Atomic Actions By Michael T. Pedersen | Book Summary in Hindi | Book Insider | Hindi Book Summary

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संक्षिप्त सारांश

यह सारांश "एटॉमिक हैबिट्स" नामक पुस्तक पर आधारित है, जो छोटे-छोटे बदलावों के माध्यम से बड़ी सफलता प्राप्त करने के महत्व पर प्रकाश डालती है। कहानी शिवा नामक एक किसान के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो छोटे-छोटे कदमों से अपनी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाता है।

  • छोटे-छोटे कदमों से शुरुआत करें।
  • निरंतरता सफलता की कुंजी है।
  • अपनी पहचान को बदलें।
  • सिस्टम बनाएं और उन पर टिके रहें।
  • स्पष्टता जटिलता से बेहतर है।

शिवा का संघर्ष और विक्रम सर का मार्गदर्शन

शिवा, चंद्रपुर नामक एक छोटे से गाँव का एक किसान है, जो अपनी आर्थिक और शारीरिक समस्याओं से जूझ रहा है। वह हर साल बदलाव लाने का संकल्प लेता है, लेकिन असफल रहता है। गाँव में विक्रम सर नामक एक नए शिक्षक आते हैं, जो शिवा को "एटॉमिक एक्शंस" की अवधारणा से परिचित कराते हैं - छोटे, दोहराए जाने वाले कदम जो समय के साथ बड़े बदलाव ला सकते हैं।

एटॉमिक एक्शंस की शक्ति

विक्रम सर बताते हैं कि कैसे छोटे-छोटे कार्य, जैसे रोज सुबह 5 मिनट टहलना, धीरे-धीरे स्टैमिना बढ़ा सकते हैं। शिवा को यह बात समझ में आती है कि बड़े बदलावों की कोशिश करने के बजाय, छोटे, निरंतर कदमों पर ध्यान केंद्रित करना अधिक प्रभावी है। वह हर दिन 5 मिनट टहलने का फैसला करता है और धीरे-धीरे इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर लेता है।

आदतों का निर्माण और निरंतरता का महत्व

शिवा धीरे-धीरे अपनी दिनचर्या में और सुधार लाता है, जैसे कि टहलने के बाद आसन करना और अपने खर्चों का हिसाब रखना। विक्रम सर बताते हैं कि एटॉमिक एक्शंस इसलिए काम करते हैं क्योंकि वे दिमाग पर दबाव नहीं डालते हैं, जिससे निरंतरता बनाए रखना आसान हो जाता है। शिवा हर काम में यही दर्शन अपनाता है और छोटे-छोटे बदलावों से अपने जीवन में सुधार लाता है।

गाँव में बदलाव की लहर

शिवा के बदलाव को देखकर गाँव के अन्य लोग भी प्रेरित होते हैं। वह लोगों को बताता है कि बदलाव छोटे-छोटे कार्यों से आता है, जैसे रोज 5 मिनट ध्यान करना या हर हफ्ते एक नई चीज सीखना। लोग छोटे-छोटे बदलावों को अपनाते हैं और पूरे गाँव में सकारात्मक बदलाव दिखने लगते हैं। विक्रम सर बताते हैं कि निरंतरता तीव्रता से अधिक शक्तिशाली होती है।

पहचान का बदलाव

शिवा की पत्नी मीरा उससे पूछती है कि क्या वह सच में बदल गया है या सिर्फ दिखावा कर रहा है। शिवा को लगता है कि मीरा सही कह रही है और वह अपनी पहचान बदलने पर ध्यान केंद्रित करता है। विक्रम सर बताते हैं कि आदतों को बदलने के साथ-साथ अपनी पहचान को बदलना भी जरूरी है। शिवा हर सुबह खुद से एक सकारात्मक वाक्य बोलता है और धीरे-धीरे उसकी सोच बदलने लगती है।

पहचान-आधारित कार्य

विक्रम सर बताते हैं कि पहचान में बदलाव सबूतों से शुरू होता है। शिवा अपनी नई पहचान के लिए छोटे-छोटे सबूत देता है, जैसे समय पर पहुंचना और सीखने से नहीं डरना। वह अपनी नई पहचान को अपने सभी कार्यों में लागू करता है और धीरे-धीरे उसकी सोच और आत्मविश्वास बदल जाता है। गाँव के अन्य लोग भी अपनी पहचान में बदलाव के साथ सकारात्मक बदलाव लाते हैं।

सिस्टम का महत्व

शिवा महसूस करता है कि कुछ दिनों में उसकी निरंतरता फिर से डगमगाने लगती है। वह विक्रम सर से सलाह लेता है, जो बताते हैं कि पहचान में बदलाव तो नींव है, लेकिन इमारत खड़ी करने के लिए सिस्टम की जरूरत होती है। शिवा अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक सिस्टम बनाता है और उसे ट्रैक करना शुरू कर देता है।

सिस्टम ट्रैकर और भावनात्मक ऊर्जा

शिवा गाँव वालों को भी अपने लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सिस्टम बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। वह एक सिस्टम ट्रैकर बनाता है, जहाँ लोग अपने लक्ष्य और कदम लिखते हैं और उन्हें पूरा करने पर टिक लगाते हैं। विक्रम सर बताते हैं कि सिस्टम भावनात्मक ऊर्जा बचाता है क्योंकि हर दिन निर्णय नहीं लेना पड़ता, बस फॉलो करना होता है।

सरलता और निरंतरता

विक्रम सर शिवा से पूछते हैं कि अब क्या लग रहा है? शिवा बताता है कि अब वह सिस्टम फॉलो करता है और सफलता खुद ब खुद चलकर आती है। वह हर हफ्ते अपने सिस्टम की समीक्षा करता है और सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है। मीरा भी अपने किचन में एक चेक लिस्ट टांग देती है और कहती है कि सिस्टम होने से काम कम लगता है और शांति ज्यादा मिलती है।

पहला ब्रेकथ्रू और मोमेंटम

शिवा को पहली बार अपने सिस्टम के वास्तविक परिणाम दिखने लगते हैं। उसे याद आता है कि पिछली बार की तरह अब उसकी कमर में वैसा दर्द नहीं हो रहा। वह समझ जाता है कि उसकी सुबह की वॉक और हल्का एक्सरसाइज ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। पिडरसन इसे मोमेंटम कहते हैं - जब पहली जीत मिलती है, तो वह हमारे अंदर कुछ खोल देती है और हमें आगे बढ़ने की हिम्मत देती है।

सामाजिक मान्यता और मोमेंटम लॉग

शिवा को एक और सफलता मिलती है जब उसके खेत की मिट्टी ज्यादा उपजाऊ लगने लगती है और उसे दूसरे किसानों से पहले सब्जियों की पहली फसल मिल जाती है। गाँव वाले उसके सिस्टम्स और आदतों को नोटिस करने लगते हैं। शिवा एक मोमेंटम लॉग बनाता है, जिसमें वह हर ऐसी छोटी या बड़ी जीत लिखता है जिससे उसे लगता है कि वह आगे बढ़ रहा है।

