0:00 दिल हमारा टूटा हुआ था या शरीर थका हुआ था उनसे मिले तो क्या बात है यह ओरा होता है जो हर दिन नई महाभारत हमारे खिलाफ ही रचते क्योंकि जहां देश का राजा चला जाए वहां कोई ईश्वर था क्योंकि राजा वहीं जाते हैं जहां देवता आते हैं बाकी राजा कहीं नहीं जाते सब लोग राजाओं के पास आते हैं करोड़ों लोग टिकट लेकर ओलंपियंस को देखेंगे कौन है ओलंपियंस जिनमें एंथूसियाज्म है पैशन है जुनून है जज्बा है लड़ने की हिम्मत है उसी नेता को सुनने के लिए भीड़ लगेगी तो पूरे जोश से जुनून से पैशन से एंथूयाज्म से जॉयफुली बोलता है तो रुपया नीचे गिर रहा है डॉलर ऊपर बढ़ रहा है कि इससे आगे हम नहीं मिलते दोस्त। अगर इससे आगे बढ़ोगे तो फिर गोली चलेगी। इससे आगे बढ़ोगे तो युद्ध माना जाएगा। और कुछ लोग होते हैं जो हर जगह संघर्ष कर रहे होते हैं। क्योंकि यूनिवर्स में डॉलर नहीं चलता। यूरो भी नहीं चलता और पाकिस्तानी
0:46 रुपया तो कतई नहीं चलता। अगर आप ये चाहें कि मैं दूसरों का अपमान करूंगा फिर भी मेरी स्टेटस, मेरी रेपुटेशन, मेरी इज्जत बढ़ेगी। ऐसा नहीं होगा। चाहे आप देश के पीएम भी क्यों ना हो। अगर आप किसी एक चपड़ासी को भी गाली देते हैं ना उसी वक्त आपने खुद की इज्जत कम कर दी। आप जिंदगी में जो चीज चाहते हो बिना आपका विश्वास आत्मविश्वास डगमगाए उसके लिए पूरा प्रयास करो। [संगीत] यूनिवर्सल लॉज़ और आप कह सकते हैं उनको लाइफ लॉज़। न्यूटंस लॉज़ ऑफ़ मोशन समझ कर आपकी जिंदगी बदले ना बदले। लेकिन ये जो लॉस है पैराडाइज लॉ से आपकी लाइफ बदले ना बदले लेकिन ये वो लॉज़ हैं जो आइंस्टाइन की
1:33 थ्योरी से बहुत आगे के हैं। रिलेटिव मोशन से बहुत आगे के हैं। काइनेटिक और पोटेंशियल एनर्जी से बहुत आगे के हैं। देखिए मैं जैसा कि आप सभी को पता है कि हम एक मिशन पर हैं जिसका नाम है ओजस्वी तेजस्वी तपस्वी भारत और उसका उद्देश्य हिंदुस्तान के 10 करोड़ लोगों को दिमागी रूप से स्टिल माइंड यानी स्थिर दिमाग और स्टील बॉडी यानी कि स्टील के तरीके का शरीर ये देने का मेरा लक्ष्य है। और उसके बाद में जो होता है वो ऊपर वाला जाने। लेकिन आज उद्देश्य है जिंदगी के लॉस समझने का। जो न्यूटंस लॉ ऑफ़ मोशन से बहुत आगे के हैं। खैर देखिए लाइफ का मतलब क्या है? ऐसा आपने देखा होगा कि यार कुछ लोग हमारी जिंदगी
2:21 में ऐसे होते हैं जिनको हम लोग देखते हैं वो हर चीज में गजब कर रहे होते हैं। प्रोफेशन में, पर्सनल लाइफ में, फिजिकल हेल्थ में, मेंटल हेल्थ में, स्पिरिचुअल हेल्थ में, हर एक आस्पेक्ट में। और कुछ लोग होते हैं जो हर जगह संघर्ष कर रहे होते हैं। यह क्यों है? जबकि जिंदगी की बात की जाए तो लाइफ इज टाइम मल्टीप्लाई एनर्जी। जिंदगी जो है वह क्या है? समय गुणा ऊर्जा। देखिए बहुत क्लियर है। अगर आप यह कहो कि लाइफ का मतलब सिर्फ साल होता है कि मैं 100 साल जिया कि मैं 80 साल जिया तो स्टेटमेंट गलत है। मान लीजिए कोई इंसान 90 साल जिया लेकिन
3:06 कोमा में जिया तो क्या जिया? तो टिंकू जिया हो गया। हम पल-पल ना माने टिंकू जिया। जिंदगी का मतलब सिर्फ उम्र नहीं है। सिर्फ समय नहीं है। जिंदगी का मतलब समय भी है और ऊर्जा भी है। देखिए यह बहुत बड़ी सच्चाई है। आप अगर मैं समय की बात कर लेता हूं ना तो हर किसी के पास में 1 दिन में 24 घंटे हैं। 1440 मिनट है। और आगे बढ़ जाओ तो 46 86400 सेकंड्स। बट फिर ऐसा क्यों? कि एक इंसान भिखारी है। एक इंसान मजदूर है और एक इंसान महान बन गया। एक इंसान पीएम बन गया। एक इंसान प्रेसिडेंट बन गया। सारा खेल इमोशंस का है।
3:53 क्योंकि हमें अक्सर जो सिखाया गया स्कूल्स में सिखाया गया, स्कूल्स ने अपने बोर्ड के रिजल्ट के हिसाब से सिखाया, कोचिंग्स ने अपने कॉम्पटीशन एग्जाम के रिजल्ट्स के हिसाब से सिखाया और सिखाया गया कि जिंदगी में टाइम ही सब कुछ है। इफ यू मैनेज योर टाइम यू विल मैनेज योर लाइफ। लेकिन ये एक फेक स्टेटमेंट है। जिंदगी में टाइम एक आस्पेक्ट है। क्योंकि टाइम सबके पास में कांस्टेंट है। इट इज़ नॉट अबाउट टाइम। ये टाइम का खेल है ही नहीं। यह खेल है एनर्जी का यानी कि ऊर्जा का और ये काइनेटिक एनर्जी नहीं है। यह पोटेंशियल भी नहीं है। है कि नहीं? जैसे मान लो आप किसी कार में बैठ गए। अब आप तो रेस्ट पे हैं। कार तेजी से भाग रही है तो आपको मिल गई काइनेटिक एनर्जी। बट यू आर नॉट मूविंग।
4:40 आप किसी लिफ्ट में बैठे हैं। लिफ्ट आपको ऊपर ले गई। तो आप में पोटेंशियल एनर्जी तो आ गई लेकिन आपका एफर्ट नहीं था उसमें। इट इज़ नॉट अ काइनेटिक एनर्जी। इट्स नॉट पोटेंशियल एनर्जी। इट इज समथिंग डिफरेंट। मैं कहूंगा कि यह फिजिकल, मेंटल, स्पिरिचुअल और सेक्सुअल एनर्जी भी नहीं है। इट इज डिफरेंट। एंड दैट्स व्हाट डिफाइन द लॉज़ यूनिवर्सल लॉज़। क्योंकि यूनिवर्स में डॉलर नहीं चलता। यूरो भी नहीं चलता। और पाकिस्तानी रुपया तो कतई नहीं चलता। वहां चलती है यह। दैट इज इमोशनल एनर्जी। इमोशनल एनर्जी। दिस इज द करेंसी ऑफ यूनिवर्स।
5:25 दिस इज द करेंसी ऑफ यूनिवर्स। एंड दिस डिसाइड्स एवरीथिंग। आपकी जिंदगी कितनी बड़ी है। आपकी जिंदगी बिग कितनी है? देखिए लॉन्ग लाइफ इज़ वन थिंग। बिग लाइफ इज़ अनदर थिंग। लॉन्ग लाइफ विल डिफाइंड बाय द टाइम। बट द बिग लाइफ। आपने एक डायलॉग सुना होगा बाबू मोसाय। जिंदगी बड़ी होनी चाहिए लंबी नहीं। शायद आपने सुना होगा यह। शायद आपने सुना हो। तो हमें ये समझना है कि टाइम इज लॉन्ग लाइफ बट टाइम मल्टीप्लाई एनर्जी इज बिग लाइफ। और मैं उसी की बात कर रहा हूं। इफ आई से ओजस्वी, तेजस्वी, तपस्वी भारत। तो मैं आपको वो सिखाना चाहता हूं जो ना फिजिक्स में सिखाएगा, ना केमिस्ट्री में, ना बायोलॉजी में, ना मैथमेटिक्स में
6:12 ना किसी क्लास में। बाबू मचा जिंदगी लंबी नहीं बड़ी होनी चाहिए और वह डिसाइड करती है दिस इमोशनल एनर्जी जिसको आप ओरा भी बोल सकते हो ओरा ऑफ पर्सन आपने देखा होगा सम पीपल आर एक्सट्रीमली अट्रैक्टिव दे हैव एक्सट्रीमली पॉजिटिव वाइब्स कि उनसे बात करो तो लगता है कि हमारा कुछ छूटा हुआ हिस्सा आज शरीर में समा गया शरीर का कुछ टुकड़ा था ऐसा जो दिल हमारा टूटा हुआ था या शरीर थका हुआ था उनसे मिले तो क्या बात है ये ओरा होता है। एंड दिस ओरा इज़ व्हाट? इमोशनल एनर्जी। इसको आप वाइबेशंस भी बोल सकते हैं। यू कैन से ओरा वाइब्रेशन फ्रीक्वेंसी
6:57 एंड एट द एंड इट इज़ e² दैट इज़ इमोशनल एनर्जी। a² + b² समझ में आए या ना आए? e² इज़ एवरीथिंग। a + b² कितना होता है? a² + 2ab + b² ये 2ab कहां से आया? यह सिखाने में नहीं आया हूं। आई जस्ट वांट टू टीच यू द इमोशनल एनर्जी दैट इज ई स्क्वायर। एंड वंस यू अंडरस्टैंड दिस योर लाइफ विल बी डिफरेंट लेवल। हां ये आसान नहीं होगा। इट इज़ नॉट स्विच ऑन। स्विच ऑफ बटन कि ऑफ कर दिया बंद। खत्म। टाटा बाय-ब गया। गुड बाय। चला गया है ना? और ऑन कर दिया तो आ गया। ऐसा नहीं है। इट्स कॉन्सेंट प्रैक्टिस। इस दुनिया में हर महान चीज एक अभ्यास है। बोलना एक अभ्यास है। मेडिसिन एक प्रैक्टिस है, लॉ एक प्रैक्टिस
7:44 है, पॉलिटिक्स एक प्रैक्टिस है, टीचिंग एक प्रैक्टिस है। सब कुछ प्रैक्टिस है। तो हमें ये जान लेना है दैट इमोशनल एनर्जी इज़ एवरीथिंग। अब क्यों ऐसा मैं क्यों बोल रहा हूं? उसके पीछे भी कोई ना कोई तो रीज़न रहा होगा। देखिए, 5 मिनट आप गुस्सा करें। बहुत आपको किसी चीज के ऊपर बहुत बेकार फील हुआ और पांच मिनट जैसे मान लो गुस्से की बात को साइड में रखते हैं। मान लो इंडिया वर्ल्ड कप हारा 50 ओवर वाला जैसे ही हारा लगा कि शरीर कोमा में चला गया। शरीर की सारी एनर्जी खत्म हो गई। जबरदस्त थकान हो गई। वो क्या थे? इमोशंस थे। 5 मिनट आप जोर से गुस्सा करें और आप
