आचार्य प्रशांत कितने अशांत ? जानिए अध्यात्मिक गुरुओं की सच्चाई ? with @Arpit_Explains @Amit Tiwari

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो आचार्य प्रशांत और अन्य आध्यात्मिक गुरुओं के उपदेशों की आलोचना करता है, खासकर अहंकार के त्याग पर उनके जोर को लेकर। इसमें उपनिषदों के ज्ञान की गलत व्याख्या करने और युवाओं को गुमराह करने के लिए उनकी आलोचना की गई है। वक्ता का तर्क है कि इन गुरुओं के पास व्यावहारिक समाधानों का अभाव है और वे युवाओं को क्रांतिकारी विचारों और तर्कसंगत सोच के बजाय धार्मिक रूढ़िवाद की ओर ले जा रहे हैं।

  • आध्यात्मिक गुरुओं द्वारा अहंकार के त्याग पर दिए गए उपदेशों की आलोचना।
  • उपनिषदों के ज्ञान की गलत व्याख्या करने के आरोप।
  • युवाओं को गुमराह करने और व्यावहारिक समाधानों के अभाव पर चिंता।

अहंकार और आध्यात्मिक गुरु

आचार्य प्रशांत और अन्य आध्यात्मिक गुरुओं द्वारा अहंकार के त्याग पर दिए गए उपदेशों पर सवाल उठाया गया है। वक्ता का मानना है कि ये गुरु अहंकार को खत्म करने की बात तो करते हैं, लेकिन उनके उपदेशों में गहराई और व्यावहारिक मार्गदर्शन की कमी है। उनका कहना है कि सिर्फ अहंकार को त्यागने की बात करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

उपनिषदों का गलत अर्थ

आचार्य प्रशांत पर उपनिषदों के ज्ञान को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का आरोप लगाया गया है। वक्ता का तर्क है कि आचार्य प्रशांत उपनिषदों के कुछ हिस्सों को चुनकर अपनी विचारधारा के अनुसार व्याख्या करते हैं, जिससे श्रोताओं को भ्रम हो सकता है। उनका कहना है कि उपनिषदों को समग्र रूप से समझना जरूरी है, न कि केवल कुछ श्लोकों को निकालकर अपनी बात को सही साबित करना।

युवाओं का पथभ्रष्ट होना

आचार्य प्रशांत जैसे गुरुओं के युवाओं के आदर्श बनने पर चिंता व्यक्त की गई है। वक्ता का मानना है कि युवाओं को ऐसे व्यक्तियों से प्रेरणा लेनी चाहिए जो क्रांतिकारी विचारों वाले हों, निडर हों और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए रूढ़ियों को तोड़ने का साहस रखते हों। उनका कहना है कि धर्म के खिलाफ बोलने से डरने वाले और लोगों को खुश करने के लिए पुराने विचारों को सही ठहराने की कोशिश करने वाले गुरु युवाओं को गुमराह कर सकते हैं।

सत्य की खोज

सत्य की खोज में नास्तिकता और आस्तिकता दोनों से परे जाने की बात कही गई है। वक्ता का मानना है कि सत्य किसी एक धर्म या विचारधारा में बंधा हुआ नहीं है। उनका कहना है कि हमें अपने पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर खुले दिमाग से सत्य की खोज करनी चाहिए।

प्राचीन ज्ञान और आधुनिकता

भारत के प्राचीन ज्ञान को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बताने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाया गया है। वक्ता का तर्क है कि अगर हमारा प्राचीन ज्ञान इतना ही श्रेष्ठ है तो हम सदियों तक गुलाम क्यों रहे और आज भी पश्चिमी सिद्धांतों का पालन क्यों कर रहे हैं। उनका कहना है कि हमें अपनी कमजोरियों को स्वीकार करना चाहिए और आधुनिक दुनिया में आगे बढ़ने के लिए नए विचारों को अपनाना चाहिए।

आचार्य प्रशांत का बचाव

एक व्यक्ति आचार्य प्रशांत का बचाव करते हुए कहता है कि वे वेदों और उपनिषदों के उन हिस्सों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो अहंकार और उसके विनाश की बात करते हैं। वह यह भी कहता है कि आचार्य प्रशांत वेदों के उन हिस्सों का समर्थन नहीं करते हैं जो अहंकार के विनाश से संबंधित नहीं हैं।

अहंकार को कैसे मिटाएं?

