0:04 हां अरविंद यस सर स्टॉप कीजिए ओके सर तो गुड आफ्टरनून एवरीवन सर सर दो मिनट दीजिए एक बार सर अच्छा हां इतने और लोग भी जुड़ जाते हैं दो दो ही मिनट की बात है सर अच्छा दो मिनट बचा है चार ठीक है ठीक है और
0:59 इस हेलो नमस्कार सर
2:49 सर रोहित रोहित जी को पिन अप कर दीजिए एक बार आप हां रेनू मैडम आ गई है। अभी स्टार्ट करें। हां सर रोहित जी को पिन अप कर दो। हां शेयर कर दिया। अच्छा रोहित जी है। एक मिनट वेरी गुड। ऐसा होता है ना? आप लोग मेरे हाथ पैर हो भाई। चलिए अरविंद यस सर मे आई स्टार्ट यस यस यस यस ओके सर सो गुड आफ्टरनून एवरीवन मायसेल्फ डॉक्टर अरविंद गड एंड फर्स्ट ऑफ ऑल आई विल
3:35 थैंक पांडे सर फॉर गिविंग मी दिस अपोरर्चुनिटी थैंक यू सर एंड नाउ वी ऑल वेलकम रिसोर्स पर्सन ऑफ दिस सेशन डॉक्टर रेनू पाठक मैम एंड डॉक्टर रेनू पाठक मैम इज करेंटली सर्विंग एज अ गेस्ट फैकल्टी इन माइक्रोबायोलॉजी इन द डिपार्टमेंट ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेस रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी जबलपुर शी होल्ड्स ए पीएचडी इन माइक्रोबायोलॉजी ऑन टाइटल स्टडीज ऑन एलगल डायवर्सिटी इन रिवर नर्मदा इन मध्य प्रदेश इन 2013 एंड हैज़ स्पेशलाइज्ड इन इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलॉजी ड्यूरिंग हर पोस्ट ग्रेजुएट स्टडीज ही हैज़ ओवर टू डिकेड्स ऑफ ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च
4:21 एक्सपीरियंस हैविंग वर्क्ड एट रेपुटेड इंस्टीटश सच एज हितकारिणी महिला कॉलेज एंड हितकारिणी डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल जबलपुर डॉक्टर पाठक हैज़ सक्सेसफुली कंप्लीटेड टू यूजीसी फंडेड माइनर रिसर्च प्रोजेक्ट्स एज प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर एंड कंट्रीब्यूटेड एज को इन्वेस्टिगेटर इन अनदर प्रोजेक्ट्स हर स्पोलरली कंट्रीब्यूशन इंक्लूड ओवर 10 रिसर्च रिसर्च आर्टिकल्स, बुक चैप्टर्स एंड सेमिनार पेपर्स इन रेपुटेड जर्नल्स एंड प्रोसीडिंग। हर रिसर्च एरियाज फोकस ऑन एलगल बायोडायवर्सिटी, माइक्रोबायोलॉजी, एनवायरमेंटल बायोटेक्नोलॉजी एंड वेस्ट मैनेजमेंट। इन एडिशन टू हर एकेडमिक एंड
5:09 रिसर्च अचीवमेंट्स डॉक्टर पाठक हैज हेल्ड सिग्निफिकेंट एडमिनिस्ट्रेटिव रोल्स एज अ मेंबर ऑफ बोर्ड ऑफ स्टडीज गवर्निंग बॉडीज एंड वेरियस एकेडमिक कमिटीज शी हैज़ आल्सो कोऑर्डिनेटेड यूजीसी ऐड ऑन कोर्सेज एंड एक्टिवली पार्टिसिपेटेड इन सेमिनार वर्कशॉप्स एंड कॉन्फ्रेंसेस एट स्टेट नेशनल एंड इंटरनेशनल लेवल। सो वी ऑल वेलकम यू मैम नाउ इट्स ओवर टू यू डॉक्टर रेनू पाठक मैम प्लीज नमस्कार और धन्यवाद डॉक्टर अरविंद बर जी फॉर माय सो ग्रैंड वेलकम एंड आई डू नमस्कार टू एवरीवन हु हैस जॉइ हियर
5:57 टुडे टू लिसन टू मी नमस्ते मैम नमस्कार मैडम हेलो सुनीता जी नमस्कार मैम रोहित विष्णु जी भी नमस्कार और आई डोंट नो दैट यू ऑल आर फ्रॉम माइक्रोबायोलॉजी ऑफ दिस सब्जेक्ट सो नमस्कार मैम आई एम फ्रॉम बॉटनी मैम बॉटनी हां सो उसी का सिस्टर ब्रांच है माइक्रो यस मैम मैडम पे है मैम बॉटनी अजय जी आपको भी नमस्कार नमस्कार मैडम बॉटनी से हूं मैडम मैं भी आई एम स्टॉपिंग माय वीडियो नाउ है ना सो देन बट दैट आई कैन फोकस ऑन माय स्लाइड्स
6:43 राइट अभी जो टाइटल शेयर किया हुआ है आपको दिख रहा होगा इट इज़ रिटन माइक्रोब्स इनविज़िबल आर्किटेक्ट्स ऑफ़ सस्टेनेबिलिटी इनोवेशंस फॉर एनवायरमेंटल सस्टेनेबल डेवलपमेंट अह सीम्स टू बी इट लुक्स लाइक लिटिल बिट कॉम्प्लेक्स टाइटल इज़ अह लुक्स अह लुक लाइक अ लिटिल बिट कॉम्प्लेक्स बट बिलीव में इट इज एज सिंपल एज द माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स आर सिंस माय मेन सब्जेक्ट माय फोकस एरिया इज़ ऑन माइक्रोबोलॉजी और माइक्रोब्स इज़ आर माय फेवरेट टॉपिक एंड इट वाज़ रिलेटेड टू दी सस्टेनेबल डेवलपमेंट सो दैट आई हैड टू बिफोर प्रिपेयरिंग ऑन दिस लेक्चर आई हैड गॉन थ्रू ऑल द एसडीजी 17 दैट यूएन हैज़ प्रिपयर्ड सो आई हैड एंड आई
7:30 लिंक्ड आई ट्राइड टू लिंक एव्री दैट 17 टॉपिक वि दी माइक्रोब्स। हाउ माइक्रोब्स आर रिलेटेड टू दी सस्टेनेबल डेवलपमेंट। सो एक्चुअली माय टॉक इज अबाउट हाउ माइक्रोब्स दो दे आर इनविज़िबल। इनविज़िबल मींस दे कैन नॉट बी सीन थ्रू नेकेड अलीस दे ऑल प्ले एन इंपॉर्टेंट रोल इन आवर लाइफ्स। एंड लाइक एंड हाउ थ्रू इनोवेशंस वी कैन यूटिलाइज देम टू एन एक्सटेंट। एंड व्हाई सस्टेनेबिलिटी? व्हाई सस्टेनेबिलिटी एक्चुअली इट इज अ मैसेज फॉर एवरीवन ऑफ अस दैट वी शुड टेक फ्रॉम नेचर ओनली व्हाट वी नीड ओनली व्हाट वी नीड सो दैट वी कैन लीव
8:15 द रेस्ट फॉर द कमिंग जनरेशन ऑफ़ द फ्यूचर। ये तो बहुत सारे लेक्चर्स में पहले इस बात का जिक्र हुआ होगा। एंड और एक जो कल्चर रूटेड है बिकॉज़ नाउ डेज इट इज गवर्नमेंट इज आस्किंग टू रिलेट एवरीथिंग टू दी भारतीय परंपरा एंड ज्ञान। सो आई वेंट टू देयर आल्सो एंड आई फाउंड दैट सो मेनी सपोर्टिंग कल्चरल रूट्स आर देयर। इट इज़ गिवेन इन द स्लाइड लाइक ऋग्वेद, उपनिषद। और उनका सभी का कहना है लाइक दैट अर्थ इज़ आवर मदर एंड वी आर हर चिल्ड्रन। सो वी हैव टू टेक केयर ऑफ़ आवर मदर लाइक चिल्ड्रंस ग्रुप। एंड वन कांसेप्ट ऑफ उपनिषद दैट इज वासुदेव कुटुंबकम। द एंटायर वर्ड इज वन फैमिली नो डाउट। सो इट इज़ आवर ड्यूटी टू
9:02 टेक द कलेक्टिव केयर ऑफ़ एवरीथिंग। एव्री नेचुरल रिसोर्सेज व्हिच इज़ बीन गिफ्टेड टू अस वी शुड टेक केयर ऑफ़ एवरीथिंग। बट एंड वन मोर बट वन मोर मंत्र इस देयर लाइक सर्वे भवंतु सुखिन सर्वे संतु निराम्या। इफ वी विल टेक केयर ऑफ़ एवरीथिंग इन अ प्रॉपर मैनर दैट इज़ वी विल मिनिमाइज द वेस्ट। एंड अनकन्वेंशनल यूज ऑफ द नेचुरल रिसोर्सेज देन डेफिनेटली वी विल फॉलो दैट सेम मंत्र बट अकॉर्डिंग टू मी दैट सर्वे भवंतु सुखिना एंड सर्वे भवंतु निरामया इन उपनिषद वासुदेव कुटुंबकम इट कैन नॉट बी फुलफिल्ड अंटिल अनलेस वी आर टेकिंग केयर ऑफ़ आवर वन मोर फैमिली मेंबर दो बिकॉज़ दे आर इन द अनसीन वर्ल्ड वी आर नॉट एबल टू सी देम बट दे आर दी माइक्रोब्स और द लिटिल
9:49 क्रिएचर व्हिच इस आल्सो अ पार्ट ऑफ आवर फैमिली एंड सेल्फलेसली सेल्फलेसली दे आर डूइंग अ लॉट मेनी थिंग्स फॉर अस नॉट फॉर अस बट फॉर दिस होल प्लनेट नॉट ओनली फॉर प्लनेट इवन द स्पेस दे आर डूइंग देयर वर्क सेल्फलेसली विदाउट इन विदाउट कोई भी काउंटिंग नहीं है अभी बहुत लोगों को जिनको माइक्रोबोलॉजी का नहीं भी पता हुआ होगा तो कोविड के टाइम पे एक पिक्चर क्रिएट हुआ लाइक ओो दे आर कॉजिंग पेंडेमिक दे आर नॉट गुड बट बिलीव मेड अ आफ्टर अ लॉन्ग एक्सपीरियंस व्हाट आई पर्सव्ड दैट वेरी लिटिल बिट ऑफ़ माइक्रोब्स आर हार्मफुल टू अस बट मोस्ट ऑफ़ देम आर बेनिफिशियल इफ वी विल यूटिलाइज देम इन अ
10:35 प्रॉपर वे। सो सस्टेनेबिलिटी अह नेक्स्ट स्लाइड प्लीज देन अ सस्टेनेबिलिटी एक्चुअली वी आर डूइंग दिस सस्टेनेबिलिटी थ्रू माइक्रो ऑर्गेनिज्म। सो व्हाट आर माइक्रो ऑर्गेनिज्म ऑब्वियसली यू ऑल मस्ट बी नोइंग एंड वी ऑल नो कि फर्स्ट जो क्रेशर आया था जो फर्स्ट आया था जब ये अर्थ फॉर्म हो रहा था तो दैट टाइम पे द प्रोकैरियोट सो द आर्की बैक्टीरिया वाज़ देयर बट द फर्स्ट वन वाज़ द साइनोबक्टीरिया व्हिच इवॉल्व ऑन दिस अर्थ एंड मोस्ट ऑफ़ द एक्सट्रीमोफाइल्स दे केम बिकॉज़ दैट टाइम मिथेन आयरनारूबिक कंडीशन वाज़ देयर हाई टेंपरेचर वाज़ देयर। सो जस्ट थिंक ऑफ इट कि उतना एक्सट्रीम कंडीशन पे भी उतना जो कि कुछ भी फेवरेबल नहीं था अर्थ फॉर्मेशन के समय पे लेटर ऑन
11:20 वो धीरे-धीरे हम अभी जहां पे रह रहे हैं इट इज़ बहुत बढ़िया जगह पे है। पर वो माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स वो उस टाइम पे भी वहां पे सर्वाइव करते थे। एंड दे वर डूइंग देयर ड्यूटी क्योंकि जो भी हार्मफुल जो भी गैसेस रिलीज़ होता था टेंपरेचर सब में उनका पार्ट था। दैट विल कम टू नो लेटर बट दैट टाइम आल्सो सो दो दे आर द ओल्डेस्ट फॉर्म प्रोफेशन बट दे कैन बी हाइली टेलर्ड उन्होंने ये भी कैपेसिटी दिया हुआ है कि आप उनको जैसा चाहे वैसा यूज़ कर सकते हैं। दे आर वेरी एडप्टेबल एंड दे कैन बी टेलर्ड और इनफैक्ट वी कैन से दैट दे आर दी नेचर इंजीनियर्स। वो नेचर के इंजीनियर्स हैं। देयर फॉर दे आर यूज्ड एज अ प्रॉब्लम सॉल्वर्स ऑफ टुडेस प्रॉब्लम। जो भी एनवायरमेंट से जो भी चैलेंजेस आ रहे हैं
12:06 और इनके डेवलपमेंट की जहां भी बात हो रही है वहां पे प्रॉब्लम सॉल्ववर के बीच में रूप में ये बहुत फिट बैठते हैं। नेक्स्ट नेक्स्ट स्लाइड द आर्शियन कोरल फॉर सॉलशंस। एस वी कैन सी इन द पिक्चर इट इज गिवन। पहला जो पार्ट है वो मरीन एक्वेटिक बॉडी को रिप्रेजेंट कर रहा है। बहुत कॉमन है। हर जगह बात हो रही है प्लास्टिक मुक्त वातावरण की। सो मेनी प्लास्टिक बॉटल्स आर देयर सो मेनी डम्स एंड वेस्टेज ऑल आर सबने वहां पर डिस्पोज करके रखा हुआ है। सेकंड जितना अबनाइजेशन बढ़ रहा है उतना ही ज्यादा पोल्यूशन बढ़ रहा है उतना ही ज्यादा चिमनीस उतना ही प्रेडिक्शन उतना ही स्मोक उतना ही स्मोक जो कि हम एयर को दे रहे हैं। सो वी आर पोलटिंग दी एक्वेटिक
12:52 बॉडी एज वेल वी आर पोल्यूटिंग दी अह एयर आल्सो होल एनवायरमेंट एंड थर्ड नॉट ओनली दिस वी हैव टू टू सस्टेन नॉट ओनली की वी हैव टू मिनिमाइज दी आर मैक्सिमाइज दी अह यूटिलाइजेशन बट नॉट ऑफ द नेचुरल रिसोर्सेज। अभी अल्टरनेटिव बात हो रही है। यहां पे देखिए जंगल काटे जा रहे हैं। जंगल काटे जा रहे हैं। सोइल का एसिडिक फॉर्म हो रहा है। सो इन वे आवर प्लनेट नाउ डेज इट इज फेसिंग वेरी डीप एनवायरमेंटल चेंजेस इन द फॉर्म ऑफ रैंप पोलशन ऑफ ऑफकोर्स दिस पोलशन इज़ लीडिंग टू दी क्लाइमेट मेट इरीगेशन आल्सो एंड द रिसोर्स डिप्लेशन सो वी नीड टू हैव फोकस ऑन दिस एरिया कि हाउ कैन वी मिनिमाइज
