मूलाधार चक्रा ACTIVATION | HOW TO BALANCE MULADHAR CHAKRA

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो मूलाधार चक्र के महत्व और चक्र ध्यान के माध्यम से तकदीर को बदलने की संभावना पर केंद्रित है। इसमें बताया गया है कि कैसे वर्तमान जीवन मूलाधार चक्र से जुड़ा है और इसे शुद्ध करके जीवन की समस्याओं को कम किया जा सकता है। वीडियो में कर्मों को नष्ट करने, शक्ति साधना के महत्व और सांस पर नियंत्रण के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति पर भी जोर दिया गया है।

मुख्य बातें:

  • वर्तमान जीवन मूलाधार चक्र से जुड़ा है।
  • चक्र ध्यान से तकदीर बदली जा सकती है।
  • शक्ति साधना गुरु के मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए।
  • सांस पर नियंत्रण आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग है।
  • मूलाधार चक्र को शुद्ध करने से जीवन की कई समस्याओं का समाधान हो सकता है।

परिचय: वर्तमान जीवन और मूलाधार चक्र

वर्तमान जीवन मूलाधार चक्र है, जिसमें थर्ड डायमेंशन की व्यवस्थाएं होती हैं। यह चक्र सबसे ज्यादा गंदा रहता है क्योंकि इसमें हमारे कर्म और प्रारब्ध जुड़े होते हैं। सांस पर नियंत्रण खोने से हम भगवान से दूर हो जाते हैं, इसलिए शक्ति की साधना गुरु के मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए।

जीवन की समस्याएं और तकदीर

जीवन में आने वाली समस्याएं हमारी तकदीर का हिस्सा हैं। यदि तकदीर में सुख, संतुष्टि और स्वास्थ्य लिखा है, तो कोई हमें पीड़ित नहीं कर सकता। तकदीर के अनुसार ही हमारा जीवन चलता है, इसलिए जीवन को बदलने के लिए तकदीर को बदलना जरूरी है।

जीवन बदलने का सही तरीका

जीवन बदलने के लिए तकदीर को बदलना जरूरी है। जीवन बदलने की कोशिश करने से ज्यादा तकदीर बदलने की कोशिश करनी चाहिए। लेखक ने भी जीवन बदलने की कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो पाए। सन्यास लेने के बाद उन्होंने तरीका बदला और सफलता प्राप्त की।

तकदीर, कर्म और प्रारब्ध

तकदीर लिखने वाला कौन है? जीवन मेरा है तो तकदीर भी मेरी ही होनी चाहिए। कृष्ण कहते हैं कि कर्म बीज है और प्रारब्ध फल है। यदि प्रारब्ध में कोई बुरी घटना आने वाली है, तो क्या हम उसे साधना के द्वारा नष्ट कर सकते हैं?

गालिब का शेर और जीवन का संघर्ष

गालिब का शेर है "खुद को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा भी पूछे बता तेरी रजा क्या है।" जीवन में संघर्ष करना पड़ता है, जैसे अंग्रेजों को भगाने के लिए संघर्ष करना पड़ा था। कर्मों से मुक्ति पाने के लिए चक्र मेडिटेशन एक तकनीक है, जो भगवान शिव ने माता पार्वती को दी थी।

चक्र मेडिटेशन और इसके लाभ

चक्र मेडिटेशन कर्म बीज से प्रारब्ध फल तक की यात्रा को बदल सकता है। यह कैंसर और किडनी के रोगियों के लिए भी फायदेमंद है। चक्रों के माध्यम से प्रकृति की शक्ति को उपयोग किया जा सकता है। बुद्ध, नानक, कबीर और रहीम जैसे ऋषियों ने भी चक्र मेडिटेशन का उपयोग किया।

दूरी हीलिंग और शिविर

चक्र मेडिटेशन के द्वारा डेली डिस्टेंस हीलिंग की जाती है, जिसके अच्छे परिणाम मिलते हैं। शिविर में सभी चक्र सक्रिय नहीं होते, लेकिन मूलाधार चक्र को शुद्ध करने की कोशिश की जाती है। मूलाधार चक्र को साफ करने से नेगेटिविटी नष्ट होती है।

मूलाधार चक्र का महत्व

मूलाधार चक्र आपका घर है, आपकी परिस्थिति है। इसे मजबूत बनाने से दूसरे चक्रों से आने वाली एनर्जी को रोका जा सकता है। मूलाधार को डिवाइन और क्लीन करने से स्वाधिष्ठान से आने वाले कर्मों को घुसने में तकलीफ होनी चाहिए।

चक्रों की ऊर्जा और कर्मों के पांच चरण

सारे चक्रों में जो कर्म होते हैं, वे प्रारब्ध पर आते-आते पांच स्टेप से गुजरते हैं। मूलाधार को बेहतर करने से जीवन बेहतर होता है। वर्तमान की तकलीफों को ठीक करना जरूरी है, इसलिए सबसे पहले मूलाधार पर ध्यान देना चाहिए।

समर्पण और चक्र मेडिटेशन

चक्र मेडिटेशन में समर्पित होकर जाना चाहिए। इसमें अपनी बुद्धि का उपयोग नहीं करना चाहिए। चक्र मेडिटेशन बहुत पावरफुल है, लेकिन मनमानी करने से विपरीत परिणाम भी आ सकते हैं।

कर्म और तकदीर को बदलना

कर्म हमारे शरीर में होते हैं, इसलिए शरीर पर हमारा कंट्रोल होना चाहिए। योगी वह है जो अपने अस्तित्व में घूमे और उसे व्यवस्थित करे। कर्म बीज को नष्ट करने के लिए दैवी शक्तियों का उपयोग करना चाहिए। शक्ति की साधना बिना गुरु के नहीं करनी चाहिए।

चक्र मेडिटेशन: शारीरिक और मानसिक पहलू

चक्र मेडिटेशन में फिजिकल और एस्ट्रल चक्र दोनों पर काम किया जाता है। इसमें मंत्र चैटिंग द्वारा मेडिटेशन कराया जाता है। घर पर कम से कम एक घंटे की साधना आवश्यक है।

मूलाधार साधना और अन्य चक्रों पर प्रभाव

मूलाधार साधना करने से बाकी चक्रों की भी क्लीनिंग हो सकती है। घर में एक कमरे में लाइट चालू करने से दूसरे कमरों में भी रोशनी जाती है। मूलाधार सबसे गंदा चक्र होता है, इसलिए इसे साफ करना बहुत बड़ी जीत है।

साधना में सांसों का महत्व

मंत्र करते समय सांसों पर ध्यान देना जरूरी है। सांस की बदमाशी छूटने से तुम भगवान हो जाओगे। सांस को पकड़ने की कोशिश करते रहो, एक दिन तुम जीतोगे।

साधना में गर्मी का अनुभव

साधना करते समय अंदर से गर्मी लगना एक अच्छा संकेत है। यह फायर एलिमेंट के एक्टिवेट होने के कारण होता है, जो कर्मों का नाश करता है। इस दौरान चिड़चिड़ापन और शरीर में दर्द हो सकता है, लेकिन इससे डरना नहीं चाहिए।

पारायण और चक्रों पर प्रभाव

पारायण में श्लोक मंत्र स्वरूप होते हैं, जो शरीर के हायर बॉडीज और चक्रों के पेटल्स पर वाइब्रेशन पैदा करते हैं। इससे उन पेटल्स से जुड़े सब्जेक्ट पर प्रभाव आने लगता है।

दुर्गा सप्तशती का महत्व

दुर्गा सप्तशती भगवती के हृदय में प्रवेश करने जैसा है। यह अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष के लिए एक कंप्लीट पैकेज है। इसे पूरे सम्मान के साथ और अच्छी तरीके से करना चाहिए।

श्वास को पकड़ने का तरीका

श्वास को पकड़ने का मतलब है श्वास का पीछा करना और देखना कि वह कहां तक आई और कहां रुकी। ड्राइविंग के समय ऐसा नहीं करना चाहिए। रात को सोने से पहले श्वास पर ध्यान देने से नींद अच्छी आती है।

