0:01 मेरे प्यारे साथियों, परीक्षा पे चर्चा के इस महत्वपूर्ण एडिशन में आपका बहुत-बहुत स्वागत है। इस बार परीक्षा पे चर्चा कुछ अलग है, कुछ खास है। बहुत सारे स्टूडेंट्स ने मुझे यह सजेशन भेजा था कि देश के अलग-अलग हिस्सों में भी परीक्षा पे चर्चा होनी चाहिए। तो इस बार मैंने देश के अलग-अलग हिस्सों में भी स्टूडेंट के साथ बैठकर के परीक्षा पर चर्चा की।
0:47 इस स्पेशल एपिसोड में आप यही देखने जा रहे हैं। हमारी चर्चा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंच गई। बच्चों से मेरी बहुत दिलचस्प बातें हुई और मैं कह सकता हूं सिर्फ बातचीत नहीं बहुत मजेदार चीजें खाने का भी मौका मिल गया। आप भी इसका आनंद लीजिए। जय जोहार सर जय जोहार द फर्स्ट थॉट दैट केम टू माय माइंड वास इज इट एक्चुअली द प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया लाइक आई कुड नॉट बिलीव माय ओन आइज कुछ खिलाया पिलाया कि नहीं यस सर
1:32 हां आप भी बहुत सारी मीटिंग्स अटेंड करके आए हैं। आप भी हमारे यहां का खाना चाहेंगे? ये ठीक कैसे बनता है सर? ये बेसन को गोलगोल आकार देके उसको तलते हैं। अच्छा और ये नमकीन होता है। तो कब खाते हैं ये लोग? सर दिवाली के टाइम पे दिवाली के टाइम खाते हैं? ज्यादातर दिवाली टाइम पे बनती है। महाराष्ट्र में इसको क्या कहते हैं? महाराष्ट्र में ऐसा ही बनता चकली कहते हैं। हां सर। ये क्या है? सर ये खुरमी है। हमारी गुड़ से बनती है, आटे से बनती है और सूजी से बनती है। हम
2:19 तो बढ़िया खिलाने के लिए धन्यवाद बेटा। वहां पे उन्हें खुरमी मिली तो उन्होंने सबको अपने हाथ से खुरमी खिलाई एंड इट वास जस्ट सो अमेजिंग। आपके मन में भी कुछ सवाल आते होंगे आज आप लोगों को यहां आने के लिए मौका मिल गया है तो? यस सर। बताइए। हम स्टूडेंट्स को भी एग्जाम्स के बाद वेकेशंस पे जाने का बहुत मन करता है। तो आप इंडिया में कोई ऐसी पांच जगह बता सकते हैं जहां हम भी जा सके। आप जिस तहसील में से हो कौन सा तहसील है आपका? सर मैं रायपुर से रायपुर से। रायपुर तहसील में कौन-कौन सी चीजें हैं? इसका जरा लिस्ट बनाओ। एक घंटा लगेगा, दो घंटे लगे जाऊंगा। फिर लिस्ट बनाओ। जिले में कौन से हैं जो
3:04 देखे नहीं है। फिर तय करूं मैं राज्य में कौन से हैं? छत्तीसगढ़ में ऐसी कौन सी जगह मैं गया नहीं हूं। हमें कहीं पर भी जाए स्टूडेंट के रूप में जाना चाहिए। तब टूरिज्म का मजा आता है। वहां खाना मिलता है तो उसे जैसे मैंने पूछा कैसे बनता है? मैंने आपको भी पूछा कैसे बनता है। क्यों? तो मेरे भीतर एक विद्यार्थी है। वो जानना चाहता है। हमारे हर एक के भीतर एक विद्यार्थी तो जिंदा रहना चाहिए। कहीं पर लिखा हुआ है तो पढ़ नहीं सकते। किसी को बोलो जरा समझाओ क्या लिखा है? क्या चीज है? रेल के डिब्बे में जाना और खा साथ में खाना भी ले जाना। देखना चाहिए कैसा अनुभव होता है। भीड़ होती है। क्या होता है? लोग बातें करते हैं, क्या करते हैं? इसका एक आनंद होता है। जीवन में
