The Mind-Gut Connection By Dr. Emeran Mayer | Hindi Book Summary | Book Insider | Book Summary

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो "द माइंड गट कनेक्शन" नामक पुस्तक पर आधारित है, जिसमें आंत और मस्तिष्क के बीच के गहरे संबंध को समझाया गया है। यह कहानी करण के जीवन के माध्यम से बताई गई है, जो पेट की समस्याओं और मूड स्विंग्स से जूझ रहा था। थेरेपी के माध्यम से, उसे पता चलता है कि आंत का स्वास्थ्य मानसिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है।

मुख्य बातें:

  • आंत (गट) को "दूसरा मस्तिष्क" माना जाता है, जिसमें 100 मिलियन से अधिक न्यूरॉन्स होते हैं।
  • आंत में रहने वाले बैक्टीरिया (माइक्रोबायोम) मूड और व्यवहार को प्रभावित करते हैं।
  • अस्वास्थ्यकर आंत एंग्जायटी, उदासी और डिप्रेशन जैसे लक्षणों को जन्म दे सकती है।
  • स्वस्थ आहार, प्रोबायोटिक्स, तनाव प्रबंधन और अच्छी नींद आंत और मस्तिष्क दोनों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।

परिचय

यह वीडियो "द माइंड गट कनेक्शन" नामक पुस्तक के बारे में है, जो आंत और मस्तिष्क के बीच के गहरे संबंध को बताती है। करण नामक एक व्यक्ति की कहानी के माध्यम से, वीडियो बताता है कि कैसे आंत का स्वास्थ्य मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

करण की समस्या

करण एक सामान्य जीवन जी रहा था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से उसे पेट में अजीब महसूस हो रहा था, जैसे गैस, कब्ज और उलझन। इसके अलावा, उसका मूड बहुत जल्दी-जल्दी बदलता था, और वह छोटी-छोटी बातों पर चिढ़ जाता था। थेरेपिस्ट से बात करने पर, उसे पता चला कि उसके पेट और मूड के बीच गहरा संबंध है।

गट-ब्रेन कनेक्शन

थेरेपिस्ट ने करण को समझाया कि मस्तिष्क और आंत एक दूसरे से लगातार बात करते रहते हैं। वेगस नर्व नामक एक लंबी वायर मस्तिष्क और पेट को जोड़ती है, और दोनों तरफ से सिग्नल आते-जाते रहते हैं। आंत में 100 मिलियन से अधिक न्यूरॉन्स होते हैं, और यह कई न्यूरोट्रांसमीटर जैसे सेरोटोनिन का उत्पादन करता है, जो सीधे मूड को प्रभावित करते हैं।

गट हेल्थ का महत्व

करण को पता चलता है कि अगर वह अपनी आंत की देखभाल करता है, तो उसका दिमाग भी बेहतर महसूस करेगा। डाइट, प्रोबायोटिक्स, स्ट्रेस मैनेजमेंट और नींद आंत के लिए महत्वपूर्ण हैं, और अप्रत्यक्ष रूप से मस्तिष्क को भी ठीक करते हैं।

करण का बदलाव

करण ने धीरे-धीरे अपनी जीवनशैली में बदलाव करना शुरू किया। उसने सुबह गर्म पानी पीना शुरू किया, अपनी डाइट में फर्मेंटेड फूड शामिल किए, शुगर और प्रोसेस्ड फूड को कम किया, और फल, सब्जियां और फाइबर युक्त खाना ज्यादा लेना शुरू किया। उसने स्ट्रेस को मैनेज करना भी शुरू किया, मेडिटेशन की कोशिश की, और उसका पेट हल्का और सेटल्ड महसूस करने लगा।

गट माइक्रोबायोटा

करण का दोस्त कबीर, जो एक मेडिकल रिसर्चर है, उसे गट माइक्रोबायोटा के बारे में बताता है। गट माइक्रोबायोटा में ट्रिलियन माइक्रोब्स होते हैं जो हमारी इम्यूनिटी, इमोशंस और ब्रेन केमिस्ट्री को प्रभावित करते हैं। अच्छे बैक्टीरिया सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर बनाते हैं, और इम्यूनिटी को भी कंट्रोल करते हैं।

इमोशनल रेगुलेशन

कबीर बताता है कि गट-ब्रेन एक्सिस इमोशनल बैलेंस का फाउंडेशन है। हेल्थी गट बैक्टीरिया एंग्जायटी, स्ट्रेस और डिप्रेशन को कम करते हैं, जबकि गट इम्बैलेंस मूड स्विंग्स और इमोशनल इनस्टेबिलिटी का कारण बन सकता है।

गट को नर्चर करना

करण माइक्रोबायोटा को समझने लगता है और गट-फ्रेंडली खाना खाता है। वह फर्मेंटेड फूड और हाई फाइबर वाली डाइट का प्रयोग करता है, और उसका मूड, एनर्जी और स्किन बेहतर होते हैं।

अवेयरनेस फैलाना

करण अपने दोस्त और रिश्तेदारों को भी गट हेल्थ के बारे में जागरूक करने लगता है। उसकी मम्मी को जॉइंट पेन और डाइजेशन की प्रॉब्लम होती थी, लेकिन फर्मेंटेड फूड और बेहतर स्लीप स्केड्यूल से उनकी एनर्जी बेहतर हो जाती है।

आंतरिक संतुलन

करण समझता है कि सबसे जरूरी बैलेंस हमारे अंदर होता है। अगर हम अपने गट को नर्चर करें, तो वह हमें मेंटल पीस और इमोशनल क्लेरिटी दे सकता है।

दोस्त के साथ ट्रिप

करण अपने दोस्त जतिन के साथ एक ट्रिप पर जाता है, जो उसे बर्गर, फ्राइज़ और सोडा जैसे अस्वास्थ्यकर भोजन खाने के लिए प्रोत्साहित करता है।

गट का प्रभाव

सिर्फ दो दिनों के अस्वास्थ्यकर भोजन के बाद, करण को पेट में भारीपन, चिड़चिड़ापन और माइंड फॉग महसूस होता है। उसे पता चलता है कि वेस्टर्न डाइट उसकी गट माइक्रोबियल डायवर्सिटी को नुकसान पहुंचा रही है।

माइक्रोबियल डायवर्सिटी

करण सीखता है कि वेस्टर्न डाइट माइक्रोबियल डायवर्सिटी को कम करती है और हानिकारक बैक्टीरिया को बढ़ावा देती है। गट माइक्रोबायोटा को वैरायटी पसंद होती है, और सेम टाइप का प्रोसेस्ड फूड बार-बार खाने से वह कमजोर हो जाते हैं।

फिर से हीलिंग

करण फिर से अपने गट को हील करने का फैसला करता है। वह शुगरी और फ्राइड आइटम्स बंद कर देता है, और फर्मेंटेड फूड, बीन्स, ओट्स, रॉ वेजिटेबल्स और फ्रूट्स को अपनी डाइट में शामिल करता है।

अवेयरनेस फैलाना

करण सोशल मीडिया पर गट हेल्थ के बारे में पोस्ट करने लगता है, और लोग उससे जुड़ने लगते हैं। वह दूसरों की हीलिंग जर्नी का भी हिस्सा बन रहा है।

तनाव और गट

कंपनी में एक बड़े प्रोजेक्ट के कारण करण तनाव में आ जाता है, और उसका खानपान और नींद अनियमित हो जाती है। उसे घबराहट होती है और सिर घूमने लगता है।

