LT Grade : Polity | अरस्तू की राज्य की अवधारणा, SST Demo Class #1, LT Grade Polity By Gargi Mam

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संक्षिप्त सारांश

इस वीडियो में, गार्गी सारस्वत राजनीति विज्ञान (पीजीटी) के गुरुजी बैच के डेमो क्लास के बारे में बताती हैं। वह अरस्तु के विचारों और दर्शन पर ध्यान केंद्रित करते हुए, राजनीतिक सिद्धांत और विचारकों के अपने हिस्से को कवर करने वाली हैं। वह एलटी ग्रेड कक्षाओं के लिए कूपन कोड और विभिन्न विषयों के लिए डेमो कक्षाओं के समय के बारे में भी जानकारी देती हैं। सारस्वत अरस्तु के जीवन, कार्यों और राजनीतिक विचारों पर जोर देती हैं, जिसमें तुलनात्मक राजनीति में उनका योगदान और नागरिक समाज की अवधारणा शामिल है।

मुख्य बातें:

  • एलटी ग्रेड कक्षाओं के लिए कूपन कोड: LT20 (3 अगस्त तक मान्य)।
  • विभिन्न विषयों के लिए डेमो कक्षाओं का समय।
  • अरस्तु के जीवन, कार्यों और राजनीतिक विचारों का परिचय।
  • तुलनात्मक राजनीति में अरस्तु का योगदान और नागरिक समाज की अवधारणा।
  • राजनीतिक दर्शन को राजनीति से अलग करने में अरस्तु का महत्व।

परिचय

गार्गी सारस्वत टीचिंग एग्जाम टीw के प्लेटफ़ॉर्म पर सभी का स्वागत करती हैं और गुरुजी बैच की डेमो क्लास के बारे में बताती हैं। जीएस पोर्शन में दो विषय चुनने की जानकारी दी जाती है, जिसमें इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र आदि शामिल हैं। एलटी ग्रेड कक्षाओं के लिए LT20 कूपन कोड 3 अगस्त तक 799 में उपलब्ध है। लाइव रिकॉर्डेड कक्षाएं, मॉक टेस्ट, डाउट ग्रुप और क्लास नोट्स भी उपलब्ध हैं। एसएसटी, बायोलॉजी और होम साइंस के बैच भी हैं। जीएस के लिए विशेष बैच 480 में उपलब्ध है। डेमो कक्षाएं सुबह 8 बजे से विभिन्न विषयों के लिए चल रही हैं। पीजीटी की डेमो क्लास शाम 6:00 बजे होगी।

राजनीति विज्ञान (पीजीटी) का सिलेबस

राजनीतिक सिद्धांत, नागरिक शास्त्र, राज्य की परिभाषा, राज्य के निर्माणक तत्व, राज्य की उत्पत्ति के सिद्धांत (दैवीय, संवेदा, विकासवादी, मार्क्सवादी), समानता, स्वतंत्रता, अधिकार, संप्रभुता, बहुलवाद, कानून और दंड के सिद्धांत, संविधान की परिभाषा और वर्गीकरण, सरकार के प्रकार (संसदात्मक, अध्यक्षात्मक, एकात्मक, संघात्मक, प्रजातंत्रात्मक, अधिनायक तंत्र), व्यक्तिवाद, उदारवाद, वैज्ञानिक समाजवाद, फासीवाद, और राजनीतिक विचारक (प्लेटो, अरस्तु, हॉप्स, जॉन लॉक, रूसो, जर्मी बैंथम, जॉन स्टुअर्ट मिल, कार्ल मार्क्स, मनु, कौटिल्य, गांधी) जैसे विषय शामिल हैं। यह सिलेबस प्री और मेंस दोनों परीक्षाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

अरस्तु का परिचय

अरस्तु का जन्म, जीवन और शिक्षा के बारे में बताया गया है। अरस्तु, प्लेटो के शिष्य थे और एथेंस में एकेडमी में शिक्षा प्राप्त करना चाहते थे, लेकिन वहां के नागरिक न होने के कारण प्रमुख नहीं बन पाए। उन्होंने लाइजियम नामक अपना स्कूल खोला। अरस्तु ने एथेंस वासियों को दर्शन के विरुद्ध दूसरा अपराध नहीं करने देने की बात कही, जिसका अर्थ है कि उन्होंने राजनीति और दर्शन को अलग-अलग रखा। उनका जन्म 384 ईसा पूर्व में मकदुनिया के स्टेजीरा में हुआ था। वे प्लेटो के शिष्य और सिकंदर के गुरु थे।

अरस्तु: प्रथम राजनीतिक वैज्ञानिक

मैक्सी के अनुसार, अरस्तु पहले राजनीतिक वैज्ञानिक थे क्योंकि उन्होंने राजनीति का वैज्ञानिक वर्गीकरण किया और इसे दर्शन से अलग किया। उन्होंने विश्व में सरकार के प्रकार बताए और संविधान को छह प्रकारों में बांटा। अरस्तु को तुलनात्मक राजनीति का जनक भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने 158 संविधानों का अध्ययन किया। उन्होंने सिविल सोसाइटी की अवधारणा दी, जिसमें पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर दोनों शामिल हैं। अरस्तु पॉलिटिकल साइंस को मास्टर साइंस कहते थे।

