रैकी एंड एनर्जी हीलिंग कोर्स - 1 डॉ. एन. के. शर्मा (2 मार्च 2026)

RCM World www.youtube.com

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो रेकी हीलिंग फाउंडेशन के माध्यम से आंतरिक शक्तियों को पहचानने और अंधविश्वासों से मुक्त होने पर केंद्रित है। इसमें रेकी, टेलीपैथी, इंट्यूशन, थर्ड आई, सबकॉन्शियस माइंड, एस्ट्रल ट्रैवलिंग, औरा, सेल्फ हीलिंग पावर और आत्म-साक्षात्कार जैसी क्षमताओं पर प्रकाश डाला गया है। वक्ता ब्रह्मांड के नियमों और डर से मुक्ति के महत्व पर जोर देते हैं, साथ ही स्वयं के गुरु को पहचानने और अपनी आंतरिक क्षमता को जागृत करने की प्रेरणा देते हैं।

  • आंतरिक शक्तियों की पहचान
  • अंधविश्वासों से मुक्ति
  • ब्रह्मांड के नियमों का ज्ञान
  • आत्म-साक्षात्कार की प्रेरणा

परिचय

इस सत्र में डॉ. एन. के. शर्मा के विचारों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो गुरुकुल के माध्यम से दुनिया भर में ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। वीडियो में भाग लेने वाले साथियों के बैकग्राउंड की जांच करने और स्पष्ट वीडियो क्वालिटी सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है।

आंतरिक शक्तियों का अनुभव

हम मन की शक्तियों, ब्रह्मांडीय ऊर्जा, और स्पर्श चिकित्सा जैसे शब्दों को सुनते हैं, लेकिन उन पर विश्वास नहीं कर पाते। अब समय आ गया है कि हम अपने भीतर की शक्तियों को महसूस करें और उनसे परिचित हों।

रेकी हीलिंग फाउंडेशन का परिचय

डॉ. शर्मा आरसीएम के साधकों को नमन करते हैं और बताते हैं कि रेकी हीलिंग फाउंडेशन पिछले 31 वर्षों से रेकी सिखाने के क्षेत्र में काम कर रहा है। उनका उद्देश्य लोगों को आत्मनिर्भर बनाना और घर बैठे स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करना है।

रेकी: आंतरिक क्षमता

रेकी हमारी अपनी आंतरिक क्षमता है। रेकी हीलिंग फाउंडेशन का मिशन लोगों को अंधविश्वास, पाखंड, भय और अज्ञानता से मुक्त करना है। यह संस्था आंतरिक क्षमताओं को जानने और ब्रह्मांड के नियमों को समझने में मदद करती है।

आंतरिक क्षमताओं की पहचान

अपनी क्षमताओं को जानकर हम स्वयं को ईश्वर तुल्य महसूस करेंगे। इस संसार में ब्रह्मांड के कुछ नियम काम करते हैं, जिन्हें जानना आवश्यक है। हर व्यक्ति परम स्वास्थ्य, समृद्धि और आनंद प्राप्त करना चाहता है, और इसके लिए कुछ निश्चित नियम हैं।

प्राकृतिक आहार का महत्व

हर व्यक्ति का अपना भोजन होता है, और जब तक मानव अपने प्राकृतिक आहार को नहीं अपनाता, तब तक वह स्वस्थ और सुखी नहीं हो सकता। पशु आहार से मुक्ति पाकर हम पर्यावरण की सुरक्षा में भी योगदान कर सकते हैं।

सफलता की ऊंचाइयों को छूना

हर व्यक्ति में सफलता की ऊंचाइयों को छूने की क्षमता होती है। हर बच्चा जीनियस है, लेकिन हम उस जीनियस और सफलता के नियमों को नहीं जान पाते।

आत्म जागरण की ओर

हर व्यक्ति में बुद्ध, महावीर, नानक और कबीर जैसे महान व्यक्तित्व छुपे हुए हैं। हमें सांसारिक चीजों में उलझने के बजाय अपने भीतर के बुद्ध को बाहर निकालना चाहिए।

असत्य से सत्य की ओर

हमें असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर और मृत्यु से अमृत की ओर चलना चाहिए। परमात्मा ने हमें तीन क्षमताएं दी हैं: फिजिकल, मानसिक और आध्यात्मिक। हमें अपनी अन्य सुपर ह्यूमन क्षमताओं को भी पहचानना चाहिए।

अतींद्रिय क्षमताएं

अतींद्रिय क्षमताएं, जिन्हें पैरासाइकोलॉजिकल पावर्स भी कहा जाता है, हर व्यक्ति में स्वाभाविक रूप से होती हैं। इसके लिए तपस्या या देवताओं को प्रसन्न करने की आवश्यकता नहीं है।

रेकी: प्राण ऊर्जा का प्रवाह

हर व्यक्ति के अंदर हाथों से प्राण ऊर्जा प्रवाहित करने की अद्भुत क्षमता होती है। रेकी का मतलब है ब्रह्मांडीय उपचारात्मक ऊर्जा, जो जीवनी शक्ति को प्रबल करती है।

टेलीपैथी: दूरस्थ उपचार

टेलीपैथी के माध्यम से हम दूर बैठे किसी भी व्यक्ति का उपचार कर सकते हैं। हमारी चेतना सूक्ष्म जगत में जाकर ऊर्जाओं में बदलाव ला सकती है।

इंट्यूशन: अंतर प्रेरणा की शक्ति

इंट्यूशन हमें नए आइडियाज और क्रिएटिविटी प्राप्त करने में मदद करता है। यह ब्रह्मांड में मौजूद ज्ञान को खींचने की क्षमता है।

थर्ड आई: छठी इंद्री

हर व्यक्ति में थर्ड आई होती है, जिसे पीनियल ग्लैंड भी कहते हैं। यह हमें आंखें बंद करके भी देखने और जानकारी प्राप्त करने की क्षमता देती है।

पावर ऑफ इंटेंशन: भाव शक्ति

हमारी भाव शक्ति हर चीज को गति देती है। हमारे विचार इतनी शक्तिशाली होते हैं कि वे एक सेकंड में कहीं भी यात्रा कर सकते हैं।

सबकॉन्शियस माइंड: अचेतन मन की शक्ति

हमारा अचेतन मन हमारे जीवन का संचालन करता है। अगर हम इसके गेम को समझ जाएं, तो हम इसकी चाबी अपने हाथ में ले सकते हैं और अपनी मर्जी से अपने विचारों और आदतों को नियंत्रित कर सकते हैं।

एस्ट्रल ट्रैवलिंग: समय यात्रा

एस्ट्रल ट्रैवलिंग के माध्यम से हम समय यात्रा कर सकते हैं, अपने पूर्व जन्म देख सकते हैं और भविष्य को जान सकते हैं।

औरा: आभा मंडल का विज्ञान

आभा मंडल के विज्ञान को जानकर हम अपने औरा को देख सकते हैं, महसूस कर सकते हैं, माप सकते हैं, साफ कर सकते हैं और प्रभावशाली बना सकते हैं।

सेल्फ हीलिंग पावर: स्वयं उपचार की शक्ति

हमारे शरीर में सेल्फ हीलिंग पावर होती है, जो हमारा सच्चा भगवान है। दुनिया की कोई भी दवा या पैथी इसके बिना काम नहीं कर सकती। हमें अपनी सेल्फ हीलिंग पावर पर भरोसा करना चाहिए।

बुद्ध बनने की क्षमता

हर व्यक्ति में बुद्ध बनने की क्षमता होती है। हमें अपने भीतर छुपे हुए ऋषि मुनि और बुद्ध को बाहर निकालना चाहिए। सच्चा गुरु हमें अपने पंख पहचानने और अपने आकाश को खोजने की प्रेरणा देता है।

ब्रह्मांड के नियम

इस संसार में दो नियम काम करते हैं: दृश्य और अदृश्य। हमें अदृश्य नियमों को जानना चाहिए, जो हमारे भाग्य और भविष्य को निर्धारित करते हैं।

ग्रहों का डर

ग्रहों का डर भारत में बहुत फैला हुआ है। ज्योतिष को आतंक का विज्ञान बना दिया गया है। हमें यह समझना चाहिए कि ग्रह हमारे जीवन को नियंत्रित नहीं करते, बल्कि तरंगे पैदा करते हैं, जिन पर हमारा शरीर प्रतिक्रिया करता है।

भगवान का डर

ईश्वर ने नियम बनाए और सो गया। वह कुछ भी नहीं करता। हमें नियमों से डरना चाहिए, भगवान से नहीं। धार्मिक बनो, संप्रदाय तो तुम्हारी पर्सनल चॉइस है।

रेकी: स्पर्श चिकित्सा

रेकी एक शक्तिशाली जीवनी शक्ति है, जो हमारे वेदों से निकली हुई स्पर्श चिकित्सा है। यह हमारे हाथों में सक्रिय हो जाती है और हमें नव जीवन देती है।

रेकी का महत्व

रेकी हमारे डे टू डे लाइफ में कोल्ड से लेकर कैंसर तक हर बीमारी में काम आती है। यह जीवनी शक्ति को प्रबल करती है और रिकवरी को तेज करती है। इमरजेंसी में रेकी जैसी चीज कोई नहीं मिलेगी।

समापन

डॉ. शर्मा के विचारों से लोगों के भ्रम और डर दूर हो रहे हैं। रेकी के माध्यम से हम सही दुनिया में आने का रास्ता पा सकते हैं।

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Transcript

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0:00 इस शानदार जो सेशन और अभी मैं आपको बताना चाहूंगा अभी मैं विजुअलाइज कर रहा था तो डॉक्टर सर का चेहरा सामने आ रहा उनके जितने भी विचार हमने उनके वीडियो में जो सुने वो साक्षात ऐसा लग रहा है मैं सामने बैठा हूं और सर मुझे इस विषय में जो बात कर रहे हैं एक पूरी दुनिया में ऐसे सानिध्य मिल रहा है हमें गुरुकुल के माध्यम से तो सभी साथी कल भी हमें एक डायरेक्शन मिला है। जो भी साथी वीडियो ऑन कर रहा है उसका पीछे का बैकग्राउंड चेक करना है उनको और वही साथी मतलब वो शामिल हो जो एकदम परफेक्ट जो गुरुकुल का जो हमारा पीछे का बैकग्राउंड है वीडियो एकदम क्लियर दिखे। तो मैं बिना

0:47 विलंब किए आप सबको साथ में लेते हुए जितने भी साथी YouTube पे जुड़े हैं उन सबका स्वागत है। तो आदरणीय सर प्लीज वेलकम जी सर स्वागत है। जी बहुत-बहुत धन्यवाद। चलिए आज हमारा बहुत ही सुंदर दिन आया है हमारे जीवन में। साथियों हम जीवन में बहुत सारे शब्द सुनते रहते हैं। जैसे मन की विराट शक्तियों के बारे में सुनते हैं। कभी ब्रह्मांड की एनर्जी के बारे में सुनते हैं। कभी स्पर्श चिकित्सा सुनते हैं। कभी ऐसे एक बहुत सारे शब्द सुनते तो है पर हमें वो यकीन नहीं हो पाता है। हमको लगता है ये तो केवल बातें हैं। पर अब हमारे जीवन में वो उदय आ गया है कि हम ऐसी बहुत सारी शक्तियों को जो अपने भीतर है उनको महसूस कर पाएंगे उनसे रूबरू हो

1:35 पाएंगे तो मैं बिल्कुल भी बीच में बाधा नहीं बनूंगा और मैं बहुत ही हृदय से डॉक्टर एन के शर्मा को आमंत्रित करता हूं कि हमें हमें अपने ज्ञान से अवगत कराएं। हमें अपनी शक्तियों से अवगत कराएं। बहुत-बहुत स्वागत है सर आपका। आरसीएम के सारे साधकों को मैं हृदय से नमन करता हूं क्योंकि आप सब और त्रिलोक जी को विशेष तौर पर कारण क्योंकि आप सब वास्तव में बहुत सौभाग्यशाली आत्माएं हैं के जिनको सुबह सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठाकर

2:20 योग के साथ जोड़कर ध्यान के साथ जोड़कर आपके जीवन में जो एक बहुत बड़ा सूक्ष्म लेवल पर एक रूपांतरण लेकर आ रहे हैं। यह सौभाग्यशाली लोगों को ही मिलता है और आप लोग यह समय चुनते भी हैं और आप ज्वाइन भी करते हैं। तो इस बात का यह प्रत्यक्ष प्रमाण है कि कहीं ना कहीं आपके भीतर एक बहुत बड़ी आग है। मतलब आप अपने स्वास्थ्य के प्रति थोड़े जागरूक हैं। आप अपने जीवन को कुछ बनाने के प्रति जागरूक है। तो दोस्तों रेकी हीलिंग फाउंडेशन में नई दिल्ली की ओर से मैं आप सबका स्वागत करता हूं। रेकी हीलिंग फाउंडेशन करीब करीब जो है इस 31 वर्षों से इस क्षेत्र में रेकी सिखाने

