NCERT | CBSE | Class - 11 | भारत का संविधान सिद्धांत और व्यवहार | भारतीय संविधान में अधिकार | भाग-6

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो भारतीय संविधान के अध्याय की प्रश्नावली पर आधारित है। इसमें मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों से संबंधित प्रश्नों पर चर्चा की गई है। वीडियो में सही-गलत कथनों की पहचान, मौलिक अधिकारों का सटीक वर्णन, स्थितियों में मौलिक अधिकारों का उल्लंघन, सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की व्याख्या, और विभिन्न अधिकारों के महत्व पर प्रकाश डाला गया है।

  • मौलिक अधिकारों का सटीक वर्णन संविधान द्वारा प्रदत्त और सुरक्षित अधिकार हैं।
  • सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार अल्पसंख्यकों को अपने बच्चों के लिए विद्यालय खोलने और उन्हें आरक्षित करने की अनुमति देते हैं।
  • संवैधानिक उपचारों का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अन्य अधिकारों की रक्षा करता है।

अधिकार पत्र: सही या गलत

अधिकार पत्र किसी देश की जनता को हासिल अधिकारों का वर्णन करता है, जो कि सही है। यह व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करता है, यह भी सही है। हालांकि, यह कहना गलत है कि विश्व के हर देश में अधिकार पत्र होता है, क्योंकि यह केवल लोकतांत्रिक शासन प्रणालियों में होता है।

मौलिक अधिकारों का सटीक वर्णन

मौलिक अधिकारों का सबसे सटीक वर्णन है "संविधान द्वारा प्रदत्त और सुरक्षित समस्त अधिकार"। यह इसलिए सही है क्योंकि मौलिक अधिकार संविधान द्वारा प्रदान किए जाते हैं और संविधान द्वारा ही संरक्षित किए जाते हैं। अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि मौलिक अधिकारों पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

मौलिक अधिकारों का उल्लंघन: स्थितियाँ

राष्ट्रीय एयरलाइन में पुरुषों को तरक्की देना लेकिन महिलाओं को दंडित करना समानता के अधिकार का उल्लंघन है, क्योंकि यह लिंग के आधार पर भेदभाव है। एक निर्देशक द्वारा सरकारी नीतियों की आलोचना करना स्वतंत्रता के अधिकार का उपयोग है। बड़े बांध के कारण विस्थापित हुए लोगों द्वारा पुनर्वास की मांग करते हुए रैली निकालना भी स्वतंत्रता के अधिकार के तहत आता है। आंध्र प्रदेश के बाहर तेलुगु माध्यम के विद्यालय चलाना शिक्षा और संस्कृति के अधिकार का संरक्षण है।

सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की व्याख्या

सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की सही व्याख्या यह है कि भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यक अपने बच्चों के लिए विद्यालय खोल सकते हैं और उन्हें आरक्षित कर सकते हैं। यह कथन संविधान में दिए गए शिक्षा एवं संस्कृति के अधिकार की सही व्याख्या करता है, जो किसी भी वर्ग या समुदाय को अपनी शिक्षा और संस्कृति के लिए संस्थान खोलने की अनुमति देता है।

मौलिक अधिकारों का उल्लंघन: उदाहरण

किसी पुस्तक पर प्रतिबंध लगाना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन करता है। न्यूनतम मजदूरी दे नहीं होना नीति निर्देशक तत्वों के तहत आता है, जबकि रात 9:00 बजे के बाद लाउडस्पीकर बजाने पर रोक और भाषण तैयार करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं है।

गरीबों के लिए मौलिक अधिकारों की आवश्यकता

गरीबों को मौलिक अधिकारों की आवश्यकता होती है। नीति निर्देशक तत्वों को लागू करने से गरीबों की स्थिति में सुधार होगा, लेकिन यह मौलिक अधिकारों की जगह नहीं ले सकता। लोक कल्याण के लिए नीति निर्देशक तत्वों का लागू होना आवश्यक है, लेकिन मौलिक अधिकार भी उतने ही जरूरी हैं।

