संक्षिप्त सारांश
यह वीडियो रिया नामक एक लड़की की कहानी बताता है, जो जापानी दर्शन के माध्यम से अपनी समस्याओं का समाधान करती है। इसमें सात जापानी आदतें बताई गई हैं जो जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करती हैं।
- वर्तमान में जीना
- कम बोलना
- गरिमा के साथ सहना
- पुरानी पहचान को त्यागना
- खुद पर भरोसा करना
- आंतरिक मूल्य को पहचानना
- लगातार सुधार करना
अंतिम जापानी आदत
एक 30-दिवसीय चुनौती के दौरान, रिया नामक एक लड़की डॉ. बुक से बात करने के लिए उत्सुक थी। उसने डॉ. बुक को बताया कि कैसे उसने "गोल्डन स्टैचू" के सबक का पालन किया और महसूस किया कि वह सोने से भी ज्यादा मूल्यवान है, जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ा और उसने अपना पहला क्लाइंट हासिल किया। रिया ने डॉ. बुक को धन्यवाद दिया, लेकिन सातवीं जापानी आदत के बारे में पूछा। डॉ. बुक ने कहा कि रिया ने पहले से ही इसे लागू करना शुरू कर दिया है। डॉ. बुक ने कहा कि आज की कहानी प्रेरणादायक होने के साथ-साथ वास्तविक भी है, जो समुदाय के सदस्यों के जीवन में हो रहे बदलावों पर आधारित है। यह कहानी उन लोगों के लिए उपयोगी है जो अधिक सोचते हैं, भविष्य के बारे में चिंतित रहते हैं, गुस्सा करते हैं या अपनी वैल्यू कम समझते हैं। डॉ. बुक ने जापानी दर्शन के माध्यम से इन समस्याओं का समाधान देने का वादा किया और बताया कि इन आदतों को कैसे लागू किया जाए।
30-दिवसीय चुनौती की शुरुआत
डॉ. बुक द्वारा शुरू की गई 30-दिवसीय चुनौती शुरू हुई। कई लोगों ने इसमें भाग लिया, कुछ ने कैमरे चालू रखे और कुछ ने बंद। डॉ. बुक ने पहले दिन की बातें सिखाईं, जिसमें ध्यान और दिनचर्या शामिल थी। प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान, एक पुराने लीडर ने डॉ. बुक से रिया नामक एक शर्मीली सदस्य से बात करने का अनुरोध किया।
वह लड़की जो बोल नहीं पाती थी
डॉ. बुक ने रिया को अनम्यूट किया, लेकिन वह घबराई हुई थी और बोल नहीं पा रही थी। प्रोत्साहन के बाद, उसने कहा कि वह अपनी जिंदगी में हो रही चीजों को समझ नहीं पा रही है, वह बहुत अधिक सोचती है, उसका अतीत बुरा रहा है, वह भावनात्मक हो जाती है, जिससे झगड़े होते हैं, और उसका आत्मविश्वास कम है। वह आत्मनिर्भर बनना चाहती है, लेकिन ऐसा नहीं कर पा रही है। उसे लगता है कि दूसरे लोग उसकी वैल्यू नहीं करते हैं। उसने डॉ. बुक के जापानी दर्शन वाले वीडियो को देखने के लिए धन्यवाद दिया और पूछा कि वह इन समस्याओं को कैसे खत्म कर सकती है और क्या 30 दिनों में अपनी जिंदगी को बदल सकती है। डॉ. बुक ने उसे बधाई दी और कहा कि वह 30 दिनों में अपनी पूरी जिंदगी बदल सकती है, लेकिन उसे अगले 30 दिनों तक रोजाना लाइव आना होगा, बिना किसी बहाने के। डॉ. बुक ने कहा कि वह जापानी दर्शन के माध्यम से उसकी समस्याओं का समाधान देंगे, लेकिन एक साथ नहीं, बल्कि रैंडमली। रिया थोड़ी घबरा गई, लेकिन सहमत हो गई। डॉ. बुक ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि पहले दिन का सबक प्रतिबद्धता के बारे में था।
स्ट्रॉबेरी का सबक
दिन 2 से 4 तक कुछ नहीं हुआ। दिन 5 को, डॉ. बुक ने रिया को ऑनलाइन देखा। रिया ने कहा कि वह पहली बार इतनी नियमित रूप से कोई चीज अटेंड कर रही है और उसे डॉ. बुक के लेसंस से फायदा हो रहा है, लेकिन वह बहुत अधिक सोचती है और भविष्य के बारे में चिंतित रहती है। डॉ. बुक ने एक कहानी बताना शुरू किया जो उन लोगों के लिए थी जो अपने अतीत से परेशान हैं या भविष्य के बारे में चिंतित हैं। एक आदमी कई महीनों बाद अपने घर जा रहा था और उत्साहित था। जंगल के रास्ते में, उसे लगा कि कोई उसका पीछा कर रहा है। उसने देखा कि एक शेर उसका पीछा कर रहा है। वह भागा और एक खाई के ऊपर से गिरने लगा, लेकिन उसने एक झाड़ी पकड़ ली। ऊपर शेर था और नीचे खाई थी। तभी दो चूहे उस डंठल को काटने लगे जिसे उसने पकड़ रखा था। वह रोने लगा, लेकिन फिर उसने एक स्ट्रॉबेरी देखी और उसे खाया। उसे इतना मीठापन महसूस हुआ कि उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। डॉ. बुक ने कहा कि शेर अतीत है, खाई भविष्य है और चूहे दिन-रात हैं जो हमारी जिंदगी की डोर को काटते रहते हैं। इन सब के