3:50 सीखने को मिलता है। भारत इतनी विविधताओं से भरा हुआ है। एक जिंदगी भी कम पड़ जाए देखने के लिए। मैंने उनसे क्वेश्चंस किए और उन्होंने मतलब इतने अच्छे तरीके से जवाब दिए। हम लोगों को इतने अच्छे तरीके से समझाया। मुझे वो बहुत पसंद आया सर। अच्छा जी बताओ आप लोगों को कितना टेंशन है एग्जाम का? नर्वसनेस हो जाती है। किस बात को लेकर के होती है? कि एग्जाम अच्छा नहीं जाएगा। ऐसा क्यों विचार आता है कि एग्जाम अच्छा नहीं जाएगा। सर एक ऐसा होता है ना कि लोगों की एक्सपेक्टेशंस होती है आपसे। हां। आपको टेंशन जो है ना मां को क्या लगेगा पापा पता नहीं क्या करेंगे
4:35 टीचर क्या कहेंगे मेरा दोस्त क्या करेगा वो मामा का बेटा है जो वो मेरे साथ पढ़ता है वो मेरे से एक दो मार्क ज्यादा ले आए तो क्या हो जाएगा हम उसी में खोए रहते हैं और उसी के कारण ये टेंशन रहता है जी सर मतलब हमारा आत्मविश्वास कम है। एक बार खुद पर आप सोच लो कि पिछली बार 80 मार्क आए थे। इस बार 80 को क्रॉस करना है। पिछली बार 40 मार्क आए थे। इस बार 40 को क्रॉस करना है। लड़ाई खुद से लड़ो। तो आप 80 का 81 हो जाएगा ना तो भी आपको लगेगा यार मेरी प्रगति हुई है। वो देखते रहोगे
5:21 तो आप रोते ही रहोगे। भाई तो जिंदगी रोने के लिए थोड़ी है। बहुत खुशी हो रहा है सर से मिले तो और उन्होंने हमसे इंटरेक्शन किया। हमारे जो क्वेश्चंस थे उनका आंसर दिया सर ने बहुत अच्छा लगा। सर मेरा प्रश्न आपसे यह है कि कभी-कभी हम एग्जाम के दौरान रिवीजन नहीं कर पाते हैं जिससे हमारा मन अशांत हो जाता है। तो सर हम अपने मन को शांत कैसे करें? एग्जाम के दौरान भी और एग्जाम हॉल में जाने से पहले भी। एक वीक देख लीजिए परीक्षा के पहले का सभी चीजों को आपने ऊपर नीचे तो कर ही लिया होगा। आप मान के चलिए आपने जो सुना है आपने जो पढ़ा है वो बेकार नहीं गया है। कहीं ना
6:08 कहीं तो स्टोरेज है ही है वो। आप शांत मन से बैठ लीजिए। चिंता मत कीजिए। जैसा पेपर आता है देख लीजिए। दूसरी चीज आप अच्छा विद्यार्थी बनना है ना आपको उस विषय पर ग्रीप होनी चाहिए ना तभी तो अच्छे विद्यार्थी बनोगे सब्जेक्ट पर ग्रीप कैसे आएगी एक अच्छा खिलाड़ी अच्छा खिलाड़ी कैसे बनता है निरंतरता बनाए रखता दिन में रहता है रूटीन में चलता है सबसे बड़ी बात है वो लगातार कंपटीशन करता रहता है। गिरता है, पटकता है, हारता है, जीतता है,
6:54 करता है। उसमें से वो खिलाड़ी बनता है। ठीक है? आपको मैं एक सुझाव देता हूं। आप करिए। आपके क्लास में कुछ विद्यार्थी होंगे। आपको लगता है जरा पढ़ने में थोड़ा कम है। ऐसे तो होते ही है। हां। ऐसे एक आध को आप दोस्त बनाइए। यह टेक्निक बहुत कायम आई है। उसको कहो कि मैं आज तुझे मैथ्स सिखाना चाहता हूं। अब उसको मैथ सिखाने के लिए आप जो मेहनत करेंगे, दिमाग फोकस करेंगे, आपका मैथ्स पक्का होगा कि नहीं होगा? उनकी पर्सनालिटी बहुत ही इंस्पायरिंग है। वो अपने हर वर्ड से ना सारे स्टूडेंट्स को
