0:02 एक बिजनेस 3 साल से लॉस में था। मालिक को उसको उठाने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। लेकिन महज कुछ स्ट्रेटजीस की मदद से वो 90 दिनों में याद रखिए सिर्फ 90 डेज में प्रॉफिट में आ गया। आप कहेंगे संभव नहीं है। तो एक और बात सुनिए। ना कोई नए लोन लिए गए, ना कोई नई मशीनरी ली गई, ना कोई प्रोडक्ट चेंज किए गए, ना कोई जग्राफी चेंज की गई, ना किसी को फायर किया गया, ना किसी को हायर किया गया। केवल कुछ ऑपरेशनल डिसीजंस की मदद से लॉस प्रॉफिट में बदल गया। आज मैं आपको एक रियल केस स्टडी जहां पर सीधा-सीधा मेरा दखल था, वह मैं बताने जा रहा हूं। और आज का यह शो देखने के बाद
0:48 हर स्मॉल और मीडियम बिजनेस ओनर अपने बिजनेस में प्रॉफिट बढ़ा सकता है और यदि लॉस में चल रहा है तो प्रॉफिट में ला सकता है। साथियों इसके लिए थोड़ा बैकग्राउंड में जाना पड़ेगा। हमारे गुरुकुल पार्टिसिपेंट है जिन्होंने इसके पहले हमारा सक्सेस हैबिट्स वाला प्रोग्राम वीआईपी भी किया। जिन्होंने बिजनेस ऑडिट के माध्यम से अपने बिजनेस को 300 बिंदुओं पर चेक भी किया। तो उनको यह पता था मेरे बिजनेस में मिसिंग क्या-क्या चीजें कहां गड़बड़ है। उनके पास सुधारने का रास्ता नहीं था। तो अक्सर क्या होता है जो लोग वीआईपी कर लेते हैं, ऑडिट भी कर लेते हैं, गुरुकुल भी कर लेते हैं, उनसे थोड़ा हमारा निजी प्रेम हो जाता है। एक रिलेशनशिप सी बन जाती है। तो एक दिन उन्होंने कंसलटेंसी के दौरान मुझसे अपनी पूरी समस्या खुलकर बताई और मुझे ऐसा लगा यह व्यक्ति मुझ पर इतना फेथ करता है। मुझे इसके लिए कुछ करना
1:35 चाहिए। तो, सबसे पहले यह समझते हैं कि उस एंटरप्रेन्योर के क्या चैलेंजेस थे। 3 साल से कंटीन्यूअस लॉस था। क्रेडिट बाजार में बहुत बढ़ गया था। क्रेडिट की पॉलिसी फॉलो नहीं होती थी। स्टाफ बहुत डीमोटिवेटेड था। वो अकाउंटेबिलिटी नहीं लेता था। डिलीवरीज राइट टाइम पर नहीं होती थी। इसकी वजह से रेपुटेशन डाउन हो रही थी और ओवरऑल इस सब का इंपैक्ट सेल्स पर था। सेल्स में किसी प्रकार की कोई ग्रोथ नहीं थी। तो ये पूरे प्रॉब्लम स्टेटमेंट है और मुझे यकीन है जितने भी एंटरप्रेन्योर, मैन्युफैक्चरर, डीलर, डिस्ट्रीब्यूटर, होलसेलर, रिटेलर इस शो को देख रहे होंगे इनमें से कई प्रॉब्लम आपके यहां होगी। अब सवाल ये आता है कि हमने उनको सॉल्यूशन क्या दिए? हम लंबी