13:38 द पोल्यूशन हाउ कैन वी मिनिमाइज दी क्लाइमेट चेंजेस दैट इज़ अनएक्सेक्टेड अभी-अभी इतना सारा अपन न्यूज़ में देख रहे हैं हर जगह देख रहे हैं लैंडस्लाइड हो रहा है ये हो रहा है ये पहले भी होता था पर उनका का अब जो बढ़ गया है अब उनका जो नंबर है और रिसोर्स का भी डिप्लीशन हो रहा है क्योंकि ऑर्बनाइजेशन और बिल्डिंग का और ये सब पूरा किसी को भी देते जा रहे हैं तो वो बहुत सारा सिर्फ बिल्डिंग्स बिल्डिंग्स हो रही है इवन वो फॉरेस्ट को और जो लैंड वाला एरिया है वो सब बढ़ता जा रहा है। सो दीज़ ऑल क्राइसिस इट नॉट ओनली डिमांड द इंक्रीमेंटल इंप्रूवमेंट्स बट ट्रांसफ़ेटिव सस्टेमनेबल इनोवेशन कि जो अगर हमारे पास वेस्ट है इट इज़ नॉट ओनली दैट कि वी हैव टू डिस्पोज द वेस्ट और डीकंपोज द वेस्ट और डिग्रेड द वेस्ट इन अ पर्टिकुलर डायरेक्शन बट नाउ इट इज अ टाइम टू रिक्वायर टू
14:25 रिसाइकल द वेस्ट। उसको हमको ट्रांसफॉर्म करना है। जो चीज खराब है उसको हमको अच्छा बनाना है। यह शायद अपना इंडिया का भी यही कांसेप्ट डेवलप हो रहा है कि आप जो भी आपका वेस्ट है बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट वी हैव टू क्रिएट एंड उस कांसेप्ट में माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स दे प्रूव टू बी अ पावरफुल नेचर इंस्पायर्ड पाथवे टू एड्रेस दी प्लेसिंग इशज़। और लाइक कुछ एक एग्जांपल्स है अभी इनहीं पर याद आता है कि कुछ सिटीज है आई हैव नॉट गिवेन इन द स्लाइड बिकॉज़ आई आई वास नॉट हैविंग द एक्चुअल डेटा ऑफ़ टुडेज़ रिकॉर्ड पर बहुत कॉमन है वी ऑल नो अबाउट द डेली एनसीआर दैट इज़ दे आर फेसिंग द सीवियर एयर पोल्यूशन सिमिलरली चेन्नई वी ऑल नो द वाटर शॉर्टेज दे हैव टू बाय फ्रॉम
15:11 द मार्केट एंड मुंबई मुंबई इज़ आल्सो फेसिंग द कोस्टल फ्लडिंग सी लेवल इज़ राइजिंग वी ऑल केम टू नो सी लेवल इज़ राइजिंग एट द मैनेजमेंट और वेस्ट मैनेजमेंट बिकॉज़ ऑफ़ द हाई पपुलेशन ब्रेक दे हैव टू फोकस वर्किंग अ लॉट ऑन द वेस्ट मैनेजमेंट एंड पंजाब आल्सो अभी एक फ्लड आया उससे तो सोइल डिग्रेडेशन भी हो रहा है बहुत ज्यादा उधर पे एंड उत्तराखंड उत्तराखंड का भी अभी-अभी करंट में अपने को एग्जांपल्स मिलेंगे कि वहां पे भी लैंडस्लाइड हो रहा है, ग्लेशियर्स हैं, फ्लर्ट्स हैं। सो दीज़ आर दी अर्जिन कॉल्स फॉर व्हिच वी नीड टू सॉलशंस देन नेक्स्ट
15:56 स्लाइड नेक्स्ट करिएगा अंडरस्टैंडिंग माइक्रोब्स। अब इतना सब जब प्रॉब्लम आया अपने पास में तो देन वी विल हैव टू थिंक इन द फॉर्म हाउ टू सॉल्व ऑल दीज़ प्रॉब्लम्स। एंड इट वास फाउंड थ्रू वेरियस रिसर्च एंड न डेज एव्री कंट्री मोस्ट ऑफ द इंडस्ट्रीज दे ऑल आर यूटिलाइजिंग माइक्रोब्स माइक्रोब्स इफ यू आर टॉकिंग अबाउट द माइक्रोब्स माइक्रोब इज अ ग्रुप ऑफ माइक्रो ऑर्गेनिज्म सेक्सुअली व्हिच इंक्लूड्स द बैक्टीरिया फंजाई एल्ग वायरसेस एक्टिनोबायोसिटिस एंड इन बिटवीन माइकोप्लाज्मा सो मेनी ग्रुप ऑफ ऑर्गेनिज्म्स दैट कैन नॉट बी सीन थ्रू नेकेड आइस ऑल कम्स अंडर द माइक्रो माइक्रोब्स एंड दे आर दी अर्थ ओरिजिनल
16:41 रिसाइकलर्स एंड इंजीनियर्स बिकॉज़ दे द मोस्टेंट थिंग दे डू फॉर आवर एनवायरमेंट दैट दे ड्राइव दी बायोजियोकेमिकल साइकिल ओनली वी नो दैट अर्थ इज़ वी आर ऑल लिविंग इन अ इकोसिस्टम एंड द की फैक्टर ऑफ़ दैट इकोसिस्टम इज़ एक्चुअली दी माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स एंड दे ड्राइव एसेंशियल बाय बायोकेमिकल साइकिल्स एंड ऑब्वियसली जो बायोकेमिकल साइकिल्स स्कूल टाइम से अपन पढ़ते आते हैं। सो मेनी कार्बन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, सल्फर, फास्फोरस ऐसा बहुत सारा साइकिल होता है। और ये सब अपना-अपना रोल प्ले करते हैं। पर ये रोल जो प्ले करते हैं वो विदाउट माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स नहीं प्ले कर
17:28 सकते। बिकॉज़ माइक्रोबियल एंजाइम्स आर ट्रांसफॉर्मिंग वन सब्सस्ट्रेट टू द प्रोडक्ट, नेक्स्ट लेवल सबस्ट्रेट, थर्ड लेवल सबस्ट्रेट। और जो भी कॉम्बि लाइक नाइट्रोजन में नाइट्रोजन का जो अमोनिया में यूटिलाइजेशन हो रहा है या डिनाइट्रिफिकेशन उसको वापस कन्वर्ट कर रहा है नाइट्रेट तो ये सब जितनी भी साइकिल्स होती हैं ये सब कैरी होती है इट इज ऑल मीडिएटेड टू अटेंटिव दे नो कि ओके आई गॉट द सब्सस्ट्रेट एंड आई हैव टू कन्वर्ट इट कोई भी एक पॉलिटिन या टॉक्सिक सब्सटेंस है माइक्रो ऑर्गेनिज्म का ड्यूटी है वो उसको को पहचानेंगे और वो उस पॉलिटन को डिग्रेड करेंगे या टॉक्सिक सब्सटेंस को डिग्रेड करेंगे। सो दैट इट कैन बी नॉन हार्मफुल नॉन हार्मफुल या फिर उसको नॉन टॉक्सिक
18:14 फॉर्म पे कन्वर्ट करते हैं। और सेम अगर बायोजियोकेमिकल साइकिल नहीं होगा तो वी कांट इमेजिन ऑफ एनी लाइफ। कोई लाइफ ही पॉसिबल नहीं है। और क्यों इनको यूज़ किया जाता है? दैट इज दे आर युबिक्वशस एंड डवोर्स। युबिक्वेशस में तो ये हमको भी पता है कि इवन वी आर दी वी आर मे बी ईच एंड ए्री ह्यूमन बीइंग इज कैरी ऑलमोस्ट मिलियन ऑफ माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स ऑल द टाइम थ्रूउ द बॉडी सरफेस इनसाइड द ग वो पूरा हमारी बॉडी को भी वही तो चला रहे है वही मैनेज कर रहे हैं नहीं होते वो अगर नहीं होते तो अभी आज की डेट में हर दिन कुछ ना कुछ कुछ ना कुछ प्रॉब्लम सबको होता रहता तो हमारे जितने हेल्थ इश्यूज है अभी देखिए एंटीबायोटिक आप लोग लेने जाते हैं डॉक्टर्स कहते हैं नो नो नो स्टॉप दिस ये डोस कंप्लीट किया अगर बहुत एंटीबायोटिक लेंगे तो अभी कोविड के टाइम से हमको पता
19:01 चला प्रोबायोटिक होते हैं। ग हेल्थ इजेंट और ग हेल्थ का तो मेन हमारा इट ऑल डिपेंड्स ऑन द टाइप ऑफ दी बैक्टीरिया वो मेंटेन कर रहे हैं। हमारा एसिडिटी से लेके एवरीथिंग रिलेटेड टू आवर डाइजेस्टिव सिस्टम एंड ऑल द बॉडी सिस्टम। कहीं ना कहीं वो साइलेंटली वो अपना रोल प्ले कर रहे हैं। और नॉट ओनली फ्रॉम द ह्यूमन बीइंग फ्रॉम द डेप्थ ऑफ़ द ओशन अप टू दी स्पेस। अब तो स्पेस में भी माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स के थ्रू ही एक्सप्लोरेशन हो रहा है। वेदर लाइफ इज़ पॉसिबल और नॉट ऑफ़ दैट। तो ये हर जगह मिलेंगे। ऐसा कोई जगह नहीं होगा जहां पर ये नहीं होंगे। एक्सट्रीमोफाइल है तो इनके पास अप्टेशन का क्वालिटी है। ये रैपिड एडबिटबिलिटी होता है। जैसा होता है। ये अपने आप को म्यूटेट कर लेते हैं। अपना छोटा स्ट्रक्चर होता है। अपने जींस को चेंज कर लेते हैं। बहुत गर्मी में भी रह लेंगे। बहुत ठंडी में भी रह लेंगे। या वैसे तो ये इनका अपना एक
19:48 माइक्रो कॉस्म होता है। इनका अपना एक माइक्रोबियल वर्ल्ड होता है। लाइक अंटार्कटिका पे जो रहते हैं वो वहीं को प्रेफर करते हैं। जो हॉट स्प्रिंग्स में है 80° वो वहीं पे प्रेफर करते हैं। रूम टेंपरेचर है। रूम टेंपरेचर में रहते हैं। पर इफ कंडीशन अराइज़ इट एडवर्स कंडीशन अराइज़ होती है। इनके पास बहुत से मैकेनिज्म होते हैं। ये अपने आप को सेट कर लेते हैं। पर ये अपनी लाइफ कंटिन्यू करते हैं। और उसके बाद में इनका मेटाबॉलिक मार्बल जो इनकी जो ये कैपेसिटी है ना इट इज़ ऑल बिकॉज़ ऑफ़ दिस पर्टिकुलर कैपेसिटी दे आर द मेटाबॉलिक दे कैन शेप एनीथिंग दे कैन शेप एनीथिंग एंड द मोस्टेंट द कॉम्प्लेक्स ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स जो भी होते हैं उसको ये इजीली ब्रेक कर सकते हैं इंटू दी सिंपलर मॉलिक्यूल्स और दे कैन ट्रांसफॉर्म इट दे कैन ट्रांसफॉर्म इट इंटू दी
20:36 या डिग्रेड कर सकते हैं या उसको डीकंपोज बहुत सारी चीजें से करते हैं। इमेजिन लाइफ विदाउट माइक्रो ऑर्गेनिज्म। अच्छे बिकॉज़ इसको चेंज करिएगा। अ बेस्ट अभी हर एक स्लाइड पे वो क्लियर होता जाएगा। एक एक फर्स्ट लिया था बायोरेमडीएशन। मे बी अ वेरी कॉमन वर्ड फॉर एवरीवन ऑफ़ अस। सो बायोरेमडीएशन। रेमीडिएशन इज़ फॉर द रेमेडी ऑफ़ द ट्रीटमेंट। एंड बायो दैट इज़ यूजिंग द बायोजिकल ऑर्गेनिज़्म। सो ऑफकोर्स माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स आर द बायोरेमडीएशन टूल और ये बायोरेमडीएशन अगर नहीं होगा तो अपना पोल्यूशन जो अभी आज की डेट में ऑयल स्पेल हो रहा है हाइड्रोकार्बन्स जो ऑयल टैंक्स जाते हैं
21:21 सुना होगा शिप पे वो गिर जाते हैं। कई बार वाटर में बहुत सारा ऑयल आ जाता है या फिर जो सोइल होता है उसमें हैवी मेटल टॉक्सिंस आ जाते हैं थ्रू पेस्टिसाइड हबीसाइड्स तो ये जितने भी तरह के जो पॉलटेंट्स हैं जो कि सोइल को और वाटर को कंटमिनेट कर रहे हैं उनके लिए दिस माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स फाउंड टू बी अ बेस्ट प्रॉब्लम सॉल्व एंड दे एक्चुअली एंड नाउ दे नीड टू बी इनोवेट हो रहा है थ्रू बायोटेक्नोलॉजी व्हाट वी आर डूइंग जो हमारे पास वाइल्ड टाइप स्ट्रेन है उसमें हम कुछ कुछ चेंजेस करते हैं अपने अकॉर्डिंगली जैसा हमको चाहिए जैसा नेचर का रिक्वायरमेंट है उसके हिसाब से बहुत इजीली वो मैनपुलेट हो जाते हैं उनके जींस बहुत अपने हिसाब से अपन उसमें चेंज कर सकते हैं