7:40 इंस्पायर करते हैं। मैं टैकंडो खेलती हूं और मैं आगे चलके स्पोर्ट्स पर्सन बनना चाहती हूं। अपनी स्टडीज और स्पोर्ट्स को बैलेंस करके कैसे रख सकती हूं? शिक्षा की जीवन में भी जरूरत है। समाज जीवन में भी जरूरत है। इसको अंडरएस्टीमेट नहीं करना चाहिए। यह गलती कभी मत करना। कि खेल में मैं बहुत अच्छा हूं इसलिए मुझे पढ़ने की जरूरत नहीं है। लेकिन शिक्षा ही सब कुछ कर लेगी ऐसा नहीं है। आप में हुनर है जो भी है उसको डेवलप करना चाहिए। खिलाड़ी बनने के लिए खेलें वो एक विषय है। लेकिन जिंदगी में खेल होना चाहिए। यह भी बहुत जरूरी है। जिंदगी खेल होने से बचाना है तो जिंदगी में खेल होना चाहिए।
8:29 खेलना भी है। खेलूंगा तो खेलूंगा और पढ़ना भी है ताकि और लोग कहे नहीं कि इसको कुछ पढ़नावढ़ना आता नहीं इसलिए मैदान में रहता है। नहीं पढ़ने में भी मैं पावरफुल हूं खेलने में भी बहुत और खेल में प्रगति करने के लिए वो भी पढ़ना ही एक प्रकार से। मैं नई-नई चीजें सिर्फ ऐसे ही दोस्तों के लिए टाइम खराब करने के लिए खेल रहा हूं। ऐसा नहीं हर दिन नई चीज सीखता हूं। गलतियां कम करता हूं, ताकत बढ़ाता हूं। उसके लिए डिसिप्लिन फॉलो करता हूं। वो जो भी बताएं उसको मैं अपने लाइफ पे इंप्लीमेंट करने का कोशिश करूंगी। और मैं लफ्जों में बयां नहीं कर सकती। आज जो भी हुआ। बहुत से विद्यार्थी होते हैं जो परीक्षा
9:17 हॉल में जाने से पहले ब्लैंक आउट हो जाते हैं। उन्हें पढ़ी हुई चीजें याद नहीं हो पाती है और उनका दिमाग ही शून्य हो जाता है। तो मैं जानना चाहता हूं क्या सर आपके साथ भी कभी यह हुआ है किसी अहम मीटिंग या चुनाव में जाने से पहले अगर मैं आपको कहूं कि आप बैठो कि सोमवार को क्या खाया था लिखो। मंगलवार को क्या खाया था लिखो। तो आप सोचोगे यार बड़ा मुश्किल है। खुद ने खाया कि नहीं खाया? मां ने परोसा था कि नहीं परोसा था? प्यार से खाया था कि नहीं खाया था? फिर भी भूल गए। क्यों? आपने उस पर ध्यान नहीं लग रखा आपने। तो अभी दूर की बात मैं नहीं कर रहा हूं।
10:05 लेकिन मान लीजिए मैं कहूंगा नहीं कैसा करूं। आज घर जाकर याद करना। सोमवार को मैं स्कूल से जल्दी आया था और मां ने इस कलर की साड़ी पहनी थी और मैं टेबल पे नहीं गया। मैंने बाहर चेयर पर ही टीवी देखते हुए मां को कहा मुझे यहां खाना एक-एक चीज याद करोगे। फिर सोचोगे पहले मां ने मुझे ये दिया था। तो याद आ जाएगा लिख लो। तो आप धीरे धीरे धीरे वापस चले जाओगे। तो जो अभी लगता है नहीं मुझे तो याद नहीं आपको एकदम से याद आने लगेगा। इसका मतलब हमारी परमात्मा ने रचना की है कि सब स्टोर रहता है। आप थोड़ा सजग हो के वो खिड़की खोलने की आदत डाल दीजिए तो आपको कभी ऐसा
