0:00 हिम्मत है तो उनकी रोस्टिंग करके दिखाओ ना जो सचमुच आज के समय के सबसे बड़े अपराधी हैं वहां तो तुम्हारी जान सूख जाएगी यही जो गुड़गांव वाले हैं अमीर जादे इनसे मैं कहता था मैं कहता था बहुत बढ़िया बात है तुम जाके अपनी गाड़ी घुसे देते हो उसके पान के खोखे में और तुम्हें बहुत मजा आता है कि उसकी सब लकड़ी का था माल टूट के गिर गया और हा हाहा करके हंसते हो ले ली ले ली हिम्मत है तो जाओ किसी शॉपिंग मॉल में गाड़ी घुसे के दिखा दो वहां तो तुम भी अंदर तुम्हारी गाड़ी भी अंदर और तुम्हारा बाप भी अंदर गाड़ी का मालिक 30 साल से मैं दिल्ली में हूं मुझे 30 साल से समझ में नहीं आया ये लेना क्या होता है ले ली ये तीन खड़े हुए हैं भगत सिंह खड़े हैं सुखदेव खड़े हैं राजगुरु खड़े हैं इनके चेहरों पे ये भाव है क्या कि लेली वगैरह हंस रहे हैं आपको क्या लगता है इन परे मुकदमा चलता था ये अदालत में चिल्लाने लग जाते थे तुम जब मुझ पर एक फालतू का मुकदमा
0:46 चला रहे हो जिसमें अन्याय ही अन्याय निहित है और जहां तुम अब मेरी जान ले लेने वाले हो मैं वहां पर भी अपनी आवाज उठाने की जरूरत नहीं समझता मुझे जहां बम फोड़ना था मैं फोड़ आया वो आवाज काफी थी ना उन्होंने कहा था ब को सुनाने के लिए यह आवाज ऊंची करनी पड़ मैं अपनी आवाज क्यों ऊंची करूं जहां आवाज ऊंची करनी थी कर दी बाकी हम जगह जगह चिल्लाते नहीं फिरते र आत्मविश्वास के असली और नकली अर्थ क्या है क्या आत्मविश्वास बस मान्यता मात्र है क्योंकि इसमें आत्म शब्द भी जुड़ा हुआ है तो जो साधारण आत्मविश्वास होता है वह एक
1:34 आग्रह होता है व आग्रह होता है कि मुझे जो पता है वही सही है मुझे जो पता है वही सही है यह आग्रह आत्मविश्वास है मैं इस बात पर अड़ चाहता हूं कि मुझे जो पता है वह सही है जो वास्तविक आत्मविश्वास होता है वह आत्मा पर विश्वास और माने सत्य तो वह सत्य पर दृढ़ता है वह कहता है जो सत्य है वही सही है साधारण आत्मविश्वास क्या बोलता है जो पता है वही सही है वास्तविक आत्मविश्वास क्या बोलता है जो सत्य है वही सही है चाहे व मुझे पता
2:22 हो चाहे ना पता हो साधारण आत्मविश्वास में डर बहुत है क्या डर है आग्रह करो कि मुझे जो पता है वही सही है अगर वह बात गलत निकल गई तो मैं टूट जाऊंगा वास्तविक आत्मविश्वास कहता है जो भी सही है सामने आने दो मैं नहीं टूटने का वास्तविक आत्मविश्वास मात्र निष्काम से आ सकता है जो भी पता है सामने आने दो मुझे उससे कोई अच्छा परिणाम चाहिए ही नहीं तो मैं क्यों निराश होऊंगा मेरी आशा क्यों
3:07 टूटेगी समझ पा रहे हैं फंस रही बात वास्तविक आत्मविश्वास कोई आग्रह लेकर आता ही नहीं है वो कोई चीज होता ही नहीं है वो एक खुलापन और एक खालीपन होता है जो सच है वो पता लग जाए हमने पहले से कोई आग्रह कर ही नहीं रखा कि सच इस तरह का हो कि सच उस तरह का हो कि सच वैसा हो कि सच हमारी मान्यता और सुरक्षा के अनुकूल हो ऐसा हमने कुछ शर्त बांधा ही नहीं जो भी सच्चाई है साहब सामने आए अंजाम क्या होगा हमें परवाह नहीं यह निष्काम है सच जो भी है सामने आए शिरोधार्य है परिणाम क्या होगा हमें क्या लेना देना परिणाम से यह