बीच, हमें एक स्ट्रॉबेरी जरूर मिलेगी और जब हम सिर्फ उस पर ध्यान केंद्रित करेंगे और उसे एंजॉय करेंगे, तो अतीत और भविष्य अप्रासंगिक हो जाएंगे। डॉ. बुक ने कहा कि हम सबकी जिंदगी में कुछ न कुछ स्ट्रॉबेरी जरूर होती हैं, लेकिन उन्हें देखने के लिए हमें शांत होकर अपने आसपास देखना होगा। यही जापानी दर्शन की पहली आदत है: इची गो इची - यह पल कभी नहीं आएगा। हमें समस्याओं के बीच स्ट्रॉबेरी ढूंढना नहीं रोकना है। आजकल लोगों की सबसे बड़ी समस्या यही है कि हमारी बॉडी तो प्रेजेंट में है, लेकिन हमारा माइंड पास्ट या फ्यूचर में घूमता है, जिससे हम प्रेजेंट को एंजॉय नहीं कर पाते। इसलिए, सभी लोग आज से रोज कम से कम 5 मिनट निकालें जहां पर वे अपनी जिंदगी की स्ट्रॉबेरी ढूंढ सकें और उन्हें खाकर एंजॉय करें, जिसमें सिर्फ उनका ध्यान उस चीज पर होना चाहिए।
अधिक सोचने से कैसे बचें
डॉ. बुक ने सेशन खत्म किया और रिया ने कहा कि वह ऐसा जरूर करेगी।
मौन की शक्ति
दिन 9 को, रिया ने बताया कि उसकी ओवरथिंकिंग पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है, लेकिन उसने धीरे-धीरे अपनी जिंदगी में 5-10 मिनट ढूंढना शुरू कर दिया है, जो उसे बहुत मजा दे रहे हैं, जिससे उसकी चिंता कम हुई है। लेकिन एक समस्या है: उसके दिन में बहुत झगड़े होते हैं। डॉ. बुक ने उसे बधाई दी और जापानी दर्शन नंबर 2 के बारे में एक कहानी के माध्यम से बताना शुरू किया।
बहस करने से आपकी वैल्यू क्यों कम होती है
1925 में रूस में राइट्स चल रहे थे। वहां पर एक नए राजा बन गए थे निकोस द फर्स्ट और उनके अगेंस्ट बहुत लोग आवाज उठा रहे थे। कई लोग बहुत कुछ बोल रहे थे। जिसमें से स्पेसिफिकली एक आदमी था कंडटी रेली जिसने किंग को ओपनली चैलेंज कर दिया था और बहुत बुरा भला वो बोलता था। और इस वजह से हुआ क्या कि किंग ने उसे पनिशमेंट दे दी डेथ पेनल्टी की। अब जब एग्जीक्यूशन का दिन आया तो भीड़ जमा हुई थी। रैलेव को फांसी के तख्ते पर खड़ा करा गया। बट जैसे ही ट्रैप डोर खुला थड़ करके आवाज आई क्योंकि रस्सी टूट गई और वो नीचे गिर गया। जैसे ही वो नीचे गिरा उसने एक लंबी सांस ली और उठते साथ ही उसने बोला देखा यह राजा इतना खराब है कि ये लोग एक ढंग की रस्सी तक नहीं बना सकते हैं। ये लोग एक किंगडम क्या चलाएंगे। ना उस टाइम पे ऐसा रिवाज था कि अगर कोई इंसान की रस्सी टूट जाती है फांसी की वजह से तो यह गॉड का साइन है। ऊपर वाले का साइन है कि उस आदमी को जीने का मौका दिया जाए। लेकिन क्योंकि उसने ऐसी चीजें बोल दी थी जिससे अगेन राजा का मजाक उड़ा। राजा को जैसे ही पता चला उसने फ़ौरन एक नई रस्सी बनवाई बहुत मजबूत और उसको फिर से फांसी में लगाया गया। एंड गेस व्हाट इस बार रस्सी नहीं टूटी। नाउ यह जो लेसन मैंने तुम्हें बताया है यह एक किताब से लिया गया है जिसका नाम है द 48 लॉस ऑफ़ पावर। जिसका एक लेसन है ऑलवेज से लेस देन नेसेसरी। कई बार हम इंसान बहुत कुछ बोल देते हैं इमोशंस में आके। लेकिन अगर हम वो नहीं बोलेंगे तो प्रॉब्लम होगी ही नहीं। कई बार हम गलत टाइम पर गलत चीजें बोल देते हैं और इस गलत टाइम पर गलत चीज बोलने की वजह से ही हां शायद आपकी जान तो ना जाए लेकिन आपका पीस और बहुत सी इंपॉर्टेंट चीजें आपकी जा सकती है। इसीलिए जापानीज लोगों की एक और बहुत प्यारी हैबिट है टाइनी हैबिट है जिसे बोलते हैं मां। उसका मतलब है द पावर ऑफ स्पाउस और साइलेंस जो जैपनीज़ लोग कई बार फॉलो करते हैं। जब भी उनको लगता है कि उनका झगड़ा होने वाला है तो वो 10 सेकंड का पॉज लेते हैं। जैपनीज़ मां का जो कांसेप्ट है वो सुनने में बहुत इजी लगता है। बट इसे प्रैक्टिकली अप्लाई करने के लिए आपको बहुत प्रैक्टिस की जरूरत है। और यह चीज करने में आपकी बहुत ज्यादा हेल्प कर सकती है मेडिटेशन। और यहीं पे मैं आपको इनवाइट करना चाहूंगा मेरे 21 डेज चैलेंज में भी। जहां हम लोग हर मंथ सुबह 7:00 से 8:00 बजे मिलते हैं। वहां पर ऐसी किताब की बातों को सीखते हैं और फिर उन बातों के ऊपर मेडिटेट करते हैं। जिससे हमारा इमोशनली अपने को रेगुलेट कर पाना आसान होता है। मेडिटेशन आपके अंदर पेशेंस पैदा करता है जो बहुत ज्यादा जरूरी है अपने इमोशंस को कंट्रोल करने के लिए। एक बार मैं जरूर चाहूंगा