0:00 दोस्तों ये वो सब्जी है जिसे हम हफ्ते में दो-तीन बार खाते हैं। लेकिन अगर एक गलती हो जाए तो यह आपको हॉस्पिटल की सैर करवा सकती है। इसीलिए तो मैं सब्जियां नहीं खाता। दोस्तों कुछ फूड्स हमें पता है अनहेल्ी होते हैं। हेल्दी फूड्स कौन से हैं? यह भी हम जानते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि डेली लाइफ में यूज होने वाले कुछ ऐसे फूड्स भी हैं जो आपके लिए जहरीले हो सकते हैं। और यहां मैं स्लो पोइजन की बात नहीं कर रहा कि 10 साल बाद का ही असर होगा। आज मैं जिन सात फूड्स की बात करने वाला हूं, इन्हें खाकर कई लोग इंस्टेंटली हॉस्पिटलाइज हुए हैं। हवा में बात नहीं होगी बल्कि आपको डॉक्यूमेंटेड एविडेंस के साथ शो करूंगा कि यह डेली यूज होने वाले हेल्दी दिखने वाले फूड्स कैसे पोइजनस हो सकते हैं। यह वीडियो आपको डराने के लिए नहीं बल्कि जागरूक करने के लिए है। आइए तो फिर बिना किसी देरी के इस इंपॉर्टेंट
0:46 वीडियो को शुरू करते हैं। [संगीत] हेलो फ्रेंड्स, वेलकम टू फिट Tuber हिंदी। स्टार्ट करते हैं नंबर सात लौकी से। जब भी वेट लॉस, ग्लोइंग स्किन, डायबिटीज या ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने की बात आती है तो एक सब्जी है जो माइंड में सबसे पहले आती है और वो है लौकी। लेकिन दोस्तों लौकी दिखने में भले ही कितनी भी फ्रेश [संगीत] हो पर अगर उसका एक छोटा सा भी टुकड़ा टेस्ट में कड़वा हो तो समझ लीजिए कि वो कोई सब्जी नहीं जहर है। और यह जहर ऐसा नहीं कि 10 साल बाद धीरे-धीरे कुछ दिक्कत करे या थोड़ी बहुत फूड पोइजनिंग करें। बल्कि कड़वी लौकी खाने से आपको कुछ ही देर में सीवियर खून की उल्टियां और ब्लड प्रेशर का अचानक ड्रॉप हो जाना इस तरह के डायरेक्ट सिम्टम्स आ सकते हैं। इसके मेडिकल एविडेंस इतने सॉलिड है कि पूरे भारत का मेडिकल सिस्टम हिल गया
1:32 था। जब साल 2010 में सीएसआईआर यानी काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के एक 59 ईयर ओल्ड सीनियर साइंटिस्ट [संगीत] और डेपुटी सेक्रेटरी की गई थी सिर्फ एक गिलास कड़वी लौकी का जूस पीने से। 2018 में पुणे की एक 41 ईयर ओल्ड कंप्लीटली हेल्दी फिटनेस एंथूजियास्ट वूमन जो सुबह 5 कि.मी. दौड़ती थी, उसने अपना रेगुलर लौकी का जूस पिया। जूस कड़वा था पर कड़वी चीज हेल्दी होती है समझकर पी लिया। कुछ ही घंटों में उन्हें ब्रेन हेमोरेज हुआ और 3 दिन बाद वेंटिलेटर पर उनकी मौत हो गई। 2015 में गुड़गांव में एक 52 साल की लेडी ने सुबह लौकी का कड़वा जूस पी लिया। थोड़ी देर में ही उन्हें इतनी तेज पेट में दर्द उठा और फिर खून की उल्टियां शुरू हो गई। 4 दिन आईसीयू में रहने के बाद उनकी जान बची। यहां तक कि 2021 में