लीकी गट

करण को याद आता है कि क्रॉनिक स्ट्रेस गट परमेबिलिटी को प्रभावित करता है, जिससे लीकी गट हो सकता है। इससे हानिकारक बैक्टीरिया और टॉक्सिंस ब्लड स्ट्रीम में घुस सकते हैं, और बॉडी में क्रॉनिक इनफ्लेमेशन शुरू हो जाता है।

तनाव प्रबंधन

करण तनाव कम करने के लिए अपनी स्ेड्यूल को हल्का करने, डीप ब्रीथिंग, योगा और जर्नलिंग का अभ्यास करता है।

सेरोटोनिन और गट

करण को पता चलता है कि उसका हैप्पी केमिकल सेरोटोनिन 90% गट में ही बनता है, और जब उसका गट इनफ्लेम्ड है तो ब्रेन कैसे हैप्पी फील करेगा।

दूसरों को प्रेरित करना

करण अपनी जूनियर स्नेहा को भी गट हेल्थ के बारे में बताता है, और उसे ब्रीदीिंग एक्सरसाइज करने की सलाह देता है।

गट का गेट

करण हर टेंशन फील्ड सिचुएशन में पॉज करता है, गहरी सांस लेता है, और खुद से कहता है कि गट का गेट बंद रखना है, लीकेज नहीं चाहिए।

एंटीबायोटिक्स का प्रभाव

करण को बैक्टीरियल इंफेक्शन होता है और उसे एंटीबायोटिक्स लेने पड़ते हैं। एंटीबायोटिक्स लेने के बाद, उसे डाइजेशन में फर्क महसूस होता है, मूड स्विंग्स होते हैं, और माइंड फॉग जैसा फील होता है।

माइक्रोबायोम डैमेज

करण को पता चलता है कि एंटीबायोटिक्स सिर्फ हार्मफुल बैक्टीरिया को नहीं मारते, बल्कि हमारे गट के अच्छे माइक्रोब्स को भी खत्म कर देते हैं।

फिर से गट हीलिंग

करण फिर से गट हीलिंग शुरू करता है। वह फर्मेंटेड फूड्स को डेली रूटीन में वापस लाता है, प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स लेता है, और धैर्य रखता है।

सकारात्मक विचार

जैसे-जैसे उसके गट में सुधार होता है, वैसे-वैसे उसके थॉट्स भी पॉजिटिव होने लगते हैं।

ब्लॉगिंग

करण अपने एक्सपीरियंस को एक ब्लॉग में लिखना शुरू करता है, और लोग उससे कनेक्ट करने लगते हैं।

निष्कर्ष

करण जान चुका है कि गट ही वह जगह है जहां से हीलिंग शुरू होती है, और वहीं से हैप्पीनेस भी।

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Transcript

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0:00 हेलो फ्रेंड्स बुक इंसाइडर पर आप सभी का स्वागत है आज हम बात करने वाले हैं द माइंड गट कनेक्शन बाई अमेरन मेयर बुक के बारे में करण की जिंदगी पहले बहुत सिंपल थी एक 9:00 से 5:00 की जॉब वीकेंड्स पर थोड़ा Netflix और दोस्तों के साथ हैंग आउट लेकिन पिछले कुछ महीनों से करण को समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या हो रहा है पेट हमेशा अजीब सा लगता कभी गैस कभी कॉन्स्टिपेशन और कभी ऐसी उलझन जो समझ नहीं आती लेकिन सबसे बड़ी बात यह थी कि उसका मूड बहुत जल्दी-जल्दी बदलता था छोटी-छोटी बातों पर इरिटेट होना बेवजह एंग्जायटी महसूस करना और कभी-कभी तो ऐसा लगता जैसे सब कुछ मीनिंगलेस हो गया हो करण ने सोचा शायद काम का प्रेशर ज्यादा हो गया है या

0:47 फिर शायद वह थोड़ा ओवरथिंकिंग कर रहा है लेकिन जब यह फीलिंग्स हफ्तों तक नहीं गई तो उसने एक थेरेपिस्ट से बात करने का सोचा थेरेपिस्ट ने उसकी पूरी बात सुनी और एक सवाल पूछा तुम्हारे पेट का हाल कैसा रहता है करण थोड़ा हैरान हुआ उसने कहा मतलब पेट का मूड से क्या कनेक्शन थेरेपिस्ट ने मुस्कुरा कर जवाब दिया बहुत डीप कनेक्शन है एक्चुअली तुम्हारा ब्रेन और गट हर वक्त एक दूसरे से बात कर रहे होते हैं एक लंबी वायर है वेगस नर्व जो ब्रेन और पेट को आपस में जोड़ती है और यह सिर्फ एक तरफा कम्युनिकेशन नहीं है दोनों तरफ सिग्नल्स आते जाते रहते हैं तुम्हारा पेट सिर्फ खाना डाइजेस्ट करने के लिए नहीं है वह तुम्हारे मूड और बिहेवियर को भी कंट्रोल करता है करण को यकीन नहीं हुआ उसे लगा यह कोई नया वेलनेस ट्रेंड है या कोई सूडो

1:38 साइंस टाइप बात लेकिन थेरेपिस्ट ने कार्लली उसे समझाया कि गट को सेकंड ब्रेन भी कहा जाता है क्योंकि वहां 100 मिलियन से भी ज्यादा न्यूरॉन्स होते हैं ऑलमोस्ट जितने स्पाइनल कॉर्ड में होते हैं और वहां एक पूरा इकोसिस्टम होता है गट माइक्रोबायोम जिसमें ट्रिलियंस ऑफ बैक्टीरिया रहते हैं यह बैक्टीरिया सिर्फ डाइजेशन में हेल्प नहीं करते बल्कि कई न्यूरोट ट्रांसमिटर्स जैसे सेरोटोिन भी प्रोड्यूस करते हैं जो डायरेक्टली मूड को अफेक्ट करते हैं करंट को थोड़ा इंटरेस्ट आने लगा उसे याद आया कि जब उसका पेट सही चलता था वह ओवरऑल खुद को अच्छा फील करता था ज्यादा कॉन्फिडेंट ज्यादा काम लेकिन जब से पेट गड़बड़ है वह हर चीज में नेगेटिविटी ढूंढने लगा है थेरेपिस्ट ने उसे एक और एग्जांपल दिया कभी नोटिस किया

2:25 है जब तुम नर्वस होते हो तो पेट में हलचल होती है जैसे इंटरव्यू से पहले या कोई इंपॉर्टेंट बात बोलने से पहले करण ने हां में सिर हिलाया वो बटरफाई एंड स्टमक वाली फीलिंग एग्जैक्टली थेरेपिस्ट बोली वो इसी ब्रेन गट कनेक्शन की वजह से होती है तुम्हारा ब्रेन सिग्नल भेजता है कि तुम स्ट्रेस में हो और ग तुरंत रिएक्ट करता है लेकिन यही प्रोसेस उल्टा भी काम करता है अगर तुम्हारा गट अनहेल्दी हो तो वह ब्रेन को नेगेटिव सिग्नल्स भेजता है जिससे ए्जायटी सैडनेस और इवन डिप्रेशन जैसे सिम्टम्स हो सकते हैं अब करण पूरी तरह इंट्रीग्ड था उसने पूछा तो इसका मतलब अगर मैं अपने गट की केयर करूं तो मेरा माइंड भी बेटर फील करेगा थेरेपिस्ट ने मुस्कुराकर कहा बिल्कुल यही रीजन है कि आजकल मेंटल हेल्थ और गट हेल्थ को साथ-साथ

