संक्षिप्त सारांश
यह वीडियो 360आर तकनीक के बारे में है और यह कब विफल हो सकती है। वक्ता बताते हैं कि कैसे तैयारी के दौरान नकारात्मक विचार आ सकते हैं और गिव अप करने का मन कर सकता है, लेकिन इनसे बचना चाहिए। वे बताते हैं कि दुनिया में किसी के पास भी परफेक्ट रिसोर्सेज नहीं होते, लेकिन हमें उपलब्ध रिसोर्सेज के साथ आगे बढ़ना चाहिए। अंत में, वे 360आर करने और दिमाग के जाल में न फंसने की सलाह देते हैं।
मुख्य बातें:
- 360आर तकनीक गिव अप करने की मानसिकता के कारण विफल हो सकती है।
- तैयारी के दौरान नकारात्मक विचार आएंगे, लेकिन उनसे बचना चाहिए।
- दुनिया में किसी के पास भी परफेक्ट रिसोर्सेज नहीं होते, लेकिन हमें उपलब्ध रिसोर्सेज के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
- दिमाग एक कमरा कम दिखाएगा और उसके कारण रोके रखेगा, लेकिन रुकना नहीं है।
वक्ता दर्शकों से पूछते हैं कि क्या उन्होंने 360आर किया है, यह देखने के लिए कि वे उपस्थित हैं या नहीं। वे पूछते हैं कि क्या उन्होंने पिछले 24 घंटों में 360आर किया है। वक्ता बताते हैं कि पहले दिन 1500 बच्चे थे, दूसरे दिन 900, और तीसरे दिन 1100। वक्ता कहते हैं कि शुरुआत के 10 दिनों में ही आधी भीड़ साफ हो जाएगी।
वक्ता बताते हैं कि 360आर कब विफल होता है: गिविंग अप मेंटालिटी। तैयारी के दौरान, दिमाग में कम से कम 200 दिन ऐसे आएंगे जब मक्कारी के कारण एक विचार आएगा कि किसी विशेष स्थिति के कारण आईआईटी नहीं होगा। यह एक स्थायी विचार नहीं है, लेकिन अधिकतम चार दिन इस विचार पर जाने के बाद, पांचवें दिन वापसी करेंगे। लेकिन वे पांच दिन बर्बाद हो जाएंगे और बैकलॉग और बढ़ जाएगा। जिस समय गिव अप करेंगे, उस समय 360आर विफल हो जाएगी।
वक्ता कहते हैं कि कोई भी ऐसी समस्या मौजूद नहीं है जिसका समाधान नहीं है। दुनिया में कोई भी ऐसा इंसान नहीं है जिसके पास परफेक्ट रिसोर्स हैं, लेकिन उस इंपरफेक्ट रिसोर्स के साथ आगे बढ़ना होगा। जब दौड़ना शुरू करेंगे तो नाइकी खुद जूते ले आएगा, लेकिन अगर रुके रहेंगे कि नाइकी जूते लेकर आए फिर दौड़ना शुरू करेंगे तो नाइकी कभी नहीं आएगी और दौड़ भी नहीं पाएंगे। हर किसी का खुशी से फासला बस एक कदम है, हर घर में बस एक कमरा कम है।
वक्ता कहते हैं कि 360आर करने पर 10 दिनों में 30 लेक्चर होंगे, लेकिन दिमाग यह नहीं कहेगा कि 10 दिनों में 30 कर लिए, बल्कि यह कहेगा कि 100 में से 30 हुए, 70 का बैकलॉग बचा है। दिमाग चाहता है कि आराम किया जाए, मेहनत न कराई जाए। बहुत से बच्चे ऐसे होंगे जो चारों दिन से देख रहे होंगे, लेकिन अभी भी एनालिसिस में जुड़े होंगे कि करूं या न करूं। दिमाग क्लेरिटी नहीं देगा, बल्कि यह कह देगा कि हो तो जाएगा, लेकिन तीन लेक्चर कितने घंटे के करने हैं, इस पर जवाब नहीं देगा।
वक्ता बताते हैं कि 60 सवाल कोई भी टीचर ने क्लास में कराए, गिन लिए कि टीचर ने क्लास में 20 सवाल कराए, 10 सवाल कराए, वह गिन लिया। उसके बाद डीपीपी मिला, वह गिन लिया। दिन में 60 सवाल करने हैं, जो भी हो जाए, खुद से करो, टीचर ने करा है, जहां से भी हो जाए, 60 सवाल। जो भी सवाल एक सवाल सॉल्व करा, वह एक काउंट हो गया, चाहे टीचर के लेक्चर में हुआ, डीपीपी में हुआ या प्रैक्टिस शीट में हुआ।
