प्यार नहीं है - बस इतनी सी बात है || आचार्य प्रशांत (2026)

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो रिश्तों में प्यार की वास्तविकता और अपेक्षाओं पर केंद्रित है। आचार्य प्रशांत बताते हैं कि अक्सर रिश्ते समझौतों, अधिकारों और कर्तव्यों पर आधारित होते हैं, न कि सच्चे प्रेम पर। वे माता-पिता और बच्चों के बीच के संबंधों पर भी सवाल उठाते हैं, यह देखते हुए कि माता-पिता हमेशा अपने बच्चों को समझने में सक्षम नहीं होते हैं।

मुख्य बातें:

  • रिश्ते अक्सर समझौतों और अपेक्षाओं पर आधारित होते हैं, न कि सच्चे प्रेम पर।
  • माता-पिता हमेशा अपने बच्चों को समझने में सक्षम नहीं होते हैं।
  • सच्चा प्रेम सीमाओं से परे होता है और पूरी दुनिया के लिए होता है।
  • हमें नकली प्यार को त्यागकर सच्चे प्रेम को सीखना चाहिए।

परिचय

आचार्य प्रशांत कहते हैं कि लोग अक्सर रिश्तों में प्यार की कल्पना करते हैं जहाँ वह वास्तव में नहीं होता है। वे दहेज उत्पीड़न और हत्या जैसे मामलों का उल्लेख करते हैं, जहाँ प्रेम का अभाव स्पष्ट है। वे इस बात पर जोर देते हैं कि हमें ऐसे मामलों पर चौंकना बंद कर देना चाहिए क्योंकि इस तरह के रिश्ते आम हैं।

क्या हमारे रिश्ते सिर्फ़ समझौते हैं?

आचार्य प्रशांत बताते हैं कि रिश्ते अक्सर अधिकारों, कर्तव्यों और समझौतों पर आधारित होते हैं। हर किसी को अपनी भूमिका और स्थान पता होता है, और रिश्ते एक अनुबंध की तरह काम करते हैं। वे कहते हैं कि इन रिश्तों में प्यार का अभाव होता है। वे उन रिश्तों की भी बात करते हैं जहाँ हिंसा स्पष्ट नहीं होती है, लेकिन प्यार फिर भी गायब होता है।

रिश्ते बदलते ही बिखर क्यों जाते हैं?

आचार्य प्रशांत कहते हैं कि रिश्ते पैटर्न और ढर्रे पर चलते हैं। यदि आप इन पैटर्नों को तोड़ने की कोशिश करते हैं, तो रिश्ते टूट जाएंगे। वे लोगों को अपने रिश्तों में थोड़ा प्रयोग करने और ढर्रे को बदलने के लिए प्रोत्साहित करते हैं ताकि उन्हें प्यार के अभाव का पता चल सके। वे कहते हैं कि रिश्तों में अक्सर उम्मीदें, नियम और सीमाएं होती हैं, जो सच्चे प्रेम को बाधित करती हैं।

माता-पिता सचमुच हमें समझते हैं?

आचार्य प्रशांत माता-पिता और बच्चों के बीच के संबंधों पर सवाल उठाते हैं। वे कहते हैं कि माता-पिता हमेशा अपने बच्चों को समझने में सक्षम नहीं होते हैं, खासकर जब वे कम उम्र में बच्चे पैदा करते हैं। वे इस बात पर जोर देते हैं कि बच्चे के जन्म का मतलब यह नहीं है कि माता-पिता स्वचालित रूप से प्यार और समझ से भर जाते हैं। वे पूछते हैं कि बच्चे को इस दुनिया में लाने का क्या औचित्य है यदि माता-पिता को जीवन का कोई ज्ञान नहीं है।

प्यार में अपने-पराए होते हैं?

आचार्य प्रशांत कहते हैं कि हमें यह नहीं मानना चाहिए कि माँ हमेशा अपनी बेटी का ख्याल रखेगी, खासकर संकट में। वे इस बात पर जोर देते हैं कि प्यार कोई शारीरिक चीज नहीं है जो बच्चे के जन्म से स्वचालित रूप से आ जाती है। प्यार सीखना पड़ता है, और जो लोग प्यार सीखते हैं, वे केवल अपनी औलाद से ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया से प्यार करते हैं। वे कहते हैं कि सच्चा प्रेम सीमाओं से परे होता है और पूरी दुनिया के बच्चों के लिए होता है।

