Eat That Frog By Brian Tracy Book Summary in Hindi Audio Book

संक्षिप्त सारांश

इस वीडियो में "ईट दैट फ्रॉग" शीर्षक वाली किताब के मुख्य विचारों पर चर्चा की गई है। मुख्य संदेश यह है कि कठिन, महत्वपूर्ण कामों को प्राथमिकता देकर उनकी शुरुआत करना और समय का सही उपयोग करना सफलता की कुंजी है।

  • कठिन कार्यों से भागने के बजाय, उन्हें पहले करना चाहिए।
  • स्पष्टता और योजना बनाना आवश्यक है।

कठिनाइयों का सामना करें

वीडियो का आरंभ उन समस्याओं से होता है, जब व्यक्ति अपने सपनों का पीछा करने में विफल रहता है। यह दैनिक कार्यों में उलझ कर रह जाने और सोशल मीडिया, मोबाइल आदि द्वारा भटकाव का जिक्र करता है। "ईट दैट फ्रॉग" किताब का सिद्धांत हमें सिखाता है कि हर दिन सबसे कठिन काम को पहले करना चाहिए।

स्पष्टता का महत्व

पहला अध्याय स्पष्टता पर केंद्रित है। ब्रायन ट्रेसी बताते हैं कि स्पष्ट लक्ष्य स्थापित करना जरूरी है; अगर नहीं, तो हम अर्थहीन कामों में अपना समय बर्बाद करते हैं। अपने लक्ष्य को स्पष्ट और मापने योग्य बनाना चाहिए, जैसे कि वित्तीय लक्ष्य। लक्ष्य लिखने से उन तक पहुँचने की संभावना बढ़ जाती है।

प्रत्येक दिन की योजना बनाएं

दूसरा अध्याय दैनिक योजना बनाने के महत्व पर चर्चा करता है। दिन की शुरुआत से पहले योजना बनाकर आप अपने दिन को बेहतर बना सकते हैं। ब्रायन ए, बी, और सी मेथड का उपयोग करते हैं: ए वो काम जो अनिवार्य हैं, बी जरूरी हैं लेकिन नहीं होते, और सी वो हैं जो केवल अच्छे हैं। सबसे पहले ए कार्य पूरे करें।

80/20 नियम का उपयोग करें

तीसरा अध्याय 80/20 नियम पर आधारित है, जो कहता है कि 20% कार्य 80% परिणाम देते हैं। ट्रेसी का सुझाव है कि उच्च प्रभाव वाले कामों की पहचान करें और उनसे आगे बढ़ें, जिसके लिए कम से कम मूल्य वाले कार्यों को खत्म किया जाना चाहिए।

दूरगामी परिणामों पर विचार करें

चौथे अध्याय में विचार किया जाता है कि आपको प्रत्येक कार्य के दूरगामी परिणामों को ध्यान में रखना चाहिए। सफल लोग लॉन्ग टर्म सोचते हैं और भविष्य में सकारात्मक परिणाम लाने वाले कार्यों को प्राथमिकता देते हैं, जैसे अध्ययन करना।

संभावना को प्रोत्साहित करें

पाँचवे अध्याय में "क्रिएटिव प्रोक्रास्टिनेशन" का सिद्धांत पेश किया गया है, जिसमें कम महत्वपूर्ण कार्यों को टालने की सलाह दी गई है। सफल लोग जानते हैं कि उन्हें अपनी प्राथमिकताएँ तय करनी चाहिए।

प्राथमिकता प्रबंधन के तरीकों को अपनाएं

छठा अध्याय प्राथमिकताओं को निर्धारित करने के सिस्टम पर केंद्रित है, जिसमें ए, बी, सी, डिलीगेट और एलीमिनेट के मेथड से कार्यों को श्रेणीबद्ध करना शामिल है।

परिणाम क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करें

सातवें अध्याय का मुख्य विषय व्यक्तिगत कार्यों के परिणाम क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना है। यदि आप अपने मुख्य कार्य पर अच्छे से कार्य करते हैं, तो आपकी प्रगति तेज़ी से बढ़ सकती है।

पाँच सबसे महत्वपूर्ण कार्यों की पहचान करें

आठवें अध्याय में "लॉ ऑफ थ्री" पर चर्चा की गई है, जिसमें कार्यों की सूची से तीन सबसे महत्वपूर्ण कार्यों की पहचान करने की सलाह दी गई है।

सही तरीके से तैयारी करें

नौवें अध्याय में तैयारी का महत्व बताया गया है। जब आप कार्य शुरू करने से पहले सही तरीके से तैयार होते हैं, तो यह काम को अधिक प्रभावी बनाता है।

सफलता के छोटे कदम

दसवें अध्याय में बताया गया है कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती, बल्कि यह लगातार छोटे कदम उठाने से हासिल होती है।

स्किल्स में सुधार करें

ग्यारहवें अध्याय में स्किल्स की निरंतरता पर जोर दिया गया है। रोज बढ़ते कौशल व्यक्ति को प्रभावशाली बनाते हैं।

टैलेन्ट का महत्व

बारहवें अध्याय में अपनी विशिष्ट प्रतिभा को पहचानने के महत्व पर चर्चा की गई है। सही दिशा में कार्य करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

रुकावटों की पहचान करें

तेरहवें अध्याय में अपने ब्रेकडाउन पॉइंट्स को पहचानने और पार करने की प्रक्रिया पर चर्चा की गई है।

खुद पर दबाव डालें

चौदहवें अध्याय का मुख्य संदेश स्वयं पर दबाव डालने का महत्व है। अपनी जिम्मेदारी खुद लेना व्यक्ति को स्वतंत्र बनाता है।

व्यक्तिगत शक्ति को अधिकतम करें

पन्द्रहवें अध्याय में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की बात की गई है, जो उत्पादकता के लिए आवश्यक है।

अपने आप को प्रेरित करें

सोलहवें अध्याय में खुद को प्रेरित करने के विभिन्न तरीकों को साझा किया गया है जिससे आप अपनी ऊर्जा को बनाए रख सकते हैं।

डिजिटल जाल से बचें

सत्रहवें अध्याय में मोबाइल और डिजिटल नोटिफिकेशंस से होने वाले भटकाव पर चर्चा की गई है और उनसे बचने के उपाय बताए गए हैं।

कार्य को छोटे हिस्सों में बांटें

अठारवें अध्याय में बड़े कार्य को छोटे हिस्सों में बांटने की तकनीक बताई गई है। यह कार्यों को प्रबंधनीय बनाता है।

फोकस ब्लॉक्स बनाएं

उन्नीसवें अध्याय में एकाग्रता से कार्य करने के लिए समय ब्लॉक्स बनाने का महत्व बताया गया है।

तुरंत कार्य करें

बीसवें अध्याय में तात्कालिकता के महत्व की चर्चा की गई है। सफल लोग बिना बहाने या टालमटोल के पहले कार्य को शुरु करते हैं।

एक कार्य में ध्यान केंद्रित करें

इक्कीसवें अध्याय का संदेश है कि मल्टीटास्किंग से बचें और एक समय में एक कार्य पर ध्यान केंद्रित करें।

सफलता की आदतें

वीडियो का समापन इस बात पर होता है कि सफलता कोई घटना नहीं, बल्कि यह रोज़ की आदतें हैं जो आपका भविष्य बनाती हैं।

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Transcript

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0:00 कभी आपने अपने ही सपनों को धीरे-धीरे मरते देखा है? हर दिन जब आप जागते हैं तो सोचते हैं आज मैं कुछ बड़ा करूंगा। लेकिन फिर वही मोबाइल, वही Netflix, वही सोशल मीडिया और वही छोटे-छोटे काम आपके सबसे जरूरी काम को आपकी असली तरक्क को पीछे धकेल देते हैं। और दिन के अंत में आप थक कर बिस्तर पर गिरते हैं। खाली, अधूरा और खुद से शर्मिंदा। क्योंकि आप जानते हैं मैंने आज भी वह काम नहीं किया जो सबसे जरूरी था। कभी सोचा है ऐसा हर दिन क्यों होता है? क्यों हम वही काम सबसे पहले करते हैं जो आसान होता है और टाल देते हैं वही जो हमारी जिंदगी बदल सकता है? इसी सवाल का

0:45 जवाब है ईट दैट फ्रॉग। एक ऐसी किताब जो आपको सिखाती है अपने सबसे कठिन सबसे जरूरी काम को सबसे पहले करना ही असली गेम चेंजर है। ब्रायन ट्रेसी की यह किताब सिर्फ टाइम मैनेजमेंट की बात नहीं करती। यह माइंडसेट मैनेजमेंट की बात करती है। यह किताब हमें याद दिलाती है कि डिसिप्लिन इज द ब्रिज बिटवीन गोल्स एंड अकम्प्लिशमेंट। यह हमें बताती है कि दिन भर व्यस्त रहने से कुछ नहीं होता। आपके दिन की शुरुआत ही तय करती है कि आप एवरेज रहेंगे या एक्स्ट्राऑर्डिनरी बनेंगे। तो फ्रॉग क्या है इस किताब में? फ्रॉग उस काम का सिंबल है जिसे करना सबसे ज्यादा जरूरी है जो आपको सबसे ज्यादा आगे ले जाएगा।

1:31 लेकिन जो आपको सबसे ज्यादा डराता है और जिसे आप सबसे ज्यादा टालते हो और ईट दैट फ्रॉग का मतलब है हर दिन की शुरुआत उसी मुश्किल काम को खत्म करने से करो। क्योंकि एक बार वह हो गया तो बाकी दिन खुद आसान लगने लगता है। वन सेट द टेबल स्पष्टता ही शक्ति है जब तक आपके लक्ष्य साफ नहीं होंगे। आप बस इधर-उधर भटकते रहेंगे। आपका पहला काम है अपने विज़न को क्रिस्टल क्लियर बनाना। दो प्लान एवरीडे इन एडवांस। कागज पर सोचो। हर दिन की प्लानिंग रात को कर लो। दिमाग में केओस होता है लेकिन कागज पर क्लेरिटी होती है। तीन द असीट शो 20 रूल कम करो लेकिन असरदार करो। 20% काम ही 88%

2:16 रिजल्ट देता है। तो बाकी 88% चीजों को या तो छोड़ो या बाद में करो। चार कंसीडर द कॉन्सिक्वेंसेस। लॉन्ग टर्म सोचो। हर काम का दूरगामी असर होता है। जो काम आपके भविष्य को बदल सकते हैं पहले उन्हें पकड़ो। पांच प्रैक्टिस क्रिएटिव प्रोक्रास्टिनेशन फालतू कामों को टालो प्रोक्रास्टिनेशन गलत नहीं बस उसका डायरेक्शन बदलो टालो लेकिन फालतू चीजों को किताब का मूल संदेश क्या है टाइम मैनेज करना नहीं प्रायोरिटी मैनेज करना सीखो बिजी मत बनो प्रोडक्टिव बनो हर दिन एक मुश्किल काम को पूरा करने की आदत डालो वही तुम्हें बाकियों से अलग करेगा यह किताब बताती है कि जो लोग अपने फ्रॉग को हर दिन