जीत का जश्न और सामुदायिक समर्थन

गाँव का रमेश, जो पहले शराब पीता था, शिवा से प्रेरित होकर शराब से दूरी बनाता है। शिवा उसे भी एक मोमेंटम लॉग बनाने को कहता है। गाँव की औरतें भी अपने घरों में सिस्टम बना रही हैं और एक दूसरे को सपोर्ट कर रही हैं। पेडरसन बताते हैं कि मोमेंटम सिर्फ मोटिवेशन से नहीं आता, बल्कि बार-बार जीतने से आता है।

सफलता की कहानी और अंतिम सीख

शिवा को ब्लॉक लेवल फार्मिंग वर्कशॉप में भेजने का इनवाइट मिलता है, जहाँ वह अपने सिस्टम से फार्मिंग में सुधार करने के बारे में प्रेजेंटेशन देता है। गाँव में हर हफ्ते ब्रेक थ्रू सर्कल नाम का एक कार्यक्रम होता है, जहाँ हर कोई अपने हफ्ते की एक छोटी जीत शेयर करता है। शिवा का मंत्र है - हर दिन एक छोटी जीत की तलाश करो।

सरलता की शक्ति

शिवा महसूस करता है कि वह बहुत कुछ एक साथ मैनेज करने की कोशिश कर रहा है और अब थोड़ा बोझ लगने लगा है। वह अपनी लाइफ को फिर से सिंपलीफाई करने का फैसला लेता है और सारे कॉम्प्लिकेटेड सिस्टम्स को हटा देता है। अब वह सिर्फ तीन कोर एरियाज - हेल्थ, लर्निंग और सर्विस पर फोकस करता है।

स्पष्टता और निरंतरता

शिवा एक्शन ट्रिगर्स को भी सिंपलीफाई करता है और अब उसे हर दिन सोचने की जरूरत नहीं पड़ती कि उसे क्या करना है। रमेश भी अपनी आदतों को सिंपल करने की ठानता है। पेडरसन बताते हैं कि चेंज इंटेंसिटी से नहीं, बल्कि क्लेरिटी और कंसिस्टेंसी से आता है। शिवा अब सबको बताता है कि हर दिन सोचो मत, बस वो करो जो तुम्हें खुद से मिलवाता है।

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Transcript

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0:00 हेलो फ्रेंड्स बुक इंसाइडर पर आप सभी का स्वागत है आज हम बात करने वाले हैं एटॉमिक एक्शंस बाय माइकल टी पेडरसन बुक के बारे में छोटा सा गांव था चंद्रपुर मिट्टी की खुशबू कच्चे रास्ते और सुबह की ठंडी हवा में बैलों की घंटियों की आवाज सब कुछ जैसे समय को थामे हुए था इसी गांव में रहता था शिवा एक सीधा साधा किसान शिवा की उम्र होगी कोई 30-32 साल लेकिन चेहरे पर थकान और आंखों में चिंता हमेशा रहती थी खेत की हालत ठीक नहीं थी घर के खर्च बढ़ते जा रहे थे और ऊपर से सेहत भी जवाब दे रही थी शिवा हर साल खुद से वादा करता इस साल सब कुछ बदल दूंगा खेत को मॉडर्न तरीके से चलाऊंगा

0:46 सेविंग्स भी शुरू करूंगा और रोज सुबह उठकर योगा भी करूंगा लेकिन कुछ ही दिनों में सब वादे धुएं की तरह उड़ जाते कभी थकान का बहाना कभी वक्त नहीं मिला तो कभी मन ही नहीं किया साल दर साल यही सिलसिला चलता रहा एक दिन गांव में नया मास्टर आया नाम था विक्रम सर शहर में पढ़े थे लेकिन गांव के लोगों से ऐसे घुलमिल गए जैसे यहीं के हो वो बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ बड़ों को भी लाइफ स्किल्स सिखाते थे एक शाम गांव के चौपाल में उन्होंने एक बात कही जिसने शिवा को सोचने पर मजबूर कर दिया बदलाव एक दिन में नहीं आता विक्रम सर बोले और ना ही बड़े बदलाव ही जरूरी हैं असली जादू छिपा होता है छोटे-छोटे कदमों में जिन्हें हम रोज दोहराते हैं इसे ही कहते हैं एटॉमिक

1:35 एकशंस शिवा ने पहली बार यह टर्म सुनी थी एटॉमिक यानी बहुत छोटा और एक्शन मतलब कोई काम लेकिन यह छोटे काम कैसे बदल सकते हैं पूरी जिंदगी सर ने समझाया मान लो अगर रोज सुबह उठकर सिर्फ 5 मिनट टहलना शुरू कर दो तो एक महीने में तुम्हारा स्टैमिना खुद ब खुद बढ़ जाएगा फिर वो 5 मिनट 10 हो जाएंगे और धीरे-धीरे तुम एक घंटा भी चला पाओगे यही होता है एटॉमिक एक्शन छोटे आसान रिपीटेबल स्टेप्स जो टाइम के साथ मिलकर बड़ा बदलाव लाते हैं शिवा को बात जम गई उसे याद आया कैसे वह एक बार एकदम जोश में आकर सुबह 5:00 बजे उठकर पूरे 1 घंटे योगा करने लगा था लेकिन दूसरे ही दिन उसके पूरे शरीर में दर्द हो गया और तीसरे दिन वह उठ ही नहीं पाया और वही मोटिवेशन दोबारा कभी

2:25 नहीं आया विक्रम सर ने कहा बड़ा एक्शन लेना टेंपटिंग होता है लेकिन वह टिकता नहीं जो टिकता है वह होता है छोटा कंसिस्टेंट स्टेप उस रात शिवा देर तक जागा रहा उसने तय किया कि इस बार कुछ बड़ा नहीं करेगा सिर्फ एक छोटा सा काम रोज दोहराएगा उसने अगली सुबह अलार्म 6:00 बजे का लगाया और खुद से एक वादा किया सिर्फ 5 मिनट खेत के बाहर टहलूंगा बस और ऐसा ही किया पहले दिन सिर्फ 5 मिनट चला ना कोई प्रेशर ना कोई गिल्ट फिर दूसरे दिन भी वही किया तीसरे दिन थोड़ा और चला धीरे-धीरे उसका कॉन्फिडेंस बिल्ड होने लगा अब शरीर थोड़ा हल्का लगने लगा था एक हफ्ते बाद उसने सोचा कि अब चलने के बाद दो आसन भी कर लूं और फिर यह रूटीन बनता चला गया किसी दिन अगर

3:13 थोड़ा समय कम होता तो वह कम टाइम चलता लेकिन टहलना छोड़ा नहीं विक्रम सर ने एक बार फिर बताया एटॉमिक एक्शंस इसलिए काम करते हैं क्योंकि यह हमारे ब्रेन को ट्रिक नहीं करते बल्कि उसे कंफर्ट जोन से धीरे-धीरे बाहर निकालते हैं और जब दिमाग पर प्रेशर नहीं होता तब वह कंसिस्टेंसी बनाए रखता है शिवा अब हर काम में यही फिलॉसफी अप्लाई करने लगा पैसे बचाने के लिए उसने कोई बड़ी स्कीम नहीं चलाई बस हर दिन के खर्चे का छोटा सा हिसाब लिखना शुरू किया एक छोटा सा रजिस्टर रखा और दिन खत्म होते ही 2 मिनट में लिख लेता था कि कितना खर्चा हुआ महीने भर में उसे खुद दिखने लगा कि कहां एक्स्ट्रा खर्च हो रहा है धीरे-धीरे वह अननेसेसरी चीजें खरीदना कम करने लगा फसल की बात आई तो उसने कोई बड़ा इन्वेस्टमेंट नहीं किया बस एक छोटे कोने