Weekend With Master

आचार्य प्रशांत अपनी ऐप के बारे में बताते हैं जहाँ गीता और अन्य कार्यक्रम चलते हैं। वे कहते हैं कि इन कार्यक्रमों ने कई लोगों के जीवन को बदल दिया है। वे लोगों को प्रेम सीखने और नकली प्यार को त्यागने के लिए प्रोत्साहित करते हैं ताकि असली प्यार अंकुरित हो सके। वे कहते हैं कि हमें अपने रिश्तों को नकली करार देने पर बुरा नहीं मानना चाहिए, बल्कि प्रेम सीखने का प्रयास करना चाहिए। वे इस बात पर जोर देते हैं कि सच्चा प्रेम मेरेपन में बांधने को नहीं कहते, बल्कि पंख देने और उड़ान देने का नाम है।

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Transcript

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0:00 आपकी समस्या यह है कि आप वहां प्यार [संगीत] की कल्पना कर लेते हो जहां नहीं है, नहीं है, नहीं है। दहेज, उत्पीड़न और कथित हत्या का मामला सामने आया है। यह कैसा प्रेम है उसके साथ यह जो भी हो रहा था उसकी मां को पता था। प्यार नहीं है। चौके आप भौचक्के हो जाएंगे। [संगीत] अरे क्या पति ने पत्नी का गला घोट दिया? अरे क्या प्रेमिका ने प्रेमी को काट दिया? क्या मां ने बेटी पर ध्यान नहीं दिया? यह जो आप चौंक रहे हैं ना यहां असली गड़बड़ हो रही है। चौकना [संगीत] बंद करिए पर हमारा प्यार ऐसा ही होता है। इसीलिए प्यार नहीं है। बस इतनी सी बात है। तुम 45 [संगीत] के होके भी मूर्ख हो तो 25 में तुम कैसे भगवान बन गए किसी को जन्म देके और जन्म दिया क्यों? पैटर्न्स के अलावा हमारी रिलेशनशिप्स क्या

0:46 है? बताओ ना। आप क्या किसी डिवाइन प्लानिंग का नतीजा हो? आप प्लानिंग क्या कॉन कांस्परेसी का भी नतीजा नहीं हो? [हंसी] पर जब पैदा हो जाते हो तो ऐसे हो जाते हो कि अरे रे रे रे रे मेरे घर आइए तो नंदी परी [प्रशंसा] तुझे पता है तेरी दादी ने तुझे महादेव से मांगा था [हंसी] काहे ट ट [हंसी] और वो पूछ रहा है छोटू पर इसमें मेरी क्या गलती थी क्या पता इसी से नमस्ते आचार्य जी। आचार्य जी मेरा प्रश्न दहेज उत्पीड़न को लेकर के है एक मामले से।

1:34 अ हाल ही में दहेज उत्पीड़न और कथित हत्या का मामला सामने आया है। अ उसमें मुझे जो सबसे चकित करने वाली बात लगी है कि उसके साथ यह जो भी हो रहा था उसकी मां को पता था। उसने WhatsApp चैट में अपनी मां से शेयर किया था कि उसका पति उस पर कुछ आरोप लगा रहा था कि उसका किसी और के साथ रिश्ता है। कुछ ऐसी बातें सामने आई हैं। तो आचार्य जी अभीकि वो नहीं रही तो उसकी मां काफी दुखी है और अपनी बेटी की इंसाफ के लिए जगह-जगह गुहार लगा रही है। तो यह कैसा प्रेम है कि जीते जी उसकी उसके पीड़ा को समझ नहीं पाता और मरने के बाद

2:19 किसी चीख-चीख कर न्याय की मांग करता है। मृतक का नाम लेना उचित नहीं है और किसी विशेष व्यक्ति को उदाहरण बनाना भी उचित नहीं है। यह सब जब जाए तो यह नाम वगैरह हटा भी दिया जाना चाहिए। लेकिन एक सामान्य जनरल बात आप समझ लीजिए प्यार नहीं है। बस कुल इतनी सी बात है। अब बाकी आप बोलो तो मैं आधे घंटे और बोल सकता हूं। प्यार नहीं है। रिश्तों का ताना-बाना है जिसमें अधिकार बता दिए गए हैं। कर्तव्य बता दिए गए हैं।

