How To Make 1 Crore With Mutual Funds, SIP | Best Mutual Funds 2025| Investmenth | Sanjay Kathuria

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो संजय कथोड़िया के साथ एक विस्तृत बातचीत है, जिसमें व्यक्तिगत वित्त, निवेश रणनीतियों और बाज़ार के रुझानों पर चर्चा की गई है। मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • लंबी अवधि के निवेश का महत्व और बाज़ार में भावनाओं से प्रभावित न होना।
  • वित्तीय लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने और उसके अनुसार निवेश करने की आवश्यकता।
  • सक्रिय आय बढ़ाने और निष्क्रिय आय पर अत्यधिक निर्भर न रहने पर ज़ोर।
  • जोखिम प्रबंधन और अपनी जोखिम लेने की क्षमता को समझने का महत्व।
  • एआई के कारण नौकरी बाज़ार में आने वाले बदलावों के लिए तैयार रहना और नई कौशल सीखना।

परिचय

संजय कथोड़िया का स्वागत किया गया, और पिछली बातचीत के बाद बाज़ार के रिबाउंड पर चर्चा की गई। संजय ने कहा कि बाज़ार में भावनाएँ अल्पकालिक होती हैं, जबकि दीर्घकालिक में बुनियादी सिद्धांत मायने रखते हैं। उन्होंने भारत में स्टॉक मार्केट के विकास की संभावनाओं पर सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया।

सही समय पर निवेश

निवेश करने का सबसे अच्छा समय हमेशा वर्तमान होता है। यदि आप 10-15 साल के लिए निवेश कर रहे हैं, तो आज और 1000 पॉइंट ऊपर या नीचे एंट्री करने से ज़्यादा फ़र्क नहीं पड़ेगा। इक्विटी मार्केट में केवल लंबी अवधि के लिए ही आना चाहिए, न कि 2-3 साल में पैसा डबल करने के लिए।

वित्तीय लक्ष्य और मानसिकता

लोगों के वित्तीय लक्ष्य स्पष्ट नहीं होते हैं, इसलिए वे निवेश नहीं कर पाते। अमीरों की मानसिकता अतिरिक्त रिटर्न के बजाय पूंजी को सुरक्षित रखने और बढ़ाने पर केंद्रित होती है। तेज़ी से पैसा बनाने के लिए अपनी सक्रिय आय और कौशल पर ध्यान केंद्रित करें। बाज़ार से अवास्तविक उम्मीदें न रखें।

बचत की मानसिकता

लोगों को जोखिम लेने में डर लगता है और वे बचत नहीं कर पाते। आरबीआई के अनुसार, बैंक फेल होने पर भी ₹5 लाख तक की राशि सुरक्षित है। इसलिए, अलग-अलग बैंकों में ₹5 लाख तक की एफडी करें। रिस्क लैडरिंग का पालन करें, यानी धीरे-धीरे जोखिम बढ़ाएँ।

सोशल मीडिया और ख़रीदारी की आदतें

सोशल मीडिया के कारण लोगों की बचत करने की क्षमता घट रही है। मार्केटिंग कंपनियाँ आपसे पैसा निकलवाने के लिए काम करती हैं, इसलिए ख़रीदारी करते समय सोच-समझकर निर्णय लें। शॉपिंग लिस्ट बनाएँ और तुरंत ख़रीदारी न करें।

व्यक्तिगत वित्त आदतें

खर्च नियम-आधारित और निवेश लक्ष्य-आधारित होने चाहिए। हर महीने अपने बजट को 1% कम करें। बकेट सिस्टम का उपयोग करें, यानी सबसे पहले इमरजेंसी फंड बनाएँ। लोगों को पैसा उधार न दें और अगर दें तो उतना ही दें जितना आप भूल सकते हैं।

म्यूचुअल फंड, सोना और रियल एस्टेट

पोर्टफोलियो में सोना होना चाहिए, जिसे ईटीएफ के माध्यम से ख़रीदना चाहिए। रियल एस्टेट में निवेश कर सकते हैं, लेकिन इसमें ज़्यादा पैसा लगता है और लंबे समय के लिए होल्ड करना पड़ता है। म्यूचुअल फंड उन लोगों के लिए बेहतर है जिनके पास कम पैसे हैं।

सोने में निवेश

सोना अनिश्चितता के समय में अच्छा प्रदर्शन करता है। यह 50% तक भी गिर सकता है, लेकिन फिर से बढ़ जाता है। पोर्टफोलियो में 10-15% सोना ज़रूर रखें। फिजिकल गोल्ड की जगह डिजिटल गोल्ड या ईटीएफ में निवेश करना बेहतर है।

ट्रेडिंग किसके लिए है?

ट्रेडिंग उन लोगों के लिए नहीं है जिनके पास कम कैपिटल है। 93% लोग 3 साल में ट्रेडिंग में पैसा खो देते हैं। 1% लोग ही साल का ₹1 लाख से ज़्यादा कमाते हैं, जिनमें से ज़्यादातर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक और एल्गोरिथम ट्रेडर्स होते हैं। ट्रेडिंग मशीनों के ख़िलाफ़ युद्ध करने जैसा है।

एल्गोरिथम ट्रेडिंग

एल्गोरिथम ट्रेडिंग में मशीनें ट्रेड करती हैं, जिनमें भावनाएँ नहीं होतीं। ट्रेडिंग बड़े कैपिटल का गेम है और इसमें सोफेस्टिकेटेड मॉडल लगते हैं। 10 लाख से कम कैपिटल वाले लोगों को ट्रेडिंग नहीं करनी चाहिए।

निवेश के लिए सुझाव

15 साल के लक्ष्य के लिए लंबी अवधि के इक्विटी में निवेश करें। अपनी जोखिम लेने की क्षमता का मूल्यांकन करें और उसके अनुसार निवेश करें।

क्लाइंट के प्रकार

कुछ क्लाइंट 54 म्यूचुअल फंड खरीदते हैं, जो ज़ू मेंटालिटी को दर्शाता है। डिस्ट्रीब्यूटर का उपयोग करते समय यह सुनिश्चित करें कि वे आपके रिस्क प्रोफाइल को समझते हैं। कुछ क्लाइंट अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर बहुत व्यवस्थित होते हैं।

कितने म्यूचुअल फंड?

एक लक्ष्य के लिए तीन से चार म्यूचुअल फंड पर्याप्त हैं।

जल्दी निवेश क्यों नहीं?

वित्तीय शिक्षा की कमी के कारण लोग जल्दी निवेश नहीं करते। वे दिखावे में ज़्यादा खर्च करते हैं। डेप्ट टू इनकम रेशियो को कम रखना चाहिए।

एसआईपी क्यों बंद हो जाती हैं?

मानव स्वभाव के कारण एसआईपी दो-तीन साल में बंद हो जाती हैं। लोग जल्दी रिटर्न चाहते हैं और बाज़ार में गिरावट से डर जाते हैं। वारेन बफेट के अनुसार, स्टॉक मार्केट धैर्यहीनों से धैर्यवानों को धन हस्तांतरित करने का स्थान है।

एसआईपी और रिटर्न

रिटर्न का पीछा न करें। लंबे समय के लिए निवेश करें। अपनी नौकरी या व्यवसाय में सक्रिय आय बढ़ाएँ। जिनके पास पैसे नहीं होते, वे 20-25% रिटर्न की उम्मीद करते हैं।

एसआईपी को स्टेप अप करें

अपनी एसआईपी को स्टेप अप करना ज़रूरी है। कमाई बढ़ने पर एसआईपी की राशि भी बढ़ाएँ।

एसआईपी के लिए सैलरी

₹25,000 कमाने वाले को अपनी आय बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए और ₹2-3 हज़ार की एसआईपी करनी चाहिए। ₹50,000 कमाने वाले को 10-15% एसआईपी करनी चाहिए। ₹1 लाख कमाने वाले को 20-25% एसआईपी करनी चाहिए।

म्यूचुअल फंड में पॉजिटिव रिटर्न

प्योर इक्विटी में 5-7 साल में पॉजिटिव रिटर्न मिलता है। जापान में 35 साल तक मार्केट सेम रहा है। पोर्टफोलियो में सोना भी होना चाहिए।

बॉन्ड्स क्या हैं?

बॉन्ड्स एफडी से ज़्यादा रिटर्न देते हैं, लेकिन इनमें थोड़ा ज़्यादा जोखिम होता है। कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में 9-12% तक फिक्स्ड ब्याज मिलता है। क्रेडिट रेटिंग के अनुसार बॉन्ड्स में निवेश करें।

बॉन्ड्स में जोखिम

बॉन्ड्स में डिफॉल्ट हो सकता है। क्रेडिट रेटिंग देखना ज़रूरी है। पोर्टफोलियो को अलग-अलग रेटिंग वाले बॉन्ड्स में बाँटें।

क्या एसआईपी ज़ीरो हो सकती है?

म्यूचुअल फंड एक बास्केट होता है, इसलिए यह ज़ीरो नहीं हो सकता।

ईटीएफ क्या है?

ईटीएफ म्यूचुअल फंड की तरह ही है, लेकिन यह लिस्टेड होता है। ईटीएफ में सिप ऑन डिप की रणनीति लगा सकते हैं। ईटीएफ के माध्यम से ग्लोबल एक्सपोजर भी ले सकते हैं।

म्यूचुअल फंड या ईटीएफ?

प्योर पैसिव लोगों के लिए म्यूचुअल फंड बेहतर है। थोड़ा एक्टिव रहने वालों के लिए ईटीएफ बेहतर है। ईटीएफ में कॉस्ट कम होती है।

इनफ्लेशन और एसआईपी

अपने गोल को इनफ्लेशन से एडजस्ट करें। स्टेप अप एसआईपी करें।

एसआईपी या लमसम?

इमरजेंसी फंड और एसआईपी के बाद बचे हुए पैसे को ओपोरर्चुनिटी कैपिटल कहते हैं। इसका उपयोग रियल एस्टेट, क्रिप्टो या सिप ऑन डिप के लिए कर सकते हैं। बड़ा लमसम आने पर फंड मैनेजर से सलाह लें।

पुराने शेयर्स

पुराने शेयर्स मिलने की कहानियाँ सच होती हैं।

निवेश पर रिटर्न

यह एक लंबा गेम है। 5-7 साल तक ज़ीरो एक्सपेक्टेशन रखें।

मार्केट रिस्क क्या है?

मार्केट रिस्क का मतलब है लाल कितना देख सकते हो। हिस्टोरिकली मार्केट रिकवर हो जाती है।

म्यूचुअल फंड कैटेगरी

म्यूचुअल फंड में हाई रिस्क, मॉडरेट रिस्क और लो रिस्क कैटेगरी होती हैं। प्योर इक्विटी हाई रिस्क, हाइब्रिड मॉडरेट रिस्क और डेप्ट लो रिस्क होते हैं।

डेप्ट फंड किसके लिए?

डेप्ट फंड उन लोगों के लिए हैं जिनका गोल छोटा है, जिनके पास एक्सेस कैपिटल है और जो ज़्यादा लाल नहीं देख सकते।

एफडी और डेप्ट फंड

लिक्विड फंड्स में प्रीमेच्योर विथड्रॉल पर पेनल्टी नहीं लगती।

स्मॉल कैप में निवेश

स्मॉल कैप में निवेश करने के लिए रिस्क टेकिंग कैपेबिलिटी ज़्यादा होनी चाहिए।

मोमेंटम फंड क्या है?

मोमेंटम फंड एक एक्टिव इंडेक्स है जो हर 6 महीने में ऐसी 50 कंपनियाँ पकड़ता है जिनका मोमेंटम स्कोर हाई होता है। इसमें शॉर्ट टर्म में रिस्क ज़्यादा होता है।

एसडब्ल्यूपी क्या है?

एसडब्ल्यूपी के कॉर्पस को अलग-अलग लेयर्स में बाँट दें। पहले डेप्ट, फिर हाइब्रिड, फिर मल्टीकैप, फिर लार्ज कैप और अंत में स्मॉल कैप।

रिटायरमेंट के लिए निवेश

शुरू का पैसा डेप्ट फंड में रखें। मिड कैप और स्मॉल कैप 30% से ज़्यादा नहीं होना चाहिए।

करोड़पति कैसे बनें?

सबसे पहले मैनिफेस्ट करें कि कब करोड़पति बनना है। फिर अपनी एक्टिव इनकम, सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट पर ध्यान दें। 15 साल में करोड़पति बनने के लिए ₹14,000 पर मंथ की एसआईपी करें।

इनकम बढ़ाएँ

खर्चे कम करने की एक सीमा है, इसलिए इनकम बढ़ाना ज़रूरी है।

अच्छे इन्वेस्टर की क्वालिटी

गोल बेसिस, रिस्क असेसमेंट और सीखने की इच्छा अच्छे इन्वेस्टर की क्वालिटी हैं।

नंबर कैसे पता करें?

अपने खर्चों का आकलन करें, ईएमआई को माइनस करें, इनफ्लेशन और लाइफस्टाइल इनफ्लेशन जोड़ें। फिर 300 महीने का खर्च निकालें।

रेंटल इनकम

रेजिडेंशियल रेंटल इनकम बहुत ही पुअर है।

एआई और नौकरियां

एआई के कारण बहुत सारी नौकरियां खत्म हो रही हैं। एआई सेलिंग हो रही है। एआई एंट्री लेवल जॉब्स खा रहा है।

एआई से कैसे बचें?

