Focus Kaise Badhaye | Padhai Me Dhyan Kaise Lagaye | Vikas Sir

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो फोकस बढ़ाने के तरीकों पर केंद्रित है, जिसमें विजुअल और ऑडियो डिस्टर्बेंस को कम करने के उपाय शामिल हैं। इसमें मोबाइल के प्रभाव, कमरे और टेबल को व्यवस्थित रखने, टेबल लैंप का उपयोग, और बैकग्राउंड म्यूजिक के माध्यम से फोकस बढ़ाने के बारे में बताया गया है।

  • फोकस बढ़ाने के लिए विजुअल और ऑडियो डिस्टर्बेंस को कम करना महत्वपूर्ण है।
  • कमरे और टेबल को व्यवस्थित रखने से फोकस बढ़ता है।
  • टेबल लैंप और बैकग्राउंड म्यूजिक का उपयोग फोकस बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

फोकस बढ़ाने के तरीके

फोकस का अर्थ है किसी एक चीज़ पर ध्यान केंद्रित करना। फोकस अच्छा होने से रिटेंशन बढ़ता है, जिससे चीजें लंबे समय तक याद रहती हैं। फोकस बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण मोबाइल है, जिस पर माइंड मैनेजमेंट के तहत चर्चा की जाएगी।

विजुअल मेमोरी का प्रभाव

विजुअल मेमोरी हमारे फोकस को प्रभावित करती है। उदाहरण के लिए, रेलवे स्टेशन पर पढ़ाई करना मुश्किल होता है क्योंकि अलग-अलग प्रकार के विजुअल्स ध्यान भटकाते हैं। कमरे में पढ़ाई करना बेहतर है, और यदि कमरे में भी विजुअल्स को कम कर दिया जाए, तो फोकस और बढ़ सकता है। टेबल को ऐसी जगह पर रखें जहाँ सामने खाली दीवार हो और आते-जाते लोग दिखाई न दें। टेबल पर सिर्फ वही किताबें रखें जो आज पढ़नी हैं।

कमरे और टेबल का प्रबंधन

टेबल और कमरा जितना ज्यादा व्यवस्थित होगा, उतना ही फोकस बढ़ेगा। टेबल पर अनावश्यक किताबें रखने से चिंता उत्पन्न होती है। यदि कमरे की बाकी चीजें दिखना बंद कर दी जाएं, तो फोकस और बढ़ सकता है। इसके लिए टेबल लैंप का उपयोग करें और बाकी कमरे की लाइट बंद रखें। इससे विजुअल इंटरफेरेंस कम होता है और ध्यान भटकने से बचता है।

ऑडियो डिस्टर्बेंस का प्रभाव

ऑडियो डिस्टर्बेंस भी फोकस को प्रभावित करता है। रेलवे स्टेशन पर आवाजों के कारण पढ़ाई करना मुश्किल होता है। कमरे में पढ़ाई करते समय इयर बड्स का उपयोग करें, जो आसपास की आवाजों को 90% तक कम कर देते हैं। इससे पंखे की आवाज भी सुनाई नहीं देगी, जिससे बैक ऑफ द माइंड पर पड़ने वाला प्रभाव कम होगा।

बैकग्राउंड म्यूजिक का उपयोग

मैथ और साइंस के स्टूडेंट्स के लिए बैकग्राउंड में लिरिक्स के बिना म्यूजिक लगाना फायदेमंद होता है। इससे बैक ऑफ द माइंड एक आवाज पर स्थिर हो जाता है और दूसरी चीजें सोचने का मौका नहीं मिलता, जिससे फोकस बढ़ता है। टीवी देखते या म्यूजिक सुनते समय नींद आने का कारण भी यही है कि माइंड को सोचने की मेहनत नहीं करनी पड़ती और वह रिलैक्स हो जाता है।

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Transcript

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0:02 हम बात और कर लेते हैं फोकस को लेकर कि फोकस किस तरीके से बढ़ाया जाए। जब हम बात करते हैं कि रिवीजन अच्छा होना चाहिए तो हमारा एक इसमें से काम यह भी है कि हमारा फोकस अच्छा होना चाहिए। फोकस क्या होता है? फोकस मतलब कि किसी एक चीज पर केंद्रित होना। जैसे आप अभी मेरी क्लास देख रहे हो तो मैं मान के चल रहा हूं और मैं विश्वस्त हूं पूरे तरीके से कि 90% लोगों का फोकस अच्छा है। आप अच्छे तरीके से मेरी क्लास जो देख रहे हो, सुन रहे हो। है ना? कोई भी बहुत अच्छे तरीके से आपको पढ़ाता है कहानियां बना के कहानियां बता-ब बता के या फिर खुद से रिलेट करके पढ़ाता है तो आपका क्या होता है फोकस अच्छा रहता है और यह सारी चीजें हमारे अच्छे से रिटेंशन को बढ़ाती है। रिटेंशन का मतलब होता है कि लंबे समय तक हमारी वो चीजें याद रहे उस चीज को बढ़ाती है। तो फोकस

