0:00 मैं सच बताऊं इस वीडियो को डालने का मेरा बिल्कुल भी मन नहीं था। अभी अराउंड 6:30 या 6:40 पे इस वीडियो को मैंने अपलोड करा है और मैं अपने फोन में टाइम दिखाऊं तो 5:40 हो रहा है। डेट भी आप देख लो 13th अगस्त। मतलब मैं 40-50 मिनट्स पहले इस वीडियो को रिकॉर्ड कर रहा हूं। मुझे अभी अपने कैमरा से एक्सपोर्ट करना है लैपटॉप में। छोटा-मोटा कट्स वर्ड्स लगाने हैं। उसके बाद मुझे इसको अपलोड भी करना है। थंबनेल भी मैंने नहीं बनाया और इतना सारा काम मुझे 1 घंटे पहले करना है। 1 घंटे का भी टाइम नहीं है। लेकिन मैंने एक्शन लिया। आज मैं सुबह से ना इसी चीज को एनालाइज कर रहा था। एक्चुअली में मेरा जो नेक्स्ट वीडियो आनी है वो किसी और टॉपिक पे आनी है। लेकिन मुझे दो से तीन दिन के लिए आउट ऑफ स्टेशन निकलना है। तो मैं उस वीडियो को अराउंड नेक्स्ट मंडे या ट्यूसडे में अपलोड कर पाता। और इस बीच मेरी लास्ट वीडियो और वो जो वीडियो अपलोड करनी है काफी ज्यादा
0:46 गैप हो जाता। तो कंसिस्टेंसी डिसिप्लिन पता है क्या चीज कहती है कि आप ना बस शो अप करना सीखो। कंसिस्टेंसी का मतलब यह नहीं होता कि हमेशा किसी भी चीज को परफेक्टली करना है कि हमेशा मैं ऐसी वीडियो को डालूं जिसमें प्रॉपर एडिटिंग हो, स्क्रिप्टिंग हो, बी रोल्स हो, सारी चीजें हो, प्रॉपर रिसर्च करी हो उसके बाद वीडियो को अपलोड करूं। इससे मैटर नहीं करता। मैटर यह करता है कि आप कितना ज्यादा शो अप हो रहे हो। ऐसा नहीं है कि यह वीडियो मैं अपलोड करूंगा और आप में से कोई भी जना इस वीडियो को वॉच नहीं करेगा। आप लोग सिर्फ वही वीडियो को वॉच करोगे जिसमें बी रोल्स होंगे, जिसमें एकशंस होंगे, जिसमें प्रॉपर स्क्रिप्टिंग होगी। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। सिमिलरली लाइफ में ना कभी भी फीलिंग और एक्शन में पता है कोई रिश्ता होता ही नहीं है। हमारे पास डेली लाइफ में ऐसीऐसी फीलिंग्स आती हैं जैसे आज मेरे पास आ रही थी। अरे छोड़ो यार दो दिन
1:32 बाद डाल देंगे कौन सा कुछ हो जाएगा। कौन सा कुछ हो जाएगा? अरे अब 5:00 बजे मैं जैसी सब कुछ सेटअप वेट अप कर रहा था। अरे छोड़ो ना यार। YouTube पर कुछ वीडियो देख लेते हैं या नेक्स्ट वीडियो की और कुछ रिसर्च कर लेते हैं या कुछ और काम कर लेते हैं। फीलिंग्स ऐसी आती है। यह फीलिंग आती है कि एक बाइक उठाते हैं। चलो दोस्तों के साथ घूमने निकल जाते हैं। और एक्शंस जब आपको कोई भी एक्शन लेना है ना तो फीलिंग का एक्शन से रिश्ता नहीं है। लेकिन हमें हमारे दिमाग में यह चीज लगता है कि फीलिंग ही हमारे एक्शंस को डिसाइड करती है। फीलिंग मन नहीं कर रहा तो एक्शन नहीं लेते हैं। अच्छा घूमने चले जाते हैं तो चलो ठीक है। घूमने चले जाते हैं। लेकिन आप अगर किसी भी चीज में 2 मिनट के लिए उस चीज को स्टार्ट कर दो। आप अपनी फीलिंग को सेट असाइड कर दो कि भाई तुम 2 मिनट शांत बैठो। मुझे यह चीज करनी है तो करनी है। मैं लिटरली बता रहा हूं। उसके बाद आप अपने आप को रोक ही नहीं पाते हो। जैसे मैंने जैसे