3:07 सबको सबकी कुर्सी बता दी गई है। तुम इस जगह बैठोगे, तुम यहां बैठोगे, तुम यह करोगी, तुम वो करोगी। यह सब कर दिया गया है। यह कॉन्ट्रैक्ट है, अनुबंध है, करार है, समझौता है, कॉम्प्रोमाइज है। इसमें प्यार नहीं है। बस बात हो गई। इसमें अब मैं और क्या बताऊं? और किसी एक मुद्दे की बात नहीं है। कहीं कोई दुखद घटना घट जाती है। खासकर दहेज हत्या हो जाती है या कुछ और ऐसा हो जाता है। तो हम हमें बुरा लगता है। हम उसकी बात करना चाहते हैं। इंसान है। बुरा लगेगा। लेकिन उनकी भी बात कर लो जो वेल एडजस्टेड दिखाई देते हैं।

3:54 वो रिश्ते भी देख लो जहां हिंसा प्रकट नहीं है। अभी प्यार वहां भी नहीं है। बस कहीं हिंसा दिख जाती है, खून बह जाता है तो हम थोड़ी आउटरेज कर लेते हैं। और कुछ नहीं है। मां को क्या पता बेटी क्या होती है? मां को क्या पता? मां कितने साल की थी जब बेटी को जन्म दिया था। 25 28 रही होगी। कई बार तो भारत में अभी भी 1/3 1/4 शादियां होती हैं तो लड़की की उम्र 18 साल से कम की होती है। अभी भी तो पता नहीं मां कितने बरस की थी।

4:42 20 की रही होगी, 25 की रही होगी, 30 की रही होगी। मां को क्या पता है? मां को क्या पता है? वो जो रिश्ता बनता है पत्नी का पति से वह प्रेम का होता है क्या? मां को अपना ही कुछ नहीं पता तो पति से क्या प्रेम करेगी? बेटी से क्या प्रेम करेगी? मां के लिए बेटी एक ऑब्जेक्ट है जिसके साथ एक विशिष्ट किस्म का बर्ताव करना है। एन ऑब्जेक्ट टू बी रिलेटेड टू इन अ पर्टिकुलर वे। यह एक ऑब्जेक्ट है। यह अभी एक ऑब्जेक्ट है जो घर में आया है और इसके साथ इस तरीके का बिहेवियरल पैटर्न डिस्प्ले करना होता है। यह रिश्ता है। इसको हम रिलेशनशिप बोलते हैं। ये ये हस्बैंड है। यह फादर है। यह मदर इन

5:30 लॉ है। इन लोगों के साथ हर रिश्ते के साथ एक मैनुअल मिला हुआ है। इसके साथ ऐसे बात करनी, इसके साथ ऐसे करना, इसके साथ ऐसे करना, इसको ऐसे करना है। ये प्यार कहां है? आप लोगों को फिर ताज्जुब क्यों होता है? जब आप पाते हैं कि अरे किसी ने अपनी प्रेमिका को काट के फ्रिज में डाल दिया। या कि बेटी अपने ही घर वालों से मदद की अपील कर रही थी और घर वालों ने ही ध्यान नहीं दिया। बोले कि अब तुझे ब्याह दिया है तू अपना देख अपना घर का तेरा घर वो है। इसमें आप लोगों को ताज्जुब होता है। मुझे यह ताज्जुब है। आपकी समस्या यह है कि आप वहां प्यार की कल्पना कर लेते हो जहां नहीं है। नहीं है नहीं है।

6:21 पैटर्न्स के अलावा हमारी रिलेशनशिप्स क्या है? बताओ ना। और पैटर्न तोड़ के देखो रिलेशनशिप टूट जाएगी। पैटर्न समझते हो ना? ढर्रा ढांचा ग्रूव एक नक्शा एक एल्गोरिदम एक आदेश पत्र उसको उसको बदल के देखो उसको तोड़ के देखो उसको छेड़ के देखो क्या होता है देखो क्या होता है जिसका नाम नहीं लेते उसे नाम से पुकार के देखो जिसको जी नहीं बोल बोलते उसको जी बोल के देखो और जिसको जी बोलते हो उसको जी बोलना बंद करके देखो देखो क्या होता है रिश्तों

7:07 का देखो ऐसे और गिरने शुरू इसीलिए तो मैं चाहता नहीं कि ये मुद्दे मेरे साथ उठाओ तुम सुनने भर से गिर जाते हो जिंदगी में चलिए बहुत हिम्मत ना भी हो तो भी थोड़ी टेस्टिंग कर लेनी चाहिए हम नहीं कह रहा हूं कि कुछ बदल ही डालो कुछ उखाड़ दो गिरा दो ना पर थोड़ा प्रयोग परीक्षण अच्छा रहता है मनोरंजन के नाते ही करके देख लो ना जो रिश्ता जिस ढर्रे में चल रहा है उस ढर्रे को बस थोड़ा छेड़ के देखो क्या होता है तो पता चलेगा कि प्यार

