0:00 है क्या आपने कभी सोचा है कि क्यों Facebook में है लाइक बटन व्हाट्सएप में व्हाट्सएप स्टेटस और यह भिंडी सब्जी में चिकन डिनर और पोर्न वेबसाइट पर पॉइंट्स की अलग-अलग के डिक्रीज दी जाती हैं क्या आपने कभी सोचा है कि क्यों हम फेसबुक इंस्टाग्राम यह आपने किसी पसंदीदा गेम को खेलते समय हम बोर क्यों नहीं होते और फिर उसको बस सामने देखते हैं में नींद आने लगती है और यह सभी प्लेटफॉर्म्स जो हम यूज करते हैं इनका हमारे दिमाग पर क्या असर पड़ता है आज की इस वीडियो में आप सोशल मीडिया एजुकेशन पोर्न एडिक्शन और के मेडिसन से रिलेटेड एस्पेक्ट्स जाने वाले हो और ना केवल फैक्स बल्कि ऐसी साइंटिफिक रिसर्च जिन्हें जानने के बाद आप इन सभी चीजों को यूज करने से पहले 10 बार सोचोंगे लेकिन वीडियो शुरू करने से पहले में आप सभी को धन्यवाद कहना चाहूंगा कि आपने इस चैनल के नाम के लिए इतने अच्छे-अच्छे सजेशंस दिए आपमें से काफी लोगों को यह पता होगा कि कॉपी राइट्स इश्यू के चलते हमें
0:45 इस चैनल के नाम को चेंज करना पड़ेगा इसलिए आज से इस चैनल का नाम self-improvement फिर से बदलकर इंप्रूवमेंट फैक्स कर दिया जाएगा आई होप आप कोई नाम पसंद आया होगा एंड ओंस अगेन थैंक यू सो मच फॉर योर सपोर्ट चलिए वीडियो शुरू करते हैं लेट्स स्टार्ट पर पोर्न एडिक्शन कि आप जाओ रिपोर्ट मूवी हमारे ग्रीन को ठीक उसी तरह से डैमेज करती हैं जिस तरह से कोई अदरक और आपको यह बात जानकर हैरानी होगी कि ब्लडी मैरी स्केनर में जो पोर्न एडिक्शन ड्रग एडिक्ट्स के बयान को स्कैन किया गया तो दोनों एडिट्स के ब्रेन लगभग-लगभग सेम लेवल पर डैमेज थे देखो दुनिया का कोई भी एडिक्शन चाहे वह पोर्न एडिक्शन हो सोशल मीडिया एडिक्शन हो या फिर गेम एडिक्शन इस सभी एडिक्शन सबसे पहले हमारे ब्रेन के रिपोर्ट सिस्टम को जाकर डैमेज करते हैं न्यूरोसाइंटिस्ट गैलरी डोंट कीप और एडिट स्क्रीन पर की गई एक रिसर्च में अपॉइंटेड के प्लेन को फोन देते समय जब स्कैन किया गया तो उनके ब्रेन में कौन की वजह से होने
1:31 वाली एक्टिविटीज में साइंटिस्ट के भी होश उड़ा दिए यह देखिए यह एक नॉर्मल इंसान का दिमाग और यह एक पॉइंट का दिमाग आप देख रहे हैं कि इन महानुभाव का दिमाग कैसे बल्कि तरह चल रहा है इतनी ज्यादा एक्टिविटी प्रिंटेड को में रिसेप्टर खासकर Dr टू रिसेप्टर को जलाकर राख कर देगी अप्रैल में पाए जाने वाले हैं यही टो कम इन रिसेप्टर्स स्पेशली डे टू रिसेप्टर्स बहन के प्रति कुंटल को टैक्स को नियंत्रित करते हैं और हमारे दिमाग में यही हिस्सा हम इंटेलीजेंट बनाता है हमारे दिमाग में उठने वाली इंपल्सेस यानी कि हमारे पूरे बिहेवियर को कंट्रोल का कहने का मतलब यह है कि हमारे दिमाग का यह हिस्सा हमें जानवर से अलग कर इंसान बनाता है और पोर्न मूवी देखने से फ्रंटल कांटेक्ट यानि कि इंसानी दिमाग को नेविगेट करने वाले बिट्टू रिसेप्टर्स कम हो जाते हैं जिसके चलते हमारा दिमाग धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है अब हो सकता है कि आपमें से कुछ लोगों को मेरी बधाई इन बातों