जाति के आधार पर भेदभाव

जातियों को झाड़ू देने के काम में मजबूरन लगे रहना और उनके बच्चों को पढ़ाई-लिखाई करने पर हतोत्साहित करना समानता के मूल अधिकार का उल्लंघन है, क्योंकि जाति के आधार पर उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है और उन्हें अवसरों की समानता नहीं मिल रही है।

भुखमरी की स्थिति और मानवाधिकार

देश में भुखमरी की स्थिति और भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में अनाज का भरा होना कानून के समक्ष अधिकार और भेदभाव की मनाही (अनुच्छेद 15) दोनों अधिकारों से संबंधित है। ये अधिकार समानता के अधिकार से जुड़े हैं और जीवन के अधिकार का एक अंग हैं, क्योंकि भुखमरी से लोगों के जीवन का हनन हो रहा है।

सोमनाथ लहरी का वक्तव्य: मौलिक अधिकार

सोमनाथ लहरी का कथन है कि मौलिक अधिकारों पर उचित प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिससे वे पूरी तरह से वापस ले लिए जाते हैं। इस कथन से पूरी तरह सहमत नहीं हुआ जा सकता, क्योंकि मूल अधिकारों के साथ जोड़े गए उपबंध नियंत्रण जरूर लगाते हैं, लेकिन उन्हें समाप्त नहीं करते। कुछ परिस्थितियों में मूल अधिकारों पर प्रतिबंध लगाना नागरिकों और सरकार के लिए अच्छा हो सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार

संवैधानिक उपचारों का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अन्य अधिकारों की रक्षा करता है। यह न्यायपालिका को इतनी शक्ति देता है कि वह मूल अधिकारों की रक्षा कर पाती है। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने इस अधिकार को संविधान का हृदय और आत्मा कहा है।

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Transcript

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0:00 पिछले वीडियो में अपने मूल अधिकारों के बड़े में जाना और हमने जाना नितिन निर्देशक तत्वों के बड़े में अब वक्त हो चला है इस अध्याय की प्रश्नावली की और तो चलिए चलते हैं और देखते हैं अपनी पाठ्य पुस्तक के प्रश्न होता है पहले क्वेश्चन है निम्नलिखित प्रत्येक कथन के बड़े में बताइए की वह सही है या गलत है सही और गलत बताना है कथन को पढ़ना है सही है या गलत है अधिकार पत्र में किसी देश की जनता को हासिल अधिकारों का वर्णन होता है ये कथन बिल्कुल सही है की हमारे देश की नागरिकों को जो भी अधिकार प्राप्त होते हैं वो अधिकारों का घोषणा पत्र कहलाता है तो ये कथन पुरी तरह सही है की अधिकार पत्र में उन अधिकारों का उल्लेख होता है जो उसे देश की जनता को प्राप्त होते हैं दूसरा है

0:45 अधिकार पत्र व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करता है यह कथन भी पूर्ण तरह सही है की जो हमारे अधिकार हैं उसमें स्वतंत्रता का अधिकार भी एक अधिकार होता है और अधिकार पत्र के द्वारा उसकी रक्षा की जाति है विश्व के हर देश समय अधिकार पत्र होता है यह कथन गलत है केवल जो लोकतांत्रिक शासन प्रणालियों हैं वहीं पर अधिकार पत्र होते हैं विश्व के प्रत्येक देश में अधिकार पत्र हो ऐसा होना आवश्यक नहीं है क्वेश्चन नंबर दो लेते हैं निम्नलिखित में से कौन मौलिक अधिकारों का सबसे सटीक वर्णन है ये अपन को जो भी अचार दिए गए हैं वाक्य इनको अपन को पढ़ना है और इनमें से अपन को ये बताना है की इनमें मलिक अधिकारों का सबसे सटीक वर्णन कौन सा कथन कर रहा है किसी

