संक्षिप्त सारांश
यह वीडियो भगवान श्री राम के सरयू नदी में जल समाधि लेने और उसके बाद भरत और शत्रुघ्न के भी समाधि लेने की कहानी बताता है। श्री राम अपनी अयोध्या को युगों तक तीर्थ स्थल बने रहने का आशीर्वाद देते हैं और सरयू नदी के जल में स्नान करने वालों को मुक्ति का मार्ग बताते हैं। भरत और शत्रुघ्न भी समाधि लेकर भगवान विष्णु के पास पहुँच जाते हैं।
- भगवान श्री राम का सरयू नदी में जल समाधि लेना।
- अयोध्या को तीर्थ स्थल का आशीर्वाद।
- भरत और शत्रुघ्न का भगवान विष्णु के पास पहुँचना।
प्रभु श्री राम की जल समाधि
प्रभु श्री राम सरयू नदी में समाधि लेने से पहले कहते हैं कि उनकी पावन अयोध्या युगों-युगों तक तीर्थ स्थल रहेगी। वे कहते हैं कि यह अंधकार में भटकती मानवता को हमेशा मार्ग दिखाएगी। इसके बाद, वे सरयू नदी को प्रणाम करते हैं और कहते हैं कि यदि उन्होंने सच्चे मन से भक्ति की है, तो उच्च विचारों और शुद्ध मन से जो कोई भी उनके जल में स्नान करेगा, उसे मुक्ति प्राप्त होगी। उनके स्पर्श मात्र से ही मन में धर्म बस जाएगा।
नारायण रूप में दर्शन
इतना कहकर भगवान श्री राम सरयू नदी में आगे बढ़ते हैं और जल समाधि ले लेते हैं। इसके पश्चात, वे अपने नारायण रूप में सभी को दर्शन देते हैं।
भरत और शत्रुघ्न की जल समाधि
फिर भगवान विष्णु भरत जी को सरयू नदी में समाधि लेने की आज्ञा देते हैं। भरत जी सरयू नदी में समाधि ले लेते हैं और शंख रूप में भगवान विष्णु के पास पहुँच जाते हैं। उसके बाद शत्रुघ्न जी जल समाधि लेते हैं, जिससे वे भगवान विष्णु जी के पास सुदर्शन चक्र के रूप में पहुँच जाते हैं। इस प्रकार भगवान श्री राम अपना युग पूर्ण करते हैं।