3:15 देखा जाता है डाइट प्रोबायोटिक्स स्ट्रेस मैनेजमेंट स्लीप यह सब गट के लिए इंपॉर्टेंट है और इनडायरेक्टली तुम्हारे ब्रेन को भी हील करते हैं करण को अपनी लाइफ की बहुत सारी चीजें अब समझ आने लगी पिछले कुछ महीनों में वह जंक फूड पर डिपेंड हो गया था ज्यादा ऑयली खाना बाहर का प्रोसेस्ड फूड कम पानी पीना नींद डिस्टर्ब रहना और फिजिकल एक्टिविटी ऑलमोस्ट जीरो शायद यही वजह थी कि उसका गट खराब हुआ और उसके साथ ही उसका माइंड भी उस दिन के बाद करण ने एक फैसला लिया वो अपने गट को हील करेगा लेकिन वह कोई ओवरनाइट चेंज नहीं चाहता था उसने धीरे-धीरे शुरुआत की हर मॉर्निंग एक गिलास वार्म वाटर के साथ दिन की शुरुआत की फिर उसने अपनी डाइट

4:03 में फर्मेंटेड फूड इंक्लूड करना शुरू किया दही अचार और घर का बना कांजी उसने शुगर और प्रोसेस्ड फूड को धीरे-धीरे कम किया और फ्रूट्स वेजिटेबल्स और फाइबर रिच खाना ज्यादा लेना शुरू किया सिर्फ डाइट नहीं करण ने अपने स्ट्रेस को भी मैनेज करना शुरू किया पहले वह छोटी-छोटी बातों पर रिएक्ट कर जाता था लेकिन अब वह खुद को रोक कर डीप ब्रीथिंग करता उसने मेडिटेशन की कोशिश की पहले अजीब लगा लेकिन कुछ हफ्तों में उसका माइंड थोड़ा शांत लगने लगा और सबसे ज्यादा नोटिसेबल चेंज यह था कि उसका पेट हल्का और सेटल्ड फील करने लगा एक दिन कर्ण अपने ऑफिस में काम कर रहा था और उसका बॉस अचानक उसके पास आया और बोला "कर्ण तुम आजकल बहुत फोकस्ड लग रहे हो सब कुछ टाइम

4:51 पर और नीटली हैंडल कर रहे हो वेल डन करण ने मुस्कुरा कर थैंक्स कहा लेकिन मन में सोचने लगा कुछ महीने पहले यही काम बहुत ओवरवेल्मिंग लगता था तब वह खुद पर डाउट करता था हर चीज कॉम्प्लिकेटेड लगती थी लेकिन अब वह क्लेरिटी फील कर रहा था रात को करण घर पहुंचा और बालकनी में बैठकर चाय पीते हुए अपने अंदर के बदलाव को महसूस किया उसे अब समझ आ गया था कि हेल्थ सिर्फ एबीएस या मसल्स की बात नहीं होती असली हेल्थ वो होती है जहां दिमाग और शरीर एक टीम की तरह काम करें वो सिग्नल्स जो वेगस नर्व से रोजाना भेजे जाते हैं वही डिफाइन करते हैं कि हम दुनिया को कैसे देखते हैं कैसे रिएक्ट करते हैं और अपने आप को कैसे फील करते हैं करण अब अपने पेट की बात

5:38 सुनना सीख चुका था अगर कभी हल्का भारीपन या अनइजीनेस महसूस होती तो वह समझ जाता कि कुछ गड़बड़ है शायद खानपान या स्ट्रेस अगर आपको हमारी फ्री समरी अच्छी लगती है तो आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं हमारी मेंबरशिप खरीद सकते हैं या हमें यूपीआई के थ्रू सपोर्ट कर सकते हैं अब समरी पर वापस चलते हैं और वह खुद को जेंटली ट्रीट करता कोई हारश डाइट नहीं बस थोड़ी केयर थोड़ी अवेयरनेस धीरे-धीरे उसका कॉन्फिडेंस वापस आने लगा अब वह खुद को लेकर डाउटफुल नहीं रहता था उसे पता था कि अगर माइंड अच्छा फील नहीं कर रहा तो शायद गट कुछ सिग्नल दे रहा है और वह उसे सुनने के लिए तैयार था यह कहानी सिर्फ करण की नहीं है हम सबके साथ ऐसा होता है कभी

6:24 माइंड गड़बड़ करता है कभी पेट लेकिन दोनों का रिश्ता बहुत गहरा है गट सिर्फ खाने का रास्ता नहीं वो एक इंटेलिजेंट सिस्टम है जो हमारे इमोशंस थॉट्स और बिहेवियर्स को साइलेंटली कंट्रोल करता है और जब हम उसे देते हैं एक अच्छा खाना थोड़ा आराम थोड़ी एक्सरसाइज तो वह भी हमें रिटर्न में पीस एनर्जी और क्लेरिटी देता है इसलिए अगली बार जब आप खुद को एशियस या अपसेट फील करें तो सिर्फ दिमाग को ब्लेम मत दीजिए थोड़ा अपने पेट से भी बात करिए शायद वह कुछ कहने की कोशिश कर रहा है क्योंकि असली कनेक्शन सिर्फ वाईफाई से नहीं गट से भी होता है करण की जिंदगी अब काफी बेटर चल रही थी पिछले कुछ महीनों में उसने अपने गट की जो केयर की थी उसका असर अब क्लियरली दिखने

7:11 लगा था उसका पेट सेटल्ड रहता एनर्जी लेवल हाई रहता और सबसे बड़ी बात उसका मूड अब पहले जैसा अप एंड डाउन नहीं होता था हर दिन अब ज्यादा बैलेंस्ड लगता था लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने उसे गट के बारे में और डीपर लेवल पर सोचने पर मजबूर कर दिया उसका एक पुराना दोस्त कबीर जो अब एक मेडिकल रिसर्चर बन चुका था कई साल बाद शहर लौटा था दोनों ने तय किया कि एक कैफे में मिलकर लंबी बात करेंगे कैफे में बैठते ही कबीर ने गौर किया कि करण की पर्सनालिटी में कुछ बदलाव आया है तू पहले इतना शांत नहीं था करण कबीर ने चाय का एसआईपी लेते हुए कहा करण मुस्कुराया हां मैंने थोड़ी लाइफ स्टाइल चेंज की है खासकर अपनी गट हेल्थ पर काम किया कबीर की आंखों में

8:00 इंटरेस्ट चमक उठा नाइस तो तूने गट माइक्रोबायोटा के बारे में कुछ पढ़ा है क्या करण थोड़ा कंफ्यूज हुआ माइक्रोबायोटा मतलब बैक्टीरिया वगैरह एग्जैक्टली कबीर थोड़ा एक्साइटेड हो गया गट माइक्रोबायोटा मतलब वो ट्रिलियंस ऑफ माइक्रोब्स जो हमारे डाइजेस्टिव सिस्टम में रहते हैं लेकिन इनका काम सिर्फ डाइजेशन नहीं होता यह हमारी इम्यूनिटी इमोशंस और ब्रेन केमिस्ट्री तक इन्फ्लुएंस करते हैं करण अब पूरी तरह अटेंटिव था मतलब मेरे पेट में जो बैक्टीरिया हैं वह मेरे मूड और इम्यून सिस्टम दोनों को कंट्रोल करते हैं कबीर ने सिर हिलाया हां एक्चुअली जब तूने गट फ्रेंडली फूड खाना शुरू किया जैसे प्रोबायोटिक्स फाइबर रिच खाना तो तूने

