0:01 हेलो फ्रेंड्स, वेलकम टू ऑनलाइन स्टडी किंगडम। दोस्तों, जैसा कि आप जानते हैं यूपी ट्रिपल एस सीपेट का जो नोटिफिकेशन है वह पब्लिश किया जा चुका है और 3 अगस्त 2026 से जो है फॉर्म अप्लाई करना शुरू हो गया है। अप्लाई करने से पहले ओटीआर मस्ट है। तो ओटीआर को करना जरूरी है। बिना ओटीआर के आप पेट अप्लाई नहीं कर सकते हैं। तो वन टाइम रजिस्ट्रेशन आप जरूर कीजिए। उसके बाद जो है आप पेट तभी अप्लाई आप कर पाएंगे। जो पुराने हैं जिन्होंने 25 दिया है उनको पता लगभग होगा। जो नए हैं उनको पता होना चाहिए कि ओटीआर जो है वह जरूरी हो गया है। अकॉर्डिंग टू कैलेंडर आपका जो एग्जाम है वह अक्टूबर में होगा। पेट का कब होगा दोस्तों? पेट का जो एग्जाम है
0:46 अक्टूबर मंथ में है। तो आपको जो है रिवीजन और अपने सिलेबस को कंप्लीट करना है। कब तक कंप्लीट कर लेना है? 30 सितंबर तक आपको पूरा कंप्लीट कर लेना है सिलेबस को और रिवीजन भी करना है, प्रैक्टिस भी करना है। तो समय कम है। तो सिलेबस की बात की जाए तो सिलेबस वही है जो 2021 पेट से होता चला आया जा रहा है। वैलिडिटी की बात की जाए तो पेट जो वैलिड होगा वह 3 साल के लिए वैलिडेड होगा। कितने? 3 साल की वैलिडिटी और यह 2025 पेट से शुरू हो चुका है। अब जिन्होंने 25 पेट में दिया है उनको भी 26 देना ही है। अगर उनके 99 नंबर हैं तो देने की जरूरत नहीं है। लेकिन देना चाहिए सभी को। ठीक है? क्योंकि जो मैक्सिमम स्कोर होगा अब यह
1:35 नॉर्मलाइज्ड स्कोर पर करेंगे या परसेंटेज या परसेंटाइल पर करेंगे वो आने वाला समय होगा लेकिन नोटिस में देखेंगे तो वह जो दोनों में 25 में देंगा कोई 26 में देगा दोनों तो जिसमें जो ज्यादा स्कोर रहेगा उसी हिसाब से अप्लाई कीजिए आप लोग। लेकिन मान लो जो पहली बार 2026 में दे रहा होगा। वह क्या करेगा? उसका कौन सा अंक होगा? वही जो दो 26 पहली बार वही उसका अंक होगा। अब मान लो किसी का 70 नंबर रहा है पिछले 2025 पेट में और उसका 26 पेट में मान लो 68 नंबर आया है। अब जो नए नया है 26 में दिया है। उसके नंबर कितने हैं? 26 वाले में एक 68 है। एक तो जो है एक हो रहा है किसका? उसका 69 है। अब जो 25 वाला पेट दिया जिसका
2:21 70 है वह 70 से दे देगा। कहेगा हम 70 से देंगे हमारा ज्यादा है तो कट ऑफ पता लगा 7 जा रही है तो 26 वाला क्या करेगा बाहर होगा अब ये 26 वाला कह रहा है कि 25 वाला जो पेट था वो आसान रहा यार तब ये पेज फस सकता है चलिए आयोग क्या करेगा देखेंगे बाकी परसेंटाइल कर दें बात अलग है कट ऑफ चलिए जो पहले सिलेबस था आपका वही सब सिलेबस है तो सिलेबस के अकॉर्डिंग टॉपिक वाइज हम लोग जो है कवर करेंगे सबसे पहले पीवाईक्यू सीरीज को किसी भी एग्जाम को आज आपको ट्रैक करना है तो सबसे पहले उसका ट्रैक रिकॉर्ड देखिए क्या रहा है? सिलेबस में क्या दिया है? किस हिसाब से प्रश्न पूछे जा रहे हैं? और किस हिसाब से आपको तैयारी रखनी है। तो यह सिलेबस दिए गए हैं। है ना? पांच-प नंबर के सभी सिलेबस में आपको मिलेंगे। टॉपिक नंबर जो दिया गया है
3:09 आपका नौ तक वह तो एनसीआरटी बेस्ड होगा। बाकी 10 नंबर सिलेबस यानी जो आपका रिजनिंग है, करंट अफेयर्स है, जनरल अवेयरनेस हो गया आपका। तो यह सब जो है आपके लिए स्कोरिंग है भाई। एक तो हिंदी आपका पांच नंबर का जो है आपका ग्रामर का होगा। बाकी आप पढ़ तो गद्यांश है तो 10 + 5 आपका 15 नंबर तो ऐसे रखा है। इसके लिए बस आपको थोड़ा प्रैक्टिस अभी से करनी है। ग्राफ के लिए भी अभी से आप शुरू कर दीजिए। तालिका के लिए भी तो क्योंकि 20 नंबर इधर हो गया। 10 इधर 20 10 30 हो गया और 10 नंबर आपका स्टैटिक जो जीके है आपका सामान्य जागरूकता और 10 नंबर करंट अफेयर। तो 50 नंबर 100 में तो यही बन रहा आपका। तो सबसे पहले आपको उसी को कवर करना है। आप ग्राफ टेबल वगैरह का
3:57 प्रैक्टिस अभी से शुरू कर दीजिए दोस्तों। तो आइए ज्यादा समय लेते हुए हम लोग पीआई की सीरीज को देखते हैं। तो यह घटना चक्रव वाली 2026 नया एडिशन है जो कि 20 रहेगा क्योंकि ऑथेंटिसिटी के मामले में देखेंगे तो काफी ऑथेंटिक रहेगा। बाकी एक आध पर% तो नहीं कहा जा सकता। है ना? तो यहां पर जो है हम लोग कवर करेंगे पीवाईक्यू। यह बुक वगैरह आपको मार्केट में भी मिल जाएगी। अगर आप यूबी पीडीएफ वगैरह देखना चाहते हैं तो आप जो है इनका घटना चक्र वालों का अपना एप्लीकेशन डाउनलोड कर लीजिए। वहां पर इनकी ई-बुक जो है अवेलेबल होगी। मिल जाएगी आपको। तो टॉपिक वाइज बिल्कुल हम लोग यहां पर कवर करेंगे और आप देखिए कि जो सब्जेक्ट दिया गया है पूरा वन शॉट में कवर करेंगे क्योंकि समय अब कम बचा हुआ है। अगर टॉपिक वाइज कराएंगे तो समय बहुत जाएगा। कंप्लीट नहीं होगा। तो एक ही वीडियो के माध्यम से
4:44 पूरा जो टॉपिक दिया गया आपके सिलेबस में सब्जेक्ट जैसे कि भारतीय इतिहास है तो भारतीय इतिहास का एक वीडियो होगा जहां पर पांच प्रश्न पांच नंबर के होंगे। फिर भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन है। फिर भारतीय आपका भारत और विश्व का भूगोल होगा। पांच प्रश्न पांच नंबर के आएंगे। भारतीय अर्थव्यवस्था है। भारतीय संविधान है। इस तरह पूरा होगा आपका। यदि आप इसका प्रीवियस एडिशन का पीडीएफ तो टेलीग्राम आप जाइन कर लीजिए। वहां पर अवेलेबल मिल जाएगी आपको। बाकी वीडियो के माध्यम से आप अपडेट होते रहिए। तो भारतीय इतिहास का जो सबसे पहला टॉपिक आपका सिंधु घाटी सभ्यता फिर वैदिक संस्कृति है। बौद्ध धर्म उसमें भी गौतम बुद्ध जीवन शिक्षाओं से संबंधित जैन धर्म है। फिर मौर्य वंश होगा। गुप्त वंश है। हर्षवर्धन है। राजपूत काल है। फिर सल्तनत काल है। ये मिसलेनियस वगैरह सब इसी में
5:29 कवर हो जाएगा। ठीक है? मुगल साम्राज्य है। मध्यकालीन इतिहास मिसलेनियस हो गया। ब्रिटिश राज्य का युद्ध एवं प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हो गया आपका। ब्रिटिश राज्य का सामाजिक आर्थिक प्रभाव। इस तरह पूरा आपका जो भारतीय इतिहास है वह कंप्लीट हो जाएगा। तो पूरा का पूरा जो है पेज नंबर 41 तक पूरा आपका एक ही वीडियो के माध्यम से आज इस वीडियो में हम लोग कवर कर लेंगे क्योंकि टॉपिक वाइज बायलिंगुअल में कराएंगे तो टाइम लगेगा। तो आप लोग अच्छी प्रैक्टिस कर लीजिए। जो इसके लिए जो अलग अध्ययन सामग्री का जो कंटेंट होगा वह जो है उसका कंटेंट टॉपिक वाइज सिंधु घाटी की सभ्यता वैदिक संस्कृत इस तरह जो है उसका वीडियो जो है प्रोवाइड करेंगे। जल्द ही आपको देखने को मिलेगा। ऐसा कंटेंट दिया
6:15 जाएगा जिससे कि आप उसी को पढ़ना है और पीआईक्यू की प्रैक्टिस कर लेनी है और जितने प्रैक्टिस आप कर पाए वह करें। बाकी आपको इधर-उधर भागने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि भटकेंगे तो भटकते रह जाएंगे। दोस्तों ज्यादा समय ना लेते हुए आइए हम लोग स्टार्ट करते हैं। पहला आपका है भारतीय इतिहास का पहला है आपका सिंधु घाटी की सभ्यता। पहला प्रश्न जैसा कि 25 पेट में पूछा हुआ है। प्रथम पाली में 7 सितंबर का प्रश्न है क्योंकि छ और 7 सितंबर को पेपर था। यह पूछा गया कि दक्षिण एशिया में पहली जो नगरीय सभ्यता है वह कौन सी थी? दक्षिण एशिया में पहली नगरीय सभ्यता कौन सी थी? सिंपल सी बात जो सिलेबस में हड़प्पा सभ्यता आपका राइट आंसर ऑप्शन बी सही जवाब बन जाएगा।
7:00 दक्षिण एशिया में प्रथम नगरीय समाज का जो उदय वो हड़प्पा सभ्यता में हुआ है। इस सभ्यता के प्रमुख बड़े शहरी केंद्र हड़प्पा मोहनजोदड़ो राखीगढ़ धौलावीरा और गढ़बेरीवाला थे। लोथल की बात की जाए जो कि अक्सर एग्जाम में आपसे पूछा जाता है। सिंधु घाटी सभ्यता का पत्त नगर के नाम से जानते हो। लोथल लोथल हो गया। कालीबंगा है। यह महत्वपूर्ण हड़प्पाई स्थल या नगर थे। नगर योजना, शिल्प और संस्कृति अत्यंत विकसित थी। अतः दक्षिण एशिया की पहली जो नगरीय सभ्यता थी, वह कौन सी थी? हड़प्पा सभ्यता। अगला प्रश्न है कि हड़प्पा सभ्यता किस युग से संबंधित थी? 6 सितंबर पूछा गया। भाई पहले पाली में पूछ लिया गया। पहली तारीख जो पेटो आपका हुआ 6 सितंबर। बताइए करेक्ट आंसर क्या होगा? कांसेस
7:46 युगीन थी। ऑप्शन बी राइट आंसर है। हड़प्पा सभ्यता को कांस्य युगीन सभ्यता माना जाता है क्योंकि हड़प्पा वासी जो थे वह कांस्य धातु का प्रयोग करते थे। उपकरणों और बर्तनों के निर्माण में कांस्य का उपयोग होता था। इसी कारण हड़प्पा सभ्यता का संबंध कांस्य युग से होगा। अगला प्रश्न है मोहनजोदड़ो शब्द का अर्थ क्या होगा? तो मोहनजोदड़ो शब्द का अर्थ क्या होता है? मृतकों का टीला यानी इंग्लिश में माउंट माउंट ऑफ द डेड होगा। ऑप्शन यहां बी आपका राइट आंसर है। मोहनजोदड़ो सिंधु सभ्यता का एक प्रमुख नगर था जिसकी खुदाई किसने? राखलदास बनर्जी ने वर्ष 1922 में की थी। प्रारंभिक तौर पर जो रहे हैं वो तो
8:32 अलेक्जेंडर रहे। इनके लेकिन जो प्रमुख रूप से जो खुदाई रही है। वह राखलदास बनर्जी के द्वारा 1922 में की थी और पुरातात्विक तत्व की ओर ध्यान आकर्षित किया। मोहनजोदड़ो का हिंदी में जो अर्थ होता है वह मृतकों का टीला है। यह पाकिस्तान के सिंधु प्रांत के लड़काना जिले में सिंधु नदी के तट पर स्थित है। तो मोहनजोदड़ो का लोकेशन याद रखना पूछा जाए तो पाकिस्तान का सिंधु प्रांत लड़काना जिला होगा। नदी कौन से संबंधित होगी? तो मोहनजोदड़ो सिंधु नदी के तट पर स्थित है। अगला प्रश्न है कि बनावली सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख शहर है जो वर्तमान में भारत के निम्नलिखित में से किस राज्य में स्थित है? बनावली तो बनावली का जो लोकेशन होगा वह ना तो राजस्थान ना गुजरात आगे ऑप्शन देखते हैं तो यहां पर राइट आंसर
