chapter 1 मानव भूगोल प्रकृति एवं विषय क्षेत्र class12 geography 2024-25 Human Geography Nature scope

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो कक्षा 12 भूगोल के पहले अध्याय, "मानव भूगोल: प्रकृति एवं विषय क्षेत्र" का विस्तृत विवरण है। इसमें भूगोल की दो शाखाओं - भौतिक भूगोल और मानव भूगोल - के बीच अंतर को समझाया गया है। मानव भूगोल की परिभाषाएँ, इसकी प्रकृति, मानव का प्रकृतिकरण, प्रकृति का मानवीकरण, पर्यावरणीय निश्चयवाद, संभववाद और मानव भूगोल के विभिन्न क्षेत्रों और उपक्षेत्रों पर प्रकाश डाला गया है।

  • भूगोल को दो भागों में बांटा गया है: भौतिक भूगोल और मानव भूगोल।
  • मानव भूगोल में मानव और उसके क्रियाकलापों का अध्ययन किया जाता है।
  • मानव भूगोल की तीन मुख्य परिभाषाएँ रेटजेल, एलनसी सैंपल और पॉल विडाल द्वारा दी गई हैं।
  • मानव का प्रकृतिकरण तब होता है जब मनुष्य प्रकृति के नियमों के अनुसार खुद को ढाल लेता है।
  • प्रकृति का मानवीकरण तब होता है जब मनुष्य प्रौद्योगिकी का उपयोग करके प्रकृति को अपने अनुसार ढाल लेता है।
  • पर्यावरणीय निश्चयवाद, संभववाद और नव-निश्चयवाद मानव और प्रकृति के बीच संबंधों को समझाने के विभिन्न दृष्टिकोण हैं।
  • मानव भूगोल के कई क्षेत्र हैं, जैसे सामाजिक भूगोल, नगरीय भूगोल, राजनीतिक भूगोल, जनसंख्या भूगोल, आवास भूगोल और आर्थिक भूगोल।

परिचय

इस वीडियो में कक्षा 12 भूगोल के अध्याय "मानव भूगोल: प्रकृति एवं विषय क्षेत्र" का अध्ययन किया जाएगा। टेलीग्राम ग्रुप और वेबसाइट पर नोट्स और अन्य अध्ययन सामग्री उपलब्ध है।

भूगोल का विभाजन

भूगोल को दो मुख्य भागों में बांटा गया है: भौतिक भूगोल और मानव भूगोल। भौतिक भूगोल में पृथ्वी की संरचना, महासागर, महाद्वीप, भू-आकृति, वायुमंडल, सौर विकिरण, जल, जलवायु और ज्वालामुखी जैसी चीजों का अध्ययन किया जाता है। मानव भूगोल में मानव और मानव से संबंधित सामाजिक, जनसंख्या, राजनीतिक, आवास और आर्थिक पहलुओं का अध्ययन किया जाता है।

मानव भूगोल की परिभाषाएँ

मानव भूगोल की तीन प्रमुख परिभाषाएँ रेटजेल, एलनसी सैंपल और पॉल विडाल द्वारा दी गई हैं। रेटजेल के अनुसार, मानव भूगोल मानव समाजों और धरातल के बीच संबंधों का संश्लेषित अध्ययन है। सैंपल के अनुसार, यह अस्थिर पृथ्वी और क्रियाशील मानव के बीच परिवर्तनशील संबंधों का अध्ययन है। विडाल के अनुसार, यह पृथ्वी को नियंत्रित करने वाले भौतिक नियमों और उस पर रहने वाले जीवों के बीच संबंधों का अध्ययन है।

मानव भूगोल की प्रकृति

मानव भूगोल भौतिक पर्यावरण और मानव जनित सामाजिक-सांस्कृतिक पर्यावरण के बीच अंतर-संबंधों का अध्ययन है। भौतिक पर्यावरण में नदी, पहाड़ और वन जैसी प्राकृतिक चीजें शामिल हैं। सामाजिक-सांस्कृतिक पर्यावरण भौतिक पर्यावरण के अनुसार बनता है, जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों का रहन-सहन और खानपान अलग होता है।

मानव का प्रकृतिकरण और प्रकृति का मानवीकरण

मानव का प्रकृतिकरण तब होता है जब मनुष्य प्रकृति के नियमों को नहीं जानता और उससे डरता है, इसलिए वह अपने आप को प्रकृति के अनुसार ढाल लेता है। प्रकृति का मानवीकरण तब होता है जब मनुष्य को अपने आसपास की चीजों का ज्ञान हो जाता है और वह प्रौद्योगिकी का विकास करके प्रकृति को अपने अनुसार ढालने लगता है। प्रौद्योगिकी समाज के सांस्कृतिक विकास का सूचक है। प्रकृति के नियमों को समझने के बाद ही मनुष्य ने प्रौद्योगिकी का विकास किया है।

पर्यावरणीय निश्चयवाद

जब मनुष्य आदिम अवस्था में था और उसे प्रौद्योगिकी का ज्ञान नहीं था, तब वह प्रकृति की शक्तियों से डरता था और उसके अनुसार अपने आप को ढाल लेता था। इस प्रकार की अन्योन्य क्रिया को पर्यावरणीय निश्चयवाद कहा जाता है।

