संविधान भाग-5 (संघ) | RO/ARO 2025 Most Expected MCQs | कार्यपालिका-न्यायपालिका | Dr. Jyoti Ma'am

Ravi P Tiwari Official www.youtube.com

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो भारतीय संविधान के भाग 5 पर आधारित है, जिसमें संघ की कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है। इसमें संसदीय सरकार की विशेषताओं, राष्ट्रपति की शक्तियों और कार्यों, महाभियोग की प्रक्रिया, अध्यादेश जारी करने की शक्ति, महान्यायवादी की भूमिका और संसद के गठन जैसे विषयों को शामिल किया गया है। वीडियो में अनुच्छेदों और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लेख करते हुए, परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई है।

मुख्य बातें:

  • संसदीय सरकार की विशेषताएं और कार्यपालिका की भूमिका
  • राष्ट्रपति की शक्तियां, निर्वाचन प्रक्रिया और महाभियोग
  • अध्यादेश जारी करने की शक्ति और उसकी सीमाएं
  • महान्यायवादी की भूमिका और संसद का गठन

परिचय

इस वीडियो में भाग 5 के अंतर्गत संघ की कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका को शामिल किया जाएगा। इसमें विधायिका और न्यायपालिका के साथ-साथ कैग, एजीआई और एजीएस जैसे पदों पर भी चर्चा की जाएगी। कल होने वाली मैराथन में वे प्रश्न शामिल होंगे जो 2:00 बजे की प्रैक्टिस क्लास में नहीं कराए गए हैं, इसलिए यह सत्र महत्वपूर्ण है।

संसदीय सरकार की विशेषताएं

संसदीय सरकार को संघ सरकार या भारत सरकार के नाम से जाना जाता है। यह प्रणाली ब्रिटेन के संविधान से ली गई है, जहां कार्यपालिका विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है। अनुच्छेद 74 मंत्रिपरिषद की बात करता है, जो राष्ट्रपति को कार्यों में सहायता और सलाह देने के लिए होती है। अनुच्छेद 75(1) के अनुसार, प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर होती है। मंत्रिपरिषद व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति के प्रति और सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदाई होती है। ब्रिटेन में इसे वेस्ट मिनिस्टर प्रणाली कहते हैं।

संघ कार्यपालिका में शामिल

संघ कार्यपालिका में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, केंद्रीय मंत्रिपरिषद और कैग शामिल होते हैं। भाग 5 संघ की कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका से संबंधित है। अनुच्छेद 52 से 78 तक कार्यपालिका, 79 से 123 तक विधायिका और 124 से न्यायपालिका से संबंधित हैं।

राष्ट्रपति की कूटनीतिक शक्तियां

राष्ट्रपति के पास कूटनीतिक शक्तियां होती हैं, जिनके तहत वह विदेशी राजदूतों की नियुक्ति करता है और भारत से विदेश में राजदूतों को भेजता है। वह वैदेशिक, व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों का निर्धारण करता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा का दायित्व

अनुच्छेद 52 के अनुसार, भारत का एक राष्ट्रपति होगा, जिसका पद ब्रिटिश सम्राट के समान होगा, लेकिन वह निर्वाचित होगा, आनुवंशिक नहीं। अनुच्छेद 53(1) कहता है कि संघ की समस्त कार्यपालिकी शक्तियां राष्ट्रपति में समाहित होती हैं। अनुच्छेद 74 के अनुसार, राष्ट्रपति को उसके कार्यों में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होती है, जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होता है। अनुच्छेद 53(2) के अनुसार, तीनों सेनाओं का सर्वोच्च समादेशक राष्ट्रपति होता है, जो तीनों सेनाओं के अध्यक्षों की नियुक्ति करता है और युद्ध और संधि का संचालन करता है। परमाणु के उपयोग का निर्धारण प्रधानमंत्री करता है, लेकिन उपयोग करते समय अनुमति राष्ट्रपति के हाथ में होती है।

राष्ट्रपति का निर्वाचन

अनुच्छेद 54 के अनुसार, राष्ट्रपति का निर्वाचन एक निर्वाचक मंडल के सदस्य करेंगे, जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होंगे। 42वां संविधान संशोधन अधिनियम 1976 कहता है कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की राय मानने के लिए बाध्य है, जबकि 44वां संविधान संशोधन अधिनियम 1978 राष्ट्रपति को पुनर्विचार की शक्ति देता है। निर्वाचक मंडल की प्रक्रिया आयरलैंड के संविधान से ली गई है।

निर्वाचक मंडल और निर्वाचन प्रक्रिया

अनुच्छेद 54 निर्वाचक मंडल के सदस्यों के बारे में बताता है, जबकि अनुच्छेद 55 निर्वाचन की रीति या प्रक्रिया को बताता है। राष्ट्रपति का निर्वाचन अप्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा होता है, जिसमें एकल संक्रमणीय मत प्रणाली और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली का उपयोग होता है। मतदान गुप्त होता है। 1997 से 50 प्रस्तावक, 50 अनुमोदक और 15,000 की धनराशि आरबीआई में जमा करानी अनिवार्य है।

महाभियोग की प्रक्रिया

अनुच्छेद 60 में राष्ट्रपति की शपथ का प्रावधान है, जिसमें वह संविधान के संरक्षण की शपथ लेता है। अनुच्छेद 61 के अनुसार, राष्ट्रपति को संविधान के अतिक्रमण के आधार पर महाभियोग द्वारा हटाया जा सकता है। यह प्रक्रिया यूएसए से ली गई है और इसे अर्धन्यायिक प्रक्रिया कहते हैं। महाभियोग का प्रस्ताव किसी भी सदन में लाया जा सकता है, जिसके लिए 14 दिन पहले सूचना देनी होती है और उस सदन के 1/4 सदस्यों का हस्ताक्षर अनिवार्य है।

राष्ट्रपति की पदावधि और योग्यता

अनुच्छेद 56 राष्ट्रपति की पदावधि से संबंधित है, जो पद ग्रहण या शपथ ग्रहण की तारीख से 5 वर्ष तक होती है। राष्ट्रपति स्वेच्छा से त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को दे सकता है, जिसका पहला कर्तव्य इस बात की सूचना लोकसभा अध्यक्ष को देना है। अनुच्छेद 58 योग्यता और योग्यता से संबंधित है, जिसमें 35 वर्ष की आयु और लोकसभा का सदस्य बनने की योग्यता शामिल है। अनुच्छेद 59 शर्तें रखता है कि किसी भी परिस्थिति में राष्ट्रपति का वेतन, विशेषाधिकार और परिलब्धियां नहीं कटेंगे।

राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति

अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की शक्ति देता है, जो भारत शासन अधिनियम 1935 से लिया गया है। राष्ट्रपति को समाधान हो जाता है कि तत्काल कार्यवाही करना अनिवार्य है, तो वह अध्यादेश जारी कर सकता है। यह शक्ति तब प्रयोग की जाती है जब संसद का दोनों सदन या कोई एक सदन सत्र में ना हो। जारी किया गया अध्यादेश 6 सप्ताह तक मान्य है और इसे 6 माह तक बढ़ाया जा सकता है। राष्ट्रपति अध्यादेश संघ सूची और समवर्ती सूची के विषय पर लागू कर सकता है।

राष्ट्रपति की न्यायिक शक्ति और क्षमादान

राष्ट्रपति की न्यायिक शक्ति में क्षमादान शामिल है, जिसके तहत वह दंड विराम, दंड निलंबन और दंड घटाना जैसे कार्य कर सकता है। रूपांतरण क्षमादान नहीं होता है।

राज्यसभा के मनोनीत सदस्य

राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 सदस्यों का मनोनयन करता है, जो कला, विज्ञान, साहित्य और समाज सेवा में विशिष्ट योगदान दिए हों। इन सदस्यों को राष्ट्रपति के चुनाव में मत देने का अधिकार नहीं है, लेकिन उपराष्ट्रपति के चुनाव में मत देने का अधिकार है।

उपराष्ट्रपति का राष्ट्रपति के रूप में कार्य

अनुच्छेद 70 के अनुसार, जब किसी कारणवश राष्ट्रपति का पद रिक्त है, तो उपराष्ट्रपति उस पद का निर्वहन करेगा। यदि उपराष्ट्रपति का पद भी रिक्त है, तो भारत का मुख्य न्यायाधीश और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट का सीनियर जज इस पद का निर्वहन करेगा। ऐसी स्थिति में 6 माह के अंदर चुनाव कराना अनिवार्य है।

कैबिनेट और प्रधानमंत्री

भारतीय संविधान में कैबिनेट शब्द परिभाषित नहीं है, लेकिन इसका प्रयोग अनुच्छेद 352 में किया गया है। कैबिनेट का नेता प्रधानमंत्री होता है, जिसे सदन के सदस्य चुनते हैं।

महान्यायवादी और संसद

अनुच्छेद 76 में महान्यायवादी का उपबंध दिया गया है, जिसकी नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। महान्यायवादी सुप्रीम कोर्ट के जज बनने की योग्यता रखता है और भारत सरकार को सलाह देता है। वह भारत सरकार के खिलाफ मुकदमा नहीं लड़ सकता, लेकिन निजी प्रैक्टिस कर सकता है। वह किसी सदन का सदस्य नहीं होता, लेकिन प्रत्येक सदन में भाग ले सकता है, मतदान नहीं कर सकता।

संसद का गठन और राज्यसभा

अनुच्छेद 79 कहता है कि संघ के लिए एक संसद होगी, जो राष्ट्रपति और दो सदनों (राज्यसभा और लोकसभा) से मिलकर बनेगी। राज्यसभा राज्य का उच्च सदन है, जो स्थाई सदन है और कभी भंग नहीं होती। इसका गठन 1952 में किया गया था।

संसद सदस्यता और लोकसभा

कोई भी सदस्य संसद की सदस्यता से वंचित किया जा सकता है, यदि वह बिना किसी सूचना के 60 दिन गायब रहे। लोकसभा में सर्वाधिक प्रतिनिधि उत्तर प्रदेश राज्य से हैं।