3:03 सुबह निगलते हैं। वही लोग धीरे-धीरे वह जिंदगी जीने लगते हैं जिसकी दूसरों को सिर्फ ख्वाहिश होती है। क्या आप जानते हैं हर बार जब आप कोई जरूरी काम टालते हैं तो आपका आत्मसम्मान थोड़ा और टूटता है। आपकी खुद पर विश्वास की दीवार थोड़ी और धड़कती है। लेकिन हर बार जब आप वह टफ टास्क पूरा करते हैं। आप अंदर से और मजबूत हो जाते हैं। आप अपने ही अंदर एक वारियर को जगाते हैं। अब आप खुद सोचिए अगर आप अगले 30 दिन तक हर सुबह अपनी सबसे बड़ी फ्रॉग को निगल जाएं तो क्या आप वही इंसान रहेंगे जो आज है? या फिर आप एक ऐसा वर्जन बन चुके होंगे जिसे खुद पर गर्व है और जिसे दुनिया सलाम करती है? तो सवाल यह है कल सुबह आप किस

3:52 काम से शुरुआत करने जा रहे हैं? क्या आप तैयार हैं? अपना मेंढक निगलने के लिए अध्याय एक स्पष्टता सबसे बड़ा हथियार है। पावर ऑफ क्लेरिटी सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम ईट दैट फ्रॉग। किताब का पहला अध्याय हमें यह सिखाता है कि क्लेरिटी ही हमारे लक्ष्य की दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है। लेखक ब्राइन ट्रेसी के अनुसार अगर आपको नहीं पता कि आप क्या चाहते हैं तो आप कभी भी अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाएंगे। एक बहुत ही खराब उपयोग समय का करना कुछ बहुत अच्छी तरह से करना है जो कि करना ही नहीं चाहिए। सबसे खराब समय की बर्बादी यह है कि किसी ऐसे काम को बहुत अच्छे से करना जो किया ही

4:39 नहीं जाना चाहिए। यह लाइन बताती है कि अगर हमारा लक्ष्य स्पष्ट नहीं है तो हम अपना समय और ऊर्जा उन कामों में बर्बाद कर देते हैं जिनका कोई मतलब नहीं। सबसे पहले सवाल पूछिए। आप क्या चाहते हैं? जब तक आप यह नहीं जानते कि आपकी मंजिल क्या है? तब तक आप दिशा में नहीं बल्कि सिर्फ गति में रहेंगे। यही कारण है कि किताब की शुरुआत में ही ब्रायन कहते हैं। डिसाइड एग्जजेक्टली व्हाट यू वांट। कई लोग इसलिए फेल होते हैं क्योंकि वे अस्पष्ट होते हैं। वे बोलते हैं मुझे अमीर बनना है। मुझे सफल होना है। लेकिन यह सब बहुत ही धुंधले लक्ष्य हैं। अपने लक्ष्य को बहुत स्पेसिफिक और मेजरेबल बनाइए। उदाहरण मैं 6

5:27 महीने में ₹1 लाख सेव करूंगा। मैं हर दिन 2 घंटे पढ़ाई करूंगा। मैं हर सप्ताह एक किताब पढूंगा। यह स्पष्ट लक्ष्य हैं। लोगों के पास सपने तो होते हैं, लेकिन वे उन्हें लिखते नहीं। रिसर्च बताती है कि जो लोग अपने लक्ष्य लिखते हैं, वे उन्हें पाने में कहीं ज्यादा सफल होते हैं। लिखना हमारे दिमाग को आदेश देता है कि यही दिशा है। एक डायरी या नोटबुक में अपने टॉप फाइव गोल्स लिखिए। फिर हर दिन उस पेज को पढ़िए। यह आदत आपके मन को रोज रिमाइंड कराएगी कि आपकी प्राथमिकता क्या है। बड़ा लक्ष्य इंटिमीडेटिंग हो सकता है। इसलिए उसे छोटे-छोटे एक्शननेबल स्टेप्स में बांटिए। उदाहरण अगर आपका लक्ष्य है बिजनेस

6:13 शुरू करना तो स्टेप्स होंगे मार्केट रिसर्च करना, नेश फाइनल करना, डोमेन लेना, लोगो बनवाना, सोशल मीडिया शुरू करना, पहला प्रोडक्ट बनाना। हर दिन एक छोटा स्टेप लीजिए। यही असली प्रोडक्टिविटी है। स्पष्टता ना केवल आपको दिशा देती है बल्कि डिस्ट्रैक्शंस को भी हटाती है। जब आपको पता होता है कि आपके लिए क्या जरूरी है तो आप ना कहना सीखते हैं और यही आपको एवरेज से हटाकर एक्स्ट्राऑर्डिनरी बनाता है। स्पष्टता सफलता की नीव है। वे गोल्स केवल भ्रम पैदा करते हैं। लिखित लक्ष्य प्लस छोटे स्टेप्स प्लस रोज का एक्शन स्थाई प्रगति। अपने समय और ऊर्जा को बचाने का सबसे अच्छा तरीका है यह जानना कि असल में

7:00 क्या करना है। अब एक सवाल जो आपकी सोच को गहराई देगा और आपको अगले अध्याय तक खींचेगा। अगर आपको सिर्फ एक काम करने की इजाजत मिले जिससे आपकी जिंदगी में सबसे बड़ा पॉजिटिव बदलाव आए तो वह एक काम क्या होगा? सोचिए क्योंकि यही अगला अध्याय बताएगा कि कैसे उस सबसे जरूरी काम को पहचाने और उसे सबसे पहले करें। क्या आप तैयार हैं अगले कदम के लिए अध्याय दो प्लान एवरीडे इन एडवांस। हर दिन की प्लानिंग सफलता की सबसे सस्ती लेकिन सबसे प्रभावशाली आदत। ब्रायन ट्रेसी इस अध्याय में हमें एक ऐसा सिंपल लेकिन पावरफुल टूल देते हैं जिससे हम हर दिन ज्यादा कर सकते हैं कम समय में। वह

7:48 कहते हैं हर मिनट की योजना आपको घंटों की मेहनत से बचा सकती है। इसका मतलब है कि अगर आप दिन की शुरुआत करने से पहले 10 मिनट निकालकर प्लानिंग कर लें तो आपका पूरा दिन फोकस्ड, ऑर्गेनाइज्ड और पर्पसफुल बन जाएगा। दिन की शुरुआत तभी सफल होगी जब आपने उसकी तैयारी पहले से की हो। ब्राइन का सुझाव है कि आप रात को सोने से पहले सिर्फ 10 मिनट निकालिए और अगली सुबह के 5 से 10 सबसे जरूरी कामों की लिस्ट बना लीजिए। यह आदत सिर्फ आपकी प्रोडक्टिविटी नहीं बढ़ाती बल्कि आपके तनाव को भी घटाती है। आप अगली सुबह कंफ्यूजन में नहीं होंगे बल्कि मिशन मोड में होंगे। ब्राइन एक बेहतरीन टूल देते हैं ए बी सी डी मेथड।

8:35 लेकिन शुरुआत के लिए हम सिर्फ ए, बी और सी को समझते हैं। ए टास्क्स मु जरूरी काम। यह वह काम है जिन्हें करना अनिवार्य है। नहीं करने पर गंभीर नतीजे हो सकते हैं। यही आपका मेंढक फ्रॉग है। बी टास्क्स शुड डू करने चाहिए। यह जरूरी तो हैं लेकिन यह जितने क्रिटिकल नहीं। इन्हें टाला जा सकता है पर टालते रहना सही नहीं। सी टास्क्स नाइस टू डू अगर समय हो तो करें। जैसे सोशल मीडिया चेक करना, कैजुअल बातें करना, मैसेज पढ़ना। इनसे कुछ खास हासिल नहीं होता। जब तक ए पूरा ना हो, बी और सी को हाथ मत लगाइए। क्योंकि डिसिप्लिन का असली मतलब है अनइंपेंट चीजों को इग्नोर करना।

9:21 चाहे वह कितनी भी आसान या मजेदार क्यों ना लगे। ब्रायन यहां पर परेटो प्रिंसिपल की याद दिलाते हैं जिसे हम 80 20 रूल कहते हैं। आपके 20% काम आपके 80% रिजल्ट लाते हैं। तो क्यों ना पहले उन टॉप 20% कामों को पहचाना जाए जो सबसे ज्यादा असर डालते हैं। अगर आपकी लिस्ट में 10 काम हैं तो उनमें से दो सबसे क्रिटिकल होंगे। पहले उन्हें कीजिए। यही है आपके फ्रॉग्स। हर दिन दो मेंढक निगलने की आदत डालिए और देखते ही देखते आप अपनी जिंदगी को पूरी तरह बदलते हुए पाएंगे। हर दिन की शुरुआत प्लानिंग के साथ करें। रात को 10 मिनट काफी हैं। अपने कामों को ए बी सी लिस्ट

10:07 में बांटें और सबसे पहले आय को खत्म करें। 80020 रूल का इस्तेमाल करके हाई इंपैक्ट काम पहचाने। काम की क्वांटिटी नहीं क्वालिटी और प्रायोरिटी मायने रखती है। अब सोचने के लिए एक जरूरी लेकिन जिज्ञासा पैदा करने वाला सवाल अगर आप हर सुबह सिर्फ एक ही काम करें जो आपका पूरा दिन सफल बना दे तो वह कौन सा काम होगा? सोचिए क्योंकि अगला अध्याय बताएगा कि कैसे आप उस सबसे महत्वपूर्ण कार्य को पहचाने और उसे सबसे पहले करें हर दिन हर हाल में। क्या आप जानना चाहेंगे अगला अध्याय जो प्रोडक्टिविटी का गेम चेंजर बन सकता है? अध्याय तीन अप्लाई द 80 रूल। क्या आपने

10:55 कभी दिन भर व्यस्त रहने के बावजूद महसूस किया है कि असल में कुछ भी प्रोडक्टिव नहीं हुआ? ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम कई बार ऐसे कामों में उलझे रहते हैं जिनका परिणाम बहुत कम होता है। ब्राइन ट्रेसी इस अध्याय में हमें एक क्रांतिकारी नियम बताते हैं जिसे कहते हैं परेटो प्रिंसिपल या 80 जोश रूल। यह नियम कहता है आपके 20% कार्य आपके 80% परिणाम लाते हैं। इसका अर्थ है कि आपकी मेहनत का अधिकांश फल केवल कुछ ही कामों से आता है। बाकी काम सिर्फ समय और ऊर्जा खा जाते हैं। आइडेंटिफाई करें वो टॉप डोनेसट कौन से काम हैं? ब्राइन ट्रेसी कहते हैं कि अगर आपकी टू डू लिस्ट में 10 काम हैं तो उनमें से केवल दो

11:42 काम ऐसे होंगे जो असल में आपके लक्ष्य को आगे बढ़ाएंगे। इन टॉप 20% कामों को पहचानना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। यह वह काम है जो आपके करियर, व्यवसाय, पढ़ाई या पर्सनल ग्रोथ में सबसे ज्यादा असर डालते हैं। उदाहरण अगर आप सेल्स में हैं तो सबसे असरदार काम है क्लाइंट से मिलना और कॉल करना ना कि ईमेल पढ़ना या फाइलें व्यवस्थित करना। अगर आप स्टूडेंट हैं तो नोट्स बनाना और रिवीजन करना ज्यादा असरदार है ना कि डेकोरेशन करना या पेंसिल शार्प करना। अब जब आपने 20% हाई इंपैक्ट काम पहचान लिए हैं तो अगला कदम है लो वैल्यू टास्क को खत्म या डेलीगेट करना।

