0:03 चलिए कल का याद है क्या देखे थे कल हम लोग पांच नाम कौन-कौन से पांच नाम तो पारिस्थितिकी तंत्र शब्द का प्रयोग पहली बार किसने किया था >> आर्थर टसले ने और पारिस्थितिकी विज्ञान के जनक किसको कहा गया >> यूजिन पी ओडम को पारिस्थितिकी इकोलॉजी शब्द का प्रयोग पहली बार अर्नेस्ट हैक विश्व में पारिस्थितिकी के जनक अलेक्जेंडर हमंबोल्ट और भारत में पारिस्थितिकी के जनक >> रामदेव मिश्र >> रामदेव मिश्र वेरी गुड याद है ना यहां तक क्लियर है इसके बाद हमने एक डायग्राम देखा था डायग्राम देख के समझा था कि एक जो ट्रॉपिक लेवल होता है पोषण स्तर होता है
0:49 उसमें कितने लेवल होते हैं और कौन-कौन से लेवल पर कौन-कौन से लोग होते हैं कौन-कौन से लोग होते हैं। सबसे फर्स्ट ट्रॉपिक लेवल पोषण स्तर का जो पहला प्रथम स्तर होता है वहां हमको कौन मिलेगा तो हरे पेड़पधे और वो क्या कहलाते हैं हरे पेड़ पौधे उस पोषण स्तर या ट्रॉपिक लेवल पर तो प्रोड्यूसर या उत्पादक क्योंकि वो भोजन का क्या करते हैं उत्पादन कैसे करते हैं तो प्रकाश संश्लेषण की क्रिया से कार्बन डाइऑक्साइड को उन लोग किस में कन्वर्ट करते हैं कार्बोहाइड्रेट और यही कार्बोहाइड्रेट उन पेड़ पौधों के लिए और आगे के जीवों के लिए क्या होता है तो भोजन या पोषण आहार न्यूट्रिशन होता है। क्लियर है बात? उसको खाने वाले जानवरों को हमने क्या कहा? शाकाहारी हर्बीवर्ब्स। है ना? उसके ऊपर कौन डिपेंडेंट रहेगा? तो
1:35 शाकाहारी जानवर। उन शाकाहारी जानवरों को हमने क्या कहा? तो उपभोक्ता कंज्यूमर। क्योंकि वो क्या करते हैं? कंज्यूम करते हैं। और अलग-अलग लेवल पे अलग-अलग कंज्यूमर है। तो ये फर्स्ट लेवल पे हैं। तो इनको हमने क्या कहा? फर्स्ट कंज्यूमर। प्राथमिक उपभोक्ता। उदाहरण क्या है? तो गाय, बैल, बकरी जितने भी शाकाहारी जानवर हैं। ठीक है? इन शाकाहारी जानवरों के ऊपर कौन डिपेंडेंट है? तो मांसाहारी जानवर। उन मांसाहारी जानवरों को भी हमने कितनी कैटेगरी में बांटा? तो दो। एक छोटे मांसाहारी जानवर और दूसरे बड़े मांसाहारी जानवर। कार्निवर्स। ठीक है? तो ये जो छोटे मांसाहारी जानवर है जैसे घास हो गया, पौधा। घास को कौन खाएगा? बकरी। तो बकरी कौन हो गई? प्राथमिक उपभोक्ता। कौन से पोषण स्तर पे? कौन से स्थान पे? तो दूसरे
2:21 क्योंकि पहले में तो पेड़-पौधा है तो यह ट्रॉपिक स्तर में या ट्रॉपिक लेवल पोषण स्तर में कौन से स्थान पर रहेगा तो द्वितीय स्थान पर उसके बाद जो छोटे मांसाहारी हैं तो उनको कौन खाएगा तो लोमड़ी लोमड़ी कौन हो गई छोटी मांसाहारी कौन सी उपभोक्ता द्वितीयक सेकंड कंज्यूमर और ट्रॉपिक लेवल पर कौन सा स्थान तो तीसरा स्थान कौन सा स्थान तीसरा स्थान इस लोमड़ी को कौन खाएगा तो बड़े मांसाहारी जानवर जैसे बाघ ना तो बाघ को हमने कौन से स्थान पे रखा तो कंज्यूमर उपभोक्ता है कौन सा तो तृतीयक उपभोक्ता टर्शरी कंज्यूमर और पोषण स्तर में कौन सा स्थान तो चौथा समझ गए बात एक-एक आगे रहेगा पोषण स्तर में उसके बाद इनको कौन खाएगा तो सर्वाहारी ओमनीवर्स और सर्वाहारी कौन होते हैं तो मानव हम मानव
3:08 कौन सी कैटेगरी में आते हैं सर्वाहारी हम पोषण स्तर में कौन से स्थान पर कहलाएंगे तो हम भी उपभोक्ता है कंज्यूम करते हैं हम लोग तो कौन से उपभोक्ता तो लास्ट कंज्यूमर अंतिम उपभोक्ता और पोषण थर्ड स्तर में कौन सा स्थान? तो पांचवा स्थान। समझ गए? क्लियर है? अब ये सब क्या लेनदेन करते हैं? वो तो अपन देखेंगे ही आगे। आज हम लोगों को देखना है। पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार
3:59 टाइप ऑफ इकोसिस्टम और इकोसिस्टम को समझने से पहले हमने एक टॉपिक और समझा था कंपोनेंट्स ऑफ इकोसिस्टम पारितंत्र के घटक कि कौन-कौन उसको निर्धारित करते हैं, डिसाइड करते हैं और कौन-कौन उसको प्रभावित ित करते हैं, इफेक्ट करते हैं। तो सबसे मेन जो उसका कारक था या फैक्टर था वह हमने देखा था अजैविक कारक में एबायोटिक कंपोनेंट्स में और क्या-क्या देखा था? तो तापमान, वर्षा, आद्रता, नमी और मृदा की संरचना है ना कंपोजशन ऑफ सोइल। ये सब क्या करते हैं कि किसी जगह पर कैसी वनस्पति होगी। किस जगह पर किस प्रकार के पेड़-पौधे होंगे? उनका नेचर कैसा होगा? यह सब कौन डिसाइड करता
4:46 है? तो वहां का क्लाइमेट वहां की जलवायु एक डायग्राम हमने आखिरी में समझा था कि कैसे सूर्य जो है वह पृथ्वी पर किस प्रकार प्रकाश डालती है। कौन-कौन से डिग्री से कौन-कौन से डिग्री तक तो कौन-कौन से डिग्री तक सबसे ज्यादा सूर्य की रोशनी मिलेगी? 23.5 डिग्री कर्क रेखा से लेकर 23.5 डिग्री मकर रेखा के बीच का क्षेत्र उसको हमने क्या कहा? तो उष्णकटिबंधीय क्षेत्र ट्रॉपिकल जोन। समझ गए बात? सबसे ज्यादा तापमान पृथ्वी के उसी भाग पर आएगा। सबसे ज्यादा वर्षा पूरे पृथ्वी में कहां होगी? तो उसी भाग पर। क्लियर है बात यहां तक? उसमें भी अगर स्पेसिफाई करूं विशेष रूप से बताऊं कि कौन सा वो जोन है, वो कौन सी लाइन है, लैटीट्यूड है, अक्षांश है जहां
5:32 पर सबसे ज्यादा वर्षा होती है तो कौन सी? तो 0 डिग्री 0 डिग्री मध्य जो रेखा बोलते हैं जिसको भूमध्य रेखा या विषुवत रेखा इक्विटेरियल लाइन उसके 5 डिग्री ऊपर और 5 डिग्री नीचे समझ गए 5 डिग्री नॉर्थ और 5° साउथ एक बेल्ट होता है। आप शायद उसको ज्योग्राफी में पढ़ोगे। बहुत इंपॉर्टेंट कांसेप्ट है। वो एग्जाम में पूछा भी है पीएससी प्रीलिम्स ने। आईटीसी जेड कॉन्टिनेंटल जोन करके है एक कि एक ऐसी पट्टी जहां पास हमेशा लो प्रेशर बना रहता है। निम्न दाब वाला क्षेत्र है हमेशा बने रहेगा। वो ज्योग्राफिकल का कांसेप्ट है। आप लोगों को पढ़ाया जाएगा उसमें। ठीक है? एग्जाम में पूछता भी है कांसेप्ट वाला है। हमेशा लो प्रेशर बना रहेगा। और जैसे-जैसे