8:48 अपने माइक्रोबायोटा को स्ट्रांग किया और वही माइक्रोब्स अब तेरे लिए सेरोटोिनिन डोपामिन जैसे न्यूरो ट्रांसमीटर्स बना रहे हैं सेरोटोनिन जिसे फील गुड केमिकल भी कहते हैं उसका 90% हिस्सा एक्चुअली गट में प्रोड्यूस होता है ब्रेन में नहीं करण की आंखें फैल गई मुझे तो हमेशा लगता था कि यह सब ब्रेन का काम है अक्सर लोग यही सोचते हैं कबीर ने कहा लेकिन अब साइंस ने यह प्रूव कर दिया है कि गट माइक्रोबायोटा हमारा सेकंड इम्यून सिस्टम और सेकंड ब्रेन दोनों की तरह काम करता है चाय की चुस्कियों के बीच करण को अपनी जिंदगी के कुछ पुराने मोमेंट्स याद आने लगे वो दिनों जब उसे बार-बार कोल्ड कॉफ और छोटे इनफेक्शंस होते थे वो समझता था कि उसकी इम्यूनिटी वीक है क्योंकि वह बाहर का खाना खाता था लेकिन अब जब वह हेल्थी खाना खा

9:39 रहा है तो ऐसी प्रॉब्लम्स ऑलमोस्ट डिसअपीयर हो गई हैं तो माइक्रोबायोटा इम्यूनिटी भी कंट्रोल करता है करण ने पूछा बिल्कुल कबीर ने जवाब दिया गट में जो अच्छे बैक्टीरिया होते हैं वो ना सिर्फ हार्मफुल माइक्रोब से फाइट करते हैं बल्कि बॉडी को रेगुलेट भी करते हैं कि कब किस पैथोजन के खिलाफ स्ट्रांग रिएक्शन देना है और कब नहीं बेसिकली गट माइक्रोबायोटा इम्यून सेल्स को ट्रेन करता है जैसे एक टीचर स्टूडेंट को ट्रेन करता है और अगर माइक्रोबायोटा वीक हो जाए तो इम्यून सिस्टम कंफ्यूज्ड हो जाता है कभी ओवर रिएक्ट करता है कभी अंडर रिएक्ट करण को अब समझ आने लगा कि उसके अंदर कितनी सारी अनसीन चीजें चल रही हैं जिनके बारे में वह कभी सोचता भी नहीं था उसकी लाइफ में इमोशंस और हेल्थ हमेशा मिस्ट्री रहे थे

10:25 लेकिन अब धीरे-धीरे सब कनेक्ट हो रहा था और इमोशनल रेगुलेशन करण ने उत्सुक होकर पूछा वह भी माइक्रोबायोटा के कंट्रोल में है कबीर ने कहा ग ब्रेन एक्सेस सिर्फ एक कम्युनिकेशन चैनल नहीं है यह इमोशनल बैलेंस का फाउंडेशन है अगर ग बैक्टीरिया डायवर्स और हेल्थी हैं तो वह ऐसे केमिकल प्रोड्यूस करते हैं जो ए्जायटी स्ट्रेस और डिप्रेशन को नेचुरली रिड्यूस करते हैं लेकिन अगर गट इमंबैलेंस हो जाए तो मूड स्विंग्स और इमोशनल इनस्टेबिलिटी कॉमन हो जाते हैं करण ने गहरी सांस ली उसे अब अपनी ओल्ड हैबिट्स पर थोड़ा रिग्रेट हो रहा था वो दिनों जब वह रात-रात भर जागकर चिप्स और कोला में डूबा रहता था उसे लगता था वह जस्ट चिलिंग कर रहा है लेकिन अब समझ में आ

11:13 रहा था कि वह धीरे-धीरे अपनी इमोशनल और फिजिकल हेल्थ खुद ही डैमेज कर रहा था कबीर ने उसकी सोच को पढ़ते हुए कहा देख हम सब मिस्टेक्स करते हैं लेकिन अब जब तू अवेयर है तो तू खुद को रिपेयर भी कर सकता है और सबसे अच्छी बात यह है कि गट माइक्रोबायोटा को रिकवर होने में ज्यादा टाइम नहीं लगता कुछ हफ्तों की सही डाइट और रेस्ट से काफी फर्क आता है उस शाम के बाद करण की क्यूरियोसिटी और बढ़ गई अब वह सिर्फ गट फ्रेंडली खाना नहीं खा रहा था बल्कि वह माइक्रोबायोटा को समझने लगा था जैसे कोई गार्डनर अपने गार्डन को समझता है हर फ्रूट वेजिटेबल और दही का स्पून उसे ऐसा लगता जैसे वह अपने अंदर के माइक्रोस्कोपिक दोस्तों को खुश कर रहा है वो अब

11:59 एक्सपेरिमेंट भी करता कुछ दिन वो फर्मेंटेड फूड ज्यादा खाता तो कभी हाई फाइबर वाली डाइट और हर बार उसका मूड एनर्जी और इवन स्किन तक बेटर लगती एक दिन उसने कैजुअली मिरर में देखा तो लगा कि चेहरा थोड़ा ग्लो कर रहा है वो हंस पड़ा शायद मेरे ग बैक्टीरिया भी खुश हैं आज कुछ हफ्तों बाद ऑफिस में एक प्रोजेक्ट डेडलाइन के दौरान पूरी टीम पर स्ट्रेस था लेकिन करण सरप्राइजिंगली काम था जब सब पैनिक कर रहे थे तब वह सबको ऑर्गेनाइज करने में हेल्प कर रहा था कामली कम्युनिकेशन कर रहा था और खुद भी फोकस्ड बना हुआ था उसकी कोलीग ने मजाक में पूछा तू क्या मेडिटेशन करके आया है आज करण ने मुस्कुरा कर कहा नहीं बस मेरे अंदर के बैक्टीरिया खुश हैं

12:46 सब हंस पड़े लेकिन करण के लिए यह जोक नहीं था यह उसकी जिंदगी की सच्चाई बन चुकी थी अब करण अपने दोस्त रिश्तेदारों को भी अवेयरनेस देने लगा था उसकी मम्मी को अक्सर जॉइंट पेन और डाइजेस्टिवन की प्रॉब्लम होती थी उसने मम्मी को भी धीरे-धीरे फर्मेंटेड फूड देना शुरू किया उन्हें शुगर कम करने की सलाह दी और उनकी स्लीप स्केेड्यूल ठीक करवाया 2 महीने में उनकी एनर्जी पहले से बहुत बेटर हो गई थी करण को अब समझ आ गया था कि हमारा शरीर एक कॉम्प्लेक्स सिस्टम है और गट माइक्रोबियोटा उसका अनसीन बट पावरफुल पार्ट है यह टाइनी ऑर्गेनिज्म्स ना सिर्फ खाना पचाते हैं बल्कि इम्यून सिस्टम को शील्ड देते हैं ब्रेन के लिए हैप्पी केमिकल्स बनाते हैं और हमें इमोशनली स्ट्रांग रखते हैं एक बार उसने गार्डन में