1:30 व्यक्ति को प्राप्त समस्त अधिकार कानून द्वारा नागरिक को प्रदत समस्त अधिकारी संविधान द्वारा प्रदत और सुरक्षित समस्त अधिकार संविधान द्वारा प्रदत वे अधिकार जिन पर कभी प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता तो इसमें से ये वाला कथन होगा जो की मौलिक अधिकारों का सटीक वर्णन करता है क्योंकि मौलिक अधिकार संविधान द्वारा प्रधान किया जाते हैं और संविधान द्वारा ही संरक्षित किया जाते हैं यह वाला कथन इसलिए नहीं ए सकता क्योंकि मूली अधिकारों पर भी उचित पूर्ण प्रतिबंध लगाएं जा सकते हैं अगला क्वेश्चन निम्नलिखित स्थितियां को पढ़ें अपन को स्थितियां दी हुई है उनको अपन को पढ़ना है प्रत्येक स्थिति के बड़े में बताएं की किस मौलिक अधिकार का उपयोग या उलझन हो रहा है और कैसे हो रहा है देखिए

2:19 पहले राष्ट्रीय एयरलाइन के चालक परिचालक दाल के ऐसे पुरुषों को जिनका वजन ज्यादा है नौकरी में तरक्की दी गई लेकिन उनकी ऐसी महिला सहकर्मियों को दंडित किया गया जिनका वजन बाढ़ गया था ये एक घटना है तो उसके बड़े में अपन को ये बताना है की इसमें कौन से मूल अधिकार का उलझन हुआ है तो जैसे की देखने से ही स्पष्ट है की इसमें सामान्य की मूल अधिकार का उलझन हुआ है यहां लिंग की आधार पर भेदभाव किया गया है महिला और पुरुष का भेदभाव किया गया है दूसरा पढ़ने हैं एक निर्देशक एक डॉक्युमेंट्री फिल्म बनाता है जिसमें सरकारी नेशन की आलोचना है तो इसमें किसी मूल अधिकार का उलझन नहीं हुआ है उसे निर्देशक ने अपने मूल अधिकार का उपयोग किया है और वो है स्वतंत्रता के

3:05 अधिकार के अंतर्गत अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दीगर एक बड़े बंद के करण विस्थापित हुए लोग अपने पुनर्वास की मांग करते हुए रैली निकलते हैं तो इसमें भी किसी प्रकार की भेदभाव का उलझन नहीं हुआ है लोग हैं वो अपनी मांग रख रहे हैं रैली निकाल रहे हैं तो ये भी स्वतंत्रता के अधिकार के तहत हमें अधिकार प्राप्त होता है रैली निकालना का अधिकार आदर्श सोसाइटी आंध्र प्रदेश के बाहर तेलगियों मध्य के विद्यालय चलती है तो ये शिक्षा और संस्कृति का अधिकार है यहां पर संरक्षित हो रहा है देख लेते हैं आंसर महिला सहकर्मियों को दंडित करना उनके सामान्य के अधिकार का उलझन करना है यह लिंग की आधार पर भेदभाव है यह अनुच्छेद 15 का उलझन करता है दूसरे का उत्तर देखते हैं इस घटना में

3:52 मौलिक अधिकार का उपभोग किया जा रहा है इसमें निर्देशक अपने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उपयोग कर रहा है उन्होंने फिल्म बनाई है सरकार की नेशन की आलोचना की है तो उन्होंने फिल्म के मध्य से अपनी भावनाओं अपने विचारों को अभिव्यक्त किया है इस घटना में भी मौलिक अधिकार का उपयोग किया जा रहा है अनुच्छेद 19 के तहत किसी उद्देश्य के लिए संगठित होने शांतिपूर्ण सम्मेलन करने रैली निकालना आदि का अधिकार हमें मिलता है इसमें शिक्षा एवं संस्कृति के अधिकार का उपयोग किया जा रहा है जो क्वेश्चन अपन ने पढ़ा था ना की आंध्र प्रदेश से बाहर और ये जो तेलुगू मध्य के विद्यालय चला रही है तो यहां शिक्षा और संस्कृति के अधिकार का उपयोग किया जा रहा है अगला क्वेश्चन लेते हैं निम्न में कौन