4:03 में ऑर्गेनिक खाद डालकर उगाना शुरू किया शुरू में नतीजे मामूली थे लेकिन धीरे-धीरे उसकी मिट्टी की क्वालिटी सुधरने लगी गांव के बाकी लोग हैरान थे कि शिवा में ऐसा क्या बदलाव आ गया पहले जो हमेशा थका थका रहता था अब उसकी चाल में आत्मविश्वास था चेहरे पर हल्की सी मुस्कान और आंखों में चमक लोगों ने पूछा शिवा भाई कोई नई दवा ली है क्या शिवा हंसता और कहता ना दवा ली है ना जादू टोना किया है बस रोज थोड़ा-थोड़ा सही करने लगा हूं एक बार फिर चौपाल में सब इकट्ठा हुए और इस बार शिवा ने सबको अपनी बात बताई उसने कहा हम सोचते हैं कि बदलाव मतलब सब कुछ एकदम बदल देना लेकिन असल में वह छोटे-छोटे कामों से आता है जैसे रोज 5 मिनट ध्यान हर हफ्ते एक नई चीज सीखना हर

4:55 दिन एक अच्छा काम करना यह छोटे एटॉमिक एकशंस धीरे-धीरे हमारे सोचने का तरीका बदल देते हैं तभी रामू काका बोले लेकिन बेटा इतने छोटे काम से क्या होगा बड़ा काम नहीं करोगे तो जिंदगी कैसे बदलेगी शिवा मुस्कुराया और बोला काका आपने देखा है ना दिया कैसे जलता है एक छोटी सी बाती थोड़ा सा तेल और एक छोटा सा फ्लेम लेकिन वही अंधेरे को दूर करता है बड़ा उजाला कभी भी एकदम से नहीं आता वो छोटे-छोटे एफर्ट्स से बनता है लोगों के चेहरों पर सोच की रेखाएं थी कुछ ने उसी दिन से छोटा-छोटा चेंज शुरू किया कोई सुबह 5 मिनट साफ सफाई करने लगा तो कोई हर दिन एक मोटिवेशनल कोट पढ़ने लगा बच्चों ने हर दिन एक नया वर्ड इंग्लिश का सीखने की आदत डाल ली एटॉमिक एक्शंस का असर

5:45 अब पूरे गांव में दिखने लगा था धीरे-धीरे वहां का माहौल बदल रहा था कोई काम अब भारी नहीं लगता था क्योंकि सब जानते थे कि उन्हें बस छोटा सा स्टेप उठाना है बाकी चेंज अपने आप आता जाएगा विक्रम सर ने एक दिन कहा कंसिस्टेंसी इज मोर पावरफुल देन इंटेंसिटी और शिवा को अब यह बात पूरी तरह समझ आ गई थी वह जान गया था कि असली ताकत हर दिन उठाए गए छोटे-छोटे कदमों में होती है अगर आपको हमारी फ्री समरी अच्छी लगती है तो आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं हमारी मेंबरशिप खरीद सकते हैं या हमें यूपीआई के थ्रू सपोर्ट कर सकते हैं अब समरी पर वापस चलते हैं अब उसका कॉन्फिडेंस और विल पावर पहले से कहीं ज्यादा स्ट्रांग हो चुकी थी जिंदगी अब भी

6:30 वैसी ही थी उतार-चढ़ाव वाले दिन कभी बारिश ज्यादा तो कभी फसल में कीड़े लग जाना लेकिन अब शिवा हार नहीं मानता वह जानता था कि बड़ा सॉल्यूशन एक दिन में नहीं मिलेगा लेकिन अगर वह हर दिन एक छोटा स्टेप उठाता रहेगा तो एक दिन उसकी मेहनत रंग जरूर लाएगी यही है एटॉमिक एकशंस का जादू छोटे आसान रोज दोहराए जाने वाले काम जो अंदर से इंसान को मजबूत बनाते हैं जो हमें सिखाते हैं कि कंसिस्टेंसी इज द रियल हीरो नॉट मोटिवेशन और यह मैसेज अब चंद्रपुर के हर घर हर दिल में बस चुका था शिवा अब सिर्फ खुद नहीं बदला था वो एक एग्जांपल बन गया था कि कैसे छोटे कदम भी एक लंबा रास्ता तय

7:15 कर सकते हैं और इसी जर्नी में उसने सीखा कि असली बदलाव बाहर नहीं अंदर से शुरू होता है बस एक छोटा स्टेप लो आज अभी अगर शिवा जैसे एक आम गांव के किसान ने अपनी जिंदगी बदल ली तो सोचो हम सब अगर अपनी-अपनी जिंदगी में छोटे-छोटे एटॉमिक एक्शंस अपनाएं तो क्या कुछ नहीं बदल सकता शायद यही पिडरसन का असली मैसेज है ग्रेटनेस किसी एक बड़े कदम में नहीं रोज उठाए गए छोटे और सच्चे कदमों में छिपी होती है चंद्रपुर गांव में जब से एटॉमिक एकशंस की हवा चली थी लोगों के अंदर एक नई उमंग आ गई थी पहले जो बदलाव एक बोझ लगता था अब वही रोज की आदत बन चुका था लेकिन असली कहानी तो अब शुरू हुई थी क्योंकि बदलाव तब तक अधूरा होता है जब तक वह हमारी

8:04 सोच हमारी पहचान का हिस्सा ना बन जाए शिवा अब पहले से ज्यादा एक्टिव हो गया था सुबह उठकर टहलना खेत के लिए नई तकनीक सीखना और बच्चों को अपने अनुभव सुनाना यह सब उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था लेकिन एक दिन उसकी पत्नी मीरा ने एक सवाल पूछ लिया जिसने शिवा को फिर सोच में डाल दिया तुम इतना सब करते हो लेकिन अंदर से तुम्हें क्या लगता है क्या तुम सच में बदल गए हो या बस कर रहे हो ताकि कुछ बदले शिवा को लगा कि मीरा ठीक कह रही है वो काम तो कर रहा है लेकिन क्या अब वह खुद को वैसा ही इंसान मानता है जैसा वह बनना चाहता है क्या उसने अपनी आइडेंटिटी बदल ली है अगले दिन चौपाल में जब विक्रम सर आए तो शिवा ने यह सवाल उनके सामने रखा सर मुस्कुराए और