13:35 बैठकर सोचा हम हमेशा आउटर वर्ल्ड में बैलेंस ढूंढते हैं लेकिन सबसे जरूरी बैलेंस तो हमारे अंदर होता है अगर हम अपने गट को नर्चर करें तो वह हमें वह मेंटल पीस और इमोशनल क्लेरिटी दे सकता है जो हम दुनिया भर की थेरेपी और मोटिवेशन में ढूंढते हैं अब करण के लिए हेल्थ का मतलब सिर्फ जिम या सिक्स पैक नहीं रहा अब वह समझता था कि असली स्ट्रेंथ भीतर से आती है उन ट्रिलियंस ऑफ टाइनी फ्रेंड्स से जो हर पल उसके अंदर अपना काम कर रहे हैं साइलेंटली लॉयली और यह सब जर्नी एक सिंपल रियलाइजेशन से शुरू हुई थी कि गट और ब्रेन कनेक्टेड है करण अब हर सुबह अपने ब्रेकफास्ट के साथ अपने गट माइक्रोबायोटा को मेंटली थैंक्स कहता था क्योंकि उसने

14:21 सीख लिया था कि अगर वह अपने अंदर की दुनिया को हील करे तो आउटर वर्ल्ड अपने आप हील होने लगती है और इस बार वह सिर्फ सर्वाइव नहीं कर रहा था वह ट्रूली थ्राइव कर रहा था करण की जिंदगी अब सही दिशा में चल रही थी हर सुबह उसका रूटीन काफी डिसिप्लिंड हो चुका था उठते ही हल्का वार्म वाटर फिर थोड़ा स्ट्रेचिंग और ब्रेकफास्ट में कुछ गट फ्रेंडली खाना जैसे दही बनाना ओट्स और कभी-कभी फर्मेंटेड आइडली डोसा अब वो सिर्फ खाना नहीं खा रहा था वो सच में अपने अंदर की माइक्रो वर्ल्ड को नरिश कर रहा था लेकिन जिंदगी तो हमेशा एक सीधी रेखा नहीं होती एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिससे करण को एक नई रियलिटी का सामना करना पड़ा उसके बचपन का दोस्त जतिन जो अब

15:07 यूएसए में रहता था इंडिया घूमने आया था जतिन काफी मॉडर्न और बोल्ड लाइफस्टाइल जीता था ब्रांडेड क्लोथ्स गैजेट्स और हर बात में वेस्टर्न स्टाइल दोनों ने मिलकर एक वीकेंड ट्रिप की प्लानिंग की और पहाड़ों की तरफ निकल पड़े रास्ते में जतिन ने बड़ी एक्साइटमेंट से कहा करण भाई अब इंडिया में भी वह सब मिल रहा है जो मैं वहां खाता हूं बर्गर्स फ्र्राइ सोडा चॉकलेट मफिनस मजा आ जाएगा करण मुस्कुराया लेकिन थोड़ा हेजिटेंट भी था उसने पोलाइटली जतिन से कहा भाई मैं थोड़ा ध्यान रखता हूं अब खाने-पीने में जतिन ने हंसते हुए जवाब दिया अरे एक दिन कुछ नहीं बिगड़ता छुट्टी मनाने आए हैं एंजॉय तो बनता है और फिर शुरू हुआ दो दिनों का फूड फेस्टिवल होटल

15:56 में रिच ब्रेकफास्ट दिन में रोड साइड फास्ट फूड और रात को सोडा के साथ पिज़्ज़ा करण ने खुद को थोड़ा ढीला छोड़ दिया उसने सोचा चलो थोड़ा सा कॉम्प्रोमाइज कर लेते हैं दोस्त के साथ मोमेंट्स भी इंपॉर्टेंट है लेकिन तीसरे दिन सुबह जैसे ही करण उठा उसे महसूस हुआ कि कुछ ठीक नहीं है पेट भारी लग रहा था मूड थोड़ा इरिटेट हो रहा था और माइंड भी फॉगी सा था उसने गौर किया कि उसकी एनर्जी वैसी नहीं थी जैसी दो दिन पहले थी यार यह क्या हो गया उसने खुद से पूछा जतिन तो फ्रेश लग रहा था उसने पूछा क्या हुआ भाई करण ने धीरे से कहा लगता है मेरा गट अपसेट हो गया है जतिन हंस पड़ा घट तू तो बड़ा साइंटिस्ट बन गया है करण मुस्कुराया लेकिन अंदर से उसे चिंता हो

16:46 रही थी पिछले कई महीनों में वह इतनी क्लेरिटी और बैलेंस में जी रहा था और अब सिर्फ दो दिन के अनहेल्थी फूड ने उसे फिर से अनस्टेबल बना दिया था घर लौटते वक्त करण ने गाड़ी चलाते हुए खुद से सोचना शुरू किया ऐसा कैसे हो सकता है कि सिर्फ 2 दिन में इतना फर्क पड़ जाए उसने उस शाम घर आते ही अपना गट जर्नल खोल लिया जो उसने कुछ महीने पहले मेंटेन करना शुरू किया था उसने पिछले दो दिनों की सारी एंट्रीज लिखी क्या खाया कैसे महसूस किया स्लीप कैसी रही मूड कैसा था उसे समझ में आने लगा था कि जो वेस्टर्न डाइट जतिन फॉलो करता है हाई इन शुगर फैट और प्रोसेस्ड फूड वो उसकी गट माइक्रोबियल डायवर्सिटी को सीधा नुकसान पहुंचा रही है उसने अगले दिन इस टॉपिक पर

17:35 और पढ़ना शुरू किया रिसर्च में साफ लिखा था वेस्टर्न डाइट्स रिड्यूस माइक्रोबियल डायवर्सिटी एंड क्रिएट इमंबैलेंस बाय फीडिंग हार्मफुल बैक्टीरिया मतलब जो रिफाइंड शुगर सैचुरेटेड फैट और प्रिजर्वेटिव फिल्ड फूड हम खाते हैं वह हमारे गट के अच्छे बैक्टीरिया को मारते हैं और बुरे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं डायवर्सिटी कम होते ही इम्यूनिटी मूड डाइजेशन ऑल स्टार्ट टू गो डाउन हिल करण को एक और शॉकिंग फैक्ट पता चला गट माइक्रोबायोटा को वैरायटी पसंद होती है और जब हम सेम टाइप का प्रोसेस्ड फूड बार-बार खाते हैं तो वह बोर्ड और वीक हो जाते हैं एक तरह से जैसे किसी जंगल में सिर्फ एक ही टाइप का पेड़ हो ना पक्षी आएंगे ना जानवर

18:22 टिकेंगे लेकिन अगर वहां ढेर सारे अलग-अलग पेड़-पौधे हो तो एक पूरा इकोसिस्टम डेवलप होता है ठीक वैसे ही गट में भी उसे याद आया कि पहले जब वह हाई फाइबर खाना खाता था जैसे सब्जियां फ्रूट्स पल्ससेस और फर्मेंटेड चीजें तब उसकी हेल्थ एकदम ट्यून लगती थी और अब बस दो दिन के इंडजेंस ने सारी बैलेंस बिगाड़ दी थी उसने फिर से अपने गट को हील करने की ठान ली उसने अगले दिन से ही शुगरी और फ्राइड आइटम्स बंद कर दिए और फर्मेंटेड फूड ज्यादा लेना शुरू किया दही कांजी पिकल्स सावर क्राउड जैसे फूड्स को उसने अपनी डाइट में शामिल किया साथ ही उसने बींस ओट्स रॉ वेजिटेबल्स और फ्रूट्स को भी वैरायटी में कंज्यूम करना शुरू किया शुरुआत में थोड़ा टफ लगा