6:18 सूर्य उत्तरायण होता है और जैसे-जैसे सूर्य दक्षिणायन होगा वैसे-वैसे ही वो जो लाइन है आईटीसी जेड वो भी ऊपर जाती है और वो भी नीचे आती है क्योंकि प्रकाश का जो फोकस है वो अपडाउन होगा सूर्य के साथ-साथ। अब बात आती है कि आपने सुना होगा ज्योग्राफी में कि 21 जून की तारीख को सूर्य की रोशनी जो है वो कर्क रेखा पर सीधे पड़ती है। और कौन सा दिसंबर? 22 दिसंबर और 22 दिसंबर को सूर्य की रोशनी जो है वह मकर रेखा पर सीधी पड़ती है। सुने हो ना यह बात? तो उसके बाद कहीं लाइन सीधी नहीं पड़ती। उसके बाद हर जगह मतलब यहां से लेकर के फिर पोल तक 23.5 डिग्री उत्तर के बाद और 23 डिग्री दक्षिण के बाद क्या पड़ता है? पोल तक सब तिरछी रेखा पड़ती है।
7:06 सीधी कहीं नहीं पड़ती है। समझ गए बात? तो अब पूरी पृथ्वी में जैसे-जैसे अलग-अलग जगह टेंपरेचर होगा, अलग-अलग टेंपरेचर के हिसाब से उस जगह पर बरसात कितनी होगी वो भी तो टेंपरेचर डिसाइड करेगा। जहां ज्यादा टेंपरेचर वहां ज्यादा पानी, जहां कम टेंपरेचर वहां कम पानी। तो टेंपरेचर ही बरसात या वर्ष को प्रेसिपिटेशन को डिसाइड करेगा। वर्षा ही वेजिटेशन को डिसाइड करेगी। मतलब वनस्पति को डिसाइड करेगी कि ज्यादा मात्रा में होगी या कम मात्रा में सदाबहार होगी या अपने पत्ते झाड़ने वाली पतझड़ होगी या कांटों के रूप में मिलने वाली कटीली झाड़ियां होंगी या तो झाड़ी पेड़ पौधा ना हो के सिर्फ घास होगा। समझ गए बात? यह सारा सिनेरियो हम लोग अपने आसपास देखते हैं। बहुत कुछ नहीं हमने अपने आसपास देखा है। फील भी करते हैं। जो सिर्फ
7:52 सुना है वह टीवी में, वीडियो में आजकल तो ग्लोबल अर्थ का जमाना है। सबको सब कुछ दिखता है। ऑस्ट्रेलिया में लोग कैसे रहते हैं यह भी आपके मोबाइल को पता है। आपको बताता है। तो सब कुछ देखा है। बस अपने को रिलेट करना है। समझ गए बात? तो जब हम बात करते हैं पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार की तो पारिस्थितिकी तंत्र को अगर मैं मेनली सबसे पहले बांटूं तो कितनी कैटेगरी में बांटूंगा? दो। कितनी कैटेगरी में? दो। एक को मैंने कहा पार प्राकृतिक पारितंत्र। पारिस्थितिकी तंत्र और पारितंत्र दोनों एक ही है। इंग्लिश में बोलते हैं इकोसिस्टम। पहले को
8:37 मैं क्या बोलूंगा? प्राकृतिक पारितंत्र। नेचुरल इकोसिस्टम। और दूसरा को मैं बांटूंगा कृत्रिम पारितंत्र। आर्टिफिशियल इकोसिस्टम और इसी को मानव निर्मित पारितंत्र भी बोल सकते हैं। मैनमेड इकोसिस्टम। तो सबसे पहले मैंने इकोसिस्टम को या
9:23 पारिस्थितिकी तंत्र को कितने प्रकार में बांटा? तो दो। एक प्राकृतिक और दूसरा कृत्रिम। डिटेल में यह पढ़ेंगे। इसको थोड़ा सा समझ के क्लोज करते हैं। ठीक है? कृत्रिम पारितंत्र क्या होगा? जो मानव ने बनाया है, जो मानव निर्मित इकोसिस्टम है और मैंने एग्जांपल में समझाया था मानव कैसे-कैसे इकोसिस्टम बनाता है। कृषि भूमि खेत जिसको बोल सकते हैं और गार्डन बनाता है अपने लिए बागवानी करता है, उद्यान बनाता है और क्या बनाता है? तो एक्वेरियम। तो एक्वेरियम वाला इकोसिस्टम उद्यान कोई गार्डन ठीक है कृषि भूमि खेत यह सब कौन
10:08 बनाता है मानव इसको हमने क्या कहा मैन मेड इकोसिस्टम या आर्टिफिशियल या कृति पारितंत्र समझ गए बात क्लियर है तो इसको इतना इंपॉर्टेंट नहीं है मेन इंपॉर्टेंट कौन है प्राकृतिक पारितंत्र इस प्राकृतिक पारितंत्र को भी हम अलग-अलग वर्गों में बांटेंगे कितने वर्ग वर्गों में बांटेंगे तो दो कितने वर्गों में बांट दूंगा दो। पहला है स्थलीय पारितंत्र जो स्थल में है, भूमि में है। दूसरा है
10:55 जलीय पारितंत्र जो कहां बनेगा? जल में। समुद्र, नदी, नाले, तालाब, झील है ना इसको मैं बोलते हैं टेरेस्टियल इकोसिस्टम और इसको बोलेंगे एक्वाटिक इकोसिस्टम। तो नेचुरल इकोसिस्टम प्राकृतिक पारितंत्र को फिर हमने कितने भागों में बांटा? दो। स्थलों में पाया जाने वाला स्थलीय पारितंत्र, टेरेस्ट्रियल इकोसिस्टम, जल में पाया जाने वाला या जलमंडल में पाया जाने वाला जलीय पारितंत्र या एक्वेटिक इकोसिस्टम। यहां तक बात समझ में आई?
11:42 फिर अगर मैं बात करूं कि स्थलीय पारितंत्र क्या-क्या हो सकते हैं? तो आप मेरे को बताइए सभी जगह स्थल एक जैसा होगा। स्थल एक जैसा होगा? नहीं। कहीं मैदान होगा, कहीं पर्वत होंगे, कहीं पठार होगा। छत्तीसगढ़ में मध्य भाग मैदान है तो उत्तर और दक्षिण का भाग पठार है। यहां भी एक जैसा नहीं है। और पठार पर्वत का मतलब ही किससे होता है? ऊंचाई से होता है। और ज्योग्राफिकल कांसेप्ट में हम जानते हैं कि जब भी हम ऊंचाई में जाएंगे तो धीरे-धीरे तापमान क्या होगा? कम होगा। और तापमान कम होगा तो उसका प्रभाव किस पर पड़ेगा? वनस्पतियों पर। वनस्पतियों के अनु आधार पर। और किस पर प्रभाव पड़ेगा? जीव-जंतुओं पर। समझ गए बात? उसी के आधार
12:27 पर अगर मैं बोलूं तो भाई स्थलीय पारितंत्र को अगर और भी बात करें तो पूरे पृथ्वी में हर जगह की जलवायु स्थिति, क्लाइमेटोलॉजी कंडीशन, क्लाइमेट कंडीशन अलग-अलग है। समझ गए? हर जगह की स्थलाकृति, स्थल की आकृति, ट्रोपोग्राफी वो भी क्या है? अलग-अलग है। हर स्थान का अपना लैटीट्यूडनल रेंज अक्षांशीय विस्तार अलग-अलग है। छत्तीसगढ़ जिस अक्षांश में हैं आप कहां मान लीजिए हम लोग बिलासपुर में हैं। हम लोग जिस स्थान पर हैं बिलासपुर में उसका लैटीट्यूडनल रेंज अक्षांशीय विस्तार कुछ होगा। छत्तीसगढ़ में पढ़ते हैं ना हम लोग तो कुछ तो होगा अक्षांशीय विस्तार उसका और आप लोगों का जो गांव है जो घर है जहां से भी आप लोग आए हो वहां का अक्षांशीय स्थिति
13:13 क्या होगी? अलग होगी। हर जगह की अक्षांशीय स्थिति अलग-अलग होती है। यह भी हम जानते हैं। और जैसे-जैसे अक्षांशों की स्थिति बदलेगी विषुवत रेखा से किस ओर जाने पर? ध्रुवों की ओर जाने पर। वैसे ही वहां भी क्या देखने को मिलेगा हमको? तापमान में कमी देखने को मिलेगी। समझ गए? मध्य पूरे विश्व के मध्य भाग का एक भी ऐसा देश बता दो जहां बर्फ जमती हो। बर्फ कहीं जमेगी? नहीं। बर्फ जमी हुई बर्फ हमको हमेशा कहां देखने को मिलेगी? 66.5 डिग्री के ऊपर। यूरोप वाले एरिया में, रशिया के अलास्का वाले एरिया में। या तो कहां देखने को मिलेगा? 66.5 डिग्री से नीचे। और 66 डिग्री से नीचे दक्षिण में अंटार्कटिका के आसपास कोई लैंड नहीं है।