कि आप लोग हमारी कम्युनिटी मेंबर्स के साथ लीडर्स के साथ ये चैलेंज जरूर करना। पिछले महीने हमने चैलेंज करके बहुत ही सिग्निफिकेंट रिजल्ट्स अचीव किए हैं। डोपामिन डीटॉक्स से रिलेटेड। आने वाले महीने में भी कुछ ऐसी चीजें होने वाली है। इसलिए इसका पार्ट जरूर बनिए। वैसे तो यह जो 21 डेज चैलेंज है वो पिछले साल मैं ₹1000 में बेच रहा था जो बहुत ही अच्छे से बिक रहा था। बट अभी के लिए क्योंकि हम समरी बोर्ड पे फोकस कर रहे हैं। इसीलिए आप लोगों के लिए अच्छी अपॉर्चुनिटी है। आप लोगों को और कुछ नहीं करना है। सिर्फ समरी बोर्ड का सब्सक्रिप्शन ले लीजिए जो सिर्फ ₹99 का है। जी हां, सिर्फ ₹99 में आप सब्सक्रिप्शन ले लो। और आपको यह ₹1000 का 21 डेज लाइव चैलेंज जहां पे हम रोज लाइव आते हैं। बातें सीखते हैं, साथ में मेडिटेट करते हैं, अफेमेशंस करते हैं और बहुत कुछ पावरफुल चीजें करते हैं। वो सब आपको कंप्लीटली फ्री मिल जाएगा। बस आपको समरी बोर्ड सब्सक्राइब करना है। लेकिन हां ZM पे लिमिटेड सीट्स ही होते हैं। इसीलिए आप अभी जाइए सब्सक्राइब कर लीजिए ताकि आपको वो लिमिटेड लोगों में आने का मौका मिले और ये चैलेंज के साथ अपनी लाइफ में ट्रांसफॉर्म होने का मौका मिले। नाउ लेट्स गेट बैक टू द स्टोरी। और आज का टास्क भी यही है कि तुम लोगों को यही करना है। नेक्स्ट टाइम जब भी तुम्हें लग रहा है कि झगड़ा होने वाला है, गुस्सा आ रहा है, बहुत कुछ बोलने का मन कर रहा है तो वो करने से पहले सिर्फ 10 सेकंड का पॉज ले लो और कुछ देर के लिए अलग हो जाओ। अपने आप को स्पेस दो। सामने वाले को स्पेस दो। और फिर जब आप शांत हो जाओ उसके बाद ही बात करो।
सबसे पहले खुद पर भरोसा करें
मिस्टर बुक ने कहा रिया क्या तुम यह कर पाओगी? उसने कहा ठीक है मैं ट्राई करती हूं और बस इसी लेसन के साथ डे नाइन भी खत्म हुआ। अब अगेन कुछ दिन निकल गए। डे 13 को फिर उनकी वापस से बात हुई। इस बार रिया ने बताया कि कैसे पिछले दो-ती दिन में उसने अब अपने घर वालों से अपने रिलेशनशिप में आर्गुमेंट करना बंद कर दिया है और बंद करने का रीज़न यही है कि जब वो पॉज लेती है और अपने को थोड़ा टाइम देती है तो ऑटोमेटिकली उसके इमोशंस थोड़े कम हो जाते हैं और फिर जब वो लोग बात करते हैं नॉर्मल इमोशन के साथ तो झगड़े नहीं होते। उसने ड्रास्टिकली देखा कि कैसे उन लोगों के आर्गुमेंट्स कम होने लग गए हैं। लेकिन अभी भी उसके दिमाग में एक क्वेश्चन था। मिस्टर बुक ने कहा हां बताओ क्या क्वेश्चन है? उसने कहा, आपको नहीं लगता कि जब मैं ऐसे चुप हो जा रही हूं, तो इससे मेरी वैल्यू कम होते जा रही है। सामने वाला इंसान मुझे कुछ भी बोल के निकल रहा है फिर भी मैं पॉज ले रही हूं, टाइम ले रही हूं। बट मुझे ऐसा लग रहा है कि यह चीज तो मेरी और वैल्यू कम करती जा रही है। मिस्टर बुक ने बोला, "हां, सही बात है। अगर तुम्हें ऐसा लग रहा है तो तुम्हारे लिए एक और कहानी है।"
डॉक्टर बुक ने कहानी बताई। एक बार एक रोड की साइड पे एक रेस्टोरेंट था। रेस्टोरेंट में एक थोड़े बड़े उम्र का आदमी बैठ के आराम से चाय पी रहा था। सैंडविच खा रहा था। तभी क्या हुआ कि वहां पे कुछ बकर्स आवारा बकर्स होते हैं ना टपोरी टाइप के। वो लोग ने उस रेस्टोरेंट में एंट्री ली और जैसे ही उन्होंने एंट्री ली उन्होंने शोर शराबा करना स्टार्ट कर दिया। वो दूसरों के साथ मजाक मस्ती कर रहे थे, किसी को छेड़ रहे थे, कुछ कर रहे थे और तभी उनकी नजर इस आदमी पर पड़ी। नाउ बात यह थी ना कि यह जो आदमी था, उसके चेहरे पे एक बड़ा सा मस्सा था। एक बड़ा सा बर्थ मार्क था काला कलर का जो चाहकर भी छुपता नहीं था। इसलिए इन लोगों की भी नजर उस पर पड़ी और उन लोगों से रहा नहीं गया। वो लोग आके इस आदमी को सताने लग गए। उन्होंने अपनी सिगरेट ली और उसके चाय में डूबा दी। सबको लग रहा था अब तो झगड़ा होने वाला है। और यह लोग भी चाहते थे कि झगड़ा हो। बट उस आदमी ने कुछ नहीं करा। बट फिर इन लोगों ने जानबूझ के उसका जो सैंडविच था उसका एक टुकड़ा लिया और खुद खाने लग गए और उसका मजाक उड़ाने लग गए। फिर भी आदमी ने कुछ नहीं किया। फिर उसके एक दोस्त ने पूरे प्लेट को नीचे गिरा दिया। सबको लगा अब तो झगड़ा होगा। बट उस आदमी ने कुछ नहीं किया। उसने