प्रकृति का मानवीकरण

जैसे-जैसे मनुष्य को प्रकृति के नियमों का ज्ञान होता गया, उसने बेहतर प्रौद्योगिकी का विकास किया और अभाव की अवस्था से स्वतंत्रता की अवस्था की ओर अग्रसर हुआ। मनुष्य ने उच्च भूमि पर स्वास्थ्य विश्राम स्थल, बड़े नगर, खेत, खलिहान, फलोद्यान, चरागाह, पत्तन और समुद्री मार्ग बनाए, और अंतरिक्ष में उपग्रह भेजे।

संभववाद

संभववाद का सिद्धांत कहता है कि प्रकृति हमें अवसर देती है और मानव उन अवसरों का उपयोग करता है, जिससे प्रकृति का मानवीकरण हो जाता है।

नव-निश्चयवाद

भूगोलवेत्ता ग्रिफिथ टेलर ने नव-निश्चयवाद की संकल्पना प्रस्तुत की, जो पर्यावरणीय निश्चयवाद और संभववाद के बीच का मार्ग है। यह सिद्धांत कहता है कि हमें पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना संभावनाओं को उत्पन्न करना चाहिए।

मानव भूगोल के क्षेत्र और उपक्षेत्र

मानव भूगोल के कई क्षेत्र हैं, जैसे सामाजिक भूगोल, नगरीय भूगोल, राजनीतिक भूगोल, जनसंख्या भूगोल, आवास भूगोल और आर्थिक भूगोल। इन क्षेत्रों के अंतर्गत कई उपक्षेत्र आते हैं, जैसे व्यवहारवादी भूगोल, सामाजिक कल्याण भूगोल, सांस्कृतिक भूगोल, लिंग भूगोल, चिकित्सा भूगोल, सैन्य भूगोल, निर्वाचन भूगोल, संसाधन भूगोल और सांस्कृतिक भूगोल।

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Transcript

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0:01 हेलो एवरीवन आज के इस वीडियो में हम बात करेंगे क्लास 12थ की जियोग्राफी का चैप्टर फर्स्ट है मानव भूगोल प्रकृति एवं विषय क्षेत्र इस चैप्टर को हम यहां पर डिटेल में पढ़ने वाले हैं ठीक है और आप हमारे टेलीग्राम से क्वेश्चन पेपर हो गया सैंपल पेपर हो गया वह भी आपको हमारे ग्रुप के अंदर आसानी से मिल जाएगा और डिटेल में अगर आप नोट्स पढ़ना चाहते हो तो आपको हर तरह के नोट्स हमारी वेबसाइट पर मिल जाएंगे और ग पर आप सर्च कर सकते हो और बहुत ही जल्दी हम अपनी वेबसाइट को अपडेट करके इसमें बहुत सारे फ्री नोट्स और डालने वाले हैं आप मुझे ्र पर फॉलो कर सकते हो एक लव स्टडी पॉइंट मेरा यूजर नेम है और आप वहां से मुझसे कुछ पूछना चाहते हैं तो आप मुझे वहां डायरेक्ट मैसेज भी कर सकते हैं ठीक

0:58 है और एक बार सिलेबस देख लीजिए मानव भूगोल प्रकृति एवं विषय क्षेत्र पहला चैप्टर हम पढ़ रहे हैं टोटल आठ चैप्टर हैं आज पहला चैप्टर कंप्लीट हो जाएगा तो सात चैप्टर जो है वो आपके बच जाएंगे अब बात करते हैं हम सीधा अपने टॉपिक पे टॉपिक देखिए सबसे पहले बात करते हैं हम सब्जेक्ट की कि ज्योग्राफी सब्जेक्ट जो हम करने वाले हैं तो यह जो ज्योग्राफी है जिसे हम हिंदी में भूगोल कहते हैं इसको हम दो कैटेगरी में बांट के पढ़ते हैं ठीक है दो कैटेगरी कौन-कौन सी है आप यह समझिए देखिए एक तो है हमारा भौतिक भूगोल जिसको हम क्या बोलते हैं फिजिकल जियोग्राफी दूसरा हमारा है मानव भूगोल मानव भूगोल के अंदर हम क्या पढ़ते हैं मानव के बारे में और भौतिक भूगोल में हम क्या पढ़ते हैं कि जो भी हमारे चारों ओर जैसे आप पृथ्वी की संरचना हो गई महासागर महाद्वीप भू आकृति वायुमंडल सौर विकरण जल जलवायु ज्वालामुखी यह सब हम भौतिक भूगोल के अंदर पढ़ते हैं लेकिन अगर हम बात करते हैं मानव भूगोल की तो मानव भूगोल के अंदर हम मानव और मानव से संबंधित चीजों को ही पढ़ते हैं जैसे सामाजिक भूगोल

1:51 हो गया जनसंख्या राजनीतिक भूगोल मानव आवास आर्थिक विकास ठीक है ये पढ़ते हैं यह भूगोल आप ऑलरेडी क्लास 11थ में पढ़ चुके के हो आप इसको पढ़कर ही आए हो क्लास 12थ में और क्लास 12थ में आपको यह मानव भूगोल पढ़नी है ठीक है तो भूगोल आप समझ गए हो कि इसको हमें दो कैटेगरी में बांट के पढ़ना है अब हम बात करेंगे सीधा-सीधा अपने मेन मेन टॉपिक की तो टॉपिक में सबसे पहला टॉपिक हमारा हो जाता है कि मानव भूगोल की मुख्य परिभाषाएं बताइए देखिए मानव भूगोल की तीन प्रमुख जो भूगोल वेता हैं जो विद्वान है उन्होंने परिभाषा बता रखी है तो मानव भूगोल की अगर हम परिभाषा हों की बात करें तो कौन-कौन से वो हमारे भूगोल वेता हैं तो देखिए इसमें हमारे रेट ज आ जाते हैं एलएनसी सैंपल आ जाते हैं पॉल विडाल आ जाते हैं ठीक है तो यह तीनों विद्वानों ने अपने-अपने अनुसार मानव भूगोल की क्या की है परिभाषा दे रखी

