0:00 [संगीत] नमस्कार स्वागत है आपका संसद टीवी पर। मैं हूं मनोज वर्मा और आप देख रहे हैं हमारा खास कार्यक्रम मुद्दा आपका। आज हम बात करेंगे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अध्यात्म की, आस्था और भविष्य की। इस मुद्दे पर बात इसलिए करेंगे क्योंकि हाल ही में हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का आध्यात्मिकता के साथ एकीकरण विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में 20 से अधिक देशों के लगभग 200 वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी ने
0:46 संबोधित करते हुए एआई की भूमिका से संबंधित विभिन्न पहलुओं का उल्लेख किया। दरअसल वर्तमान समय में एआई केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि यह शिक्षा, चिकित्सा, उद्योग और सुरक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहा है। लेकिन दूसरी ओर नैतिकता, गोपनीयता और रोजगार पर इसके प्रभाव को लेकर कई चिंताएं और मुद्दे भी उभर कर सामने आ रहे हैं। इसलिए मुद्दा आपका में आज हम बात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अध्यात्म की करेंगे। चर्चा करने के लिए दो खास मेहमान मेरे साथ जुड़े हुए हैं। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रो वाइस चांसलर डॉ. चिन्मय पांड्या जी हमारे साथ जुड़े हुए हैं। डॉक्टर चिन्मय जी आपका स्वागत है संसद टीवी पर। साथ ही हम बात
1:33 करेंगे साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अमित दुबे जी से। अमित जी आपका भी बहुत-बहुत स्वागत है संसद टीवी पर। जाहिर सी बात है कि मुद्दा एआई और अध्यात्म का है। महत्वपूर्ण मुद्दा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी ने इस मुद्दे पर क्या कहा? आइए सुनते हैं। >> दुनिया के हर व्यक्ति को नैतिकता, सत्य, अच्छा धर्म, संस्कृति दुनिया में जाना चाहिए। इसके लिए एआई का उपयोग करना चाहिए। यह आज की आवश्यकता है और इसीलिए भारत के अंदर जो श्रेष्ठ मूल्यों की सशक्त परंपरा रही है सर्वे भवंतु सुखिन समस्त विश्व को हमने अपना परिवार माना है और निश्चित रूप से इस नाते हमारी जिम्मेदारी हो जाती है कि हम एआई के माध्यम से भारत
2:21 की संस्कृति ज्ञान को दुनिया में पहुंचाएं ताकि सर्वे भवती सुकृति सारा विश्व एक परिवार के रूप में काम करें। आज जब अशांति का समय हो उस समय शांति और स्थिरता के लिए हमें हमारे ज्ञान परंपरा को दुनिया में पहुंचाना होगा। हमने हमेशा शांति की बात की है। हमने हमेशा सत्य की बात की है। हमने हमेशा नैतिकता की बात की है। और यह सब मूल्य अगर सनातन मूल्य को अगर ठीक से पहुंचाना है तो हमें ठीक से एआई का उपयोग करना पड़ेगा। और इसीलिए भारत का अतीत बहुत समृद्ध गौरवशाली वैदिक परंपराओं आध्यात्मिक परंपराओं से
3:08 पोषित रहा है और मुझे आशा है कि हम सब इस नवाचार प्रौद्योगिक के युग में हम इसका ठीक से उपयोग करेंगे और आने वाली पीढ़ी को अच्छे शस्त्र और शास्त्रों के बारे में ज्ञान देंगे ताकि उनके जीवन में एक नैतिकता आए और उसकी भागिता हो इसलिए वैश्विक सहभागिता के अंदर भारत की आध्यात्मिक चेतना पहुंचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। जाहिर सी बात है मुद्दा एआई और अध्यात्म का है। आस्था और भविष्य का है। इसलिए पहला सवाल मेरा डॉ. चिन्मय जी आपसे है क्योंकि मुद्दा एआई का आध्यात्मिकता के साथ एकीकरण का है। जो अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आपके विश्वविद्यालय में आयोजित हुआ उसका मुद्दा भी यही था। इस
