0:00 जानने वालों ने कई बार बोला है सनातन धर्म समझना है तो बहुत दूर मत जाओ बस ओम समझ लो ओम में समूचा सनातन समाया हुआ है ओम की विशिष्टता क्या विशिष्ट इसलिए है ओम क्योंकि ओम माने सारे ही विशिष्ट प्रहमांड किस में आ गया और मा में और उसक It's
0:46 done. نہیں ہے بیارتھ نہیں رکھتا اوم اوم کوئی دھونی بھی نہیں ہے اسی وشیش طرح کے کمپن کا نام نہیں ہے اوم
1:35 نہیں اوم किसी कर्म कांड का कोई साधन है ओम संकेत है कमाम उपनिशद हैं जो ओम की बात करते हैं सबसे विस्तार से तो मांडू के उपनिशद मांडू के उपनिशद तो समर्पित ही है ओम को
2:26 अन्यूपनिशदों में भी ओम के विशे में विस्तार से कहा गया है अभी प्रणव अभी उद्गीत پٹ اپنشد آپ کے سامنے نہیں ہے اس کے علاوہ رشن اپنشد چھاندوں کے اپنشد رہتری اپنشد یہ بھی اوم کی بات کرتے ہیں اور سب سے صاف سب سے سپشٹ بات جو ہے وہ مانڈوک کے اپنشد میں آتی ہے क्या है उम, क्या है उसकी विशिष्टता।
3:20 उम विवहारिक तल का पूरा नक्षा खीच देता है हमारे सामने। मार्थिक तल मौन से इंगित करता है और व्यवार और परमार्थ को एक में गूत कर दोनों के मध्य की सीड़ी से तो बन जाता है
4:13 दोनों में भेद नहीं रखने देता अ, उ और मा तीन धनिया ये तीनों व्यवहारिक तल शेतना की तीन स्थितियां हैं जागरत स्वपन और सुशुप्ते
5:01 ठीक है तो जब आप अ, उ और म कहते हो तो आप याद करते हो कि आप खड़े कहां पर हुए हो आपका दिन प्रतिदिन का व्योहारिक अनुभव क्या है? आपका जितना भी अनुभव है, वो सब इन्हीं तीन इस्थितियों के भीतर सिमट कर आ जाता है. और अनुभवों की ही सतत्ष्रंखला को जीवन कहते हैं? व्यक्ति यदि जीवित है, تو وہ کچھ نہ کچھ انبھاو کر رہا ہے ٹھیک؟ بیکت
5:51 جیوت ہے اسی لئے وہ دکھ بھی انبھاو کر رہا ہے اور دکھ سے بیچینی سے ہی اس جگیاسہ کی شروعات ہوتی ہے جس کی پرنیتی اپنشدوں کے روپ میں ہوتی ہے ٹھیک؟ شروعات جیون سے کری جا رہی ہے क्योंकि जीवन ना हो, जीवन में व्याकुलता ना हो, तो किसी तरह की खोज करने की कोई जरूरत भी नहीं रहेगी। जीवन मुक्त हो, आनन्दित हो, तो क्यों कोई शिश्य किसी से प्रश्ण पूछे, क्यों कोई नचिकेता यम
6:37 तक की आत्रा करे। तो शुरुवात हो रही ह वो ही नहीं सकता कि आप जीवित हैं और आपको अनुभव नहीं हो रहे हैं। जीवित होना मने अनुभव लेना। सारे अनुभव चेतना की इनहीं तीन अवस्थाओं से होते हैं। अब अनुभवों में आपको एक जबरदस्त विविधता दिख सकती है। आप कह सकते हो यह � کالے کا ہوا، نیلے کا ہوا، شہر کا ہوا، گاؤں کا ہوا، سڑک کا ہوا،
7:22 کھیت کا ہوا آپ کیا سکتے ہو؟ ٹھیک ہے نا؟ کچھ سنا، کچھ دیکھا، کہیں گئے، کچھ کھایا سار طرح کی انوبہ ہو سکتے ہیں تو ان سب انوبہوں کو ورگی کرت کر دیا گیا ہے تاکہ گنتی آسان ہو جائے ताकि सब विविध अनुभवों में जो एकत तो है वो सामने आ जाए तो एक वर्ग हो गया उन सब अनुभवों का जो चेतना की जागरत इस्थिति में होते हैं तो उनको इंगित किया जा रहा है अ से किसे अ से तो अ सूचक है
8:13 चेतना की जाग्रत अवस्था का चेतना की जाग्रत अवस्था मने आपके जीवन के वो सारे अनुभव जो आपने आँख खोल कर लिये वो जिन्दगी का जो भी वो हिस्सा था जो आपने आँख खोल कर बिताया उसको सिमेट कर रख दिया गया है किसमे अ में ठीक है और हम तो एक तेहाई जीवन तो सोते हुए ही जाता है और सोते हुए भी खूब अनुभव होते रहते हैं सोते हुए लोग सोचते भी रहते हैं और सपने तो हैं ही है ना सोकर उठते हो
8:59 कई बार तो उदास होते हो सोकर उठते हो तो कई बार पता ही नहीं होता क्यों प्रफुलित हो नी� तो जिन्दगी के वो सारे अनुभव जो सोते हुए हुए उसके लिए है उसके लिए है उँ उँ कोई ध्वनी नहीं है उँ आपकी जिन्दगी के समझ लीजिए लगभग 20-25 सालों की बात है क्योंकि इतने ही सोते हैं हम तो अगर आप 80 साल जीने वाले हैं
9:46 وصی میں سے پچاس سال تو آگئے جاگرت میں پچیس سال آگئے سپنا وستہ میں جس میں کہ آپ لیٹے ہوئے ہو لیکن بشہ گھوم رہے ہیں کسی نہ کسی طریقے سے اور بہ مشکل چار پانچ سال آگئے گہری نیند میں گہری نیند جس میں سنسار کے سب وشے دوب جاتے ہیں ایک بے ہوش کالیمہ میں جیسے رات کا سمدر دیکھا ہے کبھی تٹ پر کھڑے ہو کر کے کبھی ہوا ہے کہیں
10:33 بیچ پر آپ کھڑے ہوئے ہوں اور کوئی روشنی نہ ہو اور سامنے سمدر کو دیکھیں اور اوپر چاند بھی نہ ہو تو کیسا دکھائی دیتا ہے ایک اننت کالیمہ جس میں جو بھی ڈالوگے وہ بس ڈوب جائے گا وہ سوشپتی ہے وہ سوشپتی ہے اس میں کوئی وشے نہیں بچتا اندھکار کی اترکت کوئی وشے نہیں ہے اور چونکہ اس میں سب وشےوں سے تھوڑی دیر کے لیے رہائی مل جاتی ہے اسی لیے جب اتنی گہری نیند آتی ہے تو آپ تھوڑا ترو تازہ ہو کر اٹھتے ہو آپ کہتے ہو نا نیند آج اچھی آئی نیند آج اچھی آئی آج تازہ لگ رہا ہے پریش لگ رہا
11:18 ہے وہ اسی لئے لگتا ہے کیونکہ جو وشہ چین سے سونے نہیں دیتے تھے وہ ایک کالے سمدر میں ڈوب گئے تو آپ چین سے سو پائے آپ چین سے سو پائے لیکن کیا سچ مچ سب وشہ ڈوب گئے विशे है कि नहीं कैसे पता चले विधी ये है कि विशे और विशेता हमेशा साथ साथ चलते हैं इनका द्वैतात्मक साथ होता है विशे तो दिख नहीं रहा बस अंधकार दिख रहा है तो ऐसा लगने लगता है जैसे विशे है नहीं क्योंकि दिख तो रहा नहीं कोई विशे
12:09 विशेता है तो नहीं दिख रहा है पर किसी चीज का ना दिखना उसके ना होने को निश्चित नहीं बना देता तो दूसरी तरफ से जहां चलेते हैं विशेता है क्या तो कोई बहुत गहरी नीन में सो रहा हो नाम हो उसका राजू सुशुप्ति में है और नाम है उसका राज� आप उसका नाम मत लीजिए आप उसके शरीर को जंजोड दीजिए वो फिर से जग जाएगा इससे क्या पता चल रहा है कि विशेयता भी था और एक विशे भी है कम से कम एक विशे तो है कौन सा शरीर नहीं तो शरीर को जंजोडने पर जग क्यों जाता तो जो आपके जीवन क