2:19 बॉलीवुड की एक फेमस पर्सनालिटी को 2 दिन के लिए आईसीयू में एडमिट होना पड़ा। उनका ब्लड प्रेशर 40 तक ड्रॉप हो गया था। सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने हल्दी डाल के कड़वी लौकी का जूस पी लिया था। एक बार उनकी यह क्लिप देखो। आई हड समथिंग व्हिच इज नोन एस बॉटल को टॉक्सिसिटी। व्हिच इज दूधी। योर जेंटल दूधी कैन डू दिस टू यू। इट्स इफ इट टेस्ट बिटर प्लीज डोंट हैव इट। आई यूज्ड टू हैव फ्रेश जूस इन द मॉर्निंग। बट एट दैट डे टेस्ट इट बिटर। आई स्टिल वेंट अहेड विथ इट। एंड आई वाज़ इन द आईसीयू द डॉक्टर्स। इट्स ऑलमोस्ट लाइक हैविंग साइनाइड। यह मामला इतना सीरियस हो गया था कि हमारी कंट्री के सबसे बड़े मेडिकल बोर्ड आईसीएमआर को एक स्पेशल एक्सपर्ट कमेटी बिठानी पड़ी। उनकी ऑफिशियल गाइडलाइंस आज भी अवेलेबल है जो क्लियरली वर्न करती हैं कि नेवर कंज्यूम बिटर बॉटल गार्ड। अब शायद आप सोच
3:04 रहे हो कि कड़वी लौकी में ऐसा होता क्या है? देखो जब लौकी का पौधा एक्सट्रीम गर्मी बर्दाश्त करता है या सोइल में पानी की कमी होती है तो वह खुद को कीड़े-मकोड़ों से बचाने के लिए एक हाइली टॉक्सिक केमिकल कंपाउंड प्रोड्यूस करता है जिसे कहते हैं क्यूकर बीटासेन। यह कोई आम केमिकल नहीं है। यह एक साइटोटॉक्सिक कंपाउंड है। यानी यह सीधा आपके बॉडी के सेल्स को डिस्ट्रॉय करता है। मेडिकल साइंस में इस कड़वी लौकी के जूस को कंज्यूम करना ऑलमोस्ट पोइजन कंज्यूम करने जैसा माना गया है। वैसे घबराने की जरूरत नहीं। जरूरत है लौकी को सही से चेक करके फिर यूज [संगीत] करने की। इनफैक्ट अपने घरों में जब भी लौकी की सब्जी बनती है तो मम्मीियां पहले थोड़ी सी लौकी खाकर चेक करती ही हैं। अगर थोड़ा भी कड़वा होता है तो उसे तुरंत डस्टबिन में डाल देती हैं। क्योंकि भले ही उन्हें जहर
3:49 का नाम ना पता हो पर इतना उन्हें पता है कि पकाने से, उबालने से या मसाले डालने से लौकी का जहर खत्म नहीं होता। यह तो आजकल मॉर्निंग जूस के अंधे ट्रेंड्स में इस तरह के इंसिडेंट्स होने लगे। कुछ लोग डायबिटीज को कम करने के लिए सुबह लौकी और करेले का मिक्स जूस पीते हैं। [संगीत] यह जूस सही है, लेकिन हमेशा इस जूस को बनाने से पहले लौकी चेक कर लेना क्योंकि करेला तो कड़वा होता ही है। बाद में कहीं डाउट में ना रह जाओ कि कड़वाहट लौकी की है या करेले की। दोस्तों कड़वी लौकी बहुत घातक है। इसलिए इसके बारे में आप भी ध्यान रखिए और दूसरों को भी बताइए। नंबर छह पे है आलू। दोस्तों 1979 में लंदन के एक स्कूल में 78 बच्चों को अचानक फूड पोइजनिंग हो गई। उनमें से 17 बच्चों की हालत तो इतनी खराब हो गई कि उन्हें तुरंत हॉस्पिटलाइज़ करना पड़ा। उन्हें हेलुसिनेशंस हो रहे थे, उल्टियां