ओपोरर्चुनिटी स्कैनर बनें। फ्लेक्सिबल रहें। डेटा एनालिटिक्स सीखें। एआई को यूज़ करना सीखें।

एआई के उदाहरण

एआई से कंटेंट क्रिएशन, ऑटोमेशन और डिसीजन मेकिंग में मदद मिल रही है।

कोर्सेज

डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कोर्सेज करें।

समापन

संजय कथोड़िया को धन्यवाद दिया गया और उनसे भविष्य में भी आने का अनुरोध किया गया। दर्शकों से अपनी टॉप थ्री लर्निंग्स कमेंट सेक्शन में बताने के लिए कहा गया।

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Transcript

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0:00 अगर आपने ₹1 लाख डाला होता 30 साल पहले तो NTFT 50 में NFT 500 में शायद वह ₹50 लाख के आसपास होता और NFT 500 मोमेंटम 50 में वो 9 करोड़ होता। इतना बड़ा फर्क है। इतना मैसिव गैप आ जाता है। आपको अगर तेज पैसा बनाना है ना तो उसका भी तरीका है। 2019 में आई थिंक 5 या ₹6 का शेयर था। आज 700 800 का शेयर हो गया। आप कितना लाल देख सकते हो इज़ वेरीेंट। मैं 30% क्या मैं 50% लाल भी देख सकता हूं। इकोनॉमिस्ट लोग जो है जब मार्केट नीचे जा रही होती है तो प्रिडिक्ट करते हैं कि मार्केट खत्म हो जाएगी। सप्टेंबर टू सप्टेंबर भी नहीं आया अगला। ऑलमोस्ट हम वहां पहुंच गए हैं जहां से हम गिरे थे। तो रिकवरी हो जाती है। अब देखिए अगर आप 10-15 साल के लिए सोच रहे हैं तो आप आज एंट्री करेंगे या आज से 1000 पॉइंट नीचे करेंगे या 1000 पॉइंट ऊपर

0:46 करेंगे। बहुत ज्यादा फर्क पड़ेगा नहीं। लोग ये सोचते हैं मुझे 3 साल के अंदर यहां पे अपना पैसा किसी भी तरह डबल ट्रिपल करके जाना है। बिल्कुल ये रहती है। ये गेम लंबा है। ये इतना तो समझना पड़ेगा। रुको। यह कोई क्विक रेट स्कीम नहीं है। यह पहले 5 साल जीरो देगी फिर अचानक से तीन गुना हो जाएगी। देखिए 25,000 अगर कोई कमा रहा है तो आप ऐसे समझिए आपकी तनख्वा 25,000 नहीं है। आपकी तनख्वाह 22,000 है। ठीक है? 23,000 है और वो दो-3,000 जो है वो एसआईपी कर रहा है। अब जो बंदा 500 पे पहुंच गया वेरी गुड। अच्छी बात है। एटलीस्ट एटलीस्ट 10 से 15% वो अपनी एसआईपी कर। 10,000 भी डालेंगे तो 15 साल में यू शुड बी सिंग ऑन अ गुड 80,90 लाख ऑफ़ कॉपस। अगर अच्छे से इन्वेस्ट हो गया तो। फॉर एग्जांपल मुझे 3 साल में गाड़ी चाहिए, 5 साल में घर चाहिए, 10 साल में रिटायरमेंट चाहिए, 20 साल में एक्स व जेड चाहिए। मेरे को जनरेशनल वेल्थ जनरेट करनी है। उस हिसाब से आप इन्वेस्ट करो। एक गोल के पीछे तीन से चार म्यूच्यूल फंड।

1:31 ओके? ईटीएफ भी वही है। म्यूच्यूल फंड ही है एक तरीके से। पर लिस्टेड म्यूच्यूल फंड है। तो ईटीएफ में आप वो वाली स्ट्रेटजी लगा सकते हो। जब-जब गिरेगा मैं ईटीएफ खरीद लूंगा जो हम सिप ऑन डिप कहते हैं जिसे। अब दूसरा जो स्टेज आता है जिसमें रिस्क हल्का सा ज्यादा होता है पर रिटर्न्स फिर भी फिक्स्ड होते हैं और ज्यादा होते हैं वो कॉर्पोरेट बॉन्ड्स होते हैं। जैसे मैंने जेट एयरवेज में शेयर का शेयर लिया था। तब कभी कोई सोच सकता था कि Jet Airways बंद हो जाएगी? बिल्कुल नहीं। नहीं सोच सकता था ना। हुई हमारे पैसे खराब हुए उसमें। डीएचएफएल इतनी बड़ी कंपनी खत्म हो गई। अगर किसी को 15 साल में करोड़पति बनना है। तो उसकी एसआईपी होती है ₹14,000 पर मंथ। ओके? विद अ स्टेप अप ऑफ़ 7% पर ईयर। कोई भी चीज बढ़ जाती है तो हमें लगता है कि अब इससे ज्यादा नहीं बढ़ सकती। और यह गोल्ड के साथ हर पॉइंट पे लगा है। और जब तक अनसर्टेनिटी का माहौल होता है गोल्ड राजा होता है।

2:16 गोल्ड 50% भी क्रैश किया है। 50% पूरे ट्रेडर बेस में से साल का भी 1% लोग साल का ₹1 लाख से ऊपर कमाते हैं। अब यहां किसी बच्चे के पास चले जाओ। उसको लगता है मैं ₹00 डालूंगा तो मैं महीने का ₹1 लाख कमा लूंगा। बिल्कुल। जो 1% लोग हैं जो पैसा बना पा रहे हैं उसमें से मोर देन 90% पैसा फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स और एल्गोरिथ्मिक ट्रेडर्स बना रहे हैं। जैसे एक क्लाइंट मिले उन्होंने अपने म्यूच्यूल फंड में 54 म्यूच्यूल फंड्स खरीदे हुए हैं। अरे तो हर क्वार्टर में जो भी टॉप परफॉर्मिंग फंड था वो खरीद। बिलेनियर माइंडसेट है ना या मिलेनियर माइंडसेट है वो एक्स्ट्रा रिटर्न्स नहीं चज़ कर रहा है। वो कैपिटल प्रिज़र्वेशन के साथ कैपिटल ग्रोथ चज़ कर रहा है कि मेरा कैपिटल खत्म ना हो जाए। बोलते हैं 20-25% उन लोगों की अपेक्षा

3:02 होती है जिन पे पैसे नहीं होते। देखो मार्केट्स का ना पता नहीं होता। जापान 35 इयर्स तक सेम मतलब ऐसे कप मार के आया है। 35 इयर्स के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्री आईपीओ जो है उसने बहुत अच्छे रिटर्न्स दिए ओवर लास्ट फोर फाइव इयर्स। ठीक है? पर रिस्क है। बहुत हैवी रिस्क है कि अभी तक लिस्टिंग ही नहीं हुई उसकी। तो अगर भारत में 40 बैंक अकाउंट है सॉरी 40 बैंक्स हैं तो 40ों बैंक्स में आप 5-5 लाख डाल देंगे और 40 के 40 डूब गए तो भी आपके 2 करोड़ वापस आ जाएंगे। तो जेम्स स्ट्रीट टॉप टेक्नोलॉजी के लोग हायर करता है जिनको एल्गोस बनाने आते हैं ट्रेडिंग करने के। आप है ना 5 10 से ट्रेडिंग करने आएंगे तो हर रोज हारेंगे। अब मैं तो कहता हूं मार्केट में उस आदमी को ट्रेड ही नहीं करना चाहिए जिसके पास 10 लाख से कम का कैपिटल है। स्विच पर आज इस पॉडकास्ट में मेरे साथ हैं

3:48 इंडिया के वन ऑफ द मोस्ट पॉपुलर बिनेस अफेयरेंस कोच संजय कथोड़िया। संजय वेलकम। थैंक यू। थैंक यू सो मच। संजय कैसे हैं आप? एकदम बढ़िया। संजय लास्ट टाइम जब आपसे बात हुई थी तो मार्केट देखिए कहां जा रही थी? शायद 21,800 पे थी। पैनिकिक था और हम बात कर रहे थे कि सब कुछ लाल है। आपने कहा था मैंने मैंने पूछा आपसे कि क्या हालचाल है? हमने कहा आज तो सब कुछ लाल चल रहा है। तो अभी वापस देखिए रिबाउंड हो गई। तो कैसा लग रहा है? इवन दो आपने कहा था कि कुछ वेट करें लोग फिर से वापस आएगी मार्केट। अभी कैसा समझ में आ रहा है? देखिए वापस मैं यही कहता हूं कि ये इकोनॉमिस्ट लोग जो है जब मार्केट नीचे जा रही होती है तो प्रेडिक्ट करते हैं कि मार्केट खत्म हो जाएगी। जब ऊपर जा रही होती है तो कहते हैं भाई अब इसको कोई रोक नहीं सकता। आई थिंक मार्केट्स क्या है कि इट्स अ सम टोटल ऑफ एवरीबॉडीस इमोशन। ठीक है? इसमें लॉजिक कम चलता है। इमोशन ज्यादा चलता है। तो मैं हमेशा कहता हूं मार्केट्स आर इमोशनल इन द शॉर्ट टर्म पर फंडामेंटल इन द

4:35 लॉन्ग टर्म। ओके। अगर एक कंपनी अच्छा करेगी तो देश अच्छा करेगा, कंपनी अच्छी करेगी, स्टॉक मार्केट अच्छा करेगी। सिंपल रूल है यह। और अभी तो एज अ स्टॉक मार्केट हम बड़े छोटे हैं। मतलब आपको एक उदाहरण दूं तो इंडिया की टॉप वर्ल्ड की टॉप 100 कंपनीज़ में इंडिया की तीन ही कंपनी आती हैं। और पहली कंपनी Reliance है। वो 65th नंबर पे आती है। ओके। तो हमारे पास कितना बड़ा स्पेस है अभी ट्रैवल करने को? बहुत बड़ा स्पेस है और हमारी कंपनी सक्षम है। लोग सक्षम है। हम कर सकते हैं। तो इसलिए मेरे को मैं तो हमेशा ऑलवेज बुलिश हूं इंडिया पे। हां शॉर्ट टर्म में प्लस माइनस प्लस माइनस चलता रहता है। बट मैं उस टाइम भी आपको बोल के गया था कि मैं डेली ट्रैकिंग इतना नहीं करता और मैं लोगों को भी यही कहता हूं कि वो टाइम था खरीदने का। अब अगर आपने देखिए क्या होता है हर बार हम आके बोलते हैं अगर काश आपने 2020 में खरीदा होता।

5:20 बिल्कुल। तो वो काश वाला मूवमेंट था। एक सिर्फ 6 महीने पहले ही था। 6 महीने भी नहीं हुए शायद। 4 महीने पहले तक का ही था। मार्च अप्रैल तक का ही था। 4 महीने पहले आपके पास वो मूवमेंट था। आज अगर मैं वापस आ के बोलूं काश आपने 4 महीने पहले खरीदा होता तो हर बार काश मत कीजिए। कभी तो एक्शन लीजिए। यू हैव टू टेक एन एक्शन। आप कह रहे थे उसमें ना कि हम तो भर के खरीदेंगे और फिर जो लोग ये कह रहे हैं कि अब तो सब कुछ खत्म हो जाएगा। वो लोग बाद में पछताएंगे और मैं तब हंस रहूंगा। हां। और वही है तुम हंसोगे। मतलब तुम रोओगे मैं हंसूंगा। वो था ना डायलॉग इसका थ्री इडियट्स का। तो फिर मेरे साथ वही होना था। एट ये मैं देखते आ रहा हूं। मतलब आई एम इन द मार्केट्स इन 2006। आज ऑलमोस्ट 20 साल हो गए ना। मैं यही देखते हुए आ रहा हूं कि आपको मैं बताता हूं जैसे जब मैंने एसआईपी चालू करी थी 208 का जनवरी था उसके बाद मार्केट 60% क्रैश करी है तो मैंने वो

6:07 देखा हुआ है साइकिल तो मुझे समझ आती है ये बात अब एंड एव्री नेगेटिव साइकिल मेक्स अस मोर स्ट्रांग और हमें ये बिलीव करवाता है कि अगला साइकिल हमारे को अच्छा पैसा बना के देगा। संजय भाई इसमें अभी एक सवाल अब लोगों का ये आ रहा है कि ठीक है हमने वो मौका तो गवा दिया। अब क्या करें? अब मार्केट क्योंकि हाई पे आ गई है तो क्या अब खरीदें? क्योंकि लोगों को यह रह रहा है कि अब अगर खरीदेंगे तो यार ऐसा ना हो कि हमने बहुत हाई पे खरीद लिया फिर मार्केट नीचे चली जाए। तो इस सिचुएशन में लोग क्या करें? देखिए एक चाइनीस प्रोवर्ब है कि द बेस्ट टाइम टू प्लांट अ ट्री वाज़ 20 इयर्स बैक। ओके? द सेकंड बेस्ट टाइम इज़ नाउ। ठीक है? तो आपको ना आज ही चालू करना है। आपको ये नहीं सोचना। देखिए अगर आप 10-15 साल के लिए सोच रहे हैं तो आप आज एंट्री करेंगे या आज से 1000 पॉइंट नीचे करेंगे या 1000

6:52 पॉइंट ऊपर करेंगे बहुत ज्यादा फर्क पड़ेगा नहीं। ठीक है? अगर आप 10-15 साल के लिए सोच रहे हैं। अगर आप शॉर्ट टर्म सोच रहे हैं तो वैसे भी आपको इक्विटी मार्केट में आना ही नहीं चाहिए। प्रॉब्लम ये है लोग ये सोचते हैं मुझे 3 साल के अंदर यहां पे अपना पैसा किसी भी तरह डबल ट्रिपल करके जाना है। बिल्कुल ये रहती है। तो वो नहीं पॉसिबल है। हां वो कोई वन ऑफ केस हो गया। आपने कोई बहुत अच्छा मल्टीबैगर आइडेंटिफाई कर लिया और बट उस पे होल्ड करना अगर आपने कोई शेयर ₹10 का खरीदा था और वह अचानक से एक साल के अंदर ₹30 का हो गया तो आप नहीं पकड़ पाओगे आप उसको बेच दोगे आप वेट नहीं करोगे जैसे एक कंपनी थी अभी मतलब एक रेकमेंडेशन नहीं है फॉर एग्जांपल है 2019 में आई थिंक 5 या ₹6 का शेयर था आज 700800 का शेयर हो गया है सीजी पावर करके ठीक है अब किसी ने ₹6 में खरीदा अचानक से वो एक साल के अंदर ₹50 हो गया तो वो तो छोड़ देगा ही विल नॉट वेट कि मैं इतना कितना वेट

7:39 करूं? तो इसीलिए ना ये सारी हाइपोथेटिकल बातें हैं। काश मैंने यह खरीदा होता का। आप काशकाश मत करो। अगर आप लंबे समय के लिए हो तो मार्केट में एसआईपी करो और पैसे को बढ़ने दो आराम से शांति से। फाइन। संजय भाई आप कह रहे हैं कि मार्केट में एसआईपी करो। अभी स्टार्ट करो और पैसे को अपने टाइम दो। मार्केट बढ़ाएगी। लेकिन एक चीज ये आती है संजय भाई। ये सब ये चीज हमें ना सबको पता है कि हमें बजटिंग करनी है। हम हमें इन्वेस्ट करना है और फिर हमारे पास पैसा बनेगा। लेकिन हम लोगों के पास वो क्या चीज होती है कि हम फिर भी रुक जाते हैं इन्वेस्ट करने से। फिर भी लोग इन्वेस्ट नहीं कर पाते। फिर भी सोचते रहते हैं। हम देखिए क्योंकि ना लोगों के गोल्स क्लियर नहीं है। ओके मैं आपको मैं दो-तीन चीजें यहां पे साइकोलॉजिकली काम करती हैं। सबसे पहले ना हमारे वो मानसिकता बनी हुई है गेट रिच क्विक। मैं अभी दुबई गया था और मैं एक बड़े फंड मैनेजर से मिला वहां पे।

8:26 तो उनका फंड करीबन 250 300 मिलियन डॉलर का है। तो मैं उनसे बात कर रहा था तो उनको जो पैसा देता है वो सारे बड़े लोग हैं जिनके खुद के मिलियन डॉलर बिनेसेस हैं ये सब। तो मैंने बोला यार ये तो बहुत प्रेशर करते होंगे आप पे कि 16% रिटर्न बनाओ, 25% बटाओ, 30% बनाओ। बोलते नहीं संजय जी ये तो 810% मांगते हैं। मतलब जिसके पास पैसा ज्यादा है वो तो कम रिटर्न में भी खुश है। तो उन्होंने बहुत अच्छी बात बोली वहां पे। बोलते हैं कि जो बिलेनियर माइंडसेट है ना या मिलेनियर माइंडसेट है वो एक्स्ट्रा रिटर्न्स नहीं चस कर रहा है। वो कैपिटल प्रिजर्वेशन के साथ कैपिटल ग्रोथ चज़ कर रहा है कि मेरा कैपिटल खत्म ना हो जाए। आपको अगर तेज पैसा बनाना है ना तो उसका भी तरीका है और वो तरीका है आप अपनी एक्टिव इनकम पे फोकस करो। एक्टिव स्किल्स पे फोकस करो। आपके बिजनेस से, प्रोफेशन से, सैलरी