7:53 का अभाव किसको बोलते हैं प्यार नहीं है उम्मीदें हैं, डूस एंड डोंट्स हैं। तू मेरे लिए यह करेगा, मैं तेरे लिए यह करूंगी। तुझे ऐसे ऐसे रहना है, मुझे ऐसेसे रहना है। यह तेरी लक्ष्मण रेखा है, यह मेरी है। तूने अगर ऐसा करा तो मैं नाराज हो जाऊंगी। मैंने अगर ऐसा करा तो तुझे नाराज होने का हक है। नहीं यही है। और यह चलो दो वयस्क लोग अपने साथ करें, स्त्री पुरुष करें समझ में आता है। यही काम तो बच्चों के साथ भी होता है ना। बच्चा क्या है? हमें क्या पता? हमें क्या पता बच्चा क्या होता है? आपको क्या पता बच्चा क्या होता है? क्या पता?

8:39 बताइए बच्चा माने क्या होता है? यहां कितने लोग बैठे हैं जो अभी 40 पार्क के हैं? हाथ उठाइएगा। अरे बाबा बहुत सारे हैं। लगभग 40% ही हैं। 40 पार के। तो आप अभी बहुत होशियार हो। कितने हैं जो 40 पार के हैं पर मानते हैं कि बुद्धू हैं। चलो हाथ उठाओ। तो जब 25 के थे तब कितने होशियार थे? 40 पार कर गए, 45 के हो गए, 55 के हो गए। अभी भी बुद्धू हो तो 25 के थे तब कैसे थे? तो इस शरीर से क्या निकाल मारा और बोल दिया संतति इसको जन्म दिया है। अब हम पिता परमेश्वर हैं।

9:28 यकायक में मां से देवी हो गई। कैसे भाई कैसे? तुम 45 के होकर भी मूर्ख हो। तो 25 में तुम कैसे भगवान बन गए किसी को जन्म देकर और जन्म दिया क्यों? जब तुम्हें जिंदगी का कुछ पता नहीं जीवन की कोई तमीज नहीं। आइए मैं थोड़ा क्रोध में बोल रहा हूं। बोलना चाहिए क्योंकि एक इंसान की जिंदगी का सवाल है। वो बच्चा पैदा क्यों किया? जवाब दो। तुम्हें क्या पता है? तुम कुछ नहीं जानते। पर तुम उसको ले आते हो और फिर तुम कुछ जानते नहीं। इसका करना क्या है? तो कुछ शारीरिक काम है तो उसके साथ कर देते हो। चलो इसको साफ कर दो, नहला दो, मालिश कर दो, दूध पिला दो, खाना खिला दो। यह कर देते हो।

10:16 वो जो तथाकथित पिता है वो ऐसे देखता रहता है। बोलता है इसका क्या करना होता है? अच्छा स्कूल में डालना होता है। वो ऐसे उठा के स्कूल में डाल देता है। [हंसी] मैं बहुत मासूम सवाल पूछ रहा हूं। आपकी टीशर्ट से हिंट लग रहा है मुझे तुम्हें आपकी भी आपकी भी बहुतों ने आपको कैसे पता ये क्या कर डाला और मैं प्रजनन के खिलाफ वगैरह नहीं हूं। मैं बेहोशी के खिलाफ हूं। मैं जिम्मेदारी के पक्ष में हूं। प्रो रिस्पांसिबिलिटी नॉट एंटी रिप्रोडक्शन।

11:02 आप एक जीव को इस जहान में ला रहे हो। क्यों? कैसे? क्या पता था आपको? कैसे यह फैसला किया? क्या करने वाले हो? फैसला बस ऐसे किया। वो ना दीदी के तो अब दो हो गए हैं। मेरा एक तो होना चाहिए। दीदी बार-बार दिखाती है मुझे। ये देख दो दो। [हंसी] संजय सुनिए ना। चलिए ना प्लान करते हैं। [हंसी] हंस क्या रहे हो? ऐसे ही होता है। ठीक है ना? कितने लोग मानते हैं कि ऐसे ही होता है। ऐसे ही हुआ है ना? उसके बाद संजय और सुनीता ने अपनी प्लानिंग