12:28 डोंट मेजर इन माइनर थिंग्स। मतलब छोटे-मोटे कामों में मास्टर बनने की बजाय बड़े कामों पर समय लगाइए जो असल में फर्क डालते हैं। अपने कामों की एक लिस्ट बनाइए और हर काम के सामने लिखिए। यह कितना रिजल्ट देता है। फिर सबसे ज्यादा रिजल्ट वाले काम पर ज्यादा समय दीजिए। कम असर वाले काम अगर जरूरी भी हो तो उन्हें किसी और को सौंप दीजिए या समय सीमा में कीजिए। इस अध्याय का मूल संदेश है बिजी होने से बेहतर है प्रोडक्टिव होना। अगर आप दिन भर 10 काम करते हैं लेकिन असल में दो ही असर डालते हैं तो बाकी आठ काम केवल आपकी ऊर्जा खाते हैं। असली मास्टरी यह है कि आप कम करें लेकिन वही करें जो महत्वपूर्ण है।

13:16 ब्रांड कहते हैं रेजिस्ट द टेंप्टेशन टू क्लियर अप स्मॉल थिंग्स फर्स्ट। छोटे काम आसान होते हैं, लेकिन वही आपको असली कामों से दूर कर देते हैं। 20% काम 80% रिजल्ट लाते हैं। सबसे पहले टॉप 20% हाई इंपैक्ट कामों को पहचानिए। लो वैल्यू टास्क को डेलीगेट या हटा दीजिए। प्रोडक्टिव दिखने की बजाय वाकई में प्रोडक्टिव बनिए। अब एक जरूरी और सोचने वाला सवाल। अगर आप बाकी सभी कामों को छोड़ दें और सिर्फ एक ऐसा टास्क करें जो आपकी जिंदगी में सबसे बड़ा बदलाव ला सकता है तो वह टास्क कौन सा होगा? यही सवाल आपको अगले अध्याय की ओर ले जाएगा जहां हम जानेंगे कि उस सबसे बड़े और

14:03 डरावने टास्क को कैसे चुना जाए? और दिन की शुरुआत में ही उसे कैसे निगला जाए? क्या आप तैयार हैं अगले लेवल की प्रोडक्टिव थिंकिंग के लिए? अध्याय चार कंसीडर द कॉन्सिक्वेंसेस। आपके आज के फैसले आपके कल की दिशा तय करते हैं। इस अध्याय में ब्राइन ट्रेसी हमें एक गहरी बात सिखाते हैं। हर काम के परिणाम होते हैं और वही परिणाम तय करते हैं कि कौन सा काम सबसे ज्यादा मायने रखता है। दूसरे शब्दों में कहें तो जो काम सबसे बड़े और पॉजिटिव परिणाम लाता है उसी को सबसे पहले करना चाहिए। इसी सोच से प्रायोरिटाइजेशन की असली शुरुआत होती है। आज क्या करूं जो भविष्य बदल दे? ब्रायन का मानना है कि सफल

14:50 लोग हमेशा लॉन्ग टर्म थिंकिंग के आधार पर अपने कामों को महत्व देते हैं। वे सिर्फ आज का फायदा नहीं सोचते बल्कि यह सोचते हैं। अगर मैं यह काम आज करूं तो इसका मेरी जिंदगी पर एक साल, 5 साल या 10 साल बाद क्या असर होगा? यही सोच उन्हें ऐसे निर्णय लेने में मदद करती है जो असल में उनकी जिंदगी की दिशा को बदल देते हैं। उदाहरण एक छात्र आज सोशल मीडिया चला सकता है या 2 घंटे पढ़ सकता है। सोशल मीडिया का परिणाम केवल अस्थाई आनंद है। लेकिन पढ़ाई का परिणाम भविष्य में सफलता बन सकता है। हर दिन आपके सामने ढेर सारे टास्क होते हैं। लेकिन हर टास्क बराबर नहीं होता। कुछ काम छोटे और कम असर

15:37 वाले होते हैं। जबकि कुछ काम ऐसे होते हैं जो आपके गोल्स को जल्दी और ज्यादा करीब ले आते हैं। ब्राइन कहते हैं कि अगर आप यह जानना चाहते हैं कि कौन सा काम सबसे महत्वपूर्ण है तो खुद से एक सवाल पूछिए। अगर मैंने आज सिर्फ एक काम किया तो वह कौन सा हो जो सबसे ज्यादा पॉजिटिव फर्क लाएगा? यही सवाल आपको हाई वैल्यू टास्क तक पहुंचाता है। वही काम जिसे करना असल में जरूरी है। इंस्टेंट प्लेजर की बजाय डिलेड ग्रेटिफिकेशन को चुनना सफलता की कुंजी है। ब्रांड बताते हैं कि सफल लोग अक्सर ऐसे काम पहले करते हैं जो अब भी मुश्किल लगते हैं लेकिन बाद में राहत, उपलब्धि और सफलता लाते हैं। वह लोग मेंढक को सुबह-सुबह निगल

16:26 लेते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि इसके बाद बाकी दिन आसान हो जाएगा। हर बार जब आप एक काम चुनते हैं तो आप या तो शॉर्ट टर्म कंफर्ट चुन रहे होते हैं या लॉन्ग टर्म ग्रोथ। सफल लोग लॉन्ग टर्म परिणामों को प्राथमिकता देते हैं। भले ही वह रास्ता थोड़ा कठिन क्यों ना हो। हर टास्क के लॉन्ग टर्म परिणामों को देखें। हाई वैल्यू एक्टिविटीज को प्राथमिकता दें। खुद से रोज पूछें सबसे ज्यादा असर किससे पड़ेगा? तात्कालिक आनंद को टालें। दीर्घकालिक लाभ के लिए काम करें। जो काम आपके भविष्य को बेहतर बनाए उसे आज ही कीजिए। अब एक गहराई से सोचने वाला सवाल अगर आपकी जिंदगी की दिशा सिर्फ अगले 30 दिनों के फैसलों से तय

17:13 हो जाए तो आप किस काम को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाएंगे? क्योंकि अगला अध्याय बताएगा कैसे आप उस एक बड़े मुश्किल और डरावने काम बिग फ्रॉग की पहचान करें जिसे सबसे पहले निगलना जरूरी है ताकि आपकी जिंदगी की असली प्रगति शुरू हो सके। क्या आप तैयार हैं उस बड़े मेंढक से सामना करने के लिए? अध्याय पांच प्रैक्टिस क्रिएटिव प्रोक्रास्टिनेशन। प्रोक्रास्टिनेशन यानी टालना। लेकिन समझदारी से ज्यादातर लोग टालने को एक बुरी आदत मानते हैं। पर इस अध्याय में ब्रांड ट्रेसी बताते हैं कि हर इंसान टालता है। फर्क बस इतना है कि सफल लोग कम महत्वपूर्ण काम टालते हैं। जबकि

17:59 असफल लोग जरूरी काम टालते हैं। इसी सोच को कहते हैं क्रिएटिव प्रोस्टिनेशन यानी जानबूझकर और रणनीति के साथ उन कामों को टालना जो आपकी प्रगति में कोई विशेष योगदान नहीं देते। हमारा समय, ऊर्जा और ध्यान सीमित है। इसलिए अगर हम सब कुछ करने की कोशिश करेंगे तो हम बिखर जाएंगे। ब्रांड कहते हैं, आप जितना भी प्रयास करें, सब कुछ कभी नहीं कर पाएंगे। इसलिए यह जरूरी है कि आप तय करें कि क्या नहीं करना है। यहां से शुरू होती है क्रिएटिव प्रोक्रेस्टिनेशन की कला। इसका मतलब है अपने दिन के उन टास्क को पहचानना जो कम परिणाम देने वाले हैं। उन्हें बाद के लिए टाल देना या पूरी तरह नकार देना। इससे

18:45 आपके पास महत्वपूर्ण कामों के लिए ज्यादा समय बचेगा। ब्रायन कहते हैं हर दिन का एक बड़ा हिस्सा ऐसे टास्क में चला जाता है जो ना तो जरूरी होते हैं और ना ही असरदार। इनमें शामिल है बेवजह की मीटिंग्स, अनगिनत ईमेल्स, मोबाइल पर समय बर्बाद करना, दूसरों के छोटे-मोटे कामों में उलझना। आपको चाहिए कि आप अपने दिन के लो वैल्यू टास्क की पहचान करें और उन्हें जानबूझकर टालें। सक्सेसफुल लोग हमेशा अपने समय की रक्षा करते हैं। वे जानते हैं कि हर हां के पीछे एक नहीं छिपा होता है। अगर आपने किसी कम असर वाले टास्क को हां कहा तो आप किसी महत्वपूर्ण टास्क को नहीं कह रहे हैं। इसलिए ब्रांड सलाह देते हैं नहीं

19:30 कहने की आदत डालिए। लोगों को मना करने से मत डरिए क्योंकि आपके पास हर किसी के लिए समय नहीं है। अपने समय को कीमती संपत्ति समझिए। आपका समय ही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है। हर बार जब आप किसी कम जरूरी काम में समय लगाते हैं, आप उस पूंजी को बिना सोचे गवा रहे होते हैं। क्रिएटिव प्रोक्रास्टिनेशन यही सिखाती है। कम असरदार चीजों को टालो ताकि सबसे असरदार चीजें समय पर हो सके। अध्याय का सारांश। प्रोक्रास्टिनेशन बुरी नहीं है। बस सही तरीके से होनी चाहिए। हर दिन कुछ काम टालने ही पड़ते हैं तो बेहतर है आप लो वैल्यू टास्क टालें। नहीं कहना सीखिए और अपने समय की रक्षा कीजिए। जो चीजें जरूरी

20:15 नहीं है उन्हें बाद में करें या बिल्कुल ना करें। अब एक सोचने के लिए मजबूर करने वाला सवाल अगर आप केवल तीन काम ही करने दें और बाकी सब टाल दें तो वह कौन से तीन काम होंगे जो आपकी लाइफ या करियर में सबसे ज्यादा असर डालेंगे? यही सवाल अगली दिशा की ओर इशारा करता है। अगले अध्याय में आप जानेंगे कि कैसे अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बिगेस्ट फ्रॉग को चुने और उसे हर दिन सबसे पहले निगलें। क्या आप तैयार हैं अपने दिन की असली दिशा तय करने के लिए? अध्याय छ प्राथमिकता तय करने का सिस्टम। अगर आप सही प्राथमिकता चुनना सीख जाए तो आपकी आधी समस्याएं वहीं खत्म हो

21:01 जाएंगी। हर दिन हम ढेर सारे कामों की लिस्ट बनाते हैं। लेकिन असली सवाल यह है क्या आपने उन्हें उनकीेंस के हिसाब से सही क्रम में लगाया है? ब्रायन ट्रेसी। हमें इस अध्याय में एक शक्तिशाली टूल देते हैं जिसे कहते हैं ए बी सी डी मेथड। यह एक सिस्टमेटिक तरीका है यह तय करने का कि कौन सा काम पहले किया जाए और कौन सा बाद में या बिल्कुल ना किया जाए। ए बी सीडी ए मेथड क्या है? यह तकनीक आपके कामों को पांच श्रेणियों में बांटती है। ए अबब्सोलुटली मस्ट डू जरूरी और जरूरी। यह ऐसे टास्क होते हैं जो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं। अगर आपने इन्हें नहीं किया तो नुकसान, प्रेशर या बड़े अवसर का नुकसान हो

21:46 सकता है। यही असली मेंढक होता है। उदाहरण क्लाइंट को रिपोर्ट समय पर देना, जॉब इंटरव्यू अटेंड करना। A1, A2, A3 जैसे टास्क को रैंक दें और A1 से शुरुआत करें। बी शुड डू जरूरी लेकिन इतना भी नहीं। यह जरूरी तो होते हैं लेकिन ए जितने नहीं। इन्हें ना करने पर केवल हल्का अपराध, बोध या असुविधा होती है, लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं। उदाहरण सहकर्मी के जन्मदिन पर शुभकामना भेजना। जब तक सभी यह टास्क पूरे ना हो जाए, बी टास्क को हाथ ना लगाएं। सी नाइस टू डू कर सकते हैं पर करना जरूरी नहीं। इन कामों का आपके लक्ष्य या भविष्य पर कोई खास असर नहीं पड़ता। बस करने में अच्छा लगता है। उदाहरण सोशल