3:52 वास्तविक आत्म विश्वास है मुझे कोई आग्रह रखना ही नहीं है कोई सामने आया उसने कोई बात बता दी एकदम नई बात अनसुनी बात तो हम कहेंगे अच्छा ऐसा है चलो ऐसा है तो ठीक है दूसरी और हम कुई बात मान के बैठे थे व कोई आदमी आया उसने नई बात बता दी तो हमारे भीतर से क्या उठेगा विरोध उठेगा क्योंकि हमारा आग्रह टूट रहा है ना हमारा अहंकार टूट रहा है हमारी क्या मान्यता थी उसने उसे विपरीत बात बता दी बड़ा बुरा लग रहा है हमारी कोई मान्यता है ही नहीं तो सच जहां से भी पता लग रहा है हमारे लिए वह एक स्वीकार की बात है हां जी बताइए ठीक है अच्छा ऐसा है बल्कि एक फिर उसमें कौतुक रहता है एक
4:39 वंडरमेंट की बात रहती है अच्छा ऐसा है गजब आश्चर्य वह आनंद से बहुत मिलती जुलती बात है कौतुक बाल सुलभ कौतुक छोटा बच्चा हो नासे वैसे आंखें ऐसे बड़ी-बड़ी करके हां बड़ा मजा आता है वो तभी हो सकता है लेकिन जब आप पहले से ही अपनी थाली भर के ना खड़े हो गए हो फिर उसमें कोई कुछ नहीं रख सकता वास्तविक आत्मविश्वास कोई आग्रह लेकर
5:25 आता ही नहीं तो वास्तविक आत्मविश्वास में कोई आपसे पूछेगा व्हाट आर यू कॉन्फिडेंट ऑफ तो आप क्या बोलेंगे नथिंग देयर इज जस्ट कॉन्फिडेंस विदाउट एन ऑब्जेक्ट और उसको फेथ बोलते हैं आत्मविश्वास जिसका कोई विषय नहीं है आत्मविश्वास जो किसी पर आश्रित या अवलंबित नहीं है आत्मविश्वास जो किसी धारणा के सहारे पर बैसाखी पर नहीं खड़ा है बस है किस बात का इतना विश्वास है तुम्हें किसी बात का नहीं सत्य कोई बात होता है क्या हमें तो आत्मा का विश्वास है आत्मा कोई बात होती नहीं बस है एक खालीपन है ऐसा खालीपन जो किसी भी बात से दूषित नहीं हो
6:10 सकता हमें कुछ भी बता दो हम उससे दहल नहीं जाएंगे कोई भी दुनिया की सच्चाई सामने ला दो मुझसे दहल नहीं जाएंगे अब आप एक मात मान के बैठे हो आपको फलाने ईश्वर ने बनाया यह बात आपने पकड़ ली है अब कोई आपके सामने आकर बताया आपको ईश्वर ने क्या बनाया आप चिंपांजी हो और वहां पर दिखा दे आपको चिड़िया घर में कि यह हैं दादाजी के दादाज तो बड़ा बुरा लगता है बहुत लोग इसी बात पर बहुत परेशान है बोलते हैं कि तेरे पुरखे होंगे बंदर मैं तो सीधे भगवान से आया हूं वह इसको बड़े अपमान की बात मानते हैं कि पुरखे बंदर थे क्योंकि उनका आग्रह यही है कि हम तो सीधे ईश्वर के वंशज है तो फिर आप कैसे स्वीकार करोगे बात को यह आत्मविश्वास
6:57 की कमी का देव तक है आत्मविश्वास तथ्यों के प्रति पूरे खुले पन का नाम है आत्मविश्वास निराग होता है निराग होना सत्याग्रही होना बिल्कुल एक बात है बल्कि सत्याग्रही होने से ज्यादा ज्यादा साफ और ज्यादा व्यवहारिक बात है कहना निराग कोई आग्रह ही नहीं है कोई आग्रह ही नहीं है कोई आपसे फिर आके ये नहीं कह सकता देखो तुमसे एक बात बताएंगे पर तुम्हें चोट तो नहीं लगेगी आप कहोगे हमें किसी भी बात से चोट लगती नहीं क्योंकि हमारा तो कोई आग्रह है नहीं आग्रह होता तो उस पर चोट लग जाती मेरे पास कोई आग्रह नहीं है देखो सुनो बुरा मत मानना कुछ कहना था