10:52 नहीं होगा। दूसरा कोई रेफरेंस याद रहता है कि भाई उस दिन ये विषय तो था कि हां हां उस दिन सामने लाल कलर का शर्ट पहना था ना उस दिन ये बात बोला था तो रेफरेंस याद रहता है किसी को अगर आपको ये आदत है तो शायद आपको एकदम से सुन नहीं हो जाएंगे कभी हम ब्लैंक पहुंच गए ऐसा नहीं होगा सच अ गोल्डन ओपोरर्चुनिटी जो मुझे मिली है नॉट मेनी स्टूडेंट्स गेट दिस एंड आई एम इटर्नली ग्रेटफुल टू टू देम हमारा बस्तर भारत हो प्राचीन काल से गौरवान्वित कर रहा है। सर हमारा जो संस्कृति है वो धीरे-धीरे विलुप्त हो रही है। तो सर हम अपने संस्कृति को किस प्रकार
11:37 संरक्षित कर सकते हैं? हमें परिवर्तन से डरना नहीं चाहिए। लेकिन अपनी जो मूलभूत चीजें हैं उसके प्रति हमें गर्व होना चाहिए। हमारे पूर्वजों ने बहुत बड़ी चीजें की है। अब आप कभी सोमनाथ जाओगे तो सोमनाथ मंदिर में एक एरो लगा हुआ है और एरो इतना परफेक्ट लगा हुआ है कि वो कहता है कि इस एरो की दिशा में कहीं पर भी जाइए समंदर के अंदर कहीं पर भी जमीन नहीं मिलेगी। मतलब उतना ज्ञान होगा किसी को दिशा का ज्ञान होगा। आज भी आपने देखा होगा एस्ट्रोनॉमी में जो बातें आती सूर्य इतना दूर है ठीक ना सारी चीजें हमारी यहां
12:24 हमारे आर्यभट्ट वगैरह ने सब उस जमाने में लिख के गए थे जीरो की चर्चा होती है आज भी कहते हुए हमारे पूर्वजों ने दिया जिस योगा को हम भी भूल गए थे आज पूरी दुनिया उस योगा को स्वीकार करती है हम अपनी विरासत पर गर्व करें और जो भी अच्छा है उसका स्वीकार करने का मन बनाए तो मैं समझता हूं कि इसमें नष्ट होने की नौबत आने वाली नहीं है। विनाश होने की नौबत आने वाली नहीं है। अपने प्रश्न पूछे और उन्होंने जो यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने बहुत ही अच्छे आंसर दिए। मैं इसके लिए बहुत आभारी हूं उनका। सर मेरा सवाल यह है जैसे कुछ सालों पहले
13:11 आपने स्वच्छ भारत स्टार्ट किया था। हमारा नया राइट पे भी डेवलपमेंट की ओर जा रहे हैं। तो हम एज अ स्टूडेंट उस डेवलपमेंट के लिए या अपने एनवायरमेंट को प्रोटेक्ट करने के लिए क्या कंट्रीब्यूट कर सकते हैं? प्राकृतिक संपदा को बचाने का हमारे स्वभाव में हम रास्ते और धीरे-धीरे हमें लोगों को जोड़ना चाहिए। अब जोड़ते रहते हैं तो बदलाव आता है। खुद के जीवन में कुछ नियमों का अगर हम पालन करते हैं। जैसे हम गंदगी नहीं करेंगे। स्वच्छता की समस्या तो तब आती है ना जब हम गंदगी करते हैं। अब पानी मुझे बताइए कि मैं ब्रश कर रहा हूं और पानी बह रहा है। अरे भाई तुम ब्रश कर रहे हो तो
