Rhinitis Complete Allopathic Treatment In Hindi | Rhinitis Causes, Symptoms And Treatment

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Brief Summary

The video discusses rhinitis, a condition that often affects individuals during the rainy season, resulting in symptoms resembling cold or flu. Rhinitis can be allergic, non-allergic, or caused by infections. Different treatments, including various medications and nasal sprays, are provided to manage symptoms.

  • Rhinitis has different types, including allergic, non-allergic, and infection-related.
  • Common symptoms include a runny or stuffed nose, sneezing, potential eye infections, and treatment options such as antihistamines and nasal sprays.

Overview of Rhinitis

The video starts by explaining rhinitis, especially how it affects people during the rainy season. It highlights that exposure to rain can lead to colds, which may be mistaken for rhinitis. Symptoms of rhinitis include excessive nasal discharge and stuffiness. Viewers are encouraged to watch the entire video for comprehensive information about the condition.

Symptoms and Types of Rhinitis

The presenter notes that symptoms of rhinitis often resemble those of hay fever. Rhinitis is not curable permanently, as it is an allergic condition that can recur. It is categorized into three types: allergic rhinitis, non-allergic rhinitis, and rhinitis associated with infections. The nasal mucosa, which helps protect against germs, can become inflamed due to various allergens or infections, leading to symptoms like frequent sneezing and nasal pain.

Causes of Non-Allergic Rhinitis

Non-allergic rhinitis can arise from infections picked up in crowded places, such as hospitals, or from an increase in eosinophils (a type of white blood cell) that can trigger rhinitis without any allergy. The term "rhinitis" is explained, showing how it relates to the nasal structure, further clarifying the condition's terminology.

Diagnosis and Symptoms Identification

Diagnosis of rhinitis may involve checking eosinophil levels, nasal smears, and IgE antibody levels. X-rays may also be used for a thorough examination. Common symptoms include a runny nose, nasal blockages, sleep disturbances, and sometimes, conjunctivitis, which leads to red eyes and infection. Asthma may also develop as a complication of rhinitis.

Treatment Options for Rhinitis

Treatment for rhinitis is manageable with various medications. Antihistamines like Cetirizine (10 mg) or Chlorpheniramine Maleate are recommended for seven days, especially if allergic reactions are present. Alternative medications like Pheniramine can be used if others are unavailable. For nasal obstruction, nasal sprays like Dozonoze (containing Azelastine) are suggested, with a warning to limit use to no more than ten days to avoid adverse effects on the nasal membranes.

Steroid Treatments and Precautions

The video discusses the use of steroids such as Hydrocortisone (100 mg) and Dexamethasone (0.5 mg twice daily) in treatment. It also advises on the risks of dehydration due to these medications, emphasizing the importance of fluid intake. Patients should be cautious as these medications may cause drowsiness, posing risks if driving or operating machinery.

Conclusion and Additional Medications

In conclusion, the video outlines that medications like Cetirizine, Chlorpheniramine, or Dexamethasone can effectively manage rhinitis symptoms. In cases of infection, Amoxicillin or Azithromycin may be necessary. The presenters encourage viewers to understand rhinitis and its treatment options while promoting the channel for further health-related content.

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Transcript

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0:00 दोस्तों, रायनाइटिस के बारे में समझेंगे। अभी बारिश का सीजन है, तो यह लोगों को समस्या होगी। ठीक है? जब बरसात में आदमी भीग जाता है, तो उसको सर्दी जुकाम होता है। कई बार लोगों को बोलते हैं रायाइटिस भी हो जाता है। ठीक है? यह रायनाइटिस क्या होता है? इसमें नाक बहती है बहुत ज्यादा और नाक कई बार ठसने लगती है। स्टफिंग नोज़ भी हो जाता है। इसके बारे में समझेंगे। वीडियो को पूरा देखिएगा पूरी जानकारी के लिए। तो शुरू करते हैं। दोस्तों देखिए जो राइनाइटिस के जो सिम्टम्स होते हैं वो लगभग लगभग हेयर फीवर जैसे होते हैं। और दूसरी बात राइनाइटिस का कोई ऐसे परमानेंट तो इलाज होता नहीं है कि आप सोचे कि आज हमने ये दवा करा ली तो अब जिंदगी भर के लिए रायाइटिस नहीं होगा। ये एक एलर्जिक कंडीशन है जो कि बार-बार हो सकती है। ठीक है? लेकिन दवाइयों के द्वारा इसको मैनेज किया जाता है और कुछ समय के लिए इससे