लोकसभा में सीटें आरक्षित

लोकसभा में अनुसूचित जाति के लिए 84 सीटें और अनुसूचित जनजातियों के लिए 47 सीटें आरक्षित हैं। अनुच्छेद 330 के तहत एससी/एसटी को आरक्षण लोकसभा में दिया गया है।

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Transcript

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0:02 नमस्कार स्वागत है आपका आपके अपने संस्थान टारगेट में बिल्कुल थोड़ी सी लेट हुई लेकिन आए क्लास होगी जरूर होगी आनंदिता सारे लोग आ जाइए स्टार्ट करते हैं आज का सेशन लेकिन आज के सेशन के साथ-साथ मैं कुछ शेयर कर दूं भाग पांच शुरू करेंगे संघ की कार्यपालिका विधायिका न्यायपालिका यानी इसमें सब रहेगा विधायिका भी भाग पांच वाली पढ़ लेंगे न्याय न्यायपालिका भी पढ़ लेंगे। कैग एजीआई एजीएस भी पढ़ लेंगे। तब जाके हम भाग छह की ओर जाएंगे। और एक दिन में आज हम कह सकते हैं कि मान लीजिए 25 क्वेश्चन मैंने लिए हैं। लेकिन कल फिर वही 40 का रेशियो चलेगा जिससे जल्दी से जल्दी रिवीजन कर सके। कल सारे लोग तैयार रहिएगा

0:51 मैराथन के लिए। एक बात जरूर याद दिला दूं। मैराथन में मैंने वो क्वेश्चन लिया है जो मैंने आप लोगों को 2:00 बजे प्रैक्टिस नहीं कराया है। मैंने मैराथन में भाग पांच के क्वेश्चन वो वाले लिए ही नहीं है जो आपको पढ़ा दिया है। यानी मैराथन जो कल होगा 16 तारीख को वो आज तक जो पढ़ाया जाएगा उसके आगे का मिलेगा क्वेश्चन। ये वाले क्वेश्चन नहीं होंगे। इसलिए जरूर याद रखना मेरा जो आपके साथ लिंक चलने वाला है जो हम क्लास में आपको अपडेट कराए थे वो प्लस जो हम YouTube पर आपको 2:00 बजे करा रहे थे वो और ये सब मिला के कोर्स कंप्लीट है ये जरूर याद रखना ठीक है आयांश चलो भाई शुरू की जाए और मेरे बाद मैंने बताया ही

1:38 था हिस्ट्री लेंगे 17 तारीख को मुकेश सर 18 को गौरव निरंजन सर 19 को हिंदी फिर 19 को रवि सर के बाद फिर से हिंदी 20 को। चलिए स्टार्ट करते हैं आज के क्वेश्चन। क्वेश्चन क्या है? ये देख लीजिए। फिर बताइए मुझे। संसदीय सरकार को निम्न में से किस नाम से जाना जाता है? अगर मैं कहूं केंद्र सरकार की बात तो केंद्र में जो सरकार है उसे भारत सरकार या संघ सरकार के नाम से जाना जाता है। किसके नाम से जाना जाता है? भारत सरकार या संघ सरकार के नाम से जाना जाता है। लेकिन

2:24 बात करते हैं अगर संसदीय सरकार की तो संसदीय सरकार प्रावधान ब्रिटेन के संविधान से लिया गया है और ब्रिटेन में कहा जाता है कि कार्यपालिका अपने कार्यों के लिए विधायिका के प्रति जिम्मेदार होती है। विधायिका के प्रति जिम्मेदार होती है। और अगर मैं कहूं कि सरकार का मतलब कैबिनेट से होता है। कैबिनेट केंद्र और राज्य दोनों में होती है। मैंने आपको पढ़ाया था कैबिनेट जो होता है केंद्र और राज्य दोनों में होता है। केंद्र में कैबिनेट का प्रमुख प्रधानमंत्री और उसकी मंत्री परिषद होती

3:10 है। तो राज्य में कैबिनेट का प्रमुख मुख्यमंत्री और उसकी मंत्री परिषद होती है। ठीक है रमन मैं ठीक हूं। थैंक यू डिअर। अब सुनिए। इसके बाद विधायिका कार्यपालिका एक दूसरे के पूरक होते हैं। कार्यपालिका विधायिका के प्रति उत्तरदाई होती है। इसका मतलब भारत के संविधान में ब्रिटेन से जो भी प्रणाली लिया गया संसदीय शासन प्रणाली वो 75 दो 75 तीन में दिखता है। 75 दो क्या बताता है? या अगर मैं कह दूं अनुच्छेद 74 भारत में मंत्रीपरिषद की बात करती है कि भारत का एक मंत्रिपरिषद होगा। किसके लिए होगा? भारत के राष्ट्रपति को उसके कार्यों में सहायता और सलाह देने

3:57 के लिए होगा। तो 75 खंड एक कहता है कि प्रधानमंत्री की नियुक्ति भारत का राष्ट्रपति करेगा। सुनते जाना जल्दी-जल्दी। प्रधानमंत्री की नियुक्ति भारत का राष्ट्रपति करेगा और प्रधानमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करेगा। 75 दो कहता है मंत्रीपरिषद की नियुक्ति भारत में राष्ट्रपति करता है। वही इन्हें शपथ दिलाता है। वेतन भत्ते की बात करता है। इन्हें इनके पद से हटाता है। इसलिए मंत्रीपरिषद व्यक्तिगत रूप से उत्तरदाई होते हैं भारत के राष्ट्रपति के प्रति। आप इसको दूसरी लाइन में क्या कहते हैं? मंत्रीपरिषद राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत अपना पद धारण करते हैं। रिवीजन करा रही हूं। जल्दी मत करिएगा। जल्दी-जल्दी रिवीजन करिएगा। 75 खंड तीन क्या कहता है? सामूहिक उत्तरदायित्वता। मंत्री परिषद

4:43 सामूहिक रूप से केंद्र में लोकसभा के प्रति राज्य में विधानसभा के प्रति। क्यों? क्योंकि विधानसभा या लोकसभा निचला सदन कहलाता है और ये सरकार का सदन कहलाता है। इसलिए सामूहिक रूप से किसके प्रति उत्तरदाई होते हैं? लोकसभा या विधानसभा के प्रति। तो ये क्या हुआ? उत्तरदाई सरकार हुई। चूंकि उत्तरदायित्वता कार्यपालिका और विधायिका दोनों के लिए होता है और यह उत्तरदायित्वता एक दूसरे के पूरक बनाते हैं। इसलिए ब्रिटेन में इसे वेस्ट मिनिस्टर प्रणाली कहते हैं। अर्थात संसदीय सरकार को आप किन नामों से जानते हैं? सारे नामों से जानते हैं। क्लियर हो गया? सारे नामों से जानते हैं। केंद्र में संघ कार्यपालिका में होते हैं। संघ

5:28 कार्यपालिका यानी बात करें भाग पांच। किससे संबंधित है? संघ की कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका से। संघ की कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका से अनुच्छेद 52 से 78 तक पहला चैप्टर है क्या? कार्यपालिका। इसके बाद कहां आ जाते हैं? दूसरा चैप्टर जो विधायिका कहलाती है। कहां से कहां तक? तो यह आ जाते 79 से 123 तक जहां राष्ट्रपति अपना अध्यादेश 123 में जारी करता है। 124 से आ जाते हैं कहां? न्यायपालिका के लिए। याद रहेगा? ऐसे ही याद रखेंगे तभी समझ में आएगा। क्लियर हो गया? समझ में आ गया? चलिए भाई। केंद्र में

6:14 संघ कार्यपालिका में शामिल होते हैं तो आप कहते हैं संघ की कार्यपालिका में शामिल होते हैं भारत का राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति केंद्रीय मंत्रीपरिषद सेंट्रल काउंसिल मिनिस्टर जिसे आप कहते हैं सेंट्रल काउंसिल मिनिस्टर फिर आप कहते हैं कैग सही है इसमें प्रधानमंत्री मंत्री से ही सब आ जाते हैं तो राष्ट्रपति भी आता उपराष्ट्रपति भी आते हैं प्रधानमंत्री भी आते हैं लेकिन लोकसभा अध्यक्ष नहीं आता तो कौन आया? ए, बी और डी आए। कौन आया? ए, बी और डी आए। ठीक है? क्लियर हुआ? समझ में आ गया?

7:00 विदेशी भूमि में तैनात राजदूत और उच्चायुक्त का प्रतिनिधित्व करते हैं। आप सबको पता है कि राष्ट्रपति की एक आप डिप्लोमेटिक पावर लेते हैं। क्या कहते हैं आप उसे? कूटनीतिक शक्तियां। क्या नाम दिया है आपने? कूटनीतिक शक्तियां। इसको क्या कहते हैं? डिप्लोमेटिक पावर ऑफ़ प्रेसिडेंट। यह क्या करता है? कैसे कार्य करता है? प्रियंका, जूली, प्रवीण, आयांश, नेहमित, रमन ये ऐसे कार्य करता है कि विदेशी राजदूत की भारत में नियुक्ति ये करता है, स्वागत भी करता है और नियुक्ति भी करता है। भारत से विदेश में अपना राजदूत कहां

7:50 जाएगा, कौन नियुक्त होगा? यह भी बताता है। ठीक? यह भी बताता है। फिर किसके साथ? वैदेशिक संबंध होगा, व्यापारिक संबंध होगा, कूटनीतिक संबंध कैसे चलेगी? इसका निर्धारण कौन करता है? भारत का राष्ट्रपति। तो, इसका मतलब भारत के राष्ट्रपति के पास यह अधिकारिता है। राजदूतों की नियुक्ति करना, अपने देश से दूसरे देश में राजदूत भेजना, दूसरे देश के राजदूतों को, उनके संधि समझौतों को, उनके कूटनीतियों का सम्मान करना, उन्हें नियुक्ति प्रदान करना। शिवकांत समझ में आया अंजलि क्लियर? राष्ट्रीय सुरक्षा का दायित्व किसके ऊपर है? राष्ट्रीय सुरक्षा का दायित्व किसके ऊपर है? सवाल ये है। अगर राष्ट्रीय सुरक्षा की