अहंकार को मिटाने के तरीके पर सवाल पूछा जाता है, लेकिन आचार्य प्रशांत का बचाव करने वाला व्यक्ति इसका जवाब नहीं दे पाता। इससे वक्ता को यह कहने का मौका मिलता है कि आचार्य प्रशांत के अनुयायी उनके उपदेशों को ठीक से समझ नहीं पाए हैं।

उपनिषदों का अध्ययन

श्रोताओं को उपनिषदों का अध्ययन करने और अपने गुरुओं के उपदेशों का स्वतंत्र रूप से विश्लेषण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। वक्ता का कहना है कि हमें किसी भी बात को बिना सोचे-समझे स्वीकार नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे कसौटी पर कसकर देखना चाहिए।

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Transcript

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0:00 आचार्य प्रशांत समेत लगभग सभी आध्यात्मिक गुरु एक बात जरूर करते हैं एगो इसे डी रूट ऑफ जो डी इवोल्वेस इन डी वर्ल्ड अगर हमें खुद को और दुनिया को बेहतर बनाना है तो अहंकार का नस करना बहुत जरूरी वह इस छोटी सी स्ट्रीमिंग के मोहताज नहीं है की उनको मैं प्रूफ मैं खिलाफ जो आप वार्ता उनकी बात कोई भी व्यक्ति जो अपने आपको सच का खोजी बोलना हो वह अगर उपनिषदों की बात नहीं कर रहा तो बैक के रहना बहुत बच्चे रहना हिंदू लिटरेचर में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण उपनिषदों को दिया जाता है आचार्य प्रशांत भी उपनिषदों को ही महत्व देते हैं और वह खुद को उपनिषद मर्मदर्शी की तरह पेस करते हैं तुमने इसीलिए तुम बर्दाश्त कर लेते हो

0:47 दुनिया भर के ऊलजुल मूर्ख वक्ताओं को और बाबा करते हैं की वो जो बता रहे हैं वो वास्तव में उपनिषदों का ही ज्ञान है आचार्य प्रशांत की व्याख्या को सही माने का मतलब है की तमाम ग के रचयिता को खुद भी नहीं पता था की वो क्या लिख रहे हैं और जितने लोगों ने आज तक इन ग का अर्थ और भया किया है वह सभी मूर्ख है आचार्य प्रशांत समेत लगभग सभी आध्यात्मिक गुरु एक बात जरूर करते हैं अगर हमें खुद को और दुनिया को बेहतर बनाना है तो अहंकार का नस बहुत जरूरी जीवन हमारा निस्तेज और दरिद्र होता है और जो हमारा अहंकार का महल होता है उसमें बड़ी रौनक रोशनी रहती है बस जो महल है वो रेट का है

1:33 रेट के महल की चौथी मंजिल पर रतन जड़ित बाथटब लगवाया है पुरी जिंदगी को बेचकर के वो बात तब आया है क्या होगा क्या होगा क्या होगा क्या होगा नहाओगे कभी उसमें नहा कभी नहीं पाओगे लेकिन सिर्फ एक जगह पर आकर उनकी जवान को लकवा मारना था बस उसे पर बोलने के लिए उनके पास शब्द नहीं है और वो है धार्मिक है मेरा धर्म सबसे बेस्ट मेरा धर्म सबसे लॉजिकल है मेरा धर्म सबसे साइंटिफिक है ये कौन सा वेद एक धर्म है जिसका पालनपुर करने वालों के घरों में वेद पे ही नहीं जाते हैं ये किसी से छुपा हुआ नहीं इसकी वजह से इतने युद्ध कितने देंगे कितने नरसंहार हुए इतिहास में बताता है केवल यही नहीं वो दुनिया की हर समस्या के लिए अद्वैत को ही समाधान की तरह प्रस्तुत करते हैं जैसे मानो यही हर मर्द की दवा अध्यात्म वीडियो के साथ यही तो दिक्कत है वो मुझे आदर्श ऊंचे लक्षण की बातें करते हैं जो एक तरह

