0:00 बच्चों पिछले वीडियो में अपन ने संविधान के बड़े में जाना था अपन ने यह जाना था की संविधान का निर्माण क्यों किया जाता है किसी भी राष्ट्र को कैसे एक बुनियादी पहचान देता है संविधान और किसी भी राष्ट्र के लिए उसके नियम कानून के निर्माण के लिए वहां की सरकार के लिए वहां की सरकार के शक्तियों के निर्धारण के लिए सरकार पर सीमाएं लगाने के लिए किस प्रकार आवश्यकता होती है संविधान की आज हम जानेंगे भारतीय संविधान के बड़े में की भारतीय संविधान का निर्माण किस तरह से हुआ भारतीय संविधान की निर्माण में किन लोगों का योगदान रहा और वो कौन से सिद्धांत थे वो कौन से नियम थे वह कौन सी महत्वाकांक्षाएं थी जिनको मध्य नजर रखते हुए भारतीय संविधान का निर्माण
0:45 किया गया तो बच्चों बात 1935 की है सबसे पहले 1935 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारतीय संविधान सभा की निर्माण की मांग पुरजोर तरीके से राखी थी 1935 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने जो ब्रिटिश थे जो की अपन सभी जानते हैं की उसे वक्त हमारे ऊपर अंग्रेजन का शासन था तो जो अंग्रेजी सरकार थी उसके सामने ये मांग राखी की बश्वातंत्र भारत जब होगा तो भारतीयों द्वारा बनाए गए संविधान द्वारा भारत का शासन चलेगा इसलिए हमें एक संविधान सभा का गठन करना है और उन्होंने ये ब्रिटिश राज्य के सामने मांग राखी की भारतीयों द्वारा बनी हुई एक संविधान सभा का गठन किया जाए ताकि वो भारत के लिए
1:31 संविधान का निर्माण कर सके 1938 में पंडित नेहरू ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मध्य से एक घोषणा की की जो संविधान सभा होगी वो पूर्ण तरह भारतीय प्रतिनिधियों की होगी पूर्ण रहे भारतीयों की होगी और जो संविधान होगा वो भी भारतीयों के द्वारा ही बनाया जाएगा इसमें किसी प्रकार का कोई भी बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होगा यह घोषणा होती है 19 30 में इसके बाद में 1942 में सर स्ट्रर्फोर्ड क्रिप्स जो की ब्रिटिश के भी नेट मंत्रिमंडल के सदस्य थे उनकी अध्यक्षता में एक सदस्य मिशन भारत आता है जिसे कहा जाता है क्रिप्स मिशन इस क्रिप्स मिशन ने प्रस्ताव रखा की द्वितीय विश्व
2:16 युद्ध के बाद में इन प्रस्तावों के अनुसार भारत में संविधान सभा का गठन कर दिया जाएगा लेकिन इस क्रिप्स मिशन को मुस्लिम लीग ने ठुकरा दिया मुस्लिम लीग की एक साफ-साफ और सीधी-सीधी मांगी ये थी की भारत को दो स्वत क्षेत्र में बांट दिया जाए और दोनों की अलग अलग संविधान सभाएं हो दोनों का अलग-अलग संविधान बनेगा हम किसी भी कीमत पर एक राष्ट्र नहीं होने देंगे ऐसा मुस्लिम लीग ने कहा उसके बाद में 1946 में 24 मार्च 1946 को कैबिनेट मिशन भारत आता है जो की तीन सदस्य थे इसमें तीन सदस्य ही था ये जिसमें एक पथिक लॉरेंस थे एक वही क्रिप्स थे और अच्छे अवि सिकंदर इन तीनों सदस्यों का जो ये कैबिनेट मिशन था इसके
3:04 इसमें भी ऐलानकी दो राज्यों की बात नहीं स्वीकार की गई थी लेकिन फिर भी ऐसे बहुत सारे इसमें कहानी की अपन तथ्य थे जो जी जिसको मुस्लिम लीग ने स्वीकार कर लिया था या जिसको जिन्होंने मुस्लिम लीग को एक तरह से संतुष्ट कर दिया था हालांकि दो राज्यों की दो अलग-अलग राज्यों की मांग इसमें स्वीकार नहीं की गई थी तो जो भारत की संविधान सभा का निर्माण होता है वो इसी क्रिप्स मिशन के प्रस्ताव के अनुसार होता है सॉरी कैबिनेट मिशन के प्रस्ताव के अनुसार होता है जो की 1946 में भारत आया था और उसमें तीन सदस्य थे अब देखिए क्या था कैबिनेट मिशन प्रस्ताव कैबिनेट मिशन प्रस्ताव के अनुसार संविधान सभा में टोटल 389 सदस्य होंगे जिसमें से 296 सदस्य होंगे ब्रिटिश भारत के और 93 93 है ये 93