13:56 पानी तो बंद करो। जब मुंह धोओगे तब पानी लेना। छोटी-छोटी चीजें होती है। एक बार मैं एक गांव की यात्रा कर रहा था। दूर से मैंने देखा कि एक जगह एकदम से जंगल जैसा लग रहा है। हरी भला क्या है? बोले ये तो स्कूल है। तो ये सब इतना सूखा है ग्रीन है। वहां एक टीचर थे। उस टीचर ने ये जो पेट्रोल पंप होता है वहां जो ऑइल के कैन वगैरह होते हैं वो इकट्ठे करते थे वो और बच्चों को कहते थे कि तुम्हारे घर में वो जो पानी होता है जिसमें खाने का कुछ अंश होता है वो इस बोतल में रोज स्कूल आओगे तब भर के आना। तो सारे बच्चे वो बोतल भर के
14:43 या जो उनको कंटेनर दिया है वह भर के आते थे और उन्होंने वहां पैड लगाए थे। हर बच्चे को एक पैड दे दिया गया था। वो जो पानी ले आता था वो उसमें डालना होता था। थोड़ा फर्टिलाइजर का भी काम करता था। सब्जीव के टुकड़े होते थे। उसके कारण वो पूरा स्कूल को चारों तरफ एकदम से ग्रीन बन गया था। एक टीचर ने इतना बड़ा परिवर्तन लाया। मानवीय रूप से व्यवहार करें तो बदलाव शुरू हो जाता है। छोटी चीजें हैं। हम आराम से कर सकते हैं। समाज का वातावरण हमारे स्वभाव में आना चाहिए। बहुत अच्छा एक्सपीरियंस था पूरे डे का और
15:29 बिल्कुल डे ड्रीमिंग जैसा था कि बिलीव नहीं हो रहा था सच में हम लोग पीएम सर से बैठ के बात कर रहे हैं। जैसे हमारी हॉबीज होती हैं आर्ट स्केचिंग, डांसिंग, सिंगिंग इन सबका पढ़ाई की वजह से जो प्रेशर पड़ता है हम पे तो इस वजह से हम दोनों को बैलेंस करके नहीं चल पाते। तो आप ऐसा कोई तरीका बताइए जिससे हम अपने पढ़ाई और हॉबीज दोनों को एक साथ ले चल पाएं। देखिए पढ़ाई और हॉबी दोनों साथ-साथ बड़ी आराम से चल सकती है। बहुत आराम से चल सकती है। आपको उसको उसको भी पढ़ाई का हिस्सा बना सकते हैं। मान लीजिए आपको रंगोली का शौक है। आप चाहते हैं कि बहुत अच्छा रंगोली का
16:15 मुझे शौक है। अब पढ़ाई में भी मानो आपको वनस्पति के कुछ विषय हैं। आप तय करो कि वनस्पति की जो चीजें हैं मैं उसी को लाकर के रंगोली करूं। तो रंगोली में जो चीजें मैं लाऊंगा पत्तियां लाऊं तो ये नीम की पत्तियां है। ये अदरक की पत्तियां ये ढगने की पत्तियां ये फलाने के तो आपका विषय भी पढ़ा जा रहा है। आपकी हॉबी भी चल रही है। दोनों का कॉम्बिनेशन हुआ कि नहीं हुआ? मैं समझता हूं कि हॉबी होना अच्छी चीज है। आप अगर हॉबी के लिए समय देते हैं डिसिप्लिन में रह के तो आपकी पढ़ाई के लिए आपके अंदर और चेतना आती है और जागरूकता
17:02 आती है। आप अधिक फोकस कर सकते हैं और उसका बेनिफिट यहां भी होता है कि आप अपने कला में जहां भी हॉबी में जाना चाहते हैं वो भी उतना ही अच्छा कर सकते हैं। लेकिन अगर हॉबी होगी तो समाज में भी अच्छा लगता है। चार लोग आपकी ताबत बाबा ही करते हैं। आपके लोगों का नजर जाता है। अच्छा भाई इतना बढ़िया करते हैं। मैं समझता हूं आपको मान लो अच्छे वक्ता बनना है। वो हॉबी है आपकी। तो आपको कई किताबें पढ़नी पड़ती है, कई चीजें रेफरेंस करनी पड़ती है, लिखना पड़ता है। तो आपकी हॉबी तो है लेकिन साथ-साथ में अध्ययन भी है। तो दोनों चीजें एक साथ चल सकती हैं। समय का विभाजन हमें आना चाहिए। हम एक तरफ झुक जाते हैं तो गिरने की नौबत