8:50 बोले बिल्कुल सही समय पर तुमने यह सवाल उठाया है देखो हैबिट्स बदलना जरूरी है लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है अपनी आइडेंटिटी बदलना जब तक हम खुद को पुरानी सोच से जोड़कर रखते हैं तब तक नया बदलाव अंदर तक नहीं पहुंच पाता शिवा कुछ समझा नहीं तब सर ने समझाया मान लो तुम रोज दौड़ते हो लेकिन अंदर ही अंदर सोचते हो कि मैं तो हमेशा लेजी ही था तो क्या होगा तुम कभी भी खुद को रनर की तरह फील नहीं कर पाओगे लेकिन अगर तुम खुद से कहो मैं वह प्रकार का व्यक्ति हूं जो स्वास्थ्य का मूल्यांकन करता हूं तो तुम्हारा हर एक्शन उसी आइडेंटिटी को प्रूफ करने लगेगा शिवा के दिमाग में बिजली सी कौद गई यानी सिर्फ काम करना काफी नहीं खुद को उस काम के लायक

9:36 समझना भी जरूरी है वह अब समझ गया था कि जब तक उसकी खुद की नजरों में उसकी इमेज नहीं बदलेगी तब तक बाहर का बदलाव अधूरा रहेगा उसी दिन से शिवा ने एक छोटा सा काम शुरू किया हर सुबह खुद से एक वाक्य बोलता मैं एक डिसिप्लिंड इंसान हूं जो अपनी सेहत और मेहनत कोेंस देता है पहले यह थोड़ा अजीब लगता था लेकिन धीरे-धीरे यह वाक्य उसके अंदर उतरने लगा अब जब भी कोई मुश्किल आती जैसे बारिश में खेत जाना या थकावट के बावजूद सुबह उठना तो वह खुद से यही कहता मैं वह इंसान हूं जो मेहनत से पीछे नहीं हटता और सच में वह मेहनत से पीछे नहीं हटता विक्रम सर ने एक और बात कही थी जो शिवा को खूब समझ में आई आइडेंटिटी शिफ्ट बिगिंस विद एविडेंस यानी जब तुम खुद के

10:26 बारे में कोई नई सोच अडॉप्ट करते हो तो तुम्हें उसके लिए छोटे-छोटे प्रूफ्स देने पड़ते हैं जैसे अगर तुम मानते हो कि तुम एक पंक्चुअल इंसान हो तो तुम्हें बार-बार समय पर पहुंचकर खुद को यह साबित करना होगा शिवा ने अब आइडेंटिटी बेस्ड एकशंस को अपने सारे कामों में अप्लाई करना शुरू कर दिया जब वह खेत में कुछ नया ट्राई करता तो खुद से कहता मैं वो किसान हूं जो सीखने से नहीं डरता जब वह अपने बेटे को पढ़ाता तो कहता मैं वह पिता हूं जो अपने बच्चों को आगे बढ़ते देखना चाहता है यह बातें सुनने में छोटी लगती थी लेकिन उनके असर बड़े थे अब जब भी कोई पुराना डर या डाउट शिवा के मन में आता तो वह अपनी नई आइडेंटिटी की तरफ मुड़ जाता जैसे एक टाइम था जब वह पैसों की बात आते ही नर्वस हो जाता था लेकिन अब वह खुद से कहता आई एम द टाइप ऑफ

11:15 पर्सन हु मैनेजेस मनी वाइसली और फिर वो छोटी-छोटी बचत और स्पेंडिंग पर ध्यान देना शुरू करता धीरे-धीरे यह सोच शिवा की आदत बन गई और यह सिर्फ उसके लिए नहीं उसके गांव के लोगों के लिए भी इंस्पिरेशन बन गई हर कोई अपनेप बदलाव के साथ एक आइडेंटिटी जोड़ने लगा रामू काका जो पहले हर काम में डर जाते थे अब खुद को कहते मैं वो इंसान हूं जो सीखने की उम्र नहीं देखता फिर चाहे मोबाइल यूज़ करना हो या बैंक में जाना वह सब सीखने लगे बिया जो गांव की औरतों को पढ़ाना चाहती थी पहले खुद को बस एक घरेलू औरत मानती थी लेकिन अब वह खुद से कहती मैं वह महिला हूं जो नॉलेज शेयर करती है और उसने बच्चों को पढ़ाने की छोटी क्लास शुरू कर दी शिवा ने महसूस किया कि जब कोई खुद

12:05 को बदलता है तो सिर्फ उसके एक्शंस नहीं उसकी एनर्जी उसकी प्रेजेंस उसकी पूरी लाइफ बदल जाती है पहले जो लोग मैं तो ऐसा ही हूं कहकर टाल देते थे अब वह कहते थे मैं ऐसा बनना चाहता हूं एक बार विक्रम सर ने एक एनालॉजी दी जो सबको बहुत समझ आई उन्होंने कहा अगर तुम ट्रेन हो और तुम्हारा डेस्टिनेशन दिल्ली है लेकिन तुम बार-बार अनाउंसमेंट्स में बोलते रहो कि यह ट्रेन पटना जा रही है तो चाहे तुम दिल्ली की तरफ चल भी दो लोगों को कंफ्यूजन होगा वैसे ही अगर तुम बाहर से चेंज कर लो लेकिन अंदर से खुद को पुराने लेबल्स से जोड़कर रखो तो ट्रांसफॉर्मेशन अधूरा रह जाएगा यह बात शिवा को बहुत गहराई से छू गई उसने अब अपने नोटबुक में दैनिक पहचान वाक्य लिखना

12:51 शुरू किया हर दिन एक नया वाक्य जैसे मैं वह प्रकार का व्यक्ति हूं जो जो वह शुरू करता हूं उसे पूरा करता हूं आई एम द टाइप ऑफ पर्सन हु एड्स वैल्यू टू अदर्स मैं वह इंसान हूं जो मुश्किलों में भी धैर्य नहीं खोता इन लाइंस ने धीरे-धीरे शिवा की सोच को भीतर तक बदल दिया अब उसके कामों में बस बदलाव नहीं था बल्कि उसका तरीका उसकी नजर और उसका आत्मसम्मान भी बदल चुका था मीरा अब रोज शाम को जब चाय के साथ बैठती तो शिवा की आंखों में एक नई चमक देखती वो बोली अब तुम पहले जैसे नहीं रहे तुम्हारा कॉन्फिडेंस तुम्हारा बोलने का अंदाज सब अलग है शिवा हंसा और बोला अब मैं वो इंसान हूं जो खुद पर भरोसा करता है अब शिवा बदलाव का सिंबल बन गया था स्कूल में

13:41 पंचायत में यहां तक कि बाहर के गांवों से भी लोग उससे मिलने आते थे और हर किसी से वह एक ही बात कहता अगर सच में कुछ बदलना है तो सबसे पहले खुद को बदलो अपनी सोच अपनी आइडेंटिटी मान लो कि तुम वह इंसान हो जो बदलाव कर सकता है फिर बाकी सब अपने आप बदल जाएगा शिवा की कहानी अब सिर्फ एक इंसान की नहीं रही वह एक आंदोलन बन चुकी थी एक गांव में उठी लहर जो हर दिल को कहती थी तुम बदल सकते हो अगर तुम खुद को वैसा मानो पेडरसन की बात चंद्रपुर के एक-एक इंसान ने जी कर देख ली थी डोंट फोकस ऑन चेंजिंग एकशंस फोकस ऑन चेंजिंग आइडेंटिटी एकशंस विल फॉलो और शायद यही असली सच्चाई है किसी भी ट्रांसफॉर्मेशन की अब शिवा का फेवरेट सेंटेंस बन गया था जो वह हर दिन