3:07 के लिए काम कर रही है। तो रेकी सिखाने के पीछे ऐसा नहीं कि जैसे होता है ना कि कई लोगों को लगता है कि भाई एक खास विद्या उनका उनकी चाहना होती है। उनकी उनको अच्छी लगती है। इसलिए वह दुनिया में उसको फैलाने के लिए उसको उसको मतलब जैसे उसको लोगों में थोपने की कोशिश करते हैं। तो मेरा यहां पर थोपना नहीं है दोस्तों मैं आप लोगों को बताना चाहूंगा कि मैंने 20 साल हॉस्पिटल नेचुरोपैथी का चलाया और मैं कैंसर के मरीजों पर काम करता रहा तो मैंने ये देखा कि लोग जो है बीमार पड़ पड़ के दोबारा वापस आते रहते हैं। जब तक उनके भीतर एक गहरी आग नहीं लगेगी वो तब तक वह लोग

3:54 अस्वस्थ नहीं होंगे। तो मेरे दिमाग में था कि क्या मैं हॉस्पिटल में बैठकर वेट करूं लोगों का या मैं लोगों को जगाना शुरू करूं। तो मेरे भीतर एक बहुत बड़ी प्रबल इच्छा थी कि लोग कैसे आत्मनिर्भर बने और घर में बैठे-बैठे लोग अपने आप को स्वस्थ रखें। क्योंकि जो घर में अपने आप को स्वस्थ रख सकता है ना वह दुनिया में कहीं भी स्वस्थ रख सकता है। आश्रमों में जाकर या किसी नेचुरोपैथिक सेंटर में जाकर महीना भर रहकर आप थोड़ी देर के लिए श्मशान घाट के वैराग की तरफ आप थोड़ा ठीक तो हो जाते हैं थोड़ी देर के लिए लेकिन वापस आप फिर वही दुनियादारी में उलझ जाते हैं। तो उसके बाद तो जैसे कहते हैं ना कि प्रकृति में जब आप एक अच्छी भावना के साथ काम करते हैं तो परमात्मा भी आपकी सुनता है। तो उसी

4:42 समय मेरे जीवन में रेकी का रेकी का जो है उद्गमन हुआ। दोस्तों रेकी जो है ये यूं समझ ले कि ये आपकी अपनी आंतरिक क्षमता है जिसकी मैं थोड़ी देर में चर्चा करूंगा और लेकिन रेकी हीलिंग फाउंडेशन का सिर्फ यह इतना ही मकसद नहीं है के सिर्फ लोगों को जो है एक शक्ति दे दी जाए या एक पावर दे दी जाए। पावर किसके हाथ में जा रही है? तलवार किसके हाथ में जा रही है? उसके हिसाब से वो जो चीज जो है काम करती है। ठीक है ना? मतलब पॉजिटिवली या नेगेटिवली। तो रेकी हीलिंग फाउंडेशन एक मिशन के अंतर्गत काम कर रही है के सबसे पहला मिशन तो यह है

5:27 के सदियों से हम बहुत सारे अंधविश्वास पाखंड भय अज्ञानता मिथ के अंदर सुपरस्टिश में उलझे हुए हैं और वो आज 21 सेंचुरी आने के बावजूद भी हम उससे मुक्त नहीं हो पा रहे हैं। तो पहला हमारा प्रयास यह है कि आखिर कब तक इन अंधविश्वासों को या इन पाखंडों को धोते हम धोते रहेंगे और इसका ऐसा नहीं इसका कारण क्या है कि कहीं ना कहीं एक सटीक वैज्ञानिक जानकारी नहीं है। इसके अभाव में बेचारे लोग भटकते रहते हैं। और दूसरी तरफ हमारे अंदर बहुत सारी आंतरिक क्षमताएं होती है। वो क्षमताओं के बारे में हमें कभी कोई स्कूल कॉलेज में पढ़ाया नहीं जाता और हम

6:12 इन क्षमताओं को अगर जान ले तो हम जीवन में कभी असहायपन महसूस नहीं करेंगे। हम अपने जीवन के भाग्य विधाता भविष्य विधाता बन जाएंगे। और सबसे बड़ी बात है हम भगवान से कभी मांगेंगे भी नहीं। क्योंकि भगवान से जब लोग कहते हैं कि ईश्वर कृपा कर दे तो ईश्वर ऊपर से कहता है कि भैया मैंने तो कृपा कर करा के भेज दी है। अब कृपा करनी है तो तू अपने आप पर कर। तो इसीलिए आज आपने आप लोग वास्तव में अपने आप पर कृपा कर रहे हैं। और आरसीएम इसमें आपके लिए बहुत बड़ा एक प्लेटफार्म आपको दे रहा है। यह बहुत बड़ा वास्तव में सौभाग्य है। और तो इन क्षमताओं को जानने के बाद आपको लगेगा कि मैं स्वयं ईश्वर तुल्य हूं। मैं असाधारण हूं। मैं सर्वशक्ति संपन्न हूं।

6:57 मैं जो चाहे समस्याओं को सुलझा सकता हूं। मैं इस संसार में रचनाकार हूं। ईश्वर की तरह। तो ये क्षमताएं आपको पहचान में आएगी। जैसे जैसे आप धीरेधीरे जुड़ते जाएंगे हमारे साथ। और तीसरी चीज जो है दोस्तों वो है कि इस संसार में कुछ ब्रह्मांड के नियम काम करते हैं। जैसे फिजिक्स केमिस्ट्री के नियम बड़े निश्चित है। अचूक है, अटल है। वैसे हमारे भी जीवन के निर्माण में भाग्य, भविष्य जो भी हमारा पुनर्जन्म जो भी होता है वो सब एक बड़े नियम के अंतर्गत घट रहा होता है। पर हमें वो नहीं मालूम तब फिर हमारे भीतर कई तरह की अज्ञानता और डर जो है हमारे साथ जुड़ जाते हैं। तो तो इसलिए ब्रह्मांड के नियम क्या है? मैं आज थोड़ी सी चर्चा करूंगा क्योंकि विषय थोड़े से

7:43 लंबे चौड़े हैं तो कोशिश करूंगा कि आपको किस हद कितना किस हद तक मैं इस दो चार दिन में आपको दे सकूं और चौथी चीज जो है दोस्तों वो यह है कि हर मानव अपना परम स्वास्थ्य परम समृद्धि परम आनंद को प्राप्त करें क्योंकि हर आदमी की खोज यही है बस तो परम स्वास्थ्य के कोई डेफिनेट लॉ तो होंगे परम समृद्धि के भी कोई डेफिनेट लॉ तो होंगे। कोई परम आनंद के भी कोई डेफिनेट लॉ तो होंगे। तो वो क्या नियम है? आज हम उस नियमों के बारे में भी थोड़ा जो है जानने का प्रयास करेंगे। और तीसरी तरफ और उसके बाद में जो पांचवे नंबर पर हर व्यक्ति इस देखिए इस संसार में परमात्मा ने हर व्यक्ति का अपना भोजन रचा

8:31 हुआ है। जब तक मानव अपने भोजन पर नहीं आएगा ना तब तक वो जो है कभी स्वस्थ या सुखी नहीं हो पाएगा। तो सबसे पहले तो आदमी अपना प्राकृतिक आहार अपनाए और उसके उसके अपनाने से एक तो पशु आहार से मुक्ति पाए जिससे क्योंकि पशु आहार से मुक्ति पाते ही यानी कि जो मांसाहार या दूध वगैरह जैसे हम लोग इस्तेमाल करते हैं तो उसके कारण धरती पर एक बहुत बड़ा पशुओं के ऊपर से भी अत्याचार हटेगा और साथ ही साथ पर्यावरण की भी सुरक्षा होगी। तो इसीलिए हमारा प्रयास यह है कि लोग विगेनिज्म की तरफ जाए यानी कि पशु आहार से मुक्ति पाए और प्राकृतिक आहार अपनाएं जिससे धरती जो है हमारी बहुत

9:19 एक अच्छे पर्यावरण के साथ जो है लोगों को जो है उसकी उपलब्धि हो और उसके बाद में एक और प्रयास है जो हालांकि सब आज ही आज के कोर्स में सब कुछ नहीं है लेकिन धीरेधीरे आप आगे बढ़ते जाएंगे हमारे साथ तो आपको महसूस होगा कि इस संसार में हर आदमी के अंदर किसी भी सफलता या अमीरी की ऊंचाइयों को छूने की क्षमता होती है। हर आदमी संसार में हर बच्चा जीनियस है। पर वो जीनियस और वो अमीरीपन वो सफलता हम उसके नियम नहीं जान पाते हैं तो कई बार हम उस ऊंचाई को छू नहीं पाते हैं। यानी कि एवरेस्ट पर चढ़ने की क्षमता हर एक में होती है। तो इसलिए तो वो क्षमता हम कैसे जाने पहचाने और अपने

10:05 जीवन की ऊंचाइयों को छुए और अंत में दोस्तों जो भी इस संसार में आया है यह भी एक पहचान करनी बड़ी जरूरी है कि हर आदमी में बुद्ध और एक महावीर एक नानक एक कबीर सब छुपे हुए हैं। लेकिन जनरली हम लोग सांसारिक चीजों में उलझ जाते हैं तो हमारी अपने भीतर छुपा हुआ ये बुद्ध हम बाहर निकाल नहीं पाते हैं। और वैसे भी दुनिया में आप आए हैं दोस्तों तो आज नहीं तो कल आपको जागना तो पड़ेगा क्योंकि नहीं जागोगे तो सवाल क्या होता है कि अंधा बनकर कब तक जिओगे इस तरह से तो इसीलिए हमारे इस कोर्स का एक और उद्देश्य अंतिम उद्देश्य यही है कि हर आदमी आत्म जागरण की तरफ जाए बुद्धत्व की तरफ जाए महावीर बने और

10:51 अपने मैं कौन हूं इसकी सेल्फ सेल्फ रियलाइजेशन करें मैंने एक शेर शेर लिखा है कि यू तो जन्म हजार लिए एक और जन्म लिया तो क्या जिस दिन जागा तभी जन्मा में अंधा बनकर जिया तो क्या तो दोस्तों ठीक है हम कई जन्मों से थोड़े से अंधा बनकर रह तो रहे हैं पर अब आपकी आंखें खुलने का समय भी आ गया क्योंकि आप आरसीएम में जुड़े हुए हैं तो आपकी थोड़ी तो आंखें खुल ही चुकी है वैसे भी और आपके साथ ध्यान करवाने वाले हमारे धनराज जी थे अभी तो इसका मतलब है देखिए आनापान सती के साथ जुड़ रहे हैं। स्वास के साथ जुड़ रहे हैं। स्वास के साथ जुड़ने का मतलब है परमात्मा के साथ जुड़ना। क्योंकि स्वास वर्तमान है हमारी। तो आप ऑलरेडी उस पथ पर आ चुके हैं। लेकिन जैसे कहते थोड़ा और धक्का दे देता

11:38 हूं आपको इस दुनिया में और गहराई से प्रवेश करने के लिए। अच्छा अब यहां पर मैं बताना चाहूंगा कि हमारे ऋषि मुनियों ने बहुत पहले उद्घोषणा की थी कि असतो मा सद्गमया कि हम असत्य से सत्य की ओर चले। तमसो मा ज्योतिर गमय हम अंधकार से प्रकाश की ओर चले और हम मृत्यु से अमृत की ओर चल तो मेरे इस कोर्स में इस क्लास में आपको ये बार-बार महसूस होगा कि मैं आपको इन सारे वास्तव में तीनों जो उद्घोषणा है मैं आपको उनके साथ ही जोड़ने का प्रयास कर रहा हूं। यू समझ ले। ठीक है ना? तो अब यहां पर हमें समझना क्या है कि इस संसार में परमात्मा ने हमें जो पैदा किया है तो हम पूरे जीवन भर केवल तीन क्षमताओं के बारे

12:26 में हम जान पाते हैं। तीन क्षमताएं एक तो है फिजिकल क्षमता एक है मानसिक क्षमता और एक ज्यादा से ज्यादा आध्यात्मिक क्षमता। इससे ज्यादा मानव मरते दम तक है ना अपनी किसी भी क्षमता को पहचान मतलब अन्य जो क्षमताएं हैं जो इससे भी सुपर पावर है जो सुपर ह्यूमन पावर्स है हम वो कभी जान ही नहीं पाते हैं और जनरली एक जमाने में इन सारे जो सुपर हिडन जो सुपर ह्यूमन पावर है जिसको मैं अत््द्रिय क्षमताएं कहता हूं जिसको मैं पैरासाइकोलॉजिकल पावर्स कहता हूं जिसको मैं पराद या या उसको सूक्ष्म शक्तियां भी कह सकता हूं तो ये जो अती्द्र जो क्षमताएं है ना दोस्तों जिस तरह पांच इंद्रियां हमारी नॉर्मल सेंसेस