22:33 मीडिया चेक करना। ऑफिस में चाय बनाना। इन्हें टालना सीखें तभी समय बचेगा। डी डेलीगेट दूसरे को सौंप दो। ऐसे काम जो जरूरी हो सकते हैं लेकिन उन्हें करने के लिए जरूरी नहीं कि आप ही करें। इन्हें किसी और को सौंपिए। उदाहरण मीटिंग के नोट्स बनाना डाटा एंट्री डेलीगेशन आपकी प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने का शक्तिशाली तरीका है। ई एलिमिनेट हटा दीजिए। यह वह काम होते हैं जो ना तो जरूरी है ना असरदार। इन्हें हटाने से आपका समय और ऊर्जा बचती है। उदाहरण बेवजह के टीवी शो निरर्थक कॉल्स। ए बी सी डी ई मेथड का प्रयोग कैसे करें? अपनी टास्क लिस्ट बनाइए। हर टास्क को ए, बी, सी, डी या ई के टैग दीजिए। A1 को खोजिए और वहीं से शुरुआत

23:21 कीजिए। जब आप इस तरीके से काम करते हैं तो आप हर दिन सिस्टम के साथ स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते हैं। अध्याय का सारांश हर काम एक समान नहीं होता। ए बी सी डी मेथड से आप स्पष्टता के साथ निर्णय ले सकते हैं। अब एक सवाल आपकी आज की टास्क लिस्ट में कौन सा ऐसा काम है जिसे A1 कहा जा सकता है और जिसे आप अब तक टालते आ रहे हैं क्योंकि अगले अध्याय में ब्रांड बताएंगे कि कैसे अपने सबसे महत्वपूर्ण कामों की लिस्ट तैयार करें और समय की ताकत का सही इस्तेमाल करें। क्या आप जानना चाहते हैं वह तरीका जो समय को आपके पक्ष में मोड़ सकता है? अध्याय सात फोकस ऑन की

24:08 रिजल्ट एरियाज। बहुत से लोग पूरे दिन मेहनत करते हैं लेकिन फिर भी तरक्की नहीं कर पाते। क्यों? क्योंकि वह अपने असली काम यानी की रिजल्ट एरियाज केआरए पर ध्यान नहीं देते। ब्राइन ट्रेसी इस अध्याय में बताते हैं कि अगर आप अपनी सफलता को तेजी से बढ़ाना चाहते हैं तो आपको यह जानना होगा कि आपके काम के असली नतीजे किससे आते हैं? कि रिजल्ट एरियाज क्या होते हैं? हर नौकरी या बिजनेस के कुछ मुख्य क्षेत्र होते हैं। जिनसे जुड़े कामों को अगर आप अच्छे से करते हैं तो उसका सीधा असर आपके प्रदर्शन और परिणामों पर पड़ता है। इन्हें ही कहते हैं की रिजल्ट एरियाज। उदाहरण के लिए एक सेल्समैन के लिए लीड जनरेट करना,

24:56 कस्टमर से बात करना, डील क्लोज करना, फॉलो अप देना। रिपोर्टिंग एक टीचर के लिए क्लास की तैयारी बच्चों से संवाद असेसमेंट रिपोर्ट कार्ड पेरेंट मीटिंग्स अगर इनकी एरियाज में काम कमजोर होगा तो बाकी सब करने का कोई फायदा नहीं केआरए पर फोकस क्यों जरूरी है स्पष्टता आती है जब आपको पता होता है कि आपको किन क्षेत्रों में एक्सेल करना है तो आप अपनी ऊर्जा वहीं लगाते हैं। प्रोडक्टिविटी बढ़ती है। आप बेमतलब के कामों में उलझते नहीं। आपको प्रमोशन और पहचान जल्दी मिलती है क्योंकि आपके रिजल्ट दिखते हैं। खुद से पूछिए यह पांच अहम सवाल। मेरी जॉब बिजनेस के मुख्य परिणाम देने वाले क्षेत्र कौन से हैं?

25:42 उनमें से कौन सा क्षेत्र मेरी कमजोरी है? मैं किन पांच चीजों में निपुण बन जाऊं? तो मेरी परफॉर्मेंस डबल हो सकती है? क्या मैं हर दिन अपने केआरए पर फोकस करता हूं या इधर-उधर के कामों में उलझ जाता हूं? क्या मैं अपने काम को मापता हूं और सुधारने की कोशिश करता हूं? एक्शन प्लान। अपने काम के सभी टास्क की लिस्ट बनाइए। उनमें से पांच से सात की रिजल्ट एरियाज पहचानिए। हर दिन इनमें से एक या दो पर खास ध्यान दीजिए। जहां कमजोरी हो वहां सीखने, प्रैक्टिस और फीडबैक से सुधार कीजिए। यह एक सच्चाई है। आप उतने ही सफल हैं जितना अच्छा आप अपने केआरए को संभालते हैं। एक सवाल अगर आपको

26:28 अपनी सफलता को दो गुना करना हो तो आपके कौन से दो की रिजल्ट एरियाज को सबसे पहले सुधारने की जरूरत है? क्योंकि अगले अध्याय में ब्राइन ट्रेसी बताएंगे कैसे अपनी कमजोरियों को पहचान कर उन्हें ताकत में बदला जा सकता है। क्या आप तैयार हैं अपने प्रदर्शन को अगले स्तर पर ले जाने के लिए? अध्याय आठ अप्लाई द लॉ ऑफ थ्री। हर दिन किए गए 10 कामों में से सिर्फ तीन ही आपकी असली सफलता तय करते हैं। ब्राइन ट्रेसी क्या आपने कभी महसूस किया है कि आप दिन भर व्यस्त रहते हैं? लेकिन असली प्रगति बहुत कम होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम अक्सर ऐसे टास्क में फंसे रहते हैं जो जरूरी नहीं होते। इस अध्याय में ब्रायन

27:14 ट्रेसी हमें एक शक्तिशाली सिद्धांत सिखाते हैं। लॉ ऑफ थ्री लॉ ऑफ थ्री क्या है? ब्रायन ट्रेसी कहते हैं कि आपकी सफलता, आपकी आमदनी और आपकी तरक्की। इन तीन चीजों का सबसे बड़ा आधार है। आपके तीन सबसे महत्वपूर्ण कार्य। आप दिन भर में चाहे 10 या 20 काम करें पर असली असर सिर्फ तीन कामों से आता है। इन तीन टास्क को पहचान लेना ही सफलता की कुंजी है। यह वही काम होते हैं जिन्हें फ्रोज कहा जाता है। मुश्किल जरूरी और असरदार। लॉ ऑफ थ्री को कैसे अपनाएं? स्टेप एक सभी कामों की लिस्ट बनाइए। एक कागज पर अपने रोज के 10 मुख्य कामों की लिस्ट लिखिए। इसमें छोटे बड़े हर काम को शामिल कीजिए जो आप नियमित रूप से

28:01 करते हैं। उदाहरण क्लाइंट मीटिंग ईमेल जवाब देना, रिपोर्ट तैयार करना, सेल्स कॉल, सोशल मीडिया अपडेट, नई लीड्स खोजना, टीम मीटिंग, रिसर्च रूटीन डाटा, एंट्री अपस्किलिंग सीखना। स्टेप टू, इनमें से टॉप थ्री चुनिए। अब सोचिए इनमें से कौन से तीन काम ऐसे हैं जो अगर आप हर दिन पूरी शिद्दत से करें तो आपकी इनकम, पद और प्रभाव तेजी से बढ़ेगा। जैसे कि क्लाइंट से बातचीत, डील क्लोज करना, नई लीड्स, खोजना यह हो सकते हैं आपके टॉप थ्री हाई वैल्यू टास्क। इन तीन टास्क को हर दिन सबसे पहले और पूरी एनर्जी से कीजिए। यही आपकी पहचान बनाएंगे, प्रमोशन दिलाएंगे और सफलता को 10 गुना तेजी से बढ़ाएंगे। ध्यान देने वाली बात

28:47 जरूरी नहीं कि जो काम आप पसंद करते हैं, वही आपकी तरक्की लाएंगे। आपको उन कामों पर फोकस करना होगा जो असल में रिजल्ट देते हैं। भले ही वह कठिन लगे। एक्शन प्लान अपने 10 रेगुलर टास्क की लिस्ट बनाइए। उनमें से तीन सबसे प्रभावशाली टास्क को चुनिए। वही बनाइए अपनी डेली प्रायोरिटी और हर सुबह पहले इन्हीं को कीजिए। बाकी कामों को या तो बाद में कीजिए, डेलीगेट कीजिए या खत्म कर दीजिए। अब एक सोचने वाला सवाल क्या आप सच में जानते हैं कि आपके कौन से तीन काम आपकी असली सफलता के पीछे जिम्मेदार हैं? क्योंकि अगले अध्याय में ब्रांड बताएंगे ऐसे कौन से काम हैं जिन्हें अगर आपने अभी शुरू ना किया तो

29:33 भविष्य में पछताना पड़ेगा। क्या आप जानना चाहेंगे कि सफलता के लिए सेंस ऑफ एजेंसी कैसे पैदा की जाती है? अध्याय नौ प्रिपेयर थरली बिफोर यू बिगिन। जब आप मैदान में उतरते हैं तो तैयारी आपकी सबसे बड़ी ताकत बन जाती है। ब्रायन ट्रेसी इस अध्याय में एक गहरा लेकिन बेहद असरदार सिद्धांत सांझा करते हैं। तैयारी के बिना किया गया कोई भी काम या तो अधूरा रह जाता है या बेकार साबित होता है। अगर आप अपने किसी बड़े काम की शुरुआत बिना तैयारी के करते हैं तो या तो आप बार-बार रुकेंगे या बीच में ही हार मान लेंगे। ईट दैट फ्रॉग का मतलब है सबसे कठिन और असरदार काम को पहले करना। लेकिन

30:18 इसे करने के लिए आपके पास तैयारी का हथियार होना चाहिए। क्यों जरूरी है तैयारी? तैयारी से मन शांत होता है। आप सही दिशा में शुरुआत करते हैं। काम में रुकावटें कम होती हैं और सबसे जरूरी आपका फोकस तेज होता है। ब्राइन ट्रेसी के अनुसार एक बड़ी सफलता के लिए सबसे पहला और अनिवार्य स्टेप है। अपना वातावरण तैयार करना कैसे करें तैयारी? एक डिस्ट्रैक्शन हटाइए। फोन साइलेंट करें। सोशल मीडिया बंद करें। नोटिफिकेशन ऑफ करें। एक डिस्ट्रैक्टेड माइंड कभी डीप वर्क नहीं कर सकता। दो जरूरी टूल्स पास रखें। आपके काम से जुड़ी सारी चीजें जैसे लैपटॉप, नोट्स, किताबें, चार्जर, पानी सब कुछ पहले से पास