22:08 वो जो चेंज हम करते हैं उसको एक्सेप्ट कर लेते हैं और जैसे ही वो एक्सेप्ट करते हैं उनको जो भी टास्क हम देते हैं वो उसको बहुत आराम से जाके उस टास्क को फुलफिल करते हैं विदाउट कंप्लेनिंग के ओवर बर्डन है या कुछ उनके पास कोई कंप्लेंट नहीं है उनका उनका अपना एक वर्ल्ड है। एक उनको पता है कब क्या है ड्यूटी है और वो अपना काम करते हैं। तो ये टाइनी जो क्रेशर्स है इनको अपन यूज़ करते हैं जो बहुत मेजर प्रॉब्लम्स है। लाइक इट इज वेरी डिफिकल्ट टू रिमूव दी अह वाटर और ऑयल ऑफ ऑन द फ्रॉम द सरफेस ऑफ़ द वाटर बट दे कैन डू इट। दे हैव द कैपेसिटी। सो एंड दे कैन कन्वर्ट मीन्स रिमूविंग इट। दे आर ट्रांसफॉर्मिंग इट इंटू दी हार्मलेस बाय प्रोडक्ट एंड हेवी मेटल टॉक्सिन हेवी मेटल सपोज़ इफ दे
22:55 आर नॉट इट इज़ नॉट पॉसिबल फॉर टाइनी क्रिएचर्स टू ब्रेक डाउन द हैवी मेटल्स बट व्हाट दे कैन डू दे कैन बायो ऐड्सॉर्ब इट वो अपने ऊपर अपने ऊपर ले लेते हैं उसको वो ऐड्सॉर्प्शन कर लेते हैं पर उस जगह को क्लीन करके देते हैं ये जहां पे है ये उसको क्लीन करेंगे अपने इनके जो सेंसर्स है वो ह्यूमन सेंसर्स से ज्यादा है दे नो कि वो जहां पे रह रहे हैं जहां से न्यूट्रिएंट मिल रहा है ये बहुत बेस्ट एग्जांपल होता है एग्रीकल्चर में जब अभी देखेंगे कि वो जहां पे रह रहे हैं जहां से उनको खाना मिल रहा है एक एक्सेप्ट द पैरासिटिज्म रेस्ट ऑफ जितने भी इनके सिंबोटिक एसोसिएशन होते हैं ये सब में किसी ना किसी तरह से फायदा करेंगे और नहीं फायदा तो न्यूट्रलिज्म एसोसिएशन में रहेंगे पर को एकिस्टेंस की जो थ्योरी है वासुदेव कुटुंबम की वो हर एक माइक्रो ऑर्गेनिज्म हर एक माइक्रो कॉस्ट पे क्लियरली एप्लीकेबल है और ये जो नेचुरल
23:41 प्रोसेस है ये बेस्ट थिंग ये है कि इट इज़ वेरी कॉस्ट इफेक्टिव इट इज़ वेरी इकोनॉमिकल एंड एंड एनवायरमेंटल फ्रेंडली आल्सो कि कुछ ऐसा हम नहीं ऐड कर रहे हैं कि एक चीज को हटाने के लिए हम कोई दूसरा हार्मफुल कोई केमिकल या गैसेस रिलीज कर रहे हैं। एक जगह को क्लियर करने के लिए हम दूसरा कुछ वहां पे रिलीज नहीं कर रहे हैं। तो कोई हार्म नहीं कर रहे हैं। एंड विदाउट हार्मिंग और विदाउट डिस्टर्बिंग द प्रोसेस सिंपली व्हाट वी आर डूइंग वी आर इनोकुलेटिंग और वी आर गिविंग द माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स टू दैट पर्टिकुलर जो भी जहां प्लेस है जहां पे हमको करना है और वहां पे माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स जाके अपना काम करते हैं। एक बहुत इसमें बहुत अच्छा कंट्रीब्यूशन था। बाद में अभी-अभी ये दिमाग में आया हमारे एक यू ऑल मस्ट हैव हर्ड अबाउट दी बिकॉज़ हाइड्रोकार्बन कंटेन सो मेनी थिंग्स ना लाइक ऑक्टेन है, ज़लीन
24:28 है, कैमफर एंड एपिथलीन है। ये सबका एक कॉम्बिनेशन होता है। एक सिंगल कोई यूनिट नहीं है। हाइड्रोकार्बन जो होता है वो बैक्टीरिया के लिए बहुत कुछ एक ग्रुप ऑफ़ बैक्टीरिया है। लाइक सडोमना्स उनके लिए ये न्यूट्रिएंट का काम करता है। वो उसको ब्रेक हाइड्रोजन कार्बन ऑक्सीजन रिलीज़ कर देंगे। व्हिच इज़ वेरी हार्मलेस। तो वो उस पे यूटिलाइज करते हैं। उनको तो न्यूट्रिएंट सोर्स मिल रहा है। वो उसी हाइड्रोकार्बन जो कि हमको नुकसान कर रहा है वो उनके लिए खाने का काम कर रहा है। वो उसके ऊपर खाना खाते हैं। तो इसके लिए ये था कि कुछ ग्रुप ऑफ बैक्टीरिया थे। तो फर्स्ट टाइम जो इनोवेशन का या आपको बताते हैं कि जेनेटिक मॉडिफिकेशन का जो आईडिया आया था वो भी एक इंडियन ओरिजिन का था। यू ऑल मस्ट हैव हर्ड अबाउट डॉ. आनंदा चक्रवर्ती। ही वास एन इंडियन अमेरिकन माइक्रोबोलॉजिस्ट और उन्होंने फर्स्ट टाइम बनाया था 1970 में
25:15 बनाया था मैम एक सुपरब क्रिएट किया था एंड दैट सुपरबग वास एक्चुअली क्रिएटेड सुपरब फ्रॉम अ सिंगल बैक्टीरियम हैविंग फोर डिफरेंट टाइप ऑफ़ प्लाज्मिड्स। आपको भी बताया था कि हम उनमें जैसा चाहेंगे ऐड कर सकते हैं। जींस हटा सकते हैं। क्योंकि हमारे भी और सबकी यू ऑल मस्ट हैव हर्ड अबाउट द जींस। कि जो हमारे कैरेक्टर्स है जो हमारा बिहेवियर है उसका कंट्रोलिंग अथॉरिटी वो सब चीजें जींस डिस्क्राइब करता है। किसी भी लिविंग ऑर्गेनिज्म का जो डिस्क्रिप्शन है वो उसके जींस से आता है। तो वो जींस को वही प्लाज्मिड ऐसा उन्होंने डाला था कि जो कि हाइड्रोकार्बन के अ कैमफर और ऑक्टेन ओजाइलीन नेपथलीन वो सभी को डिग्रेड कर दे। मतलब मींस चारों के प्लाज्मिड एक बैक्टीरिया में ऐड किया था। और ये जो इनका
26:03 डिस्कवरी था ये इट वास सुपरब का जो इनका फाइंडिंग था इट ओपन द डोर फॉर द मॉडर्न जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्रीज एंड फॉर दी एनवायरमेंटल माइक्रोबियल एप्लीकेशनेशंस कि अब माइक्रोब्स आर सेफ एंड माइक्रोब्स हैव दैट ट्रिमेंडस कैपेसिटी टू डिटॉक्सिफाई द थिंग टू रिमूव द पॉलिट्स फ्रॉम द सोसाइटी सो और इसी के बाद में इसको कोर्ट ने भी परमिशन दिया था सुप सुप्रीम कोर्ट ने कि हां क्योंकि जीएमओ में अब बाद में बहुत सारे ऑब्जेक्शंस आ गए थे। कई था कि वो जो नॉर्मल है और वाइल्ड टाइप स्ट्रेन को अब आज की डेट में बहुत सारे लॉज़ है नहीं यूज़ कर सकते हैं। पर ये फर्स्ट था जो कि पेटेंट हुआ था और फर्स्ट था जिसको नहीं कि परमिशन दिया था कि हां जीएमओ कैन बी अ माइलस्टोन इन एनवायरमेंटल सस्टेनेबिलिटी।
26:51 तो ये इन्होंने बताया था। नेक्स्ट स्लाइड नेक्स्ट बता दें। अच्छा एक और जो बहुत एक तो ऑल स्पिल हो गया पेस्टिसाइड हबीसाइड का आ गया था और एक जो बहुत हर जगह चल रहा है सारे ही सब्जेक्ट वाले फील वाले प्लास्टिक की बात कर रहे हैं और बायोप्लास्टिक की भी बात आ रही है बहुत सारे ऐसे प्लांट्स है और एक अपना जो एस्पिलस का भी है जो कि सीबीए पे ग्रो करता है वो सिर्फ वो भी प्लास्टिक वो प्लास्टिक को डिग्रेड कर सकता है पर इंस्टेड अभी क्या बताया था कि सॉल्यूशन का इस जो भी हमारा डेवलपमेंट में जो हमारे को फोकस करना है कि टू मिनिमाइज नहीं कर सकते
27:37 अगर हम उसको डिग्रेड नहीं कर सकते डीकंपोज नहीं कर सकते सो वी कैन ट्रांसफॉर्म द दैट पर्टिकुलर थिंग उसको ट्रांसफॉर्म कर दीजिए अगर वो नहीं हट पा रहा है गायब नहीं हो पा रहा है तो डोंट वरी वी कैन ट्रांसफॉर्म इट तो वो ट्रांसफॉर्मेशन वाले में ये आता है कि अगर नहीं प्लास्टिक नहीं डिग्रेड हो सकता है तो वी कैन ट्रांस वी कैन ट्रांसफॉर्म और वी कैन स्टार्ट दी मैक्सिमाइजिंग द प्रोडक्शन ऑफ द बायोप्लास्टिक। अभी जो एक अवेयर्स क्रिएट कर रहे हैं इको पेपर और ये पेपर तो उसका पर्पस यही है कि आप उसका मैक्सिमम यूज़ करेंगे। वो मिनिमम में जाएगा। किसी भी इकॉनमी का फर्स्ट थिंग ये होता है अगर हम उसका यूज़ मिनिमाइज कर देंगे तो ऑब्वियस है वो जो भी मार्केट है उसका डाउन हो जाएगा। डाउन हो जाएगा तो उसका प्रोडक्शन बंद हो जाएगा। क्लियर कट कांसेप्ट है। तो ये इंडस्ट्रियल एप्लीकेशनेशंस में अपन यही करते हैं। जितना डिमांड है उस हिसाब से हम
28:23 सप्लाई करते हैं। डिमांड ही कम हो जाएगी तो आपका सप्लाई वो सक्सेसफुल नहीं होगा। तो इसलिए अगर हम हर एक लोग जितने भी हैं और ये अवेयरनेस क्रिएट करें कि आप प्लास्टिक का यूज बंद कर दीजिए। बीच में बहुत होता है पर फिर भी यूज करते हैं अपन। पर नहीं प्लास्टिक मत बंद करिए। आप बायोप्लास्टिक का यूज करिए। आप जो चीज आप इको पेपर्स यूज करिए उसमें जो बायो पेपर्स है उनको यूज करिए जो कि डीकंपोज हो पाए जो कि डिग्रेड हो पाए क्योंकि बड़ा डिफिकल्ट प्रोसेस होता है। इवन दो बैक्टीरिया भी उनको कितनी मेहनत करनी पड़ती है डिग्रेडेशन के लिए। समटाइ्स दे हैव टू वेट फॉर फाइव मंथ्स, सिक्स मंथ। कई बार कोई चीजें होती हैं लाइक जो पिनस वगैरह होते हैं वो 12 12 इयर्स तक वो उनका कोई डीकंपोजशन है तो हमको वैसी चीजें यूज करनी है एनवायरमेंट से जो हम ले रहे हैं जो एनवायरमेंट से ले रहे हैं उनकी चीजें उन्हीं को देनी है और ऐसी देनी है जो कि
29:08 हमारे ये जो लिविंग माइक्रोबियल वर्ल्ड है ना उनको खाना पीना मिलता रहे उनको यही ऑर्गेनिक है इससे उनको खाना मिलता है इसी से इसी पे वो मल्टीप्लाई होते हैं इसी पे वो ग्रो करते हैं वो इसी को डिग्रेड करते हैं तो ये जो पूरी अपनी साइकिल है पूरी लाइफ साइकिल पूरा इकोसिस्टम है वो बैलेंस्ड है कहीं ना कहीं ये बैलेंसिंग डिस्टर्ब हो रहा है जिसका रिजल्ट आज की डेट में वी ऑल आर सीइंग बहुत ज्यादा बैलेंस हो गया है। सो नाउ इट इज अ पीक टाइम। तो एक प्लास्टिक डिग्रेडेशन के लिए हुआ था कि बिकॉज़ प्लास्टिक के लिए भी ये ग्लोबल प्लास्टिक क्राइसिस है और इसमें जो डिस्कवरी किया था कि प्लास्टिक ईटिंग माइक्रोब्स को आइडेंटिफाई करता है। अभी तो बहुत कम है। तो हो सकता है और भी बहुत सारे क्योंकि मिलियंस ऑफ़ काउंटलेस नंबर ऑफ
29:56 माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स आर देयर इन द ग्लोब एंड वी डोंट नो हमको उनकी कैपेस उनको पता है दे नो हाउ टू डू व्हाट टू डू व्हेन टू परफॉर्म दे नो एवरीथिंग बट वी हैव टू फाइंड इट आउट हमें नहीं पता है कि ये तो वो प्लास्टिक हीटिंग का अभी जो यहां के डायरेक्टर है डीआईसी और इसके भी संधू सर उनके हां उन्होंने इस पे वर्क किया हुआ है काफी अच्छा किया हुआ है प्लास्टिक हीटिंग माइक्रोब्स ग्रो भी कराया है और ओशन डेप्थ में जाके भी शायद उनका टेस्टिंग हुआ तो इस तरह के हैं और भी होंगे पर क्योंकि अभी कम है जो तो रिसर्च तो रिसर्च एंपावरमेंट पे भी फोकस करना है कि वी हैव टू आइडेंटिफाई दी मोर एंड मोर प्लास्टिक ईटिंग बैक्टीरिया एंड उनका एक्चुअली एप्लीकेशन होता है लैब में होता है एप्लीकेशन जो एक बहुत बड़ा ड्रॉबैक आता है कि