0:48 अच्छा होना चाहिए। तो फोकस अच्छा नहीं हो इसके क्या-क्या कारण हो सकते हैं? सबसे पहला सबसे बड़ा जो कारण है वह तो है मोबाइल। सबसे बड़ा जो आपका फोकस बिगड़ने का कारण है वह क्या है? मोबाइल। और इस मोबाइल वाले इशू पर मैं माइंड मैनेजमेंट क्योंकि यह आपके आप नहीं चाहते सबको पता है भाई। मैं सामान्यत ऐसी बातें नहीं करना चाहता जो कि सब लोग करते रहते हैं कि हमें पॉजिटिव रहना चाहिए। हमें फोकस्ड रहना चाहिए। किसे नहीं पता इस दुनिया के अंदर कि पॉजिटिव रहना चाहिए। फोकस्ड रहना चाहिए। लेकिन कैसे रह वह बताओ ना। हमारी प्रॉब्लम तो वह है। तो इसको लेकर मोबाइल को लेकर क्या इशू है? क्यों हम उसे सॉल्व नहीं कर पा रहे हैं? उसको अपन माइंड मैनेजमेंट वाले टॉपिक के

1:33 अंदर जो डिस्कस करेंगे। अभी मैं आपको फोकस बढ़ाने को लेकर कुछ एक बातें बता देता हूं। हमारा जो फोकस है वो किन चीजों से प्रभावित होता है? एक मैं कह देता हूं कि विजुअल मेमोरी इससे प्रभावित होता है। विजुअल मेमोरी कैसे? मान लो कि मैं आपको कहूं कि आपको रेलवे स्टेशन पर बैठकर पढ़ाई करनी है तो क्या आप उतने अच्छे से पढ़ाई कर पाओगे? तो आप कहोगे ना रेलवे स्टेशन पर पढ़ाई कैसे होगी? क्यों? मैं आपको बिल्कुल ईयरफोन और वह ऐसे लगा दे लगा के दे देता हूं। कोई आवाज नहीं आएगी। करके देखो पढ़ाई। तो आप कहोगे ना ना नहीं हो सकती। ट्रेन के अंदर कर लो, बस के अंदर कर लो। आप कहोगे उतनी अच्छी पढ़ाई नहीं हो सकती। क्यों नहीं हो सकती? क्योंकि हमारे सामने अलग-अलग प्रकार के विजुअल्स चल रहे हैं। भले ही आपका उसकी तरफ ध्यान ना जाए लेकिन आपकी शॉर्ट टर्म मेमोरी में वो जा रहा है और वह आपके लिए एक अवरोध उत्पन्न करता है।

2:20 तो इसके लिए हम क्या करते हैं? इसके लिए हम ये करते हैं कि हम एक रूम में बैठ के पढ़ाई करते हैं। तो ये तो सबको ही पता है। इसमें एक्स्ट्रा क्या एक्स्ट्रा ये कि रूम के अंदर भी यदि अपन अदर विजुअल्स को बंद कर दें तो आपका फोकस बढ़ेगा। कैसे? क्यों ना आपका टेबल ऐसी जगह पर हो जहां पर कि सामने खाली दीवार हो। खिड़की ना हो। बाहर कोई दूसरा गेट आपको दिखाई ना दे रहा हो। आते-जाते लोग आपको दिखाई ना दे रहे हो। आपका फोकस ट्रेन की बजाय रूम में बढ़ गया। रूम की बजाय ऐसे जगह पर टेबल रखने से बढ़ गया। इसे थोड़ा सा और कैसे बढ़ाया जाए? आपके टेबल पर सिर्फ वही किताबें हो जो कि आपको आज पढ़नी है। हमने टेबल पर इकॉनमी भी रख रखी है। हिस्ट्री भी रख रखी है। क्वालिटी पढ़ रहे हैं। अचानक से इकॉनमी याद आ गई।