चक्र मेडिटेशन और पिछले जन्म के कर्म

चक्र मेडिटेशन से पिछले जन्म के कर्म नष्ट हो सकते हैं। घर में एक व्यक्ति के साधना करने से पूरे घर में एनर्जी फैलती है और दूसरे लोग भी हील होते हैं।

इच्छाशक्ति और संकल्प बल

सब कुछ हो सकता है, बस बंदे में उस स्थिति तक जाने की डेरिंग होनी चाहिए। समय को छोड़कर सब कुछ बदला जा सकता है। यह तुम पर निर्भर करता है कि तुम कितना तैयार हो।

कंसंट्रेशन बढ़ाने के उपाय

श्वास पर ध्यान देने से कंसंट्रेट कर सकते हो। श्वास को अंदर लेने और रोकने से मन रुक जाता है। श्वास को धीरे-धीरे छोड़ने और रुकने से भी मन शांत होता है।

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Transcript

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0:00 आप जो अभी प्रेजेंट में हो आप यह समझ लीजिए कि वह मूलाधार चक्र है पूरा आपका प्रेजेंट लाइफ जो है और आप जिस स्थिति में हो वो टोटल मूलाधार चक्र है इस मूलाधार चक्र में थर्ड डायमेंशन व्यवस्थाएं रहती है मतलब जो प्रारब्ध आपके जीवन में आ चुके हैं जो आपके जीवन में घटना घटित हो रही है वह मूलाधार है यह सबसे ज्यादा गंदा रहता है कर्म हमारा है हमारे शरीरों में होगा हमारे चक्रों में होगा उसी में प्रोसेस होगी और हम ना कर पाए तो हम काय के योगी है दुर्गा सस्ती करो या कुछ भी करो अगर शक्ति की साधना करना है तो गुरु समर्थ होना चाहिए वो स्वास की बदमाशी है अगर स्वास की बदमाशी जिस दिन छूट गई उस दिन

0:47 तुम भगवान हो जाओगे आज के जो जीवन हमारा चल रहा है उसमें हम साधना करके उसको कैसे चेंज कर सकते हैं या साधना सिर्फ आध्यात्मिक उन्नति के लिए है इनका सीधा सा मतलब है जो हमारे जीवन में मान लीजिए आपका जीवन बहुत अच्छा है किसी का जीवन बहुत अच्छा नहीं होगा या कोई संतुष्ट नहीं होगा या आप अपने जीवन से संतुष्ट होंगे आपके शरीर में कोई प्रॉब्लम आप हेल्दी होंगे आपके घर में बच्चों की कोई प्रॉब्लम होगी या तो बच्चों की प्रॉब्लम नहीं होगी तो बिजनेस की कोई प्रॉब्लम होगी बिजनेस की नहीं होगी तो कुछ और प्रॉब्लम होगी कहीं सास बहू आ जाएगी कहीं देवरानी जिठानी

1:34 आ जाएगी कहीं अड़ोस पड़ोसी आ जाएंगे ये आते क्यों है क्या हमारी तकदीर में दुख लिखा है इसलिए आते हैं हमारी तकदीर में लिखा है कि हमें पीड़ा होगी इसलिए पीड़ा देने आते हैं इस बात को आप मानते हो कि हमारी तकदीर में लिखा होगा कि हमें पीड़ा होगी तभी कोई हमें पीड़ा देने को आएगा चाहे वो सास हो चाहे बहू हो या तो पड़ोसी हो या तो बॉस हो अगर हमारी तकदीर में नहीं लिखा कि पीड़ा है हमारी तकदीर में लिखा है कि सुख है संतुष्टि है स्वास्थ्य है संपन्नता है तो फिर हमें कौन पीड़ित कर सकता है आप एक बात बताइए इस बात को आप एक्सेप्ट कर सकते हैं क्या मेरा सीधा सा कहने का मतलब है कि

2:19 हमारी तकदीरों से हमारा जीवन बनता है आप सब लोग इस बात को एक्सेप्ट करते हैं हमारी तकदीरों के हिसाब से ही हमारा जीवन चलता है आप सब एक्सेप्ट करते इसको 100% कि नहीं करते कई लोग कह सकते हैं कि हम तकदीरों को नहीं मानते अगर आप मानते हो कि तुम्हारी तकदीरों के हिसाब से ही तुम्हारा जीवन चलता है तो तुम्हें जीवन बदलना है या तकदीर बदलनी है अगर तकदीरों के हिसाब से जीवन चलता है तो जीवन बदलना है कि पहले तकदीर बदलो तो जीवन बदल जाएगा जरा अपन उसको सरल करते हैं सिस्टम को जरा आसान करते हैं मैं बहुत सीधा साधा सरल तित्व का बंधा हूं मैं किसी भी कठिन काम को सरल करके करता हूं अगर जीवन बदलना है

3:05 तो तकदीर बदली जाए कि जीवन बदला जाए आप में और मेरे में अंतर इतना ही है कि आप जीवन बदलने को जाते हो और मैं तकदीर बदलने को जाता हू तकदीरों का मतलब कंट्रोल लाइफ कंट्रोलिंग वो मैं बाद में बताऊंगा कि तकदीरों में कैसे जाता हूं और क्याक बदलाव होते हैं और कैसे करता है क्योंकि कोई करता है तो कोई ना कोई तो साइंस होगा तो दूसरा स्टेप यह है कि अगर जीवन बदलना है तो क्या जीवन को बदलने की कोशिश करना चाहिए या तकदीरों को बदलने की कोशिश करनी चाहिए आपके जीवन में जो कठिनाइया आ रही है या जो जीवन में जो प्रॉब्लम आ रही है आप लोगों ने भरपूर प्रयास किए तो वो कितने बदल गए क्या आप उससे

3:52 संतुष्ट हो कितने संतुष्ट हो क्योंकि एक समय ऐसा था मैंने भी अपना पूरा संघर्ष लगाया था मैंने पूरा संघर्ष किया था जीवन बदलने को लेकिन मैं नहीं बदल पाया जीवन को अपनी पूरी ताकत लगाई थी जीवन को बदलने को मैंने सोचा था कि मैं सारे लोगों को संतुष्ट कर दूंगा सब सेटिस्फाई हो जाएंगे एक भी नहीं हो पाया मेरे जो फैमिली मेंबर्स थे या जो लोग मेरे साथ थे या जो मेरे ऊपर डिपेंडेंट थे मैंने पूरी 100% कोशिश की और अच्छी मेहनत भी की और मैंने सोचा था कि सब लोग को संतोष सेटिस्फाई कर दूंगा नहीं कर पाया और जीवन को बदलने को गया तो जीवन कुछ

4:40 बदला नहीं मेरे हिसाब से तो नहीं बदला हां इतना जरूर था कि पैसे वैसे थोड़ी ज्यादा आ गए थे बाकी जीवन में और भी दूसरी व्यवस्थाएं है वो नहीं बदली एक को संभालता था तो एक छूटता था एक को संभालता तो एक छूटता था जीवन की परिपूर्णता को मैंने हासिल नहीं कर पाया मैं इस बात को एक्सेप्ट करता हूं उस समय सन्यास लेने के पहले तो आप भी क्या वैसे ही है मेरे जैसे उसके बाद मुझे लगा कुछ तो गड़बड़ है मेरा तरीका कुछ गलत है यह तरीका ठीक नहीं है और मेरे पास कुछ बचा नहीं था उस समय तक सब छूट गया था गहरे जंगलों में गया प्रवेश कर गया और सन्यास लेकर बहुत गहरे जंगलों में गया और तरीका बदल लिया और उसके

5:27 बाद जो स्थिति आई वो अलग है अब उसको आप कबीर के दोहो में डाल दो कृष्ण की गीता बना दो या रहीम के दोहे लिख दो उस पर मैंने जितनी साधना करी या जो तपस्या करी मैं आपको एक बात कहता हूं जो कबीर और रहीम के दोहे हैं वो मैंने अनुभव किए उसम एक साधक की साधना काल में जो जो होता है या एक इंसान के जीवन में जो जो होता है कबीर और रहीम ने बिल्कुल वैसे के वैसे रख दिया मेरे हिसाब से अगर कृष्ण की गीता और कबीर के दोहे दोनों को एक जैसा ही सम्मान करता हूं थर्ड स्टेप य आया कि फिर वहां जाकर मैंने क्या किया दो स्टेप आपके सामने