30:41 एप्लीकेशनेशंस जो होते हैं अपन जो करते हैं वो रिसर्च लैब में वी कल्टीवेट दी माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स बायोमास प्रेडिक्शन तक बहुत कम जा पाता है सपोज 100% अगर हमने उसको ग्रो करा लिया आइसोलेट कर दिया है लैब में और उसका उसका सिर्फ 50% पार्ट जो है वो बायोमास पे जा रहा है। बायोमास पे भी जा रहा है। और अगर जब हम उसको बिल्कुल उस पे लेके जाते हैं ऑन ग्राउंड जब हम उस पे जाते हैं तो उसका सक्सेस रेट ऑटोमेटिकली कम हो जाता है। तो उस कंडीशन में रिजर्व पर ये फाइंड आउट हो चुका है कि बहुत सारे ऐसे बैक्टीरिया है, माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स हैं जो बहुत इजीली प्लास्टिक को डिग्रेड करते हैं। ये डिग्रेड क्यों करते हैं? इनका मतलब सिर्फ यह है कि इनको प्लास्टिक से भी खाना मिलता है। है ना? दे ईट प्लास्टिक। दे आर नॉट वो अपने लिए उसको यूज कर रहे हैं तो और भी बहुत सारे ऐसे
31:26 होंगे हो सकता है वो प्लास्टिक से बहुत दूर हो पर उनके पास ये कैपेसिटी हो जब व्हेन वी विल प्रोवाइड प्लास्टिक टू देम एज अ सबस्ट्रेट मे बी दे विल स्टार्ट ईटिंग दैट देन वी विल कम टू नो कि ओ दीज़ ऑल आर आल्सो दी ग्रुप ऑफ़ बैक्टीरिया फंजाई व्हिच आर ईटिंग द प्लास्टिक और एक इसमें केस स्टडी है नेक्स्ट करिएगा ये देखिए केस स्टडी है यू ऑल कैन सी इन 2016 रिसर्च रिस्चरर्स इन जापान ये एक स्ट्रेन है एडनेला सेकेंसिस और उसको देखा था कि वो यूज करती है पीटी को। पीटी जो है इट इज़ अ मेन जिससे कि पॉलिथीन बनता है। है ना? पॉलिथीन
32:14 बनता है पीटी से। दैट इज पॉलीथायलीन टेट्राथैली उससे पॉलिथीन बनता है। तो ये जो पर्टिकुलर बैक्टीरिया है आडियोला सिकेंसिस ये प्लास्टिक को ईट कर रहा था जो प्लास्टिक बॉटल प्लास्टिक उसको ये ईट करने की कैपेसिटी थी और वो उससे प्राइमरी बिकॉज़ किसी को भी ग्रोथ के लिए इवन वी ऑल नीड फॉर द ग्रोथ कार्बन एंड एनर्जी सोर्स। कार्बन इज़ सर्व्स एस द एनर्जी सोर्स एंड बसाइड दैट मीन नाइट्रोजन। तो वो उससे उनकी ग्रोथ प्रमोट हो रही थी प्लास्टिक पे ग्रो कराने पे। व्हाई? व्हाई? बिकॉज़ कोई भी सबस्ट्रेट तभी यूटिलाइजेशन होता है जब कि लिविंग ऑर्गेनिज्म में उसको ब्रेक डाउन करने के लिए एंजाइम होता है। एक्चुअली माइक्रो ऑर्गेनिज्म का कोई ऐसा हाथ पैर या बॉडी पार्ट तो है नहीं। उनके पास में क्या है? या कोई भी एनिमल कोई भी डाइजेशन
33:01 डाइजेशन हम जो भी खाते हैं बिकॉज़ ऑफ़ दी एंजाइम्स। व्हिच फंक्शन व्हिच पार्ट ऑफ़ आवर बॉडी इज़ फंक्शनिंग इट इज़ एंजाइम्स व्हिच आर वर्किंग ऑन दी व्हाटएवर कॉम्प्लेक्स ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल वी आर इन अह कांटेक्ट विद तो ये जो इसने इस ये दो तरह के एंजाइम्स देता था पेटेस एंड एमएटीएस तो पेटेस का काम क्या था वो ब्रेक करता था पीटी को एमएचईटी में और ये दो जो है दीज़ आर दी टू मेन कंटेंट जो पीएचईटी है एमएईटी है इट इज़ मोनो टू हाइड्रोक्सी इथाइल टेट्राथैलिक एसिड हाइड्रोलेस एंड पीईटी इज़ द पॉलीथाइल टेट्राथैलीट ये उनको एस एंजाइम है सफिक्स है तो ऑब्वियसली ली वो सबस्ट्रेट क्या है उसका जब वो पेटेज़ और
33:46 एमएचटीएस को ब्रेक एमएटी को ब्रेक करता था तो किस में कन्वर्ट करता था टेट्राथैलिक एसिड और इथाईन ग्लाइकॉल में और टेट्राथाईलीन उसका कॉन्सीटुएंट है मेन कॉज़ मींस उसने ब्रेक डाउन किया कॉम्प्लेक्स पॉलीमर को और प्लास्टिक इज़ अ पॉलीमर उसको उसने मोनोमर में सीक्रेट कर दिया और ये जो मोनोमर है ये मोनोमर ये बताता है कि इस प्लास्टिक की हम बायोलॉजिकल रिसाइक्लिंग भी कर सकते हैं। तो ये इस तरह के कुछ एक एग्जांपल है। ऐसे और भी बहुत से बैक्टीरिया फंजाई है जिस पे कि रिसर्च कंटिन्यू है कि उनको हम आराम से यूज कर सकते हैं। उनका जो एंजाइम्स है दैट कैन बी यूज्ड फॉर रिसाइक्लिंग ऑफ पीटी इनू हाई क्वालिटी मोनोमर सपोर्टिंग सर्कुलर इकोनमी मॉडल। अभी तक तो पेपर को अपन ले जाते हैं। वो जो आते हैं रद्दी वाले आते हैं वो न्यूज़पेपर
34:33 लेके जाते हैं। वो फिर से उनके पेपर बना के पेपर एक रिसाइक्लिंग है। अब प्लास्टिक का भी अगर ऐसे प्लास्टिक यूजली लोग अवॉइड करते हैं। क्योंकि उनका रिसाइक्लिंग प्रोसेस एस इट इज नॉट नोन। पर अब ये अगर माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स लार्ज स्केल पे आएंगे। इनके इंडस्ट्रियल प्रिपरेशन स्टार्ट हो जाएंगे और लार्ज स्केल पे इनका प्रिपरेशन होगा तो प्लास्टिक भी एक बहुत अच्छा इकोनमी बनेगा। अगर हम प्लास्टिक को रिसाइकल करना शुरू कर देंगे। नेक्स्ट एक और जो बहुत बड़ी समस्या है दैट इज वाटर। वाटर यह भी पता है 70% ऑफ आवर 74 70% वाटर है अगर अपने या फिर अगर अपन ग्लोबल उसकी बात करते हैं तो बहुत बड़ा-बड़ा एरिया है। दुबई में अभी एक दिन
35:18 न्यूज़ में या कहीं पे शो कर रहे थे कि वो लोग उस वाटर को जो उनका सलाइन वाटर है उसको वो डिस डिसलिनेट करके और फदर वो पब्लिक यूज़ में यूज कर रहे हैं। ऐसे बहुत सारे एरिया है जहां पर वाटर तो है पर वो उसका यूटिलाइजेशन नहीं होता। पर अपने यहां पे और हर जगह पे ये जो अपने एमसीबीस या म्युनिसिपल कॉरपोरेशन वाले हैं एक्चुअली वो हर जगह पता है कि ट्रीटमेंट होते हैं वाटर की वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट करते हैं और उसमें जो पर हमको ये बताना है कि जो वेस्ट वाटर का जो ट्रीटमेंट होता है वो मैकेनिकल नहीं हो रहा है। वो मैनुअल नहीं हो रहा है। ये वेस्ट वाटर का ट्रीटमेंट चाहे वो म्युनिसिपालिटी कॉरपोरेशन के पॉइंट पे होता है जहां पे होता है। इट ऑल हैपेंस बिकॉज़ ऑफ़ दी डिफरेंट टाइप ऑफ माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स वर्किंग देयर। अगर उसमें दो ग्रुप ऑफ रहते हैं बैक्टीरिया एरोबिक एंड
36:05 एनरोबिक। अगर एरोबिक डाइजेशन है तो एरोबिक डाइजेशन क्या करेगा? उस वाटर को फर्दर पॉलिश वाटर है इट कैन बी रीयूजेबल। एनरोबिक डाइजेशन अगर एनरोब्स करते हैं जिनको ऑक्सीजन का रिक्वायरमेंट नहीं है वो अगर वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में यूज़ करते हैं तो एनरोबिक डाइजेशन क्या करते हैं? उसके वैलुएबल जो बायोगैस का आ गया है, सीएनजी का कांसेप्ट आ गया है। है ना? तो एनरोबिक डाइजेशन के थ्रू वाटर आता है। अच्छा ये तो वाटर ट्रीटमेंट जो कि वी आर डूइंग इट मैनुअली। एक वाटर प्यूरिफिकेशन प्रोसेस होता है। ऑब्वियस है आप सोचिए ओशियन में सी वाटर में कितना ही कुछ पॉलटेंट होता होगा। कितना पॉलटेंट होता है। तो बिना कुछ कहे वो नेचुरल जो वाटर प्यूरिफायर्स है। दे आर दे आर वर्किंग देयर एज अ डीकंपोजर। डीकंपोजर ऑब्वियसली
36:50 जो फिशेस हुए या जो भी एनिमल्स हैं सी एनिमल्स हैं ये सब डेड बॉडीज जो होती है कहां जाती होंगी वो तो इनका खाना है डीकंपोजर जो कि इकोसिस्टम के जो पिरामिड में लास्ट होता है वो क्या होते हैं फंचाई होते हैं तो वो इनहीं डेड डिकइंग ऑर्गेनिक मैटर पे वो सर्वाइव करते हैं और इनको इनसे फिर से एलिमेंट्स वो एक बहुत उसमें कहते है ना पांच तत्व का शरीर है यही रह जाना यही मिट्टी का मिट्टी में मिलना है तो मिट्टी में मिट्टी में जो मिलाने जाने का काम होता है। एक्चुअली दे आर बीइंग डन थ्रू दी माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स। अपने आप से नहीं जा रहा है। माइक्रोबल एक्टिविटी है जो जो कि वापस वो क्या कर रही है? स्केलेटन में से फास्फोरस निकाल ले रही है। कार्बन निकाल ले रही है, नाइट्रोजन निकाल ले रही है। और वो सारा कुछ वो उसको वापस वो सॉइल को दे रही है कि लो ये सॉइल
37:36 का है। ये सोइल ले लो। वो सॉइल में फिर से जो माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स हैं वो बायोजियोकेमिकल साइकिल चला रहे हैं। वो प्लांट्स को दे दे रहे हैं कि प्लांट्स ले लो। प्लांट्स क्या कर रहे हैं? उन चीजों को वापस एनिमल्स को दे रहा है या ह्यूमन बीइंग को दे रहा है। तो बिना माइक्रोब्स के ना प्लांट्स की पॉसिबिलिटी है ना एनिमल्स की पॉसिबिलिटी है ना ह्यूमन बीइंग की पॉसिबिलिटी है। तो ये एक्चुअली माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स है जो कि सारा रोल प्ले कर रहे हैं। और यहां देखिए इनफ्लुएंट आता है। इनफ्लुएंट रॉ वेस्ट वाटर जो भी पूरे सिटी का होता है वो जाता है वो एंटर करता है। वहां पे बड़े-बड़े एरेशन टैंक होते हैं बाहर में जिसमें कि एरोबिक बैक्टीरिया होते हैं और जो रॉ वेस्ट वाटर में जितना भी जो भी होता है स्लज होता है जो भी कचरा है वो सबका डाइजेशन करते हैं और उसमें जो सेडिमेंट पे रहते हैं जो बड़े रहते हैं लाइक प्लक्स है वो ऊपर में आ जाते हैं जो
38:24 सेडिमेंट रहते हैं वो क्योंकि नीचे की तरफ ऑक्सीजन नहीं जाती है तो वहां पे एनरोबिक जो माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स है दे प्ले देयर रोल और जो एरेशन टैंक के बाद में वो सीधे जो एफ्लेंट आता है जो वाटर रिलीज होता है वो क्लीन वाटर होता है यही चीज बोली बहुत सारे इंडस्ट्रीज पे भी बैन करते हैं कि उनका जो स्लज है या उनका जो स्पें क्लिकर है वो डायरेक्टली वाटर बॉडीज में डिस्चार्ज होता है। तो उसके लिए भी ट्रीटमेंट प्लान लगाए जाते हैं कि वो नदी में सीधे पानी हमारे इधर पे नर्मदा जी हैं तो उनके लिए भी बहुत सारा किया जाता है। तो वो ट्रीटमेंट प्लान लगा के रखे गए हैं अलोंग साइड दे रिवर्स ये जो अगर कोई भी कचरा आ रहा है जो डोमेस्टिक सीवेज आ रहा है उसका पहले ट्रीटमेंट होगा। तो ट्रीटमेंट में जो की रोल है हु इज डूइंग द ट्रीटमेंट कोई वहां पे खड़े हो के नहीं कर रहा है नॉट इवन द मशीन ओनली दीज़ माइक्रो
