0:00 नमस्कार साथियों स्वागत है आप सभी का अंकित इंस्पायर्स इंडिया पर। मैं हूं अंकित अवस्थी। आज की हेडलाइंस में जिनकी हम चर्चा करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा, डोबाल साहब की रूस यात्रा, ट्रंप द्वारा भारत पर अतिरिक्त 25% टेरिफ और भारत का वो कड़क-कड़ाता जवाब जिसकी कल्पना अमेरिका कर नहीं रहा था। आज के सेशन में इन सभी सुर्खियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। लेकिन कहानी में मजा तब आता है जब भारत जैसे सोए शेर को अमेरिका जगा देता है। यह बात मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि लगातार लंबे समय से गलत बयानबाजी कर रहे ट्रंप को उम्मीद नहीं थी कि भारत रिटेलिएशन में यह सब कर देगा। कैसा रिटेलिएशन? ट्रंप
0:46 एक्सपेक्ट कर रहे थे कि मैं इन्हें दबाता रहूंगा। सीजफायर के नाम पर कहता रहूंगा कि मैंने कराया, मैंने कराया। यह लोग चुप ही रह जाएंगे। लेकिन भारत ने स्पष्ट कहा। ऐसा कहा कि बेचारों की नोबल की दावेदारी अब लग नहीं रहा कि कोई कर पाए। इसीलिए इन्हें लगता है कि जिस काम के लिए यह राष्ट्रपति बनना चाह रहे थे कि मैं रूस यूक्रेन युद्ध को एक दिन में रुकवा दूंगा वो साल भर होने से पहले तो रुक जाए। कम से कम इन्हें कोई क्रेडिट तो दे दे। इसीलिए इन्होंने भारत पर दबाव बनाने का प्रयास किया। कैसा दबाव? भारत पर दबाव यह कि आप रूस से तेल खरीद कर उसे धन दे रहे हैं जिस धन का उपयोग रूस यूक्रेन के अंदर गोले गिराने में कर रहा है। तो माननीय ट्रंप को जब यह एहसास हुआ
1:31 कि भारत ने हमारे खिलाफ ही काम किया हुआ है। युद्ध तो ना जाने हम कब का रुकवा देते। ये तो भारत वाले हैं जो तेल खरीद लेते हैं। पैसा पहुंच जाता है। पैसे से गोला बनता है। यूक्रेन पिट जाता है। कुल मिलाकर के इन्होंने एक समझदारी भरा कदम चला। लेकिन इस समझदारी भरे कदम पर हमने अपनी प्रतिक्रिया पहले ही दी थी कि असल में ये समझदारी इतना लेट से क्यों आई और यह समझदारी असल में बेवकूफी क्यों है यह हमने बताने का प्रयास आपको किया था| तात्कालिक कारण तो यही है कि इन्हें यह रास नहीं आया कि सच उजागर हुआ। जैसे ही इधर पीएम ने संसद में कथन सत्य कहा, उसके तुरंत बाद यह भड़क कर टेरिफ की घोषणा कर दिए थे। टेरिफ की घोषणा को इन्होंने साथ-साथ कहा कि पेनल्टी लगाएंगे क्योंकि तुम रूस से व्यापार करते हो। आज घोषणा होती है कि 25% एडिशनल टेरिफ लगाएंगे। कल
2:17 रात को जो हमने सेशन किया था उसमें मैंने बताया था कि अमेरिका का एक एनवॉय रूस की यात्रा पर है। अमेरिका रूस पर 8 तारीख तक कड़े फैसले लेगा। ऐसे में भारत से संभव है कि वो पहले ही डिसीजन ले ले। तो जो होना था कल जो बताया था मैंने 24 घंटे में फैसला हो जाएगा वो हो गया। 25% एडिशनल टेरिफ का अनाउंसमेंट हो गया। कुल मिलाकर अब भारत अगर अमेरिका सामान भेजता है तो उसे 50% टेरिफ देना होगा। यह बड़ी हेडलाइन बन जाती है। ट्रंप इंपोज 25% टेरिफ और यह टोटल बन जाता है अब 50%। अच्छा साहब 50% टेरिफ के साथ-साथ और क्या हुआ? इस बात से क्या हम डर जाएंगे? क्या हम रूस से तेल खरीदना बंद कर देंगे? तो मात्र इस मैसेज से समझ जाइए कि डोबाल साहब इस समय रूस की यात्रा पर भी हैं और वो रूस की यात्रा पर