19:12 क्रेविंग्स भी हुई चॉकलेट और चिप्स देखकर हाथ अपने आप बढ़ता था लेकिन हर बार जब वह टेंप्टेशन रेजिस्ट करता तो उसे अपने अंदर कुछ रिस्टोर होता महसूस होता जैसे उसके गट माइक्रोब्स अंदर से क्लैप कर रहे हो गुड जॉब रावी हफ्ते भर में ही फर्क दिखने लगा उसका माइंड फिर से शार्प लगने लगा नींद बेहतर हो गई और मोस्टेंटली उसका मूड स्टेबलाइज हो गया एक दिन ऑफिस में उसकी मैनेजर ने कैजुअली पूछा करण तुम्हारी कंसंट्रेशन बहुत इंप्रेसिव हो गई है कोई सीक्रेट करण ने मुस्कुरा कर कहा बस खाना थोड़ा गट फ्रेंडली कर लिया है अब करण समझ चुका था कि वेस्टर्न डाइट्स सिर्फ टेस्ट बड्स को सेटिस्फाई करती हैं बॉडी को नहीं और यह टेंपरेरी कंफर्ट लॉन्ग टर्म डैमेज

20:03 बन सकता है अगर हम अवेयर ना रहें कुछ दिन बाद जतिन ने यूएसए लौटने से पहले करण से पूछा यार तू इतना डिसिप्लिन कैसे मेंटेन करता है मुझे भी गट इश्यूज होने लगे हैं करण ने शांति से कहा भाई हम जो भी खाते हैं वह सिर्फ हमारी भूख नहीं मिटाता वह हमारे अंदर की एक पूरी दुनिया को शेप करता है और अगर हम उस दुनिया का ध्यान नहीं रखेंगे तो वह हमें सिग्नल्स भेजेगी कभी मूड के थ्रू कभी इम्यूनिटी के थ्रू जतिन थोड़ा सोच में पड़ गया तो मतलब बर्गर खाने से डिप्रेशन भी हो सकता है करण ने हंसकर जवाब दिया अगर तू सिर्फ बर्गर खाएगा और फाइबर फर्मेंटेड फूड से दूर रहेगा तो हां इवेंचुअली तेरा गट अनहैपी रहेगा और उसका असर तेरे ब्रेन तक पहुंचेगा जतिन ने सिर

20:50 हिलाया चलो अब से मैं भी थोड़ा बैलेंस रखने की कोशिश करूंगा उस बातचीत के बाद करण को एक रियलाइजेशन हुआ अवेयरनेस फैलाना भी सर्विस है अब वो धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर भी गट हेल्थ के बारे में सिंपल लैंग्वेज में पोस्ट करने लगा अपने ट्रांसफॉर्मेशन की फोटोस और एक्सपीरियंस शेयर करता लोग कनेक्ट करने लगे क्वेश्चंस पूछने लगे और कई ने अपनी हेल्थ बेटर करनी शुरू कर दी करण को लगा जैसे उसने सिर्फ अपनी जिंदगी नहीं बदली वह दूसरों की हीलिंग जर्नी का भी हिस्सा बन रहा है अब जब कभी कोई उसे मिठाई बर्गर या सोडा ऑफर करता तो वह पोलाइटली मना करता और सोचता यह सब टेस्ट के लिए हो सकता है लेकिन मेरी गट फैमिली को यह पसंद नहीं आएगा और करण अब

21:35 अकेला नहीं था उसके अंदर ट्रिलियंस ऑफ माइक्रोस्कोपिक दोस्त थे जो उसकी हर चॉइस का असर महसूस करते थे कहानी यहीं खत्म नहीं हुई थी यह तो उसकी नई जिंदगी का फाउंडेशन थी एक ऐसी जिंदगी जो टेस्ट और टेंप्टेशन से ऊपर उठकर रियल हेल्थ और हैप्पीनेस की तरफ बढ़ रही थी और करण अब सिर्फ फूड को नहीं देखता था वो उसे एक इनविटेशन समझता था अपने अंदर की इकोसिस्टम को नर्चर करने का मौका क्योंकि उसे अब पता था स्ट्रांग बॉडी क्लियर माइंड और पीसफुल लाइफ वहीं से शुरू होती है गट से करण की जिंदगी अब काफी स्टेबल हो चुकी थी उसका रूटीन सेट था खानपान बैलेंस्ड था और मेंटल क्लेरिटी भी बनी हुई थी अब वह गट हेल्थ को लेकर इतना अवेयर हो चुका था कि जब भी कुछ

22:24 नया खाने का मन करता तो सबसे पहले सोचता इससे मेरे गट माइक्रोब्स को कैसा फील होगा लेकिन जैसा अक्सर होता है जिंदगी कब शांत बहती नदी से एक तूफानी समंदर बन जाए कोई नहीं जानता उस दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ करण की कंपनी में अचानक एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट आ गया डेडलाइन सिर्फ दो हफ्ते की थी और क्लाइंट इंटरनेशनल था गलती की कोई गुंजाइश नहीं थी करण को उस प्रोजेक्ट का लीड बना दिया गया शुरू में तो उसने कॉन्फिडेंट फील किया लेकिन जैसे-जैसे दिन गुजरते गए काम का प्रेशर बढ़ता गया अब उसके दिन 14 से 15 घंटे के हो गए थे ऑफिस की मीटिंग्स ईमेल्स का जवाब देना रिपोर्ट्स बनाना और हर छोटी-छोटी डिटेल पर ध्यान देना सब कुछ करण के दिमाग पर छा गया

23:11 था वो खाना तो खा रहा था लेकिन वह अटेंशन वो माइंडफुलनेस गायब हो गई थी बस जल्दी-जल्दी खा लेता हूं फिर काम करना है वो खुद से कहता फर्मेंटेड फूड की जगह इंस्टेंट नूडल्स आने लगे थे प्रोबायोटिक कर्ड की जगह वेंडिंग मशीन की ब्लैक कॉफी हो गई थी स्ट्रेस धीरे-धीरे उसके अंदर बसने लगा रात में नींद डिस्टर्ब होने लगी माइंड हमेशा अलर्ट रहता था जैसे कोई इमरजेंसी आने वाली हो करण को समझ नहीं आ रहा था कि इतना डिसिप्लिंड होकर भी उसका बॉडी और माइंड साथ क्यों नहीं दे रहे फिर एक दिन उसका सिर बुरी तरह से घूम गया ऑफिस में बैठे-बैठे उसे घबराहट हुई हार्ट बीट तेज हो गई और माथे पर पसीना आ गया इज एवरीथिंग ओके उसकी कोलीग ने पूछा करण ने

23:59 जवाब दिया लगता है स्ट्रेस ज्यादा हो गया है वो शाम को जल्दी घर आ गया और चुपचाप बैठकर सोचा क्या मेरा गट फिर से बिगड़ गया है उसने फिर से अपना गट जर्नल निकाला और पिछले 10 दिन की एंट्रीज पड़ी खाना इर्रेगुलर था स्लीप खराब थी और माइंड कास्टेंटली अलर्ट मोड में था उसे याद आया कि उसने एक बार पढ़ा था क्रॉनिक स्ट्रेस डायरेक्टली अफेक्ट्स गट परमेबिलिटी मतलब जब हम ज्यादा देर तक स्ट्रेस में रहते हैं तो हमारे गट लाइनिंग में छोटे-छोटे गैप्स बन जाते हैं जिसे लीग गट कहते हैं इससे हार्मफुल बैक्टीरिया और टॉक्सिंस ब्लड स्ट्रीम में घुस सकते हैं और बॉडी में क्रॉनिक इनफ्लेमेशन शुरू हो जाता है करण को समझ में आने लगा कि उसका