13:11 काम करती है ना वैसे हमारे अंदर अती्द्र क्षमताएं हैं। हमारे अंदर परमात्मा ने इतनी कूट कूट के ऐसीसी शक्तियां भरी है कि सदियों से है ना भारत के अंदर स्पेशली बता रहा हूं। इन सारी क्षमताओं को सिद्धियां कहकर ये कुछ ही लोग तपस्या करने वालों को हासिल होती है। हम जैसे सामान्य लोग इसको छू भी नहीं सकते। बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। यह भ्रम हमें सदियों से बांट दिया गया। तो दोस्तों यहां पर मैं कहना चाहूंगा कि हर आदमी के अंदर जिस तरह पांच इंद्रियां उसको दी गई है वैसे अ्द क्षमताएं भी नेचुरल दी गई है। इसके लिए ना सिद्धिया प्राप्त करनी है ना देवता प्रसन्न करने है ना कोई हिमालय जाना है और ना कोई कोई बहुत बड़ी कठिन घोर तपस्याएं जंगल में जाना है कहीं

13:57 पर यू समझते है ना किसी गुरु के पीछे भागना है हा इसमें कोई शक नहीं है की एक बार तो माता पिता की तरह गुरु का सहारा लेना पड़ता है लेकिन बाद में फिर खुद के पंख पहचान के आकाश में उड़ना भी पड़ता है तो चलिए तो क्या है वो हमारी क्षमताएं जिसके जिससे हम अनजान है वो सबसे पहली क्षमता है हमारी रेकी दोस्तों दोस्तों हर आदमी के अंदर परमात्मा ने हाथों से प्राण ऊर्जा प्रवाहित करने की इतनी अद्भुत क्षमता भरी है कि जो 24 * 7 आपके हाथों में हर वक्त जो है प्रवाहित होती प्रवाह होने को तैयार है मतलब लेकिन क्योंकि हमें पता नहीं है तो हम इस ऊर्जा को सक्रिय भी नहीं कर पाते और हम इसका उपयोग भी नहीं कर पाते हैं। तो आज मैं यह प्रथम जो सबसे पहली क्षमता है मैं आज इसके ऊपर आज जो है

14:44 मैं आपको इसके बारे में जानकारी दूंगा। हम तीन चार दिन हम साथ में जुड़े हुए हैं। तो जब तक आपको अच्छे से मतलब जितना ज्यादा मैं दे सकूं तब तक आपको साथ में जोड़ के रखूंगा। तो हम रेकी के बारे में काम करेंगे। और दूसरी जो क्षमता है दोस्तों वो ये कि रेकी रे का मतलब है यूनिवर्सल की का मतलब है ना यानी कि एक ब्रह्मांडीय उपचारात्मक ऊर्जा। ठीक है ना? जो जीवनी शक्ति प्रबल करती है हमारी और यही क्षमता दोस्तों हर आदमी के अंदर टेलीपैथी टेलीपैथी का मतलब है हर आदमी इसी रेकी को रेकी उपचार की ऊर्जा को ब्रह्मांड में कहीं भी एक सेकंड में ट्रांसफर कर सकता है यानी कि आप दूर बैठे बैठे आप किसी भी व्यक्ति का उपचार कर सकते हैं उतना ही प्रभावशाली ढंग से जितना आप वर्तमान में

15:31 किसी का उपचार कर पा रहे हैं। तो आप समझ सकते हैं कि कितनी अद्भुत क्षमता परमात्मा ने दी है। आपको पहली बार अनुभव में आएगा जीवन में के एवरीवेयर वी आर एंड एवरीथिंग इज हियर। यानी कि ब्रह्मांड में हमारी जो सूक्ष्म जो तरंगे होती है विचारों की भावनाओं की उपचार की वो एक सेकंड में कहीं पर भी ट्रेवल करके बिय्ड टाइम एंड स्पेस वो कहीं किसी को व्यक्ति को जाकर जबरदस्त उसको उसको उपचार उपचार का प्रभाव देती है। उसके मन में परिवर्तन लाती है और अगर कोई गलत परिस्थितियां निर्मित हो रही होती है तो उसमें एक सकारात्मक ऊर्जा क्रिएट करके उसमें बदलाव भी लेकर आ सकते हैं। यानी कि आपकी चेतना किसी भी सूक्ष्म जगत में जाकर कहीं पर भी एक सेकंड में वहां पर उन

16:18 ऊर्जाओं में बदलाव ला सकता है। तो ये टेलीपैथिक क्वालिटी सिर्फ ह्यूमन बीइंग में है ऐसा भी नहीं है। जानवरों में भी होती है। पेड़ पौधों में भी होती है। मतलब वाइब क्योंकि एवरीथिंग इज फ्रीक्वेंसी एवरीथिंग इस वाइब्रेशन। इसीलिए हम अपने भावनाओं से उन टेलीपैथिकली हम कहीं पर भी कुछ भी भेज सकते हैं। तो यह भी क्षमता का धीरे-धीरे आप जैसे जैसे मेरे साथ जुड़ते जाओगे आपका इंटरेस्ट होगा तो मैं ये सब विद्याएं आपको सिखाऊंगा और इसके बाद में तीसरा जो है दोस्तों वो है हमारे अंदर इंट्यूसिव पावर। अंतर प्रेरणा की जो क्षमता है ना दोस्तों वो कभी भी हम रेंडमली यूज करते हैं। अचानक यूज करते हैं। पूरा ब्रह्मांड जो है ना यूनिवर्सल विडम

17:04 यानी कि आज तक जितने ऋषि मुनि हुए जितने ज्ञानी अज्ञानी हुए जिन्होंने जो भी विचार भाव पैदा किए वो सारा का सारा ब्रह्मांड में मौजूद है। जैसे आज एआई हर चीज का आपको जवाब देने के लिए तैयार रहता है ना तो आप जैसे ही आप कोई चीज के बारे में सोचते हो और आपकी चेतना एक सर्टन रिलैक्स स्टेट ऑफ माइंड में जब ब्रह्मांड के साथ जुड़ती है तो आपको आपके किसी भी क्षेत्र में अगर आप काम कर रहे हो आप वैज्ञानिक हो आप संगीतकार हो आप चित्रकार हो आप लेखक हो कवि हो तो आप जानते हैं कि हमें नई क्रिएटिविटी नए इनोवेशन नए आइडियाज की जरूरत होती है तो वो सारे के सारे ब्रह्मांड में मौजूद है पर आपको वो कल पहली बात तो आपको पता होना चाहिए कि मेरे घर में लाइब्रेरी भी है यानी कि यूनिवर्सल

17:50 लाइब्रेरी है जहां से मैं जो जो भी मुझे नॉलेज की जरूरत है मैं वहां से खींच सकता हूं मैं ले सकता हूं और इंट्यूटिव पावर हर आदमी के अंदर हर एक जानवर की तरह मतलब जानवर में भी होती है जिससे होने वाली घटनाओं का पूर्वाभास होना अपने आसपास की तरंगों को पकड़ लेना तो ऐसे बहुत सारी इंट्यूशन बड़ा लंबा चौड़ा विज्ञान है उसके अंदर आपने आपने कभी देखा होगा कि लोग नारियल हाथ में लेकर पानी खोद लेते हैं। कॉपर ऑल लेकर पानी खोद लेते हैं। उनकी बॉडी अपने आप में एनर्जी का इतना बड़ा सोर्स है। यानी कि हम अपने आप में एक रेडियो है। एक टीवी है जो कई तरह की फ्रीक्वेंसी पकड़ने को तैयार है। न्यूज़ समझ में है। तो इसका भी लाभ हम धीरेधीरे हम अगर जानेंगे तो उठा पाएंगे। और इसी तरह दोस्तों हर आदमी में एक थर्ड आई होती है।

18:38 थर्ड आई शंकर भगवान की नहीं होती। ध्यान रखना शंकर तो संपूर्ण ब्रह्मांड को शिव कहते हैं हम। लेकिन वो सिंबॉलिक है जरूर है पिक्चर लेकिन वास्तव में यह ह्यूमन बीइंग की होती है। हर आदमी बचपन से पीनियल ग्लैंड जो कहते हैं वो लेकर पैदा होता है जिसको सिक्स सेंस कहते हैं। आप आपने कभी देखा होगा टीवी के ऊपर हमारे भी बहुत सारे प्रोग्राम आए हुए हैं कि जिसमें बच्चे आंख पर पट्टी बांध लेते हैं और उसके बाद में वो किताबें पढ़ लेना, आपके शरीर में घुसकर बीमारियां पहचान लेना, आपकी जेब में पैसे कितने रखे पहचान लेना, आपके विचार को पढ़ लेना। ऐसे बहुत सारे काम अब तो तो ये सारे हमने 20,000 बच्चों को हम लोगों ने ट्रेन करके जो कि सात सात साल से 15 साल के बीच के थे। हमने सब प्रयोग करके हमने ऑलरेडी मतलब देख लिया हमने और अब तो

19:24 शुक्र करो के कुछ संत महात्मा जागे हैं जो पहले जागे नहीं थे। तो जैसे रामदेव जी के यहां पतंजलि में भी इसका इंट्रोड्यूस किया गया तो वहां पर भी इसका प्रयोग चल रहा है। वहां पर बच्चों को स्पेशली सिखाया जा रहा है। रवि शंकर जी जो है आर्ट ऑफ लिविंग उनके यहां पर भी अब जो इंट्यूटिव क्लासेस चलती है। तो मतलब अब ये बच्चों के इस प्रकार के विकास का जो है अब काम जो है शुरू हो चुका है। और इसी इंट्यूशन के अंदर वो टेलीकाइनेस साइकोनेस भी सिखाते हैं। यानी कि किसी चीज को गति दे देना अपने विचारों से विचारों के शक्ति से या किसी को चम्मच को बैंड करना ये सब मतलब या आंखें बंद करके कुछ पढ़ लेना ये सब आजकल कॉमन अब चलने लगा है तो इसका मतलब है कि भगवान ने कितनी अद्भुत क्षमता दी है कि नॉर्मल आंखों से हम कम देख पाते लिमिटेड

20:11 लेकिन अंदर की आंखें जब बंद हो जाती है तो आप फिर पूरा ब्रह्मांड आपके सामने समझ लो क्यों अब आपकी चेतना जो है अब आंखें पूरी बंद हो गई तो देन द होल यूनिवर्स इस बिफोर यू तो यू कैन ट्राई यू कैन सी एनीथिंग यू कैन ट्रेवल एनीवेयर। इतनी अद्भुत क्षमता आ जाती है। तो ये भी क्षमता नेचुरल है भाई। और इसको भी प्राप्त करने के लिए कुछ करना नहीं पड़ता। बस थोड़े से मेंटल एक्सरसाइज होती है वो बच्चों की पीनियल ग्लैंड जो कि सोई हुई रहती है तो थोड़ा जगाना पड़ता है बस। तो आज भी रेकी भी आपके हाथों में है। बस मुझे जगाने के लिए थोड़ी क्रियाएं करवानी पड़ेगी बस और हाथों में जाग जाएगी। इस तरह की बात है और इसी तरह दोस्तों हर आदमी के अंदर जो है ना पावर ऑफ इंटेंशन होता है। पावर ऑफ इंटेंशन का मतलब है आपकी भाव शक्ति मतलब ऑल द एनर्जी इज ड्राइवन।

20:58 ऑल द एनर्जी आर ड्राइवन बाय पावर ऑफ इंटेंशन यानी कि भाव शक्ति हर चीज को गति देती है। तो आजकल आपने देखा कंप्यूटर मोबाइल सब आपके आवाज से और आपके थॉट से चल पड़ते हैं और आने वाला समय जो मैंने देखा 100 साल के बाद पूर्व जन्म में ले जाकर उसमें मैंने देखा कि लोग जो है विचारों से ही सब कुछ चल रहा है सब कुछ। तो हमारे थॉट में इतनी शक्ति होती है। तो हम एक हमारा जो एडवांस एक रेकी लेवल कोर्स होता है उसके अंदर हम एक प्रयोग बताते हैं कि आपका थॉट इंटेंशन कितना स्ट्रांगली फ्लो करता है और ट्रेवल कर सकता है। तो देखिए हम एक आदमी को अमेरिका में खड़ा करते हैं और एक आदमी को मुंबई में खड़ा करते हैं। अमेरिका में जो आदमी खड़ा है उसको हम कहते हैं भैया तू ढीला खड़ा होना

21:43 और अपने आप को इतना ढीला रखना कि अगर कोई पुश आवे तो तू गिर जाना मतलब रोकना मत कंट्रोल मत करना अपने आप को और मुंबई में खड़े हुए व्यक्ति को कहते हैं कि तू उसके ऊपर एक विचार फेंक प्रोजेक्ट कर कि तू गिर जा आप हैरान हो जाएंगे वो जैसे ही वो विचार करता है ना कि तू गिर जा वो उसका जो विचार जाकर उसके आरा को उसके आभा मंडल को इतना जबरदस्त पुश करता है कि सचमुच वो आदमी वहां पर गिर रहा होता है तो आप जरा सोचिए कि एक सेकंड में आपका थॉट कितना दूर ट्रेवल कर जाता है और वैसे भी आप जानते हैं ये तो क्वांटम फिजिक्स का नियम है के थॉट ट्रेवल्स फास्ट देन द लाइट स्पीड ये नियम है उसका क्वांटम फिजिक्स का तो इसीलिए तो आपके विचारों में इतनी बड़ी क्षमता है कि एक सेकंड में कहीं भी जाता है एक आदमी कॉपर र ले खड़ा होता है दूर