9:19 क्या होगा हरियाणा में है बनावली सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख शहर वर्तमान भारत की हरियाणा राज्य में स्थित है। यह जो स्थल है वह प्राचीन सरस्वती नदी के सूखे तल पर स्थित है। इस स्थल का उत्खनन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की डॉक्टर आर एस बिष्ट द्वारा किया गया था। तो याद रखना है बनावली का लोकेशन क्या होगा? तो बनावली का लोकेशन राज्य जो होगा वह हरियाणा है। किस नदी के किनारे होगा? किस नदी संबंधित होगी? बनावली? सरस्वती नदी। उत्खनन्ता आपको याद रखना है आर एस बिष्ट। अगला प्रश्न है कि हड़प्पा के एक बंदरगाह का नाम लिखना है। तो हड़प्पा का जो पत्तन नगर दैट इज लोथल भोगवा नदी के किनारे।
10:04 ऑप्शन यहां पर सी राइट आंसर है। लोथल सिंधु घाटी सभ्यता यानी हड़प्पा सभ्यता का एक बंदरगाह शहर है। यह शहर खंभात की खाड़ी गुजरात। खंभात की खाड़ी क्षेत्र में साबरमती की सहायक नदी है। भोगवा नदी उसी के किनारे स्थित है लोथल। यह जो स्थल है 2450 ईसा पूर्व से 1600 ईसा पूर्व के बीच हड़प्पा संस्कृति का प्रमाण प्रदान करता है। अगला प्रश्न है कि हड़प्पा सभ्यता के एक हिस्से में लोथल की खोज जो है किसने की थी? लोथल की खोज राइट आंसर बन जाता है लोथल। गुजरात भोगवा नदी रिलेटेड होगा। उत्खननकर्ता होंगे एसआर राव। दयाराम साहनी हड़पे रहे हैं। ठीक है? तो हड़पने के लिए
10:50 दया दिखानी नहीं होती है आपको। ठीक है? तो हड़प्पा के दयाराम साहनी रहे हैं। राखलदास बनर्जी के द्वारा जो उत्खनन रहा मोहनजोदड़ो आर्य बिष्ट का आप पढ़ के ही आ रहे हो। बनावली आर एस राव जो होंगे वो कौन होंगे? तो ये होंगे लोथल के एसआर राव। ठीक है? आर एस बिष्ट होंगे आपके बनावली पढ़ के ही आ रहे हो। आगे बढ़ते हैं। अहमदाबाद जिले गुजरात में भोगवा नदी के समीप स्थित है लोथल जिसकी खोज सर्वप्रथम डॉ. आर एस राव ने 1954 में की थी। अगला प्रश्न आपका है कि हड़प्पा स्थल की जो सर्वप्रथम संक्षिप्त खुदाई है संक्षिप्त खुदाई पूछा गया है। किसके द्वारा की गई? हड़प्पा स्थल की। तो हड़प्पा के बाद रहे हैं मेनली जो दयाराम साहनी लेकिन संक्षिप्त खुदाई के
11:38 तौर पर पहले जो है सर अलेक्जेंडर कनिंघम ऑप्शन ए अब बी राइट आंसर तो संक्षिप्त खुदाई अक्सर आपको मिलान करने को आता है दयाराम साहनी तो हड़प्पा ठीक है हड़पने के लिए दया दिखानी नहीं होती है आपको तो हड़प्पा से दयाराम साहनी याद आ जाएंगे हड़प्पा स्थल की पहली जो संक्षिप्त खुदाई 187273 की पूर्वार्ध में सर अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा की गई थी। वहीं हड़प्पा की जो पहली व्यापक खुदाई है 192021 में राय बहादुर राय यानी दयाराम साहनी द्वारा की गई थी। अतः विकल्प बी यहां पर सर अलेक्जेंडर सही जो है उत्तर होगा क्योंकि संक्षिप्त खुदाई की बात की गई है। अगला प्रश्न है कि हड़प्पा काल का इनमें से कौन सा नगर है जो तीन भागों में विभाजित था? तो तीन नगरों तीन भागों में विभाजित होने
12:23 वाला कौन था वो? धौलावीरा रहा है। कौन सा था दोस्त? धौलावीरा राइट आंसर ऑप्शन डी आपका सही जवाब बनेगा। हड़प्पा काल का धौलावीरा नगर तीन नगरों में विभाजित था। गुजरात राज्य के कच्छ के जिले में स्थित है यह धौलावीरा। यह स्थानीय रूप से कोटदा टिंबा के नाम से भी जाना जाता है। तो धौलावीरा हो गया। गुजरात में लोथल हो गया आपका गुजरात में। ठीक है? तो तीन भागों में विभाजित जो रहा है। हड़प्पा काल का स्थल वह कौन सा था? धौलावीरा था। सबसे ऊपर जो टीला रहा वह बैठते थे राजा महाराजा लोग फिर उनसे नीचे थोड़ा उसी अधिकारी फिर जहां सबसे बड़ा रहा भाग तीसरा जो था निचला जो कि जनता के लिए रहा जनता
13:10 दरबार एक तरह समझे तो यह स्थानीय रूप से कोटदा टिंबा के नाम से जाना जाता है। यदि आपसे पूछ लिया जाए कि हड़प्पा काल का कौन सा स्थल रहा है जो कि स्थानीय रूप से कोटदा टिंबा के नाम से जाना जाता था? तो राइट आंसर क्या होगा? धौलावीरा नगर जो कि तीन भागों में विभाजित भी था। अगला प्रश्न है दोस्त कि निम्नलिखित में से कौन सी धातु है जो हड़प्पा हड़प्पा सभ्यता के लोगों द्वारा ज्ञात या उपयोग नहीं की गई थी? तो लोहे का ज्ञान नहीं रहा। इनको ऑप्शन यहां पर आपका राइट आंसर बन जाता। हड़प्पा सभ्यता ताम्र कांस्य धातु कर्म से परिचित थी। इस सभ्यता में तांबा हो गया, कांस्य है, सोने का उपयोग इसका स्पष्ट उल्लेख तो मिलता है। इसलिए धातुएं ज्ञात और प्रयुक्त जो है वो कह सकते मानते हैं।
13:56 लोहे की बात की जाए तो लोहे के धातु कर्म को बाद की द्वितीय नगरीकरण की प्रमुख तकनीक व्यवता बताया गया। इससे निष्कर्ष निकलता है कि हड़प्पा सभ्यता में लोहे का ज्ञात या प्रचलित धातु नहीं थी। तो देख रहे हैं सब पेट में पूछा हुआ प्रश्न है। आगे बढ़ अगला प्रश्न है कि सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में इनमें से कौन सा कथन सही है? सत्य है बताना है। पहला तथ्य दिया है कि सिंधु लोग कपास का उत्पादन करने वाले पहले थे। बात बिल्कुल सही है। तो कौन सा सत्य है? जब पहला सत्य हो गया तो सब गलत होगा। है ना? आप ऐसे लगा सकते हो। उन्होंने लकड़ी के बक्से में अनाज भंडारित किया। किस में? लकड़ी के बक्से में। ये तो गलत है। सिंधु घाटी सभ्यता पंजाब, सिंध, बलचिस्तान, गुजरात, राजस्थान, पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों को
14:42 लेकर जो है कवर करती है। भाई पढ़ते हो आप डिटेल में क्या कि जो सिंधु घाटी सभ्यता है जो मोहनजोद हड़प्पा सभ्यता है इसका विस्तार आप देखोगे तो सबसे जो पूर्वी विस्तार वो अपना उत्तर प्रदेश है। मेरठ का है। दैट इज़ आलमगीरपुर उत्तर प्रदेश में है। ठीक है? तो सबसे पूर्वी स्थल आलमगीरपुर उत्तर प्रदेश। मेरठ जिले में होगा हिंडन नदी के तट पर सबसे उत्तरी जो है वह आपका जम्मू कश्मीर का है। दैट इज मांडा है। सबसे नीचे जो दमाबाद महाराष्ट्र है और सबसे जो आप यानी कि सबसे दक्षिणी कह सकते हैं दमाबाद महाराष्ट्र और सबसे पश्चिमी जो कि आपका दाश नदी वाला है। बलूचिस्तान पाकिस्तान का तो यह सबसे पश्चिमी हो गया। सबसे उत्तरी जम्मू कश्मीर मांडा। तो यहां पर क्या दिया गया
15:29 स्टेटमेंट कि पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों भाई यहीं तक तो आया उत्तर प्रदेश तक बिहार पश्चिम बंगाल के बतिए नहीं हुई तो ये स्टेटमेंट क्या है गलत हो गया लिखा कि पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में तो गलत हो गया सिंधु लोग कुत्तों बिल्लूओं और घोड़ों के बड़े पैमाने पर पालते थे बड़े पैमाने पर पालते थे गलत होगा घोड़े की बात हो गई गलत हो गया तो इस तरह यहां पर जो स्टेटमेंट है वो क्या होगा आपका पहला सही है सेंधव कालीन अर्थव्यवस्था स्था, कृषि, पशुपालन, शिल्प और व्यापार पर आधारित थी। यहां से प्राप्त वनस्पति अवशेष के आधार पर कहा जा सकता है कि यहां के लोग गेहूं, जौ, बाजरा, चावल की खेती करते थे। मोहनजोदड़ो से कपास वस्त्र का प्रमाण प्राप्त हुआ है। मोहनजोदड़ो से कपास वस्त्र का प्रमाण भी प्राप्त हुआ है। जिससे स्पष्ट होता है कि
16:15 हड़प्पा वासी जो रहे हैं, वह कपास के प्रारंभिक उत्पादक और उपभोक्ता थे। अगला प्रश्न भी आपका पेट का है। दोस्त पूछा गया है कि सिंधु घाटी सभ्यता की नृत्य करने वाली जो लड़की के रूप में प्रसिद्ध प्रतिमा है किस स्थल से मिली है? तो सिंधु घाटी सभ्यता का जो स्थल है मोहनजोदड़ो यहां से प्राप्त हुई है नृत्य करने वाली लड़की की प्रतिमा। तो राइट आंसर ऑप्शन बी यहां पर सही जवाब बन जाता है। सिंधु घाटी सभ्यता के प्रसिद्ध कांस्य प्रतिमा नृत्य करने वाली लड़की मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुई मोहनजोदड़ो सिंधु सभ्यता का एक प्रमुख नगरीय केंद्र था। नगरीय यह प्रतिमा धातु कला और शिल्प कौशल के उच्च स्तर को दर्शाती इसलिए सही उत्तर मोहनजोदड़ो है। अगला प्रश्न है कि हड़प्पा सभ्यता के यह भी आपका पेट 22 में पूछा
17:01 प्रश्न है कि हड़प्पा सभ्यता के दौरान यहां पर पूछा गया डांसिंग गर्ल यानी नर्तकी की जो कांस्य प्रतिमा बनाने की तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। किस तकनीक का? यहां पर दोस्तों आपका राइट आंसर बन जाता है कास्टिंग यानी मोम लोपी ढलाई का। ऑप्शन यहां पर आपका डी राइट आंसर है। हड़प्पा सभ्यता के दौरान डांसिंग गर्ल नृतकी की दुकान से प्रतिमा बनाने के लिए मोम लोपी ढलाई यानी कास्टिंग लो वैक्स कास्ट लॉस्ट वैक्स कास्टिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। निम्नलिखित में से किस स्थान पर पुजारी राजाओं की मूर्ति मिली थी? मूर्ति वगैरह बात धकाधक कहां आ रही है आपकी? मोहनजोदड़ो। ऑप्शन यहां पर बी राइट आंसर। पुजारी राजा की जो मूर्ति हड़प्पा सभ्यता के मोहनजोदड़ो स्थल से प्राप्त हुई
17:48 है। यह आकृति जिसे परंपरागत रूप से पुजारी कहा जाता है। एक साल से ढकी हुई जो दाहिने हाथ के नीचे बाएं कंधे से फैली हुई है। चलिए अगले प्रश्न की ओर। अगला प्रश्न है कि सिंधु घाटी सभ्यता में घोड़े की जो अस्थियों के अवशेष हैं, वह कहां से प्राप्त हुए हैं? कहां से मिले हैं? घोड़े की अस्थियों के अवशेष। यहां पर राइट आंसर बन जाता है ऑप्शन डी सुरकोटदा से। सिंधु घाटी सभ्यता में घोड़े की अस्थियों के अवशेष कहां से प्राप्त हुए हैं? तो सुरकोटदा। सुरकोटदा जो आपका स्थल है वो कहां पर पुरा स्थल है? सुरकोटदा पड़ता है आपका गुजरात में। लोथल कहां पड़ता है? गुजरात में। धौलावीरा कहां पड़ता है? गुजरात में। तो ये सब मिले हैं। राणा गुंडई से घोड़े के दांत। राणा गुंडई से जो