39:09 ऑर्गेनिज्म्स उनको पता है क्या-क्या चीज टॉक्सिक है वो उसको ब्रेक डाउन कर रहे हैं खुद यूटिलाइज कर रहे हैं और उसको जब वो वापस करते हैं तो वो उसको हार्मलेस फॉर्म पे वापस रिलीज कर रहे हैं तो वो क्लीन जो एफ्लेंट है वो वापस पानी में मिल जा रहा है। नेक्स्ट अह एग्रीकल्चर एप्लीकेशन जो मेन रोल होता है सोइल माइक्रो ऑर्गेनज़्म्स। सोइल माइक्रो ऑर्गेनिज़्म्स सबसे ज्यादा सबसे जो सूटेबल मीडियम होता है फॉर द ग्रोथ ऑफ दी माइक्रो ऑर्गेनज़्म्स इन एनवायरमेंट। इट इज़ कंसीडर्ड टू बी द सॉइल। और सॉइल माइक्रो ऑर्गेनज़्म्स क्या करते हैं? क्योंकि एग्रीकल्चर इज़ डायरेक्टली रिलेटेड टू दी प्लांट। एंड एज नाउ आई सेड ना कि माइक्रोब्स के बिना प्लांट्स कैन नॉट ग्रो एंड विदाउट प्लांट्स एनिमल्स एंड ह्यूमन
39:54 कैन नॉट सर्वाइव। सो इतना समझ में आया कि विदाउट माइक्रोब्स इकोसिस्टम वुड कोलैप्स कोई इकोसिस्टम रहेगा ही नहीं। अभी जिसकी बात कर रहे हैं डेवलपमेंट की कोई प्लनेट ही नहीं सर्वाइव करना है। डेवलपमेंट तो उसका बात है। तो पर वो जो पूरा इकोसिस्टम है वो कोलैप्स हो जाएगा। बट दे आर द इनविज़िबल मैनेजर्स ऑफ़ द सस्टेनेबिलिटी। दिखाई नहीं दे रहे हैं वो हमको और वो कुछ बोल भी नहीं दे रहे वो हमसे कुछ नहीं मांग रहे वो सिर्फ एक मांग रहे हैं कि ठीक है आप हमको दीजिए जितना कचरा दे सकते हैं जितनी गंदगी दे सकते हैं जितना हमारे ऊपर स्ट्रेस क्रिएट कर सकते हैं हम इधर पे है जिसको कि दूर करना है हमको अपना काम करना है तो सोइल माइक्रोब्स दे एनश्योर्स कार्बन साइकिलिंग जो कार्बन आता है नाइट्रोजन का फिक्सेशन करते हैं तो नाइट्रोजन फिक्सिंग हो गए फास्फेट सॉल्युलीबलाइजिंग जो माइक्रोब्स है जनरली
40:42 बायोफर्टिलाइजर कांसेप्ट बहुत ही अवेलेबल है पेस्टिसाइड, हर्बीसाइड जो है जो केमिकल होते हैं वो केमिकल रिलीज करते हैं। तो वो माइक्रोब्स को तो नुकसान करता ही है पर वो हमको भी करता है। बिकॉज़ हम उसको कंज्यूम कर रहे हैं। सो इनडायरेक्टली वी आर जैसे फूड में प्रिजर्वेटिव कुछ चीजें बार-बार आप गवर्नमेंट या वो बैन करते हैं और लोग उसको एक्सीड कर देते हैं। मतलब एक मात्रा निर्धारित की हुई है कि इतनी मात्रा में पर वो नहीं सुनते। अपने फायदे के लिए मात्रा वो बढ़ाते हैं। लाइक अभी इससे ऐसा ही ठीक चलिए इंडस्ट्रियल का एक एप्लीकेशन था क्लास में चल रहा था फूड वाला तो एक केएफसी का एग्जांपल दिमाग में आया था केएफसी कटकी फ्राइड चिकन उनकी बहुत सेल होती थी। फिर जब उस पे छापा डाला गया था तो पता चला था जो एमएसजी जो कि कैंसरस है वो उसकी मात्रा जो भी थी 2% की जगह वो 2%
41:27 डालते थे। तो ह्यूमन बीइंग के साथ डायरेक्ट ये जो है वो भी रिस्क करते हैं। तो इस तरह से जो केमिकल पेस्टिसाइड, हर्बीसाइड है वो सोइल माइक्रोब्स को तो नुकसान करते हैं। सोइल की कंडीशनिंग और नरिशमेंट को भी नुकसान करते हैं और वो साथ में जो एनिमल्स हैं जो उस प्लांट को हीट कर रहे हैं उनको भी कर रहे हैं और हमको भी कर रहे हैं। तो किसी तरह से पेस्टिसाइड, हर्बीसाइड तो वो बहुत एक मेजर कारण होता है कैंसर कॉज करने का। तो उसको रिप्लेस करने के लिए बोला था। स्टार्टिंग में बोला था कि नॉट ओनली दैट दैट यू शुड मिनिमाइज दी यूज और मिनिमाइज द वेस्ट और मैक्सिमाइज द यूसेज। ये वन थिंग वी ऑल कैन डू वी कैन ट्रांसफॉर्म इट। हम उस चीज को परिवर्तित करते हैं। अगर हम नहीं बदल पा रहे हैं तो उसको हटा दीजिए। तो बायोफर्टिलाइजर और वो
42:12 सिर्फ एक ही तरीका है कि अभी जैसा टेरिफ का बात आया था। एक लाइन से सारे WhatsApp पे मैसेज चलने लगे थे। वो बंद कर दीजिए। अमेरिका का लेना बंद कर दीजिए। सिमिलरली वही चीज है कि हमको फिर से ऑर्गेनिक साइड में जाना है। ऑर्गेनिक साइड में जाना है। प्लांट प्रोडक्ट्स लीजिए, माइक्रोबियल प्रोडक्ट्स लीजिए और लोगों को अवेयरनेस कर सकते हैं। एक केमिकल है। केमिकल फैक्ट्रीज ने बहुत अर्न कर लिया और बहुत नुकसान कर दिया। तो या फिर वो उनका भी एक मानक सभी का एक डिसाइडेड होते हैं। उनके स्टैंडर्ड सेट होते हैं गवर्नमेंट को। वो बस उस जो भी लॉज़ है क्योंकि उसको वो ब्रेक नहीं करना चाहिए। जस्ट फॉर देयर बेनिफिट। जस्ट फॉर देयर बेनिफिट। जस्ट सेल्फ बेनिफिट वो क्या कर रहे हैं? बाकी को नुकसान कर रहे हैं। तो नाइट्रोजन फिक्सिंग बैक्टीरिया है। प्लांट को नाइट्रोजन देता है। नाइट्रोजन इज द सोर्स वेरी मस्ट एसेंशियल न्यूट्रिएंट फॉर द ग्रोथ। एंड फास्फेट
42:58 सॉलबलाइजिंग फास्फेट सोचिए इतनी चट्टाने इतने पत्थर जब अपनी धरती बन रही थी। फास्फेट कितना भरा हुआ है? फास्फेट को वो कन्वर्ट कर देते हैं जिससे कि प्लांट उसको फास्फेट को सॉलबलाइज कर देते हैं। बड़े-बड़े जो रक्स होते हैं उनको सॉलबलाइज कर देते हैं। और फिर उसके बाद में वो प्लांट्स की न्यूट्रिएंट अवेलेबिलिटी को इनक्रीस कर देते हैं। एंड दिस वे दे आर रिड्यूसिंग दी रेलियंस ऑन दी केमिकल फर्टिलाइज़र्स। दे आर गिविंग अस द मैसेज। ओनली थिंग वी हैव टू लिसन कि लाइक आई एम डूइंग एवरीथिंग। कुछ नहीं करना। आप बाहर से नहीं भी फर्टिलाइजर डालेंगे कभी भी राइजोस्फेरिक एनालिसिस करिए। वही माइक्रोब्स रहते हैं जो कि फायदा करते हैं प्लांट को। वही वही मिलेंगे। वह ऑटोमेटिकली कैरिंग ऑन। क्या मांग रहे हैं? थोड़ा सा पानी मांगते हैं। थोड़ा उनको मॉइस्चर चाहिए रहता है। थोड़ा सा ऊपर से कभी आप एक्स्ट्रा डाल देंगे खाना तो ठीक
43:44 है। उनका मल्टीप्लिकेशन रेट बढ़ जाएगा। प्रॉपर उनको थोड़ा सनलाइट जिनको चाहिए चाहिए जिनको नहीं। अकॉर्डिंग टू द कंडीशन ऑफ द प्लांट। देखिएगा हर तरह का माइक्रोबिल फ्लोरा वैरी करता। वो कुछ वो खुद नहीं बदलते। वो अपने आप को बदलते रहते हैं। अकॉर्डिंग टू दी प्लांट्स। आल्सो बायोपेस्टिसाइड की भी बात आई थी कि जो पेस्ट है ये आईपीएम इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट चलता है जिसमें कि बहुत सारे जो माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स हैं वो सिंथेटिक पेस्टिसाइड को ओवरलुक कर रहे हैं आउटकम कर रहे हैं और वो एक बेस्ट एग्जांपल होता है वो एकिस्टेंस का देते हैं कि हम लोग सब साथ में यहां पे मिलकर के रह सकते हैं जो कि हम एक साथ हम बायोफर्टिलाइजर का भी काम कर सकते हैं बायो पेस्टिसाइड भी हो सकते हैं जो कि हम बिना प्लांट को नुकसान
44:30 क्योंकि पेस्टिसाइड नुकसान कर रहा है केमिकल बिना उसको नुकसान किए हुए हम यहां पर पे एक सेफ अल्टरनेटिव एक मोड ऑफ द एनवायरमेंट दे कैन क्रे अच्छा नॉट ओनली टू दी प्लांट क्योंकि एग्रीकल्चर प्रेडिक्शन तो बढ़ा रहे हैं बहुत कॉमन है साइनोबक्टीरिया और बैक्टीरियल फर्टिलाइज़र्स ऑल मस्ट हैव हर्ड अबाउट दी सो मेनी नाइट्रोजन फिक्सिंग माइक्रोब्स आर देयर एंड साइनोबक्टीरिया जो राइस पैडी वगैरह में वो तो पूरा पूरा डालते हैं बायोमास प्रोड्यूस करके। सो दैट वो क्रॉप प्रेडिक्टिविटी तो एनहांस करता है। क्रॉप प्रोडक्शन तो ईल्ड कर ही रहा है। एक सस्टेनेबल डेवलपमेंट का एक पार्ट वो प्रोवाइड कर रहा है सबके लिए। इकोनमी इनक्रीस करता है। पर साथ में वो सोइल को भी की भी हेल्थ को इंप्रूव कर रहा है। इट इज इंप्रूविंग द सॉइल स्ट्रक्चर
45:16 लाइक फंजाई। फंजाई का स्ट्रक्चर ऐसा होता है। माइसेलियम जैसा। इसमें देखिए रूट्स रूट जैसे दिख रही है ऐसे वो फाइन थ्रेड लाइक स्ट्रक्चर्स होते हैं तो वो सोइल को नरिशमेंट लाइक वर्मी कंपोस्टिंग का भी अभी एक कांसेप्ट आ गया वो भी ऑर्गेनिक पार्ट है कि वो जो उनकी जो कास्टिंग होती है जो एक्सटा होता है वो सोइल को पोरस में करते हैं जो बड़े-बड़े टुकड़े उनको ब्रेक करते हैं तो वो सोइल कंडीशनिंग का भी काम करते हैं जिससे कि प्रोडक्टिव एग्रीकल्चरल सिस्टम सेट हो सके। नेक्स्ट अच्छा एक और इंपॉर्टेंट है कि मोस्टली 90% जो एंटीबायोटिक्स अपन ले रहे हैं 90% 90% क्या 99.9% एंटीबायोटिक प्रोड्यूसर्स का सोर्स कहां है? सोइल में है। जितनी दवाइयां बनती है कंपनी में वो सारे जो एंटीबायोटिक्स आर व्हाट वी आर डिराइविंग इट फ्रॉम दे। तो जितनी भी फार्मा
46:02 इंडस्ट्री है वो सब सोइल माइक्रो ऑर्गेनिज्म से बेस्ड है। मैक्सिमम उनका जो फर्स्ट आइसोलेशन होता है वो सोइल सोचिए कितना और ये क्या करते हैं जो सोइल में जो एंटीबायोटिक प्रोड्यूसर्स है ये एक बहुत अच्छा करते हैं। ये तो खुद को तो प्रोटेक्ट किया हुआ है। ये ऐसे केमिकल रिलीज करते हैं। एंटीबायोटिक का काम क्या है? केमिकल कंपाउंड रिलीज़ बाय द वन बैक्टीरिया एंड व्हिच इज़ इनबिटिंग द ग्रोथ ऑफ़ द अदर डिफरेंट टाइप ऑफ़ बैक्टीरिया। और जो अदर डिफरेंट टाइप ऑफ बैक्टीरिया है ये जनरली पैथोजेनिक है नुकसान कराने वाले तो वो उनको नहीं ग्रो होने दे रहे हैं। वहां पे जो को एकिस्टेंस का मॉडल बताया था कि म्यूटलिज्म वाला भी शो करते हैं कि हम भी है आप भी है हमको कोई फर्क नहीं पड़ रहा आपके होने से। कंपटीशन भी होता है कई बार कंपटीशन में शुरू से जो डार्विन का कांसेप्ट है कि जो फि सर्वाइवल ऑफ द फिट फिटेस्ट होगा तो जो फिट होता है वो ग्रो
46:47 करता है तो ऑब्वियसली हमारे पास में और अच्छे-अच्छे वाले माइक्रोब्स आते हैं। तो इनको हर तरह का एागोनिस्टिक भी कर रहे भाई एंटीबायोटिक प्रोड्यूसर कर रहे हैं। सिनर्जिस्टिक इफेक्ट भी है। म्यूचुअलिज्म भी है। सिनर्जिस्टिक म्यूचुअलिज्म में कि हमको भी फायदा हो रहा है। तुमको भी फायदा हो रहा है। जो कि हायर प्लांट के साथ माइकोराइजा वगैरह में देखने मिलता है। तो हर तरह के जो संबंध होते हैं जैसा हम इंसानों में भी होता है कि हमें आपसे फायदा है। आपको हमसे हमें आपसे कोई फायदा नहीं है। आप अपने रास्ते वो सारे आप देखिए अगर माइक्रोब्स की लैंग्वेज में वो हर चीज हमको बताते हैं कि ऐसा भी हो सकता है यहां हम भी आप भी हमें आपसे फर्क नहीं पड़ना। हम यहां रह के आपको फायदा कर सकते हैं। आप हमको मत दीजिए इन रिटर्न। वो उनका कमशलिज्म हो जाता है। म्यूशलिज्म होता है हम भी फायदा कर रहे हैं। आप भी हमारा फायदा। तो इस तरह के हर जो रिलेशनशिप है जो एक सिंबयोटिक रिलेशनशिप है जो को