13:06 सुशुप्ति में माने किस धोनी से सूचित है मा से मा से तो ये जो पूरा हमारा व्यवहारिक जीवन है वो अ उ और मा में आ गया ये हमारी पूरी जिंदगी है अब वैसे आपसे कहा जाए कि अपनी पूरी जिंदगी सुनाओ तो आधा एक घंटा ले लोगे या काओगे फु आपकी सुविधा है तू प्रणव का विश्कार हुआ है ये सब न बोलना पड़े कि मेरे साथ ऐसा हुआ फिर वैसा हुआ फिर ये हुआ फिर मैं बच्ची थी फिर मैं बड़ी हो गई फिर नौकरी लगी
13:52 फिर नौकरी छूटी फिर दिल तूटा फिर ये हुआ फिर वो हुआ کہانی ہے تو کٹ ا لانگ سٹوری شارٹ کیا بول دیا اس کو اوم وہ آپ کی پوری زندگی کی کہانی ہے اوم سب کچھ اسی میں سما گیا چیتنا کے تین تلوں کی بات نہیں ہو رہی چیتنا کے جو تین تل ہیں انہی کے تو سارے وشعوں کو آپ اپنا جیون بولتے ہو نا اور چیتنا کے تین تلوں میں اہنکار کی جو تین استحتیاں ہوتی ہیں اسی کو تو آپ میں بولتے ہو نا او اور امہ مل کر
14:39 کے ہو گئے آپ کی پوری زندگی لو یاد کر لو اور اس کے بعد آتا ہے مون چپ ہو جاتے ہیں چپ ہو جاتے ہیں اوم بینا اس مون کے ادھورہ ہے بینا اس مون کے دھونی مات رہے بینا اس مون کے عوم بھی کسی ان سادھارن شبد کی طرح شور بن
15:24 کر رہ جائے گا वही अउम अर्थात आपके पूरे जीवन को अर्थपूर्ण बनाता है ओम की विशिष्टता क्या उसने शब्द के साथ मौन को गूथ दिया अनिवार्य बना दिया पारी बात समझ में है ओम आप से कह रहा है तीनों स्थितियां चेतना
16:11 की और जीवन भर के तुम्हारे सारे अनुभाव सारे विशे सब अर्थहीन हैं अगर उनके आधार में मौन नहीं है आप कहेंगे आधार में मौन नहीं है आधार में तो मुझे लगता है मेरी दें है उसी स ओम जो की एक विधिनुमा है आपसे कहता है कि कोई बात नहीं अ उ मा तीन है और तुम्हें लगता है तुम्हारी कहानी अ से शुरू हुई है तो पूरी कर लो जल्दी ताकि मौन तक पहुँच पाओ चेतना को ये यात्रा अपनी जल्दी करा लो चेतना माने आंकार
17:01 چیتنا کو ا او اور ما کی قید سے جلدی چھڑا لو تاکہ اس کے بعد جو مون ہے وہاں تک پہنچ پاؤ اور وہی اوم کا مانے تمہارے سموچے جیون کا ادیش ہے تمہارے جیون کا ادیش یہ نہیں ہے کہ ا او ما सुबह छे बजे उठे ये क्या है? अ सुबह छे बजे उठे ये क्या है? अ रात में ग्यारा बजे तक क्या चला?
17:51 अ ग्यारा से चार या पांच तक क्या चला? फिर आती है वो वाली नींद कौन सी? गहरी नींद उससे पहले तो चलती है जिसमें बूलते है रैपिड आई मुवमेंट हो रहा है सपने देख रहे हैं सुते हुए आदमियों कभी देखिएगा हो सो भी रहा होता तो उसकी आखें चल रही होती है आपको दिखाई देगा यहाँ पलकों ऐसे फिर नींद के आखिरी एक घंटे म वो विशय कहां चला गया हमने का वो अंधेरे सागर में डूप गया तो आखों को दिखाई न देगा तो आखों
18:40 को चलना बंद हो जाता है आपकी नीन्द का जो आखिरी एक दो घंटा होता है उसी में नीन्द गहरी होती है वो सुशप्तिक काल होता है उसके पहले जो हलकी नी گیارہ سے لے کر کے چار بے تک کیا چلا تھا؟ او اور چار سے چھے کیا چلا؟ اور چھے بجے پھر کیا چل گیا؟ تو کیا چل رہا ہے؟ یہ اوم تھوڑی ہے یہ اوم تھوڑی ہے یہ کیا ہے؟ یہ تو اوی ماں
19:29 ہے یہ ہماری زندگی ہے اوی ماں ओम का अर्थ होता है एक चक्र पर्याप्त होना चाहिए बच्चे ओम और फिर मौन क्योंकि जीवन का भरोसा नहीं कि अगले चक्र का तुमको अउसर देगा कि नहीं देगा ओम के बाद निश्चित है कि अगला ओ कहने के लिए 6 बचे उठी जाओगे और शे बज़े उठ गए तो निश्चित होता है कि आज वापस आकर बिस्तर पर सो ही जाओगे कुछ होता है क्या निश्चित तो यह आउमा आउमा इसमें क्या है जितनी जल्दी हो सके चक्र पूरा कर लो यह जीवन
20:20 का उद्देश है विशिष्ट इसलिए है ओम क्योंकि उसन اتنا خاص منطر ہے جو مون کے بینا پورا نہیں ہو سکتا کئی لوگ جب اتیاد ہی کرتے ہیں چینٹنگ تو اس میں وہ اوم کو بھی پکڑ لیتے ہیں اور ایک کو تو میں نے سنا تھا وہ اوم اوم اوم یہ تو اوئی ما کر رہے ہو تم اوم دہرانے کے لیے تھوڑی ہوتا ہے دہراؤ تو جیون میں پہلے سے ہی چل رہا ہے और क्या दुहरा रहे हो।
21:08 ओम दुहराने के लिए नहीं होता है। ओम पार जाने के लिए होता है। दुहराना सिर्फ तब तक है जब तक पार जाना संभव नहीं हो पारा। और दुहराव तो चलता रहेगा पर नियत ये होनी चाहिए कि इसके पार निकल जाएं। मौन में जा تو تین عوستہیں چیتنا کی اور مان چونکہ ادھر تین ہے تو اس کو چوتھا بول دیتے ہیں توریہ بول دیتے ہیں چوتھا اور پھر سب کو ایک ساتھ کر دیتے ہیں اس کو چوتھا بھی اسی لئے بولتے ہیں کیونکہ یہ تین ہے ورنہ وہ کوئی چوتھی عوستہ نہیں ہے وہ بس گنتی میں چوتھے नंबर पर आ जाती है तो आप उसको चौथा बोल देते हो
21:57 वो कोई चौथी अवस्था नहीं है तो यह अवस्था कोई चेतना की अवस्था नहीं होती है क्योंकि जो तीन अवस्थाइं होती है वास्तों में यह अहंकार की अवस्थाइं होती है अगर जो चौथा है वो भी अह और चौथी को भी तुम अगर अवस्था ही बोल रहे हो, तो उसमें भी अभी कौन बचा रहे जाएगा, ये लगभग वैसे ही होगा, जैसे कोई कहे, कि मुक्ति भी अहंकार की एक अवस्था है, अब अहंकार वाने तो बंधन होता है, तो हम कह रहे हैं कि मुक्ति भी बंधन क
22:51 लेकिन उसको चौथा पस इसलिए बोला जा रहा है ताकि जो तीन अवस्थाएं हैं अहंकार की उनसे उसको अलग प्रदर्शित किया जा सके ठीक है अन्यता क्रमबद धरूप से वो चौथा नहीं है ऐसा कुछ नहीं कि एक दो तीन चार बलकि ऐसे है कि ये तीन है इनसे हट कर چار ایسے نہیں ہے توری ایسے نہیں ہے توری ایسے کہ ایک دو تین اور ان کا جو درشتہ ہے جو ساکچھی ہے اس کو ان تین سے الگ گھوشت کرنا ہے تو اس کو کہہ دیا چار وہ مون ہے وہ مون