6:14 लगे यह तीसरा स्टेप मैं साधना में उतरा सीधी सी बात थी जीवन मेरा है तो तकदीर भी मेरी ही होनी चाहिए और तकदीर लिखने वाला कौन अगर जीवन मेरा है तो और यह अच्छी और बुरी क्यों मेरे जीवन से जो मैं चाहता हूं वह क्यों नहीं और इसका सिस्टम क्या है तकदीर क्या होती है और वह कैसे हमारे जीवन में प्रारब्ध बन के आती है अगर कृष्ण कहता है कर्म बीज और प्रारब्ध फल उसका कोई ना कोई तो प्रोसेस होगा यह समझने की आवश्यकता है अगर आप यह समझने की कोशिश

7:01 करो या आप इसके लिए गंभीर हो तो बात बन सकती है अगर आप इसको समझने की कोशिश नहीं करते या इस सब्जेक्ट पर आप गंभीर नहीं हो तो आपको कोई समझा नहीं सकता एक आपके सामने डिस्कशन है कि हमारे जीवन में जो हम पास्ट लाइफ में कर्म करके आए हैं वही कर्म हमारे वर्तमान में या भविष्य में प्रारब्ध बन के आता है हमने जो पिछले पास्ट में जो कर्म किए हैं अब प्रारब्ध में अगर हमारे जीवन में कोई ऐसी घटना है जो अच्छी नहीं होने वाली है या कोई दिक्कत आने वाली है तो क्या हम उसको साधना के द्वारा डिस्ट्रॉय कर सकते हैं या किसी और तरीके से डिस्ट्रॉय कर सकते हैं इसके बारे में आप

7:46 कुछ सोचते हैं शर्मा जी यह मेरी काबिलियत नहीं है इस प्रश्न का उत्तर बताने की मैं इतनी हैसियत नहीं रखता हूं कि इसका उत्तर दे सकता हूं मैं तो यही समझता हूं कि जो प्रारब्ध में लिखा व तो भोगना ही पड़ेगा वो कैसे करके भोगना है अब मार्ग दिखाना है आपने दिखाना शर्मा जी इसमें दो चीज हैं एक तो कहा है कि समय से पहले और तकदीर से अधिक किसी को कभी कुछ मिला नहीं जी जी एक चीज है और एक गालिब का शेर है खुद को कर बुलंद इतना खुद को कर बुलंद इतना बंदे हर तकदीर के पहले खुदा भी पूछे बता रजा क्या हैय दूसरी बात अब इसमें से देखना

8:33 यह है कि गालिब के तरफ कितने लोग हैं और वो जो पहले मैंने बोला है कि समय से पहले और तकदीर से अधिक कभी किसी को नहीं मिला ना मिलेगा ये दुनिया दो भागों में बट जाती है उसके लिए बड़ा एफर्ट करना है एक एक रिवर का फ्लो जो नॉर्थ से साउथ को जा रहा है जो बंदा साउथ से नॉर्थ को अपोजिट स्विमिंग करने की हिम्मत रखेगा या तो वह मूर्ख है या तो बड़ा वो है तो इसमें यह बात आ जाती है जी शर्मा जी ने बड़ी अच्छी बात कही कि हमारे जीवन में जो हो रहा है जैसे

9:19 अंग्रेजों ने हमारे ऊपर हमारे भारत पर राज्य कर लिया या हमारे को गुलाम बना लिया अब अगर हमें अंग्रेजों को भ से भगाना है तो हमें थोड़े तो संघर्ष करने पड़ेंगे अगर हमें मुक्ति चाहिए तो अंग्रेजों ने तो 200 साल राज्य किया था हम तो जन्म जन्म से इस माया के चंगुल में फसे और कितने कर्म किए होंगे कितना कुछ किया होगा एक कर्म से छूटने का या कर्म नष्ट करने के जो तरीके है टेक्निक सिद्ध मार्ग की है जो की है चक्र मेडिटेशन है भगवान शिव ने माता पार्वती को

10:05 दी बहुत पुरानी चक्र मेडिटेशन है चक्र मेडिटेशन आपकी आद्य शंकराचार्य ने करी सौंदर्य लहरी जो भी व्यवस्थाएं हैं वोह चक्र मेडिटेशन से जुड़ी हुई व्यवस्थाएं हैं सौंदर्य लहरी आद शक्ति जो है राज राजेश्वरी त्रिपुरा सुंदरी वो श्री चक्र की अधिष्ठात्री देवी है एक्चुअल मैं चक्रा मेडिटेशन परही चलता हूं मेरी मेन जो व्यवस्था चक्रा मेडिटेशन प और शक्ति का साधक हूं महाविद्याओं का साधक हूं एक खेत में अगर एक बीज डाला जाता है तो उस बीज की एक प्रोसेस होती है व मिट्टी में जाने के बाद में उसमें रोपा आता है

10:51 रोपे के बाद में पौधा बनता है और पौधे के बाद में वृक्ष बनता है और वृक्ष बनने के बाद उसम फल आते हैं कर्म बीज से प्रारब्ध फल तक की जो यात्रा है अगर आपके शरीर में कर्म बीज प्रारब्ध की तरफ उन्नत हो रहा है और अगर उस समय उसको छोटा सा रोपा है अगर उसको निकाल के जला दिया जाए या तोड़ के फेंक दिया जाए तो वो प्रारब्ध फल नहीं बन सकता और यही कार्य जो है चक्रा मेडिटेशन के द्वारा किया जा सकता है हम लोग चक्रा मेडिटेशन के द्वारा जैसे कैंसर के पेशेंट्स हैं या जो सर्जरी के पेशेंट्स हैं या आपके जो किडनी के पेशेंट्स

11:40 है चक्र मेडिटेशन इतनी पावरफुल है कि इंस्टेंट रिजल्ट देती है कई चीजों में तो मैं आपको बताऊं उस मेडिटेशन के थ्रू एक घंटे में कैंसर की गठने गल गई एक घंटे 20 मिनट में कैंसर की गठान गली एक्चुअल प्रकृतिक की शक्तियों को चक्रा के थ्रू फ्लो करके अपन उसको यूज कर सकते मैं फिर से बोलू प्रकृति की शक्ति को चक्रास के द्वारा कनेक्ट करके हम अब यूज कर सकते और मैंने अनुभूति की है और य सिर्फ मेरी अनुभूति नहीं है मैं सिद्ध मार्ग की एक छोटी सी व्यवस्था हूं जितने भी ऋषि मुनि है चाहे वह बुद्ध

12:25 हुए हो चाहे व नानक हुए हो चाहे वह कबीर हुए हो चाहे वह रहीम हुए हो चक्र मेडिटेशन इतनी पावरफुल है अगर चक्रा मेडिटेशन के बारे में बात करो तो हमारे देश नहीं विदेशी लोग आके उस मेडिटेशन को एक्सेप्ट करते हैं सीखते हैं और जाकर वह करते हैं तो इससे कम से कम हम इतना तो कर सकते हैं कि अपना जीवन तो सरल कर सकते सहज कर सकते हैं आज की डेट में चक्रा मेडिटेशन के जो वो डेली डिस्टेंस सीलिंग करते हैं और उस डिस्टेंस सीलिंग के बड़े अच्छे परिणाम हमारे यहां का एक सिस्टम है कि वह सारे

13:12 साधक इकट्ठे होक और अपनी अपनी एनर्जी एक ही समय में एक व्यवस्था में फ्लो करते हैं और जब वह एक व्यवस्था में एक समय में फ्लो करते हैं तो उनके ल् महेश कुमार जी का प्रश्न है नमस्कार गुरुजी 15 जनवरी से शुरू होने वाले शिविर में एक ही शिविर में सभी चक्र सक्रिय हो जाते हैं क्या और उसके बाद हमेशा सक्रिय रहेंगे क्या और इसी शिविर में हमारे प्रारब्ध कर्म नष्ट किए जा सकते हैं और क्या इस सभी को जो साधारण मनुष्य है वह झेल सकता है और शिविर के बाद हमें आर्थिक शारीरिक मानसिक और सामाजिक आध्यात्मिक प्रगति होगी क्या नहीं महेश जी