8:35 बात करें तो आपको याद है अनुच्छेद 53 खंड दो। अनुच्छेद 53 खंड दो पढ़ने से पहले एक बार 52 देख लीजिए। 52 कुछ नहीं कहता। कहता है भारत का एक राष्ट्रपति होगा। और ऐसा राष्ट्रपति ब्रिटिश सम्राट के समान होगा। अर्थात पद यहीं से है। अमेरिका से नहीं है। याद रखना उपराष्ट्रपति का पद अमेरिका से है। राष्ट्रपति का नहीं ब्रिटिश सम्राट के समान होता है। किंतु निर्वाचित होता है। आनुवांशिक नहीं। फर्क क्या है? केवल एकमात्र फर्क है। ब्रिटिश सम्राट और भारत के राष्ट्रपति में एकमात्र फर्क क्या दिखेगा आपको कि ब्रिटिश सम्राट

9:22 आनुवांशिक होता है। जन्म से राजा राजा होता है। लेकिन भारत का राष्ट्रपति निर्वाचित होता है। कार्य दोनों का लगभग है। विधेयक पर अनुमति देना। और अगर पुनर्विचार के लिए लौटा दिया और दोनों सदन पुनर्विचार करें ना करें बाध्य हो जाता है हस्ताक्षर के लिए। सम्राट भी बाध्य है। यह भी बाध्य है। ठीक है? चलिए भाई बच्चों ये हो गया। 53 के खंड एक की बात करें तो 53 का खंड एक कहता है। सुन लीजिएगा। बहुत इंपॉर्टेंट है। बहुत जरूरी है आपके लिए। ठीक है? क्लियर? चलिए। संघ की समस्त कार्यपालिकी शक्तियां। संघ की समस्त कार्यपालिकी शक्तियां

10:10 भारत के राष्ट्रपति में समाहित होती है। पक्का है किस में समाहित होती है? भारत के राष्ट्रपति में समाहित होती है। क्लियर है? समझ में आया? चलिए भाई। जरूर बार-बार कह रहे हैं रिवीजन कर लेना। लेखन शैली आपकी विचारधारा आपके चरित्र का निर्धारण कर देती है। विशाल चरित्र आप कितना अच्छा कितना उत्तम रखते हैं। आपकी बोलचाल की भाषा में आपकी लेखन शैली में दिख जाता है और समझ में आ जाता है कि आपके

10:56 परिवार की क्या अच्छे-अच्छे संस्कार होंगे। मैं बार-बार कहती हूं लेखन शैली विचारधारा को इतना मजबूत करिएगा ना कि आपका स्टेटस यहां दिखे। जब आप लोग जाएं तो मुझे भी यहां से फक्र हो कि मैंने आपको पढ़ाया है। एक लाइन में बस याद रखिएगा। भारत के राष्ट्रपति में समाहित होता है। बार-बार पढ़ाया है मैंने। और यह भी कहा है कि 53 एक को जब भी पढ़िएगा 74 के साथ पढ़िएगा। भैया इसलिए इतनी मेहनत करते हैं क्वेश्चन आजकल इतने बड़े-बड़े होते हैं आंसर ए, बी, डी सही दो, चार, पांच सही। इससे ज्यादा कुछ नहीं आता। इसलिए रट के जाइएगा, पढ़ के जाइएगा। रिवीजन के साथ जाइएगा। समझ में आ गया? तो भारत के राष्ट्रपति में समाहित होती है और 74 कहता है राष्ट्रपति को उसके कार्यों में सहायता और सलाह देने के लिए कौन होता है? एक मंत्री परिषद होती है जिसका प्रमुख

11:43 प्रधानमंत्री होता है अपर्णा। याद आया क्लियर हुआ? समझ में आ गया? चलिए भाई अब इसके आगे एक क्वेश्चन और है। 53 एक और 74 को जब मिला के पढ़ लिए तो जान गए कि राष्ट्रपति अनिवार्य रूप से बाध्य हो गया मंत्री परिषद की सलाह मानने के लिए। ठीक है? चलिए। अब अनुच्छेद 53 खंड दो। क्या कहता है? सेना का सर्वोच्च समादेशक कौन से सेना का? तीनों सेनाओं का सर्वोच्च समादेशक कौन होता है? अगर हम लोग 1786 का अधिनियम पढ़ेंगे तो गवर्नर जनरल कौन था? जिसके लिए

12:28 1786 का आया था। आपको पता होगा कॉर्नवालिस आया था। तो सेनाओं का सर्वोच्च समादेशक उस समय गवर्नर जनरल होता था। लेकिन वर्तमान में वर्तमान में तीनों सेनाओं का सर्वोच्च समादेशक कौन होता है? तो तीनों सेनाओं का सर्वोच्च समादेशक राष्ट्रपति होता है जो तीनों सेनाओं के अध्यक्षों की नियुक्ति करता है। युद्ध और संधि का संचालन करता है। भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा का दायित्व किसी के हाथ में है तो भारत के राष्ट्रपति के हाथ में है। लेकिन दूसरी चीज याद रखना एक लाइन में परमाणु का यूज़ कैसे होगा? इसका निर्धारण प्रधानमंत्री करता है। जबकि यूज़ करते समय अनुमति इनके हाथ में है। कुछ क्वेश्चन अगर बदल दें तो जरूर याद रखिएगा कि कैसे इसको सॉल्व करना है। कैसे इसको

13:13 सॉल्व करना है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 54 के अनुसार राष्ट्रपति का निर्वाचन ऐसे निर्वाचक गण के सदस्य करेंगे जिसमें 52 मैंने आपको पढ़ाया भारत का एक राष्ट्रपति होगा। ऐसी परंपरा ब्रिटिश सम्राट से ली गई है। ब्रिटिश सम्राट के समान इसका पद है। फर्क क्या है? वो अनुवांशिक है। भारत का राष्ट्रपति निर्वाचक है। यानी हमेशा निर्वाचन के द्वारा आता है। क्यों? क्योंकि 26 जनवरी 1950 को भारत गणतंत्र बना और गणतंत्र का राष्ट्राध्यक्ष हमेशा निर्वाचित होता है। इसलिए सवाल पूछा जाता है भारत एक गणतंत्रात्मक देश है। कैसे आप मानेंगे? आप कहेंगे यहां का राष्ट्राध्यक्ष निर्वाचित होता है। यहां का राष्ट्राध्यक्ष निर्वाचित होगा तो होता है। इसके आगे कुछ

13:58 नहीं। 53 खंड एक राष्ट्रपति की स्थिति बताता है कि संघ की कार्यपालिका का मालिक तो है लेकिन बिना मंत्री परिषद के एक पद आगे नहीं बढ़ सकता। ठीक है? आपको मैं और याद दिला दूं। 42 वां संविधान संशोधन अधिनियम 1976 जो याद कराने वाला पॉइंट है मैं वो पढ़ा रही हूं आज। 42वां संविधान संशोधन अधिनियम 1976 कहता है राष्ट्रपति मंत्रीपरिषद की राय मानने के लिए बाध्य राष्ट्रपति मंत्रीपरिषद की राय मानने के लिए बाध्य है। ठीक है? एकदम से इसको रट डालिए। लेकिन 74वें संविधान संशोधन अधिनियम 1978

14:44 क्या करता है? यह कहता है कि राष्ट्रपति को एक शक्ति देते हैं पुनर्विचार के लिए। एक बार यह मंत्री परिषद की राय को पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है। और पुनर्विचार मंत्रीपरिषद करे या ना करे यानी लोकसभा और राज्यसभा अपने-अपने सदन में पुनर्विचार करे या ना करे वो एज इट इज़ ऐसे ही लौटा देना विधेयक तो राष्ट्रपति बाध्य हो जाएगा। लेकिन फर्क क्या है? पुनर्विचार का मतलब क्या है? राष्ट्रपति किसी विधेयक को कब पुनर्विचार के लिए लौटाएगा? कहीं नहीं लिखा है। हो सकता है राष्ट्रपति 2 महीने बाद लौटाए। हो सकता है राष्ट्रपति 4 महीने बाद लौटाए। भारतीय संविधान में कहीं नहीं है। और अगर राष्ट्रपति से 5 6 महीने बाद लौटाए ना तो भी आप अनुच्छेद 61 नहीं ला सकते। महाभियोग

15:30 याद रहेगा? याद रहेगा? क्लियर हुआ? 53 तो पढ़ा ही दिया। अब आ जाइए अनुच्छेद 54। सबसे पहला क्वेश्चन निर्वाचक मंडल किस देश से लिया गया? हम लोग पढ़ चुके थे। आयरलैंड के संविधान से। निर्वाचक मंडल। राष्ट्रपति का निर्वाचक मंडल, उपराष्ट्रपति का निर्वाचक मंडल। प्रक्रिया कहां से ली गई? आयरलैंड के संविधान से ली गई। जब तक निर्वाचक मंडल यानी इलेक्टोरल कॉलेज का गठन नहीं होगा तब तक किसी भी परिस्थिति में तब तक किसी भी परिस्थिति में भारत के राष्ट्रपति का निर्वाचन नहीं हो सकता। याद रहेगा

16:17 52 53 54 एक आ जाइए। 53 एक और दो पढ़ा दिया है। 54 में मैंने कहा कि राष्ट्रपति का निर्वाचन मंडल आयरलैंड से लिया। जब तक निर्वाचक मंडल का गठन नहीं होगा। ठीक? तब तक पूजा होगी। आज 4:00 बजे वाली भी होगी। कोशिश है 3:00 बजे वाली भी हो। इसीलिए 25 की आज। आज आज मिलेंगे आप लोगों से बात भी करनी है। निर्वाचक मंडल के बिना राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का निर्वाचन नहीं होगा। निर्वाचक मंडल में कौन शामिल होते हैं? तो सबसे पहले याद रख लीजिएगा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की अगर बात करें तो राष्ट्रपति 56 सॉरी 54 है।