7:45 आपको जो कहना हो कहिए हमको बुरा लग ही नहीं सकता हवा में लाठी भांजो ग तो हवा को चोट लगेगी क्या क्योंकि हवा का कोई आग्रह है ही नहीं हां दीवार पर लाठी मारो दीवार को चोट लग जाती है क्योंकि दीवार का है यह वास्तविक आत्मविश्वास है सच्चाई किसी भी दिशा से आ रही हो किसी भी नाम में आ रही हो किसी भी रूप में आ रही हो हम स्वीकार कर लेंगे और हम सदा खुले हैं सदा प्रस्तुत हैं यह आत्मविश्वास है और जो आदमी अपनी कमजोर वल्नरेबल ब्रिटल मरियल घायल दुर्बल धारणाओं बचाए बचाए घूम रहा है उसे
8:31 आग्रह होना ही पड़ेगा समझ रहे हो बात को वह हमेशा ऐसे चलेगा जैसे एक आदमी जिसकी पेंट में बटन ना हो उसकी हालत क्या रहती है वोह भंगड़ा कर सकता है तो ऐसा ही रहेगा हमेशा जिंदगी में यह आम आदमी के आत्मविश्वास है वो जरा सा मुक्त हुआ नहीं जरा उसकी मौज आई नहीं कि फट से उसकी पैट गिर जानी है तो जिंदगी भर उसको मौज कभी आएगी ही नहीं क्योंकि मौज का मतलब होगा गया वास्तविक आत्मविश्वास क्या होता है नग्नता हमें कोई पेंट पकड़ के रखनी ही
9:19 नहीं है हम खुले नंगे हैं कोई हमें क्या नीचा दिखाएगा कोई हमें क्या चोट पहुंचाएगा कोई हमारी क्या बेइज्जती करेगा हमारे पास इज्जत है ही नहीं लो कर लो बेइज्जती बेइज्जती उनकी होती है जो इज्जत की पतलून पकड़ के घूम रहे होते हैं हमने कब की उतार दी यह वास्तविक आत्मविश्वास है जो पतलून पकड़े खड़ा है उसको बोलो देखो गिर रही है तो दहल जाएगा जो वास्तविक आदम विश्वासी उससे बोलो गिर रही है तो बोलेगा क्या गिरेगा यहां गिरने कुछ है ही नहीं हम निराग ही है निराग ही माने निर्प लून है ही नहीं कुछ कोई आग्रह नहीं क्या गिरेगा सब गिरा
10:09 दिया समझ में आ रही है बात ये तो जो नकली आत्म विश्वासी होता है उसका आत्मविश्वास चेहरे से है उसके हाव भाव से आप बता दोगे कि यह आत्मविश्वास आदमी है उसकी भाव भंगिमा में तीखे तेवर होते हैं एक हिंसात्मक होती होती है तलवार जैसी धार होती है आपको कुछ अभी यहां पर चित्र दिखाए जाए और पूछा जाए इनमें से कॉन्फिडेंट चेहरा कौन सा है आप बता दोगे वो कैसा होगा करके दिखाओ करके दिखाओ कैसा होता है कॉन्फिडेंट चेहरा कैसा होता है बताओ ना अभी आप आप ग सर्च करिए इमेजेस में कॉन्फिडेंट फेस तो दिखा नहीं
10:57 देगा कैसा होगा थोड़ा अकड़ा हुआ हिंसा होगी उस चेहरे पर पानी थोड़ा कम होगा कोमलता थोड़ी कम होगी धार थोड़ी ज्यादा होगी ऐसा ही होता है ना हा डोमिनेंट डोमिनेंट आंखें खुली होंगी ज्यादा और देख ऐसे रहो जैसे खा जाएगा दुनिया नॉलेज हो ऐसा यह झूठा कॉन्फिडेंस है यह नकली आत्मविश्वास है यह हम कह रहे हैं डर का
11:45 ही दूसरा रूप है अंग्रेजी चैनल पर बहुत पुराना वीडियो है कॉन्फिडेंस इ फियर ये नकली आत्मविश्वास है यह डर है गीदड़ जो शेर की खाल पहन कर आ गया है वास्तविक आत्मविश्वास कैसा होता है कुछ नहीं सहज साधारण चेहरा पर हमारी हमारी शिक्षा हमारी संस्कृति ऐसी नहीं रही है कि हम एक साधारण सहज चेहरे को देखकर कहे यही तो आत्मविश्वास है