2:17 पर डाउट हो रहा हो तो इस टॉपिक पर एक बहुत ही पावरफुल बुक्स लिखी गई है जिसका नाम है यार अरे नॉट पोर्न और अगर और अगर आप इस बुक की वेबसाइट पर जाकर देखोगे तो आपको सैकड़ों ऐसी साइंटिफिक रिसर्च मिल जाएंगे यह देखिए यह सभी साइंटिफिक रिसर्च है और इन रिसर्च में यह साफ बताया गया कि पोर्न किस हद तक हमारे ब्रेन डैमेज कर सकती है इस वेबसाइट के लिंक आपको डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगी अकॉर्डिंग टो थिस बुक पॉर्न मूवी देखने का सबसे बुरा असर यह हमारे दिमाग पर होता है वह यह है कि पोर्न मूवी हमारे दिमाग में होने वाली मेटाबॉलिक एक्टिविटी इसको बहुत कम कर देती हैं जिसके चलते हमारा दिमाग अपने फुल पोटेंशियल से काम नहीं कर पाता इनकी दिमाग की किसी भी काम को करने की क्षमता बहुत कम हो जाती है यह देखिए यह एक हेल्दी प्रिंट और यह एक एडिट का प्रिंट आप देख अधिक कमरे में होने वाली मेटाबॉलिक एक्टिविटीज कितनी कम है एस कंपेयर टो
3:04 हेल्प विद ब्रेन इतनी कम मेटाबॉलिक एक्टिविटीज के साथ ना तो कोई ठीक से कंसंट्रेट कर पाएगा ना ही ठीक से कुछ और नज़र कर पाएगा और ना ही ठीक से कुछ सीख पाएगा देखो हमारे ब्रेस्ट में डोपामाइन नामक हार्मोन है जाता है फूड सेक्शुअल ऐक्टिविटी सोशल इंटरेक्शन है जब हमें कोई अनएक्सपेक्टेड रिपोर्ट मिलता है तो हमारे फ्रेनुलम इंग्लिश होता है और इस डोपामिन के रिलीज होते ही हमें बहुत ही अच्छी फिल्म्स का एहसास होता है इसलिए डिपार्मेंट को प्लैज़र हॉर्मोन भी कहा जाता है दूसरा काम जरूर कमेंट करता है वह यह है कि जिन भी प्लेजरेबल एक्टिविटीज में हम इन्वॉल्व होते हैं उन एक्टिविटीज को दोबारा करने के लिए हमें मोटिवेट करता है इसलिए डोपामिन को डिजायर हारमोनियम मॉलिक्यूल ऑफ मोर भी कहा जाता है अब देखो पोर्न देखते समय कूलिंग इफेक्ट के चलते हमारा दिमाग नॉर्मल से लगभग तीन गुना ज्यादा डोपामिन रिलीज करता है जिसके चलते हमें पौन देखते समय बहुत ही कमाल की फिल्म
3:51 का एहसास होता है और जब हम पैन डेली बेसिस पर देखना शुरू कर देते हैं तब हमारा प्रिंट ओपन इनटॉलेरेंस का शिकार हो जाता है अब देखिए होता क्या है कि जैसे जब कभी हम शुरू करते हैं सबसे पहले दिन हम कमी एक्सर्साइज कर पाते हैं लेकिन एक महीना बाद हमारी एक्सरसाइज करने की टाइमिंग और कैपिसिटी दोनों बढ़ जाती है इसी तरह से अगर आज आपको एक पैग पीने के बाद नशा होता है तो एक साल बाद आपको पांचवें पीने के बाद