13:58 सब कहां है? तो नॉर्थ में है। ये सब ज्योग्राफिकल कांसेप्ट है। आपको केवल रिकॉल करा रहा हूं मैं। समझ गए यहां तक बात? तो इन सब आधार पर कि किसी भी जगह की जलवायु की स्थिति, किसी भी जगह की भू आकृति या किसी भी जगह के वर्षा की मात्रा के आधार पर हम लोग फिर स्थलीय पारितंत्र को कितने प्रकार में बांटेंगे? तो चार। कितने प्रकार में बांटेंगे? चार। पहला वन पारितंत्र फॉरेस्ट इकोसिस्टम
14:44 दूसरा घास भूमि पारितंत्र ग्रासलैंड इकोसिस्टम तीसरा है मरुस्थलीय पारितंत्र डेजर्ट इको सिस्टम और चौथा है टुंड्रा पारितंत्र।
15:33 इसको बोलते हैं टुंड्रा इकोसिस्टम। तो स्थलीय पारितंत्र को भी हमने फिर बांटा चार प्रकार में। कैसे-कैसे वन देखने को मिलेगा, घास भूमि देखने को मिलेगी, मरुस्थल देखने को मिलेगा और टुंडरा देखने को मिलेगा। सब कैसे डिसाइड होते हैं? तो तापमान, वर्षा, जलवायु की स्थिति जहां बरसात अच्छी होगी। औसत वार्षिक वर्षा एनुअल प्रेसिपिटेशन बोल लो या रेनफॉल बोल लो। जो भी उस एरिया का औसत वार्षिक वर्षा बोलते हैं ना एवरेज रेनफॉल या एवरेज प्रेसिपिटेशन एनुअल उसी के आधार पर क्या डिसाइड होगा कि वन होगा कि घास का मैदान होगा कि मरुस्थल होगा। बहुत ज्यादा पानी
16:20 गिर रहा है तो वन है। पानी की मात्रा कम है उस जगह पर तो घास भूमि है। उससे भी कम है तो मरुस्थल है। और जब ध्रुवों की ओर अपन जाएंगे जहां तापमान बहुत कम होता है। जहां पानी नहीं गिरता जहां बर्फबारी होती है। रेनफॉल रेनफॉल की जगह क्या होता है? तो स्नोफॉल होता है। अब पेड़ पौधों को बर्फ थोड़ी चाहिए। उनको तो पानी चाहिए। तो वहां पास डेवलपमेंट या ग्रोथ जो है वनस्पतियों का वो बहुत अलग तरीके का होता है। उसको हमने कैसा इकोसिस्टम कहा? तो टुंड्रा। समझ गए बात? क्लियर है? यहां तक क्लियर हैस। >> चलो सबसे पहला अच्छा जलीय को भी देख लेते हैं। यहीं जलीय पारितंत्र। तो जल में कैसा कैसा पारितंत्र मिलेगा?
17:07 दो प्रकार का मिलेगा। ठीक है? एक को हम लोग बोलेंगे समुद्री पारितंत्र, मरीन इकोसिस्टम और दूसरे को क्या बोलेंगे? ताजा पानी पारितंत्र या फ्रेश वाटर इकोसिस्टम। किस कोई पानी ताजा है या कोई पानी खारा है। कैसे डिसाइड होता है? पीएच वैल्यू से। है ना? उसके अलावा और कैसे डिसाइड होगा? उस जल में उपस्थित नमक की मात्रा जिसको हम लोग सैलेिनिटी बोलते हैं। लवणता की मात्रा किसी भी पानी में मान लीजिए पानी को अगर मेजर करना है तो हम लोग उसमें क्या मेजर
17:54 करते हैं? 1000 ग्राम एक पैमाना है। एक पैरामीटर है कि 1000 ग्राम में नमक की मात्रा कितनी है पानी में? अगर 35 पीपीटी 35 पार्ट पर थाउजेंड। पीपीटी का मतलब होता है पार्ट पर थाउजेंड 1000 में 35 तो पैमाना अपन कितने में कर रहे हैं 1000 में 35 तो उस आधार पर अगर 35 पीपीटी से ज्यादा नमक है तो खारा पानी है। 35 पीपीटी से कम नमक है तो ताजा पानी है। ठीक है? इसीलिए हम लोग नदियों की पानी को झील तालाब के पानी को यूज करते हैं क्योंकि उसके नमक की मात्रा नहीं या कम होती है तो हमको कोई दिक्कत नहीं है। हम लोग ना तो इरीगेशन में ना तो हाउसहोल्ड यूजेज में
18:42 अपने घर के उपयोग में हम लोग समुद्र के पानी का प्रयोग नहीं कर सकते। जग्राफी में पढ़ते हैं कि पूरी पृथ्वी में 70% पानी है लेकिन पीने योग्य पानी केवल 9% है। जानते हो ना जो भूमिगत जल में है जो ग्लेशियरों पर जमा हुआ है सब अलग-अलग बटे हुए हैं। तो पीने के पानी की मात्रा बहुत कम है। बाकी सब कहां देखने को मिलेगा? तो खारे पानी पे। ताजा पानी पारितंत्र क्या हो सकता है? तो जो नदियां नदियों के द्वारा जो इकोसिस्टम बनाते हैं झीलों में जो इकोसिस्टम बनेगा तालाबों के आसपास जो इकोसिस्टम बनेगा वह सब किसका एग्जांपल हो जाएगा ताजे पानी का पूरे समुद्र को नहीं देखना है समुद्र में दो टाइप का इकोसिस्टम है जो बहुत स्पेसिफिक है जिसको पीएससी अक्सर पूछता भी है लास्ट ईयर भी पूछा है और वह समुद्री पारितंत्र
19:28 में हम लोग दो देखेंगे प्रवाल भित्ति पारितंत्र कोरल रीफ इकोसिस्टम बहुत इंपॉर्टेंट है ये पढ़ेंगे इसको डिटेल में और दूसरा इकोसिस्टम कौन सा है तो मैंग्रोव कौन सा है मैंग्रो पारित मैंग्रोव से कुछ याद आता है वनस्पति पढ़े हो कि नहीं ज्योग्राफी में अभी या चलो पढ़ोगे डिटेल में मैंग्रो क्या होता है मैंग्रोव
20:13 सुंदरवन के डेल्टा में पाया जाता है वेरी गुड और सुंदरवन डेल्टा है तो ज्योग्राफी में दो वो वाला कांसेप्ट क्लियर है कि नहीं डेल्टा और एस्चुरी वाला दो प्रकार की आकृतियां होती हैं तटीय क्षेत्रों पर एक या तो डेल्टा होगा एक या तो एस्चुरी होगी और छत्तीसगढ़ के भारत के ज्योग्राफिकल कंडीशन में यह है कि जितनी नदियां पूर्व की ओर बहती हैं, पूर्वी मुख जो नदियां हैं, जितनी बड़ी नदियां है भारत में गंगा, ब्रह्मपुत्र और गोदावरी, महानदी, कावेरी, कृष्णा। इवन 95% नदियां जो है भारत की वो सब किस ओर बहती हैं? पूर्व की ओर। और पूर्व में जाकर के वो कहां मिलती है? तो बंगाल की खाड़ी में। बे ऑफ बंगाल में। कुछ नदियां जो हैं
21:00 वह वेस्ट की ओर बहती हैं। पश्चिम की ओर जैसे नर्मदा जैसे ताप्ती जैसे गोवा में दो चार नदियां हैं। ठीक है? कर्नाटक में दो चार नदियां हैं। ये सब पश्चिम की ओर बहती है। और पश्चिम की ओर बह के वो कहां जाकर मिलेंगी? तो अरब सागर में। कहां जाकर मिलेंगी? अरब सागर में। अब ज्योग्राफी में ही पढ़ा होगा या पढ़ोगे आप लोग। नदियां कहां से निकलेंगी? तो पर्वतों के शिखर से। कहां से निकलेंगी? पर्वतों के शिखर से। जितनी भी हिमालयन नदियां हैं सब हिमालय से निकल रही हैं। और जितनी भी प्रायद्वीपीय भाग की पेनसुलर प्लेट की जितनी भी नदियां हैं गोदावरी, महानदी, कृष्णा, कावेरी वो सब कहां से निकल रहा है? तो वो भी पर्वतों से। महानदी भी सिहावा की पर्वतों से निकल रहा है। है ना? गोदावरी, कृष्णा, कावेरी सब वेस्टर्न घाट जो है पश्चिमी घाट वहां की अलग-अलग चोटियों से निकलेगा। पढ़ोगे या