12:33 वास्तविक उसको हम कह देते हैं दीनता है या हम कह देते हैं य तो बहुत साधारण चेहरा है और कुछ और कह देते हैं क्या बोल दोगे हा हा बेचार कीी का चेहरा बोल देंगे हां ह्यूमिडिटी विनम्रता का चेहरा बोल देंगे आमतौर पर साधारण बोल देंगे बड़ा साधारण चेहरा है यही साधारण हो जाना ही आत्मविश्वास है एकदम साधारण आत्मा को इसीलिए निर्विक गया है निर्वित साधारण य सहज बैठे हुए हैं ना कुछ बचाने को ना कुछ छुपाने को अस्तित्व के प्रति पूरा खुलापन तथ्य जो भी है सब स्वीकार है क्योंकि
13:20 तथ्यों से ही तो मान्यताएं कटती हैं तथ्य ही तो सत्य के और मुक्ति के द्वार है हम पूरे तरीके से उपलब्ध है एकदम सहज बैठे हैं ना किसी से डरे हैं ना किसी को डराना है यह आत्मविश्वास है कोई उसमें आक्रामकता नहीं कोई तीखापन नहीं कोई किसी के ऊपर प्रभुत्व का भाव नहीं छाने की इच्छा
14:08 नहीं जो छोड़ वास्ते वाली इच्छा होती है यह भी इसी बात की द्योतक होती है कि बंदा बहुत डरा हुआ है छाएगा नहीं तो मर जाएगा इससे बर्दाश्त ही नहीं होता कि कहीं किसी कोने में सहज होकर के बैठ जाए इसकी हस्ती पर खतरा आ जाता है अगर 10 लोग इसको एक्नॉलेज ना करें तो ये किसी जगह पहुंचे वहां 50 लोग हो और वह 50 लोग इसकी हस्ती को स्वीकृति ना दे तो इसको ऐसा लगता है जैसे मर गया तो यह जो यह जो बड़ी इच्छा होती है कि मैं जहां रहूं वहां पर छा जाऊं इससे यही पता चल रहा है
14:53 कि बहुत डरे हुए आदमी हो कई लोगों को आप देखेंगे जबरदस्ती जोर से बो बोलेंगे ऊंचा बोलेंगे जहां जरूरत नहीं है वहां भी बोलेंगे हर जगह घुस इससे पता चलता है कि इन पर अस्तित्व गत संकट है यह भीतर से अपने आप को लेकर के बहुत डरे सहमे हुए हैं और आत्म विश्वासी की भीतर से मजबूत इंसान की आप पहचान पाएंगे कि वह अपने आप को कोने में ही रखना पसंद करेगा जब स्थित की मांग होगी सिर्फ तभी वह स्थिति के केंद्र में आना चाहेगा अन्यथा अपने आप को अदृश्य रखना लुप्त
15:40 रखना या कोने में रखना उसको पसंद रहेगा क्योंकि व कोने में होकर के भी केंद्र में है उसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा कि वो कोने में हो गया तो कहीं कुछ गलत हो गया कोई उस पर ध्यान नहीं दे रहा तो भी उसकी हस्ती पूरी है व चाह ही नहीं रहा कि 10 लोग मुझ पर ध्यान दें तो मुझे भरोसा आएगा कि मैं कुछ हूं उसको पता है कि वह कौन है तो कोई उस पर नहीं ध्यान दे रहा तो कोई दिक्कत नहीं बल्कि वह जानता है कि लोग ज्यादा ध्यान देंगे तो बेकार में एक तरह का डिस्टरबेंस पैदा होता है विक्षेप आता है तो कोई कहे किसी पर क्यों ध्यान दे सब
16:28 जो अपना अपना काम है करो और जो आदमी भीतर से डरा हुआ रहेगा सदा उसकी मांग रहेगी कि 10 लोग उस पर अपना मन केंद्रित करें जिसको आप अटेंशन सीकिंग बिहेवियर कहते हो यह भीतर के भय की निशानी होती है भीतर कोई है जो जानता है कि वह है ही नहीं अहंकार मिथ्या होता है ना उसको पता होता है वह है ही नहीं जब उसको पता होता है कि वह है ही नहीं तो वह अपने होने का प्रमाण 10 और लोगों से मांगता व कहता तुम लोग बोल दो मैं हूं ताकि मुझे थोड़ा तो भरोसा आए कि मैं हूं नहीं तो मैं मर गया अब कोई भी आकर आपको यह तो नहीं बोलेगा ना कि तुम हो इतना तो कोई बोलेगा नहीं व बात विचित्र लगती है तो लोगों से वह यह
