PM Modi's secret to managing anxiety revealed!

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संक्षिप्त सारांश

इस वीडियो में, नरेंद्र मोदी जी अपनी एंग्जाइटी (anxiety) और तनाव को प्रबंधित करने के अनुभवों को साझा करते हैं। वे बताते हैं कि कैसे उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपने इमोशंस (emotions) पर काबू पाया और अपने कर्तव्यों का पालन किया। वे अपने जीवन के कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख करते हैं, जैसे कि गुजरात चुनाव और गोधरा कांड, और बताते हैं कि उन्होंने कैसे जिम्मेदारी की भावना से काम लिया। इसके अतिरिक्त, वे अपने अप्रत्याशित राजनीतिक करियर और जीवन के प्रति अपने दृष्टिकोण पर भी प्रकाश डालते हैं।

  • एंग्जाइटी (anxiety) को प्रबंधित करने के लिए मिशन पर ध्यान केंद्रित करना।
  • चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में इमोशंस (emotions) पर नियंत्रण रखना।
  • अप्रत्याशित राजनीतिक करियर और जीवन के प्रति दृष्टिकोण।

परिचय: एंग्जाइटी (anxiety) और व्यक्तिगत अनुभव

नरेंद्र मोदी जी बताते हैं कि आजकल बच्चे एंग्जाइटी (anxiety) के बारे में बात कर रहे हैं और उन्हें भी एंग्जाइटी (anxiety) होती है। वे बताते हैं कि जब वे किसी के साथ बैठकर बात करते हैं तो उन्हें नर्वस (nervous) और एंस (anxious) महसूस होता है, और उन्हें डर लगता है कि वे कुछ गलत न बोल दें। वे स्वीकार करते हैं कि एंग्जाइटी (anxiety) एक कठिन विषय है, लेकिन हर किसी में इसे प्रबंधित करने की अपनी क्षमता और शैली होती है।

गुजरात चुनाव 2002: भावनाओं पर नियंत्रण

मोदी जी 2002 के गुजरात चुनाव का उदाहरण देते हैं, जो उनके जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा थी। चुनाव के नतीजों के दिन, उन्होंने टीवी नहीं देखा और 12 बजे तक किसी से कोई जानकारी नहीं ली। जब उन्हें दो-तिहाई बहुमत से आगे होने की खबर मिली, तो उन्होंने अपनी भावनाओं पर काबू रखा और अपने कर्तव्य पर ध्यान केंद्रित किया। इसी तरह, अहमदाबाद में बम धमाकों के दौरान, उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम और अस्पतालों का दौरा करने का फैसला किया, भले ही उनके सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। उन्होंने अपने मिशन के साथ खुद को व्यस्त रखकर अपनी बेचैनी को कम किया।

गोधरा कांड: जिम्मेदारी की भावना

मोदी जी 24 फरवरी 2002 को पहली बार एमएलए (MLA) बने और 27 फरवरी को पहली बार विधानसभा गए। उसी दौरान, गोधरा में ट्रेन में आग लगने की घटना हुई। वे तुरंत गोदरा जाना चाहते थे, लेकिन हेलीकॉप्टर उपलब्ध नहीं था। उन्होंने सिंगल इंजन हेलीकॉप्टर से जाने का फैसला किया और लिखित में जिम्मेदारी ली। गोधरा पहुंचकर, उन्होंने दर्दनाक दृश्य देखा, लेकिन उन्होंने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखा और अपने कर्तव्यों का पालन किया।

परीक्षा पर चर्चा और जीवन के प्रति दृष्टिकोण

मोदी जी बताते हैं कि वे परीक्षा पर चर्चा के दौरान छात्रों को यही समझाते हैं कि वे इसे अपनी रूटीन एक्टिविटी (routine activity) का हिस्सा मानें और स्पेशल (special) महसूस न करें। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे सबसे बुरे हालात के बारे में सोचते हैं, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी जीवन या मृत्यु के बारे में नहीं सोचा। वे बताते हैं कि वे कभी भी सीएम (CM) बनने के लिए नहीं निकले थे, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने दायित्वों को अच्छे ढंग से निभाने की कोशिश की है। उनका बैकग्राउंड ऐसा है कि उन्होंने कभी बड़े सपने नहीं देखे, इसलिए उन्हें किसी चीज के न होने का डर नहीं होता।