21:47 पढ़ चुके होगे। समझ गए यहां बात? दोनों में डिफरेंस यह है कि जो हिमालय से बहने वाली नदियां हैं वह ग्लेशियर है। ग्लेशियर पिघल रहा है तो वहां पानी का सोर्स कहां तक रहता है? साल भर। वहां पानी का सोर्स कहां है? साल भर है। लेकिन यह जो प्रायद्वीपीय भाग की नदियां हैं, इनके पास केवल पानी का सोर्स बरसात है। साल भर यह नदियां नहीं बहती। फॉर एग्जांपल अरपा। साल भर पानी रहता है। अभी बरसात में लगा होगा कि हां यह भी नदी है करके। इसके पहले तो समझ में ही नहीं आता होगा नदी है कि नाला है। नाला भी बड़ा है। बिलासपुर में अगर बस स्टैंड तरफ जाओगे तो पानी देखने को अब मिल रहा है। आज से चार महीने 5 महीने बाद जनवरी फरवरी के टाइम पे अर्पा पे आपको पानी देखने को नहीं मिलेगा। बहुत पतली सी
22:32 धार देखने को मिलेगी। जितनी भी प्रायद्वीपीय नदियां हैं कृष्णा, कावेरी, गोदावरी, महानदी सब वर्ष साल भर पानी से लबालब नहीं रहती। केवल बरसात में रहती हैं। साल भर कौन सी नदियां नहीं सूखती? तो जो हिमालय से निकलती गंगा कभी नहीं सूखती। समझ गए बात? हमेशा वहां पानी रहता है क्योंकि हिमालय से आ रहा है और साथ में उसके क्या है? तो ग्लेशियर। सोर्स क्या है उसका? ग्लेशियर। अब वो जो हिमालय से निकलने वाली नदियां हैं इतने लंबी दूरी चोटियों से पूरा डाउनफॉल तक आएगा। हजारों फीट की दूरी तय करेगा। नीचे आकर के तराई के प्रदेशों में मैदानों में मिलेगा। तो वो अपने साथ भारी मात्रा में क्या लाता है? सेडिमेंट्स जिसको बोलते हैं अवसाद। चट्टाने, पत्थरें है ना मिट्टी, बालू, कंकड़ यह सब जो वह लाता है अपने साथ बहा
23:18 करके उसको हम लोग बोलते हैं अवसाद या सेडिमेंट्स। अब सभी बड़ी-बड़ी नदियां हैं। 500, 800, 1000 से किलोमीटर से ऊपर है सबका। मतलब जो दूरी है किलोमीटर की सो साइज है। अब इतने लंबे भाग पर ये लोग बह रहे हैं। इतने भारी मात्रा में पानी है और पानी अपने साथ क्या रखा हुआ है? सेडिमेंट। तो जब यह समुद्र में मिलता है तो समुद्र में मिलने से पहले अपना जितना अवसाद है या जितना सेट वो बहा करके लाया है सबको वो किनारों पर क्या करते जाता है डिपॉजिट सबको क्या करता है वो डिपॉजिट तो जहां वो डिपॉजिट करता है वहां पास एक मैदान टाइप की आकृति बन जाती है उसी मैदान टाइप की आकृति को हम लोग क्या बोलते हैं तो डेल्टा तो पूर्ववर्ती जितनी ही नदियां हैं वह सब क्या बनाती हैं डेल्टा तो महानदी डेल्टा
24:03 कृष्णा डेल्टा कावेरी डेल्टा गंगा गंगा के डेल्टा को ही हमने सुंदरवन कहा और सुंदरवन अपनी कौन सी वनस्पति के लिए फेमस है? तो मैंग्रोव। अब एक बात को समझो कि गंगा नदी से कौन सा पानी आ रहा है? तो ताजा पानी फ्रेश वाटर जाकर के किस में मिल रहा है वो? समुद्र में मिल रहा है। खारा पानी। तो जहां ताजा पानी और खारा पानी मिलता है वहां पास एक नया टाइप का इकोसिस्टम पैदा होता है। जिस को हम लोग बोलते हैं मैक। समझ गए बात? ताजे पानी वाले वनस्पतियां, उन वनस्पतियों पर रहने वाले जानवर, खारे पानी वाली वनस्पतियां जिनको मैंग्रो बोलते हैं। मैंग्रो की स्पेशलिटी यही है कि यह नमक या साल्ट वाटर में भी जिंदा रह सकता है। उच्च लवण वाले जल में भी यह जिंदा रह
24:49 सकता है। घर में गमला होगा। अब बोल भी नहीं सकता। करके देखना है। बेचारे पौधे की जान चली जाएगी। अगर आप उसमें एक गिलास नमक पानी घोल के डाल दोगे तो पौधा मर जाएगा। क्योंकि उसमें नमकीन पानी को साल्ट वाटर या सलाइन वाटर को सहने की क्षमता नहीं है। लेकिन यह जो मैंग्रो होते हैं इनकी खासियत यही है कि यह खारे पानी में भी अपने आप को जिंदा रखते हैं, सर्वाइव करते हैं और उसी के क्लाइमेट के हिसाब से यह अपने आप को ढाल लिए हैं। समझ गए बात? क्लियर है? तालाब है गांव में। तालाब के ऊपर देखना कभी-कभी पूरा पत्तों से तालाब ढक जाता है। देखे हो या तालाब के किनारों में आपको काई टाइप की आकृति देखने को मिलती है। बड़े-बड़े काई जैसे मतलब बिना किसी बेस के काई या घास जैसे
25:37 स्ट्रक्चर जिसको आप लोग कॉमन भाषा में काई बोलते हो। यह तालाब के किनारे तैरता आपको मिल जाता है। मिल जाता है ना? जो जो तालाब के किनारे थोड़ी सी मात्रा में मिलता है वह समुद्रों में बहुत बड़ी मात्रा में मिलता है और उनका एक प्रोसेस होता है वो प्रोसेस हम लोग पढ़ेंगे जिसके कारण एक स्ट्रक्चर पैदा होता है जिसको हम लोग बोलते हैं प्रवाल भित्ति क्या बोलते हैं प्रवाल भित्ति तो इकोसिस्टम में या एक्वेटिक इकोसिस्टम में दो इंपॉर्टेंट कांसेप्ट पढ़ना है बहुत ही इंपॉर्टेंट है एक प्रवाल भित्ति इकोसिस्टम का और दूसरा मैंग्रोव का। समझ गए बात यहां तक? यहां क्या-क्या है? तो वन है, घास है, मरुस्थल है और टुंड्रा है। यहां क्या है? तो प्रवाल भित्ति है और मैंग्रोव है। इसी को थोड़ा-थोड़ा जानना है। क्लियर है बात? चलो शुरू करते हैं वन पारितंत्र से।
26:35 वन पारितंत्र सब जगह पानी एक जैसा गिरेगा नहीं सब जगह टेंपरेचर तापमान एक जैसा होगा नहीं सब जगह की भू आकृति एक जैसी होगी नहीं सब जगह की मिटियों का जो प्रकार है वो एक जैसा होगा नहीं तो सब जगह वन भी एक जैसे होंगे वन भी क्या होंगे अलग-अलग और वन कैसे अलग-अलग होंगे? इसको हम लोग एक चार्ट के माध्यम से समझते हैं। पूरे पृथ्वी पर कितने टाइप के क्षेत्र बताया था मैंने? तीन।
27:28 कौन-कौन सा क्षेत्र? पहला मैंने बताया था उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र ट्रॉपिकल जोन फिर फिर मैंने क्या बताया था? शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र।
28:17 इसको मैं बोलूंगा टेंपरेट जोन। फिर क्या था? शीत कटिबंधीय क्षेत्र इसको बोलेंगे फ्रिगेट जोोन समझ गए बात पूरे पृथ्वी पर के को हम लोगों ने उसकी जलवायु के आधार पर या अक्षांशीय
29:04 विस्तार के आधार पर कितने भागों में बांटा है? तो तीन उष्णकटिबंधीय क्षेत्र, शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र और शीत कटिबंधीय क्षेत्र। तो वन भी कितने प्रकार के होंगे? तीन। समझ गए? एक उष्णकटिबंधीय वन, एक शीतोष्ण कटिबंधीय वन और दूसरा शीतकटिबंधीय वन। कहां से कहां तक इनका हम लोग विस्तार देखते हैं। 23 डिग्री नॉर्थ टू 23 डिग्री साउथ। समझ में आ जाएगा? क्लियर है? इसको हम लोग कहां देखेंगे?