31:04 रखें ताकि बार-बार उठना ना पड़े। तीन जगह को क्लीन और शांत बनाइए। एक बिखरा हुआ वातावरण बिखरे हुए विचार लाता है। साफ सुथरी टेबल, अच्छी रोशनी और एक शांत जगह। यह आपकी प्रोडक्टिविटी को डबल कर देती है। चार, मेंटल तैयारी कीजिए। शुरू करने से पहले 2 मिनट आंखें बंद करके सोचिए। मैं इस टास्क को पूरी ऊर्जा और फोकस के साथ पूरा करूंगा। इससे आपका दिमाग एकाग्र होता है और आप अलर्ट मोड में आ जाते हैं। तैयारी, आत्मविश्वास, फुल स्पीड। जब आप पूरी तैयारी से काम शुरू करते हैं तो आपको कम गलती होती है। आप तेजी से काम करते हैं और बीच में रुकावटें बहुत कम आती हैं। ब्राइन कहते हैं हर एक मिनट जो आप

31:51 तैयारी में लगाते हैं वह बाद में आपके 10 मिनट बचा देता है। एक्शन प्लान अगले दिन का काम तय करें। कौन सा फ्रॉग है जिसे खाना है? उसकी तैयारी रात को ही कर लें। किताब, फाइल, डाटा, इंटरनेट सब कुछ सुबह उठते ही बिना बिखरे मन से काम कीजिए। सीधे उस काम पर जो सबसे बड़ा फर्क लाता है। शुरुआत ऐसे करें जैसे आपकी सफलता इसी पर निर्भर करती है क्योंकि वास्तव में ऐसा ही है। अब सोचने वाला सवाल क्या आपने कभी गहराई से सोचा है कि आपकी तैयारी की आदतें आपकी सफलता की सीमा तय कर रही हैं? क्योंकि अगले अध्याय में हम जानेंगे लीव बिफोर यू आर यू रेडी। से उल्टा कैसे हर

32:36 महान काम एक बोल्ड एक्शन से शुरू होता है। यानी डू फर्स्ट थिंग्स फर्स्ट। क्या आप जानना चाहेंगे कि कामों की भी एक सही क्रम होता है जिसे अपनाकर आप दोगुनी गति से आगे बढ़ सकते हैं। अध्याय 10 टेक इट वन ऑयल बैरल एट अ टाइम। ब्रायन ट्रेसी इस अध्याय में एक शक्तिशाली कहानी के जरिए हमें सिखाते हैं कि सफलता एक दिन में नहीं आती लेकिन हर दिन किए गए छोटे कदम उससे जरूर मिलाते हैं। वन ऑयल बैरल एट अ टाइम की कहानी सऊदी अरब के रेगिस्तान में तेल खोजने वाले इंजीनियरों को मुश्किल हालात में लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। रेगिस्तान में रास्ता गुम हो जाना आम बात थी। ऐसे में उन्होंने एक तरीका निकाला। हर

33:22 कुछ मील की दूरी पर एक-एक ऑयल बैरल रख दिए गए। इन बैरल्स को देखकर पता चलता था कि रास्ता सही है और अगला कदम कहां रखना है। यही सिद्धांत हमें भी अपनाना है। पूरी मंजिल पर मत सोचो। बस अगला बैरल देखो और वहां तक पहुंचो। जब कोई काम बहुत बड़ा और कठिन लगता है जैसे किताब लिखना, बिजनेस शुरू करना, फिजिकली फिट होना या किसी कठिन परीक्षा की तैयारी तो दिमाग डर जाता है और हम टालने लगते हैं। लेकिन अगर आप उस काम को छोटे-छोटे स्टेप्स में बांट दें और हर दिन सिर्फ एक स्टेप पर फोकस करें तो धीरे-धीरे ही सही आप बहुत बड़ा काम भी पूरा कर लेंगे। पहला बड़ा लक्ष्य को छोटे हिस्सों में बांटिए। जैसे पुस्तक लिखनी

34:09 है। अध्याय एक का प्लान रिसर्च रोजाना 500 शब्द लिखना संपादन दो। हर दिन सिर्फ एक हिस्से पर काम कीजिए। पूरे प्रोजेक्ट को एक साथ सोचने से तनाव होता है। बस आज का टारगेट पूरा कीजिए। जैसे कि अगला ऑयल बैरल तक पहुंचना। तीन, छोटे जीत का जश्न मनाइए। हर पूरा किया गया स्टेप आपको अगली मंजिल के और करीब लाता है। यह मनोबल को बनाए रखता है और रफ्तार बढ़ाता है। मनोवैज्ञानिक असर जब काम छोटा दिखता है तो डर और आलस्य खत्म हो जाता है। बस इतना ही करना है वाला सोच हमें एक्शन में डालता है। हम ज्यादा कंसिस्टेंट और कमिटेड हो जाते हैं। एक्शन प्लान अपने गोल को 5 से

34:55 10 छोटे टुकड़ों में बांटिए। हर टुकड़े को एक मिनी टास्क की तरह ट्रीट कीजिए। सिर्फ एक टुकड़ा रोजाना फोकस करके कीजिए। अगले दिन अगला ऑयल बैरल देखिए रिपीट टिल सक्सेस। अब एक सवाल क्या आपने अपने बड़े सपनों को छोटे स्टेप्स में बांट रखा है या आप आज भी पूरी तस्वीर देखकर डर रहे हैं? क्योंकि अगले अध्याय में ब्राइन बताएंगे। अपग्रेड करने का सबसे तेज तरीका क्या है? यानी कैसे खुद को हर दिन बेहतर बनाएं और अपने मुख्य कार्य मेंस्ट हासिल करें। क्या आप जानना चाहेंगे कि इंप्रूवमेंट को आदत कैसे बनाया जाए? अध्याय 11 अपग्रेड योर की स्किल्स द मोर यू लर्न द मोर यू अर्न।

35:41 यानी जितना ज्यादा आप सीखेंगे उतना ज्यादा आप कमाएंगे। ब्राइन ट्रेसी इस अध्याय में एक बहुत सीधी लेकिन बेहद असरदार बात कहते हैं। अगर आप रोज थोड़ा-थोड़ा करके अपनी स्किल्स को सुधारें तो वक्त के साथ आप अपराजय बन जाएंगे। आज की दुनिया में मेहनत तो हर कोई करता है, लेकिन जो व्यक्ति अपनी कोर स्किल्स को रोज थोड़ा-थोड़ा सुधारता रहता है, वही लंबी रेस का घोड़ा बनता है। यह सिद्धांत हर क्षेत्र में लागू होता है। चाहे आप स्टूडेंट हो, टीचर, बिजनेसमैन, सेल्स पर्सन, फ्रीलांसर या कोई कर्मचारी। ब्राइन कहते हैं अगर आप हर दिन सिर्फ 30 मिनट भी किसी एक स्किल को बेहतर बनाने में

36:27 लगाते हैं तो एक साल में आप 180 घंटे उस स्किल पर काम कर चुके होंगे और यही 180 घंटे आपको औसत लोगों से अलग बनाते हैं। की स्किल्स वह होती हैं जो आपके काम को सीधा असर देती हैं जिन पर आपकी तरक्की इनकम या प्रदर्शन निर्भर करता है। जिन्हें सुधारे बिना आप आगे नहीं बढ़ सकते उदाहरण के लिए एक लेखक के लिए लेखन कौशल एक सेल्स पर्सन के लिए बातचीत और कन्विंस करने की कला एक बिजनेसमैन के लिए निर्णय लेने और स्ट्रेटजी बनाने की क्षमता एक स्टूडेंट के लिए फोकस और पढ़ाई की रणनीति कैसे करें स्किल अपग्रेड एक अपनी टॉप एक से दो की की स्किल्स को पहचाने वो कौन सी दो स्किल्स

37:12 हैं जो सुधर जाए तो आपकी परफॉर्मेंस डबल हो सकती है। दो उस पर रोज थोड़ा समय लगाएं। रोज 30 से 60 मिनट किसी किताब, कोर्स, वीडियो या प्रैक्टिस में लगाएं। तीन फीडबैक लें और सुधार करें। आप जो सीख रहे हैं उसे अप्लाई करें और दूसरों से फीडबैक लें। चार, नेवर स्टॉप लर्निंग को मंत्र बनाएं। हर दिन कुछ नया सीखने की आदत आपको लगातार ग्रो करती है। सफलता का रास्ता सीधे आपकी स्किल्स से होकर जाता है। रोज थोड़ा-थोड़ा सीखने से आप सालों में एक्सपर्ट बन जाते हैं। की स्किल्स को इंप्रूव करना। टाइम मैनेजमेंट का सबसे स्मार्ट तरीका है। अपने क्षेत्र में टॉप पर पहुंचना है। सीखना मत छोड़िए। एक्शन

37:58 प्लान। अपनी टॉप दो स्किल्स की लिस्ट बनाएं। एक लर्निंग रूटीन तैयार करें सुबह या शाम 30 मिनट। हर हफ्ते एक नई चीज सीखने या प्रैक्टिस करने का लक्ष्य रखें। उसे अपने काम में अप्लाई करें। महीने के अंत में खुद को रिव्यू करें। क्या सुधरा क्या नहीं? अब एक सवाल अगर आपकी इनकम और तरक्की पूरी तरह आपकी एक स्किल पर निर्भर होती तो आप उसे रोज कितनी गंभीरता से बेहतर बनाते? आइडेंटिफाई योर कंस्ट्रेंट्स। यानी कैसे पता करें कि आपको किस चीज ने रोका हुआ है और उसे तोड़कर कैसे रफ्तार पाई जाए। क्या आप जानना चाहते हैं कि आपका सबसे बड़ा ब्रेकडाउन पॉइंट कौन सा है? अध्याय 12 लीवरेज योर स्पेशल टैलेंट्स। हर व्यक्ति

38:46 किसी ना किसी चीज में असाधारण होता है। ब्रायन ट्रेसी कहते हैं आपकी सबसे बड़ी सफलता आपकी सबसे बड़ी ताकत के एक्सपर्ट इस्तेमाल में छुपी होती है। दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिसके पास कोई विशेष क्षमता या टैलेंट ना हो। पर सच्चाई यह है कि ज्यादातर लोग अपनी ताकतों को कभी पहचान ही नहीं पाते या फिर उन्हें नजरअंदाज करके दूसरे लोगों की ताकतों की नकल में जिंदगी गुजार देते हैं। खुद से पूछने वाला सबसे जरूरी सवाल मैं किस चीज में सबसे अच्छा हूं? यह सवाल अगर ईमानदारी से पूछा जाए तो जिंदगी बदल सकता है? हर इंसान को कुछ चीजें दूसरों की तुलना में ज्यादा आसान, जल्दी और बेहतर तरीके से आती

39:32 हैं। यह नेचुरल टैलेंट हो सकता है। जैसे प्रॉब्लम सुलझाने की समझ लोगों से संवाद की कला, रचनात्मक सोच, नंबर्स और डाटा को जल्दी समझने की क्षमता। लीडरशिप क्वालिटी, विजुअल क्रिएटिविटी, डिसिप्लिन और एग्जीक्यूशन की शक्ति जब आप अपनी ताकत के हिसाब से काम करते हैं। काम थकाता नहीं, उत्साहित करता है। परफॉर्मेंस बेहतर होती है। प्रोडक्टिविटी कई गुना बढ़ जाती है। आत्मविश्वास में जबरदस्त बढ़ोतरी होती है। और सबसे जरूरी आप दूसरों से अलग दिखने लगते हैं। ब्रायन ट्रेसी का साफ संदेश है। एवरेज बनने की बजाय अपनी ताकतों को पहचानो और उसमें मास्टर बनो। स्टेप बाय स्टेप एक्शन प्लान। एक अपने नेचुरल स्ट्रेंथ को