9:11 से आप ज्यादा तेजी से पैसा कमा सकते हो। मार्केट से नहीं कमा सकते। मार्केट से उलझूल एक्सपेक्टेशन रखना फिर गलत हो जाता है। तो पहली चीज यह होती है कि आपकी एक्सपेक्टेशन ही गलत होती है मार्केट से। भाई वारेन बफेट भी कहते हैं वो रिश्ते ज्यादा लंबे निपटते हैं जहां अपेक्षाएं कम होती हैं। बिल्कुल। तो अपेक्षा कम कर दो पहले मार्केट से। सेकंड आपका गोल क्लियर होना चाहिए। मुझे मेरा गोल क्या है? फॉर एग्जांपल मुझे 3 साल में गाड़ी चाहिए। 5 साल में घर चाहिए। 10 साल में रिटायरमेंट चाहिए, 20 साल में एक्स व जेड चाहिए। मेरे को जनरेशनल वेल्थ जनरेट करनी है। उस हिसाब से आप इन्वेस्ट करो। होता क्या है? छोटा गोल होता है 3 साल। आदमी आके स्टॉक मार्केट में पैसा डालता है फिर पैसा फंस जाता है। फिर वो रोता रहता है। 3 साल के पैसे के लिए तो हम कभी कहते ही नहीं स्टॉक मार्केट हो। मार्केट इज़ फॉर एनीथिंग अपवर्ड्स ऑफ़ थ्री टू 4 इयर्स। 4 साल के ऊपर होगा तो मार्केट में घुसना चालू करिए धीरे-धीरे धीरे-धीरे। और उसके बाद जो आपको यह कन्विक्शन नहीं

9:56 होता कि अगर आप होल्ड करोगे तो आपका गोल अचीव हो जाएगा। क्योंकि आपने एजुकेशन नहीं ली। आपके पास फाइनेंसियल एजुकेशन है ही नहीं। आपको पता ही नहीं कंपाउंडिंग काम कैसे करती है। आपको पता ही नहीं बजटिंग कीेंस कैसी है। तो अगर मैं अगर आप अपनी अपेक्स एक्सपेक्टेशन ठीक कर लीजिए। रादर मैं सबसे पहला स्टेप कहूंगा फाइनेंसियल लिटरेसी एक्सपेक्टेशन ठीक सेट कर लीजिए और गोल के हिसाब से निवेश करके शांति से बैठ जाइए। मतलब इसमें ना अगर आप ज्यादा एक्शन करोगे ना तो आप प्रॉब्लम में आओगे। कम एक्शन करोगे तो ठीक रहोगे। बिल्कुल। संजय भाई लेकिन अभी सेविंग्स पे ही आ जाते हैं सबसे पहले वहीं से स्टार्ट करते हैं आपके साथ कि जैसे मैं अभी आपके पिछला क्वेश्चन मैंने आपसे किया कि लोग चाहते हैं इन्वेस्ट भी करें सब कुछ करें लेकिन वो पहला स्टेप नहीं ले पाते सेव ही नहीं कर पाते आप क्योंकि फ्रेंड्स कोच हैं आपके पास ऐसे

10:42 केसेस आते होंगे तो आप ये बताएं कि ये क्या मेंटालिटी हो जाती है लोगों की कि चाहते सब कुछ है लेकिन वो इनिशियल जो फज़ है सेविंग का वो लोगों के पास नहीं हो जाता मेरे यहां ना एक हमारे एक स्टूडेंट थे वो ना एफडी डी भी सिर्फ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में करते हैं। अच्छा ओके मतलब एक तो करते ही एफडी है और करते भी सिर्फ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में मतलब मतलब कल को HDFC भी डूब जाएगा कुछ भी डूब जाएगा इतना फियर है उनको फिर मैंने उनको समझाया बोला देखिए आरबीआई कहता है कि आप जो है कोई भी बैंक अगर फेल हो जाएगा तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया आपको ₹5 लाख वापस कर देगा। तो एटलीस्ट हर बैंक में ₹ लाख की एफडी कर दीजिए। बिल्कुल। ठीक है। अच्छा कोई बैंक आपको 50

11:27 पैसा ज्यादा ब्याज दे देता है, कोई ₹1 ज्यादा ब्याज देता है। हर बैंक चाहे वो स्ेड्यूल्ड बैंक हो, चाहे कोई भी बैंक हो आप उसमें स्ेड्यूल बैंक्स जो होते हैं वो अच्छी एफडी का रेट दे देते हैं आपको। अगर समझिए कोई बड़ा बैंक होता है वो 6.5% देगा तो वो 7 भी दे देते हैं। आठ भी दे देते हैं। तो डाल दीजिए 5 लाख वहां पे। वो तो सरकार से गारंटीड है। बैंक डूबा तो भी मिलेगा आपको। तो ये क्या है? लैक ऑफ नॉलेज है कि इतना भी नहीं आपको पता कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से एक उनकी सब्सिडरी कंपनी है डीआईसीजीसी जो गारंटी करती है कि 5 लाख तक का आपका एफडी हर बैंक अकाउंट का हर पैन के लिए अलग तो अगर भारत में 40 बैंक अकाउंट है सॉरी 40 बैंक्स हैं तो 40ों बैंक्स में आप 5-5 लाख डाल देंगे और 40 के 40 डूब गए तो भी आपके 2 करोड़ वापस आ जाएंगे। ओके। ठीक है? तो पहली चीज़ तो यह आपको हो गई। अब फिर वहां से उन्होंने स्टार्ट किया। फिर मैंने उनको

12:13 कहा देखिए आपने पहला कदम लिया। वेरी गुड। देखिए क्या है लोगों को रिस्क लेना ही बहुत कम लोगों को रिस्क मतलब रिस्क समझ ही नहीं आता है। फिर मैंने उनको कहा कि अच्छा उनको ये लगता है कि अगर मेरे पास ₹1 लाख है तो मेरे को सारे 10 लाख से ही रिस्क लेना है। मैंने बोला अरे भाई 10 लाख से मत लो। ₹25,000 से रिस्क लो। चलो हम कॉर्पोरेट बॉन्ड्स ले लेते हैं। कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में क्या है? अच्छी कंपनी के बॉन्ड्स होते हैं। ठीक है? पिरामिल का बॉन्ड आ रहा है। एक्स व जेड जो भी रेटेड कंपनी जिनकी रेटिंग होती उसमें आपको ब्याज दर 10% के आसपास मिल जाती है। तो आप करो ₹25,000 डाल के तो देखो एक दो बार जब ट्रांजैक्शन पूरा होगा आपका कॉन्फिडेंस बढ़ जाएगा। अच्छा फिर लंबे अवधि के लिए आ रहे हो छ सात साल के लिए आ रहे हो इंडेक्स फंड में डाल दो। निफ्ट्टी 50 में डाल दो। अगर रिस्क ज्यादा लेना है तो निफ्ट्टी मिड कैप में डाल दो। बहुत रिस्क लेना है निफ्टी स्माल कैप में डाल दो। कोई नॉर्मल एक्टिव फंड मत। सिर्फ इंडेक्स पकड़ लो। कोई भी इंडेक्स पकड़ लो।

13:00 उसके म्यूच्यूल फंड में पैसा डाल दो। ठीक है? तो आपको पहले पैर गीला करो हल्का सा पैर गीला करो फिर धीरे-धीरे स्विमिंग पूल में घुसो घुसो घुसो और फिर जब अच्छे समझ जाओगे तो आप तैराक बन जाओगे मतलब आप एक अच्छे स्विमर बन जाओगे तो रिस्क को हम इसे कहते हैं रिस्क लैडरिंग यानी रिस्क की सीढ़ी को चढ़ना चालू कीजिए क्योंकि रिस्क लिए बिना रिटर्न्स नहीं आएंगे या आपकी कमाई इतनी ज्यादा हो कि एफडी के 6% ब्याज से भी आपको इतना पैसा आ रहा हो कि आपको प्रॉब्लम ना हो या तो वो स्थिति है तो तो बहुत अच्छी बात है। अगर पैसा नहीं है तो आपको धीरे-धीरे फिर रिस्क लैडरिंग करनी पड़ेगी। फाइन संजय भाई आपको ये नहीं लगता कि आजकल जो सोशल मीडिया का हमारा ट्रेंड है उसकी वजह से लोगों की जो एबिलिटी है सेव करने की को इन्वेस्ट करने की एक तरीके से तो बड़ी है मान लीजिए आप जैसे लोग आ गए आप लोगों ने बताया अंकुर हैं वो लोग बता रहे हैं सब लोग बता रहे हैं लेकिन कहीं ना कहीं घटी भी है क्योंकि

13:45 एक चीज देख रहे हैं मुझे भी वो चीज चाहिए मुझे ये वाली गाड़ी लेनी मुझे तो इससे क्या आपको लगता है देखो मैंने ना एक बार अपनी क्लास में एक एक्सरसाइज की थी और मैंने सबको कहा था कि आप एक काम करो आपके घर में जो भी आपकी चीजें हैं घड़ी कपड़े, जूते जो भी आप एक्सेस जो भी चीजें आप वो चीज पकड़ो जो आपने पिछले एक साल से छुई नहीं है। ओके? चाहे आपकी कोई शर्ट थी, ट्राउज़ थी, बेल्ट थी, घड़ी थी, कोई भी चीज तो अगर एक साल से नहीं छुई तो चांस तो कम ही है ना। अब आप उसको पहन वापस यूज़ करोगे। मतलब आपके पास अगर 100 आइटम है तो कितने कितनी आइटम्स ऐसी हैं? काफी सारी होंगी। मतलब आपका भी मैंने एक्सरसाइज दी थी क्लास में। तो अगली बार जब बच्चे आए वापस तो लड़कों के केस में ये नंबर 60 के आसपास निकला। ओके?

14:31 और लड़कियों के केस में ये नंबर 80 के आसपास निकला। तो उन उससे ना उनको गिल्ट हुआ समझ आया। मतलब देखिए आप जब इसको खरीद रहे थे तब आपने ये सोचा था कि आप जो है मतलब इसको इस तरीके से यूज़ ही नहीं करोगे उसके बाद। बिल्कुल नहीं सोचता। मैं आपको बता रहा हूं। ऐसी कई लड़कियां हैं कुछ फ्रेंड्स व्रेंड्स भी हैं हमारी। उनके घर ना मैं जाता हूं कभी मिलता हूं उनसे तो उनके ना mnta के पैकेट खुले भी नहीं होते। मतलब आ गए हैं, पड़े हैं, खुले भी नहीं है। पर उस टाइम दबा दिया। ₹800 की ड्रेस हो गई। ₹1000 की ड्रेस हो गई। जी अच्छी लग रही है। लाल कलर की ड्रेस आई है। नई नया डिज़ाइन आया है। तो मतलब ऐसा हो गया कि mtra वाले भैया को पता है कि ये दीदी का घर का है। तो इतनी ज्यादा ऑर्डरिंग हो रही है उधर से। तो मतलब नथिंग अगेंस्ट mntra और एनी। आई एम जस्ट गिविंग एन एग्जांपल। तो माय पॉइंट इज़ कि आपको जब आप डिसीजन

15:16 लेते हो, परचेस डिसीजन लेते हो, मार्केटिंग वालों का यह काम है कि आपसे पैसा निकलवाएं। आपका काम है अपने पैसे को संरक्षित करने का, उसको बचा के रखने का। तो, आपको यह पता होना चाहिए क्या मैं यह चीज यूज करने वाला हूं। थोड़ा एक कदम पीछे ले लो, ठहर जाओ। पूछ लो अपने आप से। अपनी शॉपिंग लिस्ट बना लो और हफ्ते का एक दिन रखो कि मैं शॉपिंग लिस्ट रिव्यु करूंगा। इसमें से मुझे क्या चाहिए? आपने तय कर लिया कि शनिवार का दिन होगा। जी जब मैं शॉपिंग करना है कि नहीं। आपने कार्ट में डाल लो और शनिवार को चेक कर लो। इनमें से एक्चुअली कौन सी चीज चाहिए। क्योंकि उस टाइम अगर आपने खरीद लिया तो वो इंपल्स बाइंग हो जाती है। पर अगर आपने कार्ट में डाल दिया तो यह इम Amazon और ये लोग भी कहते हैं कि कार्ट में एक बार डाला ना तो उसकी प्रोबेबिलिटी ऑफ़ बाइंग बहुत कम हो जाती है। वो चीज़ लोग नहीं खरीदते और आप अपना खुद का भी बिहेवियर याद करेंगे अयाज़ भाई तो आपको भी दिखेगा कि यार मैंने हां

16:02 जो कार्ड में डाला भूल ही गया। फिर मैंने खरीदा एक्सक्ट्ली बड़ा रहता है बहुत। वो बड़ा रहता था कार्ड में। तो पहले कार्ड में डालिए। पहले परचेस मत कीजिए। पहले कार्ड में डालिए और परचेस डे बना लीजिए अपना कि मैं शनिवार जो भी आपको दिन पसंद है आप छुट्टी पे हो उस दिन और उसने आप उस दिन अच्छा यार 20 आइटम कार्ड में डाली थी चाहिए तो तीन ही थी तो 17 आइटम को क्रॉस मार दो खत्म कर दो वहां से सो दीज़ आर सम थिंग्स व्हिच यू कैन यूज़ क्योंकि अब क्या है Instagram है आप इन एक एवरेज इंडियन 7 8 घंटा स्क्रीन टाइम पे और उसमें से 30% टाइम्स वो ऐड देख रहा है तो यानी दिन में 2ाई घंटे ऐड देख रहा है तो माइंड को कंट्रोल करना बहुत मुश्किल हो जाता है तो और एडवर्ट बहुत इनोवेटिव हो गए हैं। वो स्कीम्स भी देते हैं। ऑफर्स भी देते हैं। आपको फोमो भी दिला देते हैं। फियर ऑफ़ मिसिंग आउट भी करा देते हैं। यलो भी करा देते हैं। यू ओनली ओनली लिव वंस भी

16:47 करा देते हैं। सब कुछ करा देते हैं। उनको आता आता है भाई। उनका गेम है ये। दैट्स देयर गेम। तो इस उनकी गेम से बचिए। अपने आपको संरक्षित रखिए। और जिस आज आप भी ये एक्सरसाइज करिए और कमेंट सेक्शन में आके इस वीडियो के बाद में बताना कि भाई कितनी ऐसी चीजें थी 100 में से जो आपकी एक साल से आपने छुई भी नहीं है। और उससे आपको रियलाइज होगा कि आप इंपल्स बाइंग मत करिए। फाइन भाई कुछ और पर्सनल फाइनेंस हैबिट आप हमारे व्यूअर्स को बताएंगे किस तरीके से वो अपनी सेविंग्स बढ़ा सके या सेविंग कर सकें और इसके बाद मैं आपसे ये जानना चाहूंगा कि आपने क्या क्योंकि आप सक्सेसफुल इन्वेस्टर हैं एक हमारी नजर में सबकी नजर में है तो क्या आपने भी कोई ऐसी गलतियां की है पजल फाइनेंस में जो मतलब आपको लगा नहीं करनी चाहिए थी तो कुछ देखिए हम हमेशा कहते हैं योर स्पेंड्स शुड बी रूल बेस्ड एंड योर इन्वेस्टमेंट्स शुड बी गोल बेस्ड ओके ठीक