3:04 हैं तो उम्मीदें पूरी हैं कि आप पुतिन साहब से जाकर मिलेंगे। ऐसे समय पर जब आपको धमकाया ये जा रहा हो तेल ना खरीदो आप जाकर राष्ट्रपति से मुलाकात करने पहुंच रहे हो तो क्या कोई अगेंस्ट में खिचड़ी पकाने की बात हो रही है क्या? ये खिचड़ी पकाने की बात आई क्यों? आई इसलिए क्योंकि एक खबर आज और रिलीज़ हो जाती है और वह यह है कि भारत के प्रधानमंत्री इस महीने के अंत में चीनी राष्ट्रपति से मिलने 6 साल बाद इवन गलवान वैली इंसिडेंट के बाद चीन जा रहे हैं। 6 साल में जो कुछ भी बदला हो इतने समय बाद भारत के प्रधानमंत्री चीन की यात्रा पर हैं और चीन की यात्रा की घोषणा ऐसे समय पर हो रही है जब ट्रंप धमकाए जा रहे हैं कि तुम पर इतना परसेंट टेरिफ लगा देंगे। ये सारी बातें तो होती ही हैं और इन सब बातों
3:51 में एक बात साफ है कि आप जितना हमें खींचोगे हम उतना और तुम्हारे विरोध में चले जाएंगे। तुम्हें चिढ़ मचती है रूस के नजदीक जाने पर तो हमारे एनए से पुतिन से मिलने जा रहे हैं। तुम्हें चिढ़ मचती है चाइना से तो हम खुद चाइना के साथ खड़े हो रहे हैं। ऐसे में ट्रंप के लिए यह कितना बड़ा सेटबैक होगा जिसके चलते उन्होंने भारत पर 50% टेरिफ का अनाउंसमेंट कर दिया है। आज के सेशन में विश्लेषण होगा कि इस प्रकार के टेरिफ का कितने दिन तक इसकी लोंगेटिविटी होगी। भारत पर इसके क्या प्रभाव होंगे? भारत ने किस तरह से इसको उकसा रखा है? उन सब बातों पर चर्चा होगी। एक-एक करके सारे मसलों का डिस्कशन होगा। फिलहाल के लिए वाइट हाउस का वो सफेद पत्र देख लीजिए जिसमें इस बात की चर्चा है कि वो ऐसा कर क्यों रहे हैं इंडिया क्योंकि
4:37 रूस से तेल खरीदता है। हालांकि मैं आपको एक बात बता दूं हमसे ज्यादा तेल चाइना खरीदता है लेकिन चाइना पर इनका मुंह नहीं खुला है। इससे तो और ज्यादा स्पष्ट हो गया है कि ट्रंप कितना झूठ बोल रहे थे कि भारत और पाकिस्तान का सीज फायर उन्होंने कराया। क्योंकि जैसे ही ये सच उजागर हुआ उनसे पचा नहीं अकेले भारत पर इन्होंने टेरिफ लाद दिया। जबकि अमेरिका इटसेल्फ में इस बात की मांग उठ रही है कि तुम्हारा ये जो फैसला है ये तुम्हें पता नहीं कि एशिया पेसिफिक में भारत जैसे मित्र को तुमसे कितना दूर ले जाएगा। तुमने भारत पर केवल अपनी ज़िद कि इसको झूठ मान लेना चाहिए था। स्वीकार कर लेना चाहिए था कि भारत-पाकिस्तान सीज फायर अमेरिका ने कराया था। बस ये बात वो एक बार मान ले तो मैं सारी बातें इसके लिए करता
5:23 चला जाऊंगा और भारत ने जैसे ही खुददारी दिखाई अमेरिका को यह बात पसंद नहीं आई। यही कारण है कि सेलेक्टिवली वो चाइना जिससे वो रफ नफरत करता है कंपटीशन रखता है उसके ऊपर टेरिफ ना लगाकर हम पर टेरिफ लगा दिया ये कहते हुए कि तुम रूस से तेल खरीदते हो इसलिए तुम्हारे ऊपर पेनल्टी भी लगाई जाएगी। चलिए कोई बात नहीं। अगर ऐसा भी हुआ है तो कहीं ना कहीं दुनिया को एक संदेश तो है कि भारत रूस के साथ खड़ा है। दूसरा संदेश यह भी है कि अमेरिका को भारत से ईगो क्लैश हो चुका है इस बात का कि भारत तुम हमसे डरे क्यों नहीं? हमारे कहने पर तुमने सच को मतलब झूठ को इग्नोर क्यों किया? तुमने झूठ को झूठ का सामना क्यों किया? क्यों अपनी तरफ से आकर सच बोल दिया?