वक्ता कहते हैं कि दिमाग के चाल जाल में मत फंसना। वह एक कमरा कम हमेशा दिखाएगा और उसके कारण रोके रखेगा। ऐसे बच्चों को देखा है जो 2 साल तैयारी करते हैं और एग्जाम से 10 दिन पहले उनके ख्याल आता है कि आईआईटी महत्वपूर्ण भी है। दिमाग की चालाकी देखो कि वह तैयारी शुरू करने से पहले यह सवाल खड़ा नहीं करता, बल्कि तैयारी जब 2 साल करा देता है फिर खड़ा करता है। जब भी गिव अप वाला थॉट आए या रोकने वाला थॉट आए, तो बोलना हट जा ताऊ।
वक्ता कहते हैं कि आज की शिक्षा यह ले जाना कि 360आर हुआ था या नहीं। कोई नई बात जानी तो अभी तक जो मक्कारी करी है उसका गिल्ट तुरंत हट जाएगा कि अच्छा यह नहीं पता था इसलिए नहीं हो रहा था। अगर वह चाहते हैं जो उन्हें अभी तक नहीं मिला है, तो वह करना पड़ेगा जो अभी तक नहीं कर पाए हैं। वरना वही होता रहेगा जो होता आया है अगर वही करते रहे जो करते आए।
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Transcript
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0:00 सबसे पहले बता दीजिए मालिक 360 आर करा या नहीं प्रेजेंट और एब्सेंट कल के बाद 24 घंटे नए मिले थे क्या करा उस 24 घंटे का 3 60 आर कर लिया या नहीं करा नीचे लिखो प्रेजेंट या एब्सेंट पहले वीडियो में 1500 बच्चे दूसरे दिन 900 बच्चे तीसरे दिन 1100 बच्चे चौथे दिन डिक्लाइनिंग स्पीड बड़ी मस्त है और बड़ी एक्सपेक्टेड है। शुरुआत के 10 दिन में ही आधी भीड़ साफ हो जाएगी। वो जो होती है ना कि ऐसे देख रही है। क्या हो रहा है यहां पे? क्या हो रहा है? जरा देखूं मैं भी।
0:46 अच्छा जेसीबी की खुदाई हो रही है। चलिए ठीक है। आता हूं मैं। वही वाली मेंटालिटी से पहले दिन पे आए थे बच्चे। क्या हो रहा है? देखूं ये कौन है? हैं स्नेहित मिश्रा जो यह बातें बता रहा है दूसरे दिन पे। चलो एक दिन करके देखते हैं। तीसरे दिन चौथा दिन आ गया। अभी तो लंबी लड़ाई है। पता नहीं 300 दिन तुम में से कौन टिकेगा। 300 जो दिन टिक जाएगा आईआईटीएस जाएगा। पेपर पे लिखो अभी सिंपल सी बात पे। एक एक्सेप्शन है जब 360 आर फेल करता है। कब? वो तुम्हारे दिमाग में बात डाल डालनी बहुत जरूरी है। क्योंकि जब वो सिचुएशन आएगा तुम टैकल कर लोगे कि मैं इस सिचुएशन में हूं। भाई साहब यहां पे स्नेह भैया ने
1:32 बोला था कि 360 आर फेल करेगा। वो है गिविंग अप मेंटालिटी। आपके दिमाग में तैयारी के दौरान 300 दिनों में कम से कम 200 दिन आएगा। जब आपका दिमाग मक्कारी के कारण एक थॉट देगा कि यार तेरे साथ ना यह सिचुएशन है इस वजह से तेरा आईआईटी नहीं होगा। ये परमानेंट थॉट नहीं होता। मेरा बैकलग है। थोड़ी कवर अप कर पाऊंगा। जो पहले से बच्चे तैयारी कर रहे हैं उनसे आगे थोड़ी जा पाऊंगा। ये दिमाग रखेगा तुम्हारे सामने। तुम मैक्स टू मैक्स चार दिन इस थॉट पर जाओगे। पांचव दिन तुम कमबैक
2:17 करोगे। लेकिन वो पांच दिन बर्बाद हुए ना वो पांच 3 15 लेक्चर का बैकलग और बढ़ा गया। गिविंग अप मेंटालिटी जिस टाइम तुम गिव अप करोगे उस टाइम 360 आर फेल हो जाएगी। क्योंकि मेरी तरफ से ताकत लगाने से थोड़े ही सिलेक्शन होगा जब तक तुम हाथ नहीं बढ़ाओगे। तुम हाथ बढ़ाए रखोगे। सिलेक्शन तो मैं करा रहा हूं। मेरी एक लाइन याद रखना जिस दिन तुम गिव अप करोगे उस दिन से कोई बच्चा तैयारी शुरू करेगा और सिलेक्ट होगा। तो जब भी तुम्हारे माइंड में आए कि एक कदम पीछे लेता हूं मेरी ये बात अपने दिमाग में डालना कि अभी से कोई बच्चा एक कदम आगे लेगा और वो मेरे से आगे भाग जाएगा।