30:02 23 डिग्री उत्तरी अक्षांश जिसको हम लोग बोलते हैं कर्क रेखा उस कर्क रेखा से लेकर 66 डिग्री उत्तरी अक्षांश जिसको हम लोग बोलते हैं आर्कटिक वृत्त उस डायग्राम में है। ठीक है? क्या बोलेंगे? आर्कटिक वृत्त। उस क्षेत्र को हम लोग क्या बोलते हैं? शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र। और जैसे वैसे ही नीचे 23 डिग्री साउथ वाला जो लोंगिट्यूड है लैटीट्यूड है जिसको हम लोग बोलते हैं मकर रेखा और उस मकर रेखा से नीचे 66 डिग्री अंटार्कटिक वृत्त उस पूरे एरिया को हम लोग क्या बोलेंगे शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र फिर 90 डिग्री में क्या है पोल है सीधा नॉर्थ पोल
30:48 इसमें क्या है? साउथ पोल। और उधर जाएंगे तो फिर कौन सा कटिबंध? शीत कटिबंध। यहां तक बात समझ में आई? इसी को अगर मैं थोड़ा सा बढ़ाऊं तो पहले भी हमने समझा कि भाई किसी भी जगह पर वन कैसा होगा? यह कैसे डिसाइड होगा? तो बरसात कितनी होती है? इसके आधार पे भारत के 100 कि.मी. वाले दो अलग-अलग स्थानों पे भी क्या सेम वर्षा होती है? नहीं। तो यह तो फिर इतने बड़ा भारत है हजारों किलोमीटर का। यहां भी क्या सेम वर्षा होगी? नहीं। तो वर्षा के आधार पर भी हम इस उष्णकटिबंधीय क्षेत्र को कितने भागों में बांटेंगे? तो दो। कितने भागों में? दो। पहला हम लोग बोलेंगे
31:40 उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन क्या बोलेंगे उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन और दूसरे को क्या बोलेंगे? उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन। क्या बोलेंगे? उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन। पर्णपाती मतलब जो अपने पर्ण का पात कर देता है। पत्तों को घिरा देता है। उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन। ट्रॉपिकल
32:26 एवर ग्रीन फॉरेस्ट और इसको बोलेंगे ट्रॉपिकल डेसीड्यूस फॉरेस्ट। नाम से ही क्लियर है जो वन हमेशा सदाबहार रहते हैं मतलब जिनके पत्ते नहीं गिरते जो खाली नहीं दिखते हमेशा हरेभरे रहते हैं उनको हमने क्या कहा सदाबहार वन जिन वनों के पत्ते एक निश्चित समय पर गिर जाते हैं उनको हमने क्या कहा पर्णपाती वन जैसे पर्णपाती हम लोग कौन से क्षेत्र वन वाले क्षेत्र में रहने वाले लोग हैं पर्णपाती
33:13 मैं बताऊंगा वार्षिक वर्षा के हिसाब से डिसाइड होता है तो इनका मेजरमेंट क्या है आगे लिखाऊंगा थोड़ा सर डिटेल इनके बारे में। तो इसका एक डिटेल यह है कि जहां औसत वार्षिक वर्षा 200 सेंटीमीटर से ज्यादा होती है उस जगह पर कैसा पारितंत्र मिलेगा? तो सदाबहार। समझ गए बात? और जहां पास 200 सेंटीमीटर से कम और 100 सें.मी. और 200 सें.मी. के बीच वर्षा होती है। वहां पास कैसे जंगल या वनस्पति मिलेगी? तो पर्णपाती। ऐसे वृक्ष मिलेंगे जो अपने पर्ण को या पत्तों को गिरा देते हैं। आप छत्तीसगढ़ पढ़ चुके हो ना? >> पढ़ रहे हो छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ पढ़ोगे तो पता चलेगा यहां की वर्षा में कि छत्तीसगढ़ में औसत वार्षिक वर्षा जो है वो 187 सेंटीमीटर के आसपास है। अभी फक्चुअल
34:01 अभी करंट का डाटा तो नहीं जान रहा हूं मैं लेकिन 187 के आसपास का है। अब बताओ 187 200 से ज्यादा है कि कम है? तो कैसा वन मिलेगा? >> पर्णपाती। फिर आपको छत्तीसगढ़ के वनों में अलग से पढ़ाया जाएगा कि छत्तीसगढ़ में पर्णपाती वन पाए जाते हैं। क्या वन पाए जाते हैं? पर्णपाती वन डेसड्यूस फॉरेस्ट। तो किसी भी चीज को अलग-अलग जगह पढ़ो। अलग-अलग चैप्टर के हिसाब से याद करो। इससे अच्छा उस कांसेप्ट को एक ही जगह समझ लो। जहां 200 सेंटीमीटर से ज्यादा वर्षा होगी वहां सदाबहार वन। जहां 200 सेंटीमीटर से कम वर्षा होगी वो पर्णपाती वन। पर्णपाती वन में पत्ते क्या होते हैं? एक समय पर गिर जाते हैं। जैसा हमने देखा है कि गर्मी की शुरुआत में मतलब जनवरी मिड जनवरी से
34:48 पत्ते झड़ने शुरू हो जाते हैं। किसके? पीपल के, बरगद के, नीम के, साल के, सागोन के, आम का, आमा के है ना? चालू होता है या नहीं होता है? देखते हो ना? तो यह सब वृक्ष जो है वह कौन से वन के उदाहरण होंगे? तो पर्णपाती वन। और ये सब अपने पत्ते क्यों गिरा देते हैं? पानी की कमी। और पानी की कमी से क्या होता है? तो पत्तों को गिराना पड़ जाता है। वाष्पोत्सर्जन। ठीक?