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Transcript

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0:01 आजकल बहुत सारे बच्चे यह कह रहे हैं कि उनको एंग्जाइटी होती है मुझे भी होती है एंजाइटी मेरे लाइफ में द वे इट प्रेजेंट इट सेल्फ जैसे मैं आपके साथ बैठ के बातें कर रहा हूं आई फील नर्वस आई फील एंस मुझे यह लगता है कि पता नहीं मैं क्या बोल दूंगा आपको कैसे लगेगा एंड आप इट्स टफ कन्वर्सेशन फॉर मी टू हैव बहुत सारे बच्चे एंजाइटी के बारे में बात कर रहे हैं यह आपकी जिंदगी में भी आता है और जब आपके बचपन में आता था आपने इसके साथ किया क्या आता तो होगा ऐसा तो नहीं है कि परमात्मा ने कुछ मेरे लिए दरवाजे बंद रखे

0:48 होंगे जो हर एक को देते है वो मुझे भी दिया होगा लेकिन हर एक की अपनी इन चीजों को मैनेज करने की अलग-अलग क्षमता हो और अलग अलग स्टाइल होती है य आप मुझे अगर मैं यह आपसे सीखना चाहूं तो हाउ हाउ डज वन डू इट एटली कोई थीसिस के रूप में कहना तो बड़ा कठिन है लेकिन मैं कैसे पद पर बैठा हूं कि मुझे मेरे इमोशंस को मेरी जो नेचुरल टेंडेंसी मनुष्य की होती है उन सबसे बाहर रहना होगा सबसे ऊपर रहना होगा अब जैसे

1:34 2000 दो गुजरात में चुनाव था मेरी जिंदगी का वह सबसे बड़ा कसोटी थी वैसे मैं मेरे जीवन में करीब करीब चुनाव जीतने का अवसर मुझे बहुत मिला है लड़ा तब भी और लड़ाया तब भी तो मेरे जीवन में ना टीवी देखा रिजल्ट आ रहे थे कुछ नहीं 111 बजे मेरे घर के नीचे सीएम बंगलो के बाहर ढोल की आवाज आने लगी और मैंने लोगों को कहा 12 बजे तक मुझे कुछ जानकारी मत

2:20 देना फिर हमारे ऑपरेटर ने चिटठी भेजी कि साब आप दो तिहाई बहुमत से आप आगे चल रहे हैं तो मैं नहीं मानता हूं कि कुछ मेरे भीतर कुछ नहीं हुआ होगा लेकिन उसको ओवर पावर करने वाला मेरे पास कोई थॉट था तो मेरे लिए वह रेसले सनेस क हो एंजाइटी कहो अलग हो गया उसी प्रकार से मेरे यहां पर पांच जगह पर बम लास्ट हुए आप कल्पना कर सकते हैं कैसी स्थिति

3:07 होगी एक मुख्यमंत्री के ना तो मुझे मैंने कहा मैं पुलिस कंट्रोल रूम में जाना चाहता हूं तो मेरे सिक्योरिटी वालों ने मना कर दिया साब अभी पता नहीं कहां क्या पड़ा होगा और आप कहां जा रहे हैं मैंने कहा जो भी होगा मैं जाऊंगा वोह बड़े परेशान थे ये आखिर कर क मैं मैं आकर के गाड़ी में बैठ गया तो चलती मैंने पहले अस्पताल जाऊंगा नहीं बोले साहब अस्पतालों में भी बम फुट रहे हैं मैंने कहा जो होगा होगा मैं जाऊंगा तो मेरे भीतर उसको आप कह सकते हैं

3:55 कि रेस्टस होगा एंटी होगी लेकिन मेरा तरीका यह था कि मैं अपने मिशन के साथ खप खप जाता था तो मैं उसको अलग रूप में अनुभव करता हूं शायद मुझे उस पर जिम्मेवारी का भाव आ जाता है मैं 24 फरवरी 2000 दो को जीवन में पहली बार एमएलए बना 24 फरवरी 2002 27 फरवरी पहली बार में असेंबली में गया जीवन में पहली बार विधानसभा ग्रह में