2:19 से युटुब साड़ी समस्याओं को बजाते ही खत्म कर दें उनकी साड़ी चर्चा इन ऊंचे आदर्श के इर्द गिरधारी होती लेकिन धरातल पर इन उच्च आदर्श को कैसे अचीव किया जाए उसका कोई रोड मैप इनके पास नहीं बता| कहां कोई बदलते है काश की वो बादल पता है काश की हम बादल पाते हैं ना मैं बादल का रहा हूं आप बादल का रहे हैं बदलाव आका रहा है अफसोस ये है की ऐसे लोग युवाओं के आइडियल बन जाते हैं युवाओं का आइडल तो कोई ऐसा व्यक्तित्व होना चाहिए जो की क्रांतिकारी विचारों वालों निडर बहादुर जो रूढ़ियों को तोड़े नहीं सोच को बढ़ावा दें समाज को पुरातन पेंट से आजाद करें ना की कोई डरपोक जो धर्म के खिलाफ बोलने से डेयर और लोगों को खुश करने के लिए नए-नए तर्कों से इस पुरातन पेंट को पूरा संगीत सिद्ध करने की कोशिश करें नास्तिकता से कोई मतलब है सच्चाई से मतलब है और सच्चाई ना आस्तिक के पास है ना

3:07 नास्तिक के पास है तुम खुद को जानते नहीं हो रहस्थ बने बैठे हो तुम्हें पता भी नहीं है की ये जो हथियार का विचार है तुम्हें ए कहां से गया तुम्हें पता भी नहीं है की तुम खुद कहां से ए गए हिंदू धर्म की हर वैज्ञानिकता विश्वास और रूढ़िवाद को प्रासंगिक बनाने का ठेका लिया है जरा देखिए यहां वो हनुमान जी के सूरज निकालने को भी रसोई करने की कोशिश कर रहे हैं तो सूरज को का क्या अर्थ हुआ प्रकृति में जो सबसे बड़ा तुमको दिखाई पद सकता है हनुमान जाकर के सीधे इस को जितना है मैन प्रकृति को जीत लेना जरा सोचिए क्या इस तरह के तर्कों से दुनिया के सभी धर्म की वैज्ञानिक और मूर्खतापूर्ण बटन को सही सिद्ध नहीं किया जा सकता अल में सभी के अंदर अपने धर्म अपनी सभ्यता अपनी संस्कृति को श्रेष्ठ साबित करने की एक छह होती है ये छह हमारे अंदर भी लेकिन जब हम आज के

3:54 दूर में इसे साबित करने की कोशिश करते हैं तो हमें वर्तमान में ऐसी कोई उपलब्धि नहीं दिखती जिसे दिखाकर हम अपनी श्रेष्ठ को साबित कर सके प्रेजेंट में तो जो कुछ भी है फिर चाहे वो डेमोक्रेसी हो या फिर केपीटलाइज्म या फिर इंटरनेशनल या फिर साइंटिफिक रिवॉल्यूशन या एजुकेशन सिस्टम वो सभी व्यास से आए भले ही आज हम सब इसके मजे ले रहे हैं लेकिन इनके जारी यदि हम खुद को बेहतर साबित करने की कोशिश भी करें तो भी जीत पश्चिम के सिद्धांतों की होगी भारत का पुरातन ज्ञान दुनिया में सबसे श्रेष्ठ है हमारे प्रथम सिद्धांत की वास्तव में विश्व कल्याण कर सकते हैं आज दुनिया में जो भी खराबी है वो हमारे पुरातन सिद्धांतों को नापनाने की वजह से तो हजारों सालों से उपनिषदों की हस्ती बनी हुई है बरकरार है कुछ बात है उनमें खुश

4:41 हैं उनमें जो समय के हाथों मिट्टी नहीं रहा है कलाथित है अगर दुनिया इन्हें अपना ले तो ये दुनिया बेहतर हो शक्ति है हालांकि हम इतना भी नहीं सोचते की अगर ऐसा है तो ये सिद्धांत हमारा कल्याण क्यों नहीं कर शक्ति क्यों हम सैकड़ो सालों तक गुलाम रहे आज भी हम इन साड़ी गली सिद्धांतों को नए-नए लेवल चिपका कर बेचे की कोशिश कर रहे हैं दोस्तों अगर वास्तव में हमें खुद को और अपने देश को आगे बढ़ाना है तो हमें इन बेवकूफियां से जितनी जल्दी हो सके आजाद होना हो हमें सच्चाई का सामना करना हो भले सच्चाई कितनी ही कड़वी सबसे मुंह चुराना खुद को तसल्ली देने के लिए कल्पनाओं के हवाई के लिए खड़े करना हमें कहानी नहीं लेकर जाएगा आचार्य प्रशांत को सुनने वाले लोग ज्यादातर पड़ी लिखी हुआ है इसलिए मेरी चिंता और भी ज्यादा है क्योंकि वही है जो इस देश की दिशा और दशा को बादल सकते हैं इसलिए उन्हें इस लुभाब ने झूठ से जितना जल्दी हो सके मुक्त होने की जरूर पश्चिम में इन पुरातन सिद्धांत