3:06 फिर लगता है अरे यार इकॉनमी में तो याद ही कुछ नहीं आ रहा। तो वो आपके एक तरीके से विजुअल की वजह से आपके रिटेंशन को कम कर रहा है। आपके फोकस को कम कर रहा है। आपका टेबल जितना ज्यादा मैनेज्ड होगा उतना ही अच्छा रहेगा। उतना ही आपकी पढ़ाई जो अच्छी होगी। इवन मैं कहूं कि सिर्फ टेबल ही नहीं आपका रूम जो है वह जितना ज्यादा मैनेज होगा लड़कों के रूम में आकर देख लो। इवन मेरे खुद के रूम में आकर देख लो। तो यहां पर कपड़े पड़े हैं। कुर्सी तो हमने लगता है कि भगवान ने बनाई ही कपड़े रखने के लिए है। खूंटी नहीं बनाई कपड़े रखने के लिए। कुर्सी बनाई है। उसके ऊपर ही रखते हैं हम। ठीक है? और हम जब वो रूम को भी ठीक तरीके से अरेंज करके रखते नहीं है। इससे क्या होता है कि आपका फोकस कम होता है। रूम जितना ज्यादा मैनेज्ड होगा आपका उतना ही फोकस बढ़ेगा। तो मैंने आपको छोटे-छोटे टिप्स बताए। रूम को मैनेज करो। टेबल को

3:53 मैनेज करो। टेबल पर वो किताबें हो जो कि आपको आज पढ़नी है। या फिर ज्यादा से ज्यादा एक आधे एक किताब एक्स्ट्रा हो सकती है। बहुत ज्यादा किताबें टेबल पर नहीं होनी चाहिए। जो आपने बाद में पढ़नी है, वह सब नहीं होनी चाहिए। वो आपके मन में एक तरीके की चिंता उत्पन्न करके जाती है। फिर इसके बाद एक और एक्स्ट्रा स्टेप की तरफ चलते हैं। विजुअल मेमोरी के अंदर यदि मैं रूम की बाकी चीजें दिखना ही बंद करवा दूं तो वो कैसे हो सकता है कि एक हम यदि टेबल लैंप ले आएं और टेबल लैंप के तहत पढ़ें और बाकी रूम की लाइट जो बंद रखें। आप एक बार करके देख लेना कि टेबल लैंप में पढ़ना और बाकी रूम की लाइट बंद रखना। आपको फोकस अपने आप समझ में आ जाएगा कि किस तरीके से बढ़ा है। कारण क्या हुआ? आपने विजुअल इंटरफेरेंस जितना भी था, जितना भी दृश्य प्रकार का अवरोध था, वह सारा खत्म कर दिया। अब आपको आपका बेड भी दिखाई नहीं दे

4:40 रहा, तो सोने की भी याद नहीं आ रही। आपको इधर-उधर बिखरा हुआ सामान भी दिखाई नहीं दे रहा। तो आपका जो माइंड है वो सिस्टमेटिक एक तार की तरह सोच पा रहा है। तो सारी चीजें वो सिस्टम में चल रही हैं। तो हम एक टेबल लैंप का यूज़ करके पढ़ाई कर सकते हैं। हालांकि टेबल लैंप वाला उन लोगों को थोड़ा अवॉइड करना चाहिए जिनकी आंखों में थोड़ा सा दर्द होता हो। कारण क्या है? कि वो लाइट रिफ्लेक्ट हो के सीधे आंखों में पड़ती है तो कुछ लोगों को इसमें प्रॉब्लम हो सकती है। यदि आपको ऐसी कोई प्रॉब्लम नहीं है ट्राई करके देख लो। मैं जितने भी आपको यहां पर एक्सपेरिमेंट बता रहा हूं इनको ट्राई करके देख लो। यदि आपको ठीक लगता है तो यूज़ करो वरना ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? ₹150 ₹200 का टेबल लैंप आता है। इसका नुकसान होगा बस और आप देखोगे आपका फोकस इसके अंदर बढ़ेगा। इसी तरीके से एक हमने क्या कहा? हमारे जो अवरोध है वो क्या है? विजुअल प्रकार का है। इसी प्रकार से एक हमारे जो अवरोध है वो ऑडियो प्रकार

5:26 का भी है। फिर से वही बात को रिपीट करते हैं। यदि मैं आपको कहूं कि रेलवे स्टेशन पर पढ़ाई कर लो। आप कहोगे ना भाई इतनी सारी आवाजें आ रही हैं इधर-उधर से तो मैं यहां पर पढ़ाई नहीं कर पाऊंगा। तो आप रूम पर पढ़ाई कर लो। हां, रूम पर पढ़ाई जो अच्छे से हो जाएगी। लेकिन मैं कहूं कि रूम के अंदर भी आप यदि अपनी पढ़ाई के अंदर दो चीजें ऐड कर सकते हैं। एक इयर बड्स आते हैं। क्या आते हैं? इयर बड्स आते हैं। इयर बड्स जो कि आसपास की आपकी आवाज जो है जितनी भी है उसको कैंसिलेशन कर देते हैं। 90% आपकी आवाज इधर-उधर की जो एक तरीके से कैंसिल हो जाएगी। इवन छोटी-छोटी आवाजें ना पंखा-वंखा यह भी आपको सुनाई नहीं देगा। आप कहोगे नहीं यह तो हमें परेशान करती नहीं है। मैं कह रहा हूं एक बार आप इयर बर्ड्स का यूज़ करके देखो। आपको पता लग जाएगा कि परेशान