23:37 ہے اور ان تینوں کا ادیش ہی صرف یہی ہے کہ آپ مون ہو جاؤ انتتہ مون ہونا مانے آتمست ہونا कि तीनों जवस्थाइं हैं माने आप दिन भर जो भी करते हो चलना फिरना सोना खाना कमाना शहर बदलना रिष्टे बनाना फढ़ाई करना प्यार करना लडाई करना जो भी आप दिन भर करते हो वो सब व्यर्थ है अगर उससे आप मौन में प्रविष्ट नहीं हो रहे तो شور ہے وہ سب کچھ پھر کچھ نہیں ہے اس میں تو
24:28 جیون ملا کیوں ہے پھر مکتے کے لئے عوم ہے پھر کس کے لئے جیون مکتے کے لئے عوم مون کے لئے جیون مکتے کے لئے عوم مون کے لئے اسی لئے کبھی بھی عوم عوم عوم کہنا عوم कि विदान्तिक अर्थ के साथ न्याय संगत नहीं हो सकता। ओम का उचारण जब भी हो उसमें सबसे ज्यादा महत्व, सम्मान, आधिक्य, मौन को मिलना चाहिए। ओम
25:25 ये रटने के लिए नहीं है, ये याद दिलाने के लिए है, कि जो कुछ भी है जिंदगी में, वो इसी लिए है, कि वो घुल जाए, मिट जाए, एक टेपरिंग आउट हो रहा है, फिनिंग आउट, विगलन, हमचरे हैं? कुछ है है है किस अर्थ में है कि अंकार को लगता है कि अर्थ पूर्ण है इससे कामना पूरी हो जाएगी है है है है है और वो उत्तरोतर क्रमशह प्रोग्रेसिवली क्या होता गया कम महत्तुपूर्ण होता गया
26:15 अज्ञान है है है है और वो फिर क्या होता गया घुलता गया घ कभी भी पूर्ण मौन आ जाएगा पता नहीं पता नहीं ये प्रश्न ही ना आनिदे पूर्ण मौन को क्योंकि मौन में तो ये प्रश्न उठेगा नहीं इस प्रश्न का उठना ही बताता है कि अभी मौन नहीं है तो ये प्रश्न ही फिर अभी बता रहा है कि मौन नहीं है प्र आगे संभव होगा वगएरा कि यह नहीं पता पर प्रश्ण बता रहा है कि अभी तो नहीं है बात आ रही है
27:03 समझे जीवन को और ब्रह्म को एक में गूत रहे हैं और न गूता जाए तो पाखंड हो जाता है भारत में ऐसे लोगों की कमी नहीं जो परमार्थ के तल के सब सूत् और वो अपने अहंकार को शर्ण दे देते हैं व्यवहार में क्या करते हैं और कहते हैं देखो तो एम वेदों ने घोशना करी है कि पारमार्थिक तल तो अलग होता है न व्यवहारिक तल से तो व्यवहारिक तल की सारी बाते हमको पता है
27:54 पारमार्थिक तल की भी सारी बाते हमक और ये दोनों अलग होते हैं ये हमने मान रखा है तो अब हम क्या करते हैं हम एक दोहरा जीवन जीते हैं यही पाखंड है परमार्थ में हम बोलेंगे सब मिथ्या है सब माया है और व्यवहार में बोलेंगे कि अरे अब आगे की कामनाएं कैसे पूरी करनी है बताओ और कोई कह अभी अभी आप कह रहे थे कि अहम ब्रहमासमी अब आप कह रहे हो कचोड़ी नहीं मिली तो गर्दन काट दूँगा ये दोनों बातें एक साथ
28:41 कैसे तो कहेंगे पहली बात कहां की थी परमार्थ की और दूसरी बात कहां की है व्यभार की और हमारे पुराने आचारे शंकर क्य لوگ کہتے ہیں دو ستے ہوتے ہیں وہ یہ بھی نہیں کہتے ہیں دو تل ہوتے ہیں وہ کہیں گے ستے دو ہوتے ہیں ایک پرمارتھ کا اوپر والا اور ایک نیچے والا ستے بھی ہوتا ہے وہ یہ بھی نہیں کہتے ہیں کہ ادھر ٹرث ہے ادھر فیکٹ ہے کہ ادھر ستے ہے اور ادھر تتھے اور کلپنا ہے وہ یہ بھی نہیں کہتے ہیں وہ کہتے ہیں دو طرح کے ستے ہوتے ہیں اب ستے بھی دو ہو گیا تو پھر عدویت کیا بچا دو ستے ہوتے ہیں ایک اوپری
29:27 ستے اور ایک زمینی ستے तो कहते हैं उपर ही सत्य में सब एक होगा बही जमीन पर तो कचोड़ी मज़ेदार होती ही है तो देखे आओ उपर होता होगा ऐसा कि आत्मा एक है पर जमीन पर तो इस्त्रियों को हम नीचा मानेंगे यह उपर जाकर के समान हो जाएंगी पर जब तक जमीन की बात है तब तक अद्वैत रहा आया और उसके बाद भी समाज सुधरा नहीं. क्योंकि लोगों ने जा करके इसी दोहरे पन में शर्ण ले ली. लोगों ने कहा जितनी भी उची बाते हैं वो कहा की हैं? परमार्त की हैं. और हमें जीना
30:16 कहा हैं? व्यवहार में. तो आप उनसे जा करके सब अच् جو بھی بولیئے بودھوں ہم کہو بلکل ٹھیک ہے آپ سوتر گناتے جائیے اور کہتے جائیں گے بلکل ٹھیک ہے پھر ان سے کہیں اب یہ سوتر ٹھیک ہے تو تمہاری زندگی پھر ان سوتروں کی وپریت کیوں جا رہی ہے وہ کہیں گے کیونکہ وہ سارے سوتر کہاں کے لیے ہیں پرمارت کے لیے ہیں اور زندگی کہاں بتانی ہیں ویوہار میں تو اسی لیے اونچی سے اونچی प्रग्या भारत में मौजूद होने के बाद भी भारत समाजिक रूप से पिछड़ा
31:06 रहा, खंडित रहा, कमाम तरह के अंधविश्वास और मानने ताह चलते रहे यह आप मत कर लीजिएगा, ओम का यही संदेश है ओम कह रहा है कि होनी को धोनी माने व्यवहारिक जगत ध्वनी किस से आती है कमपन से और कमपन सदा किसका होगा कोई भौत एक पदार्थ होगा तो यह कमपन होगा तुमाने ध्वनी सूचक है व्यवहारिक जगत का अ उ और मा किसके सूचक है व्यवहारिक जगत के इनको आप मौन से प्रिथक मत कर दीजिएगा नहीं तो पुरानी
31:55 ओम इसलिए नहीं है कि आवाज आप दोहराते रहो ओम में कोई जादू अगरा नहीं है ओम आपको कुछ याद दिलाने के लिए है अनुगूंज कुछ आपकी ही बात जिसको आप पीछे छोड़ाए वो आपको याद आ जाए ओम इसके लिए है। अनुस्मरण। आपकी ही बात, आपका ही सोभाव। पर उसके उपर आपने क्या चढ़ा लिया। अहंकार। जैसे आग पर क्या चढ़ा जाता है। धुआ।
32:47 तो प्रकाश गायब। वो है पर उसके उपर आपने। یہ جروزمرہ کی زندگی ہے اس کے تناو چڑھا لیا ہے اس کی مجبوریاں چڑھا لیا ہے بہت ساری مانتائیں چڑھا لیا ہے ان کو ہی دہرانے سے کوئی لاب نہیں ہونا ہے جب ان کا نام لیا جائے دھونی کے مادہم سے جتنی دیر او اور ماں آئے اس سے
33:36 دس گناہ سمیم مون میں رہا جائے کہہ کر کے ماں کو مٹنے دیا جائے شنے شنے اور اسی مون میں ستھاپت رہا جائے یہی او کا ادش ہے क्या आप मौन में स्थापित हो जाएं। बात समुझ रहे हो। वास्तव में जो सबसे पहला जप है वो ओम का ही है। बाकी सब तो बाद में हमने खुद ही कलपना करके
34:27 और ओम को जपने का मतलब होता है मौन को ही जपना क्योंकि सत्य के अलावा और किसी को जपना माने अपने गले में जूट के फंदे डालना एक फंदा तो पहले ही पड़ा हुआ है वो परयाप्त नहीं है क्या कि बार बार और तुम विविध प्रकार के नाम जप रहे हो اوم اسی لیے کوئی نام نہیں ہے اوم سب ناموں سے مقتقہ سادھن ہے جتنے بھی نام ہوتے ہیں وہ کسی وشے کی اور اشارہ کرتے ہیں