2:44 है अब बात करेंगे सबसे पहले कि रेट जेल के अनुसार रेट जेल क्या कहते हैं तो देखिए रेट जेल का कहना है कि मानव भूगोल जो है वह मानव समाजों और धरातल के बीच में जो संबंध होते हैं उसका संश्लेषित अध्ययन है अब देखिए एक बात आपको याद रख की जो परिभाषा होती है ना परिभाषा हमको उसी लैंग्वेज में याद करनी होती है जिस लैंग्वेज में दी गई है इसको आप चेंज नहीं कर सकते तो रेट जेल ने यह परिभाषा दे रखी है अब यहां पे हमें क्या समझना है कि यह परिभाषा आपके पेपर में आ सकती है और आजकल एमसीक्यू क्वेश्चन आने लगे हैं तो एमसीक्यू क्वेश्चन में क्या होता है आपको पहले से ही परिभाषा लिख के दे देंगे क्वेश्चन के अंदर और आपसे ये पूछ लेंगे बताइए यह परिभाषा किसके द्वारा दी गई है और ऑप्शन में आपको नाम दे देंगे रेट जल हो गया विडाल हो गया ठीक है या सैंपल हो गया ऐसे आपसे दे देंगे फिर अगला ये तो थी हमारी रेट जल के अनुसार परिभाषा नेक्स्ट परिभाषा जो है हमारी वह है एलएनसी सैंपल के अनुसार तो सैंपल जी ने क्या कहा है इसको समझते हैं सैंपल जी है जो इनका कहना है कि मानव भूगोल जो है वह अस्थिर पृथ्वी

3:41 और क्रियाशील जो मानव है उसके बीच में जो परिवर्तनशील संबंध है उसका अध्ययन है यानी कि यह कहते हैं कि मानव भूगोल जो है वह अस्थिर पृथ्वी और क्रियाशील मानव के बीच में परिवर्तनशील जो संबंध होते हैं उसका अध्ययन करना होता है नेक्स्ट इसके बाद आ जाता है हमारा पोल विडाल देखो इनका नाम बहुत बड़ा है पल विडाल क्या कहते हैं इनके अनुसार थोड़ा परिभाषा को हम समझते हैं तो पोल विडाल का कहना है कि हमारी पृथ्वी को नियंत्रित करने वाले जो भौतिक नियम होते हैं जो भी भौतिक नियम हमारी पृथ्वी को नियंत्रित करते हैं वो तथा इस पर रहने वाले जीव जीव में मनुष्य आ जाएंगे ठीक है जीव जंतु आ जाएंगे ये सभी इनके मध्य में जो संबंध है और इसके जो अधिक संश्लेषित ज्ञान है उससे जो उत्पन्न जो संकल्पना है जो कांसेप्ट है उसको इन्होंने मानव भूगोल माना है तो आपने देखा कि तीनों विद्वानों ने अपने-अपने ने अनुसार इसकी परिभाषा जो है अलग-अलग तरीके से दे रखी है तो इनमें से क्या होता है आपके कोई भी एक परिभाषा दे देंगे और आपसे पूछ लेंगे बताइए यह कौन सी परिभाषा है और किसके द्वारा दी गई है तो आपको पता होना चाहिए इसके बाद

4:41 अपना टॉपिक है मानव भूगोल की प्रकृति यानी कि जो हमारा ह्यूमन ज्योग्राफी होती है इसका क्या नेचर होता है ठीक है इसको समझते हैं अब देखो मैं आपके सामने किताबी लैंग्वेज रखता हूं ये आपकी किताब में दी हुई है तो इसको हम थोड़ा सा समझने की कोशिश करेंगे देखो किताब की लैंग्वेज से बहुत ही मुश्किल है आपको समझना बहुत मुश्किल होगा यह कह हैं कि मानव भूगोल जो है वह भौतिक पर्यावरण यानी कि जो हमारे जो फिजिकल एनवायरमेंट है वो और मानव जनित सामाजिक सांस्कृतिक पर्यावरण के अंतर संबंध इनके बीच में जो इंटर रिलेशन होता है ठीक है उसका अध्ययन होता है और इसकी परस्पर अन्योन क्रिया होती है यानी इंटरेक्शन होता है तो ये तो हो गया हिंदी में इसी को अगर हम इंग्लिश में देखना चाहे तो आप देख सकते हो कि जो ह्यूमन ज्योग्राफी होती है इसमें हम क्या स्टडी करते हैं कि इंटर रिलेशनशिप का स्टडी करते हैं बिटवीन किसके किनके बीच में तो फिजिकल एनवायरमेंट यानी कि जो हमारा भौतिक पर्यावरण था इसके बीच में और जो हमारा सोशियो कल्चर जो हमारा एनवायरमेंट है इसके बीच में जो आप देखते हैं इंटर रिलेशनशिप होती है इसको कहा गया है मानव भूगोल की