17:03 निर्वाचक मंडल। ठीक। राष्ट्रपति का कि उपराष्ट्रपति का कितना है? जहां इनका निर्वाचन होता है पढ़ा चुके हैं। कोई एक शख्स मुझे बता दे उपराष्ट्रपति का निर्वाचन का आर्टिकल क्या है? ठीक है? अब सुनिएगा 54 क्या कहता है? भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचन में कौन शामिल होगा? भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचन में कौन शामिल होगा? कौन शामिल होगा? संसद यानी लोकसभा, राज्यसभा केवल और केवल निर्वाचित सदस्य। रट डालिए भैया। लोकसभा, राज्यसभा यानी संसद के सदन के

17:49 दोनों सदनों के केवल निर्वाचित शामिल होंगे। केवल निर्वाचित। थैंक यू जो 66 में गए हैं। 63 तो यह नहीं कहता। फिर राज्य की विधानसभा केवल निर्वाचित मैं बार-बार यह पॉइंट लिख रही हूं केवल निर्वाचित भैया याद रखना ना तो संसद के मनोनीत शामिल होंगे ना राज्य की विधानसभा के मनोनीत मनोनीत शामिल नहीं और कौन शामिल नहीं है विधान परिषद शामिल नहीं बीपी मतलब विधान परिषद शामिल नहीं कोई भी केंद्र शासित प्रदेश शामिल नहीं लेकिन 70वां संविधान संशोधन अधिनियम 1992 कहता है दिल्ली पुुडुचेरी शामिल है।

18:34 हालांकि वर्तमान में एक क्वेश्चन और याद कर लीजिए। वर्तमान में तीन केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं जिनके पास अपनी विधानसभा है। जम्मू कश्मीर, दिल्ली, पुुडुचेरी। लेकिन जम्मू कश्मीर को अभी भारत के संविधान के अनुच्छेद 54 का हिस्सा नहीं बनाया गया। जब बनाया जाएगा विधेयक लाकर बनाया जाएगा। जब बनाया जाएगा दोनों सदनों से विधेयक पारित करके कराया जाएगा। ठीक है? क्लियर हुआ? तो चलिए भाई, इसका मतलब क्या है? किसी भी सदन का मनोनीत शामिल नहीं होता। राज्य की केवल और केवल विधानसभा शामिल होती है और विधानसभा का केवल निर्वाचित मनोनीत नहीं। विधान परिषद कोई भी केंद्र शासित शामिल नहीं केवल और केवल दो शामिल है। दिल्ली पुडुचेरी। ठीक है? तो भारत के संविधान के अनुच्छेद 54 में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित

19:20 सदस्य शामिल है। बिल्कुल सही है। राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित शामिल है। बिल्कुल सही है। केवल ए में उल्लेखित सदस्य गलत। ए और बी दोनों में उल्लेखित सदस्य शामिल है। कौन शामिल नहीं है? ये भी मैंने पढ़ा दिया। ठीक है? राष्ट्रपति के चुनाव के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सत्य है? यानी आप यह जरूर याद रखना। अनुच्छेद 54 सदस्य के बारे में बताता है कि निर्वाचक मंडल का सदस्य कौन होगा? अनुच्छेद 54 किसके बारे में बताता है? निर्वाचक मंडल का सदस्य कौन होगा? और 55 किसको बताता है? निर्वाचन की रीति या प्रक्रिया क्या होगी? पॉइंट नोट कर लेना।

20:07 55 क्या बताता है? निर्वाचन की रीति या प्रक्रिया क्या होगी? रीति क्या है? अप्रत्यक्ष निर्वाचन होगा जिसे आप परोक्ष कहते हैं। कई बार मैंने देखा है हम इंग्लिश के क्वेश्चन को ढूंढने के बजाय हिंदी में ही परोक्ष गलती कराते हैं। पिछली बार बहुत बार बच्चों ने गलती किया है। अप्रत्यक्ष को परोक्ष कहते हैं। इसी को इंग्लिश में इनडायरेक्ट जब हिंदी के क्वेश्चन समझ में ना आए तो आप चुपचाप इंग्लिश वाले वर्ड पढ़ेंगे। ठीक है? क्लियर? फिर एकल संक्रमणी पढ़ा चुके हैं। मत प्रणाली और अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली। ये और कैसे होगा? गुप्त मतदान। बस चुप। ये चार प्रक्रिया रीति की जरूर याद रखिएगा।

20:56 उसके बाद याद रखना। 1997 से एक परिवर्तन हुआ है। 1997 से एक परिवर्तन क्या हुआ है? 50 प्रस्तावक, 50 अनुमोदक और 15,000 की धनराशि आरबीआई में जमा करानी यह अनिवार्यता है। ताकि जो सिंसियर सम्मानित सदस्य हो वही आ सके। कोई भी ना आ पाए। इसके लिए क्या किया गया? 50 प्रस्तावक, 50 अनुमोदक और 15,000 की धनराशि आरबीआई में जमा कराई गई है। कुल डाले गए वैध मतों का 1/6 भाग प्राप्त ना करने पर आपकी जमानत राशि जप्त हो जाएगी। इसके लिए 15,000 रखा गया आपकी क्रेडिट दिखाने के लिए। 1997 के पहले क्या था? कितने प्रस्तावक थे? 10 प्रस्तावक, 10 अनुमोदक और ढाई हजार की राशि। पॉइंट नोट

21:43 कर लेना। हो सकता है क्वेश्चन आ जाए। 10 प्रस्तावक, 10 अनुमोदक और ढाई हजार की धनराशि। ठीक है? इसके पहले कहां थे? 10 प्रस्तावक, 10 अनुमोदक, ढाई हजार की धनराशि। पॉइंट याद कर लेना। राष्ट्रपति के चुनाव के संबंध में क्या सत्य है? अगर राष्ट्रपति का चयन करने वाली पीठ कॉलेज में उल्लेखनीय रीतियां हो। यानी कह रहा है कि मान लीजिए निर्वाचक मंडल के सदस्य में कोई भी राज्य की विधानसभा भंग हो मतलब केंद्र शासित प्रदेश उस समय उसकी विधायिका भंग हो। तो राष्ट्रपति के रूप में किसी व्यक्ति के चुनाव पर सवाल उठाया जा सकता है। बिल्कुल गलत है। अनुच्छेद 71 पर सुप्रीम कोर्ट का जब निर्णय आया था तब ये

22:28 भी कहा गया था कि जब सुनिएगा क्या-क्या पॉइंट आया था। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में कोई विवाद होगा तो उसका निर्धारण केवल सर्वोच्च न्यायालय करेगा और उसका निर्णय अंतिम और विधिमान्य होगा। उसके विरुद्ध कोई अपील नहीं होगी। उसी में कहा गया था अगर कभी निर्वाचक मंडल में कोई भी टीम खाली है, कोई भी रिक्ति है तो इन परिस्थितियों में भी कभी भी भारत के राष्ट्रपति का निर्वाचन नहीं रोका जाएगा। ठीक है? क्लियर है? चलिए भाई। राष्ट्रपति पद के लिए नामांकित व्यक्ति को अपना नाम मत पत्र पर दर्ज कराने के लिए 50 मतदाता प्रस्तावक के रूप में 50 मतदाता समर्थक के रूप में चाहिए। तो केवल क्यू सही हुआ। पी

23:15 गलत है। ठीक है। अंजलि आना है। आना है भाई। ठीक है। भाई मेरे नाम का ज्योति कुछ भी गलत अर्थ ना लिखिए। ये जो आप लिखी है ये सब क्या है ये? वो जो कोडिंग की है यह कोडिंग सबके लिए थोड़ी है। कोडिंग वो होता है जो केवल अपने के लिए होता है। है ना? भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में राष्ट्रपति पर दोषारोपण का प्रावधान है? भैया आज ही रटना। आज ही रट डालो क्योंकि अब कल से इसका नंबर गया। अनुच्छेद 60 में आ जाइए।

24:03 शपथ है। भारत का राष्ट्रपति तीसरी अनुसूची में शपथ नहीं लेता। भारत का राष्ट्रपति तीसरी अनुसूची में शपथ नहीं लेता। ठीक है? कहां लेता है? अनुच्छेद 60 में लेता है। किसके समक्ष? भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष। अच्छा मान लीजिए अगर यह सवाल पूछ लिया जाए कि भारत का राष्ट्रपति किस बात की शपथ लेता है? एक लाइन में याद रखिएगा केवल एक चीज की लेता है संविधान के संरक्षण की क्योंकि वह संविधान का गार्डियन कहलाता है। एक लाइन में याद रख लेना संविधान के संरक्षण की शपथ लेता है। इसीलिए आप

24:50 अनुच्छेद 61 लाते हैं। एक ही आधार पे लाते हैं। संविधान के अतिक्रमण के आधार पे। कोई और आधार नहीं है। अनुच्छेद 61 जब भारत के राष्ट्रपति को उनके पद से हटाना हो तो आप क्या करते हैं? महाभियोग लाते हैं। कहां से लिया गया? यूएसए से लिया गया। इस प्रक्रिया का नाम क्या है? अर्धन्यायिक प्रक्रिया। क्या नाम है? अर्धन्यायिक प्रक्रिया। किस आधार पे लाते हैं? क्वेश्चन कई बार पूछा गया है। प्लीज याद रखना। एकमात्र आधार क्या है?कि चूंकि यह शपथ ही लेता है संविधान के संरक्षण का, इसलिए संविधान के अतिक्रमण पर लाया जा सकता है। इसलिए संविधान के अतिक्रमण पर ही लाया जा