2:22 चौड़ी राम कहानी ना सुनाते हुए सीधे सॉल्यूशन पर आएंगे। आगे बढ़ने के पहले आपको याद दिला दूं आप यह शो उज्जवल पाटनी YouTube चैनल पर देख रहे हैं। यदि यह किसी के माध्यम से फॉरवर्ड होकर आप तक पहुंचा है तो आप उज्जवल पाटनी YouTube चैनल सब्सक्राइब कर लें। हर दिन एक वीडियो आपकी जिंदगी बदल सकता है। लेकिन बड़ा प्रश्न यह है आप स्वयं बदलना चाहते हैं कि नहीं चाहते? हर सुबह फैक्ट्री शुरू होते साथ कोई व्यक्ति सीधे काम पर नहीं जाएगा। सबसे पहले हर डिपार्टमेंट में रिव्यू होगा। दिन भर की प्लानिंग होगी। चारों तरफ वाइट बोर्ड लगा दिए गए। उन वाइट बोर्ड में लिखा जाता था आज का प्रोडक्शन, आज की डिलीवरी, आज का पेमेंट कलेक्शन, कल
3:10 का आर्डर, रॉ मटेरियल का करंट स्टेटस। तो हर सुबह यह पता होता था आज क्या-क्या डिलीवर होना है? कल क्या-क्या डिलीवर होना है? हमारा अपना प्रोडक्शन स्टेटस क्या चल रहा है? रॉ मटेरियल में कहीं कोई शॉर्टेज तो नहीं है? और पैसे की वसूली बराबर हो रही है कि नहीं? और इस डेली रिव्यू कल्चर के माध्यम से हर एंप्लई टाइट हो गया। आईने के समान चीजें सामने दिखने लग गई। और इसका सबसे बड़ा गुरु मंत्र क्या है? डेली विजिबिलिटी क्रिएट्स डेली अकाउंटेबिलिटी। जो दिखेगा उसके लिए ही आप किसी को जिम्मेदार ठहरा सकते हैं। जो दिखेगा उस पर ही आप कोई निर्णय ले सकते हैं। जो दिखेगा उस पर ही आप कुछ करेक्शन कर सकते हैं। तो सबसे पहले अपने ऑर्गेनाइजेशन में डेली
3:56 मॉर्निंग रिव्यू कल्चर स्टार्ट कीजिए। तो सबसे पहले जितना भी पुराना उधार अटका था उसके लिए एक लेडी को नियुक्त किया गया। उसको चारप स्क्रिप्ट दी गई। उसको एक लिस्ट दे दी गई कि किन-किन बिजनेस ओनर्स को बहुत हार्शली नहीं बोलना है और किन-किन बिजनेस ओनर्स को यानी कि क्रेडिटर्स को आप हारशली बोल सकती हैं। उनके डेमो लिए गए और उसके बाद उस लेडी को एक डेडिकेटेड काम पर लगा दिया गया। सुबह से रात तक कॉलिंग। एक-एक दिन में पांच-प छह कॉल करके जान निकाल दो। सामने वाले से डेट लो। उस डेट पर फिर जान निकाल दो। थोड़ा सा रफ भी बोल दो तो चलेगा। याद रखना आज भी इंडिया में जब कोई
4:41 लेडी किसी को फोन करके हड़काती है तो सामने वाले के अंदर का मर्द थोड़ा सा सेंसिटाइज हो जाता है और बहुत बार ज्यादा जो परेशान करता है उसी का सबसे पहले पेमेंट होता है। तो यहां पर कैश कलेक्शन की पॉलिसी को राइट किया गया। दूसरी ओर क्रेडिट की पॉलिसी बनाई गई। रेट्स को कॉम्पिटिटिव कर दिया गया क्योंकि कैश नहीं रहेगा तो बिजनेस नहीं रहेगा। 70% एडवांसकि रेट कॉम्पिटिटिव हुआ तो 70% एडवांस लोग देने को तैयार हो गए और 30% जस्ट बिफोर डिस्पैचकि कस्टमर को मैक्सिमम प्रॉफिट हो रहा था इसलिए वो एडवांस देने को तैयार हो गया। जितने भी लोग कैश रिच होते हैं, आज भी वह मार्केट में कैश डिस्काउंट लेते हैं जब भी वह कैश पे करते हैं और बहुत सारे