35:12 کسی وششت وشے کی اور اشارہ کرتے ہیں ٹھیک ہے نا وشے یا وشےوں کا ورگ تو میں اگر کہہ دوں ریکھا تو شاید میں ان کی اور اشارہ کر رہا ہوں پر میں کہہ دوں مہلا تو جتنی مہلایاں سب کی اور اشارہ کر رہا ہوں میں کہہ دوں چشمہ تو جتنے چشمیں ہیں یہاں پہ سب کی اور بات ہو گئی اور میں چشمیں کو خاص طور پر بول دوں اچھا یہ رہا چشمہ یہ کسی برینڈ کا چشمہ ہے ایسا چشمہ ہے اتنے پاور کا چشمہ ہے تو ان کا تو سب نام کسی وشے کی اور اشارہ کر رہے ہوتے ہیں نا یا وشےوں کے ایک سمو کی اور اشارہ کر رہے ہوتے ہیں ओम इतना विशिष्ट है कि वो किसी एक विशे की और संकेत नहीं कर रहा है
36:00 वो सब ही विशेयों की और संकेत कर रहा है और उसने पर भी रुक नहीं जाता क्योंकि आ उऔर मा में क्या समा गया पुरा आपका ब्रह्मान्ड समा गया अच्छितने आपकी विशेय सब इसी में तो ओम किसी एक विशे की और नहीं इशारा कर रहा है कि काली जैकेट या वहाँ बैठे राघव सिंग नाम सारे ऐसे ही होते है राघव सिंग तो यह रहे राघव सिंग और यह काली जैकेट ओम माने सारे ही विशे पूरा ब्रहमांड किसमें आ गया और मा में और इतने पर भी ओम
36:51 आगे बढ़ो, मौन हो जाओ, क्यों? शुरुवात कभी भूलनी नहीं है, शुरुवात हुई है मेरी व्याकुलता से, अध्यात्मिक जिग्यासा की शुरुवात ही होती है मेरी बेचैनी दुख से, और दुख मेरा क्यों है? क्योंकि मैं अपने आपको जीव समझता हूँ इस � जो इस जगत के मध्य में तो है पर फिर भी इस जगत से प्रथक है जो इस जगत से संबंधित तो है पर फिर भी अपनी विशिष्ट सत्ता रखता है ऐसा जीव समझता हूँ मैं अपने आपको यही
37:36 सारे दुखों का कारण है तो यह जो ब्रहमांड है वो इस ब्रहमांड के मध और म मिलाकर के कुल क्या है पूरा ब्रहमांड और ब्रहमांड क्या है मेरा दुख है भई ब्रहमांड दुख है जगत ही जीव का दुख है क्योंकि जीव और जगत ये एक दूसरे को हस्ती देते हैं और जीव की हस्ती ही जीव का दुख है अहंकार का होना ही उसका दुख है अह
38:27 بات آ رہی سمجھ میں تو اگر میں صرف کہہ دوں برہماند تو یہ میں نے پوری بات نہیں کر دی یہ میں نے بڑی دکھتی ہوئی بات کر دی کیونکہ برہماند بولنے کا مطلب ہے بیچ میں تو ابھی بھی یہ دکھ جھیلتا ہنکاری بیٹھا ہے ہنکار ہے جو ایسے دیکھ رہا ہے برہماند کو آنکھیں پھاڑ کے تکتا ہوا کہ اگلی کامنا کیسے پوری ہوگی کہاں چلا جاؤں کس دیش چلا جاؤں کس گرہ پر چلا جاؤں کس گھاٹ کا پانی پیوں برہماند مانے یہ ہے تو اہو اور ماں پہ رکنا نہیں ہے آگے آگے جانے کا مطلب برہماند سے آگے کہیں نہیں نکل گئے آگے جانے کا
39:12 مطلب ہے کہ اہنکار اجیان ہے اس اجیان سے آگے نکل گئے جگت اور جیو ساتھ چلتے ہیں جیو مانے اجیان تو جگت سے آگے نکلنے کا مطلب جیو کے اجیان سے آگے نکلنا یہ جو میں اپنے آپ کو کوئی مان کر بیٹھا ہوں اور آشا لگا رکھی ہے کہ اس کی پیاس یہ جگت بجھا دے گا میں اس آشا سے آگے نکل گیا میں چپ ہو گیا میں چپ ہو گیا صرف شابدک چپی نہیں صرف ہوتھوں والی چپی نہیں
39:58 नामों से मुक्त हुने वाली चुप्पी जपका अर्थ ही आई है कि कोई नाम न बचे नाम अगर है तो जप नहीं हो रहा कुछ और ही चल रहा है बहुत उल्टा क्योंकि सारे नाम किसके सूचक होते हैं विशेयों के और विशे ही विशेयता का विशे हैं तो नाम तो विश होता है क्योंकि नाम माने कोई विश होगा तभी तो नाम है और ये जितने विश हैं वही बोज बनकर यहां बैठे है ओम माने सब नामों से मुक्ते सब नामों से मुक्ते समझ में आरी
40:49 यह यह वो परमपद है जिसकी घोशना वेद करते हैं परम माने परम माने बियॉण्ड परम माने आगे का अतीत ट्रांसेंडेंटल तो इस अर्थ में उसको परम कहा जाता है क्योंकि वो परे है परे है बियॉण्ड अउव और मा एक दायरा बनाते हैं उस दायरे के केंदर में कौन बैठता है अहंकार और پرم وہ جو اس دائرے سے اس سیما سے پرے ہو تو اس کو اسی لئے بولتے ہیں
41:34 پرم پرم یہ دائرہ اہنکار کا ہے تو اس میں سارے وشہ بھی کس کے ہیں اہنکار کے ہیں اس کے آگے جو ہے وہی آتما ہے اہنکار کے آگے جو ہے اہنکار کا اُلنگھن اس کے دائرے کا اُلنگھن کر کے لانگ کر جو ہے اسی کا نام کیا ہے اور اسی کا نام کیا ہے پرم کیونکہ وہ پر ہے آگے ہے پرے ہے تو ان دونوں کو ملا کر کے دونہ زور ڈالنے کے لیے دونی اس پشتتہ دینے کے لیے ڈبل ایم فیسس دینے کے لیے کہہ دیتے ہیں پرم آتما باستو میں
42:20 پرم ہی آتما ہے آتما کو ہی پرم بولتے ہیں جیسے کہا جاتا ہے نا شری صدیر جی اب جی بھی شری سے ہی آیا ہے پر ہم کو چین نہیں ملتا صرف شری بول کر کے تو ادھر شری لگایا اور ادھر جی لگا دیا یونکہ اپنے آپ میں کوئی عرض نہیں رکھتا جب شری بول دیا تو جی کیوں بول رہے ہو اور جی بولنا ہے تو شری کیوں بول رہے ہو پر ہم تو شری سے بھی نہیں مانتے شری شری شری ایک ہزار آٹھ पहंकार है और क्या है यह बाता आ रही है समझ
43:06 में तो उसी तरह से परम कहना परयाप्त होता और आत्मा कहना भी परयाप्त होता पर हमने ज्यादा जोर लगा करके दोनों को मिला दिया और क्या बना दिया तो उसका भी अर्थ वही है जो परम का है आत्मा का है लेकिर हमारी कहान کہ ہم نے پرماتما بنا دیا آتما کو ہماری کہانی آگے بڑھ گئی ہم نے کہا پرماتما اور آتما الگ الگ ہوتے ہیں آتما یہاں بیٹھی ہوتی ہے کہیں پر بیکٹیریا گیترے آنٹ میں چھپ کر اور پرماتما وہاں پانچویں آکاش پر بیٹھا ہوتا ہے آدمی کا فضول دماغ دیکھئے
43:54 آتما یہاں بیٹھی ہوتی ہے اور آتما چھوٹی سی چیز ہوتی ہے उस पर हमारे कर्मों के दाग धब्बे निशान लग जाते हैं, आत्मा पर तुम्हारे कर्मों के दाग धब्बे निशान लग जाते हैं, पता नहीं, कुछ खास ही कर्म होंगे तुम्हारे, एक कर्म तो पता है, कुछ खास सूं करकर यह बाते बोल रहे हो, आत्मा पर यह सब न जैसे चुहे चुहे दानी बहुत दिन तक बंदो खोल दो भागे जोर से और फिर वो अपने सारे दाग धबे निशान लेकर के जीवन भर जो कुछ किया है