14:31 खुद से कहता और दूसरों को भी सिखाता मैं वह इंसान हूं जो अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने की कैपेसिटी रखता है और हर दिन उस दिशा में एक छोटा कदम बढ़ा रहा है और उस दिन से चंद्रपुर में हर बदलाव की शुरुआत सिर्फ एक थॉट से होती थी मैं वो इंसान हूं जो शिवा की जिंदगी में अब बहुत कुछ बदल चुका था उसके भीतर एक नई सोच पैदा हो गई थी और वह अब खुद को एक मेहनती डिसिप्लिंड और मोटिवेटेड इंसान मानने लगा था लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया उसने महसूस किया कि कुछ दिनों में उसकी कंसिस्टेंसी फिर से डगमगाने लगी थी कभी सुबह वॉक मिस हो जाती कभी खेत में एक्सपेरिमेंट्स छूट जाते और कभी-कभी बच्चों को पढ़ाने का टाइम नहीं निकलता उसने सोचा कि ऐसा क्यों हो रहा है

15:19 जब मैं खुद को सही आइडेंटिटी से जोड़ चुका हूं एक दिन वो फिर से विक्रम सर के पास पहुंचा उसने अपने दिल की बात कही सर मैं सच में बदलना चाहता हूं और मुझे लगता है कि मैं बदल भी चुका हूं लेकिन अब फिर से कुछ चीजें पीछे छूटने लगी हैं क्या आइडेंटिटी बदलना ही काफी है विक्रम सर मुस्कुराए और बोले शिवा आइडेंटिटी शिफ्ट तो फाउंडेशन है लेकिन बिल्डिंग खड़ी करनी है तो उसके लिए सिस्टम चाहिए शिवा थोड़ा चौंका सिस्टम मतलब जैसे सरकार वाला सिस्टम सर हंसे और बोले नहीं रे मैं उस सिस्टम की बात नहीं कर रहा यहां सिस्टम मतलब तुम्हारी डेली रूटीन तुम्हारे चेक लिस्ट्स तुम्हारे छोटे-छोटे टूल्स जो तुम्हारे गोल्स को रीचेबल बना दें पिडरसन कहता है

16:06 गोल्स स्टैटिक होते हैं लेकिन सिस्टम्स डायनेमिक होते हैं और सक्सेस वही पाता है जो सिस्टम्स बनाता है शिवा को बात समझ में आई उसे याद आया कि उसका गोल था फिट बनना पैसों को समझदारी से यूज करना गांव के बच्चों को सिखाना लेकिन वह सिर्फ गोल बनाके बैठ गया था और जैसे ही थोड़ा डिस्ट्रैक्शन आया सब डगमगाने लगा उसने उसी वक्त एक छोटा सा नोटबुक निकाला और लिखा गोल फिट रहना और उसके नीचे सिस्टम लिखा रोज सुबह 6:00 बजे वॉक हफ्ते में 3 दिन हल्का व्यायाम रात 9:00 बजे सोना अब उसने सिर्फ सोचना बंद कर दिया था उसने ट्रैक करना शुरू कर दिया अगले दिन से वह सुबह उठकर अपनी वॉक करने गया और वापस आकर कैलेंडर पर टिक लगाया हफ्ते के तीसरे दिन

16:57 उसने देखा कि तीन टिक्स लग चुके हैं तो उसके अंदर एक सेटिस्फेक्शन आई मैं अपने सिस्टम पर चल रहा हूं यह टिक मार्क अब उसकी मोटिवेशन बन गई कुछ दिन बाद मीरा ने भी कहा अब तुम्हारी आदतें ऑटोमेट जैसी हो गई हैं तुम बिना याद दिलाए खुद चल देते हो शिवा मुस्कुराया क्योंकि अब मैं गोल नहीं चस कर रहा सिस्टम बिल्ड कर रहा हूं फिर उसने दूसरा गोल उठाया पैसे बचाना उसने एक कागज पर लिखा सिस्टम हर हफ्ते ₹200 बचाना हर खर्च का रिकॉर्ड बनाना अननेसेसरी चीजें ना खरीदना अब वह रोज अपने खर्च लिखता और हफ्ते में एक बार अपनी बचत का टोटल चेक करता उसने फोन में एक छोटा सा एक्सेल टाइप ऐप डाल लिया जिसमें वह डेली एक्सपेंसेस भरने लगा यह काम पहले बोरिंग लगता था

17:44 लेकिन कुछ दिन में उसे इसका मजा आने लगा क्योंकि अब उसे दिखने लगा था कि सिस्टम काम कर रहा है हर हफ्ते जब वह देखता कि उसने ₹200 से ज्यादा बचा लिया है तो उसकी आंखों में चमक आ जाती शिवा को अब सिस्टम्स की ताकत समझ आने लगी थी उसने बच्चों को पढ़ाने के लिए भी एक टाइम टेबल बना लिया शाम के 5:00 बजे से 6:00 बजे तक क्लासेस और हर रविवार को क्विज डे बच्चों को भी मजा आने लगा और मीरा को भी खुशी हुई कि उसका पति अब विलेज के बच्चों का हीरो बन रहा है फिर गांव के कुछ और लोग उसके पास आए और बोले शिवा हमें भी अपने गोल्स अचीव करने हैं लेकिन हमें भी पता नहीं चलता कि कंसिस्टेंसी क्यों टूटती है शिवा ने कहा क्योंकि तुम गोल्स पर ज्यादा ध्यान दे रहे हो सिस्टम्स पर नहीं अगर तुम्हारा सिस्टम स्ट्रांग है तो तुम बिना मोटिवेशन के भी

18:34 आगे बढ़ते रहोगे उसने एक चौक बोर्ड मंगवाया और घर के बाहर लटका दिया उस पर लिखा सिस्टम ट्रैकर अब जो भी गांव वाला कुछ अच्छा करना चाहता वो वहां अपना गोल और उसके स्टेप्स लिखता हर दिन जब वो स्टेप पूरा करता तो वह टिक लगाता यह बोर्ड अब इंस्पिरेशन बन गया था रमेश जो रोज शराब पीता था उसने अपना गोल लिखा एक हफ्ते शराब नहीं और सिस्टम लिखा शाम को मंदिर जाना और हर दिन डायरी में लिखना कि कैसा महसूस किया पहले रमेश को यकीन नहीं था कि वह कर पाएगा लेकिन जब उसने तीसरे दिन टिक लगाया तो बाकी लोगों ने तालियां बजाई उस सपोर्ट से उसका सिस्टम और मजबूत हो गया शिवा ने समझ लिया था कि सिस्टम का एक और फायदा होता है वह इमोशनल एनर्जी बचाता है जब