40:19 पहचानिए। बचपन में किस काम में तारीफ मिलती थी? क्या करने में समय का पता नहीं चलता? लोग किस काम के लिए आपकी सलाह लेते हैं? दो जो भी सबसे स्ट्रांग स्किल है उसमें एक्सपर्ट बनिए, सीखिए, पढ़िए, अभ्यास कीजिए। उन लोगों से मिलिए जो उस क्षेत्र में टॉप पर हैं। तीन अपने काम को उस ताकत के इर्द-गिर्द डिजाइन कीजिए। अगर आप कम्युनिकेशन में अच्छे हैं, सेल्स, कोचिंग, ट्रेनिंग करें। अगर आप डिटेल्स में माहिर हैं। रिसर्च, प्लानिंग, एग्जीक्यूशन की भूमिका लें। एक्शन के लिए सवाल। मेरी सबसे बड़ी नेचुरल स्ट्रेंथ क्या है? क्या मैं अपने काम में उस स्ट्रेंथ का पूरा उपयोग कर रहा हूं? क्या

41:05 मैं उस स्किल में मास्टरी की ओर बढ़ रहा हूं? अब एक सोचने पर मजबूर करने वाला सवाल क्या आप वह काम कर रहे हैं जिसमें आप सबसे ज्यादा बेहतर हो सकते हैं? या आप सिर्फ वह कर रहे हैं जो सामने आ रहा है? अध्याय 13 आइडेंटिफाई योर मोस्टेंट कंस्ट्रेंट्स। आप उतनी ही तेजी से आगे बढ़ सकते हैं जितनी तेजी से आपकी सबसे कमजोर कड़ी आगे बढ़ती है। ब्राइन ट्रेसी की यह बात हमें याद दिलाती है कि सफलता केवल मेहनत पर नहीं बल्कि उन रुकावटों पर भी निर्भर करती है जो हमें धीमा कर रही हैं। हर इंसान की प्रगति में कुछ ना कुछ बाधाएं होती हैं। लेकिन अधिकांश लोग उन्हें पहचानने या स्वीकार करने से बचते हैं। सबसे पहले सवाल

41:52 पूछिए। मुझे क्या चीज रोक रही है? मेरा सबसे बड़ा ब्रेक क्या है? यह सवाल आपके पूरे लक्ष्य की दिशा बदल सकता है। सामान्य बाधाएं कौन सी होती हैं? इंटरनल कंस्ट्रेंट्स, सेल्फ डाउट, फियर ऑफ फेलियर और रिजेक्शन, निर्णय लेने की कमजोरी, आलस्य या आदतें, सीमित सोच, एक्सटर्नल कंस्ट्रेंट्स, संसाधनों की कमी, समय या जानकारी की कमी, सिस्टम या प्रोसेस की बाधाएं। गलत टीम या सहयोगी बाजार या ग्राहक से जुड़ी रुकावटें कैसे पहचाने? आपकी मुख्य कंस्ट्रेंट ब्रायन ट्रेसी कहते हैं। 80% बाधाएं आपके अंदर होती हैं और 20% बाहरी होती हैं। इसका मतलब यह है कि अधिकांश समय हमें खुद से लड़ना पड़ता है

42:40 बाहर से नहीं। इसलिए ईमानदारी से यह समझना जरूरी है। क्या मैं खुद अपनी सफलता में सबसे बड़ा रोड़ा बन रहा हूं? क्या मुझे सीखने, पहल करने या मेहनत से डर लग रहा है? क्या मैं जिम्मेदारी किसी और पर डालकर खुद को बचा रहा हूं? समाधान क्या है? पहली बाधा को लिखिए। साफ और स्पष्ट। मुझे यह स्किल नहीं आती। मैं निर्णय लेने में समय गवाता हूं। मेरी टीम समय पर काम नहीं करती। दूसरी सोचिए, इसे कैसे सुधारा जाए। अगर जानकारी की कमी है तो सीखिए। अगर डर है तो छोटे कदमों से उस दिशा में बढ़िए। अगर कोई दूसरा कारण है तो उसे हटाइए या बदलिए। तीन हर हफ्ते एक बाधा हटाइए। खुद

43:25 से पूछिए। इस हफ्ते कौन सी एक बाधा को हटाकर मैं 10 गुना प्रगति कर सकता हूं? सोचने पर मजबूर करने वाला सवाल। क्या आप अपनी प्रगति की सबसे बड़ी रुकावट को पहचानते हैं? या आप अभी तक बाहरी हालात को ही दोष दे रहे हैं। अध्याय 14 पुट द प्रेशर ऑन योरसेल्फ। बॉस मत ढूंढो। खुद के बॉस बनो। ब्रायन ट्रेसी इस अध्याय में एक बहुत महत्वपूर्ण सिद्धांत बताते हैं। सेल्फ अकाउंटेबिलिटी। सफल लोगों में एक चीज सामान्य होती है। वह खुद पर दबाव डालते हैं। वह बाहर से प्रेरणा या डर का इंतजार नहीं करते। ना ही उन्हें कोई बॉस या मैनेजर टास्क देने की जरूरत होती है। बल्कि वे खुद को टास्क देते हैं। डेडलाइन

44:12 तय करते हैं और खुद को रिपोर्ट करते हैं। क्यों जरूरी है खुद पर दबाव डालना? क्योंकि अगर आप बॉस के कहने पर ही काम करते हैं तो आप सिर्फ एक कर्मचारी हैं। अगर आप खुद के कहने पर काम करते हैं तो आप लीडर बनते हैं। जब आप खुद को जवाबदेह मानते हैं। आपका फोकस तेज होता है। आपकी प्राथमिकता स्पष्ट होती है और आपकी प्रगति नियमित होती है। कैसे बनाएं? सेल्फ प्रेशर सिस्टम। एक खुद को टारगेट दीजिए। हर हफ्ते का एक गोल तय करें। उसे पूरा करने की डेट खुद डिसाइड करें। दो डेली मिनी डेडलाइंस बनाइए। छोटे-छोटे हिस्सों में काम को बांटिए। हर दिन एक टास्क खत्म करना जरूरी मानिए। तीन प्रोग्रेस ट्रैक करें। एक

44:59 डायरी या ऐप में अपनी रिपोर्ट लिखें। हर हफ्ते अपनी परफॉर्मेंस का रिव्यू करें। चार पब्लिक कमिटमेंट करें। अपने किसी दोस्त, मेंटर या सोशल मीडिया पर टारगेट शेयर करें। जब लोग देख रहे हो तो आप और जिम्मेदार महसूस करते हैं। यह आदतें सेल्फ डिसिप्लिन को बढ़ाती हैं। आपका आत्मनियंत्रण ही आपकी सफलता की असली जड़ है। ब्राइन ट्रेसी जब आप खुद पर भरोसा करना शुरू करते हैं तो आपको किसी बाहरी नियंत्रण की जरूरत नहीं पड़ती। आप खुद को चला सकते हैं, बढ़ा सकते हैं और जीत सकते हैं। खुद को टास्क दो। खुद को समय सीमा में बांधो। खुद को जवाबदेह बनाओ। खुद को लीडर मानो। फॉलोअ नहीं। आपकी ग्रोथ आपके

45:46 ऊपर निर्भर है। ना कि आपके बॉस, कंपनी या हालात पर। सोचने वाला सवाल अगर आज से कोई आपको टास्क और डेडलाइन ना दे तो क्या आप फिर भी उतनी ही मेहनत और जिम्मेदारी से काम करेंगे? अध्याय 15 मैक्सिमाइज योर पर्सनल पावर्स। सेल्फ केयर ना है लग्जरी। यह एक प्रोडक्टिविटी स्ट्रेटजी है। ब्राइन ट्रेसी कहते हैं, काम करने के लिए सिर्फ समय नहीं चाहिए, ऊर्जा भी चाहिए और यह ऊर्जा तभी बनेगी जब आप अपनी सेहत, शरीर और मानसिक शक्ति का ध्यान रखेंगे। कोई भी इंसान चाहे कितना ही टैलेंटेड क्यों ना हो, अगर उसका शरीर और दिमाग थका हुआ है तो वह अपने टैलेंट का सिर्फ 50% ही इस्तेमाल कर पाएगा। इसीलिए इस अध्याय में लेखक हमें

46:34 सिखाते हैं कि ऊर्जा को कैसे मैनेज किया जाए ताकि आप लंबे समय तक हाई परफॉर्म कर सकें। क्यों जरूरी है पर्सनल एनर्जी का ध्यान रखना? क्योंकि थकान आपके निर्णयों को कमजोर बनाती है। नींद की कमी आपकी फोकस और मेमोरी को प्रभावित करती है। लगातार काम करने से बर्न आउट होता है जिससे प्रोडक्टिविटी गिरती है। याद रखिए काम तब तक अच्छा नहीं होगा जब तक आप अच्छे नहीं होंगे। कैसे बढ़ाएं अपनी पर्सनल पावर? एक अच्छी नींद लें। 7 से 8 घंटे रोज। सबसे सस्ता लेकिन सबसे पावरफुल प्रोडक्टिविटी बूस्टर। रात की नींद को गंभीरता से लीजिए। दो हेल्दी डाइट लें। प्रोसेस्ड फूड और ज्यादा चीनी से बचिए। फल, सब्जियां,

47:21 प्रोटीन और पर्याप्त पानी लें। हल्का खाएं। दिमाग को भारी ना करें। तीन, ब्रेक लेना सीखिए। हर 90 मिनट। काम के बाद 10 से 15 मिनट का माइक्रो ब्रेक। वॉक करें, आंखें बंद करें या थोड़ा स्ट्रेच करें। यह आपकी ऊर्जा को रिसेट करता है। चार, फिटनेस को प्राथमिकता दें। दिन में 20 से 30 मिनट एक्सरसाइज करें। इससे आपका मूड, एनर्जी और माइंड शार्पनेस बेहतर होती है। पांच, पॉजिटिव एनवायरमेंट बनाएं। नकारात्मक लोगों और थकाऊ माहौल से दूर रहें। खुश, शांत और मोटिवेटिंग स्पेस में काम करें। सबसे जरूरी बात आपका शरीर एक टेंपल है। अगर आप उसकी इज्जत नहीं करेंगे तो वह आपको

48:06 जवाब देना बंद कर देगा। सक्सेस जवन स्किल टाइम्स एनर्जी अगर आपकी ऊर्जा साथ नहीं दे रही तो आपकी बाकी सारी मेहनत अधूरी रह जाएगी। एक्शन प्लान रात की नींद के लिए समय तय करें। एक ब्रेक रूटीन बनाएं। एक हफ्ते तक हेल्दी खाना और एक्सरसाइज ट्राई करें। एनर्जी कम होने पर खुद को फोर्स मत करें। थोड़ा रुके फिर बेहतर तरीके से वापसी करें। एक सवाल आप इतनी मेहनत कर रहे हैं लेकिन क्या आप अपनी बैटरी को रिचार्ज कर रहे हैं? अब अगला अध्याय आपको बताएगा खुद को एक्शन में कैसे लाएं हर दिन? क्या आप जानना चाहेंगे वह साइकोलॉजिकल ट्रिक्स जिनसे आप अपने अंदर आग जला सकते हैं। रोज अध्याय 16 मोटिवेट योरसेल्फ इनू एक्शन।

