0:01 ठीक है। हेलो हेलो हेलो हेलो हेलो हेलो हेलो नमस्कार नमस्कार नमस्कार दोस्तों आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है हमारी आज की इस क्लास के अंदर उम्मीद करते हैं कि आप सभी लोग हमारे साथ जुड़े हुए हैं और आप सभी तक हमारी आवाज बिल्कुल सही तरीके से पहुंच रही है। हमारे जो यूपी बोर्ड के बिहार बोर्ड के झारखंड बोर्ड के राजस्थान बोर्ड के हरियाणा बोर्ड के छत्तीसगढ़ बोर्ड के और झारखंड बोर्ड के बहुत सारे साथी बहुत सारे दोस्त जुड़े हुए हैं। तो अपने हर एक साथी का अपने हर एक दोस्त का अपने हर एक प्यारे बच्चे का दोस्तों बहुत ही प्यार भरा स्वागत हम यहां पर कर रहे हैं। हमारे साथ है द वन एंड ओनली टॉम क्रूस जुड़े हुए
0:48 हैं डायरेक्टली फ्रॉम अमेरिका से। उसी के साथ-साथ दुर्गेश है बटरफ्लाई करके एक बच्ची है। उम्मे हनी हमारे साथ है। अस्सलाम वालेकुम कह रहे हैं। वालेकुम अस्सलाम व रहमतुल्लाह व बरकातू। कैफा का सर ये अरेबिक चैनल लग गया क्या? हमारे साथ संगीता है। हमारे साथ प्रियांंशु हैं। हमारे साथ लक्षित हैं। अमित भाई साहब हमारे साथ हैं। हमारे साथ निदा हैं। हमारे साथ अंश कह रहे हैं। सर जी प्रणाम सर जी राधे-राधे। सर जी आप कैसे हैं? एकदम बढ़िया। सर जी जय भीम सर जी राधे-राधे। स्वागत है दोस्तों आप सभी का बहुत अच्छे तरीके से। बहुत प्यारे तरीके से हम लोग अपने इस टॉपिक को डिस्कस कर रहे हैं और अपने सारे के सारे इन पॉइंट्स को हम लोग एक-एक कर कर देख पा रहे हैं। हम लोगों की सुबह तो क्लास चल ही रही है दोस्तों। जैसे आपको पता है हमारी एनसीईआरटी लाइन बाय लाइन और उसी के साथ-साथ जैसे कि आप सभी जानते हैं दोस्तों की जो हमारा ये वीर बैच चल रहा है इस वीर बैच के अंतर्गत हम लोग
1:34 आपके सामने अपने एक नए चैप्टर को एक नए बिंदु को एक नए टॉपिक को डिस्कस करने के लिए आ चुके हैं। हमारी आज की इस क्लास के अंदर हम लोग क्या करने लगेंगे बेटा? हमारी आज की इस क्लास के अंदर हमारा यह जो चैप्टर अपन को देखने को मिलता है जिसे हम लोग बोल रहे हैं खनिज एवं ऊर्जा संसाधन। इसका क्या करेंगे बेटा? हम लोग आप सभी के सामने इसका अपना लेक्चर नंबर क्या करने लगे हैं बेटा? हम लोग आप सभी के सामने इसका लेक्चर नंबर टू पेश करने जा सॉरी एक ही लेक्चर पेश करेंगे। और इसी लेक्चर के अंदर इस चैप्टर की जो संपूर्ण कहानी होगी जो पूरा का पूरा हमारा चैप्टर होगा इसको हम लोग आप सभी के सामने पेश कर देंगे। तो अगर आप लोग इस चैप्टर को रिवाइज करना चाहते हैं, अगर आप इस चैप्टर को एक ही बार के अंदर बहुत अच्छे तरीके से समझना चाहते हैं, तो आप बिल्कुल सही क्लास के अंदर मौजूद हैं। बहुत बेहतरीन तरीके से बहुत प्यारे तरीके से हमारा ये जो वीर बैच चल
2:20 रहा है, इसके अंतर्गत हमारा ये जो एक नया अध्याय आता है इसको हम लोग आपके सामने रख रहे हैं। चैप्टर का नाम है खनिज और ऊर्जा संसाधन। कहां देखने को मिलता है मेरे प्यारे बच्चे? आपका जो भूगोल वाला भाग है या फिर जिसको हम लोग ज्योग्राफी के नाम से जानते हैं ना वहां पर हमारा ये चैप्टर हमें दिख रहा है। मेरे को दे दो। सर क्या चाहिए? मेरे को ना एक बार जल्दी से आप लोग फायर वाली इमोजी दे दो। फिर हम लोग आपके साथ अपने इस आज के चैप्टर को एक-एक करके स्टार्ट करेंगे। सर जी नमस्ते नमस्ते बेटा जी। ठीक है। बहुत बढ़िया। सर एक बार पीडब्ल्यू एनसेट पर भी वीडियो बना दीजिएगा। डेफिनेटली आने वाले कुछ दिनों के अंदर आपको पीडब्ल्यू एनसेट के ऊपर एक वीडियो जरूर आते हुए देखने को मिल जाएगी। अरे दे दो मेरे दोस्तों मेरे को एक बार जल्दी से आप लोग फायर वाला इमोजी और फिर हम लोग यहां से आपके साथ अपनी आज की इस कहानी को अपने आज के इस प्यारे से बिंदु को एक-एक कर डिस्कस कर लेंगे। ठीक है?
3:05 चलिए, स्टार्ट करते हैं। सबसे पहले हमारी आज की इस क्लास के अंदर हम लोग क्या-क्या चीजें देखेंगे, पढ़ेंगे तो पढ़ेंगे तो पूरा का पूरा चैप्टर ही, लेकिन इस पूरे के पूरे चैप्टर के अंदर ना हमें कुछ बेसिक-बेसिक बातें यहां पर अच्छे तरीके से डिस्कस करनी होंगी। सबसे पहले हम लोग क्या जानेंगे? हम लोग यहां पर खनिज से क्या तात्पर्य होता है? शब्द का नाम ही है चैप्टर का नाम ही है खनिज और ऊर्जा संसाधन। तो हम लोग सबसे पहले ना खनिज का क्या अर्थ होता है? वो जानेंगे। फिर हमारे पास खनिज के अलग-अलग प्रकार होते हैं। ये क्या है? कहां पर देखने को हमारे खनिज के अलग-अलग प्रकार हैं? वो हम देखेंगे। फिर खनिज के भंडार यानी कि खनिज मिलता कहां पर है सर? पीछे वाली दुकान है ना वहां पर हमारे जो मौसा जी की दुकान है वहां मिलता है। नहीं खनिज मिलते कहां पर हैं? उनको हम लोग डिस्कस करेंगे। हमारे पास खनिजों का एक रूप है जिसे लोह अयस्क कहा जाता है। ये क्या है वो जानेंगे। हम लोग मैंगनीज को समझेंगे।
3:52 हम लोग तांबे को पढ़ेंगे। एलुमिनियम बॉक्साइट को जानेंगे। हमारे जितने भी ये खनिज होते हैं इनको अधिकतर हम लोग खुदाई करके निकालते हैं। इनसे क्या दुष्प्रभाव होता है या फिर जब हम खनन करते हैं तो उससे क्या नुकसान होते हैं उनको जानेंगे। फिर हम लोग अपने ऊर्जा संसाधन को पढ़ेंगे। हम लोग आपके साथ अपने परंपरागत जो हमारे ऊर्जा के संसाधन होते हैं उसको डिस्कस करेंगे। हम आपके साथ डिस्कशन करेंगे कोयले के बारे में। हम बात करेंगे पेट्रोलियम के बारे में, प्राकृतिक गैस के बारे में, बिजली के बारे में और गैर परंपरागत ऊर्जा संसाधन में परमाणु ऊर्जा, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, वायु ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा और भूतापीय ऊर्जा और कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों को भी हम लोग आपके साथ डिस्कस कर लेंगे। तो भैया, यहां तक हमारी आज की इस क्लास में हम लोग किन-किन पॉइंट्स को डिस्कस करेंगे, उनको हमने आपके सामने यहां पर
4:37 अच्छे तरीके से पेश कर दिया है। अब आपको क्या करना है? आपको हमारी इस क्लास को करने के लिए ना सबसे पहले दो चीजें करनी होंगी। पहली चीज क्या है बच्चे? आपको इस क्लास को शुरुआत से लेकर आखिर तक करना है। सर मैं क्यों करूं ये क्लास शुरुआत से लेकर आखिर तक? मेरा क्या फायदा? मेरे भाई आपको चैप्टर समझ में आएगा। और दूसरी जो चीज आपको यहां पर ध्यान रखनी है कि आपके पास जरूर कॉपी पेन पेंसिल होनी चाहिए। जो भी महत्वपूर्ण बातें मैं आपको बताता चलूं आप लोग उसको साथ-साथ नोट डाउन करते रहें ताकि कोई कंफ्यूजन या फिर कोई डाउट आपके सामने यहां पर बिल्कुल नहीं रहे। तो भैया कहानी को स्टार्ट करते हैं। चैप्टर को समझ लेते हैं और बहुत अच्छे तरीके से यहां पर आपके साथ देख लेते हैं। सर मैं आपकी नागिन आप मुझे भूल गए। अरे नहीं नहीं तुम्हें कैसे भूलेंगे? है ना? हमारे सामने सबसे पहले एक शब्द आ रहा है जिसे हम लोग बोल रहे हैं खनिज। और खनिज का मतलब क्या है
5:24 बेटा कि खनिज को अगर हम लोग समझने की कोशिश करें तो ये एक बहुत ही अच्छा संसाधन है। संसाधन का मतलब क्या कि खनिज के जरिए हमारी बहुत सारी जरूरतें हमें पूरी होती हुई देखने को मिलती हैं। और अधिकतर जितने भी हमारे ये खनिज है ना इनको हम लोग क्या करते हैं? इनको हम लोग खुदाई के जरिए यानी कि जमीन के गर्भ में जमीन की गहराई में हमारे ये खनिज मौजूद हैं और इनको हम लोग क्या करते हैं बेटा कि इनको हम लोग कहीं ना कहीं जमीन की जो हमारी गहराई होती है उससे निकालते हैं। अगर हम लोग देखें कि आज से ना हजारों साल पहले हमारी पृथ्वी के ऊपर बहुत सारी चीजें रहा करती थी। जैसे हमारी पृथ्वी के ऊपर बहुत सारे पेड़ थे। हमारी पृथ्वी के ऊपर बहुत सारे पौधे थे। हमारी पृथ्वी के ऊपर बहुत सारे हमें जीव देखने को मिलते थे। यह जो हमारे पेड़ हुए, पौधे हुए और जो जीव-जंतु हुए, यह पृथ्वी के गर्भ में चले गए। पृथ्वी की गहराई में ये दब गए और हजारों सालों में आप देखते
6:10 हैं दोस्तों कि इन्हीं में से हमें अलग-अलग प्रकार के खनिज बनते हुए देखने को मिले। इन्हीं से हमारा पेट्रोलियम हमें बनता हुआ देखने को मिला। इन्हीं से आप देखते हैं दोस्तों कि हमारा कोयला हमें बनता हुआ देखने को मिला। इन्हीं से हमारे और भी खनिज बनते हुए दिखे। तो खनिज आज से हजारों साल पहले मौजूद जो हमारी पृथ्वी के अलग-अलग पेड़-पौधे थे वो पृथ्वी के गर्भ में चले गए। पृथ्वी की गहराई में चले गए। वहां जाकर वो एक तरीके से अपने रूप को परिवर्तित कर बैठे। कुछ कोयले में बदल गए। कुछ अलग-अलग चीजों में हमें बदलते हुए देखने को मिले। अब यहां पर एक बात आपको याद रखनी है क्या? कि हमारा जो एक हर एक खनिज होता है ना हर एक खनिज की जो बनावट है वो एक दूसरे से बिल्कुल अलग है। है ना? खनिज हर एक खनिज एक दूसरे से अलग है। हर एक खनिज का रंग अलग है। हर एक खनिज का आकार अलग है। उसी के साथ-साथ आप देखते हैं दोस्तों कि हर एक खनिज के अंदर हमें क्या
6:57 दिखता है दोस्तों कि उसका रूप अलग देखने को मिलता है। और हर एक खनिज को आप क्या करते हैं दोस्तों कि जब उसको छूते हैं। है ना? तो छूने पर भी आप उनको पाते हैं। कुछ खुरदरे होते हैं, कुछ मुलायम होते हैं। तो हमारे ये जो खनिज है, ये हमें अलग-अलग प्रारूप में या फिर अलग-अलग स्वरूप में देखने को यहां पर मिलते हैं। है ना? तो यहां पर हमने अपने इस पॉइंट को एक-एक कर आपके सामने देखा। हां, हमारे जो बिहार बोर्ड वाले बच्चे हैं उसको भी वो यहां पर सर स्क्रीन पर ग्लिच हो रहा है। हां, एक बार देखते हैं भाई स्क्रीन पे ग्लिच हो रहा है यार। क्या कर रहे हो? ग्रीन हो रही है स्क्रीन। हां। अब आगे बढ़ते हैं बेटा। तो यहां पर हमने आपके साथ जो हमारा ये खनिज था और खनिज से संबंधित जो हमारा ये बिंदु था कि आखिर खनिज का मतलब क्या होता है? और खनिज की क्या परिभाषा है उसको हम लोग एक-एक कर कर आपके सामने रख चुके हैं। कोई डाउट और