6:09 ऐसे में अमेरिका की तरफ से प्रॉपर तरीके से बात लिखी गई कि रूस को पैसा मिलता है भारत के तेल खरीदने से जो दुनिया को यह गाते बजाते आए हैं। भारत की तरफ से इस बात पर दुनिया को पहले ही बता दिया गया था यह संदेश देते हुए कि ये दुनिया को मूर्ख बनाता है अमेरिका। खुद अमेरिका रूस से आज भी सामान खरीद रहा है। यूरोप आज भी रूस से सामान खरीद रहा है। इंटरेस्टिंग। अमेरिका के राष्ट्रपति से एक पत्रकार ने जो कि भारत से संबद्ध था। उसने पूछ लिया कि भाई साहब पता चला है आप अभी भी रूस से सामान मंगाते हैं। तो कहते हैं कि ये मुझे मालूम नहीं है। मैं मालूम करके बताऊंगा। हिपोक्रेसी का आप आलम देखिए। यह व्यक्ति कितना बड़ा दोगला है भारत पर इसलिए कि हम तेल मंगा रहे हैं। आप पर प्रतिबंध लगेगा और खुद आज भी यूरेनियम रूस से मंगाता है
6:57 और यह पत्रकार पूछ लेता है तो कहता है कि मैं मालूम करके बताऊंगा कि क्या वाकई में ऐसा है। खैर जो भी है इसका दोगलापन उजागर हुआ है। अब इस दोगलेपन की कीमत क्या चुकाएगा अमेरिका। अब वो समझिए। देखिए यह सत्य है कि अमेरिका को इंडोपेसिफिक में अपने लिए एक अलय चाहिए। एक ऐसा ट्रस्टवर्दी और लॉन्ग स्टैंडिंग मित्र चाहिए जो कि कभी ना कभी चीन के खिलाफ अमेरिकी धड़े में शामिल हो। चीन के खिलाफ उसे पकाया जा रहा था। बाइडन काल में खूब अच्छे से खींचा गया कि आप क्वाड में आई आते क्यों नहीं हैं? आइए ना हम लोग मिलकर के बढ़िया बातें करेंगे। मालाबार एक्सरसाइज करेंगे। चलिए कुछ ऐसा करेंगे कि हम चाइना के खिलाफ अगर फिलीपींस में ताइवान में अगर कोई मसला हुआ तो चल के आएंगे। बाइडन ये लगातार प्रयास कर रहे थे।
7:43 लेकिन इन सारे प्रयासों पर इतने लंबे समय के जो अमेरिकी प्रयास भारत को साथ लाने के थे उन पर इन भाई साहब ने अपने एक झूठ के चलते पानी फिरवा दिया है क्योंकि अल्टीमेटली इन्हें शांतिदूत जो बनना था नोबेल प्राइज जो चाहिए था लेकिन हमने कहा कि नहीं साहब हमारे लिए राष्ट्र प्रेम प्रथम है हम कैसे आपकी बात को मान लें ऐसे में अब हम लोग इस बात से उलट आगे चलते हुए ट्रंप की बातों को और धता बताते हुए रूस की यात्रा पर डोबाल साहब को भेज दिए हैं। अब ये यात्रा अचानक हुई है क्या? मतलब हम घबरा गए क्या कि अमेरिका ने हमारे ऊपर जैसे ही सेंक्शन लगाए अरे चलो अब चलते हैं रूस में चलकर बात करेंगे डोबाल साहब को भेज दिया जी नहीं असल में भारत और रूस की हर साल एक वार्ता होती है जिसमें भारत के एनएसए अमेरिका जाते हैं और भारत की भारत के राष्ट्र अध्यक्ष सॉरी माफी चाहूंगा रूस