11:49 को बाकायदा अंजाम दिया। [हंसी] ट ट और वो पूछ रहा है छोटू पर इसमें मेरी क्या गलती थी? [हंसी] मैं जहां था मुझे वहीं रहने देते। मैं खुश था। तुम्हें क्या पता यह प्रकृति भाई जंगल का इतिहास है ना हमारा 25 तो ज्यादा होता है स्त्री पुरुष तो 15 की उम्र में ही प्रजनन के लायक हो जाते हैं तो कर लो 15 में ही पैदा कर लो और मानसिक बौद्धिक आध्यात्मिक स्तर हमारा 15 और 25 के बीच में बहुत उन्नत नहीं हो रहते ऐसे ही हो

12:40 पर बच्चा जनने में अव्वल नंबर फटाफट कूद-कूद के एक और एक और हंस रहे हो और यह सब कर गुजरने के बाद अब उम्मीद यह है कि प्यार होगा। हेलो क्यों हो? कई टीनएजर्स, युवा लोग आते हैं। मुझे मेरे पेरेंट्स से कभी भी लव एंड अंडरस्टैंडिंग नहीं मिले। [हंसी] अबे क्यों मिले?

13:26 उनमें आपस में ही नहीं है। वह खुद को ही अंडरस्टैंड नहीं करते। वो तुझे क्या अंडरस्टैंड करेंगे? तेरी समस्या ये है कि तू उम्मीद कर रहा है कि वो किसी लायक हैं। कि वो तुझे समझ सकते हैं। उन्होंने खुद को समझा है कभी कि तुझे ही समझ लेंगे। उन्हें माफ कर आगे बढ़। जा के बोलो उनसे कि माफ किया। हमारा तुम्हारा गेम सेटल्ड। कोई गिला शिकवा नहीं। लेकिन वो नहीं। ऐसे सोचते हो जैसे कि बाप तो भगवान है ना। उसके पास क्षमता थी मुझे समझने की। पर उसने मुझे समझा नहीं। अरे उसके पास क्षमता ही नहीं है। तुम्हें समझ में क्यों नहीं आ रहा? अच्छा आप जिस उम्र के हैं 40 पार वालों कभी आपके पिताजी माताजी भी इसी उम्र के

14:11 थे। आप 45 के हैं? कभी आपके मां-बाप 45 के थे। जब आपके मां-बाप 45 तब आप कितने के थे? तब आप 20 के थे। तब आप 20 के थे। मां-बाप 45 आप उनकी ओर देखते थे और सोचते थे ये देखो कितने महान हैं कितने समझदार हैं। अब आप खुद 45 के हो तो पोल खुल गई ना। अब आप समझ गए ना 45 में आदमी कितना बुद्धू होता है। पर आप जब 20 के थे तो सोचते थे कि मां-बाप समझदार हैं क्योंकि 45 के हैं। 45 का होने से क्या होता है? 45 के तो आप भी हो। देखो कैसे हो। पर रहता यही है कि वह बड़े हैं। वह बड़े तो हैं पर बीच में एक ब्लैंक है। [हंसी]

14:59 मां-बाप को नहीं बोल रहा। आपको बोल रहा हूं क्योंकि वो जिस उम्र में है कल आप भी उसी उम्र में होगे। और उस उम्र में आप वैसे ही हो जैसे आप हो। पर जब बच्चे होते हो तो बड़ी उम्मीद हो जाती है कि मां-बाप तो बिल्कुल गंभीरता की और गहनता की प्रतिमूर्ति होंगे। उन्हें तो मेरे दिल का हाल पता होना चाहिए ना। परमात्मा है, परमेश्वर है, भगवान है, भगवती हैं। कुछ नहीं है। ऐसे ही हैं वो तुम मतलब ऐसे ही पैदा हो गए हो। कुछ भी हो जाता है जिंदगी में ऐसे ही तुम भी हो गए। सब ऐसे ही हुए हैं। आप क्या किसी डिवाइन प्लानिंग का नतीजा हो? आप प्लानिंग क्या कास्परेसी का भी नतीजा नहीं हो? [हंसी]

15:47 हम सिर्फ दुर्घटनाएं हैं। षड्यंत्र भी नहीं। अपने आपको इतनी इज्जत मत नवाजा करो। कुछ नहीं है हम। ये अहंकार है बहुत बड़ा। फिर मेरे माता-पिता का मिलन हुआ और उन्होंने मुझे बड़ी आत्मीयता से, ममत्व से और प्रेम से जन्म दिया। अपना अहंकार बढ़ा रहे हो और कुछ नहीं कर रहे हो। बी रियल। और वो रियलिटी जब आती है ना तो सही बोल रहा हूं। जैसे थोड़ी देर पहले कहा था मां-बाप को फिर माफ कर पाते हो। फिर