3:03 तुम्हारा जो गिव अप करने का थॉट है वो ज्यादा दिन नहीं टिकेगा। डोंट वरी। मैं कहता हूं बच्चे से कोई प्रॉब्लम ले आता है बहुत रोने वाला कि भैया मेरा नहीं होगा। पांच पन्ने का डीएम करेगा। मैं कहता हूं गिव अप कर दो। पांच दिन बाद फिर वो आता है भैया मैं करूंगा। पांच दिन तुमने क्यों फेंक दिए लाडले? मालिक पांच दिन बहुत कीमती है। एक बात याद रखना कि कोई भी ऐसी प्रॉब्लम एक्सिस्ट नहीं करती जिसका सॉल्यूशन नहीं है। कोई भी दुनिया की कोई भी जिसका सॉल्यूशन नहीं है वो हमें नहीं पता। अभी पता पड़ जाएगा। हम आगे बढ़ जाएंगे। लेकिन वह उपनिषद की लाइन चरवेती चरवेति
3:50 हमें चलते जाना है। यह याद रखना किसी के पास भी परफेक्ट रिसोर्सेज नहीं है। सिर्फ तुम्हारे पास नहीं मेरे पास भी। दुनिया में कोई भी इंसान है जिसके पास परफेक्ट रिसोर्स नहीं है। लेकिन उस इंपपरफेक्ट रिसोर्स के साथ आगे बढ़ना होगा। जब दौड़ना स्टार्ट करोगे नाइकी खुद जूते ले आएगा ले आइए पहन के दौड़ लेकिन तुम रुके रहोगे कि नाइकी लेके आए जूते फिर मैं दौड़ना स्टार्ट करूंगा नाइकी आएगी ना तुम दौड़ पाओगे कभी हर किसी का खुशी से फासला बस एक कदम है हर घर में बस एक कमरा कम है वो एक कमरा कम तुम्हारे पास हमेशा रहेगा लेकिन तुम्हारा मन जो है वो ये तुम्हें
4:38 नहीं कहेगा कि तुम्हारे पास इतने कमरे हैं इसके साथ आगे बढ़ते हैं ना लाडले वो एक कमरा कम तुम्हारा दिमाग फेंकेगा तुम्हारे सामने और बोलेगा इस कम कमरे की वजह से रुक जा। रुकना नहीं। 360 आर करोगे 10 दिन में 30 लेक्चर होंगे। दिमाग ये नहीं कहेगा कि 10 दिन में तूने 30 कर लिया लाडले। दिमाग ये कहेगा कि 100 में से 30 हुए। 70 का बैकलग बचा है। वो 70 भी 70 दिन में सॉल्व हो जाएगा। लेकिन यह जो है ना यह चाहता ही नहीं। कि तुम्हें मेहनत कराई जाए। यह चाहता है आराम। तुम में से भी बहुत बच्चे होंगे जो चारों दिन से मुझे देख रहे होंगे लेकिन अभी भी एनालिसिस में जुड़े होंगे कि करूं ना करूं। होगा नहीं होगा। मन ने कह दिया होगा
5:27 करते हैं। दिमाग क्लेरिटी थोड़ी देगा। दिमाग ये कह देगा हो तो जाएगा। लेकिन तीन लेक्चर कितने वाले करने हैं? स्नेहित भैया ने इस पे तो जवाब ही नहीं दिया कि तीन लेक्चर एक-ए घंटे के दो-द घंटे के कितने? चलो जब स्नेहित भैया इस बात का जवाब देंगे ना तब शुरू करूंगा। चाचा आप सवाल इसलिए नहीं पूछ रहे आप नहीं पूछ रहे। दिमाग दिमाग से मैं बात कर रहा हूं। दिमाग तू सवाल इसलिए नहीं पूछ रहा है कि तुझे क्लेरिटी चाहिए और आगे भागेगा तैयारी में बहुत अच्छे से। नहीं तू सवाल इसलिए खड़ा कर रहा है क्योंकि सवाल एक बार खड़ा हो जाता है उसके बाद जवाब जब तक ना मिले तुझे आराम मिलता है। भैया आपने 60 सवाल कहा है। 60 सवाल मैं कौन से गिनू लेक्चर में जो टीचर सवाल करा रहा है वो भी डीपीपी