3:54 मुद्दे से क्या तात्पर्य है? क्या मायने हैं इसके? >> यह मुद्दा आज के समय की सर्वोपरि आवश्यकता कहा जा सकता है। आज का जो समय है वो निश्चित रूप से एआई का समय है। हम लोग एक ऐसे समय में जी रहे हैं जहां पर विज्ञान, तकनीकी, साइंस, टेक्नोलॉजी चाहते ना चाहते हुए जाने अनजाने हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र पर आधिपत्य करके बैठे हैं। >> जी। कोई पिछले 100 सालों की यात्रा को उठा के देखे तो अनुभव कर सकेगा कि संचार के साधन सूचना की प्रौद्योगिकी यातायात के माध्यम कृषि अर्थव्यवस्था चिकित्सा ये सब पूरी तरह से बदल गए। इसी अवधि में एआई का आगमन हुआ और एआई के बाकी के सारे पक्षों पर जो पड़ते प्रभाव है सोशियोलॉजी पर, साइकोलॉजी पर, एंथ्रोपोलॉजी पर, मेडिसिन पर बाकी के जो जीवन के आस्पेक्ट है उन पर
4:42 चर्चा बहुत हो रही है। पर जो हमारे जीवन का मूल विषय है, ह्यूमन बीइंग्स आर डिफाइंड बाय द एस्पिरेशन। जी >> हमारे जीवन का जो मूल उद्देश्य है वह हमारे जीवन के उद्देश्य से परपस से निकल कर के आता है और यदि वह व्यक्ति के पास से हटा लिया जाए या वो लुप्त हो जाए या वो विदा हो जाए तो जो ह्यूमैनिटी है वो अपनी परिभाषा को खो बैठेगी इसलिए इस विषय पर यहां चिंतन रखा गया और विश्व के जितने प्रतिष्ठित वैज्ञानिक हैं वो इस जगह पर उपस्थित हुए। पहली बार इंटर पार्लियामेंट्री यूनियन उसके सेक्रेटरी जनरल जुड़े जो यूसी बरकली के हेड हैं प्रोफेसर रसेल वो जुड़े। इसके साथ-साथ यहां पर जितने प्रतिष्ठित डॉक्टर रॉबर्ट ट्रेगर हैं, विलियम जों्स हैं, सब यहां पर पर्सनली आए और उन्होंने सभा को संबोधित किया। तो एक महत्वपूर्ण विषय है जिस पर
5:27 चिंतन करने की भी आवश्यकता है। मंथन संवाद समीक्षा सभी जरूरी हो जाते हैं। >> जाहिर सी बात है डॉक्टर चम्म जी कि एआई और आध्यात्मिकता के साथ एकीकरण का जो मुद्दा है वह खासा महत्वपूर्ण है। लेकिन ओम बिरला जी ने इस कार्यक्रम में इस सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। अमित जी मैं आपसे जानना चाहता हूं उस मुद्दे पर। ओम बिरला जी ने कहा कि एआई को मानवता की सेवा करनी चाहिए। उसे नियंत्रित नहीं करना चाहिए। इस मुद्दे को आप कैसे देखते हैं? >> नहीं बिल्कुल ये जो बिरला जी की बात है बहुत प्रासंगिक है क्योंकि किसी भी इनोवेशन का जो पहला यूजर होता है वो क्रिमिनल होता है। अब गौर से देखिए कि जितने भी पिछले कुछ दशकों में नए इनोवेशन हुए सबसे पहले वो डार्क वेब पे क्रिमिनल के हाथों में आ गए। और इस वजह से जब चैट जीपीटी भी मार्केट में आया उससे पहले
6:12 फ्रॉड जीपीटी और वम जीपीटी जैसे एआई मॉडल्स थे जिससे आप फ्रॉड कर सकते हैं जिससे आप वायरस लिख सकते हैं। ऐसे में यह संवाद बहुत प्रासंगिक होता है कि कैसे पॉजिटिव उपयोग सुनिश्चित किया जाए। ये क्रिमिनल द्वारा ना इस्तेमाल होने लगे और उसके नेगेटिव यूज़ ना होने लगे। ये बहुत बहुत जरूरी चीज है और ये ग्लोबल कंसर्न है। ऐसा नहीं कि सिर्फ भारत की बात है। इसलिए भारत को इसमें नेतृत्व करना होगा। भारत की जो मूल रहे हैं किसी भी ऐसे टेक्नोलॉजी के लिए बहुत प्रासंगिक है। मैं हमेशा एक बात करता हूं कि हम सब एआई ही है। एक्चुअली वी ऑल आर द प्रोडक्ट द डेट दैट हैस बीन फस आवर बर्थ। बचपन से लेकर आज तक जो हम डेट कंजम करते हैं हम उसका प्रोडक्ट होते हैं। और यही चीज जब चैप्टर 13 भगवत गीता के रेफरेंस में मैं कोट करता
6:59 हूं अपने सेशन में कि भगवान कृष्ण से अर्जुन ने पूछा कि आप ज्ञान योग, भक्ति योग, कर्म योग पढ़ा रहे हैं। पहले बताइए मैं कौन? तो भगवान कहते हैं कि तुम्हें क्या लगता है तुम अर्जुन हो? तुम तो अर्जुन के पहले भी थे। तुम अर्जुन के बाद भी रहोगे। इस वक्त तुम अर्जुन का रोल प्ले कर रहे हो। तो अर्जुन कहते हैं तो फिर मैं कौन? तो वो कहते हैं कि तुम बचपन से लेकर आज तक जो भी सराउंडिंग्स, चैलेंजेस, गुरु से, टीचर से वो जो डाटा पॉइंट तुम्हें मिला उससे तुम अर्जुन बन गए। तुम्हारी जगह कोई भी होता वो अर्जुन ही बनता। और फिर मैं अपने आप को पहचानू कैसे? से तब वो मांडूक परिषद रेफर करते हैं दृ दृष्टि विवेका का सिद्धांत कि कैसे आप अपने आप को पहचान सकते हैं। अब सवाल यह है कि यदि हम सब एआई हैं। हम सब उस डाटा से वशीभूत है जो बचपन से लेकर आज तक हमें मिला है। यदि मेरा जन्म झांसी के बजाय रोमानिया हो जाता