16:32 मां-बाप के खिलाफ जो शिकायत होती है वह कम हो जाती है क्योंकि साधारण इंसान थे। उनसे एक साधारण सी भूल हो गई। बस तुम क्या उस बात की तकलीफ छाती में बांध कर घूम रहे हो? हो गया। कोई बात नहीं मम्मी हो जाता है। मैं भी सुबह चाय बना रही थी वो उबल गई। [हंसी] आपसे नहीं होता है। सही मौके पर तापमान कम करना भूल गए। मामला छलक गया।

17:20 फिर आप बोलते हो मैं दिव्य विभूति हूं। मैं अवतरित हुई हूं। आप अवतरित नहीं हुई है। आप झलकी हैं। [हंसी] हंस लो अच्छे से। यह जो मजाक है, ये चुटकुला है। यही इंसान की जात है। यही हम हैं। समझना अच्छे से। हमारा होना एक एब्सोडिटी है सचमुच। और जैसे आप अभी हंस रहे हो ऐसे ही अपनी हस्ती पर हंसा करो। फिर दूसरों से शिकायत कम होगी। [प्रशंसा] तब तो कहानियां चलती हैं। तुझे पता है तेरी दादी ने तुझे महादेव से मांगा था? [हंसी]

18:07 काहे [हंसी] बिना बात के। असली बात ही बता दो ना। अब असली बात थी कि वो बताओगे तो सेंसर बोर्ड बैठेगा। लेकिन वो असली बात अच्छी है। अश्लील भले ही हो पर मनोरंजक है। और अश्लीलता में भी क्या बुराई अगर वो सच्ची हो सत्य यदि ऑब्सिन भी है तो है तो सत्य ना। बता ही दो अपने बच्चों को कि कैसे पैदा हुए थे। कम से कम उनके भीतर से यह उम्मीद हटेगी कि हम कोई बड़े हीरे मोती हैं जिनको जाकर के

18:55 दुनिया के बाजार से संग्राम करके हमारे अभिभावकों ने हासिल किया था। कितने तो मालूम है बस इसलिए पैदा हो जाते हैं क्योंकि फैसला 51% का हो गया। बाकायदा जरी बैठी थी यह तय करने के लिए कि यह पैदा होना भी चाहिए कि नहीं रखें कि गिरा दें और ऐसे ऐसे ऐसे पेंडुलम स्विंग करता रहा करता रहा और बस 51 49 से यह फैसला हो गया कि चलो पैदा होने देते हैं। नहीं तो लगभग 50% संभावना थी कि तुम पैदा

19:41 ही नहीं होते। फ्लश कर दिए जाते। किसी अस्पताल के पीछे इतना सा फीटस बन करके कचरे के ढेर में पड़े होते। एक बहुत बड़ी तादाद है औलादों की जो ऑलमोस्ट अनवांटेड होती हैं। एक्सीडेंटल होती हैं। तो फिर पहले बैठकर के विचार होता है। उसमें दो नहीं पांच छह लोग कई बार बैठते हैं कि इसको पैदा होने भी देना है या साफ करें। पर जब पैदा हो जाते हो तो ऐसे हो जाते हो कि अरे रे रे रे रे रे मेरे घर आई एक नन्ही परी चांदनी के हसीन रथ पे सवार वो नन्ही परी बस 51% से पैदा हो गई है

20:31 जब जरी बैठी थी उसी वक्त किसी एक का भी मूड बदल गया होता तो परी का परा हो जाता और यह बातें ऐसी नहीं है जो मैं कहीं से खुफिया उठा के लाया हूं। यह घर-घर की बात है। बहुत सीधी बात है। तो ये मानते क्यों नहीं हो? और यह मानने से रिश्ते खराब नहीं हो जाएंगे। दोहरा रहा हूं। यह मान लोगे ना तो रिश्ते सहज हो जाएंगे। यह मान लोगे तो मां-बाप को माफ करना आसान हो जाएगा। यह मान लोगे तो मां-बाप से फिर दोस्ती कर पाओगे। क्योंकि दिखाई देगा कि हमारी तरह इंसान हैं। जैसे हम कुछ अच्छा कुछ बुरा करते रहते हैं। वैसे ही उनसे भी कुछ हो गया होगा। कुछ ठीक कुछ गलत।