44:42 उसका पाप उन्य का थेला लेकर के कहा जाती है परमात्मा के पास और परमात्मा गयता है बैट तमीज से आप रिजिस और फिर आत्मा ने ठीक ठाक करा होता है तो उसे अपसरा दी जाती है एलोट होती है इंसेंटिव की तरह है और नलाइकी की जाती है तो की होती है तो उसका पकोड़ा बनाया जाता है बढ़िया वाले तेल में तल कर तेल वहां पहुंचा गैसे जैसे भी पहुंचा
45:28 वो तो पराभौतिक जगत है आग जलाने के लिए कुछ लकड़ी कोईला इंधन लगता होगा तो किसने वहाँ पहुचाया और जिसने भी पहुचाया तो बिलिंग कैसे हुई जी एस्टी कैसे लगा होगा वही फ्यूल की सप्लाई हो रही है को छोटी मोटी बात है समझ में आ परम ही आत्मा है ज्यादा जोर देकर उसको बोल देते हो परमात्मा ठीक वैसे जैसे कोई बोले निर्मल प्रेम
46:13 मलिन प्रेम भी कुछ होता है क्या कोई बोले पूर्ण सत्य अपूर्ण सत्य भी कुछ होता है क्या वैसे ही मैं तुमसे सच्चा प्यार करता हूँ जूटा प्यार भी कुछ होता है क्या अगर जूटा है तो प्यार नहीं है हाँ जी हम तो प्योर वेज है यह प्योर वेज क्या होता है यही नहीं है हम लैक्टो वेजिटेरियन है यह लैक्टो वेजिटेरियन क्या होता है सीधे बोलो ना कि नॉन वेजिटेरियन हो वेजिटे जो वेज़िटेबल्स खाए कौन से वेज़िटेबल निकलता है भैस के थंसे
47:05 और दिन रात तुम उसी को पिये जा रहे है उसके बाद भी तुर रहा है कि अपने आपको शाकाहारी खोशित कर रहे हो तुमारा दूद, तुमारी चाय, तुमारी दही, तुमारी लसी, तुमारी आ रही समझ में कुछ भी नहीं है तुम्हारा शाकाहरी तुम्हारी दाल में भी घीडला हुआ है तुम्हारी दाल भी कोई सिर्फ पेडों से नहीं आ रही है या पौधों से नहीं
47:52 तो वैसे ही आत्मा को क्या बना दिया वरमात्मा आत्मा जब परमात्मा बन गई तो जो बिचारी खाली सिधी साधी विशुद्ध आत्मा थी उसको क्या बना दिया जीवात्मा बोलते है उपर परमात्मा इधर जीवात्मा ना इधर जीवात्मा है ना उपर परमात्मा है एक ही सत्य है उसको आत्मा बोलते है एक ही सत्य सत्य स مول بھرم ہٹ گیا مول بھرم کیا ہے میں اور برہمانڈ الگ الگ ہیں ایسا میں جس میں وشہ نہیں ہے
48:43 اس کو آتم بولتے ہیں ایسا میں جس میں وشہ چلے گا ساتھ میں اسے اہم بولتے ہیں یہ ہے سناتن دھرم یہ ہے شروطی یہ ویدانت ہے जो अपने आपको हिंदू बोलते हों, वो अपनी परिभाशा ही ठीक कर लें कम से कम, मैं जो जगत के साथ ही चलेगा, कि मैं वो हूँ जो कुरसी पर बैठा है, इसको क्या बोलते हैं? अहंकार, मैं वो हूँ जो अपने माबाप से आया है, इसको क्या बोलते हैं? क्योंकि ये म
49:32 ये कौन है? एहनकार क्योंकि ये मैं द्वैतात्मक है ये संसार के साथ ही चलेगा जोड़ा बनाके ये अकेले नहीं हो सकता है और अपने आपको संसार से अलग समझना ही क्या है मूल भ्रम है मिट्टी मिट्टी पर चलने लगी तो सुचने लगी मैं मिट्टी से अलग हो गई � मिट्टी कोई खा रहा है, तो वो इमान बैठा कि मैं मिट्टी से, अलग हूँ, यही मूल अज्यान है, इंडिविजुएलिटी, आपका एक अलग इकाई होना, ब्रहमांड से, यही मूल
50:17 भ्रहम है, तो माने, विशे का होना ही क्या है, मूल भ्रहम, विशे माने, विशेता अल� बोलिये जल्दी अहंकार और अविभाजित मैं जिसमें द्वायत नहीं है जिसमें कुछ इधर कुछ उधर नहीं है उसको बोलते हैं आत्म वही द्वायत सत्य है वही इश्रुति का प्रतिपाद्य विशय है बात आ रहे हैं समझ में आत्म है वही आत्म आत्मा माने कोई विश
51:04 आम भाशा में भी सच किसको बोलते हैं जिसमें धोखा न शामिलो है न तो आप अलग हो दुनिया अलग है ये पहला धोखा है ये मूल अविद्या है कि मैं और दुनिया अलग-अलग है क्यों क्योंकि दुनिया तो ऐसे ही है ये है और मैं मैं तो मैं हूँ और मैं हूँ कौन ही जब ये है तो हम मैं को बोलेंगे अहंकार अहंकार कुछ नहीं है खंडित मैं को ही अहंकार बोलते हैं मैं जो की एक जूठी माननेता लेके घूम रहा है उसको बोलते हैं अहंकार और वही मैं जिसने अपनी जूठी
51:52 माननेता के पार देख लिया उसको बोलते हैं आत्म आत्म से बस एक तरह की अतिश्योक्ति है, भाशा ही सौंदर है उसमें, अलंकरण है, भाशा में चलता है अतिश्योक्ति अलंकार, तो सत्य को आत्मा की जगह परमात्मा कहना बस अतिश्योक्ति अलंकार है, इससे यादा कुछ नहीं, समझ में आ रही है बात ही है, तो, हमने कहा यही शुति का परिप्रतिपाद्य विशय है इसी परंपद की घोशना वेद करते हैं कोई पूछे वेदों में क्या है तो इधर दर की बात मत करने लग जाईएगा मेरा भी नाम खराब होता
52:42 है कोई पूछे क्या है तो सार सार को गही रहे थोथा दे उड़ाय सीधे ब समूचा में, अखंड में, अद्वायत में, आत्म है, वही सत्य है, कुल मिला करके यही शुरुति है, यही सनातन धर्म है, बस, जानने वालोंने कई बार बोलाये सनातन धर्म समझना है, तो बहुत दूर मत जाओ, बस ओम समझ लो, ओम में समूचा सनातन समाया हुआ है, पाउ और
53:28 मा माने ये जो तुम्हारी रोज की अभ्यस्त जिन्दगी जिसका तुम प्रति दिन अभ्यास करते हो जिसका तुम्हे रोज अनुभव होता है इंद्रियों से और इस जिन्दगी का उदेश है सब अनुभवों के पार निकल जाना जीवन इसलिए नहीं है कि जीवब جیون اس لیے نہیں ہے کہ جیو بھوگے جیون اس لیے ہے کہ جیو جانے کیا جانے جیو کہ میں جیو ہوں ہی نہیں
54:16 کہ میں جیو ہوں ہی نہیں پہلے جب ہمارے شویر ہوا کرتے تھے اور چند لوگوں کو لے کے ہی میں جاتا تھا پہاڑوں پر کنستہ میں جو لوگ آپ کو دکھائی دیتے ہیں کہ مداری کا کام کر رہے ہیں تو اب سب چھاتر اگرہ رہا کرتے تھے تو یہ ایک ان کو بڑا مزہ آتا تھا کہتا تھا ان کو دیتا تھا کسی سے اپنی شد سے دے دیا ریبوگیتہ سے دے دیا کہ یہ سلوک ہے یا انش ہے جاؤ اس کو سمجھو گاؤ میں جیو ہوں ہی نہیں यही जानने को जीवन मुक्ति कहते हैं तो जीवन किसलिए है?