4:39 संस्कृत और शैक्षिक अधिकारों की सही व्याख्या है कथन को अपन को पढ़ना है और जानना है की शिक्षा और संस्कृति के जो अधिकार है उनकी सही व्याख्या कौन सा कथन कर रहा है पहले है शिक्षक संस्था खोलना वाले अल्पसंख्यक वर्ग की ही बच्चे इस संस्थान में पढ़ाई कर सकते हैं वर्ग के जो बच्चे हैं वही उसे संस्थान में पढ़ाई कर सकते हैं दूसरा सरकारी विद्यालयों को यह सुनिश्चित करना चाहिए की अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों को उनकी संस्कृति और धर्म विश्वासो से परिचित कराया जाए भाषण और धार्मिक अल्पसंख्यक अपने बच्चों के लिए विद्यालय खोल सकते हैं और उनके लिए इन विद्यालयों को आरक्षित कर सकते हैं मांग कर सकते हैं की उनके बच्चे उनके

5:26 द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थाओं के अतिरिक्त किस अन्य संस्थान में नहीं पढ़ेंगे उत्तर देख लेते हैं अपन इसका उत्तर होगा की भाषण और धार्मिक अल्पसंख्यक अपने बच्चों के लिए विद्यालय खोल सकते हैं और उनके लिए इन विद्यालयों को आरक्षित कर सकते हैं ये वाला कथन हमारे संविधान में दिए गए शिक्षा एवं संस्कृति के अधिकार की सही व्याख्या करता है हमारे संविधान द्वारा यह प्रावधान है की कोई भी वर्ग है कोई भी समुदाय है वो अपनी शिक्षा और संस्कृति के लिए संस्थान की सुरक्षा के लिए संस्थाओं की सामना कर सकता है संस्थान खोल सकता है उसमें अपने बच्चों को पढ़ा सकता है अगला क्वेश्चन लेते हैं इसमें इनमें कौन मौलिक अधिकारों का उलझन है और क्यों कथन अपने को दिए हुए हैं की इनमें

6:12 से कौन सा कथन है वो मलिक अधिकारों का उलझन कर रहा है तो देखिए न्यूनतम मजदूरी दे नहीं होना ये नितिन निर्देशक तत्वों के तहत आता है बाद में इसको कानून बनाया गया ऐसे कोई मूल अधिकार में न्यूनतम मजदूरी वाला प्रावधान हमारे किसी भी मूल अधिकार में नहीं है किसी पुस्तक पर प्रतिबंध लगाना तो यह वाला कथन है यह मौलिक अधिकार का उलझन है क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनान कर रहा है 9:00 बजे रात के बाद लाउड स्पीकर बजाने पर रॉक और भाषण तैयार करना ये दोनों ही मौलिक अधिकार के उलझन नहीं है यह जो है किसी पुस्तक पर प्रतिबंध लगाना यह हमारा जो स्वतंत्रता का अधिकार है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता उसे मूल अधिकार का उलझन कर रहा है अगला क्वेश्चन लेते हैं गरीबों के बीच कम कर

6:58 रहे एक कार्य पता का कहना है की गरीबों को मौलिक अधिकारों की जरूर नहीं है एक कार्यकर्ता है वह कार्य कर रहा है गरीबों की बीच में और उसमें एक है की जो गरीब लोग हैं उनको मौलिक अधिकारों की आवश्यकता नहीं है बस जो नितिन निर्देशक तत्व हैं उनको ठीक से लागू कर दीजिए तो क्या आप इस कथन से सहमत हैं इस कथन से सहमत नहीं हुआ जा सकता निसंदेह है उनकी जो दूसरी बात है वो बिल्कुल सही है की नितिन निर्देशक तत्वों को जी भावना के अनुरूप हमारे संविधान में शामिल किया गया था इस भावना के अनुरूप इस उद्देश्य के साथ अगर लागू कर दिया जाता है अगर उसके प्रावधानों को पूरा करने का प्रयास सरकारें करती हैं तो गरीबों की स्थिति में बेहद सुधार आएगा उनके जीवन स्टार में बेहद सुधार आएगा लेकिन मूल