17:47 आती है। लेकिन बैलेंस कर करके चलते हैं तो गिरने की नौबत नहीं आती। तो मैंने उनसे पूछा था कि हम अपनी हॉबीज और अपनी स्टडीज को एक साथ कैसे बैलेंस करें? तो उन्होंने यह ने स्यूशन दिया कि हम अपनी स्टडीज में ही अपनी हॉबीज को मिक्स करके रखें तो फिर कुछ नहीं छूटेगा। उन्होंने ये स्यूशन दिया था हमको। आप इतने साल से देश को संभाल रहे हो। देश के लीडर हो तो आप फ्यूचर जनरेशन से हम बच्चों से ऐसी कौन सी क्वालिटी एक्सपेक्ट करते हो कि हमारे अंदर आनी चाहिए एक लीडर के रूप में? ऐसा लीडर बनना है कि लीडर बनना है? दोनों बनना है। देखिए पहले लीडर बनिए। जो काम है मन में तय करिए कोई करे या ना करे मैं करूंगा।
18:35 जब ये शुरू आ जाएगा मैं अपने से शुरू करूंगा तो आप देखिए अपने आप लीडरशिप आना शुरू हो जाएगी। जैसे मान लीजिए यहां कूड़ा कचरा है। आप जा रहे हैं और आपने एक उठा लिया तो आपके साथ जो चार लोग चलते होंगे ना आपने देखा होगा वो भी उनको भी लगेगा यार उठा लो। मतलब आप लीडर बन गए कि नहीं बन गए? अच्छी चीज है। हमें अपने आप को हमेशा लीडर रोल में तैयार करना चाहिए। ये अच्छा विश्वास है। विचार भी अच्छा है। लेकिन लीडर का मतलब यह नहीं है कि चुनाव लड़ना, पॉलिटिकल पार्टी बनाना, पार्टी में जाना, लच्छादार भाषण करना ऐसा नहीं होता। लीडर मतलब लीडरशिप में क्वालिटीज होनी बहुत जरूरी
19:22 है। आप 10 लोगों को अपनी बात समझा पाओ। थोपनी नहीं है, समझानी है। समझाने के लिए पहले उसको समझना है। जो उनको समझ पाता है वो समझा पाता है। जो उनको नहीं समझता है वो कुछ नहीं समझा पाता। और इसलिए हमारी कोशिश ये होनी चाहिए कि उनको समझना चाहिए। उन्होंने बहुत अच्छे से बताया कि किसी के अंदर एक लीडरशिप क्वालिटीज होती है। अगर वो किसी चीज के लिए रिस्पांसिबल हो रहा है। इफ आई वुड डिस्क्राइब दिस होल्ड देन आई वुड से सपना। मैं प्रधानमंत्री से मिली। आई एम वेरी लकी। बहुत अच्छा था। मतलब ऐसा एक्सपीरियंस जो लाइफ में बहुत कम लोगों को मिलता है। परीक्षा की तैयारी के अनुभव, परीक्षा के
20:08 समय आने वाले विचार, स्ट्रेस और लोगों की एक्सपेक्टेशन से जुड़े हुए ढेर सारे सवाल लगातार चर्चा का हिस्सा बनते हैं। और परीक्षा पे चर्चा का मकसद ही है कि हमारे युवा साथी इस पर खुलकर बात करें। परीक्षा एक ऐसा अवसर है और परीक्षा के लिए हेल्दी कंपटीशन की भावना हमारी तैयारी को और बेहतरीन बनाती है। इन सभी चर्चाओं में स्थान अलग-अलग थे, स्टूडेंट्स अलग-अलग थे, अनुभव अलग थे।
20:54 लेकिन हर चर्चा का उद्देश्य एक ही था। हर स्टूडेंट को सुनना, समझना और साथ मिलकर कुछ ना कुछ सीखना। आप सभी को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद।