0:26 हेलो गाइस वेलकम बैक टू माय YouTube चैनल ई एन लर्न नर्स आई होप आप सब अच्छे होंगे। तो आप सभी के लिए बेहतरीन बैच आ चुका है जो कि हमारा रहने वाला है पेपर वन का यूजीसी नेट। जैसे कि आप सभी को पता है 21 जून से जो है इसके पेपर स्टार्ट हो जाएंगे। लेकिन अब सबसे बड़ी दुविधा यह है मैम हमने अभी तक कुछ नहीं पढ़ा। मैम हमने बहुत कुछ पढ़ा है। मैम हमने थोड़ा बहुत पढ़ा है। अभी हमें कुछ समझ नहीं आ रहा है। तो क्या करें? तो ये जो है आपका पेपर वन का पूरा बैच रहने वाला है। और इस पेपर वन में हम एक दिन में पूरी की पूरी यूनिट कवर करेंगे और ऐसा नहीं कि एक दो टॉपिक इंपॉर्टेंट कर लेंगे। नहीं पूरी यूनिट वन आज की क्लास में आपकी कवर होगी। तो जल्दी से आ जाइए और इसी प्रकार से जो है आपका ये सेशन चलने वाला है। इसके अलावा हम डेली करते हैं आपकी सिलेक्शन सीरीज। सिलेक्शन सीरीज जो है आपकी पीवाईक्यू बेस पे है और यूजीसी नेट को क्लियर करने के लिए दो ही
1:11 चीज़ चाहिए। एक है आपका सिलेबस प्लस आपका पीवाईक्यू और ये दोनों की ही क्लासेस आपकी यहां पर होती है। डेली हमारी सिलेक्शन सीरीज़ होती है। 9:00 बजे अगर आपने सिलेक्शन सीरीज़ को स्किप किया। आपने यह जो पूरा डिटेल बैच है जिसमें एक ही वीडियो में हम पूरा करने वाले हैं। तो कहीं ना कहीं आपके एग्जाम के लिए बहुत बहुत ज्यादा भारी नुकसान हो जाएगा। क्यों होगा? क्योंकि जिस तरीके से हम ये चीजें कवर कर रहे हैं ये आपके सिलेबस को आपके पेपर को बहुत अच्छे से कंप्लीट करा रही है। और हमारे बस में सिर्फ सिलेबस कवर करना पीवाईक्यू कवर करना ही है। एकद क्वेश्चन जो आपके अदर आते हैं उसका कोई रोल होता ही नहीं है। क्योंकि हमें 300 में से 300 लेके आने ही नहीं है। हमारा मेन टारगेट है कि हमारा जीआरएफ हो जाए। और अगर आप 230 प्लस स्कोर कर लेते हो तो बेफिक्र हो जाइए। आपका कहीं कुछ भी ऐसा नहीं है जो कि आपका जीआरएफ रोक दे। तो चलिए स्टार्ट करेंगे। वीडियोस वाले जब सेक्शन में जाते हो तो लास्ट आपको 20 डज़ करना क्या है?
1:59 मैंने क्या किया था? आपको क्या करना है? तो कंप्लीट मैंने इनेशन आपको दे रखी है। और हां आप सभी अब कर रहे हो 10 ऐसी गलती जिससे यूजीसी नेट तो भूल जाओ। पीएचडी एंट्रेंस भी नहीं होगा। तो ये गलती आपको नहीं करनी। और आप सभी को अगर यूजीसी नेट की तैयारी करनी है तो इस चैनल को सब्सक्राइब और जॉइ जरूर कर लेना। क्योंकि यहां पर मिलते हैं आपको फ्री बैचेस और बेहतरीन कंटेंट। और सबसे बड़ी बात जो आपको यहां पर गाइडेंस मिलती है वो आपके एग्जाम की वो ज्यादा इजी बना देता है। रास्ता ईजी बन जाता है। तो आठ से 30 नंबर जो है आप यहां से अपने ले सकते हो। ये आपका 10 मिनट की सीरीज है जिसमें कि इंपॉर्टेंट टॉपिक रिवाइज़ कर रहे हैं। साथ ही साथ यह जो है आपके हायर एजुकेशन पूरा मैंने करा दिया है और इसमें जो है आपको पेपर वन का जितना भी मैंने बैच अभी तक पढ़ाया है वो इस प्लेलिस्ट में आपको कंप्लीट मिल जाएगा। और आपको हमारे यहां पर मिलती है सिलेक्शन सीरीज़। सिलेक्शन सीरीज़ जो मैं आपको पीवाईक्यू में कराती हूं वो आपका यहां पर
2:46 ऑफर चल रहा है। ₹249 में आपको सिलेक्शन सीरीज़ मिल जाएगी। अगेन कहिए इसके अंदर है आपके 1000 प्लस क्वेश्चन हिंदी इंग्लिश दोनों लैंग्वेज में है। कोई भी आपको कंफ्यूजन बचेगा नहीं क्योंकि इसमें मैंने तीन से 4 महीने लगाकर आपके लिए डिटेल स्यूशन निकाला है वो और डिटेल स्यूशन ऐसा नहीं है। अगर आप खुद से ये काम करते तो लगभग 6- सात महीने लगा देते और मे बी फिर भी ना आता समझ में। लेकिन यहां पर जो है आपको डिटेल स्यूशन लास्ट के अगर 10 15 20 दिन भी बचे हैं तो आप इस सीरीज के साथ अपने पीवाईक्यू को कंप्लीट कर सकते हो। मॉक इससे लगा सकते हो। सबसे पहले मॉक लगा लो आंसर की को एज ए नोट्स आप रिवाइज़ कर सकते हैं क्योंकि इतनी डिटेल आंसर की है। टॉपिक लिखा है। डिटेल में स्यूशन लिखा है। उसके चारों ऑप्शन पे हमने काम किया है। तो चलिए स्टार्ट करेंगे आज की क्लास को और आपके Telegram पे टेस्ट भी होते हैं। वो भी फ्री है। आपके Telegram पे टेस्ट फ्री
3:32 है। यूजीसी नेट के बैचेस फ्री है। तो जो है आप ये सभी सारी चीजें ज्वाइन कर लेना। एक भी रुप आपको इसमें नहीं देना। चलो करते हैं आज की क्लास को स्टार्ट। और आपको पता है क्लास स्टार्ट करने से पहले हम करते हैं आपके सिलेबस पर बात क्योंकि अगर सिलेबस पर ही नहीं पता तो कैसे क्या पता चलेगा मैंने पहली जो आपकी फर्स्ट यूनिट है ये पहली क्लास है आज की तो इसमें मैंने आपको क्या पढ़ाया तो हमेशा मैं कहती हूं आप इस लेवल पे आ चुके हो कि अब आपको कोई मूर्ख तो बिल्कुल नहीं बना सकता और आपको खुद भी नहीं बनना तो अगर आप मूर्ख बन रहे हो तो गलत बात है क्योंकि इस लेवल पे आके मूर्खता बिल्कुल नहीं होनी चाहिए क्योंकि आपके हाथों में जो है भविष्य है पूरा तो चलिए उस भविष्य को देखते हैं आप कैसे बनाओगे तो पूरा पूरा का पूरा पहले सिलेबस डिस्कस करेंगे। फिर तुरंत जो है आपका कंटेंट हम डिस्कस करने
4:17 वाले हैं। चलो तो ये जो क्लास रहेगी टीचिंग ऐपटीट्यूड पूरा कंप्लीट करेंगे। 2 घंटे चले, 3 घंटे चले ना मैं जानती हूं ना ही आप जानते हो। तो ये है आपका पूरा सिलेबस यूजीसी नेट यूनिट वन टीचिंग ऐपटीट्यूड। टीचिंग ऐपटीट्यूड असिस्टेंट प्रोफेसर को इसलिए आना चाहिए क्योंकि आपको बच्चों को ही पढ़ाना है। चाहे आप किसी भी लेवल पे पढ़ाओ, यूनिवर्सिटी लेवल पे, कॉलेज लेवल पे कुछ भी करो। लेकिन अगर आपको यही नहीं पता पढ़ाना कैसे होता है तो क्या फायदा असिस्टेंट प्रोफेसर बनकर भी तो टीचिंग ऐपटीट्यूड यही आपको सिखाता है। तो सबसे पहले हमें क्या करना होता है? हमें टीचिंग को ही समझना है। टीचिंग होती क्या है? इसका कांसेप्ट, इसके ऑब्जेक्टिव, इसके लेवल्स क्या-क्या है? इसके कैरेक्टरिस्टिक क्या है? इसके बेसिक रिक्वायरमेंट क्या है? तो इसमें आपके ये सब टॉपिक हो जाते हैं टीचिंग। लेवल ऑफ़ टीचिंग आपका बेसिक आपका रिक्वायरमेंट। तो ये जो है ये आपका
5:04 यूजीसी का ऑफिशियल सिलेबस मैं आपके लिए लेके आई हूं। फिर इसके बाद आ जाता है आपका लर्नर। मतलब जो अधिगम करने वाला अधिगम कर्ता। अधिगम कर्ता कौन है? आप फिलहाल आप पढ़ रहे हो। तो आप कहोगे अधिगम कर्ता। मुझे किन-किन चीजों का ध्यान रखना पड़ेगा? आपको पढ़ाते समय आप एडलेसेंस में हो। आप एडल्ट लर्नर्स हो। इस चीज का सबसे बड़ा ध्यान रखना होता है। क्योंकि जब छोटे बच्चों को पढ़ाते हैं तब हमारा अलग बिहेवियर होता है। जब बड़े बच्चों को पढ़ाते हैं तब हमारा अलग बिहेवियर होता है। आगे बात करेंगे इंडिविजुअल डिफरेंसेस जो कि आप सभी लर्नर्स को अलग बनाता है। हम सभी के बीच में जो है क्या है? आपका एक बार आपका ओ वाओ माइक टोन है ना बता दो जल्दी से एक सेकंड मैंने आपके कमेंट नहीं देखे और मुझे ऐसा लगा अचानक से कि ऑडियो वीडियो का नहीं पता भाई एक से एक सेकंड मैं चेक कर लूं आप
5:50 आ जाओ अगर आप में से कोई लाइव है तो फटाफट एक बार कमेंट करके बोल दो और जल्दी से आ जाइए आप सभी ऑडियो वीडियो बताइए सब कुछ ठीक है और एक बार फटाफट सेशन को शेयर और जो भी नए हैं जो भी पुराने हैं जिन्होंने अभी तक सेशन को लाइक नहीं भैया फटाफट से लाइक करो और जल्दी से शेयर करके आ जाओ। यह क्लास अगेन मैं कह रही हूं पूरा सिलेबस आपका कवर कराएंगे हम। तो यह नया क्रैश कोर्स है। तो इसमें आप लोगों को सपोर्ट होना जरूरी है क्योंकि ऐसे ही हम सारी यूनिट करने वाले हैं। आ जाओ। तो इसमें हम बात करेंगे किशोर और वैश्य के बीच में क्या-क्या अंतर होते हैं? व्यक्तिगत विभिन्नता और उसका प्रभाव क्या पड़ता है? अगर आप सभी एक ही डंडे से पढ़ने लग जाते तो बात ही अलग ना होती। तो जो पहले टाइम पे चल रहा था, जो अब चल रहा है, उसके दोनों को पॉइंट को समझेंगे। फैक्टर क्या है? अफेक्टिंग टीचिंग। जब हम
6:36 टीचिंग की बात करते हैं तो बहुत सारे ऐसे फैक्टर आ जाते हैं जो हमारी टीचिंग को खराब करते हैं। हमारी टीचिंग को बढ़िया करते हैं, प्रभावी भी बनाते हैं। तो बहुत सारे पॉजिटिव नेगेटिव दोनों ही आ जाते हैं। तो शिक्षा से संबंधित कौन-कौन से हैं? लर्नर से, सपोर्ट मटेरियल। अब मैं पढ़ाने के लिए किन चीजों का यूज़ कर रही हूं। अब मान लीजिए मैं आपको स्क्रीन दिखाई ही नहीं रही। जो ये सामने लिखाई से दिखाई ही नहीं रही। बस बोले जा रही हूं। तो कहीं ना कहीं आपका ध्यान कम केंद्रित होगा। आप थोड़ा कम पढ़ोगे। लेकिन हमें तो भाई जितने ज्यादा टूल्स आप यूज करोगे, जितने ज्यादा सपोर्ट सिस्टम आप यूज करते हो, उतना ज्यादा बेहतर तरीके से आप लोग सीखते हो। चलो ठीक है सवाना धन्यवाद बताने के लिए ऑडियो वीडियो। ठीक है। आगे हम बात करेंगे आपका इंस्ट्रक्टर फैसिलिटी क्या-क्या है? ठीक है? क्या-क्या सुविधा मिलने वाली है? एनवायरमेंट कैसा दोगे आप पढ़ाते समय? आगे है आपका अगेन फैक्टर्स क्या होने वाले
7:22 हैं? संस्थान, कारकता उसका फैक्टर। तो कुल मिलाकर इसके सब टॉपिक थे। अब हमारा जो चौथा टॉपिक आ जाता है टीचिंग में तो वो क्या है आपका मेथड ऑफ टीचिंग। पढ़ाने के लिए कौन-कौन से टीचिंग मेथड को यूज़ करोगे? हायर लर्नर लर्निंग इंस्टट्यूट के लिए क्या-क्या चीज हम यूज़ करते हैं? हमें पता है आज के टाइम पे टीचर सेंटर। लर्नर सेंटर एक बड़ा विवाद बन रहा है। क्यों? क्योंकि एनईपी ने आके सारी चीजें बिल्कुल चेंज कर दी। पहले था टीचर सेंटर। अब सीधा हम चले गए लर्नर सेंटर मेथड पे। तो इन दोनों में क्या अंतर है? इसे समझेंगे। आगे आपका ऑफलाइन ऑनलाइन मेथड क्या होता है? इसे जल्दी से। डिजिटल इनिशिएटिव क्या-क्या है? अब आज के टाइम पे क्या चल रहा है? स्वयं से क्वेश्चन आते हैं, स्वयं परवा से क्वेश्चन आते हैं, मॉक से क्वेश्चन आते हैं। तो ये होता क्या है? इसे समझेंगे। आगे आपका ये छोटा सा प्यारा सा टॉपिक टीचिंग सपोर्ट सिस्टम ये अलग से इन्होंने दिया हुआ है। तो इसमें
8:08 परंपरागतित शिक्षण विद्या मतलब ट्रेडिशनल मेथड क्या-क्या है? मॉडर्न मेथड क्या आज के टाइम पे क्या हो रहा है? आज के टाइम पे हो रहा है आईसीटी बेस्ड मेथड। तो यह भी हम करेंगे और यह कहीं ना कहीं आपका वहां पर भी हो जाएगा जो आईसीटी की यूनिट है। ठीक है? इसके बाद हम बात करेंगे यहां तक चीजें क्लियर। इवैल्यूएशन सिस्टम मतलब हम बात करेंगे मूल्यांकन। मूल्यांकन के तत्व क्या है? प्रकार क्या है? टाइप्स बहुत ज्यादा पूछा जाता है। फॉर्मेटिव इसे आप असेसमेंट भी बोल सकते हो। तो फॉर्मेटिव असेसमेंट क्या है? अह आपका सिमिटिव असेसमेंट क्या है? सीआरटी क्या है? सीआरटी तो भाई यूजीसी ज्यादा पूछता है। सीआरटी एनआरटी क्या है? है ना? नॉर्म्स रेफरेंसेस टेस्ट क्या है? क्राइटेरिया रेफरेंसेस टेस्ट क्या है? तो सारा उड़ाएंगे इस क्लास में ही। आगे आपका
8:54 चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम कहां से आया? क्या था? कंप्यूटर बेस्ड लर्निंग क्या होती है? और मूल्यांकन प्रणालियों का नवाचार क्या है? बस ये है आपका पूरा का पूरा सिलेबस। सिलेबस क्लियर ये सिलेबस मैं नहीं लेके आई। ये आपका यूजीसी नेट ने दे रखा है। और इसी के बेस पे आपको काम करना है और इसी के बेस पे ये पूरी क्लास रहेगा। ये पूरा कोर्स रहेगा आपके ऑफिशियल सिलेबस के बेस पर। और यहां पर सबसे बड़ी बात यही है। धोखा वाली बातें कुछ है नहीं। जो है सिलेबस में वही आपको पढ़ाया जाएगा और वही आपको खुद से भी पढ़ना है। अगर आप खुद से पढ़ रहे हो तो। चलो आज की मोस्ट मोस्ट इंपोर्टेंट क्लास को स्टार्ट करेंगे। तो सबसे पहला यूनिट का जो टॉपिक है वो क्या है? टीचिंग क्या है? चलो देखते हैं। तो अगर हम बात करें टीचिंग का कांसेप्ट ही क्या है? टीचिंग आप कहोगे मैम पढ़ाने का तरीका बिल्कुल सही। अब मैं पढ़ा रही हूं इसे मैं टीचिंग बोल सकती हूं। लेकिन टीचिंग एक ऐसा प्रोसेस है। हमेशा याद रखना
9:40 प्रोसेस है प्रोडक्ट नहीं है। प्रोडक्ट मतलब आपको उत्पाद नहीं है। उत्पाद अच्छा नहीं होता प्रभावी शिक्षण के लिए। हम पढ़ रहे हैं टीचिंग ऐपटीट्यूड। तो टीचिंग ऐपटीट्यूड के लिए उत्पाद नहीं है। हमें बच्चों को मशीन नहीं बनाना। एक प्रोसेस है। आप भी सीखते हो। तो टीचर भी सीखता है। ये हमारा टीचिंग ऐपटीट्यूड बताता है। तो टीचिंग क्या एक प्रोसेस है जो कि चलता रहेगा किस चीज के लिए? विद्यार्थियों को ज्ञान। आप लोगों को क्या चाहिए? गाइडिंग चाहिए। भाई आपको नॉलेज चाहिए, कौशल चाहिए, मूल्यांकन चाहिए, दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए। आपको क्या करना है? आप मेरी क्लास में क्या आपको नॉलेज मिल जाए? आपके कौशल डेवलप हो जाए। आप जो असिस्टेंट प्रोफ़ेसर बनना चाह रहे हो तो आपके अंदर टीचिंग स्किल आ जाए। इसीलिए तो आए हो आप यहां पर। मूल्यांकन आ जाए, अह सॉरी मूल्य आ जाए, दृष्टिकोण आ जाए। आप ऐसा ऐपटीट्यूड डेवलप कर पाओ। उस लायक बन तो जाओ। तो उस लायक बनने के लिए ही आपका टीचिंग ऐपटीट्यूड दिया जाता है। तो इसे प्राप्त
10:25 करने के लिए आपको चाहिए शिक्षण की प्रक्रिया। मतलब आपको कोई मार्गदर्शन आपको कोई गाइडेंस दे दे, निर्देश दे दे और आपको सहायता मिलती है। ऐसा नहीं है कि आप खुद से नहीं पढ़ सकते, पढ़ सकते हो। लेकिन हां बिना एक गाइडेंस के हम ज्यादा लंबे समय तक चल नहीं सकते। और जब हमें गाइडेंस मिल जाती है तो हम कम समय में बहुत बड़ा काम कर सकते हैं। जो कि आपको यहां पर बी भी जाते हैं यूजीसी नेट की। आगे हम बात करेंगे टीचिंग ऐपटीट्यूड। समझ टीचिंग समझ में आया? टीचिंग क्या है? एक ऐसा प्रोसेस है जो क्या करेगा जो विद्यार्थियों को ज्ञान या नॉलेज देगा किसके माध्यम से टीचर के माध्यम से या एक ऐसा संसाधन के माध्यम से जो मार्गदर्शन जो गाइड करे आपको जो निर्देश दे और जो आपको सहायता प्रदान करे ये दो तरफ़ा होगा तभी होगा आपका प्रभावी शिक्षण मैं बार-बार प्रभावी शिक्षण जरूर बोलूंगी क्योंकि यूजीसी सबसे ज्यादा क्वेश्चन यही पूछता है प्रभावी शिक्षण है क्या इफेक्टिव टीचिंग क्या है तो प्रभावी
11:12 शिक्षण बार-बार सुनने को मिलेगा तो प्रभावी शिक्षण वही है दो तरफ़ा संवाद मतलब जिसमें मैं भी एक्टिव हूं और आप भी एक्टिव रहो। ठीक है? आप भी एक्टिव रहो, मैं भी एक्टिव रहूं। ये पूरा बैच आपका जो आज से चला है, इसमें हम सारी यूनिट को इसी प्रकार से सिलेबस वाइज पूरा का पूरा एक क्लास में उड़ाने वाले हैं। तो चाहे कितने भी लंबे समय तक रहो, 2 घंटे की हो, 3 घंटे की हो, 4 घंटे की हो, आपको लगातार बने रहना है क्योंकि ये आपके लिए कराया जा रहा है। तो, यह क्या है? दो तरफ़ा संवाद है। इसमें क्या है? टीचर भी चाहिए स्टूडेंट के बीच में संचारित वातावरण। की बात करते हैं। मतलब ऐसा भी ना हो कि
11:58 आपके और मेरे बीच में बातें हो रही है। लेकिन एक स्ट्रक्चर नहीं है। आप अपने घर की बातें बता रहे हो। मैं अपने घर की बातें बता रही हूं। तो ये नहीं है बिल्कुल भी टीचिंग। टीचिंग क्या है? आप भी अपने मन की बात बताओ। मैं भी अपने मन की बात। लेकिन किस चीज से? नॉलेज से रिलेटेड। अब हम लड़ाई झगड़ों की बात करने लग जाए तो वो टीचिंग नहीं होती। तो ये दो तरफा वाला संवाद है और ये तभी हो सकता है जब आपको और मुझे दोनों को एक ऐसा एनवायरमेंट मिले जहां पर हम अच्छे से टीचिंग कर सकें। अब इसका सेकंड टॉपिक क्या था? मतलब इसका सब टटॉपिक क्या था? आपका ऑब्जेक्टिव क्या-क्या होते हैं? जब हम टीचिंग की बात करेंगे तो टीचिंग के ऑब्जेक्टिव हमारे मिलेगा सबसे पहले ट्रांसमिशन ऑफ नॉलेज। पूछा जाता है ज्ञान का संप्रेक्षण करना। अब मेन मुद्दा क्या होता है? पढ़ाई का टीचिंग का। क्या मुद्दा है? ज्ञान मिलना चाहिए। भाई मैम हम यहां ज्ञान लेने आ रहे हैं। हम यहां पर अपना सिलेबस कवर करने आ रहे हैं। सिलेबस मतलब ज्ञान नॉलेज लेने आ
12:44 रहे हैं। तो सबसे पहला हमारा पॉइंट ही हो जाता है कि आपको नॉलेज मिल जाए। आपका जो है क्या हो जाए? ज्ञान का संप्रेक्षण कम्युनिकेट कर पाए हम किस चीज को? नॉलेज को। छात्रों में विषय वस्तु तथ्यों की जानकारी। फैक्ट मैं आपको दे दूं। कंटेंट आपको मैं दे रही हूं। आगे बात करेंगे। सेकंड पॉइंट हो जाता है डेवलप ऑफ स्किल। हमें क्या करना है? डेवलपमेंट ऑफ स्किल। आपके अंदर कौशल डेवलप करना है। बहुत से बच्चे क्या समझते हैं? यूजीसी नेट को हलवा समझते हैं। ठीक है? ठीक है? वो रटने पे फोकस करते हैं। मैंने 10 गलतियां बताई है। उसमें से एक गलती ये भी है कि रट लो या टॉपिक रट लो। आप टी आप असिस्टेंट प्रोफेसर बनने जा रहे हो। 1 लाख प्लस सैलरी मिलती है लगभग। तो क्या है आपके अंदर वो अगर स्किल नहीं है ना तो नहीं बन सकते भाई। इंटरव्यू में 2 मिनट में आपकी धज्जियां उड़ जाएगी। पता लग जाएगा कि अगर जेआरएफ भी हो रहा है तो रट के हो रहा है। ऐसा नहीं कि जेआरएफ रट के नहीं हो सकता। खैर अब
13:30 थोड़ा सा मुश्किल हो गया। लेकिन हां बहुत से बच्चे फिर भी पता नहीं कैसे कर लेते हैं। तो इंटरव्यू में 2 मिनट में आपको रिजेक्ट कर दिया जाएगा पीएचडी में। असिस्टेंट प्रोफेसर की वैकेंसीज में 2 मिनट में बाहर हो जाओगे। क्यों हो जाओगे? क्योंकि भाई स्किल क्वेश्चन देखेंगे वो आपको ये नहीं देखेंगे कितने नंबर है क्या नहीं। उन्हें तो स्किल से मतलब है। पढ़ा भी पाओगे बच्चों को। बौद्धिक और व्यवहारिक क्षमताओं का विकास करना। भाई मेंटल भी और प्रैक्टिकल दोनों चीज को ही हमें डेवलप करना है। स्किल के अंदर यही आता है। आगे हम बात करेंगे फॉर्मेटिव। फॉर्मेशन ऑफ एटीट्यूड एंड वैल्यूज़। अब हमें क्या करना है? फॉर्मेशन करना है। किस चीज का फॉर्मेशन करना है? किस चीज का निर्माण एटीट्यूड आपके अंदर वो दृष्टिकोण हो। आप सब बच्चों को एक नजर से देख सको। आप सब बच्चों को पढ़ा सको। आपके अंदर हिचक नहीं होनी चाहिए। आपके अंदर वो एटीट्यूड ऑटोमेटिक होता है। कुछ लोग चाहे थोड़ा सा कम भी पढ़े लिखे हो लेकिन वो बहुत अच्छे
14:16 से समझा सकते हैं। तो वो एटीट्यूड वो दृष्टिकोण आपका होना चाहिए ऐज़ ए टीचर एज ए असिस्टेंट प्रोफेसर। आपके पास कुछ वैल्यू्यूज तो बिना वैल्यू्यूज के इंसान जीरो होता है। हमें भी पता है और हम भारत जैसे देश में रहते हैं तो वहां पर वैल्यू तो यहां है हाई होती है। बहुत ही ज्यादा वैल्यू नहीं है। तो इंसान की वैल्यू नहीं इंसान जीरो मानते हैं यहां पर। तो नैतिकता भी आपके अंदर होनी चाहिए। सामाजिकता भी किसी के साथ बातें करने का बिहेवियर आपको पता हो। किसी की भावनाओं को समझो। कोई रो रहा है तो पागलों की तरह दांत फाड़ के ऐसा नहीं जाता। तो हमें इन चीज को भी डेवलप करना है। आगे हम बात करेंगे आपका होलिस्टिक डेवलपमेंट। होलिस्टिक डेवलपमेंट किसकी बात करेगा? होलिस्टिक डेवलपमेंट करेगा आपका समग्र विकास। अब हमें बच्चों को हमें टीचिंग करानी क्यों है? आपके अंदर क्या-क्या होना चाहिए? बौद्धिक आप मेंटली
15:01 भी है ना कॉग्निशन के बेस पे भी आपका क्या हो? आपका माइंड भी विकसित हो। पहले के टाइम पे क्या होता था? सिर्फ एक पक्ष पे फोकस था कि नंबर लेके आओ। जो नंबर यहां से आ जाएंगे। बात खत्म। भावना आप समझ रहे हो? बहुत से ऐसे टॉपर होते हैं। रैंकर वन होते हैं। लेकिन क्या होता है? सुसाइड कर रहे हैं। क्यों कर रहे हैं? क्योंकि भावना का विकास नहीं हुआ। तो आज के टाइम पे प्रभावी शिक्षण में हम किसकी बात करते हैं? होलिस्टिक डेवलपमेंट ये पॉइंट ये वर्ड पेपर में कई बार आ चुका है आपके एग्जाम में। तो ये पीवाईक्यू बेस पे ही है चीजें। तो क्या है? बौद्धिक है, भावात्मक है और शारीरिक विकास को प्रोत्साहित हमें करना है। तो इंसान को क्या है? कॉग्निशन भी, इमोशन भी, शरीर भी सही रहे। एक दूसरे से वार्तालाप भी हम अच्छे से कर पाए, नैतिकता भी आ जाए, सामाजिकता भी आ जाए। तो टोटल मिलाकर जो भी डेवलपमेंट का कॉन्सेप्ट है, डेवलपमेंट मतलब विकास क्या होता है? इन सभी पक्ष को मिलाकर ही आपका विकास होगा।
15:47 अगर हम कहें कि तुम्हारा विकास सही है तो अगर आपके 100 में से 100 नंबर आ रहे हैं वो विकास नहीं है। अगर आप सभी पक्ष में बराबर समानता रखते हो अच्छे तरीके से सभी को मैनेज कर पाते हो। अगर आपके सामने कोई समस्या आ जाए आप उसे टैकल कर पा रहे हो तो इस मतलब हम कह सकते हैं आपके अंदर विकास है। छोटी-छोटी बातों पे रोने लग जाते हो। हाइपर होने लग जाते हो। पेपर कब होगा? ये होगा वो होगा। तो इसका मतलब नहीं है भाई आपके अंदर वो डेवलपमेंट। वो डेवलपमेंट डेवलप करो। आगे हमारा जो पांचवा पॉइंट रहेगा वो है आपका मोटिवेशन एंड गाइडेंस। हम टीचिंग की बात इसलिए ही करते हैं ताकि आप सब मोटिवेट हो पाओ। आप सभी को गाइडेंस मिल जाए। तो असिस्टेंट प्रोफेसर बन के सबसे पहले ये काम करना चाहिए आपको कि बच्चों को मोटिवेशन दो। क्योंकि आज के टाइम पे ये तो जीरो है। आज के टाइम पे ये जीरो है। और हम सबसे ज्यादा किस पे फोकस करते हैं? हम सबसे ज्यादा फोकस करते हैं गाइडेंस पे। और आपको पता है ना आज भी मैंने 20 दिन मुझे पता है भाई आप 20 दिन
16:33 बर्बाद करने वाले हो। तो उस 20 दिन की गाइडेंस आपको दे दी। तो जाकर चेक करना। तो छात्रों को प्रेरित करना और सही दिशा दिखाना ही हमारा काम है। तो यही आपका भी काम होना चाहिए। आगे आ जाओ। अब हम बात करेंगे लेवल ऑफ टीचिंग। ये पेपर में कई बार आ चुका है। शिक्षण के स्तर कौन-कौन से होते हैं? मेनली आपके चार स्तर होते हैं। अगर हम यूजीसी के पैटर्न पे चलें। लेकिन यूजीसी के पैटर्न पर जब हम चार प्रकार के पढ़ते हैं तो उसमें सिर्फ आपके तीन रहते हैं। ये फोर्थ वाला जो है कभी कबभार पूछ लिया जाता है। तो इसकी कुछ टेबल इस प्रकार से बनती है। तो सबसे पहले आपका स्वायता आ जाएगा। स्वायता क्या होता है आपका? ऑटोनॉमी। ठीक है? ऑटोनॉमी मतलब अपनी मर्जी का काम करना। ना तो यहां पर आपको मेरी जरूरत पड़ेगी। ठीक है? किसी की जरूरत नहीं पड़ेगी। यहां पर आप अपने आप खुद कर लोगे। तो स्वायत ऐसा
17:20 फज़ होता है जिसमें सिर्फ आप अकेले रहोगे और अकेले रहकर अपने जीवन का यापन करोगे और जीवन का यापन ऐसा नहीं है मतलब लर्निंग करोगे सीखोगे खुद को आगे बढ़ाओगे आपके पास कोई टीचर कोई गाइडर नहीं होगा आपको खुद को ही खुद को बहुत आगे लेके जाना है तो स्वायत हो जाती है अपनी मर्जी से काम करना तो ऑटोनॉमी ये सबसे जीरो लेवल पे हम कह सकते हैं सबसे बच्चा छोटा सा यही तो करता है फिर इसके बाद हमारा आ जाता है मेमोरी लेवल ठीक है मेमोरी जिसे हम बोलते हैं स्मृति स्तर ठीक है एमएल आ जाता है आपका मेमोरी लेवल मेमोरी लेवल में क्या होता है? चलो पढ़ेंगे। लेकिन इसके बाद है आपका अंडरस्टैंडिंग लेवल और इसके बाद है आपका रिफ्लेक्टिव। ठीक है? रिफ्लेक्टिव लेवल। ये चार होते हैं। स्वायता कभी-कभी पूछ लिया जाता है। लेकिन दो-ती साल से स्वायता पे इन्होंने थोड़ा सा फोकस कम किया है। लेकिन ये बताने का मतलब ये था स्वायता शब्द बार-बार पूछा जाता है। चाहे आपकी डीम यूनिवर्सिटी में स्वायता हो। ये वर्ड पूछा
18:07 जा सकता है। तो इस वर्ड को मुझे अवगत कराना था जो कि आप सभी समझ गए। स्वायता का मतलब ही होता है खुद की मर्जी करना। इसमें कोई भी आके आपका इंटरफेयर नहीं करता। खुद ही आप करते हो। हम बात करेंगे सबसे पहले लेवल ऑफ टीचिंग दिया किसके द्वारा है? तो आपका कोगन के द्वारा जो है दिया गया था। आप कहोगे मैम यह क्या बता रहे हो आप? हमने तो कुछ और पढ़ा है तो वो भी बताती हूं। मैंने यहां पर बात की लेवल ऑफ टीचिंग ये जो तीन प्रकार के दिए ये किसने दिए थे? तो ये आपका मॉरीिशस एलकोनन के द्वारा दिए गए थे। समझ में आया? थोड़ा सा अंतर है। मेमोरी अलग नहीं दिया है। अंडरस्टैंडिंग अलग है। लेकिन ये जिक्र ही किसने किया था? लेवल ऑफ टीचिंग नाम की कुछ चीजें होनी चाहिए। ये आपका कोगन के द्वारा दिया गया था। इन्होंने किस बेस पे बांटा? इन्होंने कॉग्निटिव एबिलिटीज़ के हिसाब पर क्या बांट दिया? आपके शिक्षण को बांट दिया कि टीचिंग के तीन टाइप्स होने चाहिए। आ जाओ। सबसे
18:53 पहला टाइप्स है आपका मेमोरी। मेमोरी सिर्फ एक याद वर्ड रखना। रूट लर्निंग और ये सबसे निचला क्योंकि मैंने बताए ना ये चार बताए मैंने आपको। ठीक है? चार में से ये हटा भी दिया जाता है। ये नहीं माना जाता कभी-कभी। ये अलग होता है। कभी-कभी मैच भी कर लिया जाता है। ये यूजीसी का ही पैटर्न बता रही हूं मैं। कब हमारे मेनली होते हैं? तीन। सबसे पहले एम फिर आपका यू और आपका आर। ठीक है? तो ऐसे याद रखना एम यू आर कई बार सीक्वेंस में लगाने को दे सकते हैं। तो मूर हो गया। तो ये सबसे निचला हिस्सा है ये वाला। सबसे पहले यही आता है। बच्चा नर्सरी का यही करता है। मेमोरी रटते हैं। हम बच्चों को बताते हैं कि बेटा ये ए फॉर एप्पल है। इसे रट लो अपने दिमाग में बिठा लो। तो छोटे बच्चों को नहीं पता। ए फॉर एप्पल सच में होता है। आप छोटे बच्चों को ये बोल दो ए फॉर बॉल होती है। तो बच्चा ए फॉर बॉल याद कर लेगा। उसे नहीं पता। उसे जैसा बताओगे जैसा रटवाओगे वो उतना ही रट
19:40 लेगा। ठीक है? चलो एक बार फटाफट भाई सेशन को लाइक और शेयर कर दो ताकि मेरे अंदर भी एनर्जी बनी रहे और मैं पूरा का पूरी यूनिट आज कवर करो। कम समय में ही कराएंगे बस। ठीक है? कम समय में इसलिए भी कराएंगे क्योंकि आपका एग्जाम है। ऐसा तो है नहीं कि 10 12 घंटे की वीडियो देंगे। नहीं बिल्कुल भी नहीं। पूरा का पूरा सिलेबस कवर कराना है। टाइमिंग हम ध्यान में रखेंगे जरूर। लेकिन इतना भी नहीं कि हां 1 भी घंटे में ही पूरा खत्म हो जाएगा। 1 घंटे का है भी नहीं। आपको पता है एक-एक साल में पूरा आपका सिलेबस होता है। उसे आज हम इस तरीके से कर रहे हैं कि आप भी पूरी क्लास देखने के बाद ये कहोगे कि मैम यकीन नहीं था ऐसा भी हो जाएगा। चलो तो ये क्या काम करेगा? हमारा मेमोरी लेवल काम करेगा रटने पर। एक ही वर्ड याद रखना रूट लर्निंग। रूट लर्निंग यहां पर बच्चे का माइंड काम नहीं करता। काम का मतलब ये नहीं कि बच्चा कुछ
20:25 यूज़ ही नहीं करता। मेमोरी भी आपका माइंड का ही पार्ट है। काम करने का मतलब हम सिंपल सी भाषा में बताते हैं कि वो समझ नहीं पाता ये चीज़ हो रही है या नहीं हो रही है। आपने देखा छोटा बच्चा छोटे बच्चे को ए फॉर एप्पल। लेकिन वह जैसे कुछ साल के बाद बड़ा होता है तो पूछने लगता है मम्मी यह इसका रंग रेड क्यों है? आसमान में तारे क्यों दिखाई देते हैं? यह सूरज इधर क्यों आया? यह तो कल यहां पर था। वो तो ये तो बच्चों के आंसर आने लगते हैं। लेकिन ये वो वाली स्टेज है जिसमें आंसर नहीं आते। क्वेश्चन बच्चा पुट अप नहीं करता। तो यहां पर क्या है? पुनः स्मृति बस बच्चों को हम रिकॉल कराते हैं कि ए फॉर एप्पल है। रट लो। ए फॉर एप्पल है। ए फॉर एप्पल है। बच्चे को नहीं पता एप्पल होता क्या है? नहीं पता बच्चे को लेकिन रट लेगा। यह क्या होता है? टीचर स्टैंडर्ड होता है क्योंकि टीचर ने ही घुंटी मतलब कहते हैं ना एक घुंटी पिलाई। बच्चे ने पी ली तो यह है टीचर ही इसमें होगा। तो पूछा जाता है टीचर सेंटर्ड अप्रोच कौन सी है? तो मेमोरी लेवल टीचर सेंटर्ड अप्रोच होती है क्योंकि
21:10 इसमें टीचर ही होता है। मुख्य रूप से टीचर ही होगा सब कुछ इसमें बच्चा का रोल जो है पैसिव रहता है। ये पूछा जाता है पैसिव निष्क्रिय या फिर आपका सक्रिय तो टीचर तो यहां पर एक्टिव है और बच्चा जो है यहां पर स्टूडेंट जो है आपका पैसिव है। पैसिव मतलब कम रोल होता है। टीचर ही करेगा। टीचर ही बच्चे को ए फॉर एप्पल बताएगा। टीचर ही ए फॉर बॉल भी बता सकता है। बच्चा वैसा ही करेगा। आगे बात करेंगे। यहां पर मेथड क्या होता है? यहां पर हम रिपीटेशन कराते हैं बार-बार। टेस्ट कराते हैं, ड्रिल कराते हैं। मछली जल की रानी है। इसी का एग्जांपल है। तो इसमें क्या करते हैं? सूत्रों को ए फॉर एप्पल। बस हमें पता है ए फॉर एप्पल होता है। क्यों होता है? कैसे होता है? हमें नहीं पता। बस हमें रटवाना है। तो याद करना किसी तिथि को इसके अंदर आ जाएगा। सेकंड टाइप्स आपका होता है अंडरस्टैंडिंग लेवल ऑफ़ टीचिंग। अब अंडरस्टैंडिंग किसे कहते हैं? अब बच्चा पहले रट रहा था। अब धीरे-धीरे समझने लग जाएगा। अच्छा ए फॉर
21:56 एप्पल होता है। ठीक है? बी फॉर बोल होती है पर बी फॉर तो बॉय भी होता है तो बच्चा समझ जाएगा क्योंकि वो बी वर्ड से बन रहा है तो बच्चा समझ गया अंडरस्टैंडिंग आ गई तो मध्यस्तर होता है क्योंकि बीच में होता है तो सीक्वेंस में लगाने वाला काफी बार पूछा जाता है तो लेवल जरूर याद रखना पहले मेमोरी अंडरस्टैंडिंग और आपका रिफ्लेक्टिव तो ये अर्थ को समझने लग जाता है यहां पर बच्चा क्या करेगा अर्थ को समझने लग जाएगा हां देखो आपके लिए इतना बेहतरीन कोर्स लेके आई हूं मैं और अभी भी
22:43 सिर्फ इतने कम बच्चे हैं भाई एक बार जल्दी से अपने कॉलेज ग्रुप में फटाफट शेयर करके आओ जल्दी से ठीक है। जल्दी से अपने कॉलेज ग्रुप में शेयर करके आओ ताकि उन्हें भी तो पता लगे कि ऐसा भी कुछ हम कर सकते हैं जो कि मैं आज करके दिखाने वाली हूं। आगे हम बात करेंगे संवाद। यहां पर क्या था? यहां पर बच्चा और यहां पर जो है टीचर दोनों बात कर सकते हैं। तो स्टूडेंट लर्नर अह आपका प्लस टीचर है ना बेस्ड होता है। तो यहां पर छात्र और शिक्षक दोनों होंगे। क्योंकि अगर टीचर समझाएगा नहीं तो बच्चा समझेगा कैसे? तो यहां पर दोनों ही एक्टिव रहते हैं। तो पूछा जाए किस फज़ में दोनों एक्टिव रहेंगे? तो आपका होता है अंडरस्टैंडिंग में। यहां पर टीचर भी बच्चा भी वहां पर सिर्फ टीचर था एक्टिव। तो संवाद इंटरेक्शन करते हैं। अब आप मुझसे कुछ पूछ लो। नहीं आ रहा समझ में तो मैं बता दूंगी। तो ये वाला फज़ है। आ गया मेथड। इसमें कौन-कौन से मेथड अपनाए जाते हैं? आप क्या कर सकते हैं। मैं
23:29 एक्सप्लेन करके बता सकती हूं। डिस्कशन करेंगे। आप भी बोलोगे मैं भी बोलूंगी। उदाहरण हम उदाहरण एग्जांपल दे दे के समझ लेते हैं। है ना? डेमोक्रेटिक मतलब वही लोकतांत्रिक होता है। आपको भी सोचने समझने की क्षमता है ना? पावर हम दे देते हैं। आगे हम बात करेंगे न्यूटन के। इसमें एग्जांपल में याद रख सकते हैं। कोई भी अगर आपने न्यूटन का नियम रटा था वो पहले वाले में। अब रट लिया तो हम पूछेंगे क्यों? अब उस रूल को समझने वाला यहां पर आ जाता है। अब मैंने क्या कहा कि आप इसे रट लो। पहले मेमोरी फिर आपका क्या आना था? बताओ जल्दी से। अंडरस्टैंडिंग और आपका रिफ्लेक्टिव। इसे रट लो। पहले मैंने ये कहा इसे रटो। अब मैं समझा रही हूं ना मेमोरी क्यों आएगा? क्योंकि बच्चा छोटा है। फिर थोड़ा सा बड़ा हो गया। अंडरस्टैंडिंग आ जाएगा। फिर सबसे लास्ट में रिफ्लेक्टिव। रिफ रिफ्लेक्टिव होता है। सबसे हाई पे रिफ्लेक्टिव हम बात
24:14 करते हैं जिसमें सबसे ऊंच और अह विकसित स्तर होता है। यह कहीं ना कहीं जो पीएचडी हो करते हैं जो पीएचडी करते हैं। आप जब इस लाइन पे जाओगे तो आपके अंदर ये वाली चीजें आ जाएगी। चलो यह यह समस्या समाधान विश्लेषणात्मक रचनात्मक सोच पर केंद्रित होता है। यह किस पे फोकस करेगा? क्या है समस्या? क्रिटिकल थिंकिंग। आप यहां पर अपना समाधान खुद निकालोगे। पहले में तो टीचर एक-एक चीज बता रहा था। यहां पर आप अपना समाधान खुद निकाल लोगे। पहले मैं चीजें समझी यहां से खुद निर्माण करने लग जाओगे। पहले मैं थ्योरी समझ लेते हैं। यहां पर आप अपनी थ्योरी खुद ही बना दोगे। आप यहां पर कोई नया कांसेप्ट खुद ही डेवलप कर लोगे। तो जब आप अपना कांसेप्ट तो ये बहुत हाई लेवल पे आ जाता है। पीएचडी वाले स्टूडेंट क्या करते हैं? अपनी अलग थ्योरी निकालते हैं। अपना अलग स्यूशन प्रोवाइड करते हैं। क्रिएटिव थिंकिंग नया कुछ
25:00 निकालना, नया चार करना। ठीक है? आगे हम बात करेंगे। स्टूडेंट सेंटर्ड होते हैं क्योंकि यहां पर बच्चा सबसे ज्यादा काम करता है। आप कहोगे मैम टीचर नहीं होता। यहां पर टीचर हो सकता है आप एज ए गाइडर टीचर को ले सकते हो लेकिन यहां पर स्टूडेंट ही होगा सबसे ज्यादा एक्टिव यहां पर टीचर जो है ना पैसिव रोल में होता है जरूरत पड़ेगी तो आप टीचर के पास आओगे वरना क्या जरूरत पड़ रही है ना वो वाला सिस्टम आ जाता है तो ये होता है रिफ्लेक्टिव आगे हम बात करेंगे इसमें जैसे कि आपको कोई केस स्टडी करनी है खुद ही तो करोगे कोई प्रोजेक्ट बनाना है कोई आपकी प्रॉब्लम है उसका समाधान करना आपका ही काम है आगे हम बात करेंगे आपका एनालाइज़ रियल लाइफ इशज़ मतलब यह क्या काम करेगा अब आपके जीवन में दुख यह है कि मैम अह यह मतलब कुछ सबके जीवन में अलग-अलग दुख होता है कि मैम मेरा जो है ना बार-बार दो दिन पढ़ता हूं। चार
25:45 दिन का गैप हो जाता है। खुद को ही मोटिवेट आप कर सकते हो। रिफ्लेक्ट करो ऐसा हो क्यों रहा है? आपकी समस्या क्या है कि मैं डेली नहीं पढ़ पाता। तो इस समस्या का समाधान आप खुद खोजो। हेल्प चाहिए मेरी ले सकते हो। लेकिन समाधान आपको खुद खोजना होगा। आपको अपनी समस्या पे काम करना है। जो भी समस्या है उसका विश्लेषण करो। उसका हल निकालो। यहां तक चीजें कवर हुई है तो जल्दी से एक बार मुझे कमेंट करके बता दीजिए ताकि मैं आगे चल सकूं। जल्दी से बताइए यहां तक चीजें क्लियर तो ये मैं आपके लिए टेबल लेके आई हूं। इस टेबल से सारी चीजें क्लियर मेमोरी मतलब आपका रिकॉल करना। रिकॉल ऑफ़ फैक्ट मतलब सीधा रट दो। कुछ नहीं समझना। अंडरस्टैंडिंग क्या करना? वाक्या करना। आपस में बातें करना। इंटरेक्शन करना। रिफ्लेक्टिव मतलब सिर्फ प्रॉब्लम सॉल्विंग
26:31 पे फोकस करोगे। बहुत हाई लेवल पे आ जाता है। ये क्या होता है? टीचर सेंटर्ड। सिंपल सी बात है। टीचर टीचर मुख्य है। ये स्टूडेंट सेंटर्ड। लेकिन ये इंटरेक्टिव यहां पर टीचर स्टूडेंट दोनों रहेगा। ठीक है? टीचर स्टूडेंट दोनों यहां पर टीचर की वैल्यू ज्यादा। स्टूडेंट पैसिव और यहां पर स्टूडेंट एक्टिव, टीचर पैसिव। समझ में आया? इसका उदाहरण कोई डेट याद रख ली। किसी सिद्धांत को समझ लिया तो अंडरस्टैंडिंग और किसी केस स्टडी को हल कर दिया तो आपका हो ही जाएगा। चलो इसमें यह तो मैंने बता ही दिया। याद रखना। यहां तक चीजें क्लियर जल्दी से बता दीजिए। चलो अब आपका एक काम है। मैंने पढ़ा दिया। अब मुझे जल्दी से बता दो कि मेमोरी लेवल किसने
27:17 दिया? आपका रिफ्लेक्टिव लेवल किसने दिया? क्वेश्चन ये भी कभी-कभी पूछ लिया जाता है। तो मॉरीिशस ने क्या दे दिया? आपका अंडरस्टैंडिंग दे दिया। ठीक है? लिख लेना। ने मॉडिसन ने जो है अंडरस्टैंडिंग दिया है। हंट ने क्या दिया है? आपका चिंतन दिया है और आपका स्मृति किसने दिया है? हरबर्ट ने दिया है। ये भी याद रख लेना। अब हम अगला टॉपिक पे चलते हैं। आपकी बेसिक रिक्वायरमेंट ऑफ टीचिंग। अब विशेषता पढ़ लेते हैं जल्दी से। तो टीचिंग क्या है? वैसे मैंने पढ़ा दी है स्टार्टिंग में। टीचिंग क्या है? एक टीचिंग क्या है? एक प्लान एक्टिविटीज है। अब आपको क्या लग रहा है कि मैं ऐसी आके पढ़ाने लग गई। आपको पता है इस क्लास को रिजाइन करने में मुझे लगभग एक हफ्ता लगा है। एक हफ्ते की मेहनत है और ऐसे नहीं कि दो-ती घंटे की
28:03 पूरे-पूरे दिन की मेहनत है। आपके लिए सोचना पूरा सिलेबस कवर कराना कम समय में कराना कोई टॉपिक छूटना भी नहीं चाहिए। सारा का सारा टॉपिक भी आना चाहिए। डिटेल में भी लिखना है पर लंबा नहीं होना चाहिए। है तो बहुत सारी चीजों को सोचते हैं। तब जाकर एक क्लास बनती है। क्लास के पीछे पता नहीं कितने घंटों की मेहनत है। कितने दिन की मेहनत है। और इस क्लास के पीछे तो एक हफ्ते की मेहनत है मेरी। तो आपका प्लैंड एक्टिविटी पहले से ही हम डिसाइड करते हैं कि क्या करना है। ये क्या है? लक्ष्य। अब मेरी ये क्लास क्या है? लक्ष्य है भाई। मुझे तो यूनिट वन आपकी यूजीसी नेट की कंप्लीट करानी है। जो कि आपके एग्जाम के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है। आपके एग्जाम में बहुत ज्यादा काम आएगी। इसके बिना तो काम चलने वाला नहीं है। तो इस चीज को मैंने ध्यान में रखते हुए आपके लिए काम करा है। तो क्या है? लक्ष्य गोर ओरिएंटेड है। अगर मुझे पता ही नहीं है मुझे पढ़ाना
28:48 क्या है। चलो मुझे पता ही नहीं है पेपर कौन सा है। मुझे नहीं पता यूजीसी नेट का पेपर है। मैं नहीं जानती तो क्या मैं पढ़ा पाऊंगी? नहीं पढ़ा पाऊंगी। मेरा क्या उद्देश्य होगा इस क्लास का नहीं होगा। फिर तो मैं पता नहीं क्या पढ़ाऊंगी। मुझे ही नहीं पता रहेगा। तो अगर हमें कोई गोल ओरिएंटेशन गोल ओरिएंटेड प्लस आपका पर्पसफुल तो हमारे पास पर्पस होना चाहिए। वरना हमारा काम नहीं चलेगा। और बहुत से बच्चे सिलेक्शन सीरीज के लिए WhatsApp पे मैसेज कर रहे हैं। स्क्रीन पे ये ये WhatsApp नंबर आपको दे रखा है। अगर आपको सिलेक्शन सीरीज चाहिए हमारी 1000 प्लस क्वेश्चन की बेहतरीन कंटेंट की डिटेल्स स्यूशन की तो आप थोड़ा सा वेट किया करो। अभी भी आप कॉल पे कॉल मैसेज पे मैसेज कर रहे हो और आपको पता होनी चाहिए आज ये आपकी इतनी बड़ी क्लास होने वाली है। तो थोड़ा सा मैं WhatsApp पे मैसेज कैसे आपके देख सकती हूं। तो सिलेक्शन सीरीज के लिए सिर्फ बहुत से बच्चे बड़े प्यारे हैं। भाई सीधा लिख देते हैं। पीवाईक्यू सिलेक्शन सीरीज
29:34 चाहिए। बाकी डिटेल में लिखी जाती है। तो सब्र आपको रखना पड़ेगा। और टीचिंग क्या है? कला भी है और विज्ञान भी है। फैक्ट पे भी हम बात करेंगे। रियल चीजों पे भी हम बात करेंगे और इमोशन भी हमें डेवलप करना पड़ेगा। क्योंकि सिर्फ बच्चों को डंडे से पढ़ाना या बच्चों को बिल्कुल 100% सटीक होना प्योर चीज हम नहीं करा सकते टीचिंग में। तो हमें कला इमोशन के ऊपर भी मान लो किसी बच्चे को ये चीज ऐसे नहीं आ रही। हम चेंज करेंगे। चेंज करेंगे। कला हो गई। नया कुछ सोचेंगे तो कला हो गई। साइंस क्या कहता है? बिल्कुल प्योर कर देना चीजों को। साइंटिफिक है ना? प्योर कर देना। जिसमें किसी प्रकार का भेदभाव ना हो। लेकिन भाई हमें थोड़ा सा भेदभाव करना होता है। भेदभाव ना लेकर आप कह सकते हो हमें इंडिविजुअल डिफरेंसेस का ध्यान रखना होता है। अब किसी बच्चे को 1 मिनट में आ जाएगा। अगर आप कहोगे विज्ञान ही है अगर टीचिंग तो हम क्या कहेंगे? सब बच्चे एक ही मिनट में सीखो नहीं सीख सकते। तो कला क्या कहती है?
30:19 अगर किसी बच्चे को 1 मिनट में नहीं आ रहा। आप उसे 2 मिनट दे दो। आगे हम बात करेंगे संप्रेक्षण जरूरी है। अगर आपका स्टूडेंट के बीच में कम्युनिकेशन ही नहीं है। कम्युनिकेट ही नहीं कर पाते तो क्या फायदा पढ़ाई का? क्या फायदा? बच्चों को कुछ समझ में आएगा। नहीं आ सकता। तो इंटरेक्शन और कम्युनिकेशन बहुत ज्यादा जरूरी हो जाता है। आगे सबसे अगेन पूछा जाता है टू वे कम्युनिकेशन या टू वे प्रोसेस होता है। तो कुछ जो आज की क्लास पढ़ रहे हो ना वो कम्युनिकेशन के काफी कांसेप्ट आपके डेवलप कर देगी ऑटोमेटिक। क्यों करेगी? क्योंकि हम कम्युनिकेशन में भी प्रभावी भी शिक्षण भी यह है और प्रभावी कम्युनिकेशन भी यही है। है ना? इफेक्टिव कम्युनिकेशन भी यही है। टू वे प्रोसेस। मैं भी एक्टिव रहूं। आप भी अब बहुत से बच्चे चुपचाप बिल्कुल बैठ के यस नो तो आप ही बताओगे ना मुझे कि समझ में आया नहीं आया? या मैं मैं टीचर ही तो भगवान थोड़ी हूं और भगवान को भी नहीं बता दी तो चीजें आजकल तो क्या है आप ही तो
31:05 बताओगे क्या है क्या समझ में आया क्या समझाना है क्या नहीं समझाना तो ये आप मुझे बताओगे तो टू वे कम्युनिकेशन बहुत ज्यादा जरूरी है और जब आप असिस्टेंट प्रोफेसर बन जाओगे तो सामने अगर कोई बच्चा बैठा है और वो कुछ बोलेगी ना तो आप क्या पढ़ा पाओगे कुछ नहीं पढ़ा सकते तो खुद को उस लेवल पर रखा करो जो सामने वाला बोल रहा है तो समझा करो तो मॉडिफाई करना होता है बिहेवियर को अब क्या है लर्निंग क्या होता है जो हमारा व्यवहार है उसमें परिवर्तन लाना अब पहले जो चीजें आती थी वह नहीं आ रही थी। अब आपने लर्निंग की, आपने टीचिंग की तो आपको वो चीजें आ गई। तो आपका क्या था? बिहेवियर क्या था? पहले आप उल्टे सीधे बोलते थे। लेकिन जैसे आपने पढ़ाई स्टार्ट की आपका लैंग्वेज आपका बिहेवियर ऑटोमेटिक चेंज हो जाता है। और हम इंसान को देख के बता देते हैं। ये पढ़ा लिखा है। इसका बोलने का तरीका पता चल जाता है। आगे हम बात करेंगे। ये सतत है, गतिशील प्रक्रिया है। ये एक कंटीन्यूअस है, डायनेमिक है। कभी भी एक
31:51 जैसा टीचिंग होता ही नहीं है। मान लो आज मैं ऐसे पढ़ा रही हूं। अब आप कहोगे मैम सेम ये क्लास कल भी मुझे दो। तो क्या लगता है मैं जो आज वर्डों का यूज किया कल मैं वो सेम कर सकती हूं नहीं कर सकती भाई मैं ही हूं पढ़ाने वाली सब कुछ मेरा है लेकिन आप कहो कि सेम यही एग्जांपल कल दो मुझे नहीं है भाई नहीं कर सकती क्योंकि हमारा जो टीचिंग होता है हमारा जो लर्निंग का प्रोसेस होता है वो कंटीन्यूअस होता है लगातार तो हमेशा चढ़ना ही है चाहे जीवन में पढ़ाई भी छोड़ दो लर्निंग तो करते रहोगे तो डायनेमिक ये होता है गतिशील है हमेशा एक जैसा नहीं रहता शिक्षण अधिगम को सुगम बनाता है बहुत ज्यादा इजी बना देता है अगर टीचिंग ना हो तो लर्निंग आप अच्छे से नहीं कर सकते। तो इसमें बहुत सारे क्षेत्र आ जाते हैं। जैसे कि बताया सभी क्षेत्रों को हमें डेवलप करना है। कॉग्निटिव, अफेक्टिव, साइकोमोटल तीनों पे ही हमें काम करना
32:38 है। आगे हम बात करेंगे। इसमें सबसे ज्यादा जरूरी है। अब आपने पढ़ लिया। अब ये क्लास जब एंड हो जाएगी तो आप मुझे फीडबैक तो दोगे। तभी तो मैं अगली क्लास लेके आ पाऊंगी। फीडबैक नहीं दोगे तो मुझे ऐसा लगेगा। नहीं तो बच्चे सीरियस ही नहीं है। मैंने इतनी मेहनत की और यह क्लास उन्हीं बच्चों के लिए जो सच में सीरियस हैं। जो सच में यूजीसी नेट जेआरएफ को क्लियर करना चाहते हैं तो यह क्लास उन्हीं के लिए है जो बिल्कुल सीरियस नहीं है तो प्लीज आप इस क्लास को मत कीजिएगा आपको कोई बेनिफिट नहीं मिलने वाला तो जो सच में सीरियस है पढ़ाई को करना चाहता है ये आपका इतना कंटेंट करा देगा कि आपने सोचा भी ना होगा तो मूल्यांकन के ऊपर भाई मूल्यांकन चाहिए ही चाहिए आप खुद को ऑब्जर्व करना इस क्लास को देखने के बाद कि कितने सारे कांसेप्ट आपके क्लियर हुए फीडबैक मुझे जरूर देना इस क्लास के एंड में आगे हम बात करेंगे मूल आवश्यकता क्या होती है ऐसी क्या चीजें हमें चाहिए प्रभावी शिक्षण के लिए अगेन
33:25 कहूंगी भी प्रभावी शिक्षण। इफेक्टिव टीचिंग क्या होती है? यह जो वर्ड है ना यही आता है इफेक्टिव टीचिंग में। तो सबसे पहले तो आपके ऑब्जेक्टिव होने चाहिए। तो पूछा जाएगा प्रभावी शिक्षण के लिए क्या-क्या सही है? क्या-क्या नहीं? मैच अप करो, ये करो। असरशन रीज़ आ जाएगा। तो सबसे पहले तो भाई क्लियर ऑब्जेक्टिव होना चाहिए। मुझे पता था मुझे आज क्या पढ़ाना है, क्यों पढ़ाना है? ये मुझे पता क्लियर था मेरा। विषय का ज्ञान। अब मैं आपको पढ़ा रही हूं। कुछ तो नॉलेज मेरे पास होगी। तभी मैं आपको एक्सप्लेन कर पा रही हूं। तभी मैं आपको पढ़ा पा रही हूं। तभी मैं आपके लिए ये सब चीजें लेके आई हूं। आगे जो है शिक्षार्थियों का ज्ञान। अब मैं आपको पढ़ा रही हूं। आपके पास भी तो नॉलेज होनी जरूरी है। अब आप पीजी ना करके अब आप कहो मैम ये क्लास जो है सेकंड क्लास के बच्चों को समझा दो। मैं तो समझा भी दूंगी। लेकिन क्या सेकंड क्लास का बच्चा समझ पाएगा? नहीं समझ पाएगा। क्योंकि हमें लर्नर्स के अकॉर्डिंग चीजें डिज़ाइन करनी होती है। अब ये सिलेबस आपका ही क्यों रखा? क्योंकि आप पीजी के स्टूडेंट हो। ये यूजीसी नेट के
34:11 लिए क्यों रखा? क्योंकि इस लेवल की बात है। आप इस लेवल पे कर सकते हो। अब यही काम अगर हम 10वीं क्लास के बच्चों को दे दें नहीं होगा। क्योंकि हमारा मनोविज्ञान, हमारी आवश्यकता, हमारी नीड, हमारी क्षमता इसी के बेस पर हमारा पूरा करिकुलम डिजाइन है। हमारी पूरी एनईपी डिज़ाइन है। एनईपी सीधा कहता है जैसा बच्चा वैसा पढ़ाओ। ठीक है? क्यों डिसाइड होता है कि सेकंड क्लास में इतने ही सब्जेक्ट पढ़ाने हैं। सेकंड क्लास में विज्ञान साइंस अलग नहीं पढ़ाना। ईवीएस पढ़ानी है। थर्ड क्लास में। क्यों कहा जाता है ऐसा? क्योंकि नीड देखना है। बच्चा जैसे-वैसे ही तो पढ़ाओगे। अब एक रोटी का एक रोटी खाता है। बच्चा आप उसे 10 रोटी खिलाओगे। क्या खा सकता है? नहीं खा सकता। पॉसिबल है ही नहीं। तो ऐसे हम क्या करेंगे? उपयुक्त विधियों का जो हमें विधियां चाहिए, जो मेथड हमें जिस जगह यूज़ करने पड़ेंगे, वहां यूज़ करेंगे। जिस बच्चे को जैसे समझ में आएगा, वैसे ही हम करेंगे।
34:56 अगेन विषय जैसा हमारा टॉपिक है, उसके अकॉर्डिंग अभी मेरा साइंस का तो टॉपिक है नहीं। अब मैं यहां पर एक्सपेरिमेंट करने लग जाओ। आप कहोगे मैम मूर्ख हो। ये तो आप स्किल डेवलप करने वाला टॉपिक है। तो आप एक्सपेरिमेंट क्यों कर रहे हो? तो जैसा विषय है वैसी नीड हमें लगती है। जैसा स्टूडेंट है वैसा हमें पढ़ाना होता है। एक बार फटाफट सेशन को लाइक कर दो सभी। आगे हम बात करेंगे कम्युनिकेशन स्किल। तो भाई अगर मैं कम्युनिकेशन मेरा अच्छा ना हो तो मैं आपके साथ नहीं जुड़ सकती। मेरा आपके साथ जो है कम्युनिकेशन स्ट्रांग नहीं है तो आपको आधी चीजें समझ में आई कि आधी चीजें समझ में आएगी नहीं। तो एक टीचर के अंदर जो मैं मानती हूं सबसे ज्यादा जरूरी है कम्युनिकेशन। चाहे आप कहोगे मैम टॉपिक का वो तो सेकेंडरी है। प्राइमरी पे सबसे जरूरी है कि आप स्टूडेंट्स से अच्छे से वार्तालाप तो कर पाओ। अब बहुत से बच्चों के बहुत से टीचरों के पास पीएचडी कर ली, यह कर ली, वो कर लिया। सब्जेक्टिव नॉलेज बहुत है लेकिन पढ़ा ही नहीं सकता।
35:43 कम्युनिकेशन के नाम पर कुछ नहीं है। तो कहते हैं ना किताबी ज्ञान से ज्यादा प्रैक्टिकल ज्ञान होना जरूरी है। तो स्पष्ट और प्रभावी संप्रेक्षण होना जरूरी होता है। आगे हम बात करेंगे जब आप हम प्रभावी शिक्षण की बात करते हैं। जब हम प्रभावी शिक्षण की बात करते हैं तो हमें बहुत सारी सहायक सामग्री चाहिए। टीचिंग एड्स तो चाहिए। अब मेरे पास पीसी ना हो, मेरे पास कैमरा ना हो, मेरे पास मोबाइल ना हो, मेरे पास ये ना हो। तो मैं क्या कैसे पढ़ा पाऊंगी? नहीं पढ़ा पाऊंगी। आप क्लास रूम में जा रहे हो। आपके पास बोर्ड ही नहीं है। आप असिस्टेंट प्रोफेसर बन गए। आप वहां पर गए। स्टूडेंट के पास किताबें ही नहीं है। आपके पास सब्जेक्ट ही नहीं है। आपके पास टॉपिक ही नहीं है। क्या करोगे? कुछ भी नहीं कर सकते। अगेन क्लासरूम मैनेजमेंट बहुत ज्यादा जरूरी है। अब आपको भी पता है यहां पर जो ज्यादा बोलता है, ज्यादा उल्टा सीधा
36:29 बोलता है तो उसे भी थोड़ा सा अनुशासन में रहना पड़ता है। क्योंकि आप किस प्लेटफार्म पे हो? आप पहली बात तो ईएन लर्नर्स वाले प्लेटफार्म पे हो। यहां पर मजाक हर एक चीज़ होती है। लेकिन लिमिट में एक टीचर और स्टूडेंट की गरिमा होनी चाहिए। तो अनुशासन जरूर बनाकर रखना होता है। व्यवस्था भी होनी चाहिए। प्रेरणा भी मोटिवेशन के बिना कहां आप चल पाओगे? तो प्रभावी अधिगम है। पूछा जाता है। प्रेरणा मोटिवेशन भी बहुत ज्यादा जरूरी है। अब आ जाओ मोटिवेशन होता है दो प्रकार का। एक होता है इंटरनल मोटिवेशन। एक होता है एक्सटर्नल मोटिवेशन। इंटरनल मतलब आंतरिक, एक्सटर्नल मतलब आपका बाह्य। हमें पता है बाह्य चीज़ 2 मिनट की होती है। अगर पिज़्ज़ा बर्गर खाओगे, तो बीमार हो जाओगे। तो, यह अच्छा नहीं होता। तो ऐसे ही बाहरी मोटिवेशन 2 मिनट का है। अब मैं आपको कितना ही मोटिवेट कर लूं जब तक आपको पता है अगर आप कोई असिस्टेंट प्रोफेसर बनना है आपकी नीड नहीं होगी तो आप नहीं कर सकते। और जब नीड होती है ना तो हम कुछ भी