3:52 सदस्य होंगे देसी रियासतों से ब्रिटिश भारत यानी की ऐसे क्षेत्र जहां पर सीधा अंग्रेजन का राज था और रिया सकते हैं जहां की रजाई थी राजा थे उनका राज था और वो ब्रिटिश राज्य के अधीन थी तो जो 389 सदस्य हैं उनमें से 296 तो चुने जाएंगे इस ब्रिटिश भारत से और 93 सदस्य चुने जाएंगे देसी रियासतों से और सीटों का आवंटन है वो जनसंख्या के अनुपात में किया गया और इससे 10 लाख लोगों को एक सीट प्राप्त हुई इस तरह से जनसंख्या के अनुपात में सीटों का आवंटन कर दिया गया अब देखिए जब चुनाव होता है तो उसे चुनाव के अंतर्गत जो असेंबली थी उसमें उसे समुदाय के सदस्यों द्वारा अकाल संक्रमणीय मत के मध्य से समानुपातिक
4:37 प्रतिनिधित्व तरीके से चुनाव किया गया हम सभी जानते हैं की जब उसे वक्त ब्रिटिश का शासन था हमारे ऊपर ब्रिटिश राज था तो सभी जो राज्य थे सीधे या तो अंग्रेजन के अधीन थे या फिर वहां एक गवर्नर बिठा दिया जाता था एक तरह से वो प्रांतीय सरकारें थी तो वो जो प्रांतीय असेंबली थी वो असेंबली है वो समानुपातिक प्रतिनिधित्व के द्वारा अपनी जितनी सिम उसको मिली करते हैं उतने सदस्य चुनकर संविधान सभा में भेजेगा देसी रियासतों के लिए यह व्यवस्था की गई थी की जो रियासत के प्रमुख हैं वो संविधान सभा के लिए अपने सदस्य चुनकर भेज देंगे अब देखिए संविधान सभा के लिए जो चुनाव हुए थे वो जुलाई अगस्त 1946 में हुए थे ये ते हो गया की किस प्रकार चुनाव होंगे कहां कहां से कितने सदस्य आएंगे और ये चुनाव होते
5:23 हैं जुलाई अगस्त 1946 के अंतर्गत इन चावन का जब रिजल्ट आता है तो 296 में से जो 208 सिम थी वो कांग्रेस ने प्राप्त की थी यानी की कांग्रेस ने भारी बहुमत प्राप्त किया था जो 93 सिम देसी रियासतों को दी गई थी वो खाली रही क्योंकि देसी रियासतों ने उसे वक्त अपने आप को संविधान सभा से अलग रखा था तो अब इसको संविधान सभा के चुनाव के जो परिणाम आए इन परिणाम में हिंदू मुस्लिम सिख पारसी बांग्ला भारतीय इसी अनुसूचित जाति जनजाति सभी प्रकार के प्रतिनिधियों को जगह मिली थी यानी की इन सभी प्रकार के समुदायों से प्रतिनिधि चुनकर संविधान सभा में आए थे एक मोहम्मद अली जिन्ना और एक गांधीजी इन दो बड़े नाम को छोड़कर लगभग सारे की साड़ी भारत की बड़ी हस्तियां बड़ी
6:10 विभूतियां संविधान सभा के सदस्य के रूप में चुन्नी गई थी अब अपन बात करते हैं संविधान सभा की कार्यप्रणाली की संविधान सभा की जो पहले बैठक होती है वो 9 दिसंबर 1946 को होती है इसका मुस्लिम लीग ने बहिष्कार किया था मुस्लिम लीग इस बैठक में शामिल नहीं हुई थी फ्रांस के आधार पर फ्रांस को में भी ऐसी ही व्यवस्था थी तो फ्रांस के आधार पर इस सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य थे दो सच्चिदानंद सिंह उनको इस सभा का अध्यक्ष दिया अध्यक्ष बनाया गया था जो पहले बैठक हुई थी 9 दिसंबर 1946 को तो संविधान सभा का अस्थाई अध्यक्ष चुनाव गया था डॉक्टर सच्चिदानंद सिंह को क्योंकि वो उसे समय सबसे वरिष्ठ सदस्य थे वरिष्ठतम