4:41 गया मेरी एमएलए की आयु तीन दिन थी और अचानक गोदरा में इतना बड़ा कांड की खबर आने लगी ट्रेन में आग लगी है धीरे धीरे खबर आई म तो मैं बहुत ही स्वाभाविक जो भी रेस्ट लेस क हो जो भी क्योंकि मैं चिंतित था मैं में था हाउस में मैं निकलते ही कहा मैंने कहा मैं गोदरा जाना चाहता हूं तो मैंने कहा यहां से बड़ौदा जाएंगे बड़ौदा से हम हेलीकॉप्टर लेंगे तो बोले हेलीकॉप्टर तो है नहीं मैंने कहा किसी का देखो तो ओ एनजीसी का साइज था तो सिंगल

5:26 इंजन था ने मना करया वीआईपी नहीं ले जा सकते मैंने कहा मैं वीआईपी नहीं हूं मैं कॉमन मैन हूं मैं जाऊंगा तो बड़ा झगड़ा हुआ हमारा मैंने कहा मैं लिखित देता हूं जो कुछ भी होगा मेरी जिम्मेवारी है मैं सिंगल इंजन हेलीकॉप्टर से जाऊंगा और मैं गोदरा पहुंचा अब वो दर्द नाक दृश्य इतने डेड बॉडी है सब कल्पना कर सकते मैं भी इंसान हूं मुझे भी सब कुछ हुआ जो होना था लेकिन मुझे मालूम था कि मेरे मैं कैसे पद पर बैठा हूं कि मुझे मेरे इमोशंस को मेरीय जो नेचुरल टेंडेंसी मनुष्य की होती है उन सबसे बाहर रहना होगा सबसे ऊपर

6:15 रहना होगा और जो भी कर सकता हूं करके मैंने कोशिश की अपने आपको संभालने की पर जैसे मैं परीक्षा पर चर्चा पर स्टूडेंट से बात करता हूं तो मैं उनको सारा उसका लेसन समझाता हूं कि भाई तुम दिमाग में से निकाल दो कि तुम कुछ करने जा रहे हो तुम्हारी रूटीन एक्टिविटी के हिस्सा बनने ऐसे जाओ तुम स्पेशल नए कपड़े पहनने की कोशिश मत करो उस दिल क्या आप ऐसे सोचते हैं कि वर्स्ट केस क्या होगा वर्स्ट केस मतलब सबसे बुरी चीज क्या हो सकती है क्या आप वैसे सोचते हैं जी नहीं मैंने कभी ना जीवन का सोच है ना मृत्यु का सोचा

7:01 है देखिए मैं हिसाब किताब करके जो चलते हैं ना जिंदगी में उनके लिए शायद होगा मैं इसलिए मैं शायद इसका जवाब नहीं दे पाऊंगा क्योंकि सचमुच में मैं कभी मैं आज जहां पहुंचा हूं वहां आने पहुंचने के लिए निकला ही नहीं था जी इसलिए मुझे पता ही नहीं है कुछ मैं जब सीएम बना तो मुझे आश्चर्य था मैं सीएम कैसे बन गया तो मेरे जीवन का यह राह नहीं था दायित्व आया है तो मैं निभा रहा उस अच्छे ढंग से करना य मेरा मकसद रहता है पर कोई इस काम के लिए चल पड़ा था ऐसा नहीं है इसलिए मुझे वह हिसाब किताब बैठता नहीं है

7:47 जी जो सामान्य जीवन में होता है मैं शायद इसमें अपवाद हूं क्योंकि क्योंकि मेरा बैकग्राउंड ऐसा है कि मैं ऐसा कभी सोच ही नहीं सकता हूं मैं मुझे मैंने किसी एक बार किसी ने पूछा था भा मेरा बैकग्राउंड ऐसा है कि मैं अगर कोई प्राइमरी स्कूल का टीचर बन जाता तो मेरी मां ने मोहल्ले में गुड़ बेचा होता गुड़ खिलाया होता सबको देखो मेरा बेटा टीचर हो गया तो मेरा वो बैकग्राउंड था तो इसलिए मैंने तो कभी ऐसे सपने देखे नहीं थे इसलिए मुझे कोई यह नहीं होगा तो क्या होगा यह नहीं होगा तो कैसा होगा ये सब कुछ चीजें दिमाग में बहुत ज्यादा आती नहीं है जी हम

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