5:29 लोग साउंड होते हैं। उनको लगता है यह सीडी जितना भी परसेंट की हो, यदि मुझे बच जाए तो यह मेरा प्रॉफिट। तो इस स्ट्रेटजी का सबसे बड़ा गुरु मंत्र क्या है? प्रॉफिट तभी आएगा जब पैसा टाइम पर आएगा। याद रखिए यदि आप कम प्रॉफिट मार्जिन में काम कर रहे हैं और आपका पेमेंट लेट आ रहा है तो आपकी सीसी आपकी ओडी आपके प्राइवेट लेंडर्स के इंटरेस्ट आपके ऑपरेशनल ओवरहेड्स आपके प्रॉफिट को खा जाएंगे। आपको समझ में भी नहीं आएगा कि व्यापार तो चल रहा है लेकिन पैसा नहीं आ रहा है। यदि मिलना प्रैक्टिकली पॉसिबल नहीं है आपकी फैक्ट्री बहुत आउटर में या आपके कस्टमर दूसरे सिटीज में है तो हर रोज पांच कस्टमर को कॉल करना है। कॉल करने का मेन
6:17 रीजन वन रिलेशनशिप बिल्डिंग। सेकंड फीडबैक हमारे प्रोडक्ट में क्या अच्छा है? आपको हमारे साथ काम करने में क्या-क्या दिक्कतें? क्या-क्या चैलेंज आ रहे हैं? हम आपको और बेहतर सेवाएं और प्रोडक्ट कैसे दे सकते हैं? आज हम जहां भी हैं, जो भी हैं, वह आपकी वजह से हैं। तो हर रोज जब आप पांच कस्टमर को कॉल करते हैं। उसमें से कुछ कस्टमर आपके करंट कस्टमर हैं। कुछ कस्टमर ऐसे हैं जो पहले बहुत व्यापार करते थे। अब आपसे नहीं करते। और कुछ कस्टमर ऐसे हैं जो पोटेंशियल कस्टमर हैं। आप उनको जानते हैं लेकिन वो आपके साथ काम नहीं करते। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा लगभग 30% कस्टमर वापस लौट कर आ गए और हम बिजनेस गुरुकुल में इसको रीएक्टिवेशन ऑफ ओल्ड कस्टमर्स के नाम
7:02 से आधा दिन तक पढ़ाते हैं। एक-एक स्क्रिप्ट देते हैं और मैंने खुद अपनी आंखों से पैन इंडिया हर बैच में चमत्कार होते देखे। तो 30% पुराने कस्टमर लौट आए। कुछ नए कस्टमर जुड़ गए और कुछ ने कुछ ऐसे फीडबैक दिए जिनकी वजह से प्रोडक्ट, सर्विसेस, टर्म्स, कंडीशंस इंप्रूव हो गए और व्यापार करने का एक बेहतर माहौल बना जो बाद में अगेन बिजनेस में कन्वर्ट हुआ। देखिए गुरुकुल का बहुत इंपॉर्टेंट हिस्सा है दो एनालिसिस। रोल मॉडल एनालिसिस और कॉम्पिटिट एनालिसिस। वहां पर हम इनकी सारी स्क्रिप्ट्स वगैरह भी देते हैं। तो रोल मॉडल एनालिसिस में जो भी हमसे 5 एक्स या 10 एक्स है जो हमारे रीजन में इंडस्ट्री लीडर है उसको एनालाइज किया कि वो कैसी
7:48 स्कीम और ऑफर देते हैं। वो ग्राहक के साथ ऐसा क्या करते हैं कि ग्राहक उनको छोड़कर नहीं जाता। ग्राहक बार-बार उनके पास आता है और ग्राहक दूसरे ग्राहकों को भी लेकर आता है। और सेकंड हमने की कॉम्पिटिट एनालिसिस कि हमारे कॉम्पिटिट इस वक्त क्या स्कीम्स और ऑफर चला रहे हैं। और हमने एक डेड बिजनेस में जिसको मार्केट भी मान चुका था डेड और ओनर भी मान चुका था डेड है। हमने उसको जिंदा करते हुए एक छोटी सी मार्केटिंग कैंपेन चलाई और बहुत सुपर अट्रैक्टिव ऑफर ल्च किया। खाली ध्यान यह रखा कैश फ्लो बराबर रहना चाहिए। एक भी आर्डर लॉस मेकिंग ऑर्डर नहीं होना चाहिए। भले प्रॉफिट कम बचे लेकिन प्रॉफिट बचना चाहिए और दूसरे कंपिटिटर्स की तुलना में हमारी टर्म्स, कंडीशन और प्राइसिंग बेटर