5:39 प्र प्रकृति यानी कि नेचर अब यहां पे आपको दोनों ही लैंग्वेज समझ में नहीं आएगी क्योंकि किताब की लैंग्वेज है बहुत ही टफ है मैं आपको आसान भाषा में समझाऊ यहां पे आसान भाषा में समझाऊ अब आपको समझ में आ जाएगा यहां पे देखो क्या था प्रकृति में दो टर्म यूज कर रखी थी एक तो भौतिक पर्यावरण अब ये भौतिक पर्यावरण क्या होता है देखिए भौतिक पर्यावरण जो हमारे चारों तरफ होता है जो भी फिजिकली हमारे चारों तरफ अवेलेबल है जैसे मान लो नदी हो गई पहाड़ हो गए ठीक है या फिर नदी पहाड़ के अलावा कोई भी प्राकृतिक चीज वन हो गया ये सब जो भी हमारे चारों ओर है वो भौतिक पर्यावरण में आ जाता है हमारा फिजिकल एनवायरमेंट दूसरी टर्म यूज करी हुई है यहां पे वो है सामाजिक सांस्कृतिक पर्यावरण सामाजिक सांस्कृतिक पर्यावरण को हम बोलते हैं सोशियो कल्चर एनवायरमेंट ठीक है यही दो टर्म यूज हो रख है आपकी अब आप समझिए भौतिक पर्यावरण में क्या होता है भौतिक पर्यावरण में अगर आप देखोगे फिजिकल एनवायरन ट में तो आओ हमारे चारों और जो भी चीजें होती है वो सब भौतिक पर्यावरण में हो जाता है इसके बाद सेकंड नंबर पे हमारी जो है सामाजिक सांस्कृतिक पर्यावरण इसका

6:37 मतलब क्या है कि देखिए जैसा हमारा फिजिकल पर्यावरण होगा यानी भौतिक पर्यावरण होगा वैसी ही हमारी सामाजिक सांस्कृतिक पर्यावरण हो जाएगा यानी वैसे ही हमारा कल्चर हो जाएगा एग्जांपल के लिए समझिए मान लीजिए कोई ऐसा एरिया है जो पहाड़ी एरिया है पहाड़ है अब पहाड़ी एरियो में आप देखोगे कि उबड़ खाबड़ होता है ठीक है लोगों को आने जाने में दिक्कत होती है वहां पे सुविधाएं भी आसानी से नहीं पहुंचाई जा सकती तो यहां के जो लोग होंगे इनका कल्चर आपको अलग दिखेगा ठीक है यहां के लोग जो होंगे उनका पहनावा उनका रहन-सहन उनका खानपान आपको अलग दिखेगा अगर हम बात करते हैं किसी ऐसी जगह की जो बहुत ही गर्म है ठीक है जैसे मान लो राजस्थान का कोई ऐसा एरिया है जो कि काफी गर्म एरिया है वहां पे बहुत गर्मी होती है तो यहां के लोगों का जो पहनावा होगा इनका जो कल्चर होगा इनका जो खानपान होगा सब कुछ अलग होगा तो कहने का मतलब ये है कि जैसा हमारा पर्यावरण होता है ठंडे प्रदेश देशों में आप देखोगे वहां के लोगों का रहन-सहन उनका पहनावा अलग होता है ठंडे प्रदेशों वाले लोगों का अलग होगा गर्म प्रदेशों वालों का

7:36 अलग होगा पहाड़ों में रहने वाले लोगों का जो कल्चर होगा वो अलग होगा उनका सब कुछ डिफरेंट होगा तो जैसा हमारा फिजिकल एनवायरमेंट होता है ऐसा ही हमारा कहीं ना कहीं कल्चर हो जाता है ऐसा ही हमारा एनवायरमेंट बन जाता है जैसा कि हमारा जो भौतिक पर्यावरण होगा उसके अकॉर्डिंग ही हम ढल जाते हैं ये बताया गया और इन दोनों का ही अध्ययन इन दोनों के बीच में जो इंटर रिलेशनशिप होती है इसी का अध्ययन किसमें किया जाता है मानव भूगोल में तो यही मानव भूगोल के प्रकृति है आई होप आपको समझ में आया होगा आसान करके समझाया है इसके बाद देखो एक टॉपिक है यह बहुत ज्यादा आपके आता है पेपर में इसमें से एक क्वेश्चन आता है पेपर में या तो आपसे ये पूछ लेंगे बताइए मानव का प्रकृतिक क्या है ठीक है या यह पूछ लेंगे बताइए प्रकृति का मानवीकरण क्या है इन दोनों में क्या अंतर है या इन दोनों में से किसी एक टॉपिक को पूछ लेते हैं तो देखिए मानव का प्रकृतिक क्या होता है आसान शब्दों में समझिए देखिए क्या था कि मानव यानी कि मनुष्य जो है मनुष्य पहले प्रकृति के नियमों को नहीं जानता था ठीक है

8:33 प्रकृति के नियमों को जब वह नहीं जानता था जब वह आदिम अवस्था में था तो वह बहुत डरता था प्रकृति से डरता था मान लो बिजलियां कड़क गई आसमान में तो वह डर जाता था मानव को लगता था कि भगवान जो है वह हमसे नाराज हो गए हैं इसलिए ऐसा हो रहा है बाढ़ आ जाएगी भूकंप आ जाएगा या कोई भी प्राकृतिक घटना हो जाती थी वह डर जाता था ठीक है क्योंकि वह प्रकृति से बहुत डरता था तो उसको ज्यादा नॉलेज नहीं थी तो यह तब वह अपने आप को प्रकृति के अनुसार डालता था ठीक है यानी कि अपने आप को वो प्रकृति के अनुसार ढाल लेगा जब मनुष्य अपने आप को प्रकृति के अनुसार ढाल लेगा तो उसको बोलते हैं मानव का प्रकृतिक क्योंकि वो प्रकृतिक हो रहा है उसका दूसरी तरफ है प्रकृति का मानवा करण मानवीकरण इसका मतलब क्या है देखिए जब मनुष्य को अपनी सराउंडिंग अपने आसपास जो भी है उन सब चीजों का जब ज्ञान हो जाता है मनुष्य को ठीक है तब वह क्या होता है वह टेक्नोलॉजी का विकास करता है और धीरे-धीरे वह प्रकृति की जो चीजें होती है ठीक है प्राकृतिक आपदा हो गई या जो भी है उसको वह आसानी से समझने लग जा और कहीं