21:18 प्रश्नकर्ता के प्रश्न में मान्यता छुपी थी कि मां है तो बेटी का तो ख्याल रखेगी ना जैसे कि रिश्ते की परिभाषा में यह निहित हो। ऐसा कुछ भी नहीं है। कि बेटी संकट में मां को बोल रही है कि मां यहां ससुराल में मेरे साथ गलत हो रहा है। अत्याचार हो रहा है। मां बचाओ क्या करूं? मां रक्षा करो। तो मां कहेगी कोई बात नहीं मैं आ रही हूं या तू मेरे पास आ जाए या मैं कोई उपाय सुझाती हूं। तुम ये क्यों मान रहे हो कि मां ऐसा कुछ करेगी? क्यों मान रहे हो? क्योंकि तुम्हें लोक संस्कृति ने सिखा रखा है कि मां बच्चे का रिश्ता तो अनिवार्यतः प्यार का होता है। और मैंने अपना पूरा उत्तर शुरू के ही तीन लफ्जों में खत्म कर दिया था। प्यार नहीं है क्योंकि प्यार कोई शारीरिक चीज नहीं होती

22:04 कि आप बच्चा जन्म दोगे तो प्यार हो जाएगा। प्यार बड़ी गहरी बात होती है। क्या कहते हैं हम? प्यार सीखना पड़ता है। एक उम्र के हो गए। तुम संभोग कर लिया, गर्भ हो गया, प्रजनन हो गया तो उससे प्यार थोड़ी हो जाएगा। प्रजनन से प्यार हो जाएगा क्या? यह कैसी बात है? नहीं तो फिर प्रजनन ही प्रेम का मार्ग कहा जाता। प्रजनन तो पागल भी कर लेता है। प्रजनन सारे पशु करते हैं। कोई कातिल हो, अपराधी हो, प्रजनन तो बलात्कार से भी हो सकता है। तो प्रजनन और प्रेम का क्या अनिवार्य रिश्ता है भाई? प्यार सीखना पड़ता है। और जिन्होंने प्यार

22:50 सीखा होता है ना, वह फिर यह नहीं करते कि प्यार उसी से करेंगे जो हमारे जिस्म की औलाद हो। उनका प्यार बस होता है। उनका प्यार पूरी दुनिया के बच्चों के लिए होता है। पूरी दुनिया को ही अपना बच्चा मानते हैं। [प्रशंसा] कहीं प्यार नहीं है। इसकी एक अच्छी विश्वसनीय सूचना इसी बात से मिल जाती है कि कोई कहे कि मैं तो बस अपने बच्चों से प्यार करती हूं। जैसे ही किसी ने यह कहा कि मैं तो बस अपने परिवार से, अपने बच्चों से, अपने पति से, अपने पिता से, अपने इन्हीं से प्यार करती हूं। यह इस बात की बड़ी सशक्त सूचना है कि वो प्यार करता ही

23:38 नहीं या करती ही नहीं। जिनको होता है वो अपने प्यार को सीमा नहीं दे सकते। ऐसे एक किसी संकीर्ण दायरे में कैद नहीं कर सकते कि मुझे प्यार दो अपने बच्चे से है। जिसे प्यार होगा उसे प्यार होगा। उसे किसी एक विषय से प्यार नहीं होगा। उसे प्यार होगा। प्यार उसकी आंतरिक स्थिति होगी। उसकी यह स्थिति विषय सापेक्ष नहीं होगी कि ये फलाना चेहरा सामने आया तब तो मुझे प्यार है। और कोई और चेहरा सामने आया तो मुझे प्यार नहीं है। प्यार ऐसा नहीं होता। पर हमारा प्यार ऐसा ही होता है। इसीलिए प्यार नहीं है। होना चाहिए। है नहीं। अध्यात्म इसीलिए है ताकि हम प्रेम सीख पाएं।

24:25 आग्रह है मेरा प्रेम सीखो और प्रजनन से प्रेम नहीं आ जाएगा। ये जो संस्कृति में चलता है ना कि मां का बच्चे के प्रति प्यार तो उच्चतम होता है। अनकंडीशनल होता है। सबसे गहरा प्यार कौन सा होता है? मां बच्चे का। झूठ है ये। बहुत बड़ा झूठ है ये। ऐसा कुछ नहीं है। जिसको प्रेम पता ही नहीं वो किसी से भी प्यार कैसे कर लेगा? अपनी औलाद से भी प्यार कैसे कर लेगा? ना नहीं होता। और जिसको प्रेम पता है उसके प्रेम को तुम रोक के दिखाओ। रुकेगा नहीं। वो सारी सीमाएं लांघ जाएगा। धर्म की, जात की, अपनेपन की, पराएपन की