17:33 है जी स्पेंड शुड बी रूल बेस्ड यानी यानी नियम होना चाहिए खर्चे का। जैसे एक नियम हो गया। मैं अगर कोई चीज एक बार खरीद दो बार खरीद सकता हूं तो एक बार खरीदूंगा। ये एक नियम हो गया। दूसरा नियम हो गया द 1% रूल। एव्री मंथ मैं अपना बजट लेके बैठूंगा और उसको 1% कट करूंगा। ओके? फॉर एग्जांपल मैं इस महीने ₹00 का खर्चा किया। तो मैं अब तय करूंगा कि अगले महीने में मैं ₹400 से चार सिर्फ ₹400 कम कर दूंगा। अब वो 400 कैसे कम होगा? एक Siggy Zomato का आर्डर कम कर लो। एक ही ठीक है। या फिर आपने एक Uber राइड की जगह आपने मेट्रो पकड़ ली। पैदल चले गए कहीं पे। यह पहला स्टेप हुआ। अगले महीने जब आप वो ₹39,600 हो गया, फिर से ₹4 का 400 कम करो। ऐसे करते-करते आप उसमें बचा रहे हो पैसा। यह पैसा आपका आगे ऐड ऑन होगा। अभी शुरू में छोटा लगेगा पर बाद में ये नंबर बहुत बड़ा हो जाता है। ठीक है? तो पहला ये

18:18 दूसरा एक रूल हो गया। तीसरा आपका रूल हो गया बकेट सिस्टम यूज़ करिए। बकेट सिस्टम का मतलब ये होता है कि सबसे पहले अपना इमरजेंसी फंड क्रिएट करिए। लोग चार में से तीन लोगों के पास एज अ इमरजेंसी फंड नहीं है। मतलब आपको किसी की जॉब चली जाए। मैं एक मेरे एक फ्रेंड की जॉब चली गई तो 3 महीने का पैसा नहीं था उसके पास और उसकी तनख्वाह ₹.5 लाख महीना थी। 2 एंडफ लाख अ मंथ उसकी सैलरी थी। और वो 3 महीने का पैसा जमा नहीं कर पाया। तो एटलीस्ट आपके पास 6 महीने का एक जो है अह इमरजेंसी फंड क्रिएटेड होना चाहिए आपके पास। तो यह जो चीजें हैं यह आप करिए। इतने से ही आप में बहुत मैसिव इंप्रूवमेंट आ जाएगा। आप बहुतों से बहुत आगे निकल जाएंगे। अब आपने पूछा मैंने क्या गलतियां करी थी? आई थिंक जो सबसे बड़ी गलती मेरे से हुई है

19:04 वो हुई है कि मैंने ना लोगों को पैसा दान में दिया है लिटरली। तो थोड़े इमोशनल है हम। तो कोई आ गया बोला संजय सर ये भाई ये ऐसा हो गया थोड़ा पैसा दे दो, पैसा दे दो, पैसा दे दो। बाद में वो उठ के फोन भी नहीं उठाते हैं। फिर आपके से बात भी नहीं करते। इमोशनल ट्रॉमा देते हैं। तो मैं आप सबसे रिक्वेस्ट करूंगा आपका नाम HDFC बैंक, स्टेट Bank ऑफ इंडिया, ICICI बैंक नहीं है। ठीक है? तो आप प्लीज किसी को पैसा मत दीजिए और अगर देते हैं तो उतना पैसा दीजिए जो आप भूल सकते हैं। अगर आपकी क्षमता ₹1000 की है देने की और उसको देके आप भूल सकते हैं कि चल ठीक है यार दोस्ती का नाम लिख दिया मैंने। तो ₹1000 ही रुपया दीजिए। प्रेशर में आके ₹10,000 15,000 मत दीजिए। ठीक है? क्योंकि कहानी सबके पास है। प्रॉब्लम सबकी है। अंत में आपकी जब प्रॉब्लम होगी तो समझ आएगी। तो ये मेरी एक सबसे बड़ी मिस्टेक रही है पर्सनल फाइनेंस में। सेकंड मुझे लगता है ऐसी चीजों में

19:50 कभी-कभी मैंने इन्वेस्ट किया है और ये सबके साथ होता है शुरू में जो चीज हमें समझ में नहीं आती तो हमने उसमें भी इन्वेस्ट कर दिया कि चलो दोस्त बोल रहा था ये बोल रहा था तो हमारे से भी गलती हुई पर हमने ये देखा कि उन सारी चीजों में हमें पैसा नहीं बना और जहां मैं डिसिप्लिन तरीके से एसआईपी करता रहा इन्वेस्टमेंट करता रहा उधर मेरे को पैसा बन गया तो मेरे को ये रियलाइज हुआ ये वाला गेम भी बंद कर रहे हैं दुकान मैंने लाइफ को ना कंसोलिडेट किया तो मैं चाहता हूं आप लोग भी ना लाइफ को कंसोलिडेट कीजिए फैलाइए मत ये भी कर लूंगा वो भी कर लूंगा ऐसे भी कर लूंगा वैसे भी कर लूंगा कंसोलिड जितना आप फोकस्ड बेस्ड इन्वेस्टमेंट करेंगे गोल बेस्ड इन्वेस्टमेंट करेंगे उतना आप खुश रहेंगे हैप्पी रहेंगे तो आई थिंक ये कुछ चीजें आपको मतलब जो है ध्यान रखनी चाहिए फाइन भाई लास्ट वीडियो में कुछ क्वेश्चंस आए थे कमेंट्स में दो चार क्वेश्चन जो मुझे लगे वो मैं आपसे पूछूंगा तो उसमें एक क्वेश्चन था एक बंद ये कह रहे थे कि आई

20:36 विल नॉट बाय म्यूच्यूल फंड आई विल बाय फिक्स्ड एसेट्स लाइक गोल्ड लैंड इट्स द सेफेस्ट एंड हाइली रिटर्न इन्वेस्टमेंट हम तो ये क्या अप्रोच ठीक होती है देखिए गोल्ड आप खरीद रीद सकते हैं। बिल्कुल खरीदना चाहिए। मैं तो हमेशा कहता हूं आपके पोर्टफोलियो में गोल्ड का सेक्शन होना चाहिए। तो उसको खरीदने का माध्यम ईटीएफ है। आप ईटीएफ के माध्यम से खरीदिए। डिजिटल गोल्ड भी होता है पर उसमें जीएसटी लग जाता है। फिजिकल गोल्ड में फिर स्टोरेज और ये सब की स्ट्रेस भी होती है आपको। अगर आप इन्वेस्टमेंट के लिए खरीद रहे हैं। अगर आप पहनने के लिए खरीद रहे हैं तो ज्वेलरी खरीदिए। फिर तो आपको खरीदनी ज्वेलरी चाहिए। तो पॉइंट नंबर वन ये हो गया। पॉइंट नंबर टू इन्होंने बोला रियलस्टेट। बिल्कुल खरीद सकते हैं। पर उस रियलस्टेट के जो नेचर है उसमें आपको पैसा ज्यादा लगता है और आपको बहुत लंबे समय के लिए उसको होल्ड करना पड़ता है। तो अगर आप वो चीज के लिए तैयार हैं तो आप रियलस्टेट में इन्वेस्ट कीजिए कोई प्रॉब्लम नहीं है। और इसमें ये भी कह रहे हैं कि आई आई विल नॉट बाय म्यूच्यूल फंड। मैं म्यूच्युअल

21:22 फंड नहीं खरीदूंगा। तो उनकी चॉइस है। ओके ये उनकी पर्सनल उनकी चॉइस है। बट आज देखिए आज है ना आप समझिए भारत देश में अगर आप देखें तो 90% लोग ₹25,000 पर मंथ से कम कमाते हैं। बिल्कुल। तो उनके पास क्या विकल्प है बेचारों के पास? जहां कैसे पैसे बनाएंगे वो? वो तो जमीन का टुकड़ा नहीं खरीद सकते। आज एक बेसिक जमीन का टुकड़ा भी 2530 लाख से नीचे का नहीं आता। ठीक है? तो वो तो नहीं खरीद पाएंगे या घर अगर आप सिटी में आ गए तो बहुत ही बुरा हाल है। यहां तो नोएडा वो साइड में तो बहुत महंगे हो गए हैं। तो उनके लिए क्या विकल्प है? उनके पास 5000 हैं, 2000 है डालने के लिए। तो वो तो कहीं से तो स्टार्ट करेंगे। हैबिट तो बनेगी। तो इसलिए म्यूच्यूल फंड्स उनके लिए बेटर होता है। एक्चुअली। ओके। संजय भाई इसमें गोल्ड की बात इन्होंने की थी। तो गोल्ड पे आपसे सवाल करूंगा बिकॉज़ गोल्ड आप देख रहे हैं कहां से कहां पहुंच गया। तो ये क्या सोचा था कि गोल्ड इस तरीके से बढ़ जाएगा मतलब एक साल

22:08 के अंदर-अंदर एक तो ये दूसरा ये कि क्या गोल्ड अभी भी वर्दी इन्वेस्टमेंट है कंसीडरिंग कि इतना बढ़ गया एक साल में पिछले देखिए हम ना कोई भी चीज बढ़ जाती है तो हमें लगता है कि अब इससे ज्यादा नहीं बढ़ सकती और ये गोल्ड के साथ हर पॉइंट पे लगा है जब वो 25000 हुआ था तब भी लोगों को लगा महंगा हुआ फिर 50600 हुआ और महंगा हो गया फिर 75000 पे सबने सोचा और गोल्ड इस साल स्टार्ट हुआ था 74000 से और 1 लाख टच कर गया तो गोल्ड जो है ना वो ग्लोबली जो है तब बेनिफिट देता है जब कहीं ना कहीं अनसर्टेनिटी होती है वॉर होती है और इस टाइम पे अगर आप देखेंगे ग्लोबली वॉर चल ही रही है कंटीन्यूअसली चल रही है ठीक है कभी मिडिल ईस्ट में चल रही है कभी यूक्रेन रशिया चल रही है फिर बीच में इंडिया पाकिस्तान का थोड़ा सा हो गया तो ना ग्लोबली अभी अनसर्टेनिटी का माहौल है और जब तक अनसर्टेनिटी का माहौल होता है गोल्ड

22:54 राजा होता है और गोल्ड ने वो दिखा दिया है तो आपको ये नहीं सोचना है ऐसा नहीं है गोल्ड में बैड इयर्स नहीं आए हैं। गोल्ड 50% भी क्रैश किया है 50% इन 2 इयर्स थ्री इयर्स मतलब जहां से स्टार्ट हुआ 50% नीचे गिर गया। बट ऐसा नहीं है कि उसके बाद वो रिबाउंड नहीं होता। तो गोल्ड एक अच्छा इंस्ट्रूमेंट है। वो आपके पोर्टफोलियो का एक पार्ट होना चाहिए। मैं गोल्ड को गद्दा कहता हूं। मतलब जब पूरा सब कुछ गिर जाता है तो आपको वो गद्दे की तरह थोड़ा सा रिलैक्सेशन देता है। तो पोर्टफोलियो में 10-15% आप गोल्ड जरूर रख सकते हैं। ओके। 10-15% गोल्ड रखें। आप ये कह रहे हैं कि गोल्ड 50% भी गिर सकता है और बीच में ऐसी खबरें भी आने लगी थी लोगों ने बड़ी मतलब वीडियोस ऐसी आने लगी कि हमने भी बनाई थी नहीं चलिए आपने तो समझाने के लिए बनाई होगी लोगों ने डराने के लिए बनाई थी कि गोल्ड 500 आ जाएगा 400 आ जाएगा तो क्या

23:41 गोल्ड में ये भी खतरा है कि इतना नीचे आ जाएगा और प्लस जैसे आप रिबाउंड कह रहे हैं मान लीजिए स्टॉक मार्केट में हमने देखा 4 महीने में 5 महीने में ये इवन दो काफी लंबा पीरियड था कि जब मार्केट रिबाउंड हुई टाइम लगा इस बार लेकिन गोल्ड में क्या इतना ही टाइम लगता है गोल्ड में और ज्यादा टाइम लगता है रिबाउंड होने में वापसी देखिए अगेन को कंप्लीटली डिपेंड करेगा ग्लोबल सिनेरियोस क्या है। ठीक है? ठीक है? अगर ग्लोबली इंटरेस्ट रेट्स बहुत तेजी से बढ़ गए तो गोल्ड को फायदा नहीं होगा क्योंकि फिर लोग गोल्ड से पैसा हटा के बॉन्ड्स खरीद लेंगे। सरकार के बॉन्ड्स खरीद लेंगे। तो गोल्ड मोहताज है अनसर्टेनिटी का और इस टाइम पे देखो टाइम्स अनसर्टेन हैं। कोई भी कंट्री जो है वो ये नहीं कह सकता कि क्लियरली सर्टेनिटी के साथ चल रही है। कहीं ना कहीं किसी ना किसी को कुछ ना कुछ नुकसान बीच में होता ही है। वॉर होता ही है युद्ध होती ही है। तो मैं इसलिए गोल्ड में 10 से 15% इन्वेस्टमेंट रखता हूं। गिर गई तो गिर गए। 15 10-15%

24:28 नीचे भी गिर गई तो इतना फर्क नहीं पड़ता। और संजय भाई हमारे घरों पे हमने देखा एक इमोशनल अटैचमेंट भी है गोल्ड के साथ। बहुत पुराना अटैचमेंट है लेकिन वो अटैचमेंट वो फिजिकल गोल्ड के साथ कि जो हम पहनते हैं ये सब चीज़ होता है घर पे और अगर घर पे समझाया कि नहीं आप इस तरीके से कर लो तो वो कहते हैं ये कौन सा गोल्ड है ये तो कुछ है ही नहीं तो मतलब एक एक बड़े लोगों में तो ये तरीका भी है क्योंकि उन्होंने वो चीज़ देखी हुई है उन उनकी नजर में फिजिकल गोल्ड बढ़ा है लेकिन असल में वो उतना नहीं बढ़ा है जितना डिजिटल जिस तरह से डिजिटल गोल्ड में हमें मिलती है तो इस पे आपकी क्या राय है देखिए मैं कहता हूं जो सहूलियत जो समझ आए वो कर लीजिए अगर आपको फिजिकल गोल्ड पे पैसा डालना है तो आप 1 ग्राम से नीचे तो ले ही नहीं बिलकुल। तो यानी आपका ₹10,000 के आसपास का मिनिमम इन्वेस्टमेंट होना ही चाहिए। पर अगर आपके पास है ही ₹1000 तो आप क्या करोगे? फिर आप कैसे गोल्ड ले लोगे? तो आप फिजिकल गोल्ड नहीं ले सकते तो आप ईटीएफ ले लो। ₹9 में ईटीएफ मिलता है। ₹10

25:15 में ईटीएफ मिलता है। यानी कि आप ₹10 में गोल्ड पे पार्टिसिपेट तो कर सकते हो ना। कि एटलीस्ट आपने स्टार्ट तो कर दिया गोल्ड के रेट्स के हिसाब से आपका ग्रोथ और या फिर जो भी लॉस होगा जो भी होगा होगा। तो ठीक है। पुरा पुराने बड़े बुजुर्गों को था कि मेरे हाथ में उनको तो हर चीज़ अपने हाथ में चाहिए थी। का कागज मेरे हाथ में होना चाहिए। पहले तो शेयर्स के कागज मेरे हाथ में होने चाहिए। फिर वो भी हो गए। तो चलेगा। धीरे-धीरे ट्रेंड्स बदलेंगे। यंगस्टर्स इन्वेस्ट करेंगे तो ट्रेंड्स जरूर बदलेंगे इसमें। फाइन। संजय भाई ट्रेडिंग किन लोगों के लिए है? ट्रेडिंग किन लोगों के लिए? ट्रेडिंग उन लोगों के लिए जिनके पास कैपिटल है। पहली बात। या उनके लिए जिनको मतलब एक दिन में अमीर बनना है। नहीं नहीं नहीं। उनके उन उनके लिए ट्रेडिंग उनके लिए ट्रेडिंग इसलिए है क्योंकि शायद वो हमारे जैसे लोगों को पैसा कमा के देना चाहते हैं। इसको मैं डेटा से