7:45 तो आदमी कुछ और होता। कोई दूसरा खाना खा रहा होता। कोई दूसरे कपड़े पहन रहा होता, कोई दूसरी भाषा बोल रहा होता और जिंदगी भर बोलता कि आई एम अ प्राउड रोमानिया। 50 साल के बाद क्यों मुझे बोलता कि भाई साहब आप तो इंडिया में पैदा हुए थे तो मैं कंफ्यूज हो जाते। >> ये जो हमारा स्पिरिचुअल एलाइनमेंट है कि आप खुद को जो समझ रहे हो वो नहीं है। वह सिर्फ डाटा का प्रोडक्ट है। आप तो एस अ विटनेस उसको जी सकते हो, देख सकते हो कि इतनी पावरफुल थॉट प्रोसेस है कि यदि हम ये कन्व कर गए तो मुझे लगता है कि हम एआई के क्षेत्र में ना सिर्फ नेतृत्व करेंगे हम एआई के पॉजिटिव न्यूज़ को भी कंट्रोल कर पाएंगे, रेगुलेट कर पाएंगे। क्योंकि अभी ये जो एआई जैसे बायस हो जाता है। एआई हेलुसिनेट करता है। एआई के अंदर वो सारी गलतियां दिखती है जो एक ह्यूमन बीइंग में दिखती है क्योंकि डाटा तो वहीं से मिला
8:31 है। >> ये सारे चैलेंजेस हम काउंटर करेंगे कैसे? उसके लिए मेरे ख्याल से भारत के पास वो ज्ञान है और वो ज्ञान प्रमुखता से सामने लाना चाहिए जिससे कि हम पॉजिटिव यूज़ ऑफ़ एआई को प्रमोट कर सके। >> जी जाहिर सी बात है लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी ने भी इस मुद्दे पर जोर दिया। डॉक्टर चिन्मय जी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी ने कहा कि एआई तकनीक हमेशा नैतिक सीमाओं के भीतर होनी चाहिए। मानवीय मूल्यों, करुणा और आध्यात्मिकता पर आधारित होना चाहिए। ये किस तरह से आध्यात्मिकता पर आधारित हो सकती है? क्या टेक्नोलॉजी का आध्यात्मिकता के साथ किस तरह समन्वय हो सकता है? >> निश्चित रूप से हो सकता है और माननीय लोकसभा अध्यक्ष जी ने जो कहा वो बिल्कुल सत्य कहा। भारत की भूमि उसी चिंतन को देने
9:16 की भूमि रही। हमारे यहां पर एक चिंतन निकला जिसको पूज्य गुरुदेव ने कहा वैज्ञानिक अध्यात्मवाद >> कि विज्ञान और अध्यात्म एक दूसरे के विरोधी नहीं है। पूरक है। >> हम लोगों को लगता भर है। विज्ञान जो है बाहर की लौकिक विकास के लिए है और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अध्यात्म है। दोनों की धाराएं अलग-अलग हो सकती हैं। पर दोनों के गुण अलग-अलग नहीं है। दोनों एक दूसरे को मिलकर के ही मानवता को संपूर्णता प्रदान करते हैं। भगवान ने गीता में एक शब्द कहा है धूमेना अग्नि यथा दर्शो मनचा जो दिखाई पड़ता है आग है तो धुआ है शुभ है तो अशुभ है जहां पर शीशा है वहां धूल है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अपने एडवांटेजेस भी है और डिसएडवांटेजेस भी है ये हमारे ऊपर है कि हम उनका उपयोग कैसे करते हैं आज की समस्या यह है कि हम घोड़े को बनाने पर तो मेहनत कर रहे हैं। घुड़सवार के ऊपर नहीं कर रहे हैं। यंत्र
10:03 तो बेहतर से बेहतर हो रहे हैं। यंत्र को संभालने वाले के ऊपर मेहनत नहीं है। यू हैव द वेपन्स। अब वेपन यदि गलत व्यक्ति के हाथ में गए तो वही जो है डिस्ट्रक्शन का कारण बन जाते है। यू हैव द एटम। एटम गलत व्यक्ति के पास में गया तो एटम एक बम बन जाता है और वही एटम एनर्जी ला के न जाने कितनों का कल्याण करता है। तो जो उद्देश्य है वो निर्धारित करता है कि उसका आउटकम क्या आएगा। इंटेंशन इज द डिटरमिनेंट ऑफ द आउटकम। >> यहां पर मैं दो बातें महत्वपूर्ण लाना चाहता हूं कि हम लोगों ने इस इसको यहां किया क्यों? हरिद्वार की पुण्य भूमि पर करने के पीछे का कारण क्या था? जी >> कैन आई से कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जो लाभ है वो तो हम लोग महसूस कर ही सकते हैं। >> निश्चित रूप से उससे एक्सेसिबिलिटी ऑफ इंफॉर्मेशन पहले से बेहतर हुई। एक उदाहरण मैं देता हूं कि स्वामी विवेकानंद की पोएम हम लोग 87 में ढूंढने के लिए निकले थे। तो