17:13 बुलवाना चाहता है कि तुम हो तो इसके लिए लोगों से बुलवा देता है तुम सुंदर हो या तुम अच्छे हो या तुम प्यारे हो या तुम ज्ञानी हो या तुम बहादुर हो या तुम अमीर हो आप बहुत सच सवर के किसी पार्टी में जा आप मालूम है इतना सत सवारे क्यों जाते हैं ताकि आपको भरोसा आ जाए कि आप मुर्दा नहीं हो अहंकार है तो नहीं है तो हम जानते हो तो शून्य है मिथ्या है तो किसी तरह वह चाहता है अगर 10 15 लोग प्रमाणित कर दे कि मैं हूं तो मुझे लगेगा कि मैं हूं तो आप बहुत सच सर के गए लोग बोल रहे हैं कि कितने हैंडसम हो या कितने प्रिटी हो या कितने कूल हो या कितने सेक्सी हो उन्होंने जो भी बोला हैंडसम प्रिटी कूल सेक्सी उसमें उन्होंने क्या
17:59 बोला तुम हो बस यही सुनने के लिए तो हम तरस रहे थे कि हम हैं हैंडसम कूल प्रेटी सेक्सी यह सब तो बहाने हैं हम यह सुनने के लिए मरे जा रहे हैं कि तुम हो तुम हो तुम हो आत्म विश्वासी वास्तविक आत्म विश्वासी जानता है कि वोह है उसे किसी और से नहीं सुनना कि तुम हो तो फिर उसको कोई आवश्यकता नहीं रहती दूसरों का ध्यान आकर्षण करने की उसको नहीं फर्क पड़ता उसको पता है वह कौन है क्या है कितना नहीं है कितना है सब उसको अपना हिसाब खुद ही पता है वह अपना झूठ भी जानता है अपना सच भी जानता
18:51 है शांत मौन सहजता इससे बड़ा आत्मविश्वास नहीं होता और चिल्लाता हुआ कूदता हुआ जगमग चमकता हुआ आत्मविश्वास बड़ी भीतरी बीमारी का सूचक है आप देखिएगा सार्वजनिक जगहों पर कई बार ऐसा होता है वहां दो लोग आपस में बात कर रहे होंगे और वो एक दूसरे के सामने खड़े हैं वो एक दूसरे से बहुत आराम से बोलेंगे तो भी सुन लेंगे एक दूसरे की बात आने सामने खड़े हैं लेकिन वह एक दूसरे से इतनी जोर से बात कर रहे हैं कि पूरा हॉल सुन रहा है यह दोनों आपस में बात नहीं कर रहे यह क्या कर
19:38 रहे हैं यह पूरे हॉल को सुना रहे हैं यह चीज आप आप किसी कॉलेज की कक्षा में भी पा सकते हैं यह आप किसी विवाह वगैरह के बैंकट हॉल वगैरह में पा सकते हैं यह आप किसी किसी कॉरपोरेट मीटिंग में भी ऐसा पा स आप किसी फ्लाइट में भी ऐसा पा सकते हैं आप मूवी थिएटर में ऐसा पा सकते हैं किसी भी सार्वजनिक जगह पर यह सब पा सकते हैं और यह काम वही व्यक्ति कर रहा होता है जिसको बड़ी हसरत होती है कि दूसरे उसकी ओर बस देख दे एक बार कितने बड़े भिखारी हो दूसरों की एक नजर के लिए तरसे जा रहे हो और बहुत खेद की बात है कि यह काम महिलाएं ज्यादा करती है
20:27 थोड़ा इतना सारा इत्र अपने पर उड़ेल लिया है यह क्या कर रहे हो तुम निकल गए हो उसके 5 मिनट बाद भी वहां पर वह उसकी खुशबू है तुम तुमको भली भाति पता है तुम यह क्यों कर रहे हो या तो यह बोल दो कि इतना बुरा गंते हो कि तुम्हें यह नहा के आना पड़ रहा है केमिकल में और अगर वैसी बात नहीं है तो यह सब तुम सिर्फ इसलिए कर रहे हो कि दूसरा किसी तरह तुम्हारी हस्ती का अनुमोदन कर दे बस कि यह है गहनों की खनखन इत्र तीखे तेवर तीखे रंग ऊंची आवाज चेहरे को