26:01 बताता हूं। बात करते हैं अभी एक रिपोर्ट अभी एक इशू हुआ था जेन स्ट्रीट करके कंपनी का। ठीक है? अब आप समझिए कि कैसे सिस्टम कैसे रिग्ड है। सिस्टम नहीं रिग्ड है। मतलब ये चलेगा ही बड़े लोगों के लिए। सेबी कहता है 93% लोग 93% लोग 3 साल में लॉस करते हैं। ठीक है? तो 7% प्रॉफिट कर रहे हैं। उस 7% में से 1% साल का ₹1 लाख या उससे ज्यादा कमाते हैं। ओके। मतलब पूरे ट्रेडर बेस में से साल का भी 1% लोग साल का ₹1 लाख से ऊपर कमाते हैं। अब यहां किसी बच्चे के पास चले जाओ। उसको लगता है मैं ₹00 डालूंगा तो मैं महीने का ₹1 लाख कमा लूंगा। बिल्कुल। यही थॉट प्रोसेस आता है। तो यहां प्रूव हो गया कि वो थॉट प्रोसेस

26:46 ही गलत है। तीसरा डेटा पॉइंट जब ये मैप किया गया कि जिनके लॉस हुए थे उनकी आमदनी कितनी है। क्योंकि ये तो डाटा सब होता ही है एलएबी के पास। तो ये पता चला कि जिनकी इनकम कम है उनके लॉसेस ज्यादा है। ओके। अगर किसी की ₹3 लाख साल की इनकम है तो उसके लॉस ज्यादा हैं। एज़ कंपेयर टू समबडी जिसकी 10 लाख इनकम है। तो यहां लोग क्या कर रहे हैं? गैंबलिंग कर रहे हैं। गैंबलिंग हो रही है। क्योंकि जिसकी 3 लाख इनकम है वो डाल ही नहीं पाएगा ना ज्यादा पैसे। बिल्कुल। तो वो क्या करता है? फार आउट ऑफ द मनी कॉल पुट खरीद लेता है। टर्म्स होते हैं टेक्निकल टर्म्स। अभी डाटा खत्म नहीं हुआ। अभी और बताता हूं। ठीक है? वो कहता है रुको जरा सबर करो। अभी और बताता हूं। तो ये हो गया। अब आते हैं आगे और जो 1% लोग हैं जो पैसा बना पा रहे हैं। उसमें से

27:32 मोर देन 90% पैसा फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स और एल्गोरिथ्मिक ट्रेडर्स बना रहे हैं। ओके? और उसमें एक नाम उठा था जेन स्ट्रीट। अच्छा। ठीक है। अब जेन स्ट्रीट क्या बीमारी आप समझो वो ऐसी ऑर्गेनाइजेशन है जिसका कोई सीईओ नहीं है जिसको ट्रेडर्स चलाते हैं। और आईआईटी मद्रास चेन्नई कह लो आईआईटी चेन्नई का जो हाईएस्ट पैकेज गया था पिछले या पिछले से पिछले साल वो गया था 4 करोड़ 30 लाख साल का और एंप्लयर जिसने हायर किया था उसका नाम था जेन स्ट्रीट। ओके। तो जेन स्ट्रीट टॉप टेक्नोलॉजी के लोग हायर करता है। जिनको एल्गोस बनाने आते हैं ट्रेडिंग करने के। ओके। और उनका झगड़ा कोई और कंपनी से चल रहा है अभी एक सीक्रेट स्ट्रेटजी पे जिसका नाम है

28:19 इंडिया ऑप्शन स्ट्रेटजी जिससे उन्होंने 2024 में ₹1000 करोड़ कमाए। ₹1,000 करोड़ सिर्फ जेन स्ट्रीट ने कमाए। टोटल मिला के 3 साल में सारे ऑप्शन ट्रेडर्स में जो लॉस किया है वो है 1 81000 करोड़ और ओनली 2024 का लॉस जो था वो था 74ाउ करोड़ अरे ये जो 74000 करोड़ है ये जेन स्ट्रीट जैसी कंपनीज़ के पास स्टॉक मार्केट ब्रोकर्स के पास नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के पास जाता है अब आप डिसाइड कर लो आपको ट्रेड करना है या गेम में कुछ और चल रहा है ये डाटा ऑफिशियल कोई मेरा मनगढ़ंत कहानियां नहीं है। जाके सेबी की रिपोर्ट को पढ़ा जा सकता है। दो-तीन न्यूज़ आर्टिकल्स जेन स्ट्रीट के बारे में पढ़े

29:05 जा सकते हैं। एक बहुत बड़ा क्रिप्टो का एक्सचेंज होता था एफटीx सैम बैंकमैन फ्राइड सैम ओल्ड सैम बैंक फ्राइड सैम बैंक फ्राइड सैम बैंक या तो सैम बैंकमैन फ्राइड जब एमआईटी से पास हुए थे उनका पहला जॉब पता है कहां लगा था? जेन स्ट्रीट में ओके तो ये जेन स्ट्रीट है। उधर से निकल के उन्होंने वो अल्मेडा रिसर्च अपनी कंपनी बनाई थी। फिर एफटी एक्स एक्सचेंज बनाया था। तो वहां से वो निकले थे। बट ही वास अ प्रोडक्ट ऑफ़ जेन स्ट्रीट। वहां उन्होंने ये सब सीखा था। तो आप किसके साथ लड़ रहे हो यार? आप मशीनंस के अगेंस्ट लड़ रहे हो और वो भी सोफेस्टिकेटेड मशीनंस जो वर्ल्ड का टॉप टैलेंट बना रहा है। मतलब इंडिया का नहीं आईआईटी चेन्नई तो एक हो गया। एमआईटी के बच्चे तक उधर जा रहे हैं। जब वो 4 करोड़ का पैकेज इंडिया के बच्चों

29:52 को दे रहे हैं। उनको जिन्होंने इंजीनियरिंग पास आउट करी है। तो सोचो वो क्या कर रहे हैं उनके पीछे? तो किसके साथ युद्ध करने निकले हो भाई? शांति से ऐसा भी करो। वो जगह मत जाओ। वो जगह नहीं है आपके लिए। लास्ट क्वेश्चन रहेगा कि आप एल्गो ट्रेडिंग की बात कर रहे हैं तो एल्गो ट्रेडिंग होती कैसे? एल्गो ट्रेडिंग मशीन लर्न बेसिकली मशीन ट्रेड करता है। ट्रेडिंग का सबसे बड़ा प्रॉब्लम ये होता है। लोग अपनी स्ट्रेटजी पे स्टिक नहीं करते। ठीक है? जैसे एक स्टॉप लॉस लेना होता है। तो लोग नहीं ले पाते स्टॉप लॉस क्योंकि उनको लगता है नहीं वापस रिबाउंड हो जाएगा। पोजीशन ठीक हो जाएगी। पर इमोशन ये मशीन के पास इमोशंस नहीं होते। तो इसलिए लोग एल्गो से ट्रेड करते हैं। वो प्रोबेबिलिटी ऑफ प्रॉफिट पर वर्क कर रहे होते हैं। पर देखिए ट्रेडिंग जो गेम है ना वो बड़े कैपिटल का गेम है और बड़े इसमें बड़े सोफेस्टिकेटेड मॉडल्स लगते हैं।

30:38 फेलियर्स बहुत होते हैं। आपके पास कैपेसिटी होनी चाहिए। आप है ना 5 10 से ट्रेडिंग करने आएंगे तो हर रोज हारेंगे। अब मैं तो कहता हूं मार्केट में उस आदमी को ट्रेड ही नहीं करना चाहिए जिसके पास 10 लाख से कम का कैपिटल है। ठीक? फ्री कैपिटल। फ्री ओके? फ्री कैपिटल। फ्री कैपिटल और उसके पहले सीखना चाहिए अच्छे से कि क्या करना है, क्या नहीं करना है। तो इट इज़ नॉट दैट ईजी। इट्स लाइक अ प्रोफेशन। आप सोचो डॉक्टर बनने को 5 साल लगता है। उसके बाद भी आदमी पहले 10-15 साल स्ट्रगल कर रहा होता है। तो ट्रेडिंग भी वैसा है। पर ट्रेडिंग में क्या है? लोगों को उम्मीद है कि बटन दबाएंगे तो इधर से आलू डालेंगे उधर से सोना डालेंगे। 3000 हां। 4000 दिन का 4000 दिहाड़ी मजदूर। मैं ये ट्रेडर लोग और ट्रेडर नहीं है। साले दिहाड़ी मजदूर हैं। जैसे दिहाड़ी मजदूर सोचता है ना मैं सुबह उठूं। ₹500 कमा के आ जाऊं। वैसे ये ट्रेडर लोग सोचते हैं कि मैं सुबह उठूं। कोई बटन दबाऊं ₹5,000 कमा के आ जाऊं। दैट्स नॉट गना हैपन एवर तो अब तो डाटा प्रूव करता है मतलब मेरे को

31:24 बोलने की जरूरत ही नहीं है उसमें सही भाई एक क्वेश्चन आया इन्होंने कुछ लिखा नहीं है अपने बारे में बताया नहीं लेकिन वो ये कह रहे हैं कि मेरी काफी हेल्थ कॉम्प्लिकेशन है 15 साल मेरा गोल है मैं अचीव क्या कर पाऊंगी प्लीज रिप्लाई इन्होंने कुछ आईडिया नहीं दिया इसमें कि उनको क्या पहला स्टेटमेंट क्या था उनका कि मेरी काफी हेल्थ कॉम्प्लिकेशंस हैं। 15 साल मेरा एक गोल है। मैं क्या अचीव कर पाऊंगी इस वक्त में? ये तो बहुत ही इनकंप्लीट सा क्वेश्चन है। पर अगर आपके पास 15 साल की अवधि है तो आप अच्छे से इन्वेस्ट कीजिए। लॉन्ग टर्म इक्विटी में इन्वेस्ट कीजिए और मतलब अगर आप 10,000 भी डालेंगे तो 15 साल में यू शुड बी सिंग ऑन अ गुड ₹80 लाख ऑफ़ कॉपस अगर अच्छे से इन्वेस्ट हो गया तो ये है बट इनकंप्लीट क्वेश्चन है मतलब उसको कॉम्प्रिहेंड करना एक्सक्ट्ली वो लगा मेरे को उसप एक क्वेश्चन है क्वेश्चन नहीं एक्चुअली वो

32:10 बता रहे हैं वो कह रहे हैं सर 20% गिरने के बाद बहुत डर लगने लगता है हां बिल्कुल लगता है बिल्कुल लगता है ये बिल्कुल इन्होंने लाजमी बात करी है सही बात करी और इसीलिए आपको जो है पहले ना अपना रिस्क इवैल्यूएशन करना बहुत जरूरी है। आप कितना लाल देख सकते हो इज वेरीेंट। मैं 30% क्या मैं 50% लाल भी देख सकता हूं क्योंकि मेरे पास उतना आपने देखा है। है देखा भी है कैपेसिटी भी है, नॉलेज भी है, सब कुछ है। ठीक है? और गोल्स लंबे हैं। पर एक व्यक्ति जो आज मार्केट में घुस रहा है, वो इतना लाल नहीं देख सकता। तो ऐसे व्यक्ति को क्या करना चाहिए? उसके पोर्टफोलियो में इक्विटी का पोर्शन कम कर देना चाहिए। अब समझिए अगर उसने ₹1 लाख डाला था। मैं उदाहरण लेता हूं और उसमें से उसने ₹80,000 बॉन्ड्स में डाले थे या एफडी में डाले थे तो वो तो लाल हो ही नहीं सकता। बिल्कुल। अब बचा था ₹20,000 अब ₹00 20% गिर गया तो

32:59 कितना लाल हुआ? 4000 ही तो लाल हुआ। यानी पूरे पोर्टफोलियो में 1 लाख के पोर्टफोलियो में वो ₹4,000 लाल हुआ। उतने में उसको डर नहीं लगेगा। पर यही अगर उसने सारा पैसा इक्विटी में डाल दिया होता और उसमें लाल देखने की क्षमता नहीं है तो वो 20% लाल पे होता। तो मैं हमेशा कहता हूं आप कितना लाल देख सकते हो पहले ये डिफाइन कर लो। मेरा मेरे मेरे क्लाइंट से भी पहला क्वेश्चन यही होता है कि पहले ये बताओ लाल कितना देख सकते हो गोल बता दो और लाल बता दो उसके हिसाब से डिजाइन करेंगे फिर वो बोलते हैं अरे सर इतने तो हम पैसे डाल ही नहीं सकते जितने आप बोल रहे हो गोल अचीव करने के लिए मतलब भाई देखो आप का गोल ये है आप लाल ज्यादा नहीं देख सकते तो इक्विटी में डाल ही नहीं सकता फिर कल को आप नाराज हो जाओगे यार मेरे तो बहुत पैसे लॉस हो गए फिर आप यू नो आप टिकोगे नहीं इन्वेस्टमेंट पे सो आप लाल कितना देख सकते हो ये बहुत इंपॉर्टेंट एलिमेंट है और उसके हिसाब से इन्वेस्टमेंट

33:45 कीजिए लाल आप देख सकते हो 2% का पैसा आप डाल देते हो स्माल कैप में ऐसे कैसे चलेगा भाई वहां तो देखना पड़ेगा भाई 20 20 25% लाल देखना पड़ेगा आपको तो सर भाई कैसे-कैसे क्लाइंट्स मिलते हैं क्या ऐसा भी होता है कोई कहता है यार 50% भी लाल देख लूंगा मैं कोई दिक्कत नहीं है तो कैसे क्या फिर आप उनको कैसे देखो एक बड़े अलग तरीके के लोग होते हैं एंड देखिए सबकी अपनी अंडरस्टैंडिंग है अभी जैसे एक क्लाइंट मिले उन्होंने अपने म्यूच्यूल फंड में 54 म्यूच्यूल फंड्स खरीदे हुए हैं। अरे मतलब जब भी हर हर क्वार्टर में जो भी टॉप परफॉर्मिंग फंड था वो खरीद लिया। खरीद लिया। चलो अब ये अच्छा ये मिड कैप में अब ये अच्छा कर रहा है। ये खरीद लो। अब ये स्माल कैप भी अच्छा कर रहा है। तो हम कहते हैं ऐसे लोगों को ना ज़ूम मेंटालिटी होती है। मतलब उनको ज़ू जैसे भरा होता है ना जानवरों से। वैसे इन लोग का पूरा ज़ू बना होता है म्यूच्यूल फंड का। तो उनका फिर हमने ठीक करवाया। पहली चीज़। दूसरी चीज़ मुझे ऐसा