4:36 हो रही थी और उनका सेंट्रल नर्वस सिस्टम कोलैप्स कर रहा था। मामले की जांच हुई तो पता चला कि उन्होंने मिड डे मील में आलू की सब्जी खाई थी। ऐसे आलू की सब्जी जो स्कूल के स्टोर हाउस में पड़े पड़े हरे हो गए थे और आलू जो रखा हरा हो जाए उसमें एक जानलेवा टॉक्सिन होता है जिसे [संगीत] कहते हैं सोलानिन। इस केस ने ऊपर तक सबको हिला दिया और WHO और एफडीए ने क्लियर वार्निंग्स इशू करी कि अगर किसी आलू में सोलानिन का लेवल 20 मिलीग्राम से ऊपर चला जाए तो वो इंसानों के लिए जहर है। यह कितना सीरियस है आप इस बात से अंदाजा लगाइए कि सिर्फ एक मीडियम साइज का हरा आलू 5 साल के बच्चे [संगीत] की जान ले सकता है। इनफैक्ट रिसेंटली सऊदी अरेबिया में एक 11 साल के बच्चे ने घर में कच्चा हरा आलू खा लिया। कुछ ही घंटों में उसे हरे रंग की
5:22 उल्टियां आने लगी और उसका ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट इतना ड्रॉप हुआ कि उसे तुरंत आईसीयू में एडमिट करना पड़ा। मेडिकल रिपोर्ट्स ने कंफर्म किया कि यह हार्ट और ब्रेन पर सीधा सोलानिन का अटैक था। दोस्तों 1922 में जर्मनी का मास एपिडेमिक जहां एक दिन में 700 से ज्यादा सोल्जर्स सिर्फ हरे आलू खाने की वजह से बीमार हो गए। या फिर 2014 में रशिया में बेसमेंट में रखे हरे और सड़ते आलू की टॉक्सिक गैस [संगीत] से एक पूरी फैमिली का दम घुटना। ऐसे कई फेटल केसेस डॉक्यूमेंटेड हैं। यूएस की अथॉरिटी नेशनल कैपिटल पोइजन सेंटर ने वार्निंग जारी करी कि अगर आलू हरा हो रहा हो या उस पे इस तरह से अंकुरण से निकलने लगे तो उसे सीधा फेंक दो। क्योंकि यह सोलनिन कंपाउंड ना आलू को बॉईल करने से और ना ही फ्राई करने से खत्म होता है। यह एक
6:07 ऐसा इनहिबेटर है जो सीधा आपके ब्रेन और नर्वस सिस्टम के सिग्नल्स को ब्लॉक कर देता है। साइंटिफिकली आज इस बात का एविडेंस है कि 450 ग्राम हल्के हरे आलू भी अगर कोई बंदा खा ले तो उसे हॉस्पिटल में एडमिट होना पड़ सकता है। दोस्तों आलू का हरापन धूप में रखने से या किसी घुटी हुई जगह पर रखने से जल्दी आता है। इसलिए इन्हें डार्कनेस में वेंटिलेटेड जगह में ही स्टोर करके रखें। बाकी अगर आलू में थोड़ा हरापन आ जाए तो ज्यादा डाउट में ना रहें। एटलीस्ट चाकू से उस हरे हिस्से को अच्छे से काट दें। लेकिन अगर आलू ज्यादा हरा हो तो रिस्क ना लें। उसे सीधा डस्टबिन में फेंक दें। नंबर पांच पे है राजमा। राजमा वेजिटेरियंस का अल्टीमेट हाई प्रोटीन कंफर्ट फूड है। जिसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। लेकिन बस भूलकर भी ऐसे राजमा ना खा बैठना जो अध पके
6:53 हो। क्योंकि अगर राजमा पूरी तरह ना पका हो तो उसमें पीएचए नाम का एक बेहद खतरनाक प्लांट टॉक्सिन एक्टिव रह जाता है। यह पीएचए लिटरली पेट और आंतों की लाइनिंग को छील देता है जिससे भयंकर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। 1976 में यूके के एक हॉस्पिटल की खुद की कैंटीन में राजमा को ठीक से सोक करके बॉईल नहीं किया गया। राजमा खाने के सिर्फ दो-ती घंटे बाद ही 31 लोग जिनमें हॉस्पिटल का अपना स्टाफ भी था। सीवियर डायरिया और भयंकर क्रैंप से तड़पने लगे। हालत इतनी बिगड़ी कि सबको आईवी ड्रिप्स पर रखना पड़ा। ऐसे ही 2006 में जापान के एक बहुत फेमस नेशनल टीवी शो पे वेट लॉस का एक नया ट्रेंड बताया। उन्होंने कहा कि राजमा को सिर्फ 3 मिनट के लिए पैन में रोस्ट करो और खा लो। इससे वेट लॉस जल्दी होगा। अगले ही दिन पूरे जापान में मेडिकल इमरजेंसी लग