10:50 30 लाइब्रेरीज का चक्कर काटने के बाद मिल पाई थी। आज आप चैट जेपीटी में डालिए। आपको दो मिनट में पता चल जाती है कि विवेक लहरी में है। नजदीकी लाइब्रेरी कहां पर है? वह प्राप्त हो जाएगी। सुमित्र नंदन पंत का ट्रांसलेशन चाहिए कि आपको सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का चाहिए। जो आप चाहे वो प्राप्त कर सकते हैं। देयर आर अदर एडवांटेजेस नोंड आरनो का एग्जांपल है। ये बच्चा जो था वो 21 साल की उम्र में एक्सीडेंट हुआ। ही लॉस्ट ऑल फोर लिम्स। आई एआई का ब्रेन चिप लगा। इस एबल टू वॉक विद इन ए डे ऑफ द ऑपरेशन। एक दिन में चल पाने की स्थिति में है। आप अपने फोन में बीम आईज को डाउनलोड करेंगे तो जो व्यक्ति विजुअली इंपेयर्ड है वो चल सकता है। आप जीब्रा मेडिकल विज़न को डाउनलोड करेंगे तो मेरा क्षेत्र न्यूरोलॉजी का है। आई प्रैक्टिस्ड एस अ पर्सन विद लाइक यू नो इन लंदन फॉर 10 इयर्स और डिशिया के जो पेशेंट
11:36 है उनके आप अर्ली डायग्नोसिस कर सकते हैं। उनका अर्ली इंटरवेंशन कर सकते हैं। डिजीज की सर्िलेंस कर सकते हैं। प्रोग्निसिस और प्रोग्नोस्टिक इंडिकेटर्स को देख सकते हैं। तो मेडिकलली जितने एडवांसमेंट है दे आर बियों्ड आवर इमेजिनेशन बट एट द सेम टाइम हम लोग ये महसूस नहीं कर पा रहे हैं पर हमारे आसपास की दुनिया पूरी तरह से एआई की दुनिया हो गई है आपके फोन में चाहे वो जैेमिनी है चाहे मेटा है वो आपका एआई है चाहे आपका सेल्स है रिटेल है मार्केटिंग है वो एआई है। आप पेंगम लैब्स के डेटा को उठा के देखेंगे तो पिछले साल 6ाउज आर्टिकल्स पर डे वर बीइंग रिटन बाय द एआई और ये गारंटी नहीं है कि वो आर्टिकल एआई ने लिखा कि ह्यूमन बीइंग ने लिखा है। आज की तारीख में आप यह सोच के देखिए कि भारत की इकॉनमी 4.1 ट्रिलियन की है और एआई कंपनीज़ की जो कलेक्टिव वेल्थ है दैट इज़ 12 ट्रिलियन डॉलर। तो धीरे-धीरे करके क्या है
12:22 पावर सॉल्यूशन पॉलिटिक्स हराकलेट सेड अ ब्यूटीफुल स्टेटमेंट दैट इफ यू आर नॉट इंटरेस्टेड इन पॉलिटिक्स डज नॉट मीन पॉलिटिक्स इज नॉट इंटरेस्टेड इन यू। तो आप हो सकता है कि एआई में इंटरेस्ट ना रखें पर एआई हैज़ गॉट एब्सोल्यूट इंटरेस्ट इन यू। और वो हमारे सामने घट रहा है। मैं एक ही उदाहरण देना चाहता हूं कि जिस कारण से हम लोग चिंतित हैं। >> जी जेफरी हिंटन इज द पर्सन हु गॉट द नोबेल प्राइज ही गॉट द ट्यूरिंग अवार्ड एस वेल एंड ही वास कॉल्ड एस द गॉड फादर ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उनको आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जनक कह करके पुकारा गया एंड ही रिजाइन फ्रॉम ह पोजीशन सो दैट ही कैन टॉक फ्रीली अबाउट द डेंजर्स ऑफ द आई एंड ही कॉल्ड इट एन एकिस्टेंशियल थ्रेट टू ह्यूमैनिटी उनका कहना यह है कि हमारा अंतिम आविष्कार है। इसके बाद हम लोग किसी आविष्कार को करने की स्थिति में नहीं होंगे। बाकी के सारे आविष्कार जो है वो