0:45 छुटकारा पा दिया जा सकता है। ठीक है? तो ये दो तरह का होता है। एक एलर्जिक होता है, एक नॉन एलर्जिक होता है। जो एलर्जिक होता है। उसके अलावा एक इंफेक्शन से भी होता है कई बार। तो एलर्जिक, नॉन एलर्जिक और इंफेक्शन तीन तरह के हैं। बेसिकली राइनाइटिस राइनाइटिस है क्या दोस्तों? अ जो नाक है इसके अंदर एक नेज़ल म्यूकोसा होता है। आपकी नाक के अंदर कुछ कैविटीज हैं। कुछ मास कह सकते हैं। उसके अंदर कुछ मेंबेंस हैं और नेज़ल म्यूकोसा एक म्यूकोसा एक लेयर है जो कि नाक के अंदर जर्म्स पार्टिकल्स को जाने से रोकती है। इंफेक्शंस बढ़ने से रोकती है। इसका यह काम होता है एक प्रोटेक्टिव लेयर की तरह। तो कई बार इसी में इनफेक्शन हो जाता है। ड्यू टू बैक्टीरियल इनफेक्शन ड्यू टू सम

1:30 एलर्जेंस। तो होता क्या है दोस्तों? इसमें इनफ्लामेशन बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इनफ्लामेशन बढ़ती है तो फिर नरिंग नोज नाक बहना शुरू हो जाती है। आदमी को छीके बहुत ज्यादा आती हैं और और उसकी नाक में भी दर्द हो जाता है। कई बार सूजन आ जाती है। नाक लाल दिखने लगती है और कई बार तो बुखार भी आ जाता है। तो ये है दोस्तों क्या? हाइपरसेंसिटिविटी ऑफ म्यूकस मेंब्रेन। आदमी की जो नाक है उसके अंदर की म्यूकस मेंब्रेन है उसकी हाइपर सेंसिटिविटी की वजह से होता है। तो अब नॉन एलर्जिक की बात करें देखिए कई बार इनफेक्शन हो जाते हैं। आप कहीं पे गए हॉस्पिटल्स में या आप किसी पेशेंट के पास में बैठे उसने छींक दिया और आपकी नाक में उसके जर्म्स आ गए तो आपको भी यह बीमारी हो सकती है। दूसरा इओसिनोफिल्स होता है दोस्तों। इओसिनोफ्लिक भी होता है।

2:16 अह इसमें क्या होता है? ब्लड की जो सीबीसी कराई जाती है उसके अंदर इओसिनोफिल्स जो होती है वो बढ़ जाती हैं कई बार। तो जो डायरेक्टली या इनडायरेक्टली कह सकते हैं कि आपको नॉन एलर्जिक होता है वो। ठीक है? कोई एलर्जी नहीं है आपको लेकिन फिर भी आपकी नाक में रायनाइटिस हो रहा है। और राइनाइट राइनो जो वर्ड है दोस्तों नाक से लिया जाता है। नाक को ऐसा राइनो जो राइनो [गला साफ़ करने की आवाज़] होता है जानवर देखा होगा आपने। उसकी भी नाक के ऊपर एक सींग होता है। ठीक है ना? तो ये चीज है। इसलिए नाक को राइनो कहा जाता है और रायनाइटिस बोल रहे हैं तो समझ लीजिए टिस लगा टस तो सूजन। तो राइनाइटिस यह होता है। यहां पर दोस्तों बात अगर की जाए डायग्नोसिस की तो इओसनोफीलिया की जांच की जाती है। कई बार नोज स्मेयर की जांच की जाती है। नाक की जांच की जाती है। कई बार

3:02 एंटीबॉडी आईजीई उसकी जांच भी की जाती है। एक्सरे भी करना पड़ता है कई बार। तो ये बहुत सारे तरीके हैं रायनाइटिस को कंफर्म करने के। यहां पे दोस्तों बात करते हैं रायनाइटिस होने पर क्या-क्या लक्षण देखने को मिलते हैं। रनिंग नोज़ नाक बहने लगती है। स्टफी नोज़ साथ में कई बार अनिद्रा नींद नहीं आती है। व्यक्ति की नींद पूरी नहीं हो पाती है। और कई पेशेंट में तो यह भी देखा जाता है कि जब उनको रायनाइटिस होता है तो उनको कंजक्टिवाइटिस भी साथ में हो जाता है। आंखें भी लाल हो जाती है। आंखों में इनफेक्शन हो जाता है। बोलते हैं ना आंखें आने लगी। तो कंजक्टिवाइटिस भी हो जाता है कई बार। कई पेशेंट को अस्थमा भी होने लगता है, एजमा भी होने लगता है। तो ये सारे कॉम्प्लिकेशंस देखने को मिलते हैं। अब बात करेंगे काम की चीज ट्रीटमेंट की। तो देखिए ट्रीटमेंट बड़ा ही आसान होता