47:33 एकजिस्टेंस का फार्मूला है वो सोइल में बहुत अच्छे से देखने को मिलता है। अब सोॉइल के बाद में एक अभी देखिए ये जो हमने यूज किया है 10थ सितेंंबर का ही पेपर है जिसमें कि फिर से इंदौर को वो दिया है। तो इसमें एक्चुअली टाइम्स ऑफ इंडिया की है कटिंग और इसमें देखिए जो रैंकिंग हुई थी कैटेगरी वन टू थ्री पपुलेशन वाइज उसमें देखिए इंदौर है जो हम लोगों का जबलपुर है वो सेकंड नंबर पे आ गया ऑब्वियसली इसमें जो एयर क्वालिटी इंप्रूव हुआ पर ये बताया गया है बैक उसमें रोड में कि एयर क्वालिटी का इंप्रूवमेंट उस एक्सटेंट तक पे नहीं हुआ है जो एक्चुअल है तो बहुत सारे कारण होते एयर पोलशन के वो देखा था बायोमास है म्युनिसिपल रोड डस्ट है वैकुलर क्योंकि बहुत सारी दिल्ली में यही बताया आया था क्योंकि एयर पोलशन
48:19 का वहां मेजर प्रॉब्लम है तो एक दिन और इवन सीरीज पे चलाइए चले बहुत कोशिश की जाती है पर पपुलेशन के हिसाब से इट इज़ नॉट पॉसिबल फॉर एवरीवन ऑफ अस कि सबको सिविक सेंस डेवलप होगा रिड्यूसिंग डस्ट जो जितने मकान बन रहे हैं मकान तोड़े जा रहे हैं जो तोड़ते हैं कि वो बुलडोजर चला रहे हैं आप सोचो कितना डस्ट कितना डस्ट पार्टिकल हम एयर वो दे रहे हैं एक मकान बनाना इज वन थिंग मकान तोड़ने में भी तो हम पोलशन कर रहे हैं और उसके बाद में जो हमारी ड्यूटी ड्यूटी बनती है कि क्रिएटिंग पब्लिक अवेयरनेस की नॉट ओनली दिस कि एयर को स्मोक से या जो फ्यूल है या एसिड रेन का मेन कॉज होता है कि एसिड दे रहे हैं तो एसिड रेन हो रहा है वो कहां जा रहा है हवा तो क्लाउड में जा रही है बादल बन रहे है वही वापस आ रहे हैं और वो नुकसान कर रहे हैं
49:04 पर साथ में जितने डिजीज कॉजिंग जितने पैथोजेनिक होते हैं कि वो अभी मास्क लगा के सब चल रहे थे हम लोग ट्रिपल लेयर मास्क क्यों क्योंकि बिकॉज़ हमको एयर का समझ में आ गया था रोल कि एयर कैसे एक एयर के थ्रू ही ट्रेवल करें। तो एयर तो बहुत इंपॉर्टेंट सोर्स है। जहां पे कि पैथोज्स भी करते हैं। यहां पे एक थोड़ा सा वो है कि इसीलिए बोलते हैं जो कफिंग करते हैं, स्नीजिंग करते हैं जो स्पटम डिस्कार करते हैं। मान लीजिए अभी हमारे सामने से ये बहुत मेजर प्रैक्टिस है। मेजर प्रॉब्लम है। कई बार देखते हैं ऐसे जाते लोग रास्ते से उन्होंने स्पटम उन्होंने उसको स्पिट कर दिया। मान लीजिए उसमें कहीं कोई माइकोबक्टीरियम ट्यूबरकल हो बेसलाई हो वो पेशेंट हो उसका। इतनी पब्लिक जा रही है वो नहीं जानती है। अगर कोई इम्यूनो कॉम्प्रोमाइज पेशेंट गया उस पर्टिकुलर और
49:50 यह 100 इयर्स तक एक्टिव रहते हैं। वो तो उसमें वो तो कहां खत्म होंगे और कोई अगर इम्यूनो कॉम्प्रोमाइज पेशेंट गया और वो वहां का वो एयर जो नीचे की धूल है वो भी ऊपर हवा में ही आ रही है ना डस्ट या जो स्मोक बनके जो एरोसोल्स डेवलप होते हैं हमारा ड्रॉप न्यूक्लआई हमने छीका वो हमारा सोइल आया ऊपर आया उस आराम से उनको एक कैप्सूल मिल जाता है पैथोज्स को ग्रो होने के लिए और हमने उसको अगले ने एक्सहेल किया उसको बाहर किया हमने उसको इन्हेल कर लिया एयर पोलशन का ये भी बहुत होता है तो ये एक अवेयरनेस क्रिएट करने की बहुत जरूरत है कि कहीं कहीं पे अगर आप हंसिए, आप स्पिट करते हैं, आप स्नीजिंग करते हैं तो वो स्कूल में अपन बचपन से बोलते हैं कीप योर हैंकी ऑन योर माउथ ऑफ नोज। सो दैट हम दूसरों को नहीं बीमार करें। तो वो भी एक बहुत जरूरी है कि नॉट ओनली थ्रू ये इंडस्ट्री या
50:36 व्हीकल या जो फैक्ट्रीज है वही सारा गंदा करे। इवन एक सिंगल ह्यूमन बीइंग भी रिस्पांसिबल है एयर की केयर करने के लिए। नेक्स्ट करिएगा। अब इसमें माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स का क्या रोल है? नेक्स्ट यह देखिए माइक्रो ऑर्गेनिज्म आप देखिए दिख रहा है बायो रेमिडेशन ऑफ एयर पॉलटन बायोरेमडेशन की बात की थी प्लास्टिक कोई भी रेमेडी कोई भी जो एवान का जो ड्रॉबक है जो पॉलटेंट है उसका अगर हमको उपचार करना है उसका ट्रीटमेंट करना है थ्रू द बायोलॉजिकल ऑर्गेनिज्म पर हियर बायो बायो इज़ रिलेटेड टू दी माइक्रोबियलली सो बायोरेबिडेशन ऑफ़ द एयर पॉलिटेंस अब एक और वर्ड है इसके के देश में माइक्रो एल्ग फॉर
51:21 कार्बन डाइऑक्साइड सीक्वेस्टेशन ये बहुत इस पे बड़े-बड़े एनवायरमेंट ऑफ इंडिया के मिनिस्ट्री के बहुत बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स चलते हैं करोड़ों के कार्बन डाइऑक्साइड सीक्वेस्टेशन पर जो कि बहुत मेजर कॉज है जो अभी अटलांटिक और आर्कटिक और सबका ओशन देश जो है वो फिर से वापस आ रहे हैं अपनी ही तरफ तो ये कार्बन डाइऑक्साइड क्या होता है जो रिलीज होता है कार्बन डाइऑक्साइड का तो टेंपरेचर हाई करता है सब सबको पता होगा इवन आज बच्चों को भी पता है ग्रीन हाउस इफेक्ट का जो क्या ड्रॉबैक है और वो हीट को ट्रैप कर लेता है। कार्बन डाइऑक्साइड अगर ज्यादा होगा तो वो जो ग्रीन हाउस वो उसको ट्रैप कर देगा और जो अपना अभी गर्मी बढ़ रही है वी ऑल कैन फील इट। वो बताने के लाइव एग्जांपल है कि जो टेंपरेचर पहले कभी था नहीं जाता था बढ़ती जा रही है। बढ़ती क्यों जा रही है? बिकॉज़ ऑफ़ द कार्बन
52:07 डाइऑक्साइड एमिशन। तो माइक्रो एल्ग जो है वह बहुत अच्छा सोर्स है। वह उसको स्टोर कर सकते हैं। वो जो कार्बन डाइऑक्साइड को वो उसको स्टोर करते हैं। ये पता होगा प्लांट्स तो करते ही हैं। पर एक जो उनसे भी ज्यादा जो परसेंटेज ऑफ़ कार्बन डाइऑक्साइड सीस्ट्रेशन का है वो है माइक्रो ऑर्गेनिज्म उसको आराम से स्टोर कर लेता है। अच्छा उसी तरह से यीस्ट है। यीस्ट जो रहता है ये भी एक ग्रुप ऑफ माइक्रो ऑर्गेनिज्म है। यूनिसेल्यूलर वो है फंजाई है। ये क्या करता है? है पार्टिकुलेटर अभी बताया था ना जो एरोसोल ड्रॉपलेट न्यूक्लआई जो पैथोज्स रहते हैं एयर में तो ये उनको ट्रैप कर लेता है ये उनको यूज कर लेता है और बायो फिल्टर्स एंड ऐसे बहुत सारे बायोस्क्रबर्स और बायोफिल्टर्स तैयार कर रहे हैं जिसमें कि
52:53 जनरली एस्पेलस एक फंचाई होती है उसके इसी का बताया था अभी प्लास्टिक में भी और इसमें भी बायोफिल्टर्स उसको भी लार्ज स्केल पे उसका प्रोडक्शन प्रोसेस वो कर रहे हैं कि उसको एज अ बायोफिल्टर यूज़ कर ले जो अपन अभी ये लगाते थे ना सिंथेटिक मास्क N5 वाले एंट वाले तो ये अपने ऐसे फिल्टर्स अपन बना दे और कहीं भी कंपनी दर्पण कर देंगे तो वो फिल्टर करके वो देगा वो जो भी टॉक्सिन है उस एयर में वो उसको अब्सॉर्ब कर लेगा और अब्सॉर्ब करने के बाद में क्लियर या स्टेराइल एयर विल हैव मिथाइन गैस मिथाइनोट्रॉस बायोगैस जनरेशन में बहुत इंपॉर्टेंट रोल है सल्फर नाइट्रोजन ऑक्साइड रिमूवल करते हैं और एक इन सब पे रिसर्च चल रही है आईएससी बोर में तो और एक और है टेरी टीएफआरआई और टेरी में
53:38 शायद शायद इसके ऊपर दो जगह ये काम चल रहा है और बायोचार इज एक्चुअली हियर इट इज बायोचार को माइक्रोब्स के साथ प्लेस कर देते क्या होता है माइक्रोब्स शाइनी वेट वाले होते हैं ना तो वो बहुत ज्यादा यूज़ में उनको नहीं कर सकते हैं तो क्या करते हैं उसके साथ में अपन कोई भी ऑर्गेनिक बायोमास लाइक बहुत सारा प्लांट का हमारे पास में जो एग्रीकल्चरल वेस्ट अगर कुछ है तो उसको क्या करते हैं उसको चैिंग कर देते हैं हाई टेंपरेचर पे उसको बर्न कर देते हैं हीट करते हैं और उसके बाद उसका जो चैड प्रोडक्ट होता है उसमें हम माइक्रो ग्रुप से ग्रो करा देते हैं तो वो ज्यादा इफेक्टिव हो जाता है स्क्रबिंग एंड बायोफिल्टर्स में यूज़ करने के लिए और बहुत सारे ग्रुप ऑफ है जो एयर माइक्रोबियल फ्लोरा में भी दो सोइल इज द बेस्ट आई थिंक बट एयर में भी बहुत से है लाइक स्टडोमनास है बेसिलस है रोडोकस थायोबेसिलस एस्पिलस
54:25 विज़ेरियम क्लोरेला ग्रुप ऑफ फंजाई बैक्टीरिया और दीज़ ऑल आर वर्किंग कंटीन्यूअसली टू प्यूरिफाई टू रिड्यूस द एयर पोल्यूशन नेक्स्ट नेक्स्ट अब माइक्रोबल फ्यूल सेल्स उस पे भी काफी बातें हो चुकी है। सबका पर्पस है कि जो वेस्ट है उसको रिसाइकल किया जाए। सोर्स ऑफ रिन्यूएबल सोर्स कोई भी हम एनर्जी सोर्स ऐसा हो क्योंकि बहुत महंगा हो गया है ना पेट्रोल और एवरीथिंग। तो वो उसके लिए है ये है कि थोड़ा सा इसका एक ड्रॉबक ये आ रहा है जो भी माइक्रोबियल फ्यूल सेल है कि इसका जो सक्सेस रेट है इसका जो सक्सेस रेट है वो लैब में तो 90 टू 100% मिलता है कि
55:12 आप कोई भी एक जियोबक्टर है लाइक या बहुत से ऐसे बैक्टीरिया है तो उसके इलेक्ट्रोड सरफेस से हम वन टू 2 वोल्ट पर मीटर स्क्वायर में हम लाइट एनर्जी तो ले ले रहे हैं पर जब इंडस्ट्रीज में जाते हैं इलाज स्केल पे तो ये 90% का ये हो जाता है 30% तो इसके लिए अभी जरूरत है कि बड़ी-बड़ी क्योंकि लैब में ये सब वर्क हो रहा है हमारे इधर पे भी होता है डीआईसी में और पीएचडी भी हुई है लोगों की कि वो माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स के थ्रू दे आर जनरेटिंग दी क्लीन एनर्जी और वो बहुत सारी चीजें सर के वहां पे होता है कि उन्होंने ट्यूबलाइट और टॉर्च और बहुत सारा ये साइकिल वगैरह ये सब जो चलते हैं ना वो वो वाली चीजें की है बैटरी जनरेटेड इसके थ्रू इनके इलेक्ट्रोड्स माइक्रो ऑर्गेनिज्म को पेस