55:04 मुक्ति है तू और मुक्ति की परिभाशा क्या है? यही जानना कि मैं जीव तो विच नहीं क्या? जीवन यही जानने के लिए है कि आप जीव होई नहीं यही क्या है? यही जीवन मुक्ति है, यही धर्म है, यही सनातन है। बाकी जो कुछ आपके सामने परोसा जाता है, सनातन बताकर, वो कहीं से सनातन नहीं है, वो किथी इधर उधर की सस्ती माननेता का नाम है। कुल मिलाकर सनातन क्या बात है? यही। जीवन मुक्ति ही सनातन है। सनातन माने
55:54 अब चेतना का कोई विशय तो काला तीत होगा नहीं काल का तो मतलब ही है बदलाव और सत्ते होता है नित्ते नित्ते माने जो बदल नहीं सकता और सारे विशय लगातार क्या बदल रहे हैं कर रहे हैं बदल रहे हैं और इन सब विशयों का जो अनुभोकता है एक्सपिरियन्स दोनों ही नकली है ये जानना ही जीवन मुक्ति है सारे अनुभव आप लीजिये ही इसलिए ताकि अनुभवों का सार जान सकें सास चल रही है दिल
56:45 धड़क रहा है कुछ न कुछ तो करेंगे जो भी कर रहे हैं उसमें अनुभव तो होई रहा है वो अनुभव इसलिए नहीं है पर जो भी अनुभव हो रहा है उसको जानना जरूरी है ये क्या हो रहा है ये क्या हो रहा है अनुभव इसलिए है ताकि अनुभोकता के बारे में जानकारी मिल सके ताकि अनुभोकता और अनुभव्य विशे के रिष्टे के बारे में जानकारी मिल सके अनुभव इसलिए है और इसी दृष्टे से अनुभवों को चुनना भी चाहिए अब एक अनुभव जो पहले साड़े छहसो बार
57:33 हो चुका है उससे कोई नई सूचना मिलेगी क्या तो बहुत दोहराव मत करो जीवन छोटा सा है दोहराते दोहराते खट से बीच जाएगा हमें तो नई सूचना एक लंबी चौड़ी सी है यहां बीच में अंधेरा है आपके हाथ में टॉर्च है आप अपनी जहाँ पर खड़े रहों के बास ऐसे करोगे या क्या करोगे पूरा घूमोगे इर्द घूमोगे 360 डिगरी पूरा उस पर आप रोश्णी
58:20 डालोगे उपर से डालोगे दाहीं से डालो ہر دشا ہر کون سے پرکاش ڈال پاؤں اس لئے انبھاؤ لوں گا آپ وہی انبھاؤ لے رہے ہو بس تو کیا پرکاش ڈال رہے ہو چلتی چکی دیکھ کے دیا کبیر ہے چکی تو چل رہے ہو یہ روز صبح اٹھے کچھ کر لیا آفس چلے گئے واپس آئی یہ کر لیا شنیوار کو کچھ اور کر لیا سال ختم ہو رہا ہے تو ہر سال کی طرح اس بار پھر چھٹی پر چلے گئے یہ وہی تو آپ گول گول گھوما رہے ہو اس میں آپ کو کیا مکتی مل رہی ہے तो अनुभव तो लेने हैं वेदान्त आपको नहीं कहता कि वो आला सन्यास ले लो जिसमें दुनिया छोड़ के चले आना है वेदान्त तो कहता है
59:07 अनुभव तो साधन है अनुभव से ही तो अनुभोकता के बारे इंपता चलेगा न तो लो अनुभव परंधे होकर नहीं लो � जानते समझते अनुभाव लो और जिस अनुभाव से कुछ राज खुलने की संभावना है उस अनुभाव को तो साहस पूरवक लो दाम चुका करके भी लो और जिस अनुभाव से अब कुछ नया ग्यात नहीं होने वाला वो अनुभाव लेने के अगर दाम भी मिलते हो तो भी
59:56 तो यह अनुभा नहीं लेना मुझे अब, यह अनुभा बहुत ले लिया, इसमें मुझे अब कुछ नया नहीं पता चल सकता, तो वही रोज खाना, वही रोज जाना, वही जगें, वही सडकें, वही दुकाने, वही लोग, वही चेहरे, वही काम, हो गया, हो गया, साल भर कर ल और जीवन और ब्रहमांड और बहुत सारी पहेलियां लेकर खड़े हैं बहुत सारे विशे लेकर खड़े हैं कामना बनकर खड़े हैं मुझे अभी रहस्य सुल जाने हैं कामना कोई विशे तभी बन सकता है जब तक वो विशे ग्यात
1:00:47 ना हो जिस विशे का आपने परदाफाश इस चीज को जान सकता था, इस दाइरे में उसको जान लिया, आगे जाने दीजिये, और बहुत गाठे हैं जो खोलनी है, और बहुत कुछ है जो अभी चुनोती बनकर खड़ा हुआ है, और बहुत कुछ है जो अभी अनसुल्जा है, अन जाना है, अन देखा है, अन छुआ है, मौन आएगा मुझे सबसे गुजरना है मुझे आग्या दीजिए मैं कहीं अटक कर रहे गया तो
1:01:36 पार कैसे निकलूँगा और जो पार नहीं निकला वो परम तक कैसे पहुचेगा क्योंकि परम तो वो जो पार है पार है अटकना नहीं है हम बड़े गड़बर लोग होते हैं हम गलत जगए अड़ा बसा लेते हैं हम अटक जाते हैं अटकना नहीं है भारत की पहचान जानते क्या stability हमारे सब stable होता है मामला और stability आनी चाहिए बस एक जगए पर सत्य के साथ वहां जाकर टिक
1:02:22 जाओ बादे stable हो जाओ तो बढ़िया है प लोग नौकरियां खो जारें जिसमें 40 साल स्टेबल हो सकें। बहुत खुश होते हैं। कहते हैं ये आपको जो नौकरी मिली है आप इसमें क्यों। स्टेबिलिटी बहुत है। तुम पागल हो गये हो। ओम तो बता रहा है पार निकलो तुम कह रहे हो मैं अटक गया। वहीं � यह रीड है क्या है यह रीड है इनसान की कैसी होनी चाहिए ऐसी होनी
1:03:08 चाहिए हमारी कैसी है ऐसी है पर यह stable equilibrium की पहचान क्या होती है कि उसको थोड़ा था हटा दो वापस अपनी जगे पर आ जाएगा दो गलतियां हो गई है पहले तो रीड होनी चाहिए थी ऐसी ऐसी रीड हो तो रीड ऐसी ये तो एक तो वो नहीं है कैसे है पाय लागू दददा जंडवत बिछे हुए है अब दददा कोई भी हो सकता है दददा बॉस हो सकता है दददा सेलिब्रिटी हो सकता है बाकी तो बाबा जी नेता जी है ही आप देखते
1:03:55 हैं यो वहाँ पे जाकर बड़े-बड और उपर से unstable नहीं है मामला, unstable होता तो भी ठीक होता, unstable माने क्या? unstable माने कि कोई हटा दे तो हटे रहोगे, हिंदुस्तान की खासियत है कि आप ऐसे गिरे हुए हो और अगर कोई उठाए, किसी ने इतना उठा भी दिया, तो क्या करोगे? जहां वो हटा कि नहीं कि फिर से गिर � unstable equilibrium है इसका मतलब होता है कि अगर हटा दिया तो हटे ही रहो गिर गए अब वापस ऐसे नहीं आओ गए बड़ी से बड़ी माया है
1:04:44 कि सच्चाई के साथ हमारा बनता है unstable equilibrium कि किसी ने ऐसे खड़ा कर भी दिया एक बार को और हवाएं आई संयोग आए मौसम आए रिष्टे आए ध अपने आप अभी खड़ा नहीं हो सकता अब संस्था से फोन आएगा तब खड़ा होगा अब वह भी पांच बार काटेगा गाली गलोज करेगा गंदगी लिखेगा उसके बाद बड़ी मुश्किल से खड़ा होगा और गले महीने फिर कुछ होगा और फिर गिर जाएगा सही � अब ऐसे पड़े
1:05:31 हो कोई कहा रहा है ऐसे मत पड़े हो खड़े हो खड़े हो खड़े जा उसने इतना भी खड़ा कर दिया पूरा खड़ा कर दिया अब पूरा तुम्हें खड़ा करके वो हट गया कि मर गया या कुछ और हो गया ले खतम ये बात समझ में आ रही है जिंदगी स जिन्दगी पार निकलने के लिए होती है हम हर चीज में खोजते हैं कि किसी तरीके से बस सेटल हो जाए इसे तामसिक्ता कहते हैं कि एक तो गलत जगह पर हो और वो भी
1:06:18 सेटल्ड हो जैसे अपना पिगी भाई जो शाम वर्णिय सरिता में अठखेलिया करते करते निद्रा की गोद में सो गया एक तो गलत जगह पर है उपर से well settled है हिल भी नीरा और कोई आउट लायर है कोई बगावती पिगू है वह वहां से बाहर निकल नहीं कोशिश कर रहा है तो उसको ताने मार रहा है कह रहा है यह देखो यह बड़े आये परं हमारे पुर्खे सब बेवकूफ थे क्या सब यही जी है यही मरे और यह नए आये बड़े सिकंदर यह क्या कह रहे हैं यह बाहर निकलना है