22:31 कहीं किसी शहर में हम दूसरे शहर से कहते हैं इसको खोलो तो वो धीरेधीरे कॉपर र खोलने लग जाती है यानी कि सचमुच हमारे भावनाओं से हम किसी भी लिविंग नॉन लिविंग को हम प्रभावित कर सकते हैं। यह क्षमता आपके अंदर है। और इसके बाद दोस्तों हमारे अंदर एक क्षमता है। देखिए क्षमता तो बहुत सारी है। मैं तो कहता हूं ना 50 हाथ है आपके। जैसे दुर्गा विष्णु के हाथ होते हैं ना वैसे आपके भी हाथ है। पर हमें पता ही नहीं है। हम इतने असहाय होकर दुनिया में जी रहे हैं। बाबाओं के पीछे भाग रहे हैं। ज्योतिष के पीछे भाग रहे हैं। मतलब तन तांत्रिकों के पीछे भाग रहे हैं। परेशान होकर जो है गंडे ताबीज बांधे जा रहे हैं। अंगूठियां पहने जा रहे हैं। तरह तरह की दोस्तों इतना कमजोर ईश्वर ने नहीं बनाया। ध्यान रखना आपको। तो आपके अंदर एक और क्षमता है ना। देखिए मैं बहुत मैं तो

23:17 जितनी क्षमता है बोलता चला जाऊं। कोई अंत नहीं है। पर मैं थोड़ी बहुत बता देना चाहता हूं। द पावर ऑफ सबकॉन्शियस माइंड। दोस्तों, आपका अचेतन मन इतना कमाल का जादूगर है आपका कि आपके पूरे जीवन का संचालन गवर्नर यही माइंड करता है। आज अगर आप सफल है तो इसके कारण, असफल है तो इसके कारण, अमीर है तो इसके कारण, गरीब है तो इसके कारण, आप बड़े-बड़े मतलब आप दुनिया में असंभव काम कर जाते तो इसके कारण, नहीं कर पाते तो इसके कारण। यानी कि आपका यह बिलीफ सिस्टम, आपकी आदत, आपकी पर्सनालिटी सब कुछ सबकशस के हाथ में है। तो दोस्तों, यह जो सबकशस है ना ये आपका अपना कंप्यूटर है। यानी कि ये आपका यंत्र है जो भगवान ने आपको दिया है। पर मजेदार बात यह है या या समझो कि दुखद बात

24:04 यह है कि ये आपको संचालन कर रहा है। आप इसके गुलाम बने हुए हो। आज आपका विचार भी आपके कंट्रोल में नहीं है। आप जरा सोचो। आपकी आदत आपके कंट्रोल में नहीं है। तो अगर सबकॉन्शियस माइंड के गेम को अगर हम समझ जाए कि हाउ डस इट वर्क्स? ये कैसे काम करता है? तो फिर इसकी चाबी हमारे हाथ में आ जाती है। फिर हमारी मर्जी से हमारा विचार चलेगा। हमारी मर्जी से हमारी आदतें बनेगी। और हमारी मर्जी से हम इसकी प्रोग्रामिंग कर सकेंगे। हमारे सारे बिलीफ को चेंज कर सकते हैं। तो दोस्तों ये साइंस जब मैंने भी समझा तो उस चीज का मैंने भी उपयोग किया और आज मैं यू कह सकता हूं कि मेरे विचार मेरी मर्जी के बिना मेरे अंदर नहीं आ सकते। क्यों? क्योंकि मैं उसकी

24:50 चाबी समझ गया। उसकी पकड़ मेरे हाथ में आ गई। तो वही पकड़ मैं तुम्हें भी देना चाहता हूं। और और ये कोई मुश्किल काम नहीं है। बस थोड़ा थोड़ा सा इंटरेस्ट लेने की बात है। बस और इसके बाद दोस्तों हर आदमी के अंदर जो है एस्टल ट्रेवलिंग की ताकत होती है। यानी कि एवरी पर्सन इन रिलैक्स स्टेट ऑफ माइंड ही कैन ट्रेवल एस्टली टाइम ट्रेवल कर सकता है। पास्ट प्रेजेंट फ्यूचर में कहीं भी जा सकता है। यानी कि टाइम स्पेस के बियों्ड तो अपने कई पूर्व जन्म देख सकता है। भविष्य को देख सकता है। और किसी के भी जीवन में भी जा सकता है। कई आत्माओं से मुलाकात भी कर सकता है। उनसे बातचीत भी कर सकता है। क्योंकि वो सूक्ष्म स्तर पर सब मौजूद है। तो आपकी चेतना एक रिलैक्स स्टेट ऑफ़ माइंड में कहीं पर भी ट्रेवल कर

25:35 सकती है। मैं तो पूर्व जन्म पे करीब-करीब 30 साल से काम कर रहा हूं और अभी तक 46,000 लोगों को ले जा चुका हूं और ये सब अनुभव मैंने हजारों लोगों को करवा भी दिया है मैंने इसके अंदर। तो कहने का मतलब है कि ये ये क्षमता है आपकी इसलिए मैं ये करवाने का प्रयास भी करता हूं ताकि लोगों को अनुभव में आवे और इसके बाद में हमारे अंदर है पावर पौरा। आज सॉरी अब हमारे दो चार दिन हम साथ में जुड़े हुए हैं। तो पौरा पौरा जो है आभा मंडल का संपूर्ण विज्ञान मैं आपको जो है आपको सिखाने वाला हूं कि हम आभा मंडल को कैसे देखें। हम उसको कैसे नंगी आंखों से देखें। हम कैसे उसको फील करें। हम कैसे उसको मेजरमेंट करें। कैसे हम उसको क्लीन करें और कैसे

26:22 उसको एक्सपेंड करें, प्रोटेक्शन करें और कैसे उसको प्रभावशाली बनाएं। हमारी मैग्नेटिज्म इतनी स्ट्रांग बनाएं कि हम जिसको जाकर मिले हम जिसके साथ बैठे उसको उसके उसको वो हमसे प्रभावित हो इस तरह से तो दोस्तों इस तरह से हमारे आभा मंडल के विज्ञान को भी हम लोग जो है इस क्लास में हम जानने का प्रयास करेंगे और फिर हमारे अंदर आप तो अभी चूंकि ऑलरेडी योगा के साथ जुड़े हुए हैं तो चक्रों के बारे में आप सबको जानकारी है तो चक्रों के ऊपर भी हम लोग जो है रेकी जो सीखेंगे हम उसके ऊपर भी काम करेंगे और इसके अलावा दोस्तों हमारे अंदर अह एक और जो पावर होती है वो होती है कि अफमेशन विजुलाइजेशन की। आदमी अपने सबकॉन्शस को अफमेशन विजुअलाइजेशन के माध्यम से कुछ भी परिवर्तन ले आ सकता है

27:10 और चेंज कर सकता है। अब यहां पर मैं दो पावर की चर्चा करना चाहूंगा जो बहुत महत्वपूर्ण है। देखिए दोस्तों सबसे पहली जो एक और अद्भुत पावर जो हम हमारे अंदर है जिसके ऊपर हमारा विश्वास थोड़ा कमजोर है और वो हमारी पावर है सेल्फ फीलिंग पावर। दोस्तों हमारे बॉडी में हमारा सच्चा भगवान जो कहते हैं ना अगर कोई कहे कि मुझे भगवान को देखना है मुझे भगवान को अनुभव करना है तो मैं कहता हूं तुम्हारे अंदर वो 24 घंटे बैठकर तुम्हारी केयर कर रहा है सेल्फ हीलिंग पावर दोस्तों इस दुनिया में सेल्फ हीलिंग पावर के अलावा कोई दुनिया की ताकत कोई दुनिया की दवा कोई दुनिया की पैती आपका भला नहीं कर सकती आपको लाभ नहीं दे सकती हमारा भरोसा कैसा है मालूम है कि जब

27:55 हम बीमार पड़ते हैं तो हम डॉक्टर के पास जाते हैं। हम दवा लेने का प्रयास करते हैं। तो आपको समझना क्या मालूम है कि आज अगर एक आदमी आईसीयू में भी जाता है ना, वेंटिलेटर भी जाता है ना तो हम समझते हैं कि वेंटिलेटर दिया इसलिए ये ठीक हुआ। आईसीयू में डॉक्टर ने कुछ इसके साथ ट्रीटमेंट किया इसलिए ये ठीक हुआ। ये बहुत बड़ा भ्रम है बता रहा हूं मैं आपको। दोस्तों डॉक्टर के पास जब हम जाते हैं ना तो आप क्योंकि एक रेस्टिंग पीरियड में होते हैं और रेस्ट के अंदर बॉडी अपना काम स्वयं कर रही होती है। अच्छा अगर एक डॉक्टर अब ज्यादा से ज्यादा क्या देगा भाई आपको आईसीयू में रखेगा तो ऑक्सीजन बाहर से देगा या नहीं तो अंदर से कोई इंजेक्शन वगैरह देगा दवाई देगा तो उस दवाओं को रिएक्शन करता कौन है? हमारी जीवनी शक्ति हमारी सेल्फ हीलिंग पावर। अगर दोस्तों

28:41 तुम्हारी सेल्फ हीलिंग पावर प्रतिक्रिया करने की क्षमता में ही नहीं है वो तो फिर तुम्हारे हजारों ऐसे ट्रीटमेंट रहने दो ना वो तो कोई काम आने वाली भी नहीं है। तो जितनी दुनिया में पेथिया है ना वो एलोपैथी हो के आयुर्वेदिक हो के होम्योपैथी हो के यूनानी हो ये सब के सब पेथिया सेल्फ हीलिंग पावर के प्लेटफार्म पर नाच रही है। इस और अगर मैं यह प्लेट सेल्फ हीलिंग पावर अगर बॉडी में से निकाल दूं तो दोस्तों एक भी दुनिया की ट्रीटमेंट इवन गरम ठंडा पानी नेचुरोपैथी का भी काम नहीं करेगा। क्यों? गर्म पानी को रिएक्शन करने के लिए हमारे अंदर प्रतिक्रिया करने की क्षमता तो होनी चाहिए ना। तो शरीर में क्षमता ही नहीं है तो शरीर मुर्दा है। समझ लो फिर। तो दोस्तों हमारा लेकिन हमारा प्रॉब्लम कहां है मालूम है? हमें सेल्फ हीलिंग पावर पर

29:28 जरा भी भरोसा नहीं है। आप जरा सोचो जिस छोटे से वीर्य कण से आप छ फीट के आदमी बन गए। आपको आपको पता नहीं चला कि आप कब बड़े हो गए और वो क्षमता जो आपको इकोनमिकली सर्वाइव कर रही है। आपको कम से कम ऑक्सीजन कम से कम प्रोटीन कम से कम फैट कम से कम मिनरल्स विटामिनस कम देने के बावजूद भी आपको जीवित रख रही है। आपको इतने अत्याचारों के बावजूद आपके पीएच आपके एसिड अल्कलाइन बैलेंस को इतना नॉर्मल रख रही है। और आपको इतने आसपास के नेगेटिव वातावरण रेडिएशन से भी बचाकर आपको किसी हालत में आपको सर्वाइव कर रही है और और आप ना भी चाहो कि ना चाहो आपके बाल बनेंगे स्किन नहीं बनेगी आपके अंदर बैक्टीरिया फिर से वापस डेवलप

30:15 होंगे ही तो दोस्तों इतना शरीर के अंदर जो हमारा सेल्फ विलिंग पावर काम कर रहा है हमें उसके ऊपर भरोसा नहीं हमें हम बीमार पड़ते तो हमारा भरोसा किस पे डॉक्टर के पास जाओ जी दवाई लो जी और मैं मैं तो यू कहता हूं कि जिस दिन हेल्थ और इम्युनिटी दवाओं से मिल गया ना उस दिन ईश्वर की मृत्यु हो जाएगी क्यों फिर तो नियम का कोई मतलब मतलब नहीं है। गलतियां करो भैया दवा खा लो बस सीधा। इसीलिए याद रखना के मेडिसिन जब आप लेते हो ना अपने शरीर को कोई भी केमिकल देते हो वो तुम्हारा शरीर का आहार नहीं होता। शरीर उसके विरोध में प्रतिक्रियाएं करता है। तो प्रतिक्रिया करने में आपके अपने ही फिक्स्ड डिपॉजिट में से आप अपना पैसा खर्च कर रहे होते हो। याद रखना जब भी हम कोई भी उपचार करते हैं चाहे चाहे वो प्राकृतिक हो चाहे वो केमिकल

31:01 हो। याद रखना प्रतिक्रिया करने में वी आर लूजिंग आवर एनर्जी वी आर नॉट अर्निंग आवर एनर्जी और किसी बीमारी में ठीक होने का नियम क्या है कि आप अपनी एनर्जी अर्न करो जीनी शक्ति कमाओ जी अच्छे हवा से अच्छी धूप से अच्छे रेस्ट से अपने माइंड से खानपान से लेकिन हम उल्टा करते हैं हम समझते दवा खाओ जी और दवा खाने से हम ठीक हो जाएंगे ठीक है दवा ध्यान रखना दवाएं गलत नहीं है साइंस कोई गलत नहीं है एलोपैथी भी गलत नहीं है आयुर्वेद भी गलत नहीं है ये ये मानव को राहत देने के लिए सुविधाएं पैदा की गई है और इन साइंस का वैल्यू करना भी चाहिए। वी मस्ट रेस्पेक्ट ऑल दिस ससे। लेकिन प्रॉब्लम पैथी की नहीं है। प्रॉब्लम तुम्हारे दिमाग की है कि दवाएं जाकर मुझे स्वस्थ करती है या बाहर

