0:00 कि यह जज उन और संयम के संग नीरज uie है कि खत्म बल है कि हर आत्मा में अक्षुण्ण बल है इस बल का सदुपयोग हो जाए तो हर मनुष्य कमाल कर सकता है वह अपने ही नहीं दूसरे के जीवन को भी धन्य कर सकता है वह बहुत कुछ सृजन कर सकता है हर आत्मा की अलग अलग विशेषताएं हैं सबका अलग-अलग स्वभाव है सबकी अलग-अलग सृजनात्मकता है सबके लिए कोई एक मार्ग
0:45 निर्धारित नहीं किया जा सकता कोई दूसरा किसी के बारे में पूरी तरह जान भी नहीं सकता किसी और के लिए अपनी कोई राय बनाने में पूर्ण सत्यता ही नहीं सकती इसी तरह अपने लिए पूर्ण ज्ञान बार कहीं से मिल ही नहीं सकता वह तो अपने भीतर ही खोजना होगा एक गुरु शिष्यों को लगातार 10 साल तक एक ही तरह की शिक्षा देता है लेकिन शिक्षा लेने के पश्चात समय कुछ न कुछ नहीं होगा सबका कर्म करने का सोच झाला रीजन करने का तरीका अलग अलग होगा कोई भी दो हु एक तरह से नहीं हो सकते बाहर से कितना भी ज्ञान लोग लेकिन साथ में आत्मशक्ति का ज्ञान भी करना होगा वह
1:32 दूसरों पर निर्भर मत रहो दूसरे वह मार्किंग करेंगे जो आपके अनुकूल नहीं है आपकी शक्ति किसी और तरफ व्यवहार कर रही है और आप किसी और के कहने से दूसरी तरफ जाने का प्रयास करेंगे तो क्या स्थिति होगी आप समझ सकते हैं लेकिन हमें दूसरों पर भरोसा ज्यादा और अपने आप पर भरोसा कम है बात यह नहीं है कि दूसरे जो बात कर रहे हैं वह गलत है वह सत्य भी हो सकती है परम सकते भी हो सकती है बड़ी ही मूल्यवान हो सकती है आपके लिए बड़ी उपयोगी हो सकती है लेकिन वह कितनी ही मूल्यवान बात हो उसमें एक अधूरापन रह गई यहां अपने का यह भाव भी नहीं है कि आप दुनिया
2:19 में किसी को भी सुन्नत छोड़ दो यह आपके ऊपर है कि आप इसे सुनना पसंद करते हैं एक और आपको ज्यादा प्रभावित करता है यह कहने के पीछे भाव यह है कि आप लाख और से ज्ञान अर्जित कर लो जब तक अपनी आत्मशक्ति का ज्ञान नहीं करोगे तब तक बात अधूरी ही रहेगी हर इंसान के भीतर एक बहुत ही साल जगत है बहुत सारी ऊर्जा हैं जिन्हें लगातार प्रवाहित होने की प्रवृत्ति है उनको रोकना असंभव है यदि आप उनको सही मार्ग नहीं दे पाए तो वह या तो कुंठित होकर आपको मानसिक रुग्णावस्था में डाल देगी यह विध्वंसात्मक बन जाएगी
3:05 कि उर्जा हमेशा सृजन करना चाहती है पर जब सृजन का अवसर नहीं मिलता है तो वह विध्वंस की ओर बहने लगती है कई ऐसे मनुष्य होते हैं जिनमें उर्जा का एक बड़ा ही प्रबल होता है वह ऊर्जा ऐसा कुछ करना चाहती है जिससे सारा संसार जाने उस ऊर्जा का यदि सही उपयोग हो जाए तो इस संसार के लिए बड़ा ही सुंदर कार्य हो सकता है और यह इसका सही उपयोग नहीं हो पाया तो वह इंसान या तो पागल हो सकता है या कोई विनाश कर सकता है जिसने कितनी ऊर्जा है वह क्या करना चाहती है किस प्रकार उसको बेहतर दिशा दी जा सकती है इसके बारे में जितना दूसरों पर निर्भर होंगे उतना ही ज्यादा गुमराह होंगे दूसरा
