12.09.2025 PROF NEERJA

MM-TTC, RDVV, Jabalpur www.youtube.com

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो भोजन और पोषण के महत्व पर प्रकाश डालता है, खासकर कोविड के बाद। यह टिकाऊ पोषण और टिकाऊ वातावरण के बीच संबंध पर जोर देता है, और यह बताता है कि हमारी भोजन पसंद पर्यावरण को कैसे प्रभावित करती है। यह वीडियो जंक फूड के सेवन को कम करने और स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थों को चुनने के महत्व पर भी प्रकाश डालता है।

मुख्य बातें:

  • टिकाऊ पोषण और पर्यावरण के बीच संबंध
  • जंक फूड के सेवन को कम करने का महत्व
  • स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थों को चुनने का महत्व
  • भोजन की योजना बनाने और भोजन की बर्बादी को कम करने का महत्व
  • पोषण लेबल को पढ़ने और समझने का महत्व

परिचय

डॉ. संध्या शर्मा डॉ. नीजा श्रीवास्तव का परिचय देती हैं, जो वनस्पति विज्ञान विभाग, गवर्नमेंट पीजी कॉलेज कोटा में प्रोफेसर हैं। डॉ. श्रीवास्तव को शिक्षण और अनुसंधान में 25 से अधिक वर्षों का अनुभव है, और उन्होंने माइक्रोबायोलॉजी और प्लांट साइंस के विभिन्न क्षेत्रों में यूजीसी और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं पर काम किया है। उन्होंने 45 से अधिक शोध पत्र और लेख प्रकाशित किए हैं, और माइक्रोबायोलॉजी और प्लांट साइंस से संबंधित 12 पुस्तकों की लेखिका हैं। उन्हें वीएमओयू कोटा और इग्नू नई दिल्ली के काउंसलर के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।

पोषण और पर्यावरण

डॉ. नीजा श्रीवास्तव पोषण के बारे में अपने विचार साझा करती हैं, क्योंकि वह मूल रूप से वनस्पतिशास्त्री हैं, इसलिए वह इस पोषण को पर्यावरण से जोड़ना चाहती हैं। कोविड के दौरान और उसके बाद टिकाऊ पोषण बहुत महत्वपूर्ण है। हमें पोषण, आहार और भोजन के बारे में सब कुछ पता होना चाहिए।

अस्वास्थ्यकर भोजन विकल्प

आजकल लोग आसानी से ऑनलाइन खाना ऑर्डर कर देते हैं, जैसे कि समोसे, पेस्ट्री, पिज्जा या बर्गर, जो जंक फूड हैं और स्वास्थ्य के लिए अच्छे नहीं हैं। डॉ. श्रीवास्तव पूछती हैं कि क्या कभी किसी को जंक फूड खाने के बाद अपराधबोध हुआ है, और क्या हमने कभी सोचा है कि जो खाना हमने ऑर्डर किया वह सही था या नहीं।

भोजन, पोषण और टिकाऊ पोषण के बीच अंतर

हम सभी आहार के बारे में जानते हैं, लेकिन टिकाऊ पोषण या टिकाऊ आहार के बारे में बहुत कम जानते हैं। टिकाऊ पोषण टिकाऊ पर्यावरण से निकटता से संबंधित है। भोजन, आहार या पोषण जिसका पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, उसे टिकाऊ पोषण के रूप में जाना जाता है। भोजन ऊर्जा और पोषण दोनों प्रदान करता है, लेकिन आजकल हम केवल ऊर्जा के लिए भोजन खा रहे हैं, पोषण के लिए नहीं।

भोजन के घटक

हम सभी कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन के बारे में जानते हैं, लेकिन ये किसी भोजन का एकमात्र हिस्सा नहीं हो सकते हैं। छोटे बच्चों की आवश्यकताएं अलग होती हैं, थोड़े बड़े बच्चों की अलग होती हैं, हमारी अलग होती हैं, और हमसे बड़े लोगों की अलग होती हैं। इन तीन चीजों के अलावा भी भोजन में हमें कुछ चाहिए। अगर हमें पोषण चाहिए तो हमें उसमें बहुत सारी चीजें जोड़नी चाहिए।

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन पर भोजन विकल्पों का प्रभाव

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के कारण जैव विविधता का नुकसान 36 से 45% हो गया है। उच्च आय वाले देशों में आहार से संबंधित पानी का उपयोग 25% है। प्लास्टिक की बोतलों के उपयोग से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। पहले हम घर से टिफिन में खाना लेकर जाते थे, लेकिन अब हम डिस्पोजेबल में ले जाते हैं। प्लास्टिक में गर्म भोजन पैक करने से नैनोप्लास्टिक हमारे शरीर में जा रहा है, जिससे पोषक तत्व खत्म हो रहे हैं।

टिकाऊ आहार

टिकाऊ आहार वह है जो स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देता है, पर्यावरण पर कम प्रभाव डालता है, सुलभ, किफायती, सुरक्षित और सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य है। टिकाऊ आहार का मतलब है कि हम जो कुछ भी खाएं वह वापस पर्यावरण में जाकर मिल जाए और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डाले।

टिकाऊ भोजन के लिए सुझाव

  • मौसमी भोजन खाएं।
  • आगे की योजना बनाएं।
  • अपना भोजन उगाएं।
  • स्थानीय उत्पाद चुनें।
  • पौधे आधारित उत्पाद अधिक खाएं।
  • अलग-अलग तरह का खाना खाएं।
  • भोजन की बर्बादी को कम करें।
  • पैकेजिंग मुक्त खाद्य पदार्थ खाएं।

स्वस्थ आहार के लिए विचार

स्वस्थ आहार खाते समय, हमें स्वास्थ्य, पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखना चाहिए। हमें अपनी हेल्थ का ध्यान रखना चाहिए कि हेल्दी है या नहीं, बैलेंस्ड है या नहीं और सेफ फूड है या नहीं। हमें एनवायरमेंट को भी देखना चाहिए कि हम जो खा रहे हैं जो हमारी डाइट है वो बायोडायवर्सिटी को प्रिजर्व कर रही है या नहीं, नेचुरल रिसोर्सेज को प्रिजर्व कर रही है या नहीं, सीजनल है या नहीं?

ऊर्जा आवश्यकताएँ और कैलोरी

सामान्य तौर पर, 30 से 50 वर्ष की आयु के पुरुषों को 2200 से 2400 कैलोरी की आवश्यकता होती है, और महिलाओं को 1800 कैलोरी की आवश्यकता होती है। यदि आप मध्यम रूप से सक्रिय हैं, तो पुरुषों को 2400 से 2600 कैलोरी की आवश्यकता होती है, और महिलाओं को 2000 कैलोरी की आवश्यकता होती है। यदि आप बहुत सक्रिय हैं, तो पुरुषों को 2800 से 3000 कैलोरी की आवश्यकता होती है, और महिलाओं को 2200 कैलोरी की आवश्यकता होती है।

कैलोरी गणना और बीएमआई

कैलोरी की गणना करने के लिए, यदि आपका बॉडी का वेट 50 ग्राम है, तो आपको 1 ग्राम प्रोटीन खाना है। कार्बोहाइड्रेट और वसा की भी आवश्यकता होती है। आप अपना बीएमआई भी निकाल सकते हैं। आपका वेट है उसको डिवाइडेड कर दें। आपकी हाइट मीटर स्क्वायर से वो आपका बीएमआई आ जाएगा।

पोषण लेबल

हमें न्यूट्रिशन लेबल्स पढ़ने आने चाहिए। किसी भी मटेरियल के पीछे लिखा है कैलोरीज। पर सर्विंग का मतलब यहां पर इसके दो पीस है। दो पीस में है। आपने दो पीस खा लिए तो कैलोरीज कितनी हो गई? 230।

भोजन चुनौतियाँ

आज की तारीख में एक तो बायोडायवर्सिटी लॉस हो ही रहा है। अनसस्टेनेबल फूड कंजमशन हम कर रहे हैं। डाइट रिलेटेड बहुत सारे इश्यूज हो रहे हैं और बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं कोविड के बाद। तो ये पपुलेशन ग्रोथ हो रही है। बहुत एनवायरमेंटल डिग्रेशन हो रहा है। फूड लॉस एंड वेस्टेज तो हो ही रहा है।

टिकाऊ भोजन के लिए भविष्य के सिस्टम

भविष्य के सिस्टम में हम एनिमल प्रोडक्ट, ग्रीन प्रोडक्ट्स, फंक्शनल फूड और फ्यूचर फूड्स खा सकते हैं। मशरूम का ट्रेंड बहुत ज्यादा है। अच्छा प्रोटी रिच फूड है।

टिकाऊ आहार पर प्रश्न और उत्तर

इस भाग में, डॉ. श्रीवास्तव दर्शकों के सवालों के जवाब देती हैं, जिनमें मधुमेह के लिए आहार योजना, एनीमिया के लिए खाद्य पदार्थ, शाकाहारियों के लिए ओमेगा -3 फैटी एसिड के स्रोत और गट स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के तरीके शामिल हैं।

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Transcript

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0:04 संध्या स्टार्ट यस सर >> वेरी गुड आफ्टरनून टू ऑल ऑफ यू माय नेम इज डॉक्टर संध्या शर्मा असिस्टेंट प्रोफेसर ऑफ बॉटनी गवर्नमेंट कॉलेज पथरिया दमोह मध्य प्रदेश फर्स्ट ऑफ ऑल आई वुड लाइक टू थैंक रेस्पेक्टर संजीव कुमार पांडे सर टू गिव मी दिस अपॉर्चुनिटी टू इंट्रोड्यूस आवर नेक्स्ट स्पीकर डॉक्टर नीजा श्रीवास्तव मैम थैंक यू सर। डॉ. नीजा श्रीवास्तव मैम इज वर्किंग एस प्रोफेसर इन डिपार्टमेंट ऑफ बॉटनी गवर्नमेंट पीजी कॉलेज कोटा। शी हैज़ मोर देन 25 इयर्स ऑफ एक्सपीरियंस इन टीचिंग एज वेल एज कंडक्टिंग रिसर्च। इन हर 25 इयर्स

0:50 ऑफ़ एक्सपीरियंस शी सुपरवाइज़ज़ मोर देन 16 पीएचडी स्टूडेंट्स एंड सेवन एमफिल स्टूडेंट्स। शी हैज आल्सो वर्क्ड ऑन अ यूजीसी एंड डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी फंडेड प्रोजेक्ट ऑन डिफरेंट फील्ड्स ऑफ माइक्रोबायोलॉजी एंड प्लांट साइंसेस। शी हैज़ पब्लिश्ड मोर देन 45 रिसर्च पेपर्स एंड आर्टिकल्स इन जनरल्स ऑफ इंटरनेशनल एंड नेशनल रिप्यूट। शी इज़ द ऑथर ऑफ 12 बुक्स रिलेटेड टू माइक्रोबायोलॉजी एंड प्लांट साइंस। आई एम हैप्पी टू शेयर दैट शी इज रिकॉग्नाइज्ड एस काउंसलर ऑफ वीएमओयू कोटा एंड इग्नू न्यू दिल्ली। शी गॉट बेस्ट टीचर अवार्ड गिवेन बाय द हायर एजुकेशन

1:36 डिपार्टमेंट गवर्नमेंट ऑफ राजस्थान एंड आल्सो अवार्डेड द बेस्ट वुमेन साइंटिस्ट अवार्ड फ्रॉम डीएसटी राजस्थान। लास्ट बट नॉट द लीस्ट शी इज द इनोवेशन एंबेसडर ऑफ आईआईसी गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एंड आल्सो रिकॉग्नाइज्ड आईपीआर एक्सपर्ट ऑफ डीएसटी राजस्थान वेलकम मैम प्लीज टेक अ फोरम एंड एनलाइट अस वेलकम >> थैंक यू मैम थैंक यू संध्याय मैम >> संजीव सर अगेन आई वुड लाइक टू थैंक यू फॉर इनवाइटिंग मी एंड दिस टॉपिक आवाज माइक माइक बंद हो गया माइक संदीप सर आई एम वेरी थैंकफुल बिकॉज दिस टॉपिक इज वेरी क्लोज टू माय हार्ट अच्छा

2:25 >> माइक क्यों बंद हो जाता है मैडम का >> हां ठीक अब ठीक >> ठीक है सर >> बिकॉज़ इट इज वै क्लोज रिलेटेड टू माय हार्ट व्हेन आई ऑलवेज एगर टू शेयर माय एक्सपीरियंसेस एंड ऑल द थिंग्स रिलेटेड टू द न्यूट्रिशन बिकॉज़ इन नाउ डेज द न्यूट्रिशन एंड द हेल्थ एंड ऑल द डाइट रिलेटेड इशज़ आर द बर्निंग प्रॉब्लम्स। सडनली हार्ट अटैक होना, सडनली कुछ भी हो जाना। तो इस पे बात करना मुझे हरदम से अच्छा लगता है। आपने जरा ओपोरर्चुनिटी मुझे दी और मैं यहां शेयर करना चाहूंगी कि आई एम द डायबिटिक एजुकेटर ऑफ गवर्नमेंट ऑफ इंडिया। डायबिटिक एजुकेटर की जो मैं रिसोर्स पर्सन हूं जो इंडिया की गवर्नमेंट से चलता है। तो मैं कुछ न्यूट्रिशन के

3:12 बारे में फूड एंड न्यूट्रिशन स्पेशली प्लांट बेस्ड जितनी भी डाइट्स होती हैं और नाउ डेज आफ्टर द कोविड इट इज़ वेरीेंट टू नो आवर डाइट एंड ऑल द न्यूट्रिशन रिक्वायरमेंट ऑफ आवर बॉडी। सो सर विद योर परमिशन शुड आई स्टार्ट? सर आपकी आवाज नहीं आ रही सर। >> एक मिनट बस मैं आपको करता हूं। >> सर शेयर का भी इशू >> हां मैं कर सकते हैं मैडम आप।

3:59 >> सर वििबल है। सरिबल हैिबल हैिबल करना पड़ेगा >> ठीक है माइक आवाज आ रही है ना सर >> यस यस मैम आ रही है >> यस मैम आ रही है वेलकम मैम नीजा मैम >> थैंक यू मैम सो डू आई वांट टू शेयर माय व्यूज और माय नॉलेज रिलेटेड टू ऑल अबाउट द न्यूट्रिशन बिकॉज़ आई एम बेसिकली बॉटनिस्ट सो आई वांट टू रिलेट दिस न्यूट्रिशन टू द एनवायरमेंट सस्टेनेबल एनवायरमेंट एंड व्हाट द सस्टेनेबल न्यूट्रिशन वी शुड नो अबाउट द न्यूट्रिशन एंड मोस्टेंट एज़ ऑलरेडी आई सेज़ दैट ड्यूरिंग द कोविड एंड आफ्टर द कोविड द