7:39 गई। हजार से ज्यादा लोगों ने इस वेट लॉस ट्रेंड को फॉलो करके अधपके बींस खाए। कुछ ही घंटों के अंदर उन्हें ऐसे साइड इफेक्ट्स हुए कि सैकड़ों लोगों को एक साथ हॉस्पिटल में एडमिट करना पड़ा। जैपनीज गवर्नमेंट ने उस टीवी चैनल पर एक्शन तो लिया ही साथ में पब्लिकली नेशनल वार्निंग इशू करी कि राजमा को बिना ठीक से उबाले खाना सीधा जहर खाने के बराबर है। दोस्तों दुनिया की सबसे बड़ी फूड सेफ्टी अथॉरिटी यूएसएफडीए ने अपनी ऑफिशियल बैड बग बुक में इस खतरे को प्रॉपर्ली रेड किडनी बीन पोइजनिंग का नाम दिया है। और सबसे शॉकिंग फैक्ट तो यह है कि कटोरी भर राजमा भी नहीं। सिर्फ चार से पांच अदपके दाने ही किसी भी हेल्दी इंसान को इमरजेंसी रूम पहुंचाने के लिए काफी हैं। तो नो डाउट राजमा बहुत हेल्दी हैं। लेकिन इसे ज्यादा ट्रडी तरीकों से नहीं बल्कि अपने ट्रेडिशनल स्टाइल में ही जैसे हम रात को
8:26 इसे 8-10 घंटे भिगो देते हैं और फिर पूरा पका कर ही खाते हैं वैसे ही खाओ तब यह आपको अपने जबरदस्त फायदे देगा। नंबर चार पर है जायफल। दोस्तों जायफल एक पावरफुल स्पाइस है। नींद ना आए बॉडी में पेन या सेक्सुअल स्ट्रेंथ को इनक्रीस करने के लिए इसका रिजल्ट बहुत अच्छा है। लेकिन जो चीज इतनी स्ट्रांग होती है उसको लेने का तरीका भी सही होना चाहिए। वरना लेने के देने पड़ सकते हैं। ऐसा ही हुआ जब 2015 में नीदरलैंड्स की एक 37 साल की औरत ने नींद जल्दी लाने के चक्कर में दो चम्मच लगभग 10 ग्राम जायफल पाउडर अपने खाने के ऊपर डाल के खा लिया। बस फिर क्या था? कुछ ही घंटों में उसकी दिल की धड़कन इतनी बढ़ गई कि उसे सीिवियर हेलुसिनेशंस, अजीब-अजीब सी चीजें दिखने लगी। 36 घंटे तक उसकी बॉडी में नट मेक टॉक्सिसिटी के सिम्टम्स रहे। इनफैक्ट
9:12 रिपोर्ट की आखिरी लाइन में डॉक्टर्स ने एक्सप्लसिटली मेंशन किया है कि उस दिन के बाद उस लेडी ने जिंदगी में दोबारा कभी जयफल को हाथ नहीं लगाया। चलो वो लेडी तो बच गई। लेकिन जयफल ओवरडोज का सबसे दर्दनाक केस 1887 में ब्रिटेन में हुआ था। जब एक आठ साल के बच्चे ने खेल खेल में दो साबुत जायफल खा लिए। कुछ ही घंटों में उसकी बॉडी पैरालाइज हो [संगीत] गई। बहुत कोशिशों के बाद भी डॉक्टर्स उसे बचा नहीं पाए। असल में जयफल सिर्फ एक आम मसाला नहीं है। अगर इसकी क्वांटिटी थोड़ी सी भी लिमिट क्रॉस कर जाए तो यह एक खतरनाक साइको एक्टिव ड्रग बन जाता है। इसके अंदर एक हाइली एक्टिव केमिकल कंपाउंड पाया जाता है जिसे कहते हैं मेरिस्टिसिन। ये सीधा आपके ब्रेन और सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर अटैक करता है। मेडिकल साइंस में इसके ओवरडोज को प्रॉपर एक नाम दिया गया है नटमैक साइकोसिस।