6:55 सदस्य थे एक बहुत इंपॉर्टेंट क्वेश्चन है बहुत बार पूछा जाता है प्रतियोगी परीक्षाओं में भी पूछा जाता है की हमारे संविधान सभा के अस्थाई अध्यक्ष कौन थे उसके बाद में 11 दिसंबर 1946 को चुनाव हो जाता है हमारे स्थाई अध्यक्ष का जो है डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद और चुनाव होता है अस्थाई स्थाई उपाध्यक्ष का भी जो थे डॉक्टर हा सी मुखर्जी अब देखिए यह संविधान सभा की आप देख का रहे हैं एक तस्वीर यहां मैंने लगे है की किस तरह से संविधान सभा में हमारे सदस्य बैठे हैं और यहां आपस में बैठकर चर्चा और विचार विमर्श करके एक तरह से आपस में बहसबाजी करके और संविधान का निर्माण कर रहे हैं 13 दिसंबर 1946 को पंडित नेहरू ने संविधान सभा में एक
7:41 ऐतिहासिक उद्देश्य प्रस्ताव रखा था वही उद्देश्य प्रस्ताव आज थोड़ा बहुत परिवर्तित रूप में हमारे भारतीय संविधान की प्रस्तावना है जिसे भारतीय संविधान का दर्पण भी कहा जाता है इसके बड़े में विस्तृत चर्चा आप आगे की कक्षाओं में पढ़ेंगे इस प्रस्त लोगों को 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया ये भी एक बहुत इंपॉर्टेंट क्वेश्चन है बहुत बार पूछा जाता है की नेहरू ने संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव कब रखा था तो वह उन्होंने रखा था 13 दिसंबर 1946 को चलिए आगे चलते हैं और अब समझते हैं अपन संविधान सभा के कामकाज की शैली की किस तरह से हमारी संविधान सभा ने कार्य
8:26 किया और किस तरह से हमारे इतने सुंदर इतने विशाल संविधान का निर्माण हुआ सो डागीय सदस्य पूरे देश की हिट को ध्यान में रखकर विचार विमर्श किया करते थे हमारी संविधान सभा में कुछ अपवादों को छोड़कर ऐसा कोई भी सदस्य ऐसी कोई भी बातचीत नहीं हुई थी जो की निज स्वार्थ के आधार पर हो सभी के सभी सदस्य ऐसे थे जो की संपूर्ण देश और संपूर्ण देशवासियों की हिट को मध्य नजर रखते हुए विचार विमर्श कर रहे थे अपने तारक प्रस्तुत कर रहे थे ने अपने तथ्य प्रस्तुत कर रहे थे यह हमारे लिए एक सौभाग्य की बात थी की सदस्यों में मतभेद नहीं जो स्वार्थ के आधार पर कभी भी नहीं हुए उनमें मतभेद थे लेकिन निज स्वार्थ के
9:11 आधार पर नहीं थे बहुत सारे बिंदुओं पर चर्चा परिचर्चा हुई निसंदेह है मतभेद होने ही थे और होने भी चाहिए क्योंकि जब वाद विवाद होता है पक्ष विपक्ष देखा जाता है तभी तो उसमें से एक बेहतर और बेहतर चीज निकाल कर बाहर आई है तो इसलिए मतभेद थे सदस्यों में लेकिन निज स्वार्थ के आधार पर बिल्कुल नहीं थे उन सभी विषयों पर गहराई से चर्चा हुई जो की आधुनिक राज्य का आधार है की किस प्रकार की सत्ता हनी चाहिए केंद्रित सत्ता हनी चाहिए या फिर विकेंद्रीकृत सत्ता हनी चाहिए संसदीय प्रणाली अच्छी है या फिर संघात्मक प्रणाली अच्छी है या फिर अध्यक्षत्मक प्रणाली अच्छी है या फिर एकात्मक शासन व्यवस्था अच्छी है इस तरह के सारे मुद्दों पर बहुत
9:58 विस्तृत 24 बहुत वाद विवाद हुआ बहुत सहमतियां असहमतिया बनी की आधुनिक राज्य के निर्माण के लिए क्या-क्या आवश्यक नियम है सिद्धांत है जरूरी अवधारणाएं हैं जिनका पालनपुर हमें करना है केवल एक प्रावधान जो की बिना वाद विवाद के पास हो गया वो क्या था वो था सार्वभौमिक मताधिकार का प्रावधान क्योंकि सीधी सी बात है किसी भी व्यक्ति को मताधिकार का ना देना कहानी भी किसी भी तरीके से न्याय पूर्ण नहीं है तो संविधान सभा का एक भी सदस्य इस बात पर स सहमत नहीं हुआ की सभी को हम बताधिकार सभी सदस्य इस बात पर सहमत थे की बिना किसी