भी कुछ नहीं होगा ठीक उसी तरह जब हम फोन मूवी देखने के आदी हो जाते हैं तब प्रेम को सेम अच्छी फीलिंग्स को सस्पेंड करने के लिए बहुत अधिक मात्रा में विटामिन इलाज करना पड़ता है इसलिए पोर्न वेबसाइट पर पहुंच की अलग-अलग कैटेगिरी दी जाती है ताकि उन अलग-अलग कैटेगरीज की वीडियो देखकर आपका प्रेम ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में डिलीट कर सके और आपको जल्द से जल्द पॉर्न की लत लग सके और जितनी भी बातें मैंने आपको बताई है यह कोई कपोल कल्पना नहीं है यह सभी बातें साइंटिस्ट में हजारों लोगों
4:37 पर रिसर्च करने के बाद दुनिया को बता हैं नेक्स्ट वीडियो गेम्स एंड सोशल मीडिया एडिक्शन इंटरनेट और वीडियो गेम्स एडिशन पर अब तक हजारों साइंटिफिक रिसर्च हो चुकी हैं कि देख रहे हैं आप यह सभी साइंटिफिक रिसर्च है यह सैकड़ों साइंटिस्ट ने प्रॉपरली रिसर्च करने के बाद अप्लाई किया है आप इतनी सारी रिसर्च इसके बारे में मैं आपको एक सिंगल वीडियो में तो नहीं बता पाऊंगा लेकिन फिर भी कुछ इंपोर्टेंट रिसर्च इसके बारे में मैं आपको अपने की जरूर कोशिश करूंगा जिस नंबर वन मॉन्ट्रियल रिसर्च इस पॉइंट फॉर स्ट्रिंग बींस शूटर गेम्स लॉग ग्रे मैटर इनकी शूटिंग गेम्स जैसे गिफ्ट जी को आफ ड्यूटीज फॉर नाइन एक्स एक्स एक्स फैक्टर आफ ऐसे सभी गेम्स खेलने से हमारे ब्रिटेन के कुछ हिस्से जैसे कि हिप्पोकैंपस में प्रिंसेस यानि कि न्यूरॉन्स कम होने लगते हैं वह जिसके चलते हुए मेंटल डिसऑर्डर यानी कि मानसिक बीमारियों के होने के चांसेस बहुत
5:23 बढ़ जाते हैं इसीलिए सच में अगर आप थोड़ा सा निशा के देखोगे तो इसमें साफ-साफ लिखा है कि बढ़ने घंटे कॉल ऑफ ड्यूटी जैसे गेम्स खेलने के बाद ड्रेन के हिप्पोकैंपस में न्यूरॉन्स कम होने लगते हैं और इस नंबर टू बी कुछ ऐसा ही कहती है अब नॉर्मल ग्रे मैटर वॉल्यूम अन सिंपल सी बेटी इन यंग एडल्ट्स विद इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर 2017 देखो कॉल आफ ड्यूटी अब जैसे Games को बनाते समय सबसे ज्यादा इसी बात पर फोकस किया जाता है कि कैसे इन गेम्स को ज्यादा से ज्यादा डिजिट बनाया जाए इन गेम्स को डिजाइन है इस तरीके से किया जाता है ताकि खेलने वालों का ग्रीन ज्यादा से ज्यादा डोपामिन रिलीज कर सके अपनी खेलते समय क्या होता है अब जो खेल के समय चिकन डिनर पंच सोशल इंटरेक्शन और हिप्स और जैसी एक्टिविटी के चलते हमारे ग्रीन में कंटिन्यूज टो कम इन रिलीज होता रहता है और वह डोपामिन ब्रिटेन के रिमोट सिस्टम को