9:59 [संगीत] इसकी साइको एक्टिव नेचर की वजह से यूएस में कई टीनएजर्स इसका जानबूझकर यूज करके हॉस्पिटल तक पहुंचे हैं। इंटरनेट के अंधे ट्रेंड्स ने इस खतरे को और भी बढ़ा दिया है। 2020 में TikTok पर एक नट मेक चैलेंज वायरल हुआ। जहां टीनएजर्स नेचुरल हाई के चक्कर में दो-तीन चम्मच डेफल पानी में घोल-घोल कर पीने लगे। होना क्या था? यूएस के पोइजन कंट्रोल सेंटर्स में इमरजेंसीज की बाढ़ आ गई। 15-16 साल के हेल्दी बच्चों को सीवियर हेललुसिनेशंस, एक्सट्रीम पैनिकिक अटैक्स और 150 के ऊपर की दिल की धड़कन के साथ सीधा आईसीयू में एडमिट करना पड़ा। दोस्तों, जयफल मेडिसिन है, लेकिन इसे चुटकी भर ही लेना होता है। लिमिट क्रॉस होते ही यह फेटल ड्रग बन जाता है। इसलिए ध्यान से। नंबर तीन पे है बादाम। दोस्तों, बादाम जो हेल्दी फैट्स के
10:44 बेस्ट सोर्सेज में से एक हैं। हार्ट और ब्रेन के लिए सुपर फूड है। क्या यह भी नुकसान कर सकते हैं? [संगीत] जी हां, नुकसान ही नहीं यह आपको वेंटिलेटर पर भी ला सकते हैं। ऐसे ही हुआ 2024 में ईरान की 36 साल की एक महिला के साथ जब उसने 40 बादाम खा लिए। बादाम खाने के थोड़ी देर में ही उसे उल्टियां होने लगी। हॉस्पिटल लाया गया तो उसका खून तेजाब में कन्वर्ट हो रहा था। 4 घंटे के अंदर वह बेहोश हो गई। उसे सांस लेने में दिक्कत हुई और उसे वेंटिलेटर पर डालना पड़ा। करीब 72 घंटे बाद वह होश में आई और उसकी जान बची। अच्छा क्या आप बता सकते हो कि उसकी यह हालत क्यों हुई? ऑप्शन ए ज्यादा बादाम खाने की वजह से, ऑप्शन बी बिना भिगोए बादाम खाने की वजह से, ऑप्शन सी बादाम से होने वाली किसी अचानक [संगीत] एलर्जी की वजह से या फिर ऑप्शन डी इन बादामों के अंदर छुपे एक ऐसे नेचुरल जहर की वजह से जो पेट में जाते
11:32 ही सीधा [संगीत] साइनाइड बन जाता है। दोस्तों, सही जवाब है ऑप्शन डी। एक्चुअली उस महिला की ऐसी हालत इसलिए हुई क्योंकि उसने जो 40 बादाम खाए थे वो कड़वे बादाम थे और कड़वे बादामों के अंदर एक बेहद [संगीत] टॉक्सिक नेचुरल केमिकल कंपाउंड पाया जाता है जिसे कहते हैं एमिकलन और यह पेट के एसिड के साथ मिलके हाइड्रोजन साइनाइड [संगीत] बना देता है जो कि एक डेडली जहर है। इसका असर बच्चों पर कितना भयंकर होता है इसका अंदाजा इस बात से लगाइए कि 2013 में एक 5 साल का बच्चा सिर्फ 10 कड़वे बादाम खाने की वजह से कोमा में चला गया था। देखो कैलिफोर्निया बादाम के कड़वे होने का चांस बहुत कम होता है। लेकिन अपनी जो देसी वैरायटी है जैसे गुरबंदी या ममरा बादाम यह न्यूट्रिशन में तो कैलिफोर्निया बादाम से बहुत ऊपर हैं लेकिन इनमें बादाम कड़वे निकलने का चांस