35:33 अभी ठंड आने वाली है। अभी ठंड आएगी तो आप लोगों की स्किन ड्राई हो जाएगी। फिर वह दुनिया भर का लोशन मॉइस्चराइजर का खर्चा बढ़ जाएगा। होता है होठ फटने शुरू हो जाते हैं। होता है। क्यों ऐसा होता है? क्योंकि हमारी बॉडी से मॉइस्चर निकलता है। क्या होता है? हमारी बॉडी से मॉइस्चर निकलता है। जैसे हमारी बॉडी से मॉइस्चर निकलता है। ठीक वैसे ही पेड़ पौधों के शरीर से भी क्या निकलेगा? मॉइस्चर निकलेगा। यह बात समझ में आ गया नॉर्मली हम लोग को पानी की कमी हो गई। बोलते हैं गर्मियों में ज्यादा पानी पियो, ओआरएस पियो, ग्लूकॉन डी पियो, नींबू पानी पियो, गन्ना रस पियो, छाछ पियो, लस्सी पियो। सब बोलते हैं ना। क्यों बोलते हैं? क्योंकि गर्मियों में पानी की कमी हो जाती है। तापमान ज्यादा होता है तो
36:20 तापमान ज्यादा होने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। हम लोग तो पीवी के सब मैनेज कर लेते हैं। पेड़ पौधे क्या करेंगे? समझ गए बात? तो वो क्या करते हैं? अपने उनके शरीर में यही वाष्पोरिज्म मतलब मॉइस्चर के निकलने की एक प्रक्रिया होती है जिसको हम लोग बोलते हैं वाष्पोत्सर्जन। क्या बोलते हैं? वाष्पोत्सर्जन ट्रांस्पिरेशन। और यही प्रक्रिया जब नदियों में, तालाबों में, वाटर बॉडी में होगी तो उसको हम लोग बोलते हैं वाष्पीकरण। इवापोरेशन। ये दोनों कांसेप्ट तो क्लियर है ना? पानी तापमान में, उच्च तापमान में पानी गर्म होगा। भाप बन के उड़ेगा। फिर वही भाप ऊपर जाकर के जल ओस की बूंदों में कन्वर्ट होगा। संघनित होकर के बड़ी बूंदे बनेगा। नीचे गिरेगा जिसको हम लोग बोलते हैं बरसात। यह कांसेप्ट क्लियर है? तो
37:08 वाटर बॉडी में या जलमंडल में जो भी ऐसी क्रिया होती है उसको हम लोग बोलते हैं वाष्पीकरण। क्या बोलते हैं? वाष्पीकरण। ठीक ऐसी ही क्रिया जब मानव शरीर में या पेड़ पौधों के शरीर में होता है तो उसको हम लोग बोलते हैं वाष्पोत्सर्जन। क्या होता है? वाष्पोत्सर्जन। जैसे कि यह पेड़ पौधे अपना खाना, अपना भोजन कहां बनाते हैं? पांचवी क्लास का विज्ञान है ये। >> अपने पत्तों में। कहां बनाते हैं? अपने पत्तों में। किसकी सहायता से। क्लोरोफिल की सहायता से। क्लोरोफिल कहां पाया जाता है? पत्तों में पाया जाता है। तो जैसे खाना पत्तों में बनता है क्लोरोफिल की सहायता से। ठीक उसी प्रकार यह जो वाष्पोत्सर्जन होता है, यह जो ट्रांस्पिरेशन की प्रक्रिया होती है, वह
37:54 भी किस पर होती है? तो पत्तों में। यहां तक बात समझ में आया? अब जो पेड़-पौधे गर्मियों की शुरुआत में अब मालूम है आने वाला समय गर्मी का है, पानी की कमी होगी, तो वह अपने शरीर के पत्तों को क्या कर देता है? गिरा देता है, छड़ा देता है। ताकि क्या ना हो? वाष्पोत्सर्जन ना हो। और वाष्पोत्सर्जन ना होने से उसके शरीर में पानी की मात्रा बनी रहेगी। समझ गए बात? क्लियर है? तो इन लोग वाष्पोत्सर्जन से बचने के लिए अपने पत्ते गिरा देते हैं। ऐसा नहीं है कि इसके जो पेड़ होते हैं सदाबहार वन के उनको वाष्पोत्सर्जन की जरूरत नहीं पड़ती या उनको पत्ते गिराने की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसा नहीं है। पत्ते हर पेड़ गिराते। ऐसा कोई पेड़ नहीं है जो पत्ते नहीं गिराते। लेकिन बात देखने की है जैसे हम लोग पर्णपाती वन वाले क्षेत्र में
38:41 रहते हैं तो देखना फरवरी मार्च में जितने भी जंगली एरिया तरफ चले जाओ जंगलों की तरफ चले जाओ सब हमको केवल ठूट दिखेगा पत्ते कहीं नहीं दिखेंगे सूर्य की रोशनी सीधे जमीन पर पड़ रही है शाखाओं का परछाई बन रहा है पत्ते कहीं नहीं दिखेंगे कि दिखेंगे क्योंकि हमारे यहां जितने भी वैरायटी के पेड़ हैं यह सब एक सीमित एक निश्चित टाइम पर एक साथ पत्ते गिराते हैं तो हमको सब पदझड़ वाले वन कैसे देखने को मिलते वीरान सूखे हुए। लेकिन यह जो सदाबहार वन के पेड़ हैं, यह लोग अलग-अलग टाइम पर पत्ते गिराते हैं। कोई गर्मियों की शुरुआत में गिरा देगा, कोई ठंड की शुरुआत में गिराएगा। तो ऐसे दो अलग-अलग टाइम होता है। तो एक साथ नहीं गिराते हैं करके इनको अपन ऐसा खाली या उजाड़ जैसा नहीं दिखता। तो यह हमेशा कैसा दिखता है? सदाबहार। कुछ ने गिरा दिया कुछ में है।
39:28 फिर उसने गिरा दिया तो पहले वाले में आ गया। उतने दिन तक तो ऐसे करके पूरा मैनेज होता है। तो वन पारितंत्र में अगर अपन उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में वनों की बात करें तो पहला है उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन और दूसरा है उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन। सेम यही कहां होगा? शीतोष्ण कटिबंध में। वहां भी वर्षा की मात्रा के आधार पर कौन-कौन से वन पाए जाएंगे? तो शीतोष्ण कटिबंधीय क्या होगा सदाबहार वन और यहां
40:20 एक मिनट क्या बोले? नहीं तो भोजन स्टोर करके रखते हैं ना। मानव को छोड़ के बहुत सारे जानवर और पेड़ पौधों में यह है कि वो जैसे कार्बोहाइड्रेट को सिंथेसिस करते हैं। वो क्या करते हैं? प्रकाश संश्लेषण की क्रिया से कार्बोहाइड्रेट बनाएंगे और कार्बोहाइड्रेट को अपने टिश्यूस में उत्तक जिसको बोलते हैं उसमें वो स्टोर करके रखते हैं। तो उसके बेस पर वो लंबे समय तक जिंदा रह सकते हैं। है ना? तो उनके में ये कैपेसिटी होती है। जैसे ऊंट एक बार पानी पिएगा 30 दिन तक पानी नहीं पिएगा। चलता रहेगा रेगिस्तान में। तो उसके अंदर वो कैपेसिटी है। वैसे वाटर होल्डिंग कैपेसिटी उसको यूज करने की कैपेसिटी इनके पास है। छोड़ देते हैं तो अपना एनर्जी स्टोर करके रखें। वह एक टाइम तक सर्वाइव कर लेते हैं।
41:07 उसमें कोई दिक्कत नहीं है। दूसरा कौन सा हो गया? शीतोष्ण कटिबंधीय वन। इस क्षेत्र में एक नया टाइप का इकोसिस्टम देखने को मिलता है। जिसको हम लोग बोलेंगे भूमध्य सागरीय वन। मेडिटेरियन फॉरेस्ट। क्योंकि यही वो रीजन है जहां हमको क्या देखने को मिलेगा? यह भूमध्य सागर है और कहां है? 23 डिग्री से लेकर 66.5 डिग्री के बीच में है। और 23 डिग्री से 66.5 डिग्री का बीच शीतोष्ण कटिबंध है और यह कैसा टाइप का अलग टाइप का एक ये इकोसिस्टम पैदा करता है। इसकी विशेषताएं कुछ अलग है। जैसे कि बताऊंगा। उसको हम लोग क्या बोलते हैं? भूमध्य
41:52 सागरीय वन। यह वन पूरे पृथ्वी पर पूरे दुनिया में यह इकोसिस्टम जो है अपने रसदार फलों के प्रोडक्शन के कारण फेमस है। पहला जितने भी रसदार फल होते हैं। रसदार फल मतलब विटामिन सी वाले अंगूर, संतरा, अनार जितने भी रस वाले फल होते हैं, वह सबके प्रोडक्शन में सबसे अच्छा क्लाइमेट किसको माना जाता है? भूमध्य सागरीय क्षेत्र को। समझ गए बात? तो चाहे वो फरसदार फल हो, चाहे वो फूल हो। बहुत सारे जो फूल होते हैं उनके प्रोडक्शन के लिए औषधीय पेड़ होते हैं। है ना? औषधीय पेड़ों के प्रोडक्शन के लिए कौन सा इकोसिस्टम फेमस है? तो भूमध्य सागरीय वन। रंग बिरंगी चिड़ियों के लिए कौन सा इकोसिस्टम फेमस