6:08 जाकर एक्टिवेट करता है और रिपोर्ट सिस्टम से सिग्नल सीधे रिफाइन तेल को टैक्स यानी कि दिमाग के आगे वाले हिस्से में जाते हैं जो कि हमारे कंसंट्रेशन के लिए रिस्पॉन्सिबल होता है तो इसी कंटिन्यूज टो कम इन के चलते पंजी खेलने वाला इंसान बिना रुके पूरे कंसंट्रेशन के साथ घंटो-घंटो तक पहुंचने रहता है अब आप सोच रहे होंगे कि हां तो इसमें प्रॉब्लम क्या है तो इसमें प्रॉब्लम यह है कि इससे आपका ब्रेन डोपामिन डिपेंड बन जाता है आपके स्क्रीन को लंबे समय तक कंसंट्रेट करने के लिए गेम की तरह ही समय-समय पर डोपामिन पोस्ट की जरूरत पड़ेगी और बैंक खुली सिर्फ यही एक चीज आपके कंसंट्रेशन और अटेंशन स्पैन को घटाकर 10 साल के बच्चे से भी कम कर देगी और जिन्हें रिसर्च के बारे में मैं आपको बता रहा हूं उन सभी के लिंक आपको डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगी आप वहां से जाकर उन्हें पढ़ सकते हैं ठीक इसी तरह सोशल मीडिया जैसे कि Facebook Instagram
6:53 में किसी और प्लेटफार्म पर हर एक फोटो वीडियो यह हर एक पोस्ट को स्क्रोल डाउन करते समय हमारे एयरप्लेन मोड ऑफ करें चीज होता है इसीलिए हर 15 से 20 मिनट पर लोगों को फेसबुक चेक करने की इच्छुक होती रहती है और यह जो आप फेसबुक पर लाइक किया WhatsApp पर यह स्टेटस बिंदी देखते हैं यह सभी चीजे ग्रीन के डोपामाइन और अवार्ड सिस्टम पर अपना फर्स्ट डालते हैं अब आप लोग एडिक्शन के बारे में इतना कुछ जान चुके हैं कि मुझे नहीं लगता कि सोशल मीडिया एडिक्शन पर मुझे कोई ज्यादा बताने की जरूरत है बाकी के एडिक्शन की तरह ही सोशल मीडिया की लगी प्रेम के रिमोट सिस्टम को डैमेज करती है टो कनक्लूड अभी एडिक्शंस चाहे वह पोर्न एडिक्शन हो सोशल मीडिया एडिक्शन हो या फिर के मेडिसन इस सभी रियल है वास्तव में इनका मौजूद है और यह सभी एडिक्शंस हमारे ब्रेन के डिपार्मेंट चैप्टर की धज्जियां उड़ाकर ग्रीन को कमजोर बना देते हैं अब स्क्रीन की जो फ्यूज उड़ चुके हैं यानि की प्रिंट में जो डीप मिनी ट्रैक्टर खत्म हो चुके हैं उनको रिकवर
7:40 किया जा सकता है उसकी आपको करना होगा टो कम इन डीटॉक्स डोपामिन फास्ट ऑफ कोर्स जो लोग देख लेते हैं किसी भी तरीके का कोई और सबसे ट्विट करते हैं वह लोग जख्मी डीटॉक्स ना करें और इम्मीडिएटली किसी डॉक्टर से कंसल्ट करें सुनाओ पास करते हैं डोपामिन डीटॉक्स कि डिपो में डीटॉक्स करने के लिए ज्यादा आपको कुछ नहीं करना है बस आपको हफ्ते के किसी एक दिन सोशल मी का प्रयोग रफी गेमिंग ऐसी हर तरह की एक्टिविटी से दूर रहना है ना ही कोई मोबाइल यूज करना है और ना ही कंप्यूटर ना ही उस दिन किसी से ज्यादा बात करनी है और ना ही कुछ तला-भुना खाना है यानि कि पूरे एक दिन आपको किसी साधु की तरह रहना है आप मेरिट कर सकते हैं अपनी नौकरी लिंग को किसी भी पेपर पर लिख सकते हैं वह पर जा सकते हैं कहने का मतलब यह है कि आपको अपने आपको बोर करना है अभी आपके ऊपर डिपेंड करता है कि आप और मैं आपको कितना बोर कर सकते हो ऐसा करने से सबसे पहले तो आपकी