31:46 से इम्यूनिटी आती है। यह तुम्हारा भ्रम है। तो दोस्तों इसीलिए दवाएं जरूरत पड़ने पर जरूर इस्तेमाल करो। लेकिन कम से कम सेल्फ हीलिंग पावर पे तो भरोसा करो। दोस्तों अब मेरे स्टाफ में मेरे परिवार में जब कोई बीमार पड़ता है ना तो आप जानते हैं मैं क्या शब्द इस्तेमाल करता हूं। एंजॉय योर सिकनेस। मैं कहता हूं मजे लो अपनी बीमारी के। जो भी सिम्टम आया क्यों? अरे बॉडी इस एट वर्क। सेल्फ हीलिंग पावर आपके लिए कुछ लड़ रहा है, कुछ संघर्ष कर रहा है। इसकी मदद करो भाई। चुपचाप पड़े रहो। इसको ज्यादा छेड़ छेड़छाड़ मत करो। तो दोस्तों आज तक शरीर जो भी चाहे करें। मैं जानता हूं शरीर मेरे हित में काम कर रहा है। उसका हर एक एक्शन रेमेडीियल है। उपचारात्मक है। मुझे उसके विरोध में नहीं जाना है। तो इस तरह से दोस्तों आप याद

32:32 रखना जब आप दवा खाते हो ना तो शरीर दो फ्रंट पर लड़ाई करता है। एक तो बीमारी ऑलरेडी अंदर एक जो गड़बड़ चल रही है उसके विरोध में लड़ाई कर रहा है। और एक फिर दवा आ रही तो दूसरी तरफ भी लड़ाई कर रहा है। यानी कि बॉडी जब भी तुम दवा खाते हो ना तो बॉडी हैस टू फाइट ऑन टू फ्रंट्स। आप यू समझ ले। तो इसीलिए बस सोच समझ के वाइजली दवा का उपयोग करें। मैं यू कहना चाहता हूं और यह दिमाग में रखें दवाओं से जीवनी शक्ति कम होती है। बढ़ती नहीं कभी भी। ठीक है? तो सेल्फ हीलिंग पावर इज द ग्रेटेस्ट पावर व्हिच यू मस्ट बिलीव। और और लास्ट जो दोस्तों एक और जो बहुत बड़ी क्षमता जो मैंने आपको बताई बहुत अभी थोड़ी देर पहले हर आदमी में बुद्ध बनने की जागने की क्षमता होती है। लेकिन दोस्तों हम लोग है ना जागने को तैयार नहीं है। हमारे अंदर

33:18 अभी इंटरेस्ट नहीं है। फिलहाल तो हम लोग क्या करते हैं मालूम है। हम अपने भीतर जो छुपा हुआ ऋषि मुनि हमारे अंदर छुपा हुआ बुद्ध हमारे अंदर छुपा हुआ गुरु हम उसको निकालने के लिए जरा भी इंटरेस्टेड नहीं है। हम सस्ता रास्ता खोजते हैं। हम कहते हैं जो गुरु जाग गया जिस उसको पकड़ लो बस। तो याद रखना दोस्तों एक हर हर हर व्यक्ति की अपनी यात्रा होती है। हर व्यक्ति का अपना आकाश होता है। हर व्यक्ति के अपने पंख होते हैं। एक गुरु जो है हमारे लिए इंस्पिरेशन होता है। प्रेरणा होता है। वो अपने पंख पहचानता है और आकाश को खोल देता है। तो वो हमें सूचना दे रहा होता है कि देख भाई परमात्मा ने जैसे पंख मुझको दिए वैसे पंख तेरे पास भी है। तो तू मुझसे प्रेरणा ले। तेरे अपने पंख पहचान खोल और अपने आकाश को खोज ले। लेकिन हम है ना बड़े

34:03 भोले यानी तो अंधे भी बोल सकता हूं मैं। क्यों मालूम है? हम कहते नहीं गुरुजी हम तो आग पर पंखों पर लटके जी आप हमें तार दो जी। तो अगर तुम गुरु के पंख पर लटके तो याद रखना गुरु भी भटका और तुम भी अटके। दोनों नहीं उड़ने वाले हैं। और याद रखना सच्चा गुरु सच्चा गुरु जो होता है ना वो कभी अपने पंख पर लटक नहीं देता। सबसे सच्ची बात तो यह है कि सच्चा गुरु स्वयं परम मुक्त होता है। परम स्वतंत्रता में जी रहा होता है। वो कभी भीड़ इकट्ठी नहीं करता। भीड़ इकट्ठी कौन करता है? किसको भीड़ की जरूरत है? जिसके अहंकार का पोषण करना होता है। वो तो राजनेता का शीर्ष संत स्वरूप है। यू समझ लो आप। तो दोस्तों अगर कोई अगर कोई गुरु भीड़ के साथ अटक गया जुड़ गया ना तो समझना वो राजनेता हो गया।

34:49 फिर वो गुरु नहीं है। फिर वो आध्यात्मिक गुरु नहीं है। ध्यान रखना। गुरु देखिए गुरु तो चिती चिती बस स्वयं मुक्त होकर चलता रहता है दुनिया को जगा के उस जगह से छूट जाता है निकल जाता है छेड़ता है जगाता है भाग जाता है वो आपके साथ नहीं चिपका नहीं रहता तो दोस्तों ये समझना बहुत जरूरी है लेकिन फिर भी लोग है ना ये सब ना समझते हुए भी अपने गुरु को ना पहचानते हुए जो है अनुयाय बनना पसंद करते हैं। मैंने एक शेर लिखा कि इशारे पे मत लटक इशारे पे मत लटक स्वयं के गुरु को जान दूसरों के पंख क्या काम के अपने पंख पहचान तो दोस्तों आज नहीं तो कल आपको इस क्षमता को इस शक्ति को अपने गुरु को पहचानना ही पड़ेगा और नहीं पहचानोगे ना तो तुम हमेशा अंधे बनकर अनुयाय बनकर तुम फॉलोअ बने रहोगे और याद

35:36 रखना फॉलोअ नेवर नेवर रीच एनीवेयर फॉलोअ का मतलब क्या मालूम है मेरा अपना कुछ नहीं किसी और ने जो देख लिया या किसी और का दर्शन किसी और का स्वाद मैं उसकी चादर अपने ऊपर ओढ़कर मैं अंधा बनकर भेड़ बकरी बनकर मैं चुपचाप उसके पीछे पीछे चलता जाऊंगा बस तो दोस्तों अनुय कैसे कहीं पहुंच सकता है जरा बताओ तो भारत में ये प्रथा इतनी जबरदस्त चल पड़ी के बुद्ध और महावीर के तो परंपरा में कुछ तो बुद्ध हुए कुछ तो महावीर हुए जैन में 24 तीर्थंकर हुए ऐसा कहा जाता है क्योंकि उन्होंने उन्होंने रास्ता ही वैसा बताया लेकिन मैं तो अब देखिए हिंदू धर्म भी है और भी कई तरह के धर्म है इसमें कहां कहां दूसरे नए

36:24 बुद्ध कहां ज्यादा बुद्ध बने कहां इतने महावीर बने तो दोस्तों मेरा कहने का मतलब क्या मालूम है कि सच्चा गुरु हमेशा मुक्त करता है और तुम्हें अपना गुरु बनने की प्रेरणा देता है गुरु तो एक चांद इशारा है जो चांद की तरफ करके कहता है देख बेटा वो रहा चांद तुम तो अंगुली पकड़ लेते हो गुरु तो एक माइलस्टोन है जो कहता है जा बेटा ये रहा मुंबई का रास्ता मैं जाकर आया हूं इसलिए तुझे बता रहा हूं। आप कहते नहीं गुरुजी आपने हमें आश्रम का आपने हमें रास्ता बताया। हम तो आपका आश्रम बनाएंगे। आपका मंदिर बनाएंगे। हम आपकी सेवा करेंगे। अगर तुम माइलस्टोन पर बैठ गए ना और तुमने माइलस्टोन के ऊपर ही चिपक गए तो तुम्हारा मुंबई जाना नामुमकिन। तो दोस्तों गुरु जो होता है ना वो तुम्हें सच्चा गुरु ऐसे नहीं करेगा। वो तो लात मारेगा और तुम्हें कहेगा भाग यहां से। और ये ले नक्शे। और नक्शे का मतलब क्या मालूम है? गुरु ग्रंथ गीता कुरान बाइबल जिसमें ये लिखा रहता है

37:11 हाउ टू रीच बॉम्बे। लेकिन लोग बड़े भोले लोग क्या कहते हैं मालूम है भाई साहब मैं दिल्ली से बॉम्ब का नक्शा मैं रोज पढ़ता हूं जी सुबह उठ के ब्रह्म मुहूर्त में पढ़ता हूं जी और मैं नियम से पढ़ता हूं जी मैं 25 साल हो गए जी 40 साल हो गए जी उसको मैं भैया और अपने बेटे को भी पढ़ाया जी मैंने बच्चे को भी याद कर ले बेटा जरा अंकल को गीता सुनाना जरा मुंबई का नंबर से बोर का नक्शा जरा दिल्ली से बॉम्बे का नक्शा सुनाना बेटा तुम तो ऐसे बच्चों को तैयार करते हो जैसे नक्शा क्या पढ़ लिया जैसे से बहुत बड़ा कोई कमाल कर दिया हो। अरे भाई नक्शे पढ़ने से कभी कोई मुंबई पहुंचा क्या? नक्शे हमारे मार्गदर्शक है। हमें जरूरी है हमें गाइड करने के लिए। पर कब तक नक्शे चाहिए? जब तक समझ में ना आवे जब दो चार बार आप उस रास्ते को समझ लेते

37:58 हो और आप चल पड़ते हो तो फिर क्या आप उसी नक्शे को यूज़ करोगे क्या? तो आप क्या कहो अब जो व्यक्ति चल पड़ता है ना मुंबई दिल्ली से तो दोस्तों उसकी अपनी स्वयं की गीता पैदा हो जाती है उसकी स्वयं की बाइबल स्वयं की कुरान स्वयं की गुरु ग्रंथ पैदा हो जाता है दोस्तों तो हर व्यक्ति को नियमानुसार स्वयं की गीता पैदा करनी चाहिए और हम अपनी गीता पैदा करने से बचने का प्रयास कर रहे है हम कहते है उधार से ज्ञान चला लो जी अब कृष्ण की गीता या गुरु नानक जी का गुरु ग्रंथ तुम्हारा स्वाद नहीं है भाई वो रसगुल्ला कृष्ण भगवान ने खाया इसलिए गीता में उन्होंने व्याख्यान किया कि देखो भाई रसगुल्ला इतना मीठा होता है। अब जो लोग गीता का व्याख्यान करते हैं इसका मतलब इतना ही है कि अपना रसगुल्ला खाने को मिला नहीं इसलिए पराए रसगुल्ले की

38:43 स्वाद की चर्चा कर रहे हैं। तो दोस्तों उधार के ज्ञान को लेकर ठीक है लोगों को जगाने के लिए अगर कर रहे हैं तो कोई गलत बात नहीं है। लेकिन उससे पहुंचते कहीं नहीं है हम। बस सीधी सी बात ये है तो इसीलिए कभी भी ध्यान रखना कि जो व्यक्ति चला ना उसने कभी देखिए गुरु नानक ने कभी कभी बुद्ध या महावीर या कृष्ण की बात नहीं की कृष्ण ने कभी बुद्ध महावीर की बात नहीं की जो व्यक्ति चलता है ना वो उसकी अपनी ही गीता स्वाद पैदा हो जाता है तो इसलिए तुम्हें आज नहीं तो कल चलना ही पड़ेगा अपनी गीता पहचाननी पड़ेगी इसलिए भगवान बुद्ध ने जो कहा ना अप दीपो भव स्वयं के दीपक बनो तुम दूसों के पीछे कब तक भागोगे? तो इसलिए देखिए मेरा भी मेरा भी कहना क्या है? लोग देखिए लोगों की आदत है कि थोड़ा

39:30 सा कोई स्पिरिचुअल बात करे थोड़ा सा कोई अच्छी बात करे तो लोगों को लगता है ये गुरु भी थोड़ा सही लग रहा है। पकड़ लो जी इसको तो मेरा सूत्र क्या है मालूम है? जाग जाओ और भाग जाओ। मैं तुम्हें जगा जगाने के लिए आया हूं और गुरु का काम भी यही है कि अंधकार से अंधकार मिटा नहीं। रोशनी हुई नहीं कि बस चले जाओ। गुरु के साथ चिपके ना तो गुरु ही बाधा बन जाएगा। ध्यान रखना। तो इसलिए जाग जाओ और भाग जाओ। और तो इसीलिए दोस्तों तो अब यहां पर ये सब बातें बताने का मेरा अर्थ क्या मालूम है? तुम कब तक अपने बुध को छुपा के रखोगे यार कब तक महावीर को छुपा के रख? अरे बाहर लाओ यार धीरेधीरे बढ़ो अपने उस ऊंचाई को एवरेस्ट को छुए छोटी छोटी पहाड़ियों में कब तक अटके रहोगे? तो दोस्तों इस तरह से जो है ये