7:42 कोई कंफ्यूजन तो यहां तक है नहीं। अब खनिजों के ना हमें क्या देखने को मिलते हैं बेटा? जो हमारा ये खनिज है इसके ना हमें क्या देखने को मिलते हैं कि अलग-अलग हमें खनिज के क्या देखने को मिलते हैं कि हमारा जो ये खनिज है इसके हमें भंडार देखने को मिलते हैं। यानी कि ये खनिज मिलता कहां पर है? क्या पीछे वाली दुकान पर मिलता है या फिर बाजार में मिलता है या फिर आप देखते हैं कि शॉपिंग मॉल में मिलता है या फिर घर पर Amazon से डिलीवर करा सकते हैं। ऐसा नहीं है। हमारे जो ये खनिज हमें देखने को मिल रहे हैं अगर आप ध्यान से देखें इनके ना हमारे अलग-अलग भंडार हैं। तो पांच जगहों पर हमारा खनिज हमें देखने को मिलता है। इसमें से सबसे पहला प्रकार है आग्नेय और रूपांतरित चट्टाने। अब ये आग्नेय और रूपांतरित चट्टाने क्या हैं? भैया हम यहां पर देखते हैं कि हमारे पास ज्वालामुखी है। ये हमारे पास हमारी ज्वालामुखी है। ये ज्वालामुखी में से आप
8:28 देखते हैं दोस्तों कि एक प्रकार का ये पहाड़ ही होता है। ज्वालामुखी क्या है कि एक प्रकार का पहाड़ है। इस पहाड़ के अंदर हमें ये क्या दिखता है बेटा कि ये यहां पर हमें लावा दिखता है। ये लावा क्या होता है? ये लावा धूम करके फूटता है। जब लावा फूटता है ज्वालामुखी। इस ज्वालामुखी के अंदर बहुत ज्यादा गैसें इसके अंदर बहुत ज्यादा लावा। इसके अंदर हमें दिखता है दोस्तों कि बहुत ज्यादा गर्मी है। ये गर्मी अचानक से बाहर आती है। और ये जो लावा हमें दिखता है ना ये लावा बाहर आने के बाद आप क्या देखते हैं दोस्तों कि कुछ इस तरीके से ठंडा होकर जम जाता है। और इस जमे हुए लावा में जो हमें खनिज दिखते हैं इस चट्टान के कोई चट्टान है। कोई पहाड़ है। इस पहाड़ से आप देखते हैं दोस्तों कि हमारा जो लावा बाहर आ जाता है। पिघलता हुआ बाहर आता है। और बाहर आने के बाद आप देखते हैं दोस्तों कि ये बाहर आकर जम जाता है। इस जमे हुए खनिज में इस ज इस जमे इस जमे
9:13 हुए लावा को हम क्या कहते हैं? आग्नेय और रूपांतरित चट्टान कहते हैं। तो जमीन की गहराई से ये जो हमारा लावा बाहर आया और बाहर आकर जम गया और फिर इसके अंदर जो हमें खनिज देखने को मिलता है उसमें हमें टिन, जस्ता और तांबा ये हमारा टिन और जस्ता और तांबा है। कुछ इस प्रकार के खनिज देखने को मिलते हैं। तो ये हमारा सबसे पहले प्रकार का खनिज है जिसको हमने यहां पर एक-एक कर कर आपके सामने बहुत अच्छे तरीके से पेश किया। है ना? तो यहां पर हमने अपने इस खनिज के बिंदु को आपके सामने रखा है। अब आगे बढ़ना शुरू करते हैं क्या? कि खनिज का ना हमारे पास एक दूसरा प्रारूप भी देखने को मिलता है। दूसरी जगह जहां हम खनिज को देख पाते हैं और वो ये क्या है बेटा? इसको हम लोग बोलते हैं अवसादी चट्टान के रूप में। अवसादी चट्टान का मतलब क्या है? कि बहुत बार हमारे पास कोई पहाड़ है। हम देखते हैं कि एक ना ये पहाड़ का टुकड़ा
9:58 जमीन से अलग हो गया। अपने आप अलग हो गया। बहुत बार पहाड़ जो होते हैं या फिर जो चट्टाने होती हैं वो जमीन से अपने आप अलग हो जाती हैं या फिर पहाड़ से कुछ पहाड़ का हिस्सा पहाड़ से या फिर चट्टानों से अपने आप अलग हो जाता है और इसको हम लोग क्या बोलते हैं बेटा इसको हम लोग अवसादी चट्टानों के नाम से जानते हैं कि हमारा जो पहाड़ है उसके अंदर कुछ क्रिया हुई और उसका एक हिस्सा टूट गया। इस टूटे हुए हिस्से में जो हमें खनिज मिलता है उसे हम लोग अवसादी चट्टानों के रूप में खनिज कहते हैं। और इसमें हमें लोहा दिखता है, जिप्सम दिखता है। इसके अंदर हम कोयला देखते हैं या फिर पोटाश को देखते हैं। तीसरी जगह जहां पर हमें क्या देखने को मिलता है बेटा? हमारा खनिज मिलता है। पहला क्या है? कि ज्वालामुखी से बाहर आ रहा है। दूसरा है कि एक पहाड़ से अलग हो रहा है। उसे हमने अफसादी चट्टान के नाम से जाना। सर सर 48 बैकलग हैं। सेप्टेंबर में हेल्प कर दीजिएगा। क्लास के आखिर में मैं आपको
10:44 डिस्कस करता हूं बेटा। ये है ना? हमारे पास यह तीसरे तरीके का खनिज का प्रारूप है जिसे हम लोग बोलते हैं क्या? जिसे हम लोग बोलते हैं धरातलीय चट्टान। धरातलीय चट्टान का मतलब क्या है? कि हमारी पृथ्वी पर ना हमारी जमीन पर हमें क्या दिखता है कि बहुत सारी चट्टानें पड़ी हुई हैं। अगर आप हमारी पृथ्वी पर देखें। है ना? अगर आप हमारी पृथ्वी पर देखें हमारी हमारी जमीन जो हमारी सतह है, जहां पर मैं खड़ा हूं, ये क्या है बेटा? ये धरातल है जिस पर मैं खड़ा हूं जिस पर अभी मैंने पैर मारा जिस पर आप बैठे हुए हैं ये पृथ्वी का धरातल है या फिर ये पृथ्वी की सतह है हमारे पृथ्वी के ऊपर बहुत सारी चट्टाने पड़ी हुई हैं बहुत सारे पहाड़ पड़े हुए हैं। ये ना तो जमीन से निकल कर बाहर आए हैं ना ही ये टूटे हैं। ये यहीं पर पृथ्वी पर पड़े हुए हैं। इन पड़े हुए चट्टानों में जो हमारे खनिज दिखते हैं। इनको हम लोग क्या बोलते हैं बेटा? इनको हम लोग धरातलीय चट्टान कहते हैं और धरातलीय चट्टानों के अंदर जो
11:30 सबसे महत्वपूर्ण खनिज हमें दिखता है उसे हम लोग बॉक्साइट बोल रहे हैं। फिर हमारे पास ना हमें दिखता है दोस्तों कि ये खनिज का चौथा रूप है और इसको हम लोग क्या बोलते हैं? इसको हम लोग बोलते हैं जलोढ़ जमाव के रूप में खनिज और ये जो हमारा जलोढ़ जमाव के रूप में हमें खनिज आता हुआ देखने को मिलता है। इसे आप क्या देखते हैं बेटा? हम यहां पर देखते हैं कि एक नदी हमें बहती हुई दिखती है। ठीक है? और यह नदी हमें यहां पर बहती हुई देखने को मिल रही है। और अगर आप लोग इस नदी को देखें ना तो इस नदी के अंदर हमें पानी देखने को मिलता है। यह क्या दिख रहा है बेटा? यह हमारी नदी पानी बहती हुई दिख रही है। बहुत बार जो हमारी नदी होती है, नदी जब बह रही होती है तो उस नदी के अंदर हमें एक मिट्टी दिखती है और अधिकतर जो मिट्टी नदी के साथ आती है, उसे जलोढ़ मिट्टी कहा जाता है। बहुत बार जो नदी बह रही है और नदी का जो ये पानी है, ये क्या करता है बेटा? हमें दिखता है कि
12:15 बहुत सारी जो हमारी खदानें होती हैं। खदान क्या है? कि जहां पर हमारे सोने की खदान होती है जहां सोना होता है या फिर जहां पर चांदी होता है वहां पर नदी का पानी पहुंच जाता है और नदी का पानी जब किसी खदान में पहुंचता है तो ये बहुत सारे जो सोने के भाग होते हैं या फिर जो चांदी के हिस्से होते हैं उनको अपने साथ ले जाता है तो ये हमारे पास चौथे प्रकार का क्या है दोस्तों कि एक तरीके से आप देखते हैं कि प्रारूप है जहां पर हमें क्या देखने को मिलता है जहां पर हमें खनिज देखने को मिलता है कि नदी का पानी बह रहा है नदी का पानी बहते हुए क्या हुआ जो खदान थी वहां से गुजरा और हमने क्या किया बेटा कि यहां से हमें इस प्रकार से कुछ हमारे जो महत्वपूर्ण और बहुत ही महंगे खनिज होते हैं वो मिल जाते हैं। है ना? जैसे हमारा सोना हुआ, चांदी हुआ, टिन हुआ, प्लैटिनम हुआ। ये सारे हमारे नदी की धारा के साथ बहते हुए हमारे खनिज है। हमारे पास खनिज का ये पांचवें
13:04 प्रकार का रूप है। और इसको अपन लोग क्या बोलते हैं बेटा? इसको हम लोग बोलते हैं महासागर के जल में। बहुत महत्वपूर्ण बिंदु है। ध्यान से देखिएगा। अब ये महासागर के जल के रूप में हमारा खनिज क्या है? इसको हम लोग यहां पर देखते हैं। तो अब तक हमने खनिजों के पांच प्रकार देखे हैं और खनिजों के इन पांच प्रकारों को हम लोग एक-एक कर कर आपके सामने यहां पर देख चुके हैं। हमने पहले प्रकार को देखा आगने रूपांतरित हमने अवसादी को देखा। फिर हमने आपके साथ यहां पर धरातलीय चट्टान को देखा और यह हमारा चौथे प्रकार का खनिज है जिसे हमने नदी की धारा के साथ ज्वालामुखी के साथ गुजरते हुए देखा। हमारे सामने यहां पर ना खनिज का एक और स्वरूप आ रहा है बेटा जिसे हम लोग बोलते हैं महासागर कि हमारे समुद्र के अंदर ही हमारे समुद्र के अंदर ही बहुत सारे खनिज देखने को मिलते हैं जो विरल हैं। विरल का मतलब क्या है कि ये ज्यादा आर्थिक महत्व के नहीं होते यानी कि थोड़े
13:51 सस्ते होते हैं। सर स्क्रीन पर ग्लिच चल रहा है। हां टीम बैठी है उसको सही कर रही है। आप इग्नोर करें। अरे भैया नहीं इग्नोर कर सकते। मालिक देखो यार पूरा ग्लिच कर रहा है ये हां बढ़ते हैं आगे है ना बढ़ते हैं आगे और अगर अब कुछ होगा तो उसको सही तरीके से सॉर्ट कर लेंगे आप घबराइएगा नहीं इस टेक्निकल एरर को हम लोग यहां पर सही तरीके से सही कर लेंगे घबराने की आवश्यकता नहीं है। हां। तो हम यहां पर देखते हैं दोस्तों कि जो हमारा यह समुद्र है ना इस समुद्र के अंदर भी हमारे कुछ खनिज हमें दिखते हैं जो विरल हैं। विरल का मतलब क्या है कि भैया ये हमें आर्थिक महत्व के नहीं दिखते हैं।