9:29 ना कहीं प्रकृति को अपने अनुसार ढालने लग जाता है तो उसको बोलते हैं प्रकृति का मानवीकरण ठीक है एक जगह है मानव का प्रकृतिक एक है प्रकृति का मानवीकरण आई होप आपको ये दोनों टर्म समझ में आई होगी इसको थोड़ा सा ना मैं आपको एक्सप्लेन करके बताता हूं तो आपको अच्छे से समझ में आएगा देखिए अब यहां पे एक चीज है मानव का प्रकृतिक पढ़ रहे हैं तो यहां पे मैंने आपको पहले ही बता दिया था जो टेक्नोलॉजी होती है प्रौद्योगिक को इंग्लिश में टेक्नोलॉजी बोलते हैं ठीक है टेक्नोलॉजी जो है वो किसी समाज के सांस्कृतिक विकास के स्तर की सूचक होती है कहने का मतलब क्या है कि जो हमारी जो टेक्नोलॉजी होती है जैसी हमारी टेक्नोलॉजी होगी कहीं ना कहीं हमारा वैसा ही सांस्कृतिक विकास माना जाता है ठीक है तो फिर मानव जो है वो प्रकृति के नियमों को अच्छे तरीके से समझकर ही समझने के बाद ही समझकर ही टेक्नोलॉजी का विकास कर पाया है बिल्कुल अगर मानव को मान लीजिए प्रकृति के नियम ही नहीं पता होंगे तो वह कभी भी टेक्नोलॉजी का विकास नहीं कर पाएगा मानव को जब गति के नियम पता लगे तभी उसने एरोप्लेन बना दिया ठीक है और एग्जांपल बहुत सारे हैं देखिए

10:25 जैसे यहां पे एक एग्जांपल दे रखा है कि घर्षण और ऊष्मा की संकल्प कल्पनाओं ने अग्नि की खोज में हमारी सहायता करी है जब यानी कि हमने घर्षण और ऊष्मा के कांसेप्ट को समझा उसकी संकल्पना को समझा तभी हम अग्नि की खोज कर पाए अगर हमें यह कांसेप्ट ही नहीं समझ में आता प्रकृति का यह नियम ही नहीं समझ में आता तो इसकी अग्नि की खोज हम नहीं कर पाते ठीक है इसके बाद देखो नेक्स्ट है कि डीएनए और अनुवांशिकी के रहस्य को जब हम जान गए यानी मनुष्य जब जान गया तब वह बहुत सारी बीमारियों के पे विजय पाने के योग्य बन गया उसने कई सारे एंटीवायरस और ऐसी दवाइयां बना दी इसके बाद क्या है अधिक तीव्र गति से चलने वाले जो यान है जो एरोप्लेन वगैरह होते हैं उसको विकसित करने के लिए भी वायु की गति के नियम जो थे इसका इसको जान पाए हैं अब आप सोचो कि अगर वायु की गति के नियम ही नहीं जान पाते तो कभी भी एरोप्लेन बनाना पॉसिबल नहीं था तो यहां पे सीधा-सीधा आपको यह समझा दिया गया है कि प्रकृति के नियमों को जानने के बाद ही मनुष्य ने क्या किया अपना विकास किया है इसके बाद देखते हैं नेक्स्ट

11:23 है कि प्रकृति प्रौद्योगिकी को विकसित करने के लिए महत्त्वपूर्ण है अगर जब तक हम प्रकृति के ज्ञान को नहीं जा बन पाएंगे ना प्रकृति को नहीं समझ पाएंगे तब तक हम टेक्नोलॉजी को का विकास कहीं ना कहीं नहीं कर पाएंगे प्रौद्योगिकी जो है टेक्नोलॉजी जो है वह मनुष्य पर पर्यावरण की बंदिशों को कम करती है बहुत अच्छा एग्जांपल है देखिए पर्यावरण की कई सारी बंदिश होती है उसको कहीं ना कहीं टेक्नोलॉजी के जरिए हम उसको कम कर सकते हैं और तब यह तभी कर सकते हैं जब हमें प्रकृति के नियमों का पता हो अब एग्जांपल मैं आपके सामने देता हूं मान लीजिए कोई गर्म जगह है कोई देश है वहां पे बहुत गर्मी रहती है वहां पर टेंपरेचर रहता है 50 डिग्री सेल्सियस ठीक है अब लोगों को वहां पे रहने में कितनी समस्या होगी सोचो आप लोग निकलेंगे धूप में जुलस जाएंगे कितनी गलत कंडीशन होगी लेकिन फिर भी क्या वहां लोग रहते नहीं है रहते हैं अब वो प्रकृति की बंदिश है कि भाई इतना टेंपरेचर है लेकिन मनुष्य ने क्या करा एसी बना दिया अब जब मनुष्य ने एसी डेवलप कर दिया तो वो उस गर्मी को कहीं ना कहीं कम कर सकता है