अपना हैंकर शिफ्ट लिया। अपना मुंह पोछा और वहां से निकल गया। यह लोग चिल्ला-चिल्ला के बोलने लग गए कि कैसे डरपोक आदमी है। कितना कमजोर आदमी है। डरा हुआ आदमी। थू है ऐसे लोगों पे। और ऐसे ही वो लोग अपनी एक फालतू मजाक मस्ती में खाने में बिजी हो गए। ना कुछ टाइम बाद वहां पर वहां की जो रेस्टोरेंट की वेटर थी वह लोगों के पास गई और उसने कहा सर आप लोगों को उस इंसान के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था। बचपन से ही उसे बहुत ज्यादा इन सब चीजों के पीछे चिढ़ाया गया है और बहुत कुछ करा गया है और इस वजह से ही अब वो एक ऐसा इंसान बन गया है जिसके साथ लोग चाह के भी मजाक नहीं कर सकते। उन तीनों आवारा ने बोला कि हां चलो जाओ अपना काम करो। उस वेट्रेस ने कहा आप लोगों को बाहर वो आदमी बुला रहा है। अब नाउ जैसे ही ये तीनों लोग आदमी लोग बाहर जाते हैं वो लोग क्या देखते हैं कि आदमी खड़ा हुआ है और अकेले नहीं खड़ा हुआ है। उसके साथ दो पुलिस की गाड़ी खड़ी हुई है। दरअसल बात यह थी कि ये कोई नॉर्मल इंसान नहीं था। यह उस जगह का शेरफ था। पुलिस ऑफिसर था जो नॉर्मल से कपड़े पहन के वहां खड़ा था। उसने उन तीनों लोगों को अरेस्ट करवाया और फिर पुलिस स्टेशन में जो उन लोगों के साथ हुआ होगा वो सब आप इमेजिन कर सकते हो। वेल बात यह थी बचपन से इस आदमी की वैल्यू नहीं करी गई थी। और इसलिए बचपन से उसने एक चीज समझ ली थी कि जब तक वह अपनी वैल्यू नहीं बढ़ाएगा तब तक उसके साथ यह होता रहेगा और इसलिए उसने बहुत मेहनत से पढ़ाई लिखाई करी और अपने आप को इतना केबल बना लिया कि आज लोग चाहकर भी उसका मजाक नहीं उड़ा सकते।
ऐसे ही रिया कई बार हमें लगता है कि जब हम बात करते हैं आर्गुमेंट करते हैं तो उससे हमारी वैल्यू बढ़ती है। बट ऐसा नहीं है। जैपनीज की एक और टाइनी हैबिट है जिसे बोलते हैं गमन। मतलब है एंडोर विद डिग्निटी। कई बार हमें लगता है कि हमारी खामोशी हमारी वीकनेस है। लेकिन नहीं खामोशी वीकनेस नहीं होती है। अगर आपको रिसोंड भी करना है तो उसे अपने एक्शन से करना चाहिए ना कि रिएक्शन से। कई बार हमें लगता है कि हमें आर्गुममेंट करने से हमारी वैल्यू बढ़ती है। जब हम कुछ चीजें बोलते हैं तब वैल्यू बढ़ती है। लेकिन एक्चुअल में हमारी वैल्यू तब बढ़ती है जब हम एक वैल्यूुएबल इंसान बन जाए। उस इंसान की तरह पुलिस ऑफिसर या फिर अपने आप को इतना ऊंचा उठा ले कि लोग ना चाहते हुए भी हमें डिसरिस्पेक्ट ना कर पाए। बट उस चीज के लिए हमें अपने आप को इंप्रूव करना पड़ेगा। इसीलिए आज का टास्क तुम्हारे लिए यही है। अपने अंदर अपनी स्किल्स, अपनी कैपेबिलिटी पर काम करो। अपने आप को एक वैलुएबल इंसान बनाओ। मिस्टर बुक ने पूछा रिया बताओ कौन सी ऐसी स्किल है जिसमें लगता है तुम नॉर्मल लोगों से ज्यादा अच्छी हो। एवरेज से ज्यादा अच्छी हो। उसने कहा सर पता नहीं। बट फिर जब उसने थोड़ा सोचा तो उसके दिमाग में आया योगा। योगा मैं यूजुअली अपने फ्रेंड्स में सबसे ज्यादा अच्छा करती हूं। और इस चीज के लिए लोग मुझे प्रज़ भी करते हैं। मिस्टर बुक ने कहा ग्रेट। इसी चीज में और एक्सपर्ट बनो। और एक्सपर्ट बनने के बाद उसे दूसरों को सिखाना भी स्टार्ट करो। यह चीज से तुम्हारी वैल्यू बढ़ेगी और तुम्हारा कॉन्फिडेंस और हर एक चीज बढ़ेगी। रादर देन झगड़ा करने के ऑटोमेटिकली तुम्हारी वैल्यू बढ़ते जाएगी। जिससे ना चाहते हुए भी लोग तुम्हें रिस्पेक्ट करने लग जाएंगे। और जब भी तुम्हें झगड़ा करने का मन करे तो बातों में अपनी एनर्जी वेस्ट करने के बजाय अपने ऊपर काम करना, अपनी स्किल्स को इंप्रूव करना।
अपनी पुरानी पहचान को मार डालो