14:36 आर्थिक महत्व का मतलब क्या है कि एक तरीके से ना इनमें किसी प्रकार से सर हमारा ये जो स्क्रीन है ना बहुत बार ग्रीन हो रहा है। सर जी आप ऐसे हो जाते हो। अटक जाते हो। सर जी, आपकी आवाज नहीं आती है। मेरे लाल, पीले, नीले, गुलाबी, हरे, संतरी, नारंगी, कत्थई, जामिनी। अगर स्क्रीन हमारी ग्रीन हो रही है। अगर स्क्रीन थोड़ी सी ब्लैक हो रही है। टीम इस पर काम कर रही है। आपका उद्देश्य है पढ़ना। हमारा उद्देश्य है पढ़ाना। आप घबराइए नहीं। हम आपको रिपीट कर देंगे अगर नहीं समझ में आएगा। ठीक है बेटा? तो चलिए स्टार्ट करते हैं। हमारे पास ये क्या है बेटा? समुद्र का है ना? एक और प्रारूप है या फिर हम देखते हैं कि हमें अगर खनिजों को हासिल करना है तो खनिज ये पांचवी जगह से हमें हासिल किए जा सकते हैं जिसको हम
15:22 लोग बोल रहे हैं महासागर के समुद्र के पानी में बहुत सारे खनिज है जो विरल होते हैं यानी कि जो आर्थिक महत्व के नहीं होते जो बहुत सस्ते होते हैं जैसे नमक हुआ बहुत सस्ता है जैसे हमें दिखता है मैग्नीशियम हुआ और ब्रोमीन हुआ तो ये पांच जगह पांच हमारी जगह हैं जहां से हम लोग खनिजों को हासिल कर सकते हैं या फिर जहां पर हमें खनिजों का भंडार दिख रहा है। अब हमारे सामने एक बिंदु आता है कि खनिज के कितने प्रकार हैं? खनिज मिलते कहां-कहां पर हैं वो हमने देख लिए। पहला ज्वालामुखी से निकल रहा है। दूसरा चट्टान से अलग हो रहा है। तीसरा हमने देखा धरातल पे पड़े हुए हैं। चौथा हमने देखा कि नदी के साथ बहते हैं और पांचवा हमने देखा कि महासागर के अंदर मौजूद हैं। अब यहां से हम लोग क्या करते हैं बेटा? अब यहां से ना हम लोग आगे बढ़ते हैं और आगे बढ़ते हुए कुछ जबरदस्त हमारे जो कुछ क्वेश्चंस आएंगे कुछ क्वेश्चंस हम लोग आपके साथ करना चाहेंगे ताकि अच्छे तरीके
16:08 से हम लोग अपने इन सारी की सारी पॉइंट्स को समझ सकें ठीक है कहां गया कहां गया कहां गया कहां गया हां यहां तक के जो हमारे पॉइंट्स उनको हमने देखा अब पहले ना हम अपने बिंदुओं को देख लेते है अब तक हमने भंडार कहां पर है हमारे खनिजों का उनको एक-एक कर कर देखा हमारे जो ये खनिज है ये विशेषकर तीन प्रकार के हमें दिखते हैं कौन-कौन से प्रकार के होते हैं एक को बोलते हैं धात्विक खनिज, दूसरे हैं अधात्विक खनिज और तीसरे हैं ऊर्जा खनिज। अब एक-एक कर इनकी कैटेगरी कैसे बंट रही है? उसको हम लोग यहां पर समझना शुरू करते हैं। देखिए खनिज मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं। इसमें से जो सबसे पहले प्रकार का खनिज है उसे बोला जाता है धात्विक खनिज। धात्विक खनिज का मतलब क्या है बेटा? ऐसे हमारे खनिज जिसके अंदर हमें धातु देखने को मिलती है। मतलब क्या है? कि भाई ये ठोस होते हैं। ऐसे हमारे खनिज जो ठोस
16:55 होते हैं जिनको आप अगर आप पीटना चाहेंगे तो वो उनके अंदर से आपको आवाज वो ठोस होते हैं। बिल्कुल सॉलिड होते हैं। ठोस होते हैं। उनको हम लोग धात्विक खनिज कहते हैं। ऐसे ही हमारे पास एक खनिज है जो अधात्विक होते हैं। यानी कि ये क्या है बेटा? कि ये मुलायम होते हैं। अगर आप इनको तोड़ना चाहें तो टूट सकते हैं आसानी से और ये ठोस नहीं होते हैं। और एक कहलाते हैं हमारे ऊर्जा खरीज जिनसे हमें क्या मिलती है? जिससे हमें ऊर्जा या फिर जिनसे हम लोग बिजली को बनाते हैं अधिकतर। तो धात्विक खनिज जो ठोस है, अधात्विक खनिज जो ठोस नहीं है, ऊर्जा खनिज जिनसे हमें बिजली की प्राप्ति होती हुई देखने को मिल रही है। अब हम लोग यहां पर ध्यान से देखें कि जो हमारे पास ये धात्विक खनिज हमें देखने को मिला। इस धात्विक खनिज के अंदर ना हमारे को बहुत अच्छे तरीके से एक पॉइंट आता हुआ देखने को मिल लेता है। उसे हम लोग समझते
17:40 हैं क्या? कि यह जो हमारा धात्विक खनिज है। इसके अंदर हमें लोह धातु आता हुआ देखने को मिलता है। लोह धातु का मतलब क्या है बेटा? ऐसा हमारा खनिज जिसके अंदर लोहा होता है। है ना? है तो धातु मगर इसके अंदर लोहे की उपस्थिति होती है। इसे हम लोग धात्विक खनिज कहते हैं। जैसे हमारा लोह अयस्क हुआ। है ना? ऐसे हमारे धातु वाले खनिज जिनके अंदर हमें लोहा देखने को मिलता है। उसको हम लोग क्या बोलते हैं बेटा? उसको हम लोग एक तरीके से धात्विक खनिज का लोह रूप बोलते हैं या फिर लोह धातु बोलते हैं। जैसे हमारा लोहा हुआ खुद लोहे के अंदर लोहा तो होता है। ऐसे हमारा कोबाल्ट हुआ, मैंगनीज हुआ। इनको हम लोग लोह खनिज के नाम से जानते हैं। होते ये धातु हैं। मगर इनके अंदर आप देखते हैं दोस्तों कि लोहा होता हुआ देखने को मिलता है। फिर धात्विक खनिज का एक और रूप है जिसे हम लोग अलोह अलोह खनिज कहते हैं। नाम से ही
18:27 स्पष्ट है। अलोह का मतलब है कि है तो धातु मगर उसके अंदर लोहा नहीं होता। जैसे तांबा है ठोस मगर लोहा नहीं है। ऐसे ही बॉक्साइट है ठोस मगर उसमें लोहा नहीं है। अधात्विक खनिज को अगर हम देखें तो ऐसे हमारे खनिज जिनको हम लोग क्या कर सकते हैं दोस्तों कि जिनको हम लोग तोड़ सकते हैं। जैसे हमारा नमक हुआ, अभ्रक हुआ। अगर आप इनको तोड़ना चाहें इनको आसानी से तोड़ा जा सकता है। नमक है। आप इसको पीस कर तोड़ सकते हैं आराम से। है ना? खनिज के अंदर ही ये जो हमारा धात्विक खनिज है, इसके अंदर एक और हमारा भाग है जिसे हम बोलते हैं बहुमूल्य खनिज। कि ये ठोस होते हैं हमारे। मगर ये बहुत ज्यादा कीमती हैं। जैसे सोना हुआ, चांदी हुआ, प्लैटिनम हुआ। इनकी बहुत ज्यादा हमें डिमांड देखने को मिलती है। ऊर्जा खनिज का मतलब क्या है बेटा कि जिनसे हमें ऊर्जा हासिल होती है। जैसे कोयला हुआ, पेट्रोलियम हुआ या फिर प्राकृतिक गैस। तो अब तक हमने क्या पढ़ा है? मैं
19:13 इसको एक बार जल्दी से आपके सामने यहां पर रखता हूं ताकि कोई दुविधा नहीं रहे। खनिजों को हमने तीन भागों में बंटते हुए देखा। सबसे पहले हमारा धात्विक खनिज। धात्विक खनिज हमारे तीन भागों में बंट गया। लोह धातु जिसके अंदर लोहा होता है और लोह धातु जिसके अंदर लोहा नहीं होता है। बहुमूल्य खनिज जो है तो ठोस मगर जो कीमती होते हैं। धात्विक खनिज का मतलब है कि जो ठोस नहीं है जिनको आसानी से तोड़ा जा सकता है और ऊर्जा खनिज जिनसे हमें ऊर्जा हासिल होती है। ये बिंदुओं को हमने एक-एक कर कर आपके सामने देख लिया। अब हमारे सामने एक प्रश्न आता है और इस बिंदु को हम लोग बहुत अच्छे तरीके से देखते हैं कि हमारे पास यह जो हमारा धात्विक खनिज है। इसको एक-एक कर कर हम लोग आपके सामने यहां पर रखना शुरू करते हैं बच्चे। ठीक है? ध्यान से देखा जाए। है ना? इसको हम लोग अगर ध्यान से देखें तो इसको हम लोग देखते हैं। क्या देखते हैं? हमारे सामने एक शब्द आया है।
19:59 क्या बोला जा रहा है बेटा? इस शब्द को हम लोग बुला रहे हैं धात्विक खनिज। यानी कि एक हमारा खनिज है जो धातु वाला है यानी कि ये ठोस है। और इसको हम लोग क्या बोल रहे हैं बेटा? इसको हम लोग बोल रहे हैं लोह अयस्क। अब सबसे पहले आप सभी के दिमाग में यह सवाल आ सकता है कि सर ये लोह अयस्क क्या होता है? या फिर लोह अयस्क का तात्पर्य क्या है? इसको हम लोग समझने की कोशिश करते हैं कि लोह अयस्क का मतलब क्या है? ये हम समझते हैं। देखो जब हमारे पास क्या है बेटा कि हमारे पास यहां पर तीन चित्र रखे गए हैं। ये क्या है बेटा? ये कहलाती है लोहे की खदान। है ना? क्या कहलाती है? लोहे की खदान। कि हम लोग लोहे को जमीन की गहराई से निकालते हैं। जब हम जमीन की गहराई में जाते हैं। जब जमीन के गर्भ में जाते हैं जिसे हम खदान कहते हैं तो जो चीज हमें मिलती है ना वो ये होती है। ये क्या है बेटा? ये पत्थर हमें दिख
20:46 रहे हैं। और इसी को हम लोग क्या बोलते हैं बेटा? इसी को हम लोग लोह अयस्क बोलते हैं। यही क्या कहलाता है? यही हमारा लोह अयस्क है। लोह अयस्क का मतलब क्या हुआ कि जब हम जमीन से निकाल रहे हैं। उसके अंदर जो निकलने वाला हमारा पदार्थ है इसे हम लोह अयस्क कहते हैं। हम इससे क्या करेंगे? हम इससे लोहा अलग कर लेंगे। और जो लोहे की अशुद्धियां होती हैं। लोहे की अशुद्धियां मतलब कि इसके अंदर धूल होगी। इसके अंदर हमें मिट्टी देखने को मिलेगी। इसके अंदर हमें कुछ और तत्व देखने को मिलेंगे। उसे अयस्क कहा जाता है। तो जमीन की गहराई से जो टुकड़े हमें हासिल होते हैं, इसे हम लोहा नहीं कहेंगे। लोहा तो ऐसा होता है ना। तो हम जमीन की जब खुदाई करते हैं और इसके बाद जो हमें तत्व हासिल होते हुए दिखते हैं, इसे हम लोहा अयस्क कहते हैं। हम लोहे को इससे अलग कर लेते हैं और लोहे की अशुद्धि को ही हम लोग अयस्क कहते हैं। और फिर हमारा ये शुद्ध पार्ट लोहा कहलाता
21:32 है। है ना? लोहा एक कैसा है बेटा कि ये आधारभूत उद्योग है कि अपने आसपास आप कोई भी सामान देखें वो लोहे की मदद से ही बना है। जैसे मेरा ये चश्मा हुआ है इसमें भी लोहा लगा है। मेरे इस कलम में भी लोहा लगा है। मेरी स्क्रीन पे भी लोहा लगा है। आपके फोन में भी लोहा लगा है। लोहा एक ऐसा चीज है जो हर जगह और हर संसाधन में यूज़ किया जाता है। लोहे से ही हम लोग दूसरे कारखानों की मशीनों को बनाते हैं। तो लोहा लोहा क्या है दोस्तों कि एक आधारभूत खनिज है। ये बाकी सारे खनिजों को आगे बढ़ाता है। लोहा जिस देश में जितना ज्यादा होता है वो देश उतना ही आगे बढ़ता है। और लोहा भारत के अंदर बड़ी संख्या के अंदर मौजूद है। अब हम ना यहां पर हमारा जो यह लोहा हमें आता हुआ देखने को मिलता है, इसके अलग-अलग जो हमारे प्रतिरूप हैं, लोहे के हमारे पास दो रूप दिखते हैं, उनको समझते हैं। देखो हमारे पास सबसे अच्छे प्रकार की जो क्वालिटी का लोहा होता है, उसे हम लोग