13:59 मैं आपसे जो बोलूंगा वह सत्य ही बोलूंगा मैं यह सब चीजें आपसे बिल्कुल नहीं कह सकता कि ऐसा हो जाए जो मूलाधार चक्र है वह थर्ड डायमेंशन है आप जो अभी प्रेजेंट में हो आप यह समझ लीजिए कि वह मूलाधार चक्र है पूरा आपका प्रेजेंट लाइफ जो है और आप जिस स्थिति में हो वह टोटल मूलाधार चक्र है इस मूलाधार चक में थर्ड डायमेंशन व्यवस्थाएं रहती मतलब जो प्रारब्ध आपके जीवन में आ चुके हैं जो आपके जीवन में घटना घटित हो रही है वह मूलाधार है यह सबसे ज्यादा गंदा रहता है इस मूलाधार को मैं इतना क्लीन करने की

14:46 कोशिश करूंगा साफ करने की कोशिश करूंगा कि इसमें जो नेगेटिविटी है वो सारी डिस्ट्रॉय हो ये क्लीन हो और उसके बाद में इसमें जो साधना करूंगा और आपको साधना बताऊंगा कि इसके बीच में जो लम बीजा अक्षर है इसके बाद में जो वम बीजा अक्षर इसके फोर पेटल्स है और उन फोर पेटल्स का क्या महत्व होता है आपके लाइफ में वो जो वम बीजा अक्षर है वो आपके शरीर में किन चीजों से जुड़ा होता है या आपके जीवन में किन चीजों से जुड़ा होता है और वहां पर आप जाओगे तो आपके जीवन में आपके शरीर में क्या बदलाव होगा ऐसे आपको उन पांच बीजा अक्षरों पर में साध कराऊंगा आपके साथ साधना करूंगा पाच दिन तक हम उस पर

15:33 प्रैक्टिकल करेंगे जब आप साधना करोगे तो आपके शरीर में कुछ कुछ आपको फील होगा उसके बाद में वह साधनाएं अगर आप लगातार करते रहोगे घर जाके तो आपका जीवन पहले से बेहतर होगा अगर आप साधना नहीं करोगे तो वह शक्ति वह मूलाधार फिर से बंद हो जाएगा और आपको मैं बताऊं कि आप इतने कम समय में आप सारे चक्रों की साधना नहीं कर सकते मूलाधार चक्र मतलब आपका घर आप जिस परिस्थिति में है वो मैं एक उदाहरण देता हूं आपके घर में डाकू घुस आए आपको पता चल गया कि वोह बाउंड्री कुंद के घर के भीतर आ गए बगीचे में आ गए या दरवाजे तोड़ रहे हैं उसी समय आपके एक फ्रेंड का फोन

16:19 आया कि महेश भाई आपको मारने के लिए चार लोग आ रहे हैं आपसे 100 किलोमीटर की दूरी पे हैं फिर दूसरे फ्रेंड का फोन आया महेश भाई आपके दुश्मन आ रहे हैं और वो अभी तीन चार दिन में आपके पास पहुंच जाएंगे तीसरे फ्रेंड का फोन आया महेश भाई सावधान हो जाओ आपको मारने की तैयारी कर रहे हैं एक 15 दिन एक महीने के अंदर आपके जीवन में खतरनाक गेम करेंगे आपका तो सबसे पहले आप किससे निपट महेश भाई जो दुश्मन आपके घर में घुस गया उससे या जो 50 किलोमीटर दूर है उससे या जो चार दिन बाद आने वाला है उससे या जो 15 दिन आने वाला है

17:04 उससे बताइए महेश जी आप किससे निपटें हा जो घर में सरस ग मूलाधार चक्र आपका सबसे क्लोज का है और उसमें जो प्रॉब्लम आ चुकी है सबसे पहले उससे निपट और मूलाधार चक्र को इतना सॉलिड बनाओ कि दूसरे चक्रों से जो एनर्जी जो प्रारब्ध आपके मूलाधार में आ रहे मतलब आप समझिए कि वोह कर्म पांच स्टेप से होते हुए लास्ट स्टेप मूलाधार में आते हैं मूलाधार में आ गए मतलब प्रारब्ध में क्रिएट हो गए 100% प्रारब्ध में आ गए वह उसके ऊपर स्वाधिष्ठान चक्र है स्वाधिष्ठान में आ गए मतलब वो

17:51 अभी एनर्जी बेस में है वो वो कन्वर्ट नहीं हो पाए मैटर में वो एनर्जी बेस में है आने वाले हैं लेकिन टाइम है उनकी जो फ्रीक्वेंसी है वो फ्रीक्वेंसी अभी हाई लेवल पर है वो मैटर में कन्वर्ट नहीं हुए वो थर्ड डायमेंशन नहीं हो पाए वो इस डायमेंशन के ऊपर की व्यवस्था है आपको टाइम है अगर आप अपने मूलाधार को कमजोर करके रखोगे मूलाधार मतलब आपका मूल आधार जैसे आप घर बनाते हो तो उसके नीचे न्यू कितनी मजबूत डालते हो वो न्यू अगर मजबूत रहेगी तो आप कितना भी ऊपर बिल्डिंग बना लो खींच लो पाच माले बना लो छह माले बना लो तो जो मूल आधार है वह जमीन के नीचे जाता है और मजबूती के लिए रहता है मूल आधार उसके ऊपर

18:37 पूरी आध्यात्मिक की बिल्डिंग खड़ी होती है आपकी इसलिए मूलाधार पर जबरदस्त काम करना पड़ता है अगर मूलाधार मजबूत होगा तो उसमें कोई भी कर्म आसानी से एंटर नहीं हो सकता मूलाधार को इतना डिवाइन करिए इतना क्लीन करिए कि स्वाधिष्ठान से कोई कर्म आए तो मूल में घुसने में उसको पसीने आने चाहिए तकलीफ होनी चाहिए इसलिए आप यह मत सोचिए कि आप इसमें आओगे तो सारे चक्र एक्टिवेट हो जाएंगे नहीं होंगे हां लेकिन मूलाधार को एक्टिवेट करते करते उसकी ऊर्जा ऊपर आती है सारे चक्र का मतलब है उसमें जो कर्म होते हैं वह कर्म प्रारब्ध पर आते आते उनके पांच स्टेप होते हैं पहले स्टेप पर जब वो

19:23 आता है तो वो आकाश तत्व से कनेक्ट होता है उसमें आकाश तत्व की आधिक्य होती है दूसरे स्टेप पर जब वो कर्म आता है प्रारब्ध में बनते बनते उसमें वायु तत्व की प्राथमिकता होती है तीसरे पर आता है तो अग्नि तत्व की चौथे पर आता है तो जल तत्व की और पांच में में आता है तो व प्रारब्ध बन जाता है उस समय पृथ्वी तत्व का आधिक्य होता हैय स्टेप्स है यहां पर वो कर्म और ज्यादा बलशाली होता होता होता होता आपके जीवन में प्रवेश करता है तो मूलाधार को अगर आप बेहतर करोगे और जितना आप बेहतर करोगे आपका जीवन उतना बेहतर होता जाएगा और अगर आप पांचों चक्रों को एक साथ करोगे तो

20:09 पांच चक्रों में से एक भी बेहतर नहीं होगा आज जो करंट पोजीशन है आज जो आपके जीवन में तकलीफ है आज आपके जीवन में जो घटनाएं घट रही है सबसे पहले उनको ठीक करो फिर जो कल होने वाला है उसको आइडेंटिफिकेशन अच्छा नहीं है और जो अच्छा नहीं है उसको कैसे उससे निपटा जाए लेकिन आज हमारी वर्तमान की व्यवस्थाएं बिगड़ी हुई है और हम आने वाले भविष्य की बात करें वह ठीक नहीं और आप जब भी आओगे तो आप यही कहोगे ज्यादातर लोग कहेंगे भैया जी स्पाइनल कार्ड की प्रॉब्लम है भैया जी रेस्पिरेटरी सिस्टम प्रॉब्लम है हार्ट की प्रॉब्लम है भैया जी लंग्स की प्रॉब्लम है भैया जी लीवर कमजोर है तो आज की प्रेजेंट