8:28 जाते हैं और भारत से रूस और रूस वाले भारत आते हैं। इस तरह की वार्ता चलती रहती है। लास्ट ईयर सितंबर में एनएसए डोबाल रूस में गए थे। और जब गए थे तो वह महीना सितंबर का था। और उस समय मीडिया ने जिस चीज को छापा था वो ये कि ये बहुत ही मतलब कहा जाए तो अविस्मरणीय क्षण है कि पुतिन साहब भारत के एनएसए से मिलने आए थे। भारत के एनएसए को इन्होंने बातचीत की थी। साथ बैठे जनरली ऐसा होता है राष्ट्र अध्यक्ष राष्ट्र अध्यक्ष से मिलते हैं। एनएसए एनएसए से मिलते हैं। विदेश मंत्री विदेश मंत्री से मिलते हैं। एनएसए तो कोई पद सरकार वो लोकतंत्र लोकतंत्र के अंदर विधायकी का या सांसदीय का पत्र नहीं वो नहीं है। मंत्रालय का कोई पद नहीं है। ये तो एक सरकारी नौकरी है। इन व्यक्ति से पुतिन मिले हैं। इसका मतलब उन्होंने अपनी लाइंस
9:14 क्रॉस की थी। प्रोटोकॉल ब्रेक किया था। ये खबर उस समय प्रकाशित हुई थी। अब चर्चा यह है कि उस समय जब उन्होंने ऐसा किया था। हो सकता है डोबाल साहब से इस बार पुतिन फिर से मिले लेकिन खास ये नहीं है। खास ये है पिछली बार सितंबर में ये वार्ता होनी थी। इस बार ये अगस्त में ही हो रही है। इसका मतलब एक साल से पहले ही ये वार्ता होने का असल जो ट्रिगर है वो केवल और केवल ट्रंप है। जिसने इन दिनों जैसे रायता फैलाया हम तुरंत प्रभाव से पहुंच गए कि सर बताइए आगे क्या मोड ऑफ एक्शन होना चाहिए? आपके साथ तेल खरीदना है। क्या तरीका रहेगा? आपके साथ व्यापार रखना है। बताइए किस तरह से हम लोग मिलकर आगे काम करेंगे। यही काम हो रहा है। एक इंटरेस्टिंग बात और है। मैंने आपको कल के सेशन में बताया था एक अमेरिकी प्रतिनिधि पुतिन से मिलने के लिए रूस पहुंच रहे हैं। स्टीव विटकॉफ नाम है इनका।
10:02 ट्रंप के प्रतिनिधि जो रूस में जा रहे हैं उन विटकॉफ का प्रेजेंस इस समय रूस में ही है। चर्चाएं यह भी चल रही हैं कि जो रूस अमेरिका से आया हुआ प्रतिनिधि है जो शांतिदूत बनकर आया है पुतिन को समझाने। हो सकता है उससे भी डोबाल साहब की मुलाकात हो जाए। हालांकि इस बात के केवल कयास लगाए जा रहे हैं क्योंकि पुतिन को यह समझाने ये आए हैं कि भाई साहब मान जाइए क्योंकि आपको पिछली बार कहा था आप नहीं माने इसलिए 8 अगस्त तक का आपको टाइम दिया गया। आपके जो मित्र हैं वो आपसे तेल खरीदना बंद कर देंगे। हमने उनको डराना धमकाना शुरू कर दिया है। इस बीच में भारत का वहां प्रतिनिधि होना यह दर्शाता है कि विटकॉफ को यह संदेश दिया जा रहा हो कि विटकॉफ चिंता मत करो। रूस और भारत अपना रास्ता निकाल लिए हैं। खैर विटकॉफ की यहां यात्रा होती है। तमाम प्रयास हैं कि आने वाले समय