55:58 करके पर इसका जो सक्सेस रेट है इसमें अभी और बहुत काम करने की जरूरत है। नेक्स्ट एक इसमें केस स्टडी भी होगा। देखिए ये बहुत सुना होगा। एल्गी इज आल्सो अ जो बॉटनी के भी होंगे और उसके भी तो एल्गी वो जो हरा हरा दिखता है जो नहीं जानते हैं अगर दूसरे सब्जेक्ट के हैं तो बहुत कॉमन में आप कभी भी किसी नदी के किनारे जाइए और अगर किसी चट्टान पे थोड़ा भी पैर हमारा स्किप हो रहा है स्लिप हो रहा है तो डेफिनेटली मान के चलिए वहां पे एल्गी ग्रो कर रही है ब्रायोफाइट्स में वो पैर को जमाएगा पर वो स्लिप हो रहा है तो एल्गी कहीं भी अपन चाहते हैं अगर ग्रीन वाटर दिख रहा है हमको हरे कलर का या वाटर के ऊपर कुछ एक तो वो रहता तो तो अगर वाटर का कलर ऐसा कुछ दिख नहीं रहा हो पर वो ग्रीन है टोटली तो समझ के जाइए वहां पर
56:44 बहुत सारे प्लटोनिक पपुलेशन ऑफ एल्ग इस गोइंग तो एल्ग में क्या होता है ये बहुत एल्ग इज अ ग्रेट बायोफर्टिलाइजर ग्रेट उस पॉलटेंट एयर फिल्टर वगैरह में भी सब में काम आता है और एल्ग में कॉस्मेटिक इंडस्ट्रीज में बहुत ज्यादा इसका यूज़ होता है कॉस्मेटिक में होता है मेडिसिन में होता है जो मैल न्यूट्रिशन ये सब हमारे जितने भी पॉइंट्स है वो आपको बाद में बताएंगे जितने अपने 17 पॉइंट्स हैं 17 पॉइंट में एक भी ऐसा पॉइंट नहीं होगा जो माइक्रो ऑर्गेनिज्म के थ्रू नहीं कवर होता हो तो और सब में यूज़ हो रहा है तो जो अपना माइक्रो शायद सेकंड ही था वो जीडी वाला जो था तो कि हंगर जो पार्टी को तो और ऊपर स्पेस में भी इवन सोल्जर्स को भी स्परोना यू ऑल मस्ट हैव हर्ड बहुत पॉपुलर हुआ था कि मैक्सिमम प्रोटीन कंटेंट उसी में रहता
57:30 है तो और इवन छत्तीसगढ़ में तो ये हुआ था बीच में न्यूज़ में आया था कि हर एक को एंपावरमेंट के लिए भी मैंने एंपावरमेंट के लिए बोला था कि आप लोग अपना सेल्फ करिए तो सबने अपने घर के बाहर में गड्ढा करके और उसमें आधाआधा मट मटके को तोड़ करके और वो एल्गी को ग्रो कराते थे और प्रिमिटिव पीरियड में तो जो चाट वगैरह जो दूसरे शहर वो लोग एल्गी को ऐसे ले निकाल लेते थे पानी में से उसको खाते थे और उनको स्ट्रेंथ मिलती थी बीमारियां दूर होती थी तो एल्ग तो बहुत ही न्यूट्रिशन के लिए तो बेस्ट सोर्स है फर्टिलाइजर कंडीशनिंग करता है ग्रोथ को भी प्रमोट करता है उसका एक और जो अभी एडवांटेज ये अभी हाल में अब ये शुरू किया गया है कि वो अच्छा सोर्स हो सकता है बायोडीजल का भी एक जेथ्रोपा सुना होगा प्लांट जेथ्रोपा रतनजोत से भी पर इसमें इसमें क्या होता है? जो एल्ग है दे आर द एक्सीलेंट रिन्यूएबल फीड स्टॉक फॉर
58:17 बायोडीजल ड्यू टू देयर हाई लिपिड कंटेंट। इसमें लिपिड का कंटेंट बहुत हाई होता है। लिपिड होता है ऑयल में। एंड रैपिड ग्रोथ ग्रोथ भी बहुत जल्दी है। एंड एबिलिटी टू यूटिलाइज वेस्ट वाटर एंड कैप्चर। क्योंकि एल्ग को ग्रोथ के लिए फास्फेट एंड नाइट्रोजन चाहिए रहता है। पी एंड एन। और ये वेस्ट वाटर में बहुत अमाउंट में होता है। तो वेस्ट वाटर का भी सोश यूटिलाइजेशन होता है। कोई हमको अलग से कुछ माइक्रो ऑर्गेनिज्म का एक जो बहुत फायदा है इंडस्ट्रियल एप्लीकेशनेशंस में कि इनको आपको कुछ सिंथेटिक मीडियम की बहुत जरूरत नहीं है। जो कचरा है लिया ये उसके ऊपर ग्रो करेंगे। जो चीज जहां जिस तादाद में ज्यादा है ये उसके ऊपर ग्रो करेंगे। तो इनके लिए अलग से हमको कुछ कमर्शियल उसके करने की जरूरत नहीं पड़ती है। तो बायोडीजल डिराइव फ्रॉम एल्ग इज अ सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टू फॉसिल फ्यूल। फस्टिफ्यूल पे भी बहुत ज्यादा आ रहा है कि बहुत ज्यादा पोलशन कॉज करें। इसको हमको मिनिमाइज करना
59:03 है। इसका अल्टरनेटिव देखना है। तो जो एल्ग का बायोडीजल है इट कैन बी एन अल्टरनेटिव टू दी कॉस्टल फ्यूल। व्हाई एल्ग? एल्ग बिकॉज़ ऑफ़ द हाई लिपिड कंटेंट फास्टर ग्रोथ एंड टेरेस्ट्रियल क्रॉप नॉन फूड सोर्स। इसमें जो लेते हैं बायोडीजल में हाई लिपिड वाला अपन नहीं करते। हम हाई प्रोटीन वाले को खाने में यूज़ करते हैं। तो नॉन फूड सोर्स अवॉयडिंग फूड व फ्यूल कांटेक्ट। यह नहीं होगा कि वो खाने वाली चीज को आप फ्यूल मिला रहे हैं। तो कोई इस तरह की कोई बात नहीं होगी। और ये इसका प्रोसेस स्टेप है। वेरी इजी नो। सो इसमें सिर्फ हमको क्या करना है? जो लिपिड है उसको हम अल्कोहल में मिलाते हैं। और ये बायोडीजल का काम करते हैं। सुना होगा। प्लस ग्लिसरॉल। अभी ही वो आ गया है फिर से कि गैसलीन ऐड कर सकते हैं। पेट्रोल पंप वालों
59:50 को परमिशन दिया गया है। पर वो भी आ रहा है कि वो कॉरपोरेटर को भी नुकसान कर रहे हैं। लॉन्ग टर्म पे सक्सेस रेट लोग उस पे बहुत सारे विवाद खड़े हुए हैं। पर ये एल्गी वाला अगर अपन यूज़ करेंगे ना तो वो कोई नुकसान नहीं करना है। एंड उसमें पर जो चैलेंजेस है फिर बताया था हाई प्रेडिक्शन कॉज ड्यू टू कल्टीिवेशन हार्वेस्टिंग एक्सट्रक्शन थोड़ा डिफिकल्ट होता है। प्योर फॉर्म मेंटेन करना कंटमिनेशन ना आए। जब हम ग्राउंड पे ले जा रहे हैं चीजों को तो वहां पे और जो इसका बाय रिएक्टर्स वगैरह जो यूज करते हैं वो थोड़ा सा डिफिकल्ट है उसको इसका इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन सेटअप करना पर किया था अपने यहां तो उतना नहीं सक्सेस हो पाया इंडिया में पर है बाहर कुछ कंट्रीज में इनको कर रहे हैं इजराइल में चाइना में कल्टीवेटिंग एल्गी और पर एल्गी बहुत ईजीली बायोमास में आ जाती है लैब में
1:00:36 अपन कल्टीवेट करेंगे तो बहुत ईजीली आ जाता है और नेक्स्ट करिए एक और है सेम वही है एनर्जी सोर्स का दैट इज द हाइड्रोजन गैस इसके पहले वाला हाइड्रोजन गैस था फ्रॉम प्रोडक्शन फ्रॉम साइनोबक्टीरिया तो साइनोबक्टीरिया भी वही है एल्ग है ब्लू ग्रीन एल्ग है वो एल्ग मेन से था ये आपका ब्लू ग्रीन एल्ग से हम हाइड्रोजन को प्रोड्यूस कर सकते हैं और हाइड्रोजन जो है वो हमारे फ्यूल जेट में भी और सब में वो एज अ सोर्स ऑफ फ्यूल हम उसको यूज कर सकते हैं। और क्लीन एनर्जी की तरफ एक बहुत अच्छा रिप्रेजेंट करता है। एक प्रॉमिसिंग स्टेप है फॉर टुवर्ड्स द क्लीन
1:01:24 एनर्जी ऑलदो चैलेंजेस एडवांसमेंट इन बायोटेक्नोलॉजी एंड बायोरेक्टर सेम थिंग बिकॉज़ बायोरिएक्टर की डिजाइनिंग उतनी जितना कि बैक्टीरिया के केस में हो चुका है। बैक्टीरिया में बहुत से जितने भी इंडस्ट्रीज है आप राइट फ्रॉम दी हमारा अल्कोहल ले ले सॉल्वेंट ले लें। उसके बाद में विटामिंस है, कॉस्मेटिक्स है, जितनी भी एंटीबायोटिक्स हैं, जितने भी हमारे अमीनो एसिड्स हैं, वो सब इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन इनके सबके होते हैं विथ द हेल्प ऑफ द माइक्रो ऑर्गेनिज्म है। माइक्रो ऑर्गेनिज्म का फिर आप हमेशा याद रखना कि माइक्रो ऑर्गेनिज्म इटसेल्फ इज़ नॉट डूइंग एनीथिंग। बिकॉज़ दे डोंट हैव एनीथिंग। उनके दांत नहीं है, हाथ नहीं है, पैर नहीं है। बट माइक्रोबल एंजाइम्स एक्चुअली। तो माइक्रोबियल एंजाइम्स आर प्लेइंग देयर रोल। वो एंजाइम्स के ऐसा कुछ ना कुछ एंडो होते हैं जो वो अपने आप ही एंजाइम बाहर दे देते हैं और एंजाइम उनके वो जो रिव्यूज
1:02:10 होती है होती है वापस उनके पास आ जाती है। तो माइक्रोबियल एंजाइम्स के एज पे ये बहुत सारी इंडस्ट्रीज हैं। सारे प्रेडिक्शन कर रही हैं और उसमें एल्ग के में थोड़ा सा मुश्किल आता है क्योंकि इसके बाय फिलामेंटस है ना तो वो थोड़ा सा ना कई बारी मशीन को चोक करता है आता है तो उसके भी कुछ अल्टरनेटिव कर रहे हैं कि उस हिसाब से डिजाइनिंग हो इसलिए थोड़ा सा डिफिकल्ट आ रहा है लार्ज स्केल सेटअप में। नाउ नेक्स्ट एक और एग्जांपल दिया हुआ है हमने शायद इसमें अभी लगाया था आपने गोवर्धन वाला। ये देखिए ये इंदौर का ही है बायोसीएनजी बायोसीएनजी इज अ और क्या है इसका थोड़ा सा कंप्रेस्ड फॉर्म है एल्ग का उसका सॉरी बायोगैस का है ना जिसको कि अपन उसमें सिलडर्स करते हैं मोटर व्हीकल वगैरह में यूज़ होता है और इसके प्रेडिक्शन
1:02:55 को बढ़ाने के लिए बता रही है कि गवर्नमेंट भी इन सब चीज में बराबर से इंटरेस्ट ले रही है वो देखिए रजिस्ट्रेशन यूनिफाइड रजिस्ट्रेशन पोर्टल चालू किया हुआ है कि जिनको भी अगर इस तरह का वो तो सेटअप या स्टार्टअप के लिए दे रहे हैं आप खुद स्टार्ट करना चाहते हैं तो एक यूनिफाइड रजिस्ट्रेशन पोर्टल शुरू किया हुआ है और यह जो है ये इंदौर का है मिनिस्ट्री ऑफ़ जलशक्ति डिपार्टमेंट ऑफ़ ड्रिंकिंग वाटर एंड सनिटेशन कि ये जितने भी चीज़ तैयार हो रहे हैं ये दे आर प्रिपेयरिंग और प्रोड्यूसिंग ऑल दिस थिंग ऑन द कॉस्ट ऑफ़ द वेस्ट वाटर। कुछ अलग से हमको नहीं चाहिए। वेस्ट वाटर का कन्वर्शन हो रहा है इन द सोर्स ऑफ बायोडीजल या बायोफ्यूल या फिर सीएनजी के फॉर्म पे या फिर बायोगैस के फॉर्म पर। नेक्स्ट अब इसमें जो चैलेंजेस और लिमिटेशंस है अभी
1:03:44 हर बार हमने वैसे बताया है और अगेन इट इज गिवन देयर दैट इज द प्रोसेस ऑप्टिमाइजेशन लैब में हो पा रही है चीजें जब वही लार्ज स्केल पे ले जाते हो तो थोड़े से चैलेंजेस है और कॉस्ट इफेक्टिवनेस क्योंकि कोई चीज वैसे तो इन माइक्रो ऑर्गेनिज्म को नहीं चाहिए बट माइक्रो ऑर्गेनिज्म जब सब्सस्ट्रेट को प्रोडक्ट में कन्वर्ट करता है और प्रोडक्ट को जब हम मार्केट में लाते हैं उसके पहले हम उसकी जो भी प्रोसेस करते हैं पैकेजिंग होता है, प्यूरिफिकेशन होता है, टेस्टिंग होती है, उसके बाद में वो किसी एक ब्रांड फॉर्म में मार्केट में आता है। वो सब प्रोसेस का भी कॉस्ट बहुत ज्यादा हो जाता है। तो वो महंगा पड़ता तो लोग अवॉइड करते हैं कि हम बना। पर इसमें फिर भी है कि हम जितनी उसमें लागत लगा रहे हैं हमको उसमें फायदा ही होना है। उससे मुनाफा होना है। पर वो चीजें थोड़ी सी वो