4:47 सस्टेनेबल न्यूट्रिशन इज़ वेरीेंट व्हाट व्हाट वी ईट एंड व्हाट वी वांट टू ईट एंड व्हाट आवर न्यू जनरेशन वांट टू इट इट इज़ वेरीेंट दैट वी शुड नो ऑल अबाउट द न्यूट्रिशन डाइट एंड फूड। सो क्या हो सकता है? कैसे सस्टेनेबल न्यूट्रिशन हो सकता है? क्योंकि यह जो रिफ्रेशर कोर्स है आपका ये जो है सस्टेनेबल एनवायरमेंट से रिलेटेड है। आई थिंक फ्रॉम द लास्ट लास्ट 10 डेज यू मेयर नोज़ अबाउट द सस्टेनेबल न्यूट्रिशन। तो इसके बारे में बात करना चाह रही हूं मैं। जस्ट फील दिस इज़ द टाइम। 12:30 बज रहे हैं। 1:00 बज रहा है। हमें भूख लग रही है। हम चाहते हैं कि ठीक है आई एम हंग्री। आई वांट टू ईट समथिंग। अगर हम

5:32 वर्क प्लेस पर है कहीं इंस्टट्यूट में तो एक ही चीज आती है। घर पे भी खाना नहीं बनाना चाह रहे। बहुत हमारी तो स्नैकिंग मंचिंग की इच्छा हो रही है। तो वी गो जस्ट जल्दी से हम अपना फोन ऑन करते हैं। जो हमें टुगेस्ट स्वैगी गए और जल्दी से हमने कोई भी स्नैक ऑर्डर कर दिया। समोसा हो सकता है, पेस्ट्री हो सकती है, पिज़्ज़ा हो सकता है, बर्गर हो सकता है। जहां तक मैं सोचती हूं, जब कभी भी हम जोatो SWGI से ऑर्डर करते हैं तो हम रोटी दाल तो नहीं करते कम से कम। बहुत रेयरली मंचिंग करते हैं। तो ठीक है आपने जोatोगी से ऑर्डर कर लिया। आपको भूख लगी थी। आपने कुछ भी खाया। अब वी ऑलरेडी नोस दैट दी आर द जंक फूड एंड दी आर द नॉट वेरी हेल्दी टू आवर हेल्थ। लेकिन

6:20 फिर भी हम खाते हैं। लेकिन खाने के बाद क्या आपको कभी गिल्ट हुई है कि नहीं नहीं हमें तो नहीं खाना चाहिए था। क्यों नहीं खाना चाहिए था? क्या वह फूड सही था जो हमने आर्डर करा और खाया? क्या कभी हम मैम आपकी आवाज नहीं आ रही है। >> आवाज नहीं आ रही है मैम। >> शेयर भी बंद हो गया। >> वो लगता है वो चला गया होगा उनका।

7:08 बात कहीं वो बोलती ना जा रही हो

8:10 चला गया चला गया चला >> सर जॉइन कर लिया मैंने >> ठीक है ठीक ठीक है। >> जी मैडम कहिए। दिख रहा है >> दिख रहा है ना >> यस >> मैम

9:04 >> वो जोatो या sविg से जो भी कुछ हमने ऑर्डर रखा रहा वो अनहेल्ी था अनहेल्ी तो हमारे लिए था लेकिन क्या वो सस्टेनेबल फूड था क्या उसका जो न्यूट्रिशन था >> कट गया >> इसके पहले नेटवर्क का इशू है कोई तो मैडम तो जॉइ कर आप लोग तो ऐसा किया कीजिए जंक फूड बहुत खाया कीजिए। हां। उससे क्या होता है कि आप आपका आपकी

9:50 तयत खराब हो गई तो कम से कम छुट्टी तो मिलेगी कॉलेज से। है ना? मेडिकल की छुट्टी मिलेगी। फिर उसके बाद 10 लोग आपको फिर आएंगे पूछने पानी पी लो, चाय पी लो आराम। फिर आप फोन आएगा सर तयत कैसी है? देयर इज अ लॉट ऑफ बेनिफिट। है ना? बहुत सर >> कहां सर गवर्नमेंट कॉलेज में तो कहां बेनिफिट है आपके पेंडिंग इतने पढ़ जाते हैं वो अपने मार्क लेटर जब हम वापस आते हैं तो वो 10 की जगह और 1520 मिल जाते हैं मार्क लेटर के अभी आपको ये सब भी करना है >> तो संध्या मैडम आप जंक फूड मत खाइए ठीक है >> यस सर सर जंक फूड खाने नहीं भी खा रहे तो भी हेल्थ इतनी हो रही है कि खाएंगे तो कितनी होगी

10:35 >> तो लीव तो हमारी ही तोगी ना जो मेडिकल लीव है ऐसे तोेंगे नहीं >> नहीं जिनको प्रॉब्लम है वो तो मत खाएं जिनको नहीं है प्रॉब्लम वो खूब खाएं ठीक है जयश्री ने तो आज ही दिन का मंगाया है जोatो से >> सर बिना बीमार हुए भी मिल जाती है मेडिकल ड >> अच्छा वो तो फिर वो तो इललीगल है बड़ी मुसीबत है। बेचारे को शरीर को चार घंटे चाहिए होता है फूड को पूरी तरीके से अब्सॉर्ब करने के लिए। वो बेचारा करता रहता है। उसके बाद पीछे से फिर कुछ चला

11:21 गया। तो फिर वो बेचारा उसमें लग जाता है। लगातार वो उसमें भिड़ा रहता है कि शरीर के साथ में लगा रहे लगा रहे लगा रहे। बालकिशन जी >> हाई एफिशिएंसी के साथ काम करवाते हैं सर। हम बालकिशन जी थोड़ा ठीक से आप का वीडियो अभी थोड़ी देर के लिए स्टॉप कर दे रहे हैं। तो उसमें क्या है कि चार घंटे लगते हैं अजय। >> हां सर। >> हां सर। और चार घंटे में यह होता है और एक होता है बायोलॉजिकल क्लॉक। वो जो बायोलॉजिकल क्लॉक होता है वो उसके

12:08 अनुसार से ही आपको खाना शरीर मांगता है कि अब हमको खाना चाहिए। वो टाइम फिक्स हो जाता है उसका। और लीवर का बायोलॉजिकल क्लॉक कितने बजे का होता है पता है? >> वो डिटॉक्सिफिकेशन करता है जब हम सोते हैं सर। >> कितने बजे? वो जब सोएंगे तब थोड़ी ना नहीं नाइट में >> नाइट में 11 बजे से ले सुबह 4 बजे तक और हम लोग तो 12 12:30 एक बजे सो के उठते हैं तो इसमें आ रहा है फोन तो फिर तो चलना चाहिए तो WhatsApp चल रहा है अच्छा अच्छा लाइट चली गई ठीक ठीक ठीक है ठीक ठीक आ जाएगी

12:53 लाइट तो वो उस हम लोग सोते हैं 12:30 बजे 1:00 बजे है ना और वो बेचारा को टाइम ही नहीं मिलता है पूरा अच्छे से शरीर को डिटॉक्स करने का फिर वो वो भी हम लोग के समान मोटाजा हो जाता है। फैटी लीवर जिसको कहते हैं। फैटी लीवर होता है। फिर एक लीवर सिरोसिस होता है। लीवर इज द बेसिक लाइक >> सर वो गांव में कहते हैं ये तो उम्र के लोग हैं >> वो हम भी देखते हैं जवान हॉस्टल में रहते थे कुछ नहीं होता था सर सारी रात पढ़ते थे

13:41 बच्चे जो है सुबह 5:00 बजे तक कोई पढ़ रहा है कोई 6:00 बजे तक पढ़ रहा है तो >> नहीं सर उसमें उसके अलग-अलग टाइमिंग होते हैं जैसे हमारे एक फ्रेंड है उनका उनका बेटा रात में बहुत पढ़ता था सुबह दिन में सो जाता था। तब उसको कितना भी समझाया वो नहीं माना। अच्छा फिर उसने एमटेक करने के लिए वो चला गया यूएस अमेरिका चला गया। >> तो अब वो दिन में सो जगता है रात में सोता है। >> क्योंकि उसका जैसे बायोलॉजिकल क्लॉक बन गया था रात में सोने का और दिन में >> वहां पर उल्टा हो गया। तब भाई साहब को रात में अपने आप नींद आ जाती है।

14:26 >> मुझे लगता है मेरे को भी अमेरिका ही जाना पड़ेगा। मेरा भी है। >> हां तो फिर आप अमेरिका जाओगे तो आप भी रात में सोने लगोगे आराम से। >> नहीं सर रात में जगने से जो अपने टेंसर डिफेंस सिस्टम है बॉडी का वो भी वीकन हो जाता है रात में जगने से। जब रात को सोते ही स्टडी है। प्रॉपर चार्ट >> रात में किसी भी हालत में आपको 10:00 बजे तक में सो जाना चाहिए। जॉइन कर लिया। >> अच्छा हां आइए जी >> अरे एक मिनट सॉरी >> सर होस्ट >> एक मिनट मैं >> आ रही है सर स्क्रीन >> जीजा मैडम आप कर सकते हैं।

15:11 >> हेलो हेलो कोई कुछ बोल रहे हैं क्या? हां बोलिए कुछ बोल रहे हैं? >> हां सर बताइए। >> कोई हेलो हेलो बोल रहे थे कहां किन की आवाज आ रही थी? चलिए ठीक है। >> अपना माइक चेक करें। हां। सो टेक्निकल ग्लिच के लिए सॉरी सर। चलिए तो जैसा मैंने आपको पहले वाली स्लाइड में बताया कि ठीक है हम सोचते हैं खाना खाने के लिए जोatोगी जो भी हमने ऑर्डर करा कर दिया और हमने खा लिया समोसा खाया पेस्टी खाई डजंट मैटर हमको पता ही नहीं है एक्चुअल में हम हमारी जनरेशन हो सकता है

15:58 कि अवेयर है लेकिन जो नई जनरेशन जिनके साथ हम डील कर रहे हैं उनको पता ही नहीं है कि फ़ूड खा रहे हैं वह फ़ूड जिस पर्पस से खाया जा रहा है क्या वह पपस उस फूड से कंप्लीट हो रहा है या नहीं हो रहा उनको नहीं पता तो यह हमारी जिम्मेदारी बन जाती है एस उनके मेंटोर कि हम उनको बताएं लेकिन न्यूट्रिशन क्या है और सस्टेनेबल न्यूट्रिशन क्या है? व्हाट इज द डिफरेंस बिटवीन द डाइट एंड द सस्टेनेबल डाइट? क्या अंतर हो सकता है? डाइट हम सब जानते हैं और हम सब अवेयर भी हैं। ऐसा नहीं है कि वी आर नॉट अवेयर। वी आर फुल्ली अवेयर। बट व्हेन वी टॉक अबाउट द सस्टेनेबल न्यूट्रिशन और द सस्टेनेबल डाइट देयर इज ए वेरी मच और लॉन्ग गैप बिटवीन द फ़ूड न्यूट्रिशन एंड द

16:46 सस्टेनेबल न्यूट्रिशन। सस्टेनेबल न्यूट्रिशन इज़ क्लोजली रिलेटेड टू द सस्टेनेबल एनवायरमेंट। द फ़ूड और द डाइट और द न्यूट्रिशन व्हिच इज़ अह यूज़ और मे बी ए पॉज़िटिव इंपैक्ट ऑन द एनवायरमेंटल इज़ नॉर्मली नोन एज़ द सस्टेनेबल न्यूट्रिशन। सो एस वी ऑल नो द फूड द एनीथिंग व्हिच इज रिटेबल इन एनी फॉर्म वेदर इट इज द फॉर्म ऑफ सॉलिड और द सेमी सॉलिड और द लिक्विड इट कम्स इन द फूड। हम जो खा रहे हैं दिन भर हम फूड खा रहे हैं। वो फूड न्यूट्रिशन वाला फूड है या डाइट है या न्यूट्रिशन डाइट है वो हमें नहीं पता। हम और आप जो खा रहे हैं वह हम फूड खा रहे हैं। जैसे ही हमें इच्छा करी हमने आर्डर

17:31 करा है घर पर हमने जो भी बनाया वह फूड है। लेकिन यहां पर हमारी जो पुरानी जनरेशन थी दे आर वेरी वेल अवेयर अबाउट द फूड एंड द न्यूट्रिशन। बट इन आवर जनरेशन और इन आवर अपकमिंग जनरेशन दे दोज़ आर नॉट वेरी मच नोन अबाउट द फ़ूड, अबाउट द न्यूट्रिशन एंड द व्हाट इज़ द न्यूट्रिशन वैल्यू ऑफ़ द फ़ूड शुड बी। सो फूड एक अलग चीज है। हमने खाना खा लिया, भूख लगी, चाहे किसी भी फॉर्म में हमने खाना खाया। अब व्हाट इज द फूड का काम क्या है? हम खाना क्यों खाते हैं? क्या जरूरत है हमें खाना खाने की? दो ही पॉइंट है। एनर्जी एंड न्यूट्रिशन। लेकिन नाउ डेज वी आर ईटिंग फूड ओनली फॉर द एनर्जी। नॉट फॉर द न्यूट्रिशन। वी नेवर कंसीडर न्यूट्रिशन। वी ऑलवेज कंसीडर एनर्जी इन

18:18 एनी फॉर्म। अगर हमें मान लो हम कहीं जा रहे हैं और हमें गर्मी लग रही है तो हमने ठंडा पानी तो पिया मिला तो ठीक है नहीं तो एनर्जी ड्रिंक पी वी गो फॉर द एनर्जी ड्रिंक कि हमें एनर्जी मिल जाएगी जल्दी से आप जिम वगैरह में जा रहे हैं वहां पर आपको जो एनर्जी फूड के नाम पर जो कुछ भी चीजें प्रोवाइड कराई जा रही है वो एनर्जी दे रही है। आजकल जिम का ट्रेंड बहुत बड़ा है। हर बंदा जिम जाना चाह रहा है। जिम जाके वो अपनी मसल्स बनाना चाह रहा है। मसल्स तो सेकेंडरी पॉइंट होता है। फूड खाते हम इसलिए कि या तो हम ओबेस हैं। ओबेस हैं तो हम फूड को कम कर देते हैं कि भाई हम जब फूड कम खाएंगे तो हम पतले हो जाएंगे। ऐसा नहीं होता। फूड हमें एनर्जी दे रहा है। लेकिन क्या वो फूड आल्सो प्रोवाइड न्यूट्रिशन? ये फूड इज नॉट एबल टू