3:53 कितना भी अच्छा हो कितना ही अनुभव हो आप के अंतर को वह नहीं पढ़ सकता यह यात्रा तो स्वयं को ही करनी होगी दूसरा आपको जगह मैं बता नहीं सकता जिन लोगों ने इस बात को समझ लिया है वे किसी के पिछलग्गू नहीं मानते हैं आत्म शक्ति को स्वयं पहचानते हैं वे अपनी आत्मा की आवाज को बड़े ध्यान से सुनते हैं कि दूसरों की बातों में आकर भयग्रस्त नहीं होते हैं अपनी आत्मा की आवाज को दबने नहीं स्वयं पर अपने विश्वास को कमजोर नहीं करते हैं वह आंखें बंद करके नकल नहीं करते बल्कि अपना कुछ अलग करने का जज्बा रखते हैं इसलिए यह देखने में आता है
4:40 कि सृजन करने वालों का सबका अपना अपना तरीका होता है मानव जीवन पूर्णता लिए है कि यह बहुत मूल्यवान उपलब्धि है यह परमात्मा की एक बहुत विलक्षण और पवित्र प्रकृति है यह आनंद का सागर है इससे बेहतर इस ब्रह्मांड में कुछ भी नहीं लेकिन पता नहीं क्यों दृष्टि को दूषित किया जा रहा है हमें बार-बार यह समझाया जा रहा है कि हम नीच पापी और निर्बल है हमें मांगना सिखा चिकना कर अधिकारी बना दिया गया है हमारी आत्मशक्ति को बुलाने का पूरा इंतजाम कर दिया गया है आश्चर्य की बात तो यह है कि जो जितना ज्यादा तथाकथित धर्म का पालन
5:27 कर रहा है वह उतना ही ज्यादा अंदर से कमजोर होता जा रहा है उसको पूरा दिग्भ्रमित कर दिया जाता है और डरा दिया जाता है कि जरा सा भी इस लाइन से बाहर जाओगे तो पाप के भागीदार बन जाओगे और वह इंसान इस बाप के डर से अपनी सारी शक्तियों को भूलकर लकीर का फकीर बन जाता कि सबके सोचने-समझने और आप निरीक्षण की क्षमता को सील कर दिया गया है क्या हमरो धो अपने आपको पतित कहकर परमात्मा द्वारा दिए गए इस अनमोल जीवन का अपमान नहीं कर रहे हैं क्या हम अपने आपको पति फिर इस जीवन में कुछ सेलेक्ट कर पाएंगे कि हम
6:13 रोज-रोज परमात्मा से कुछ मांगकर जो हमें मौलिक रूप से मिला है उसको भूलते नहीं जा रहे हैं कुछ सवाल करो अपने आप से प्रेम मंदिर इससे उनके जवाब ढूंढो सारी बात समझ में आ जाएगी अपने आपको पति समझना सबसे गिरी हुई वाइट है जैसा हम अपने बारे में सोचेंगे वैसे ही हम बनते जायेंगे कि हमारे भीतर यह बात बहुत गहरे में बैठ गई है कि हम कमजोर है इसलिए हम सहारा खोजते रहते हैं हम सोचते हैं कि किसी का सहारा मिल जाए तो शायद ने अपने जीवन में कुछ कर सकूं रखो यदि आपने अपने भीतर उस शक्ति को विस्मृत कर दिया जो जगत का निर्माण कर सकती है
7:00 आपने अपनी ऊर्जा को संकुचित कर लिया सारा ध्यान इस बात पर केंद्रित कर दिया कि कहीं से कुछ मिल जाए और मैं बस उसका सहारा लेकर चल पड़ो अपनी जिम्मेदारी के दायरे को बहुत कम कर लिया हम दूसरों की कहानियां बड़े गर्व से पड़ते हैं पर कहानी बनाने की नहीं सोचते हैं हम बस इसी इंतजार में बैठे रहते हैं कि कोई मोहरा आएगा तो हमारी जिंदगी संवर जाएगी हम पूरी तरह अपने आप को दूसरों पर निर्भर बना चुके हैं हम यह मान चुके हैं कि मैं तो कमजोर हूं मुझमें इतनी सामर्थ्य कहां कि मैं अपने आप कुछ निर्णय लेकर कुछ जिम्मेदारी लेकर कोई कहानी बना सकूं हम हमेशा दूसरों से आशीर्वाद मांगते