37:16 कर सकते हैं। तो इंटरनल मोटिवेशन सबसे चरम सीमा पर होता है। कुछ तो नीड होगी या ये बताओ बिना नीड के आप छह-छात घंटे पढ़ रहे हो। नहीं मेरे कहने से आप दो दिन पढ़ सकते हो। तीसरे दिन नहीं पढ़ सकते। खुद की भूख होनी जरूरी है। और अपने भूख पे काम करना स्टार्ट कर दो। आगे हम बात करेंगे मूल्यांकन और फीडबैक जरूरी है जो कि अभी मैंने बताया। आगे लचीलापन अनुकूलता जरूर आनी चाहिए। अब मैंने फिक्स कर रखा नहीं मैं तो बस दो ही घंटे पढ़ाऊंगी। किसी को आए समझ में ना आए। मैं नहीं 2 से 1 मिनट भी ऊपर होने वाले हैं। ऐसे टीचर मिलते हैं। अच्छे नहीं होते वो। लचीलापन जरूरी है क्योंकि हम टीचिंग की बात करें। जितना ज्यादा फ्लैक्सिबल होगी टीचिंग उतना ज्यादा आपके लिए बेहतर होगा। आगे हम बात करेंगे अनुकूलता। अनुकूलता किसकी बात करता है?बिलिटी। आप किसी चीज को अडप्ट कर पाओ। अडप्ट कैसे करोगे? और हमें उसी के चीज अनुकूल करना है। अब जो
38:02 चीजें पढ़ाई जा रही है उस पर ध्यान दो। आपको बताया जा रहा है आपके लिए है। बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट यूनिट है। बहुत ज्यादा क्वेश्चन इससे बनते हैं। ये यूनिट बाकी यूनिट का बेस है। क्योंकि टीचिंग करने टीचिंग असिस्टेंट प्रोफेसर करके अब करना ही क्या है? टीचिंग ही तो करनी है। तो अगेन ये आपके लिए बहुत ज्यादा जरूरी है। तो इस चीज पे आपको ध्यान देना ही पड़ेगा। तो अच्छे शिक्षक की प्रक्रिया परिस्थिति के अनुसार जो है विधियों का समायोजन है। तो अनुकूलता हमारे जीवन में बनी रहनी चाहिए। हमें पता है सर्दी होती है तो हम सर्दी के कपड़े पहनते हैं। गर्मी होती है हम गर्मी के कपड़े पहनते हैं। अब हम आगे बात करेंगे आपका पेशेवर नैतिकता। अब प्रोफेशनल में तो आप ऐसे जा रहे हो देश के निर्माण करने वाले है ना निर्माणक। तो जब आप ऐसे प्रोफेशन में जाते हो तो भाई नैतिकता नाम की चीज भी होनी चाहिए। निष्पक्ष हो। कोई भेदभाव करना नहीं है। एथिकल आपके अंदर हो किससे कैसे तमीज में बात करनी है वैसे ही करो। बहुत से बच्चे
38:49 ऐसे आते हैं उल्टे सीधे कमेंट कर देते हैं ना। बिना कुछ जाने बिना कुछ बोले। तो एक ने तू तड़ाक में मैसेज किया। लेकिन भाई मैंने तो अपनी नैतिकता नहीं छोड़ी। मैंने तो उसे आप ही कह के बात किया। उसने लिखा तू क्या जानती पता नहीं क्या बदतमीजी से उसने कुछ लिखा था। तो मैंने तो आप लिख के मैसेज किया। तो ये मेरी नैतिकता को बता रहा है। आप जिस लैंग्वेज जिस टोन में बता रहे हैं वो आपकी नैतिकता को बता रहा है। तो आप तैयारी और वो बच्चा था भी असिस्टेंट प्रोफेशन का। वो तू लिख के बात कर रहा था। अच्छी बात नहीं है। तो आपको उस लेवल पे आना है जिस लेवल पे बनने जा रही हो। तो निष्पक्ष होना चाहिए। भाई मैं किसी को भी भेदभाव करके नहीं देखती और आपको भी नहीं देखना। छात्रों के हित में ही आपके लिए क्लास लेके आए हैं। अब हम अगले टॉपिक की बात करेंगे शिक्षार्थियों की विशेषता। अब आप लोगों की क्या विशेषता होनी चाहिए? चलो तो सबसे पहले एडोलेसेंस है। तो
39:38 एडोलसेंस का सबसे पहले तो ग्रुप याद रखो। एज ग्रुप क्या होता है? तो 13 से 18 साल वाले होते हैं एडोलसेंस और 18 साल के बाद हो जाता है एडल्ट एजुकेशन। तो अब आप लोग सभी किस में हो? एडल्ट एजुकेशन में हो। एडोलेंस वाले बच्चे नादान होते हैं। नादान तो खैर आजकल है नहीं बड़े तेज होते हैं। मतलब बहुत कहते हैं ना इतना इतनी समझ नहीं मैच्योरिटी नहीं आती। आने लगती है इस ऐज में लेकिन इतनी खास नहीं आती। तो 13 से 18 साल का बच्चा गलती अभी करेगा सीखेगा भी। लेकिन आप एडल्ट एजुकेशन में हो। अब आप सभी एडल्ट हो। कोई भी 18 साल से कम का तो है ही नहीं। तो क्या है भाई? एडल्ट एजुकेशन अलग है, एडोलसेंस अलग है। एडलसेंस एक ऐसा काल है जिसमें बहुत ज्यादा बदलाव होते हैं। बच्चों को पता ही नहीं उसके साथ क्या-क्या हो रहा है। तो यहां पर हम बात करेंगे सबसे पहले शैक्षणिक विशेषता। तो हमें अमूर्त चिंतन बच्चे के अंदर आने लगेगा। अमूर्त चिंतन वो होता है जो सामने चीज है भी नहीं। उसके बारे में सोचना।
40:24 जैसे कि बच्चे के सामने नहीं है। कुछ ऐसी चीज लेकिन वो फिर भी सोचता है भाई मुझे तो पायलट बनना है। नहीं है उसके सामने कोई। उसके घर में कोई भी नहीं था। लेकिन फिर भी सोचा। तो अमूर्त ऐसा एब्स्ट्रैक्ट थिंकिंग और आपका समस्या समाधान में रुचि इसमें दिखने लगती है। आगे हम बात करेंगे। इसमें बच्चा जो है ना अपने अध्ययन की आदतें करियर को चुनने की समझ विकसित करने लगता है। आपको भी पता है 18 साल के आसपास आपने सोच लिया था। मुझे करना क्या है? रोज से बच्चे नहीं सोचते वो अलग बात है। इसमें सोशल अब इसमें सामाजिक विशेषता क्या आ जाएगी? यह अवस्था साथियों का बहुत ज्यादा प्रभाव है। इस ऐज में या तो हमारे यहां पर कहा जाता है बच्चा बिगड़ता ही है बच्चा सुधरता ही है। और वो बिगाड़ने सुधारने में था मतलब सामाजिकता सबसे ज्यादा जरूरी है। अगर दोस्त अच्छे होंगे तो बच्चा सुधर जाएगा। अगर दोस्त अच्छे नहीं होंगे तो बच्चा बिगड़ जाएगा। आगे हम बात करेंगे
41:09 सामाजिक पहचान की। तो इसमें बच्चा अपनी आइडेंटिटी ढूंढने लगता है। मैं क्या हूं? आजकल तो भाई रील्स Instagram पे ही अपनी आइडेंटिटी पहचानने वाला काम हो गया। आगे हम बात करेंगे इमोशनल बच्चे के अंदर अस्थिरता होती है। कभी खुश लगेगा, कभी इतना गुस्सा आता है कि मर्डर कर दे बच्चा। ऐसा भी हो जाता है भाई। ठीक है? मतलब अलग ही लेवल पे यहां पर बच्चा इमोशन था ही नहीं। स्टेबिलिटी होती ही नहीं है। कभी अच्छा कभी आपके लिए जान दे दे, कभी आपके लिए जान ले दे तो गुस्सा, झुलझुलाहट ये तो होता ही है। आत्म जागरूक खुद को ही समझता। बस मैं ही हूं सब कुछ। मेरे जैसा कोई नहीं। मेरी बात कोई नहीं समझ सकता। मुझे कोई समझ ही नहीं सकता। तो किसमें हो गया? इमोशनल में हो गया। कॉग्निशन तो इसमें बढ़िया कॉग्निटिव में क्या होता है कि तर्क तर्क बच्चा लगाने लगता है। आलोचनात्मक सोच विकसित स्टार्ट हो जाती है। बच्चे को पता रहता है हां ये
41:55 चीज ऐसे तो लॉजिक लगा लेगा। तो जो आपका रिफ्लेक्टिव लेवल है वो कहीं ना कहीं इसमें भी आने लगता है। आगे हम बात करेंगे तथ्यों का पथ्यकरण पर। प्रश्नों पर सवाल उठने लगता है। मेरी 18 साल हो गए मैं नहीं करूंगा शादी। तो क्वेश्चन उठाने लगता है। तो इस प्रकार के क्वेश्चन उठाएगा घर में भी, बाहर भी और टीचर पर भी। क्या कह रहे हो यह लोग यूनिट वन को? एक तो सबका पढ़ाई पर फोकस नहीं गया। कमेंट करके बताओ चीजें समझ में आ रही है या नहीं? आज ही पूरा कराओगे। ईलू भैया आज ही पूरा होना है। पूरी यूनिट वन आज ही होनी है। चाहे 2 घंटे लगे, 4 घंटे लगे, चाहे मुझे चक्कर आके मैं गिर जाऊं, कुछ भी हो लेकिन मैं आज ही कराऊंगी। आगे आ जाओ। अब
42:41 हमने बात की थी एडल्ट की। अब हम बात करेंगे एडल्ट की। पहले की थी एडोलसेंस। तो एडोलसेंस कैसे होता है? पढ़ लिया। अब एडल्ट एडल्ट आप हो। अब आप क्या हो? 18 साल से प्लस वाले जितने भी आप एडल्ट हो। बुढ़ापा नहीं आया अभी आपको। तो इसमें क्या है? आप अत्यधिक लक्ष्य उन्मुख हो जाते हैं। आपको पता है भाई मुझे जॉब चाहिए ही चाहिए। मुझे नौकरी चाहिए ही चाहिए। अगर मुझे नौकरी नहीं मिली ना तो कहीं ना कहीं मेरा भविष्य खराब हो जाएगा। इससे पहले बच्चा नौकरी के लिए इसलिए भी सोच रहा था। मेरे पिताजी ने कहा है डॉक्टर बनना है तो बन जाएगा। लेकिन यहां पर आप अपने लिए जीते हो और आपको अपने लिए ही जीना है। तो प्रैक्टिकल और रिलेवेंट लर्निंग करने लगता है। प्रासंगिक अध अधिगम होने लगता है। आपको पता है अगर नहीं करूंगा तो मेरा पूरा जीवन बर्बाद हो जाएगा। कोई किसी को खाने-पीने को नहीं देता। दो दिन की कहानी है। तीसरे दिन सब भूखे मरते हैं फिर। तो क्या है भाई? सोशल। सामाजिकता आ जाती है
43:28 कि जीवन के अनुभव का अधिगम करने लगते हो। समान समानता का सहयोग। ये तीनों आपको पसंद आने लगता है। यहां पर सिर्फ ऐसा नहीं कि दोस्त ने कह दिया चल यूजीसी नेट का पेपर छोड़ चल घूमने जल्द से वो वाला नहीं आपको पता है इस स्थिति में आपको क्या करना है तो आप स्थिति के अकॉर्डिंग काम करने लग जाते हो इमोशनल के ऊपर वही इमोशनल आप जो स्थिर हो गए अब ऐसे तो बात पे रोने लगोगे आपको मैंने डांट दिया आप रोने लगोगे नहीं आप मुझसे बदला लोगे वो भी नहीं आता तो बदले वाली भावना भी अडोलेसेंस में ज्यादा आती है यहां पर आप बिल्कुल आंतरिक कारणों के मोटिवेट भी कैसे होते हैं इंटरनल फैक्टर आपको खुद का करियर दिखता है आपको खुद की ग्रोथ दिखती है अगर मैंने मेहनत नहीं की तो मेरा क्लियर नहीं होगा। सिंपल सी बात है। उसमें आठ दोस्तों के कहने से बिना पढ़े हुए पेपर दे आते थे। लेकिन इसमें पढ़ के दोगे तो नियंत्रित होता है कॉग्निशन। इसमें हम चिंतन का बात करते हैं। प्रयोग का तर्क का जो रिफ्लेक्टिव