18:35 है यह घोड़े के दांत मिले हैं और लोथल एवं मोहनजोदड़ो से घोड़े की मृण मूतियां मिली हैं। इन तथ्यों को याद रखना। घोड़े की अस्थियां पूछा जाए अवशेष तो सुरकोटदा गुजरात। राणा गुंडई के घोड़े के दांत पूछा जाए तो राणा गुंडई से लोथल एवं और मोहनजोदड़ो से घोड़े की मृण मूर्तियां मिली हुई है। तो इन्हीं 14 प्रश्नों के साथ पूरा आपका जो भारतीय इतिहास का पहला रहा है आपका सिंधु घाटी का सभ्यता पीवाईक्यू कंप्लीट होता है। अगला आपका दूसरा है वैदिक संस्कृति। प्रश्न है कि वेद वेद जो आंशिक रूप से एक गद्य कृति है। कौन सा वेद होगा? तो यहां पर आपका राइट आंसर क्या बनेगा? यजुर्वेद होगा। तो यजुर्वेद जो कि आंशिक रूप से एक
19:21 गद्य कृति है। यजुर्वेद आंशिक रूप से गद्य कृति है। यजुर्वेद में यज्ञों में यज्ञों में प्रयुक्त होने वाले मंत्र, आहुति, वाक्य और कर्मकांडीय निर्देश मिलते हैं। इसी सामग्री में पदात्मक मंत्रों के साथ-साथ गदात्मक मंत्र भी पाए जाते हैं। तो यजुर्वेद को आप याद रखना है। बेसिकली आपको मिलान करने को आ जाए तो आपको पता होना चाहिए जो आपका कर्मकांड का वेद है वह कौन सा है? यजुर्वेद है। यजुर्वेद के दो भाग होंगे आपके। शुक्ल और कृष्ण होंगे। यह सब जो है नोट के माध्यम से जब कवर कराएंगे पूरा तो अब आप उस वीडियो को देखिएगा। उससे बेहतर कंटेंट आपको कहीं नहीं मिलेगा। इन द सेंस आपको उसी को पढ़ना है। उसी को पढ़
20:06 करके पेट जाकर देना है और पीआईक्यू कर लेना है। पर्याप्त होगा। बाकी आपको इधर-उधर बटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगला प्रश्न भाई पूछा गया कनिष्ठ सहायक में जूनियर असिस्टेंट 15 के प्राचीनतम वेद कौन सा है? सबसे पुराना वेद कौन सा है दोस्त? सिंपल सी बात है। ऋग्वेद है। ऑप्शन बी राइट आंसर। ठीक है? तो क्रम आग से मिलान का सबसे पुराना तो सबसे पुराना आपका ऋग्वेद हो गया। ठीक है? तो ऋग्वेद आपका पुराना हो गया। ऋग्वेद के बाद आता है यजुर्वेद। यजुर्वेद के बाद आपका सामवेद है। सामवेद के बाद आएगा आपका अथर्ववेद। ठीक है? प्राचीन वेद ऋग्वेद है। अन्य तीन वेद यजुर्वेद, सामवेद व अथर्ववेद हैं। ऋग्वेद में यज्ञ देव यज्ञ में देवताओं के आवाहन
20:51 के लिए सूक्त संकलित हैं। वहीं पर बात की जाए वैदिक धर्म का आरंभिक स्रोत जो है वह क्या है आपका? तो ऋग्वेद ही है। इसकी सूक्तों की संख्या कितनी है? तो यह आपको पता होना चाहिए। शोक्तों की जो संख्या है दोस्त वो कितनी है? 1028 है। वहीं पर मंत्रों की संख्या पूछा है तो लगभग 1000 लगभग 10552 है जिसमें देवताओं की जो स्थिति वो की गई है। ऋग्वेद में मंडल कितने हैं? तो ऋग्वेद में 10 मंडल हैं। तो 10 मंडल 1028 सूक्त हैं। मंत्रों की संख्या लगभग 10552 है। तो इन सब तथ्यों को आपको याद रखना है। अगला आप देखिए प्रश्न पेड 25 का है भाई कि ऋग्वेद में कितने भजनों का संग्रह है? तो मंत्र तो 10552 है। भजन पूछा गया है यानी सूक्त। तो
21:39 1028 ऑप्शन यहां पर सी राइट आंसर है। तो आप क्या कह सकते हैं? बस पीवाई से उठा के पूछ लिया। तो इसलिए इसकी जो व्याख्या है वह जरूरी है आपकी। बाकी पीवाईक्यू भाई प्रश्न उत्तर ही आपको देखना है तो कहीं से भी देख लीजिए। ऋग वैदिक साहित्य का सबसे प्राचीन वेद माना जाता है। ऋग्वेद जो है वैदिक साहित्य का सबसे प्राचीन माना जाता है। यह स्तुत सूक्तों का संग्रह है। ऋग्वेद में कुल 128 सूक्त या भजन संकलित हैं। मंत्र कितने हैं? तो मंत्र आपका 10552 मंडल कितने? 10। अगला प्रश्न है यहां पर पूछा गया भाई पेट 25 में ही कि उपनिषद शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या है? उपनिषद आप संधि विच्छेद कर डालो है ना इसको उप कर लो सा कर लो उपनिषद है तो नी कर लो उप प्लस
22:28 नी प्लस सद तो उप का मतलब क्या सिंपल सी बात निकट हो जाएगा नी से जो है नीचे या श्रद्धा पूर्वक आप कह सकते हैं तो वही जो भाई गुरु के जो समीप जाकर के श्रद्धा पूर्वक बैठकर जो ज्ञान प्राप्त करते थे तो यहां पर आप देखेंगे तो ऑप्शन आपका जो सही बैठ रहा है वह क्या होगा किसी के पास बैठना ऑप्शन यहां पर बी राइट आंसर बन जाता है उपनिषद शब्द के संस्कृत के उप नी और सद से बना है। उप का अर्थ है निकट। नी का अर्थ है नीचे या सद का अर्थ होगा बैठना। इसका आशय गुरु के निकट बैठकर ज्ञान प्राप्त करने से है। इसलिए उपनिषद शब्द का शाब्दिक अर्थ यहां पर होगा किसी के पास बैठना। अगला प्रश्न है कि वेदों के गद्य प्रकरण क्या कहलाते हैं? वेदों के जो गद्य प्रकरण है क्या कहलाते हैं? राइट आंसर यहां पर बन जाएगा। वेदों का जो गद्य प्रकरण है वो क्या कहलाते हैं? ब्राह्मण कहलाते हैं। तो खासकर जो गद्य आधारित यानी
23:16 गद्य जो प्रधान है वह आपका यजुर्वेद ही है। बाकी सब पद प्रधान है। ज्यादातर घर के मुख्य आपके वेदों के गद्य प्रकरण वेदों के गद्य प्रकरण ब्राह्मण कहलाते हैं। ऋग्वेद के ब्राह्मण ग्रंथ आयत व कौस्तकीय हैं। तो ये मिलान करने को आपको आ जाता है। पूछा जाता है। एक तरफ जो है वेद दे देते और दूसरी तरफ जो है वह उनके ब्राह्मण ग्रंथ दे देंगे। तो ऋग्वेद का ऐत्रीय अक्सर यह पूछा जाता है ऐत्रीय और कौस्तिक यजुर्वेद का शतपद होगा तैत्रीय है और मात्रायणी है और काठक है तथा कठ कपस्थल है जबकि सामवेद की बात की जाए तो सामवेद के पंचमेश जो कि अक्सर पूछा जाता है जैमिनीय है अथर्ववेद का गोपथ ब्राह्मण है। तो इन तथ्यों को याद रखना मिलान करने को एग्जाम में पूछ लिया
24:02 जाता है। पीसीएस वगैरह में पूछे गए हैं। आगे देखते हैं। अगला है दोस्त कि शतपथ ब्राह्मण और तैतिय ब्राह्मण यानी किसके ब्राह्मण मूल पाठ हैं? किसके हैं? तो अभी आप पढ़ रहे हो शतपथ है किसका? तैतिय किसका है? मैत्रायणी किसका है? तो ये सब किसके हैं? यजुर्वेद के। राइट आंसर ऑप्शन बी सही जवाब बन जाता है। अगला प्रश्न शतपद ब्राह्मण और तृतीय ब्राह्मण यजुर्वेद के ब्राह्मण मूल पाठ है। वहीं पर शुक्ल यजुर्वेद इसे वाचन से संगिता भी कहा जाता है। ऋषि वाग्ञलक के वाजन से संबंधित माने जाते हैं। याद रखना है। अगला प्रश्न है कि पुरुष सूक्त जो चार वर्णों की उत्पत्ति की व्याख्या करता है। किस वैदिक ग्रंथ में पाया जाता है? पुरुष सूक्त। तो पुरुष सूक्त आपका ऋग्वेद ऋग्वेद के अंडरल जो मंडल है आपका कौन सा? दसवां मंडल। तो राइट आंसर क्या बनेगा दोस्त यहां
24:49 पर? ऑप्शन ए ऋग्वेद। तो पेट 25 में पूछा गया प्रश्न रहा है दोस्त। ऋग्वेद के दशव मंडल में दशम मंडल में पुरुष सूक्त का उल्लेख मिलता है। इसमें कहा गया है कि यही प्रसिद्ध पुरुष सूक्त चार वर्णों की उत्पत्ति की व्याख्या करता है। तो ऋग्वेद का दसवां मंडल है। ये सब है। सूत्र वगैरह उसी में जो दिए हैं। 10 मंडल होगा। फिर नौवे ये होगा। है ना? तो यहां पर लिखा है कि ब्राह्मणोवस्य मुखमासीद ब्राह्मणोवश्य मुखमासीद वही बात है ना जो जो अक्सर प्रवचन में आप सुनते होंगे कि ब्राह्मण जो है मुख से होंगे बाहु राजन्य भुजाओं को जो है क्षत्रिय यानी जो आपका शरीर ही है शरीर के जो है चार भाग काट दो चार वर्णों में बांट दो तो मुख जो है वो ब्राह्मण और बाहु जो है वो क्षत्रिय
25:35 जंघाओं की बात कर लोगे तो वैश्य और नीचे चले जाओगे पैर पैर में चरणों में बात करोगे तो शद्र तो मुखास बाहु राजन्य कृत उदस्या यद्वैश्य है ना चलिए संस्कृत आगे बढ़ते हैं दोस्त बस आप इसका अर्थ समझ गए आगे बढ़ते हैं छांदोग्य उपनिषद स्पष्ट रूप से निम्नलिखित में से किस आश्रम को संदर्भित करता है? छांदोग्य उपनिषद स्पष्ट रूप से निम्नलिखित में से किस आश्रम को संदर्भित करता है? छंदोग्य उपनिषद यह भी आपका पेट का प्रश्न है। तो छांदोग्य जो उपनिषद है वह स्तूरूप से आश्रम जो संदर्भित करेगा ब्रह्मचर्य गृहस्थ वानप्रस्थ ऑप्शन यहां पर आपका बी राइट आंसर है। जो छांदोग्य उपनिषद है इसमें तीन स्कंध यानी तीन भाग बताए गए हैं। यज्ञ अध्ययन, दान, तप और
26:22 आश्चर्य। यज्ञ, अध्ययन, दान, तप और आचार्य। तो घर में रहने वाला ब्रह्मचारी छांदोग्य उपनिषद में सन्यास आश्रम का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता है। तो केवल आपको ब्रह्मचर्य गृहस्थ और वानप्रस्थ सन्यास का जो है बात नहीं मिलती आपको छांदोग्य उपनिषद में इसका उल्लेख नहीं मिलता। इसलिए यह उपनिषद मुख्यत ब्रह्मचर्य गृहस्थ वानप्रस्थ आश्रमों का संदर्भ देता है। तो याद रखना है और छांदोग उपनिषद जो है वह बेसिकली आपका जो आपका कौन सा वेद सामवेद है। सामवेद से संबंधित यह प्रमुख उपनिषद है छांदोग्य उपनिषद। तो यहां पर जो है सन्यास आश्रम का उल्लेख नहीं है। बाकी ब्रह्मचर्य गृहस्थ और वानप्रस्थ इनकी बात जो है की जाती है। अगला प्रश्न है निम्न में से कौन सा उपवेद नहीं है? उपवेद
27:09 तो यहां पर जो उपवेद नहीं होगा वो होगा आपका ऑप्शन डी योगेद। ठीक है? ऑप्शन यहां डी राइट आंसर। प्रश्नगत विकल्पों की बात की जाए तो इसमें योगवेद को छोड़कर यानी ऑप्शन डी को छोड़कर जो सभी दिए गए हैं उपवेद हैं। आयुर्वेद की बात आयुर्वेद चिकित्सा संबंधित होगा। गंधर्व वेद जो कि नृत्य संगीत से रिलेटेड होंगे। शिल्प वेद की बात की जाए तो भवन निर्माण से और शस्त्र शास्त्र वेद की बात की जाए तो युद्ध की शैलियों से संबंधित होंगे। अगला प्रश्न यहां पर है वैदिक देवता है इंद्र। वैदिक देवता कौन? इंद्र तो इनका संबंध जो है जो इंद्र हैं ये वैदिक देवता किसके देवता माने जाते हैं? तो वैदिक देवता जिनको कि ऋग्वेद में सबसे अधिक जो सर्वाधिक मंत्र समर्पित हैं वह इंद्र देवता को ही है। इंद्र देव तो उसके बाद जो