7:48 रहते हैं कि बस आपका आशीर्वाद मिल जाए तो ही मैं कुछ कर पाऊंगा मैं आपके बिना तो मैं कुछ कर ही नहीं सकता यह शब्द सुनने में बड़े अच्छे लगते हैं पर ये इंसान को कमजोर बनाते हैं यह उसकी दूसरों पर निर्भरता को बढ़ाते हैं यह बात मन में बैठ जाती है तो इंसान हरै सफलता में यही सोचता रहता है कि मुझे पूरा आशीर्वाद नहीं मिला मुझे अभी और किसी का आशीर्वाद लेना है तब ही में सफल हो पाऊंगा वह अपनी शक्ति को और जगाने की बात नहीं सोच पाता आज से अपने सोचने का अंदाज बदल लो जो भी जीवन में मिला है उसका बस धन्यवाद दो और यह सोचो बस अब तो मुझे इतना मिल गया है अब
8:36 आत्मशक्ति द्वारा सफल हो कर ही रहूंगा अब मैं दुनिया से रास्ता जाने वाला नहीं रास्ता दिखाने वाला बनूंगा मुझे परमात्मा ने इतना शक्तिशाली बनाया है इन शक्तियों का उपयोग में पूरी जिम्मेदारी से करूंगा तो और आप देखोगे कि अब कि पूरी दिशा ही बदल चुकी है आपके विचारों में ऊर्जा गई है नित्य नया सृजन दिखाई देने लगा है जिससे आप सोच भी नहीं सकते थे उससे अब एक एक करके सच साबित करते जा रहे हो बस किसी अंधकार में मत पड़ना परमात्मा से कुछ मांगना नमक पर परमात्मा को धन्यवाद देते रहना उसके द्वारा दी गई शक्तियों को धीरे-धीरे पहचानने लग जाओगे महसूस होने
9:23 लगेगा कि इसमें कितना आनंद लहर और बस इसी राह पर चलते रहना जीवन से दूसरों पर निर्भरता घटती जाएगी और आत्मबल बढ़ता जाएगा अपनी शक्ति को पहचानने में दो बहुत बड़ी बड़ी बाधा हैं साहस की कमी बॉर्डर आदमी सोचता है जिस तरीके से मेरी पीढ़ियां चलती आ रही है जिस तरीके पर पूरी दुनिया चल रही है वह सही ही होगा भले ही उसके परिणाम गलत आ रहे हैं वे दिखाई दे रहे हैं पर सबसे अलग हटकर सोचने का साहस वह नहीं कर पाता वह कभी-कभी अलग रहा के लिए सहमत भी हो जाता है पर फिर भी हिम्मत नहीं कर पाता एक मान्यता बन गई है कि जिस
10:12 काम को भीड़ कर रही है वह सही ही होगा लेकिन सच यह है कि जिसे भीड़ कर रही है वह सही ही हो यह जरूरी नहीं दूसरा है पाप-पुण्य का डर किसी बात का पालन नहीं करूं कि कहीं मुझे नहीं मिल जाएं अगले जन्म में मुझे सजा नहीं मिल जाए वही में इंसान से जानवर तो नहीं बना दिया जाऊंगा ऐसी कहानियां बना बनाकर इंसान को इतना अधिक डरा दिया गया है कि अभी का नाटक उसे दिखाई नहीं देता है भविष्य के अंदर घुसे दिखाई देने लगता है यह बात किसी को समझ में नहीं आती कि डर से बड़ा कोई नहीं है सिर्फ इस वजह से किसी भी लकीर को पकड़ लेना कि यह
10:58 कहने से सर मिलता है और यह करने से नर्क मिलता है हम अपने साथ कितना बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं किसने दिए यह पैमाने किसी ने कुछ भी कहानी बना दी और बड़े आश्चर्य की बात है कि पूरी दुनिया उसके पीछे लग जाती है परमात्मा ने हमें इतना सुंदर जीवन स्वर्गीय है वह दिखाई नहीं देता है हम अपने ही कृत्य से इस दुनिया को नरक में तब्दील करते जा रहे हैं वह में कि ही नहीं देता है यह सिर्फ वह हम करते जा रहे हैं एक मात्र डर की वजह से हम इतने ज्यादा डर चुके हैं कि कोई भी हमें आसानी से डरा देता है कोई भी कहानी हमारे ऊपर थोप देता है और हम उसके बड़े भक्त हो जाते