20:56 कंडीशन है ना आप यह थोड़ी कहोगे कि आज लीवर को खराब हो जाने दो हमारा कल अच्छा रहना चाहिए ऐसा नहीं बोल सकते आप वर्तमान में जो घटनाएं हमारे साथ में घट रही है सबसे पहले साधारण व्यक्ति या कोई भी व्यक्ति पहले उनसे निपट है कल जो आने वाला है उससे बाद में निपट जो आज हमारी प्रॉब्लम्स है वो हमें आज ही सॉल्व करनी पड़ेंगी और पहले सॉल्व करनी पड़ेगी प्राथमिकता तो हम आज की चीज को ही देंगे ना और अगर आप आज को सुधारना चाहते हो वर्तमान को सुधारना चाहते हो तो सबसे पहले आपको मूलाधार पर कंसंट्रेट करना पड़ेगा और जब तक आप मूलाधार पर बहुत अच्छी तरह से काम नहीं करोगे और जब तक मुझे संतुष्टि नहीं हो

21:41 जाएगी मूलाधार एकदम बेहतरीन हो गया है और एकदम सेफ हो गया बहुत हद तक सेफ हो गया है तब तक मैं स्वाधिष्ठान पर नहीं जाऊंगा ये मेरी सिस्टम है यह मेरी प्रोसेस है मैं पहले भी चक्रा मेडिटेशन करा रहा हूं इतने सालों से तो जो है मैं वही बोलूंगा और इसमें आप अपनी बुद्धि ना लगाए तो बेहतर है क्योंकि चक्र मेडिटेशन को आप जानते नहीं है आपने चक्रा देखे नहीं है इनके सिस्टम से आप परिचित नहीं है तो आप मेरे पास आए या किसी भी गुरु के पास जाए तो समर्पित होकर जाइए क्योंकि चक्र मेडिटेशन जो भी सिद्ध कराते हैं या जो

22:27 साधु कराते आपके बिना समर्पण के वह सिद्ध नहीं हो सकता अगर मैं कितना भी समर्थ रहो लेकिन आप अपनी बुद्धि से करेंगे तो रिजल्ट नहीं आएंगे चक्रा मेडिटेशन में एक एक अक्षर पर आपको वैसे करना पड़ेगा जैसा बोला जाएगा उसको आपको स्वीकार करना पड़ेगा तभी कुछ बेहतर हो सकता है हमारे सिद्ध मार्ग के सिद्धांत है आप कहीं भी जाए चक्र मेडिटेशन में अपनी बुद्धि को बिल्कुल यूज मत करना कभ भी मत करना इससे बहुत जल्दी रिजल्ट्स आते हैं बहुत पावरफुल मेडिटेशंस है लेकिन आप अगर अपनी मनमानी

23:13 करोगे तो विपरीत भी कुछ हो सकता है मनमानी की इसमें कोई जगह नहीं सीनियर्स है जब उनको लगेगा मूलाधार क्लियर हो गया या मूलाधार के आगे की व्यवस्थाएं करनी चाहिए वो देखते हैं उसके बाद डिसीजन लेते हैं आप देख ही नहीं सकते चक्रा को आप कैसे डिसीजन ले और यह मत समझिए कि एकदम से सब बदल जाएगा हां लेकिन मैं यह कह सकता हूं कि पाच दिन की साधना के बाद आप यहां से सेटिस्फाई होकर जाओगे आप दूसरे की डेट लेकर जाओगे कि दूसरी डेट कब है मैं एक्चुअल आपको एक्सप्लेन नहीं कर सकता मैं एक्सप्लेन बहुत अच्छे से नहीं कर सकता जितने अच्छे से मैं साधना कर सकता हूं उतने अच्छे से एक्सप्लेन नहीं कर सकता क्योंकि मैं ना तो बिजनेसमैन हूं ना मुझे

24:00 एडवरटाइजिंग आती है मुझे तो साधना आती है मेरे यहां पर एक बात है जो लोग वन करते हैं वह टू के लिए तैयार रहते हैं क्योंकि इतनी इंटरेस्टिंग है वह इतनी इंटरेस्टिंग है और इतनी रिजल्ट्स वाली मेडिटेशन है हम लोग की कि आप रोक नहीं पाओगे अपने आप अगला प्रश्न है तेजस का कर्म से ही तकदीर बनी है और जो पिछले जन्म का फल है वही कर्म है तो गुरु कैसे तकदीर बदल सकते हैं और उसकी विधि क्या है तेजस कर्म भी तो हमारे ही शरीर में रहता है दोस्त और शरीर हमारा है तो हमारे शरीर पर अगर हमारा कंट्रोल नहीं होगा तो क्या पड़ोसी का होगा

24:49 भाई कर्म हमारा है हमारे शरीरों में होगा हमारे चक्रों में होगा उसी में प्रोसेस होगी और हम ना कर पाए तो हम काय के योगी हैं योगी तो वह है जो पूरे अपने अस्तित्व में घूमे और अपने अस्तित्व को व्यवस्थित करे और शुद्र करे अगर हमारे मनोमय कोष में है वो कर्म तो मनोमय कोष में रुद्र की ऊर्जा डालकर उसको जला डालेंगे अगर हमारे ज्ञान मय कोष में है वो कर्म तो महेश्वर की ऊर्जा डाल केर जलाएंगे उसको ये दवी शक्तियां फिर कब काम आएंगी अगर हमारे कर्म नष्ट नहीं करते सती तो दैवी शक्तियों का क्या यूज है एक योगी अगर दवी शक्ति को यूज ना करे तो फिर कौन करेगा और कर्म बीज

25:35 किसको कहा है वही तो कर्म बीज है मेरी साधना भगवती की साधना दुर्गा सपस से स्टार्ट हुई थी दुर्गा सपस भगवती की सबसे अच्छी साधना है लेकिन एक बात बताओ एक मेडिकल स्टोर है उसमें सारी मेडिसिंस हैं हमारे को क्या बीमारी है और उसमें कौन सी मेडिसिन हमारे लिए यूजफुल है मेडिसिन तो सारी है दुर्गा सप सती में भगवती के भिन्न भिन्न स्वरूप है सब अच्छे सब बेहतर है और दुर्गा स सती से कैसे कोई ना कर सकता है शक्ति की साधना बिना गुरु के मत करना शक्ति नियंत्रित नहीं होती दुर्गा सस्ती करो या कुछ भी करो अगर शक्ति की साधना करना है तो गुरु समर्थ होना

26:22 चाहिए गुरु ऐसा होना चाहिए कि शक्ति उसकी बात सुने और सुन के हमें और चले शक्ति की साधना में रिस्क नहीं लेना चाहिए कभी भी जो भी साधना करते हो सब सती पढ़ते हो या जो नहीं पढ़ते या जो भी करते हो तो मैं आपसे एक ही बात कहूंगा आप चक्रा मेडिटेशन करो या जो भी करो मैं सभी लोगों को कहना चाहता हूं शक्ति की साधना में अपनी मनमानी कभी मत करना क्योंकि मैंने शक्ति के वो स्तर देखे हैं भगवती का वो अग्र स्वरूप भी देखा है और भगवती का स्वम्य स्वरूप भी देखा है तुम ना तो उग्र स्वरूप को सहन कर सकते हो ना ऐसी स्थिति है कि उसको स्वरूप को

27:08 देखने के बाद इंसान जीवित बच सके इसलिए गलती मत करना शिव भोला है मेल एनर्जी सारी ठीक है वह तुम करोगे थोड़ी गलती हो जाएगी मेनेजेबल है लेकिन शक्ति मेनेजेबल नहीं है गलती के इसलिए शक्ति की साधना कभी भी समर्थ के बिना मत करो आपका परिवार होगा सारी व्यवस्थाएं होंगी आप एक जवाबदार पर्सन हो ग रिस्क मत लेना शक्ति की साधना में ऋषभ जयसवाल जी का प्रश्न है कि चक्र मेडिटेशन में फिजिकल चक्र या एस्ट्रल चक्र किस पर काम किया जाएगा और इसमें क्या मंत्र