7:46 अधिकारों की जगह नितिन निर्देशक तत्व नहीं ले सकते तो निसंदेह है उनकी लोक कल्याण के लिए गरीबों को उनकी वंचित वर्ग से ऊंचा उठाने के लिए उनको एक अच्छा जीवन जीने के लिए नितिन निर्देशक तत्वों का इस प्रकार से लागू होना आवश्यक है लेकिन उतने ही जरूरी उनके लिए मूल अधिकार भी हैं अगला क्वेश्चन देखते हैं अनेक रिपोर्ट से पता चला है की जो जातियां पहले झाड़ू देने के कम में लगी थी उन्हें अब भी मजबूरन यही कम करना पद रहा है जो लोग अधिकार पद पर बैठने हैं वे इन्हें कोई और कम नहीं देते इनके बच्चों को पढ़ाई लिखी करने पर हतोत्साहित किया जाता है इस उदाहरण में किस मौलिक अधिकार का उलझन हो रहा है इस उदाहरण में सामान्य के मूल अधिकार का उलझन

8:31 हो रहा है क्योंकि जाति के आधार पर उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है दूसरा अवसरों की सामान्य जो उनको मिलनी चाहिए ये भी उनको नहीं मिल रही है और ये दोनों ही एक ही अधिकार सामान्य से ही संबंधित है अगला क्वेश्चन लेते हैं अपनी याचिका में अदालत का ध्यान देश में मौजूद भुखमरी की स्थिति की तरफ खींच भारतीय खाद्य निगम के गोदाम में 5 करोड़ तन से ज्यादा पांच भारत हुआ था सोच से पता चला की अधिकांश राशन कार्डधारी यह नहीं जानते की उचित मूल्य की दुकानों से कितनी मंत्र में वो अनाज खरीद सकते हैं मानवाधिकार समूह ने अपनी याचिका में अदालत से निवेदन किया की वह सरकार को सार्वजनिक

9:16 वितरण प्रणाली में सुधार करने का आदेश इस मामले में कौन-कौन से अधिकार शामिल हैं ये अधिकार आपस में किस तरह से जुड़े हुए हैं क्या ये अधिकार जीवन की अधिकार का एक अंग है तो देखते हैं अपन उत्तर इस मामले में कानून के समक्ष अधिकार और भेदभाव की मनाही अनुच्छेद 15 दोनों ही अधिकार शामिल है ये कानून के समक्ष सामान्य और दूसरा भेदभाव नहीं होना चाहिए और ये दोनों ही अधिकार सामान्य के अधिकार से संबंधित है और ये जीवन की अधिकार का ही एक अंग है क्योंकि इतना सर भुखमरी की स्थिति है भूख से मा रहे हैं यानी की एक तरह से उनके जीवन की रक्षा नहीं हो रही है उनके जीवन का हनान हो रहा है भूख के करण जब सरकार के पास जो गोदाम है वह अनाजों से भरे पड़े हैं तो

10:03 निसंब है ये अधिकार जीवन के अधिकार के साथ जुड़े हुए हैं इस अध्याय में उद्धत सोमनाथ लहरी द्वारा संविधान सभा में दिए गए वक्तव्य को पढ़ें अपना जो ये अध्याय है पुस्तक के अंदर अगर आप देखेंगे तो सोमनाथ लहरी का एक उदाहरण आपको मिलेगा पुस्तक के अंदर तो क्या आप उसे कथन से सहमत हैं ये भी हां तो इसकी पुष्टि में कुछ उदाहरण दें और यदि नहीं तो अपने कथन के विरुद्ध तारक प्रस्तुत करें तो सबसे पहले अपन सोमनाथ लहरी जी के कथन को फटते हैं की क्या का रहे हैं वो देखिए वो का रहे हैं की मैं समझना हूं की इनमें से अनेक मौलिक अधिकारों को एक सिपाही के दृष्टिकोण से बनाया गया है आप देखेंगे की काफी कम अधिकार दिए गए हैं और प्रत्येक अधिकार के

10:48 बाद एक उपबंध जोड़ा गया है जो की उन पर उचित पूर्ण प्रतिबंध लगा रहा है लगभग प्रत्येक अनुच्छेद के बाद एक उपबंध है जो इन अधिकारों को पुरी तरह से वापस लेट है मौलिक अधिकारों की हमारी क्या अवधारणा हनी चाहिए हम उसे प्रत्येक अधिकार को संविधान में पन चाहते हैं जो हमारी जनता चाहती है यह बोला था संविधान सभा में श्री सोमनाथ लहरी जी ने अब हमें बताना है की हम इस कथन से सहमत हैं या हम इस कथन से ऐसे मत हैं तो देखिए इस कथन से हम कम ही सहमत हैं क्योंकि मूल अधिकारों के साथ जोड़ा गया मूल अधिकार आ जो उपबंध है वो मूल अधिकारों पर आ नियंत्रण जरूर लगता है लेकिन उनको समाप्त नहीं करता है और कुछ ऐसी