13:09 एआई ही कर रहा होगा। होगा द बुक दैट इज वर्थ रीडिंग इस कॉल आवर फाइनल इन्वेंशन और इसलिए क्या है आध्यात्मिक जो सोच है इसके पीछे बहुत जरूरी है। इसलिए जरूरी है क्योंकि प्रयोग आविष्कार अनुसंधान अपने आप में बुरे नहीं होते। उनको चलाने वाले बुरे होते हैं। तो इसलिए क्या है कि यदि उसकी सोच बेहतर होगी तो वही चीजें जो है वो समाज के कल्याण का लोक की उन्नति का आधार बनेगी। दूध है। सांप के मुंह में लग गया तो जहर बन जाता है। ऋषि के हाथ में गया तो प्रसाद बन जाता है। दूध का दोष नहीं है। अग्नि वही है। उसके अंदर आप हवन सामग्री डालेंगे तो यज्ञ के धुएं से पूरे संसार को सुसज्जित करती है। उसके अंदर कूड़ा डालेंगे तो बदबू आएगी। तो हम आविष्कार को दोष नहीं दे रहे। आविष्कार के उपयोग के ऊपर नियंत्रण लगाने की बात कर रहे हैं। और हम लोगों ने पिछले साल हिरशिमा में पोप
13:56 फ्रांसिस भी थे और दुनिया के सारे प्रसिद्ध लीडर 14 24 लीडर वहां एकत्रित हुए थे। वहां हम लोगों ने हिरशिमा कॉल फॉर एआई एथिक्स के ऊपर साइन इसी उद्देश्य से किया कि इसके ऊपर समय रहते नियंत्रण को स्थापित किया जा सके। जी जाहिर सी बात है इसीलिए हम एआई और अध्यात्म पे चर्चा कर रहे हैं। आस्था और भविष्य पे चर्चा कर रहे हैं। क्योंकि टेक्नोलॉजी का विस्तार जिस तेजी के साथ हुआ है। एआई का जिस तेजी के साथ विस्तार हो रहा है। नए-नए प्रयोग सामने आ रहे हैं। नई-नई टेक्नोलॉजी सामने आ रही है। जाहिर तौर पर अमित जी समाज में एक व्यापक क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है। चाहे वो बात मैं स्वास्थ्य की की जाए या शिक्षा की की जाए या दूसरे क्षेत्रों की। लेकिन एक चुनौती भी बहुत बड़ी उभर के सामने आई है। एआई और टेक्नोलॉजी के कारण वो नैतिकता की है, गोपनीयता की है, डीप
14:44 फेक की है और रोजगार पर जो असर पड़ रहा है, जो प्रभाव पड़ा है, उसको उन चिंताओं को आप कैसे देखते हैं जिस और डॉक्टर चिन्मय जी इशारा कर रहे हैं। >> नहीं बहुत बहुत गंभीर मुद्दा है। मैं आपको एग्जांपल देता हूं। कल का मोबी क्विक का एक कोई फ्रॉड हुआ जिसमें 40 करोड़ दो दिन में निकल गए। मैं चैट जीपीडी से डिस्कस कर रहा था कि वनेबिलिटीज क्या-क्या है। तो उसने मुझे बताया कि ये कमजोरियां थी सिस्टम में जिसकी वजह से ऐसासा हुआ। लास्ट में उसने लिख दिया आप एफआईआर से भी मैं आपसे एफआईआर शेयर करूं और उसमें ये चीजें और भी है। तो मुझे बड़ा आश्चर्य लगा। मैंने कहा एफआईआर तो आज सुबह हुई है। ये चैट जीपीटी के पास कैसे पहुंची? इतना फास्ट डाटा अपलोड हो रहा है कि आप आज की डेट में कोई भी इंफॉर्मेशन जो इंटरनेट पर
15:29 अवेलेबल है या नहीं है एआई के पास पहुंच जाती है और ये आपकी सिक्योरिटी के लिए बहुत बड़ा थ्रेट क्रिएट हो जाता है क्योंकि वो आपके बारे में पहले से जानता है। अभी जब वो एक एआई एक्सपेरिमेंट वो चल रहा था जिसमें लड़कियां साड़ी में फोटो क्रिएट कर सकती है अपनी तो उसमें एक लड़की ने साड़ी में फोटो क्रिएट की और उसके बाद जो उसने इनपुट फोटो दी थी उसमें वो फुल स्लीव्स में थी पर जब उसने साड़ी में फोटो क्रिएट की तो उसको हाफ स्लीव में दिखाया और उसके हाथ पर एक तिल था और वो दिखा दी तो उसने सोचा कि जब मैंने फोटो जो दी है उसमें तो वो तिल नहीं दिख रहा है। इसको कैसे पता कि मेरे हाथ मत। >> इसका मतलब है इसके पास मेरी कोई पुरानी फोटो भी है जो ओपन सोर्स इसने ली है और यह मुझे पहचान के उस तरह की बॉडी क्रिएट कर रहा है। ये इतना बड़ा रिस्क है। हमें पता ही नहीं कि हमारा कौन-कौन सा डाटा एआई में