25:38 सकता है। एक पॉइंट याद रहेगा? कितने दिन पहले सूचना देते हैं? 14 दिन पहले। किस सदन में लाते हैं? किसी भी सदन में। किसी भी सदन में। कितने सदस्यों का हस्ताक्षर अनिवार्य है? उस सदन के 1/4 सदस्यों का उस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर अनिवार्य है। इसी में चले आइए उपराष्ट्रपति के लिए। उपराष्ट्रपति के लिए जो संसदीय प्रक्रिया लाते उसे महाभियोग नहीं कहते। दो आधार पे लाते हैं। साबितिक कदाचार और असमर्थता। पॉइंट याद करते जाइए। मैंने खूब पढ़ाया है। साबितिक कदाचार और असमर्थता। सबसे पहले किस सदन में लाते हैं? उपराष्ट्रपति का मामला है तो राज्यसभा में क्यों? क्योंकि उसी का पदेन

26:23 सभापति है। उसी का पदेन सभापति है। 14 दिन पहले सूचना देकर एक चौथाई सदस्य के हस्ताक्षर से वहां भी लाया जाएगा। लेकिन महाभियोग जैसी प्रक्रिया होती है उसे संसदीय प्रक्रिया कहते हैं। महाभियोग नहीं कहते। संविधान का अतिक्रमण आधार नहीं होता। वहां दो आधार होता है। साबित कदाचार और असमर्थता। क्लियर हो गया? एक तो पांच संसद सदस्यों का विशेषाधिकार। आप यूं ही जाकर किसी संसद के सदस्य को सत्र चलते समय अरेस्ट नहीं कर सकते। आप पहले अध्यक्ष से मिलिए। तो उनको जो विशेषाधिकार है उसके बारे में है। ठीक है? चलिए 63 क्या कहता है? भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा। भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।

27:09 राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा सही है? क्वेश्चन ये है। कौन सा सही है? दोनों सदनों के सदस्य बहस में हिस्सा लेते हैं। परंतु केवल राज्यसभा के सदस्यों को मत देने का अधिकार है। गलत है। जब मैंने आपको बताया 1/4 सदस्य हस्ताक्षर करके प्रस्ताव ला दीजिए। सदन में ला दीजिए। 14 दिन पूर्व सूचना दे दीजिए लिखित कि महोदय आपके विरुद्ध अविश्वास आया है। यानी आपके विरुद्ध महाभियोग लाएंगे। क्लियर? तो जिस सदन में ले जाएंगे जिस भी सदन में चाहे मान लीजिए आपने किया है लोकसभा में मान लीजिए तो वहां उपस्थित

27:55 और मत देने वाले सदस्यों का दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित करिए यानी विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करना है फिर भेज दीजिए राज्यसभा में जरूरी नहीं कि लोकसभा में आए किसी में भी आ सकता है राज्यसभा भी क्या करें उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित कर दे। जिस तारीख को दूसरा सदन जो भी हो प्रस्ताव पारित करेगा उसी तारीख से मान लिया जाएगा राष्ट्रपति का पद रिक्त हो गया। भारत में अब तक महाभियोग से किसी का पद रिक्त नहीं हुआ है। ठीक है? अब जब हम बात करते हैं वाइस प्रेसिडेंट की तो सबसे पहले आप क्या करते? 14 दिन पूर्व सूचना। 1/4 सदस्य का हस्ताक्षर और सबसे पहले राज्यसभा में लाते हैं। राज्यसभा में क्या करते हैं आप? कुल सदस्यों के बहुमत से

28:42 प्रस्ताव पारित करते हैं। कुल सदस्यों का बहुमत प्रस्ताव पारित और भेज देते हैं लोकसभा को। यह नियम है। पहले राज्यसभा में ही आएगा उपराष्ट्रपति का और भेज देते हैं राज्य लोकसभा में। लोकसभा कुछ ना करें। साधारण बहुमत से स्वीकृति दे दें। अब वहां क्या होगा? उपराष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाएगा। दोनों में एक अंतर है जो मैंने अभी नहीं बताया। इसलिए नहीं बताया कि वो क्वेश्चन बन सकता है। मुझे बताना है। क्या अंतर है? यह समझिएगा। जब किसी भी सदन से पहले सदन से प्रस्ताव पारित होकर राष्ट्रपति के लिए दूसरे सदन में भेजा जाता है तो शर्त है कि दूसरा सदन जो भी होगा वो पहले एक न्यायिक जांच बैठाएगा और इस न्यायिक जांच में तय किया

29:30 जाएगा कि इसमें भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग का आधार सही है या नहीं। उस समय राष्ट्रपति या तो स्वयं या अपने प्रतिनिधि के माध्यम से अपना बचाव पक्ष रखता है और अगर पाया गया कि ये तर्क आधार सही है तब जाके दूसरा सदन इस पर कार्यवाही करके विशेष बहुमत से पारित करेगा। राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग तभी लाया जा सकता है जब वे राष्ट्रपति पद के लिए अयोग्य सिद्ध हो जाए गलत जब उन्होंने संविधान का अतिक्रमण किया हो। ए और बी दोनों ही नहीं। प्रश्न समझ में आ रहा है ना? एकदम ऐसा तो नहीं है ना कि हम रिवीजन नहीं कर पा रहे हैं। हम लोग छोड़ रहे हैं। राष्ट्रपति एक अध्यादेश जारी कर सकता है जब उसका समाधान

30:16 हो जाता है। जब उसको समाधान हो जाता है कि तत्काल कार्यवाही किया जाना आवश्यक है। 55 तक हमने देखा था। इसका आर्टिकल आप बताइए जल्दी से। 56 राष्ट्रपति की पदावधि है। और राष्ट्रपति की पदावधि कहां से काउंट होती है? याद दिला दूं। पद ग्रहण या आप इसे दूसरे शब्द में कहते हैं शपथ ग्रहण की तारीख से 5 वर्ष तक। ठीक? इसमें तीन प्रकार के क्वेश्चन बन सकते हैं जो जल्दी-जल्दी रिवीजन कर लीजिए। शपथ ग्रहण की तारीख से 5 वर्ष तक। क्या 5 वर्ष खत्म होने के बाद वो चला जाएगा? बिल्कुल नहीं। भारतीय संविधान की एक सबसे अनोखी विशेषता है। आप अपने पद पर तब तक बने रहेंगे जब तक आपका उत्तराधिकारी ना जाए। चाहे लोकसभा स्पीकर का मामला देख लीजिए। चाहे इनको देख लीजिए किसी को। तो

31:02 ये पद पर तब तक बना रहेगा। आज मान लीजिए 5 वर्ष पूरा हो गया। 10 दिन तक भी रहेगा। हो सकता है एक माह तक रहे जब तक इसका उत्तराधिकारी ना आ जाए। ठीक है? इस बीच मान लीजिए भारत का राष्ट्रपति चाहे कि मैं पद पर नहीं रहूंगा तो स्वेच्छा से त्यागपत्र दे दे। किसको देगा? उपराष्ट्रपति को। और उपराष्ट्रपति किसे देता है? राष्ट्रपति को। स्वेच्छा से त्यागपत्र राष्ट्रपति किसे देगा? उपराष्ट्रपति को। उपराष्ट्रपति किसे देता है? राष्ट्रपति को। सवाल यहां ये पूछा जाता है कि जब राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को देता है। उपराष्ट्रपति का पहला कर्तव्य क्या है? तत्काल त्वरित शीघ्र इस बात की सूचना लोकसभा अध्यक्ष को देना। पॉइंट याद कर लेना। इस बात की तुरंत सूचना लोकसभा अध्यक्ष को देना। लेकिन जब उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति को त्यागपत्र

31:48 देता है ना तो कोई फर्क नहीं पड़ता। राष्ट्रपति के पद के समाप्ति से छ माह पूर्व तक चाहे चुनाव हो जाना चाहिए। इनका चुनाव हो जाना चाहिए। उपराष्ट्रपति के लिए लिखा है शीघ्र से सीख। क्या लिखा है? शीघ्र से सीख। मामला खत्म। याद रहेगा 56? क्लियर हो गया? अब पूछा गया कि मान लीजिए कोई व्यक्ति था और उसने 1 वर्ष में ही उसका पद हट गया। तो नया जो चुना जाएगा क्या वो 4 वर्ष के लिए होगा? बिल्कुल नहीं। भारत में राष्ट्रपति का पद चाहे 2 दिन का हो, चाहे 2 दिन रहा हो या ना रहा हो। जब भी चुनाव होता है 5 वर्ष के लिए होता है बीच के खंड के लिए नहीं उपचुनाव जैसी प्रक्रिया नहीं है पॉइंट याद कर लेना अनुच्छेद 58 की बात

32:33 करें योग्यता और योग्यता आपको पता है 35 और लोकसभा का सदस्य बनने के योग्य खत्म बात जब इसका चयन हो तो किसी भी सदन का सदस्य ना हो अगर सदस्य है तो मान लिया जाएगा शपथ लेते समय कि उसने पिछला पद छोड़ दिया है पिछला पद छोड़ दिया है लाभ के पद पर ना हो पढ़ ही चुके थे 59 शर्तें रखता है कौन सी शर्त? किसी भी परिस्थिति में मेरा वेतन, विशेषाधिकार, परिलब्धियां कटेगा नहीं। ठीक है? कटेगा नहीं। अब तो समझ में आ गया 60 शपथ बता ही दिया था। 61 हो गया। अब आ जाइए कहां चलना है? 123 पहला क्वेश्चन बताइए। भारत के राष्ट्रपति के अध्यादेश का वर्णन कहां से लिया है आपने? अनुच्छेद 123 अध्यादेश कहां से

33:21 लिया? भारत शासन अधिनियम 1935 से। भारत शासन अधिनियम 1935 से लिया है। बात करो। ठीक है। थैंक यू आशीष जी। थैंक यू सो मच। आप लोगों को समझ में आता है बस इसके लिए। ठीक है? चलो भाई। भारत शासन अधिनियम 1935 से क्या कहता है? पहले ही लिख दिया है। बड़े-बड़े क्वेश्चन बन रहे हैं। फिर बता दें ए बी सी डी करके आ जाएगा। एक दो तीन करके आ जाएगा। आपको पढ़ना है। कहता है कि अगर राष्ट्रपति को समाधान हो जाता है कि तत्काल कार्यवाही करना या अविलंब कार्यवाही कार्यवाही करना अनिवार्य है क्योंकि परिस्थिति ऐसी है।