1:07:12 भारत वो सारे काम कर रहा है जो सनातन विरुद्ध है सेटल्मेंट सनातन नहीं होता सत्य सनातन होता है आप मांगते हो नौकरियां कि कोई निकाले ना बड़ी रहाते कोई निकालता नहीं है आप खुश हो याते हो कि भारत में तलाक नहीं होते अच्छा तलाक तो नहीं होते तो इतनी भुरूनत्या क्यों होती है और वो और जिसका गर्भबात कराया गया उसने गर्भबात करवा
1:08:01 हम अच्छे से जानते हैं भारत में marital rape कितना है marital rape इतना है उसके बाद भी तलाक नहीं है यह अच्छी बात है यह बुरी बात है पर हम खुश इसी में रहते हैं कि highest value is settlement सबसे जादा मुल्ले किसका है settle हो जाओ यह सबसे बड़े मुल्ले की बात है भले ही तुम्हारे settle होने मे مکتے کو روز بیڑیا پڑھ رہی ہوں پر خوش اس بات پہ ہیں کہیں well settled well settled بات آ رہی ہے سمجھ میں ہم پتہ نہیں کیا جسے پراب
1:08:54 ہونے کے لیے سب تپ کیے جاتے ہیں اوم کے بارے میں دوسری بات پہلی بولی اوم ہی ہے جس کی بات وید کرتے ہیں دوسرا کہا اوم ہی ہے جس کے لیے سارے تپ کیے جاتے ہیں سارے تپ اسی لیے ہیں کہ آ اوم کے بھیتر ہی ہوتے ہیں سارے تپ لیکن ہوتے اس لیے ہیں کہ اس کے آگے نکلو اس کے آگے نکلو اور تپ مانے کوئی ریچوال نہیں ہوتا کہ नदी किनारे बैठ करके विशिष्ट मुद्रा में हाथ जोड करके ऐसे मुंडी उपर को उठा के करो तो तब है पूरा जीवन ही यदे मुक्ते के प्रयास में है तो उसको कहते हैं तपस्या
1:09:41 तपाना तपाना आग से गुजारना अगनी बड़ा स्थान दिया है उंचा वेदों ने किस अर्थ में जो कुछ भी जल सकता है उसको जला देती है अगनी से बस वही गुजरता है जो जली नहीं सकता माने जो कुछ भी भौतिक है उसे कोई न कोई आग खा जाएगी थोटी आग नहीं तो बड़ी आग सूरज जैसी आग ह उसको आग खा जाती है तो आग से बचता गया है वही जो
1:10:31 जल सकता ही नहीं माने आग किसका प्रतीक हुई नेति नेति का इसलिए अगनी को इतना महत्त है इसलिए सांकेतिक रूप से भी जब हम यग्य करते हैं तो उसमें पुरोहित अगनी को बनाया जाता है अगनी पुरोहित जो कुछ भी विर्थ का है उसको आग जला देगी। उसकी नेती नेती कर देगी। तो उपर बस वही पहुँचेगा जो जल सकता ही नहीं। नहन्यते हन्यमाने शरीरे। जो कुछ भी जल सकता है उसको आग जला देगी। तो आग का इसलिए इतना महत्त है। आप किसी बात को
1:11:20 मैं बताती हूं कि आमर तो नेती नेती करती है आग इसलिए इतना महत्य है अगनिका जूट का परदाफाश कर देती है आग समझ में आ रही ये बात है जिन लोगों को कामना बहुत सताती हो विश है कि कोई चीज दिग गई कहीं کسی کا شریر دکھ گیا تو ان کے لیے ایک ودھی ہے جو کچھ بھی دکھے اسے آگ سے گزارو ایسے ہے کوئی چیز ہے وہ آنکھوں کو بہت کھینچ رہی ہے اس کو آنکھ سے گزارو اور دیکھو کہ اب وہ
1:12:06 کیسی دکھ رہی ہے کچھ آ رہا ہے سمجھ میں کونسی چیز لبھا رہی ہے وہاں जो रूम में गाड़ी खड़ी हुई है या कि एक नया घर खरीदना है उसमें आग लगा दो मतलब यहाँ पर देखो क्या बचा कोई बिल्कुल fit, sexy, handsome बनकर आगा है तुम्हारे सामने उसको आग लगाओ देखो कि क्या बचेगा यह जो खाल है यह जलती हुई कैसी दिखाई � क्योंकि वही है वो शरीर बन करके तो अभी ताजा ताजा खड़ा हुआ है
1:12:56 राख मिट्टी तो वो शताब्दियों से था शरीर तो अभी बनाए और अभी बनाए अभी गिर भी जाएगा फिर राख ही होना है उसको तो जब राख ही होना है उसको तो उसको राख रूप में दे کوئی آپ نے بہت گذب بات نہیں کہا دی صاحب بہت تہلے بول گئے ہیں کیا ہار جلے جیوں لاکڑی کیس جلے جیوں گھاس وہ باپ کے سامنے بلکل بن کے کھڑی ہو گئی ہے آپ
1:13:42 اس کے دیکھئے بالوں میں آگ لگی ہوئی ہے کیس جلے جیوں گھاس ہے سوکھی گھاس جل رہی ہو ایسے اس کے بال جل رہے ہیں اور ہڈی ایسے جل رہی ہے جیسے لکڑی ہو यही सच्चा ही है नित्य नित्य का भेद कर दिया अगनी ने प्रणाम अगनी देव आपने सब साफ कर दिया समझ में आ रही यह बात है या खुद ही नहाने जाते हो ऐसे मलमल के खुश्मत हो जाया करो या क्रीम लगा ली खाल चमकने लग गई तो जैसे देखरत चमक रही है � अपने हाथ को देख के सोचा करो कि जब यह जलेगा तो कैसा दखेगा। देखो
1:14:28 इसको ऐसे, देखो इसमें आग लगी हो, यह जल रहा है। समय दिखा तो देता ही है, समय रहते देख लो। समय तो दिखाएगा, पर समय के बाद देखने से क्या लाब होगा। क्योंकि तब आ� अब टिकट भी नहीं लगा सकते कि अरे मेरा मुर्दा देखने आये हो मेरी भसम देख रहे हो तो कुछ तो दूसरों का मुनाफ़ कराने से अच्छा अपने ही मुनाफ़ करा लो खुद को जलता हुआ सोयम ही देख लो लाब हो जाएगा सच मुछ बात आ रही है समझ में कुछ
1:15:25 तपादो सत्य मात्र शेश बचेगा और जो तपन के पार नहीं जा सकता वो जूट है जिसको इस जगत की कोई भौतिक प्रतिक्रिया मिटा सकती है, खंडित कर सकती है, डिसिंटिग्रेट कर सकती है, डिजेनेरेट कर सकती है तुम कहे वहाँ दिल लगाए बैठे हो, यही तो � और जिसकी इच्छा रखते हुए ब्रह्मचर्य अपनाया जाता है, वही ओम है. तो ब्रह्मचर्य माने जीवन ऐसा जीना, चर्या,
1:16:16 आचरण कर्म चर्या आचरण चर्य कर्म चर्य, कर्म, जीवन ऐसा जीना, कि अउम के पार निकल सको, ये ब्रह्मचर्य है. जीवन ऐसा जीना कि आउमा तीनों अहंकार की ही अवस्थाएं हैं, अहंकार की तीनों अवस्थाओं के तुम ग्याता रहो, यही ब्रहमचर्र है। जैसे यह दृष्ट दुनिया की ओर है, वैसे ही नजर अपनी ओर भी मुड़ी रहे, इसी को ब्रहमचर्र कहते हैं।
1:17:05 ब्रहमचर्य का संबंध आख से है आख से यौनांग से नहीं है देखने से है देखने से ब्रहमचर्य का संबंध चश्मा उतारने से है नाडा बांधने से नहीं बाबा जी ने आपको जो बताया है वो बहुत नीचे की बात है माने गिरी हुई बात है वो बात वेद सम्मत नहीं है, वेद कहते हैं ब्रहमचर्य माने आख खुली रखना, आख खुली रखने को ब्रहमचर्य कहते हैं, अूम से इस तरह गुजरना कि मौन में प्रविष्ट हो जाओ यही ब्रहमचर्य है, जिंदगी ऐसे जीना
1:17:54 कि जिंदगी से अचूते हो जाओ यह ब्रह्मचर्य भी वही करता है जो ओम कर रहा है आचरण सारा किस तल पर होता है चर किस तल पर होता है व्यवहारिक और ब्रह्म परमार्थिक तो ब्रह्मचर्य माने वो पुल जो व्यवहार को परमार्थ से जोड़ता है चर कहा है व्यवहार में और ब्रह्म कहा है परमार्थ मे
1:18:52 I am वर्पना को काटने में मदद करता है कि ये हमारी सुशुप्ति में तुम्हारी जो मूल वृत्ति है मात्र वही सक्रिय रहती है उस सुशुप्ति को अगर हटा दिया बस आ उखी बात करी तो वृत्ति बची रह जाएगी सुशुप्ति में हो मर नहीं गये हो सुशुप्ति में یہ گہرا اندھیرا ہے جس کو وشے بنا لیا ہے جس کارن الگ الگ وشے