16:16 कब कब चला गया है और कैसे उसका मिसयूज़ हो सकता है बाय क्रिमिनल्स। इसके लिए पहले तो अवेयरनेस जरूरी है लोगों को और दूसरा उसके लिए रेगुलेशन जरूरी है। जो इस तरह के डिस्कशन हो रहे हैं वो इसी कंसर्न्स को जाहिर करने के लिए हो रहे हैं। बहुत सारे एक्सपेरिमेंट मैंने किए। सर मैं आपको बताता हूं मनोज जी कि मैंने एक बार चडजी को अपने हाथ की फोटो खींच के दे दी दोनों हाथ >> जी >> और उसको कहा कि मेरा पाम हिस्ट्री के थ्रू आप पढ़ के बताइए मेरे भविष्य के बारे में और उसने बहुत अच्छा बताना शुरू किया जब पूरा बताया उसके बाद उसने लास्ट में बोला कि यदि आप मुझे अपना लोकेशन और डेट ऑफ बर्थ और टाइम भी बता दे तो मैं और भी बता सकता हूं। तो मैंने वो भी बता दिया तो उसने और कुछ बताना शुरू कर दिया। फिर मैंने कहा फिर उसने कहा कि यदि आप मुझे अपना चेहरा की फोटो दे दे तो मैं और भी कुछ बता सकता हूं। विश्वास मानिए क्योंकि एआई आपको इंप्रेस करने के लिए तो बोलेगा नहीं
17:01 क्योंकि कोई ह्यूमन तो है नहीं। तो जो एनालिसिस कर रहा है वो इतना कन्वसिंग एनालिसिस था कि मुझे लगा कि यदि ये चीज इतनी आसानी से एनालिसिस करके जो इयर्स ऑफ एफर्ट्स लोग करके वो नॉलेज ले पाते हैं। ये हर जगह उस तरीके से उस डोमेन में ट्रेंड है कि आप इंस्टेंटली उसको यूज़ कर सकते हैं। तो ये पॉजिटिव डायरेक्शन की ओर भी इशारा कर रहा है। लेकिन नेगेटिव डायरेक्शन की ओर भी इशारा कर रहा है। मिसयज भी होगा। आज की डेट में मैं उस डोमेन में एक्सपर्टीज गेन कर सकता हूं जो मुझे आती नहीं है और मैं अपने हिसाब से उसको नेगेटिवली भी यूज़ कर सकता हूं। तो मेरे ख्याल से जैसा कि अभी वाइस चांसलर साहब बोल रहे थे कि जो हमारा स्पिरिचुअल ज्ञान है वो इस समय इतना बड़ा रोल प्ले कर सकता है अध्यात्मिक ज्ञान। क्योंकि यही एक ऐसी चीज है जो इंसान जो कि उसको कंट्रोल
17:47 कर रहा है उसको कंट्रोल करने के लिए इस्तेमाल होगी ना कि टूल को रेगुलेट करने के लिए और यदि हम ये कर पाए विश्वव्यापी कर पाए तो मेरे ख्याल से जो एक कंसर्न है वो काफी हद तक दूर किया जा सकता है। >> जी बिल्कुल डॉक्टर चिन्मय जी भारत ने हमेशा वसुदेव कुटुंब का संदेश दिया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी ने भी इस सम्मेलन में जो दुनिया भर से वैज्ञानिक आए थे उनके बीच वसुदेव कुटुंब का संदेश दिया। एआई जो है वो भारत के प्राचीन ज्ञान और ज्ञान प्रणालियों को विश्व स्तर पर किस तरह से प्रसारित कर सकता है। किस तरह योगदान दे सकता है? कैसे दे सकता है? >> इस क्षेत्र में एआई से बढ़कर के दूसरी टेक्नोलॉजी हो भी नहीं सकती। और अभी पिछले ही दिनों माननीय प्रधानमंत्री जी के द्वारा जो है भारत मंडपम में वो ज्ञान
18:34 भारतम के नाम से एक बहुत ही इंपॉर्टेंट पोर्टल को लांच किया गया जिसमें जितनी भारत की प्राच्य भाषाएं हैं और प्राच्य भाषाओं की जितनी पांडुलिपियां है मैनुस्क्रिप्ट्स हैं और उसके अंदर जो समाहित ज्ञान विज्ञान की धरोहर है उसको सर्वसामान्य के लिए उपलब्ध कराया गया है और निश्चित रूप से आज के समय की सर्वोपरि आवश्यकता वही है क्योंकि ऐसी दुनिया की कोई समस्या ही नहीं है जिसका समाधान भारतीय संस्कृति के अंदर सन्नहित ना हो और जिसको भारत लंबे समय से जीता ना रहा हो या जिसको लंबे समय से भारत बताता ना रहा हो। मैं आपको एक छोटा सा उदाहरण देता हूं। जैसे कि चिकित्सा का ही क्षेत्र है। अब आप हार्ट के लिए जो शब्द है वो हृदय है संस्कृत में >> और हम लोग एस ए डॉक्टर वी हैव बीन यूजिंग इट फॉर लॉन्ग पीरियड ऑफ़ टाइम। पर जो हृदय शब्द है वो संस्कृत के तीन शब्दों से आया
19:19 है। हरति ददाति आति हरति का मतलब है टू रिमूव द डीऑक्सीजनेटेड ब्लड। ददाति का मतलब है टू गिव द ऑक्सिजनेटेड ब्लड। याति का मतलब है टू पलसेट। तो जो वर्ड है इट इज द डिस्क्रिप्शन ऑफ द ऑर्गन एंड नॉट ओनली द पर्सन हु क्रिएटेड इट। जिसने बनाया उसको सिर्फ जो है भाषा विज्ञान का ही ज्ञान नहीं था। उसको मानवीय संरचना का भी ज्ञान था और ये शब्द जो है 8000 साल से ज्यादा पुराना है। अदर वाइज हम लोग मानते हैं कि फादर ऑफ जो वस्कुलर साइंसेस है वो जूलियन हक्सले और वो 200 साल पुराना है। पर ज्ञान लंबे समय से पुराना है। तो जो आपने बोला वो निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बहुत बड़ा मार्गदर्शक और बहुत ही ज्यादा पथ प्रदर्शक सिद्ध हो सकता है। इस आधार पर कि वो ज्ञान सबके लिए उपलब्ध हो। चाहे हम नालंदा को देखें, तपशिला को