34:33 लगता है कि अगर आप डिस्ट्रीब्यूटर भी यूज़ करते हो इन्वेस्टमेंट करने के लिए। व्हिच इज़ ओके। बिकॉज़ डिस्ट्रीब्यूटर्स हेल्प करते हैं आपको इन्वेस्टमेंट्स पे स्टे करने के लिए। कभी मार्केट्स खराब होती है फिर आप अपने डिस्ट्रीब्यूटर से बात कर लेते हो। वह आपको तू चिंता मत कर यार चलेगा। पर है ना एटलीस्ट डिस्ट्रीब्यूटर कौन से फंड्स खरीद रहा है आपके लिए। वो फंड्स आपके रिस्क प्रोफाइल को सूट करते हैं कि नहीं करते हैं। ये जरूर देख लीजिए। मैंने ये एक बहुत बड़ी चीज देखी और लोग मेरे पास आए जो ऑलरेडी कहीं डिस्ट्रीब्यूटर पे थे और मेरे से बात-वात करी तो मैंने यह देखा कि शायद उनके रिस्क प्रोफाइल को और उनके गोल को समझा नहीं गया है बिफोर क्रिएटिंग द पोर्टफोलियो। रैंडमली बोल दिया। अच्छा आप इस पे डाल दो आप इस पे डाल दो इसमें डाल दो इसमें डाल दो तो आई थिंक ये एक दूसरा मैंने गलती देखी है और तीसरा मैंने मैंने कुछ ऐसे क्लाइंट्स देखे हैं जो हाइली ऑर्गेनाइज्ड मतलब जिनकी एक्सेल शीट मैंने मंगा ली मैं

35:18 बोला यार अब ये एक्सेल शीट तो मेरे को दे दो यार मैं इसको यूज़ करूंगा इतनी बढ़िया तरीके से पूरा उनको पता होता है मेरा कितना पैसा आ रहा है कहां लगा है कैसे लगा है मतलब उनकी एसेट रजिस्टर उनकी लायबिलिटी रजिस्टर उनका इनकम रजिस्टर उनका एक्सपेंस रजिस्टर सब कुछ एक्सेल पे बहुत अच्छे से मेंटेंड है। को क्लेरिटी है कि उनको क्या चाहिए उनका क्या है तो वो बड़ा अच्छा लगता है मेरे को जब ऐसे तरह के क्लाइंट्स मुझे मिलते हैं। फाइन संजय भाई अभी आपने कहा कि कुछ आपके पास क्लाइंट्स आए जिनके पास 54 50 से ज्यादा म्यूचल फंड है तो आइडियली एक बंदे को कितने म्यूच्यूल फंड होल्ड करने चाहिए कितने म्यूचल फंड में इन्वेस्ट करना चाहिए एक रफ फिगर अगर आप कुछ दें एक गोल के पीछे तीन से चार म्यूच्यूल फंड ओके अगर आपने गोल बना लिया है उस गोल के लिए तीन से चार म्यूच्यूल फंड्स ऊपर होने चाहिए अपने पास बस फाइन भाई अभी एक और चीज आती है क्वेश्चन में कि इनिशियली जब बंदे जॉब स्टार्ट करते

36:04 हैं मान लीजिए 24 साल में स्टार्ट की 22 साल में स्टार्ट की तो तब उनको रहता है ठीक है सबसे पहले कमाई से हम लोग जनरली फोन ले लेंगे हम कुछ आगे चलके चारप साल के बाद एक गाड़ी ले लेंगे हम और जब 35 36 37 इधर आते हैं जब बड़े खर्चे आने लगते हैं तब समझ में आता है यार इन्वेस्ट भी तो करना था इनवेस्ट तो करना था राइट है ना और तब आके दिक्कत ये होती है कि अब क्या करें हम तो ये आप बताएं कि इस तरीके की चीजें क्यों होती है हम लोग पहले क्यों आइडेंटिफाई नहीं कर पाते कि अगर हम लोग कमाने लग गए हैं तो थोड़ा सा इन्वेस्ट करना करना चलेगा लैक ऑफ फाइनेंसियल एजुकेशन एक्चुअली हम क्या देख रहे रहे होते हैं। हम देख रहे होते हैं अरे यार देखो ना अंबानी कितना खर्च कर रहे हैं। ये लोग कितना करते हैं। ऐसे देते हैं वैसे। आपको रियलाइज़ करना होगा कि जब धीरूभाई अंबानी ने बिज़नेस स्टार्ट किया था तो पहले 15 साल गाड़ी नहीं ली थी और आपको पहले 15 महीने में गाड़ी चाहिए।

36:52 मतलब वो आदमी 15 साल वेट करने को तैयार था जो एंटरप्राइज बना रहा था इतनी बड़ी और आपने जॉब जॉइ करी है और आपको 15 महीने के अंदर गाड़ी चाहिए। तो ये तो फिर आप पीछे हो जाओगे ना। भाई फाइनेंस रूल बड़ा सिंपल है। अगर आपकी बाल्टी में जितना बड़ा छेद होगा उतना बाल्टी जल्दी खाली होगी। तो आप छेद बड़े करते रहोगे। उसमें ईएमआई के छेद डाल दोगे। iPhone खरीद लोगे फिर गाड़ी खरीद लोगे, फिर बाइक भी खरीद लोगे, फिर घर भी खरीद लोगे, फिर सब कुछ ही कर लोगे। तो फिर आप भरोगे कैसे उस उस बाल्टी को? जो भी आप डिसीजन देखिए हम एक है ना रेश्यो होता है। इसको हम कहते हैं डेप्ट टू इनकम रेशियो। अब डेप्ट टू इनकम रेशियो का मतलब ये है अयाज़ भाई कि आपने सब्जी आपकी तनख्वाह ₹1 लाख है। उदाहरण के तौर पे महीने की ₹00 आपका घर का ईएमआई जा रहा है। 15,000 आपका फोन का ईएमआई जा रहा है। 15,000 आपका गाड़ी का ईएमआई जा रहा है। तो ₹60,000 जा

37:37 रहा है। यानी आपका डेप्ट टू इनकम रेशियो हो गया 60%। ठीक है? अब ये 1 लाख कमाने के लिए आपको 30 दिन काम करना है। तो 60% यानी 18 दिन आप बैंक की नौकरी कर रहे हो। बिल्कुल। तो आप एक तो नौकरी कर रहे हो। ऊपर से उसमें से 18 दिन बैंक की नौकरी कर रहे हो। सिर्फ 12 दिन आपके पास है। फिर आपको सरकार को भी पैसा देना है टैक्स के फॉर्म में। फिर आप जीएसटी भी पे करते हो वो भी सरकार को जा रहा है। तो अगर आप नेट नेट अपनी सेविंग देखोगे आप कहीं भी नहीं रह जाते। पर ये चीज लोगों को समझ ही नहीं आती। तो डेप्ट टू इनकम रेशियो आपका जो है वो 15 20 चलो 25% तक समझ आता है कि चलो इस रेंज में है। चलो ठीक है। आपको लाइफ भी जीनी है। अच्छे से क्रिएट भी करना है। पर अब पहले दिन आपकी तनख्वाह चालू हुई है और आप अपने ऊपर उधार का बोझ डाल रहे हो। अरे पहली इनकम चालू हुई है। आप अपना इमरजेंसी फंड क्रिएट करो। धीरे-धीरे इन्वेस्टमेंट की हैबिट डालो। हैबिट डालो नहीं जी पहले तो

38:24 हम उधार लेंगे ठीक है यही रहता है भाई इसमें मान लीजिए आप हैं एजुकेट कर रहे हैं लोगों को काफी चैनल्स आपके हैं और प्लस आप और मतलब व्यूज बहुत सारे आपके वीडियोस पे आते हैं रील्स आपके इतनी पॉपुलर होती हैं उस पे मैं lindin तक पे आपको देखता हूं तो ये चीज कर रहे हैं और काफी सारे फिफुंसर्स हैं जो और भी एजुकेट कर रहे हैं लोगों को फेंस कोच हैं लेकिन अभी भी एक चीज देखते हैं जब भी डाटा आता है कि एसआईपीस जो है वो दो-ती साल के अंदर बंद हो जाती है बहुत सारी। तो एक तरफ आप लोग एजुकेट कर रहे हैं लोगों को। आप कह रहे हैं कि लॉन्ग टर्म में जाइए, पैसा बनाइए, एक गोल भी दे रहे हैं। दूसरी तरफ ये चीज आ रही है कि एसआईपीस दो-ती साल से ऊपर चलती नहीं है। तो ये कहां कंट्राडिक्शन है? देखिए ह्यूमन नेचर तो ह्यूमन नेचर है ना। सुन के बड़ा अच्छा लगता है। रिजल्ट्स देख

39:10 के बड़ा अच्छा लगता है। वो कैलकुलेटर देख के बड़ा अच्छा लगता है। अरे 10,000 डालूंगा तो 1 करोड़ बन जाएगा। बहुत अच्छा मजा आता है। पर जब वो हल्का सा झटका लगता है तो फिर आप हिलने लग जाते हो कि यार मैं क्या करूं? ये तो वही बात हो गई ना। किसी ने बोला यार दो दोस्त रात को बैठे हैं। अब जॉब से परेशान हैं। बोले यार जॉब कल रिजाइन कर रहे हैं और हम स्टार्टअप करेंगे। स्टार्टअप चालू करिए। 3 महीने बाद समझ आ गई भाई ये तो अपने काम की नहीं है। टाइम तो लगता है। अगर आप स्टार्टअप कर रहे हो या कोई बिज़नेस कर रहे हो तो 5 साल आपको लगते हैं पहले स्टेबलाइज़ होने को। पर नहीं जी हमारे पास तो पेशेंस ही नहीं है। देखिए पेशेंस का गेम है। और इसलिए देखिए वारेन बफेट का एक-एक कोड जो होता है मास्टर क्लास ही होती है। कहते है ना स्टॉक मार्केट इज़ अ प्लेस टू ट्रांसफर वेल्थ फ्रॉम विद दी इंपेशेंट टू द पेशेंट। ओके। यही बिल्कुल। तो यानी जो इंपेशेंट होगा उससे पैसा उठाएगा उठाया जाएगा और पेशेंट जैसे हमारे लोगों को दे दिया जाएगा। तो जितने लोग एसआईपी बंद करके जाते

39:56 हैं मैं तो वो मेरी कमाई करा के जा रहे हैं। तो अच्छा मैं बता भी रहा हूं मत करो। बिल्कुल। अभी पीछे जब मार्केट्स गिरी तो एसआईपी क्लोज़र रेशियो 100% से ऊपर चला गया। मतलब जितने लोग आ रहे थे उससे ज्यादा लोग जा रहे थे। अभी पिछले महीने ये रेश्यो वापस 80% के आसपास आ गया। क्यों? क्योंकि मार्केट ऊपर चली गई। अरे ये कैसी बात हुई यार? जब मार्केट नीचे जा रही थी। एट दैट टाइम द क्लोज़र रेशियो शुड बी द लोएस्ट कि लोगों को ज्यादा खरीदना चाहिए उस टाइम बट नहीं नहीं अब नहीं है तो नहीं है अब यही तो कोशिश हैज़ भाई कि कोशिश करते रहें करते रहें करते रहें करते रहें मतलब बट मेरे एक संजय से या एक इन्फ्लुएंसरर से अच्छे इन्फ्लुएंसरर से मेरे को लगता है लाखों लोग लगेंगे इस इस पूरे हुजूम को कहते हैं ना जिसे समझाने को बहुत एफर्ट लगेगा बहुत एफर्ट लगेगा

40:42 एक थ्योरी और आती है इसमें कि जब लोग एसआईपी कर रहे हैं बढ़ भी रहे हैं काफी हमने देखा पिछले चारप साल में जो डाटा आता है इसमें लोग ये कहते हैं कि कोई भी इंस्ट्रूमेंट जब ज्यादा सक्सेसफुल होने लगता है जब ज्यादा पॉपुलर होने लगता है तो फिर उसकी ना इतनी वैल्यू नहीं रह जाती हम फिर वो उसमें इतने रिटर्न्स नहीं मिलते बहुत कम हो जाते हैं ये सब चीजें होती है और जब वो कम लोगों को पता होता है तब उसमें ज्यादा रिटर्न बनता है फॉर एग्जांपल जब आप इन्वेस्टमेंट में आपने इन्वेस्ट स्टार्ट किया होगा इन्वेस्टिंग तब बहुत कम लोग थे तो आप लोगों को बहुत अच्छा रिटर्न मिला लेकिन अब जब इतने ज्यादा लोग आ जाएंगे सब कॉमन हो जाएगा तो उतना रिटर्न नहीं मिलेगा ये एक थ्योरी आती है इस पे इस पे क्या ओपिनियन है आपकी देखिए मुझे लगता है कि ये गलत थ्यरी है। उसका रीज़न ये है कि आपको रिटर्न्स चज़ ही नहीं करने हैं। ओके। मैंने कहा ना अपेक्षा कम रखनी है आपको।

41:27 आपको लंबे समय रहना है मार्केट। अब आप बोलेंगे कि मार्केट 10% रिटर्न भी नहीं देगी तो वो तो पॉसिबल नहीं है। तो आप अपनी कैलकुलेशन 10% के हिसाब से करो। आप रिटर्न्स क्यों चज़ कर रहे हो? अब देखो 10% अगर मार्केट रिटर्न दे पाती है तो मेरे कितनी की एसआईपी लगेगी? कितने समय के लिए लगेगी? आप वो करो और भूल जाओ। अब प्रॉब्लम यह है कि आप रिटर्न्स रिटर्न्स एक ही जगह मिलेंगे वो है कि आप जहां नौकरी कर रहे हैं वहां रिटर्न्स मिलेंगे। यानी अपनी नौकरी में आपकी तनख्वाह बढ़ सकती है। आपके व्यवसाय में आपकी इनकम बढ़ सकती है। आपके फ्रीलांसिंग में आपकी इनकम बढ़ सकती है। उसके लिए स्किल्स पे एफर्ट डालना पड़ेगा। वो कोई डालना नहीं चाहता। यशस भाई मैं क्या कह रहा हूं कि मैं दुबई के एक बिलिनेियर फंड मैनेजर से मिला और वो कह रहा है लोगों की अपेक्षा 8% 10% है। और वो दूसरी बात भी उसने कही। उसने बोला है कि मैंने बोला यार 202% तो होती थी अपेक्षा। बोलते हैं 202%

42:12 उन लोगों की अपेक्षा होती है जिन पे पैसे नहीं होते। पॉइंट कह रहा है बिल्कुल सही। जिनके पास पैसे नहीं होते वो 2025% की एक्सपेक्टेशन लगाते हैं। ये जिनके पास पैसे हैं ना वो नहीं लगाते। वो अपने बिज़नेस में बिजी हैं। उनको पता है ये पैसा साइड में काम कर रहा है। 810% देगा तो भी चल जाएगा। सो यू हैव इफ यू हैव टू क्रिएट वेल्थ। यू हैव टू क्रिएट वेल्थ थ्रू एक्टिव इनकम एंड देन यू हैव टू प्रिजर्व वेल्थ एंड देन यू हैव टू कंपाउंड वेल्थ। ये तीन स्टेप्स आपको करने पड़े। पहले आपको कमाई बढ़ानी है, अपनी सेविंग्स बढ़ानी है और सेविंग्स बढ़ा के अपनी इन्वेस्टमेंट बढ़ानी है और इन्वेस्टमेंट को लंबे समय तक काम करने देना है। दैट्स इट। इतना सिंपल फ्रेमवर्क है ये। इसमें दो चीज मेरे को क्लियर हुई। एक तो आपकी क्लेरिटी मेरे को समझ आय भाई के अगर आपको ज्यादा कमाना है तो आप पहले अपनी एक्टिव इनकम बढ़ाइए। आपका स्किल्स। इस पे आप बहुत क्लियर है। इस पे आपसे पहले भी बात हुई। इस अभी भी आपने दो तीन बार