22:17 क्या बोलते हैं? उसे हम लोग मैग्नेटाइट लोहा कहते हैं। यह आपके सामने लोह अयस्क है। इसमें हमें क्या देखने को मिलता है दोस्तों? लोग इसके अंदर 70% यह जो हमारा मैग्नेटाइट लोह अयस्क होता है इसमें 70% तो लोहा है और 30% इसके अंदर अयस्क देखने को मिलता है। यह सबसे अच्छी क्वालिटी का लोहा माना जाता है। ये एकदम से चुंबक के साथ जुड़ जाता है और इसके जरिए हम लोग बिजली को बनाते हैं। तो यहां पर हमने लोहे का जो सबसे पहला रूप है जिसे हमने मैग्नेटाइट लोहा कहा वो देखा। फिर हमारे पास लोहे का एक दूसरा रूप है जिसे हम लोग हेमेटाइट कहते हैं। सर यहां पर ये जो नाम आपने बताया ना हेमा सर। मुझे शर्म आ गई सर। क्लास में पढ़ती है सर। मेरी क्लास में ही पढ़ती है सर। आगे वाली सीट पर बैठती है सर। जब भी ये हेमेटाइट वर्ड आता है सर मेरे दिमाग में हेमा का जिक्र आ
23:03 जाता है सर। मैं ना हेमा के बारे में ही सोचता हूं सर। मैं सोते टाइम पर भी, जागते टाइम पर भी, खाते टाइम पर भी, नहाते टाइम पर भी, हेमा के बारे में ही सोचता हूं। अरे मेरे भाई वो वाली हेमा नहीं है ये। ये हेमाटाइट है। और हेमाटाइट के बारे में आप क्या देखते हैं दोस्तों? कि जो हमारा हेमेटाइट लोहा है इसके अंदर 50 से 60% हमें लोहा दिखता है और तकरीबन 40% के आसपास हमें अशुद्धि देखने को मिलती है। ये रहा हमारा हेमेटाइट लोहा। और हेमेटाइट लोहे को भी हम क्या देखते हैं दोस्तों? कि फैक्ट्रियों के अंदर मुख्यत काम में लाया जाता है। है ना? अब एक-एक कर हम लोग कुछ क्वेश्चंस को आपके सामने देखेंगे और आपसे चाहेंगे कि आप लोग अपने आंसर्स को एक-एक कर हमारे साथ बता दें। लेकिन अभी ना हमने यहां पर लोहे की जो हमारी अलग-अलग प्रकार रही हैं हेमेटाइट और मैग्नेटाइट उनको डिस्कस किया है। अब हमारे भारत के अंदर ये
23:48 जो हमारा लोहा हमें निकलता हुआ दिख रहा है इस लोहे की ना हमें मुख्य प्रकार से क्या देखने को मिलती हैं बेटा? हमें बेल्ट देखने को मिलती हैं। सर बेल्ट तो पेंट में लगाते हैं। बेटा इसे हम लोग हिंदी के अंदर बेल्ट कह रहे हैं। और इसी के साथ-साथ ना अंग्रेजी में इसे बेल्ट कहते हैं। हिंदी के अंदर इसे पेटी कहते हैं। सर पेटी में तो सेब आते हैं। सर कभी आप बेल्ट की बात कर रहे हो। कभी आप पेटी की बात कर रहे हो। सही-सही डिसाइड कर लो भैया क्या लगाना चाह रहे हो। तो यहां पर इसको डिस्कस करते हैं कि ये बेल्ट या फिर पेटी का मतलब क्या है? आप लोगों ने शायद इस शब्द को जरूर सुना होगा। हिंदी बेल्ट वाले राज्य या फिर हिंदी पेटी या फिर हिंदी पट्टी वाले राज्य। ऐसे हमारे भारत के इलाके जहां पर हिंदी बोली जाती है। जैसे यूपी हुआ, बिहार हुआ, मध्य प्रदेश हुआ, दिल्ली हुआ। है ना?
24:35 पंजाब के कुछ इलाके हुए। ऐसे ही हमें दिखता है दोस्तों कि हमारा झारखंड का कुछ भूभाग हुआ। ये यहां पर आप देखें बेटा हमें क्या देखने को मिला? यहां पर हमारे पास एक से ज्यादा बहुत सारे इलाके हैं। जब भी हम लोग क्या करते हैं? एक जगह पर बहुत सारे इलाकों को बताते हैं। जब भी हम एक जगह पर बहुत सारे इलाकों को बताते हैं तो उसके लिए हम लोग पेटी शब्द या फिर बेल्ट शब्द को यूज़ करते हैं। तो भारत में ना हमें देखने को मिलता है कि हमारे यहां पर चार ऐसी जगह हैं जहां पर एक साथ हमारे खनिज या फिर लोहा निकलता है। एक है उड़ीसा और झारखंड बेल्ट। दो राज्य साथ हैं। तो इसीलिए बेल्ट या फिर पेटी शब्द यूज़ किया। हमें देखने को मिलता है उड़ीसा और झारखंड के अंदर हमारे ये खनिज है और यह दिखता है दोस्तों कि उड़ीसा के जो हमारा मयूरभंज इलाका है वहां सर और वहां की जो बादाम की पहाड़ियां हैं उड़ीसा के अंदर जो हमारी
25:21 बादाम की पहाड़ियां हैं वहां से निकलता हुआ दिखता है और यहां से निकलने वाला जो हमारा ये लोहा है इसे हम लोग क्या बोलते हैं बेटा इसे हम लोग हेमेटाइट लोहा के नाम से जानते हैं। ऐसे ही हमारा जो झारखंड है झारखंड के अंदर जो हमारी सिंभू जमीन है सिंभू का जो जिला है वहां से भी हेमेटाइट लोहा निकलता है। तो ये भारत का सबसे पहले प्रकार का खनिज निकलने वाला या फिर लोहे की निकलने वाली जगह है जिसे हमने हेमेटाइट लोहे के नाम से जाना है जो उड़ीसा और झारखंड से निकलता है। भारत के अंदर ये दूसरी जगह है। भारत के अंदर ये हमारी दूसरी बेल्ट है या फिर भारत के अंदर ये हमारी दूसरी पेटी है जहां से हम लोग अपने खनिज को निकलते हुए देखते हैं जिसको हम लोग लोह लोहा कहते हैं। ये भी दो इलाकों से निकल रहा है। कौन सा? छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र। है ना? तो ये हमारे छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के भूभाग से निकलता है। और इसको बोलते हैं क्या बेटा? इसको बोलते हैं
26:06 दुर्ग बस्तर चंद्रपुर बेल्ट। छत्तीसगढ़ के अंदर जो बस्तर जिला है वहां पर निकलता है लोहा और वहां की जो बलदेलिया नामक पहाड़ियां हैं ना वहां से निकलता है और यहां पर भी हमें हेमेटाइट लोहा ही निकलता हुआ दिखता है। उसी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में ना तकरीबन 14 हमारी क्या है बेटा कि खदानें हैं। 14 हमारी ऐसी जगह हैं जहां से हम लोग हेमेटाइट लोहा को निकाल लेते हैं। और ये जो हमारा छत्तीसगढ़ लोहा है। छत्तीसगढ़ से जो हमारा ये निकलता है हेमेटाइट लोहा इसको हम लोग कहां करते हैं? इसको हम लोग आंध्र प्रदेश ले जाते हैं। इसको कहां लेके जाते हैं? इसको हम लोग आंध्र प्रदेश का जो हमारा विशाखापत्तनम बंदरगाह है वहां लेके जाते हैं। और फिर विशाखापत्तनम से इसको कहां भेजते हैं? इसको हम लोग जापान भेजते हैं, कोरिया भेजते हैं। वहां की जो गाड़ियां बनाने वाली कंपनियां हैं, वो इस लोहे को लेती हैं। हमारे प्यारे भारत के अंदर ये दूसरे प्रकार की जगह है जहां पर हम लोग लोहे को
26:52 निकलते हुए देखते हैं। ये दुर्ग जो दिखता है दोस्तों कि हमारे दुर्ग वस्त्र छत्तीसगढ़ और जो हमारा महाराष्ट्र वाला इलाका है वहां से होता है। यहां से निकलने वाला जो लोहा है उसे विश्व विशाखापत्तनम से हम लोग जापान या फिर कोरिया के अंदर भेज देते हैं। हमारे भारत के अंदर यह तीसरी जगह है जहां से हमें लोहा निकलता हुआ दिखता है और इसको बोला जाता है बिल्लाली बिल्लारी चित्रदुर्ग चिकमंगलूर बेल्ट बड़ा ही विचित्र सा नाम आपको सुनने में लग रहा होगा क्योंकि ये कर्नाटकी नाम है क्योंकि ये कन्नड़ भाषा का हमारा शब्द है हम देखते हैं दोस्तों कि हमारे पास है बिल्लारी चित्रदुर्ग चिकमंगलूर बेल्ट और विशेषकर ये हमारा जो कर्नाटक का इलाका है हमारा जो कर्नाटक का राज्य है वहां पर देखने को मिलता है कर्नाटक क्या है मेरे भाई ये रहा है ना यह भारत का तीसरा इलाका है जहां पर हमें लोहा निकलता हुआ दिखता है और यह पश्चिम घाट ये पश्चिम दिशा है बेटा पश्चिम की तरफ ही ये निकलता हुआ हमें
27:39 देखने को मिलता है। और यहां से जो निकलने वाला लोहा है ना उसे हम लोग क्या करते हैं? सरली बनाकर। सरली का मतलब क्या है? कि इसको एक तरीके से तरल रूप में क्या किया जाता है बेटा? कि इसको हम लोग द्रव्य रूप में इसका क्या किया जाता है? इसको लिक्विड फॉर्म में पिघलाकर हम लोग क्या करते हैं? मैगलोर भेजते हैं और फिर मैगलोर से इसको यूरोपीय देशों में भेजा जाता है। भारत के अंदर यह हमारा चौथे प्रकार का क्या है बेटा? एक तरीके से कोयले का हमारे पास यह लोहे का प्रतिरूप है और जिसको हम लोग किस नाम से जान रहे हैं? यह कहलाता है महाराष्ट्र गोवा बेल्ट। भारत के अंदर अगर सबसे गंदे प्रकार का, भारत के अंदर अगर सबसे लप्पू प्रकार का, भारत के अंदर अगर सबसे बेकार प्रकार का लोहा कहीं दिखता है तो वो इसी इलाके के अंदर देखने को मिलता है। यह भारत का गोवा और महाराष्ट्र राज्यों से निकलने वाला दोस्तों हमारा लोहा है जो रत्नागिरी जिले से निकलता है महाराष्ट्र का। इस लोहे की जो क्वालिटी है
28:26 वो बहुत ज्यादा खराब है क्योंकि इसके अंदर अयस्क ज्यादा होते हैं। इसके अंदर अशुद्धियां ज्यादा होती हैं। इसके अंदर हमें लोहा बहुत कम देखने को मिलता है। और इसको भी हम लोग क्या करते हैं? इसको भी हम लोग दूसरे देशों में भेज देते हैं। गोवा के मार मंगाओ बंदरगाह से इसको दूसरे देशों के अंदर भेजा जाता है। अब कुछ क्वेश्चंस आपके साथ करेंगे। आपको बताना होगा कि यहां पर कौन सा आंसर बिल्कुल सही है। कौन सा हमारा लोहा है जिसमें 50 से 60 हमें लोहा का या फिर लोहे का तत्व देखने को मिलता है। जल्दी से बताइएगा। बहुत ही बेहतरीन सवाल है और बहुत अच्छे तरीके से हम लोग आपसे अपने इन आंसर्स को जानना चाहेंगे। जल्दी बताइएगा बेटा। हां जल्दी बताइएगा बेटा। बहुत अच्छा सवाल है और बहुत ही बेहतरीन तरीके से। क्या बात है यार। देखो हमारे प्यारे बच्चे
29:11 ना क्लास के दौरान भी क्या करते रहते हैं? आपस में बातचीत करते ही रहते हैं। एक तरीके से वो एक दूसरे की फिक्र करते हैं। है ना? ये बात मुझे आप लोगों की बड़ी प्यारी लगती है। है ना? टीचर पढ़ा रहा है पूरी मेहनत के साथ। हमारे बच्चे अपनी पूरी मेहनत के साथ बात करते रहते हैं। तुमने क्या नाम बताया था अपना? उसने नाम नहीं बताया। तुमने पूछा है उससे। तुम कहां रहती हो? उसने बताया नहीं है। तुम पूछ रहे हो उससे। तुम्हें पढ़ाई करना पसंद है। वो पढ़ना चाह रही है लेकिन तुम उसके साथ बातें करना चाह रही हो। नाठी बॉय नाठी बॉय। ऐसा नहीं चलेगा। है ना? आइंदा नहीं करना इसे। तो यहां पर हमने देखा दोस्तों कि वो हमारा कौन सा लोहा अयस्क है जिसके अंदर 50 से 60% हमारे पास लोहा होता है उसे अपन लोग हेमेटाइट कहते हैं और ऑप्शन बी अपन का बिल्कुल सही है। लगभग ओह हो 95% दोस्तों ने बिल्कुल सही आंसर