19:03 प्रोवाइड द न्यूट्रिशन। देन द फूड इज टोटली रफ। दिस फ़ूड इज़ ओनली गिव एनर्जी जो कि आपको मोटा बनाएगा। आपको अनहेल्ी बनाएगा। क्योंकि उसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू है ही नहीं उस फूड की। आपने सिर्फ पेट भरने के लिए खाना खाया है ना कि आपने अपनी बॉडी को रिचार्ज करने के लिए खाया है। आपने अपने फूड के माध्यम से चाहे आपने जो भी खाया आपने अपने स्टमक को फिल कर दिया। नॉट मोर देन इट। तो फूड बहुत वॉइसली सेलेक्ट किया जाना चाहिए कि एनर्जी हमें मिले और एनर्जी के साथ-साथ न्यूट्रिशन मिले। तो वो एक तरह से कहें कि डाइट या हम न्यूट्रिशन के पार्ट में न्यूट्रिशनल फूड वैल्यू उसमें ऐड होगी जब हम सोच समझ के खाना खाएंगे। तो आज के बाद हम फूड खाएं ना

19:48 ही सिर्फ एनर्जी लेने के लिए बल्कि न्यूट्रिशन का भी उसमें जो है पूरा पार्ट होना चाहिए। ये आपको मैंने बताया एनर्जी मिलती है। फूड हम क्यों खा रहे हैं? वी वांट द एनर्जी फॉर द मसल्स इंप्रूवमेंट और द बॉडी टेंपरेचर। बॉडी टेंपरेचर को मेंटेन करने के लिए भी फूड चाहिए, ग्रोथ चाहिए हमें और कीपिंग हेल्दी और हमें हेल्दी रखने के लिए। ये हेल्दी वाला पार्ट आजकल मिस हो रहा है। तो इसी के बारे में हम बात करेंगे। न्यूट्रिशन क्या है? ये थिक थोड़ा सा हम देख लें। कई बार हम इग्नोर कर जाते हैं कि व्हाट इज द न्यूट्रिशन? एक्चुअल में न्यूट्रिशन इज द प्रोसेस। व्हिच द बॉडी टेक्स एंड यूज़ फूड। वो जो हमने जो फूड खाया है ना आपने और हमने उस फूड को किस प्रोसीजर के माध्यम से बॉडी काम में लेगी और वो किस तरह से काम आएगा बॉडी की

20:34 बिल्डिंग में बॉडी की नर्चरिंग में और बॉडी की पूरी ग्रोथ के लिए वो कहलाता है न्यूट्रिशन और फूड तो सिर्फ फूड है आपने फूड ले लिया फूड जानवर भी खाते हैं उनका कोई न्यूट्रिशन से लेना देना नहीं है तो हम जो आजकल खा रहे हैं न्यूट्रिशन को भूल के हम सिर्फ फूड खा रहे हैं तो फूड को न्यू न्यूट्रिशन के साथ यू शुड बी कॉम्प्लीमेंट न्यूट्रिशन एंड फूड विथ ईच अदर देन यू ईट द फूड। और जब आप फूड खा रहे हैं कोई भी तो देख लें कि हम क्या खाना चाहते हैं और क्या इसका आगे यूज़ होगा। न्यूट्रिशन इज द वन ऑफ द मोस्टेंट फैक्टर इन कीपिंग हेल्दी एंड लॉन्ग लिविंग बॉडी। पुराने जमाने में 100 साल हमारे शास्त्रों में एज मानी गई है। लेकिन आजकल तो बहुत जल्दी ही हम परेशान हो रहे हैं। और कोविड के बाद जैसे मैंने कहा कि आजकल 35 साल 38

21:21 साल इवन छोटे बच्चों को भी स्कूल्स में हार्ट अटैक आ रहे हैं। तो कारण क्या है? कारण कहीं ना कंफल जो हमारी तेजी से बदली है। ऑनलाइन लाइफस्ट जो चल रही है ना आजकल हमारी चाहे किसी भी प्लेटफार्म पर हो वो चाहे जोो एसयूवी या कोई और भी फूड डिलीवरी आइटम हो सकता है। रेडी टू ईट। जल्दबाजी में हम सब हैं। हरी भरी करी की वजह से जो है सारी की सारी न्यूट्रिशनल वैल्यूस खत्म होती जा रही है फूड की और वो हमें कहीं ना कहीं नुकसान पहुंचा रहा है। अब हमने खाना खाया तो खाना खाने के तीन चीजों से तो हम बहुत ज्यादा नोन है। वी आर ऑल अबाउट वेयर कार्बोहाइड्रेट्स, फैट्स एंड द प्रोटीन। सबको पता है कि कार्बोहाइड्रेट है, फैट है, प्रोटीन है। अब कार्बोहाइड्रेट तो हमको आपको पता है कि वी गेट कार्बोहाइड्रेट फ्रॉम द ग्रेंस एंड द

22:06 फ्रूट्स एंड द फैट्स कमिंग फ्रॉम द एनी टाइप ऑफ़ द ऑयल एंड द प्रोटीन कम द फ्रॉम द पल्ससेस एंड मीट एंड द नॉनवेज मटेरिय फिश भी हो सकता है, कुछ भी हो सकता है। लेकिन ये सिर्फ ये तीन जो है किसी फूड का पार्ट नहीं हो सकते। छोटे बच्चे उनकी रिक्वायरमेंट अलग है। थोड़े बड़े बच्चे उनकी अलग है। हमारी अलग है। हमसे बड़े वालों की अलग है। तो ये जो तीन चीजें हम खाते हैं इनके अलावा भी अगर फूड में हमें कुछ चाहिए। अगर हमें न्यूट्रिशन चाहिए तो हमें उसमें बहुत सारी चीजें जोड़नी चाहिए। और पहले जोड़ते भी थी। लेकिन अब नाउ डेज वी आर ओनली कंसर्न अबाउट द कार्बोहाइड्रेट, फैट एंड प्रोटीन। आजकल आपने सुना होगा कीटो डाइट बहुत चल जहां सिर्फ प्रोटीन पर जो है एफेसिस दिया जाता

22:53 है कि आप दिन भर प्रोटीन खाएं। इसी तरह से कार्ब डाइट चल रही है। लो कार्ब मटेरियल्स फूड के बहुत सारे आ गए जिनमें कि लो कार्ब ड्रिंक भी आ रही हैं। लो फैट तो खैर है ही फैशन बन गया है। लेकिन फैट हमें खाने चाहिए। कौन सा खाना चाहिए, कौन सा नहीं खाना चाहिए? यह हम नहीं जान पाते। न्यूट्रिशन के पॉइंट ऑफ व्यू से फैट बहुत जरूरी है क्योंकि कुछ विटामिंस हैं ही ऐसे जो कि फैट में डिॉल्व होते हैं और फैट में डिॉल्व हो के वो बॉडी हमें अब्सॉर्ब कर पाती है। लेकिन अगर फैट ही हम नहीं खाएंगे तो उस वजह से जो पर्टिकुलर विटामिंस है वो डिॉल्व नहीं होंगे। डिॉल्व नहीं होंगे तो बॉडी उनको अब्सॉर्ब नहीं कर पाएगी। तो क्या न्यूट्रिशन के पार्ट्स होते हैं? यह न्यूट्रिशंस के कंपोनेंट है। यह कंपोनेंट अगर हमारे फूड में है तो हमारे लिए यूज़फुल है। देन द फूड इज नोन एज द न्यूट्रिशन रिच

23:40 फूड। एंड आवर फूड शुड बी रिच न्यूट्रिएंट। रफेज़ होने चाहिए। उसमें फैट भी होना चाहिए, विटामिंस होने चाहिए, मिनरल्स होने चाहिए, वाटर होने चाहिए। हर एक अपना हर एक चीज का अपना एक पार्ट है और उनमें से एक भी कोई पार्ट मिसिंग होता है तो थोड़े दिन तो हमारी बॉडी जो है उसको बर्दाश्त कर लेती है। लेकिन जब दो चार साल हम ऐसे रहते हैं तो हमारी बॉडी उस पे रिएक्ट करना शुरू कर देती है और हमको बहुत सारी चीजों का सामना करना पड़ सकता है। तो सब चीजें बहुत बैलेंस तरीके से हो और बहुत अच्छे तरीके से हो तो तो हमारी बॉडी लंबी चलेगी और हम हेल्दी रह पाएंगे। अब आपको लगेगा कि यह तो कहने की बातें हैं। कैसे हम इसको गो थ्रू हो। हमको क्या पता कि हमारी बॉडी को कितना

24:26 कार्बोहाइड्रेट चाहिए, कितना प्रोटीन चाहिए, कितना फैट चाहिए, कितना रफेस चाहिए, कितना वाटर चाहिए, कितना मिनरल चाहिए, कितना विटामिन चाहिए। एक व्यक्ति आम व्यक्ति नहीं समझ सकता कि मुझे 6 ग्राम प्रोटीन खाना चाहिए या 10 ग्राम कार्बोहाइड्रेट खाना चाहिए या रफेस मेरे को 15 ग्राम खाने चाहिए या वाटर मुझे जो है कितना पीना चाहिए यह मुझे नहीं पता। तो हम क्या करें? थोड़ा सा मैं यहां पर आपको एक बेसिक सी इंफॉर्मेशन देने की कोशिश करूंगी। तो शायद हो सकता है कि आज के बाद कम से कम सर कुछ कह रहे हैं? >> जी मैम मैं >> रफेज क्या है? >> रफेज जितने भी रेशेदार फाइबर्स जो होते हैं वो रफेज >> जी मैम। जो भी फाइबर हम काम में ले खाते

25:11 हैं ना सर वो सब रफीज में आते हैं। तो फाइबर का रफीस का काम हमारी जो जितना भी हमारा फूड है उसको अच्छी तरह से डाइजेस्ट करना और बॉडी से टॉक्सिंस को निकालने में हेल्प करना रफीस का काम होता है। तो जितने भी फाइबर वाली चीजें जब कहते हैं जैसे फूड्स में फाइबर होते हैं कि हम जैसे ऑरेंज खा रहे हैं तो हमें जूस ना पी के जो है उसको पूरा ऑरेंज को खाना चाहिए। तो वो जो उसमें थ्रेट्स है जो फाइबर्स है वो दे आर ऑल कम इन द रफेस। ठीक है सर। तो >> तो एक जनरल सी मैं आपको एक गाइडलाइन बताऊंगी जिससे कि आप अपना एनालिसिस खुद ही कर सकते हैं कि हमें कितने की जरूरत है और आप अपना भी कर पाएंगे और अपने फैमिली मेंबर्स का भी कर पाएंगे कि हमें कितने न्यूट्रिशन की जरूरत कितनी हो सकती है। ये देखिए मिनरल्स के सोर्सेस सबको पता है। इतना हम आजकल ऑनलाइन और सब देखते हैं कि

25:58 कहां क्या मिलता है। कार्बोहाइड्रेट तो हम दिन भर खाते हैं। रोटी खा रहे हैं। अच्छा कार्बोहाइड्रेट के बारे में दो चार मिथ है। उसके बारे में हम बात करेंगे। अभी फैट्स हैं, विटामिंस है, वाटर है, प्रोटीनंस है। ये सिक्स न्यूट्रिएंट्स है जो हमारी बॉडी को चाहिए। अब मैंने जैसे कहा ना कि हमें पता नहीं चलता कि हमें कितना खाना है। भाई, कितना खाना है, कितना पानी पीना है, कितना लिपिड खाना है, कितना प्रोटीन खाना है, कितने कार्ब्स खाने है, कितने विटामिनस। अब ये एक मोटा-मोटा सा हिसाब है। एक जनरल क्लासिफिकेशन है हमारी बॉडी का। कोई सी भी ऐज का हो सकता है। वो डिपेंड करेगा उसके वेट पर। वो हम आगे बात करेंगे कि बीएएमआई कैसे निकालेंगे और यह सब कैसे निकालेंगे। तो हमारी बॉडी का 61% हमें वाटर चाहिए। हम दिन क्योंकि बॉडी 61% लगभग बॉडी बनी हुई होती है वाटर से। लिपिड

26:46 का इसमें परसेंटेज होता है 14 एंड 17% प्रोटीन होता है। कार्बोहाइड्रेट 1.5 होते हैं। विटामिंस लेस देन 1% है और मिनरल्स 6% है। विटामिंस है तो 1% लेकिन इनके बिना बॉडी को आगे चलने में बहुत मुश्किल आती है। क्योंकि जितना भी मिनरल्स है, सोडियम है, मिनरल्स की बात करें तो सोडियम है, पोटेशियम है, सोडियम की डेफिशिएंसी हो जाएगी तो हम दिक्कत में आ जाते हैं। कोई सी भी पोटेशियम की डेफिशिएंसी हो जाएगी तो कोमा में भी आदमी जा सकता है। सोडियम की वजह से कोमा में जा सकता है। तो ऐसा नहीं है कि यह 1% है तो इनका यूज़ कम है। 1% है लेकिन इनका यूज़ उतना ही है जितना इस वाटर का है। तो ये दो तीन चीजें हम यहां डिस्कस करेंगे। अब आप देख रहे होंगे कार्बोहाइड्रेट्स।

27:32 कार्बोहाइड्रेट 1.5% है हमारी बॉडी की रिक्वायरमेंट में। लेकिन हम सबसे ज्यादा कार्बोहाइड्रेट्स खाते हैं। आपने भी जनरल महसूस किया होगा कि हम चार रोटी खा रहे हैं, तीन रोटी खा रहे हैं, सुबह खा रहे हैं, शाम को खा रहे हैं, दिन में खा रहे हैं। इसके अलावा और भी कार्बोहाइड्रेट्स खाते हैं। फूड्स भी कार्बोहाइड्रेट्स हैं। ये बात अलग है कि वो कार्बोहाइड्रेट्स के साथ उनमें जो है विटामिनस है, मिनरल्स हैं। लेकिन वो आते हैं कार्बोहाइड्रेट्स में। तो हमें एक जनरल एक मेजरमेंट अगर वी वांट टू मेजर द आवर फूड और आवर न्यूट्रिएंट रिक्वायरमेंट देन वी शुड कट द कार्बोहाइड्रेट्स एंड इंक्रीस दिस प्रोटीन कंटेन। तो बिकॉज़ अभी मैं आपको बताऊंगी कि कार्बोहाइड्रेट से कितनी एनर्जी मिलती है, प्रोटीन से कितनी मिलती है, लिपिड से कितनी मिलती है। तो आप आराम से कैलकुलेट कर पाएंगे और जान पा जाएंगे कि इस कार्बोहाइड्रेट को कट करके

28:19 अगर हम प्रोटीन को बढ़ा देते हैं तो हमारी एनर्जी की जो रिक्वायरमेंट है वो तो एटलीस्ट फुलफिल हो ही जाएगी। तो आगे देखते हैं। यह देखिए हमारी इच्छा वाला खाना जो कि हमें अच्छा लगता है। जो हम खाते हैं। बहुत हम एंजॉय करते हैं इस खाने को। करना भी चाहिए। नो डाउट वंस इन अ वाइल हफ्ता में दो रोज खा लें, तीन रोज खा लें। लेकिन लाइफ टाइम अगर हम यह खाएंगे तो हमारी दिक्कत आ जाएगी। अब देखिए आप मैं जैसे कह रही थी ना कि यह जो फूड है ना यह हमारी हेल्थ को तो नुकसान पहुंचा है लेकिन हमारे एनवायरमेंट को बहुत नुकसान पहुंचा रहा है। ये फूड जो है हेल्दी तो नहीं है साथ में एनवायरमेंट के फ्रेंड भी नहीं है। कारण क्या है कि जितना भी नॉनवेज फूड है या इस

29:05 तरह के फूड्स है। आप इस ग्राफ से समझ सकते हैं कि एक जो है पर ग्राम जो है यह देखिए बीफ से जो है ग्रीन हाउसेस गैसेस जब हम मीट को एज ए फूड बनाते हैं तो जो है 100 ग्राम जो है इससे जो है ग्रीन हाउस गैसेस निकलती हैं और नट्स देखिए आप नट्स छोड़ भी दें क्योंकि महंगा है खाने में नहीं आता लेकिन वेजिटेबल्स पे आ जाइए आप 6.8 ही है आराम से वेजिटेबल खाएं अब इसमें भी आप देखिए नॉनवेज में भी चीज जो है सेलफिश है लम में इनमें देखिए अंतर देखिए आप ग्रीन हाउस गैस का जो है कितनी ज्यादा निकलती है इनकी जब प्रिपरेशंस होती है तो हम यहां पे अगर नॉनवेज भी हम खा रहे

29:52 हैं तो हम ऐसा फूड जो प्रेफर कर सकते हैं जिनसे कि जो है ग्रीन जो है जिनकी प्रिपरेशन में जो ग्रीन हाउस गैसेस है उनका जो निकलना कम से कम हो अगर आप नॉनवेज है और अगर वेजिटेरियन है तो कोई दिक्कत ही नहीं है। फिर भी आप चाहते हैं कि हम अपना जो है योगदान दे सकते हैं एनवायरमेंट फ्रेंडली फूड में तो आप इस पे जा सकते हैं। राइस पे जा सकते हैं। एग्स अगर नॉनवेज खाते हैं तो एग्स है। टोफू पे खा सकते हैं। ब्रेड पे या लेग्यूम्स इसीलिए कहा जाता है लेग्यूम तो एक पंथ कई काज है। लेग्यूम्स खाएंगे तो आप ग्रीन हाउस गैस इमशन को भी रोकेंगे। साथ ही साथ प्रोटीन रिच फूड होता है यह। तो ज्यादा से ज्यादा हम जो है इस तरह के फूड अगर हम खाते हैं प्लांट बेस्ड फूड तो एनवायरमेंटल फ्रेंडली जो फूड्स होते हैं और सस्टेनेबल

30:39 न्यूट्रिशन एंड डाइट के साथ-साथ जो है सस्टेनेबल एनवायरमेंट की तरफ भी हम जा सकते हैं। यह देखिए एक और इसमें कितना फूड है अगर खा रहे हैं तो किलोग्राम में वही वाला पार्ट है जो कि फूड में है। इसमें वेजिटेबल्स में देखिए पॉइंट्स आप और यहां देखिए आप 70 आप इमेजिन कर सकते हैं कि हम अपनी फूड चॉइस के अकॉर्डिंग एनवायरमेंट को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं। तो हमें सस्टेनेबल फूड की तरफ जाना पड़ेगा और सस्टेनेबल फूड अगर हम खाएंगे तो एनवायरमेंट तो सस्टेनेबल की तरफ बढ़ेगा ही बढ़ेगा। अब एक स्टडी आई ब्राजील के साइंटिस्ट ने उन्होंने कहा कि जो अल्ट्रा प्रोसेस फूड है यूएफपीएस अल्ट्रा प्रोसेस फूड जितने भी होते हैं चाहे वो बैड हो

31:24 चाहे वो पिज़्ज़ा हो चाहे कोई सा भी फूड हो उसकी वजह से हमारी जो बायोडायवर्सिटी है उसका लॉस 36 से 45% हो गया है। अब आप समझ सकते हैं कि जो बायोडायवर्स हम कहते हैं ना कि हमारा फूड कैसे बायोडायवर्सिटी को कम कर रहा है। कर रहा है। क्योंकि जब ग्रीन हाउस गैसेस एनवायरमेंट में बढ़गी तो नेचुरल है कि क्लाइमेट चेंज होगा। क्लाइमेट चेंज होगा तो उसका एक पार्ट बायोडायवर्सिटी भी है। बायोडायवर्सिटी भी कम होगी। तो डाइट रिलेटेड जो बायो जो है डाइट से हमारी इस वजह से ग्लोब में जो है बायोडायवर्सिटी चेंजेस आ रहे हैं। टोटल 25% डाइट रिलेटेड वाटर यूज इन अ नंबर ऑफ हाई इनकम कट। ये एक बहुत इंपॉर्टेंट

32:10 पार्ट है। हम पैकेज्ड बोतल पानी पीते हैं। आज से आपको पहले याद होगा 15 20 साल 20 साल पहले सब कहते थे कि घर से पानी की बोतल लेके जाना चाहिए। अब हम हम और आप लेके नहीं जाते। हम तो कहीं भी हमें जरूरत पड़ी हमने प्लास्टिक की वाटर बोतल खरीदी और पानी पिया। तो अब आप सोचें कि पानी का हम कितना मिसयज तो कर ही कर ही रहे हैं। साथ में जो पैकेजिंग का वजह से जो फूड की पैकेजिंग की वजह से जो एनवायरमेंट को नुकसान पहुंच रहा है। पहले स्थिति प्लास्टिक की बोतल नहीं होती थी। अब आप ट्रेन में जाएंगे आप बस में जाएंगे आपको प्लास्टिक की प्लास्टिक की बोतल चारों तरफ नजर आएंगी। तो जब वो नजर आएंगी तो वो प्लास्टिक पोलशन है वो धीरे-धीरे एनवायरमेंट को नुकसान पहुंचाएगा। आप किसी भी ऑनलाइन फूड डिलीवरी

32:57 से फूड ऑर्डर करते हैं तो उसकी पैकेजिंग देखिए आप। कभी आपने शायद गौर नहीं किया होगा कि उसकी पैकेजिंग में कितना मटेरियल यूज़ हुआ है जो कि एनवायरमेंट को नुकसान पहुंचा रहा है। पहले हम और आप घर से जाते थे। घर से टिफिन में खाना लेके जाते थे। अब हम टिफिन में नहीं ले जाते। हम अब डिस्पोजेबल में ले जाते हैं कि व्हाई वी व्हाई वी कैरी दैट दिस टिफिन? यूजिंग थ्रू। तो यह जो जो हम काम कर रहे हैं ना यह एनवायरमेंट को नुकसान पहुंचा रहा है। डाइट को तो खत्म कर ही रहे हैं। नो डाउट आप जो प्लास्टिक में गरमगरम फूड पैक कर लेते हैं और जिसको हम खाते हैं तो वो जो नैनो प्लास्टिक है वो हमारी बॉडी में जा रही है। बॉडी में जा रही है तो न्यूट्रिएंट्स खत्म हो रहे हैं। तो न्यूट्रिएंट्स खत्म हो रहे हैं। तो सस्टेनेबल न्यूट्रिशन की बात खत्म होती जा रही है। पहले पीतल के टिफिन में स्टील के

33:44 टिफिन में हम खाना रखते थे। उसमें जो है वह ऐड होते रहते थे मेटल्स जो कि हमारी डाइट को बहुत अच्छा बनाते जाते थे और हमारे को जो न्यूट्रिशन है बॉडी में वो अपने आप ही फैले जाते थे। अब धीरे-धीरे वो सब चीज कम होती जा रही है। उसकी जगह प्लास्टिक ने ले लिए। तो सस्टेनेबल न्यूट्रिशन सस्टेनेबल डाइट इज़ डायरेक्टली रिलेटेड टू द एनवायरमेंट सस्टेनेबल एनवायरमेंट। तो दिस इज़ नाउ आवर रेस्पोंसिबिलिटी दैट वी मिनिमाइज द यूज़ ऑफ़ अ सच थिंग्स व्हिच आर व्हिच हैव द नेगेटिव इंपैक्ट ऑन द एनवायरमेंट। सो दिस इज द मेन इंपॉर्टेंट थिंग अबाउट द सस्टेनेबल न्यूट्रिशन। हाईली प्रोसेस जितने भी फूड है उन फूड में जो है आपने देखा होगा चाहे कुछ भी खा रहे हैं हम उनमें जो है फ्लेवरिंग एजेंट डाले

34:31 जाते हैं स्वीटनर्स डाले जाते हैं इमल्सिफायर डाले जाते हैं और जो है कलर्स डाले जाते हैं फैट है ट्रांस फैट शुगर साल्ट ये सब डाले उसमें जाते हैं तो आपने खाया अब एक बात हमारे दिमाग में आ सकती है कि हमारा फूड एनवायरमेंट को कैसे नुकसान पहुंच रहा है? हमें पहुंचा रहा है वो तो ठीक है। लेकिन एनवायरमेंट को कैसे पहुंचा? जो साइंस के विद्यार्थी हैं वो समझ पाएंगे एक फूड चैन होती है। हमने खाना खाया। हमारे जो जितनी भी बॉडी से यह जो खाना निकला वह वापस एनवायरमेंट में गया तो जो हमने खाने में कलर खाए थे जो भी हमने स्वीटनर्स खाए थे जो भी इमल्सिफायर खाए थे

35:17 जो भी फ्लेवरिंग एजेंट खाए थे वो सब एनवायरमेंट में चले गए जब वो एनवायरमेंट में चले गए तो अब वो साइकिल में आ गए अब वो कहां चले गए सोइल में चले गए सोइल से कहां गए प्लांट्स में आ गए और प्लांट से वापस हमारे पास आ गए ऐसा नहीं है कि आपने आज वन ग्राम कोई कलर एजेंट खाया तो वो घूम फिर के आप तक ही आ जाएगा वापस तो हम अपना तो खा ही रहे हैं साथ में दूसरों का भी ले रहे हैं तो एनवायरमेंट को नुकसान पहुंचा रहे वो कलरिंग एजेंट उसी वो फ्लेवरिंग फ्लेवरिंग एजेंट वो जितने भी आर्टिफिशियल एडिटिव्स थे वो सब हमने सोइल में डाले वो सब हमने पानी में डाले और वो हमारे पानी के जो है हमने अपने घर में बर्तन धोए मान लो खाना आया उस खाने को हमने प्लेट साफ करी वो खाना पानी से नाली में पहुंचा नाली से रिवर में पहुंचा रिवर

36:03 सी में पहुंच गया। एनवायरमेंट में पहुंच गया। और एनवायरमेंट में अगर एक बार कोई चीज पहुंच गई तो वो फर्क होती रहती है और एक तरह फूड चेंज वो चलती रहती है। अब आप सोच सकते हैं कि हम और आप अल्ट्रा पॉसिव फूड से जो है एनवायरमेंट को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं। तो इसको हमें कहीं ना कहीं हम नहीं कह सकते कि हम इसको आज की तारीख में खत्म कर सकते हैं। लेकिन कम से कम इसको रोक तो सकते हैं। रोक किसी सेंस में कि हम उसका यूज़ मिनिमम कर। जहां जरूरत है वहां आपको खाना भी पड़ेगा। हम नहीं कह सकते कि एक दिन में हम प्लास्टिक खत्म कर देंगे या एक दिन में हम अल्ट्रापो फूड खत्म कर नहीं कर सकते। लेकिन वी कैन मिनिमाइज द यूजज़ ऑफ़ सच थिंग्स। आजकल डाइट में जब बात करते हैं ना तो कैलोरीज की बात बहुत होती है। सैचुरेटेड फूड, अनसैचुरेटेड फैट्स, रेड मीट,

36:51 एनवायरमेंट सस्टेनेबल इन सब की बातें तो खूब होती है भाई। लेकिन क्या जो डाइट हम खा रहे हैं इस डाइट से हमें जैसे मैंने पहले आपको कहा कि जो एनर्जी हमें मिल रही है ये एनर्जी क्या न्यूट्रिशन को भी काम में ले रही है क्या न्यूट्रिशन से ऐसा कोई हमने ईट करा है ऐसा हमने फूड कंज्यूम करा है कि एनर्जी का प्रोडक्शन के साथ-साथ न्यूट्रिशन वैल्यू भी बढ़े उसकी ऐसा नहीं होता तो ऐसा नहीं हो पाता तो दिक्कत आ जाती है और दिक्कत का तो आगे इतने एग्जांपल्स है कि शायद हम सब उन एग्जांपल्स को जानते हैं। डाइट डाइट भी बहुत बात होती है भाई। लेकिन डाइट और सस्टेनेबल डाइट में अंतर क्या है?

37:40 डाइट सिंपल सी लैंग्वेज है जो कि हमारी हेल्थ को और विंग जो बैलेंस जो हमारे न्यूट्रिएंट को करें वो तो डाइट है। लेकिन सस्टेनेबल डाइट वो सब तो करें लेकिन साथ ही साथ एनवायरमेंट को भी सस्टेन करें। सस्टेनेबल एनवायरमेंट के लिए इंक्लूड हो सकती है। प्लांट और प्लेनेट को भी बचा सकती है। तो वह डाइट कहलाएगी सस्टेनेबल डाइट। अब ये शब्द आपको सस्टेनेबल डाइट सुन के लग रहा होगा कि ऐसा तो कैसे हो? हम तो सिर्फ खाना ही खा सकते हैं। सस्टेनेबल डाइट हम कैसे कर सकते हैं? कर सकते हैं। बहुत इजी है। हमारे जितने भी पूर्वज थे वो सब सस्टेनेबल डाइट पे रहते थे। सस्टेनेबल डाइट मतलब आपने जो कुछ भी खाया वह आपकी हेल्थ के लिए तो यूजफुल हो। आपके न्यूट्रिशन की रिक्वायरमेंट को तो फुलफिल करे लेकिन उसके

38:28 बाद वो एनवायरमेंट को भी रिच करे। फॉर एग्जांपल हम खाना खाते हैं तो प्लास्टिक की प्लेट्स में ना खाकर अगर हम स्टील की प्लेट में खाते हैं तो हम कोई वेस्टेज नहीं निकाल रहे। अगर हम डिस्पोजेबल है ले रहे हैं तो ऐसा डिस्पोजेबल है जो कि इको फ्रेंडली डिस्पोजेबल है। तो जब वो एनवायरमेंट में जाएगा तो वो एनवायरमेंट को रिच करेगा। आप प्लास्टिक डालेंगे तो वह नेगेटिव इंपैक्ट डालेगा। तो सस्टेनेबल डाइट का मतलब यह कि हम जो कुछ भी खाएं वह वापस एनवायरमेंट में जाकर मिल जाए। एनवायरमेंट पे पॉजिटिव इंपैक्ट डाले। तो वो कहलाएगी सस्टेनेबल डाइट। और कोई बहुत बड़ा टास्क नहीं है सस्टेनेबल। थोड़ा सा हमें अपने बस कंफर्ट ज़ोन से बाहर आना पड़ेगा। और कंफर्ट ज़ोन से जैसे ही हम बाहर आ जाएंगे तो हम सस्टेनेबल डाइट। खाना तो वही है हमारा। फूड तो हमारा वही है लेकिन

39:14 उसमें न्यूट्रिशन है। डाइट जो है सस्टेनेबल डाइट है। हमारी बॉडी के साथसाथ एनवायरमेंट भी सस्टेन करेगी। सारे के सारे जैसे मैंने कहा रिसोर्स का ऑप्टिमाइजेशन यूज सोशियोइकोनॉमिक आस्पेक्ट है। एनवायरमेंटल इंपैक्ट है और प्राइमरी गोल डाइट का तो क्या होता है? हम अपना वेट मैनेजमेंट डिजीज प्रिवेंशन और मूड और एनर्जी लेवल सिर्फ हमारी बॉडी की बात होती है डाइट में। लेकिन सस्टेनेबल डाइट में एनवायरमेंट की भी बात होती है। पोल्यूशन कम से कम हो। वाटर यूजेज कम से कम हो, लैंड यूजेज कम से कम हो और ऐसी फूड प्रोडक्ट हम खाएं जिसमें कि जो है ग्रीन हाउस इमल्शन कम से कम हो और सोशियोइकोनमिक फैक्टर्स हैं। तो ये सस्टेनेबल डाइट कहलाती है। कैसे खा सकते हैं? किस तरीके से खा सकते हैं? ये आगे हम देखेंगे।

39:59 फर्स्ट पहली बार 1986 में यह टर्म जो है पॉइंट हुई सस्टेनेबल डाइट या सस्टेनेबल न्यूट्रिशन भी इसको कई बार कह देते हैं। तो ये आप साइंटिस्ट क्लसी काउंस इन्होंने सबसे पहले ये टर्म दी और आजकल बहुत ज्यादा यूरोपियन कंट्रीज में इस पर काम हो रहा है। हमारा देश तो पहले भी कर रहा था लेकिन बीच में हमारे पूर्वज तो थे ही सस्टेनेबल डाइट पर सस्टेनेबल न्यूट्रिशन पर। अब जो हम हमारी जनरेशन जो है इस डाइट पर आ गई है सस्टेनेबल डाइट से तो वो हमें वापस अपने जड़ों की तरफ लौटने की जरूरत है। ये थोड़ा सा है सस्टेनेबल फूड ईट सीजनली। आजकल हम ईट सीजनली नहीं खाते। हमें अच्छा लगता है महंगा प्रोडक्ट लाकर। जो मौसम में चीज है वो तो हम खाएंगे ही

40:46 खाएंगे। लेकिन हमें अच्छा लगता है। पहले आपको ध्यान हो तो विंटर में गोभी आती थी। उसकी अलग महक होती थी। लेकिन अब हम गर्मी में भी गोभी खाना चाहते हैं। भले ही वह महंगी है। प्राउड फील करते हैं कि गोभी इतनी महंगी है। हम उसको अभी भी खा रहे हैं। मत खाइए भाई। प्लीज मत खाइए। जिस सीजन की वेजिटेबल है, जिस सीजन का फूड है, जो आपके लोकल एरिया में है, आप वही खाएं। वही सस्टेनेबल फूड है। आप कीवी खाएंगे, आप ड्रैगन फूड खाएंगे, नहीं खाएं। वो हमारे नहीं है। हमारे एरिया के फूड नहीं है। जिस एरिया के हैं, वहां खाएं। कारण एक तो आप कॉस्ट इफेक्टिव कॉस्ट आपकी उसकी बहुत ज्यादा लगेगी। दूसरा कॉस्ट तो चलिए कोई बात नहीं लेकिन उसकी पैकेजिंग में उसकी शेलफ लाइफ बढ़ाने में जिन केमिकल्स का यूज

41:32 हुआ और जिस तरह से उसको प्रोडक्ट को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसपोर्ट किया गया उससे उसके हेल्थ बेनिफिट्स तो खत्म हो गए। आप केमिकल्स ही खा रहे हैं। भाई कहीं दूर से आएगा वह तो नेचुरली उसकी शेलफ लाइफ बढ़ाने के लिए उसको प्रिजर्व करने के लिए उसमें प्रिजर्वेटिव्स डाले जाएंगे। और आप लोकल फूड खाएंगे तो वहां कोई प्रिजर्वेशन का चीज ही नहीं है। शाम को तोड़ा या सुबह तोड़ा शाम तक आप तक पहुंच गया। तो आप सीजनली फूड खाएं। अपने एरिया के फूड खाएं। तो वो सस्टेनेबल फूड है। कोई बहुत बड़ा इशू नहीं है। आप फूड ना खा के सस्टेनेबल फूड खाएं। समझ में जो है बस इतना सा फर्क आ जाता है कि हम जो है महंगी चीजों को खाना चाहते हैं। नहीं खाएं आप सीजनली और लोकली फूड जो आपके

42:17 एरिया में लग रहे हैं वो खाएं। आपके एरिया में अगर अमरूद लग रहे हैं तो आप अमरूद खाएं। आप नहीं कहें कि आम आ रहे हैं तो हम तो आम जो है ₹200 किलो खाएंगे और ₹60 किलो अमरूद नहीं खाएंगे। नहीं आप अमरूद को प्रेफर करें। प्लान अहेड। यह एक बहुत इंपॉर्टेंट है जो कि हम में मिसिंग है। हम प्लानिंग करते ही नहीं। हमें शाम को क्या खाना है? हम शाम को 4:00 बजे सोचेंगे और फिर ऑनलाइन ऑर्डर करेंगे। हम आसपास वेजिटेबल मार्केट तक जाकर सही सब्जी नहीं लाना चाहते। हम ऑर्डर करके मंगाना चाहते हैं। उसकी पैकेजिंग में वो फूड आएगा। तो वो फूड सस्टेनेबल फूड नहीं रहा। तो प्लान करें कि हमें क्या खाना है, दो रोज बाद, तीन रोज बाद क्या खाना है। उसकी

43:03 प्लानिंग करें। उसी हिसाब से परचेसिंग करें। ग्रो ईयर ऑन। ये तो बहुत ही अच्छी बात है। इसमें एक कंट्रोवर्सी हो सकती है कि भ आजकल हर एक के पास जो है स्पेस नहीं है। तो स्पेस नहीं है तो हम उगाए भी कैसे? तो उसका तरह-तरह से एग्रीकल्चर में बहुत सारी उसमें जो है मेथड्स निकल गए हैं। जिसमें कम पानी में कम स्पेस में आप जो है अपना कुछ उगा सकते हैं। आजकल फैमिलीज़ वैसे भी छोटी है तो थोड़ी बहुत रिक्वायरमेंट 50% भी अगर हम अपनी रिक्वायरमेंट घर से पूरी कर लेते हैं देन इट इज द मोर देन इनफ। आप सस्टेनेबल फूड की तरफ बढ़ सकते हैं। तो यह कुछ है कि सस्टेनेबल फूड कौन-कौन से हो सकते हैं? डाइट जो भी चीजें सस्टेनेबल से है, सस्टेनेबल फूड से बनी है, जो हमारी डाइट में इंक्लूड है, वह सब सस्टेनेबल डाइट है। आप एनालिसिस करिए कि कल आपने क्या खाया था? आज सुबह आपने क्या खाया? या

43:51 दो रोज पहले आपने क्या खाया? क्या वो सस्टेनेबल डाइट थी? सस्टेनेबल डाइट का मतलब सिर्फ नहीं। आप ये कहेंगे मैंने तो दाल खाई थी। वो दाल आपने कैसे बनाई और कैसे खाई? और किससे मंगाई? यह इंपॉर्टेंट है। सिर्फ दाल खाना तो डाइट है, लेकिन अगर सस्टेनेबल डाइट की बात हो रही है, तो क्या वह ऑर्गेनिक डाइट थी? क्या वो हमने ऐसी जगह से खरीदी जहां यू का यूज़ केमिकल जो प्रिजर्वेटिव प्रिजर्वेशन का टाइम था वो कम था? गेहूं आपने देखा होगा हम भी इकट्ठा करके रखते हैं साल भर का और बाजार से भी लाते हैं। अब आप कहेंगे हमने तो गेहूं खाए। नहीं भाई आपने जो घर पे गेहूं स्टोर करे थे और उसका आपने जो वीट फ्लावर बना रहा था उसका जो कंसमशन करा था वो

44:38 सस्टेनेबल डाइट का पार्ट था। लेकिन आपने अगर आटा आशीर्वाद आटा ले लिया या आपने अलग-अलग आटा दे सिल्वर कॉइन ले लिया वो आप आटा लाए और उससे आपने रोटी बनाई तो वो सस्टेनेबल डाइट का पार्ट नहीं है। क्यों नहीं है? क्योंकि वो पैक्ड फूड है। वो पैकेज पैक्ड फूड में आ गया। पैकेजिंग उसकी हो गई। उसकी शेलफ लाइफ बढ़ाने के लिए जो भी उन्होंने करा तो वो अब सिर्फ डाइट हो गई। फूड हो गया। दिस इज नॉट द सूटे सस्टेनेबल डाइट। तो अगर आप सस्टेनेबल डाइट काम में लेना चाहते हैं तो आपको देखना पड़ेगा कि वो कहां से आई है। तो जैसे मान लीजिए सैलेड आप खा रहे हैं। आप कह रहे हैं खीरा। खीरा ठीक है। अच्छी बात है। खीरा खाया है हमने। आप कहेंगे हम तो रोज सैलेड

45:23 खाते हैं। हम तो गाजर भी खा रहे हैं और अनियन भी खा रहे हैं और कुकुंबर भी खा रहे हैं और जो भी सैलेड का पार्ट है वो खा रहे हैं। लेकिन क्या आपने जो गाजर खाई अभी आपने जो गाजर खाई वो गाजर विंटर में आती है। अभी आप जो गाजर खा रहे हैं क्या वो सस्टेनेबल डाइट का पार्ट है? नहीं है क्योंकि वो तो प्रिजर्व है या जो है आउट ऑफ सीजन है। तो सस्टेनेबल डाइट में आप जो कुछ भी खा रहे हैं ये अब में बहुत बड़ा मिथ है कि हम तो बहुत हेल्दी फूड खा रहे हैं। हम हेल्दी फूड नहीं खा रहे। हम जो कुछ भी मार्केट से बना बनाया ला रहे हैं या पैक्ड फूड ला रहे हैं। वो सब फूड है। वो न्यूट्रिशन उसमें कितना है इसकी

46:09 कोई गारंटी नहीं है। तो सस्टेनेबल डाइट आपको न्यूट्रिशन देगी। आपकी हेल्थ को जो इंप्रूव करेगी और आपको एक तरह से कहें आपकी लाइफ को लाइफ की क्वालिटी को बढ़ाएगी। तो दिस इज अ सस्टेनेबल डाइट। सस्टेनेबल डाइट क्या होती है? प्रमोट द ऑल द डायमेंशन ऑफ़ इंडिविजुअल हेल्थ एंड। आपकी हेल्थ के हर पार्ट को इंप्रूव करेगी। वो एनवायरमेंट पर कम से कम उसका नेगेटिव इंपैक्ट होगा। असेबल होगी, अफोर्डेबल होगी, सेफ होगी और कल्चर ही एक्सेप्टेबल होगी। यह आप देखिए। यह नई टर्म जो है आती है कि सांस्कृतिक रूप से भी वो मानी जाएगी। आपने जैसे हमारे

46:54 जो बड़े लोग हैं ना वो उनके यहां शादी वगैरह होती थी तो उसका मीनू अलग होता है। आजकल की शादी वगैरह का मेनू अलग है। क्योंकि वो कल्चरली एक्सेप्टेबल हो गई है। लेकिन वो है सारी की सारी क्या? फूड है। दिस इज नॉट ए सस्टेनेबल डाइट। पहले के जमाने में जब लोकल एरिया में कोई फंक्शन होता था तो वहां पर जो फूड होता था जैसे कद्दू अगर हो रहा है तो उस जगह कद्दू बनेगा। जहां पे जो है लोकल एरिया में जो फूड होता था वो बनता था। साउथ में हम जाएंगे तो वहां पर आपको फर्मेंटेड फ़ूड मिलेगा। क्योंकि उस एरिया का है। वहां नारियल का तेल काम में लिया जाएगा। हम लोग नारियल का तिल काम में नहीं ले सकते क्योंकि हमारे यहां मूंगफली होती है नॉर्थ में तो मतलब वो वो एक तो सस्ता भी होता है जो सस्टेनेबल डाइट होती है ना एक हमारे मन में मिथ है कि सस्टेनेबल डाइट जो है वो

47:41 अफोर्डेबल नहीं है वो ही अफोर्डेबल है जो हम फूड खा रहे हैं वो अफोर्डेबल नहीं है वो तो एक तरीके से हमने कह दिया ना कि पैग्स फूड है वो तो हमारा एक कंफर्ट ज़ोन है कि हम आर्डर देते हैं घर से गए बैग लेके दो बग लाए खरीद लाए और खा लिया। सस्टेनेबल फूड में मेहनत हमारी लगती है। लेकिन अफोर्डेबल है वो सेफ है। तो सस्टेनेबल फूड खाना चाहिए। हमें क्यों खाना चाहिए? बहुत सारी इस मैंने बताए थे क्योंकि एनवायरमेंट हेल्थ को बढ़ाते हैं। फूड प्रिंट को रिड्यूस करते हैं। रिसोर्स का ऑप्टिमाइजेशन होता है और बायोडायवर्सिटी का प्रोटेक्शन होता है सस्टेनेबल डाइट यूज़ करने से। एम तो मैंने आपको पहले ही बताया कि ऑप्टिमल ग्रोथ एंड डेवलपमेंट होता है इंडिविजुअल का और माल

48:26 न्यूट्रिशन नहीं होता। आजकल माल न्यूट्रिशन, मेल न्यूट्रिशन, कुपोषण एक बहुत बड़ा इशू है। आप हम या हमारे आसपास के लोग भी अगर चेकअप के लिए जाएंगे ना तो सब में विटामिन बी की डेफिशिएंसी, विटामिन डी डी की बी की डेफिशिएंसी डेफिनेटली आएगी। कारण क्या है कि हम जो फूड खा रहे हैं, वो फूड खा रहे हैं। हमारे को न्यूट्रिशन तो मिल ही नहीं रहा। तो कुपोषण के शिकार हम सब हैं। एक तरीके से देखा जाए। डाइट जो है हमारी जो है हमें किसी भी डिजीज से प्रोटेक्ट करती है और बायोडायवर्सिटी को तो प्रिवेंट करती ही करती है। यह देखिए सस्टेनेबल फूड का जो भी चीजें होती है कल्चर हेरिटेज स्किल को

49:12 बढ़ाती है। इको फ्रेंडली होती है। सीजनल होती है। जो भी किचन न्यूट्रिएंट नीड्स और फूड सिक्योरिटी वगैरह को बढ़ाती है। अब क्या हम कर सकते हैं? पहला तो चूज लोकल प्रोडक्ट जैसा मैंने आपको बताया लोकल प्रोडक्ट्स व्हाटवर द लोकल प्रोडक्ट्स अवेलेबल इन योर नियर बाय शॉप्स यू शुड कंज्यूम देम प्लांट बेस्ड प्रोडक्ट काम में ले हम ज्यादा से ज्यादा बाय वो सीजनल जो भी है वो खरीदें हम ईट वेरिएंट मतलब अलग-अलग तरह का खाना खाएं। यह नहीं कि मूंग की दाल खा रहे हैं तो रोज मूंग की दाल खा रहे हैं। नहीं उसमें वेरिएशन लाए। हम कहते हैं ना दाल ही तो है। एक मिथ मेरे को डाइटिशियंस और कई न्यूट्रिश कहते हैं कि पल्ससेस खाइए। ठीक है? दाल खाइए। आप अपने खाने में दाल खाइए।

49:59 अब दाल खाने में एक बात जो आती है वो ये है कि आपको दालें बदल बदल के खानी चाहिए। क्योंकि हर दाल का प्रोटीन का जो स्ट्रक्चर है, जो प्रोटीन कंपोजीशन है, वो हर दाल की अलग-अलग है। ये जो न्यूट्रिशन वाले विद्यार्थी या जो साइंस वाले विद्यार्थी वो समझ सकेंगे कि हर दाल में प्रोटीन है तो प्रोटीन लेकिन अलग टाइप के प्रोटीन है हर में और हमारी बॉडी को हर तरह के प्रोटीन की जरूरत है। तो प्रोटीन हमें दालें बदल बदल के खानी चाहिए। यह नहीं कि हम एक दाल खा रहे हैं। हमें जो पसंद है वही खाते जा रहे हैं। सस्टेनेबल फूड लेवल्स। फूड लेवल्स के बारे में हम लोग बहुत कम जानते हैं। इसके बारे में भी डिस्कस करेंगे। फूड वेस्टेज को मिनिमम रखें हम। खाना नहीं छोड़ें। जितनी

50:46 रिक्वायरमेंट है उतना खाएं और पैकेजिंग फ्री फूड्स खाएं। वो पैकेजिंग जो है फ्री फूड तभी मिलेगा जब आप लोकल मार्केट से जाके खुद खरीदेंगे। ऑनलाइन मंगाएंगे तो वो तो पैक्ड ही आएगा। आजकल देखा होगा आपने मशरूम भी पैकेजिंग में आ रही है। अच्छा एक नई कल्चर और चली है कि लोग जो है कटी कटाई सब्जियां लेके आते हैं। वो भी पैक आ रही है। तो अब वो मतलब ही नहीं है न्यूट्रिशन का। उसने धोई है, काटी है, क्या करा है ये उसी को पता है। तो वो इस तरह की जो आपकी हैबिट्स है उनको आप बदले और आप अपना अगर खुद का भोजन लगा सकते हैं। खुद के प्लांट्स लगा सकते हैं। तो इट इज द वेरी गुड थिंग। यह आपको बता ही दिया मैंने। जल्दी से मैं कुछ और चीजें बताना चाह रही हूं। अब कि प्रैक्टिकली क्या है? यह सब तो

51:32 थ्योरिटिकली हो रहा है। अभी प्रैक्टिकली क्या? तो प्रैक्टिकली हम जो कुछ कर सकते हैं तभी किसी चीज की बात हो सकती है। एक तो हमारे प्लांट बेस्ड फूड हो। दूसरा होल प्लांट्स को खाएं आप वेजिटेबल्स, ग्रेंस एंड लेग्यूम्स को और चूज़ लोकल एंड सीजनल। बार-बार वही कह रही हूं। मिनिमाइज फूड बेस्ड फूड को स्टोरेज प्रॉपर्ली करें ताकि ओवरपचे ना करें। हम कहते हैं ना जब से फ्रिज का आविष्कार हुआ है ना तब से हम 8आ 10-10 रोज की सब्जियां लगा के रखने लगे तो वह नहीं करें। उसमें वेस्टेज होता है और फूड की न्यूट्रिशन वैल्यू भी खत्म होती है और वेस्टेज को जो है रिड्यूस करें। सर्टिफाइड प्रोडक्ट लें और माइंडफुल पैकेजिंग मतलब ऐसा नहीं कि पैकेजिंग पर ध्यान दें। ऐसा नहीं कि बहुत अच्छी ब्राइट पैकेजिंग है। वो अच्छा है। ऐसा नहीं

52:18 मिनिमम पैकेजिंग वो कंसमशन ऑफ़ पैकेज एंड कन्वीनियंस और धीरे-धीरे चेंजेस कर सकते हैं हम। एकदम से हम चाहे कि हम कुछ चीज बदल लें दैट नॉट पॉसिबल। हेल्दी डाइट जब हम खाते हैं तो चार चीजें हमें ध्यान में रखनी चाहिए। हेल्थ, एनवायरमेंट, सोसाइटी और इकोनमी। सिर्फ हम अपना पेट भरने के लिए खाना ना खाएं। अपनी हेल्थ का ध्यान रखें कि हेल्दी है या नहीं, बैलेंस्ड है या नहीं और सेफ फूड है या नहीं। और पोर्टेबल वाटर पानी अच्छा है या नहीं, पीने वाला है या नहीं? एनवायरमेंट को देखें कि हम जो खा रहे हैं जो हमारी डाइट है वो बायोडायवर्सिटी को प्रिजर्व कर रही है या नहीं, नेचुरल रिसोर्सेज को

53:05 प्रिजर्व कर रही है या नहीं, सीजनल है या नहीं? और रिड्यूस फूड वेस्टेज और ऐसा खाना हो जो हम सबके साथ बैठ के खा सके। ऐसा नहीं है कि किसी को पसंद नहीं आ रहा। आप जबरदस्ती में बैठ के खा रहे हैं। सबको पसंद आए। हमारी सोसाइटी में एक्सेप्ट किया जा सके। ऐसा फूड हो और अफोर्डेबल हो और मतलब सबको इक्विटेबल हो। सब बराबर हो। ये देखिए हेल्दी और न्यूट्रिशनल वैल्यू और इसका एनवायरमेंटल इंपैक्ट देखिए। ये देखिए विटामिन बी2 सी बी12 ये हाई क्वालिटी प्रोटीन और ये मिनरल्स हैं और ये प्रोबायोटिक माइक्रो ऑर्गन प्रोबायोटिक मतलब आजकल आपने देखा होगा आप अगर किसी मॉल वगैरह में जाते हैं तो वहां प्रोबायोटिक की छोटी-छोटी शीशियां मिलती है दही एक तरह से प्रोबायोटिक है लेकिन हम खाते हैं ग्रीक कर्ड बड़ा अच्छा लगता है कि ग्रीक

53:51 कर्ड है नहीं हम अपने घर में जमाए ना उस दही से बेहतर कुछ भी नहीं हो सकता एक थोड़ा सा मिथ यहां दूर करना चाहती हूं कि दही में जब तक हल्की सी खटास नहीं होगी होगी तब तक वह प्रोबायोटिक नहीं माना जाता। हम कहते हैं कि दही अच्छा होना चाहिए। बहुत मीठा होना चाहिए। मतलब उसमें हल्की सी भी खटास नहीं हो। तो फिर वो दही अच्छा दही नहीं है। जो लैक्टोबसिलस बैक्टीरिया है वो प्रॉपर नहीं है। दही को पूरा अच्छे से जम जाने दें। अच्छे से उसमें जो है माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स का डेवलपमेंट हो जाने दें। तब उसको कंज्यूम करें। राइदर देन इट कि आप उसको जमाए और थोड़ा सा रखें और तीन चार पांच घंटे हल्का सा वो जमे और फ्रिज में रख दे और उसको खा लें। नहीं दिस इज़ नॉट द राइट वे टू इट प्रोबायोटिक्स। काइट इज़ अ प्रोबायोटिक। तो

54:36 यूज़ द प्रोबायोटिक एंड द माइंडफुल माइंडफुल यूज़ करें आप उसका और अच्छे से उसको जमने दे तब तो उसमें बैक्टीरिया डेवलप होंगे। अदरवाइज आप दही खा लेंगे तो भी जो आपको उसका बेनिफिट मिलना चाहिए था वो प्रॉपर नहीं मिल पाएगा। दही साथ ही साथ यह तो हमारा फूड है जो हमारी ये रिक्वायरमेंट तो पूरी करे ही करे लेकिन साथ में बैलेंस भी हो। यानी कि ग्रीन हाउस गैस का कम से कम हो। लैंड वाटर यूज़ कम से कम हो। नाइट्रोजन फुटप्रिंट कार्बन फुटप्रिंट हमने सुना है। फूड की बात हो रही है। नाइट्रोजन फुटप्रिंट होते हैं रिड्यूस डिग्रेडेशन और बायोडायवर्सिटी। तो इन दोनों में बैलेंस जब होगा तो हमारी डाइट सस्टेनेबल डाइट कहलाएगी। सस्टेनेबल डाइट का मतलब यह भी नहीं है कि सारा हम एनवायरमेंट के लिए सोच लें कि भ एनवायरमेंट को नुकसान नहीं पहुंचना। चाहिए हमारी बॉडी को नुकसान पहुंच जाए। ऐसा

55:23 नहीं। सस्टेनेबल डाइट मींस द प्रॉपर बैलेंस बिटवीन हेल्थ एंड न्यूट्रिशन वैल्यू ऑफ़ आवर एंड द एनवायरमेंटल इंपैक्ट। तो व्हेन बोथ आर इनंबैलेंस देन डाइट इज़ नोन एस द सस्टेनेबल डाइट। अब ये आपकी पर्सनल बात है। पर्सनल मतलब जिसको कि हम समझ सकते हैं और थोड़ा सा आप अपने नॉलेज को भी इंप्रूव कर सकते हैं कि हमें कितनी एनर्जी की जरूरत है। यह देखिए। सो नॉर्मली आप 30 से 50 के बीच में मेल है तो आपकी कैलोरी की रिक्वायरमेंट अगर सेडेंटरी मतलब जैसे कि हम पढ़ाई पढ़ा ही रहे हैं बैठे ही बैठे हैं तो हमारी कैलोरी की रिक्वायरमेंट है 2200 से 2024 और फीमेल्स की 1800 और मॉनिटरी एक्टिविटी करें यानी कि हम दो-3

56:08 किलोमीटर घूम रहे हैं 34 किलोमीटर घूम रहे हैं थोड़ा सा मॉनिटरी एक्टिव है तो हमारी कैलोरी की रिक्वायरमेंट है 2400 से लेकर 2600 और फीमेल्स की 2000 कैलोरीज कैलोरी जो है वो एनर्जी जो होती है उसको मेजरमेंट की यूनिट अगर आप बहुत एक्टिव हैं, बहुत आप घूमते हैं, बहुत आप फिजिकल एक्टिविटी करते हैं। देन अगर आप मेल हैं, तो आपकी कैलोरी की रिक्वायरमेंट है 2800, टू 3000 और फीमेल्स की है 200। तो ये चीज आप बस ध्यान में रख लें। आपकी एनर्जी की रिक्वायरमेंट जैसे मैं हूं तो मेरी एनर्जी की रिक्वायरमेंट 1800 क्योंकि मेरी सेजरी लाइफ स्टाइल है। बस आज अभी इस इस चार्ट से आप देख लें कि मेरी एनर्जी की रिक्वायरमेंट कितनी है। बस इतना सा आज आप देख लें और अगर आप 51 से ज्यादा है तो आपकी एनर्जी की रिक्वायरमेंट है। तो अगर

56:56 आप एज को छोड़ भी दे तो मान के चलें कि 1700 तो वुमस की एनर्जी रिक्वायरमेंट है और 200 मेल्स की एनर्जी रिक्वायरमेंट है। एक ब्रॉड सेंस में लेके चलें। अब हमारे दिमाग में यह पता होना चाहिए कि हमारी बॉडी की रिक्वायरमेंट एनर्जी की इतनी है। अब हमें खाना क्या है और कैसे खाना है? कैसे सस्टेनेबल डाइट करनी है? ये हम देखते हैं। अब हम जो खाना खाएं उसमें से 40 से 45 से जैसे मान लो दो 1000 2000 कैलोरी मेरी बॉडी की रिक्वायरमेंट है। तो लगभग मेरे को जो है 2000 है ना तो 2000 में से लगभग मेरे को 1000 कार्ब से मिलनी चाहिए। कार्ब का मतलब ग्रेंस और फूड्स।

57:41 मतलब मेरी बॉडी की एनर्जी इतनी परसेंट कार्ब से आनी चाहिए। इतने परसेंट फैट से आनी चाहिए। 2000 की बात कर रही हूं मैं और प्रोटीन के इतने से आनी चाहिए। बस इतना सा हमें ध्यान में रखना है तो हम सस्टेनेबल डाइट कहने की हमें किसी को जरूरत ही नहीं है। हम अपनी बॉडी का ध्यान खुद रख लेंगे। यह आप एक बड़ी सी चीज ध्यान में रखें कि मेरी बॉडी की रिक्वायरमेंट 2000 कैलोरी दिन भर में और उसमें से मुझे कार्ब्स खाने हैं लगभग 1000 कैलोरी के। फैट मुझे खाने हैं 20 से 30% एनर्जी मिले जिससे प्रोटीन से। अब देखें एक कप चाय ही तो है। एक कप चाय में 55 कैलोरी होती है। शुगर उसमें 6 ग्राम होती है और फैट उसमें 1 ग्राम होता है। तो एक कप चाय सिर्फ एक कप

58:26 चाय नहीं है। दिन भर में अगर आपने तीन कप चाय पी तो आपने 200 कैलोरीज के आसपास कंजमशन कर लिया जिसमें कि आपने एक 6 ग्राम एक कप में है तो 18 ग्राम आपने शुगर खा ली और 1 ग्राम शुगर से चार कैलोरी मिलती है। यह आप डाटा चाहे तो ध्यान रख सकते हैं कि 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट से चार कैलोरी मिलती है। 1 ग्राम प्रोटीन से चार कैलोरी मिलती है और 1 ग्राम फैट से छ कैलोरी मिलती है। आगे आपको दिखा भी दूंगी। तो आप जब कैलोरी काउंट अपना करेंगे ना तो आपको समझ आ जाएगा कि मेरे लिए क्या अच्छा है। अब ये देखिए ये एक बहुत बड़ा मिथ है। हमें हमारे घर में बड़े छोटे बच्चे सब बड़े हैं। खाली पेट डायबिटीज है। सुबह हो

59:11 खाली पेट चाय नहीं पिएंगे। हम बिस्कुट खाएंगे। भाई बिस्कुट बिस्कुट है। चाहे वह डाइजेस्टिव बिस्कुट हो, चाहे वह Parleg बिस्कुट हो, कोई सा भी बिस्कुट है, सब बराबर है। कोई सा भी लो एनर्जी नहीं है। चाहे आप बाबा रामदेव जी के खाएं, चाहे कोई सा भी ब्रांड खा लें। बिस्कुट मतलब बिस्कुट सब में बराबर कैलोरीज है। बराबर फैट है। बस अंतर ग्रेंस का हो सकता है। ये आपको सामने दिख रहा है। Parleg खाओगे तो भी वही बात है। डाइजेस्टिव है। थ्रिप्टिन खाओगे तो थ्रिप्टिन में प्रोटीन ज्यादा है। तो यह वहम निकालते हैं कि हम तो बिस्कुट खाते हैं। भाई आप बिस्कुट खा रहे हैं। बात तो वही है। कोई सा भी बिस्कुट खा लें आप। यह देखिए सो गए। हम कहते हैं बेसन का

59:56 लड्डू तो बहुत अनहेल्दी है और बिस्कुट सुबह खाने चाहिए चाय के साथ लेकिन लड्डू नहीं खाने चाहिए। देखिए लड्डू में भी आधा जो एक लड्डू है उसमें 132 कैलोरी है। सिर्फ मीडियम साइज में। और ये देखिए आपने पांच या चार बिस्कुट खाए तो 306 कैलोरीज पहुंच गई आपकी बॉडी में। तो खाने में फायदा किसका है भाई? इस लड्डू को खाओ। बेसन भी है उसमें। घर का बना हुआ है। इसमें पता नहीं कौन सा ट्रांस फैट है। क्या है? कौन सी कार्ब पता ही नहीं। फैट देखिए इसमें 12 ग्राम फैट है। इसमें 6 ग्राम ही फैट है। वो भी हमारे घर का फैट है जो हमने अच्छा काम में लिया है। यहां पे कौन सा फैट है पता ही नहीं। तो यूज़ देसी फूड भाई। लड्डू खाएं। सुबह लड्डू खा लें। कोई दिक्कत नहीं

1:00:43 है। लेकिन आप उसकी जगह पांच अगर बिस्कुट खा के ये सोच रहे हैं कि मैं तो डाइट कॉन्शियस हूं और मैं तो लड्डूवडू से दूर रहता हूं। तो कोई फायदा नहीं है। आपने तो इससे ट्रिपल लगभग दुगनी से ज्यादा कैलोरीज कंज्यूम कर ली। कार्ब भी ज्यादा है इसमें। तो ये छोटी-छोटी चीजें हैं जो कि हमारी डाइट को सस्टेनेबल डाइट बनाती हैं। तो ये हमें थोड़ा सा जानकारी होनी चाहिए। देखिए समोसा दो समोसा खाएंगे तो 250 कैलोरी मिलेगी। आलू गोभी की सब्जी खाएंगे एक कप तो 150 कैलोरीज मिलेगी। बिरयानी खाली 500 एक कप। बिरयानी खाई ना आपने 500 कैलोरी मिली आपको और नान खा लिया तो 250 एक पीस रोटी खाई तो 100 कैलोरी मिली पनीर टिक्का खाया तो 200

1:01:32 तो ये कैलोरी मोटी-मोटी कैलोरीज आपको पता होनी चाहिए कि मैं एक चम्मच अगर शुगर खाऊंगा तो मुझे 5 ग्राम शुगर मैंने खाई तो एक में अगर चार हो रही या पांच हो रही है तो लगभग 25 कैलोरीज एक चम्मच में है। तो कैलोरी अब देखिए मैंने आपको बताया था कि 1 ग्राम प्रोटीन अगर आप खाते हैं तो चार कैलोरीज मिलती हैं। 1 ग्राम कार्ब अगर आप खाते हैं तो चार कैलोरीज मिलती है और 1 ग्राम फैट खाते हैं तो नौ कैलोरीज मिलती है आपको। तो ये डिसाइड आपको करना पड़ेगा कि हमें बॉडी की रिक्वायरमेंट मेरी सेडेंटरी लाइफ स्टाइल है। मेरी 2000 कैलोरीज की रिक्वायरमेंट है। तो भोजन टोटल कितनी कैलोरीज खानी चाहिए? किससे आएगी? अब एक चम्मच में 5 ग्राम फैट होता है। तो अगर आपने 1 ग्राम कोई ऑल खाया तो 5 45 45 कैलोरीज आ गई। अब आप समझ सकते हैं कि 1

1:02:18 ग्राम एक चम्मच फैट में जो है कितनी कैलोरीज आती है। 1 ग्राम का एक चम्मच छोटी चम्मच जो होती है उसमें 5 ग्राम शक्कर आती है। 5 ग्राम शक्कर का मतलब 20 कैलोरीज आपने एक चम्मच में ले ली। प्रोटीन अगर आपने दाल खाई है 1 ग्राम या मान लो 5 ग्राम दाल खाई है तो 20 ग्राम 20 कैलोरीज आपको मिलेगी। तो ये एक छोटा सा आपको कैलकुलेशन अगर माइंड में रखेंगे ना तो आपकी डाइट को बहुत सस्टेनेबल डाइट और बहुत न्यूट्रिशन डाइट आपको मिल जाएगी। जब भी आप खाएंगे ना आपको लगेगा मैंने एक चम्मच खाया है तो आप मनी मन कैलकुलेट कर लेंगे कि हां इतनी कैलोरीज मैंने खा ली। अब मुझे यहां रुक जाना है। समोसा पूरा समोसे में

1:03:06 100 कैलोरीज है। तो मैं समोसे की क्रेविंग तो आ रही है। मुझे खाना है तो मैं एक बाइट खा लूं। बस क्रेविंग दूर कर लूंगा। तो क्रेविंग का मतलब है कि आपने पास 10 अगर एक बाइट खाई है तो पांच छह कैलोरीज खाई है आपने। तो पूरा समोसा खाने से आप बच सकते हैं। अगर आपको इस बेसिक इनेशन पता है तो इसके बाद ये देखिए कैलोरी रिक्वायरमेंट आपको मैंने बता ही दी। अब कैलोरी काउंट कैसे करेंगे? हमारी कैलोरीज का काउंट क्या है? सर टाइम हो रहा है क्या? >> नहीं मैम कोई दिक्कत नहीं है। आप तो बहुत शानदार चल रहा है मैम। प्लीज कंटिन्यू। >> ठीक है। >> कंटिन्यू मैम कंटिन्यू। >> अब आप देखिए कि कैलोरीज का काउंट कैसे होगा? कैसे पता चलेगा कि मुझे कितना फैट खाना चाहिए, कितना कार्बोहाइड्रेट खाना

1:03:54 चाहिए, कितना प्रोटीन खाना चाहिए? कैसे काउंट होगा? काउंट कैसे करते हैं कि अगर आपका बॉडी का वेट मान लीजिए 50 ग्राम है तो आपको जो है प्रोटीन खाना है 1 ग्राम मोटा-मोटा हिसाब रखें बारीक के हिसाब से नहीं रहेंगे। 1 ग्राम प्रोटीन पर वेट के हिसाब से रिक्वायरमेंट है। तो अगर आपका 50 किलो वजन है तो आप 50 ग्राम प्रोटीन की रिक्वायरमेंट पर डे है। अगर आपका वजन 70 किलो है तो आपको 70 ग्राम की है। अगर आपका वजन 40 40 किलो है तो आपको 40 ग्राम की है। तो ये आप अपना निकाल सकते हैं कि मुझे 40 ग्राम की है। अब आपको कार्बोहाइड्रेट कितना खाना है? तो कार्बोहाइड्रेट आपको कितना खाना है? उसकी भी रिक्वायरमेंट होती है कि जितना आपका वजन है उसके अकॉर्डिंग आपको

1:04:40 कार्बोहाइड्रेट खाना है और आपको कितना इफेक्ट खाना है वो भी रिक्वायरमेंट है। ये मैंने फार्मूला बना रखा है। आप देख सकते हैं। तो आप अपनी बॉडी को समझ लें बस। तो जैसे ही आप अपनी बॉडी को समझ लेंगे ना तो आप अपना बीएएमआई भी निकाल लेंगे। अभी बैठे-बैठे आप अपना बीएएमआई निकाल सकते हैं। आपका वेट है उसको डिवाइडेड कर दें। आपकी हाइट मीटर स्क्वायर से वो आपका बीएएमआई आ जाएगा। और अगर ये बीएएमआई आपका जितना भी आता है जैसे यहां आया है ना जैसे हाइट 70 इंच है तो 70 * 70 और 49 और उसको डिवाइडेड कर दिया हाइट से तो ये आ गया बीएएमआई और ये इसका कैलकुलेटर है अगर अब ये देखिए 25.8 आया मतलब 25.8 का मतलब क्या है? आप ओवरवेट हैं। ओवरवेट है तो आप अपने कैलोरीज को कम कर दें। 2000 कैलोरी का

1:05:29 रिक्वायरमेंट है तो आप अपनी 1500 कर दें। 500 कैलोरीज पर डे घटा दें या 200 कैलोरीज पर डे घटा दें। इंटेक थोड़ा सा कम करना पड़ेगा। 200 कैलोरीज जब आप घटा देंगे तो आपकी बॉडी का जो फैट है क्योंकि एनर्जी तो बॉडी को चाहिए। उस फैट से वो एनर्जी पूरी हो जाएगी। तो ओवरवेट आप धीरे-धीरे आपका वेट लॉस होगा। आजकल हम क्या कर रहे हैं कि डाइट का मतलब सिर्फ वेट लॉस है। हम ओबेस हैं। हमें वेट लॉस करना है। उस हिसाब से हम डाइट करते हैं। तो वो बिल्कुल भी साइंटिफिक नहीं है। पहले आप अपना बीएएमआई निकालें। कितना आपको वेट लूज़ करना है, कितना आपको उसमें न्यूट्रिशन के थ्रू करना है, कितना कार्बोहाइड्रेट के थ्रू करना है, कितना प्रोटीन के थ्रू करना है। कभी भी वेट लॉस

1:06:14 जर्नी में प्रोटीन से कंप्रोमाइज नहीं किया जाता। वेट लॉस जर्नी में हरदम बात होती है फैट्स की और फैट्स भी बाद में आते हैं। पहले कार्बोहाइड्रेट को कम करते हैं। तो अगर आपको पता चल जाएगा कि मैं कार्बोहाइड्रेट ज्यादा खा रहा हूं तो मैं प्रोटीन का इंटैक्ट बढ़ाकर कार्बोहाइड्रेट कम कर दूं। मान लो मैं चार रोटी खा रहा हूं और दाल एक कटोरी खा रहा हूं तो मैं दाल को दो कटोरी कर दूंगा और रोटी को दो कर दूंगा। हो गया बैलेंस। कहीं जाने की जरूरत ही नहीं है हमें किसी के पास। अपना बीएएमआई हम घर बैठ के निकाल लें। अब जैसे ही बीएएमआई निकल गया हमें लग रहा है कि हम ओबेस हैं या हम क्या ओवरवेट में आ रहे हैं या हम एक्सट्रीमली ओवरवेट है तो 200 कैलोरीज की हमारी रिक्वायरमेंट है तो हम उसको 1000 कर दें बस इससे कम ना करें

1:06:59 500 ही ना कर दें धीरे-धीरे और डाइट में अगर कोई आपकी मेडिकल इश्यूज नहीं है तो सिर्फ कंट्रोल होगा कार्बोहाइड्रेट पर प्रोटीन कभी भी कंप्रोमाइज नहीं होते अगर कोई किडनी का एस का इशू है तो एक अलग चीज लेकिन नॉर्मली प्रोटीन तो खाना ही है। प्रोटीन एनर्जी का जो कैलोरी का जो बढ़ाते हैं वो हम करते हैं प्रोटीन को बढ़ाकर और कार्बोहाइड्रेट को घटाकर। तो ये आप खुद भी कर सकते हैं अपनी बॉडी के लिए। अब आपका आइडियल बॉडी वेट कितना होना चाहिए? मुझे तो पता ही नहीं है। मेरे को तो लग रहा है कि मेरा 70 किलो वजन है। बिल्कुल सही है। नहीं आइडियल बॉडी वेट जो है हमारी न्यूट्रिशन सोसाइटी उसने दे रखा है। आप खुद भी निकाल सकते हैं। 50 केg वेट है

1:07:46 उसमें प्लस 2. आपका इंच है। जैसे कि मान लो आप 5.2 इंच के हैं तो इसमें 50 में आप 2.3 2.3 और जोड़ दें दो बार तो आपका आइडियल बॉडी वेट आ जाएगा 50 kg और उसमें से आपके जितने भी इंच हैं 5 फीट के बाद जितने भी इंच बढ़ते जा रहे हैं उसमें 2.3 और जोड़ते जाएं तो वो आइडियल वेट आ जाएगा आपका मेल्स का और फीमेल्स में जोड़ेंगे 40 45.5 और फीमेल मेल्स में जोड़ेंगे 50 kg तो आप अपना आइडियल वेट निकाल सकते हैं। आइडियल बॉडी वेट आपका अगर निकल गया तो आपको एडजस्टेड बॉडी वेट यानी कि आपका बॉडी वेट कितना एडजस्ट करना है वह भी निकाल सकते हैं। आइडियल वेट प्लस04 तो ये आपका एडजस्टेबल बॉडी वेट आ जाएगा। तो कहीं इधर

1:08:31 उधर हमें जाने की जरूरत ही नहीं है। हम अपना और अपने फैमिली का तो खुद ही ध्यान रख सकते हैं। बस थोड़ी सी चीजें हमें पता चल जाए कि क्या करना है और क्या नहीं करना और कैसे करना है। तो ये आप खुद भी घर पे कर सकते हैं। ये एक चीज मैं बताना चाह रही थी कि न्यूट्रिशनल फैक्ट या न्यूट्रिशन वैल्यूस हम हर पैकेट में पीछे लिखी रहती है। यह देखिए यह किसी भी कोई प्रोडक्ट है उस प्रोडक्ट की वैल्यूस लिखी है। 115 कैलोरी शायद हम और आप पढ़ते ही नहीं है। लेस का पैकेट लाए कुछ भी लाए सॉस की बोतल लाए व्हाटएवर कुछ भी हम लाए हर एक के पीछे उसके न्यूट्रिशनल फैक्ट इसको न्यूट्रिशनल टर्म में कहते हैं न्यूट्रिशन

1:09:17 लेबल्स। हमें न्यूट्रिशन लेबल्स पढ़ने आने चाहिए। किसी भी मटेरियल के पीछे लिखा है कैलोरीज। देखिए आप इसके पीछे मैंने जैसे बताया कि 115 कैलोरीज लिखा है। अब 115 कैलोरीज देख के हम खुश हो जाते हैं कि इस पैकेट की तो 115 ही तो कैलोरी है इसमें। नहीं भाई आप ऊपर भी पढ़िए। ऊपर लिखा है अमाउंट पर सर्विंग। पर सर्विंग का मतलब यहां पर इसके दो पीस है। दो पीस में है। आपने दो पीस खा लिए तो कैलोरीज कितनी हो गई? 230 पर सर्विंग अमाउंट पर सर्विंग एक पीस में 115 कैलोरी है। दो पीस आपने खा लिए तो 230