5:29 और लोकतंत्र की दोस्तों आज हमारे देश को आजाद हुए 75 साल पूरे हो चुके हैं इस बीच ना जान कितनी पीढ़ी लेकिन आज भी किसी साड़ी में हम लोग जैसे-जैसे हमारी आर्थिक संपन्नता बड़ी है हम और जोर से इस पुरातनपान का समर्थन कर लेना हमारी और हमारे देश की भलाई इसी में है की हम जितना जल्दी हो सके की सबसे पीछा चुडा लेने वह वह इस छोटी सी स्ट्रीमिंग के मोहताज नहीं है की उनको मैं प्रूफ मैं बस उपल्ब की बात कमलेश जी एक चीज मेरी सुन लीजिए आप इस टाइम आचार्य प्रशांत को रिप्रेजेंट कर रहे हैं ये ये बात ध्यान में रखिएगा ये देखो भैया यहां पे चांदो के उपनिषद 5/8

6:15 गौतम श्री जाति अग्नि है उसका गुप्तांग ही ईंधन है कम क्रीडा के लिए बोलना ही दुआ है उसकी यानी ही ज्वाला है उसमें पुलिस की जनन इंद्रिय का प्रवेश ही अंगारे हैं और आनंद की प्राप्तियां ही चिंगारी है आगे का रहे हैं 6/2/13 में गौतम श्री अग्नि है उसका गुप्तांग इधर है गुप्तांग पर ज हुए बाल धुआं है लिंग प्रवेश अंगार है और कमानंद ही चिंगारियां हैं ये बस ये है हालात ना भाई हां तो सॉरी बोल दो थोड़ा तो छोटी सी सरिता वाले आपके आचार्य प्रशांत की जो उन्होंने गप्पे मेरी है उसको हमने खोल खोल के यहां पर दिखाए है एक मिनट रुको बीच में बीच में नहीं वो बीच

7:00 में नहीं बोलो मैंने किताब भी खोल के यहां पे दिखाई है की किस तरह की विरोधाभासी बातें कन्फ्यूज्ड बातें करते हैं कहां की वेलोसिटी को चूड़ा के मारा है उपनिषद में गांधी से गांधी बातें लिखी हुई है डॉक्टर साहब ने यही बात कारी थी आपने कहा की अगर वो निकाल के दिखाओगे तो सॉरी बोलना पड़ेगा की आप छोटी सी सरिता वाले उनका क्या कर लेंगे भाई ये लोग कुछ नहीं करना है हमारे यहां के जो छोटे-छोटे ऑर्डनेंस है ना उनकी दिमाग बड़े-बड़े हैं वो सब समझ लेते हैं आप जैसे नहीं है मगर मैं जिन उपनिषदों के बात कर रहा हूं बहुत सिर्फ और सिर्फ अहंकार और उसके विलन के बड़े में बात करते हैं जिसके बड़े में आचार्य जी बात करते हैं उसके अलावा में वेदों में जो भी ऐसी बात लिखी है जो

7:45 अहंकार और उसके विज्ञान के बड़े में नहीं है उसे चीज का समर्थन आचार्य जी नहीं करते हैं जी चीज बड़े में आचार्य जी बात करते हैं वो सिर्फ और सिर्फ वही चीज है जो आपके अहंकार को पिघलते में या बिग्लन करने में आपकी समर्थ मदद करें अच्छा कमलेश भैया सुनो ना ये जो अहंकार है है ना इसको कैसे मिटाया जाता है ये बता दो ये आपको पता ही नहीं है और आपको उनकी पुरी बॉडी डिफरेंट कर रही है तब जाएगा ये उनको बोला है ना क्योंकि मैं समझ लिया मैं अहंकार को खत्म कैसे करना है ये बिल्कुल समझ जाऊंगा अगर आप समझाओगे तो आप आपका गया क्या आप आपने बोलिए