20:04 देखें, विक्रमशिला को देखें, कांची को देखें, वल्लभी को देखें, जितने भारत के ज्ञान के प्रमुख संस्थान रहे वो जाने ही इसलिए जाते रहे क्योंकि वहां पर जो ज्ञान और विज्ञान था वो सबके लिए था। अकेले नालंदा का ही उदाहरण देखें तो रत्नोददी, रत्नगंज इन सबके अंदर के जो वहां का धर्मगंज का जो विश्वविद्यालय था >> उसके अंदर कहते हैं कि एक करोड़ के करीब पुस्तकें सुरक्षित थी। तो वो ज्ञान विज्ञान के सर्वसामान्य के पास उपलब्धि का ही तो प्रमाण है। जी डॉक्टर चिन्मय जी आपने बहुत महत्वपूर्ण बात रखी यहां पर मैं आपसे ही जानना चाहूंगा इस मुद्दे को क्योंकि एक बड़ा मुद्दा है एआई के लोकतांत्रिककरण का मैं टेक्नोलॉजी से उसको जो समर टेक्नोलॉजी है उसको लोकतांत्रिककरण से जोड़ता हूं इसको क्योंकि हमारा देश लोकतंत्र की जननी है और आपने एक बात कही
20:50 कि ज्ञान सबको मिलना चाहिए। ज्ञान सबके पास होना चाहिए। लेकिन एक चिंता उभर कर आती है कि एआई की जो शक्तियां हैं वो कुछ ही लोगों के हाथों में केंद्रित हो रही हैं। क्या आप ऐसा मानते हैं? क्या आप यह मानते हैं कि एआई सबके लिए सुलभ है, समावेशी है, न्यायसंगत है? बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न है और अब तक के आपने जो प्रश्न पूछे उसमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगले वर्ष में भारत जो है एआई समिट को करने जा रहा है और एआई समिट यह चौथी विश्व की सबसे बड़ी समिट है और उसका जो प्रमुख आधार भारत ने रखा भारत सरकार ने माननीय प्रधानमंत्री जी ने और भारत के सभी गणमान्य विद्वानों ने रखा वो यही रखा है डेमोक्रेटाइजेशन ऑफ द एआई और उसके पीछे का कारण बिल्कुल यही है क्योंकि
21:37 आप उसमें वही देखते हैं जो लोग डालते हैं। अब एक सामान्य सा आप उदाहरण लीजिए। आप आपके एमएलए, एमपी जो भी हो उनको आप चाहते भी हो सकते हैं, नहीं भी चाहते हो सकते हैं। बट यू हैव वोटेड फॉर देम टू कम इंटू द पावर। योर वोट हैज़ प्लेड अ रोल इन मेकिंग दैट हैपन। आपके पास छोटा सा ही सही पर अधिकार है जिसके माध्यम से आप व्यक्ति को एक निर्वाचित व्यक्ति को आप सही स्थान पर पहुंचा सकते हैं। इंटरनेट पे जो आ रहा है एआई पे जो आ रहा है उसको डालने के लिए ना मैं वोट कर रहा हूं ना आप वोट कर रहे हैं। उसको कोई व्यक्ति जो दुनिया के किसी और कोने में बैठा है वो डालने के लिए लोगों को मैनपुलेट करने के लिए स्वतंत्र है। >> अभी बेल्जियम में घटना घटी जहां पर एक व्यक्ति जो थेरेपी के सेशन में था एआई मैनपुलेटेड हिम टू कमिट सुसाइड। उसने उसको
22:23 इस तरीके के उदाहरण देने शुरू करें कि उस व्यक्ति ने अंत में जाकर के आत्महत्या कर ली और यह प्रश्न इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि व्यक्ति के मैनिपुलेशन से लेकर सिस्टम का मैनपुलेशन यदि उसका डेमोक्रेटाइजेशन नहीं होगा उसको एक समानता नहीं मिलेगी उसके ऊपर एक तरीके का नियंत्रण एक तरीके का जैसा अभी प्रतीक जी ने बहुत सही बात बोली कि उसका लीगलाइजेशन इंपॉर्टेंट है और बहुत सारे देश यूरोप में ऑलरेडी एआई का लॉ आ चुका है यूके सत्र में लाने आने वाले हैं। यूएसए में ऑलरेडी प्रिपरेशन में है। भारत में इसके ऊपर ऑलरेडी चर्चा प्रारंभ हो चुकी है। तो इसकी आवश्यकता निश्चित रूप से है कि इसका नियमन हो, नियंत्रण हो, निर्धारण हो और एट द सेम टाइम निर्वाचन हो। तभी इस चीज का सही अर्थों से सम्यक उपयोग संभव हो सकेगा। जी