40:16 पूरा हमारा कोर्स का प्रयास ये है कि आप अपनी सारी इन क्षमताओं की रिकग्निशन करें। अच्छा अब दूसरी जो चीज है अब दूसरा जो है वो है ब्रह्मांड के नियम जैसे कि मैंने आज बताया हमें देखिए वैसे मैं बताना चाहूंगा कि कल सुबह हम जब 6:30 बजे मिलेंगे तो कल हम रेकी का जो एक ध्यान है एक शक्तिपात का जो प्रयोग है जिस हम ऊर्जा का सक्रियकरण करते हैं तो कल हम सुबह करेंगे क्योंकि हम सुबह जब आएंगे तो हम सिर्फ सबसे पहले वही प्रक्रिया करेंगे और उसके बाद में अपना उपचार दूसरों का उपचार कैसे करें वह सारी प्रक्रिया हम लोग सीखेंगे। ठीक है ना? तो आज मैं जरा उसका बेस और प्लेटफार्म बना देता हूं जिससे कि आपको साइंस समझ में आ जाए। अच्छा अब दूसरा जो है ब्रह्मांड के नियम। दोस्तों इस संसार में दो नियम काम

41:03 करते हैं। एक इनविज़िबल एक विजिबल। अदृश्य नियम तो आप जानते हैं कि नहीं सॉरी वििबल तो आप जानते हैं कि ग्रेविटेशनल फोर्स काम कर रहा है। आग में हार डालो जलता है। ठंडा पानी ठंडा लगता है। है ना? से वो तो वो तो जैसे कहते ऑब्वियस है लेकिन कुछ इनविजिबल जो नियम काम करते हैं जिससे हम 95% इनविजिबल नियमों के साथ जुड़े हुए हैं पर ये नियम हमें मालूम ही नहीं भाग्य कैसे बनता है भविष्य कैसे बनता है पुनर्जन्म क्यों हो रहा है जीवन का सत्य क्या है और तो मतलब ये तो ये सारे नियम इनविजिबल लेवल पर जो चल रहे है ना ये हमारे स्कूल में फिजिक्स केमिस्ट्री की तरह हमारा विषय होना चाहिए था। देखिए ना आज आपको फिजिक्स सिखाई जाती है, केमिस्ट्री सिखाई जाती है।

41:50 तो आप क्वेश्चन नहीं करते हो के हाइड्रोजन ऑक्सीजन मिलके क्या बनता है करके आप क्वेश्चन नहीं करते हो। आप कहते हो तो नियम है जी ऐसे तो तो दोस्तों ये नियम नहीं हमें बताए गए ना समझाए गए तो क्या हुआ? बीच में आ गया पंडित पुरोहित मौलवी तांत्रिक बाबा फिर इन्होंने जो हमें कहानियां सुनाई हमें चुपचाप भरोसा करना पड़ा। क्यों हम आर्गुममेंट करें तो करें कैसे कोई हमारा विषय तो है नहीं तो दोस्तों अगर हमें यू कहा गया कि यमराज भस पर बैठ के आता है तो आप आज भी विश्वास करते हो कि आता ही होगा क्या मालूम उसने अपना व्हीकल भी चेंज नहीं किया तो आपको विश्वास है आज भी और अगर कोई कहता है जब बरसात नहीं हो रही तो इंद्र देवता नाराज हो जाते हैं तो आपको लगता होगा भैया कोई ऊपर एक आदमी धोती पहन के मुकुट पहन के थोड़ा और मूडी मूड आए तो बरसात करें ना आए

42:37 तो ना करें और इगोइसिस्टिक भी है थोड़ा क्योंकि जब तक उसका हजारों बार नाम ना ले लो तब तक वो पसीजता ही नहीं है। उसको वो खुश ही नहीं होता भाई। तो आपको आज भी 21 सेंचुरी में ना दोस्तों ऐसी कहानियों पर भरोसा है। ये बड़ी मजेदार बात है। तो इस तरह से तो कहने का मतलब क्या है कि ये सब क्यों है? क्योंकि आपको कभी इसका वैज्ञानिक जो सत्य है वो कभी बताया नहीं गया और हमारे अंदर दोस्तों इतने डर पैदा कर दिए कि आज भी हम इससे मुक्त नहीं बता रहा हूं। आपके अंदर भगवान का डर स्वर्ग नरक का डर, तांत्रिक और काले जादू का डर, पाप पुण्य का डर और तो मतलब ये सब तो डर क्या है? अज्ञानता का बाय प्रोडक्शन का डर। दोस्तों ये जो ग्रहों का जो सबसे बड़ा

43:24 जो डर जो भारत के अंदर चलता है ना दोस्तों क्योंकि मैंने कहा ना कि आज मेरा इस कोर्स का मकसद है आपके पुराने सारे अंधविश्वास में थोड़े हटा दू तोड़ दूं। दोस्तों ग्रहों का डर इतना खतरनाक रूप से हमारे ऊपर डाल दिया गया कि ज्योतिष जैसे इतना सुंदर और सर्वश्रेष्ठ विज्ञान है जो कि इंडिकेटिव साइंस प्रेडिक्टिव नहीं होती उसको उन्होंने आतंक का विज्ञान भारत के ज्योतिषियों ने बना के रख दिया। ऐसा नहीं कि सारे ज्योतिष ऐसे हैं 202% अच्छे अच्छी आत्मा भी अच्छी ज्योतिष भी है और और बहुत बड़ी कला है ये जिसे बहुत कुछ जाना जा सकता है गाइडेंस दी जा सकती है लेकिन उसको आतंक का विज्ञान बना के रख दिया और भारत के अंदर हर व्यक्ति के पीछे डर तरह तरह के डर शनि मंगल राहु केतु के डर डाल दिए

44:09 दोस्तों ज्योतिष तो विदेश में पढ़ाई जाती है वहां विदेश में कहीं पर भी आप किसी भी वहां एस्ट्रोलॉजर से मिलो वो यूरोप में अमेरिका में जाओगे ना जर्मनी दे जस्ट टॉक अबाउट योर आपका स्वभाव और आपके और आपके अंदर क्या कमजोरियां स्ट्रेंथ है उसका यूज़ करो। वो तकनीक वो बताते हैं। पर यहां तो ऐसे बताते हैं कि जैसे सारे मंगल राहु केतु जो है ना ये ग्रह आपके पीछे पड़े हुए हैं और आपका चौपट आपका परेशान कर रहे हैं आपको। दोस्तों आपको सबसे पहली बात क्या समझनी मालूम है? ये जितने ब्रह्मांड में ग्रह घूम रहे हैं ना इनको तुम्हारे अंदर रत्ती भर भी इंटरेस्ट नहीं है और ये कोई तुम्हारे लिए नहीं घूम रहे ध्यान रखना ये और तुम अकेले धरती पर तुम अकेले नहीं हो ये भी ध्यान में रख लेना हजार लाखों योनिया है ये सबके लिए घूम रहे हैं और और

44:56 ये घूम रहे तो क्या पैदा कर रहे हैं तरंग ही तो पैदा कर रहे है ना और तरंगे अगर धरती पर आ रही है तो क्या उससे हो रहा है मौसम में बदलाव आ रहा है धरती पर तो मौसम में बदलाव आता है और वो भी बहुत ग्रेजुअली बड़ा कैजुअली आता है ना ऐसे एकदम सडनली तो नहीं आता तो दोस्तों दोस्तों आपको समझना क्या है कि अल्टीमेटली हु इस गोइंग टू रिएक्ट आपका शरीर अगर प्रतिक्रिया अगर कोई आसपास तरंगे पैदा हो रही है तो शरीर का भी अपने आप प्रतिक्रिया करता है विरोध करता है अगर आप कमजोर होते हो तो फिर एक मोबाइल का रेडिएशन भी आपको नुकसान कर जाएगा भाई एक एक आदमी जोर से आवाज करेगा तो तुम परेशान हो जाओगे अरे भाई जब तुम्हारी एनर्जी नॉर्मल रहती है बैलेंस में रहती है ठीक-ठाक रहती है तो देन यू कैन बाउंस बैक ऑल द नेगेटिविटी ऑफ दिस दिस यूनिवर्स फिर

45:42 चाहे कितनी भी तरंगे आसपास होना अरे योगी लोग माइनस 30 माइनस 40 हिमालय के अंदर नंगे बदन अरे तुम्हारे सामने सबसे उदाहरण तो रामदेव जी का ही है बालकृष्ण जी का है हमारे आपने देखा होगा कि रामदेव जी वही वही सर्दी में भी वही एक वो ऊपर पहनते नीचे पहनते हैं तो क्यों शरीर इतना क्षमतावान है वो कैसे भी गर्मी ठंडी सब में अपने मतलब वी आर द पावरफुल मैन हम किसी भी आसपास की तरंगों को बाउंस बैक कर सकते हैं तो इसलिए क्या होता है के संबंध की बात यह है कि कोई भी ग्रह ना आपके नौकरी खराब करने धंधा खराब करना है, शादी नहीं होने देने, बच्चे नहीं होने देने के तुम्हें कष्ट देने के लिए काम करते हैं। भाई ये तुम्हारी अपनी सोच है और तुम्हें इतनी छोटी सोच दे दी गई है। दोस्तों ये सारे शनि मंगल कहां काम करते हैं? जब जंगल

46:29 में जाके बैठ जाओ तो सॉरी ये शनि मंगल राहु केतु किसको लगते हैं? पता है पूरे वर्ल्ड में किसी को भी नहीं लगते। सिर्फ एक जात को लगते हैं। और वो कौन है? हिंदू। दोस्तों पूरे वर्ल्ड में आप जाकर गूगल में सर्च कर लेना 14% हिंदू है बस पूरे वर्ल्ड में और ये सारे शनि मंगल इनको लगते हैं और 86% जो क्रिश्चियन मुस्लिम या और जो धर्म है उनको नहीं लगते सोचने की बात नहीं है और ये तुम्हारे और हिंदू बेचारा डर के मारे है ना रात को शादियां कर रहा है रात को दो दो तीन तीन चार बजे आज तक भी वो परिवर्तन नहीं कर पा रहा है दोस्तों साउथ इंडिया वाले भी तो तुम्हारी तरह धार्मिक है वो सुबह सुबह शादियां करते और क्रिश्चियन भी सुबह सुबह शादा करते हैं। मुसलमान भी सुबह शादिया करते हैं। मैं ये नहीं कहता कंपैरिजन नहीं कर रहा हूं। पर मैं कहता हूं ये डर क्यों? अरे सारे देखिए

47:18 ये डर सरदारों में नानक ने निकाल दिया तो सारे सरदार संडे को संडे को शादी करते मुरत भी नहीं देखते बता रहा हूं मैं आपको और वो अग्नि के फेरे भी नहीं खाते। वो तो गुरु ग्रंथ के फेरे खाते हैं। तो दोस्तों क्या इनकी शादियां टूट गई? तो मतलब किसका डर? कौन डरा रहा है तुम्हें इस संसार में? सब मैंने कहा था ना हमारे ही डर हमारे ही विश्वास हमारे ही डर हमारे ही विश्वास बंधाते हैं आस या करते हैं निराश तो दोस्तों तुम अपने आप में और ये सारे शनि मंगल राहु केतु जो है ना दोस्तों जंगल में जाके बैठ जाओ तो लग्न बंद क्यों माना तो कोई मकान चाहिए ना कार चाहिए ना पैसा चाहिए वहां लग के करेगा भी क्या लेकिन जैसे शहर में आते हैं और इच्छाएं सपने धीरेधीरे आपने देखा होगा एक गांव का आदमी लिमिटेशन में रहता है जैसे शहर में आता है उसकी महतत्वाकांक्षा इच्छाएं बढ़ने लग

48:04 जाती है तो उसके शनि मंगल भी उतने ही बढ़ने लग जाते हैं और जवानी में यह ज्यादा लगते हैं क्योंकि उसमें ज्यादा इच्छाएं सपने होती है। महतकांक्षाएं होती है और बुढ़ापे में कम लगते हैं क्योंकि अब तो बहुत कुछ भैया सब ठीक-ठाक कर लिया हमने जीवन में तो मतलब क्या होता है और साधु बन गए तब तो फिर लग्न बंद ही बिल्कुल बंद फिर तो शनि मंगल लगते ही नहीं हमारे ऊपर साधु को तो लगते ही नहीं क्योंकि कुछ है ही नहीं खोने को पाने को तो दोस्तों कहने का मतलब क्या है कि किसका डर लेके तुम बैठे हो और इतने तुम डरे हुए हो के अगर तुम एक रेड लाइट के ऊपर कोई आदमी शनि का फोटोग्राफ ले आ जाए और तुमसे अगर चिल्ला के कहे शनि महाराज और तुम किसी अच्छे काम से जा रहे हो और बाय चांस तुमने दो चार पांच नहीं दिया उसको और तुम्हारा काम उस दिन नहीं भी हुआ तो तुम्हें क्या डाउट आएगा यार उस शनि महाराज ने दो पांच मांगे