27:55 है वो अग्नि को हैं तो इंद्र देव को ठीक है वर्षा के देवता ऑप्शन यहां सी राइट आंसर बन जाता है। इनको जो है लगभग 250 जो है वो मंत्र इनको समर्पित है और 200 के आसपास अग्नि को है। तो सबसे सर्वाधिक समर्पित मंत्र इनको किसको है? इंद्र देव को। ऋग्वेद में सबसे प्रतापी देवता कौन? इंद्र जिसे पुरंदर अर्थात किले को तोड़ने वाला कहा गया है। पुरंदर आप पढ़ते हो पर्यायवाची इंद्र का। इंद्र आर्यों के युद्ध नेता के रूप में चित्रित हैं। जिसने असुरों से लड़ने में आर्य सैनिकों का नेतृत्व किया और उन्हें विजय दिलाई। ऋग्वेद में इंद्र पर 250 सूक्त हैं। तो सर्वाधिक सूक्त इन्हीं इंद्र को ही समर्पित है। इसके बाद जो नंबर है वो किसका? अग्नि का है। अगला प्रश्न है कि पंचगव्य में निम्नलिखित में से क्या
28:41 सम्मिलित नहीं है? तो सम्मिलित पंचगव्य की बात की जाए तो गाय याद कीजिए। ऋग्वेद में गाय को अगन्या भी कहा गया है। वध ना करने वाली बात। तो गाय की बात करेंगे तो गाय से ले लेंगे आप दूध। ठीक है? दूध हो गया, दही हो गया, घी हो गया। तीन चीजें हो गई। फिर जो है गोबर ले लीजिए और मूत्र है तो गाय मूत्र हो गया, गाय गोबर हो गया और दूध, दही, घी हो गया। यह पंचगव्य में होंगे। बाकी इनमें से जो नहीं होगा उसको आप क्या करो सम्मिलित नहीं यानी ऑप्शन एंड डी राइट आंसर गाय के दूध दूध दही घी मूत्र और गोबर से निर्मित जो पदार्थ होगा वो पंचगव्य कहलाता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में से इसके औषधि
29:26 उपयोग का उल्लेख है। बाकी जो तुलसी दिया यहां पर नहीं होगा। अगला प्रश्न है कि महाजनी अगला प्रश्न है महाजनी प्रथा है। महाजनी प्रथा का सर्वप्रथम उल्लेख निम्नलिखित में से किस प्राचीन ग्रंथ में हुआ था? यजुर्वेद का ब्राह्मण ग्रंथ कौन सा है? शतपथ ब्राह्मण। ऑप्शन यहां पर सी राइट आंसर बन जाएगा। तो प्राचीन काल में जो महाजन जो साहूकार हुआ करते थे वो लोगों को जो है धन व्याया अनाज वगैरह कुछ उधार देते थे। उसके बदले जो जो ब्याज वसूलते थे सूद है ना सूदखोर तो सूद जो ब्याज वसूलते थे यह जो प्रथा रही वही किया है महाजनी प्रथा रही महाजन लोग सेठ लोग है ना महाजनी प्रथा का सर्वप्रथम उल्लेख शतपद ब्राह्मण में
30:12 हुआ है। इसमें सूदखोर को कुशीदिन कहा गया है। तो यदि एग्जाम में आपसे पूछा जाए कि शतपद ब्राह्मण में महाजनी प्रथा का उल्लेख हुआ है। तो इसमें शूदखोर को क्या कहा गया है? कुशीदिन कहा गया है। अगला प्रश्न है दोस्त कि ऋग्वेद में निहित गायत्री जो मंत्र है ना वह किस देवता को समर्पित है? ओम भूर भुव स्वः तत्व वितुर्णयम किसको समर्पित है? सूर्य देवता को यानी सा ऑप्शन यहां पर आपका डी राइट आंसर। ऋग्वेद में निहित है गायत्री मंत्र जो कि शाबरी देवता यानी सूर्य देवता को समर्पित है। ऋग्वेद के कौन से मंडल में बात की गई है? गायत्री मंत्र की तो ऋग्वेद का तीसरा मंडल है जिसमें गायत्री मंत्र का उल्लेख जो है वह है और इसे विश्वामित्र द्वारा रचित जो है
30:58 माना जाता है गायत्री मंत्र को। अगला प्रश्न है कि रामायण में जो मांडवी थी वो किसकी पत्नी थी? तो राम की तो सीता जी थी। लक्ष्मण की उर्मिला थी। भरत की जो है वह थी कौन? मांडवी मांडवी ही पूछा है। तो राइट आंसर आपका ऑप्शन बी बन जाएगा। मेघनाथ की पत्नी की बात की जाए तो इनकी पत्नी का नाम था लोचना। कौन सा लोचना? सुलोचना। ठीक है? तो सुलोचना रही हैं। सुग्रीव और बाली की लड़ाई भी तो सुग्रीव की पत्नी का नाम रूमा था और बाली की पत्नी का नाम तारा था। तो यहां पर मांडवी पूछा गया है। राइट आंसर ऑप्शन यहां पर बी सही जवाब बन जाएगा। तो राम [नाक से की जाने वाली आवाज़] का हो गया। सीता का है। भरत की मांडवी लक्ष्मण की उर्मी और शत्रुहन की रही श्रुतकीर्ति। आगे
31:44 बढ़ते हैं। रामायण में मांडवी भरत की पत्नी थी। जबकि सीता भगवान राम की उर्मिला लक्ष्मण की और सूतकीर शत्रुहन की। महाभारत में वर्णित कुरुक्षेत्र की लड़ाई कितने दिन तक लड़ी गई थी? तो संविधान का निर्माण दो साल 11वां 18 दिन। तो 18 दिन यहां दिख रहा है आपको। बस यही होगा आंसर। राइट आंसर ऑप्शन बी सही जवाब बन जाएगा। इस तरह थोड़ा रिलेट करके याद रखना है। कुरुक्षेत्र की जो लड़ाई है कितने दिन तक चली थी? तो 18 महाभारत में वर्णित कुरुक्षेत्र का युद्ध कौरवों और पांडवों के मध्य कौरव और पांडवों के मध्य हस्तिनापुर साम्राज्य के सिंहासन की प्राप्ति के लिए लड़ा गया था। हस्तिनापुर यह युद्ध 18 दिन तक लड़ा गया था। दोस्तों इसी के साथ टॉपिक नंबर टू वैदिक कल्चर
32:29 आपका कंप्लीट हो जाता है। तीसरा टॉपिक है बौद्ध धर्म गौतम बुद्ध की जीवनी एवं शिक्षाओं से संबंधित आपका सिलेबस में है। पहला प्रश्न है कि निम्नलिखित में से कौन सा बौद्ध पवित्र स्थल निरंजना नदी के तट पर स्थित है? कौन सा बौद्ध पवित्र स्थल है? यहां पर आपका राइट आंसर बन जाएगा ऑप्शन ए बोधगया। पवित्र बौद्ध स्थल बोधगया। बोधगया किस नदी के किनारे स्थित है? तो निरंजना नदी के किनारे स्थित है। बोधगया में ही गौतम बुद्ध को पीपल वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और इसके पश्चात वह बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए। तभी से यह स्थल बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्ष 2002 में यूनेस्को के
33:17 द्वारा बोधगया में स्थित महाबोधी मंदिर परिसर को विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया था। तो बोधगया में ही पीपल वृक्ष के नीचे गौतम बुद्ध जी को जो है ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। तो इसलिए जो है ये बोधगया जो स्थल है इसका महत्व है और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्ष 2002 ईस्वी में बोधगया में स्थित जो महाबोधी मंदिर है। महाबोधी मंदिर परिसर को विश्व विरासत स्थल भी घोषित किया गया। कब? वर्ष 2002। अगला प्रश्न है कि ज्ञान प्राप्त करने के बाद गौतम बुद्ध को किस रूप में जाना जाने लगा? तो ज्ञान प्राप्त करने के बाद गौतम को जो है गौतम बुद्ध के रूप में तो ऑप्शन यहां पर आपका बी राइट आंसर है। अगला प्रश्न है कि बोधगया एक महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थ केंद्र क्यों है? क्योंकि गौतम
34:04 बुद्ध ने यहां पर पीपल वृक्ष के नीचे निरंजना नदी के तट पर ज्ञान की प्राप्ति की थी। तो इसलिए बौद्ध तीर्थ जो है केंद्र क्यों है? ऑप्शन यहां पर बी आपका राइट आंसर है क्योंकि गौतम बुद्ध ने यहां ज्ञान प्राप्त किया था। अगला प्रश्न है कि गौतम बुद्ध को ज्ञान किस नदी के तट पर प्राप्त हुआ? तो पीपल वृक्ष के नीचे निरंजना नदी के तट। ऑप्शन यहां पर आपका डी राइट आंसर। बढ़ते हैं अगले प्रश्न। अगला प्रश्न है कि इस स्मारक से गौतम बुद्ध ने दुनिया के लिए बौद्ध धर्म के अपने दिव्य ज्ञान का प्रचार किया था। किस स्मारक से? पूछा गया है कि गौतम बुद्ध ने दुनिया के लिए बौद्ध धर्म के अपने दिव्य ज्ञान का प्रचार किया था? तो यह जो प्रश्न है इसका सही उत्तर यहां
34:50 पर आपको ऑप्शन में नहीं है। तो इसलिए जो है 2016 का डिस्ट्रीब्यूटेड रहा है। गौतम बुद्ध को बोधगया में कहां पर? बोधगया में ज्ञान प्राप्त हुआ। इस ज्ञान का प्रवर्तन यानी प्रचार का जो आरंभ है वो धर्मचक्र प्रवर्तन कहलाया था। जो उन्होंने सबसे पहला जो अपना उपदेश दिया था जिसे कि धर्मचक्र प्रवर्तन कहा गया तो सारनाथ वाराणसी से। ठीक है? तो आप यहां पर ऑप्शन में है नहीं सारनाथ वाराणसी। तो इसलिए यहां पर जो है स्टार लगा। आगे बढ़ते हैं। तो किस स्मारक से होगा? तो याद रखना है सारनाथ वाराणसी से जो है इन्होंने पहला अपना उपदेश दिया था जिसको कि आप धर्म चक्र प्रवर्तन के नाम से जानते हो। दोस्तों अगला प्रश्न है कि बुद्ध ने दुख से मुक्ति पर अपना पहला उपदेश कहां दिया था? पहला जो अपना उपदेश है वो कहां दिया था? तो सारनाथ
35:35 वाराणसी। ऑप्शन यहां पर आपका राइट आंसर है। और ये पिछली बार यानी 2025 वाला जो पेट रहा आपका वो पूछा गया है 7 सितंबर 2025 पहली पाली में। है ना? तो वही सब पीआईक्यू से मिक्स प्रश्न रहे। बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना जो पहला उपदेश है वह सारनाथ में दिया। इसे धर्म चक्र प्रवर्तन भी कहा जाता है। यह उपदेश दुख दुख के कारण दुख के समाधान और दुख के समाधान के उपाय से संबंधित है। इसे ही चार आर्य सत्य भी कहा जाता है। तो बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्य अगर पूछा जाए तो याद रखना है। तो चार आर्य सत्य को जरूर याद रखना कि एग्जाम में पूछा जा सकता है आपका। ठीक है? पहला क्या? दुख है और दुख का क्या होगा? कारण होगा। यानी बौद्ध धर्म में
36:21 बताया कि जब तक सृष्टि रहेगी तब तक क्या है? दुख जो है वह मनुष्य के साथ छाया बनकर रहेगा और दुख का कारण यानी कि कोई जो वस्तु है क्षणभंगुर है। तो उसको पकड़ कर रखना ही क्या है? दुख का कारण है। और दुख का समाधान क्या है कि भाई जो विवेक है अपना उसको क्या है? जगाना आवश्यक है। इसके बाद दुख निरोध गामनी प्रतिपदा यानी कि इस मार्ग पर आप चलेंगे को देखेंगे तो दुख के बंधन टूट जाएंगे और आपको परम सत्य की जो है प्राप्ति हो जाएगी। तो चार यार शत्रियों को याद रखना है दोस्तों। आगे बढ़ते हैं। अगला प्रश्न है कि बुद्ध ने अपना पहला उपदेश कहां दिया था? वही सारे प्रश्न रिपीट हो रहे। सारनाथ वाराणसी ऑप्शन डी राइट आंसर है। फिर नेक्स्ट है कि बुद्ध ने यहां डाट डाट है कि कहां जो है अपना पहला धर्म उपदेश देते हुए अपने मत की आधारशिला रखी थी। तो