6:13 में जो मिल रहा है वो भी या उसके बाद अलग से एक सवाल खड़ा हो गया। स्नेह भैया जवाब दे रहे हैं इस पे। नहीं दिया। पहले दिन नहीं दिया, दूसरे दिन नहीं दिया, तीसरे दिन नहीं दिया, चौथे दिन नहीं दिया। अब जवाब ही नहीं दे रहे भैया। तो मैं कैसे आगे बढ़ जाऊं? जब तक इसका पता नहीं पड़ेगा। चलो मैं जवाब दे देता हूं। 60 सवाल कोई भी टीचर ने क्लास में कराए गिन लिए कि टीचर ने क्लास में 20 सवाल कराए 10 सवाल कराए वो गिन लिया। उसके बाद डीपीपी मिला वो गिन लिया। तुमने दिन में तुम्हें 60 सवाल करने हैं। जो भी हो जाए खुद से करो। टीचर ने करा है। जहां से भी हो जाए 60 सवाल। जो भी सवाल एक सवाल तुमने सॉल्व करा वो एक काउंट हो गया। चाहे टीचर के लेक्चर में हुआ, डीपीपी में हुआ या प्रैक्टिस शीट में हुआ। मिल गया जवाब। आगे बढ़ोगे? नहीं दिमाग लेकिन खड़ा करेगा।
6:59 क्या लाडले दिमाग के चाल जाल में मत फंसना। वो एक कमरा कम हमेशा दिखाएगा दिमाग और उसके कारण रोके रखेगा तुम्हें। मैंने तो ऐसेसे बच्चों को देखा है कि 2 साल तैयारी करते हैं। एग्जाम से 10 दिन पहले उनके ख्याल आता है। आईआईटी इंपॉर्टेंट भी है। दिमाग की चालाकी देखो कि वो तैयारी शुरू करने से पहले नहीं ये सवाल खड़ा करता है। तैयारी जब 2 साल करा देता है फिर खड़ा करता है। इसको ना संभाल के रखना। जब भी गिव अप वाला थॉट आए या रोकने वाला थॉट आए बोलना हट जा ताऊ। मुझे पता है तू क्यों आ रहा है। हम क्लेरिटी की तरफ बढ़ेंगे। लेकिन यह
7:46 एक्सपेक्ट नहीं करेंगे कि एक्सट्रीम क्लेरिटी आ जाएगी जब हमें सब कुछ पता होगा और हम सिलेक्ट हो जाएंगे। एक्सट्रीम क्लेरिटी किसी को नहीं। मुझे है? मुझे है क्लेरिटी एक्सट्रीम। किसी को नहीं होती। मैं चाहूं तो अभी 10 सवाल खुद पे खड़े कर लूं। अभी नहीं बढ़ना। ये दिमाग में डालना। अपनी 360 आर कॉपी में यह बात चौथे दिन पर लिखना कि एक कमरा कम दिखेगा। वो एक कमरा कम है नहीं। इसका जाल है कि चार ऑलरेडी कमरे हैं ना उस पे ध्यान ना दिला करके एक कमरा कम वो देख। बाकियों के पास देख कितने कमरे। वो
8:34 रुकेगा। वो पांचवे कमरे पे रुक जाएगा। तुम छठे सातवें कमरे पे पहुंचोगे। यही तो लड़ाई है। फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथमेटिक्स कितना सरल है। आराम से पूरा हो जाए। ये भेजा कंट्रोल में आ जाए तो ये भेजा सोने नहीं देता रात में। जैसे ही बेड पे जाओगे ना एक थॉट फेंकेगा। उसमें 1 घंटे जाएंगे। सोचते जाओगे, सोचते जाओगे। कंक्लूजन आएगा ही नहीं। सोच लोगे पूरा 2 घंटे और सोच करके खुद में ही कंक्लूजन बना लोगे कि अच्छा नहीं होगा मुझसे। कंट्रोल करना। ठीक है? आज की शिक्षा यह ले जाना। और आज की शिक्षा ले जाने से पहले सवाल पूछना 360R हुआ था या नहीं? क्योंकि ये भी बड़ा जाल है अच्छी चीजों का।
9:21 कोई नई बात जानी ना तो अभी तक जो मक्कारी करी है उसका गिल्ट तुरंत हट जाएगा कि अच्छा ये नहीं पता था ना इसलिए नहीं हो रहा था। कल से देखो कैसे बदलता हूं जीवन। कुछ नहीं बदलोगे। औकात लगती है बदलने में। तुम वह चाहते हो जो तुम्हें अभी तक नहीं मिला है तो वह करना पड़ेगा जो अभी तक नहीं कर पाए हो। वरना वही होता रहेगा जो होता आया है अगर वही करते रहे जो करते आए। कल सुबह 6:00 बजे उठ जाना। 10:00 बजे 9:30 मिलूंगा कल फिर से एक नई बात के साथ दिमाग में एक-एक करके ये सारी बातें पाइल अप होने देना। स्लो चल रहे हैं। सबसे पहले पहुंचेंगे। गुड नाइट।