21:16 रंगना भड़कीले कपड़े मैं किसी नैतिकता के नाते इन सब पर आपत्ति नहीं कर रहा मैं एक चिकित्सक के नाते बोल रहा हूं कि यह सब आंतरिक बीमारी के लक्षण है भाई दूसरे की जितनी इंद्रियां होती हैं सब पर आघात कर दो उसकी नाक में घुस जाओ खुशबू बनके उसके कान में घुस जाओ खनखन खन खन खन बनके उसकी आंख में घुस जाओ भड़कीले कपड़े और जिस्म बनके यह क्या कर रहे हो पुरुष भी करते हैं तुम क्यों खुश हो रहे हो हम काहे को पीछे रहे बराबरी का जमाना
22:07 है सोचो एक्नॉलेजमेंट चाहिए वोह भी अजनबियों से यह कितनी कितनी दरिद्रता की बात है जिनको तुम जानते भी नहीं अगर वह भी बस एक बार बोल दे एक नजर से बोल दे क्या तुम हो तो थोड़ी भीतर ठंडक आ जाती है यह आदमी अपने एकांत में कितना तड़पता होगा यह अपने एकांत में कितना तड़पता होगा जिसको समाज में आकर के दूसरों के मध्य आकर के ऐसे भीख का कटोरा फैलाना पड़ता है अजनबियों के भी सामने आत्म विश्वासी उसको
22:55 मानना जो एक एक महफिल में चुपचाप एक कोने में बैठ कर के भी पूरी तरह संतुष्ट मुस्कुरा सके जिसको कोई चाहत ना हो कि किसी ने मुझे देखा किसी ने मुझे जाना किसी ने मुझे पहचाना किसी ने मेरी तारीफ करी अरे तारीफ नहीं तो कोई निंदा ही कर दो वो निंदा भी नहीं मांग रहा उसे कुछ नहीं चाहिए वो कह रहा है मैं तो अदृश्य हूं कोई मुझे ना देखे कोई मुझे ना जाने तो भी मुझे समझ फर्क नहीं पड़ता हां लेकिन अगर कुरुक्षेत्र की मांग यह होगी कि आ जाओ मध्य में और करो युद्ध तो उससे हमें इंकार नहीं है पर स्थितियों की मांग होगी तो बीच में आएंगे नहीं तो हमारे लिए कोना पर्याप्त है वो कोना ढूंढेगा अपने लिए मुझे कोना चाहिए मैं तुम्हारी मैं तुम्हारा ध्यान चाहता ही नहीं मुझे मेरा कोना दे दो मैं खुश हूं
23:40 वहां पर समझ में आ रही है बात य अभी भगत सिंह पर बात चली थी पिछले दिन उनके चेहरे पर आक्रामकता किसने देखी है बताना बल्कि कोमल है चेहरा नहीं है कोमल लड़कपन है चेहरे पर कहीं से भी यह नहीं लगता कि सक्ति है वहां सक्ति है क्या यह होता है आत्मविश्वास आंखों में उग्रता है हिंसा है जला दूंगा अंग्रेजों नहीं आंखों में मृदु होता है
24:31 थोड़ा निकट से देखो तो लगता है जैसे जैसे नम है आंखें आर्द्रता है आंखों में यह होता है आत्मविश्वास चुप मौन कोमल लेकिन जो करना है वह कर जाएगा जहां बम बजाना है बजा जाएगा वहां नहीं पीछे हटेगा और जो झूठा आत्मविश्वास होता है यह कैसा होता है जहां जरूरत नहीं वहा गधे की तरह ढेंचु ढेंचु छाए हुए छोड़ वास्ते और जब मौका आया तो गधे की तरह नदारद भी हो गए कोई अपने से कमजोर मिल गया उसको सता दिया उसका मजाक उड़ा दिया लेकिन जहां पर टक्कर लेनी चाहिए वहां