6:11 भले ही ना करती हो लेकिन हमारा बैक ऑफ द माइंड इन सब चीजों से प्रभावित होता है। या तो उस बैक ऑफ द माइंड को एक सिस्टमेटिक आवाज दे दो तो फिर उसकी तरफ उसका ध्यान बंध जाएगा और आपको वो पढ़ाई करने देगा। एग्जांपल के थ्रू मैं आपको समझाता हूं कि मैं यह कह रहा हूं कि आप यदि इयर बड्स का यूज़ करते हो उसके बाद पढ़ते हो तो जो मैं कह रहा था कि बोल-बोल के पढ़ना। आप हल्का सा भी मन में सोचोगे तो आवाज गूंजेगी। आप हल्का सा भी बोल बोल के पढ़ोगे तो आपको लगेगा जोर-जोर से बोल के पढ़ रहे हैं यदि इर बड्स का यूज करते हैं। तो जो मैंने शुरुआत में बात कही थी बोल बोल के पढ़ना वो यहां पर इयर बड्स यूज़ करने के बाद बहुत तेज नहीं बोलोगे तब भी वो आपका काम यहां पर हो जाएगा। दूसरा मैं आपको एक और एग्जांपल दे देता हूं। खासतौर पर ये मैथ जो पढ़ने वाले हैं ना उनके लिए ज्यादा काम का रहता है। वो इसको बड़ा यूज़ करते हैं।

6:57 साइंस के जो स्टूडेंट होते हैं मैं जब कोटा रहा तो मैंने इस मेथड का बड़ा यूज़ किया। वो यह था कि बैकग्राउंड के अंदर म्यूजिक लगाकर और म्यूजिक ऐसा जिसके अंदर लिरिक्स नहीं है। वो लिरिक्स लगाकर ईयरफोन लगा लो। हल्की-हल्की आवाज जो कि परेशान ना करें। उसके बाद मैथ्स रीजनिंग के सवाल जब करते थे तो बहुत अच्छे से होते थे। कारण क्या है कि आपका जो बैक ऑफ द माइंड है वो एक आवाज पर जाके स्टिक हो गया। अब आपको बहुत ज्यादा सोचने का मौका नहीं मिल रहा। आपके माइंड को। बहुत गहरी सूक्ष्म लेवल पर ये बातें हैं ये। आपके माइंड को दूसरी कुछ चीजें सोचने का मौका नहीं मिल रहा। इसलिए आपका बैक ऑफ द माइंड एक चीज पर स्टेबल हो गया और जो दूसरा माइंड है वो आपको पूरी तरीके से पढ़ने में लगा देगा। यह आपको बात समझ में नहीं आ रही। एक बहुत ही इजी सा एग्जांपल देता हूं जो आप अच्छे से रिलेट भी कर पाओगे। हम में से बहुत सारे ऐसे लोग

7:44 हैं जो कि टीवी देखतेदेखते सो जाते हैं जो कि मूवी देखतेदेखते सो जाते हैं या फिर जो कि म्यूजिक सुनते-सुनते सो जाते हैं। टीवी देखतेदेखते अचानक से नींद हमें क्यों आ जाती है? म्यूजिक सुनते-सुनते अचानक से नींद क्यों आ जाती है? क्योंकि यदि हमारे पास में यह सारी चीजें ना हो तो हमारा माइंड सोते समय में कुछ ना कुछ सोचता रहता है। कुछ ना कुछ हमारे दिमाग में चीज चलती रहती है। लेकिन जैसे ही म्यूजिक आ गया जैसे ही टीवी आ गया आपका वो जो सोचने वाला मन था वो उस कहानी में चला गया। वो उस म्यूजिक में चला गया तो आपके माइंड को रिलैक्स हो गया क्योंकि उसे मेहनत नहीं करनी पड़ रही। उसे सोचना नहीं पड़ रहा। और दूसरा जो माइंड है वो आपको बहुत आसानी से नींद दिला देता है। यह इसका एक रीजन है। तो इस तरीके से यदि हम एक ऐसा म्यूजिक यूज करके पढ़े जिसमें कि लिरिक्स नहीं है तो

8:30 यह भी हमारे फोकस को बढ़ाता है। तो मैंने

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