34:08 शर्त क्या है? कारण पूछा जाएगा तो यही कि अविलंब कार्यवाही तत्काल कार्यवाही करना अनिवार्य है। जब किसको पता चल जाए? कंफर्मेशन टू प्रेसिडेंट राष्ट्रपति को एहसास हो जाए। शर्त क्या है? शर्त है कि अध्यादेश आप किन परिस्थिति में लाएंगे? एक लाइन में शर्त याद कर लीजिए। जब संसद का दोनों सदन या कोई एक सदन सत्र में ना हो। जब संसद का दोनों सदन या कोई एक सदन सत्र में ना हो तब भारत का

34:54 राष्ट्रपति अपने अपने अविलंब कार्यवाही के तहत 123 का प्रयोग कर सकता है। राज्यपाल के लिए 213 है। जब राज्य विधानमंडल का दोनों सदन या कोई एक सदन सत्र में नहीं है और राज्यपाल को लगता है कि तत्काल कोई कार्यवाही करनी चाहिए। अविलंब निर्णय लेना है तो वो भी अध्यादेश जारी करता है। जारी किया गया अध्यादेश सबसे पहले छ सप्ताह तक मान्य है। छ सप्ताह के अंदर जो भी सदन सत्र में नहीं था आता है और उसको लगता है कि ये कानून बनना चाहिए वो इसकी स्वीकृति देता है अर्थात अनुमोदन देता है। तो आगामी छ माह तक यानी टोटल अध्यादेश कितने समय तक लागू होता है? छह माह छ सप्ताह। इसको आप दूसरे शब्द में

35:40 कहते हैं 7 माह तक चलता है। इसके बाद दोनों सदन को लगा कि विषय अच्छा है कानून बनना चाहिए तो दोनों सदन उस पर विधेयक पारित करा के कानून बना सकते हैं। समझ में आ गया? क्लियर हुआ? राष्ट्रपति अध्यादेश कहां लागू कर सकता है? संघ सूची और समवर्ती सूची के विषय पर। ठीक है? राज्यपाल अध्यादेश कहां लागू कर सकता है? राज्य सूची और समवर्ती सूची के विषय पर। याद रहेगा? चलिए किंतु संसद का केवल एक सदन सत्र में हो। संसद के दोनों सदन सत्र में हो। ठीक। कोई भी सदन सत्र में ना हो। ए और सी दोनों

36:26 सही है। मैम के अकॉर्डिंग सी नहीं है। मैम के अकॉर्डिंग डी है। या तो ए केवल एक सदन सत्र में हो एक नहीं है। तब भी तो कानून नहीं बनेगा। दोनों नहीं है तब भी कानून नहीं बनेगा। तो क्या है ये? ए और सी सही है। अब आयांश बताओ मैम के अकॉर्डिंग क्या होना चाहिए? डी होगा ना? पवन, प्रियंका, पूजा, प्रवीण, शिवकांश। क्लियर है स्वाति? निम्नलिखित में से राष्ट्रपति की कौन सी न्यायिक शक्ति उसकी परिभाषा से मेल नहीं खाती? अनुच्छेद 72 या 76 क्या लिख दूं? क्या लिख दूं? क्षमादान। 72 76 तो एजीआई है ना

37:12 न्यायिक शक्ति मतलब आप इसे क्षमादान कहते हैं गलत है न्यायिक शक्ति ये तो प्रक्रिया है ना पांच प्रकार के प्रतिहार प्रविलंब ऐसे करके शर्त है जब संसद का दोनों सदन या कोई एक सदन सत्र में ना हो। सही तो है। दोनों नहीं है। कोई भी सदन सत्र में नहीं है। संसद का केवल एक सदन सत्र में है। अब क्या पढ़ाओगे? बताओ। अब क्या पढ़ाओगे? मैं तैयार हूं। रूपांतरण पूर्ण क्षमादान। रूपांतरण क्षमादान होता है क्या? रूपांतरण का मतलब

37:58 क्या होता है? मान लीजिए कुछ आपको मृत्युदंड दिया गया था। तो इसको आजीवन कारावास में बदलोगे ना पूर्णता क्षमादान कैसे कर सकते हो बोलो कैसे कर सकते हो दंड विराम कम सजा देना भाई दंड विराम मान लीजिए कोई ऐसा व्यक्ति है जो अगर जिसको सजा दी गई है कठोर सजा और उस कठोर सजा का पालन करेगा तो वो मर जाएगा तो उस समय क्या किया जाता है कुछ समय के लिए विराम लगा दिया जाता है यही किया जाता है दंड निलंबन सजा को अस्थाई तौर पर टाल दीजिए। जब तक वो स्वस्थ हो जाए। दोनों एक ही है। दंड घटाना, सजा कम करना। मान लीजिए 10 वर्ष का कठोर कारावास था। मैंने पढ़ाया है तो 5 वर्ष का साधारण कारावास कर दीजिए

38:46 या 5 वर्ष का कठोर ही करिए। दो ही तो प्रक्रिया थी। ठीक है? क्लियर हुआ? तो पहला नहीं है। पहला नहीं है। रूपांतरण मतलब परिवर्तन प्रक्रिया। ठीक? प्रकृति बदल दीजिए। लेकिन यह नहीं है कि क्षमादान क्षमादान तो होता है पूर्णता क्षमा करना अर्थात अपोलॉजी यानी जैसे कि मैंने कोई अपराध किया ही ना हो ऐसा सजा मुक्त हुआ है। निम्न में से कौन भारत के राष्ट्रपति निर्विरोध चुने गए? अब ये सब तो ना पूछिएगा हमसे। बताएं मुझे

39:37 किरण क्या कह रही हैं आप नीलम बताइए नीलम संजीव रेड्डी की बात करें तो इनकी तो वास्तव में मुझे ये सबसे मेरे लिए फेवरेट पर्सन है। यह हर जगह निर्विरोध चुने गए इतने लोकप्रिय थे इतने लोकप्रिय थे कि हर जगह जहा भी आप इन्हें देखिएगा इनके विरोध में कोई खड़ा नहीं हुआ कोई भी नहीं खड़ा हुआ राज्यसभा के मनोनीत सदस्यों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा वक्तव्य सही है? ठीक। [प्रशंसा] भारत के राष्ट्रपति के चुनाव में उन्हें

40:22 मत देने का अधिकार नहीं है। भारत के उपराष्ट्रपति के चुनाव में उन्हें मत देने का अधिकार है। सोच के आंसर देना। हां, अध्यक्ष भी ये निर्विरोध थे। बिल्कुल सही है। चलिए। कौन सा वक्तव्य सही है? शुरू करो। अगर मैं कहूं भारत में राष्ट्रपति

41:08 राज्यसभा में 12 सदस्यों का मनोनयन करता है। सही है क्या? 12 सदस्यों का मनोनयन करता है। मुझे लगता है सही है। ठीक। कहां से लिया गया? यह प्रक्रिया आयरलैंड के संविधान से ली गई। किन्हें करता है जो कला, विज्ञान, साहित्य, समाज सेवा में विशिष्ट योगदान दिए हो। कला, विज्ञान, साहित्य, समाज, सेवा में विशिष्ट योगदान दिए हो उन्हें करता है।

41:54 चलिए भैया यानी उच्च सदन में 12 सदस्यों का मनोनयन करता है। ठीक है? अब सवाल ये कि क्या भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचन में जो निर्वाचक मंडल बनता है, उसमें यह मनोनीति शामिल है? कभी मैंने पढ़ाया है? बिल्कुल शामिल नहीं है। मैंने हमेशा पढ़ाया है लोकसभा और राज्यसभा यानी संसद के दोनों सदन के निर्वाचित शामिल है। राज्यों की विधानसभा के निर्वाचित शामिल हैं। मनोनीत का कहीं योगदान नहीं है। ठीक है? तो पहला। अब ये बताइए क्या अनुच्छेद 61 में शामिल होते हैं? ये बिल्कुल होते हैं। बुलाने में नहीं आते। ठीक। बुलाने में नहीं आते। कहां आते हैं संगीता? हटाने

42:41 में आते हैं। तो धोखा आपको पता नहीं कहां-कहां दिखता है। लेकिन धोखा तो सबसे ज्यादा संविधान में यहां है। बुलाते समय राष्ट्रपति को नहीं आए। हटाते समय भाग आए। ये कहानी जरूर याद रखिएगा। चलिए। भारत के उपराष्ट्रपति के चुनाव में उन्हें मत देने का अधिकार है। तो उठा लीजिए 66। कहता है भारत के उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में कौन निर्वाचक गण में शामिल होता है? केवल लेख लाइन में है संसद के दोनों सदन के सदस्य। निर्वाचित मनोनीत सभी शामिल हैं। राज्य विधानसभा शामिल नहीं। राज्य विधान परिषद शामिल नहीं। केंद्र शासित प्रदेश शामिल नहीं। क्लियर हो गया? तो एक और दो दोनों जिन्होंने बहुत राइट कहा ना थैंक यू सो मच। उपराष्ट्रपति

43:27 अधिकतम कितनी अवधि तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर सकता है? बहुत अच्छा क्वेश्चन है। और जल्दी से आंसर दीजिए। कहा गया जब किसी कारणवश पॉइंट नोट करना किसी कारणवश कौन सा कारण हो सकता है मृत्यु त्यागपत्र महाभियोग या कोई विशेष कार्य लिया जा सकता है के कारण भारत के राष्ट्रपति का पद रिक्त है। तो उस पद का निर्वहन कौन करेगा? अनुच्छेद