12:17 एसी से उस टेंपरेचर को कंट्रोल कर सकता है अब देखो नेचर ने हमको इतना टेंपरेचर दे दिया लेकिन हमने मानव ने टेक्नोलॉजी का विकास करके उसको कम कर दिया आपको समझ में आ रहा है बिल्कुल आसान है अब सोचो मान लो कोई ऐसी जगह है जहां पर बहुत ठंड रहती है टेंपरेचर आपका माइनस में चला जाता है 0 डिग्री से भी नीचे चला जाता है लोग वहां पर बहुत दिक्कतों में रहते हैं बहुत समस्या में रहते हैं अब वहां पे लोगों ने ही टेक्नोलॉजी का ज्ञान प्राप्त करके हीटर और इलेक्ट्रिसिटी बिजली वगैरह का कहीं ना कहीं अ खोज कर दी बना दिया अब हीटर के जरिए ये क्या है उस टेंपरेचर को कहीं ना कहीं कंट्रोल कर सकते हैं काबू कर सकते हैं तो यही आपको बताया है यहां पे कि कहीं ना कहीं जो प्रकृति का ज्ञान है है वो होना जरूरी है प्रकृति का ज्ञान होने के बाद ही मनुष्य टेक्नोलॉजी का विकास कर पाया है और टेक्नोलॉजी के विकास के कारण ही मनुष्य जो है पर्यावरण की जो बंदिश हैं उसको कहीं ना कहीं कम कर पाया है ठीक है इसके बाद देखते हैं और आगे प्राकृतिक पर्यावरण से अन्योन क्रिया की आरंभिक अवस्थाओं में मानव इससे अत्याधिक प्रभावित

13:18 हुआ था और इन्होंने प्रकृति के आदेशों के अनुसार अपने आप को ढाल लिया था बिल्कुल देखिए जब मनुष्य आदिम अवस्था में था जब उसे ज्यादा प्रकृति का ज्ञान नहीं था वह ज्यादा जानता नहीं था तब उसने अपने आप को प्रकृति के अनुसार ढाल लिया था क्योंकि वह प्रकृति से डरता था प्रकृति के प्रकोप से डरता था ठीक है और हमेशा वह क्या करता था प्रकृति के अनुसार अपने आप को ढाल के चलता था प्रकृति को वह मां मानता था प्रकृति की वह पूजा करता था यह सारी चीजें हैं जब आदिम अवस्था में थे इसका कारण यह है कि टेक्नोलॉजी का स्तर जो था बहुत ही निम्न था उस समय में टेक्नोलॉजी नहीं थी लोगों को इतना ज्ञान ही नहीं था ठीक है टेक्नोलॉजी नहीं थी और मानव के सामाजिक विकास को की अवस्था अगर हम देखें तो आदिम अवस्था में था मनुष्य जो था अपने आदिम अवस्था में था ज्यादा टेक्नोलॉजी वगैरह नहीं थी ज्यादा प्रकृति का उसको ज्ञान नहीं था वह डरता था यह सब है इसके बाद देखो आदिम मानव समाज और प्रकृति की प्रबल शक्तियों के बीच इस प्रकार की अन्योन क्रिया यह जो इंटरेक्शन होता है इसी को पर्यावरणीय निश्चयवाद कहा

14:15 गया है अब यह पर्यावरणीय निश्चयवाद की एक थ्योरी है यह आपको पता होनी चाहिए ठीक है यह पेपर में आ जाता है कभी-कभी देखो दो नंबर में आएगा एक या दो नंबर का क्वेश्चन आता है कि आदिम मानव यानी मानव जब अपनी आदिम अवस्था में था जब वो टेक्नोलॉजी के बारे में ज्यादा नहीं जानता था ज्यादा उसे टेक्नोलॉजी के बारे में नहीं पता था उस समय में क्या था कि वह प्रकृति की जो शक्तियां हैं कहीं ना कहीं उसके साथ जो उसकी अन्योन क्रिया होती थी उससे पर्यावरणीय निश्चयवाद का कांसेप्ट निकला है इसी को पर्यावरणीय निश्चयवाद कहा गया है ठीक है अब चलते हैं आगे और डिटेल में समझते हैं थोड़ा प्रौद्योगिकी विकास की उस अवस्था में हम प्राकृतिक मानव की कल्पना कर सकते हैं जो प्रकृति को सुनता था उसकी प्रचंड होता से डरता था और उसकी पूजा कर करता था ये वो वाली कंडीशन है मानव की जब मानव को प्रकृति के नियमों का ज्यादा ज्ञान नहीं था वो उसकी आदिम अवस्था थी उस अवस्था में मानव क्या करता था प्रकृति को सुनता था उसकी प्रचंड होता जो होती है उससे डर जाता था ठीक है और उसकी पूजा भी करता था यह है इसके बाद है प्रकृति का मानव मानवीकरण