8:32 पाएंगे कि आपकी 5 घंटे की एनर्जी चली गई। अच्छा कई बार ऐसा होता है कि हमारी जिंदगी में कुछ अच्छा हुआ और उस पूरी रात नहीं सो पाते और कई बार हमारी जिंदगी में कुछ ऐसा होता है कि हम पूरे दिन सोए हो फिर भी कुछ ऐसा सुनाई पड़ा कुछ ऐसा ऐसी बात पता चली कि बस थक के टूट के सो गए हम। वो इमोशंस हैं। वो ओरा है। वो फ्रीक्वेंसी वाइबेशंस है। एंड दोज़ डिसाइड्स एवरीथिंग। देखो क्या है? एक चीज हम लोग को समझ लेनी है। अगर मैं एनर्जी की बात करूं या मैं टाइम की बात करूं क्योंकि इन दोनों का मल्टीप्लाई मैंने लाइफ को बोला है। टाइम मशीनंस डिसाइड करती है कि भाई ये घड़ी चलेगी।
9:19 इस घड़ी में 24 घंटे ही है। मशीन डिसाइड करती है। मतलब दिस इज़ अगेन दिस इज़ लिमिटेड। क्योंकि मशीन ने डिसाइड किया। दिस इज नॉट लिमिटेड। यह आपके इमोशंस डिसाइड करेंगे दैट हाउ आर यू फीलिंग। क्योंकि आपकी फीलिंग ही आपका सब कुछ डिसाइड करेगी। आपने देखा होगा ऐसा बहुत टैलेंटेड लोग होते हैं लेकिन उनकी जिंदगी में उनके आसपास के लोग ऐसे होते हैं जो उनको खत्म कर देते हैं। क्रैश कर देते हैं। संगत की रंगत होती है। अगर कोई इंसान महान लोगों के बीच में है तो खुद भी महान होने लगता है। लेकिन कई बार हम परिवार में ही ऐसे जोकरों के बीच फंस जाते हैं जो हर दिन नई महाभारत हमारे खिलाफ ही रचते हैं।
10:05 तभी तो बात बनी है कि हमें तो अपनों ने लूटा। गैरों में कहां दम था। मेरी कश्ती डूबी वहां जाप पानी कम था। यह कौन हैं? ये चक्रव्यूह रचने वाले कौन हैं? इनकी नेगेटिव वाइबेशंस है। नेगेटिव एनर्जी है। वो रोक लेते हैं उस इंसान को। कुछ नहीं करने देते। टैलेंट होने के बावजूद खत्म कर देते हैं उसको। मैं ऐसे तरीके आपको बता रहा हूं। तो दिस इज़ नॉट लिमिटेड। बट दिस इज़ लिमिटेड। ये मशीन ओरिएंटेड है। मशीन विल डिसाइड। दिस इज़ ह्यूमन। ह्यूमन विल डिसाइड कि मेरी एनर्जी कितनी होगी। ह्यूमन विल डिसाइड इन दिस केस। तो हमें यह समझना है कि जो फंडामेंटल करेंसी है ना वो ऊर्जा है। क्योंकि समय तो हमारे हाथ में है ही नहीं। हमने तो ये तक सुना है कि भाई ऊपर वाले ने डिसाइड किया
10:52 हुआ है कितना समय मिला है। तो फंडामेंटल फंडामेंटल परफॉर्मेंस करेंसी जहां से आपकी जिंदगी में परफॉर्मेंस आएगी वो एनर्जी है। और उस एनर्जी का नाम है इमोशनल एनर्जी। देखो ई मींस एनर्जी। इमोशनल मतलब जो मूव करवा दे। इमोशनल। ऐसी एनर्जी जो आपको मूव करवाए, ड्राइव करवाए। यार जिंदगी में लड़ना है यार। कुछ करके दिखाना है इमोशनली। गांव में किसी झोपड़ी में आग लगी। उसमें किसान का बेटा फंसा हुआ है। इमोशंस ही
11:38 मेरा बेटा है। इमोशंस इमोशंस मेक द ट्रू मोशन। एक बहुत सिंपल सी कहानी सुनाता हूं। जिंदगी में काम आएगी। कैसे इमोशंस मोशन लाते हैं। एक बार की बात है। एक इंसान फर्स्ट ऐड बॉक्स बेच रहा था जिसमें कुछ पट्टियां होती है, कुछ कैंची होती है, मरम होता है, डिटोल होता है, बेच रहा था। हर घर जाता कहता इसमें 25 आइटम है। ₹400 का है। लेंगे। 20 घर जाता तो दो बिकता। अब उसने चेंज किया। कैसे इमोशंस ड्राइव करते हैं चीजों को मैं आपको बता रहा हूं। और इसलिए इमोशनल मैनेजमेंट इज़ मोस्टेंट। दूसरा एक और था जो फर्स्ट एड बॉक्स बेचता था।
12:26 उसके पास भी 25 आइटम ही थे। लेकिन ₹800 का बेचता था। क्या कहता ये साहब ये जो फर्स्ट एड बॉक्स हैं ये इनके फाउंडर एक डॉग साहब हैं। उनकी कंपनी है ये। उन्होंने बनाए हैं। इसलिए बनाए हैं कि एक बार दिवाली पर घर में उनकी बेटी का हाथ जल गया। वो अंदर भागे फर्स्ट एड बॉक्स ढूंढने। उनके घर में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं था। उनको बहुत बेकार लगा कि यार जब मैं डॉक्टर होने के बावजूद मेरे घर में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं है तो भारत में कितने घर ऐसे होंगे जिनके पास फर्स्ट एड बॉक्स नहीं है। नाउ दे हैव कनेक्टेड इमोशन। अब जब इंसान ये सोचेगा कि हां मेरी बेटी के साथ ऐसा हुआ तो मेरे बेटे के साथ ऐसा हुआ तो तो ₹800 निकाल के देगा। 20 घरों में जाता 18 में बेच के आता। इमोशंस। आपकी जिंदगी में लाइफटाइम किस क्वालिटी के
13:14 इमोशंस रहे? इसी पर लॉज़ बेस्ड हैं। आपने किस इमोशनल स्टेट में जिंदगी जी वही क्वालिटी ऑफ लाइफ है। बाकी तो क्वांटिटी है। सुबह होती है और शाम होती है। यूं ही जिंदगी तमाम होती है। इमोशंस आप कभी फॉरेन ट्रिप पे गए। किस लेवल के इमोशंस थे? नींद ही नहीं आ रही है। आपने कोई एग्जाम क्रैक किया। आ हा हा रात भर जगे हुए हो। क्या सपने ही सपने? आपने जिंदगी में जब हाई फ्रीक्वेंसी के साथ आप जिए क्या एनर्जी होती है? लेकिन ऐसा अक्सर हो नहीं पाता है। खैर हम इस चीज को समझेंगे। द फंडामेंटल परफॉर्मेंस करेंसी इमोशन एंड दिस इज़ द करेंसी ऑफ़ यूनिवर्स। यूनिवर्सल लॉज़ इसी पर बेस्ड हैं। अगर आप यूनिवर्सल लॉज़ को पढ़ने लगेंगे
13:59 और आपको ये नहीं पता कि उसकी करेंसी क्या है? वो किस करेंसी के दम पर चलते हैं तो आप मात खा जाएंगे दोस्त। लोग बार बोलते हैं लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन। पहले बेसिक को समझिए। क्योंकि अक्सर मैं देखता हूं माफ करिएगा। लेकिन भारत में कई ऐसे कोचेस हैं जो लॉ ऑफ अट्रैक्शन सिखाते हैं और उसके हिसाब से अपनी जिंदगी गुजारते हैं और वो सीधा लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन समझाने लगते हैं। इट इज़ नॉट डॉलर, इट इज़ नॉट रूबल, इट इज़ नॉट ए यूरो। इट इज़ नॉट मार्क। जर्मनी की करेंसी जर्मनी बर्लिन मार्क। इट इज़ इमोशनल एनर्जी। दैट इज़ द करेंसी ऑफ़ यूनिवर्स। एंड दैट डिसाइड्स एवरीथिंग। तो हमें यह समझ लेना है कि यूनिवर्स इसी
14:45 के हिसाब से ड्रिवन है और मैं चाहता हूं कि मैं अपने देश के लोगों को वो सिखाना चाहता हूं जो वेस्टर्न कंट्रीज के लोगों को भी ढंग से नहीं पता हो। मैं इनको इंटेलेक्चुअल लेवल पर आगे ले जाना चाहता हूं। क्योंकि मुझे पता है कि मेरे देश के लोग अगर इंटेलेक्चुअल लेवल पे आगे चले गए तो देश अपने आप बढ़ जाएगा। 5 किलो अनाज का अपनाेंस है। जिंदगी में भूखे पेट भजन ना होवे लाला वो अलग चीज है। मैं उसकी बात नहीं करता हूं। हम पॉलिटिक्स की बात कभी और करेंगे। लेकिन अगर इंटेलेक्चुअल लोग यहां पर रहे तो वो हिंदुस्तान का झंडा लहरा सकते हैं। वो क्रांति ला सकते हैं। वो वो कर सकते हैं जो भारतीयों ने कभी नहीं किया। खैर इमोशनल एनर्जी को एक बार थोड़ा सा और
15:30 समझने का प्रयास करते हैं। देखिए मैं आपको एक चीज क्लियर कट बता देता हूं। इमोशनल एनर्जी को लाने में आपकी फिजिकल एनर्जी, आपकी मेंटल एनर्जी, आपकी स्पिरिचुअल एनर्जी का भी बहुत बड़ा रोल है। अगर कोई इंसान का ऑपरेशन हो रहा है या कोई हॉस्पिटल में भर्ती है तो उसकी इमोशनल एनर्जी हमेशा कम ही होगी। खैर, समझने का प्रयास करते हैं एक बार चीजों को और आगे जानते हैं कि एक्चुअली में चीजें हैं क्या? इमोशनल एनर्जी क्या है? देखिए जैसा कि मैंने आपको बताया ये फ्रीक्वेंसी है।
16:20 ये वाइब्रेशन है। और यही ओरा है। ओरा मतलब महिमामंडल। कुछ लोगों का चुंबकीय व्यक्तित्व होता है। उसी महिमामंडल की बात मैं कर रहा हूं। ठीक है? बेसिक फिजिक्स में एक फार्मूला है। e = h न्यू जहां h कांस्टेंट होता है और न्यू का मतलब होता है फ्रीक्वेंसी। और यही फार्मूला एनर्जी को रिप्रेजेंट करता है। इंसान की एनर्जी भी फ्रीक्वेंसी से डिसाइड होती है। क्योंकि इमोशनल एनर्जी से पावरफुल कोई एनर्जी है नहीं इस दुनिया में। समझना चीजों को। यह दो टाइप की हो सकती है। एक वो जो पॉजिटिव है या हाई है। दूसरी वो
17:08 जो नेगेटिव है और लो है। अभी आपको डिफरेंस जब समझ में आएगा तो आप ये महसूस करेंगे कि आपको किस एनर्जी का अभ्यास करने की जरूरत है। जब मैं पॉजिटिव की बात करता हूं तो दिस इज पी ई एल जे पी फॉर पैशन कोई भी इंसान किसी भी फील्ड में सक्सेसफुल रहा है तो कहता है आई वास पैशनेट फॉर दिस ये मेरा पैशन है मतलब मुझे इसके अलावा और किसी चीज में मजा नहीं आता दिस इज़ माय पैशन ये आपने सुना होगा पी फॉर पैशन पी फॉर स्पेशल, ई फॉर एंथूजियाज्म यानी कि
17:56 जोश, एल फॉर लव। एंड जे फॉर जॉय। ये हाई फ्रीक्वेंसीज हैं। दीज़ आर हाई फ्रीक्वेंसीज। आप उसी इंसान को देखना चाहते हैं जो अपनी चीजों को लेकर एंथूजियास्टिक है। यार रोहित शर्मा को देखा यार कितना जॉयफुल खेलता है। सचिन क्या क्लास था यार उसने क्रिकेट से प्यार किया। ही लव्ड क्रिकेट। विराट कोहली कितना पैशनेट हो के खेलता है। ये शब्द यही तो भीड़ को खींचते हैं। यही तो अट्रैक्शन है। हाउ टू बिकम मैग्नेटिक पर्सनालिटी? ये इन पे फोकस करो। हम कहां ध्यान देते हैं? फोर स्क्वायर पे। हमको फोर स्क्वायर ये इन चार पे फोकस नहीं करना
18:43 है। फोर स्क्वायर छोटी फोर स्क्वायर बड़े-बड़े गम को भुला देती है। छोटी एडवांस पैशन एंथूजियाज्म लव जॉय। किसी भी काम में अगर ये होते हैं तो यूनिवर्स बारिश करने लगता है। ब्लेसिंग्स की। पढ़ रहे हो? फ्रस्टेटेड हो। मां-बाप की वजह से पढ़ता हूं। बोलते हैं पैसा लगाया इसलिए पढ़ता हूं। कुछ नहीं कर पाओगे। मैं यहां पर आप लोगों से बात इसलिए नहीं कर रहा हूं कि मुझे इस चीज का कुछ मिल रहा है कि आप मुझे करोड़ों रुपए दे देंगे। क्योंकि मुझे पता है इंडिया में इनसे भी सब स्टैंडर्ड की चीजें सिखाने के लिए लोग बहुत सारा पैसा लेते हैं। मैं इसलिए कर रहा हूं क्योंकि मेरा जुनून है कि मुझे हिंदुस्तान
19:29 के 10 करोड़ लोगों को ओजस्वी तेजस्वी तपस्वी बनाना है। जिंदगी में जो कुछ कर रहे हो जब इसे भी सुन रहे हो तो खुशी और प्रेम के साथ सुनो। तब इसका अर्थ निकल के आएगा। वरना सब निरर्थक है। तुम भागवत गीता भी सुनोगे बिना प्रेम के, बिना जॉय के कोई मतलब का नहीं है। व्हाट आर द नेगेटिव इमोशंस? जीआईएफ ग्रीप इनसिक्योरिटी। हां, गहरा दुख। इनसिक्योरिटी यानी कि असुरक्षा की भावना, पीियर, डर और डिप्रेशन। मान लो कोई एक क्रिकेटर
20:17 स्पेलिंग इसकी ठीक कर देते। मान लेते हैं कोई बॉक्सर है भारत की तरफ से ओलंपिक ओलंपिक्स में गया पाकिस्तान का बॉक्सर है। ओलंपिक्स में गया पाकिस्तान की तरफ से और डर रहा है। डर रहा है। फियर है तो वो एंथूजियास्टिक नहीं हो सकता। क्योंकि नो वन कैन बी जॉयफुल विद फियर। नो वन कैन बी पैशनेट विद इनसिक्योरिटी। नो वन कैन बी एंथूजियास्टिक विद फियर। अगर यह है तो यह गायब होगा दोस्त। और अगर यह है तो तुम इसको मार्केट से नहीं खरीद सकते। अगर यह है तो तुम इसको मार्केट से नहीं खरीद सकते। और खरीद पाते तो सारे अमीर लोग प्रेशनेट होते, एंथूजियास्टिक होते, जॉयफुल होते, अपने काम से प्रेम करने वाले होते। ऐसा होता नहीं है।
21:04 ये चीजें प्रैक्टिस से पैदा होती है। अभ्यास से पैदा होती है। अनवेवरिंग बिना हिलने वाले फोकस से पैदा होती है। खरीदी नहीं जाती। ना Amazon पे मिलती है ना Flipkart पे, ना MNR पे, ना Meesho पे, ना GSO पे, कहीं नहीं मिलती। तो, अगर आप गरीब भी हैं तो आप इन चीजों को डेवलप करके पैसे और पर्स की बात नहीं कर रहा हूं। अमीर हो सकते हैं, शक्तिशाली हो सकते हैं। क्योंकि मुझे ऐसा कभी-कभी महसूस होता है कि जो वर्तमान समय जो कलयुग है इसमें ईश्वर शायद पैसे का नाम है। क्योंकि जहां देश का राजा चला जाए वहां तो ईश्वर था। क्योंकि राजा वहीं जाते हैं जहां देवता आते हैं। बाकी राजा कहीं नहीं जाते। सब लोग राजाओं के पास आते हैं। तो राजा तो गए।
21:51 शादी में राजा तो गए। तो राजा कहां जाते हैं? जहां देव आते हैं। तो देव कौन हुआ? पैसा। अगर आप गरीब हैं पैशन से एंथूजियाज्म से लवली मतलब प्रेम से कोई काम करते हुए और खुश रहकर कि मुझे तो इसी में मजा आ रहा है। क्या सुकून है क्या आनंद है? ईश्वर का नाम भी पैशनेट होकर लोग। मीराबाई ने पैशन से नाम लिया। प्रेम से नाम लिया। एंथूजियाज्म से कोई भी काम किया जाए वह ईश्वर को प्रसन्न करता है। यूनिवर्स को प्रसन्न करता है। बारिश होने लगती है। ब्लेसिंग्स मिलती है। खैर मैं सिर्फ यह कहना चाहता हूं
22:39 कि आइदर या तो आप ऑन हाई फ्रीक्वेंसी या तो आप धरती पर हाई फ्रीक्वेंसी में हैं, हाई इमोशनल एनर्जी में हैं या फिर लो फ्रीक्वेंसी में। बीच में कुछ नहीं होता। बीच में एक जेंडर होता है। मैं उसका नाम नहीं लूंगा। यहां बीच में कुछ नहीं होता। आइदर यू आर हाई और यू आर द लो। या तो परफॉर्मर हैं या ऑडियंस से। या तो लोग पिच पर खेल रहे हैं या स्टेडियम में देख रहे हैं। दो ही टाइप के लोग हैं। जिनमें एंथूजियाज्म है, जिनमें पैशन है, जिनमें जुनून है, वह परफॉर्मर हैं। और जो डिप्रेस्ड थे, मूड ठीक करने के लिए आए टिकट लेकर वो तालियां बजा रहे हैं। यही धरती का सच है। आइदर यू आर परफॉर्मर और योर ऑडियंस। कौन परफॉर्मर हैं? मैंने सुना अभी पेरिस ओलंपिक पेरिस ओलंपिक स्टार्ट होने वाला है। पेरिस तीसरी बार
23:25 ओलंपिक करवा रहा है। हमारा देश एक भी बार नहीं करवा पाया। इंफ्रास्ट्रक्चर शायद सपोर्ट नहीं करता होगा। यह भारत की कमी है। यह भारत की कमजोरी है कि इतना बड़ा देश ओलंपिक नहीं करवा पाया। कॉमनव्थ करवाया था एक वक्त। उसमें ना जाने कितने घोटाले किए। उन घोटालों ने कांग्रेस की सरकार को हटा दिया। पेरिस में करोड़ों लोग टिकट लेकर ओलंपियंस को देखेंगे। कौन है ओलंपियंस? जिनमें एंथूजियाज्म है, पैशन है, जुनून है, जज्बा है। लड़ने की हिम्मत है। दोज़ आर वाइब्रेटिंग ऑन द हायर फ्रीक्वेंसी। देखिए अगर फ्रीक्वेंसी हायर है। फ्रीक्वेंसी अगर हायर है तो एरो ऐसा जाएगा और यह जो स्पायरल है वो ऐसा बढ़ता जाएगा। लेकिन अगर फ्रीक्वेंसी कम है तो एरो नीचे आएगा और ये नीचे की तरफ लोअर क्वालिटी ऑफ एनर्जी
24:11 आप में बढ़ाएगा। तो जिन लोगों का चेहरा चमक रहा है, जिनका दिमाग काम कर रहा है, जिनमें कंसंट्रेशन है, जिनमें जुनून है, जज्बा है, दोज़ आर वाइब्रेटिंग ऑन द हायर फ्रीक्वेंसी। उनमें इमोशनल एनर्जी है। इसका सीधा मतलब क्या है? इसका सीधा मतलब यह है कि उन लोगों में पैशन है, एंथूजिया जोश है। उस चीज से वो प्रेम करते हैं। वो जॉयफुली वो काम करते हैं और जब वो काम करते हैं तो सब कुछ भूल जाते हैं। मैं आपको सच बता रहा हूं। जब विराट कोहली क्रिकेट खेलता है तो क्रिकेट ना जाने कितने लोग खेलते हैं। लेकिन वो पैशनेट होकर खेलता है तो भीड़ लगती है। फर्क यही है। फर्क यही है। मैं आपको सच बताऊं।
24:56 तो यह पूरी दुनिया एनर्जी की दीवानी है। यहां ना कोई चमकीली स्किन का दीवाना है, ना ऊंचाई लंबाई का दीवाना है, ना अच्छे बालों का दीवाना है। यहां दीवानगी तो बस ऊर्जा को लेकर है। अगर कहीं भीड़ लगी है तो कहीं ना कहीं किसी ना किसी रूप में ऊर्जा का प्रदर्शन हो रहा होगा। उसी नेता को सुनने के लिए भीड़ लगेगी जो पूरे जोश से जुनून से पेशेंस से एंथजाइम से जॉयफुली बोलता है। उसको देखने के लिए भीड़ नहीं लगेगी। जो पेज देखदेख कर बोल रहा है वहीं भी अटक जा रहा है। जुनून दुनिया भीड़ एनर्जी की दीवानी है। इमोशनल एनर्जी पैशन एंथूजियाज्म। अब यह समझते हैं
25:44 इकोनॉमिक्स ऑफ ई स्क्वायर। देखिए मैं जो चीजें आपको समझाता हूं उसके लिए ना जाने कितनी मेहनत मैं करता हूं। क्यों करता हूं? क्योंकि मुझे अपने देश से प्रेम है। मैं अपने देश के लोगों को कुछ सिखाना चाहता हूं। उनको बदलना चाहता हूं और मैं करके रहूंगा। और हो सकता है एक दिन हमारी ओडिटियंस की सेना इतनी बड़ी हो जाए कि हम संसद में बैठकर यह डिसाइड कर रहे हो किस देश का क्या होगा। क्योंकि हमारा देश का युवा तो एमएमएस के पीछे पड़ा है। एमएमएस कि भाई लिंक कहां है? हां। नैतिकता कहां है? तमीज कहां है? और लिंक कहां है? मैंडेटरी मिलिट्री सर्विज।
26:30 मैंडेटरी मिलिट्री सर्विज जब देश का युवा करेगा, जब वो मेहनत करेगा तब देश में कुछ बदलाव आने की उम्मीद है। तो ओटीटियंस डिसाइड करेंगे। खैर खैर यहां देखिए। इकोनॉमिक्स और यहीं से हम यूनिवर्सल लॉस को समझेंगे ऑफ ई स्क्वायर यानी कि इमोशनल एनर्जी। कब आप इसको गेन करते हो और कब आप इसको लूज़ करते हो। मैं ये समझाने का प्रयास आपको करता हूं। समझिए। लॉस कब होता है और प्रॉफिट कब होता है। मैं उसी की बात कर रहा हूं। एक सज्जन मुझसे पूछ रहे हैं कि आपके जैसा ओरा कैसे बनाएं? लॉस कब होता है और प्रॉफिट कब होता
27:17 है? वही बात मैं आपसे कर रहा हूं। कब प्रॉफिट होता है। समझिए। पता है कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनका ओरा बहुत जबरदस्त होता है। एनर्जी बहुत जबरदस्त होती है। लेकिन उनकी संगत, उनकी फैमिली, उनके दोस्त, उनके सहकर्मी ऐसे होते हैं जो उनको हर दिन गिराते जाते हैं, खत्म करते जाते हैं। तो सबसे महत्वपूर्ण जो है ना कि लॉस कब होता है? तो मैं कहूंगा टॉक्सिक लोगों की संगत से टॉक्सिक लोग क्योंकि भारत में हर किसी ने पैदा होते ही पीएचडी किया हुआ है। मतलब
28:04 पुल हिम डाउन और पुल हर डाउन। उड़ कैसे रहा है? नीचे खींचो। उड़ कैसे रहा है? नीचे खींचो। मेहनत कैसे कर रहा है? नीचे गिरा दो। टॉक्सिक लोगों की संगत से दूर रहें। मैं आपको सच बता रहा हूं। सोशल मीडिया पर भी मैं ऐसे लोगों की बातें नहीं सुनता हूं। कमेंट नहीं पढ़ता हूं। मैसेज नहीं देखता हूं जो कुछ भी उल्टा सीधा बकवास करते हैं। और मेरे आसपास ऐसे लोग हैं भी नहीं। मेरी कनेक्शन में सिर्फ ऐसे लोग हैं जो बहुत पॉजिटिव हैं। क्योंकि मेरे आसपास नेगेटिविटी टिक नहीं पाती। वो खुद चली जाती है। छोड़ के चली जाती। या तो देखो लोग आपको बदल देंगे। दुनिया में दो ही चीज होती है। या तो आप खरीद लेते हो या बिक जाते हो।
28:50 या तो आप लोगों को बदल दोगे। आप में इतना खतरनाक हो रहा होगा, जबरदस्त ताकत होगी कि आप सबको बदल दोगे। या आप अगर कमजोर ओरा रहा तो आप बदल दिए जाओगे। परिवर्तन संसार का नियम है। पर ये होता रहता है। डिपेंड करता है कि किसका ओरा किस क्वालिटी का है। और कैसे कम होता है एक्सेसिव वरी से। मैं तो ये कहता हूं कि वरी क्यों लिखूं? इसमें तीनों लिख दूं। हरी से भी कम होता है, जल्दबाजी से भी, वरी से भी कम होता है और करी से भी कम होता है। काजू करी, पनीर करी, यह करी, मसाला करी और ना जाने क्या-क्या मसालों से भी उतना ही कमजोर होता है। उबला हुआ खाना खाने से बेहतर होता है। ऐसा मेरा मानना है। आप
29:36 प्रयास करेंगे, खुद देखेंगे तो आपको भी महसूस होगा कि हां अब मेरे में ज्यादा एनर्जी है। तला हुआ खाना दो-दो तीन-तीन बार तल के खाए जा रहे हैं। कम हो जाएगी ऊर्जा। इनसेसिव स्टेट में रहने से इनडसेसिव स्टेट यानी कि आप निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। सबसे ज्यादा एनर्जी कंज्यूमिंग होता है। जिंदगी में मुझे क्या करना है और क्या नहीं करना। क्या मैं करूं या ना करूं? क्योंकि इनका जवाब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नहीं दे सकती। गजब इमोशंस देते हैं और तब आप किसी इंसान के पास जाते हो उससे विचार विमर्श करते हो और फिर आप डिसीजन ले पाते हो। इस प्रोसेस में आप दोनों के बीच में किस एनर्जी का आदानप्रदान हुआ वो थी
30:24 इमोशनल एनर्जी। वो हाई फ्रीक्वेंसी पे था। आप लो फ्रीक्वेंसी पे थे उसकी बात आपने मान ली। रोबोट नहीं दे सकते इमोशनल एनर्जी। इसलिए कभी भी रोबोट इंसानों को रिप्लेस नहीं कर पाए। कभी भी एआई आई को रिप्लेस नहीं कर पाएगी। कभी एजीआई आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस ह्यूमन इंटेलिजेंस को रिप्लेस नहीं कर पाएगी। यह मेरा प्रॉमिस है। मुझे पता है मेरी तरह कोई रोबोट बात नहीं कर सकता। कोई कोडिंग नहीं सिखा सकती उसे। आपकी तरह मेरा साथ कोई रोबोट नहीं दे सकता। इनडसेसिवनेस कि यार ये करूं या ना करूं? करना है कि नहीं करना है। मैं आपको सच बता रहा हूं। इस दुनिया में सबसे ज्यादा लोग इनसेसिवनेस की वजह से
31:12 मरते हैं। इनसेसिवनेस वो डिसीजन नहीं ले पाए। आपने देखा होगा कि रोड पे कुत्ता बहुत बार मरा हुआ मिलता है। क्यों? क्योंकि कुत्ता जो है वह रोड को क्रॉस करने का प्रयास कर रहा होता है और एकदम से घूम के वापस आ जाता है। वो डिसाइड ही नहीं कर पा रहा कि मेरे को ऐसे जाना है कि वापस लौटना है कि जाना है कि नहीं जाना है। तो रोड पे चिपक जाता है। इनडिसेसिव होता है। गाय अगर हाईवे पे बैठी भी है तब भी गाय को कोई मारने वाला क्योंकि गाय ने डिसाइड कर लिया मुझे बैठे रहना है। गाय ने चलना डिसाइड कर दिया तो गाय पीछे नहीं जाती वापस। वो जाती जाएगी। जाती जाएगी जाती जाएगी। जिंदगी में जो
31:59 डिसीजन लेना है वो ले लो क्योंकि तुम्हारे लैक ऑफ डिसीजन बहुत बहुत एनर्जी कंज्यूम करेंगे और इतनी कंज्यूम कर लेंगे कि तुम कुछ नहीं कर पाओगे। उसके अलावा और क्या चीज है ऐसी जो एनर्जी को कम कर सकती है। तो नेगेटिव रूमिनेशन यानी कि नकारात्मक विचारों की जुगाली करना। रूमिनेशन मतलब क्या होता है? जुगाली करना। निर्णय नहीं ले पाना। नकारात्मक विचारों की जुगाली करना। बार-बार सुबह शाम हर वक्त वही नेगेटिव ख्यालात अपने दिमाग में घुमाते रहने से इंसान का ओरा कम हो जाता है। जिंदगी में हाई फ्रीक्वेंसी ऑपरेट नहीं होता। यूनिवर्स की ब्लेसिंग खत्म हो जाती है और एक दिन जिंदगी भी खत्म हो जाती है। उसको लगता है कि मेरे पास भी तो 24 घंटे थे। मेरे पास भी तो 80 साल थे। मैं वहां क्यों नहीं पहुंच पाया? जब बाकी लोग पहुंच गए।
32:46 ऐसा क्यों हुआ? उसके अलावा ओवर कमिटमेंट से। ओवर कमिटमेंट्स आपने किस पेरेंट्स को चांद तारे तोड़ लाऊं तेरे लिए। हां सुना होगा आपने ओवर कमिटमेंट्स कि पापा मैं ये करके बताऊं भाई तू देखना एक दिन लोअस नाउ बी हंबल बी काम बी एक्टिव। मैं आपको सिखाता हूं। देखिए जितने भी आपके बीच में सवाल हैं उन सवालों को साइड में रखिए। आपके सभी सवालों का जवाब मैं देने का प्रयास करता हूं इन सेशन के माध्यम से। कुछ समय ये टाइपिंग रोक दिया करें। ये कोई चैटिंग नहीं है कि जानू बाय लव यू। गुड
33:35 नाइट। स्वीट ड्रीम्स विल मिस यू। रुकिए। समझिए। कहीं तो अपने दिमाग को लगाइए। कहीं तो आंखें और बस हाथ। आंखें और हाथ आंखों से अंधे हो गए और अंगूठे पिचक गए। वर्कआउट तो हम अंगूठों का ही करते हैं आजकल। फोकस करिए समझने का। दिमाग को विकसित होने का मौका दीजिए। क्योंकि रुपया नीचे गिर रहा है। डॉलर ऊपर बढ़ रहा है। क्यों? क्योंकि हमारा मानसिक स्तर नीचे गिर रहा है। उनका बढ़ रहा है। उनके पास कंप्यूटर लैपटॉप बहुत पहले से है। मोबाइल पहले से हैं। हमारे पास अभी आए। हम पागल हुए बैठे हैं। रील्स पे रील्स, रील्स पे रील्स, कच्चा बादाम, पक्का बादाम, कच्चा काजू वो अभी वापस किताबें पढ़ने लगे। उनको पता चल गया सब बकवास है। हम तो रील्स में हैं। 30 सेकंड। हमको
34:21 सीखना नहीं है। ज्ञान नहीं लेना है। हम बस कचरे के दीवाने हैं। बिग बॉस में क्या चल रहा है। उसने उसको गाली दिया। उसने उसको खाना खिलाया। वो ऐसेस हो गया। वो एसेस हो गई। ना जाने क्या-क्या जहां ज्ञान मिलता है वहां प्रतिकर्षण होने लगता है। तभी तो दुनिया में कुछ लोग सक्सेसफुल है। कुछ लोग की फ्रीक्वेंसी हाई है। बाकी सबकी तो लो है। क्योंकि सबको खा के सोना है यार। प्रोक्रास्टिनेशन इज़ अससिनेशन ऑफ़ एव्री डेस्टिनेशन। खैर मैं सबसे महत्वपूर्ण जो मानता हूं ना ऐसे लोगों से दूर हो जाइए जिनकी जिंदगी में कोई सपना नहीं है। कोई गोल नहीं है। क्योंकि जिनका कोई सपना नहीं है ना उनका कोई अपना नहीं है। समझ लीजिए इस चीज को। हमें इस चीज को समझना है। अच्छा यहां कुछ लोग हमेशा पॉलिटिक्स की बात करते हैं।
35:08 मोदी ने ऐसा कर दिया। राहुल गांधी बहुत बढ़िया है। विराट को तो सन्यास लेना नहीं चाहिए अभी तक। रोहित शर्मा तो वर्ल्ड कप जिताएगा वनडे का। हमको पता है। सानिया मिर्जा को अपने भारत में शादी कर लें। जी कोई हां मोहम्मद शमी से करवा लो। तुमने कभी खुद की जिंदगी के बारे में सोचा है? 10 मिनट कभी बैठकर सोचे हो कभी शीशे में देखा है कभी इस उंगली को खुद की तरफ किया है कि तू क्या कर रहा है उसने यह कर दिया उसने वह कर दिया ऐसे करते रहोगे तीन उंगलियां तुम्हारी तरफ होगी हमेशा हर वक्त जिंदगी में शीशे की तरफ देखा करो पाओगे कि तुम्हारा सबसे बड़ा दोस्त तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन एक साथ तुम्हें दिख रहा है वो तुम्हें नहीं करना है मोदी ने ऐसा कर दिया मनमोहन ने वैसा किया था कोहली तो लज्जन में चला गया उसने तो यूके की सिटीजनशिप ले ली अरे तुम तुम्हारी गली में ढंग से नहीं रह पा रहे हो सीखने पर ध्यान
35:56 महत्वपूर्ण है क्योंकि हमें हमको बदलना है। खुद की कमियां निकालनी है। खुद पर ध्यान देना है। तुम जिनकी बातें करते हो ना वो हमसे बहुत आगे निकल चुके हैं। और उनकी बुराई करके हम कुछ हासिल नहीं कर पाएंगे। दोस्त कुछ हासिल नहीं कर पाएंगे। हासिल तभी कर पाएंगे जब हम भी उनके बराबर संसद में बैठे होंगे। और इसके लिए मिशन को सफल बनाना होगा। यह क्यों मोदी क्यों राहुल गांधी हमारे बीच में आते हैं? क्या हमारे में हैसियत नहीं है कि हम संसद में जाकर हमारी बात कह पाएं? क्या हमारे कंठ खत्म हो गए हैं? क्या हमारे कंठों से आवाज नहीं निकलती? क्या हमें लखवा मार गया है? क्या हमारी जवानी में खून पानी हो गया? क्या हमारी
36:41 हैसियत नहीं है कि वहां के स्पीकर में हमारी आवाज गूं सके? हम ऐसा नहीं सोचते हैं। बैलेट पेपर पे चुनाव होना चाहिए। ईवीएम मशीन बेकार है। ना जाने क्या-क्या क्यों? कब इमोशनल एनर्जी बेहतर हो सकती है। प्रॉफिट पर ध्यान देते हैं। कब बेहतर हो सकती है? ये समझिए। दैट इज़ेंट। दिस इज़ वेरीेंट। मतलब मुझे लगता है कि कम कैसे हो रही है? वो एक आस्पेक्ट है। और बढ़ा कैसे सकते हैं? बहुत महत्वपूर्ण है। कम इन कांटेक्ट विद हाई ओरा पीपल। कम इन कांटेक्ट विद जिनका ओरा आई है आई ओरा पीपल अब सर कांटेक्ट में कैसे आए उनके बारे में पढ़कर सर अब्दुल कलाम से बहुत
37:29 इंस्पायर्ड हूं मैं उनके बारे में पढ़ो कांटेक्ट में आ गए उनकी जिंदगी के बारे में जब पढ़ोगे तो उनके कांटेक्ट में आओ सर भगत सिंह सर व्हाट अ लेजेंड्री पर्सन उनकी मां का नाम बताओ सर वो नहीं पता पढ़ो उनके बारे में जीवनी पढ़ो उनकी कांटेक्ट में आ गए सर आपके आपके कांटेक्ट में कैसे है? मेरी किताब पढ़ो। मेरे से बात करो। चिट्टी उंगली पकड़ के मैं तुम्हारे कांटेक्ट में आ गया और मैं तुमसे कोई बात नहीं कर रहा हूं। ऐसा कांटेक्ट किसी काम का नहीं है। कांटेक्ट शब्दों में होता है। शब्दों में तुम मेरे शब्द सुन पा रहे हो। तुम मेरे कांटेक्ट में हो। तुम महान क्रांतिवीर शहीद भगत सिंह के शब्द पढ़ पा रहे हो। तुम उनके कांटेक्ट में हो।
38:14 गले लगने से कांटेक्ट नहीं होता है। शब्द पढ़ो उनके। वो क्या बोल के गए? और तुम पाओगे क्योंकि ऊर्जा शब्दों में होती है दोस्त। शब्दों में तुम्हारे मां-बाप ने तुम्हें कुछ कहा? कुछ नहीं कर पाएगा तू। सांप को दूध पिला रहे हैं हम। नाकामयाब औलाद है हमारी। खत्म। दस्त हो जाएंगे तुम्हें यार। ताकत शब्दों में है दोस्त। कौन तुम्हें अच्छा लगता है? जिसके शब्द अच्छे हैं जो तुम्हारे हिसाब से ऐसे शब्द बोलता है जिससे तुम्हारी ऊर्जा बढ़ती है। वो तो तुम्हें अच्छा लगता है। तो हमें ऐसे लोगों के कांटेक्ट में आने का प्रयास करना है जो बेहतरीन है क्योंकि आपकी संगत की रंगत आएगी दोस्त। कोयले की दलाली में हाथ काले होते हैं। और समय रहते हुए समय रहते हुए क्योंकि वक्त नूर को बेनूर बना देता है। फकीर को हुजूर बना देता है। वक्त की कदर
39:00 करे बंदे क्योंकि वक्त है तो कोयले को भी कोहिनूर बना देता है। 90 साल की उम्र में जाके किसी ढंग के इंसान के कांटेक्ट में आओगे कुछ नहीं उखाड़ पाओगे। यही समय है। जवानी है जिसमें जिंदगी में रवानी लाई जा सकती है। उसके बाद में तो कुछ नहीं हो पाएगा। कुछ भी नहीं हो पाएगा। कभी कुछ नहीं कर पाओगे। कंप्लेन बॉयज को इग्नोर करो। नॉट कंप्लेन बॉय। आई एम अ कंप्लेन बॉय। मम्मा इज़ कंप्लेन बॉय। इसकी बात नहीं कर रहा हूं। कंप्लेनिंग पीपल जो जिंदगी में बस शिकायतें ही करते हैं। क्योंकि ये कुछ नहीं उखाड़ पाएंगे। शिकायतें कौन करता इसका सशन नहीं है। इसके साथ आईडियाज़ नहीं है। हमें ये समझ लेना है जब भी कोई इंसान आपसे मिले और बस शिकायत करे मान लो कि उसका ओरा वीक है और वो पूरा प्रयास कर रहा है कि आपका भी ओरा खत्म हो जाए।
39:46 क्योंकि ओरा मतलब क्या है? कुछ करने का जुनून। या फिर ओरा क्या है? सब कुछ पा लिया हो और बस चेहरे पे शांति दिख रही हो। ये भी ओरा है। ये हाईएस्ट लेवल का ओरा है। जो बुद्ध को मिल गया था। भगवान बुद्ध को मिल गया था। भगवान महावीर को मिल गया था। उच्चतम स्तर का है या फिर कुछ पाने का जज्बा हो। आपको क्या लगता है? क्या सम्राट अशोक का ओरा हाई नहीं रहा होगा? बिल्कुल रहा होगा। क्योंकि सम्राट अशोक बनने के लिए चंद्रगुप्त बनने के लिए चाणक्य बनने के लिए ओरा तो हाई चाहिए। लड़ने के लिए भी ओरा हाई चाहिए और शांत रहने के लिए भी ओरा हाई चाहिए। कंप्लेन लो ओरा वाले लोग करते हैं। एनर्जी कम है।
40:32 शक्ति नहीं है। इन लोगों से बिल्कुल दूर हो जाओ। अच्छा कुछ ऐसा करो जो आपको खुशी मिले। डू समथिंग जिससे आपको खुशी मिले जिससे आपको प्रेम हो। हर वक्त फ्रस्ट्रेशन में जीने का मतलब नहीं है। जिंदगी आइसक्रीम है। पिघली जा रही है। मारे जाओगे। हर वक्त फ्रस्ट्रेशन में नहीं। हर वक्त कभी रेस्ट इज बेस्ट। कभी-कभी कुछ दिन ऐसे भी गुजारिए जब कुछ नहीं किया, कहां कुछ नहीं किया। सुकून मिला। हां सुकून मिला। रिकवरी हो गई। हां रिकवरी। हर वक्त तनाव में रहने की जरूरत नहीं है। हमें अपने आप को रिपेयर भी करना है। अच्छा वो ऐसा ही करिए जिससे आपकी ऊर्जा बढ़ती हो। कुछ गलत नहीं। कुछ ऐसा नहीं जैसे ऊर्जा कम हो जाए। 10 कि.मी. भाग के आ गए। जितनी किताबें हैं सबको टांगा और पैदल
41:18 पैदल 20 कि.मी. चल के आ गए। फिर मेरा टेस्ट होता है। पानी की बोतल भी रख लेना। अच्छा लगता है कि जिंदगी में आज अपने आपको फिजिकली चैलेंज किया। कुछ ऐसा किया क्या बात है? क्योंकि मुझे इतना पता है जो पैदल चलना शुरू कर देता है उसका दिमाग स्थिर हो जाता है। कंसंट्रेट हो जाता है। फिर वो हिलता नहीं है। तो हमें डिसाइड करना है। कुछ ऐसा करो। अक्सर मुझसे लोग पूछते हैं कि सर फ्रस्टेट होता रहता हूं। नींद नहीं आती है। विचार चलते रहते हैं। क्या करूं? सारी किताबें उठा बैग में डाल और 10 कि.मी. का चक्कर काट के आ। क्या थकान होगी, दिमाग स्थिर हो जाएगा, नींद आ जाएगी, सुबह एनर्जी के साथ में उठेगा और जिंदगी में सारे युद्ध लड़ने को तैयार रहेगा। यू हैव टू डिसाइड दिस। इतना ही नहीं अगर आपको अपनी ई स्क्वायर यानी कि
42:04 इमोशनल एनर्जी हाई करनी है तो आपको उन पैरामीटर्स पर ध्यान देना पड़ेगा। यानी कि फिजिकल एनर्जी, मेंटल एनर्जी, स्पिरिचुअल एनर्जी और इनको ठीक करने का इलाज मैं आपको बता चुका हूं। एस, ई, डी, डी, एच। यह किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ने हैं। यह किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ने हैं। यहां एस का मतलब है स्लीप सोना है। क्योंकि सोना ही असली गोल्ड है। मैं फिर बता रहा हूं। एक्सरसाइज पसीना बहाना है। 20 मिनट सीढ़ियां चढ़नी है। डीप ब्रीथिंग करनी है। स्लीप एक्सरसाइज। डीप ब्रीथिंग। मैं सब लोगों को ये चीज बार-बार बताता हूं। डाइट अपनी डाइट का ध्यान रखना है और हाइड्रेशन पानी पीना है क्योंकि जब ये आपकी बैलेंस होगी तो इमोशनल एनर्जी भी बढ़ेगी। एक मोटिवेटेड एक पैशनेट
42:51 इंसान कौन है? एक एंथूजियास्टिक इंसान कौन है? कौन अपने काम से प्रेम कर रहा है? कौन अपने प्रोफेशन को जॉयफुली कर रहा है? वो जो सिद्ध है। स्लीप एक्सरसाइज, डाइट, डीप ब्रीथिंग, हाइड्रेशन। इसके ऊपर मैंने पूरा सेशन लिया, समझाया है। ये तो करना पड़ेगा। अपनी बाउंड्री सेट करो। अपनी बाउंड्री सेट करो। और ऐसा नहीं कि तुम्हारे रूम में कोई भी घुस जा रहा है। दे बाउंड्रीज। दिस इज वेरीेंट। दुनिया में वही लोग सेफ रह पाते हैं चाहे वो कंट्री हो या फिर इंसान हो। सक्सेसफुल और शांत वही रह पाएगा जिसकी बाउंड्रीज बॉर्डर्स डिसाइडेड है कि भाई इतना ही ये हमारी बाउंड्रीज। इससे आगे हम नहीं मिलते। दोस्त। अगर इससे आगे बढ़ोगे तो फिर गोली चलेगी। इससे आगे बढ़ोगे तो युद्ध माना जाएगा।
43:37 इससे आगे बढ़ोगे तो सीजो फायर है। बाउंड्रीज लिमिटेशन कि आप इससे आगे नहीं आ सकते क्योंकि जब ओरा की एक बाउंड्री होती है। ओरा अपने आप में एक बाउंड्री है। लोगों से ज्यादा मत मिला करो। आप जिस रूम में पढ़ते हो, जहां मेहनत करते हो, जहां काम करते हो, हर वक्त आपके आसपास चार लोग बैठे हैं। कब सोचोगे? कब दिमाग लगाओगे? कब आइडियाज लाओगे? कब पढ़ोगे? कब धार दोगे? खत्म ही हो जाओगे। मैं तो यह कहता हूं कि अपने भाई-बहन के साथ भी बाउंड्री सेट करके चलो। इतना ही भाई हो इससे ज्यादा नहीं। बहन हो इतना ही मां-बाप को भी। ऐसे नहीं कि कुछ भी कर रहे हो और मां-बाप टांग लगा दे रहे। सो नहीं बिल्कुल नहीं। आई डोंट लाइक दिस। आपको भी
44:22 नहीं करना है। अपना फैसला लो। सही साबित करके बताओ। मैंने 2011 में मेरा एमबीबीएस में एडमिशन हुआ। बैचलर ऑफ़ मेडिसिन, बैचलर ऑफ़ सर्जरी डिग्री। भारत की सबसे प्रिशियस डिग्री मानी जाती है। लेकिन मेरा जिंदगी में यह था कि मुझे बस लोगों को शिक्षाएं देनी है, ज्ञान देना है। जुनून था मेरा। मेरे पेरेंट्स कभी नहीं चाहते थे कि मैं इस प्रोफेशन में आऊं। एक वक्त तो ऐसा था कि मैं खुद नहीं चाहता था फर्स्ट ईयर, सेकंड ईयर में। लेकिन मैं लड़ा हूं उनसे कि मुझे यही करना है। मुझे इसमें मजा आता है। मुझे सुकून मिलता है। मैं एंथूजियास्टिक फील करता हूं। पैशनेट फील करता हूं। जॉयफुल फील करता हूं। मैं इसी काम से प्रेम करता हूं। यही मेरा सब कुछ है। साबित करो खुद को कि अपना डिसीजन खुद लूंगा। जब भारत सरकार तुम्हें कह रही है कि तुम सरकार चुनने लायक हो और तुम अपनी बाउंड्रीज नहीं चुन पा रहे हो।
45:08 बाउंड्रीज आर वेरीेंट वेरी वेरीेंट सर दिमाग रुकता ही नहीं है। हर वक्त कुछ ना कुछ करता रहता है। एक और तरीका है भक्ति करो। नाम जप करो। नाम जप करो। देखो दिमाग नहीं रुकेगा। और दिमाग को फ्री छोड़ोगे तो नेगेटिव रूमिनेशन करेगा और उससे और कम हो जाएगा। यह तो तरीका है। प्राचीन लोगों ने जो समझाया है क्या जबरदस्त समझाया। उनको पता था जैसे फेफड़ों का काम सांस लेना है। जुबान का काम भूलना है। पेट का काम पचाना है। दिमाग का काम सोचना है। ढंग का नहीं सोचेगा तो उल्टा सोचेगा। नेगेटिव सोचेगा। और क्या होगा? खुद का नुकसान कर लेगा। नाम जप करो। नाम जप नहीं करना है। कोई दिक्कत नहीं।
45:53 कंटेंट का जाप करो। अभी सेशन देखा इसको सोचो दिमाग क्या-क्या बताया सर ने क्या-क्या बताया नेगेटिव थॉट्स नहीं आए क्योंकि दिमाग तो सोचेगा और जिंदगी जाए जा रही है दोस्त दिमाग सोच रहा है कचरा और जिंदगी पिघले जा रहे खत्म हो जाओगे दिमाग एक ऐसा तरीका ढूंढता है क्योंकि हमेशा हमेशा सच मान लो क्योंकि ह्यूमन ब्रेन जो है ना वो सर्वाइवल के कांसेप्ट पे इवॉल्व हुआ है। जंगल में रहते थे। पहले नोएडा के फ्लैट्स में नहीं रहते थे। कोई ग्रेटर नोएडा में और गुड़गांव में नहीं रहते थे हम लोग। पहले जंगल में रहते थे। सर्वाइवल के मोड से हमारा ब्रेन डेवलप हुआ है। यानी कि हमेशा ये इमोशंस जीतेंगे। ये इमोशंस हमेशा जीतेंगे। यहां तक पहुंचने के लिए मेहनत करनी पड़ेगी दोस्त। आसान
46:40 नहीं है ये ट्रांजिशन। और इन इमोशंस में कौन है? पूरी दुनिया की 99.99% आबादी है। और इनमें कौन है?01% कुछ नहीं कर सकते। मेडिटेशन करो, ध्यान करो, ध्यान करो, ध्यान करो। ध्यान करो। क्योंकि यही चमत्कार है। इस जिंदगी में जिस चीज पर आकर ध्यान शब्द लग जाता है, यूनिवर्स स्वतः वहां आ जाता है। यूनिवर्सल लॉज़ स्वतः वहां आ जाते हैं। चमत्कार वहां से होने लगते हैं। और मेडिटेशन के ऊपर मैंने पूरा सेशन लिया है। आप कभी सुकून से बैठे हो, शांति से बैठे हो तब देखिएगा। मैंने देखा कि बहुत सारे ब्यूरोक्रेट्स ने जो बहुत सीनियर आईपीएस हैं आईएएस उन्होंने भी उस सेशन को देखा बहुत सारे पॉलिटिकल
47:27 लोगों ने देखा भारत में ही नहीं ओटीटी भारत को आज विदेशों में भी देखा जा रहा है और 60 70 80 साल के लोग भी मुझे लग रहा है कुछ लोग तो लाइव में भी देख रहे होंगे उनको प्रणाम करता हूं इस उम्र के लोग देखते हैं आप 18 साल में देख पा रहे हो खुशकिस्मत हो समय आपको पहले सिखा दे रहा है ध्यान का अभ्यास करो मैं अभी जब बोल रहा हूं आपके सामने बात कर रहा हूं ध्यान का अभ्यास किए हो जो बोल रहा हूं उसको सुनने का अभ्यास कर रहा हूं। कुछ भी ऐसा बोल रहा हूं। उसको खुद सुन रहा हूं। तभी मैं एक डेढ़ घंटे 2 घंटे तक बोलता हूं। तो अनवरत बोलता जाता हूं। क्यों बोलता जाता हूं? क्योंकि मैं ध्यान में हूं। मैं बोल नहीं रहा हूं। मैं सिर्फ सुन रहा हूं जो मैं बोल रहा हूं। कितना आसान है। अपनी जिंदगी से ऐसे लोगों को निकाल फेंको जो तुम्हें गलत-गलत बोलते हैं क्योंकि तुम्हें खत्म कर देंगे। वो तुम्हारी फ्रीक्वेंसी को खत्म कर देंगे।
48:12 खैर थोड़े से यूनिवर्सल लॉज़ की बात कर लेते हैं। जिंदगी में इन लॉज़ से महत्वपूर्ण है यूनिवर्सल लॉज़। ब्रदर इन लॉ, फादर इन लॉ, सिस्टर इन लॉ जो भी लॉज़ हैं उनसे कई गुना महत्वपूर्ण है यूनिवर्सल लॉज़। क्योंकि इमोशनल एनर्जी पर चलते हैं। और जिंदगी इमोशनल एनर्जी पर चलती है। दूसरे लोगों से, पराए लोगों से जिंदगी नहीं चलती है दोस्त। खुद के एनर्जी से चलती है और इसलिए हमको यूनिवर्सल लॉ समझने की जरूरत है। सबसे पहला जो है और बहुत फेमस लॉ है लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन।
48:58 जिसको लॉ ऑफ़ वाइब्रेशन भी कहा जाता है। लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन या लॉ ऑफ़ वाइब्रेशन। देखिए इसका एक ही मतलब है। सिर्फ एक मतलब है। मतलब सिर्फ इतना सा है फॉर एव्री डिफरेंट लेवल यू नीड ए न्यू डेविल फॉर एव्री डिफरेंट लेवल फॉर एव्री डिफरेंट लेवल और फॉर अ डिफरेंट लेवल यू नीड न्यू डेविल आपको जिंदगी में कुछ भी बनना है समझ लेना इस चीज को एक चेक मैंने लिया और इस चेक के ऊपर ₹1 लाख लिख दिए। लोग यही
49:44 समझते हैं भारत में या विदेशों में या ज्यादातर लोग लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन का मतलब है क्योंकि इसी तरीके से इसको प्रसारित किया गया है। एक चेक लिया और उसके ऊपर लिख दिए 50 लाख। वो पांच साल बाद 50 लाख आ गए। सेंसलेस दिस इज़ नॉट लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन। दिस लॉ ऑफ़ फ्रस्ट्रेशन। फेक इट अंटिल यू मेक इट। बहुत सिंपल एग्जांपल देता हूं। बहुत ही सिंपल एग्जांपल। मान लेते हैं कि कोई एक यंग बच्चा है। उसको विराट कोहली जैसा बनना है। तो विराट कोहली जैसा बनने के लिए उसको वैसी दाढ़ी रखनी चाहिए। वैसी गाली देनी
50:30 चाहिए या जबरदस्ती दो चार फैंस बुलाकर उनके बैट पे साइन करना चाहिए। या उसके जैसी डाइट लेनी चाहिए। उसके जैसी प्रैक्टिस करनी चाहिए। उसके जैसे कोच से मिलना चाहिए। उसके जैसे ग्राउंड पर जाकर अभ्यास करना चाहिए। वैसे ही एकेडमी जॉइन करनी चाहिए। उस लेवल के प्लेयर्स के बीच में जाके मैच खेलना चाहिए। कौन सा ऑप्शन सही है? फर्स्ट ऑप्शन गलत है। दाढ़ी रखने से विराट नहीं बनते। इट रिक्वायर्स फैशन। टेक इट अंटिल यू मेक इट। मतलब आपको उनकी हर चीज़ कॉपी करने का प्रयास करो। जैसा आप बनना चाहते हो। हर चीज कॉपी कर लो। उनकी डाइट फॉलो करो। उनकी ड्रेस फॉलो करो। उनका वे ऑफ वॉकिंग फॉलो करो। उनका वे ऑफ टॉकिंग फॉलो करो। सब फॉलो करो। और हो सकता है कि एक दिन आप उनसे भी महान बन जाओ। उस लेवल
51:17 पर पहुंचो। उस लेवल पर पहुंचो। रणछोड़ दास जी ने क्या कहा? कि बेटा सक्सेस के पीछे नहीं। काबिलियत के पीछे भागो। सक्सेस झकमरा के तुम्हारे पीछे आएगी। यही लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन है कि काबिलियत को यूनिवर्स की ब्लेसिंग मिलती है। यूनिवर्स ब्लेसिंग उसको मिलती है। तो तुम काबिलियत का पीछा करो। तितलियों के पीछे नहीं बगीचा बनाने पर ध्यान दो। एक-एक तितली पकड़ोगे तो मारे जाओगे। बहुत महत्वपूर्ण है। जो भी बनना चाहते हो। मान लो कि तुम नरेंद्र मोदी बनना चाहते हो। हमको देश का पीएम बनना है। वैसी ड्रेस पहनो। वैसा बोलने का अभ्यास करो। जो उन्होंने जिंदगी में किया वो किए और तुम्हें कुछ अलग करना है तो ओटीएन बनो ओजस्वी तेजस्वी तपस्वी भारत और कुछ ऐसा कर
52:03 दिखाओ कि हिंदुस्तान का हजार सालों का इतिहास याद रखें कि हमारे देश में एक सेना पैदा हुई थी जिसका नाम था ओजस्वी तेजस्वी तपस्वी भारत की सेना और उन्होंने इस भारत में अमूलचूल परिवर्तन लाए भारत को बदल के रख दिया तुम्हें डिसाइड करना है लॉ ऑफ अट्रैक्शन में काबिलियत के पीछे भागना पड़ेगा एक और लॉ देखो। लॉ ऑफ इंस्पायर्ड एक्शन। मैं एक ही रंग में लिखूंगा तो ठीक रहेगा। लॉ ऑफ़ इंस्पायर्ड एक्शन। देखिए एक चीज समझ लो। ये फिजिकल वर्ड है। यहां पर बैठने से, इमेजिनेशन से और मेडिटेशन से। शांति तो मिल सकती है लेकिन वो चीज नहीं
52:48 मिलती है क्योंकि फिजिकल वर्ल्ड है। और इस फिजिकल वर्ल्ड में फिजिकल एफर्ट्स लगाने पड़ते हैं। फिजिकल एफर्ट्स सीधा है। तुम अगर ये मानते हो कि तुम सोचने से सब कुछ बन जाओगे। कभी नहीं बन पाओगे। तुम्हें अपने कंफर्ट ज़ोन को छोड़ना पड़ेगा। एक्शन लेना पड़ेगा। और एक्शन की शुरुआत होती है मेरे हिसाब से या तो एक जगह बैठ जाने से या जगह छोड़ देने से। इस दुनिया का इतिहास उठा के देख लो। महान लोग या तो एक जगह बैठ गए हैं कि मैं बस यहीं रहूंगा कहीं नहीं जाऊंगा या फिर पूरी दुनिया घूमे हैं। इसके अलावा और कोई ऑप्शन नहीं। महान वे नहीं बने जो घर से जाकर सब्जी लेकर घर आ गए हो। उठा के देख लेना इतिहास।
53:35 जो घर से गए वो मार्केट से 2 किलो शक्कर ले घर पे आ गए। कभी महान नहीं बन पाए। बाकी समय फोन चला रहे हैं। टाइम पास कर रहे हैं। महान लोग या तो कमरे में बंद हो गए या पूरी दुनिया के लिए कमरा खोल दिया। पूरी दुनिया में घूमते रहे। एक्शन लेना पड़ेगा दोस्तों। एक्शन नहीं लोगे कुछ नहीं कर पाओगे। यह पूरी दुनिया पूरा ब्रह्मांड भगवान श्री राम ने बताया करके कर्म तो करने पड़ेंगे चाहे भगवान ही क्यों ना हो जन्म इंसान हो जानवर हो या जगदीश हो जिसको इस धरती पर आना है जिसको धरती पर आकर तो काम करना पड़ेगा उसके बिना कुछ हो नहीं पाएगा एक कहानी सुनाता हूं तुम्हारी जिंदगी में काम आएगी अंबानीज अभी ट्रेंड कर रहे हैं अंबानीज की कहानी सुनो कि कैसे एक्शन मैटर करते हैं। इमेजिनेशन और एक्शन
54:22 का कॉम्बिनेशन बताता हूं। या इंटेंशन बोल दो इसको। इंटेंशन गुणा एक्शन कैसे काम करता है। एक समय था इंदिरा गांधी जी की हत्या कर दी गई। और जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई तो राजीव गांधी देश के पीएम बने। उत्तर प्रदेश के किसी एक सांसद को धीरूभाई अंबानी ने चुनाव के दौरान चंदा दिया था। वो चुनाव जीत गए। कांग्रेस से लड़े जीत गए। धीरूभाई ने कहा कि यार कुछ सेवा तो करो हमारी। क्योंकि वोट और नोट तो कॉम्बिनेशन है। पहले हम नोट देंगे।
55:09 तुम्हें वोट मिले। अब तुम्हें हमें नोट देना है। यह सब चलता है। कुछ सेवा करो हमारी। बोले क्या सेवा करें बताओ कौन सा कॉन्ट्रैक्ट दिलाना है कहां ठेका दिलाना है कहां जमीन दिलानी है बताओ बोले नहीं यह सब नहीं चाहिए राजीव गांधी से मुलाकात करवा दो बोले कोशिश करता हूं सांसद थे प्रयास किया समय दे दिया मिल गया समय गए राजीव गांधी के पास मालिक नमस्कार हां जी नमस्कार साहब ये ₹ लाख ₹ लाख प्रधानमंत्री हूं मैं बाबू नहीं हूं अफसर का। किसी ऑफिस का सरकारी बाबू नहीं हूं मैं। आसपास किस बात की? बोले साहब बुरा मत
55:56 मानिएगा। इंदिरा मैम जब जिंदा थी अच्छा प्रेम हमारे बीच में रहा। हमेशा आशीर्वाद रखा उन्होंने। उधार लिए हुए थे उनसे। उनकी मौत हो गई। लौटाने आया हूं। सोचो राजीव गांधी पर इस चीज का कितना इंपैक्ट पड़ा होगा कि यार मेरी मां मर गई और ये पैसे लौटाने आए हैं। कितना सच्चा इंसान है और ऐसा कहा जाता है कि उसके बाद धीरूभाई अंबानी की Reliance को कांग्रेस ने पूरे भारत में जमीन लेने में कोई बीच में दिक्कत नहीं आने दी और कोई कसर नहीं छोड़ी जितनी जमीन Reliance को चाहिए दे दो। इमेजिनेशन कि बनना है और इंस्पायर्ड एक्शन कि अब करना क्या है?
56:42 दे आर कनेक्टेड। मुझे इस बात से कोई मतलब नहीं है कि तुम इस सेशन को देख रहे हो, नहीं देख रहे हो, सुन रहे हो, नहीं सुन रहे हो। जिंदगी में इंप्लीमेंट करना बहुत महत्वपूर्ण है। तुम्हें मान लो इस सेशन से सुनकर इस सेशन को सुनकर तुमने ये बात काम की बात किसी और को सिखाई। तुम काम नहीं कर रहे हो। वह काम करने लगा। यूनिवर्स की मेहरबानी उस पे होगी, तुम्हारे ऊपर नहीं होगी। क्योंकि उसने एक्शन लिया। उसने एक्शन लिया। तो उस पर मेहरबानी होगी। तुम्हारे ऊपर मेहरबानी नहीं होगी। ये रट के रखो। रट के रखो। एक और लॉ है। लॉ ऑफ़ डिवाइन वननेस। ये बहुत महत्वपूर्ण
57:27 है। ये मेरे दिल के सबसे करीब है। डिवाइन वननेस। यूनिवर्सल लॉस यह मानते हैं और ये लोग मानता है कि हर कोई एक जैसा है। कोई अंतर नहीं है। जैसे तुम हो वैसा कोई और है। और जैसा उसने पा लिया जैसा उसने हासिल कर लिया वैसा तुम भी हासिल कर सकते हो। कोई अंतर नहीं है दोनों में। जो तुम बाहर ढूंढ रहे हो कि उसमें कुछ बात है ना। तुम्हारे में वो बात है जो तुम बाहर ढूंढ रहे हो तुम्हारे अंदर है और तभी तो कबीर दास जी ने कहा है जो तिल माही तेल है जो चकमक माही आग तेरा साईं तुझ में है जाग सके तो जाग इंसाइड
58:14 डिवाइन वननेस और इसकी सबसे महत्वपूर्ण सीख क्या है कि तुम जो इज्जत चाहते हो जिस तरीके से खुद का ट्रीटमेंट चाहते हो वैसे दूसरों को भी ट्रीट करो वैसे ही दूसरों को भी सम्मान दो दूसरों को भी दो। अगर सिर्फ तुम चाहते हो कि मुझे यह मिले, मुझे यह मिले, मुझे वह मिल जाए, मुझे मिल जाए, कुछ नहीं मिलेगा तुम्हें। जो चाहते हो वो दो। क्योंकि जिंदगी आईना है दोस्त। ये दर्पण है, ये मिरर है। यहां जो दिखाओगे वही दिखेगा। जो फेंकोगे वो लौट के आएगा। सम्मान दोगे सम्मान। और यह तो बहुत बड़ा सच है कि आप खुद का सम्मान खोकर ही दूसरे का अपमान कर सकते हैं।
59:01 अगर आप यह चाहें कि मैं दूसरों का अपमान करूंगा फिर भी मेरी स्टेटस, मेरी रेपुटेशन, मेरी इज्जत बढ़ेगी। ऐसा नहीं होगा। चाहे आप देश के पीएम भी क्यों ना हो। अगर आप किसी एक चपरासी को भी गाली देते हैं ना, उसी वक्त आपने खुद की इज्जत कम कर दी। आप जब किसी की दूसरे की रिस डिसरिस्पेक्ट कर रहे हो, बेइज्जती कर रहे हो, तो यह मान के चलो आपने खुद की इज्जत में से उधार दे दिया। लौट के नहीं आएगा दोस्तों। इज्जत दो, सम्मान दो, सुकून से रहो। जब तहजीब से रहते हो, तमीज से रहते हो, वाइबेशंस हाई होते हैं। और इसी पर बेस्ड एक बहुत जबरदस्त मेरा फेवरेट लॉ है लॉ ऑफ़ रेसिप्रोसिटी। लॉ ऑफ़ रेसिप्रोसिटी यानी कि क्रिया प्रतिक्रिया का नियम। क्रिया प्रतिक्रिया। इसका मतलब क्या है? यह भी यूनिवर्सल लॉ
59:46 है। अगर तुम कुछ पाने की उम्मीद से कुछ भी करते हो कभी लौट के नहीं आएगा। लेकिन तुम बिना किसी उम्मीद के कुछ करते हो 10 गुना लौट के आएगा। मदर टेरेसा बिना उम्मीद के बस सेवा करनी है सेवा। कई लोग कहते हैं कि वो क्रिश्चनिटी की एंबेसडर थी। वो तो क्रिश्चियनिटी का प्रचार करने यहां पर आई थी। उनका कोई सेवा से संबंध नहीं था। जो तुम कहते हो मुझे उससे फर्क नहीं पड़ता। मैंने पढ़ा है। मैं तुम्हारी बातों पे भरोसा नहीं करता। कुछ लोग कहेंगे कि वो तो इनके एंबेसडर थी। धर्म को कभी साइड में रख दिया करो। धर्म अक्सर आंखों के सामने वो आईना ले आता है जिसके आर-पार कुछ दिखता नहीं क्योंकि आईने के पीछे पॉलिश होती है। लेंस से देखना है तो धर्म को हटाना पड़ेगा।
1:00:33 नोबेल प्राइज मिला उनको। शांति का नोबेल पुरस्कार। उम्मीद मत करो। दो आजकल तो एक समोसा भी दे रहे हैं तो सेल्फी ले रहे हैं। समोसा बांटा। मैं देख रहा था कुछ फोटोग्राफ्स कुछ लोग अस्पताल में गए दो केले ले पांच जने गए लो साहब दो केले हमने एक वर्ड में दिए एहसान मत करो प्रभु इतना बड़ा एहसान नहीं जो दोगे बिना इच्छा के 10 गुना लौट के आए याद रखो इस चीज को और सबसे महत्वपूर्ण सबसे महत्वपूर्ण इससे ऊपर कोई लॉ नहीं है लॉ ऑफ अनवेवरिंग फेथ यानी कि कभी ना डगमगाने वाला विश्वास दोस्त फेथ यानी कि स्ट्रांग फेथ उसमें वो ऊर्जा होती है जो आपको जिंदगी में सब कुछ
1:01:21 दे सकता है। आप जिंदगी में जो चीज चाहते हो बिना आपका विश्वास आत्मविश्वास डगमगाए उसके लिए पूरा प्रयास करना। बिना रुके बिना झुके पूरी जिंदगी लगा देना। लेकिन जो चाहते हो उसे पाकर रहना। विश्वास नहीं। पेड़ अपनी पत्तियां बदलते हैं दोस्त। जड़े नहीं। जिंदगी में ध्यान रखना कि मैं क्यों कर रहा हूं। यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हो सकता है कई बार तुम्हारा विश्वास मेरी बातों पर भी नहीं होगा। अपने कर्मों पर भी नहीं होगा। अपने मां-बाप पर भी नहीं होगा। विश्वास बनाए रखना क्योंकि विश्वास से बड़ा भगवान इस धरती पर कोई नहीं। तो ये कुछ बेसिक बातें मैं आपके साथ डिस्कस करना चाह रहा था। कुछ फोटोग्राफ्स भी मैंने लिए हैं आप लोगों को दिखाने के लिए कि इमोशनल एनर्जी का एक चार्ट है जो
1:02:07 सबसे ज्यादा एनलाइटनमेंट के ऊपर है। पीस यहां दिखती है और यहां पर ग्रीफ, गिल्ट, शेम आप दिखती है। यह फ्रीक्वेंसीज आप देखते हैं। यहां यह एक्सपेंड होते जाता है आपका ओरा। यह ओरा आपका एक्सपेंड होता जाता है। ओरा एक्सपेंड होता जाएगा। और जब ऐसे इमोशंस होते हैं तो औररा कमजोर सिकुड़ता जाता है। ओरा फैलता तभी है जब आप पीस में हैं। जब आप जॉय में हैं। जब आप सुकून में हैं। जब आपको सत्य का ज्ञान हो चुका है। खैर ये वो सर्किल्स हैं जिनकी मैं बात कर रहा था कि किस तरीके से एक पॉजिटिव एनर्जी बिलीफ होता है और किस तरीके से नेगेटिव एनर्जी बिलीफ होता है। बट ये मैं उम्मीद करता हूं कि आज के सेशन के माध्यम से आपने बहुत कुछ सीखा होगा और जिंदगी में इन चीजों को इम्प्लीमेंट करने का प्रयास करेंगे। कोशिश करिए कि आपके कांटेक्ट में जो भी आता है उसकी ऊर्जा को बढ़ाइए। क्योंकि जब आप उसकी ऊर्जा को कम करने का प्रयास करेंगे सबसे पहले गड्ढे में आप गिरेंगे।
1:02:52 ओजस्वी तेजस्वी तपस्वी भारत की तरफ से आपको प्रणाम करता हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद। शुभरात्रि। जिंदगी में लोगों को उठाइए क्योंकि सच बता रहा हूं। दूसरों के आंसू पोछने से बड़ी दुनिया में कोई भक्ति नहीं होती। धन्यवाद।