48:55 बिकम योर ओन चीयर लीडर यानी खुद का सबसे बड़ा मोटिवेटर बनो। दुनिया कितनी भी आपकी तारीफ करे अगर आप खुद को प्रेरित नहीं कर सकते तो लंबे समय तक कुछ भी हासिल नहीं कर पाएंगे। ब्राइन ट्रेसी इस अध्याय में कहते हैं कि बड़े-बड़े लीडर्स, टॉप परफॉर्मर और सफल लोग खुद को रोज अंदर से मोटिवेट करते हैं। वे अपनी ऊर्जा बाहरी माहौल से नहीं बल्कि अंदर की पॉजिटिव सोच से लेते हैं। खुद को मोटिवेट करने का विज्ञान हमारा दिमाग एक बगीचे की तरह है। अगर आप इसमें सकारात्मक सोच के बीज नहीं बोते तो इसमें नकारात्मक विचार अपने आप उगने लगते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप रोज खुद से अच्छा बोले। खुद को प्रोत्साहित करें और हर छोटी

49:42 सफलता को सेलिब्रेट करें। प्रेरित रहने के पांच जरूरी तरीके। एक सकारात्मक स्व बातचीत करें। हर दिन खुद से कहें मैं कर सकता हूं। मैं काबिल हूं। मैं अपने लक्ष्य के करीब जा रहा हूं। यह वाक्य आपके अंदर की ऊर्जा को जागृत करते हैं। दो, हर दिन लक्ष्य याद दिलाएं। अपने लक्ष्यों को सुबह पढ़ें या लिखें। इससे आपके दिमाग को दिशा और उद्देश्य मिलता है। तीन, सक्सेस को सेलिब्रेट करें। हर छोटा टास्क जो आपने पूरा किया उसे सेलिब्रेट करें। यह आपको अगला टास्क करने की ताकत देगा। चार। मोटिवेशनल कंटेंट देखें, सुने पॉजिटिव किताबें पढ़ें। प्रेरक वीडियो या पडकास्ट

50:27 सुने। इससे आपका माइंड लगातार सकारात्मक रहता है। पांच जिन्हें आप पसंद करते हैं उनके साथ समय बिताएं। ऐसे लोग जो आपको प्रेरित करते हैं जो आपके सपनों पर विश्वास करते हैं। एक्शन प्लान। हर दिन सुबह तीन पॉजिटिव बातें खुद से बोलें। एक मोटिवेशन प्लेलिस्ट बनाएं जिसमें गाने, वीडियो या कोट्स हो। एक सक्सेस जार बनाएं। हर दिन अपनी एक छोटी जीत उसमें लिखें। हर वीकेंड खुद को एक छोटा रिवॉर्ड दें। ध्यान रखें कोई और आपको तब तक मोटिवेट नहीं कर सकता जब तक आप खुद को मोटिवेट करना ना सीखें। आपके अंदर वह आग है। बस उसे रोज जलाए रखने की जरूरत है। और अगर आपने यह सीख लिया तो आप किसी भी मुश्किल से पार पा

51:13 सकते हैं। अब एक सवाल अगर आज आपका कोई चियर लीडर नहीं है तो क्या आप खुद अपने लिए खड़े हो सकते हैं? अगले अध्याय में हम जानेंगे डिले ग्रेटिफिकेशन कैसे तुरंत मजा छोड़कर लंबी सफलता की ओर बढ़ा जाए। क्या आप जानना चाहेंगे कि कैसे छोटे-छोटे त्याग बड़ी जीत में बदलते हैं? अध्याय 17 गेट आउट ऑफ द टेक्नोलॉजिकल टाइम सिंक्स। मोबाइल और डिजिटल नोटिफिकेशन यह आज के जमाने के सबसे बड़े फ्रॉग्स हैं। आपने कभी महसूस किया है कि आप कुछ जरूरी करने बैठे थे? और अचानक Instagram की एक रील, WhatsApp का एक मैसेज या YouTube की एक नोटिफिकेशन ने आपका पूरा ध्यान खींच

51:59 लिया। ब्रायन ट्रेसी इसे कहते हैं टेक्नोलॉजिकल टाइम सिंक्स यानी ऐसे डिजिटल जाल जो आपका समय चूस लेते हैं और आपको बिना कुछ हासिल किए थका देते हैं। तकनीकी जाल क्यों खतरनाक हैं? अटेंशन स्पैन घटता है। बार-बार डिस्ट्रैक्ट होने से आपका फोकस टूटता है। आप डीप वर्क नहीं कर पाते। यानी वह गहरी अनइंटरप्टेड प्रोडक्टिविटी जो असली सफलता देती है। डिसीजन फटीग बढ़ती है। हर नोटिफिकेशन पर रिएक्ट करना माइंड को थका देता है। फिर आप असली जरूरी फैसलों में गलती करने लगते हैं। टाइम का इल्लुजन सोशल मीडिया पर 5 मिनट का ब्रेक कब एक घंटे में बदल जाता है, आपको पता भी नहीं चलता। इससे बाहर कैसे आए? वे डिजिटल

52:48 डिसिप्लिन लाएं। अपने फोन की नोटिफिकेशन बंद करें। एप्स को फोल्डर्स में छिपाएं ताकि बार-बार खोलने का मन ना हो। दो फिक्स टाइम स्लॉट बनाएं। दिन में सिर्फ दो या तीन बार ही सोशल मीडिया या मैसेजिंग चेक करें। जैसे सुबह 10:00 बजे, दोपहर 2:00 बजे और रात 8:00 बजे 3 डीप वर्क के घंटे तय करें। दिन में कम से कम 2 घंटे ऐसे रखें जब आप फोन से पूरी तरह दूर रहें। इस समय को अपनी सबसे अहम जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल करें। चार, डिजिटल डिटॉक्स करें। हर हफ्ते एक दिन बिना सोशल मीडिया के बिताएं। यह आपके दिमाग को रिचार्ज करेगा और फोकस लौट आएगा। टूल ऐप ब्लॉकर्स का इस्तेमाल करें। फॉरेस्ट, फ्रीडम, कोल्ड टर्की जैसे एप्स

53:37 आपकी स्क्रीन टाइम को कम करने में मदद कर सकते हैं। पोमोडो टेक्निक भी अपनाएं। 25 मिनट डीप वर्क, 5 मिनट ब्रेक। याद रखें टेक्नोलॉजी एक शानदार सेवक है लेकिन बहुत ही खराब मालिक। ब्रायन ट्रेसी आप टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करें लेकिन उसे खुद पर हावी ना होने दें। जब आप डिजिटल डिस्टरबेंस से बचते हैं तो आपका दिमाग साफ होता है। निर्णय तेज होते हैं और कार्यकुशलता कई गुना बढ़ जाती है। अब सोचने का समय अगर आज से ही आप हर दिन एक घंटा सोशल मीडिया से बचा लें तो उस समय से आप क्या नया बना सकते हैं? क्या आपको लगता है कि कोई बड़ा काम आपको डराता है? तो कैसे उसे टुकड़ों में बांटकर आसान और रोचक

54:24 बनाया जा सकता है? आप जानना चाहेंगे? अध्याय 18 स्लाइस एंड डाइस द टास्क। क्या आपने कभी किसी बड़े काम को देखकर सोच लिया? यह मुझसे नहीं होगा। ब्रायन ट्रेसी कहते हैं कि ऐसा डर हर किसी को लगता है। लेकिन फर्क यह है कि सफल लोग उस बड़े काम को छोटे टुकड़ों में बांटकर खा जाते हैं। एक बार में एक निवाला। यही है इस अध्याय की सीख। स्लाइस एंड डाइस द टास्क। यानी काम को छोटे-छोटे हिस्सों में काट दो ताकि वह आसान और स्पष्ट हो जाए। क्यों जरूरी है टुकड़ों में बांटना? फियर कम होता है। जब कोई काम बहुत बड़ा लगता है तो हमारा दिमाग उससे बचना चाहता है। लेकिन अगर वही काम 10 आसान स्टेप्स में बंट जाए तो हर स्टेप

55:11 मैनेजेबल लगता है। मोमेंटम बनता है। हर पूरा किया गया छोटा टास्क एक जीत है। यह जीत हमें मोटिवेट करती है आगे बढ़ने के लिए। क्लेरिटी मिलती है। जब आप स्टेप्स तय करते हैं तो आपको पता होता है अगला कदम क्या है? इससे डिसीजन लेना आसान हो जाता है। कैसे करें इस टेक्निक का इस्तेमाल? एक माइंड स्टॉर्मिंग करें। पेपर पर उस काम से जुड़े सारे स्टेप्स लिखिए। कोई भी स्टेप छोटा या बेमतलबने नहीं है। सब लिखिए। दो सीक्वेंस बनाइए। उन स्टेप्स को सही क्रम में सजाइए। जो पहले करना है वो सबसे ऊपर रखिए। तीन चंकिंग टेक्निक अपनाएं। बड़े टास्क को 15 से 20 मिनट के हिस्सों में बांटिए। हर चंक पूरा करने के बाद खुद को

55:57 एक छोटा रिवॉर्ड दें। चार टाइम बॉक्स करें। हर स्टेप को पूरा करने के लिए समय तय करें। जैसे स्टेप एक, 20 मिनट, स्टेप दो, 15 मिनट आदि एक सच्चाई याद रखें। किसी हाथी को कैसे खाया जाता है? एक निवाले में। ब्रायन ट्रेसी यही सिद्धांत हर मुश्किल काम पर लागू होता है। जब आप किसी बड़े लक्ष्य को लेकर बैठते हैं तो वह आपको पहाड़ जैसा लगेगा। लेकिन जब आप उसे छोटे पत्थरों में तोड़ते हैं, तो एक-एक कदम आपको उस पहाड़ की चोटी तक पहुंचा देता है। हर टास्क को एक चेक लिस्ट के रूप में लिखें। हर टिक की गई लाइन डोपामाइन रिलीज करती है। यानी आप खुद को पूरा सक्षम और उत्साहित महसूस करते हैं। अब सोचिए अगर आप

56:45 अपने सबसे डरावने टास्क को 10 हिस्सों में बांट दें तो क्या वह आसान नहीं लगेगा? क्या आप अपने सबसे जरूरी काम के लिए बिना किसी रुकावट के घंटों का समय निकाल पा रहे हैं? अगर नहीं तो कैसे बनाएं डीप फोकस ब्लॉक्स? जानना चाहेंगे अध्याय 19 क्रिएट लार्ज जंक्स ऑफ टाइम। काम को खत्म नहीं कर पाता। क्यों? अक्सर हम कहते हैं मेरे पास समय नहीं है या काम अधूरा रह जाता है। असल में समय की कमी नहीं है बल्कि स्ट्रक्चर की कमी है। ब्रायन ट्रेसी कहते हैं कि अगर आप रोज के कामों में से बड़े डिस्टरबेंस फ्री टाइम ब्लॉक्स निकाल लें तो आप वह हासिल कर सकते हैं जो बाकी लोग महीनों में

57:32 भी नहीं कर पाते। इसीलिए अध्याय 19 की सबसे महत्वपूर्ण सलाह है क्रिएट लार्ज चंक्स ऑफ टाइम यानी एकाग्रता वाले लगातार काम करने के टाइम ब्लॉक्स तैयार करें। क्यों जरूरी है लंबा फोकस टाइम? डीप वर्क होता है। छोटी-छोटी इंटरप्शनंस से हमारा दिमाग सतही सोच में चला जाता है। लेकिन जब हम लगातार 60 से 90 मिनट तक एक काम में लगे रहते हैं तो हमारा दिमाग डीप जोन में जाता है। जहां असली प्रोडक्टिविटी होती है। कॉन्टेक्स्ट स्विचिंग से बचते हैं। जब आप हर 5 मिनट में मोबाइल या ईमेल देखते हैं तो आपका ध्यान बटंट जाता है। बार-बार फोकस में आना आपको थका देता है। मैसिव