11:44 हैं कोई थोड़ी अच्छी कहानी बना लेता है तो हमारे लिए वह भगवान हो जाता है फिर किसकी हिम्मत जो उसकी बात नहीं माने बात नहीं माने तो नर्क का भागीदार बनता है कि डर के भी दो प्रकार है एक कुछ अनिष्ट होने का डर यह कुछ खोने का डर दूसरा डर है कुछ मिलने का लालच में यह करूंगा तो इतना फल मिलेगा इस जन्म में इतना फल मिलेगा यह अगले जन्म में इतना फल मिलेगा नहीं करने पर यह सब छूट जाएगा यह भी एक प्रकार का डर रही है हमें कितना हिस्सा भी बना दिया गया है धर्म में भी सोने बाजी इस अपने और उस
12:31 हाथ ले यह कोई धर्म है यह कोई आत्मा की आवाज है यह तो निश्चित है कि डर की वजह से किए गए कार्य को अंजाम जो भी हो पर डर अपने आप में बहुत बुरी बला है यह किसी भी बुरे से बुरे नाक से कम नहीं है यह अपनी आत्मा की हत्या है यानी यह सबसे बड़ी आत्महत्या है इसीलिए शायद कहावत मनी की जो डर गया वह मर गया कि शरीर को मार लेना तो सिर्फ शरीर की हत्या है लेकिन डर के वशीभूत हो ना सबसे बड़ी आत्महत्या है किसी की बनाई हुई लकीरों पर चलना जीवन की प्रकृति नहीं है यदि किसी की बनाई हुई लकीरों पर चलने का प्रयास करोगे तो हमेशा भ्रांत अवस्था में
13:17 रहोगे जीवन ने की यात्रा है अपनी आत्मा की आवाज को पहचानना सीख को और अपने मार कि स्वयं खोज करो दवा इंसान हमेशा युद्ध में रहता है जब उसे सत्य का पता लगता है तो वह कुछ अपनी आत्मशक्ति से निर्णय लेने के लिए सोचता है जैसे ही वे सोचना शुरू करता है दर उसने व्यवधान पैदा करता है अपनी ओर से कुछ करने की हिम्मत को पस्त कर देता है वह कुछ निर्णय नहीं कर पाता और बड़ी दुविधा में पड़ा रहता है दुविधा जीवन के लिए सबसे बड़ा अभिशाप है दुविधा में रहने वालों जैसी बुरी दशा आ किसी किन्नर पाएंगे जिस प्रकार जो पत्थर बिल्कुल दाग रहित होता है वहीं हीरा
14:04 कहलाता है जरा सा भी दाग जो कि नंगी आंखों से भी लिखता ना हो तो भी हीरे की कीमत को कम कर देता है उसी प्रकार डर का जरा सा भी अंश आत्म शक्ति को कमजोर कर देता बहुत पुरुषार्थ के बाद बहुत जीवन गुजारने के बाद हम निर्णय लेने लायक बन पाते हैं लेकिन छोटा सा भी डर कुछ शक्ति को शून्य कर देता है इसीलिए जीवन में कुछ पाना है तो अपने आत्मा को सच्चा ही हल्का सा भी उसने ना पाए तब आप देख पाओगे कि आपके भीतर ही कितनी बड़ी शक्ति का भंडार भरा पड़ा यह मत लगाना चाहिए और किससे नहीं करना चाहिए
14:49 बाघ की वजह कोई भी हो डर की वजह से किया गया हर कार्य गलत है चाहे ना हो थे कटर हो गुरु का डर हो या मानकर हो इस डर से कुछ करना कि नहीं करूंगा तो आप लग जाएगा यह सोच ही गलत है वही काम आपकी आत्मा की आवाज से भीतरी इच्छा से हो तो वह पुण्य किसी को इसलिए नमस्कार करना कि नहीं करूंगा तो नाराज हो जाएगा क्या इसमें कोई आनंद है जब कोई सामने आए और भीतर के भाव नमस्कार करने के लिए उमड़ पड़े आनंद तो उसमें है एक बार डर के पिंजरे से बाहर तो आ कर देखो फिर अपने कृत्यों का इमानदारी से निरीक्षण करो फिर अपने विचारों का
15:36 निरीक्षण करो तुरंत सही और गलत का भान हो जाएगा आप में शक्तिपूर्ण जागृत हो जाएगी बस हमारी खोज होनी चाहिए यदि हमारी खोज ही नहीं है तो शतक कुछ भी नहीं हो सकता यदि विश्वास नहीं होता है तो यह देख लो कि आप तक जिन लोगों को हम अपने जीवन में महापुरुषों के रूप में जा कि है क्या हंसी हंसती घृणि भक्ति गीत को सुनें है और