15:19 हमने क्या पढ़ा मानव का प्रकृतिक अब पढ़ेंगे प्रकृति का मानवीकरण अब देखो जैसे-जैसे मनुष्य को प्रकृति के नियमों का ज्ञान हो जाता है उसके बाद क्या होता है यह समझते हैं देखिए समय के साथ-साथ लोग अपने पर्यावरण और प्राकृतिक जो बल है उसको समझने लगे अब जब लोगों को प्रकृति और प्रकृति का ज्ञान होने लगा तो क्या हुआ उन्होंने अपने सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के साथ-साथ जो मानव था वह बेहतर और अधिक सक्षम टेक्नोलॉजी का विकास करने लगा जैसे-जैसे मतलब मानव को अपने सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के बारे में मतलब कहीं ना कहीं उसको समाज और सराउंडिंग के बारे में जानकारी मिली तो वो सक्षम बेहतर टेक्नोलॉजी का विकास कर पाया क्यों कर पाया क्योंकि उसको प्रकृति का ज्ञान हुआ था ठीक है वे अभाव की अवस्था से स्वतंत्रता की अवस्था की ओर अग्रसर हुए यानी कि पहले जब मानव आदिम अवस्था में था जब उसको आग की खोज नहीं थी आग के बारे में नहीं जानता था वह ठीक है वो उसने गाड़ियां नहीं बनाई थी पहिए के बारे में नहीं जानता था वह बिल्कुल आदिम अवस्था में था शिकार करता था ऐसे नॉर्मल सी जिंदगी जी लेता था

16:16 उसे खेती के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं थी उस अवस्था से धीरे-धीरे वह स्वतंत्रता की अवस्था की ओर अग्रसर हुआ यानी धीरे-धीरे उसे अ समाज का ज्ञान हुआ समाज में जो सराउंडिंग में जो संसाधन है उसका ज्ञान हुआ संसाधनों का कैसे हम इस्तेमाल कर सकते हैं उसका ज्ञान हुआ तो धीरे-धीरे वह क्या हुआ स्वतंत्रता की अवस्था की ओर अग्रसर हुआ और पर्यावरण से जो संसाधन हम मिले हैं उसके द्वारा ही वे संभावनाओं को जन्म देते हैं ठीक है जो भी मतलब पर्यावरण में उसको संसाधन मिले उन संसाधनों का इस्तेमाल करके ही उसने संभावनाओं को जन्म दिया है अब यहां पे संभावनाओं को जन्म देने का मतलब क्या है कि नई-नई चीजों को ख की खोज की है आप ऐसे कह सकते हो ठीक है इसके बाद है मानवीय क्रियाओं की छाप जो होती है वो सर्वत्र होती है यानी कि मानव जो क्रियाएं कर है उसकी छाप हमें सब जगह देखने को मिलती है कैसे तो सबसे पहले इसे समझते हैं देखिए मानव ने क्या किया उच्च भूमि पर स्वास्थ्य विश्राम स्थल बना दिए बड़े-बड़े नगर बसा दिए खेत बना दिए खलिहान फलोद्यान पहाड़ियों में चरागाह बना दी पत्तन और महासागरीय तल पर समुद्री मार्ग बना दिया

17:17 अंतरिक्ष तक में उसने उपग्रह भेज दिए यानी कि मानव की जो क्रियाएं हैं उसकी छाप हमें हर जगह दिखती है यह सारा मनुष्य ने किया है और कैसे किया है जैसे-जैसे उसको अपने सराउंडिंग अपने मतलब चारों ओर जो भी अ टेक्नोलॉजी है उसका ज्ञान हुआ उसके बाद ही कर पाया तो पहले के विद्वानों ने इसको क्या बोला संभववाद का नाम दिया ठीक है यह दूसरा कांसेप्ट है संभववाद पे आपका शॉर्ट क्वेश्चन आ सकता है दो नंबर एक नंबर का क्वेश्चन आता है ज्यादा बड़ा क्वेश्चन नहीं आता ठीक है और संभववाद क्या कहती है संभववाद का जो कांसेप्ट है वो यह कहता है कि जो प्रकृति होती है ना जो नेचर होता है हमें प्रकृति अवसर देती है ठीक है और मानव उन अवसरों का उपयोग करता है और धीरे-धीरे प्रकृति का मानवीकरण हो जाता है कहने का मतलब है कि प्रकृति हमको क्या करती है प्रकृति हमको अवसर देती है और उन अवसरों का हम इस्तेमाल करते हैं ठीक है उन अवसरों को कहीं ना कहीं हम उपयोग करते हैं और धीरे-धीरे जो प्रकृति है उसका मानवीकरण हो जाता है प्रकृति पर मानव प्रयासों की छाप पड़ने लगती है जो कि आपको मैं स्टार्टिंग

18:12 में बता चुका था कि मानव जो भी करता है उसकी छाप कहीं ना कहीं प्रकृति में हमें देखने को मिलती है ठीक है आगे चलते हैं नेक्स्ट हमारा टॉपिक है भूगोल वेता जो है ग्रिफिथ टेलर इन्होंने एक नई संकल्पना प्रस्तुत की है क्या है इनकी संकल्पना अभी हमने नव पर्यावरणीय जो निश्चयवाद था इसको पढ़ा फिर हमने संभववाद पढ़ा दो कांसेप्ट हम पढ़ चुके हैं लेकिन टेलर जी जो है इन्होंने एक नई संकल्पना प्रस्तुत कर दी एक नया कांसेप्ट दे दिया जो इन दोनों के बीच का है यानी जो नव निश्चयवाद है ठीक है इसको क्या बोलते हैं नव निश्चयवाद और इसका मतलब है रुको और जाओ ठीक है इसको निश्चय रुको और जाओ नव निश्चयवाद के नाम से हम जानते हैं तो यह जो कांसेप्ट है ये किसने दिया था भूगोल वेता है ग्रिफिथ टेलर इनके द्वारा ये दिया गया है और देखते हैं यह संकल्पना क्या बताती है यह जो कांसेप्ट है यह बताता है ना तो बिल्कुल नितांत आवश्यकता की स्थिति हो यानी ना तो पर्यावरणीय निश्चयवाद हो और ना ही बिल्कुल संभववाद हो इन दोनों के बीच का इन्होंने बताया इन्होंने कहा कि कुन जो सीमाएं होती हैं ठीक है इनका मतलब है उन