25:18 बिल्कुल दिखाई नहीं देते मैं लखनऊ से इधर आया था दिल्ली तरफ मुझे यहां का कल्चर ही समझ में ना आए क्योंकि 90 के दशक के आरंभिक वर्षों के लखनऊ की बात कर रहा हूं वहां पर एक तहजीब तब तक बची हुई थी और यहां जो जो जो कल्चर था तो इसको लोग बोलते थे लेली कल्चर लेली लेली का क्या मतलब मैं गाजियाबाद आया था लेली माने हर आदमी का काम है दूसरे की
26:06 ले लेना हां नीचा दिखाना दूसरे की ले लो और ताली बजाओ तो बोलते थे लेली संस्कृति तो यह देखता रहा देखता रहा ठीक है एक बार मैंने पूछा मैंने कहा यहां दुनिया में इतना कुछ है जो गलत हो रहा है एक से एक यहां पर एक्सप्लोइटर्स है एग्रेसर्स हैं हम चलकर उनकी क्यों नहीं लेते यह जो तुम लेली लेली करते रहते हो 11वी वाले हैं नवी वालों की ले रहे हैं इंटरवल पकड़ पकड़ के और बहुत खुश हो रहे हा हा हा फलाने की लेली या कि कोई नया टीचर आ गया क्लास में
26:54 तो तीन चार मिलकर के उससे उल्टे पल्टे सवाल कर रहे हैं कुछ कर रहे हैं वो कुछ पूछ रहा है तो उसके उल्टे जवाब दे रहे हैं और फिर बहुत खुश हो रहे हैं कि इसकी तो ले ली मैंने कहा अच्छी बात है ले ली तो तो चलो ना मिलकर के और भी यहां बड़े-बड़े लुटेरे हैं उनकी लेते हैं ना तो चुप चुप फिर थोड़ा और आगे बढ़े तो आज से 10 साल पहले करीब भारत में चीज आई बाहर पहले भी चलती थी रोस्टिंग तो वहां हुआ कि यह रोस्ट कर रहे वो रोस्ट कर रहे बहुत अच्छी बात है रोस्ट कर रहे हो
27:40 इसको कर रहे हो उसको कर रहे हो हिम्मत है तो उनकी रोस्टिंग करके दिखाओ ना जो सचमुच आज के समय के सबसे बड़े अपराधी है वहां तो तुम्हारी जान सूख जाएगी तुम्हारे मुंह से आवाज नहीं निकलेगी हिम्मत है तो उनको रोस्ट करके दिखाओ रोस्टिंग बहुत अच्छी बात है तुम्हारा यह सारा लेली और रोस्टिंग सिर्फ कमजोर लोगों पर चलता है यही झूठे आत्मविश्वास की निशानी यह सब बहुत आत्मविश्वास से भरे हुए होते हैं ना दूसरों पर हंस रहे हैं उनकी ले ली कुछ खास तौर पर इनको कोई गरीब मिल जाए या कमजोर मिल जाए कोई बिहारी मिल गया तो उसको बोल र बिहारी चोर और उसकी ले ली और अगर कोई ऐसा है जो इनकी संस्कृति का
28:28 नहीं है कमजोर भी है गरीब भी है तब तो उसकी लेना तो पक्का ही है गुड़गांव में जाओ तो वहां पर घूम रहे होते हैं वह बड़े बापों की औलाद बहुत सारी उनके पास अब गाड़ियां है बड़ी वह जाकर के वोह जाएंगे कोई चाय वाला होगा उसके खोखे में गाड़ी मार दी उ खोखा गिर गया सब हस रहे हैं हा हा हा रात में गए कोई रिक्शा वाला अपने रिक्शे पर सो रहा उसको बोला इधर आना भाई जरा गाड़ी में बैठ उसको गाड़ी में बैठाया गाड़ी में उसको लेकर चल दिया दो किलोमीटर किलोमीटर बाद उसको नीचे उतार दिया और खूब हसे कि यहां से पैदल जाएगा वापस हा हा हा हा हा ले ली यह सब झूठा आत्मविश्वास
29:15 है चूंकि यह खुद डरा हुआ होता है खुद कमजोर होता है इसीलिए किसी कमजोर को पकड़कर उसको डराता है झूठा आत्मविश्वास खुद डरा होता है खुद कमजोर होता है इसीलिए यह कमजोर का शिकार करने की फिराक में रहता है वास्तविक आत्मविश्वास ना डरता है ना डराता है वह रक्षा करता है उसको अगर कभी आप पाओगे भी संघर्ष करता हुआ तो वह अपने से ज्यादा किसी मजबूत से संघर्ष में होगा वो धर्म युद्ध होता है उसके लिए वह कमजोर पर नहीं चढ़ बैठता अगर उसको