2:19 ही ये सेटअप करा मेरी फीलिंग फीलिंग भाड़ में जाए। मैंने कैमरा ऑन करा या माइक सेटअप करा और मैं अभी आपके सामने बोल रहा हूं। अब मुझे खुद ही नहीं पता मैं कितनी देर तक बोल सकता हूं। मेरे पास रुकने के लिए अब कोई पॉज का बटन है ही नहीं जब तक मैं खुद नहीं जाऊंगा। मेरी फीलिंग यह नहीं कह रही कि रुक जाओ। मेरी फीलिंग कह रही है सब कुछ इस कैमरे में बोलना शुरू कर दो। तो यही चीज होती है एक्शन और फीलिंग में। आपकी फीलिंग अगर आपको कंट्रोल करने लग जाए ना और आप उसके अकॉर्डिंग अपने एक्शंस को लेना शुरू कर दोगे तो आप कभी भी उन चीजों को अचीव ही नहीं कर पाओगे जिस चीज को आप अपने दिमाग में डेली टारगेट्स ले चलते हो। आपको उस फीलिंग्स को सेट असाइड करना है। आपको शो अप होना सीखना है। देखो मोटिवेशन इज अ डिफरेंट थिंग। अगर आप किसी भी काम को करने के लिए बार-बार मोटिवेशन के पीछे भाग रहे हो तो आप समझ लो वो आप जबरदस्ती कर
3:04 रहे हो। देखो होता क्या है? कभी कबभार कुछ चीजें ऐसी होती हैं ना जिस पे हमें मोटिवेशन से ज्यादा डिसिप्लिन या कंसिस्टेंसी पर काम करना पड़ता है। जैसे कि अगर हमें अपनी बॉडी को शेप में ले आना है तो हमें पता है इसके लिए जिम जाना पड़ेगा। अब जिम जाने के लिए ना मोटिवेशन के अगर एक घंटे पहले वीडियो देख लेते हैं, आधे घंटे पहले वीडियो देख लेते हैं तो मोटिवेशन दो-ती दिन तक तो काम करेगी। उसके बाद आप फिर घर बैठ जाओगे और आपकी जो बॉडी है वो ट्रांसफॉर्म नहीं हो पाएगी। तो यहां पे आपको क्या करना है? एक्शन लेना है। अब फीलिंग पता है क्या कहती है? यार आज जिम छोड़ो आज कुछ और काम कर लेते हैं। आज मेरे पास बहुत ज्यादा वर्क लोड है। यह दिमाग कह रहा है बहुत ज्यादा वर्क लोड है। आज जिम नहीं जाते हैं। आपका दिमाग आपके एक्शंस के ऊपर भारी पड़ने लगा। लेकिन एक बार आपने शूज पहन लिए, सॉक्स पहने, टी-शर्ट पहनी जिम वाली और दो मिनट के लिए बस घर से बाहर