19:22 तुम्हारे पास सिस्टम होता है तो तुम्हें हर दिन डिसीजन नहीं लेना पड़ता बस फॉलो करना होता है और यही बात पेडरसन भी कहता है वेल डिज़ सिस्टम्स रिड्यूस फ्रिक्शन एंड डिसीजन फटीग धीरे-धीरे विलेज में सिस्टम्स की हवा चल पड़ी थी कोई पढ़ाई का सिस्टम बना रहा था कोई फिटनेस का कोई पैसे का और सबका एक मांट्रा बन गया था डोंट अबसेस ओवर गोल्स फॉल इन लव वि द सिस्टम एक दिन विक्रम सर ने चाय पीते हुए शिवा से पूछा "अब क्या लग रहा है?" शिवा बोला पहले मैं सोचता था कि मुझे सक्सेसफुल बनना है अब मैं सिस्टम फॉलो करता हूं और सक्सेस खुद ब खुद चलकर आती है सर बोले बहुत बढ़िया अब तुम समझ गए हो कि सफलता एक मंजिल नहीं एक तरीका है जीने का और वो तरीका है राइट

20:11 सिस्टम्स कंसिस्टेंट एक्शंस और सही आइडेंटिटी अब शिवा हर हफ्ते अपने सिस्टम की रिवु करता वो देखता कि कौन सा रूटीन अच्छे से चल रहा है और कहां इंप्रूवमेंट की जरूरत है कभी-कभी वह बोल्ड भी हो जाता था लेकिन फिर खुद को याद दिलाता कंसिस्टेंसी बोर्डम के साथ डील करना भी सिखाती है मीरा ने अब अपने किचन में एक चेक लिस्ट टांग दी थी ग्रोसरी लिस्ट मंथली सेविंग किड्स के लिए मील प्लान और वह भी अब कहती थी सिस्टम होने से काम कम लगता है और पीस ज्यादा मिलती है शिवा के बेटे ने भी अपने पढ़ाई के लिए एक वीकली ट्रैकर बनाया मंडे को मैथ ट्यूसडे को साइंस वेडनेसडे को हिंदी अब जब भी एग्जाम आता तो उसे पैनिक नहीं होता क्योंकि सिस्टम उसे

20:58 हर दिन थोड़ा-थोड़ा तैयार करता शिवा ने एक नई बात सीखी थी सिस्टम्स सिर्फ काम पूरे करने के लिए नहीं होते वह माइंडसेट भी बदलते हैं जब हम डेली रूटीन में डिसिप्लिंड होते हैं तो धीरे-धीरे वह डिसिप्लिन हमारी लाइफ के बाकी हिस्सों में भी घुस जाता है अब जब भी कोई गांव में कहता मुझे अपना गोल अचीव करना है तो शिवा सिर्फ एक सवाल करता उसके लिए तुम्हारा सिस्टम क्या है शिवा ने अपनी जिंदगी के तीन मेन पिलर्स बना लिए थे पहला आइडेंटिटी को बदलना दूसरा छोटे और रिपीटेबल एटॉमिक एकशंस अपनाना और तीसरा सस्टेनेबल और डायनेमिक सिस्टम्स बनाना अब चंद्रपुर गांव सिर्फ एक गांव नहीं था वो एक मूवमेंट बन गया था जहां लोग गोल्स नहीं सिस्टम्स

21:45 बनाते थे और सिस्टम्स उन्हें धीरे-धीरे उस आइडेंटिटी तक ले जाते थे जो वह हमेशा से पाना चाहते थे पेडरसन की किताब अब गांव की चौपाल में भी घूम रही थी और सबसे पसंदीदा लाइन बन गई थी सक्सेस इज नॉट अ गोल यू अचीव इट्स अ सिस्टम यू रन शिवा अब बस यही कहता था बड़ा बदलाव एक झटके में नहीं आता वो रोज के छोटे सिस्टम से बनता है और जब सिस्टम मजबूत होता है तो सक्सेस तो मजबूरी बन जाती है सर्दियों की शुरुआत हो चुकी थी चंद्रपुर गांव में सुबह की धुंध और चूल्हे की गर्माहट का संगम कुछ अलग ही एहसास दे रहा था शिवा अब अपने नए सिस्टम्स को पूरी तरह अपनाकर एक अलग ही फ्लो में जी रहा था उसकी दिनचर्या अब एक अच्छी आदत में बदल चुकी थी लेकिन जो असली बदलाव आया वो तब

22:34 शुरू हुआ जब उसे पहली बार अपने सिस्टम के रियल रिजल्ट्स दिखने लगे उस दिन वह खेत में हल चला रहा था और अचानक उसे याद आया कि पिछली बार की तरह अब उसकी कमर में वैसा दर्द नहीं हो रहा वो समझ गया कि उसकी सुबह की वॉक और हल्का एक्सरसाइज ने असर दिखाना शुरू कर दिया है उसने हल चलाते हुए मुस्कुरा कर कहा शायद यह मेरी पहली जीत है उसी शाम उसने अपने ट्रैकर पर एक बड़ा सा सर्कल खींचा और लिखा फर्स्ट सक्सेस मीरा ने पूछा इतना खुश क्यों लग रहे हो शिवा ने कहा "मुझे आज खुद पर प्राउड फील हो रहा है यह शायद पहली बार है जब मैंने कोई हैबिट बिना बीच में छोड़े पूरी की है मीरा ने उसकी आंखों में वह चमक देखी जो पहले कभी नहीं देखी थी यही वह मोमेंट था जिसे

23:22 पिडरसन मोमेंटम कहता है जब पहली जीत मिलती है चाहे वह कितनी ही छोटी क्यों ना हो वह हमारे अंदर कुछ खोल देती है वह हमें सिर्फ खुश नहीं करती वह हमें आगे बढ़ने की हिम्मत भी देती है अगले दिन से शिवा का एंथूजियाज्म और बढ़ गया अब वह वॉक करते समय जॉगिंग भी करने लगा बच्चों को पढ़ाने में गेम्स ऐड करने लगा पैसे बचाने के लिए घर में एक छोटी सी गुल्लक भी रख दी और गांव के बच्चों को भी सेविंग सिखाने लगा उसकी छोटी-छोटी जीतें अब एक लॉन्ग विनिंग स्ट्रीक बन रही थी जैसे डोमिनोज की पहली गोटी गिरती है और बाकियों को भी साथ ले आती है वैसे ही शिवा की फर्स्ट विक्ट्री ने बाकी हैबिट्स को भी पुश देना शुरू कर दिया था उसका माइंडसेट बदल रहा था अब वह

24:08 सोचता था अगर मैं यह कर सकता हूं तो वह भी कर सकता हूं पेडरसन की बात बिल्कुल सही थी मोमेंटम खुद को रीइंफोर्स करता है और आइडेंटिटी जो पहले सिर्फ वर्ड्स में थी अब एक्शन में बदलने लगी थी कुछ ही हफ्तों में शिवा को एक और ब्रेक थ्रू मिला खेत में उसने ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर यूज करना शुरू किया था शुरुआत में लोग हंसते थे लेकिन अब उसके खेत की मिट्टी ज्यादा उपजाऊ लगने लगी थी और सबसे बड़ी बात उसे दूसरे किसानों से पहले सब्जियों की पहली फसल मिल गई गांव के चौपाल में सब बातें कर रहे थे कि शिवा का तरीका कुछ नया है यह उसकी दूसरी जीत थी सोशल रिकॉग्निशन अब सिर्फ वह नहीं गांव वाले भी उसके सिस्टम्स और हैबिट्स को नोटिस करने लगे थे यही सोशल वैलिडेशन