8:36 होनी चाहिए। तो थोड़ी मेहनत करके थोड़ा रिसर्च करके एक मिड पाथ निकाला। अभी 70 दिन हुए थे कि बिजनेस में बहुत हेल्दी साइंस नजर आने लगे। एंप्लाइजज़ का मोटिवेशन चेंज होने लगा। ओनर को खुद रास्ते दिखने लगे और वो मुझसे कहता है सर यह सब तो मैं कर सकता था। पता नहीं मैंने क्यों नहीं किया। अब एंप्लाइजस काफी समय से अपने नॉलेज के साथ स्टेल हो चुके थे। हमने उन एंप्लाइजस को खूब सारे वीडियोस देने शुरू किए। उज्जवल पाटनी YouTube चैनल पर प्रोडक्टिविटी के वीडियोस हैं। वो हमने जिनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ानी थी उनको दिए। लीडरशिप के वीडियोस हमने उनको दिए जिनको लीडर बनाना था। कस्टमर रिलेशनशिप के वीडियोस हमने उनको दिया जो कस्टमर फेसिंग
9:22 है। बातचीत की प्लेलिस्ट के वीडियोस हमने उनको दिया जिनको कस्टमर से बात करना चाहिए। इस तरीके से हमने उज्जवल पार्टनी YouTube चैनल पर फ्रीली अवेलेबल वीडियोस ऐसा मत सोचना कि कोई पेड कंटेंट। फ्रीली अवेलेबल वीडियोस को अलग-अलग बास्केट्स में डाला और अपने यहां एंप्लाइजज़ की लर्निंग स्टार्ट की। वहां पर जो सक्सेसफुल एंप्लई था वो अपनी स्टोरी भी सुनाता था कि भले हम दो-ती साल से लॉस में हैं लेकिन पहले हम कैसे करते थे। जो फील्ड में जाता था वो आकर सुनाता था कि हमारे दूसरे कॉम्पिटिट क्या कर रहे हैं और हमको क्या करना चाहिए। हर सैटरडे लर्निंग से अचानक ही एंप्लाइज अपग्रेड होने लग गए। मार्केट से नया इनपुट आने की वजह से, कॉम्पिटिटर्स का इनपुट आने की वजह से, रोल मॉडल्स का इनपुट आने की वजह से उनके काम करने के तरीके चेंज होने लग गए। बहुत सारे वीडियोस की मदद से उनको
10:08 नया रास्ता दिखने लगा और सबसे बड़ी चीज वो मोटिवेटेड हो गए। अब फैक्ट्री प्रॉफिट देखना स्टार्ट कर चुकी थी। अब डेली ऑलमोस्ट ऑर्डर बुक बैक होती थी। अब डिलीवरीज रिव्यू की वजह से बहुत टाइमली होती थी क्योंकि रॉ मटेरियल का चैलेंज नहीं आता था। एडवांस प्लानिंग चलती थी। हालांकि मैं फिर से कहूंगा यह सब बताने में बहुत सरल है। यदि आपने अब तक बिजनेस कोचिंग नहीं ली है तो मैं आपको सबसे पहले बिजनेस ऑडिट में इनवाइट करना चाहूंगा जहां पर आप आओ 300 फैक्टर्स पर अपने बिजनेस को पहले तो चेक करो मेरे बिजनेस में क्या राइट है क्या रॉन्ग है और क्या कमी है। फिर आप एक प्रोग्राम वीआईपी में आओ। वहां अपने आप को सुधारो। देखो आप सुधर जाओगे तो व्यापार सुधर जाएगा, परिवार सुधर जाएगा, संसार सुधर जाएगा। पहले अपने आप को