29:58 हमारे सामने रख दिया है। बहुत बढ़िया। अब एक सवाल यहां से हमने देख लिया। है ना? अब क्या करते हैं बेटा कि अब हम लोग आपके साथ अपने कुछ और बिंदुओं को एक-एक कर डिस्कस करना शुरू करेंगे और यहां से जो हमारा ये पॉइंट आ रहा है इसको हम लोग समझ लेंगे चलिए। पूछा जा रहा है कि भारत का वो कौन सा हमारा लोहा है जिसके अंदर 70% लोहा होता है और बाकी 30% अयस्क होता है? चार ऑप्शंस आपके सामने। जल्दी से आपको अपने सही आंसर को बताना है। जल्दी से बताइएगा बेटा। बहुत प्यारा सवाल है। पेपर के अंदर आता रहता है और बहुत अच्छी संभावना रखता है आपके पेपर के अंदर आने की। सर यूपी बोर्ड की परीक्षा कब से होंगी? एक बच्चा पूछ रहा है। यूपी बोर्ड की परीक्षा विशेषकर फरवरी से होती हैं मेरे बच्चे। है ना? और सबसे पहले बिहार बोर्ड की होती हैं। फरवरी के एकदम स्टार्टिंग में ही 10 फरवरी के आसपास
30:45 स्टार्ट हो जाता है बिहार बोर्ड का और फिर उसके बाद फरवरी के आखिरी समय में मार्च के पहले हफ्ते में हमें यूपी की क्लासेस और यूपी का पेपर हो जाता है। सीबीएसई वाले जो हमारे बच्चे हैं उनका पेपर हो जाता है। फरवरी और मार्च के स्टार्टिंग। जैसे-जैसे यूपी का होता है, वैसे-वैसे सीबीएसई का भी होता है। सबसे पहले बिहार वाले बच्चों की कहानी स्टार्ट होती है। तो अगर हम देखें कि जो हमारा लोह अयस्क है, ऐसा लोह अयस्क जिसमें 70% लोहा होता है, उसे हम लोग मैग्नेटाइट लोहा बोलते हैं। ऑप्शन ए अपन का बिल्कुल सही है। 85% दोस्तों ने बिल्कुल सही आंसर दिया। तो अब तक तो हमने यहां पर ना आपके साथ जो हमारे अलग-अलग प्रकार के क्या रहे हैं बेटा? हमारे अलग-अलग प्रकार के एक तरीके से खनिज रहे हैं। जिनको हम लोग इस्तेमाल करते हैं वो देख लिए। है ना? अब आगे बढ़ते हैं और आगे बढ़ते हुए ना अब हमने लोहे को देखा, लोहा कहां मिलता है वो देखा। लोहे के अलग-अलग
31:31 प्रकारों को देखा और इसकी पूरी पृष्ठभूमि को हम लोग समझ चुके हैं। बढ़ रहे हैं आगे। ठीक है? अभी के समय कोई भाई और बहन मिलकर एक WhatsApp ग्रुप बनाओ जिसमें हम लोग सिर्फ नोट्स की बातें करेंगे। सच में पढ़ाई के उद्देश्य से WhatsApp ग्रुप बना रहा है। चलिए बढ़ते हैं आगे। हमारे सामने यहां पर एक पॉइंट हमें आता हुआ देखने को मिल रहा है जिसे हम लोग बोल रहे हैं मैंगनीज। और ये जो मैंगनीज अपन को देखने को मिलता है ना इसका महत्वपूर्ण बिंदु क्या है? इसको हम लोग एक-एक कर कर आपके सामने यहां पर समझने की कोशिश करते हैं। तो हमने लोहे को देखा। लोहे के हर एक बिंदु को समझा। लोहा हमें कहां देखने को मिलता है? लोहे के दो प्रकार मैग्नेटाइट और हेमेटाइट को हमने पढ़ा। अब हम लोग यहां से अपनी कहानी को आगे बढ़ाना शुरू कर रहे हैं। हमारे सामने एक शब्द है जिसे हम लोग मैंगनीज कह रहे हैं। दिखने में ऐसा होता
32:16 है दोस्तों। ये रहा हमारा मैंगनीज़। बहुत खूबसूरत है। है ना? बहुत ज्यादा ठोस है। मैंगनीज़ की अगर आप बात करते हैं तो इसका विशेषकर जो यूज़ किया जाता है वो स्टील को आप देखते हैं दोस्तों कि पिघलाने में यानी कि जो हमारा स्टील है आयरन होता है उसके पिघलाने के लिए भी हम लोग मैंगनीज़ का यूज़ करते हैं और मैंगनीज से और चीजें भी बनती हैं। जैसे जो ब्लीचिंग पाउडर होता है। सर ब्लीचिंग पाउडर कहां यूज़ होता है? कपड़े को साफ करने के लिए जब कपड़ों पे गंदगी लग जाती है उसको धोने के लिए। जो हमारे कीटनाशक जो हमारे खाद होती है उसके अंदर इसका यूज किया जाता है। पेंट जो आप घर के अंदर करते हैं जिसे सफेदी बोला जाता है। जब दिवाली होली ईद आती है जब घर के अंदर हम पुताई करते हैं वो जो पेंट होता है ना वो हमारे मैंगनीज से ही बना होता है। और सबसे ज्यादा जो मैंगनीज है ना वो भारत में उड़ीसा राज्य से आ रहा है। भारत के अंदर हमारे पास एक और प्रकार का हमारा खनिज है जिसे हम लोग तांबा बोलते हैं। और तांबे की कहानी क्या है? या फिर तांबा कहां-कहां से
33:03 निकल रहा है? उसकी क्या-क्या पृष्ठभूमि इसको समझते हैं। तांबा एक बहुत ही महत्वपूर्ण हमारा खनिज हमें देखने को मिलता है। बहुत महत्वपूर्ण ये हमारा खनिज है। तांबे से हम लोग अलग-अलग काम करते हैं। दिखने में कुछ ऐसा होता है बेटा तांबा जब निकलता है। तांबे से बिजली के तार बनाए जाते हैं और तांबे का प्रयोग हम लोग इलेक्ट्रॉनिक और रसायन उद्योग यानी कि इसका जो हमारे इलेक्ट्रॉनिक अप्लायंसेस होते हैं, जो बिजली से चलने वाले हमारे यंत्र होते हैं, उसके अंदर हम लोग क्या करते हैं? तांबे का प्रयोग करते हैं या फिर तांबे के सामान को यूज़ किया जाता है। हमारा जो मध्य प्रदेश राज्य है भारत में वहां से देश का 52% मध्य प्रदेश भारत का एक ऐसा राज्य है जहां से देश का सबसे ज्यादा 52% तांबा निकलता है और उसके बाद हमारे राजस्थान से लगभग देश का 48% तांबा निकलता हुआ दिखता है। तांबा दिखने में ऐसा है इससे बर्तन बनते हैं। इससे तार वार बनाए जाते हैं बिजली के। उनको हमने समझा।
33:49 हमारे प्यारे भारत में एक और प्रकार का खनिज है जिसे हम लोग बोलते हैं बॉक्साइट। बॉक्साइट से एलुमिनियम हासिल होता है। तो ध्यान से समझते हैं। ये है क्या? बच्चे इसके अंदर फंस जाते हैं तो आपको नहीं समझना आपको नहीं फंसना है। हमने क्या किया बेटा कि हमने ना ये खनिज हासिल किया जिसे हम लोग क्या बोल रहे हैं? जिसको हम लोग बोलते हैं बॉक्साइट। और ये बॉक्साइट हमें कहां से मिला? ये हमें धरातलीय चट्टान से मिला। ये हमारा बॉक्साइट हमें देखने को मिला। हमने क्या किया कि बॉक्साइट को ना शुद्ध किया। हमने बॉक्साइट से उसके अयस्क को अलग किया। हमने बॉक्साइट को अच्छा बनाने की कोशिश की। और जब हमने बॉक्साइट से अशुद्धियों को निकाला तो उसकी जो अशुद्धियां थी वो और अच्छी एक खनिज में बदल गई जिसको हम लोग एलुमिनियम बोलते हैं। हमारे पास बॉक्साइट है। हम बॉक्साइट को शुद्ध करते हैं। बॉक्साइट से उसके अयस्क को निकालते हैं। उसकी अशुद्धियों को
34:35 निकालते हैं। तो भैया बॉक्साइट अपने साथ जो अपनी अशुद्धियों को छोड़ता है तो उसमें एक नया खनिज बन जाता है जिसे हम लोग एलुमिनियम बोल रहे हैं। तो बॉक्साइट से अपन को एलुमिनियम हासिल होता हुआ देखने को मिला। एलुमिनियम जो है ना बेटा ये बहुत ही महत्वपूर्ण हमारा खनिज है। यह लोहे की तरह ही मजबूत होता है। मगर यह लोहे की तरह भारी नहीं बल्कि हल्का होता है वजन में और इसका बड़ी संख्या में यूज़ होता है। ये हमारा एलुमिनियम है। इससे हमारी एलुमिनियम की शीट बनती है। इसका यूज़ अलग-अलग जगहों पर किया जाता है। अगर हम बॉक्साइट की बात करें भारत के अंदर ये जो हमारा बॉक्साइट हमें देखने को मिल रहा है। इस बॉक्साइट की अगर हम बात करते हैं तो ये हमारे अमरकंटक जो है और बिलासपुर यानी कि हमारा एमपी और छत्तीसगढ़ का जो हमारा इलाका है वहां पर देखने को मिलता है। मगर सबसे ज्यादा जो हमारा बॉक्साइट निकलता है ये हमारे उड़ीसा राज्य में निकलता हुआ दिखता है और देश के
35:21 अंदर लगभग 45% के करीब जो बॉक्साइट है ये उड़ीसा से निकलता हुआ दिखता है और उड़ीसा के पंचपथमाली जो हमारा इलाका है वहां से हमें यह आता हुआ देखने को मिलता है। हमारे पास एक और प्रकार का खनिज है जिसे हम लोग अभ्रक कहते हैं। अब अभ्रक को अंग्रेजी में क्या बोला जाता है? अभ्रक को अंग्रेजी में हम लोग बोलते हैं बेटा क्या? इसको अंग्रेजी के अंदर बोला जाता है माइका। क्या बोला जाता है बेटा? इसको अंग्रेजी के अंदर हम लोग माइका बोलते हैं। है ना सर? ये कैसा वर्ड यूज़ कर दिया आपने? माइका। सर मुझे शर्म आ जाती है। अरे ये वो वाला माइका नहीं है यार। है ना? तुम्हारा तो ज़हन ही वहां जाता है भाई। तुम तो वहीं पहुंच जाते हो। माइका को हम लोग हिंदी के अंदर अभ्रक कहते हैं। और ये कैसा हमारा खनिज है भैया? ये जो हमारा खनिज है। ये इस
36:07 प्रकार का खनिज है जो क्या है बेटा कि एक प्रकार से हमारा अधात्विक खनिज है। यानी कि इसको हम लोग क्या कर सकते हैं? इसको हम लोग आसानी से तोड़ सकते हैं या फिर मोड़ सकते हैं। और अगर हम लोग बात करते हैं किसके बारे में कि जो हमारा ये अभरक हमारा खनिज है ना इसको एक ही जगह पर इसकी बहुत सारी तय लगाई जा सकती है। जैसे अगर आपके पास अभरक है तो हम इसको फोल्ड कर सकते हैं। अगर आप में से बहुत सारे बच्चों ने पतंग को उड़ाया होगा तो जब पतंग को उड़ाते हैं तो उसको उसकी जो सद्दी होती है उसको लपेटा जाता है। ऐसे ही जो हमारा क्या है बेटा कि ऐसे ही जो हमारा ये अभरक है इसको हम फोल्ड कर सकते हैं। है ना? इसकी बहुत सारी तय लगाई जा सकती है। एक ही जगह पर इसको बहुत बार हजारों जो उसकी लेयर्स हैं वो एक साथ जोड़ी जा सकती हैं। अभ्रक ऐसा होता है। इसका यूज़ कहां होता है? जैसे दो बिजली के बहुत बड़े-बड़े तार हैं। बिजली के दो बड़े-बड़े तार हैं। इन दो बड़े-बड़े तारों को जोड़ने के लिए जो तत्व हम यूज़