12:17 भी होता है। इसलिए अगली बार कभी आप बादाम खाओ और वो कड़वा निकले तो उसे हेल्दी समझ के या महंगे हैं क्या फर्क पड़ता है सोच कर खाने की गलती मत कर लेना। दोस्तों अगला फ़ूड आपको हैरान कर देगा। मुजफ्फरपुर केस के बारे में सुना है आपने? बिहार के मुजफ्फरपुर में 14 बच्चों की ब्लैंड में हेमरेज हो गया हुआ है। बिहार के मुजफ्फरपुर में 1995 से लेकर लगातार 20 सालों तक गर्मियों में एक रहस्यमई बीमारी आती थी। हंसतेखेलते बच्चे रात को आराम से सोते और सुबह 4:00 बजे उन्हें अचानक भयंकर दौरे पड़ने लगते। देखते ही देखते उनके ब्रेन में सूजन आ जाती और उनकी मौत हो जाती। लोकल लोग इस अजीब बीमारी को चमकी बुखार कहते थे। एक टाइम पर इसने करीब 150 बच्चों की जान ले ली थी एक ही सीजन में। डॉक्टर्स 20 साल तक
13:03 समझ ही नहीं पा रहे थे कि यह कौन सा नया वायरस है। आखिरकार 2014 में यूएस की सीडीसी और इंडिया की मेडिकल टीम्स ने मिलकर इन्वेस्टिगेशन [संगीत] की और 2017 में अपना डाटा द लैंसेट जर्नल में पब्लिश किया तो पूरी दुनिया शॉक्ड रह गई। असली मुजरिम कोई वायरस नहीं बल्कि मुजफ्फरपुर के बागों में गिरने वाली कच्ची लीचियां थी जो बच्चे दिन भर खेलते हुए खाया करते थे। लीची खाने की वजह से 100 से ज्यादा बच्चों की मौत। दोस्तों जो हरे पीले से रंग की [संगीत] कच्ची लीची होती है उसमें दो बेहद खतरनाक टॉक्सिंस भरे होते हैं। हाइपोग्लाइसिन ए और एमसीपीजी। इन टॉक्सिंस का एक ही काम है बॉडी को नया ग्लूकोज बनाने से रोक देना। जब गांव के बच्चे दिन भर खेलते हुए बहुत सारी कच्ची लीचियां खा लेते थे और पेट भर
13:50 जाने की वजह से रात का खाना नहीं खाते थे तो यह जहर अपना काम शुरू करता था। बच्चे खाली पेट सोते थे और रातोंरात यह टॉक्सिनस उनका ब्लड शुगर डेंजरसली लो कर देते। बच्चों को ब्लड शुगर लेवल फॉल कर जाता है। फॉल इतना करता है कि कई कई बच्चे को जीरो हो जाता है। सुबह होते दिमाग शॉर्ट सर्किट हो जाता और बच्चे इसलिए दोस्तों मेडिकल टॉक्सिकोलॉजी का यह क्लियर रूल हमेशा याद रखिए। [संगीत] लीची हमेशा पूरी तरह पकी हुई लाल ही खाएं। अक्सर सस्ते के चक्कर में पीले रंग की लीचियां हम ले लेते हैं। वह महंगी पड़ सकती है। दोस्तों आखिरी फूड वो है जिसे हम इतना सेफ मानते हैं कि आंख बंद करके भी खा लें। लेकिन वही सबसे बड़ी गलती है। बात करेंगे उसकी लेकिन पहले मैं आपसे शेयर करना चाहता हूं ट्रू बेसिक्स का क्लीन प्लांट प्रोटीन। मार्केट में वे और प्लांट प्रोटीन के नाम पे माल्टाक्सिन और
14:36 आर्टिफिशियल स्वीटनर्स भरे [संगीत] होते हैं जो आपकी गट लाइनिंग को बिल्कुल डैमेज कर देते हैं। लेकिन यह कोई नॉर्मल प्रोटीन पाउडर नहीं। इसके एक बार इंग्रेडिएंट्स देखो। मटर से एक्सट्रैक्टेड प्रोटीन, कोको पाउडर, कोकोनट मिल्क, नेचुरल फ्लेवर और पपीते से एक्सट्रैक्ट किया गया यह पपाइन डाइजेस्टिव एंजाइम। कोई आर्टिफिशियल फ्लेवर नहीं, कोई आर्टिफिशियल स्वीटनर नहीं, एक भी खराब इंग्रेडिएंट नहीं है। इतनी ट्रांसपेरेंट तरीके से इंग्रेडिएंट्स मेंशंड है कि मुझे कोई डाउट नहीं कि यह भारतीय मार्केट में बेस्ट प्रोटीन पाउडर्स में से एक है। वर्कआउट के बाद अगर आप प्रोटीन पाउडर लेना चाहते हो तो यह लो। इसके एक स्कूप में 24 ग्राम हाई क्वालिटी प्रोटीन है। कोई स्वीटनर नहीं है। फिर भी इसके नेचुरल चॉकलेट फ्लेवर की वजह से काफी पसंद आएगा आपको। साथ में स्टेनलेस स्टील का यह कूल सा स्कूपर भी [संगीत] मिलता है। इस प्रोटीन पाउडर का आप डेली एक स्कूप ले