37:07 पहला जो अपना उपदेश दिया जिसे कि धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है। यह सारनाथ वाराणसी ऑप्शन डी राइट आंसर है। गौतम बुद्ध का जन्म कपिलवस्तु के निकट लुंबिनी नामक स्थान पर हुआ था। बुद्ध ने अपना पहला धर्मोपदेश सारनाथ वाराणसी में दिया था। यहां उन्होंने पांच ब्राह्मण सन्यासियों को पहला उपदेश दिया जिसे बौद्ध धर्म में धर्म चक्र प्रवर्तन कहा गया है। तो यह भी आपके एग्जाम में पूछ लिया जाता फैक्ट पूछ लिया जाए कि सबसे पहला जो अपना धर्म उपदेश दिया था वो कितने सन्यासियों को दिया था? तो पांच ब्राह्मण सन्यासियों को अपना पहला उपदेश दिया जिसे कि धर्म चक्र प्रवर्तन कहा गया है। अगला प्रश्न है कि गौतम बुद्ध ने धम्म चक्र पवन सूत्र यानी धर्म चक्र प्रवर्तन का सूत्र का उपदेश दिया। वही बात भाई सारनाथ वाराणसी में बढ़ते हैं आगे।
37:56 अगला प्रश्न है कि बौद्धों के लिए उत्तर प्रदेश में स्थित सारनाथ महत्वपूर्ण क्यों है? सारनाथ क्यों महत्वपूर्ण है? क्योंकि यहां पर जो है भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। ज्ञान प्राप्त करने के बाद निरंजना नदी के तट पर पीपल वृक्ष के नीते बुधगया में फिर वहां से जो है निकले और वाराणसी सारनाथ में जो है अपना पहला उपदेश पांच ब्राह्मण सन्यासियों को दिया। तो इसलिए राइट आंसर क्या होगा? ऑप्शन डी होगा। इसलिए महत्वपूर्ण है सारनाथ। बढ़ते हैं अगले प्रश्न की ओर। प्रश्न है कि गौतम बुद्ध ने सारनाथ में अपना जो पहला उपदेश है वो दिया था किस मुद्रा में? भूमि स्पर्श मुद्रा है, ध्यान मुद्रा है या धर्मचक्र प्रवर्तन मुद्रा? तो क्या होगा दोस्त? ऑप्शन यहां पर आपका सी राइट आंसर
38:41 बनेगा। धर्म चक्र प्रवर्तन मुद्रा। अगला प्रश्न है कि बुद्ध ने किस उम्र में परिनिन यानी अंतिम मुक्ति जो है प्राप्त की थी? किस वर्ष की उम्र में? तो अंतिम जो मुक्ति महापरिनिबाण जो है इनको प्राप्त हुआ कुशीनगर नारा में। तो यहां पर राइट आंसर क्या होगा? ऑप्शन यहां पर ए सही जवाब बन जाएगा। 80 वर्ष की अवस्था। याद रखना है कहां? कुशीनगर में जो है अंतिम सांस इन्होंने ली थी। बुद्ध को परिनिर्माण कहां प्राप्त हुआ? राइट आंसर ऑप्शन बी। कुशीनगर। महात्मा बुद्ध को मल गणराज्य की है ना मल गणराज्य की राजधानी कुशीनारा अथवा कुशीनगर में लगभग 483 ईसा पूर्व में परिनिर्माण प्राप्त हुआ था। अच्छा जो 16 महाजनपद है 16 महाजनपदों में आठ महाजनपद
39:26 का उत्तर प्रदेश में मिलेगा। आठ महाजनपदों में सात महाजनपद में जो शासन प्रणाली रहा ही वह राजतंत्रात्मक रही है। लेकिन एक ऐसा मात्र गणराज्य था वह मल गणराज्य था जहां पर गणतंत्रमात्मक यानी गणराज्य है तो क्या होगा जो शासन प्रणाली रही है वो गणतांत्रिक रही है। यानी यहां का जो शासक होगा वो राजा नहीं होगा। तो यूपी स्पेशल आप जो है यूपी जीके फोरम को आप सब्सक्राइब कर लीजिए। वहां पर अच्छे से यूपी स्पेशल कवर कराया जा रहा है। तो कुशीनगर में जो अंतिम सांस इन्होंने 483 ईसा पूर्व में जो है 80 वर्ष की अवस्था में जो अंतिम सांस लिया तो इसी को जो है वो महापरिनिर्वाण के रूप में बौद्ध ग्रंथों में जो है जाना जाता कहा जाता है। वहीं पर बोधगया की बात की जाए तो बोधगया में महात्मा बुद्ध को
40:11 बोधगया यानी उर्बेला में महात्मा बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। पीपल वृक्ष के नीचे निरंजन के तट पर ऋषि पत्तनम सारनाथ वाराणसी में इन्होंने अपना पहला उपदेश दिया। दिया। इसी की धर्म चक्र प्रवर्तन की संज्ञा दी गई। अगला प्रश्न है कि उस स्थान का नाम बताना है जहां बौद्धों की मान्यता के अनुसार गौतम बुद्ध ने अपनी मृत्यु के बाद परिनिर्माण प्राप्त किया। परनिर्वाण मृत्यु के बाद तो राइट आंसर क्या होगा? कुशीनगर ऑप्शन यहां बी आपका सही जवाब होगा। अगला प्रश्न पूछा गया पेड पिछले 25 में कि बौद्ध धर्म में त्रिपिटक त्रिपिटक जो त्रिपिटक जो शब्द है इसका अर्थ क्या है? तो बौद्ध धर्म में त्रिपिटक या त्रिपिटक शब्द का अर्थ क्या होता है? तो जो बौद्ध धर्म ग्रंथ है इसके तीन भाग हैं। ठीक है? विनयपिटक, शत्रुपवेटक और आधिम्म पिटक। तो यहां पर आप क्या कहोगे? इसका जो
40:59 राइट आंसर बनेगा तीन संग्रह है जिनमें बौद्ध शिक्षाएं मिलती है। यानी ऑप्शन यहां पर आपका बी राइट आंसर बन जाता है। त्रिपिटक या त्रिपिटक का शाब्दिक अर्थ क्या है? तीन पिटारे या तीन संग्रह और यह बौद्ध धर्म ग्रंथों के तीन प्रमुख भाग हैं। इसमें विनय पिटक है, श्रुतपिटक है और धम्मपिटक शामिल है। इन संग्रहों में बौद्ध अनुशासन, उपदेश और दार्शनिक विवेचन जो है वो संकलित हैं। तो इनको याद रखना है। ठीक है? त्रिपिटक अभी आप पढ़ के आ रहे हो जो बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्र हैं। एक तो दुख होगा, दुख का कारण होगा, दुख का समाधान होगा और दुख के समाधान के मार्ग भी बताए गए हैं। तो वो चार आर्य सत्य हो गए। बौद्ध धर्म के त्रिपिटक याद रखो। विनय पिटक, शुद्धपिटक, अधिम्म पिटक। इसके अलावा बुद्ध धर्म के आपके त्रिरत्न पूछ लिए जाते हैं। त्ररत्न में आपके बुद्ध हो जाएंगे। ठीक है? बुद्ध है, धर्म है और संघ है। यह
41:47 त्ररत्न में आते हैं। अक्सर पूछ लिया जाए या त्रिन जो है किससे संबंधित है? जैन या बौद्ध धर्म तो याद रखना बौद्ध धर्म। तो यहां पर जो है बौद्ध ग्रंथ के तीन जो है प्रमुख भाग है। एक तो विनय शुद्ध और अधिम्म पिटक। विनय पिटक विनय पिटक है। अनुय विनय यानी कि जो आपके जो मठ वगैरह में जो रहने वाले उनके लिए नियम कायदा कानून है। ठीक है? शुद्ध पिटक यानी कि सूत्र वगैरह यानी कि आप बौद्ध धर्म की जो शिक्षाएं हैं उनके वचन हैं यह आपको शुद्ध पिटक में मिलेंगे। अधि धम्मपटक की बात की जाए जिसमें कि बौद्ध की सिद्धांतों की टीका टिप्पणी व्याख्याएं वगैरह जो है वो मिल जाती हैं। तो याद रखना है बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्य आपने देखे। त्रिरत्न पूछ लिया जाए और त्रिपिटक पूछा जाए तो इन सब तथ्यों को याद रखना है। आगे बढ़ते हैं। अगला प्रश्न है आपका त्रिपिटक के किस भाग
42:32 में बुद्ध की पारंपरिक शिक्षाएं हैं? तो विनयपिटक में क्या देगा भाई? नियम कानून है ना अनुशासन रहा है। श्रुतपिटक यानी सूत्र यानी कि जो शिक्षाएं हैं, वचन है, जो उपदेश दिए हैं। शिक्षाओं से संबंधित पूछा गया तो आंसर क्या होगा आपका? बी होगा। बौद्ध धर्म के जो सिद्धांत दार्शनिक होंगे आपके विवेचना दार्शनिक विवेचन। तो ये आपको मिलेगा धम्मपिटक में। तो यहां पर पूछा गया शिक्षाएं बुद्ध की पारंपरिक शिक्षाएं हैं किस में? शुद्धपिटक में। तो ऑप्शन यहां पर आपका बी राइट आंसर बन जाता है। तो इसका सही जवाब क्या होगा? ऑप्शन बी। तो त्रिपिटक का शुद्धपिटक बुद्ध के उपदेशों और वचनों का मुख्य संग्रह। इसमें बुद्ध की शिक्षाएं, संवाद और सूत के रूप में संकलित हैं। अगला प्रश्न है कि पाली में बौद्ध ग्रंथों की किस में? पाली में। पाली भाषा में है बौद्ध ग्रंथों में बौद्ध
43:21 ग्रंथों को आमतौर पर त्रिपिटक यानी कि थ्री फोल्ड बास्केट भी कहा जाता है। पाली में इनमें से कौन सा त्रिपिटकों में से नहीं है? तो अरिधम्म पिटक है, शतपिटक है और विनयपिटक है लेकिन उपासक नहीं होगा। तो ऑप्शन यहां सी राइट आंसर बन जाएगा दोस्तों। अगला प्रश्न पेट 2022 में पूछा गया था कि निम्नलिखित में से किस स्थान पर प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन किया गया था? तो बौद्ध जो संगीतियां हुई बौद्ध जो कॉनक्लेव रहे हैं उसमें से यहां पर पहली तो जो बौद्ध संगीतियां रही हैं आयोजन जो रहा है उसमें से यहां पर पहली पौध प्रथम पूछा गया है आपका तो पहला तो आजाद शत्रु के शासक में राजगृह में रहा है इसमें राजगृह में पहला दूसरी जो रही वैशाली वैली रही है और कुंडलवन कश्मीर में चौथी रही है ना कुंडलवन कश्मीर में कनिष्क के शासनकाल
44:07 में चौथी पाटिलपुत्र वाली तीसरी रहा आपके अशोक के शासनकाल में तो पहला आजाद अशोक दूसरा काला अशोक फिर अशोक है फिर कनिष्क है इनके शासनकाल में क्रमश हुई थी तो यहां कहां पर पहली पहुंची गई है दोस्तों पहली होगी आपका राजगीर राजगीर अथवा राजगीर किसके शासनकाल में अजाति शत्रु की तो बौद्ध संगीतियों को आपको याद रखना है पहली बौद्ध संगीति थी ठीक है इसको रट मारो पहली बौद्ध संगीत होती 483 ईसा पूर्व में कहां पर राजगृह में जिसकी अध्यक्षता महाकश्यप के द्वारा की गई थी अजातशत्रु के शासनकाल में द्वितीय महा बौद्ध संगीत जो रही है वो कालाशोक के शासनकाल में 483 ईवी में वैशाली में आयोजित रही है शवगामी के द्वारा इसकी की अध्यक्षता की गई थी। ईशरी पाटिलपुत्र है। यह अशोक के शासनकाल में और मुगल पुत्र तिष्म की जो है यह अध्यक्षता
44:53 में हुई। चौथी जो कंक्लेव रही है आपकी ये पहली शताब्दी ईसा में होती है और यह कुंडलवन कश्मीर में जो है कनिष्क की शासनकाल में होती है। जिसकी अध्यक्षता जो है वो वशुमित्र जबकि उपाध्यक्षता अश्वघोष ने की थी। तो यहां से प्रश्न बनते हैं। इनको आप जो है इसका स्क्रीनशॉट ले करके रोज आप देखा करिए इसको। ठीक है? तो पहला जो रहा है वो राजगृह ठीक है स्थान और शासक जरूर याद रखो आप अध्यक्षता भी याद रखो पूछा जाता है किसके द्वारा की गई थी तो राजगृह आपका अजात शत्रु के शासनकाल में देखो अजात शत्र है फिर काला अशोक है फिर अशोक आ जाता है फिर कनिष्क है और राजगृह वैशाली पाटित पुत्र कुंडलवन क्रम याद रखो महाकश्म सबकामी मुगल पुत्र तिस्म हो गए और वशुमित्र हैं। आगे बढ़ते हैं। तो वही कि