10:49 में पुतिन और डोबाल साहब आपस में मिल लेंगे। दूसरा हमने अपनी सक्रियता में जो काम किया वो यह कि जिस समय अमेरिका हमारे खिलाफ प्रयास कर रहा है कि इन्हें दबाया जाए उसी दौर में हमने एक अनाउंसमेंट कर दिया कि प्रधानमंत्री मोदी एसइओ की समिट में साझा होने के लिए चीन जाएंगे। एसइओ के समिट में 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच में आप चीन की यात्रा पर होंगे। यह दौरात 31 अगस्त और 1 सितंबर के बीच में होगा। वर्ष 2020 में जब गलवान वैली इंसिडेंट हुआ था, उसके बाद मोदी की यह पहली चीन यात्रा होने वाली है। उससे पहले वो 2018 में यहां गए थे और उसके बाद में अब यह यहां जा रहे हैं। तो 6 साल बाद प्रधानमंत्री मोदी की अब चीन में यात्रा हो रही है। हालांकि इस लिहाज से भी प्रधानमंत्री मोदी का यह चीन
11:36 में छठा दौरा होगा और ऐसा करके वो 70 सालों में पहले ऐसे प्रधानमंत्री होंगे, जो इतनी बार चीन गए होंगे। आखिरी बार यह दौरा 2018 में था। जिसके बाद शी जिनपिंग को भारत लाया गया था। शी जिनपिंग भारत आए थे। उनकी तस्वीरें भी आप देख सकते हैं। लेकिन 2020 में गलवान वैली इंसिडेंट हुआ। कई बार तो लोग यह भी कहते हैं कि इसको भड़काने में भी अमेरिका का कहीं ना कहीं रोल रहा होगा। क्योंकि इससे सबसे ज्यादा फायदा अमेरिका को हुआ था। भारत में चीन के बॉयकॉट में तमाम प्रयास हो गए थे। चाइना को बॉयकॉट किया जाना शुरू हो गया था। चीन के विरोध में भारत में मोमेंटम बनकर खड़ा हो गया था और इसी बीच में अमेरिका आ खड़ा हुआ और उसने हमारे कंधे पर हाथ रखते हुए बाइडन का एक टॉप एडी भारत आता है और वो कहता है कि आप चाइना पर फोकस करना छोड़िए
12:23 अमेरिका के साथ चलिए और वो ऐसा कहकर भारत को अपने साथ खींच ले गया। लेकिन पुतिन यह बात जानते थे। पुतिन जानते थे कि एक गलवान इंसिडेंट के चलते भारत चाइना के खिलाफ अमेरिका के साथ जा रहा है। इसे कैसे साथ लाया जाए? पुतिन जहां एक और खुद की लड़ाई 2022 से यूक्रेन में लड़ रहे थे, वहीं दूसरी तरफ वो भारत और चीन को साथ लाने का प्रयास कर रहे थे और हुआ भी। भारत और चीन को साथ लाने के लिए पुतिन ने पिछली बार ब्रिक्स समिट जो कि कजान रशिया में हुई थी। उस समिट के अंदर चीन के राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री का हाथ मिलवा दिया था। इस पर हमने आज से एक साल पहले सेशन किया था और बताया था कि किस तरह से दोनों को साथ लाने में पुतिन ने कामयाबी हासिल की थी। प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग
13:10 2000 सन सन 2020 के बाद लास्ट ईयर इस तरह से हैंडशेक करते हुए दिखे थे जो कि अमेरिकी नीतियों पर पानी फेरने के समान था। ट्रंप जब आए तो ट्रंप को यह रियलाइज हो गया था कि पुतिन कहीं ना कहीं ब्रिक्स कंट्रीज को ब्राजील, रशिया, इंडिया, चाइना और साउथ अफ्रीका को एक करने का प्रयास कर रहे हैं। ट्रंप इस बात से भयभीत हुए और इसी के चलते उन्होंने पिछले ही साल एक ट्वीट मार दिया और कहा कि अगर अमेरिका के खिलाफ यह ब्रिक्स कंट्री सोचते हैं कि वो कुछ नया तरीका कर लेंगे तो याद रखिएगा उन पर मैं 100% टेरिफ लगा दूंगा। उनका कोई भी माल चाइना में बिकने नहीं दूंगा। हमने इस बात को सुना तो था लेकिन धीरे-धीरे अब हम इस दिशा में आगे बढ़ने लगे हैं। ऐसा मैं क्यों कह रहा हूं? आप आप नोटिस करिए