58:19 आउटपुट मिलता है। एक दिन में दो से तीन गहरे अनइंटरप्टेड ब्लॉक्स काफी होते हैं बड़े काम निपटाने के लिए। कैसे बनाएं फोकस ब्लॉक्स? व्हाट? स्केेड्यूल। इट लाइक अ मीटिंग। अपने दिन में 90 मिनट के दो से तीन फोकस टाइम स्लॉट पहले से तय करें। यह स्लॉट किसी मीटिंग या कॉल से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। दो यूज द पोमोडो टेक्निक। 25 मिनट फोकस प्लस 5 मिनट ब्रेक चार पोमो डोरों के बाद लंबा ब्रेक 20 से 30 मिनट इससे माइंड फ्रेश रहता है और डिसिप्लिन बना रहता है। तीन डिस्ट्रैक्शन एलिमिनेटर जोन बनाइए मोबाइल फ्लाइट मोड पर नोटिफिकेशन बंद ईमेल WhatsApp और सोशल मीडिया को फोकस टाइम में दूर रखिए। चार

59:07 डेडिकेटेड वर्क स्पेस बनाइए। जहां केवल काम होता हो, वहां की साफ सफाई, रोशनी और वातावरण आपकी एकाग्रता बढ़ाएं। टाइम ऑडिट करें। एक हफ्ते तक हर घंटे लिखिए। आपने क्या किया? आपको खुद दिखेगा कि कितना समय वेस्ट हो रहा था। अब वही समय फोकस ब्लॉक्स में बदल दीजिए। सफल लोग ऐसा ही करते हैं। बिल गेट्स, ईलॉन मस्क और टिमफेरिस जैसे लोग अपने दिन के सबसे बेस्ट घंटे डीप वर्क को देते हैं और वही उनकी सफलता की असली वजह बनता है। ब्राइन ट्रेसी भी कहते हैं एक काम को पूरी एकाग्रता के साथ करने में जो संतोष है वह किसी अधूरे काम के बोझ से कहीं ज्यादा मूल्यवान है। सोचिए अगर आप हर दिन सिर्फ 2 घंटे बिना

59:54 रुकावट के डीप वर्क करें तो एक साल में आप क्या कुछ हासिल कर सकते हैं? क्या आप तेजी से काम शुरू कर पाते हैं? या अक्सर टालते हैं? जल्दी एक्शन लेने की आदत कैसे बनाएं? जानिए अगले भाग में। अध्याय 20 डेवलप अ सेंस ऑफ अर्जेंसी। डू इट नाउ। डू इट फास्ट। काम को टालो मत झपट लो। ब्रायन ट्रेसी इस अध्याय में एक शक्तिशाली आदत के बारे में बात करते हैं। सेंस ऑफ इयरजेंसी यानी काम को लेकर तेजी और तत्परता। अधिकतर लोग सफल नहीं हो पाते क्योंकि वह सोचते रहते हैं। प्लान बनाते रहते हैं पर शुरुआत नहीं करते। सफल लोग एक बात में बहुत तेज होते हैं एक्शन लेने में। वह सोचते नहीं

1:00:40 वह करते हैं। अर्जेंसी क्या है? सेंस ऑफ अर्जेंसी का मतलब है जैसे ही कोई जरूरी काम सामने आए उसे फौरन शुरू करना। बिना बहानों के, बिना टालमटोल के पूरी ऊर्जा और फोकस के साथ ब्रायन ट्रेसी कहते हैं। सक्सेसफुल पीपल लॉन्च फास्ट एंड कीप मूविंग फास्ट। प्रोस्टिनेशन क्यों होता है? कंप्लीट क्लेरिटी नहीं होती। काम बड़ा या मुश्किल लगता है। परफेक्शनिज्म की बीमारी कम आत्मविश्वास। डिस्ट्रैक्शंस की भरमार इन सभी कारणों का इलाज एक ही है। तुरंत शुरू करो। एक बार आप शुरू कर देते हैं तो आगे का रास्ता खुद बनता चला जाता है। कैसे विकसित करें अर्जेंसी? पहला मंत्र बनाएं अब करो। हर बार जब कोई जरूरी

1:01:27 काम सामने आए खुद से कहिए अब करो। अभी करो बाद में नहीं। डोर स्पीड को आदत बनाइए। हर टास्क को करने में समय लिमिट सेट करें। उदाहरण मैं यह रिपोर्ट 45 मिनट में खत्म करूंगा। थ्री अपने आप को चैलेंज दीजिए। खुद से पूछिए मैं इस काम को कितनी तेजी से और कितनी गुणवत्ता के साथ खत्म कर सकता हूं। खुद से कंपटीशन करें। चार डेडलाइन बनाएं और फॉलो करें। बिना डेडलाइन के काम ढीला पड़ जाता है। टाइट डेडलाइन अर्जेंसी को जन्म देती है। पांच इंस्टेंट ग्रेटिफिकेशन छोड़ें। मोबाइल, सोशल मीडिया, Netflix जैसी चीजें तुरंत मजा देती हैं। पर दीर्घकाल में रिग्रेट ही देती हैं। ब्रांड ट्रेसी बताते हैं कि

1:02:13 दुनिया के टॉप परफॉर्मर इस एक आदत में सभी से आगे होते हैं। उन्हें इंतजार नहीं करना पड़ता। उन्हें धक्का नहीं देना पड़ता। वे खुद ही जलते हैं अंदर से। और यही इनर फायर उन्हें सफल बनाता है। सोचिए अगर आपने हर जरूरी काम को उसी वक्त करना शुरू किया तो आपकी जिंदगी एक साल में कितनी बदल जाएगी? क्या आप एक समय में एक ही काम कर पाते हैं या बीच में बार-बार स्विच करते हैं? ध्यान और गहराई से कैसे काम पूरा करें? जानिए अगले अध्याय में। अध्याय 21 सिंगल हैंडल। एव्री टास्क मल्टीटास्किंग एक धोखा है। एक बार में एक काम करो। आज के तेज रफ्तार जीवन में हमें

1:03:00 बार-बार यह सुनने को मिलता है। मल्टीटास्किंग करो तभी आगे बढ़ पाओगे। लेकिन ब्राइन ट्रेसी इस भ्रम को तोड़ते हैं। वह साफ कहते हैं मल्टीटास्किंग आपकी प्रोडक्टिविटी को नहीं बढ़ाता बल्कि उसे खत्म कर देता है। असल में जब हम एक समय में कई काम करने की कोशिश करते हैं तो हमारा ध्यान बढ़ता है। गुणवत्ता गिरती है और काम पूरा नहीं होता। सिर्फ आधा अधूरा रहता है। ईट दैट फ्रॉग का मतलब है हर दिन सबसे जरूरी सबसे कठिन टास्क को पहले करना। और जब आप उस काम में लगे तो उसे पूरी एकाग्रता से कीजिए। उसे अधूरा छोड़िए मत। उसे खत्म कीजिए। ब्राइन ट्रेसी कहते हैं स्टार्ट इट, स्टिक विद इट, फिनिश इट।

1:03:46 अधूरे काम क्यों भारी पड़ते हैं? जब कोई काम अधूरा रह जाता है, वह आपके दिमाग पर बोझ बन जाता है। आपके आत्मविश्वास को कमजोर करता है। समय की बर्बादी करता है। इसलिए हर काम को शुरू करें। उस पर टिके रहें और अंत तक जाएं। कैसे अपनाएं? सिंगल हैंडलिंग, वर्क। डेली एक फ्रॉग चुने। सुबह उठते ही सबसे जरूरी टास्क को पहचाने। दो, डिस्ट्रैक्शंस बंद करें। मोबाइल, सोशल मीडिया, ईमेल को कुछ समय के लिए बंद रखें। तीन, टाइम ब्लॉक करें। जैसे 90 मिनट का अनइरप्टेड टाइम सिर्फ उस एक काम के लिए। चोर, काम खत्म होने पर सेल्फ रिवॉर्ड दें। इससे ब्रेन को पॉजिटिव रीइंफोर्समेंट मिलता है। पांच काम शुरू करने में देरी मत

1:04:32 करें। जितनी देर आप सोचते रहेंगे उतनी ज्यादा एनर्जी लीक होगी। इसका असर क्या होता है? फोकस शार्प होता है। कॉन्फिडेंस बढ़ता है। टाइम बचता है। काम की क्वालिटी बढ़ती है। सेटिस्फेक्शन मिलता है और सबसे बड़ी बात आपका जीवन कंट्रोल में आने लगता है। हर दिन का एक लक्ष्य हो। बिना लक्ष्य के दिन बिना दिशा की नाव जैसा है। सिर्फ जरूरी काम करें। काम कम हो लेकिन असरदार हो। डिसिप्लिन को आदत बनाएं। यही आपको सफलता के ट्रैक पर बनाए रखता है। खुद से कंपटीशन करें। रोज खुद को थोड़ा और बेहतर बनाइए। सीखना कभी बंद मत कीजिए। जितना सीखेंगे उतना कमाएंगे और बढ़ेंगे। अंतिम सवाल जो आपकी जिंदगी बदल सकता है। अगर

1:05:20 आपने इस किताब के 21 नियमों में से सिर्फ पांच को पूरी तरह से अपनाया तो एक साल बाद आप कौन होंगे? आगे बढ़ो। टालो मत। अपने मेंढक को पहचानो और उसे खा जाओ। आपका भविष्य आपके एक्शन से बनता है। इरादों से नहीं। याद रखो सफलता कोई घटना नहीं बल्कि रोज की आदत है। और आज सही आदत की शुरुआत करने का सबसे अच्छा दिन है। दोस्तों तो यह थी ब्रायन ट्रेसी की जबरदस्त किताब ईट दैट फ्रॉग की कहानी जिसने हमें सिखाया कि अगर आप अपनी जिंदगी में सच में कुछ बड़ा करना चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी सबसे मुश्किल सबसे जरूरी काम को पहचानिए। और बिना समय गवाए उसी को सबसे पहले खत्म कीजिए। ब्राइन

1:06:07 ट्रेसी बार-बार एक बात पर जोर देते हैं। एक्शन क्रस फेयर मतलब जब आप उस मेंढक यानी सबसे कठिन काम को खा जाते हैं तो आपके बाकी सारे काम अपने आप आसान लगने लगते हैं। इस किताब की सबसे बड़ी सीख यही है कि प्रोडक्टिविटी कोई टैलेंट नहीं होती। बल्कि यह एक आदत होती है और यह आदत बनती है छोटे-छोटे लेकिन सही निर्णयों से। आप भी अपनी लाइफ में अगर समय की कमी, टालमटोल की आदत या कामों के बोझ से परेशान हैं तो यह किताब आपके लिए एक गाइड बन सकती है। अब सवाल यह है क्या आप तैयार हैं अपनी मेंढक को निगलने के लिए? क्या आप तैयार हैं सबसे कठिन काम से शुरुआत करने के लिए? अगर हां, तो आज से ही इस किताब के 21 प्रैक्टिकल

1:06:54 आईडियाज में से कम से कम एक आईडिया को लागू करना शुरू कीजिए और अपनी जिंदगी को एक नई दिशा दीजिए। इस वीडियो को यहीं समाप्त करते हैं। लेकिन आपकी प्रोडक्टिविटी जर्नी अब शुरू होती है। अगर आपको यह वीडियो पसंद आया हो तो लाइक करें, शेयर करें और सब्सक्राइब करना ना भूलें हमारे चैनल ऑन योर बुक फ्लो को। जहां हम लाते हैं आपके लिए जिंदगी बदल देने वाली किताबों के सार हिंदी में। मिलते हैं अगली किताब की दमदार समरी के साथ। तब तक के लिए धन्यवाद।

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