45:39 महात्मा बुद्ध की मृत्यु के तत्काल बाद जो है 483 ईसा पूर्व में पहली बौद्ध संगीत का आयोजन वर्तमान बिहार राज्य की राजगीर राजगृह में हुआ था। अगला प्रश्न है कि कनिष्क के शासनकाल के दौरान निम्नलिखित में से कौन सी बौद्ध संगीति आयोजित की गई थी? किसके कनिष्क के शासनकाल में? तो कनिष्क के शासनकाल में कौन सी होगी दोस्त? पहली किसके अजात शत्रु फिर कालाशोक फिर अशोक और उसके बाद चौथी कनिष्क के शासनकाल में। तो ऑप्शन यहां पर आपका सी राइट आंसर है। बढ़ते हैं आगे। प्रश्न पूछा जाए कि नागार्जुन कौन थे? नागार्जुन कौन थे? तो नागार्जुन भी क्या है? एक बौद्ध दार्शनिक थे। एक बौद्ध सागर दार्शनिक थे। ऑप्शन यहां पर बी आपका राइट आंसर बनेगा जो कि शून्यवाद के प्रवर्तक भी माने जाते हैं। शून्यवाद के प्रवर्तक पूछा जाए तो कौन? नागार्जुन।
46:25 नागार्जुन एक बौद्ध दार्शनिक थे। वे शून्यवाद या मध्यमिक के प्रवर्तक थे। इनकी प्रसिद्ध जो रचना है मूल मध्य क्या है? मूल मध्यमक मकारिका। ठीक है? तो रचना इसको अगर पूछ लिया जाए कि मूल मध्यमक मकारिका जो रचना है वो किसकी है? तो नागार्जुन की है जो कि शून्यवाद एवं आदमी के क्या है? प्रवर्तक थे। ठीक है? तो शून्यवाद जरूर याद रखना। शून्यवाद मतलब बिल्कुल कि इस दुनिया संसार जो भी है ना संसार को माना गया कि शून्य और उसकी जो जो भी मटेरियल वगैरह इस संसार में क्या है? सब कुछ क्या है? सत्याहीन माना जाता है। कुछ भी जो है वह छत नहीं जो कि विज्ञान से क्या है एक तरह से विज्ञानवाद से क्या है अलग है भिन्न है आगे बढ़ते हैं तो शून्यवाद के प्रवर्तक पूछा जाए तो याद रखना है जो बौद्ध दार्शनिक बौद्ध भिक्षु हैं नागार्जुन थे अगला प्रश्न है चलिए अगला
47:14 प्रश्न है आपका 21 नंबर है कि राजा बिंबिसार के दरबार में किसके बिंबिसार के दरबार में उस प्रसिद्ध चिकित्सक का क्या नाम है? तो बिंबिसार के दरबार में दरबारी चिकित्सक रहे हैं और भगवान बुद्ध के क्या है? निजी चिकित्सक थे। तो कौन थे? तो उनका नाम था जीवक। ठीक है? ऑप्शन यहां पर आपका सी राइट आंसर। जीवक प्राचीन भारत के प्रसिद्ध आयुर्वेदा आचार्य थे। यह गौतम बुद्ध के निजी चिकित्सक तथा बिंबसार के राज चिकित्सक थे। बिंबिसार मगध का राजा था और अजातशत्रु बिंबिसार का पुत्र था। तो अजातशत्रु जो रहे हैं अपने पिता की हत्या बिंबिसार की की थी। इसके बाद राजगद्दीन को मिली। वो अजात शत्रु जो रहे हैं वह जैन धर्म के अनुयाई रहे हैं। क्योंकि पहली जो बौद्ध संगीत रही वह अजात शत्रु के शासनकाल में ही जो है हुई थी। कहां? राजगृह में।
47:59 दूसरी वैशाली में। तीसरी कहां हुई थी? बौद्ध गण के लिए पढ़ के अभी आ रहे हो। तीसरी कहां? पाटिलपुत्र। चौथी कनिष्क कुंडलवन में। शासनकाल अजात शत्रु काला अशोक अशोक फिर कनिष्क। इन सब तथ्यों को याद रखना होता है। आगे बढ़ते हैं। अगला प्रश्न है कि भारत में स्थित किस शहर को विश्व का सबसे पुराना शहर माना जाता है? तो यह आप जानते हो वही काशी अपना बनारस है वाराणसी तो किस शहर को विश्व का सबसे पुराना शहर दर्ज वाराणसी ऑप्शन आपका बी राइट आंसर होगा। हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार वाराणसी यानी काशी विश्व का प्राचीनतम शहर है। बुद्ध काल में वाराणसी काशी महाजनपद की राजधानी थी। अगला प्रश्न है कि त्रिरश्म बौद्ध गुफा परिसर जहां तीन नई गुफाएं खोजी गई किस राज्य में स्थित है? त्रिरश्म बौद्ध गुफा परिसर। यह जो
48:47 आपका प्रश्न रहा है वह ट्रिपल एससी वीडियो और एग्जाम 27 जून 2023 का प्रश्न है कि त्रिश में जो बौद्ध गुफा परिसर है जहां पर तीन नई गुफाएं खोजी गई है। ठीक है? तो ये करंट से रिलेटेड तो किस राज्य में स्थित होगा? तो याद होगा आपको कौन सा राइट आंसर बनेगा ऑप्शन बी महाराष्ट्र। तो महाराष्ट्र के नासिक के निकट त्रिरश्म पहाड़ी कौन सी पहाड़ी त्रिरश्म पहाड़ी में स्थित त्रिरश्म बौद्ध गुफा है या पांडव लेनी का दस्तावेजीकरण एक ब्रिटिश सैन्य अधिकारी द्वारा किया गया था। पांडव लेनी का दस्तिवेदीकरण जो है एक ब्रिटिश सैन्य अधिकारी के द्वारा किया गया था। वर्ष 2021 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को उसी क्षेत्र में तीन और गुफाएं मिली। ऐसा माना जाता है कि यह गुफाएं क्या है? बौद्ध भिक्षुओं का निवास
49:34 स्थान हो सकती हैं। तो त्रिश्म बौद्ध गुफा का लोकेशन आपको याद रखना है। महाराष्ट्र राज्य में है। त्रिरश्म पहाड़ी पर है। त्रिश्म बौद्ध गुफा 2021 में जो है ये भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के द्वारा पता लगाया गया था और ऐसा माना जा रहा है कि वक्ष भिक्षुओं का यह स्थान हो सकती है। तो बौद्ध धर्म से संबंधित है। याद रखना है। तो इन्हीं 23 प्रश्नों के साथ पूरा का पूरा चलिए भारतीय इतिहास का अगला जो टॉपिक है आपका टॉपिक नंबर कौन सा है? चौथा है। जैन धर्म महावीर की जीवन एवं शिक्षाओं से संबंधित तथ्य आपके एग्जाम में पूछे जाएंगे। पहला प्रश्न है कि पहले जैन तीर्थंकर कौन
50:20 रहे हैं? तो पहले जैन तीर्थंकर पूछा गया है। राइट आंसर होगा ऑप्शन बी ऋषभदेव थे। जैन परंपरा के अनुसार जैन धर्म में कुल कितने तीर्थंकर हुए? 24 तीर्थंकर हुए। जैन धर्म के मूल संस्थापक या प्रवर्तक प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव थे या आदिनाथ जो है माने जाते हैं। तो ऋषभदेव या आदिनाथ इनका कहा जाता है नाम है इनका। तीर्थंकर 30वें तीर्थंकर जो हैं कौन? 23वें जो तीर्थंकर हैं वो पार्श्वनाथ थे। महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर रहे हैं। तो आपके जो सिलेबस में है वह महावीर स्वामी को आपको पढ़ना है। जीवनी एवं शिक्षाओं से संबंधित तो महावीर स्वामी 24वें तीर्थंकर
51:06 इनसे पहले जो 23वें रहे हैं वह पार्श्वनाथ थे। पहले जो तीर्थंकर या मूल संस्थापक कर्ता धर्ता जो रहे हैं प्रथम तीर्थंकर के तौर पर ऋषभदेव या आदिनाथ महावीर स्वामी जिन्होंने छठी शताब्दी ईसा पूर्व के जैन धर्म का प्रचार प्रसार और सुद्रीकरण किया है। अगला प्रश्न जो कि पेट 2025 में यानी पिछला जो आपका पेट हुआ है पूछा गया 25 में कि आदि पुराण किस तीर्थंकर की संर संत चरित जो है वो संग्रह है आदि पुराण तो आदिनाथ यानी जो आदि पुराण रहे आदिनाथ की अगर बात की जाए जो कि प्रथम तीर्थंकर रहे हैं तो उन्हीं से संबंधित है। तो राइट आंसर क्या होगा आपका? ऑप्शन ए यहां पर सही जवाब बन जाता। आदि पुराण में जैन परंपरा
51:52 के प्रथम तीर्थंकर का चरित्र वर्णित है। प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ और ऋषभनाथ को आदिनाथ भी कहा जाता है। इसी कारण आदि पुराण आदिनाथ के संत चरित्र से संबंधित ग्रंथ माना जाता है। अगला प्रश्न है दोस्त किव 30वें कौन से 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ से जुड़ा प्रतीक क्या रहा है? कौन से 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ से जुड़ा प्रतीक क्या रहा है? राइट आंसर यहां पर बनेगा सांप। ऑप्शन यहां बी आपका सही जवाब। पहला जो रहा वह बैल प्रतीक जो रहा है वह आपका ऋषभनाथ आदि देव से जुड़ा रहा। शंख की बात की जाए तो शंख जो रहे हैं 22वें जो तीर्थंकर थे आपके
52:39 नेमिनाथ से जुड़ा। शेर तो आपके 24व वाले रहे हैं जो है ना सिंह महावीर स्वामी का इन तथ्यों को याद रखना है जो कि आपके पेट एग्जाम में पूछा भी गया है खासकर उनके याद रखने हैं पहले के याद रख लेना है और 21 22 23 वाले 24 वालों को याद रखो है ना तो 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ की प्रतिमा के ऊपर सर्प फण छत्र का उल्लेख मिलता है। इसलिए 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ से जुड़ा प्रतीक जो है सांप माना जाता है। अगला प्रश्न है कि जैन धर्म जैन धर्म में 24वें तीर्थंकर और अंतिम तीर्थंकर किसे माना जाता है? कौन जो आपके सिलेबस में है वर्धमान महावीर स्वामी ऑप्शन यहां पर आपका बी राइट आंसर है। अगला प्रश्न दोस्त कि
53:25 जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण मौलिक सिद्धांत क्या है? तो जैन धर्म में है कितने? पांच सिद्धांत। पांच सिद्धांतों में जो आपका अहिंसा है अहिंसा वो सबसे जो है मूल सिद्धांत बताया गया भाई जैन धर्म वाले अहिंसा से क्या दूर है तो कौन से हैं पांच याद रखना है सत्य है अहिंसा है सत्य अहिंसा सत्य अहिंसा अस्तेय अपरिग्रह ब्रह्मचर्य पांच हैं जैन धर्म की पांच जो है सिद्धांत आइए व्याख्या देखते हैं अहिंसा को जैन धर्म की सबसे महत्वपूर्ण मौलिक सिद्धांत के रूप में जाना जाता है। जैन धर्म के पांच सिद्धांतों में अहिंसा सबसे मौलिक सिद्धांत है। जैन धर्म के पांच सिद्धांत कौन-कौन से हैं? अहिंसा, सत्य, अस्तय,
54:14 अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य। और आता आप जब आप नोट जो है देखेंगे, जब नोट जो है कवर कराएंगे तो आपको पता होना चाहिए कि जो जैन धर्म में इसमें भी जो है दो संप्रदाय था। एक दिगंबर और एक श्वेतांबर रहे। तो जो श्वेतांबर थे यानी जो श्वत वस्त्र धारण करने वाले श्वेतांबर होंगे जो कि स्थूलभद्र के शिष्य रहे। दिगंबर यानी बिल्कुल नग्न रहने वाले जो थे वह भद्रबाहु के शिष्य रहे। तो इन जो पांच सिद्धांतों को बताया गया है। जो श्वेतांबर है इन पांचों में से जो है श्वेतांबर वाले जो सफेद कपड़ा पहनने वाले हैं। इनमें से जो है किसका पालन नहीं करते? वो ब्रह्मचर्य ब्रह्मचर्य का पालन नहीं करने वाले जो हैं पांच सिद्धांतों में वह हैं कौन से जो श्वेतांबर हैं यानी कि जो स्थूलभद्र के शिष्य हैं। जबकि भद्रबाहु वाले जो दिगंबर