48:51 मैंने दिया नहीं तो शनि महाराज ने ऊपर से देख लिया इसलिए उन्होंने मेरा काम बिगाड़ दिया तो इसका मतलब आपका देवता इतना नीचा किस्म का है कि दो चार रुपए के चक्कर में तुम्हारा काम नहीं करेगा। तुम्हारी सोच भी देखो ना सबसे पहले तो इंसान की सोच पर मुझे हंसी आती है कि तुम ऐसे देवताओं की कल्पना करते हो और ऐसे देवताओं को मानते हो दोस्तों ऐसे देवता नहीं होते और तुम्हारा डर देखो ना कैसा है कि तुम पांच तुम्हारा देवता तुम्हारा धंधा चौपट करेगा लेकिन तुम्हारा डर ऐसा है और इतना बड़ा डर शनि मंगल का है दोस्तों के आज 50 साल पहले भारत में दो तीन महाराष्ट्र में एक सिंगपुर में एक मंदिर था शनि का और आज और मंदिर मंदिरों में सिर्फ नौ नौ नव ग्रह होते थे। आज दोस्तों दिल्ली में 200 शनि

49:39 के मंदिर है। कोई भी गांव राजस्थान में चले जाओ, इधर चले जाओ सब जगह शनि के मंदिर किसने बना दिए? ये पंडित पुरोहितों ने बना दिया। तुम्हारे अंदर तुम्हारा डर बड़ा करने के लिए और याद रखना छोटा शनि बनाओगे तो शनि मानता भी नहीं। ये भी खतरनाक बात है। वो कहते है नहीं जी 25 फीट का, 20 फीट का, 10 फीट का। क्यों? छोटा शनि बनाते ही शनि महाराज ऊपर से नाराज हो जाते हैं। कैसी अद्भुत कल्पना है दोस्तों आपकी ग्रहों को लेकर? मैं इस मैं जरा चाहता हूं इससे बाहर निकलो। एक बात ध्यान रखना पूरा ब्रह्मांड तुम्हारे जीवन को संचालन करने के लिए काम कर रहा है। तुम्हें जिंदा रखने के लिए काम कर रहा है। तुम्हें मदद करना चाहता है। तुम्हारे जीवन को बढ़ाना चाहता है। तुम्हें ग्रो करना चाहता है। दोस्तों मारना नहीं चाहता। तुम्हें दुख देना नहीं चाहता। तो इसलिए दोस्तों कहने का मतलब ये है कि बिलीव इन योरसेल्फ, बिलीव इन योर बॉडी, बिलीव इन नेचर एंड बिलीव इन गॉड। जो

50:24 यूनिवर्सिस्ट ने बनाया। ठीक है ना? तो ये सारी बातें बताने का अर्थ क्या है कि हमारा डर कितना है? दोस्तों और आगे बढ़ते जाओगे ना तो मैं आपको इवन ये ब्लैक मैजिक का भी डर है। आप में से कई लोगों को काले जादू का डर है। याद रखना अगर सफेद जादू होता तो काला जादू भी डेफिनेट होता है। लेकिन हर चीज का ऑपोजिट तो होता है ना। तो मैं तुम्हें ये सारे काले जादू से निकलने की इतनी सिंपल तक बताता हूं कि दुनिया का कैसा भी काला जादू रहने दो। है तो तरंगों का रूप। मैं कहता हूं तुम उसका ऑोजिट तरंग पैदा करने का विज्ञान सीख जाओगे ना तो कोई दुनिया का ब्लैक मैजिक तुम्हें जरा सा भी असर नहीं कर सकता। तो मतलब यह सब तकनीक है। कौन सी बड़ी कौन सी बड़ी बड़ी बातें हैं। इतनी छोटी छोटी बातें हैं कि जो कहता हूं सेकंड्स में किसी ब्लैक मैजिक को तुम ध्वस्त कर सकते हो। ये ताकत तुम्हारी बता

51:10 रहा हूं। इस तरह से और मृत्यु का डर है वो तो तुम पूरे जन्म में जाओगे तो तुम देख लोगे मैं तो कई बार मारा। मेरी तो पैकिंग बदलती रही। तो जब ये अनुभव कर लोगे तो फिर तुम क्यों मृत्यु से डोगे? और अंतिम जो डर है दोस्तों वो बताकर फिर मैं आज का कोर्स जो है वो थोड़ा ये करूंगा। देखिए अंतिम डर है हमारा भगवान का डर। हर आदमी शब्द इस्तेमाल करता है ईश्वर की मर्जी। दोस्तों इस संसार में आपको समझना क्या मालूम है? ईश्वर ने नियम बनाए और परमानेंटली सो गया। ईश्वर कुछ भी नहीं करता। ध्यान रखना इस संसार में। ईश्वर कहता है कि हे मानव तू इस धरती पर 24 घंटे सर फोड़ फोड़ के रोता रहे, चीखता रहे, चिल्लाता रहे, गुस्सा करता रहे तो तेरी मर्जी। तू यहां पे हर वक्त हंसता रहे, खेलता रहे, नाचता रहे, गाता रहे तो तेरी मर्जी। तू यहां पर फल खा

51:56 के योगा करके 500 साल जी ले तो तेरी मर्जी तू तंबाकू खा के जंक फूड खा के तू 250 साल में मर जा तो मेरे को क्या तेरी मर्जी ईश्वर को क्या पढ़ी है जीवन तुम्हारा है तो दोस्तों भगवान जो लोग भगवान पे डालते रहे भगवान की मर्जी भगवान ने उठा लिया भगवान ने नहीं करता इस संसार में भगवान नहीं काम करता नियम काम करते हैं और नियम को हमारे योग्य ने कहा रित हुक्म धर्म और धर्म का मतलब क्या एटर्नल लॉ ऑफ यूनिवर्स सनातन धर्म मतलब ऐसा मतलब जो एटरर्नल है जो कभी नष्ट नहीं होता जो सदियों से चला आ रहा है तो दोस्तों इस संसार में धर्म काम कर रहा है नियम काम कर रहे हैं जो बुद्ध ने भी बताया

52:41 जो महावीर ने भी बताया हमारे नानक जी ने भी बताया सब ने एक ही बात कही कि पूरा ब्रह्मांड नियम के अंतर्गत है भाई तो नियम से डरो मैं भगवान से नहीं डरता ध्यान रखना मैं नियम से डरता हूं क्योंकि मैं जानता हूं कि मैं आग में हाथ डालूंगा जलेगा। मैं घृणा करूंगा मेरा खून जलेगा। प्रेम करूंगा मेरा खून बढ़ेगा। तो दोस्तों ये नियम है। तो इसे धार्मिक बनो। संप्रदाय तो तुम्हारी पर्सनल चॉइस है। मैं हिंदू बनू के क्रिश्चियन बनू कि मुसलमान बनू के सिख बनू वो तुम्हारी चॉइस है। लेकिन उसका कोई नियम से लेन देन नहीं है। ध्यान रखना। तो संप्रदाय तो फिलोसफी एक पर्टिकुलर विशेष दर्शन की धारा है। यू समझ लो। ठीक है ना? तो तो अब यहां पे समझना क्या मालूम है? एक मैंने शेर लिखा है इसके बारे में कि नियम से कोई तरे ना पत्थर घीना नीचे जाए कुदरत

53:29 के कानून में राम ना आए दोस्तों ध्यान रखना ईश्वर बीच में कहीं पर भी नहीं आता मैंने कविता लिखी तो आपको सुनकर के एक आईडिया आ जाएगा आपको के धरती को क्या बीज से नाता धरती को क्या बीज से नाता जैसा बीज को बोया जाता उसी स्वभाव गुण धर्म को लेकर कड़वा मीठा फल बन जाता कुदरत का कानून है धरती कर्म तुम्हारे बीज एक बीज के फल फल हजार हैं। हजार फलों के लाखों बीज कहे नंद नहीं कोई जगत में नरक स्वर्ग को देने वाला नर्क स्वर्ग हम स्वयं रचते पल पल जैसा बीज को डाला आहार व्यवहार विचार से हर पल बीज जो बोए पल पल फल बनता गया अचानक कुछ ना होए कहे नंद जागे रहो

54:15 सचेत रहो हर पल इस पल बोया बीज ही फल लाएगा कल दोस्तों किसको पड़ी है और तुम तो फिर लोगों के दिमाग में आएगा अरे भैया फिर भगवान किसको बोले जी कहा हाथ जोड़ क्या करें अरे भाई हमने ऐश्वर्य को ईश्वर कहा भगवता को भगवान कहा डििनिटी को डिवाइन कहा गॉडलीनेस को गॉड कहा पर ईश्वर कोई व्यक्तित्व नहीं है ध्यान रखना कोई आदमी नहीं है कि जिसकी तारीफ की जाए जिसकी प्रशंसा की जाए जिसको जिसकी आरती उतारी जाए जिसके खूब भजन गाया जाए स्तुतियां गान किया जाए अरे नहीं भाई वो तुम्हारी सोच है वो तो देखिए देखिए ऐसा नहीं कि गलत है। आदमी बेचारा मतलब बड़ा भोला है ना इनोसेंट है और उसके वो साइकोलॉजिकल नीड है। इसलिए वो एक आदमी का रूप दे देता है भगवान को।

55:02 और फिर तुम्हारा अकेले का भगवान तो है नहीं। 84 लाख योनिया है। भैंस का भगवान कौन है भाई? चिड़िया का भगवान कौन है भाई? यानी तो शेर का भगवान कौन है भाई? उसका भगवान फिर वो अपने दृष्टि से देखता होगा ना। तुम तो ह्यूमन बीइंग हो। तो तुम भगवान का ह्यूमन बीइंग का पिक्चर बनाते हो। तो कहने का मतलब क्या है मालूम है कि ईश्वर कोई व्यक्तित्व नहीं है कि जो जिसके मतलब जिससे आपको डर के जीना पड़े मैंने कविता लिखी कि सदियों से लोग ना जाने क्यों परमात्मा को रिझा रहे हैं खोकर अपना अमूल्य समय खुद को ठगा रहे हैं। अरे परमात्मा कोई व्यक्ति नहीं जिसे खुशामद का इंतजार है। परमात्मा तो प्रकृति का नियम है जिस पर चलना ही सच्चा उपचार है। तो दोस्तों ईश्वर जो है व्यक्तित्व नहीं है बल्कि हमारे उपनिषद में हमारे सा में इसको बहुत क्लियरली बताया गया है ई वासम इदम

55:50 सर्वम द होल यूनिवर्स इस नथिंग बट द एक्सप्रेशन ऑफ द गॉड ईश्वर एक अभिव्यक्ति है एक स्वाद है एक सुगंध है वो होश का विषय है वो खोज का विषय नहीं ध्यान रखना नेवर सर्च गड ही इज ओनली वो ही है सिर्फ सिर्फ सिर्फ सिर्फ तो दोस्तों जिस दिन आप अपने ज्ञान ज्ञान के अहंकार ज्ञान से अपने इस अहंकार के बर्फ को पिघला दोगे ना तो तुम भी इस परमात्मा के सागर में मिल जाओगे और फिर तुम्हें लगेगा कि मैं स्वयं ही ईश्वर हूं। मैं स्वयं शिव हूं। तभी तो ये उद्घोषणा की गई कि तत्व मसी शिवोह ब्रह ब्रह्मास्म ये सब क्यों कहा गया? क्योंकि आज नहीं तो कल तुम्हें अपने इस अहंकार को इस बर्फ को तो गलाना ही पड़ेगा। तो इस तरह से दोस्तों तो मेरे जीवन में ना सबसे बड़ी

56:36 परम मुक्ति क्या मालूम है? मुझे भगवान का डर नहीं है। मुझे भगवान को मनाने की झंझट नहीं है। मुझे उसको मैं डर डर के उसको हाथ नहीं जोड़ रहा हूं। मैं कोई परेशान नहीं हो रहा हूं। ना मैं उसके ऊपर डालता हूं। मुझे मालूम है कि मेरे घर में मैं फुलवारी बना के जिऊ के कांटे की झाड़ियां बना के जू। कोई ईश्वर रोक तो नहीं रहा है मुझे। तो कहने का मतलब क्या मालूम है? व्हाई यू आर फियरिंग गॉड? मैं कहता हूं ईश्वर को जियो। हर पल उसका आनंद लो। इसलिए जब मैं पानी पीता हूं तो उसकी ठंडक में उसके सिवा कौन है वो ठंडक? अरे एप्पल में मिठास कौन है वो? अरे तुम्हारी स्वास में जो चल रहा है प्राण में कौन है वो तुम्हारी धड़कन कौन है वो तो दोस्तों ईश्वर तो हर पल तुम्हारे अंदर स्पंदित हो रहा है ना उसके मजे लो ना उसके तो दोस्तों मैं तो ईश्वर के मजे ले रहा हूं इसलिए मुझे कोई ईश्वर को मनाने की झंझट नहीं है मैं उससे मुक्त