13:56 ब्रिक्स के लिए जो ये धमकी थी वो किन देशों के लिए थी? ब्राजील। ब्राजील में फिलहाल लू ऑलरेडी इतने भड़के हुए हैं ट्रंप पर कि उन पर ऑलरेडी 50% टेरिफ लगा हुआ है। उनके खिलाफ बालसेनारो की कहानी मैंने सुनाई है। आगे भी दिखाऊंगा। वो भड़के पड़े हैं। रामा फोसा को बिठाकर इन्होंने बेइज्जत किया था साउथ अफ्रीका वालों को अमेरिका में। दो ब्रिक्स के अंदर बी और एस खिलाफ हो ही गए। अब आरआईसी में आप जानते हैं रशिया के खिलाफ भड़के पड़े हैं। इंडिया के खिलाफ हो चुके हैं। चाइना तो पहले ही कंपटीिट है। तो ये पांचों देश एक हो रखे हैं। और ऐसे में इन पांचों देशों की ही कहानी अब बड़ी कहानी बन रही है। और इसी के चलते ईरान ऑब्जर्वर लिखता है ट्रंप का पागलपन देखने वाला होगा क्योंकि ये उन्हें बैक फायर कर जाएगा क्योंकि भारत के प्रधानमंत्री छ साल बाद चीन की यात्रा पर जा रहे हैं। दुनिया वाले
14:42 अब इसे लिखने लगे हैं। एक मेगाट्रोन करके न्यूज़ चैनल का एक हैंडल है। वो कवर कवर करता है कि भाई ट्रंप भारत पर सेंक्शन लगा रहे हैं। भारत रशिया की यात्रा चीन की यात्रा पर जा रहा है। यह दर्शाता है कि इंडिया और चाइना ने ऑफिशियली रिजेक्ट कर दिया ट्रंप के अल्टीमेटम को कि तुम रूस से तेल खरीदना बंद कर दो। यह बात जब न्यूज़ में आती है कि रूस रूस के साथ रहना डिसाइड कर लिया है इंडिया और चाइना ने। तेल खरीदने पर साफ इंकार कर दिया है कि हम अमेरिका की बात नहीं मानेंगे। इस बात को अलेक्जेंडर डूगिन रिपोस्ट कर देते हैं। मतलब कि यही लाइन जो लिखी है ये सच है। ऐसा कहकर अलेक्जेंडर डूगिन। अब ये कौन है? अलेक्जेंडर डूगिन वह व्यक्ति हैं जिन्हें पुतिन का दिमाग कहा जाता है। यह वह व्यक्ति हैं जो पुतिन के विदेशी मामलों के
15:27 सलाहकार कहे जाते हैं। लंबे समय से यह पुतिन के साथ हैं। फॉरेन पॉलिसी के मामले में पुतिन के साथ मतलब दिमाग इन्हीं का चलता है। मतलब एक तरह से समझिए कि ग्लो जो डूगिन है वही पुतिन की मेमोरी है या फिर कहिए तो प्रोसेसर है कि वो दुनिया को कैसे देखेंगे। तो डूगिन बताएंगे। तो डूगिन ने जिस ट्वीट को रीपोस्ट किया इसका सीधा सा ऑफिशियल मीनिंग ये निकाला जा सकता है कि इंडिया ने और चाइना ने ट्रंप की धमकियों को बाईपास कर दिया है। कहा है कि हम रूस से तेल खरीदते रहेंगे। तुम्हें जो हो वो कर लेना। ऐसे में भारत इतना बड़ा कदम अगर उठा रहा है तो इसके पीछे कहीं ना कहीं ब्रिक्स की कोई साझा रणनीति होगी। मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं? इन पांचों लोगों को पहचान लो। शुरुआत भले ही लूला से कर लो। लूला को चाइना अमेरिका वाले काफी धमका रहे थे। साथ ही साथ में रामा फोसा के साथ जो