55:01 की बात की जाए जो नग्न रहने वाले वो इन पांचों सिद्धांतों का पालन करते हैं। तो हो सकता है आपके एग्जाम में पूछा जाए तो इन तथ्यों को आपको याद रखना है दोस्त। अगला है कि जैन धर्म में त्रिरत्न। ठीक है? जैसे कि आपका बौद्ध धर्म में त्रिपिटक था। सूत्र यानी विनय सूत्र और अधिम्म। जैन धर्म में त्रिरत्न की बात की जा रही है। और उन्हें निर्वाण मार्ग का कहा जाता है। ये क्या है? तो जैन धर्म के जो त्ररत्न सम्यक दर्शन यानी कि सही विश्वास है सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र ठीक है तो आचरण तो सम्यक दर्शन सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र याद रखना है जैन धर्म के त्रिरत्न यदि एग्जाम में पूछा जाए कि जैन धर्म के त्रिरत्न में
55:47 से निम्नलिखित में से कौन सा नहीं होगा चार विकल्प पांच विकल्प तो आ ही रहा उपयुक्त में से कोई नहीं तो सम्यक चरित्र सम्यक ज्ञान और सम्यक दर्शन याद रखिएगा। तो यहां पर राइट आंसर ऑप्शन डी आपका सही जवाब। जैन धर्म के तिरत्न सही विश्वास यानी सम्यक दर्शन। सही ज्ञान यानी सम्यक ज्ञान। सही आचरण यानी सम्यक चरित्र। जैन धर्म में सत या यथार्थ में विश्वास को सम्यक दर्शन। तत्वों का सही ज्ञान को सम्यक ज्ञान कहा गया है। सुख-दुख में समभाव को ही सम्यक चरित्र कहा गया है। सुख-दुख में समभाव को ही सम्यक चरित्र कहा गया है। जैन धर्म में जीव का जो अंतिम लक्ष्य है मोक्ष निर्वाण अर्थात कर्म बंधन से पूर्ण मुक्ति है। अगला प्रश्न मनुष्य
56:35 जीवन का सर्वोत्तम धेय कैवल्य होता है। तो कैवल्य क्या है? इसका अर्थ बताना है आपको। तो जैन धर्म में मोक्ष निर्वाण की जो प्राप्ति हो जाती है पूर्ण मुक्ति जब मिलती है कैवल्य कहा जाता है। तो आप कह सकते हैं इच्छाओं पर क्या है? पूर्ण विजय प्राप्त करना ही क्या कैवल्य। ऑप्शन यहां पर आपका ए राइट आंसर है। जैन धर्म के अनुसार मनुष्य जीवन का चरम लक्ष्य मोक्ष निर्माण की प्राप्ति है। कैवल्य अत्यंत महत्वपूर्ण अवस्था मानी जाती है। कैवल्य का वास्तविक अर्थ पूर्ण ज्ञान या सर्वज्ञता है। दिए गए विकल्पों में इच्छाओं पर विजय प्राप्त करना कैवल्य का शाब्दिक अर्थ जो है वह नहीं होगा। लेकिन अब विकल्प में है नहीं। तो मोस्ट एप्रोप्रियट आंसर वही होगा आपका। तो कैवल्य का जो वास्तविक अर्थ है वह मोक्ष।
57:23 तो यहां पर जो है कैवल्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक साधन या उससे जुड़ी अवस्था के रूप में निकटतम विकल्प यहां पर बन रहा है। तो कैवल्य का जो अर्थ होगा क्या होगा? केवल ज्ञान यानी पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति से है। ठीक है? यानी कि जिसमें व्यक्ति को समस्त पदार्थों और उनके सभी रूपों का पूर्ण एवं प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त हो जाता है। जिसको कि मोक्ष की दिशा में सर्वोच्च ज्ञान माना जाता है। तो कैवल्य का सही अर्थ क्या? पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति। अगला है भगवान महावीर स्वामी को ज्ञान कहां प्राप्त हुआ था? जैसे कि बौद्ध धर्म में महावीर स्वामी को बोधगया में पीपल वृक्ष के नीचे निरंजना नदी के तट पर तो यहां पर महावीर स्वामी जो
58:09 जैन धर्म से रिलेटेड है इनको ज्ञान की प्राप्ति कहां हुई थी तो इनको रिजुपालिका के नीचे जो है यानी जो शाल वृक्ष रहा रिजुपालिका जो नदी रही के किनारे साल वृक्ष के वो पीपल वृक्ष के रहे शाल वृक्ष के नीचे जो है इनको ज्ञान प्राप्त हुआ था और ग्राम था जिमका ग्राम कौन सा जिंभिका ग्राम ऑप्शन यहां पर आपका सी राइट आंसर बन जाता है। महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे। उन्होंने लगभग 12 वर्षों की कितने 12 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद दंभिका ग्राम के पास रिजुपालिका नदी के तट पर कौन सी नदी? रिजुपालिका नदी तट है। जबकि जैन धर्म ओ बौद्ध धर्म में आपने क्या पढ़ा? निरंजना नदी के तट पर रहा है। यहां पर शाल वृक्ष के नीचे था। वहां पीपल वृक्ष
58:55 के नीचे पढ़े थे। तो एक शाल वृक्ष के नीचे केवल इनको ज्ञान प्राप्त हुआ। अगला प्रश्न यूपी ट्रिपल एससी पेट 2025 में पूछा गया कि महावीर ने निम्नलिखित में से किस स्थान पर मोक्ष प्राप्त किया था? अब जैन धर्म बौद्ध धर्म में आपने देखा कि कुशीनगर नारा में रहे। कुशीनारा में उनको निर्माण मोक्ष प्राप्त हुआ था। अंतिम शास्त्र ये इन्होंने 72 वर्ष की उम्र में 72 वर्ष की आयु में जो है इनको मोक्ष मिला। पावापुरी ऑप्शन यहां पर आपका बी राइट आंसर है। बौद्ध धर्म आपने 80 वर्ष वाले में पढ़ के 80 वर्ष के रहे उस समय। तो देख रहे हैं आप किस तरह के प्रश्न आपके एग्जाम में पूछे गए। तो इसी तरह आपका पूरा का पूरा जो रहा है यह टॉपिक नंबर फोर आपका कंप्लीट हो जाता है।
59:41 एक्सप्लेनेशन आप देख लीजिए कि जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने 527 तो ये तथ्य आपके लिए इंपॉर्टेंट है। भाई फ़क्चुअल पूछ ले डाटा तो 527 ईसा पूर्व में कितने वर्ष उम्र वर्ष की आयु में यह भी आपके लिए इंपॉर्टेंट है। जैसे महावीर स्वामी की बात की जाए तो 80 वर्ष की आयु में उनको ज्ञान प्राप्त हुआ। मोक्ष प्राप्त हुआ था उनको कुशीनारा में इनकी बात की जाए तो पावापुरी में इनको निर्माण मोक्ष प्राप्त हुआ 72 वर्ष की आयु में तो इस तरह आपका जो चौथा नंबर टॉपिक रहा वह कंप्लीट हो जाता है दोस्तों अब आइए आगे बढ़ते हैं अगला है आपका पांचवा नंबर टॉपिक है सिलेबस में आपके दिया है कि मौर्य वंश सम्राट अशोक से रिलेटेड बातें यूपी ट्रिपल एससी पेट 25 में पूछा गया कि मौर्य वंश का संस्थापक
1:00:28 कौन था तो राइट आंसर क्या बनेगा चंद्र चंद्रगुप्त मौर्य जो कि जैन धर्म का क्या था? अनुयाई रहा है। तो ऑप्शन यहां पर डी आपका राइट आंसर बनेगा। दोस्त मौर्य वंश की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने की थी। उन्होंने नंद वंश के शासन को समाप्त कर मौर्य साम्राज्य की नींव रखी थी। चंद्रगुप्त मौर्य के शासन से प्राचीन भारत में एक शक्तिशाली और विस्तृत साम्राज्य का उदय हुआ। तो देख रहे हैं किस तरह पूछा गया। 25 पेट में 21 पेट में क्या पूछा गया? जब पहली बार पेटा आ रहा है तो मौर्यकालीन भारत की विवरण वाली इंडिका के लेखक कौन रहे हैं? इंडिका के लेखक कौन? मेगस्थनीज। मेगस्थनीज क्या? इंडिका। ऑप्शन यहां पर आपका डी राइट आंसर है। मौर्यकालीन भारत के विवरण वाली इंडिका के लेखक
1:01:13 मेगस्थनीज थे। मेगस्थनीज चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में भारत आया था। तो यदि आपसे एग्जाम में पूछा जाए कि मेगस्थनीज किसके शासनकाल के दौरान भारत आया था? तो चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल के दौरान चंद्रगुप्त मौर्य कौन जो कि मौर्य वंश के संस्थापक थे। मेगस्थनीज मूलतः कहां का निवासी था? तो ग्रीस का निवासी था जो सेलकस निकेटर का राजदूत था। तो किसका राजदूत था जो भारत आया था। सेलकस निकेटर का राजदूत था। जो कि ग्रीस का मूलत निवासी रहा। चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में भारत आया था। मेगस्थनीज के द्वारा इंडिका लिखी गई है। अगला प्रश्न जो कि लोअर पीसीएस का रहा 19 का कि मेगस्थनीज जिन्होंने भारत के बारे में प्रसिद्ध
1:01:59 ग्रंथ कौन सी लिखी थी? इंडिका इंडिका किसने लिखा था? मेगस्थनीज तो मूल रूप से किस देश के वो थे? तो अभी पढ़ के आ रहे हो ग्रीस। ऑप्शन यहां बी राइट आंसर है। अगला प्रश्न दोस्त कि नगरपालिका प्रशासन की एक विस्तृत प्रणाली की स्थापना के लिए निम्नलिखित में से सबसे प्रसिद्ध राजा का नाम बताना है। नगरपालिका की प्रशासन की एक विस्तृत प्रणाली की स्थापना तो इसके लिए सबसे प्रसिद्ध राजा कौन रहे हैं? यहां पर आपका राइट आंसर बनेगा ऑप्शन बी चंद्रगुप्त मौर्य। मौर्य वंश के संस्थापक यूनानी जो लेखक जो मूलता ग्रीस का रहा लेखक मेगस्थनीज ने मौर्यों के नगर प्रशासन का सिद्धांत जो नगर प्रशासन रहा उसका विस्तृत विवरण दिया।
1:02:45 मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक इंडिका में भारत और चंद्रगुप्त के शासनकाल का विवरण लिखा है। अर्थात मेगस्थनीज के अनुसार नगरपालिका प्रशासन की एक विस्तृत प्रणाली चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में विद्यमान थी। अगला प्रश्न है कि चंद्रगुप्त मौर्य के इस प्रसिद्ध राजनीतिक सलाहकार को निम्नलिखित में से सभी नामों से जाना जाता था। तो चंद्रगुप्त मौर्य के जो प्रसिद्ध राजनीतिक सलाह रही चाणक्य आप जानते हो तो चाणक्य चाणक्य हो गए चाणक्य को कौटिल्य भी कहा जाता था विष्णुगुप्त भी नाम रहा तो यहां पर कौन से नहीं होंगे तो समुद्रगुप्त यहां पर नहीं होगा राइट आंसर ऑप्शन डी सही जवाब बन जाता है कौटिल्य अथवा चाणक्य अथवा विष्णुगुप्त एक राजनीतिक व चंद्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री के रूप में प्रसिद्ध थे। इनका व्यक्तिवा व्यक्तिवाचक
1:03:32 जो नाम था क्या रहा? विष्णुगुप्त कहते थे लोग पिता के द्वारा पैतृक जो नाम रहा वह चाणक्य था गोत्र के तौर पर यह कौटिल्य कहलाते थे गोत्र जो नाम रहा कौटिल्य था पैतृक नाम चाणक्य और व्यक्तिवाचक नाम विष्णुगुप्त तो इन्होंने चंद्रगुप्त मौर्य के साथ मिलकर नंद वंश को समाप्त कर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की थी। चाणक्य। आगे बढ़ते हैं। अगला प्रश्न है कि विशाखदत्त द्वारा लिखित कौन सी पुस्तक? यह मुद्रा राक्षस है। मुद्रा राक्षस किसके द्वारा लिखित है? विशाखदत्त के द्वारा लिखित है। यह कौन सी भाषा में लिखी गई है? दोस्तों, मुद्रारा राक्षस नाम कुछ लग रहा है संस्कृत जैसा है ना? तो यह आपका यहां पर ऑप्शन सी सही जवाब बनेगा। संस्कृत
1:04:18 विशाखदत्त द्वारा रचित है मुद्राराक्षत जो कि संस्कृत भाषा का नाटक है। इसे हिंदी में अनुदित करने का जो श्रेय है वो भारतेंदु हरिश्चंद्र को प्राप्त है। यदि आपसे एग्जाम में पूछा जाए कि मुद्राराक्षक जो कि मूलत संस्कृत भाषा का रहा है। इसका जो हिंदी रूपांतरण था हिंदी में अनुवादित जो रहा वो किसके द्वारा किया गया? तो हरिश भारतेंदु हरिश्चंद्र को इसका श्रेय जो है वो जाता है। इस ग्रंथ से चंद्रगुप्त मौर्य के विषय में विस्तृत सूचना मिलती है। इस ग्रंथ से मुद्रा राक्षस से जो कि विशाखदत्त के द्वारा रचित है। हिंदी रूपांतरण भारत हरिश्चंद्र जी के द्वारा किया गया। तो इस ग्रंथ का चंद्र चंद्रगुप्त मौर्य के विषय में विस्तृत सूचना प्राप्त होती है। नाटक में चंद्रगुप्त को बृसल तथा कुलहीन कहा गया
1:05:06 है। तो मुद्रा राक्षस जो नाटक है संस्कृत भाषा का इसमें चंद्रगुप्त को ना क्या कहा गया है? वृसल अथवा कुलहीन कहा गया है। ढुंडीराज ने मुद्रा राक्षस पर टीका लिखी थी। तो मुद्रारा राक्षस पर टीका किसने लिखा टिप्पणी? तो वो थे ढूंढिकराज। कौन था? झुंडीराज थे। आगे बढ़ते हैं दोस्तों। तो, यह जो आपके व्याख्या वाले जो इंपॉर्टेंट फैक्ट हैं, इनको भी आपको याद रखना है। वरना इस तरह का पीआईक्यू करने से कोई मतलब नहीं। बस क्वेश्चन आंसर देख लीजिए। पीआईक्यू हो जाएगा। लेकिन यदि आप व्याख्या अच्छे से कवर कर रहे हैं, तब समझिए आप जो है, तैयारी कर रहे हैं। बढ़ते हैं आगे। अगला प्रश्न है दोस्त, कि रुद्रदामन के गिरनार शिलालेख में वर्णित सुदर्शन झील।
1:05:52 रुद्रदामन के गिरनार शिलालेख में गिरनार शिलालेख में वर्णित सुदर्शन झील के निर्माण का श्रेय किस मौर्य अधिकारी को दिया जाता है बताइए यह भी आपके पेट 2025 में पूछा गया प्रश्न रहा है दोस्तों रुद्रदामन के गिरनार शिलालेख में जो वर्णित सुदर्शन झील है इसके निर्माण का जो श्रेय है किस मौर्य अधिकारी को दिया जाता है मौर्य अधिकारी राइट आंसर होगा पुष्यगुप्त को ऑप्शन ए यहां सही जवाब है रुद्र दामन रुद्र दामन के गिरनार शिलालेख में सुदर्शन झील के निर्माण का जो श्रेय है वह पुष्यगुप्त को दिया जाता है। पुष्यगुप्त चंद्रगुप्त मौर्य का प्रांतीय अधिकारी था। पुष्यगुप्त चंद्रगुप्त मौर्य का प्रांतीय अधिकारी था। शिलालेख के अनुसार उसने सौराष्ट्र क्षेत्र में
1:06:39 सौराष्ट्र यानी गुजरात गिरनार गुजरात तो सौराष्ट्र क्षेत्र में इस झील का निर्माण कराया था। सुदर्शन झील बाद में रुद्रदामन ने इसी झील की मरम्मत कराई थी। अगला प्रश्न आप देख रहे हैं। 6 सितंबर को पूछा गया था और यह जो आपने यह पढ़ा सुदर्शन झील वाला बिल्कुल प्रश्न सेम दिख रहे हैं आपके। ये सात को पूछा गया था। उसके पहले छह को पूछा कैसा गया था। प्रश्न देखिए पूछा गया था कि रुद्रदामन के गिरनार शिलालेख में सुदर्शन झील का उल्लेख जिसका निर्माण किस मौर्य शासक के शासनकाल में हुआ था? वहां पर पूछा गया कौन से अधिकारी के रहा है अंदर में और यहां पूछ लिया गया किस शासनकाल में रहा है तो प्रश्न आप देख पा रहे हैं थोड़ा रिलेट आप करिए तो लगभग एक ही लग रहे हैं बस वहां कार्य शासनकाल
1:07:24 पूछा गया यहां वहां अधिकारी के तौर पर पूछा गया किसके तो चंद्रगुप्त मौर्य यहां पर राइट आंसर आपका बन जाता ऑप्शन बी सही जवाब है। आगे बढ़ते हैं। अगला प्रश्न है निम्नलिखित में से किस संप्रदाय में बिंदुसार की रुचि थी? तो जो उनको रुचि रहे जिस संप्रदाय में वह मारने वाले जो थे आजीवक रहे। ठीक है? उनके अंदर शिक्षा क्या? आजीवक ऑप्शन यहां पर आपका सी राइट आंसर बन जाता है। मौर्य सम्राट बिंदुसार की रुचि आजीवक संप्रदाय में थी। यूनानी लेखकों ने बिंदुसार को अमित्रों अमित्रों केडीज कहा है। यूनानी लेखकों ने बिंदुसार को अमित्रों केडीज कहा है। विद्वानों के अनुसार अमित्रों केडीज का जो संस्कृत रूप है वह है अमित्रघात। अमित्र घात है ना अमित्र
1:08:12 अमित्र यानी कि मित्र ना हो घात का मतलब संघार तो मित्र ना हो अर्थात दुश्मन या शत्रु ले लो तो शत्रुओं का संहार करने वाला आप ये हिंदी में भी पढ़ते हो वाक्यांश के लिए एक शब्द शत्रुओं का संहार करने वाला या विनाश करने वाला अमित्रघात कहलाएगा तो यहां पर जो है वो क्या कहा गया अमित्र केडीज का संस्कृत रूप होता है अमित्रघात तो बिंदुसार को यह संज्ञा दी जाती थी भारतीय दर्शन और इतिहास के अहत्याओं के अनुसार आजीवक संप्रदाय की जो स्थापना है वो मक्खली गोशाल यानी गोशालक ने की थी। आजीवक संप्रदाय की स्थापना किसने की थी? मक्खली गोशाल दास ने की थी। आगे बढ़ते हैं। अगला प्रश्न है कि निम्नलिखित में से कौन सा वह व्यक्ति है जिनका नाम देवा नाम पिय दर्शी था? देवा
1:08:58 नाम पिय पियदर्शी भी था। तो अक्सर यह पीसीएस वगैरह में पूछा जा चुका प्रश्न है। तो वह किसको कहा जाता? तो मौर्य सम्राट अशोक को ऑप्शन यहां पर आपका डी राइट आंसर है। पेड 22 में भी पूछा गया। अगला वही है कि देवामपीय नाम किसे दिया गया? तो आपका उत्तर होगा अशोक जी को। देवा नामपीय मौर्य मौर्य शासक अशोक को कहा जाता है। अशोक को देवांगना पियदशी भी कहा जाता है। तो ये सब नाम देख लीजिए। देवांगना पियदशी पूछा जाए। देवा नामपिय पूछा जाए। अशोक का नाम मासिक गुर्जर नेतूर उडेगोलम के अभिलेखों से जो है मिलता है। अशोकों को अशोक को धम्म नीति एवं कलिंग युद्ध के लिए विशेष तौर पर जाना जाता है।
1:09:44 कौन सा कलिंग युद्ध? अच्छा आपके एग्जाम में अक्सर पूछा जाता है कि कलिंग युद्ध का जो वर्णन है ना वह अशोक के कौन से शिलालेख से प्राप्त होती है? जानकारी तो कौन सा है? अक्सर एग्जाम में पूछा जाता है। याद रखिएगा तथ्य कौन सा? 13वें शिलालेख से। अगला प्रश्न है कि सम्राट अशोक का कौन सा शिलालेख कलिंग पर उनकी विजय का उल्लेख? अच्छा वही प्रश्न है आपका कलिंग युद्ध की जानकारी। तो 13वें शिलालेख ऑप्शन यहां डी राइट आंसर है। कलिंग युद्ध तथा उसके परिणामों के विषय में अशोक के 13वें शिलालेख से कौन से शिलालेख 13वें शिलालेख से विस्तृत सूचना प्राप्त होती है। अशोक ने अपने राज्या अभिषेक के 8 वर्ष बाद जो कि 261 ईसा पूर्व में कलिंग पर आक्रमण किया था। कब? 261 ईसा पूर्व यानी राज्या
1:10:29 अभिषेक के 8 वर्ष बाद 261 ईसा पूर्व में कलिंग पर आक्रमण किया था। उसने विजय उपरांत यानी विजय के बाद कलिंग में दो अधीनस्थ प्रशासनिक केंद्र स्थापित किए। पहला उत्तरी केंद्र जिसकी राजधानी तोसली दूसरा दक्षिणी केंद्र जिसकी राजधानी जौगढ़ थी। अगला प्रश्न अशोक के प्रधान शिलालेखों में सबसे बड़ा शिलालेख कौन सा है? अशोक के प्रधान शिलालेखों में सबसे बड़ा जो शिलालेख है वह कलिंग के युद्ध का वर्णन करने वाला 13वां ही है। ऑप्शन यहां पर सी राइट आंसर है। अशोक के प्रधान शिलालेखों में 13वां जो शिलालेख सबसे बड़ा है। इसमें अशोक के कलिंग विजय यानी राजा अभिषेक के आठ वर्ष बाद जो कि 261 ईसा पूर्व का वर्णन है। इसकी तुलना में धम्म विजय को अधिक
1:11:16 महत्वपूर्ण भी बताया गया है। धम्म विजय को अधिक महत्वपूर्ण बताया गया है। कलिंग विजय की तुलना में अशोक के आक्रमण के दौरान कलिंग यानी पूर्वी प्रांत एक पूर्वी था दूसरा पश्चिमी था। अभी आप पढ़ के आ रहे हो एक्सप्लेनेशन में आपने यही देखा कि पूर्वी और यानी उत्तरी दक्षिणी था जो कि आपका तोसली जोगढ़ रहा तो यहां पर कलिंग पूर्वी प्रांत की जो राजधानी थी तोसली ऑप्शन यहां पर आपका डी राइट आंसर बन जाता। अगला प्रश्न है दोस्त निम्नलिखित में से कौन सा अशोक के साम्राज्य के अधीन नहीं था? तो कश्मीर रहा है, गुर्जर रहा, कर्नाटका की होगा। कामरूप की बात की जाए तो समुद्रगुप्त के जो है से रिलेटेड रहा है। तो ये साम्राज्य अधीन नहीं था। वो कामरूप
1:12:03 होगा। ऑप्शन यहां पर आपका डी राइट आंसर बन जाता है। तो उपर्युक्त विकल्पों में कामरूप जो दिया गया है अशोक के साम्राज्य के अधीन नहीं रहा है। कामरूप का पहला जो ऐतिहासिक उल्लेख है वह समुद्रगुप्त के चौथी सदी ईवी के प्रयाग प्रशस्ति यानी हरिसेन द्वारा जो रचित प्रयाग प्रशस्ति है इसमें मिलता है। जहां यह गुप्त साम्राज्य के सीमांत राज्य यानी देविका और समतट के साथ वर्णित मिलता है कामरूप। अगला प्रश्न है अशोक के कौन से शिलालेख में ब्राह्मी लिपि का प्रयोग नहीं किया गया है? तो अशोक का जो शिलालेख ज्यादातर ब्राह्मी लिपि में लिखे गए हैं लेकिन वो कौन सा नहीं होगा? सारनाथ वाला होगा लेकिन शाहबाजगढ़ यहां पर नहीं होगा। शाहबाज नहीं हो जाएगा। आगे विकल्प में देखते हैं। नहीं शबाज वाला नहीं होगा। बाकी धौली ही आपका
1:12:49 होगा। अशोक के 14 बहद शिलालेखों विभिन्न जो है राज संज्ञाएं यानी शासनादेश दिए गए हैं जो भिन्न-भिन्न स्थानों से प्राप्त किए गए हैं। अशोक के शाहबाजगढ़ तथा मानसेरा कौन सा शिला अभिलेख मानसी शाहबाजगढ़ी वाला और मानसेरा अभिलेख अन्य लेखों के विपरीत खरोष्ठी लिपि में जो है लिखे गए हैं। शाहबाजगढ़ आधुनिक पाकिस्तान के खैबर पखुआ प्रांत के मर्दान जिले में स्थित है शाहबाजगढ़। अगला प्रश्न है दोस्त कि निम्नलिखित में से मौर्य कला का सर्वोत्तम जो प्रतिमान है वह कौन सा है? मौर्य कला का सर्वोत्तम जो प्रतिमान है वह कौन सा होगा? राइट आंसर यहां पर बनेगा स्तंभ होगा। कौन सा स्तंभ? ऑप्शन यहां पर आपका ए सही जवाब सर्वोत्तम प्रतिमान मौर्य
1:13:35 कला का स्तंभ। मौर्य कला का सर्वोत्तम जो प्रतिमान है वह स्तंभों को माना जाता है। जिनमें अशोक द्वारा धम्म के प्रचार हेतु स्थापित कराए गए एकात्मक स्तंभ एकात्मक स्तंभ जो है विशेष रूप से उल्लेखनीय है। अशोक के एकात्मक स्तंभों का सर्वोत्कृष्ट जो नमूना है वह सारनाथ का सिंह जो चतुर्भुत सिंह जो चतुर्मुख स्तंभ शीर्ष है सारनाथ जो आपकी अपने अशोक चक्र में यानी
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