24:56 मोमेंटम को और फ्यूल देती है जब आप खुद को अच्छा फील करते हो और फिर दूसरे भी आपको नोटिस करते हैं तो आपकी मोटिवेशन तीन गुना हो जाती है शिवा अब अकेला नहीं था वो एक एग्जांपल बन चुका था रोज शाम को वह अपने नोटबुक में सिर्फ प्रोग्रेस नहीं लिखता था वह अब ब्रेक थ्रूस भी रिकॉर्ड करता था उसने एक नया पेज बनाया मोमेंटम लॉग उसमें वह हर ऐसी छोटी या बड़ी जीत लिखता जिससे उसे लगता कि वह आगे बढ़ रहा है उस लॉग में लिखा था दिन 14वें दिन पहली बार बिना रुके जॉगिंग की दिन 22वें दिन बच्चों ने स्पेलिंग टेस्ट में सुधार दिखाया दिन 35वें दिन ₹800 बचाए पिछले महीने डे 48 खेत में फसल सबसे पहले आई उस लॉक को पढ़कर ही उसे अगले दिन के लिए इंस्पिरेशन मिलती

25:46 थी अब उसे मोटिवेशन बाहर से नहीं खुद से मिलती थी एक शाम गांव का रमेश जो पहले शराब पीता था वह शिवा के पास आया और बोला भाई तेरी बातों ने मुझे भी बदल दिया अब मुझे भी लगता है कि अगर तू कर सकता है तो मैं क्यों नहीं शिवा ने मुस्कुराते हुए कहा शुरुआत सिर्फ एक जीत से कर बाकी सब खुद होता जाएगा शिवा ने रमेश को भी एक मोमेंटम लॉक बनाने को कहा रमेश ने पहले तो हंस के टाल दिया लेकिन फिर जब उसने पहली बार पूरे हफ्ते शराब से दूरी बनाई तो उसे समझ आया कि यह लॉग्स काम करते हैं उसने लिखा दिन साथ पहली बार एक हफ्ता क्लीन रहा उस एक लाइन ने उसके अगले हफ्ते की ताकत बना दी मोमेंटम का असर अब पूरे गांव में दिखने लगा था गांव की औरतें भी अपने घरों

26:34 में सिस्टम बना रही थी मीरा ने भी एक ग्रुप बनाया स्वच्छता सिस्टर्स हर महिला एक छोटे गोल पर काम कर रही थी कोई रसोई साफ रखती कोई बच्चों का होमवर्क टाइम फिक्स करती कोई सेविंग्स पर ध्यान देती हर बार जब कोई महिला अपनी छोटी जीत शेयर करती बाकी सब ताली बजाकर उसकी तारीफ करती यह ग्रुप अब एक मोमेंटम मशीन बन चुका था पेडरसन की एक और बात अब शिवा को समझ आने लगी थी मोमेंटम सिर्फ मोटिवेशन से नहीं आता वो रिपीटेड स्मॉल विन से आता है जब हम बार-बार जीतते हैं भले ही वह जीत छोटी हो वह एक अंदरूनी इंजन तैयार करती है जो हमें आगे धकेलती रहती है एक ब्रेक थ्रू के बाद दूसरा ब्रेक थ्रू आता है शिवा के लिए अगला ब्रेक थ्रू तब आया जब गांव के सरपंच ने

27:21 उसे ब्लॉक लेवल फार्मिंग वर्कशॉप में भेजने का इनवाइट दिया वो पहली बार गांव से बाहर ट्रेन में बैठा और पहली बार प्रेजेंटेशन दी कि कैसे उसने सिस्टम से अपनी फार्मिंग इंप्रूव की लोग दंग रह गए कि एक आम किसान इतनी क्लेरिटी से हैबिट्स और रिजल्ट्स को कैसे जोड़ पाया वापस लौटते वक्त उसकी आंखें भर आई थी वो जानता था कि इस जर्नी की शुरुआत एक स्मॉल हैबिट से हुई थी लेकिन वह छोटी सी जीत कमर में दर्द ना होना ने एक लहर शुरू की जो अब एक पूरी कहानी बन चुकी थी अब शिवा का मांट्रा था हर दिन एक छोटी जीत की तलाश करो वो गोल्ड ड्रिवन नहीं विन ड्रिवन हो गया था और हर विन मोमेंटम को और मजबूत बना रही थी गांव में अब हर हफ्ते ब्रेक थ्रू सर्कल नाम का

28:10 एक कार्यक्रम होता था हर कोई अपने हफ्ते की एक छोटी जीत शेयर करता और बताता कि उस जीत ने उसे कैसे बदला कोई कहता मैंने पहली बार रोज समय पर खाना खाया कोई कहता मैंने आज तक की सबसे साफ रसोई रखी और कोई छोटा बच्चा कहता मैंने आज पहली बार गलती के बाद रोया नहीं शिवा अब सबका गाइड बन चुका था लेकिन उसका फेवरेट काम वहीं था दूसरों की पहली जीत सेलिब्रेट करना कहानी अब वहां पहुंच चुकी थी जहां एक गांव धीरे-धीरे अपनी आदतों के जरिए खुद को बदल रहा था और यह बदलाव किसी बड़ी योजना से नहीं सिर्फ छोटी विक्ट्रीज से आया था पेडरसन बिल्कुल सही कहता है मोमेंटम इज द फ्यूल ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन जब एक छोटी जीत होती है तो वह अगली जीत का दरवाजा खोलती है शिवा अब

28:58 खुद से एक वादा करता है हर दिन एक छोटा कदम एक छोटी जीत और एक नया ब्रेक थ्रू और वह जानता है यही एटॉमिक हैबिट्स की असली ताकत है क्योंकि बदलाव कोई एक पल का काम नहीं होता वह हर रोज हर छोटे स्टेप में छुपा होता है और जब वह स्टेप्स जुड़ते हैं तो मोमेंटम क्रिएट होता है और वही मोमेंटम आपको एक ऐसी जगह ले जाता है जहां आप कभी सोच भी नहीं सकते थे गांव में अब गर्मी अपने पूरे जोर पर थी गेहूं की कटाई हो चुकी थी और खेतों में अब थोड़ी राहत का मौसम था ऐसे ही एक दोपहर जब धूप ज्यादा तेज थी शिवा अपने घर की छांव में बैठा हुआ अपने डायरी के पन्ने पलट रहा था उसके हाथों में अब उसकी पुरानी लिखी हुई आदतों की लिस्ट थी मोमेंटम लॉक था और कुछ नए

29:47 विचार पर आज कुछ अजीब था वो थोड़ा परेशान लग रहा था मीरा ने आकर पूछा "क्या हुआ आज बड़ा सोच में लग रहे हो शिवा ने धीरे से कहा मीरा आदतें बन तो गई हैं पर अब लगने लगा है कि मैं बहुत कुछ एक साथ मैनेज करने की कोशिश कर रहा हूं रोज ट्रैकर भरना हर काम का चेक लिस्ट बनाना हर बात को रूटीन में बांधना अब थोड़ा बोझ लगने लगा है मीरा ने उसकी बात सुनी और मुस्कुरा कर बोली शिवा तू तो खुद कहता था कि सिंपलीसिटी सबसे बड़ी ताकत होती है कहीं तू खुद ही कॉम्प्लेक्सिटी में उलझ तो नहीं गया शिवा कुछ देर चुप रहा फिर एक लंबी सांस लेकर बोला शायद तू सही कह रही है मैंने इतने सारे टूल्स बना लिए कि अब खुद उनमें उलझने लगा हूं उसी शाम को उसने अपनी पूरी डायरी