27:54 चैटिंग द्वारा मेडिटेशन कराया जाएगा और क्या हमें फिजिकल पावर्स मिलेंगी जो कि चक्रास की होती है और हमें कितनी देर तक साधना में बैठना घर पर आवश्यक होगा ष एक घंटे की साधना करते हैं हम लोग एक घंटे का सेशन रहता है और उसमें हम अपने मूलाधार चक्र पर जाकर काम करते हैं मूलाधार में बहुत सारी साधनाए तो उनमें से जो साधनाएं आपको मिलेंगी उससे आपके फिजिकल जो प्रॉब्लम है वो प्रेजेंट में आपके लाइफ में क्या प्रॉब्लम है और आपको साधनाएं डिफरेंट डिफरेंट दूंगा और उन में बताऊंगा अगर यह प्रॉब्लम आए तो यह साधना करना इससे य प्रॉब्लम सॉल्व होगी

28:41 यह प्रॉब्लम आए तो यह साधना करना सबका जीवन अलग है सबके जीवन की प्रॉब्लम अलग है तुम्हारे लिए क्या परफेक्ट होगी डिफरेंट डिफरेंट मेडिटेशंस होंगी तुम्हारा जीवन बदलता है तो कुछ कम ज्यादा होता है तो उस समय तुमने अपनी साधना बदलनी वो मैं तुम्हें बताऊंगा कि कब क्या कम हो तो कौन सी साधना करो तो अभी मैं तुम्हें नहीं बता सकता क्योंकि चक्रा मेडिटेशन सीक्रेट होती है तो उतना मैं नहीं जा सकता लेकिन उस समय मैं बताऊंगा कि यह बीजा अक्षर इस सब्जेक्ट पर काम करता है और उसके मंत्रराज होते हैं संजीवनी मंत्र से उसको जागृत करते हैं उनके अपने अपने पावर्स होते हैं उसके बाद में आप घर जाकर दो घंटे

29:27 साधना अगर आप घर में करते हो 24 घंटे में तो बहुत बेहतर है लेकिन कई लोग ऐसे होते हैं कि जिनको कभी दो घंटे नहीं मिलते तो कम से कम एक घंटे की साधना तो आपको करनी ही होगी अगर आप एक घंटे की भी साधना नहीं कर सकते तो चक्रा मेडिटेशन अटेंड मत करिए और बहुत इंटरेस्टिंग मेडिटेशन होती है उसमें बोर नहीं होते आप आपकी इच्छा होगी करने की शरीर हल्का होता है अच्छा लगता है बहुत फीलिंग आती है बहुत अच्छा लगता आपको लगेगा कि हम एक घंटा और करें लेकिन मिनिमम वन ववर तो देना पड़ेगा ज्यादा से ज्यादा आप जितना कर सकते हो आपके लिए बेटर है आपका जीवन बेहतर होगा गुरुजी क्या मूलाधार साधना करने से बाकी चक्र जो रहते अपने

30:15 उनकी भी क्लीनिंग फास्ट हो सकती है क्या और दूसरा कि अगर सबके लिए वही टाइम रहता है ड्यूरेशन या कम ज्यादा रहता है जी क्या है कि आप घर में 40 मिनट भी कर सकते हो 30 मिनट भी कर सकते हो वो आपके कंफर्ट के हिसाब से है दूसरी चीज हम आपको एक बात बताएं कि आपके घर में चार पांच कमरे हैं तो एक कमरे में अगर आप बड़ी लाइट चालू करते हो तो थोड़ी थोड़ी रोशनी दूसरे कमरों में भी जाती है आपको मैं अभी इतना नहीं कह सकता लेकिन सनज जी इतना समझिए कि जो सबसे बेहतर तरीका है व यूज किया जाता है और मैं इतने साधना शिविर मैं लेता हूं और मैं

31:01 इतने लोगों की हीलिंग करता हूं इतने सालों से मैं साधना कर रहा हूं तो सबसे ज्यादा गंदा चक्र जो होता है इंसान का व मूलाधार हो अगर मूलाधार साफ हो गया तो बहुत बड़ी जीत हो गई समझिए बहुत बड़ी जीत हो गई मूलाधार के बाद में क्या होता है मूलाधार अपनी एनर्जी से भर जाता है तो मूलाधार स्वाधिष्ठान को एनर्जी ट्रांसफर करने लगता है ऑटोमेटिक स्वाधिष्ठान में एक्टिविटीज स्टार्ट हो जाती है व एनर्जी की उसके बाद वह धीरे-धीरे एनर्जी ऊपर चली जाती है मणिपुरा अनाहता यह सब मूवमेंट होते रहते हैं एनर्जी में मूलाधार में कभी भी मैं आप सभी से वापस बोलता हूं मूलाधार

31:46 इतना इंटरेस्टिंग सब्जेक्ट है कि आप इससे निकलना ही नहीं चाहोगे यह साधनाए इतनी इतनी बेहतरीन है और इतनी है कि आप और उनके रिजल्ट ऐसे हैं कि आपको लगेगा कि बेस्ट है मूलाधार में जल्दबाजी करते हैं ना जो साधक वो वापस गिरते हैं ऊपर जाकर गिरते हैं इसलिए मूलाधार तो मैं अच्छी तरह से करके लूंगा हां लेकिन इतना है कि अगर आप मूलाधार अच्छे से करते हो तो बहुत हद तक लाइफ की कंट्रोलिंग या लाइफ की व्यवस्थाएं बेहतर होती है बहुत अच्छी होती है श्री वल्लभ दिगंबरा का पाठ डेली करते हैं चैटिंग और चैटिंग करने से जब हम चैटिंग

32:32 करते तो हमें चैटिंग पर ज्यादा ध्यान देना है या सांसों पर ज्यादा ध्यान देना है और परायण भी ये करते हैं का साधना में क्या लाभ है आप एक बात बताइए आपसे मैं बोलू कि एक बंदा गाड़ी चलाता है कार चला रहा है या टू व्हीलर चला रहा है उसी समय वो गाड़ी चलाते चलाते फोन पर भी बात कर लेते वो सामने भी देखता है अगर फोर व्हीलर चला रहा है तो उसके गियर होंगे क्लच होगा एक्सीलेटर होगा उसके हाथ में एक स्टेयरिंग होगी पीछे कौन आ रहा है बाजू से कौन घुस रहा है सामने से कौन आ रहा है इतना सब करने के बाद गाड़ी के भीतर क्लिट एक्सीलेटर स्टेरिंग गियर यह सब करते हुए वो बाहर के लोगों को देखते हुए भी फोन लगा

33:18 के बात कर लेता है इतना सब करते करते आप यह भी कर लेते हो आप लोग करते हो मैं नहीं कर पाता ये तो एक समय में जब आप इतने सारे काम करते हो तो तुम यह नहीं कर सकते कि वो मंत्र करते समय स्वास पर ध्यान दे लो मोस्ट ऑफ द टाइम ट्राय कर लेते हैं लेकिन आफ्टर सम टाइम ऐसे रिलाइज होता है कि सासों पर से ध्यान चला गया है और सिर्फ मंत्र का जो टेक्स्ट है उस पर ही ध्यान जा रहा है वो स्वास की बदमाशी है अगर स्वास की बदमाशी जिस दिन छूट गई उस दिन तुम भगवान हो जाओगे यही लफड़ा होता है स्वास की एक डोर परमात्मा के हाथ में है और एक डोर तुम्हारे हाथ में है यह माया है कि वो छल करती है व स्वास

34:05 छूट जाती है जितनी बार छूटे उतनी बार पकड़ो आखिरी में तुम जीतोगे क्योंकि तुम पकड़ोगे एक बार ज्यादा अगर वो 100 बार छूटेगी तो तुम 101 बार पकड़ोगे तुम लगातार स्वास को पकड़ने की कोशिश करते रहो एक महीने में तुम देखोगे कि अब वो कम छूटती है उतनी नहीं छूटती ये तो फर्क मुझे भी मतलब समझ में आ गया क्योंकि मैंने जब स्टार्ट किया था तो बिल्कुल ही यह सब गड़बड़ होता था अब बहुत हद तक थोड़ा स्ट्रीमलाइन हो रहा है लेकिन फिर भी कभी-कभी कंफ्यूजन होता है कि जो चल रहा है वह सही चल रहा है या नहीं चल रहा है कोई भी ऋषि मुनि हुए कहीं के भी हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई कोई भी हुआ जो मुक्त हुआ एक चीज कंपलसरी उसके

