संक्षिप्त सारांश
यह वीडियो श्मशान वासिनी मरघट की महारानी काली की स्तुति है। इसमें महामाई काली की शक्ति और उनके द्वारा बुरी शक्तियों को बांधने और नष्ट करने का वर्णन है। मंत्र में भैरव और 70 वीर भी शामिल हैं, जो शत्रुओं को परास्त करने में काली की सहायता करते हैं।
- महामाई काली की स्तुति
- बुरी शक्तियों का विनाश
- भैरव और वीरों का सहयोग
ओम नमो शमशान वासनी
यह मंत्र श्मशान वासिनी मरघट की महारानी काली को समर्पित है। उन्हें महामाई, हुकारताई, गरजताई, पंजताई और घोर आई के रूप में संबोधित किया गया है। वे रक्त की धाराएं बिखेरती हैं और मशान की चौकी काटती हैं। यह चौकी मरघट, चेटक, ओघड़, मैली और कुचेली चौकियों के रूप में जानी जाती है, जिन पर काई साव की सवारी होती है।
बांधी बांधी
महामाई काली अपनी चौकी पर वज्र धारण करके बैठती हैं और भूत, प्रेत, देव, दानव, यक्ष, राक्षस, दत्त, वादी, वैताल, बरम, खबीश, योगिनी, जोगिनी, 63 कुल, बामन वीर, डायन, डाकनी, उड़ंत, गढ़ंत, वार और हार को बांधती हैं। वे गले को, गलियारे को, किए को, कराए को, चले को, चराए को, अपनी और पराई मैली शक्तियों को भी बांधती हैं।
आगे भैरव पीछे 70 वीर
मंत्र में कहा गया है कि आगे भैरव और पीछे 70 वीर चलते हैं। वे उल्टी मार, पलटी मार, पछाड़ के मार, उटक के मार, पटक के मार से शत्रुओं का संहार करते हैं। वे शत्रुओं को छिन्न-भिन्न कर देते हैं और उन्हें धरती पर गिरा देते हैं। मरघट की महामाई काली की शक्ति से यह सब संभव होता है।
मंत्र गुरु के से दुहाई
यह मंत्र गुरु और महादेव की दुहाई देता है, साथ ही राजा रामचंद्र का भी स्मरण करता है। अंत में, "ओम राम काली महाकाली किल किली फट स्वाहा" के साथ मंत्र समाप्त होता है।