42:59 इसके बारे में बात की। दूसरी चीज़ मेरे को एक और क्लियर हुई। इसमें जो आपने बात की वो ये कि जो लोग ये कह रहे हैं कि भ हमें बहुत पैसा कमाना है और ज्यादा रिटर्न कमाने हैं और वो एसआईपी वगैरह उनकी कमी है उस हिसाब से तो एक उनकी साइकोलॉजी मेरे समझ में ये आ रही है कि भ वो यहां भी वो चाह रहे हैं कि वो आराम से बैठे रहे हां है ना और मुझे कुछ नहीं करना और लेट द मार्केट डू एवरीथिंग मैं बढ़ाऊंगा नहीं उसे मुझे काम नहीं करना नहीं करना तो ये आई थिंक ये इंपॉसिबल है जब तक आप अपना एफर्ट नहीं डालेंगे तब तक चीजें नहीं निकल नहीं नहीं। देखिए मैं आपको बताता हूं। मेरी एक फ्रेंड है। शी हैज़ अ इनकम ऑफ़ ₹5 लाख अ मंथ। ठीक है? एंड एसआईपी ऑफ़ ₹50,000 अ मंथ। तो मैंने एक दिन उसको पूछा। मैंने बोला अरे यार ये क्या बात हुई यार? तुम 5 लाख कमा रहे हो महीने। एटलीस्ट ₹1.52 लाख की

43:44 तो एसआईपी करो यार। बचा हुआ पैसा पड़ा है बैंक अकाउंट में। एफडी में जा रहा है। जा रहा है। मैंने तेरा इमरजेंसी फंड बन चुका है। तेरे पास घर है। यू आर मैरिड। एवरीथिंग इज ओके। ग्रेट। व्हाट अबाउट द रिमेनिंग मनी?" नहीं वो एफडी कर दी। क्यों कर दी? एक पॉइंट के बाद आप एफ में मत डालो ना पैसा। आपका इमरजेंसी फंड बन गया है। चलो 3 महीने, 6 महीने, 8 महीने, 10 महीने का आपने पैसा जमा कर लिया। अब तो डालो मार्केट में नहीं डालना। फिर वो रोते हैं। अरे यार हमारे तो पैसे नहीं बने। कैसे बनेंगे यार? आप 5 लाख अच्छा आप 5 लाख जिसकी इनकम है वो उसके लाइफ के गोल्स भी अच्छे होंगे। बिल्कुल। वो थोड़ी कोई अपनी छोटी गाड़ी 8-10 लाख की गाड़ी खरीदना चाहेगा। वो 25 लाख की गाड़ी खरीदना चाहेगा। 30 लाख की गाड़ी खरीदना चाहेगा। तो उसके लिए आपको इन्वेस्ट भी बेटर करना है ताकि आप इन्वेस्ट बेटर करेंगे तो वो कॉर्पस तैयार होगा उतने तरीके का। सो आई थिंक पीपल व्हाट दे आर

44:30 डूइंग इज दे आर नॉट स्टेपिंग अप। आपको अपनी एसआईपी को स्टेप अप भी करना है। मैंने जब एसआईपी स्टार्ट की थी तो वो शायद ₹3000 की एसआईपी थी। जाते-जाते वो 3 लाख की एसआईपी हो गई। कितनी एसआईपी करी हमने? तो वो स्टेप अप क्या? अगर मैं नहीं स्टेप अप करता तो मैं आज कहां फाइनेंसियली फ्री हो पाता। कमाई बढ़ी हमने स्टेप अप कर दिया। फाइन। संजय भाई अब तीन सिनेरियो मैं आपको दूंगा। सैलरी वाले उसके हिसाब से आप मुझे बताएं कि कितनी एसआईपीस एटलीस्ट या कितना इन्वेस्टमेंट उनका होना चाहिए। अगर कोई ₹25,000 कमाता है तो उसको कितना इन्वेस्टमेंट करना चाहिए? ₹00 वाले का भी बताएं और ₹1 लाख अगर कोई कमाता है क्योंकि जो ₹25 लाख कमा रहा है उसको तो हम हम बात कर चुके उसके बाद देखिए ₹25,000 अगर कोई कमा रहा है तो वो बहुत बुरी स्थिति में है। मतलब आई डोंट वांट टू मिल आप भारत के लास्ट 90% में मतलब आने लग गए

45:15 हो। तो आपको बड़ा सिंपल काम करना है। आपको अपनी इनकम बढ़ानी है। तो शुरू का जो पैसा बन रहा है उसमें अपनी इनकम बढ़ाने के लिए आप अपनी स्किल्स पे फोकस करिए। बट साथ ही साथ हमें हैबिट भी बनानी है। तो आप ऐसे समझिए आपकी तनख्वाह 25,000 नहीं है। आपकी तनख्वाह 22,000 है। ठीक है? 23,000 है। और वो दो-3,000 जो है वो एसआईपी कर दीजिए। ज्यादा मत करिए। पर जो बचता है पैसा उसमें से अपने स्किल्स पे फोकस करिए। अपने आप को बेटर कीजिए क्योंकि यहां से अब आपको अपनी तनख्वाह को फटाफट 1 लाख पहुंचाना है। अब जो बंदा ₹00 पहुंच गया। वेरी गुड। अच्छी बात है। एटलीस्ट एटलीस्ट 10 से 15% वो अपनी एसआईपी कर दे। मतलब ₹5,000 से लेके ₹8,000 तक कर दे। वापस उसके लिए भी सेम गोल है। उसको अपनी एक्टिव इनकम पे फोकस करना है। और जो बंदा 1 लाख पे पहुंच गया उसको मिनिमम 20 से 25,000 की एसआईपी करनी चाहिए। मिनिमम बोल रहा हूं। अगर उससे

46:02 ज्यादा कर पाए बहुत अच्छी बात है। पर 20 से क्योंकि अब 1 लाख वाले का टैक्स जीरो हो चुका है। एक्सैक्टली अब उसको टैक्स नहीं देना तो पूरा पैसा उसके घर आने वाला है। तो एटलीस्ट 20 से 25% उसको और अगर देखिए अगर 1 लाख वाला कोई यंग लड़का है क्योंकि यंग बच्चा है। तो इन दैट केस तो उसके पास बहुत स्पेस है। उसको 500 की भी एसआईपी कर देनी चाहिए। करना क्या है और क्या खर्चे आपको एक्सक्टली आपका हो सकता है रेंट होगा 10-15000 का बाकी आना जाना ट्रेवलवल तो 500 बचेंगे 400 बचेंगे आप जितना ज्यादा इस टाइम कर सकते हो कर लो सो इस तरीके से आपको जो है ग्रो करना चाहिए अपने को फाइन भाई आपने एक चीज कही थी अभी कि मिनिमम जिनका गोल 3 साल हो तो उनको तो इधर आना नहीं चाहिए एक तरीके से एटलीस्ट चार या पांच साल होना चाहिए तो म्यूच्यूल फंड के बारे में एक चीज़ पता करूंगा कि पॉजिटिव रिटर्न जो है म्यूच्यूल

46:48 फंड की वो कितने साल में ऑलमोस्ट थोड़ी सी गारंटी होती है कि यार इतने साल के के बाद म्यूच्यूल फंड जो है वो नेगेटिव रिटर्न नहीं प्योर इक्विटी में 5 से 7 साल के मैंने खुद देखा हुआ है मेरे म्यूच्यूल फंड 3 साल तक ज़ीरो रिटर्न्स थे तो फाइव टू से इयर्स लग जाता है देखो मार्केट्स का ना पता नहीं होता जापान 35 इयर्स तक सेम मतलब ऐसे कप मार के आया है 35 इयर्स के बाद ठीक है उनकी स्टोरी तो बहुत ही अलग थी एसेट बबल हो गया था ये सब हो गया था बट एक उदाहरण है वो भी एक उदाहरण है और इसीलिए प्योर इक्विटी के साथ-साथ आपका थोड़ा बहुत गोल्ड हो गया ये हो गया वो हो गया तो उसमें एक पोर्टफोलियो बनना चाहिए कंपोजिशन बनना चाहिए फाइन सर भाई आपने बोंड्स की भी बात की थी अभी म्यूच्यूल फंड से रिलेटेड म्यूच्यूल फंड के अलावा तो बोंड्स के बारे में भी व्यूअर्स को हमारे बताएं कि वो क्या होते हैं और उनमें कैसे इन्वेस्ट किया जाता है और उनका रिटर्न किस तरीके से होता है देखिए बॉन्ड्स जो होते हैं ना देख हम

47:34 समझते हैं एफडी जो होती है वो आपकी बेसिक एकदम बैंक देता है और उसके रेट्स थोड़े कम होते हैं। अब दूसरा जो स्टेज आता है जिसमें रिस्क हल्का सा ज्यादा होता है पर रिटर्न्स फिर भी फिक्स्ड होते हैं और ज्यादा होते हैं वो कॉर्पोरेट बॉन्ड्स होते हैं। तो कॉर्पोरेट बॉन्ड्स देश की जो बड़ी कंपनीज़ हैं उनको अलाउड है कि वो आपसे और मुझसे उधार ले सकती हैं। पर वो आपसे और मुझसे उधार लेती हैं बॉन्ड्स के माध्यम से। तो वो एक डिबेंचर बॉन्ड्स बनाएंगी। बॉन्ड बनाएंगी और उसमें आपको बोलेंगे समझो उस ₹1 करोड़ का बॉन्ड बनाएंगे तो अयास भाई बोले ₹1 लाख मैं डालता हूं। संजय भाई बोले ₹1 लाख मैं डालता हूं। ठीक है? अब हमने उनके कंपनी के शेयर्स नहीं लिए। हमने उन्हें उधार दिया है। तो वह कंपनी हमें ब्याज देगी। तो महीने का दे सकती है या फिर क्वार्टर में दे सकती है या साल में एक बार दे सकती है। वह बता देगी कि मैं कब कब दूंगी और यह ब्याज जो होता है वो 9% से

48:20 लेके 12% तक फिक्स्ड होता है। ओके? तो एक अच्छा रिटर्न होता है। तो अब इसमें क्या होता है? कंपनी अच्छी है कि नहीं है? कंपनी की क्या स्थिति है? उसके लिए क्रेडिट रेटिंग होती है। तो क्रेडिट रेटिंग जैसे होती डबल ए प्लस तो बहुत अच्छा क्रेडिट रेटिंग है। डबल ए ए फिर ट्रिपल बी चालू होता है। तो इस तरीके से इन्वेस्टमेंट ग्रेड कंपनी होती है। जैसे-जैसे रेटिंग कम होती है वैसे-वैसे वो कंपनी ज्यादा ब्याज ऑफर करती है कि भाई देखो हमारी रेटिंग अच्छी नहीं है तो हम आपको ज्यादा ब्याज दे देंगे। अब आपको इसमें इन्वेस्ट कैसे करना है? बहुत सारे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स हैं। फॉर एग्जांपल एक प्लेटफार्म है विंटwल्थ करके तो आप उस पे जा सकते हैं। उन प्लेट कोई भी प्लेटफार्म पे चले जाइए और उस पे जाके अपने को रजिस्टर करिए। ये सारे सेमीबी रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म्स हैं। तो और प्लेटफार्म आपका बॉन्ड नहीं होल्ड करता। आपका बॉन्ड आपके डीमैट में आ जाता है। ओके? तो कल को वो प्लेटफार्म खत्म भी हो गया बाय चांस उड़ गया कुछ प्रॉब्लम हो गई तो

49:06 इट्स लाइक जब आप Zerodha से या किसी से शेयर खरीदते हैं Go से तो वो आप उनके पास नहीं होता। आपके डीममेट में आ जाता है। इसी तरीके से यहां पे बॉन्ड आपके डीममेट में आ जाता है। तो आपने यह खरीद लिया और उससे फिर आपको इंटरेस्ट मिलना चालू हो जाता है। तो ये बेसिकली बॉन्ड्स का पूरा जो है एक सिचुएशन है। फाइन संजय भाई आपने कहा कि 9% या 12% फिक्स रिटर्न मिलता है बॉन्ड में और फिर यहां पे रेटिंग भी आ गई कंपनी। जी। तो इसमें भी रेटिंग की हम फिक्र ही क्यों करें कि अगर हमें फिक्स मिल रहा है। देखिए फिक्स देखिए बॉन्ड्स में क्या होता है कि कल को अभी जैसे पीछे एक बहुत बड़ा केस हुआ जसोल का जसोल इंजीनियरिंग का और ब्लू स्मार्ट का तो यही तो प्रॉब्लम हुई कि बॉन्ड पे डिफॉल्ट हो गया। ठीक है? तो बॉन्ड्स पे डिफॉल्ट हो सकता है। देखिए हमें समझना चाहिए। जैसे मैंने

49:51 जेट एयरवेज में शेयर का शेयर लिया था। तब कभी कोई सोच सकता था कि जेट एयरवेज बंद हो जाएगी? बिल्कुल नहीं। नहीं सोच सकता था ना। हुई हमारे पैसे खराब हुए उसमें तो इस तरीके से जब एक कंपनी पैसा लेती है चाहे वह उधार के फॉर्म में ले चाहे वो इक्विटी के फॉर्म में ले कंपनी खत्म बंद हो सकती है मोदी ग्रुप था बहुत बड़ा वो भी खत्म हो गया था तो हो सकता है कुछ भी हो सकता है वी डोंट नो डीएचएफएल इतनी बड़ी कंपनी खत्म हो गई ऐसी बहुत सारी लिस्टेड कंपनीज़ हैं जो डब्बा हुई हैं तो ये जो परेशानियां है ये बॉन्ड्स में भी आ सकती है और इसीलिए बॉन्ड्स में क्रेडिट रेटिंग आप देखेंगे तो आप थोड़े से सेफ्टी बेटर वाले ले सकते हैं। आप यह कह सकते हैं अगर मुझे ₹1 लाख बॉन्ड में डालना है तो मैं 80% ए रेटेड में डालूंगा। 20% डबल बी में डालूंगा ताकि उसमें थोड़ा ब्याज ज्यादा मिल जाए। तो इस तरीके से आप अपना पोर्टफोलियो डिजाइन कर