15:22 सकते हो। प्लांट बेस्ड है। क्लीन इंग्रेडिएंट्स हैं और लैब टेस्टेड भी है। 1 केजी की प्राइस 2500 के आसपास है। लेकिन फिट ट्यूबर कम्युनिटी के लिए स्पेशल 10% ऑफ है। [संगीत] लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में है। वापस आते हैं और बात करते हैं आखिरी फूड की जो है बेहद हेल्दी सेब। [संगीत] आजकल फिटनेस के नाम पर एप्पल, पीनट, बटर और पानी को ब्लेंड करके स्मूदी बनाने का बहुत ट्रेंड चला है। नो डाउट यह हेल्दी है, लेकिन सेब को ब्लेंडर में डालते वक्त उसके बीज निकालना मत भूलें। क्यों? क्योंकि सेब के बीज में भी वही [संगीत] साइनाइड फॉर्मिंग जहर है जो कड़वे बादामों में था। नॉर्मली अगर आप गलती से एक आध बीज निगल भी लो तो उसकी हार्ड कोटिंग की वजह से पेट में जहर नहीं बनता। पर जब ब्लेंडर उन बीजों को बुरी तरह क्रश कर देता है तो उसके अंदर का जहर एक्टिवेट होकर सीधा साइनाइड बना देता है। टेस्ट करने की जरूरत नहीं क्योंकि 2025 में
16:10 टर्की के 26 साल के एक बंदे ने यह एक्सपेरिमेंट करके देख लिया है। उसने कहीं पढ़ा कि सेब के बीजों में साइनाइड होता है। कि सेब के बीज का सेवन करने से मनुष्य की यह सीड्स है पोइजनस। एप्पल के बीज के लिए कहा जाता है कि इसमें जहर होता है। बीज होता है जो बीच में उसमें साइनाइड होता है। उसने सेब के 200 बीज इकट्ठे क्रश करके अपनी एनर्जी ड्रिंक में मिलाकर पी [संगीत] लिए। 3 घंटे बाद सेब के बीजों से जो साइनाइड बना उसने असर दिखाना शुरू किया और उसकी बॉडी का बीपी और हार्ट रेट क्रैश [संगीत] होने लगा। वो पर्सन मेंटली अनस्टेबल था और शायद उसने साइनाइड ही अटेम्प्ट किया था। लेकिन डॉक्टर्स ने स्टमक वॉश करके साइनाइड का जहर बाहर निकाल दिया और उसे बचा लिया। दोस्तों, इस बात में तो कोई डाउट नहीं कि आपको सेब के काफी सारे बीज खाने पड़ेंगे, तब आपको दिक्कत होगी, लेकिन फिर भी सेब के बीजों को अवॉइड
16:57 ही करना चाहिए। मेन बात यह भी है कि सारे सीड्स ही हेल्दी नहीं होते। कुछ बीज [संगीत] तो सीरियसली टॉक्सिक भी हो सकते हैं। सो दोस्तों, यह थे वो सात आम फूड्स, जो वैसे तो सुपर हेल्दी है, लेकिन आपकी एक छोटी सी गलती इन्हें लीथल जहर बना सकती है। बाकी यह वीडियो किसी ऐसे पर्सन से शेयर करें जो इंटरनेट पर चल रहे हेल्थ ट्रेंड्स को ब्लाइंडली फॉलो करता हो। और तुम जाकर यह वाली वीडियो देख लो। सब्जियां नहीं खाता। ट्रू बेसिक्स का एक्चुअल क्लीन प्लांट प्रोटीन चेक आउट करना भी ना भूलना। अपना ध्यान रखिए। माय नेम इज [संगीत] विवेक। आई थैंक यू सो मच फॉर वाचिंग।