16:14 किया वो आपके सामने है। बिठाकर वाइट हाउस में जो इंसल्ट की जिस पर हमने वाइट हाउस में जेलस्की 2.0 करके एक सेशन किया था। साउथ अफ्रीका ने इस बात में बहुत ज्यादा ट्रंप के खिलाफ फिर भला बुरा कहा था। लेकिन ट्रंप गुस्सा हो के उसके ऊपर 30% टेरिफ लगा दिए। ऐसे में लूला की अगर बात करें तो बालसेनारों को बचाने के लिए लूला के खिलाफ इन्होंने अपनी तरफ से एक्शन लिया था। अपनी पाठशाला पर हमने इस पर सेशन किया था कि अफ्रीका और ब्राजील अमेरिका और ब्राजील झड़क क्यों झगड़ क्यों रहे हैं? और उस झगड़े के चलते ब्राजील पर भी इन्होंने 50% टेरिफ लगा दिया था। वो लूला जो अब यह कह रहे हैं कि अमेरिका वालों सुन लो ट्रंप से तो मैं बात भी नहीं करूंगा क्योंकि ट्रंप ने बयान में यह कह दिया था कि मैं ब्राजील पर 50% टेरिफ लगा रहा हूं। लूला मुझसे बात करने आएंगे। लूला ने कहा सुनो बेटा बात तो छोड़ो तुम हमसे बात कर लेना। हम तुमसे बात नहीं करेंगे। ऐसा कह
17:00 के लूला अपना एक बयान दे देते हैं। और वो कहते हैं कि मैं ट्रंप से बात नहीं करूंगा। अगर मुझे बात ही करनी है तो मैं पुतिन से करूंगा। मैं शी जिनपिंग से करूंगा। मैं मोदी से करूंगा। मतलब एक तरह से ब्रिक्स के ये पांचों नेशन अमेरिका के खिलाफ अब प्रताड़ित भी अमेरिका से प्रताड़ित भी हो चुके हैं और अमेरिका के खिलाफ एक भी होने का सोच सकते हैं। ऐसे समय पर सोचना जब लूला तो लंबे समय से साइन दे रहे हो कि मैं तो अमेरिका के खिलाफ ही हूं। ऐसे में इन लोगों का लूला हो या रामाफोसा इनका मोदी जी के साथ होना यह दर्शाता है कि कहीं ना कहीं कुछ ऐसा खिचड़ी पक रहा है जहां ये पांचों देश अमेरिका को काउंटर करने की कोई साझा रणनीति ला सकते हैं। पिछली बार जब खजान में ब्रिक्स की बैठक हुई थी तब एक नकली नोट ब्रिक्स करेंसी के नाम पर जारी किया
17:46 गया था जिससे ट्रंप मचल गए थे। कहीं यह सच्चाई ना हो जाए यह देखने वाली बात होगी। क्योंकि ब्रिक्स के पांचों की पांचों जो फाउंडिंग मेंबर हैं वो इस समय इनसे तने हुए हैं। इनके खिलाफ कुछ भी अब नया रास्ता उठा सकते हैं। भारत 25% एडिशनल टेरिफ का वेलकम कर रहा है कि ठीक है सर आपको लगता है 25% टेरिफ लगाना था लगाइए लेकिन याद रखिएगा इंडिया विल टेक ऑल एकशंस नेसेसरी टू प्रोटेक्ट इट्स नेशनल इंटरेस्ट। साथियों यह काम बहुत पहले हो जाना चाहिए था। भारत को ट्रंप के झूठ के खिलाफ पहले ही खड़ा हो जाना चाहिए था। लेकिन देर से आए दुरुस्त आए। समस्त भारतीयों को आवश्यकता है यह समझने की कि नव उपनिवेशवाद के इस दौर में जब भारत अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए रूस से तेल खरीद रहा है ना