23:10 अमित जी आखिरी सवाल मेरा आपसे है क्योंकि मुद्दा एआई के लोकतांत्रिककरण का है। जाहिर सी बात है कि टेक्नोलॉजी का लाभ समाज के अंतिम पंक्ति में जो व्यक्ति खड़ा है उस तक पहुंचे। हमने देखा जनधन ने क्रांतिकारी परिवर्तन देश में किया है। आप कैसे देखते हैं एआई के लोकतांत्रिककरण के मुद्दे को? देखिए कोई भी टेक्नोलॉजी इंटरनेट सबसे पहले डेमोक्रेटाइजेशन प्रोसेस में बहुत रोल प्ले किया है और आपने देखा है कि हर हाथ में फोन है हर हाथ हर हाथ अपना ओपिनियन दे सकता है। आज की डेट में मैं सोशल मीडिया को लोकतंत्र का पांचवा खंभा मानता हूं। >> आपने देखा कि नेपाल में जब सोशल मीडिया बैन किया गया तो लोकतंत्र ही ध्वस्त हो गया। तो ये इतना इंपॉर्टेंट हो चुका है।
23:57 ऐसे में यदि हम एआई का इस्तेमाल करते हैं जो कि बहुत सारी चीजें मिसयज करने के भी पावर देता है। आपने देखा है इलेक्शंस के अंदर डीप फेक कंटेंट आते हैं। इलेक्शन के अंदर किसी के बारे में ओपिनियन बदलनी है। जैसा कि सर ने कंसर्न दिखाया कि आप नरेटिव सेट कर सकते हैं और आपके पास ये प्रोविजन ही नहीं है कि आप चेक कैसे करें कि ये झूठ है या सच है या ये आज का है या पुराना है। ऐसे में एआई ना सिर्फ डिटेक्ट भी कर सकता है। आप चाहे तो उसी से क्रिएट करा के भी कन्फ्यूजन क्रिएट करके राइट्स करा सकते हैं। उसी टेक्नोलॉजी के थ्रू आप डिटेक्ट कर पाएंगे। आपके पास कोई दूसरा तरीका भी नहीं है। तो हमें तैयार करना होगा अपना डिफेंस सिस्टम ताकि जब ये डेमोक्रेटाइज हो सिस्टम जब हर आदमी करे तब वो उसका मिसयज ना करे। मुझे हमेशा से डर यह रहता है कि जब किसी भी पावर को आप हर व्यक्ति को दे
24:43 देते हैं तब उसको कंट्रोल करना बड़ा मुश्किल हो जाता है। क्योंकि वो व्यक्ति अपने हिसाब से अपनी सराउंडिंग्स के हिसाब से अपनी लाइफ के चैलेंज के हिसाब से उसको यूज़ करता है या मिसयज करता है। ऐसे में यदि एआई का कानून है ही नहीं। आज की डेट में किसी का भी वीडियो जब वायरल होता है तो आप उसको सजा नहीं दे सकते। कोई कानून नहीं है उसके लिए। और ऐसे में महिलाएं या बच्चियां जो मुझे फोन करती है कि साहब WhatsApp पे घूम रहा है। अब क्या करें? एआई कंटेंट है। WhatsApp भी नहीं बताता कि सोर्स क्या है। WhatsApp कहता है ये तो इन हमारे पास है नहीं। अब ऐसे में मेरे ख्याल से कोई कानून जब तक नहीं आएगा हम लोगों को हेल्प नहीं कर पाएंगे। मदद नहीं कर पाएंगे। जिसके लिए एक लेजिसलेशन एक फ्रेमवर्क लाने की जरूरत है। कि एआई का इस्तेमाल कहां-कहां हो? किस कंट्रोल के साथ हो? रिस्पांसिबिलिटी किसकी हो? लॉक
25:29 क्रिएट किए जाए। किसने कब कौन सा कंटेंट क्रिएट किया था? ओरिजिनल रिसोर्स क्या था? ये सारी चीजें यदि हमारे पास होंगी तो एआई ही हमें बता देगा कि ये बंदा बदमाश है। इसको पकड़ लीजिए। मेरे ख्याल से यह जो एफर्ट है पैरेलली लगाने की जरूरत है। तभी एक जनतांत्रिक एआई एक फ्रूटफुल आउटकम के फॉर्म में हमारे सामने होगा। वरना ऐसा भी हो सकता है कि अभी हम कानून नहीं है हमारे पास तो हमारे लिए एक दर्द बन जाए और किसी भी जनतंत्र के लिए भी खतरा खड़ा हो जाए। जी जाहिर सी बात है मुद्दा आस्था और भविष्य का है। जाहिर तौर पर अगर बात की जाए एआई और अध्यात्म की तो इसका एकीकरण जो है वो देश के लोकतंत्र को और मजबूत करेगा। डॉक्टर चिन्मय जी आपने संसद टीवी से बात की। बहुत-बहुत धन्यवाद हमसे बात करने के लिए। अमित जी आपका भी बहुत-बहुत शुक्रिया।
26:14 बहुत-बहुत धन्यवाद संसद टीवी से बात करने के लिए। तो आज इस कार्यक्रम में इतना ही। मुझे दीजिए आज्ञा। नमस्कार। [संगीत] संसद टीवी के और भी प्रोग्राम्स देखने के लिए सब्सक्राइब करें हमारा YouTube चैनल और हां इन्हें लाइक और शेयर करना ना भूलें।