44:15 लेवल था वो इसमें अच्छा वाला आ जाता है। अह सब निर्देशित अधिगम और स्वतंत्रता को पसंद करते हो। आपको ये चाहिए भाई लड़कियों को भी चाहिए। लड़कों को भी चाहिए कि भाई मैं आजाद रहूं। आजाद होने का मतलब यह नहीं होता कि पढ़ाई ही करनी है। आजाद होने का मतलब यह नहीं होता पैसा ही कमाना है। मतलब मैं अपना जीवन अच्छे से अपने अकॉर्डिंग जी तो सकूं। बहुत से लोग नौकरी कर रहे हैं। बढ़िया अच्छी खासी नौकरी कर रहे हैं। बढ़िया पैसा आ रहा है। सब कुछ है। लेकिन खुशी नहीं है। वो खुशी को ढूंढने आप लगते हो एडलेसेंस में तो कुछ पता ही नहीं होता। लेकिन हां एडल्ट में सब कुछ करने लगते हो। आगे आ जाओ। अब हम अगले टॉपिक पे चलते हैं। इंडिविजुअल डिफरेंसेस व्यक्तिगत अंतर है। अब आप में मुझ में बहुत अंतर है। आप सभी में बहुत अंतर है। अब क्या पता मेरी क्या चीज अच्छी है। और आपका क्या पता आपके अंदर क्या कैपेबिलिटी है। तो अपनी कैपेबिलिटी को पहली बात बाहर लेके आओ। और जब आप असिस्टेंट प्रोफेसर बनते हो तो हमें इस
45:02 चीज के ऊपर बहुत ज्यादा फोकस करना पड़ता है। मैं बिल्कुल नहीं समझ सकती। मैं बिल्कुल नहीं समझती कि जिस स्पीड से मेरी पढ़ाने का तरीका है आपका भी हो या जिस तरीके से मैं पढ़ाती हूं आप भी पढ़ा सकते हो। क्या पता आपका तरीका मुझसे भी बेटर हो। आप सबके अलग-अलग तरीके हैं। बहुत से स्टूडेंट का मैसेज आता है। मैम हमें भी आपकी तरह पढ़ाना है। मेरी तरह क्यों पढ़ाना है भाई? मेरी तरह नहीं बन सकते आप। क्या पता मेरे अंदर कितनी कमी है। आपके अंदर क्या पता कितनी खूबी है। आप उन्हें निकालो ना। और यह बात सच है। किसी के जैसे बनोगे तो अपनी चाल भी खो देते हैं। कहते हैं ना वो कौन सी कहावत है कि हिरन चला पता नहीं किसकी चाल फिर अपनी भी चाल खो दी तो वो नहीं हमेशा इंडिविजुअल डिफरेंसेस पे फोकस करो और ये बहुत अच्छी चीज होती है। आपके और मेरे बीच में अंतर नहीं होगा। तो आपके और मेरा अस्तित्व रह क्या गया। तो इंडिविजुअल डिफरेंसेस के ऊपर हमें बच्चों
45:48 के ऊपर भी फोकस करना है। हमें पता है सारे लर्नर के अंदर योग्यता अलग है, रुचि अलग है, प्रेरणा अलग है, पृष्ठभूमि अलग है, व्यक्तित्व अलग है। और इसी वजह से अब हमारी एनए पे भी हमारे सिलेबस को चेंज कर रही है। सब चीजें होती जा रही हैं। पहले क्या था? एक ही डंडा सब बच्चे एक ही किताब सब बच्चों को वही पढ़नी है। हर एक बच्चा एक ही लाइन में लगा हुआ था। अब चेंज आ रहा है। तो ये पूछा जाता है प्रभावी शिक्षण क्या है? योग्यता के आधार पर, रुचि के आधार पर जो पढ़ा रहे हो प्रभावी शिक्षण ही है ये। चलो आगे हम बात करेंगे अंतर के आधार पर बहुत सारे व्यक्तिगत इंडिविजुअल डिफरेंसेस होते हैं। आपकी मेरी बुद्धि अलग-अलग है। आपका मेरा आईक्यू लेवल अलग है। थिंकिंग मैं क्या पता क्या सोचते हो। आप पता नहीं क्या सोचते हो। क्या स्पीड है। मेरे अंदर क्रिएटिविटी है नहीं है। आपके अंदर क्या पता मुझसे ज्यादा हो। तो हम क्या सोचते हैं? अलग-अलग तरीके से सोचते हैं। हां ई लोग बिल्कुल सही कह रहे हैं।
46:34 ये आपको उस एग्जाम में भी लिमिट से ज्यादा हेल्प देगा। क्योंकि है ही ये पूरा। हां भाई यह तो मैंने सोचा ही नहीं था आपको उस एग्जाम में बहुत ज्यादा है। आपने सोचा नहीं था जितना ही उसमें भी हेल्प करेगा। आगे हम इमोशनल की बात करेंगे। भावात्मक अब सब सबकी भावना अलग है। क्या पता मुझे बड़ी जल्दी गुस्सा आ जाता हो। क्या पता आपको गुस्सा ना आता हो। क्या पता मुझे बहुत जल्दी रोना आता है। क्या पता आपको ना आता हो। तो भावना सबकी अलग-अलग है। सामाजिकता सबकी अलग-अलग है। अब क्या पता मैं मुझे बड़ा अच्छा लगता हो। बड़ों लोगों के मतलब बड़े लोगों के बीच में बैठना उठना। आपको छोटे बच्चों के साथ खेलना पसंद हो। और वैसे भाई मुझे थोड़ा सा छोटे बच्चों के साथ खेलना इतना खास पसंद नहीं है। मतलब मुझे नहीं पसंद है। क्या पता आपको छोटे बच्चे के साथ खेलना उतना ज्यादा पसंद हो। मुझे मतलब थोड़ा सा अपने से थोड़े से बड़े उनके साथ सीखने को ज्यादा मिलता है। ऐसा
47:21 नहीं मतलब सबकी चीजें अलग-अलग है। लेकिन मैं एक एग्जांपल दे दूंगी। कल्चर वही आपका अलग है। मेरा बैकग्राउंड अलग है। सबके ट्रेडिशनल अलग होते हैं। लैंग्वेज अलग है। तो उसका प्रभाव मिलेगा। अब आप कहने लगोगे नहीं मैम हमारी लैंग्वेज में बोलो। मैं कभी आपके घर आई नहीं। तो मैं कैसे बोल सकती हूं? आप कहो नहीं मैम हमारे वाला खाना खाओ। मैंने कभी आपके घर में खाना देखा ही नहीं। मतलब मैंने नहीं देखा आपके घर का खाना कैसा है। तो आप कहोगे कि नहीं मैम ऐसे ही खाना खाया करो। मैं नहीं खा सकती। नहीं पता मुझे शारीरिक सबकी फिजिकल हेल्थ स्ट्रेंथ सब अलग है। क्या पता कोई 2 मिनट कदम पे सांस फूल जाती है। क्या पता कोई 2 कि.मी. पे पलक भी नहीं झपकाता है ना। ऐसीऐसी लर्निंग स्टाइल सबका अलग है। सबके पढ़ने का तरीका अलग-अलग है। किसी को देख के समझ में आता है। किसी को बोल के समझ में आता है। किसी को लिख के समझ में आता है। सब लर्नर अलग-अलग होते हैं। अब हम क्या करेंगे? शिक्षकों के लिए उपयोगी
48:06 बिंदु क्या है? शिक्षक क्या करेगा? विविध ये पूछा जाता है डायवर्स क्लासरूम या मेथड अच्छा होता है। तो आपको क्या करना है? अलग-अलग तरीके की विधियां यूज़ करनी है क्योंकि आप सभी अलग-अलग हो। चलो धन्यवाद पुष्पा हां जी मैम बहुत अच्छे से समझ में आ रहा है। ठीक है बीच-बीच में बताते रहा करो और एक बार देखो जिन्होंने अभी तक लाइक नहीं किया एक बार लाइक और शेयर करो क्योंकि बिल्कुल मेरा ध्यान आज पढ़ाने पे है बातें वातें कम देखेंगे आज हम बातें नहीं करते वो बीच में थोड़ा सा समझदारी भी होती है। अब अगेन है ना मेरा
48:54 मेथड आप नहीं जान सकते। तो विविध विधियां हमें है ना डवर्स मेथड यूज़ करने हैं जो कि आपके लिए बहुत ज्यादा जरूरी है। व्यक्तिगत अधिगम आवश्यकताओं का सम्मान करना है। उनका उत्तर देना है। आगे हम बात करेंगे सहायक कुल मिलाकर यह है। जितने ज्यादा आप अलग-अलग मेथड सपोर्ट सिस्टम यूज़ करोगे, समृद्धि आधारित शिक्षण यूज़ करोगे, उतना ज्यादा बेटर है। हमें पता है। पहले हम बच्चों को सिर्फ किताबों से पढ़ाते जब हम पीपीटी से पढ़ाते हैं। अब हम बच्चों को बोर्ड से पढ़ाते हैं। अब हम बच्चों को स्मार्ट बोर्ड से पढ़ाते हैं। हम ये पढ़ाते हैं, वो पढ़ाते हैं। तो बच्चा और ज्यादा आपको पता है ना आईक्यू बच्चे का बढ़ता जा रहा है। अब बच्चा अलग ही लेवल का सीख रहा है। तो क्यों है? क्योंकि चीजें बदल रही है। अब ये क्वेश्चन भी आता है शिक्षण को प्रभावित करने वाले कारक कौन सा है? कौन सा प्रभावी शिक्षण बनाएगा? कौन सा नहीं बनाएगा? तो सबसे पहले कौन से कारक आ जाते हैं? टीचर लर्नर रिलेटेड फैक्टर। अब हमें पता है शिक्षक का ज्ञान योग्यता शिक्षण की गुणवत्ता को
49:40 प्रभावित करती है। अगर मेरे पास नॉलेज ही नहीं है। अगर मेरे पास योग्यता ही नहीं है तो मैं कितना ही मेहनत कर लूं नहीं पढ़ा सकती। आगे मेरा दृष्टिकोण मेरा एटीट्यूड ही नहीं है पढ़ाने वाला। मैं आपको मोटिवेट ही नहीं कर पाती तो क्या फायदा? ऐसे-ऐसे टीचर देखे हैं। भाई उनके अंदर भी नेगेटिविटी भरी है और बच्चों के अंदर भी। लेकिन मेरी मेरी क्लास में उल्टा बच्चे नेगेटिव हैं। मैं इतनी पॉजिटिव हूं। बच्चे मुझे नेगेटिव करके जाते हैं। है ना? इतनी बेहतरीन क्लास पर भी ना तो लाइक हो रहा है ना ही शेयर हो रहा है। आप इसकी कदर बाद में समझोगे। बाद में रहोगे। फिर कमेंट आते हैं मैम हमें पहले आपका चैनल नहीं मिला। पता नहीं YouTube थोड़ा सा अगेन मैं कह रही हूं जब से हैक वगैरह हुआ है ना तब से बहुत ज्यादा दिक्कत हुई है। कम्युनिकेशन कौशल जो है स्पष्ट समझ
50:27 में आया? आपकी मेरी बातें बिल्कुल क्लियर होनी चाहिए। शिक्षार्थियों को प्रेरणा रुचि अधिगम की प्रभावशीलता को बढ़ा दिया। अगर आपका इंटरेस्ट ही नहीं है ना यूजीसी नेट में तो आपको यह क्लास बहुत बेकार लगेगी। इससे बेकार क्लास पूरी धरती पे नहीं है। अगर आपका इंटरेस्ट ही नहीं है। हर एक चीज में कमी लगेगी। बहुत से बच्चे आते हैं मैम ये नहीं था, वो नहीं था। इंटरेस्ट नहीं है। आपकी नीड ही नहीं है। आपके घर में बढ़िया पैसा है, घर वाले बढ़िया दे रहे हैं। आपको जरूरत ही नहीं है पढ़ने की। तो इस वजह से कमी हर चीज में लगेगी। तो अगेन अगर आपके अंदर प्रेरणा नहीं है, इस क्लास में हजार कामियां है। अगर आपके अंदर मोटिवेशन है तो इस क्लास में आपको हजारों इंटरेस्ट मिल जाएगा। आगे हम बात करेंगे व्यक्तिगत अंतर। अब आपकी बुद्धि अलग चलती है। है ना? आपकी बुद्धि चलती है PUBG में। मेरी बुद्धि चलती है आपको पढ़ाने में। आपकी हेल्थ मुझसे बहुत बेटर है। आपके पास बहुत सारी नॉलेज है। आप कहते हैं ना सड़कों पे घूमते हो। घूमने का
51:15 मतलब वैसे अच्छे अच्छे वाले सेल्स में। ठीक है? तो आपके पास ज्यादा नॉलेज है। आगे हम इस आपका सपोर्ट मटेरियल क्या-क्या हो सकता है? अब आपको अच्छा टीचर बनना है प्रभावी शिक्षण कराना है। तो चार्ट मॉडल्स जितने ज्यादा अलग-अलग चीजें उतना बेहतर आपका शिक्षण। अब मान लो कैमरा मैंने बंद कर दिया तो क्या पता आपको समझ में ना आए। ठीक है? अब कहीं ना कहीं मेरे भी बॉडी लैंग्वेज यूज़ करती हूं मैं। तो उसका भी बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ता है। तो चार्ट मॉडल्स इन सबका डिजिटल उपकरण हम यूज़ कर रहे हैं। तो इसी वजह से हमारा टीचिंग मेथड आसान है, रोचक है। आगे हम बात करेंगे आपका विषयनुकूल है। सब्जेक्ट के अकॉर्डिंग हम काम करेंगे। स्पष्ट होना चाहिए। आकर्षित हमारा होना चाहिए। चलो जल्दी से हम बात करेंगे। अभी आपके टाइप्स मैं लेके आ गई। ये देखो कितना आप सोचोगे नहीं कितना बेहतरीन आपका कंटेंट