57:22 हूं उस वर्ड से तो दोस्तों आज का इस विषय का मेरा असली पर्पस ये था कि तुम लोग जो है किसी भी तरह इन सारे भ्रमों से बाहर निकलो और अंत में थोड़ा सा मैं जरा रेकी के बारे में बता कर क्योंकि कल मैं फिर सीधा शक्ति प्रतिपात के अंदर आऊंगा। दोस्तों आज हम जो रेखी कल जो हम सीखेंगे ना वो इतनी पावरफुल जीवनी शक्ति है कि जो एक बार आपके हाथों में सक्रिय हो गई तो ये ये जो रेखी है ना ये है तो जापनी शब्द पर ये जापान से नहीं आया। यह भारत के हमारे वेदों से निकला हुआ स्पर्श चिकित्सा है। हमारे वेदों में साफ साफ लिखा हुआ है अथर्ववेद में अय हस्त जो भजम हे मानव तेरे हाथ औषधि युक्त है। तेरे हाथ स्पर्श करने योग्य है। हे मानव तू इन हाथों से तू लोगों को नव जीवन दे नव प्राण दे। तो दोस्तों ये तो हमारे ऑलरेडी था। पर यह

58:09 हमारा दुर्भाग्य था कि इतने हजारों साल पहले लिखे गए हमारे इन विद्याओं को जैसे हमारे अंदर और भी विद्याएं हैं वो बीच के लोगों ने कभी सामान्य जन तक पहुंचाने नहीं दिया और ये भी मुझे दुख होता है यहां अफसोस होता है कि इतने तीन चार चार000 साल पहले लिखा हुआ ये ये जो विद्या है ये बीच के जो आध्यात्मिक गुरु आए इन्होंने क्यों नहीं इस विद्या को मानव तक पहुंचाया और बीच में इतने पंडित पुरोहित आए इन्होंने क्यों नहीं पहुंचाया भाई और ये जापान क्यों चली गई ये तिब्बत से जापान गई जापान जाकर वहां जापनीज कपड़ा पहन लिया फिर ये वेस्टर्न कंट्री आ गई और अब और ये विद्या आज हमें जापान के कारण नहीं मिली ध्यान रखना ये वेस्टर्न कंट्री के कारण मिली और जानते हो वेस्टर्न कंट्री की ईमानदारी क्या है अगर उनको कोई भी सब्जेक्ट में दम

58:54 लगता है ना साइंस में दम लगता है तो वो उसको जो है तुरंत बाजार में लाकर उसको आराम से मतलब प्रोफेशनली कर देते होंगे लेकिन कम से कम ला के दुनिया को बताते तो है फिर वो दाढ़ी बढ़ाकर कपड़े गेरुए पहनकर है ना वो ये मिस्ट्री बीच में पैदा नहीं करते कि ये तो भगवान की कोई सिद्धि है कोई शक्ति है मुझे वरदान है ये सब फालतू बातें इंडिया में चलती है तो दोस्तों कहने का मतलब क्या मालूम है कि ये आज विद्या आज हम तक पहुंची और रेकी हीलिंग फाउंडेशन ने आज अब तक जो है आपको जानकर के खुशी होगी आप YouTube पर जाओगे मेरे यहां डॉक्टर एन के शर्मा डालोगे तो आपको दिखाई देगा कि रेकी हमारी फर्स्ट लेवल जो मैं आपको सिखा रहा हूं 2 मिलियन दो मिलियन से ज्यादा हमारे लोगों

59:42 ने रेकी सीख ली है। जरा सोचिए आप तो वी हैव बिकम द वर्ल्ड लार्जेस्ट रेकी ग्रुप और हम लगातार आगे चले जा रहे हैं। और हमारा हमारा मिशन है घर रेकी हर रेकी। क्यों? क्योंकि आज ये रेकी आप सीखोगे ना तो आपके डे टू डे लाइफ में आपके कोल्ड से लेकर कैंसर तक हर बीमारी में क्या चाहिए? जीवन शक्ति प्रबल चाहिए। तो ये रेकी आप जब अपने आप को टच करके एनर्जीाइज करोगे तो आपकी जीवनी शक्ति का प्रबल होगा तो आपका रिकवरी जल्दी होगी रीजनरेशन फास्ट होगा डिटॉक्सिफिकेशन फास्ट होगा तो दोस्तों जीवनी शक्ति के बिना कोई भी रोग ठीक तो होता नहीं है और तो आज वो रेकी 24 * 7 अवेलेबल एनर्जी है और सबसे बड़ी बात क्या मालूम है इमरजेंसी में आपको रेकी जैसी चीज कोई नहीं मिलेगी इतनी जबरदस्त है मान लो

1:00:29 कि कोई आदमी को अचानक गिर गया चोट लग गई आपने तुरंत उसको 15-20 मिनट हीलिंग कर दी। आप देखोगे की उसी समय दर्द में आराम बता रहा हूं। दोस्तों हमने अभी जरा सोचो कार के दरवाजे में हाथ आ जाए, तो आप उसको 8 10 दिन तो दर्द तो रहेगा ना। इतना इतना जबरदस्त वो उसमें इंजरी होती है। लेकिन हमने 15 मिनट हीलिंग करके उसका दर्द पूरी तरह खत्म कर दिया। 15 मिनट में बता रहा हूं। हाथ पे गरम गरम तेल गिर गया। हमने रेकी कर दी। करीब करीब आधा घंटा तक रेकी जाती रही। दोस्तों उसके बाद है ना कहां जला वो एरिया पता भी करना मुश्किल हो गया। इतनी वंडरफुल हीलिंग होती है। घर में हार्ट अटैक आ जाए। अगर रेकी जानने वाले परिवार के लोग हैं तो दोस्तों मर नहीं सकता। आप जानते हैं आदमी हार्ट अटैक में मरता क्यों है? क्योंकि बैटरी का बैकअप अगर अच्छा है तब तो वो 10% भी बचा है मान

1:01:17 लो तब तो वो जाके वापस हॉस्पिटल में रेस्ट करके रिकवर करके आता है। देखिए जनरली हार्ट अटैक होता है ना हम तुरंत हॉस्पिटल भागते हैं। और वहां जाकर हम क्या सोचते हैं? डॉक्टर ने इसको बचा लिया। नहीं बचने की क्षमता उसके अंदर थी। अरे डॉक्टर अगर इंजेक्शन भी देगा तो अंदर माल होगा तो रिएक्ट करेगा नहीं होगा तो कैसे रिएक्ट करेगा? अगर वही जीवन शक्ति अगर अंदर थी तो उसको रिकवर करने में ऑलरेडी लगी हुई थी। तो भाई हार्ट अटैक में क्या होता है? अगर मान लो एनर्जी नहीं है और व्यक्ति लेकिन एक बात ध्यान रखना हार्ट अटैक में तुरंत आदमी नहीं मरता। कुछ घंटों के बाद मरता है। लेकिन अगर उसी समय रेकी चार्जर की तरह मिल गई और आपने रेकी कर दी तो मैं बताता हूं कि उसी वक्त जैसे मोबाइल बुझने जा रहा था आपने चार्जर में डाल दिया। इतने जबरदस्त काम करती है। रोज रोजमर्रा के जीवन में घर में ऑफिस में बच्चा रात को

1:02:04 चिल्ला रहा है। पेट में दर्द हो रहा है। आपने नींद में भी हाथ रखा ना तो भी उसको आराम मिल जाता है। दोस्तों ऑफिस में तकलीफ होती है। तो आपने तुरंत उसको दो मिनट में आराम दे दिया। कितनी मतलब चलते फिरते हर वक्त अवेलेबल जो परमात्मा ने दी है ना आज इस ऊर्जा को हम कल सीखेंगे और आपके हाथ बन जाएंगे उसके बाद जगन्नाथ यानी कि योर हील हैंड्स विल बिकम हीलिंग हैंड्स तो दोस्तों बस ये क्षमता हम कल सुबह जब मैं लौट के आऊंगा आपके साथ दोबारा सुबह 6:30 बजे जुडूंगा तो मैं इस विद्या को आपके अंदर सक्रिय करूंगा तो मैं अब मैं ओवर टू त्रिलोक जी बहुत-बहुत धन्यवाद बहुत-बहुत धन्यवाद और न जाने कितने जन्मों के न जाने कितने वर्षों के भ्रम और डर मैं समझता हूं सबके दूर भाग

1:02:51 रहे होंगे और नहीं तो भाग रहे हैं तो थोड़ा पुरुषार्थ हम करेंगे तो बिल्कुल अस्तित्व पूरा सहयोग कर रहा है बस हमारे दरवाजे थोड़े खुले रखे सब कुछ जीवन में श्रेष्ठ होने वाला है डॉक्टर सर को बहुत-बहुत धन्यवाद कि ये कृपा हमें मिली हम तो ऐसे ही नहीं तो जीवन को गुजार देते ना। इतना तो गुजार दिया तो और गुजर जाता। तो बहुत-बहुत धन्यवाद आपको जगाने के लिए। बहुत शुभकामना सबके लिए। मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं। सुबह मिलते हैं कल। ठीक है तिलोक जी मैं विदा लूं। बिल्कुल बिल्कुल ओके ओके तो बहुत-बहुत धन्यवाद। सर का सौभाग्य और गुरुकुल का सौभाग्य हमें

1:03:38 ये आशीर्वाद मिला और हमें बहुत सारी चीजें जानने को भी मिली। तो आदरणीय सर एक बार आपके विचार फिर हम विदा लेंगे। जी तो साथियों हो सकता है बहुत सारे साथियों को तो ये बातें बड़ी अचंभित लग रही होगी। डाइजेस्ट भी हो पा रही है कि नहीं हो रही है। विश्वास हो रहा है नहीं हो रहा है। मैं एक छोटी सी कहानी बता देता हूं। हकीकत मोनालिसा एक बार बहुत गंभीर बीमार हो गई। अभी वो पताना उसको कह रहा था फिर आज बता ही देता हूं बहुत ज्यादा आपने देखा होगा बहुत दिनों तक आ ही नहीं रही थी इसको पहले कोल्ड हुआ कप हुआ फिर पसली पसलियों में शायद कुछ हेयर क्रैक आ गया फिर ना उठ रही ना बैठ पा रही ना बोल पा रही ना कुछ भी नहीं हो पा रहा था और मेरे मन में एक विचार आए कि मैं यहां बैठा क्या कर सकता

1:04:23 हूं थोड़ा सा एक गहराई से भाव आया और मुझे मुझे मिले कोई रेकी करने वाले मिले तो मैंने उनसे अनुरोध किया वीडियो पे मोनालिसा खुद गवाह है उस बात की दो मिनट ट्रेकी की और मोनालिसा एकदम रेडी है वो अपनी बीमारी को ढूंढती रहेगी कहां गई तो ऐसा नहीं है कि ये सब कुछ नहीं होता है आप खुद देखेंगे कल महसूस करेंगे पर विश्वास पूरा रखें तैयारी करके आए नहा धो के बैठे अच्छे से और सभी साथी जिनको भी आपने इसमें ज्वाइन कराना चाहा था और आज नहीं हो पाए उनको ये वीडियो दिखा दे पहले। ये दिखाना बहुत जरूरी है। नहीं तो कल का सत्र फिर उस तरह से नहीं हो पाएगा। तो आप सभी को दिखाएं और इस मौके को चूकना चाहिए क्या?

1:05:11 मैं इतने दिन से जो कह रहा था अब आपको बात समझ में आ गई होगी कि बिल्कुल सर। अभी भी कुछ देर नहीं हुई है। आप सबको आज का दिखा दे और कल से जितने भी आप जिनके भी जिनका जीवन में सहयोग करना चाहते हैं। ये बहुत ही अलग मतलब हम किस दुनिया में जी रहे हैं। पता ही नहीं सही दुनिया में आने का रास्ता हमें मिलने वाला है। तो चलिए बहुत-बहुत धन्यवाद सभी को। जी और अभी सीनियर जो रॉयल्टी के साथ में जुड़ना है। हां जी 8:00 बजे रॉयल्टी टेक्निकल का सेशन है।

1:05:56 जी मिलते हैं कल सुबह। जी जी धन्यवाद। अभी जो आज चेंज कर दिया गया है। पहले योगा होगा सवा5 से 6 बजे तक। और छ से 6 मेडिटेशन तो यह सब मेडिटेशन का लाभ ले जी धन्यवाद सर और उस टाइम पे जब सर किए थे जस्ट दो मिनट के बाद मेरे मुंह से यही निकला था सर जादू हो गया तो मैं वो जादू चखी हूं तो कल हम लोग मिलके वो जादू को चखेंगे सीखेंगे मैंने सीखा तो नहीं है मेरे ऊपर अप्लाई हुआ था तो मेरा मेरा वो दर्द भाग गया था तुरंत तो मैंने जादू चखा था अभी जादू को सीखना है

1:06:43 ताकि सीखते होंगे कल बहुत सारे साथी सीख जाएंगे बहुत आसान है गुरुदेव बहुत आसान है मैंने सीख लिया है जी उभर दबा दे सर हां जी

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