नवरिया को ये सारी बातें इतनी हजम तो नहीं हुई बट उसने एक कमिटमेंट दिया था कि वो बातें फॉलो करेगी मिस्टर बुक की। इसलिए उसने उसको भी करना स्टार्ट किया। अब धीरे-धीरे उसने अपने ऊपर और काम करना स्टार्ट किया। अब भी जब कोई झगड़े होते, कुछ भी होती तो वह शांत होती और आर्गुममेंट करने के बजाय सिर्फ अपने आप को इंप्रूव करने पर काम करती है। उसने योगा से रिलेटेड क्लासेस ली। उसने अपने योगा लेसंस जो पहले कोर्सेज और क्लासेस लेके सीखे थे उसी चीज को रिवाइज करके उसकी प्रैक्टिस करने लग गई और धीरे-धीरे वापस से उसका कॉन्फिडेंस बढ़ने लग गया। जब भी कोई झगड़ा करने जाता, वो झगड़ा करने वालों के मुंह लगने के बजाय सीधा जाके अपने योगा की प्रैक्टिस करने लगती। अब ऐसे ही कुछ और दिन निकल गए। आया डे 17। रिया ने फिर डॉक्टर बुक से बात करी और इस बार वो बहुत एक्साइटेड थी। उसने बताया कि कैसे अभी भी वह उन जैपनीज फिलॉसोफी को फॉलो कर रही है। लास्ट टाइम जब उसका झगड़ा होने वाला था अपने घर वालों से तो वापस से उसने बोलने के बजाय अपने को काम डाउन किया, शांत करा और वो जाकर वापस से अपनी योगा की प्रैक्टिस करने लग गई और फिर हुआ यह कि कुछ टाइम बाद उसका जो दोस्त था जिसके साथ उसका झगड़ा हुआ था उसने खुद से आकर उसको सॉरी बोला और यह चीज पहले कभी नहीं हुई थी और वो इस चीज के लिए बहुत खुश थी। उसने डॉक्टर बुक को बताया कि सच में यह खामोश रहना और अपने आप को इंप्रूव करना काम कर रहा है। लोग सामने से आके सॉरी बोल रहे हैं। बट अभी भी एक क्वेश्चन है। डॉक्टर बुक ने फिर से स्माइल करा और कहा क्या? उसने कहा, "सर, बट अभी भी मुझे ऐसा लग रहा है कि यार यह मैं नहीं हूं।" मैं ऐसी बंदी हूं ही नहीं जो चुप रह के सुन ले। मैं ट्राई कर रही हूं बहुत अंदर से। बट मुझे अंदर से ऐसा लग रहा है कि दिस इज NOT WHO I AM। मैं तो एक ऐसी बंदी हूं जो लोगों को मुंह पर जवाब देती है। मुझे लोगों को सुनाना ज्यादा सही लगता है। रादर देन सिर्फ चुप रह के अपना काम करने के। इस चीज से मैं कैसे डील करूं। तब डॉक्टर बुक ने अगेन इस अपॉर्चुनिटी का फायदा उठाते हुए एक और स्टोरी बताई। एंशिएंट इंडिया में एक मर्चेंट था कारोबार करने वाला। एक बार जब वह जंगल गया तो उसे वहां पर तीन तोते मिले। वो तीनों ही तोते नॉर्मल नहीं थे। बात करने वाले तोते थे। अब तीनों को तो वो ले ही नहीं सकता था लेकिन उनमें से एक तोते को उसने ले लिया। वो अपने साथ उस तोते को लेके आया और अपने साथ शहर में जाके उसे रखने लग गया। मर्चेंट को वो तोता इतना पसंद था कि उसने उसके लिए सोने के केज बनवाए। वो उसे सबसे बेस्ट फ्रूट्स देता था। सबसे बेस्ट खाना देता था और एकदम कंफर्टेबल लाइफ देता था। बेसिकली वह तो को हर एक चीज देता था जिससे वह तोता खुश रहे लेकिन फिर भी वह तोता खुश नहीं था क्योंकि उसके पास एक चीज जो सबसे इंपॉर्टेंट थी वो नहीं थी वो था फ्रीडम और यह चीज उस तोते के ओनर को भी समझ में आ रही थी लेकिन वो तोते से इतना प्यार करने लग गया था कि उसे छोड़ना नहीं चाहता था इसीलिए एक बार जब वापस एक काम के सिलसिले में उसे उसी गांव में जाना था जो जंगल के पास था तो उसने उस तोते से बात करके पूछा उसने पूछा कि तुम्हारे लिए कुछ लेके आऊं कुछ चीजें कुछ चाहिए तुम्हें तो उसने बोला कुछ नहीं बस जाके मेरे जो दो दोस्त है तोते उनसे जाकर बात कर लेना मेरे बारे में बता देना मैं खुश खुश हूं। यहां मेरे पास गोल्डन केज है। खूब सारा अच्छा खाना है। लेकिन अभी भी मैं तुम लोगों के साथ का टाइम बहुत मिस करता हूं। तो मर्चेंट फिर वापस से उस गांव गया। वहां के जंगल गया और वहां जंगल में उसे वापस से वो दो तोते मिले। उसने जाके बताया कि तुम्हारे दोस्त तोते ने एक मैसेज दिया है कि वो अब गोल्डन केज में रहता है। वो बेस्ट खाना खाता है। मैं उसका ख्याल भी बहुत रखता हूं। वह ठीक है लेकिन अभी भी वह तुम लोगों को बहुत याद करता है और इस वजह से उसे बुरा लगता है और जैसे ही इस आदमी ने यह बात बोली तो उन दोनों तोतों में से एक जो तोता था वो कांपने लगा और कांपते-कापंपते जोर से वो नीचे गिर गया बिल्कुल मोशनलेस। उस मर्चेंट ने जाके भाग के देखा तो उसे रियलाइज हुआ तोता तो मर चुका है। उसे यह देख के बहुत शॉक लगा। वो फौरन वापस से गया अपने घर वाले तोते के पास और उसने सोते के पास जाके यह चीज बताई कि मुझे समझ नहीं आ रहा है कि क्या हुआ। मैंने तुम्हारा मैसेज उस तोते को दिया और वह तोता अचानक से गिर कर मर गया। नाउ यह सुनते ही उसके पिंजरे का भी जो तोता था वह भी उसी तोते की तरह कांपने लगा और अचानक से वह भी वहां पर गिर गया और उसकी भी मौत हो गई। मर्चेंट ने जब उसे अपने हाथ में लिया तो उसने नोटिस किया कि यह भी मर चुका है। जरा भी हिल रहा नहीं था वो। नाउ उस मर्चेंट को बहुत ज्यादा बुरा लगा। उसे समझ ही नहीं आ रहा था क्या हो रहा