8:31 आप शंकर भाई को क्या बोलते हैं जो व्यक्ति उपनिषद के श्लोक और पुराण में फर्क नहीं कर सकता तो वहां बात करने नहीं दिखा रहे हो उसके अंदर क्या हो तो आप हीरे की बात करेंगे हम तो खोल खोल के दिखा रहे हैं यहां पे कचरा हीरा आप बता दो वेदों में हीरा अब पता है ना क्या उसमें हीरे जेड हुए हैं तो आप निश्चित पड़ी है कठोप में हीरा बताओ ना बताओ ना थोड़ा उसने जो नचिकेता की जो कन्वर्सेशन है क्या

9:26 अपने पिताजी से भी नए नचिकेता की उम्र क्या थी आप उसको देख रहे हैं उसे उम्र में वो अपने पिताजी के खिलाफ खड़ा हुआ है सबसे गौर करने वाले तो चीज ये थी अब आप सात-आठ साल खत्म करता है वो हीरा बताना है आपको अरे कैसे निकालनी है अलग एक मिनट कमलेश जी सुनो यार अब सुनते नहीं हो दुनिया में अलग-अलग जगह पे अलग-अलग जो फिलोसॉपीज है जो हुई है इसमें हीरा मोती जैसी वाली बात कोई नहीं है दूसरी बात आपकी आवाज से ग रहा है आप बहुत यंग हो आज आप मेरी बात को नोट करो आज का तारीख नोट करो ठीक है मेरा नाम देख लो नोट करो कभी ना कभी 10 साल 20 साल 30 साल के बाद जीवन में जरूर वो मौका आएगा जब आपको

10:14 लगेगा यार ये मैं कहां यह बेवकूफ आचार्य प्रशांत के चक्कर में अपना अहंकार खत्म करने में लगा था यार की अहंकार ये करना ये दिमागी खुजलियां जो है ना यह जीवन की आपाधापे में सब को जाति है इसलिए मैं आपको समय दो जीवन सब शिखा देगा यूथ किस तरह से मिस गाइड होता है ये बिल्कुल प्रेजेंट है एकदम आप देखिए बिल्कुल क्योंकि कुछ भी नहीं पता उपनिषद को कभी हाथ नहीं लगाया उपनिषद का एक श्लोक नहीं पड़ा आचार्य प्रशांत ने उपनिषद को बताया की ये बहुत महान है तो सुनकर चले आए की यहां आचार्य प्रशांत ने बता दिया उसने महान कभी आप खुद खोल के क्यों नहीं देखते आप खुद क्यों नहीं आपने प्रयास कर की अगर आचार्य प्रशांत ने कुछ बताया है की उपनिषद बड़े महान है तो जाकर हम एक-दो बने तो पलटते हैं देखें तो सिर्फ है क्या लिखा हुआ क्या

11:01 है और क्यों नहीं आपने जो वो फिलॉसफी जो भी बात है कर रहे हैं उनको क्यों नहीं है आपने प्रैक्टिकल ही उनको प्रैक्टिकल उनको आजम कर देगा क्यों नहीं आपने उन्हें कसौटी पर काश अगर आप कहते हैं की अहंकार के विलन की बात करते हैं फिर आपसे कहा की आप अहंकार विघ्न हो गया आपने कहा नहीं हुआ आपसे पूछा की क्या आपके गुरु का अहंकार का विकलांग हो गया वो भी आपको नहीं पता तो आपने इसका मतलब जो कुछ आपने सुना उनसे शिखा अहंकार के विज्ञान के बड़े में उसका आप एक भी प्रैक्टिकल इंप्लीमेंटेशन आप नहीं प्रेजेंट कर सके नहीं बता सके और मैं समझना हूं आपको आना तो आपको कुछ अभी तक समझ आया जो उन्होंने बोला और ना ही आपने उसको समझना की कोशिश कारी अगर आपको सामने कोई व्यक्ति है कोई टीचर है आपको कुछ शिखा रहा है तो आप उसे जब तक नहीं

11:46 करेंगे जब तक आप उसे कसौटी पर कसेंगे नहीं की भाई ये जो चीज है ये कहानी वो तब तक आपको उसका सच्चाई का पता नहीं चलेगा मैं समझना हूं आप अभी काफी इंगेज में है तो मेरा ये कहना है की कोई दिक्कत नहीं है आप जो हम का रहे हैं उन हमारी बटन को भी आप सुन जो आप आपके आचार्य जी का रहे हैं आप उन बटन को भी सुनिए और खुद से आप एक स्वतंत्र दिमाग से आप उनका विश्लेषण करें और जो चीज का रहे हैं अगर उपनिषद की बात करते हैं तो उपनिषदों को भी जरूर मांगा लेने

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