3:50 निकल गए। मैं गारंटी लिख के दे दे रहा हूं। आप घर लौट कर वापस नहीं आओगे। क्योंकि सबसे हार्डेस्ट पार्ट पता है क्या होता है? घर छोड़ देना। मतलब किसी भी चीज पर एक्शन लेना। जैसे मैंने अभी एक्शन लिया। अब मैंने बताया ना अब मैं वापस नहीं आऊंगा। अब यह वीडियो शूट होगी और यह अपलोड होगी YouTube के ऊपर। तो सिमिलरली आपको अपनी प्रायोरिटीज आपको अपने लाइफ के जो गोल्स हैं उसको लिखना है और उस पे यह कहना है इससे फर्क नहीं पड़ता कि मैं अपना बेस्ट दूं। इससे फर्क नहीं पड़ता कि मुझे पूरी तैयारी से करना है। फर्क इस चीज से पड़ता है कि मुझे वहां पर एक्शन लेना है। मुझे वहां पर खड़ा होना है। जैसे मान के चलो एक आपको एक ट्री है। एक पेड़ है उसको काटना है। आप सुबह आए आपने उसपे एक एक्स मारा। ठीक है? तो उसमें कट लगा। आप 2 घंटे बाद आए आपने दो-तीन और एक्स मारे उस पे कट लगा। अब आप नेक्स्ट डे फिर से आए। आपने
4:36 चाहे हल्की सी कुल्हाड़ी भी मारी ना तो वो जो कट लगा हुआ है उस पे आपने कुल्हाड़ी जैसी मारी। वो एक्स से जो कट था वो और ज्यादा डीप होता गया और ज्यादा गहरा होता गया। तो आपको लग रहा है कि आपके उस हल्के से कट से कोई फर्क नहीं पड़ रहा। लेकिन फर्क पड़ रहा है। और एक दिन ऐसा आएगा जब आपका वो छोटा सा एक्स जब आप डेली मारते रहोगे, मारते रहोगे वो पूरा पेड़ कट जाएगा। अगर आपको कोई भी चीज करनी है तो प्लीज आई एम फ्रैंकली सेइंग किसी भी चीज का वेट मत करना कि मेरे पास अच्छे गिय्स हो। मेरे पास अच्छा कैमरा आ जाए या मेरे पास अच्छा पहले माइक आ जाए या जिम के लिए अच्छी टी-शर्ट आ जाए या जिम के लिए अच्छे शूज आ जाए उसके बाद मैं जिम जाऊंगा उसके बाद मैं YouTube चैनल बनाऊंगा। आप चैनल नहीं बना पाओगे। आप जिम नहीं जा पाओगे। आज डाइट नहीं ली कोई फर्क नहीं पड़ता। पानी पियो, कॉफी पियो फटाफट जिम भाग जाओ। माइक अच्छा नहीं है। फोन को ऐसे उल्टा पकड़ो। उसको रिकॉर्ड करो। पास रखो। कैम फैन को ऑफ
5:23 करो। घर में एसी है तो बहुत अच्छी बात है। वह भी नहीं है तो सुबह मॉर्निंग में जल्दी उठो। लाइट नहीं है। विंडो की लाइट से रिकॉर्ड करो। लेकिन एक्शंस लो क्योंकि जब एक्शंस लोगे तब आप आगे बढ़ना शुरू कर दोगे। 90% लोग आज भी एक्शंस नहीं ले रहे हैं तो आपके पास कंपटीशन की कोई भी कमी नहीं है। मतलब कंपटीशन है ही नहीं। और जिस दिन इन 90% लोगों ने भी एक्शन लेना शुरू कर दिया ना, यह चीज उन लोगों ने भी समझ ली। मैं फ्रैंकली बता दे रहा हूं। यह लोग आपको छोड़ेंगे नहीं। आपको उस दिन महसूस होगा कि लाइफ में किसी भी चीज को पाना कितना ज्यादा टफ है। आज टफ नहीं है क्योंकि 90% लोग मैं सच बता रहा हूं अभी भी एक्शंस नहीं ले रहे हैं। वो अभी भी यही सोच रहे हैं कि पहले यह आ जाए, पहले वो आ जाए, पहले यह आ जाए उसके बाद स्टार्ट करेंगे। बस। सो दैट्स इट फॉर दिस वीडियो।
6:09 मेरा नाम है सार्थक विरमानी। और अगर आपको यह वीडियो अच्छी लगी हो तो लाइक जरूर कर देना। एंड दिस चैनल इज ऑल अबाउट गेटिंग थिंग्स बेटर। मिलते हैं आप लोग से नेक्स्ट वीडियो में बहुत जल्दी। थैंक यू।