है। लेकिन फिर जैसे तैसे दिल पर पत्थर रख के उसने उस मरे हुए तोते को अपने हाथ में लिया और उसे देख के रोने ही लगा। तभी अचानक से क्या हुआ कि जैसे मानो उस तोते में जान आ गई। उसने अपने पर उड़ाए और वहां से वह तोता उड़ के भाग गया। मर्चेंट शॉक में था कि वह जिंदा था। फिर उसने यह सब कैसे किया? तो जाते-जाते तोते ने बताया कि कैसे उसका जो दोस्त था उसने भी वह मरने का नाटक किया था। वो भी मरा नहीं था। वो तो बस उसे एक मैसेज दे रहा था कि कैसे अगर तुझे भी जिंदा रहना है तो तुझे मरना होगा। तभी तू इस पिंजरे से बाहर निकल पाएगा। इसीलिए उसने मरने का नाटक किया। नाउ देखो इस कहानी से लेसन क्या है? देखो हम सबको ना जिंदगी में नई लाइफ चाहिए। नई बॉडी, नया कॉन्फिडेंस, नए पैसे। बट प्रॉब्लम यह है ना कि हम अपनी पुरानी आईडेंटिटी को छोड़ने के लिए रेडी नहीं है। वह तोता जब गोल्डन केज में था, उसके पास बहुत कुछ था। लेकिन जब तक वह कंफर्ट ज़ोन से बाहर निकलने के लिए, मरने के लिए रेडी नहीं था, तब तक वो वहां से निकल नहीं पाया। और यहीं आता है जैपनीज़ का नेक्स्ट फिलॉसोफी जिसे बोलते हैं शिंका। मतलब एववोल्यूशन बिकमिंग अ बेटर फॉर्म। अगर आप लोगों को भी ये अपनी एक नई आईडेंटिटी बनाना है, स्ट्रांग आइडेंटिटी बनाना है, तो आपको अपनी ओल्ड आइडेंटिटी को मारना होगा कि मैं तो बस ऐसा ही हूं। मैं तो इंट्रोवर्ट हूं। मैं तो बात करता ही हूं। मुझसे तो सुना नहीं जाता है। यह सब आपने एक अपनी ओल्ड आइडेंटिटी बना के रखी है। लेकिन जब तक आप इस ओल्ड आइडेंटिटी को खत्म नहीं करोगे, मारोगे नहीं तब तक आप वो न्यू वर्जन नहीं बन पाओगे। Just like that तोता जो कंफर्ट में था लेकिन पिंजरे में था। लेकिन जैसे ही उसने अपने ओल्ड आइडेंटिटी को मारा, उस कंफर्ट को मारा, तभी उसको बाहर निकलने का मौका मिला और वापस से वो आसमान में उड़ के अपने दोस्तों के पास वापस जा सका। इसीलिए यह टाइनी जैपनीज हैबिट भी अपने अंदर डालना चालू करो। अपने आप से डेली क्वेश्चन पूछो। कौन सा आपका वो पुराना वर्जन है जो आपको धीरे-धीरे मार रहा है? मतलब टॉक्सिक लड़ाई करना, बहुत ज्यादा मोबाइल स्क्रोल करना, कास्टेंट नेगेटिव थिंकिंग या फिर मैं एक इंट्रोवर्ट हूं। मैं एक लो कॉन्फिडेंट इंसान हूं। यह सब बोलना बंद करिए। यह आइडेंटिटी को मारना चालू करिए। तभी आपकी न्यू आइडेंटिटी बनेगी।
स्वर्ण बुद्ध भीतर
नाउ रिया को यह वाली कहानी एक्चुअल में पसंद आई। उसको रियलाइज हुआ कि हां जब तक वो यह बोलते रहेगी कि मैं ऐसे ही हूं तब तक ग्रोथ का चांस नहीं है। प्रोग्रेस का चांस नहीं है। इसीलिए उसने वापस से ट्राई करना स्टार्ट किया। अपनी ओल्ड आइडेंटिटी को मारना स्टार्ट किया। बट यह एक्सजेक्टली करे कैसे? उस लड़की को यह समझ नहीं आ रहा था। इसीलिए वह बहुत दिल से वेट कर रही थी कि कब उसका वापस से मौका मिले मिस्टर बुक से बात करने का ताकि वह इसका यह क्वेश्चन पूछ सके। उसको समझ में आ रहा है कि कौन सी कौन सी आदतें हैं जो उसकी ओल्ड आइडेंटिटी है वो उसे परेशान कर रही है। लाइक चुप रह के बातें ना सुनना और यह सारी चीजें। डे 21 आज रिया ने मिस्टर बुक को कहा, "सर, पिछली बार आपने मुझे बताया था कि अगर मुझे अपना एक न्यू ब्राइट फ्यूचर बनाना है, तो मुझे अपने ओल्ड सेल्फ को मारना पड़ेगा उस तोते की तरह। अपनी पुरानी लिमिटिंग आइडेंटिटीज को उन्हें मारना होगा और नई स्ट्रांग आइडेंटिटीज बनानी होगी। पर बट यह चीज मैं करूं कैसे? मुझे समझ नहीं आ रहा है। इसका कोई प्रैक्टिकल तरीका है? डॉक्टर बुक ने कहा हां। इसके पीछे भी एक लेसन है जिसे जैपनीज में जीको शिनराॉय बोलते हैं। और यह क्या होता है मैं तुम्हें एक कहानी से बताता हूं। 