1:04:29 थोड़ा सा और उसको कंट्रोल करना पड़ेगा। या तो वो बोल दे कि जो ऑर्गेनिक है या जो उस हम टैक्स नहीं लगेगा। तो मे बी शायद ये चीजें और सक्सेसफुल हो जाए। लोग उसके ऊपर इंटरेस्ट दे। पब्लिक एक्सेप्टेंस इज वेरीेंट। लोग नहीं पीते हैं गिलोय का। अभी कितने कब से चल रहा है गिलोय का? स्पेरोलना के टेबलेट काफी टाइम पहले से आ चुके हैं। और वो जो है ऋषि जेनी वगैरह ये कितने ऐसे प्रोडक्ट्स हैं मशरूम के लिए लोग नई नॉनवेज है नहीं अवॉइड करते। तो पब्लिक का एक्सेप्टेंस इस वेरीेंट। लोग डरते हैं जबकि ये चीजें टेस्ट हो के आती है। कॉस्मेटिक्स यूज़ कर रहे हैं। कितने सारे एल्ग के शैंपूस हैं, पाउडर है, लिपस्टिक्स है, ब्रांड नेम्स में है। बायो करके देखिए जितने रहते हैं वो सब में या तो प्लांट है या ये बैक्टीरिया में इनवॉल्व है। एल्ग इनवॉल्व है। तो ऐसे बहुत सारे प्रोडक्ट है। एंटीबायोटिक अपन खा
1:05:15 लेते हैं। पर अगर वही चीज हम किसी सॉल्यूशन फॉर्म में देंगे कि ये ले लीजिए। स्पाइना का पानी है। इसको पी लीजिए। नहीं नहीं लेंगे लोग। तो पब्लिक का एक्सेप्टेंस ही बहुत जरूरी है। जब डिमांड बढ़ेगी तो फिर वही है कि प्रोडक्ट आएगा। और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क ऑब्वियसली डेवलपिंग क्लियर एंड सपोर्टिव रेगुलेशन फॉर द रिसोंसिबल डिप्लॉयमेंट ऑफ़ जेनेटिकली मॉडिफाइड माइक्रोस क्योंकि मना कर दिया था। बताया था इनिशियली देते थे। पर फिर लोगों ने केस लगाया था जो वहां के जो केस किसान होते हैं ऑब्वियसली उनको लॉस उनको लगता है ये लोग तो लाके कॉटन भी अलग टाइप का ला रहे हैं। प्लांट की ग्रोथ भी अलग टाइप की ला रहे हैं। तो उसको हम कैसे कंट्रोल कर सकते हैं? तो उसके लिए फिर से सोचना पड़ेगा। और क्या टेस्टिंग होते थे ना पहले जैसे अपन ने कोई प्रोडक्ट बनाया माइक्रो ऑर्गेनिज्म के थ्रू तो उसकी जो इनिशियल टेस्टिंग होती थी दैट वी वर परफॉर्मिंग ऑन द एनिमल्स तो एनिमल्स वर इज़ली अवेलेबल नाउ अ डे दे हैव
1:06:01 बहुत स्ट्रिक्ट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क डिज़ाइन हो गया आप नहीं कर सकते हैं वो पेटा वालों ने कर दिया सबने कर दिया तो आपको टेस्टिंग के लिए लोग नहीं मिल रहे है वालंटियर्स नहीं है तो थोड़ा सा डिफिकल्ट सिचुएशन यहां पे आ जाता है नेक्स्ट यह तो वही है इंसेंटिव इन्वेस्टमेंट इन आरएडी एंड पब्लिक एजुकेशन वही सेम ऑलमोस्ट सेम थिंग की पॉलिसीज जो पॉलिसी मेकर है उनको फिर से पॉलिसी बनानी पड़ेगी और जितने इंडस्ट्रीज है उनको बोलना पड़ेगा कि आप जैसे खाना कुपोषण हो रहा है या हेल्थ का इशू आ रहा है या जिसकी भी बात आ रही है तो उसमें हमको एक फिर से पॉलिसी फ्रेमवर्क इस
1:06:48 रिक्वायर्ड और जो स्टार्टअप के लिए देते हैं अब हो रहा है अभी सर हुआ था आईडिया हैकाथोन हुआ था उसमें आईडिया ले अब ये चीजें कर दी है खैर गवर्नमेंट ने काफी कुछ अपने यहां पे पर बहुत जगह पे अभी भी नहीं लागू है कि आप ले आइए और हम आपके आईडिया को हम आपको दे रहे हैं कि आप मेडिसिन वो बनाइए साबुन बनाइए परफ्यूम बनाइए अगरबत्ती बनाइए और बहुत सारे कैंडल्स बनाइए एंड यू कैन यूज़ द माइक्रोब्स पर वो वही चीज है कि एक्सपर्टाइज है अगर सब कोई अलऊ कर दिया तो थोड़ा सेंसिटिव इशू हो जाता है क्योंकि वही हमको दिख तो नहीं रहा है ना हमको दिखाई नहीं दे रहा हमने गलत आइडेंटिफिकेशन का और गलत से गलत चीज कर दी तो वो और मुश्किल हो जाएगी तो बहुत केयरफुल इसमें रिसर्च की जरूरत है सिर्फ एक रिसर्च टेस्टिंग के बाद ही आप बाहर ले आ सकते हैं माइक्रोब्स की कोई चीजों को हां कंपोस्ट वगैरह बना लेते हैं अपन वर्मी वो जो
1:07:34 कंपोस्ट होता है बायोफर्टिलाइज़र्स होता है वो तो बन सकता है पर जो अगर कोई प्रोडक्ट जो कि डायरेक्ट ह्यूमन यूज़ में है उसके लिए थोड़े से और पॉलिसी फ्रेमवर्क की जरूरत है और इन्वेस्टमेंट की जरूरत नेक्स्ट एक ये बताया था कि अभी ही शुरू अभी गए थे जो लोग स्पेस में कि स्पेस में एक कल्पना चावला जी का एक हुआ था शी वास आल्सो माइक्रोबियोलॉजिस्ट और उनका पेन वापस ही नहीं आ पाया था और वही पर्पस था कि चंद्रमा में लाइफ पॉसिबल है या नहीं अब तो मार्स में लाइफ पॉसिबल है या नहीं तो यह पॉसिबल है या नहीं यह चीज सिर्फ पहले एक बहुत एक लाइक एक कोई डॉग को ले गए थे वहां पे देखने के लिए पर डॉग से नहीं हमारा तो
1:08:22 सीधा क्योंकि जो सबसे लिविंग ऑर्गेनिज्म की जो सबसे सिंपल यूनिट है वो माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स होते हैं। तो माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स को अगर हमने स्पेस में दिया तो फर्स्ट थिंग दे आर एडप्टल रेज़िलियंट एंड मेटाबॉलिकली डवर्स है ना दे आर द कैपेसिटी टू अप देमसेल्व्स टू एनीवेयर। सेकंड थिंग ऑक्सीजन प्रेडिक्शन नहीं है वहां पे। तो एनरोप्स भी होते हैं। और अगर हम चाहते हैं कि हमको वहां पर ऑक्सीजन प्रोड्यूस करना है। एरोप्स है तो साइनोबक्टीरियल अल्गी तो है। अभी आपको बताया था बहुत अच्छा सोर्स है। कार्बन डाइऑक्साइड सीक्वस्टेशन का और कार्बन डाइऑक्साइड का जो एमिशन है ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए यूज कर रहे हैं। पर साथ में वो हमको ऑक्सीजन भी दे रहा है। तो साइनोबक्टीरिया को हम रख सकते हैं। वहां पे कार्बन डाइऑक्साइड फिक्सेशन के लिए कर सकते हैं। वाटर जो साइकिल होती
1:09:07 है तो कुछ ऐसे जो बैक्टीरिया है उनको आप वहां पे ले जाके रख सकते हैं। दूसरा बताया था सपोर्ट फूड प्रोडक्शन। तो अब जो जाते हैं तो अभी भी है कि जो शियाश वगैरह ग्लेशियर्स पे जो सोल्जर्स खड़े होते हैं खाना हर दिन पहुंचाना पॉसिबल नहीं होता है तो सबको स्पिनना देते हैं गवर्नमेंट देते हैं कि आप रखे रहिए और इसको खा लीजिए दिन में तो आपको जितना दिन भर का नॉट ओनली प्रोटीन व्हाटएवर न्यूट्रिएंट एलिमेंट यू आर रिक्वायरिंग फॉर अ डे वो सबको फुलफिल कर देगा और वो एक्टिव रखता है तो सिंगल सेल प्रोटीन ऐसे और बहुत सारे ऐसे प्रोडक्ट आ गए नॉट ओनली स्पाइनल जो कि उसमें ग्रो कर आराम से ग्रो करने देते हैं। फर्मेंटेशन फॉर विटामिन प्रोबायोटिक्स वो आप तो प्रोबायोटिक लेके चलिए। छोटे-छोटे सेशन में लैक्टोबसिलाई आ जाते हैं। वो योकू है। बहुत सारे प्रोडक्ट्स मार्केट में अवेलेबल है। जो कि
1:09:54 आपको बताया था व्हिच मेंटेनेंस द गट हेल्थ। एंड ग हेल्थ क्या करेगा? क्या करेगा? अगर हमारा गट हेल्थ अच्छा होगा। इट विल नॉट अलाउ द पैथोज्स टू बी देयर। वो पैथोजन से लड़ाई करके उनको मार देगा। बट व्हेन वी टेक एंटीबायोटिक और या फिर खाने पीने का रूटीन करते हैं। वो हमारे ग माइक्रोबायोटा डिस्टर्ब होते हैं। जिनको जो बाहर से तो हजारों दुश्मन भी होते हैं हर जगह वो एंटर कर जाते हैं। फिर वो अपना काम करना शुरू करते हैं। नेक्स्ट नेक्स्ट करिएगा। एक क्रिस आर भी आया था। क्रिस्प आर दैट इज द क्लस्टर्ड रेगुलरली इंटरस्पेस्ड शॉर्ट पैलेंड्रोमिक रिपीट्स। और ये बहुत इंपॉर्टेंट है बिकॉज़ ये इट अब रीसेंट में आया है कि इट शोस द अप्टिव इम्यूुनिटी सिस्टम ऑफ द बैक्टीरिया। जो बैक्टीरिया
1:10:39 होते हैं जब उनका जीन एनालिसिस किया था तो देयर देख पाओ कि उसमें कई सारे जो सीक्वेंस थे वो रिपीटीशन में थे। कुछ जो उनका डीएनए का सीक्वेंस होता है एक अरेंजमेंट था वो रिपीटीशन में होता था। तो वो रिपीटीशन क्या हुआ था? बैक्टीरिया ने अपने आप को वायरस से बचाने के लिए। सोचिए उनके में यह भी सेंसिंग मैकेनिज्म है कि जो हमको नुकसान कर सकता है हम उससे बचाने के लिए अपने आप में चेंज ला और मतलब बहुत अनइमेजनेबल बात है कि ये चीज हमको नुकसान करे इसके लिए हम अपने आप को इस ढंग से चेंज कर ले हम बाहर से कुछ नहीं मांगेंगे हमने अपने ही रिपीट सीक्वेंस बार-बार ला दिए और हमने उन सीक्वेंस को ऐड कर दिया जहां पे कि वायरस अटैक कर सकता है। तो उसका ये पूरा टाइमलाइन दिया हुआ है कि 1987 में फर्स्ट टाइम इसको इकोलाई में ऑब्जर्व किया था। इकोलाई लैब
1:11:25 एक्सपेरिमेंटल बैक्टीरिया मानी जाती है। 2002 में उसको टर्म दिया था क्रिस्प आर एंड स्पेसर फाउंड मैचिंग वायरल डीएनए सजेस्टेड इम्यून रोल। तो वो उसने अपने आप को वायरस किया। एंड एक्सपेरिमेंटल प्रूफ ऑफ इम्युनिटी स्टप्टोकस थर्मोफेलस। और ये बहुत मेजर जीन एडिटिंग टूल में हम इसको यूज़ कर सकते हैं। मतलब जब भी हमको जीन एडिट करना होता है तो ये इट इज़ अ टेक्नोलॉजी दैट कैन बी अप्लाई टू एनी माइक्रो ऑर्गेनिज्म। बताया था जीन एडिटिंग की जरूरत कब पड़ेगी जब हमको लग रहा है कि हम तो इससे ये बहुत तादाद में और हमको इसका यूटिलाइजेशन करना है अपने यूज़ में इस तरह से तो माइक्रो ऑर्गेनिज्म के लिए कोई रेगुलेटरी फ्रेमवर्क नहीं है। आप जितना चाहे जैसा चाहिए जहां चाहिए यूज़ कर लीजिए। जितना चाहिए ग्रो कराइए जितना चाहे वेस्ट में फेंकिए। तो उसको आप यूज़ कर सकते
1:12:11 हैं अपने उसमें एज अ टूल टू कैरी आउट द वेरियस डेवलपमेंटल प्रोसेससेस। नेक्स्ट अब यह थे सस्टेनेबल गोल जिस अभी आपका चल रहा होगा रिफ्रेशर काफी टाइम से। अब इसमें देखिए मोस्टली जो है हमारा इसमें आपको क्रिस पावर का हम रोल बता देते हैं। क्रिस पावर हमारा इसमें जाता है टू में भी और जीरो हंगर में जीरो हंगर में जाएगा क्योंकि हम जो क्लाइमेट रेिलिएट क्रॉप्स हैं और या किसी भी क्रॉप के हम न्यूट्रिशनल वैल्यू को भी मान लीजिए कोई किसी लोकालिटी में वहां पे एक कोस्टल एरिया वहां फिशेस ज्यादा है और एग ज्यादा और इन केस वहां पे वो अभी सी वाला अलग है पर या अगर जिधर भी हम रह रहे हैं वहां
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