19:17 सीमाओं में जो पर्यावरण की हानि ना करती हो और संभावनाओं को उत्पन्न किया जा सकता है यानी कि इन्होंने ऐसे कांसेप्ट के बारे में बात करी है जो पर्यावरण को ज्यादा नुकसान ना पहुंचाए और नई-नई संभावनाओं को को उत्पन्न करें एग्जांपल मैं देता हूं जैसे मान लो आपको पता है कि पेड़ को बहुत ज्यादा काटा जा रहा है अब वनों को बहुत ज्यादा काटा जाएगा तो क्या होगा वनों को काटने से पोल्यूशन होगा बहुत ज्यादा कहीं ना कहीं जो प्रकृतिक जो पारिस्थितिक तंत्र है वह बिगड़ जाएगा तो ऐसे में क्या हो सकता है ऐसे में यह हो सकता है कि मैक्सिमम जितने पेड़ काटे जा रहे हैं उससे ज्यादा पेड़ उगाना शुरू कर दो तो यह कहीं ना कहीं इस नई कांसेप्ट से आया हुआ है ठीक है तो यह समझ में आया आपको इसके बाद एक टॉपिक है हमारा मानव भूगोल के क्षेत्र और मानव भूगोल के उप क्षेत्र अब यहां से आपसे ना सीधा-सीधा क्वेश्चन पूछ लेते हैं क्वेश्चन कैसे पूछते हैं देखो आपके एनसीआरटी में सीधा-सीधा ये दे रखा है एक टेबल दे रखी है इसमें आपको मानव भूगोल के क्षेत्र बता रखे हैं यह सारे क्या है मानव

20:11 भूगोल के क्षेत्र हैं और इनर इनके अंतर्गत मानव भूगोल के उप क्षेत्र आ जाते हैं यह सारे क्या है उप क्षेत्र है लेकिन पेपर में क्वेश्चन कैसे आता है आपसे या तो ऐसे पूछ लेंगे मैं आपके सामने क्वेश्चन रख देता हूं या तो ऐसे पूछ लेंगे कि बताइए मानव भूगोल के कोई चार कोई पांच कोई छह क्षेत्र बता दीजिए या तो सी ऐसे क्वेश्चन आ जाता है तो आप कैसे बताओगे अगर आपसे सीधा पूछ ले तो आप बता सकते हो कि सामाजिक भूगोल जो है यह भी मानव भूगोल के अंतर्गत आ जाता है क्षेत्र में आ जाता है फिर नगरीय भूगोल आ जाएगा ठीक है राजनीतिक भूगोल आ जाएगा जनसंख्या भूगोल हो गया आवास भूगोल हो गया आर्थिक भूगोल हो गया ये सारे मानव भूगोल के क्षेत्र हैं और यह आपके दो नंबर में चार नंबर में ऐसे आ सकता है क्वेश्चन इसके बाद दूसरा क्वेश्चन आ सकता है मानव भूगोल के चार उप क्षेत्र बताइए तो इसमें व्यवहारवादी आ जाएगा सामाजिक कल्याण आ जाएगा सांस्कृतिक भूगोल आ जाएगा ठीक है लिंग ंग भूगोल आ जाएगा चिकित्सा भूगोल सैन्य भूगोल इसके अलावा निर्वाचन आ जाएगा संसाधन भूगोल आ जाएगा सांस्कृतिक हो जाएगा ठीक है यह सारे आ जाते हैं तो यहां तो ये

21:08 आपको मैंने मानव भूगोल के चार उप क्षेत्र बता दिए और एक लास्ट टॉपिक है जो आपको खुद से पढ़ना है मैंने आपको मानव का प्रकृतिक बताया और प्रकृति का मानवीकरण बताया आपके एनसीआरटी में दो बॉक्स दे रखे हैं एक मैं आपको मानव का प्रकृतिक बताया हुआ है दूसरा में प्रकृति का मानवीकरण बताया हुआ है ये दोनों आपको एनसीआरटी में जाकर पढ़ने हैं आप इसको पढ़ोगे बॉक्स को तो आपको जो मैंने बताया था ना इसके जो कांसेप्ट बताया था वो चीजें आपको इसके अंदर समझ में आ जाएंगी ठीक है तो यह बिल्कुल आसान है और यहां से ना आपके सोर्स वाला क्वेश्चन भी आता है मैं आपको यहां पे इसलिए नहीं करा रहा हूं क्योंकि सिंपल इसमें कुछ कराना नहीं है जब मैं आपका पैसेज करवाऊंगी ना सोर्स बेस्ड क्वेश्चन कराऊंगा वहां पे मैं आपको इन सभी टॉपिक को करा दूंगा तो यहां पे अपना चैप्टर जो है खत्म हो जाता है क्योंकि इसके अलावा इस चैप्टर में कुछ था नहीं बेसिक से कांसेप्ट थे आई होप आपको समझ में आए होंगे तो आप वीडियो को लाइक जरूर कर दें चैनल को अगर आपने सब्सक्राइब नहीं करा है तो सब्सक्राइब कर दो और कमेंट कर दिया

21:57 करो मिल मिते नेक्स्ट वीडियो में थैंक्स फॉर वाचिंग जय हिंद जय भारत

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