8:26 ब्रिटेन के डोमिनिक सेक्टर रिकवर होने लगेंगे इसके चलते आपका दिमाग धीरे-धीरे स्ट्रांग होने लगेगा सेकंड जब आप पूरा दिन अपनी थॉट्स ओर फीलिंग को अब और करोगे तो इससे धीरे-धीरे आपकी अवेयरनेस पिंक होने लगेगी लेकिन हफ्ते केवल एक दिन डोपामिन डीटॉक्स करने से ब्रेन को बहुत टाइम लगेगा रिपेयर होने में इसलिए मैं तो आपको यही रिक्वेस्ट करूंगा कि सोशल मीडिया तभी यूज करें जब तक बहुत जरूरी न हो और बाकी की सभी चीजें इम्मीडिएटली छोड़ दें खास करके पोर्नोग्राफी कि देखो भैया कोई चीज का नुकसान करती है कोई चीज ज्यादा लेकिन पोर्नोग्राफी एक ऐसी चीज है जो दिमाग को भरपूर मात्रा में नुकसान करती है और दूसरा फायदा जो अपनी डीटॉक्स करने का होगा वह यह कि हमारा दिमाग सब कुछ करना चाहता है लेकिन कभी बोर होना नहीं चाहता इसलिए आप अपने दिमाग को इतना बोल कर दो इतना मोड़कर दो कि आपका दिमाग आपसे हाथ जोड़कर बोले कि भाई चल मेडिटेशन कर लें या बुक ही पढ़ ले यार कुछ
9:13 और काम कर ले लेकिन बोर मत कर देखो जितना आप सोचते हैं उससे कई गुना ज्यादा ताकतवर हमारा यह दिमाग और हमारा दिमाग हमेशा उन्हीं कामों को करना चाहता है जिन कामों को करने से प्रिंस को धोखा मिलता है साइंस के experiment में रेट कि ब्रिटेन में एक मशीन को लगाया गया जिस मशीन के बटन को दबाने से चूहे के डोपामिन रिलीज होता था experiment में रेट और उस बटन के बीच में बिजली के इलेक्ट्रिक पैर रख दिया गया आप बिलीव नहीं करोगे कि रेट उसे इलेक्ट्रिक पेट यानी कि करंट पर चलते हुए बटन को जाकर प्रेस करता था कि उसकी बहन को डोपामिन बूस्ट मिल सके और उसी और बटन को फिर से रिप्लेस किया गया तो रेड ने खाने के लिए उस इलेक्ट्रिक पेड़ पर चढ़कर जाने का रिस्क नहीं लिया टो कनक्लूड हमारा दिमाग डोपामिन के लिए कुछ भी कर सकता है अभी आपके ऊपर डिपेंड करता है कि आप अपने प्रेम को कैसे डोपामिन देते हैं या तो आप पॉर्नोग्राफी सोशल मीडिया यज्ञ तो किसी
9:58 ऐसी एक्टिविटी में एनरोल अपने प्रेम को डोपामिन दे सकते हैं जिससे आपकी विल पावर और आपका दिमाग दोनों ही कमज़ोर होंगे या तो फिर किताबें पढ़कर मेडिटेशन करके बड़े-बड़े सपने खोल सेट करके आप अपने दिमाग को डोपामिन दे सकते हैं जिससे आपकी विल पावर कंसंट्रेशन पावर के साथ-साथ ओवरऑल पूरी लाइफ इंप्रूव होगी आप अपने सेलफिश बिहेवियर से बाहर निकलकर अपने देश और अपने समाज के लिए कुछ करने की सोचने लगे लेकिन यह डिसीजन केवल और केवल आप ही होगा कि आप कौन सा रास्ता चुनते हैं तो दोस्तों इस वीडियो के लिए इतना ही वीडियो अच्छी लगी हो तो लाइक करें सब्सक्राइब करें और इस वीडियो को पेरेंट्स और उन लोगों को जरूर शेयर करें इमेज 25 साल से कम है थैंक यू सो मच फॉर वाचिंग