44:14 70 को अगर पढ़ लीजिए तो कहता है संसद के पास अधिकारिता है कि वह इस पर नियम बनाए। संसद ने क्या नियम बनाया? संसद ने कहा कि जब कभी किसी कारण से राष्ट्रपति का पद रिक्त है तो पहली प्रायोरिटी में उपराष्ट्रपति इस पद का निर्वाहन करेगा। कहे मान लीजिए उपराष्ट्रपति का पद भी रिक्त है। कहे कोई बात नहीं। तो दूसरी प्रायोरिटी में भारत का मुख्य न्यायाधीश चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया इस पद का निर्वहन करेगा। यह भी नहीं है। तो कहे तीसरी प्रायोरिटी में सुप्रीम कोर्ट का सीनियर जज सीनियर जस्टिस ऑफ सुप्रीम कोर्ट क्या करेगा? इस पद का

44:59 निर्वहन करेगा। कब तक करेगा? जब तक चुनाव करके भारत का राष्ट्रपति ना आ जाए। इसमें दो क्वेश्चन मैंने आपको बताना था वही ले आए हैं। क्वेश्चन यह कि जब भारत के राष्ट्रपति का पद खाली हो तो मैक्सिमम कितने समय में चुनाव कर लिया जाए? हमने कहा छह माह ऐसी कंडीशन छ माह के लिए नहीं होती। जब भारत का राष्ट्रपति 5 वर्ष तक कार्यकाल पूरा करता है तो उनके कार्यकाल पूरा होने के 2 माह पहले, एक माह पहले ठीक दो माह पहले, एक माह पहले, 20 दिन पहले निर्वाचन करा लीजिए। करा लीजिए। शब्द क्या कहता है? अनुच्छेद 56 भारत के राष्ट्रपति का पद शपथ ग्रहण की तारीख से 5 वर्ष तक होता है। 5 वर्ष के पूर्व भारत के

45:45 राष्ट्रपति का निर्वाचन हो जाना चाहिए। अर्थात उत्तराधिकारी आ जाना चाहिए। क्यों? क्योंकि अनुच्छेद 77 कहता है भारत सरकार के सभी कार्य राष्ट्रपति के नाम से होते हैं। पद रिक्त नहीं रह सकता। लेकिन जब मामला ऐसे हो त्यागपत्र ये सब कुछ तब उपराष्ट्रपति छह माह तक कार्य करेगा। जो भी इसमें हो चाहे पहली प्रायोरिटी वाला व्यक्ति हो दूसरी या तीसरी वाला छह माह तक करेगा। छह माह से ज्यादा नहीं इसलिए निर्वाचन छह माह के अंदर अवश्य हो जाना चाहिए। क्लियर? कैबिनेट का नेता होता है। भारतीय संविधान में कैबिनेट शब्द कहीं परिभाषित है?

46:33 कैबिनेट शब्द की परिभाषा कहां दी गई है? बताएं मुझे परिभाषा कहां दी गई है? 1952 अयांश ये क्या है? 1952 चलिए मैं ही डाउट क्लियर करूं। नो मतलब कहीं नहीं दी गई। नो मतलब कहीं नहीं दी

47:20 गई। कहीं नहीं है। पहले क्वेश्चन को देख लीजिए। कैबिनेट शब्द यानी मंत्रिमंडल शब्द की परिभाषा नहीं है। मंत्रिमंडल शब्द का प्रयोग किया गया है। मंत्रिमंडल शब्द का प्रयोग किया गया है केवल एक बार। बहुत डिटेल में पढ़ा दे रहे हैं क्योंकि मैराथन में ये क्वेश्चन नहीं आएंगे। बार-बार बता रहे हैं। मैराथन में दूसरे क्वेश्चन चलेंगे। ठीक है? कहां है? अनुच्छेद 352 में जब कहा गया भारत का राष्ट्रपति भारत में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करेगा लेकिन मंत्रिमंडल के लिखित परिभाष प्रतिवेदन पर लिखित रिपोर्ट पे ठीक है तो इसका मतलब क्या है इसका मतलब

48:09 अनुच्छेद 352 में केवल प्रयोग किया गया है परिभाषा नहीं प्रवीण स्वाति सलोनी क्लियर हुआ कहीं नहीं है अब क्या है अब आ जाइए कैबिनेट का वर्गीकरण भी कहीं नहीं है क्योंकि अब याद कर लीजिए 74 75 1 75 2 75 3 75 याद कर लीजिए कहीं नहीं दिया गया है। 74 कहता है कल होगी सलोनी। 74 कहता है भारत के राष्ट्रपति को उसके कार्यों में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी। मंत्रिमंडल शब्द है ही नहीं। मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा। वर्गीकरण है ही नहीं। 75 एक कहता है भारत

48:54 के प्रधानमंत्री की नियुक्ति भारत का राष्ट्रपति करेगा और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर भारत का राष्ट्रपति करेगा। 75 दो कहता है मंत्री परिषद व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति के प्रति उत्तरदाई होंगे। 753 कहता है मंत्री परिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति दाय उत्तरदायित्व होंगे। 75 पांच कहता है कोई भी बाहरी व्यक्ति प्रधानमंत्री या कोई भी कैबिनेट मंत्री बन सकता है। देखिए छह माह के अंदर सदस्यता किसी भी सदन की लेनी अनिवार्य है। ठीक है क्लियर हुआ? अब आ जाइए। कहीं नहीं लिखा है तो वर्गीकरण कौन करता है? कैबिनेट राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री गैर स्वतंत्र प्रभार उपमंत्री सचिव हम आप करते हैं। सुविधा के अनुसार करते हैं। व्यवहार में काम चलाने

49:40 के लिए करते हैं। ठीक है? क्लियर है? तो ये कौन है? कैबिनेट का नेता प्रधानमंत्री होता है। किसने चुना? वो सदन में सारे सदन के सदस्य अपने आप अपना अध्यक्ष चुन लेते हैं। क्लियर हो गया है? मंत्रिमंडल सचिवालय में किसका गठन किया जाता है ताकि मंत्रिमंडलीय सचिवालय में किसका गठन किया गया है ताकि सरकारी नौकरी और निजी दोनों क्षेत्र में ठप पड़ी निवेश परियोजनाओं पर नजर रखी जा सके तथा उनके क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं को जल्द से जल्द दूर किया जा सके बताइए

50:32 रत्नेश आपकी समस्या का समाधान कसम से मुझे बोलने की जरूरत नहीं मिली यही रह गई लेकिन ये समस्या का समाधान तो इनको दिखता नहीं तो हम कहां से बता दें आपको बताएं मुझे चलिए भैया मैं बता दूं बिल्कुल कुछ भी नहीं एक लाइन में परियोजना अनुवीक्षण दल पीएमजी के पास होता है। यह क्या करता है? यह दल समझ लीजिए पीएमजी दल क्या करता है? मंत्रिमंडलीय सचिवालय में किसका गठन किया गया है? यही पूछा जा रहा है ना? सरकारी और निजी दोनों क्षेत्र में ठप पड़ी वैकेंसी कैसी है? परियोजना कौन सी

51:18 बंद हो रही है? किसे आगे बढ़ाया जाए? कैसे आगे इनकी बाधाओं को दूर किया जाए? यह इनका कार्य है। एक बार में लिख दिया। इसे याद कर लीजिएगा। संविधान के किस अनुच्छेद में महान्यायवादी का उपबंध दिया गया है? एडवोकेट जनरल ऑफ स्टेट तो अटर्नी जनरल ऑफ इंडिया एजीआई एडवोकेट जनरल ऑफ स्टेट ठीक

52:03 यही लगाना नीलम इसीलिए कह रहे हैं राष्ट्रपति द्वारा इनको नियुक्त किया जाता लेकिन किसे जो सुप्रीम कोर्ट के जज बनने की योग्यता रखते हैं। पहला पॉइंट इसका मतलब वेतन, कार्यकाल सब कुछ इनके बराबर। याद रहेगा? राष्ट्रपति किसे करता है जो सुप्रीम कोर्ट का जज बनने की योग्यता रखते हो। बात समझ में आई? रतेश बात तो यही है यार अपनी ढपली अपना राग रोज हम लोग चिल्ला रहे हैं। पता नहीं ये कितने निर्दई कितने मतलब दुष्ट सरकार

52:51 है इसको समझ में नहीं इसमें क्या ही बोल दें हम आप बताइए। तो नियुक्त किसको करेगा जो सुप्रीम कोर्ट के जज बनने की योग्यता रखती हो? इसका मतलब महान्यायवादी के लिए क्या ये कह सकते हैं कि ये राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत पद धारण करता है? क्योंकि इसको हटाने के लिए किसी की जरूरत ही नहीं है। महान्यायवादी क्या कार्य करता है? भारत सरकार को सलाह देता है। विधिक मामलों में परामर्श देता है। लेकिन भारत सरकार के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं लड़ सकता। बाकी निजी प्रैक्टिस करेगा अपने जीवन यापन के लिए। क्यों? क्योंकि ये सरकार का स्थाई वकील नहीं होता। अस्थाई वकील होता है। जब सरकार को जरूरत पड़ती है, सरकार इन्हें बुलाती है। इनके दैनिक भत्ता के हिसाब से इनको पेमेंट करती है। बाकी आप निजी कार्य करिए। अब समझ में आया? दूसरा चीज

53:36 महान्यायवादी अपना निजी प्रैक्टिस कर सकता है। हमेशा पूछा जाता है कर सकता है। क्या महान्यायवादी किसी सदन का सदस्य होता है? बिल्कुल नहीं होता। बिल्कुल नहीं होता। ये प्रत्येक सदन में भाग ले सकता है। सदन की कार्यवाही देखता है। लेकिन अनुच्छेद 88 कहता है ये किसी भी सदन में मतदान नहीं कर सकता। मान लीजिए विधेयक पारित हो रहा हो और यह सोचे मतदान कर दे नहीं कर सकता। क्यों? क्योंकि सरकार का सदस्य स्थाई नहीं है और किसी सदन का सदस्य नहीं है। ठीक है वंदन अच्छा हुआ। बहुत बढ़िया। ना पूछो नीलम एलटी आई तो है। अब मेरे मुंह से निकल नहीं रहा है कि आप लोग एलटी पढ़िए। निकल ही नहीं रहा है।