1:19:40 پرتیت نہیں ہو رہے لیکن پھر بھی ایک وشے ہے کیا وہ جو گہرا اندھیرا ہے وہی وشے ہے اور اس گہرے اندھیرے کا احساس کس کو ہو رہا ہے وہ جو شریر کے ساتھ ہی اٹھتا ہے تو اس لئے ہم یہ بھی کہہ سکتے ہیں کہ شریر ہی اب وشے ہے جو ہنکار ہے وہ شریر کے بینا نہیں ہو سکتا तो सुशुप्ति माने मुक्ति थोड़ी होता है, सुशुप्ति भी बंधन की ही एक अवस्था है, तो जब हम बंधनों के तीन प्रकार गिनेंगे, तो उसमें सुशुप्ति को भी सम्मिलित करना पड़ेगा, क्योंकि वो भी एक तरह का बंधन
1:20:30 ही है, आज समझ रहे हो? और और संबंधित होता है वोता है आनंद मैं कोश कौन सा आनंद मैं कोश तो बहुत लोगों को लगता है यही मुक्ति है क्योंकि सच्चदानंद घं यह तो हम भहुत बार मुक्ति के लिए कह देते हैं तो सच्चदानंद में भी आनंद है और सुशुप्ति के साथ भी आनंद मैं को� और जागरत ही होती है, इसलिए स्वपनवस्था होती है, कैसे? अगर गहरी नींद ना आए आपको आठ दस दिन, तो आपकी जागरत ही डावाडोल हो जाएगी,
1:21:18 या आपके साथ ऐसा होने लग जाए, जब गहरी नींद के जो घंटे होते हैं आपके, सुबह जो पाँच बु� जो सुशुप्ति के अवस्था है इसका बड़ा योगदान रहता है जाग्रति को अनुकूल बनाए रखने में किसकी अनुकूल हंकार के और जाग्रति क्या बंधन है तो सुशुप्ति जाग्रति रूपी बंधन को बनाए रखने में योगदान देती है और जाग्रति के ही ज तो ये तीनों अवस्थाएं एक दूसरे में गुथी हुई हैं क्योंकि ले देगर के हैं
1:22:06 तो एक की ना किसकी अहंकार की अहंकार ही कभी तैजस बन जाता है कभी प्राग्य बन जाता है कभी वैश्वानर बन जाता है ये अहंकार के नाम होते हैं तीन अवस्थाओं में लेकिन ले दे करके कोई भी नाम दे लो, तीन अवस्थाओं के अलग नाम है, जागरत सप्न तुछुप्ति, तो उसी के अनुसार हंकार के तीन नाम दे देते हैं, कि इन तीज अवस्था में हंकार ये कहलाएगा, इसमें ये कहलाएगा, नाम दे देते हैं, कोई नाम दे लो, जैसे सुशुप्त का प्रबंध भी इसलिए किया गया है कि सुबह उठो और माया में
1:22:57 डूबने को तानो ताजा रहो बिलकुल आहा बड़ी बढ़िया नीद आई थी आज जाके पांच करगला और काटूंगा मुझे मैं आ रही है बाती है कि कुछ फसर आये भी अगर मैं सही समझा तो मूल वृत्ति शुधतम रूप में आश्वशुक्ति में क्याप्चर हो रही है क्योंकि उसमें भाति-भाति के विशय नहीं रहते देखो सुनो यह मूल वृत्ति अहम वृत्ति ठीक है अहम वृत्ति अगर मौलिक है तो उसका विशय भी मौलिक होगा
1:23:44 आलंकि मौलिक हम इने कह रहे हैं लिगेने जूट हैं क्योंकि द्वैत तो होई गया ना इधर वृत्ति इधर विश्य तो दो तो हो गए तो ये सत्य तो नहीं है पर सत्य अगर एक बिंदू है और उस शुरुवात होती है उसके तूटने से उसके दो बनने से ऐसे माया की शु उसका विशय क्या है? जो कि अभी diversified नहीं है, fragmented नहीं है, खंडित नहीं है, वैविद्य नहीं लिए हुए है, तो अहम वृत्य का विशय एक होता है बस, एक, एक, उसको अंधकार बोल सकते
1:24:31 हैं, अंधकार, ठीक है? अंधकार, फिर यह जो अहम वृत्य है, यह पांच साथ और और उन वृत्तियों के अपने 150-5000 अपने विशय होते हैं तो अब आपका जो युनिवर्स है ब्रहमांड है वो भी अलग-अलग विशयों में बट गया
1:25:20 ایسے ہوتا ہے یہ ادویت سکتے ہیں one without the second ٹھیک ہے اب یہاں سے مایا شروع ہوتی ہے مایا کا عارت ہوتا ہے کہ یہ دو ٹکڑوں میں بٹ گیا کس کے لیے اس کے لیے یہ مول اہمورتی ہے یہ اس کا وشہ ہے یہ اہمورتی ہے اس کا وشہ ہے اہم ورکتی ابھی کھنڈت نہیں ہے وہ بھی ابھی ایک ہے تو اس کا وشہ بھی ایک ہے جس کو ہم نے کہا دیا کالا اندھیرہ جس میں ابھی سب وشہ چھپے ہوئے ہیں ایک وشال کالا اندھکار جس میں سب وشہ چھپے ہوئے ہیں ٹھیک ہے اب اس کے آگے یہ اور ٹکلوں میں بٹتی ہے اور پھر اس میں سے بھی سارے وشہ پرکٹ ہوتے ہیں اس اندھیرے میں سے یہ اتنے سارے اس میں سے ہر چیز
1:26:10 ہر حصہ جا کر کے کسی وشہ سے جڑا ہوا ہے अब विविधता है किसमें अहंकार की अवस्थाओं में अहंकार के नाम रूप आकार में और अहंकार के विशयों में इसको सुनना बार बार समझना कैसे होता है आगे बढ़िये तरन्य वादिस्वाजी अप्रणाम आशार जी मेरा प्रोस्ट प्रोसेस को कर रहा है क्या उसका मिलब जो रियमर्जन से बार बार उसके उपरती
1:26:58 है या फिर यह थोड़ क्लिए साफ बोलो पेटा क्या बोलना चाहरा है आपने जैसा कहा था कि हमेशा वी शुट ट्राइन यूँ हाँ क्योंकि वरना तुम्हारा आओ मा का चक् तो मतलब लेकिन आपने कहा कि कुछ ऐसा करी कि जुन अलग हो तो अनुभाव इसलिए हैं ताकि उनसे सीखो कि अंडामेंटल प्रेमाइस तुम वही पुराने अनुभाव दोहरा रहे हो तो ऐसा है कि जैसे गन्य से सारा रस निकाल लिया पर उसको बार बार बार डाल रहे हो � दो सुबह उठे ऑफिस से ले गए वापस आये सबजी लेकर के खाना खाली टीवी
1:27:44 देख लिया लड़ाई कर ली सो गए सुबह फिर उठे फिर चले गए यही किया यही किया आ गए तो अब इस अनुभाव में क्या बचा है कि तुम कुछ सीखो गए इससे इसलिए अनुभाव जब जान लिये जाते हैं तो मौन में प्रवेश स्वतह हो जाता है तुम अउमा में घूमते हो आशा के मारे कि अभी इसमें कुछ और मिल जाएगा अगर तुम्हें ये आशा है ही कि कुछ और मिल जाएगा तो जाओ ना कहीं और आजमाओ तो
1:28:34 तुम तो बहुत पखंड करते हो भविश्य में मिलेगा, कहीं और मिलेगा, अच्छा कहीं और मिलेगा, तो हाँ जा के देख क्यों नहीं लेता, जा ना, नया अनुभाव ले, जहां की भी आशा है, उसको आजमा ही ले, आजमा ले, तब तो मुक्ति मिलेगी, नहीं तो आशा भी कारण बन जाती है, इसी दाइ मतलब क्यों ही जाना फिर नहीं इसमें की मतलब क्योंकि तो मिहा नहीं आये होते तो यह सवाल भी पूछ रहे होते
1:29:22 रोज तुम्हारा जो आउ मा आउ मा उई मा चलता है उसमें सत्र शामिल होता है क्या तो यह क्या है नया अनुभव यह नया अनुभव यह तभी तो कुछ नया तुम रोज जो करते हो ढाक की तीन पात उसमें इस वाल भी उठता क्या और तुम पर जोर न लगाया जाए तो तुम्हें आते नहीं ये तुम्हारा stable equilibrium है कोई मा उसी में तुम फसे रहते हमें दाइरे अपने नहीं तोड़ने आपसे दाइरे तोड़वाने के लिए भी कोई �
1:30:08 यह है अलबेर कामों की मिथा उफ सिसिफस वो उसको उठाता है लेके जाता है और फिस सत्र समाप्त हो जाता है पत्थर वापस जाकर खाई में गिर जाता है वो रोज उसको सुबह उठाता है उपर चोटी तक लेके जाता है चटान को और रोज जैसे ही शाम होती है वो पत्थ اوپر لے بھی جاؤ تو اوپر وہ انسٹیبل رہتا ہے ایسے
1:30:57 مجھ میں آ رہی ہے بھائی انتظار مت کرو کہ کوئی اور یہ کرے پہلی بات تو کوئی آئے گا نہیں کرنے کے لیے तुम्हारी मर्जी तु इसलिए दूसरे का इंदार मत करो जिंदगी बहुत छोटी है अपने आउमा से खुदी बहार आ जाओ यही ओम है ठीके तन्यवाद आचाजी you