25:14 उसके प्रेम को रोक नहीं पाओगे। और फिर यह थोड़ी होगा कि अपने अपने बच्चे को मैंने मुर्गे के बच्चे का सूप पिलाया। यह क्या कर रहे हो? तुम्हारा बच्चा-बच्चा और मुर्गे का बच्चा सूप। मैं इल्जाम नहीं लगा रहा हूं। मैं आपको आहत नहीं करना चाहता कि मैं कहूं कि देखो तुम दोषी हो, तुम गिल्टी हो। तुम में प्यार नहीं है। मैं चाहता हूं कि प्यार

26:02 हो। लेकिन जब तक आप नकली प्यार को ही प्यार समझते रहोगे, प्यार कहां से होगा? नकली प्यार को हटाना जरूरी है ताकि असली वाला अंकुरित हो सके। तो बुरा मत मान जाइएगा कि इन्होंने तो हमारे रिश्तों को ही नकली करार दिया। हम प्यार मतलब जानते ही नहीं है। तो फिर हम और क्या कर रहे हैं रिश्तों में? बहुत आसान है मेरी बात को अन्यथा ले लेना। यह दुनिया जैसी है और जैसी और ज्यादा होती जा रही है, जिस गर्त में गिर रही है, आपको सचमुच लगता है इस दुनिया के लोग प्यार जानते हैं? तो मेरी बात से आपको झटका

26:48 क्यों लग रहा है? बुरा क्यों मान रहे हो? प्यार सीखो। प्यार सीखो। और प्यार को सीमाएं मत दो। मत कहो कि मेरा परिवार है। तो इसलिए प्यार है। यह सब मेरा दोस्त, मेरा यार, मेरी पत्नी, मेरी बच्ची यह जो मेरापन है ना, यह प्यार का दुश्मन है। प्यार मेरेपन में बांधने को नहीं कहते। प्यार पंख देने का, उड़ान देने का नाम है। और यह मेरेपन का, ममत्व का, ममता का भाव बहुत बड़ी जंजीर होता है।

27:37 ऐसी घटना अभी हुई है। आगे भी होती रहेगी। जो आप व्यर्थ से व्यर्थ प्रतिक्रिया दे सकते हैं वो यह है कि आप आश्चर्य जाहिर करें। आप चौके हैं। आप भौचक्के हो जाए कि अरे क्या पति ने पत्नी का गला घोट दिया? अरे क्या प्रेमिका ने प्रेमी को काट दिया? अरे क्या मां ने बेटी पर ध्यान नहीं दिया? यह जो आप चौंक रहे हैं ना यहां असली गड़बड़ हो रही है। आप चौंकना बंद करिए। आईना देखना शुरू करिए, स्वीकारना शुरू करिए। क्या पता इसी से प्यार जगे कुछ, नकली हटे कुछ और असली की

28:25 कुछ आहटें आए। [संगीत]

29:43 हम [संगीत] आपको खुशी होगी इस नाते जो हमारी अपनी ऐप है जिसमें हमारे गीता और बाकी सब कार्यक्रम चलते हैं। यहां पर बुद्ध हैं, गीता है, उपनिषद है, अष्टावक्र हैं। यह

30:31 मुझे मिले, मेरी जिंदगी बदली। यह तुम्हें मिलेंगे तुम्हारी जिंदगी भी बदलेगी। सच पूछिए तो मतलब लाखों नहीं तो कम से कम हजारों जिंदगियां तो हैं जो बिल्कुल बदली हैं। 2 लाख से अधिक गीता प्रतिभागियों के साथ जुड़े आचार्य प्रशांत ऐप पर। [संगीत] पहला महीना बिल्कुल फ्री गीता मिशन का पूरा एक्सेस। ऐप पर आपको मिलेंगे नियमित लाइव सत्र। हर दिन आचार्य प्रशांत के विशेष संवाद। गीता कम्युनिटी का एक्सेस, गीता परीक्षा, चयनित समाचार, ऑडियो बुक्स, कोर्ट्स और भी बहुत कुछ। Google Play स्टोर या Apple App स्टोर पर आचार्य प्रशांत सर्च करें और अभी डाउनलोड करें।

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