24:46 मूड स्विंग क्यों हो रहा है याददाश्त कमजोर क्यों लग रही है और डाइजेशन भी क्यों खराब हो रहा है स्ट्रेस सिर्फ मेंटल नहीं होता वह फिजिकल फॉर्म में बॉडी के हर सेल को इंपैक्ट करता है खासकर गट को और गट का मतलब सीधा ब्रेन से जुड़ा हुआ है करण को अब वह पुराना कनेक्शन फिर से याद आने लगा ब्रेन और गट की दोस्ती अब करण ने अपने आप से एक नया कमिटमेंट लिया अब मैं सिर्फ खानपान पर नहीं अपने स्ट्रेस लेवल्स पर भी ध्यान दूंगा उसने सबसे पहले अपनी स्ेड्यूल को थोड़ा हल्का करने का ट्राई किया बॉस से रिक्वेस्ट की कि डेली रिपोर्टिंग अल्टरनेट डेज पर कर दी जाए फिर उसने अपनी मॉर्निंग्स में 10 मिनट की डीप ब्रीथिंग ऐड की धीरे-धीरे उसने योगा भी शुरू किया

25:33 शुरू में शरीर स्टिफ लगी लेकिन हर पोज़ के साथ उसका न्यूरस सिस्टम रिलैक्स होने लगा उसे महसूस हुआ कि जैसे उसके अंदर एक स्टॉर्म था जो अब धीरे-धीरे शांत हो रहा है एक दिन उसने अपने पुराने न्यूट्रिशनिस्ट दोस्त से भी बात की उस दोस्त ने कहा रावी क्रॉनिक स्ट्रेस से कॉर्टिजोल लेवल लगातार हाई रहता है यह ना सिर्फ गट लाइनिंग को वीक करता है बल्कि डाइजेशन स्लो कर देता है और सेरोटोनिन का प्रोडक्शन भी घटा देता है मतलब मूड ऑटोमेटिकली डल होता चला जाता है करण को यह सुनकर एक और रियलिटी समझ में आई उसका हैप्पी केमिकल सेरोटोनिन 90% गट में ही बनता है और जब उसका गट इनफ्लेम्ड है तो ब्रेन कैसे हैप्पी फील करेगा अब वो हर दिन

26:19 स्ट्रेस मैनेजिंग रिचुअल्स फॉलो करने लगा सुबह सनलाइट एक्सपोज़र कुछ जर्नलिंग और रात को इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस से दूरी उसने एक ग्रेटट्यूड जार भी बनाया जिसमें हर रात वो एक छोटी सी थैंकफुल बात लिखकर डालता कुछ हफ्तों में फर्क दिखने लगा करण फिर से बैलेंस्ड फील करने लगा उसकी नींद इंप्रूव हो गई डाइजेशन फिर से स्मूथ हो गया और सबसे बड़ी बात वह खुद को फिर से खुद जैसा महसूस करने लगा फिर एक दिन उसे अपने ऑफिस में जूनियर स्नेहा मिल गई जो बहुत एशियस लग रही थी करण ने पूछा क्या बात है स्नेहा ने जवाब दिया काम का प्रेशर बहुत बढ़ गया है रात को नींद नहीं आती और खाना भी टेस्टलेस लगने लगा है करण ने मुस्कुरा कर कहा तू अपना गट हील कर सब सही लगने लगेगा

27:09 स्नेहा थोड़ा कंफ्यूज हुई गठ मतलब करण ने कहा "मैं एक्सप्लेन करता हूं जब हम स्ट्रेस में होते हैं तो हमारा गठ वीक हो जाता है अंदर से लीकेज होने लगता है और इनफ्लेमेशन बढ़ती है मूड लो हो जाता है माइंड डल लगने लगता है और बॉडी टायर्ड लेकिन अगर हम अपने गट का ध्यान रखें माइंडफुल ईटिंग प्रोबायोटिक्स और स्ट्रेस मैनेजमेंट तो धीरे-धीरे सब बेटर होने लगता है स्नेहा ने पहली बार गट हेल्थ को इस एंगल से सुना था उसने पूछा तो क्या ब्रीथिंग से भी गट बेटर हो सकता है करण ने कहा बिल्कुल ब्रेथ ही तो सिग्नल है ब्रेन और गट के बीच जितनी डीप और रिलैक्स्ड ब्रीथिंग उतना काल मैसेज गट को मिलेगा और वह भी अपना काम ठीक से करेगा उस दिन

27:58 स्नेहा ने भी करण की तरह एक छोटा सा स्टेप लिया उसने ऑफिस के ब्रेक में 5 मिनट की ब्रीदीिंग एक्सरसाइज शुरू की करण अब सिर्फ अपनी हीलिंग जर्नी पर नहीं था वो दूसरों को भी उस पाथ पर ले जा रहा था उसे समझ आ गया था कि क्रॉनिक स्ट्रेस एक स्लो पोइजन है जो ना दिखता है ना तुरंत मारता है लेकिन अंदर से सारी सिस्टम को बिगाड़ देता है खासकर गट को अब जब करण किसी टेंशन फील्ड सिचुएशन में आता तो वह पहले पॉज करता एक गहरी सांस लेता और खुद से कहता गट का गेट बंद रखना है लीकेज नहीं चाहिए वो अपने मील्स को फिर से सेक्रेड मानने लगा लैपटॉप और फोन दूर रखकर खाना खाता हर बाइट को चू करता और खुद से पूछता क्या यह फूड मेरे माइक्रोब्स को खुश करेगा हर दिन

28:47 थोड़ा बेटर हो रहा था माइंड अब बॉडी के साथ मिलकर काम कर रहा था और दोनों मिलकर एक हेल्थियर करंट बना रहे थे कभी-कभी वह सोचता अगर मैंने गट हेल्थ को लेकर अवेयरनेस ना रखी होती तो शायद मैं भी उन लाखों लोगों में शामिल होता जो डेली स्ट्रेस को नॉर्मल मानकर चलते रहते हैं जब तक कि बॉडी पूरी तरह जवाब नहीं दे देती अब करण की जिंदगी का मोटो था स्ट्रेस आएगा लेकिन मैं उसे बॉडी में घर नहीं बनाने दूंगा क्योंकि अब वह जान चुका था एक पीसफुल माइंड और हेल्थी गट साथ चलें तभी जिंदगी का सफर स्मूथ होता है करण की जिंदगी अब पहले से बहुत ज्यादा बैलेंस्ड हो चुकी थी गट और ब्रेन की डीप कनेक्शन उसने ना सिर्फ महसूस की थी बल्कि एक्टिवली

29:33 उस पर काम भी किया था उसके चेहरे पर अब वो कॉन्फिडेंस लौट आया था जो कभी स्ट्रेस और डाइजेशन इश्यूज के चलते खो गया था लेकिन जिंदगी कभी-कभी बिना वार्निंग के एक नया ट्विस्ट दे देती है और ऐसा ही ट्विस्ट करण की जिंदगी में तब आया जब उसे एक दिन तेज बुखार और गले में जबरदस्त इनफेक्शन हुआ डॉक्टर से कंसल्ट करने पर उसे बताया गया कि बैक्टीरियल इंफेक्शन है और बिना एंटीबायोटिक्स के ठीक नहीं होगा करण ने एंटीबायोटिक्स लेने में हेजिटेशन दिखाई लेकिन डॉक्टर ने कहा इस बार जरूरी है रावी इनफेक्शन लंग्स तक जा सकता है थोड़ी सोच के बाद उसने एंटीबायोटिक्स का प्रिस्राइब्ड कोर्स शुरू कर दिया शुरुआत में सब ठीक लग रहा था बुखार उतर गया गले