42:37 है? तो भूमध्य सागरीय वन। यहां तक बात समझ में आई? देश दुनिया के बारे में थोड़ा बहुत जानते हो? शराब सबसे ज्यादा कहां बनता है? नहीं भारत में नहीं वर्ल्ड में दिल्ली >> इटली नहीं थोड़ा सा बाजू में आओ। >> स्पेन। >> ठीक है। सबसे ज्यादा शराब बनने के लिए कौन सा कंट्री फेमस है? तो स्पेन। आपने जो कहा इटली वह किसके लिए फेमस है? तो फूलों के लिए। किसके लिए फेमस है? फूलों के लिए। एक फेमस फूल आता है जिसको बोलते हैं लिली। वो लिली हब है वो। इटली में जितना इतना
43:25 ज्यादा फूलों का प्रोडक्शन होता है कि इटली फूलों के प्रोडक्शन का हब है। पूरे वर्ल्ड में पहले नंबर पे आता है। बाजू वाला कंट्री स्पेन जो है वो रसदार फलों के कारण स्पेन भी है। आपका फ्रांस भी है। यह सारे जो देश हैं वह अपने कौन से प्रोडक्शन के कारण? तो रसदार फलों के प्रोडक्शन के कारण फेमस है। अब यह जितने कंट्री का नाम लिया हूं मैप में देख लेना। सब भूमध्य सागर के किनारे हैं। सब कहां मिलेंगे? भूमध्य सागर के किनारे। जहां रसदार फल होगा वहीं तो शराब बनेगी। जनरल कांसेप्ट है। जहां कि क्लाइमेट फूलों की खेती के लिए प्रसिद्ध होगा। वहीं तो फूलों की खेती होगी। तो इटली में होता है। समझ गए बात? तो ये अपने रंग बिरंगी पशु पक्षियों के लिए फूलों के लिए फलों के लिए और औषधीय
44:11 पौधों के लिए कौन सा इकोसिस्टम फेमस है? 66 डिग्री से उधर जाओगे तो पेड़ पौधे देखने को नहीं मिलेंगे। क्या मिलेगा देखने को? क्या देखने को मिलेगा? क्या मिलेगा? टुंड्रावन। और टुंड्रावन में कोई पेड़ पौधा या वनस्पति नहीं होती। क्या होता है? तो बहुत छोटी-छोटी वनस्पतियां होती है जिनको हम लोग बोलचाल की भाषा में काई बोलते हैं। समझ गए? अभी बरसात गया है। गया है ना? इतना भारी बरसात हुआ। अभी भी काई जो जमती है बरसात में वह अभी भी आपके घर के दीवारों में या आसपास आपको देखने को मिल जाएगी। काई देखने को मिल जाएगी। हरा
44:58 हरा हरा दिखता है। बहुत लंबे एरिया में थोड़ा सा फूला फुलला स्पंज जैसा मोटा-मोटा दिखता है ना। ऐसे ही प्रकार की वनस्पति हमको कहां देखने को मिलेगी? तो टुंड्रावन में क्लियर है यहां तक बात समझ गए? जितना बोला हो उतना लिख पाओगे। देखो कुछ कठिन काम नहीं करना है। इसलिए बोल रहा हूं क्योंकि कल संडे है। और मैं नहीं चाहता आप लोगों का संडे खराब हो। सोने में घूमने में पूरा बात सुन लो। सोने में घूमने में कुछ काम कर लेना थोड़ा सा। ठीक है? यह बनाए हुए हो या अभी मिल जाएगा। आपको केवल क्या करना है? उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन। थोड़ी देर पहले मैंने बताया कि उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन कहां मिलेंगे? जहां औसत वार्षिक वर्षा किससे ज्यादा
45:45 होगी? 200 सेंटीमीटर से। एक पॉइंट यह हो गया। ठीक है? अब मैं पूछूंगा कि उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन में पेड़ पौधे कैसे पाए जाते हैं? तो चलो खोज लेना बोलता लेकिन थोड़ा लीनियन हो जाता हूं। बता देता हूं। यहां पास जो पेड़ पौधे होते हैं वो तीन स्टेज पर मिलते हैं। एक बड़े-बड़े वृक्ष मिलेंगे। दूसरा छोटे वृक्ष मिलेंगे। तीसरा नीचे स्तर पर लताएं मिलेंगी। समझ गए बात? अबुजमाड़ के घने जंगल, अधमने उनने जंगल, सतपुड़ा के घने जंगल सब पढ़े हो ना? यह सब जो जंगल हैं इनके लिए हम लोग क्या बोलते हैं कि इतना ज्यादा घने होते हैं कि सूर्य की रोशनी जमीन पर नहीं पड़ती। अमेजॉन के बारे में भी ऐसे ही कुछ बोला जाता है। सुने हो ना ये सब बात? तो इतने घने होते हैं कि सूर्य की रोशनी भी अंदर तक नहीं मतलब पहुंच पाती। अबुजमा के लिए
46:32 भी आप लोग ये सुनोगे। तो भाई ऐसा क्यों होता है? तो ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ये जो वनस्पतियां हैं जो वेजिटेशन है वो तीन स्तर पर होगा। सबसे पहला स्तर पर बड़ी-बड़े वृक्ष मिलेंगे। बड़ी-बड़ी वृक्ष, बड़ी-बड़ी झाड़ियां। उसके नीचे छोटे वृक्ष मिलेंगे। नीचे लताएं मिलेंगी। समझ गए बात? कौन से प्रकार के बड़े-बड़े वृक्ष मिलते हैं यहां? यही आपको लिख करके लाना है। तो दो चार फेमस नाम है। एग्जाम ने पूछा है। तो जैसे रोजवुड है, आबनूस है, महोगनी है और एबोनी है। सुनो ध्यान से आजू-बाजू का चेहरा मत देखो। ते लिखबे कि नहीं ऐसा करके सुनो आप ही को लिखना है। अब मेरा याद नहीं आएगा तो Google बाबा से पूछोगे। फिर वो उल्टा सीधा बताएगा और मेरे को मालूम है जितने भी लोग लिख के लाएंगे
47:19 सब लिख के लाएंगे ऐसा तो नहीं लगता जितने भी लोग लिख के लाएंगे 80% का लिखावट सेम रहेगा क्योंकि जब Google से लिखते हैं तो कॉमा तक नहीं बदलते हैं। मैंने देखा है मेरा एक्सपीरियंस है। अरे कॉमा तो बदल देते कॉपी कर रहे हो तो थोड़ा अक्षर दो चार लाइन इधर-उधर। तो दो चार पेड़-पौधे हैं जो फेमस है सदाबहार वनों के जिनका नाम है रोजवुड, आबनूस, महोगनी, एबोनी। समझ गए बात? क्लियर है? उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन जहां औसत वार्षिक वर्षा 200 सेंटीमीटर से कम और 100 सेंटीमीटर से ज्यादा हो। समझ गए? इसके वनस्पतियों के बारे में नहीं बताना पड़ेगा। सब आपके घर के आसपास है। थोड़ी देर पहले बताया भी था। पीपल, नीम, बबूल, आम, साल, सागोन, शीशम जिसके लिए
48:06 हमारा राज्य फेमस है। ठीक है? तो ये सब वनस्पतियां कहां हो जाएंगी? यहां। क्लियर है? इतना लिख लोगे हो जाएगा। इसके और इसके बारे में ज्यादा लिखने की जरूरत नहीं है क्योंकि यहां के पेड़ पौधों को हम लोग जान के क्या करेंगे? हमारे काम का नहीं है। वो फॉरेन में बहुत खूबसूरत खूबसूरत पत्ते होते हैं। कहीं गुलाबी, कहीं पीले कलर के ऐसे पूरे मतलब जितने भी पिक्चर आप लोग देखो सुंदरता वाले तो रोड पर गिरे होते हैं। चौड़े पत्ते होते हैं। देखना अब चलो दूसरी भाषा में समझाता हूं। शाहरुख खान वाली मोहब्बतें देखे हो? देखे हो ना तो जो पत्ता उड़ते रहता है पूरे पिक्चर में पता नहीं कहां से आता है कौन इतना पत्ता उड़ा रहा था पूरे पिक्चरों में पत्ते उड़ते रहते हैं तो कैसे पत्ते होते हैं चौड़े पत्ते होते हैं ठीक है वही
48:52 चौड़े पत्ते किस टाइप के वन पारिस्थितिकी तंत्र के में देखने को मिलते हैं तो शीतोष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन यहां पास कैसे पत्ते देखने को मिलेंगे तो चौड़े पत्ते वाले वो जो पत्ते हम लोग देखते हैं उसको बोलते हैं लोरेल लोरेल के मैगनेलिया ये दो टाइप टाइप का पत्ता होता है। चौड़े पत्ते वाली वनस्पतियां होती हैं। बहुत खूबसूरत पतले और चौड़े-चौड़े पत्ते होते हैं। उसी को वो कहां मिलेंगे? सदाबहार वन में। दिमाग बढ़ाने के लिए क्या खाते हो? बादाम खाते हो। गलत चीज खाते हो। फिर बादाम दिमाग जैसा दिखने वाला एक ड्राई फ्रूट। >> अखरोट। अखरोट को क्या बोलते हैं? >> वालनट। अखरोट को क्या बोलते हैं? वालनट। तो जैसा अखरोट हो गया वालनट। एक और ड्राई