34:52 जीवन में आई होगी कंपलसरी ह पर कि उसने अपनी शवास को पकड़ा होगा ये कंपलसरी जब तक शवास नहीं पकड़ी तब तक मुक्ति नहीं है शवास नहीं पकड़ी तो मृत्यु है स्वास पकड़ ली तो मुक्ति है अध्यात्म बहुत लंबा चौड़ा है तुमसे संभाला जाएगा नहीं संभाला जाएगा सब छोड़ दो शवास को पकड़ लो जो तुम्हारे पास है जिसको तुम 100 बार पकड़ सकते हो 1000 बार पकड़ सकते हो उसको पकड़ो और जिस दिन तुम्हारे हाथ में ज्यादा पकड़ में आ गई उस दिन तुम परमात्मा के और करीब आ जाओ य सबसे आसान तरीका है जब मंत्र उच्चार चलता रहता है तो

35:38 जब शवास चलती है तो अंदर ऐसे गर्मी सी लगती है मतलब जितना भी स्लो हो जाए तो बहुत बाहर ठंडी है लेकिन अंदर से गर्मी लगती है तो कभी कभी डर लगता है यह तीन चार दिनों से हो रहा है तो मुझे अंदर से थोड़ा डर लग रहा उसका रीजन मैं बताता हूं उसका रीजन है आप जब स्वास पर ध्यान देते हो मंत्र करते हो उससे क्या होता है कि एक फायर एलिमेंट आपके अंदर एक्टिवेट होता है फायर एलिमेंट क्या करता है पिंगला नाड़ी होती है हमारी उस पिंगला नारी में वह फायर एलिमेंट एक्टिवेट होता है और वह जब एक्टिवेट होता है तो व क्या करता है आपके कर्मों का नाश करता है

36:23 उसको हम लोग कहते हैं संघार क्रम जब साधक प्रथम अवस्था में होता है साधना करता है तो उसके जो पास्ट लाइफ के जो कर्म आ रहे हैं तमोगुण कर्म है तो व ति वागनी से साधा अगनि से वह कर्म नष्ट होते वो तुम्हारा स्टार्ट हुआ ये कर्मों की डिस्ट्रक्शन प्रोसेस चालू हो गई है ना तो यह अग्नि होगी इसके बाद एक अग्नि बढ़ेगी तो मसल्स पेन होंगे लोअर लेगस पेन होंगे दर्द करेगा मन में चिड़चिड़ा हट आएगी बहुत ऐसे इरिटेशन होगा वो होने देना वो क्योंकि फायर एलिमेंट जब एक्टिवेट होता है तो यह होता ही है सब

37:09 साधकों को होता है चाहे मैं चक्रा मेडिटेशन कराऊ उनको भी होगा क्योंकि वो डिस्ट्रक्शन है ना और आपके शरीर में हो रहा है वो नेगेटिव कर्म भी आपके शरीर में है और वो जो फायर एलिमेंट एक्टिवेट हुआ है वो डिवाइन एनर्जी भी आपके शरीर में दोनों एक दूसरे से टक रा रहे हैं तो शरीर पर प्रभाव आएगा लेकिन वो टकरा रहे हैं इसका मतलब है कि वह जो कर्म तुम्हे खाने वाले थे वह खाने से पहले नष्ट हो जाएंगे उस अग्नि में खुशी इस बात की है इसे डरना नहीं चाहिए जो भी है मतलब जो हो रहा है उसे बस ए तीसरे व्यक्ति जैसे देखते हैं कि अपनी कंडीशन कैसी वैसे ही देखना चाहिए ओ हो रहा है तो होने देना है इसमें आपको मैं

37:55 इंडिकेशन बताता हूं फयर जब एक्टिवेट होता है तो अंदर से गर्मी लगती है चिड़चिड़ापन आता है ज्यादा गुस्सा आएगा शरीर में दर्द होगा मसल्स पैन होता है फायर एलिमेंट मसल से कनेक्टेड है यह सब चीजें होंगी लेकिन इनको होने देना इसके बदले में आपको जो चीज मिलेगी जो इंसिडेंट आपके जो जीवन में जो प्रारब्ध नेगेटिव आने वाले हैं वो डिस्ट्रॉय होंगे ये संघार क्रम होता है इसमें यही होता है कि जो हमारे तमोगुण कर्म है वो नष्ट होते हैं शि वागनी से वो हो रहा है उसमें इतनी चीजें तुम्हारे ऊपर आएंगी और यह जब संघार क्रम कंप्लीट होगा तो सृष्ट क्रम में कन्वर्ट हो जाता है फिर

38:41 उसके बाद में वो जल तत्व आएगा हमारे पंडित जी वगैरह है घर के तो उन्होंने कुछ ऐसे बताया था कि पारायण वगैरह करना चाहिए तो मैंने एक बार नवनाथ सार जिसे कहते कि पूरा नवनाथ सार का एक पारायण किया था तो मुझे तभी ये क्वेश्चन है उन्होंने जस्ट कहा और मैंने किया ऐसे मैंने क्वेश्चन नहीं पूछे लेकिन मुझे ये क्वेश्चन थे कि इससे होता क्या है क्योंकि जो हम पढ़ रहे हैं वह एक तरह की एक कथा है जिससे हमें कुछ सीख मिलती है या उनका महात्म पता चलता है लेकिन एगजैक्टली हमारे सिस्टम में उसके क्या चेंजेज होते हैं यही नहीं कि कौन सा भी पारायण हो जैसे सप्तशती हो या फिर गुरु चरित्र हो तो इससे हमारे सिस्टम पर क्या असर होता है बेटा जी उसमें क्या होता है जो श्लोक होते हैं वो मंत्र स्वरूप होते

39:28 हैं अब दुर्गा सप सती में जो मंत्र स्वरूप श्लोक है वो आपके जो शरीर में हायर बॉडीज है और हायर बॉडी में जो चक्रा है उनके एक एक पेटल्स पर भगवती एक एक बीजा अक्षर में बैठी है अब तुमने एक मंत्र किया सर्व मंगल मांगल्य शिवे सरवार साध के तो जहां पर भी सर्व मंगला बैठी होगी वो पेटल्स में वाइब्रेशन स्टार्ट हो जाती है और अगर वो पेटल्स पर वाइब्रेशन स्टार्ट हो गई और वो पेटल थोड़ा भी एक्टिवेट हो गया तो उस पेटल से जुड़े जो सब्जेक्ट आपके लाइफ के हैं हम उस परे प्रभाव आने लगेगा अभी इसी को हम लोग क्या करते हैं कि अब तुम पूरी दुर्गा सप सती पढ़ो गी और अपने सारे पैटल पर काम

40:14 करोगे हम लोग क्या करते हैं कि जो जरूरी है तुम्हारे जीवन में आज उस पेटल पे जाके काम करते हैं सब पेटल पे नहीं करते टोटल सारे पेटल्स पर नहीं करते जो तुम्हारे लिए इंस्टेंट जरूरी है आज तुम्हारी अवस्था क्या है व्यवस्था क्या है तुम्हे उस पेटल्स प साधना देते हैं कि यहां पर यह करो उसके मंत्र कुछ और होते हैं तुम्हारी फ्रीक्वेंसी अब तुम्हारी स्थिति क्या है तुम 10 टू फ वाले हो तुम्हारे घर में कैसी व्यवस्थाएं हैं तुम्हारी क्या उसके हिसाब से ऐसी कोई साधना दी जाती है कि उसमें तुम मैनेज कर सको और तुम्हारी जो प्रेजेंट लाइफ है उसमें क्या बैलेंसिंग वो बैलेंस हो जाए

40:59 बजाय इसके कि पूरी सब सती पढ़ो और सब चीजें करो तुम्हारे जीवन में जरूरी क्या है अभी वो कर लो सब मत करो मेरे पास आओगे तो सिर्फ मैं वो सिलेक्टेड दूंगा और तुम वो सिलेक्ट नहीं कर सकते तो पूरा पढ़ो इतना ही अंतर है और कुछ नहीं है सब सती पूरी एक कंप्लीट मेडिटेशन है आपके अर्थ धर्म काम और मोक्ष के लिए कंप्लीट पूरा एक पैकेज है वह वो बहुत बड़ी चीज है उतना अगर आपके पास जब तक कुछ नहीं है तो दुर्गा सपस एकदम एक नंबर की चीज दुर्गा सपस मतलब आप भगवती के हृदय के भीतर प्रवेश कर रहे दुर्गा सस्ती से बेहतरीन कुछ भी