3:47 है। कुछ दवाइयां होती है उनको चलाया जाता है कुछ समय तक। तो इसको ठीक भी किया जा सकता है। जैसे कि सिट्रेजन टैबलेट दुनिया को पता है भाई एलर्जी जब होगी तो सिट्रेजन चलाना होगा। तो सिट्रेजन हाइड्रोक्लोराइड 10 मिलीग्राम की टेबलेट आपको रात में सोते वक्त 7 दिन तक तो देना ही है। साथ ही दोस्तों क्लोरोफेनरमाइन मेलेट की टेबलेट जो आती है कह सकते हैं एिल ये भी दिया जाता है मतलब अगर आपको सिट्रजन नहीं देना है तो आप एविल दे सकते हैं दोनों नहीं देना दोनों में से एक को ही देना है तो क्लोरोफेनमाइन मैलेट जो होता है दोस्तों वो एविल के अंदर होता है एविल ग्रैंड नेम है उसको प्रमोट नहीं करते हम बाकी आपको जानकारी के लिए बताना है ताकि आप जल्दी पहचान सके तो 4 मिलीग्राम का ये टेबलेट भी आप हर रात को दे सकते हैं सोने से पहले 7 दिन तक 7 दिन इसलिए बोल रहा हूं क्योंकि 7

4:33 दिन के अंदर अंदर यह ठीक भी हो जाता है। उसके अलावा दोस्तों अगर आपको क्लोरोफेनामाइन नहीं मिल रहा है या अवेलेबल नहीं है तो आप फनेरामाइन भी ले सकते हैं। ठीक है? और 25 मिलीग्राम यह भी दिया जा सकता है। साथ ही दोस्तों नेज़ल ऑब्स्ट्रक्शंस अगर हो रहे हैं तो वहां पर एक नेज़ल स्प्रे आता है वो लगाया जा सकता है। डओनोज़ करके डओनोज़। तो इसके अंदर दोस्तों एज अ लास्टाइन होता है। एज अ लास्टाइन 40 मिलीग्राम यह स्प्रे किया जा सकता है। ठीक है? क्रूटिकल ज़ोन प्रोपायनेट और यालास्टाइन इसके अंदर होता है। किसके अंदर? डओ नोज़ के अंदर। इस स्प्रे को किया जाता है। हमेशा एक बात याद रखो कोई भी नेदरल स्प्रे आपको 10 दिन से ज्यादा यूज़ नहीं करना है। 10 दिन आपने डाला और आपको

5:18 आराम नहीं मिल रहा तो आपको तुरंत बंद करना है क्योंकि यह ना कि मेंबेंस को ज्यादा डायरेक्ट जाके अफेक्ट करते हैं। ठीक है? तो 10 दिन से ज्यादा कोई भी नजल स्प्रे नहीं डालना है। इसके अलावा दोस्तों कुछ स्टेरॉइड भी चलाने होते हैं रायनाइटिस के केस में। हाइड्रोकॉर्टिसोन या डेक्समेथसोन यह चलाना होते हैं दोस्तों। हाइड्रोकॉर्टिसोन आप 100 मिलीग्राम दे सकते हैं दोस्तों। इंजेक्शन भी लगा सकते हैं। साथ ही डेक्समेथसोन की टेबलेट 0.5 मिलीग्राम सुबह शाम 7 दिन तक दी जा सकती है। और डेक्स भी नहीं देना तो आप चाहे तो बैटनेस दे सकते हैं। बीटा मेथोसोन यह भी आप 0.5 मिलीग्राम सुबह शाम दे सकते हैं। एक चीज यहां पे ऐड करना चाहेंगे कि देखिए जितने भी जो एंटी एलर्जिक ड्रग्स दिए जा रहे हैं इनकी वजह

6:04 से कई बार पेशेंट को डिहाइड्रेट होने का खतरा भी रहता है। तो पानी आपको पीते रहना है। डिहाइड्रेट नहीं करना है आपकी बॉडी को। और तो और दोस्तों यह जितनी भी दवाइयां हैं इनसे व्यक्ति को सेशन जरूर आता है। एक डिजीनेस भी आती है। तो आपको ड्राइव नहीं करना है बिल्कुल भी या कोई भी मशीनरी ऑपरेट नहीं करना है। कहीं ऊंचाई पे जाके काम नहीं करना है। क्योंकि चक्कर आने का खतरा रहेगा। आपको नींद आ सकती है। तो यह है रायनाइटिस। इसमें आपको सिंपली सिट्रोजन एनरमाइन क्लोरोफेनरमाइन या मेलेट या डेक्समेथोसोन बीटासोन ये चलाना होती है। बुखार वगैरह है तो आप पैरासिटामॉल ऐड कर सकते हैं। तो ये है क्या रायनाइटिस और उसका ट्रीटमेंट और यहां पे एक चीज और है अगर इनफेक्शन लग रहा है तो आप एमॉक्सिसिलिन दे सकते हैं या एथ्रोमाइसिन

6:49 भी दे सकते हैं। तो आई होप आप समझ गए होंगे राइनाइटिस के बारे में। वीडियो अच्छी लगी तो लाइक कीजिएगा, सब्सक्राइब करें हमारे चैनल को। मिलते हैं आपसे अगले वीडियो में। जय हिंद वंदे मातरम [संगीत]

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