1:10:04 कैलोरीज हो गई। तो न्यूट्रिशन फैक्ट हम जरूर पढ़े। हम पढ़ लेते हैं कि 500 कैलोरीज है। भाई 500 अगर चार सर्विंग है उसमें तो 2000 कैलोरीज हो गई। तो यह ध्यान में रखें आप। इसलिए तो आप जरूर पढ़े। ये जो न्यूट्रिशनल लेबल्स हैं इनको तो पढ़ना हमें आना ही चाहिए कि कितना उसमें कोलेस्ट्रॉल है, कितना सोडियम है, कितना क्या है। आप 10-15 बार पढ़ेंगे ना तो उसके बाद निगाह आपकी अपने आप वहीं जाएगी। तो यह तो आप एक बार प्लीज इसको चेक करें और अपनी हेल्थ के लिए, अपनी फैमिली की हेल्थ के लिए, अपनी डाइट के लिए हम इतना तो कर सकते हैं कि थोड़ा सा पढ़ लें। हमें इनक्रीस क्या करना चाहिए? वेजिटेबल, फ्रूट्स, नट्स ये सब हम जानते हैं। सीजनल

1:10:49 प्रोडक्ट रिड्यूस क्या करना चाहिए? फूड वेस्ट को रिड्यूस करना चाहिए। और लिमिट हम ये नहीं कह सकते कि हम किसी चीज से बच सकते हैं या हम सॉफ्ट ड्रिंक नहीं पिएंगे या हम कोई पैकेज फूटेंगे। लेकिन उसको एक लिमिट में करें। प्रोसेस फूड कम से कम खाएं। जितनी हमको लगता है कि हां यदि हमारी बॉडी परमिसिबल है कर सकते हैं। उतना हम खाएं। इसके बाद फूड चैलेंजेस क्या है? आज की तारीख में एक तो बायोडायवर्सिटी लॉस हो ही रहा है। अनसस्टेनेबल फूड कंजमशन हम कर रहे हैं। डाइट रिलेटेड बहुत सारे इश्यूज हो रहे हैं और बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं कोविड के बाद। तो ये पपुलेशन ग्रोथ हो रही है। बहुत एनवायरमेंटल डिग्रेशन हो रहा है। फूड लॉस एंड वेस्टेज तो हो ही रहा है। तो ये चैलेंजेस है हमारे फूड सिस्टम के आज

1:11:35 में क्योंकि हमको सस्टेनेबल फूड को खाने में यूज करने में थोड़ी सी दिक्कत डालते हैं। दिस इज द प्रॉमिसिंग। क्या-क्या आगे हो सकता है जो हम कर सकते हैं। एनिमल प्रोडक्ट, ग्रीन प्रोडक्ट्स। बार-बार बात एक ही आती है कि हम गो टू ग्रीन प्रोडक्ट्स गो फॉर द ग्रीन प्रोडक्ट्स। फ्यूचर सिस्टम में हम ये सब कर सकते हैं। फंक्शनल फूड खाएं। नॉर्मल फूड, फ्यूचर फूड्स जो हो सकते हैं। जैसे कि आजकल मशरूम बहुत यूज़ हो रही है। मशरूम का ट्रेंड बहुत ज्यादा है। अच्छा प्रोटी रिच फूड है। इस तरह से फूड हम नए यूज कर सकते हैं। फूड सस्टेनेबिलिटी कैसे हो सकती है? देखिए। सबसे पहले तो प्रोडक्शन हमारा सस्टेनेबल डाइट कैसी होगी? प्रोडक्शन

1:12:21 हमारा ऑर्गेनिक होना चाहिए। फिर उसके बाद उसका फ्रेमवर्क यानी कि जब उसकी ट्रांसपोर्टिंग होती है एक दूसरे से आता है तो वो सही होना चाहिए। प्रोसेसिंग और डिस्ट्रीब्यूशन में जो है एनवायरमेंट फ्रेंडली होना चाहिए। कंजमशन में भी ऑर्गेनिक, नॉन सिंथेटिक और लिटिल फूड खाना चाहिए और वेस्टेज कम होना चाहिए या वेस्टेज ऐसा हो जो कि बायोडिग्रेडेबल हो जो कि मतलब नेचर में अपने आप से खत्म हो जाए। ऐसा होना चाहिए। इसके बाद एनवायरमेंटली ईटिंग करनी चाहिए हमें। अपने लिए तो करें ही करें लेकिन ऐसा फूड खाएं जो कि एनवायरमेंटल फ्रेंडली हो। देख सकते हैं आप कि हाई इंपैक्ट क्या है? लो इंपैक्ट क्या है और ईट लेस हमें क्या चाहिए चाहिए? ईट मोर। तो ये हमें चीजें ज्यादा खानी चाहिए। मार्जिन और ये चीजें हमें कम खानी चाहिए। तो ये हो सकता है और

1:13:08 सस्टेनेबल ईटिंग मैंने बता ही दी। ईट मोर प्लांट्स वेस्टेज दो ही चीजें कर लें आप। तो प्लांट्स को ज्यादा खाएं। प्रोसेस फूड कम खाएं और खाने का वेस्टेज ना करें। तो भी मेरे ख्याल में हमारा फूड सस्टेनेबल फूड हो सकता है। सो दिस इज ऑल फ्रॉम माय साइड। इफ आई विल बी सॉरी मैम देयर इज अ रिक्वेस्ट कि डायबिटीज के आप एंबेसडर है तो डायबिटीज के रिगार्डिंग डाइट प्लान क्या होना चाहिए? कैसे होना चाहिए? क्योंकि ऑलमोस्ट एल्डरली जो >> बिल्कुल बिल्कुल सर डायबिटीज में सर दो तीन चीजें हमें ध्यान में रखनी चाहिए। एक तो कार्बोहाइड्रेट का कंजमशन सर हमें कम करना चाहिए। दो तीन मैं टिप देना चाहती हूं यहां पर कि एक तो कार्बोहाइड्रेट हम मिनिममत करें। मिनिमम कार्बोहाइड्रेट मतलब ये कि हम कई बार कहते हैं कि हम तो जौकी

1:13:55 रोटी खाते हैं। हम तो मिर्ची रोटी खाते हैं। क्योंकि हम डायबिटी है। हम गेहूं नहीं खा रहे। नहीं सीरियल्स मतलब सीरियल्स। कार्बोहाइड्रेट मतलब कार्बोहाइड्रेट। चाहे आप जौकी रोटी खा रहे हैं। ये बात जरूर है कि आप जौ ज्वार खा रहे हैं तो उनमें फाइबर्स या रफेस ज्यादा है। तो उसकी वजह से उनका जो आपकी शुगर लेवल है वो एकदम से नहीं बढ़ता। धीरे-धीरे बढ़ता है। तो सीरियल्स मतलब सीरियल्स आप गेहूं भी नहीं खाएं और ज की रोटी भी नहीं खाए उसको रिप्लेस करें प्रोटीन से। अगर कोई किडनी का इशू नहीं है तो इट इज सजेस्टेड कि आप अपने जो है जितना भी कार्बोहाइड्रेट का जो खाना है उसको आप जो है प्रोटीन से रिप्लेस कर दें। कई बार क्या होता है सर जैसे अपन सुबह अपन ने शुगर नापी तो जैसे ही हमने ब्रेकफास्ट करा हमने दलिया खा लिया कि हम तो दलिया खा रहे हैं। वेज दलिया मतलब हमने बहुत सारी

1:14:42 वेजिटेबल्स उसमें मिला ली। ठीक है वो अच्छा है लेकिन उसमें रफेस तो बढ़ गए लेकिन वो है तो गेहूं वो आपकी शुगर को स्पाइक तो देगा ही देगा तो उसकी जगह आप प्रोटीन अगर खाएंगे आप स्प्राउट्स खाएंगे तो वो डायबिटीज वालों के लिए बहुत अच्छा है। तो मेरा एज ए डायबिटिक एजुकेटर सजेशन पहला तो यही रहता है कि रिड्यूस कार्बोहाइड्रेट आप जितना रिड्यूस कर सकते हैं आप कर दें। उसकी जगह आप प्रोटीन रिप्लेस कर दें। दूसरा जो डायबिटिक वालों का एक बड़ा इशू होता है कि उनमें एकदम से कई बार क्योंकि वो दवाई भी खा रहे होते हैं, कई बार इंसुलिन भी ले रहे होते हैं तो एकदम से उनमें शुगर डाउन हो जाती है। तो उस स्थिति को रोकने के लिए फिर आप परहेज ना करें। आप एक टॉफी या कुछ

1:15:29 भी खा लें। कई जब कभी भी आपको लगता है कि आपकी शुगर 60 से कम जा रही है या 70 50 से कम जा रही है तो उसको थोड़ा सा स्पाइक आपको देने में कोई बुराई नहीं है। आप उसको हल्का सा स्पाइक दे सकते हैं। नहीं तो आप आगे समस्या में अगर मान लो ऐसी समस्या या लो शुगर की दिक्कत आपको दो चार महीने रह गई तो आपकी बॉडी की वेसल्स पर बहुत ज्यादा जो ब्लड वेसल्स हैं उन पे बहुत ज्यादा इंपैक्ट आता है। तो वो हम थोड़ा सा उस चीज को भी केयर काउंट करें। तीसरी बात यह सर कि फ्रूट्स की बात आती है। फ्रूट्स भी कार्बोहाइड्रेट रिच है। जैसे कि मैंगो नहीं खाना चाहिए। जैसे तो केला नहीं खाना चाहिए। तो केले में मेरा सजेशन था एज अ डायबिटिक एजुकेटर कि हम राइब्ड बनाना नहीं खाए। थोड़ा कच्चा केला हम खाएं। वो हमारे

1:16:17 लिए बहुत अच्छा होगा। कारण क्या कि केला पोटेशियम रिच है। तो जब पोटेशियम रिच होता है तो वो हमारे स्पाइक को और ब्लड वेसल्स को बहुत कंट्रोल करता है। क्योंकि हम सोडियम एकदम से बॉडी में नहीं बढ़ा सकते डायबिटीज वालों को। तो हम सलाह देते हैं कि आप पोटेशियम को इनक्रीस करें थोड़ा सा और पोटेशियम पक्के केले में मतलब सॉरी कच्चे केले में ज्यादा होता है। आप ब्राइब्ड बनाना ना खाएं। कच्चा थोड़ा हल्का कच्चा बनाना खाएं। तो यह दो तीन चीजें जो कि नॉर्मली की जाती है। मतलब सबसे पहली बात तो यह डायबिटीज वालों को कार्बोहाइड्रेट से थोड़ी दूरी बनाके रखनी चाहिए। मैम जैसे आपने बताया कि बेसन जो है अमूमन ये यहां पर कल्चर यही है कि जैसे डायबिटीज हुआ उसको बेसन पे शिफ्ट कर देते हैं आप बेसन से बनी हुई चीजें खाइए और

1:17:05 >> लेकिन बेसन के अलावा भी कोई प्रोटीन के ऐसे अच्छे सोर्स है जो कि एल्डर >> सर बिल्कुल बेसन तो है ही है बेसन के अलावा सर जैसे जितने भी स्प्राउट्स है आप मूंग की दाल का चीला बना ले वो भी रोटी की तरह काम करेगा मूंग की दाल बेसन को मिलाकर रोटी बना ले या फिर आप पूरा नहीं खाना चाहते तो 3/4 आप कोई से भी स्प्राउट ले लें और उसको मिला लें। रागी खा सकते हैं आप सर। रागी के साथ-साथ एक सर वो आता है चावल आता है सर। मुझे नाम याद नहीं आ रहा। उसको भी आप खा सकते हैं। अभी मुझे याद आ जाएगा सर। वो बिल्कुल ऐसा आपको फील देगा कि जैसे आप चावल खा रहे हैं। >> ठीक है। डाइट का स्पैन थोड़ा-थोड़ा रखना चाहिए या जैसे अपने रूटीन में मान लो खा रहे हैं। अभी ब्रेकफास्ट में कुछ ले लिया। तीन टाइम रिकमेंडेड है कि तीन टाइम जैसे नॉर्मल हम

1:17:51 खाते हैं और बीच में आपको लगता है तो थोड़ा सा आप कोई भी हेल्दी स्नैक्स जैसे मखाना मखाना डायबिटीज वालों को बहुत ज्यादा जो है सजेस्ट किया जाता है कि आप मखाना खाएं और पल्ससेस में मूंगफली तो है ही मूंगफली चना तो और उसके साथ अगर आप गुड़ खाते हैं तो गुड़ है तो शुगर नो डाउट कि शुगर की एक फॉर्म में लेकिन फिर वो बात आ जाती है कि उसमें रफेस है थोड़ा सा तो वाइट शुगर की जगह हम उसको थोड़ा सा क्योंकि कई बार मीठे की क्रेविंग डायबिटीज़ वालों को क्रेविंग होती है मीठे की तो उनकी क्रेविंग को दूर करने के लिए आजकल बहुत चल रहा है सर इस्टीविया खा लो ये खा लो पर वो मैं रिकमेंड हम नहीं करती क्योंकि वो बॉडी के अकॉर्डिंग नहीं है हम >> वो क्या है आर्टिफिशियल भी नहीं है तो वो नेचुरल प्रोडक्ट ही लेकिन हमारी बॉडी उनके लिए नहीं है वो प्लांट किसी और पर्पस से हम उसको एज ए सप्लीमेंट काम में ले रहे

1:18:38 हैं तो उसकी जगह तो हम है कि थोड़ा सा हम हल्का सा गुड़ खा लें या हल्की सी चॉकलेट खा लें अगर हमको ज्यादा ही बहुत क्रेविंग हो रही है तो डार्क चॉकलेट खा सकते हैं हम >> वो क्रेविंग हम शुगर की कैसे सेट कर सकते हैं? >> मैम इट्स वेरी इनफेटिव एंड वेरी मच थैंकफुल टू यू मैम। >> थैंक यू सर। >> नमस्ते मैम। >> नमस्ते। >> नमस्ते मैम। >> जी मैम मेरी एक क्वेरी है। >> मैम मैं गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज से हूं। जोधपुर राजस्थान से >> हमारे गर्ल्स कॉलेज में एनीमिया की गर्ल्स मैम बहुत ज्यादा है तो और वो फाइनशियली भी बैकवर्ड क्लास से आती हैं गर्ल्स तो उनके लिए कोई फूड ऐसा कोई हम उन्हें बताएं

1:19:25 >> मैम उनके लिए तो अगर आपके कॉलेज में जगह

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