54:21 मैं समझ रही हूं। रतेश मैं समझ रही हूं। इसीलिए तो मैंने कहा भी नहीं। क्या बोल दूं। आपसे बोलूं फिर आप कहे। मैंने कहा नहीं। मैंने कहा अगर आप लोगों को जी लो अपनी जिंदगी जाने दो। चलो भैया तो ये महान्यायवादी महाधिवक्ता ये अच्छा ये सर्वोच्च विधिक अधिकारी होता है। ये सवाल बहुत बार पूछा गया है। सर्वोच्च विधिक अधिकारी होता है। भैया यूपीएसआई और सुपर टेट वाले परेशान नहीं होंगे। 25 ही क्वेश्चन है। जल्दी से चल रहे हैं आप ही की तरफ। ठीक। यूपीएसआई चाहे मैं 10 मिनट बाद आऊं आऊंगी जरूर। आप लोग इंतजार करिए। सर्वोच्च विधिक अधिकारी या भारत का प्रथम विधिक अधिकारी कहलाता है। उसी प्रकार महाधिवक्ता राज्य का सर्वोच्च विधिक अधिकारी या राज्य का प्रथम विधिक अधिकारी कहलाता है। राज्यपाल के प्रसाद पर्यंत पद धारण करता है। हाई कोर्ट के न्यायाधीश

55:09 बनने की जो योग्यता रखता होगा उसी को रखा जाता है। आर्टिकल बताइए। मुझे ये पूछना था। मैंने पूछा नहीं। महाधिवक्ता का आर्टिकल बताइए। सब हम ही नहीं बताएंगे। मतदान नहीं कर सकता। यह भी किसी सदन में लेकिन भाग ले सकता है। स्थाई मैंने कहा सदस्य नहीं होते। निजी प्रैक्टिस कर सकते हैं। ठीक है? क्लियर? तो चलिए भाई। अनुच्छेद 76। ठीक। अब आइए 148 कैग है ना? कैग है ये उपराष्ट्रपति का निर्वाचन से संबंधित है। क्लियर हुआ? नहीं कविता ये मेरी कई क्लास। 165 थैंक यू। थैंक यू। थैंक यू। निम्नलिखित में से किसे लोकसभा की कार्यवाही में विशिष्ट निमंत्रण पर भाग लेने का अधिकार है? क्वेश्चन बहुत अच्छा है। सोच के बताना

56:03 कि इसे लोकसभा की कार्यवाही में विशिष्ट निमंत्रण पर भाग लेने का अधिकार है। महान्यायवादी है जब ये भाग लेता है। तब इसे दैनिक भत्ता मिलता है। जैसे सारे सदन के सदस्यों को मिलता है। सब कुछ मिलता है। लेकिन ये मतदान नहीं करेगा। ठीक है? भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद कहता है? संघ के लिए एक संसद होगी जो राष्ट्रपति और दो सदनों से मिलकर बनेगी जिनके नाम राज्यसभा और लोकसभा होंगे। भाग दो नागरिकता

56:50 जो पुराना वाला पढ़ाए थे याद होगा सबको भाग एक संघ राज्य क्षेत्र सीमा क्षेत्र नाम में परिवर्तन करने की अधिकारिता राष्ट्रपति के पास अनुच्छेद 79 भारत की एक संसद होगी जिसका तीन अंग होगा लोकसभा राज्यसभा और प्रेसिडेंट यह किसी भी सदन में कभी भाग नहीं लेता। लेकिन सदन का अभिन्न अंग माना जाता है। क्यों? क्योंकि लोकसभा राज्यसभा से कोई विधेयक पारित होता है तो राष्ट्रपति के पास जाता है हस्ताक्षर के लिए तभी यह कानून का स्वरूप लेता है। प्रथम राज्यसभा का गठन किस वर्ष किया गया? राज्यसभा राज्य का उच्च सदन।

57:37 फिर क्या है? स्थाई सदन। कभी भंग नहीं होती। कभी समाप्त नहीं होती। एक सवाल आपका पूरा करा रहे हैं। यह लाइन लिखकर कार्यकाल 6 वर्ष प्रत्येक 2 वर्ष पर कितने सदस्य प्रत्येक 2 वर्ष पर 1/3 लिख दूं? निर्वाचित होते हैं? इतने ही रिटायर्ड होते हैं।

58:24 ठीक जल्दी से बताइए 1952 प्रथम राज्यसभा का गठन अब सुनिए मैंने क्यों लिखा एक है विधान परिषद सब कुछ राज्यसभा जैसा लेकिन यह नहीं यह समाप्त हो सकती है मगर भंग भंग नहीं समाप्त हो सकती है मगर भंग नहीं। इसीलिए मैंने कहा आपको बता दें कोई भी सदस्य संसद की सदस्यता से वंचित किया जा सकता है। यदि बनी है कविता सबको भेजी जाती है।

59:15 अपर्णा नहीं भेजी जाती। भेजी तो जाती होगी। इस टेलीग्राम को तो तुमने ऐड किया ही नहीं होगा। यह कब से चल रहा है पता है? बिना किसी सूचना के 60 दिन यानी दो माह गायब रहे तब। बिना किसी सूचना के 60 दिन यानी दो माह गायब रहे तब। ठीक है? किसी सांसद के पद त्याग के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा सही है? सोचना बताना। पद त्याग उस तारीख से प्रभावी होगा जिस दिन अध्यक्ष पद त्याग को स्वीकार कर लेते हैं तथा पद त्याग स्वीकृत होने के बाद सदस्य के पास त्यागपत्र वापस लेने का विकल्प नहीं रहता है। बी कह रहा है अगर

1:00:01 सांसद ने अपना पद त्याग प्रभावी होने के लिए कोई भविष्य की तारीख निर्दिष्ट की है और यदि उसी दौरान अध्यक्ष ने त्यागपत्र स्वीकार कर लिया तो पद त्याग उसी तारीख से प्रभावी माना जाएगा। क्या सही है ये बताइए? तुम बताओ क्या लिख दें? 90 दिन तो कहीं है ही नहीं। 40 और 60 का आंकड़ा चलता है।

1:00:48 40 और 60 का आंकड़ा चलता है। सी केवल ए यहां तुम कैसे भविष्य निर्धारित कर सकते हो कि मैं भविष्य की इस तारीख को त्यागपत्र दूंगा। तुमको अधिकारिता नहीं है। तुमको अधिकारिता नहीं है। जब अध्यक्ष त्याग पत्र स्वीकार कर ले पद त्याग स्वीकृत होने के बाद आपके पास कोई विकल्प नहीं है। वापस लेने का तब ये थोड़ी कि उसी तारीख से प्रभावी होगा। मैं कह रहा हूं। भैया कौन हो तुम? सब कुछ तो सदन का अध्यक्ष है चाहे लोकसभा चाहे राज्यसभा। यही कंफ्यूजिया लो वहां मत कंफ्यूजिया आना पूर्णनी। लोकसभा में सर्वाधिक प्रतिनिधि निम्नलिखित में से किस राज्य से हैं? बताना है। 552

1:01:35 अधिकतम 545 पहले थे। दो सदस्य आंग्ल भारतीय वाले आपने हटा दिए। 104वां संविधान संशोधन अधिनियम 2019 जो 25 जनवरी 2020 से प्रभावी हुआ। आपने हटा दिए तो वर्तमान में 543 बचे। सबसे ज्यादा आप कहां से हैं? ये तो फिर रहेंगे हर जगह। लोकसभा में सबसे ज्यादा यही रहेंगे। ठीक। सही है क्या?

1:02:21 निम्नलिखित भारतीय राज्यों में से किस राज्य की लोकसभा में केवल एक सीट है? सवाल ये राज्यसभा में भी हम सब ज्यादा हैं। मिजोरम में केवल इनके पास एक सीट है। लोकसभा की कितनी सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है? 33 यानी 33% मतलब अगर मैं कहूं 1/3 केवल महिला के लिए सही है। एससी एसटी उनके अनुपात में है। उनके

1:03:07 जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण मिला है उन्हें। सही है। [प्रशंसा] 84 थैंक यू सो मच अनुसूचित जनजातियों के लिए लोकसभा में कितनी सीटें आरक्षित है? 47 किसके लिए है? 84 एससी 47 से इनकी अनुच्छेद याद है किसी को? अनुच्छेद किसी को याद है? 330 क्या है?

1:03:55 330 क्या है? अच्छा 47 पूर्णनी तुम ये लिख रही हो तो 25 तुमने लिख दिया है एससी के लिए। उनका वर्ग ज्यादा है। अनुच्छेद 330 क्या है? यह सवाल मैंने किया। स्वाति ठीक है। 47 333 क्या है अनीता? 330 तो मैंने पढ़ा है। हो सकता है मैंने गलत पढ़ा हो। आप मेरा सही करें। रमन हो सकता है मैंने पढ़ा हो। गलत पढ़ा हो। आप मुझे बताइए। एससी एसटी को आरक्षण लोकसभा में किस आर्टिकल द्वारा दिया गया है?

1:04:54 लोकसभा में अब बताएंगे आप पूजा विजय लक्ष्मी नीलम अपर्णा यह तो ठीक है नीलम 330 सही है 330 पक्का चलिए फिर ठीक है चलिए भाई इसका मतलब ये 25 क्वेश्चन हम लेकर आए थे। ये 25 क्वेश्चन लेकर आए थे। और इस 25 क्वेश्चन के बाद कल

1:05:42 मैराथन का जरूर याद रखिएगा। वो क्वेश्चन होंगे नहीं जो हमने आज तक किए हैं। फिर याद दिला दूं वो क्वेश्चन कल नहीं होंगे। कल 4:00 बजे शाम से हमारी मैराथन है। वो क्वेश्चन नहीं होंगे। ठीक? जो ये तुम ये बता रहे हो राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग क्वेश्चन समझो मैंने कहा लोकसभा में एससी एसटी को आरक्षण तो 330 है। थैंक यू सो मच थैंक यू।

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