10:55 पावरफुल, विजनरी, पॉजिटिव, प्रोडक्टिव, लॉन्ग टर्म सोचने वाला बनाओ जो कि वीआईपी आपके लिए करेगा। और यदि आपको लगता है कि मेरे बिजनेस में अपॉर्चुनिटीज है, सिस्टम्स की कमी है, प्रोसेस की कमी है, मैं ओवरलोड हो गया हूं तो आप बिजनेस गुरुकुल में आओ। देखो मैंने तीन दवाइयां दे दी। अब आपको चुनना है कि कौन सी दवा आपके लिए काम करेगी और यदि बड़ा सपना है तो पहली फुर्सत में आप ट्रायंगल को कर दो। क्योंकि जिस व्यक्ति की आज मैं कहानी सुना रहा हूं उसका रिजल्ट उस ट्रायंगल की वजह से आया है। तो सबसे बड़ा स्टेप मैं आपको अब बताने जा रहा हूं। और देखिए स्क्रीन पे अभी तक मैंने जितनी भी चीजें बताई है सबकी डेट्स आ गई। अब निर्णय आपको लेना है कि जहां है वहीं रहना है या अपने बिजनेस का गेम चेंज करना है।
11:41 एक व्यक्ति को सेल्स लीडर अपॉइंट किया। एक व्यक्ति को प्रोडक्शन लीडर अपॉइंट किया। एक व्यक्ति को पेमेंट कलेक्शन लीडर अपॉइंट किया। और एक व्यक्ति को परचेस लीडर अपॉइंट किया। उनके साथ बैठकर खूब डीप ब्रेन स्टॉर्मिंग किया। उन सबको उनकी शक्ति और अकाउंटेबिलिटी का एहसास कराया। उन सबको कहा कि अपने टारगेट्स लो। जैसे ही उन्होंने टारगेट लिया हमने टारगेट लिंक्ड इंसेंटिव अनाउंस किया और अचानक ही कंपनी बदल गई। 90 दिन के अंदर के चेंजेस आपको बता रहा हूं। कंपनी प्रॉफिट में आ चुकी थी। क्रेडिट पॉलिसी नई इफेक्टिव हो चुकी थी। कैश कलेक्शन पहले की तुलना में बहुत रोबस्ट हो चुका था। टीम अब फुल्ली मोटिवेटेड थी। ओनर का लोड कम हो चुका था। क्योंकि चारों हेड्स जो बनाए गए, चारों की
12:27 कोर टीम जो बनाई गई, उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को पूरी तरीके से उठाना स्टार्ट कर दिया था। कस्टमर से फीडबैक लेने की वजह से डिलीवरी टाइम इंप्रूव हो चुका था। प्रोडक्ट इंप्रूव हो चुका था। टर्म्स एंड कंडीशंस इंप्रूव हो चुकी थी। और 90 दिन के अंदर कंपनी प्रॉफिट पर आ गई। बचे हुए 90 दिन क्योंकि उसकी कहानी मैं आपको नहीं सुना सकता। बचे हुए 90 दिन में हमने अगले दो-ती साल का सफर तय कर लिया और अब वो कंपनी अपने रीजन की लीडर है। इतना डिटेल में मैंने आपको इसलिए बताया ताकि आपको यह समझ आए कि आपको अपने व्यापार में क्या परिवर्तन करना है और आप सफल हो क्योंकि मैं कब जीतूंगा जब आप सफल होंगे आपकी सफलता में मेरी सफलता है। शुक्रिया। धन्यवाद। थैंक यू। मैं तैयार हूं। मैं तैयार हूं।
13:17 मैं तैयार हूं। मैं तैयार हूं।