1940 की बात है। एक कोर्ट में कटघरे में एक अमेरिकन फुटबॉल प्लेयर था जिसका नाम था फ्रैंक जिमेनस्की। किसी तो लीगल केस की वजह से उसे एज अ विटनेस कोर्ट में बुलाया गया था। बातोंबातों में जज ने कैजुअली पूछ लिया कि फ्रैंक तुम करते क्या हो? फ्रैंक ने बोला सर आई प्ले सेंटर फॉर नॉट ट्राडम। बेसिकली वो एक फुटबॉल प्लेयर थे जो एज अ सेंटर खेलते थे नॉट ट्रेडम के लिए जो एक कॉलेज थी। नज ने हल्के से मुस्कुराते हुए पूछा अच्छा वेर यू एनी गुड? तुम क्या थोड़े अच्छे प्लेयर थे? नाउ कोर्ट रूम इस पे साइलेंस हो गया। बट फिर फ्रैंक ने कुछ ऐसा बोला कि उनका जो कोच था वो शॉक हो गया। फ्रैंक ने फुल कॉन्फिडेंस के साथ बोला सर आई एम द BEST CENTER NOTM HAS EVER HAD। मेरे से अच्छा और प्लेयर कभी नोट के पास नहीं था। नाउ यह चीज बहुत शॉकिंग थी क्योंकि फ्रैंक एक ऐसा इंसान था जो यूजुअली बहुत हम्ल था। वह कभी अपनी बढ़ाई नहीं करता था। अपने बारे में बड़ा नहीं बोलता था और हमेशा शांति ज्यादा रहता था। और इसीलिए जब उसने इतना कॉन्फिडेंटली इस चीज को कहा तो उनका कोच भी थोड़ा सा क्यूरोसिटी में आ गया कि यार इसने ऐसा बोला क्यों? तो फिर जैसे ही सेशन खत्म हुआ कोच ने फौरन फ्रैंक को साइड में लिया और पूछा फ्रैंक तुम तो यूजुअली कभी अपनी तारीफ नहीं करते या अपने बारे में कोई बड़ी बात नहीं करते बट तुमने आज सबके सामने इतनी बड़ी बात कैसे बोली? नाउ इसके ऊपर फ्रैंक थोड़ा सा शर्मा गया और उसने कहा सर मुझे यूजुअली यह सब बातें बोलना पसंद नहीं है बट क्या कर सकता था आई WAS UNDER ओथ मैंने वहां कसम खाई थी कि मैं झूठ नहीं बोलूंगा नाउ यह होता है कॉन्फिडेंस खुद पे और इसे ही बोलते हैं जीको शिनराय मतलब ट्रस्ट इन योरसेल्फ कई लोगों को लग रहा था कि फ्रैंक वहां पर एगेंट हो रहा है कोच को भी यही लगा बट एक्चुअली में वो एगेंट नहीं था वो उसका सेल्फ कॉन्फिडेंस था वो उसका खुद पर ट्रस्ट था और इसीलिए उसने कटघरे में कसम खाने के बाद सिर्फ यह सोच के साथ सच बोला क्योंकि उसे झूठ नहीं बोलना था उसे वहां पर हम्ल नहीं होना था और यह एक बहुत पावरफुल लेसन है। कई बार हम खुद को अननेसेसरीली छोटा समझते हैं। अपने बारे में छोटा बोलते हैं कि नहीं मैं इतना अच्छा नहीं हूं। मैं यह नहीं कर सकता। मैं वो नहीं कर सकता। लेकिन अगर आप एक छोटी हैबिट अपनी लाइफ में लाना स्टार्ट करो जीको शिनराई की तो इससे आप अपनी आइडेंटिटी चेंज कर सकती हो। रिया ने पूछा अच्छा बट कैसे? उसने कहा सिंपली यह छोटी आदत रोज अप्लाई करो। अपनी एक कुछ आइडेंटिटी के स्टेटमेंट्स बनाओ और डेली उनको बोला करो। I AM CAPABLE, I AM IMPROVING, I AM CONFIDENT। और इसको कॉन्फिडेंटली बोलने की कोशिश करना। बिना ज्यादा सोचे इस चीज को करना चालू करो। कई लोग इसे ही अफेमेशंस बोलते हैं। कई सारे बड़े-बड़े एथलीट्स, प्लेयर्स ये लोग अफमेशन का यूज करते हैं खुद का कॉन्फिडेंस बढ़ाने के लिए। खुद का सेल्फ ट्रस्ट बनाने के लिए। तुमने देखा होगा शाहरुख खान भी कई बार अपने को बोलता है आई एम द बेस्ट। रोनाल्डो बोलता है आई AM THE BEST। मोहम्मद अली बोलते थे, आई AM THE GREATEST। यह उन लोगों का एगेंस नहीं था। यह वो लोगों का सेल्फ ट्रस्ट है। बिकॉज़ वो एक चीज समझते हैं। जब तक वो खुद पर ट्रस्ट नहीं करेंगे, दुनिया उन पर ट्रस्ट नहीं करेगी और ना ही वह अपना बेस्ट परफॉर्मेंस दे पाएंगे। इसीलिए तुम भी आज से ऐसे स्टेटमेंट्स बनाना स्टार्ट करो और यह छोटी आदत धीरे-धीरे तुम्हारी आइडेंटिटी को चेंज करना स्टार्ट करेगी। जहां पहले तुम बोलती थी कि मैं किसी का भी सुन के नहीं ले सकती हूं जो कहीं ना कहीं यह बताता है कि मैं इंपेशेंट हूं। तुम यह बोलो कि मैं पेशेंटली लोगों को सुनती हूं, समझती हूं और फिर मुझे जो चाहिए वो चीज अच्छे से कम्युनिकेट करती हूं। I AM A GOOD COMMUNICATOR। ऐसे टाइप की चीजें तुम्हें अच्छा कम्युनिकेटर भी बनाएगी और तुम्हारे रिलेशनशिप भी अच्छी करेगी।
रिया का पहला क्लाइंट
नाउ ये सिंपल सी चीज रिया ने फिर फॉलो करना स्टार्ट करी। अगेन डे 22, 23, 24 ऐसे ही डेज़ आए और डेज गए। फाइनली इसके बाद डे 27 को रिया को मौका मिला अगेन फिर बात करने का। रिया ने मिस्टर बुक से बात करते हुए कहा, "सर, मैंने ये छोटे अफोर्मेशंस रोज बोलना स्टार्ट करी हूं।" और धीरे-धीरे जब भी मैं यह बोलती हूं, मेरे अंदर एक कॉन्फिडेंस फील होना स्टार्ट होता है। लेकिन अभी भी एक प्रॉब्लम है। मिस्टर बुक मुस्कुराए और उन्होंने पूछा, "अच्छा, अब क्या प्रॉब्लम है?" रिया ने कहा, "सर, मैं यह बोल तो रही हूं बट कहीं ना कहीं मुझे लग रहा है कि यह सच नहीं है।" कहीं ना कहीं मुझे ऐसा लग रहा है मैं फेक कर रही हूं। सच में जो मैं बात बोल रही हूं वो सच है या सिर्फ झूठी बातें मैं बोल के अपने आप को बेवकूफ बना रही हो। नाउ यह चीज ने मिस्टर बुक को काफी इंप्रेस किया। मिस्टर बुक ने कहा इट्स अ ग्रेट क्वेश्चन। और फिर उन्होंने हमेशा की तरह एक कहानी बताई। कई डेकेड्स पहले थाईलैंड का रिनोवेशन जैसा हो रहा था। नए हाईवेज, रेल रोड्स ये सारी चीजें बन रही थी। तभी वहां पे एक टेंपल था जिसके अंदर एक बड़ा सा गौतम बुद्ध का स्टैचू रखा हुआ था। नाउ किसी तो रीजन की वजह से उस स्टैचू को वहां से हटाना था रेनोवेशन और कंस्ट्रक्शन के काम के लिए। तो इसीलिए उस स्टैचू को उठाने के लिए कन बुलाई गई। और जैसे तैसे करके उसे कन के थ्रू उठाने की कोशिश करी गई। लेकिन हुआ यह कि जैसे ही कन ने उस स्टैचू को उठाना स्टार्ट किया अजीब सी आवाजें कन से आने लग गई। उन्होंने एक्सपेक्ट नहीं किया था कि यह जो गौतम बुद्ध का स्टैचू है वो इतना वजन होगा और इसीलिए वो कन ने काम करना बंद कर दिया। वो थोड़ा सा वो बेंड सा हो गया। फौरन उन्होंने उस कन से उस स्टैचू को उठाने के लिए रोका। बट वो स्टैचू फिर भी थोड़ा सा अटक सा गया था और हुआ यह कि उसके कुछ देर बाद ही मौसम एकदम बादलों से छा गया और ऐसा लग रहा था कि अब बारिश होगी क्योंकि यह बुद्ध स्टैचू मिट्टी का बना हुआ था इसलिए फौरन वहां के जो लोग थे उन्होंने उसको अच्छे से ढकना स्टार्ट किया जो भी उनको प्लास्टिक का मटेरियल मिल रहा था कवर मिल रहा था उससे उस चीज को कवर करना स्टार्ट किया ना सभी वर्कर्स ने बहुत अच्छे तरीके से उस गौतम बुद्ध के स्टैचू को ढाक तो दिया था और बारिश भी होना स्टार्ट हो गई लेकिन फिर बहुत देर से बारिश हो रही थी तो जो एक काम वाला था उसने सोचा कि चलो जाके देखते हैं गौतम गौतम बुद्ध का स्टैचू बराबर है कि नहीं? और जब वो वहां पर गया और उस प्लास्टिक को हटा के थोड़ा उसने देखा तो उसने नोटिस किया कि गौतम बुद्ध के स्टैचू से कुछ तो एक चीज चमक रही है। और यह चमकती हुई चीज देख के उसकी क्यूरोसिटी जागी। जब उसने हाथ से उस चीज को थोड़ा सा हटाया, साफ किया तो उसने कुछ ऐसा नोटिस किया जो उसने जिंदगी में एक्सपेक्ट नहीं किया था। जैसे-जैसे धीरे-धीरे वह मिट्टी उन वर्कर्स ने हटाना चालू करी, उनको रियलाइज हुआ कि यह जो गौतम बुद्ध का स्टैचू है, वह एक्चुअल में मिट्टी का नहीं बल्कि पूरे का पूरा सॉलिड गोल्ड से बना हुआ है। जिसकी वर्थ 100 एंड मिलियंस ऑफ डॉलर्स की है। नाउ हिस्टोरियन ने जब इसके बारे में रिसर्च किया तो उनको पता चला कि दरअसल बात यह थी कि कई 100 साल पहले थाईलैंड किंगडम सियाम के नाम से जाना जाता था और तब वहां पे म्यांमार के जो बर्मीज लोग थे वो लोगों ने थाईलैंड पे अटैक कर दिया था। अब गौतम बुद्ध का यह जो स्टैचू जो सॉलिड गोल्ड का था उनको पता था कि यह वो लोग शायद चुरा सकते हैं। उसे तोड़ सकते हैं, उसे मेल्ट कर सकते हैं। इसीलिए उनके दिमाग में एक ब्रिलियंट आईडिया आया। उन्होंने पूरे गौतम बुद्ध के स्टैचू को मिट्टी से और प्लास्टर से ढक दिया ताकि लोगों को लगे ये सिर्फ मिट्टी का है और वो उसको चुराए ना। अब हुआ यह कि जब बर्मीज़ लोगों ने अटैक किया तो हां वो गौतम बुद्ध के स्टैचू को उन्होंने मिट्टी का ही समझा। लेकिन अनफॉर्चूनेटली शायद जितने भी मॉक्स थे वो बचे नहीं। उन सभी को मार दिया गया और इसीलिए फिर कोई भी इंसान बचा ही नहीं जो बता सके कि एक्चुअल में यह जो गौतम बुद्ध का स्टैचू है वह मिट्टी का नहीं बल्कि सोने का है और यहीं पे आता है एक इंपॉर्टेंट लेसन। सच बात तो यह है कि गौतम बुद्ध के स्टैचू की तरह ही हम सब भी इंसान देखा जाए तो अंदर से गोल्ड से ही बने हुए हैं। हम इतने वैल्यूुएबल है लेकिन जिंदगी में कई बार हम अपने आप को मिट्टी से ढक लेते हैं। मिट्टी मतलब हमारे फियर, रिजेक्शन कंपैरिजन इनसिक्योरिटी फेलियर ट्रॉमा क्रिटिसिज्म ईगो लेज़नेस ये सारी चीजें मिट्टी बनके हमें ढक देती है। जिस वजह से कई बार हम खुद भी आईने में देखते हैं तो हमें लगता है हम वर्थस हैं। दूसरे भी देखते हैं तो शायद उनको लगता होगा कि हम वर्थलेस हैं। लेकिन सच बात तो ये है कि अगर इस मिट्टी को इस प्लास्टर को एक-एक करके अगर हम निकालना स्टार्ट करें तो हमें रियलाइज होगा कि एक्चुअल में हम खुद भी सोने के बने हैं। हम सब में टैलेंट है। जिस दिन तुम इस चीज को रियलाइज कर