30:35 एक बार फिर पढ़ी पेडरसन की एक लाइन उस दिन उसे बहुत जोर से समझ आई क्लेरिटी बीट्स कॉम्प्लेक्सिटी उसने सोचा कि उसे अब अपनी लाइफ को फिर से सिंपलीफाई करना पड़ेगा अगली सुबह उसने सारे कॉम्प्लिकेटेड सिस्टम्स को देखने का फैसला लिया उसने अपनी हैबिट्स की लिस्ट उठाई और देखा कि बहुत सारी चीजें वो बस इसीलिए कर रहा था क्योंकि वह कभी शुरू की थी लेकिन अब शायद जरूरत नहीं थी उसने खुद से एक सवाल पूछा क्या यह हैबिट मेरी कोर आइडेंटिटी को सपोर्ट करती है अगर जवाब हां था तो वह हैबिट रखी गई अगर नहीं तो उसे रिमूव कर दिया गया अब उसने सिर्फ तीन कोर एरियाज चुने हेल्थ लर्निंग और सर्विस हर दिन बस इन्हीं तीन चीजों पर फोकस करना था बाकी सब

31:24 क्लटर को उसने हटा दिया शिवा ने अपने सारे हैबिट ट्रैकर्स को एक छोटे से कैलेंडर में बदल दिया जिसमें सिर्फ एक छोटा सा चेक बॉक्स होता क्या मैंने आज अपनी हेल्थ पर 10 मिनट दिए क्या मैंने आज कुछ नया सीखा और क्या मैंने किसी की मदद की बस इतना ही यह क्लेरिटी उसकी लाइफ में एक नया ईज लेकर आई अब उसे हर दिन सोचने की जरूरत नहीं पड़ती थी कि उसे क्या करना है वो सुबह उठते ही अपने प्रीडफाइंड छोटे स्टेप्स फॉलो करता पानी पीना हल्का स्ट्रेचिंग करना एक छोटा आर्टिकल पढ़ना या पडकास्ट सुनना और किसी ना किसी की मदद करना चाहे घर के कामों में हाथ बटाना हो या बच्चों के सवालों के जवाब देना अब उसने एक्शन ट्रिगर्स को भी सिंपलीफाई किया जैसे अगर

32:16 मैं सुबह उठता हूं तो सबसे पहले पानी पियूंगा अगर मैं दोपहर को आराम करता हूं तो एक शॉर्ट पॉडकास्ट सुनूंगा अगर कोई मुझसे मदद मांगे तो टालूंगा नहीं यह छोटे ट्रिगर्स अब उसे डिसीजन लेने में टाइम वेस्ट नहीं करने दे रहे थे एक दिन रमेश उसके पास आया और बोला शिवा अब तो तू पहले से ज्यादा रिलैक्स्ड और फोकस्ड दिख रहा है पहले तू हर बात पर नोट बनाता था अब बस मुस्कुराता है और काम करता है शिवा ने कहा भाई पहले मैं समझता था कि ज्यादा टूल्स का मतलब ज्यादा इंप्रूवमेंट लेकिन अब समझ आया कि जो सिंपल है वही सस्टेनेबल है रमेश ने भी फिर से अपनी आदतों को सिंपल करने की ठानी उसने अपनी सुबह की रूटीन में सिर्फ दो काम रखे नहाना और एक मोटिवेशनल ऑडियो

33:06 सुनना और यही दो काम उसे पूरे दिन की एनर्जी देने लगे अब गांव में शिवा के ब्रेक थ्रू सर्कल में भी बदलाव आया पहले हर कोई अपने कॉम्प्लेक्स रूटीन और हैबिट चेन शेयर करता था अब वह बस एक सवाल पूछते आज सबसे क्लियर मोमेंट क्या रहा लोग सिंपल विंस बताने लगे आज पहली बार फोन उठाने से पहले खुद से पूछा क्या यह जरूरी है या आज बेमतलब की बातचीत से बचा सिंपलीसिटी अब विलेज की नई लाइफस्ट बन गई थी मीरा ने भी अपने ग्रुप स्वच्छता सिस्टर्स को सिंपलीफाई कर दिया अब हर महिला बस एक काम फोकस करती चाहे वह बच्चों को दिन में एक बार हाथ धोने की आदत डालना हो या रोज घर के बाहर का एक कोना साफ करना और इस क्लेरिटी ने हर किसी को कम स्ट्रेस और

33:55 ज्यादा कंसिस्टेंसी दी शिवा को अब अपने आप पर भरोसा हो चला था अब उसे लगता था कि क्लेरिटी से भरे छोटे स्टेप्स ज्यादा पावरफुल होते हैं बनिस्बत किसी बड़ी ओवरप्लंड स्ट्रेटजी के वह समझ गया था कि जब हम हर दिन छोटे और क्लियर एकशंस लेते हैं तो हमारी आइडेंटिटी खुद ब खुद मजबूत होती जाती है और यही उस किताब की असली बात थी कि ट्रांसफॉर्मेशन कोई कॉम्प्लिकेटेड चीज नहीं है बल्कि एक सीधी और सरल प्रैक्टिस है जिसे हर कोई अपनाकर अपने जीवन को बदल सकता है एक दिन जब गांव के स्कूल में बच्चों को शिवरात्रि पर एक निबंध लिखने को कहा गया तो एक बच्चे ने लिखा "मेरे गांव का सुपर हीरो शिवा भैया " उन्होंने हमें सिखाया कि बड़ी बातें करने

34:41 से नहीं छोटे-छोटे अच्छे काम करने से बदलाव आता है शिवा ने वह निबंध पढ़ा और उसकी आंखों में नमी आ गई शायद यही उसकी अल्टीमेट ब्रेक थ्रू थी अब बदलाव उसके अंदर नहीं उसके आसपास भी दिखने लगा था कहानी अब पूरी हो चुकी थी पर बदलाव की प्रक्रिया अभी चल रही थी क्योंकि जैसा पिडरसन ने कहा था चेंज डजंट कम फ्रॉम इंटेंसिटी इट कम्स फ्रॉम क्लेरिटी एंड कंसिस्टेंसी शिवा अब एक सिंपल सी बात सबको बताता हर दिन सोचो मत बस वो करो जो तुम्हें खुद से मिलवाता है जितना साफ देखोगे उतना गहराई से बदलोगे और इस तरह क्लेरिटी ने कॉम्प्लेक्सिटी को हराया और गांव ने एक नई सिंपलीसिटी की दुनिया में कदम रखा जहां छोटे काम बड़े बदलाव लाते थे

35:32 तो फ्रेंड्स यह थी हमारी आज की बुक समरी आपको कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताएं और धन्यवाद आपका समरी एंड तक सुनने के

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