18:32 केवल खरीद रहा है बल्कि दुनिया में तेल की कीमतों में स्थिरता लाता है। स्थिरता। क्यों? क्योंकि एक तरफ जब वेस्टर्न वर्ल्ड ने रूस से तेल खरीदना बंद किया तो उन्होंने जो पहले से परंपरागत स्रोत थे चाहे गल्फ कंट्रीज या वेनेजुएला जैसे देश वहां से तेल खरीद करके रास्ता परिवर्तित कर दिया था। तेल को प्रभावित कर दिया था। भारत ने तो दुनिया में तेल की कीमतों को बरकरार रखने में मदद दी है। लेकिन अमेरिका वाले इस बात को नहीं समझते तो भारत ने कहा कि हम अपने हितों का ख्याल पूरी तरह से रखेंगे। देखना होगा साथियों आने वाले समय में भारत पर अत्यधिक कितने टेरिफ लगाए जा सकते हैं। मेरा मानना है कि ये कहीं ना कहीं डेढ़ महीने के भीतर भीतर 100% टेरिफ का एक बार तो हमें टेस्ट दिलाएंगे। हालांकि टिक नहीं पाएंगे क्योंकि भारत अब अकेले इस मामले को नहीं लेकर चलने वाला
19:19 है। कहीं ना कहीं वो रूस, चाइना, ब्राजील इन साउथ अफ्रीका इन सबको साथ में लेकर क्योंकि 50-50% पर पहुंच चुके हैं भारत और ब्राजील 30% पर साउथ अफ्रीका। चाइना वालों के साथ डील की बात चल रही है। रशिया ऑलरेडी सेंशंड है। ऐसे में अगर ये पांचों कुछ खिचड़ी पकाते हैं और दुनिया में अमेरिका को आइसोलेट करने का कोई प्लान ले आते हैं तो ये दुनिया के लिए एक अपने आप में बड़ी मिसाल कायम करेगा। बाकी आप लोग इस विषय पर क्या सोचते हैं? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर रखिएगा। साथियों अगर आप राजस्थान से हैं और राजस्थान के इतिहास में रुचि रखते हैं तो आज हमने एक बहुत ही बेहतरीन सेशन पैनल डिस्कशन में रखा था जिसमें मराठों के अभी हाल ही में क्या हुआ है कि एनसीईआरटी की किताब में मराठों का एक मैप दिखाया गया है। उस मैप में राजस्थान के बहुत से क्षेत्रों को ये दिखाया है कि कभी वो मराठों के गुलाम थे।
20:06 इस बात पर हमने हिस्टोरिक तरीके से ये दिखाने का प्रयास किया है। आप समझिएगा उस बात को कि इसमें कितनी तथ्यात्मक त्रुटि है। एनसीईआरटी असल मायने में कहां गलतियां कर रही है, क्या सही कर रही है। अगर आप राजस्थान का परिपेक्ष जानना चाहते हैं तो अंकित इंस्पायर्स राजस्थान पर आ जाइए। वहां पर खबरों का विश्लेषण राजस्थान के लिए हो रहा है। लिंक उसका कमेंट बॉक्स में पिन है। बाकी हमारे एप्लीकेशनेशंस, अपनी पाठशाला और बातें बाजार की पर जाते रहिए। वहां पर हमारे नए-नए कोर्सेस, हमारे बुक्स, हमारे कोर्सेस उपलब्ध हैं। आप उन्हें एक्सेस कर सकते हैं। आपका समय शुभ हो। बहुत-बहुत धन्यवाद।