36:54 करते हैं ना, यही है अपना अभ्रक। हाई वोल्टेज जो हमारे तार होते हैं, उनको जोड़ने के लिए हम लोग क्या करते हैं? अभ्रक का यूज़ करते हैं। और बहुत सारे इलेक्ट्रॉनिक अप्लायंसेस के अंदर भी बहुत सारे बिजली के यंत्रों में भी क्या किया जाता है? अभक का यूज़ होता है। अभ्रक भारत के अंदर छोटा नागपुर का जो हमारा इलाका है विशेषकर जो झारखंड हमारा इलाका है वहां पर ज्यादा देखने को मिलता है। और अभ्रक का एक बड़ा उत्पादन राजस्थान में भी है और उसी के साथ-साथ हमारे आंध्र प्रदेश के अंदर भी अपन को होता हुआ देखने को मिल जाता है। अब हम लोग यहां से हमारे जो ये भिन्न-भिन्न प्रकार के खनिज रहे हैं उनको तो समझ लिए हैं। अब इन खनिजों से ना एक बड़ी परेशानी होती है जिसको हम लोग किस नाम से जान रहे हैं बेटा? जिसको हम लोग यहां पर जानते हैं खनन के दुष्प्रभाव के बारे में कि जब हम लोग खुदाई करते हैं और जब हम अपने इस खनन के जरिए क्या करते हैं? खनिजों को जमीन के गर्भ से निकालते हैं तो उसमें बहुत सारी परेशानियां हैं। यहां पर आपके सामने एक
37:40 चित्र पेश किया गया है और ये चित्र अगर आप ध्यान से देखें तो आपको क्या देखने को मिलता है बेटा? यहां पर अगर आप देखें तो ये एक तरीके से हमारी खनन है। खनन का मतलब क्या है? खनन खनन खाए खनन खाए खनन खा। अब एक खनन का मतलब है कि यहां पर हम देखते हैं कि हम जमीन की गहराई में जा रहे हैं और जमीन की गहराई से जाकर क्या कर रहे हैं? एक तरीके से अपने जो संसाधन है उनको निकाल रहे हैं। हम अपने कोयले को, लोहे को निकाल रहे हैं। जो हमारे मजदूर इसमें जाते हैं ना उनके सामने बहुत सारी परेशानियां है भाई। बहुत सारी परेशानियां है। जैसे उनको बहुत ही कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। सबसे पहली बात है कि यहां पर नए सर्गित रोशनी है। रोशनी क्या यहां बहुत ज्यादा है। आपको दिख ही नहीं रहा। बहुत लिमिटेड रोशनी इसके अंदर हमें देखने को मिलती है। इसके अंदर हमें बहुत कम रोशनी देखने को मिलती है। हमेशा से ये डर बना रहता है कि जो ऊपर का हमारा ये फ्लोर है। है ये जो ऊपर की हमारी ये बिल्डिंग है ये नीचे गिर सकती है। अचानक से कभी सारी
38:27 ईंटें नीचे आ सकती हैं। सारे हमारे मजदूर इसके अंदर मर सकते हैं। डर है कि जब ये आगे की तरफ बढ़ रही हैं तो आगे पानी आ सकता है। अचानक से पानी भर जाए। ये सब डूब सकते हैं। अचानक से इसके अंदर आग लग सकती है। है ना? और इससे भी हमारे जो मजदूर हैं उनके जीवन पर खतरा बना रहता है। तो बहुत खतरा वाला ये काम है। जहां पर हमारी ये खनन होता है। जहां पर हम लोग अपने इन खनिजों को निकालते हैं। उन इलाकों में धूल होती रहती है बहुत। और जो खुदाई कर कर हमारी कीचड़ निकलती है या फिर जो हमारा मलबा निकलता है जिसे हम लोग सरली बोलते हैं अगर हम इसको सड़कों पर या फिर खेतों में डाल देते हैं तो इससे खेत और सड़क नुकसान जाते हैं। जहां पर हमारी ये खदानें होती हैं वहां पर बहुत ज्यादा धूल होती है और जो लोग कपड़े बाहर सुखाते हैं उनके कपड़े बहुत ज्यादा गंदे हो जाते हैं और उन लोगों को ना सांस की बीमारी बहुत ज्यादा होती है। है ना? जिन इलाकों में आप देखते हैं दोस्तों कि बहुत धूल उड़ती है यहां पर खनन होता रहता है उन लोगों को सांस संबंधी
39:14 बीमारी होती है। अब ये सारी परेशानियां तो हमने देख ली लेकिन हमारे ये जो खनिज हमें देखने को मिलते हैं ना इन खनिजों को हमें संरक्षण देने की जरूरत है। संरक्षण का मतलब क्या है बेटा? कि जितने भी हमारे ये खनिज हैं हमें इनका बचाव करना जरूरी है। क्यों बचाव करना जरूरी है? कि जितने भी हमारे ये खनिज हैं आज नहीं बने हैं। आज से हजारों साल पहले आज से करोड़ों साल पहले आप देखते हैं दोस्तों उनको निर्मित किया गया है। तो जितने भी खनिज हमारे आसपास आज मौजूद हैं इन सारे खनिजों को बनने में करोड़ों-करोड़ों साल लगे हैं। आज से करोड़ों साल पहले हमारे ये खनिज हमें बनते हुए देखने को मिलते हैं। और ये खनिज क्या है बेटा कि ये अवीकरण योग्य संसाधन है कि अगर एक बार खत्म हो गए दोबारा नहीं बनते। जैसे एक बार हमारा कोयला खत्म तो खत्म है। दोबारा बनेगा करोड़ों साल बाद। और अगर हमने अपने इन खनिजों का सही तरीके से प्रयोग नहीं किया तो क्या होगा बेटा कि
40:00 हमारा ही जीवन खत्म हो जाएगा। तो इसीलिए हमें क्या करना है? हमें ना अपने खनिजों का बहुत ही समझदारी तरीके से प्रयोग करना है और जो हमारे ये खनिज हैं इनको हमें बहुत अच्छे तरीके से यूज़ करना है ताकि हमारी पृथ्वी का अस्तित्व बना रहे ताकि हमारी दुनिया चलती रहे और हमारी दुनिया के समक्ष किसी प्रकार की कोई दुविधा या फिर परेशानी हमें आती हुई देखने को नहीं मिले। ठीक है भैया? तो यहां तक हमने आपके साथ अपने जो हमारे संबंधित क्वेश्चंस थे उनको एक-एक कर कर हमने आपके सामने रख दिया। आगे बढ़ना शुरू करते हैं और अब आगे बढ़ते हुए हमारे पास एक और प्रकार का हमारे पास बिंदु आएगा। अब यहां से हम लोग अपने ऊर्जा संसाधनों के बारे में डिस्कशन करेंगे। अब ये हमारे ऊर्जा संसाधन कौन से हैं? कहां से आते हैं? और क्या इनकी कहानी है? वो देखनी है। खनिजों की कहानी कंप्लीट होती है। अब हम लोग अपने ऊर्जा संसाधन की तरफ आपको लेके जाएंगे। ऊर्जा संसाधन का मतलब
40:45 क्या है? कि ऐसे हमारे संसाधन जिनसे हमें ऊर्जा या फिर एनर्जी हासिल होती है जिससे हम बिजली वगैरह बनाते हैं उसे हम लोग अपने ऊर्जा संसाधन कहते हैं। ऊर्जा संसाधन के भी हमारे दो रूप हैं। एक को बोलते हैं परंपरागत ऊर्जा संसाधन और दूसरे कहलाते हैं गैर परंपरागत ऊर्जा संसाधन। है ना? तो ऊर्जा संसाधन के भी हमारे दो भाग हमें आते हुए देखने को मिल रहे हैं। इसके अंदर एक कहलाता है परंपरागत ऊर्जा संसाधन और दूसरा है गैर परंपरागत ऊर्जा संसाधन। अगर हम बात करते हैं परंपरागत ऊर्जा संसाधन की। आपने जो शब्द सुना है बेटा यह जो शब्द है परंपरा हां जुबी डूबी जुबीड डूबी पंपारा जुबीड डुबी परंपरा वो नहीं परंपरा का मतलब होता है जो ऐसी चीज जो आपके सामने बहुत सालों से होती आ रही है सर ये हमारे खानदान की परंपरा है। हमारे समाज की
41:30 परंपरा है। देश की परंपरा है। हमारे इलाके की परंपरा है। हमारे गांव की परंपरा है। हमारे शहर की परंपरा है। एक ऐसी चीज जो पिछले काफी सालों से होती हुई आ रही होती है। उसे हम परंपरा कहते हैं। है ना? और ऐसे हमारे संसाधन, ऐसे हमारे ऊर्जा के संसाधन जिनका यूज़ हम काफी लंबे टाइम से करते आ रहे हैं। ऐसे हमारे ऊर्जा के संसाधन जिनका प्रयोग हम काफी लंबे टाइम से करते आ रहे हैं। है ना? बहुत लंबे टाइम से बहुत बहुत सालों से इनका प्रयोग होता आ रहा है। उनको हम लोग हम लोग परंपरागत ऊर्जा संसाधन कहते हैं। जैसे हमारा कोयला हुआ पिछले 100 150 200 300 सालों से इनका प्रयोग हो रहा है। हमारा पेट्रोलियम हुआ पिछले 100 सालों से इनका प्रयोग हो रहा है। हमारी नेचुरल गैस हुई पिछले 100 सालों से हम लोग इनका प्रयोग कर रहे हैं। तो ऐसे हमारे संसाधन जिनका यूज़ हम पिछले काफी समय से कर रहे हैं। उनको हम लोग परंपरागत संसाधन कहते हैं। हमारे सामने दूसरा बिंदु
42:16 है गैर परंपरागत संसाधन। गैर परंपरागत संसाधन का मतलब है कि जिनका आविष्कार हमने हाल फिलहाल में किया है। यानी कि 50 वर्षों के अंदर ही किया है। जैसे हमने सूरज से बिजली बनानी शुरू करी। अभी 50 सालों के आसपास ही सीखी है। हमने परमाणु ऊर्जा से बिजली बनानी सीखी है। हाल फिलहाल के सालों में ही सीखी है। पवन ऊर्जा जो हुई हवा से जो हम बिजली बनाते हैं ये भी हमने पिछले कुछ ही 50 सालों के आसपास सीखी है। तो जो हमने हाल फिलहाल में एनर्जी बनानी सीखी है। है ना? जो वर्तमान समय में की है उसे गैर परंपरागत ऊर्जा संसाधन कहते हैं और जो पिछले काफी टाइम से हमारे संसाधन मौजूद है जिनसे बिजली बनती है वो हमारे परंपरागत ऊर्जा संसाधन कहलाते हैं। अब यहां पर हमें देखने को मिलता है दोस्तों कि अधिकतर अगर हम लोग बात करें कि भारत के जो हमारे ग्रामीण इलाके हैं, भारत के जो हमारे देहाती इलाके हैं, भारत के अंदर जो हमारे देहाती इलाके देखने को मिलते हैं। उन देहाती या फिर हमारे ग्रामीण इलाकों के अंदर भारत में हमें किस
43:03 प्रकार की स्थिति देखने को मिलती है। यहां पर आप देखें दोस्तों कि यहां पर ना एक तरीके से लोग क्या करते हैं? जो खानावाना बनाना होता है तो उसके लिए जंगल से लकड़ियां लेकर आते हैं और उसके बाद उसके अंदर आग जलाई जाती है। अधिकतर भारत के गांव में 70% के करीब जो खाना-वाना बनाया जाता है या फिर जो घर की ज़रूरतें पूरी की जाती हैं, वह लकड़ियों पर है ना जो छोटी-मोटी लकड़ियां होती है जंगल से या फिर जो हमारे उपले होते हैं उनसे होती है और जंगलों की लकड़ी को काटा जा रहा है जिससे हम देखते हैं दोस्तों कि हमारे जंगल की लकड़ियां हमें खत्म होती हुई दिखती हैं। और बहुत बार जो हमारे पशु हैं, पशु के जो मल होता है, पशु का जो आप देखते हैं दोस्तों कि जो एस्क्रीटा होता है, मल होता है, है ना? उससे उसके गोबर से हम लोग उपले बनाते हैं और उस उपले को भी क्या करते हैं दोस्तों कि हम लोग प्रयोग में लाते हैं। हालांकि जब हम इसको जलाते हैं तो ये अच्छा नहीं है। इसका प्रयोग खाद के तौर पर या फिर कुछ और सिचुएशन में किया जा सकता है।
43:50 इस पॉइंट को हमने यहां पर आपके सामने देखा। अब हम लोग भारत के अंदर मौजूद हमारा एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रकार का ऊर्जा संसाधन है जिसे हम लोग कोयला कहते हैं और कोयले की क्या कहानी है? कोयला हमें किस प्रारूप में आता हुआ दिखता है? और कोयले के संदर्भ में क्या-क्या महत्वपूर्ण बिंदु हैं? उसको हम लोग एक-एक कर कर देखते हैं। कोयला एक प्राकृतिक संसाधन है। यानी कि इसको आपने और मैंने तो नहीं बनाया। आज से हजारों साल पहले जो चीज पृथ्वी के अंदर दब गई उनमें रासायनिक अभिक्रिया हुई और उनमें से कुछ चीजें हमें कोयला बनती हुई दिखी। कोयला एक जीवाश्म ईंधन है। यानी कि हजारों सालों से जो चीज जीवित थी उनके मरने से ये बना है। और इसको जलाने से हम लोग क्या करते हैं दोस्तों कि कोयले को जलाते हैं तो इससे बिजली बनती है या फिर इसका प्रयोग अलग-अलग कामों में होता है। कोयले के ना हमारे पास चार प्रकार हैं। कौन-कौन से? एक कहलाता है पीट, एक है लिग्नाइट, एक है बिटुमिनस और एक है एंथसाइट। तो एक-एक करके
44:37 जो हमारे कोयले के चारों प्रकार हैं, इनके बारे में हम लोग डिस्कशन करते हैं और इन चारों के चारों प्रकारों को अच्छे तरीके से समझ लेते हैं। सबसे पहले आप देखिए दोस्तों कि हमारे पास जो कोयले का सबसे पहला प्रारूप है इसे बोलते हैं पीट। नाम से ही स्पष्ट है क्या? कि इसको भगवान ने इसको ईश्वर ने पीटा है। मतलब पीटा क्यों जाता है? जब आप पढ़ाई नहीं करते हैं। सर पापा तो ऐसे ही पीट देते हैं। प्यार आ रहा है मेरे लाल। आज आप पिटाई कर दूं। तो हमने क्या देखा? हमारा ऐसे प्रकार का कोयला जो सबसे बेकार क्वालिटी का होता है जिसके अंदर बहुत ज्यादा नमी होती है या फिर जिसके अंदर बहुत ज्यादा जल होता है, पानी होता है। अगर आप इसको जलाएंगे तो जलाना मुश्किल है। यह बहुत देर से जलता है और जल्दी ही खत्म हो जाता है। इसको हम लोग क्या बोलते हैं? सबसे बेकार प्रकार का ये हमारा कोयला है जिसे हम लोग पीट कोयला कहते हैं। यह बहुत खराब होता है। पीठ से
45:24 थोड़ी अच्छी क्वालिटी का। पीठ से थोड़ी अच्छी क्वालिटी का हमारा होता है लिग्नाइट कोयला। है ना? पीठ से थोड़ी अच्छी क्वालिटी का जो हमारा कोयला है उसे हम लोग लिग्नाइट कोयला बोलते हैं। लिग्नाइट भी क्या है बेटा कि एक निम्न दर्जे का यानी कि इसकी क्वालिटी भी अच्छी नहीं है। ये भी क्या है बेटा कि एक तरीके से मुलायम है। यानी कि इसके अंदर भी पानी होता है। पानी होने की वजह से हम इसे क्या कर सकते हैं? हम इसे प्रेस कर सकते हैं। जैसे ये हमारा लिग्नाइट कोयला है एग्जांपल के तौर पर। तो अगर हम इसे प्रेस करेंगे तो ये दब सकता है। इसके अंदर पानी होता है लिग्नाइट कोयले के अंदर भी। लेकिन ये पीठ से थोड़ा अच्छा है। इसका रंग भूरा होता है। सर भूरा मतलब ब्राउन होता है। लिग्नाइट कोयला हमारे भारत के अंदर जो हमारा तमिलनाडु राज्य है वहां से निकलता हुआ दिखता है। और इस कोयले को ना लिग्नाइट कोयले से हम लोग बिजली वगैरह बना लेते हैं। भारत में तीसरे प्रकार का ये हमारा कोयला है जो हमें थोड़ी अधिक गहराई में मिलता है। है ना? जमीन की थोड़ी गहराई में मिलता है।
46:11 क्योंकि जमीन के अंदर होता है तो इसके अंदर नमी ज्यादा नहीं होती है। और इसको बोलते हैं बिटुमिनस। देखो एकदम चटक काला है ना बिटुमिनस कोयला ये हमारे सामने मौजूद है और बिटुमिनस कोयले से हम लोग क्या करते हैं बेटा बिटुमिनस कोयले से हम लोग बहुत सारे काम करते हैं और इसको ना लोहे को पिघलाने में और बिजली बनाने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। ये तीसरे प्रकार का हमारा कोयला है। सबसे बढ़िया प्रकार का जो अपना कोयला है एकदम ठोस जलाओगे एकदम जल जाएगा और बहुत लंबे टाइम तक जलता रहेगा। इसको हम लोग बोलते हैं एंथसाइट कोयला। और ये जो हमारा एंथसाइट कोयला है ये सबसे अच्छे प्रकार का कोयला माना जाता है। इस कोयले को हम लोग क्या करते हैं दोस्तों कि अलग-अलग कामों में यूज़ होते हुए देखते हैं। और अगर हम कोयले को एक बार जला लेते हैं तो एक बार जलने के बाद कोयला क्या होता है दोस्तों कि एक तरीके से ना ये राख में परिवर्तित हो जाता है। ये तो आपको जानकारी है। अब भारत के अंदर हमने कोयले के चार अलग-अलग प्रकार
46:57 देख लिए। पीट, पिटुमिनस, लिग्नाइट और एंथसाइट। हमारा ये जो कोयला है आखिर मिलता कहां है? सर सवाल कैसा है ये आपका? सर आप 10th के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। आपके पास इतने साल का एक्सपीरियंस है। आप यह सवाल कहेंगे। सर आपने कहा क्या है? आप यह कह रहे हैं कि कोयला मिलता कहां पर है? सर मेरा जो घर है मेरे घर के बराबर में एक दुकान है। रमेश अंकल कोयला बेचते हैं। है ना? ना ऐसे उनकी दुकान के आगे लगे रहते हैं। रमेश अंकल की दुकान पे मिलता है। मेरे लाल इसीलिए मैं आपको पढ़ा रहा हूं क्योंकि रमेश अंकल ये सही आंसर नहीं है। मेरे भाई सवाल पूछा जा रहा है कि भारत के अंदर वो कौन सी जगह है जहां से हमारे कोयले निकलते हैं या फिर हमारे कोयले हमें प्राप्त होते हुए दिखते हैं। उनको हम लोग एक-एक कर कर यहां पर आपके सामने रखेंगे और अच्छे तरीके से हम लोग अपने इस बिंदु को समझ लेंगे। ठीक है? ध्यान से देखते हैं।
47:42 सबसे पहले अगर हम देखें दोस्तों कि भारत में ना हमारे पास दो जगह हैं जहां से हमारा यह कोयला अपन को निकलता हुआ दिखता है। सबसे पहला कहलाता है गोंडवाना कोयला क्षेत्र। गोंडवाना कोयला क्षेत्र का मतलब क्या है? कि आज से करोड़ों करोड़ों करोड़ों करोड़ों साल पहले आज के टाइम पर अगर हम दुनिया को देखते हैं तो हमारे पास बहुत सारे महाद्वीप हैं। हमारे पास एशिया है, अफ्रीका है, उत्तरी अमेरिका है, दक्षिणी अमेरिका है। हमारे पास अंटार्कटिका है, ऑस्ट्रेलिया है। दुनिया में बहुत सारे अलग-अलग जमीन के टुकड़े बंट चुके हैं। लेकिन आज से करोड़ों साल पहले दुनिया में सिर्फ हमें दो जमीन के टुकड़े दिखते हैं। एक को बोलते हैं लोरेशिया और दूसरे को बोला जाता है गोंडवाना। ठीक है बेटा? और आज से करोड़ों साल पहले यह जो गोंडवाना है ना इसी में हमारा भारत हुआ करता था। यहां पर यह हमारा भारत है और आपको श्रीलंका दिख रहा है बेटा। है ना? यह दक्षिण भारत की हमारी पूछ है। तो ये जो
48:28 गोंडवाना कोयला क्षेत्र है यहां पर हमारा ये कोयला निर्मित हुआ है। करोड़ों साल पहले। कितने करोड़ों साल पहले? 20 करोड़ साल पहले यहां पर जो हमारा निर्मित हुआ कोयला ये हमारा गोंडवाना कोयला क्षेत्र कहलाता है। और गोंडवाना कोयला क्षेत्र फिर धीरे-धीरे अपनी स्थिति यहां पर बदला है और फिर अब हमारा भारत यहां पर आ गया है। प्लेटें परिवर्तित हुई और भारत यहां पर आ गया। तो एक तो हमारा कोयला क्षेत्र है जो लगभग 20 करोड़ साल पहले बना है जिसे हमने गोंडवाना कोयला क्षेत्र कहा और एक हमारा कोयला क्षेत्र जिसे हम लोग टर्शरी कोयला क्षेत्र कहते हैं जो लगभग 5 करोड़ साल पहले बना है जब हमारे पास कुछ जीव-जंतु आ चुके थे इस प्रकार के है ना अब एक-एक कर कर हम लोग अपने आज के टाइम पर हमारा गोंडवाना क्षेत्र कौन सा है अगर हम अपने आज के टाइम के गोंडवाना क्षेत्र की बात करते हैं तो हमारा झारखंड हुआ हमारा उड़ीसा हुआ उसी के साथ-साथ हमारा आपको दिखता है दोस्तों कि छत्तीसगढ़ हुआ हमारा आंध्र प्रदेश हुआ हमारा महाराष्ट्र वाला
49:15 भूभाग भाग हुआ। तो जितने भी हमारे ये राज्य हैं ये सारे 20 करोड़ साल पहले के बनाए गए हमारे कोयला यहां से निकलता है जो गोंडवाना कोयला क्षेत्र है। और जितना भी हमारा उत्तरपूर्वी राज्य हैं जैसे हमारा आसाम हुआ, जैसे हमारा मणिपुर हुआ, जैसे हमारा मेघालय हुआ, जैसे हमारा आप देखते हैं दोस्तों कि हमारा एक तरीके से नागालैंड हुआ। इन सारे राज्यों के अंदर हमें टर्शरी क्षेत्र दिखता है जो लगभग 5.5 करोड़ साल पहले अपने कोयले को बना चुके हैं। अब कुछ क्वेश्चंस आपके साथ करेंगे। आपसे अनुरोध है कि आप लोग जल्दी-जल्दी से अपने इन आंसर्स को हमारे सामने पेश करना शुरू करें। तो पहला सवाल आएगा बेटा बहुत अच्छे तरीके से आपको अपने आंसर को देना है। सवाल पूछा जा रहा है आंसर है आपसे अपेक्षित कि कोयले का जो टर्शरी निक्षेप है कोयले जो हमारा टर्शरी वाला कोयला है ये कितने साल पहले बनाया गया है? 5.5
50:01 करोड़ साल पहले बना है सर। 6 करोड़ साल पहले, 7 करोड़ साल पहले या फिर 4 करोड़ साल पहले। है ना? जल्दी से बताइएगा। ठीक है? जल्दी बताइएगा। बहुत प्यारा सवाल है बेटा। बहुत अच्छा सवाल है और बहुत अच्छे तरीके से सर मैप की क्लासेस भी होंगी। हां बेटा मैप की क्लासेस भी होंगी। और सुबह तो हमारी एनसीईआरटी लाइन बाय लाइन बहुत डिटेल से चल ही रही है। है ना? बहुत बढ़िया। और सारे साथियों के आंसर्स यहां पर आने शुरू हो गए हैं। और हमने यहां पर बहुत अच्छे तरीके से पाया कि जो हमारा यह कोयला क्षेत्र है जिसे हम लोग टर्शरी कोयला क्षेत्र कहते हैं। इसके अंतर्गत हम देखते हैं दोस्तों कि लगभग 5.5 करोड़ साल पहले इसका निर्माण हुआ है। ऑप्शन ए अपन का बिल्कुल सही है। लगभग 97% दोस्तों के आंसर बिल्कुल सही है। गोंडवाना कोयला क्षेत्र
50:47 इसकी आयु कितनी है? है ना? बहुत प्यारा सवाल। पेपर के अंदर आता रहने वाला सवाल। अच्छे तरीके से आप लोग अपने इस क्वेश्चन को बताएंगे। बहुत ही प्यारा सवाल है बेटा। जल्दी बताइएगा कि जो हमारा यह गोंडवाना कोयला क्षेत्र है, यह कितने वर्ष पहले बना है। है ना? बहुत बढ़िया। और बहुत प्यारे तरीके से हमारे साथियों के आंसर्स हमारे सामने आ गए हैं। सर, कल तो सुबह की मैथ की क्लास है। हां, तो सुबह कमल सर आएंगे और कमल सर से आपसे मिलने का सौभाग्य मिलेगा। कल की क्लास में सुबह 5:00 बजे। है ना? तो यहां पर हमने देखा दोस्तों कि जो हमारा ये गोंडवाना कोयला क्षेत्र है, इसकी अगर हम बात करते हैं तो इसका निर्माण लगभग आप क्या देख पा रहे हैं? में 20 करोड़ों साल पहले हुआ है। ऑप्शन सी हमारा बिल्कुल सही ऑप्शन रहा। लगभग 69% दोस्तों ने बिल्कुल सही आंसर दिया। अगला सवाल है कि इनमें से