50:37 सकते हैं। क्रेडिट रेटिंग देखना बहुतेंट है। फाइन संजय भाई जिन लोगों ने एसआईपी नहीं की होती जिनको इंस्ट्रूमेंट के बारे में पता नहीं होता जो लोग सुनते हैं तो उनको ये भी लगता है ऐसे भी आपने कहा कंपनी ज़ीरो हो सकती है। उनको लगता लगता लगता लगता लगता लगता लगता लगता लगता लगता है यार एसआईपी भी ज़ीरो हो सकती है। हमारा म्यूच्यूल फंड भी ज़ीरो हो सकता है। तो क्या ऐसा हो सकता है? नहीं क्योंकि म्यूच्यूल फंड एक बास्केट होता है। बास्केट में 50 स्टॉक्स हैं, 30 स्टॉक्स हैं, 70 स्टॉक्स हैं तो वो सब कुछ जीरो नहीं होंगे। इट्स वेरी रेयर कि कोई मतलब रेयर भी नहीं है। मतलब ऑलमोस्ट दो कंपनी हां मतलब एक दो कंपनी खत्म हो जाएंगी ज्यादा से ज्यादा। अगर आपने निफ्ट्टी 50 लिया है तो कभी एक या दो एक ही कंपनी जा सकती है। दो कंपनी जा सकती है। तो Reliance है ये सब सारी एक साथ थोड़ी खत्म हो जाएंगी। फिर तो हम ही खत्म हो जाएंगे। फिर तो सबको मतलब फिर तो कुछ न्यूक्लियर बम्ब गिरा है या कुछ हुआ है जो ऐसी ऐसी स्थिति बनी है। तो इन दैट केस तो पैसे की आपको जरूरत भी नहीं है फिर। बिल्कुल कोई पता नहीं अभी मैं कहीं पढ़

51:23 रहा था किसी ने डाला हुआ था कि अगर कहीं न्यूक्लियर वॉर हो आपको लग रहा है कि पक्का हो रहा है या होने वाला है तो आप एक काम करो सारा अपना पैसा डाल दो हां उसमें डाल दो किसी भी स्टॉक में म्यूच्यूल फंड में कहीं भी डाल दो क्योंकि मार्केट गिरेगी हां और नहीं हुआ तो मार्केट शूट करेगी शूट कर जाएगी और अगर हो गया तो आपके पैसे देखिए जब हम बात कर रहे हैं तो अभी इजराइल ईरान वॉर पे था दो दिन पहले तक अटैक हो रहा था फिर एक दिन पहले आके सीज फायर हो गया सीज फायर हो गया स्टॉक मार्केट000 पॉइंट ऊपर चला गया। तो अब अगर जब वॉर चल रही थी तब किसी ने ₹1 लाख के शेयर खरीदे होते तो मार्केट तो आपको देगा ही 3% एक ही दिन के अंदर। वो कह रहा था अगर हो गया वॉर तो पैसे की जरूरत ही नहीं। हां बिल्कुल सही कह रहे हैं। आप छोड़ सकते हैं उसको। ओके। संजय भाई आपने बॉन्ड्स हमने कवर किया। अभी आते हैं ईटीएफ के बारे में। ईटीएफ पे आपकी वीडियोस ही मैंने देखी। तो मैं चाहूंगा आप उसके

52:09 बारे में बात करें कि म्यूच्यूल फंड के साथ-साथ ईटीएफ भी होता है जो हमारे डीमेट में आ जाता है। तो ईटीएफ क्या है एज एन इंस्ट इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट वो कितना इफेक्टिव है लोगों के लिए? देखिए ग्लोबली जो है ना लोग ईटीएफ के माध्यम से ही इन्वेस्ट करते हैं। ओके। यूएस तो कंट्री ऑफ ईटीएफ कहा जाता है उसमें। उधर तो क्रिप्टो का भी ईटीएफ है। तो ईटीएफ भी वही है। म्यूच्यूल फंड ही है एक तरीके से पर लिस्टेड म्यूच्यूल फंड है। यानी म्यूच्यूल फंड ट्रेड कर रहा होता है पूरे दिन के दौरान। अभी एक उदाहरण लेते हैं। जैसे फॉर एग्जांपल आज मार्केट गिरी और आपको लगता है यार मेरे को निफ्ट्टी 50 खरीद लेना चाहिए। अब आप म्यूच्यूल फंड में खरीदोगे तो हो सकता है आपको आज की एनएवी ना मिले। कल के लिए और कल पता चला निफ्टी ऊपर चला गया। तो ये जो बेट लेना होता है आपको कि लगता है यार निफ्टी गिर रहा है मैं और डाल देता हूं पैसा। यह बेट आप ईटीएफ में लोगे तो

52:56 ज्यादा ईजीली ले सकते हो। तो निफ्ट्टी 50 का ईटीएफ है, निफ्टी मिड कैप का ईटीएफ है। सारे ईटीएफ मिलेंगे। ईटीएफ आपको हमेशा किसी ना किसी इंडेक्स का ही मिलेगा। ठीक है? ईटीएफ कोई ना कोई इंडेक्स को कॉपी कर रहा होता है इंडिया में। जैसे फॉर एग्जांपल निफ्ट्टी 50 हो गया निफ्टी nex 50 हो गया निफ्ट्टी मिड कैप 150 हो गया निफ्टी स्माल कैप 250 हो गया सेंट्रल एंड पब्लिक सेक्टर स्टॉक्स हो गए और इंटरनेशनल ईटीएफ भी है जैसे फॉर एग्जांपल आपको nसdc 100 में पैसा डालना है तो आप उसके लिए भी ईटीएफ है आपको चाइना हैंगसिंग के टेक्नोलॉजी इंडेक्स में डालना है उसके लिए भी ईटीएफ है तो ईटीएफ के माध्यम से आप ग्लोबल एक्सपोज़र भी ले सकते हैं। तीसरा ईटीएफ के माध्यम से आप गोल्ड भी खरीद सकते हैं। तो गोल्ड पे भी अगर आज आपको लगता है कि यार गोल्ड गिर गया चलो आज खरीद लेता हूं थोड़ा सा तो वो ईटीएफ के माध्यम से खरीदना ईजी होगा। तो ईटीएफ के माध्यम से अगेन ईटीएफ बास्केट है तो वो जीरो नहीं हो

53:42 सकता। बिल्कुल। तो ईटीएफ में आप वो वाली स्ट्रेटजी लगा सकते हो। जबजब गिरेगा मैं ईटीएफ खरीद लूंगा। जो हम सिप ऑन डिप कहते हैं जिसे तो हम सिप ऑन डिप ईटीएफ के माध्यम से करते हैं। हमारे पास 7 आठ ईटीएफ है। सवा5 बजे दोपहर को जाते हैं मार्केट पे। चेक करते हैं। जो ज्यादा गिरा होता है उसको खरीद लेते हैं। फाइन संजय भाई। तो म्यूच्यूल फंड में जाएं हम डायरेक्टली जैसे लोग या फिर ईटीएफ में भी पॉसिबिलिटी है उनकी यहां पे ज्यादा रिटर्न कमाने की। ज्यादा रिटर्न कहां से हो सकते हैं? क्योंकि मैंने बहुत सारी वीडियो ऐसी देखी। वो कहते हैं यार ईटीएफ के थ्रू आप ज्यादा रिटर्न कमा सकते हो कंपेयर टू म्यूच्यूल फंड डायरेक्टली। देखिए म्यूच्यूल फंड्स उनको करना चाहिए जो प्योरली पैसिव है। ठीक है? जिनको मार्केट को देखना भी नहीं है। लेना देना ही नहीं है। और ईटीएफ में पॉइंट ये है कि ईटीएफ में एसआईपी करना इतना आसान नहीं है। क्योंकि ईटीएफ में ना एसआईपी अमाउंट की नहीं होती। नंबर ऑफ यूनिट्स की होती है। और अचानक उस दिन अगर उतना पैसा आपके अकाउंट में नहीं पड़ा तो वो फिर

54:27 खत्म। मतलब फिर वो बाउंस हो जाएगा। मतलब आपका लगेगा नहीं। अह ट्रेड नहीं लगेगा। तो अगर आप प्योर पैसिव हैं तो आप म्यूच्यूल फंड्स पे रहिए। अगर आप थोड़ा एक्टिव हैं तो आप ईटीएफ पे आ सकते हैं। कोई प्रॉब्लम नहीं है। ओके। तो अगर मैं आपसे कहूं 10 साल का कोई रिटर्न ऐसा म्यूच्यूल फंड का ऐसा या फिर उसका ईटीएफ का तो क्या आपको मार्जिन लगता है कि किस में थोड़ा ज्यादा मिलता है लोगों को? ईटीएफ में कॉस्ट कम है। ओके? कॉस्ट कम है। देखिए क्या होता है जैसे आप कोई भी म्यूच्यूल फंड पकड़ेंगे तो उसके जो एक्सपेंस रेश्यो होता है वो 25 पैसा, 30 पैसा, 40 पैसा तक होता है। इवन इंडेक्स फंड का भी। ठीक है? बट अगर आप ईटीएफ लेंगे तो उसका होता है 3 पैसा, 4 पैसा, 5 पैसा। तो इतना बड़ा फर्क 10-15 साल जब कंपाउंडिंग लगती है तो बहुत फर्क आ जाता है। तो उस एंगल से ईटीएफ सस्ते पड़ते हैं। फाइन और ट्रेडेबल भी होते हैं।

55:12 भाई हम जब बात करते हैं एसआईपी में हम बात करते हैं निफ्टी की कि 12% या 13% हमें 10 15 20 सालों में मिला। मतलब जनरली इतना रखते हैं। लेकिन इसके अंदर एक जो बहुत बड़ी चीज है इनफ्लेशन उसको हम काउंट नहीं करते। तो क्यों हम जब 12% सीएजीआर की बात करते हैं तो उसमें इनफ्लेशन नहीं हटाते। प्लस और भी उसमें एक्सपेंस रेशियो वगैरह होती है। सब बता रहे हैं। तो उसके बाद हमें ये बताना चाहिए कि भ कितना रिटर्न आ रहा है। रादर देन कि 12% 12% इट सीम्स गुड। लेकिन जब इनफ्लेशन उसके अंदर आ जाती है। सब चीज आ जाती है तो फिर तो बहुत कम रह जाता है। यही गोल प्लानिंग का बेसिक आता है। ओके? ठीक है? देखिए आपको ना ये नहीं चेक करना कि उस टाइम मेरे पैसे इनफ्लेशन के हिसाब से एडजस्ट हो के कितने होंगे। हमें ये चेक करना है आज के मेरे खर्चे इनफ्लेशन लग के उस टाइम कितने होंगे। ओके? पॉइंट को रिवर्स कर देना है। लोग यही आर्ग्यू करते रह जाते हैं यार इनफ्लेशन क्या हो गया?

55:57 वेरी गुड। गुड पॉइंट। इनफ्लेशन को कैप्चर करने के दो तरीके हैं। सबसे पहला तरीका है कि आप अगर आज ₹00 खर्च कर रहे हो। ठीक है? आपको लगता है जी मैं 10 साल बाद रिटायर होना चाहता हूं। तो पहले तो देखो आज वो ₹00 जो 10 साल बाद आपको कितना लगेगा? फॉर एग्जांपल आप कहते हो वो ₹1 लाख हो जाएगा। तो आपने पहले ही इनफ्लेशन से एडजस्ट कर लिया। आपने गोल को ही एडजस्ट कर लिया। अब हमारा रूल होता है कि आपके पास जी 300 महीने का पैसा होना चाहिए। तो ₹1 लाख * 300 ₹3 करोड़ के आपको उस टाइम पर म्यूच्यूल फंड का कॉर्पस चाहिए। ठीक है? आपका दूसरा गोल सेट हो गया कि भाई ₹3 करोड़ का कॉर्पस चाहिए मुझे। अपने पास समय है फॉर एग्जांपल 10 साल का समय है। ठीक है जी? 10 साल का समय सेट हो गया। अब आपको क्या करना है? अब आपको अपनी एसआईपी बनानी है जो एक स्टेप अप एसआईपी होगी। ओके? अगर आप सेम अमाउंट ही डालेंगे तो फायदा नहीं होगा। फिर तो आपको इनफ्लेशन मारेगा ही मारेगा। तो आपको आज अगर आपने 20,000

56:45 डालना चालू किया महीने का एग्जांपल के तौर पे तो अगले साल उसको 22,000 करिए। 24 करिए, 25 करिए। एक एजमशन लीजिए। अगर आप 10% स्टेप अप नहीं कर सकते तो 7% कर दीजिए। इनफ्लेशन ही 7% की है। ओके? तो उसे बीट कर पाएंगे एटलीस्ट तो सबमिट कर लेंगे। तो आपने क्या किया? पहले तो अपने गोल को इनफ्लेशन से एडजस्ट अपने आप ही कर दिया। डन। ठीक है? उसके बाद आपने अपने स्टेप अप डाल के उसको भी इनफ्लेशन से एडजस्ट कर दिया। तो अब काहे का इनफ्लेशन? अब तो हो गया सारा काम सेट हो गया। तो इस तरीके से आपको गोल सेटिंग करनी चाहिए। फाइन। संजय भाई अभी एसआईपी प्लस लमसम भी आता है चीजें। होता क्या है कि किसी के पास ज्यादा पैसा पड़ा हुआ है तो वो एसआईपी में जाए या लमसम में जाए यह भी कंफ्यूजन रहता है। तो लमसम करना किन सिचुएशन में बेहतर रहता है एसआईपी की हमने बात ही की कंपैरिजन टू लमसम एसआईपी किन सिचुएशन में बेहतर रहती है वो थोड़ा पता है।

57:31 देखिए लमसम हम इसको ना कैपिटल को बकेट्स में डालते हैं। सबसे पहला हो गया आपका इमरजेंसी फंड सेट है। उसको छूना नहीं है। सेकंड आपने गोल्स बनाए लाइफ के उसके अराउंड एसआईपी कर दी। डन बहुत अच्छी बात है। अब जो पैसा आ रहा है नया अगला पैसा आ रहा है तो वो तो अब कोई काम का नहीं है। मतलब उसका कोई काम नहीं है। आपके गोल्स गोवल सेट है चल रहा है। तो उसको हम कहते हैं अपोरर्चुनिटी कैपिटल। ठीक है? तो ओपोरर्चुनिटी कैपिटल के मल्टीपल यूज़ हो सकते हैं। फॉर एग्जांपल आपको कोई रियलस्टेट पसंद आ गई तो आप उसमें इन्वेस्ट कर दीजिए। फॉर एग्जांपल आपको लगा कि मैं जो है कुछ डिजिटल एसेट लेना चाहता हूं। क्रिप्टो लेना चाहता हूं। मेरे को समझ आ रही है बात तो कुछ पैसा आप उसमें डाल सकते हैं। आपको समझ आता है नहीं यार मैं एक काम करता हूं। ये सब छोड़ते हैं। मुझे मार्केट्स में ही रहना है। पर इस पैसे को मैं तब डिप्लॉय करूंगा जब मार्केट गिरेगी। तो ऐसा सिप ऑन डिप जिसे हम कहते हैं। तो

58:16 आप एक कैपिटल आपके पास समझिए महीने का एक्स्ट्रा बच रहा है। 25,000 एक्स्ट्रा बच रहा है। हर महीने बच रहा है। तो इस ₹25,000 को आप जो है आपका इमरजेंसी फंड ये सब सेट हो चुका है। इस 25,000 को आप टुकड़ों में बांट दीजिए। जबजब निफ्ट्टी 50 नीचे गिरे उस टाइम पे डाल दीजिए। तो, यह लमसम हो जाएगा आपका। पर कब लमसम करोगे? जब थोड़ा सा गिरावट होगी। तो, यू विल कैच दोज़ पॉइंट्स जहां पे गिरावट ज्यादा होगी। इससे आपको ओवरऑल एक साल का 1 डेढ़% ज्यादा कमाने का मौका मिल जाएगा। आपकी एसआईपीस तो चल ही रही हैं। तो इस तरीके से आप अपने ओपोरर्चुनिटी कैपिटल को डिवाइड कर सकते हैं। अगर आपके पास बहुत बड़ा लमसम आ गया है अचानक से आप

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