30:03 संघर्ष करना ही है तो कमजोर की रक्षा के लिए करता है यह वास्तविक आत्मविश्वास है यह जो पूरा कार्यक्रम चलता है मैंने जब देखता था सबसे पहले व एक आया था ए आईबी मैंने कहाय सब ठीक है बहुत बढ़िया है और जिस तरह की यह बातें कर रहे थे वो सब हम कैंपस में बहुत देख चुके थे बल्कि बच्चों वाली बातें इनको गाली गलौज भी इससे कई गुना ऊंचे लेवल की कैंपस में चलती थी तो वह सब उसमें कुछ खास नहीं है मैंने कहा यह सब तो ठीक है कभी किसी ताकतवर शख्सियत की भी तो रोस्टिंग करके दिखाओ ना वहां तो जेल में डाल द जाओगे तुरंत हिम्मत नहीं है वहां पर कुछ मुंह
30:50 खोलने की यही जो गुड़गांव वाले हैं अमीर जादे इनसे मैं कहता था मैं कहता था बहुत बढ़िया बात है तुम जाकर अपनी गाड़ी घुसे देते हो उसके पान के खोखे में और तुम्हें बहुत मजा आता है कि उसकी सब लकड़ी का था माल टूट के गिर गया और हाहा करके हंसते हो ले ली ले ली हिम्मत है तो जाओ किसी शॉपिंग मॉल में गाड़ी घड़ के दिखा दो वहां तो तुम भी अंदर तुम्हारी गाड़ी भी अंदर और तुम्हारा बाप भी अंदर गाड़ी का मालिक
31:38 समझ में आ रही है बात कुछ चाहे बोस का चेहरा हो चाहे टैगोर का चेहरा हो चाहे गांधी का चेहरा हो चाहे नेहरू का चेहरा हो चाहे तिलक का चेहरा हो इन चेहरों पर आपको आक्रामकता और उग्रता नहीं दिखाई देगा दिखते हैं ये
32:26 बस चंद शेखर आजाद हैं उनके कई बार चित्र बनाए जाते हैं कि जब वो बंदूक लेकर के बैठे हुए हैं और आखिरी उनके क्षण है उन क्षणों में भी उनके चेहरे पर आपको तनाव या उग्रता दिखाई देते हैं यह वास्तविक आत्मविश्वास होता है उन्हें कोई जरूरत नहीं है आप क्या कल्पना भी कर सकते हो कि भगत सिंह सुखदेव राजगुरु मिलकर किसी की खिल्ली उड़ा रहे हैं ले रहे हैं किसी की कल्पना भी कर सकते हो क्या पर गुड़गांव के छोरे करते हैं यह हरकत यह तीन चार मिल
33:12 जाएंगे किसी की लेना शुरू कर देंगे और यह मुझे आज से 20 साल पहले से समझ में नहीं आ 30 साल 30 साल से मैं दिल्ली में हूं मुझे 30 साल से समझ में नहीं आया यह लेना क्या होता है ले ली यह तीन खड़े हुए हैं भगत सिंह खड़े सुखदेव खड़े राजगुरु खड़े इनके चेहरों पर यह भाव है क्या कि लेली वगैरा हंस रहे हैं शांत सौम्य गंभीर मृदुल आत्मा का तेज चेहरे पर बिल्कुल स्निता के साथ मौजूद है
33:58 ना हंस रहे हैं ना रो रहे हैं आपको क्या लगता है इन परे मुकदमा चलता था यह अदालत में चिल्लाने लग जाते थे ना यह आत्मविश्वास होता है तुम जब मुझ पर एक फालतू का मुकदमा चला रहे हो जिसमें अन्याय ही अन्याय निहित है और जहां तुम अब मेरी जान ले लेने वाले हो मैं वहां पर भी अपनी आवाज उठाने की जरूरत नहीं समझता मुझे जहां बम फोड़ना था मैं फोड़ आया वह आवाज काफी थी ना उन्होंने कहा था बहरों को सुनाने के लिए यह आवाज ऊंची करनी पड़े मैं अपनी आवाज क्यों ऊंची करूं जहां आवाज ऊंची
34:44 करनी थी कर दी बाकी हम जगह-जगह चिल्लाते नहीं फिरते [संगीत] हम [संगीत]