51:33 वो कौन सा कोयला है जो सबसे बढ़िया क्वालिटी का होता है? सबसे बढ़िया क्वालिटी वाला जो हमारा कोयला है वो कौन सा है? यह आपसे पूछा जा रहा है। है ना? सबसे बेहतरीन प्रकार का जो हमारा कोयला है, इसका आंसर आपको बता देना है। जिंदाबाद जिंदाबाद। बढ़िया। तो हमने यहां पे डिस्कस किया पूछा गया कि जो हमारा ये कोयला है और कोयले का जो सबसे उत्तम क्वालिटी का हमारा कोयला देखने को मिला वो कौन सा है भैया? वो अपना है एंथसाइट जो एकदम ठोस होता है और जलाते ही जल जाता है। ऑप्शन ए अपना बिल्कुल सही है। लगभग 69% दोस्तों ने बिल्कुल सही आंसर
52:19 हमारे सामने पेश किया है। बहुत अच्छा। पूछा जाता है दोस्तों कि इनमें से आपको जल्दी से आंसर देना है कि इनमें से वो कौन सा कोयला है जो नीलाम अच्छी क्वालिटी का नहीं होता। जिसका रंग भूरा होता है, मुलायम होता है। उसे क्या बोला जा रहा है? यह आपके सामने सवाल है और जल्दी से आप लोग अपने क्वेश्चन के आंसर को पेश कर देंगे। है ना सर आपकी क्लासेस कब होती हैं? हमारी क्लासेस तो वैसे सप्ताह में दो दिन होती हैं बेटा। मंडे को और फ्राइडे के दिन सुबह 5:00 बजे। तो उसमें आप जुड़ सकते हैं और अच्छे तरीके से चीजों को अपनी और डिटेल्ड तरीके से एनसीईआरटी का हर एक शब्दावली उसके अंदर आप और बेहतरीन तरीके से समझ सकते हैं। और वीर की क्लासेस तो एक सप्ताह में एक बार होती ही है। तो हम यहां पर इसे देख पा रहे हैं। हमारा जो ये कोयला क्षेत्र है जिसको हम लोग किस नाम से जान
53:05 रहे हैं? जिसको हम लोग निम्न क्वालिटी का कोयला कहते हैं। यह है अपना लिग्नाइट कोयला। ऑप्शन सी हमारा यहां पर बिल्कुल सही है। लगभग हमारे 77% दोस्तों ने बिल्कुल सही आंसर दे दिया। बहुत बढ़िया। तो अब तक तो हमने कोयले के बारे में डिस्कशन किया है। अब कोयले से ना हम लोग आपको आगे लेके चलेंगे और कोयले से हम लोग आपको लेके जा रहे हैं पेट्रोलियम की तरफ। आया आया पेट्रोलियम आया। ठीक है? अब यहां से हमारी पेट्रोलियम की जो कहानी है उसको हम लोग समझना शुरू करते हैं। देखो जैसे हम लोग जमीन की गहराई से कोयले को निकालते हैं और कोयले से हम बिजली बनाते हैं। कैसे बनाते हैं वो मैं आपको आगे बताऊंगा। हमारा जो यह कोयला होता है, कोयले के बाद भारत में जो सबसे बड़ी संख्या के अंदर हम लोग जिसे ऊर्जा संसाधन को यूज करते हैं, वो है हमारा पेट्रोलियम। है ना? और जमीन की गहराई से हम क्या करते हैं बेटा? इस पेट्रोलियम को हासिल करते हैं। पेट्रोलियम
53:50 का जो हमारा यह रूप है, इसको हम लोग अलग-अलग जगहों पर प्रयोग में आते हुए देखते हैं। इससे प्लास्टिक बनती है। इससे टेक्सटाइल यानी कि कपड़े बनाए जाते हैं या फिर फार्मासटिकल्स के अंदर भी इसको यूज़ करते हैं। दवाइयां ववाइयों के अंदर भी इसको यूज़ किया जाता है। अच्छा जो पेट्रोलियम है ना ये हमारी चट्टानों से या फिर हम देखते हैं दोस्तों कि जो हमारी जमीन का गर्भ है जो हमारी जमीन है ना वहां से बाहर तरल रूप में आ जाता है। तो जहां से पेट्रोलियम होता है ये वहां से द्रव्य रूप में द्रव्य रूप में आप देखते हैं तरल रूप में बाहर आना शुरू कर देता है और फिर वहीं से हम लोग इसको रिसते हुए जब ये निकलता है तो इसका हम लोग निकालना शुरू कर लेते हैं। अगर भारत में पूछा जाए कि पेट्रोलियम सबसे ज्यादा कहां से निकलता है? ध्यान से देखें। भारत में तीन इलाके हैं जहां पर सबसे ज्यादा पेट्रोलियम निकलता है। एक है हमारा मुंबई हाई वाला इलाका। और मुंबई हाई वाला का मतलब क्या है? कि जो मुंबई का है ना अरब सागर है
54:36 यहां पे समुद्र में निकलता है। देश का लगभग 63% जो हमारा पेट्रोलियम है वो यहीं से निकलता है इस समुद्र से। उसके बाद दूसरे नंबर पर है गुजरात और गुजरात में 18% देश का पेट्रोलियम निकलता है। और उसके बाद हमारा है असम। यहां से देश का 13% कोयला निकलता है। देश में सबसे पहली बार जो हमारा देश में सबसे पहली अच्छा अच्छा मैंने कोयला-कोयला बोल दिया क्या? दोबारा सर समझते हैं इसको अच्छे तरीके से। हम यहां पर पेट्रोलियम की बात कर रहे हैं। भारत में तीन ऐसे इलाके हैं जहां पर हमें पेट्रोलियम पेट्रोलियम पेट्रोलियम निकलते हुए दिखता है। सबसे पहले जो हमारा मुंबई हाई का इलाका है यहां पर देश का 63% पेट्रोलियम निकलता है यानी कि तेल निकलता है। उसी के साथ-साथ यहां पर हमारा गुजरात है जिसमें देश का 18% के करीब पेट्रोलियम निकल रहा है। और फिर है हमारा आसाम जहां पर देश का 13% पेट्रोलियम निकल रहा है।
55:21 देश में सबसे पहले जो हमारा पेट्रोलियम निकलना शुरू हुआ था। है ना? वो असम से ही हुआ था। और असम के जो दिगबोई नामक इलाका है और नहरकटिया यहां पर भारत के सबसे पहले हमारे पेट्रोलियम निकलता हुआ हमें दिखता है या पेट्रोल हमें निकलता हुआ देखने को मिलता है। अब जहां-जहां पर हमारा पेट्रोलियम निकलता है पेट्रोलियम के साथ ही हम लोग क्या करते हैं बेटा? हमें देखने को मिलता है कि जहां-जहां पेट्रोलियम निकल रहा है ना वहीं पर हमें उसी के साथ-साथ प्राकृतिक गैस भी निकलती हुई दिखती है। और प्राकृतिक गैस भी क्या होती है बेटा कि एक तरीके से ईंधन के तौर पर प्रयोग में लाई जाती है। भारत के अंदर जो हमारा कृष्णा गोदावरी वाला इलाका हुआ जहां कृष्णा गोदावरी की नदियां हैं वहां पर और जहां पर हमारा मुंबई हाई है। हमारा गुजरात है और आसाम है। हम क्या देखते हैं कि यहां पर प्राकृतिक गैस को देखते हैं। प्राकृतिक गैस को हम बड़े-बड़े पाइप्स के जरिए क्या
56:06 करते हैं दोस्तों कि इसको एक जगह से दूसरी जगह पर पहुंचाते हैं। भारत के अंदर हजीरा, विजयपुर, जगदीशपुर लगभग 1700 कि.मी. लंबी यह पाइपलाइन है जो भारत के अंदर यूज़ की जाती है और इससे हमारी बिजली बनती है। सर आप बता रहे हो बिजली बनती है, बिजली बनती है, बनती कैसे है? यह बताओ। बिजली बनने के हमारे पास दो तरीके हैं। सबसे पहला तरीका है कि हम पानी से बिजली को बनाते हैं। हमने नदी की ऊंचाई से हमने क्या किया बेटा कि हमने नदी की ऊंचाई, नदी को ऊंचाई पे रखा और ऊंचाई से हमने पानी को फेंकना शुरू किया। आगे हमने बांध बनाया हुआ है और यहां पर हमारा यह टरबाइन है। जब यह पानी टरबाइन पर यानी कि इस टायर पर लगता है तो टायर घूमता है जिससे हमारा एक तरीके से आप देखते हैं कि बिजली बननी शुरू हो जाती है। तो पानी की धारा से हम बिजली बनाते हैं। दूसरा तरीका क्या है बेटा? दूसरा तरीका है कि हमारे पास होता है कोयला, पेट्रोलियम
56:52 और प्राकृतिक गैस। हमने क्या किया? कोयला, पेट्रोलियम प्राकृतिक गैस को इस जगह पर रख दिया। और इसके अंदर फिर हमने इसको जलाया। कोयला, पेट्रोलियम प्राकृतिक गैस जो है इसको हमने जलाया। इसके जलने से बहुत सारी भाप पैदा हुई। बहुत सारा धुआं पैदा हुआ। इस भाप को हम लोग क्या करते हैं? इस टरबाइन पर डालते हैं। और भाप के प्रेशर से ये टरबाइन घूमती है जिससे हमारी बिजली पैदा होती है। बिजली बनाने के ये हमारे दो तरीके हैं। कैसे बनती है? पानी से और कैसे बनती है कोयला पेट्रोलियम से? उसको हमने एक-एक कर कर आपके सामने रख दिया। हमारे पास ना परमाणु ऊर्जा भी और परमाणु ऊर्जा ऊर्जा का हमारा क्या है बेटा कि एक तरीके से गैर परंपरागत संसाधन है जिसको हम लोग अच्छे तरीके से देख रहे हैं। सर ये क्लास कब तक चलेगी? की पूछ रही है मुश्किल से 5 मिनट हमारी जो परमाणु परमाणु ऊर्जा है इसके अंदर हम देखें दोस्तों कि हमारे पास ना दो तत्व हमें देखने को मिलते हैं। कौन सा? एक है यूरेनियम दूसरा है थोरियम।
57:38 यूरेनियम थोरियम हमें देखने को मिला। हम क्या करते हैं कि इनकी आंतरिक संरचना में बदलाव करते हैं। हमारे पास यह जो हमारा यूरेनियम और थोरियम है, हम इनकी आंतरिक संरचना में बदलाव करते हैं। यानी कि इनके अंदर हम लोग थोड़ा सा इनको चेंज करते हैं। जब इनकी आंतरिक संरचना में बदलाव होता है तो इसमें बहुत सारी ऊष्मा निकलती है। बहुत सारी एनर्जी निकलती है। और इसी ऊष्मा को ये जो भाप निकल रही है, जो एनर्जी निकल रही है, इसको हम लोग क्या करते हैं बेटा? टरबाइन पर डालते हैं जिससे हमारी बिजली बन जाती है और इसे हम लोग परमाणु ऊर्जा के नाम से जानते हैं। ये जो हमारा क्या है बेटा कि एक तरीके से थोरियम है ये भारत के केरल में है ना वहां पर मिलता है और केरल के समुद्र के किनारे एक मोनासाइट रेत है वहां पर मिलता है हमारा थोरियम और जो हमारा क्या है दोस्तों कि हमारा एक तरीके से हमें देखने को मिलता है कि यूरेनियम है। यूरेनियम हमें भारत के अंदर झारखंड में और उसी के साथ-साथ राजस्थान की जो
58:24 अरावली की पहाड़ियां हैं वहां पर देखने को मिलता है। भारत के अंदर हम क्या करते हैं दोस्तों कि हमारे पास ना सूरज की रोशनी से भी हम लोग बिजली बनाते हैं और किस तरीके से भारत के अंदर सूरज की रोशनी से बिजली बनती है उसको देख लेते हैं कि हमने क्या किया कि हमारे पास क्या है दोस्तों कि हमारे पास सोलर प्लांट है सूरज की रोशनी इन प्लांट्स पर पड़ती है और इसके अंदर ना एक तरीके की टेक्नोलॉजी है जिसे हम लोग बोलते हैं फोटोवोल्टिक टेक्नोलॉजी तो सूरज की रोशनी जब इन पर पड़ती है तो ये ऊर्जा में परिवर्तित हो जाते हैं। यहां यहां तार लगे
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