41:45 नहीं लेकिन उसको पूरे सम्मान के साथ और अच्छी तरीके से करो तो ठीक है उस किताब के ऊपर अगर आपने दूसरी बुक रख दी वो भी उसको पसंद नहीं है उस किताब के ऊपर कोई ट भी आ गई तो भगवती को पसंद नहीं है वो स्वयं भगवती ही है वह सब सती इसके बारे में जो भी मैंने पढ़ा है मतलब ऑनलाइन भी टेक्स्ट भी और बुक्स में भी तो इसे अगर दीक्षा हो तो ही पढ़ सकते या एक डर का थोड़ा सा इसमें एलिमेंट डाला गया है कि फर्स्ट टाइम जब मैंने किया तो बहुत डर लग रहा था कुछ नहीं डरने की बात आपसे प्रथम चरित्र एक चरित्र कंप्लीट करो उसके तीन चरित्र है ना तो बीच में मत

42:33 छोड़ो एक आधा मत करो तीन एक साथ नहीं कर सकते एक अभी कर लो एक दूसरे दिन कर लो या दोपहर को या एक चरित्र कंप्लीट करो बाकी कुछ नहीं होगा टेंशन मत लो हृदय साफ है तो सब ठीक है आपकी भावना शुद्ध है तो ठीक है दूसरी चीज मैंने एक ही सावधानी बताई कि उसको लाल कपड़े में संभाल के रखिए दूसरी चीज उसके ऊपर कुछ रखिए मत तीसरी चीज जो चरित्र है वो आप पूरा कंप्लीट कर लीजिए बस उतना बस करो और कोई दिक्कत नहीं है वह बहुत अच्छी है पत्री भगवती ऐसे नहीं करती मोस्टली अगर अपन कोई गलती जानबूझ के करें तभी वह खड़ी होती नहीं तो ऐसे नहीं करती य

43:19 स्वास को पकड़ कर रखना मतलब स्पेसिफिकली क्या करना होगा अनिरुद्ध जब अपनी स्वास आती है ना तो तो जब अपन ने ली ये छोड़ी शवास का पीछा करो कहां तक आई फिर रुकी फिर छोड़ी शवास का पीछा करो और अनिरुद्ध ये काम तुमने ड्राइविंग के समय नहीं करना बिल्कुल नहीं करना या तो तुम जब ड्राइविंग के लिए जाते हो या ड्राइव करते हो तो उसके दो घंटे पहले ये बिल्कुल भी मत

44:05 करना नहीं तो अनकॉन्शियस होते हैं अपन जब आप श्वास को पकड़ते हो तो अनकॉन्शियस होते हो एक अलग स्टेज में चले जाते हो तुम तो इसको उस समय करो जब तुम थोड़ा सुबह उठते हो उसके बाद स्नान करोगे या तो खाना खाओगे चाय पियोगे या जो भी करते हो तो उस शवास को अगर तुम पकड़ते हो तो तुम्हें बहुत सावधानी है रात को सोने के पहले अगर शवास पर तुम ध्यान दो तो नींद भी अच्छी आती है वो बार-बार छूटती है कभी इधर आएगी उसके बाद तुम्हारा ध्यान कहीं और चला जाएगा फिर वह छूट जाएगी जब तुम्हें ध्यान आए तब पकड़ो लेकिन सिर्फ एक बात ध्यान रखना कि लगातार शवास को पकड़ने से एक आदत बन जाती

44:52 है और उसमें क्या होता है कि जब ड्राइविंग वगैरह करते हैं हम उस समय बहुत लोग अनकस हो जाते हैं उससे थोड़ा संभल के करना बस लीना जी का प्रश्न है चक्र मेडिटेशन से पिछले जन्म के जो कर्म वो नष्ट हो सकते हैं क्या और अगर हा बिल्कुल हो सकते हैं और घर में एक व्यक्ति ने चक्र मेडिटेशन किया तो व घर के सभी लोगों के पिछले जन्म के कर्म नष्ट कर सकते हैं और कौन से चक्र से हम पिछले जन्म के कर्म नष्ट कर सकते हैं देखो चक्र मेडिटेशन तो हम अभी मूलाधार लेवल वन से स्टार्ट करेंगे क्योंकि स्टार्टिंग तो लेवल वन से ही होती है फर्स्ट दूसरी चीज क्या होती है आप लोगों के कर्म क्या है एक दूसरे के साथ ज्यादा

45:38 होते हैं जिनके साथ आप ज्यादा समय गुजारते हो उन्हीं के साथ कर्म होते हैं तो ज्यादातर क्या होता है कि जब आप साधना करते हो तो एनर्जी पूरे घर में एनर्जी फील्ड आपका फैलता है तो ऑटोमेटिक दूसरे लोग हील होते हैं उससे 80 पर वो करता लेकिन 20 पर उसके फैमिली के लोग ऑटोमेटिक होते हैं ऑटोमेटिक होंगे बिना किए होंगे वो उन पर प्रभाव आता है और सबसे पहले आप सारे चक्र एक साथ मत करो नहीं तो कोई भी नहीं होगा सबसे ज्यादा डेंजर जो होता है या सबसे ज्यादा प्रॉब्लेम िक होता है वह मूलाधार होता है मूलाधार ही करो रणजीत जी का प्रश्न है कि जैसा हम चाहेंगे वैसा हो सकता

46:23 है कैसे हो सकता है रंजीत जी सब कुछ हो सकता है बंदा उस स्थिति तक जाना चाहिए और उसमें उतनी डेरिंग होनी चाहिए कि वह सृष्टि को पलट सके क्या आप उतना कर सकते हो अगर आप कर सकते हो तो सब कुछ हो सकता है एक चीज नहीं हो सकती जो गुजर गया समय वह वापस नहीं आ सकता उसके अलावा सब कुछ हो सकता है तुम कितना तैयार हो यह तुम ऊपर डिपेंड करता है बंदे में कितना दम है और वह कितना आगे तक जा सकता है उसमें डेरिंग कितनी है और उसका संकल्प बल कितना सॉलिड है उस पर

47:09 डिपेंड करता है कि तुम क्या नहीं कर सकते सब कुछ संभव है लेकिन उसके लिए क्या तुम उतना कर सकते हो उस लेवल तक जाना पड़ता है नेक्स्ट विशाल भारद्वाज जी का प्रश्न है कि उन्हें कंसंट्रेट और फोकस करने में दिक्कत होती है उन्हें कुछ समझ नहीं आता तो कैसे वह शार्प करे अपने माइंड को विशाल अगर शवास पर ध्यान दो तो कंसंट्रेट कर सकते हो दूसरी चीज क्या होता है विशाल जब अपन श्वास को अंदर लेते हैं और उसके बाद अपन ने श्वास को रोक लिया उस समय अगर शवास को रोका जाए तो मन रुक जाता है थोड़ी देर में अभी जितनी देर श्वास को

47:57 रोका ठीक है जित आसानी से रुकती है ठीक है उसके बाद धीरे-धीरे छोड़ो एकदम से मत छोड़ो मतलब शवास छोड़ने में जितना ज्यादा से ज्यादा समय लगा सकते हो उतना लगाओ उसके बाद में जब बाहर तुम पूरी शवास छोड़ दो लास्ट तक जितनी जा सकती हो उतनी छोड़ो उसके बाद थोड़ी देर रुक जाओ उसको कहते हैं बाह्य कुंभक तो तुम जब शवास को स्लोली स्लोली लोगे और स्लोली स्लोली छोड़ोगे और उसके बाद छोड़ने के बाद थोड़ी रुकोगे और लेने के बाद थोड़ी देर रुकोगे तो उसमें क्या है कि तुम्हारा मन रुक जाएगा एकदम शांत हो जाएगा थोड़ी देर के बाद बहुत-बहुत धन्यवाद परम पूज्य भैया जी

48:43 का कि उन्होंने सभी का मार्गदर्शन किया

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