52:02 लेके मैं आई हूं। आगे हम बात करेंगे आपका विजुअल एड्स। दृश्य सहायता मतलब मैं चार्ट दिखा दूं, पिक्चर दिखा दूं। ग्राफ्स मैप इसके हिसाब से। तो पूछा जाता है विजुअल एड्स में कौन-कौन सा आएगा? ऑडियो में कौन सा आएगा? रिकॉर्डेड लेक्चर जो बाद में देखेंगे स्टूडेंट कमेंट करके जरूर देखा जाना तभी अगला अगली इस बैच की अगली क्लास तभी आएगी जब इस पे कम से कम आप 100 कमेंट्स तो करोगे कैसी लगी क्लास क्योंकि देख देखेंगे ये लगभग बहुत सारे बच्चे तो 100 प्लस मुझे कमेंट चाहिए कि क्लास कैसी लगी और रियल फीडबैक झूठ बोलोगे तो भी क्लास नहीं होगी और यहां पर धमकी चलेगी मेरी सत्ताधारी शिक्षण करेंगे ऑडियो विज़ुअल अब आप मुझे देख भी पा रहे हो आप मुझे सुन भी पा रहे हो ठीक है तो ये अच्छा होता है यह और भी ज्यादा बेटर प्रिंटेड अब आपको हमारी सिलेक्शन सीरीज मिलती है। ठीक है? तो वो क्या होती है? आपकी बुक हो गई,
52:47 हैंड आउट हो गए। ठीक है? और वर्कशीट हो गई। डिजिटल रिसोर्सेज ऑनलाइन कंटेंट आपको मिल रहा है। प्रेजेंटेशन है, ऐप है। ठीक है? WhatsApp है। तो ये सब क्या है? ऑनलाइन। अब हम बात करेंगे शिक्षित सुविधा कौन-कौन सी होनी चाहिए? जब आप टीचर जब आप असिस्टेंट प्रोफेसर बनोगे तो वहां पर क्या चाहिए आपको? क्लासरूम तो चाहिए। अब पुराने वाला जमाना तो है नहीं कि पेड़ों के नीचे बैठ के पढ़ा दोगे। अच्छा अगले दिन आएगा नहीं। हमारे घर में तो एसी लगा हुआ है। गुरु जी तो हमें पेड़ों के नीचे बिठाते हैं। कोई नहीं आने वाला। आगे है आपका लैब चाहिए। हमें पुस्तकालय चाहिए। मल्टीमीडिया चाहिए। मल्टीमीडिया रूम का मतलब अलग-अलग प्रकार की आप चीजें यूज़ कर सको। आप बोर्ड यूज़ कर सको। आप मोबाइल यूज़ कर सको। आप पीपीटी यूज़ कर सको। मल्टीमीडिया विभिन्न प्रकार की चीजें। उचित सुविधा मिलनी चाहिए। सबसे जरूरी है। अच्छा वातावरण। अब
53:33 आपको पता है हमारी क्लास का वातावरण बड़ा अच्छा होता है ना। बड़ा प्यारा है। कभी-कभी डिस्टर्ब हो जाता है वो अलग बात है। और होना भी चाहिए। तो क्या है? गुड लर्निंग एनवायरमेंट। अगर हम यहां पर उल्टे-सीधे आप कमेंट में बदतमीजी करने लगो, कमेंट में उल्टे-सीधे कमेंट आने लगे, आपको क्या लगता है कि मैं पढ़ा पाऊंगी नहीं पढ़ा पाऊंगी? आप पढ़ पाओगे नहीं पढ़ पाओगे। वो अलग बात है कि कमेंट ऑफ कर दोगे, ऑन कर दूंगी मैं तब पढ़ लोगे। लेकिन वैसे तो नहीं पढ़ पाओगे। तो जब हम पढ़ाते हैं तो इन चीजों का 10 बच्चे पढ़ाई पे ध्यान दे रहे हैं। 20 बच्चे आपकी क्लास में लड़ रहे हैं। नहीं पढ़ा पाओगे। अच्छा नहीं है लर्निंग एनवायरमेंट। तो प्रभावी उपयोग शिक्षकों की शिक्षक की क्षमता। अगेन अ कहा जाता है कि टीचर अब प्राइमरी नहीं रहा। सेकेंडरी है लेकिन टीचर टीचर ही है। आप समझो टीचर टीचर ही है। चलो अब हम बात करेंगे टाइप्स मैंने बता रखा है कक्षा का एनवायरमेंट कैसे होना चाहिए? लैब होनी
54:19 चाहिए ताकि प्रैक्टिकल बच्चा कर सकें। लाइब्रेरी होनी चाहिए ताकि बुक का एक्सेस मिल सके। अब तो ऑनलाइन लाइब्रेरी आती है। ई लाइब्रेरी क्या होता है? इलेक्ट्रॉनिक लाइब्रेरी जो आप ऑनलाइन भी पढ़ते हो। ऑनलाइन ही पढ़ते हो। आजकल पढ़ते क्या हो? तकनीकी टेक्नोलॉजी हमें चाहिए। स्मार्ट बोर्ड चाहिए, कंप्यूटर चाहिए, इंटरनेट में बिना इंटरनेट के सांसे नहीं आती। अगर पूछा जाए प्रेजेंट टाइम में अब सबसे ज्यादा जरूरी क्या है? ऑप्शन है सांसे। ऑप्शन है मोबाइल, ऑप्शन है इंटरनेट। बताइए और चौथा ऑप्शन है इंटरनेट के साथ मोबाइल। शिक्षक वातावरण संस्था मैंने चलो अब हम बात करेंगे लर्निंग एनवायरमेंट। शिक्षण वातावरण देख लिया। चलो भौतिक भी होना चाहिए। सामाजिक भी सभी परिस्थिति को लेके हमें साथ चलना है। हमेशा पॉजिटिव
55:06 रहना है क्योंकि जीवन वैसे ही इतना नेगेटिव है। थोड़ा सा और आप नेगेटिव हो जाओ। तो क्या बचा? कुछ नहीं बचा। अब ये मत कहने लगना मैम माइनस माइनस प्लस होता है। आई नो वेरी वेल। बट माइनस माइनस आपके लिए और ज्यादा माइनस हो जाएगा। प्लस नहीं होगा। तो हमें क्या करना है? माइनस तो दुनिया है। हमें प्लस बनना है। सारा क्या-क्या होता है? अगर पढ़ते समय कक्षा का माहौल खराब है, पीियर ग्रुप अच्छे नहीं है, टीचर का व्यवहार अच्छा नहीं है, तो इससे बहुत ज्यादा गलत प्रभाव पड़ेगा। और हमें अच्छा बनाना है तो हम क्या करेंगे? क्लास रूम बड़ा अच्छा रखेंगे। आप एक दूसरे के साथ सीखोगे। यस। इंटरनेट के साथ मोबाइल को लॉक कर दिया जाए। वेल डन। क्योंकि मोबाइल से भी काम नहीं चलेगा जब तक नेट ना हो। इंटरनेट ना हो। तो व्यवस्थित संगठन है। अब संस्था के बारे में बात करेंगे। अब हम अह जब आप किसी
55:52 कॉलेज में जाओगे तो उसकी संस्था कैसी होनी चाहिए? अवस्थित होनी चाहिए। ऐसा ना हो कि प्रिंसिपल अपना अलग लगा हुआ है। स्टूडेंट अपनी अलग दुनिया में मगन है। अह टीचर अलग है। आप नए टीचर गए हैं वहां पर। आप देखोगे ये क्या हो रहा है? यहां तो कोई पढ़ता ही नहीं है। यहां कोई पढ़ाता ही नहीं है। किसी के चल रहे हैं। कोई वहां पे खेल रहा है, कूद रहा है। सबसे जरूरी होता है वहां ऑर्गेनाइज्ड होना चाहिए। सेटअप फॉर्मल होना चाहिए। लाइक स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटीज़ क्या है? हमारी फॉर्मल है। अधिगम में अनुशासन जरूरी होता है। पाठ्यक्रम हो। नहीं पढ़ा पाओगे भाई बिना पाठ्यक्रम के। यूजीसी सबसे पहले पाठ्यक्रम देता है। कोई भी वैकेंसीज आए पाठ्यक्रम देता है। समर्थन मिलना चाहिए। सपोर्ट मिलनी चाहिए। चलो आप लोगों के दृष्टिकोण है। प्रदर्शनी को प्रभावित करती है। जैसी आपकी संस्था होगी। कहते हैं ना जैसे टीचर जैसे
56:38 स्टूडेंट होते हैं वैसी ही संस्था बन जाती है। अच्छे स्टूडेंट होंगे, अच्छी संस्था बनेगी। अच्छे टीचर होंगे ऑटोमेटिक अच्छी संस्था बनेगी। अब बता दो हमारी ई एन लर्नर संस्था कैसी हो? बताओ। अब हम लर्निंग एनवायरमेंट की बात कर लेते हैं। तो कोपरेटिव होना चाहिए। अगर छात्र दो या पांच है तो आपस में छोटे-छोटे समूह में काम करो। एक दूसरे के साथ परस्पर पॉजिटिव रहो। ठीक है? सकारात्मक दो। स्ट्रक्चर में करो एक्टिविटीज। अच्छे सीखने और सामाजिक कौशल को विकसित करो। डेवलप करते रहो अपने आपको हमेशा। हमेशा पॉजिटिव रिलेशनशिप में बने रहो। है ना? बच्चों के साथ सकारात्मक हमें बनके रहना है। और जो है हर एक रिलेशनशिप पॉजिटिव ही होनी चाहिए। समझ गए? एक दूसरे के साथ जो है ध्यान और सहायता प्रदान करो। अब हम बात करेंगे लर्निंग एनवायरमेंट। चलो
57:23 यह तो हो गया। यह तो हो गया। चलो फिर भी देख लो भूत कौन-कौन वैज्ञानिक परिवेश सीखना होना चाहिए। भावनाओं पे काम करने होनी चाहिए। छात्रों के बीच शिक्षकों के बीच आपस में सबकी बढ़िया तालमेल बैठना चाहिए। कोपरेटिव लर्निंग सहकारी शिक्षण यूजीसी का पीवाईक्यू है 2025 का। पीवाईक्यू सीरीज़ में आपको कराया है। तो सहकारी शिक्षण क्या होता है? एक साथ मिलकर पढ़ना। बिना किसी भेदभाव के। खुला होना चाहिए। ओपन क्लास रूम का मतलब है आप लचीरापन कर सकते हो। आप चीजें चेंज कर सकते हो। स्मार्ट क्लासरूम होनी चाहिए। मोटिवेशन फैमिली जैसा सोशियो कल्चर जैसा परिवार मिलना चाहिए। चलो अब हम बात करेंगे आपका मोस्टेंट टॉपिक। टीचर सेंटर्ड और आपका लर्नर सेंटर्ड टॉपिक। चलो करें
58:09 स्टार्ट। चलो यहां तक चीजें क्लियर है। एक बार बता दीजिए। यहां तक चीजें क्लियर है। जल्दी से कमेंट करके बताइए यहां तक चीजें सही है। स्टैंडिंग एजुकेशन प्लेटफार्म। धन्यवाद। यहां तक क्लियर जल्दी से एक गिलास पानी पी के आओ। जल्दी से एक गिलास पानी पी के आओ क्योंकि गर्मी है भाई। पानी पीना जरूरी है। चलो आगे हम बात करते हैं। अब देखो
58:55 शिक्षक और आपका शिक्षार्थी शिक्षक शिक्षार्थी। ये हूं मैं#ग मैं। ये हो आप#टग यू। ठीक है? अब देखो इसमें सिर्फ मेरी चलेगी। मैं अपनी मर्जी से काम करूंगी। इसमें आपकी भी चलती है। आपको क्या लगता है यह क्लास मेरी मर्जी से चल रही है? नहीं। मैं तो कहती हूं मैंने जितने भी क्लास लाती हूं आपकी नीड के हिसाब से लाती हूं। जैसे आप मुझे कहते हो मैं वैसे कर लेती हूं। तो क्या है? ये हमारी क्लास लर्नर सेंटर्ड है। मैं आपकी बातों का आपके मुझे पता है इस क्लास की वैल्यू आपके लिए। तो मैं ये क्लास लेके आई। और इस क्लास को बनाने में लिमिट से ज्यादा मेहनत लगी। अगर मुझे टीचर सेंटर्ड बनना होता मैं क्यों सोचती आपके बारे में? अरे छोड़ो ना पांच छह क्वेश्चन लेके आते जैसे दुनिया में चल रहा है। जैसे बाकी चैनलों पर चल रहा है। एक डेढ़ घंटा एक छोटा सा टॉपिक लेके आऊंगी। उसके पांच से
59:42 10 क्वेश्चन करा दूं। एक घंटा उसमें चला जाता है। उस पे बढ़िया व्यूज आ जाते हैं। उस पे व्यूज सच में बढ़िया आते हैं। लेकिन भाई मुझसे पता नहीं क्यों नहीं हो पाता वो। और वैसे मुझे वो करना भी नहीं है। अगेन मैं कहूंगी जैसे मैं अपनी चाल चल रही हूं वैसे ही हमें चलना चाहिए। दूसरों की चाल में अपनी चाल खो देते हो। तो शिक्षार्थी अपनी मर्जी का काम करेगा। टीचर टीचर अपने हिसाब से देखेगा और यहां आपके
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