10:44 आ जाति के बिना किसी वर्ग के बिना किसी भी प्रकार के भेदभाव के भारत के सभी नागरिकों को मत देने का अधिकार प्राप्त होना ही चाहिए तो केवल एक बिंदु ऐसा था जी पर की ज्यादा विचार वे नहीं हुआ जी पर वाद-विवाद नहीं हुआ जी पर पक्ष विपक्ष नहीं हुआ जी पर बहसबाजी नहीं हुई वो बिंदु कौन सा था सार्वभौमिक मताधिकार का और उसे वक्त संविधान जब बना था तब ये आयु किस वर्ष थी की प्रत्येक भारतीय नागरिक जो की 21 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेट है वो वोट देने का अधिकारी होगा चाहे वो देश के किसी भी कोनी में र रहा हो चाहे वो किसी भी धर्म का पालनपुर करता हो चाहे वो किसी भी जाति व्यवस्था का हो संविधान सभा में हुई चर्चा
11:31 मोटे-मोटे करो में प्रकाशित हुई संविधान सभा में जो चर्चा हो रही थी उसको समाचार पत्रों में प्रकाशित किया गया उसको सार्वजनिक बहस के लिए भी सामने लाया गया की जनता भी इस बड़े में जान सके जनता को भी इस बात की जानकारी हो की संविधान सभा में किस बात पर चर्चा हो रही है किन मुद्दों पर क्या-क्या सहमतियां और असहमतिया बन रही हैं इन बिंदुओं पर क्या-क्या निर्णय लिए जा रहे हैं ताकि जनता भी इस बड़े में सोच कर सके समझ सके और अगर उसे कुछ असहमतिया है तो फिर वह भी बता सके तो इस तरह की व्यवस्था की गई थी मतलब हमारी संविधान सभा उसकी कार्यप्रणाली उसकी बहसबाजी सभी के लिए खली थी कहानी कोई गोपनीयता नहीं थी अब ले लेते हैं अपन कुछ
12:17 सवाल अभी इस वीडियो में अपन ने क्या जाना की भारतीय संविधान का निर्माण हमारी एक संविधान सभा ने किया था वो संविधान सभा के भी नेट मिशन जो की 1946 में भारत आया था उसके प्रस्ताव पर आधारित थी एक और बात मैं आपको बता डन की 299 सदस्य र गए थे संविधान सभा में आगे आते-आते और जब 26 नवंबर 1949 को हमारा संविधान बनकर तैयार हो गया था 26 नवंबर 1949 तब इस पर हस्ताक्षर करने वाले सदस्यों की संख्या 284 थी 299 इसलिए र गए थे क्योंकि बाद में 1947 के अंतर्गत एक पाकिस्तान अलग राष्ट्र बन गया था यानी की जो दो राज्यों की मांग है वो अंग्रेजी
13:03 सरकार ने स्वीकार कर ली थी इसलिए जो मुस्लिम लीग की सिम थी वो यहां से कम हो गई इसलिए सदस्यों की संख्या र गई 299 और बाद में संविधान सभा में जब मैंने शुरू में आपको बताया की देसी रियासतों ने अलग रहने का फैसला किया था वो भी धीरे-धीरे सारे सदस्य संविधान सभा में ए गए थे और 284 सदस्यों ने अंतिम रूप से तैयार हमारे संविधान पर हस्ताक्षर किया थे पूरे 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन में हमारा संविधान बनकर तैयार हुआ था और इतनी इस अवधि के अंदर 166 बैठ के हुई थी संविधान सभा की बहुत सारे वाद विवाद के बाद बहुत सारे विचार विमर्श के बाद हमारा संविधान बनकर तैयार हुआ अब
13:48 लेते हैं सवाल संविधान सभा के निर्माण हेतु कैबिनेट मिशन का क्या प्रस्ताव था इसके बड़े में अपन को लिखना है की कैबिनेट मिशन ने कहा था की 389 सिम हनी चाहिए 296 ब्रिटिश भारत की होगी और 93 देसी रियासतों की होगी उन्होंने भी दो राज्य के सिद्धांत को नहीं मानना था लेकिन उसमें कुछ ऐसे प्रावधान थे जिन्होंने बहुत हद तक मुस्लिम लीग को संतुष्ट कर दिया था पंडित नेहरू द्वारा उद्देश्य प्रस्ताव कब प्रस्तुत किया गया यह बहुत इंपॉर्टेंट क्वेश्चन है की पंडित नेहरू ने संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव कब प्रस्तुत किया धन्यवाद