30:19 की सूजन कम हो गई और वह फिर से एनर्जी महसूस करने लगा लेकिन एंटीबायोटिक्स लेने के एक हफ्ते बाद से कुछ सटल चेंजेस होने लगे सबसे पहले उसे डाइजेशन में फर्क महसूस हुआ उसे मील्स के बाद हैवीनेस लगने लगी कभी-कभी पेट फूल जाता और स्टूस भी इर्रेगुलर हो गए फिर मूड स्विंग्स भी शुरू हो गए छोटी-छोटी बातों पर इरिटेशन रात को नींद डिस्टर्ब होना और दिन में माइंड फॉग जैसा फील होना करण थोड़ा परेशान होने लगा मैंने तो फिर से सेम डाइट योगा और ब्रीथिंग शुरू कर रखी है फिर यह सब क्यों हो रहा है एक दिन उसने अपने पुराने जर्नल को फिर से खोला और अपने सिम्टम्स को नोट किया सब कुछ ठीक लग रहा था सिवाय उस एक चीज के एंटीबायोटिक्स तभी उसे याद आया कि

31:05 एक बार उसके न्यूट्रिशनिस्ट दोस्त ने बताया था एंटीबायोटिक्स सिर्फ हार्मफुल बैक्टीरिया को नहीं मारते वो हमारे गट के अच्छे माइक्रोब्स को भी खत्म कर देते हैं करण ने इंटरनेट पर थोड़ी और रिसर्च की एक आर्टिकल में लिखा था इवन अ शॉर्ट कोर्स ऑफ एंटीबायोटिक्स कैन डैमेज द गट माइक्रोबायोटा बैलेंस फॉर मंथ्स और इवन इयर्स और यह इमंबैलेंस ना सिर्फ डाइजेशन को अफेक्ट करता है बल्कि ब्रेन फंक्शन को भी जैसे मूड मेमोरी और इमोशनल रेगुलेशन उसे अब समझ में आने लगा कि एंटीबायोटिक्स ने उसके अंदर के अच्छे बैक्टीरिया की दुनिया में टहलका मचा दिया है और उसकी ग ब्रेन कनेक्शन फिर से कमजोर हो गई है इस बार करण को ज्यादा समय नहीं लगा समझने में कि सॉल्यूशन फिर से उसी रास्ते में छिपा है गट हीलिंग लेकिन इस बार हीलिंग जर्नी

31:56 पहले से थोड़ी अलग थी क्योंकि डैमेज डीपर था करण ने सबसे पहले फर्मेंटेड फूड्स को डेली रूटीन में वापस लाना शुरू किया उसने घर में ही कर्ड बनाना शुरू किया साथ ही ट्रेडिशनल पिकल्स और कांजी जैसे नेचुरली फर्मेंटेड ड्रिंक्स भी अपनी डाइट में इंक्लूड किए उसने मार्केट से प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स भी लेना शुरू किया लेकिन डॉक्टर की एडवाइस लेकर ताकि सही स्ट्रेन और डोसेज मिल सके पर सबसे बड़ी चैलेंज थी पेशेंस करण को यह समझना पड़ा कि एंटीबायोटिक्स से हुआ माइक्रोबायोम डैमेज एक दिन में नहीं भरेगा उसे वक्त लगेगा हफ्तों नहीं महीनों इस दौरान उसने अपने मानसिक स्वास्थ्य का भी ख्याल रखा उसने खुद को बार-बार याद दिलाया तू फिर से ठीक

32:42 हो जाएगा बस थोड़ा सुसंगत रहना है एक रोचक चीज उसने नोट की जैसे-जैसे उसके गट में सुधार हुआ वैसे-वैसे उसके थॉट्स भी पॉजिटिव होने लगे वो एशियस नहीं रहता था उसका फोकस इंप्रूव होने लगा और वह छोटी-छोटी बातों में भी जॉय महसूस करने लगा करण को अब गट ब्रेन एक्सिस की थ्योरी सिर्फ थ्योरी नहीं लगी वह उसे खुद अपनी बॉडी में जी रहा था एक दिन जब वह अपने बालकनी में बैठा था हल्की धूप ले रहा था और हाथ में हल्दी दूध था उसने खुद से कहा "मैंने अपनी गुट की हीलिंग जर्नी शुरू की थी एक मजबूरी से लेकिन अब यह मेरी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है वो जानता था कि एंटीबायोटिक्स जरूरी थे लेकिन अब वह हर बार किसी भी दवा से पहले अपने गट के बारे

33:29 में जरूर सोचता करण ने उस इंसिडेंट से यह भी सीखा कि प्रिवेंशन इज ऑलवेज बेटर अब अगर उसे किसी भी तरह की इनफेक्शन होती तो पहले लाइफस्टाइल रेमेडीज ट्राई करता इम्यूनिटी बूस्ट करता और एंटीबायोटिक्स को लास्ट ऑप्शन मानता नॉट द फर्स्ट कुछ महीने बाद जब उसका गट फिर से बैलेंस में आया उसने अपने एक्सपीरियंस को एक ब्लॉग में लिखना शुरू किया उसका ब्लॉग टाइटल था गट की बात मेरी हीलिंग जर्नी उसने इसमें वो सब शेयर किया स्ट्रेस के दौरान गट पर क्या असर पड़ता है कैसे गलत खानपान गट माइक्रोब्स को कमजोर करता है और एंटीबायोटिक्स के बाद कैसे हम अपने गट को फिर से मजबूत बना सकते हैं धीरे-धीरे लोग उसके ब्लॉक से कनेक्ट करने लगे कुछ ने लिखा रवि तुम्हारी स्टोरी पढ़कर समझ आया कि मेरे मूड स्विंग्स सिर्फ मानसिक नहीं

34:19 थे वो गट की वजह से थे कुछ ने लिखा मैं भी एंटीबायोटिक्स के बाद लो एनर्जी फील कर रहा था लेकिन अब मैंने प्रोबायोटिक्स शुरू किए हैं करण के लिए यह सबसे बड़ी रिवॉर्ड थी कि उसकी खुद की हीलिंग अब दूसरों की इंस्पिरेशन बन रही थी एक दिन उसने अपनी पुरानी जर्नल एंट्री पढ़ी उस दिन की जब वह पैनिक में था बॉडी ट्रेंबलिंग कर रही थी और माइंड स्कैटर था उसने एंट्री के नीचे लिखा था अब पता है बॉडी को कैसे सुनना है करण अब पहले जैसा इंसान नहीं था उसकी सोच उसका ध्यान उसका बिहेवियर सब कुछ बदल गया था वो जान चुका था कि गट ही वह जगह है जहां से हीलिंग शुरू होती है और वहीं से हैप्पीनेस भी कहानी अब यहीं खत्म होती है लेकिन करण की जर्नी नहीं क्योंकि गट और

35:06 ब्रेन की दोस्ती लाइफ लॉन्ग चलती है करण अब हर दिन अपने अंदर के छोटे-छोटे माइक्रोब्स का ख्याल रखता है क्योंकि उसने महसूस किया है जब वह खुश होते हैं तो मैं भी खुश होता हूं तो फ्रेंड्स यह थी हमारी आज की बुक समरी आपको कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताएं और धन्यवाद आपका समरी एंड तक सुनने के

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