11:35 परिस्थितियों घटित हो जाति हैं ऐसी परिस्थितियों पैदा हो शक्ति है की उन परिस्थितियों में अगर मूल अधिकारों पर प्रतिबंध लगाया जाए तो वो ज्यादा अच्छा है नागरिकों के लिए और सरकार के लिए कई बार सरकार को शांति की स्थापना में या फिर जीवन की रक्षा में या फिर देश की रक्षा में मूल अधिकारों पर प्रतिबंध लगाना पड़ता है ये मूल अधिकारों पर प्रतिबंध का जो अप बैंड जोड़ा गया इस उपबंध का सरकार किस तरह से इस्तेमाल करती हैं इस पर निर्भर करता है मूल अधिकारों की ताकत की अगर सरकार अपबंधों को केवल जो उचित पूर्ण स्थितियां दी गई हैं इस भावना के साथ लगाएं की जब विशेष आवश्यकता हो विशेष जरूर हो तभी उनको बंदों को अनून प्रतिबंधों को लगाया जाए

12:21 तभी वो नियंत्रण किया जाए तो फिर बाद में ये उपबंध गलत नहीं है लेकिन अगर सरकार इनका दुरुपयोग करने ग जाए अगर सरकार अपनी भी जो स्वार्थ के करण ही मूल अधिकारों के हनान करने ग जाए तो बाद में ये उपबंध जो मूल अधिकार हैं वो एक तरह से अपनी जो शक्ति है प्रभाव है मेहता है वो होने लगता हैं तो देखते हैं अपन प्राप्त नहीं है क्योंकि कभी-कभी विशेष प्रस्तुतियां में इनको निलंबित करना पड़ता है मतलब हमारा संविधान हमें असीमित मूल अधिकार नहीं देता कुछ विशेष परिस्थितियों ऐसी होती हैं जहां मूल अधिकारों को निलंबित भी करना पड़ता है यह सरकार पर निर्भर करता है की वहीं अपबंधों का उपयोग जान कल्याण हेतु करती है अथवा दमन के लिए करती है जैसे की अभी अपन

13:07 ने बात किया था की यह पुरी तरह सरकार पर निर्भर करता है की हमारी सरकार है वो किस तरह की विचारधारा वाली है वह किस तरह के सिद्धांतों वाली है अगर वो इनका उपयोग जान कल्याण के लिए करती है तो इनको बंदों में कोई बुराई नहीं है लेकिन अगर सरकार दमन के लिए इनका प्रयोग करती है तो निसंदेह है सोमनाथ लहरी जी ठीक का रहे हैं आपके अनुसार कौन सा मौलिक अधिकार सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है इसके प्रावधानों को संक्षेप में लिखिए और तारक देकर बताएं की यह है क्यों महत्वपूर्ण है तो जैसे की अपन ने जब पिछले वीडियो में पढ़ा था तब भी अपन ने यह बात कर ली थी की जो संवैधानिक उपचारों का अधिकार है वो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण अधिकार है सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण अधिकार वह इसलिए है क्योंकि अगर संविधानिक उपचारों का अधिकार संविधान द्वारा

13:54 नागरिकों को नहीं दिया जाएगा तो बाकी अन्य अधिकारों का कोई मतलब नहीं र जाता बाकी अधिकारों की रक्षा करता है हमारा संवैधानिक उपचारों का अधिकार ये अधिकार है वो न्याय पालिका को इतनी शक्ति देता है इतनी ताकत देता है की हमारी न्याय पालिका है वह हमारे मूल अधिकारों की रक्षा कर पाती है और इसीलिए डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने इस अनुच्छेद को इस संवैधानिक उपचारों के अधिकार को संविधान का हृदय और आत्मा कहा है तो ये था अपना अध्याय दो भारतीय संविधान में अधिकार धन्यवाद

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