49:37 फ्रूट आता है जिसको बोलते हैं चेसनट। ठीक है? तो वालनट, चेसनट ये सारे प्रोडक्शन किस टाइप के ये सारे पेड़ किस टाइप के वन में देखने को मिलेंगे? तो पर्णपाती वनों में। यहां चौड़े पत्ते वाले देखने को मिलेंगे। तो यहां ड्राई फ्रूट जैसा वालनट, चेसनट, एक मैपल का पेड़ होगा। ये सब पेड़ हमको कहां देखने को मिलेंगे? पर्णपाती में। जान मालूम है तो ठीक, नहीं मालूम है तो भी कोई दिक्कत नहीं है। ठीक है? इंपॉर्टेंट कौन सा है? तो यह दोनों अब जानवर जानवर बताओ जानवर सदाबहार वन में कैसे जानवर मिलेंगे पर्णपाती वन में कैसे जानवर मिलेंगे चलो सदाबहार का नहीं मालूम पर्णपाती का तो बता दो
50:26 चलो एक दो चीज बताता हूं देखो चीजों को लिंक करके याद करोगे बहुत अच्छा रहेगा आगे भी काम आएगा यह भारत है यह मैप है यहां मैं बात करूं सदाबहार वन कहां देखने को मिलेगा जहां सबसे ज्यादा वर्षा होगी। पहले ही दिन बताया था एक वेस्टर्न घाट वाला एरिया है और दूसरा नॉर्थ ईस्ट वाला एरिया है। यह दो जगह अत्यधिक वर्षा देखने को मिलती है। फिर आप लोग जीके में बचपन से सुनते हो। भारत में सबसे ज्यादा पानी पहले गिरता था चेरापूंजी में। अब गिरता है मौसिन राम में। दोनों में 14 कि.मी. का डिफरेंस है। ज्यादा नहीं है। दोनों एक ही जगह पे स्थित है। खांसी की पहाड़ियों में। यह खांसी की पहाड़ी कहां मिलेगी? मेघालय में। और मेघालय कौन सा क्षेत्र है भारत का? उत्तर पूर्वी। कौन सा क्षेत्र है? उत्तर पूर्वी। अभी बताया उत्तर पूर्वी में और दक्षिण भारत के वेस्टर्न घाट में ही
51:13 हमको सदाबहार वन मिलेगा। कहां सदाबहार वन मिलेगा जहां सबसे ज्यादा पानी गिरेगा। तो वहीं वो जगह भी मिलेगी जहां औसत वार्षिक वर्षा सबसे ज्यादा होगी। तो देख लो नॉर्थ ईस्ट में पूरा सदाबहार वन है। वेस्टर्न घाट में पूरा क्या है? सदाबहार वन। यह तो चलो दिमाग में बैठ गया। अब हाथी बताओ सबसे ज्यादा कहां मिलेंगे? सदाबहार वनों का जानवर जो है वह हाथी है। छत्तीसगढ़ में मिलता है लेकिन आना जाना करने वाले हाथी आते हैं या रहने वाले हाथी नहीं है। पढ़ाऊंगा आगे हाथी प्रोजेक्ट एलीिफेंट में वो कॉरिडोर में आना जाना करते हैं। सबसे ज्यादा हाथियों की संख्या अगर पूरे भारत में कहीं है तो वह है पहले नंबर पर कर्नाटक में। कहां है? कर्नाटक। क्या कर्नाटक वेस्टर्न घाट में है?
52:01 वेस्टर्न घाट में ही है। दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा हाथी मिलेंगे आसाम में। काजीरंगा नेशनल पार्क में। ठीक है? आसाम में। क्या आसाम उत्तर पूर्वी भारत का हिस्सा है? है। तीसरे नंबर पे हाथी सबसे ज्यादा मिलते हैं केरल में। क्या केरल वेस्टर्न घाट का पार्ट है? है। >> तो देखो जैसा वनस्पति मतलब जैसा वर्षा वैसी वनस्पति और वैसे ही वहां के जीव-जंतु। तो एक सिंह वाला गैंडा कहां मिलेगा? पूरी भारत में केवल एक जगह मिलता है। असम में थोड़ा सा पश्चिम बंगाल में भी मिलेगा। जलदापारा नेशनल पार्क है वहां भी मिलता है। तो काजीरंगा, मानस, असम सिर्फ भारत में मिलता है एक सिंह वाला गैंडा पूरे वर्ल्ड में। सिंह जो है वो पूरे भारत में केवल एक ही स्टेट में एक ही राज्य में मिलता है वो है
52:47 गुजरात। और हम लोग जिसको किसी को भी देख के हम लोग शेर बोल देते हैं। एक्चुअली में शेर अलग होता है और बाघ अलग होता है। हम लोग बाघ को भी क्या बोलते हैं? शेर। अभी दुर्गा पूजा करेंगे। दुर्गा माता किस में बैठी है? शेर में। देखने से वो धारी वाला बाघ है। थोड़ा सा डिफेक्ट है हमारी बचपन की चीजों में। सुधार दूंगा या सुधर जाएगा। समझ गए बात? अभी धारी वाला फोटो दिखाऊंगा बाघ का और पूछूंगा ना क्या है? तो सर शेर बोलोगे। अपने आप से पूछो। शेर ही बोलोगे। सर बाघ है। कोई नहीं बोलेगा। जंगल में क्या दिखा? तो शेर दिखा। देखने से वो टाइगर है। बाघ है। लायन थोड़ी ना है। लयन शेर केवल एक ही जगह मिलता है गुजरात में। समझ गए बात? तो एक सिंह वाला गैंडा अगर असम में मिल रहा है तो असम उत्तर पूर्वी
53:32 भारत का हिस्सा है और उत्तर पूर्वी भारत है मतलब वह सदाबहार वन है और सदाबहार वन है तो एक सिंह वाला गैंडा, हाथी ये सब किसके जानवर कहलाएंगे? तो इसके बताओ हिरण, सांभर, चीतल, सियार, बाघ ये सब कहां देखने को मिलेंगे? यहां। हाथी, गैंडा यह सब कहां देखने को मिलेगा? बंदर यह सब कहां देखने को मिलेगा? सदाबहार वन में। समझ गए बात? इतना आप लोग लिखना। इसको लिखाऊंगा और इक्वेटिक इकोसिस्टम पढ़ाऊंगा मंडे को। मोस्टेंट वही है क्वेश्चन। वहीं से आता है। क्लियर है ना बात? समझ गए? >> इसके अलावा एक और कांसेप्ट चलता है बायोडायवर्सिटी का, जैव विविधता का। यह हम
54:20 लोग डिटेल में पढ़ेंगे आगे। लेकिन यह थोड़ा सा अभी आपको क्लियर होना जरूरी है। क्या होती है जैव विविधता? बायोडायवर्सिटी। तो किसी एक निश्चित स्थान पर जितने ज्यादा प्रकार के पेड़-पौधे और जीव-जंतु मिलेंगे, उस जगह की बायोडायवर्सिटी उतनी ही ज्यादा होगी। समझ गए बात? अब यह जो हम लोगों ने पढ़ा है, एक चीज बताओ। सबसे ज्यादा पेड़-पौधे कहां मिलेंगे? कौन से इकोसिस्टम में मिलेंगे? >> किस में मिलेंगे? उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन लास्ट थ्री ईयर में दो बार एक बार पीएससी ने और एक बार व्यापम ने एग्जाम पूछा है कि पृथ्वी के किस भाग पर जैव विविधता सबसे ज्यादा होती है? ऑप्शन में ऐसे ही चार नाम था। तो कहां
55:07 होती है? उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन। ये उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन वहां मिलेगा जहां सबसे ज्यादा पानी गिरेगा। जहां सबसे ज्यादा पानी गिरेगा। सबसे ज्यादा पानी कहां गिरेगा? तो याद करो आईटीसी जेड विषुवत रेखा के 5 डिग्री उत्तर से लेकर 5 डिग्री दक्षिण के बीच में पूरे विश्व में अगर बात करें कि एवरग्रीन फॉरेस्ट कहां देखने को मिलते हैं तो उसी रीजन पे देखने को मिलते हैं। 5 1/2° नॉर्थ टू 5 1/2 डिग्री साउथ। कल ही बोला था इस अक्षांश को जाकर के देखना तो आपको Amazon वहीं मिलेगा जहां मैं आपको बता रहा हूं। विश्व में सबसे ज्यादा हरे-हरे वाले जो मैप नक्शे आते हैं ना हरा मतलब वन। सबसे ज्यादा हरा हरा देखो कहां देखने को मिल रहा है? इक्विटेरियल लाइन के आसपास। समझ गए बात?
55:53 क्लियर है? लिख लोगे इतना। तो सबसे ज्यादा जैव विविधता कहां देखने को मिलेगी? वनों में। उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन में। और सबसे कम जैव विविधता कहां देखने को मिलेगी? >> टुंड्रावन में। समझ गए बात? क्लियर है? चलो तो फिर लिख के लाइएगा मंडे को। ठीक है? चलो आज के लिए फिर इतना ही। थैंक यू सो मच।