अरस्तु के विद्यालय और प्रमुख रचनाएँ

अरस्तु के विद्यालय का नाम लाइजियम था। मैक्सी ने उन्हें प्रथम राजनीतिक वैज्ञानिक कहा है। उनकी प्रमुख रचनाओं में "द पॉलिटिक्स," "द कॉन्स्टिट्यूशन," और "निकोमेनियन एथिक्स" शामिल हैं। "द पॉलिटिक्स" में उन्होंने सिविल सोसाइटी और नगर राज्य (पोलिस) की बात की है, जिससे पॉलिटिक्स शब्द बना। "द कॉन्स्टिट्यूशन" में उन्होंने 158 देशों के संविधानों की तुलना की और एथेंस के संविधान को बेहतर बताया। "निकोमेनियन एथिक्स" में उन्होंने मानव आत्मा का अध्ययन किया। अन्य रचनाओं में "रेथोरिक," "यूडीमियन एथिक्स," और "ऑन द पाइथागोरियंस" शामिल हैं।

अरस्तु के राजनीतिक विचार

अरस्तु की किताब "पॉलिटिक्स" में नगर राज्य का वर्णन है, जिसमें सर्वोच्च शक्ति जनता के हाथ में होनी चाहिए। उन्होंने सामूहिक निर्णय बुद्धि के सिद्धांत का समर्थन किया, जिसमें जनता की सामूहिक बुद्धि को बुद्धिमान शासक से भी बेहतर माना गया। "निकोमेनियन एथिक्स" में उन्होंने आत्मा के अध्ययन की बात की और बुजुर्गों के सुझावों को महत्वपूर्ण बताया। अरस्तु के अनुसार, राजनीति एक आदर्श राज्य है जहां निर्णय लेने का अधिकार समुदाय का होता है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया होती है। नियमों को लागू करने के लिए विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है, जिससे कुलीन तंत्र की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

मिश्रित संविधान और अरस्तु की आलोचना

अरस्तु का संविधान का विचार मिश्रित संविधान पर आधारित है, जिसमें लोकतंत्र और कुलीन तंत्र दोनों के तत्व शामिल हैं। वे प्लेटो के विचारों से अलग हैं, क्योंकि प्लेटो पूर्ण परिवर्तन की बात करते हैं, जबकि अरस्तु यथास्थितिवादी हैं। कैनी नामक एक दार्शनिक ने अरस्तु की "द पॉलिटिक्स" को पिछड़ी हुई रचना बताया क्योंकि अरस्तु एक तरफ जनता के हाथ में शक्ति की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ सिकंदर के गुरु हैं, जो विश्व साम्राज्य का निर्माण कर रहा था।

आठ नंबर का प्रश्न: अरस्तु प्रथम राजनीतिक वैज्ञानिक

अरस्तु को प्रथम राजनीतिक वैज्ञानिक क्यों माना जाता है, इस कथन की पुष्टि करने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं का उपयोग किया जा सकता है:

  1. कथन मैक्सी का है।
  2. अरस्तु ने दर्शन को राजनीति से अलग किया।
  3. उन्हें तुलनात्मक राजनीति का जनक कहा जाता है।
  4. तीनों पुस्तकों (पॉलिटिक्स, द कॉन्स्टिट्यूशन, निकोमेनियन एथिक्स) में तार्किक तथ्यों का प्रयोग किया गया है।
  5. अरस्तु मिश्रित संविधान की बात करते हैं।
  6. अरस्तु अपने गुरु प्लेटो से अलग विचार रखते हैं।
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Transcript

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0:02 नमस्कार गुड इवनिंग राम राम राधे-धे जय श्री कृष्णा मैं गार्गी सारसत एक बार फिर से आप सभी के सामने उपस्थित हूं आपके अपने प्यारे परिवार टीचिंग एग्जाम टीw के प्लेटफार्म पर कैसे हैं आप सब लोग एक बार जरूर बता दें बहुत बढ़िया अरे क्या बात है देखूं तो सही जरा पिटी वाले कितने स्टूडेंट्स हैं रिचा मधीशिया आंचल प्रिंसेस नायक ओके सैयदा खान और और कौन है भाई? और कौन है? बहुत बढ़िया। सब यही लोग हैं। मुझे तो ऐसा लग रहा है यही है। यही लोग हैं। चलिए तो बिना समय गवाए हुए यहां आज आपको बहुत ही महत्वपूर्ण सा टॉपिक बता दूं। देखिए ये जो

0:47 आपके लिए गुरुजी बैच है, उसकी डेमो क्लास चल रही है। जिन्होंने भी जीएस पोर्शन लिया है। अब जीएस में आपको कोई दो ऑप्ट करने होंगे। जीएस में आपको कोई दो ऑप्ट करने होंगे तो वो आपकी मर्जी होगी। आप हिस्ट्री पिटी कर सकते हैं। आप ज्योग्राफी इकोनॉमिक्स कर सकते हैं। जो आप करना चाहें हाल फिलहाल पढ़ाया तो सभी जाएगा। तो उस पढ़ाने के दौरान में पिटी जो है उसका एक हिस्सा सर पढ़ाएंगे और एक हिस्सा मैं कराऊंगी। तो जरा देख लेते हैं कि क्या रहेगा क्या नहीं। तो देखिए यहां आपको बता दूं कि आपके लिए एलटी ग्रेड की जो क्लासेस में कूपन कोड लगना था वो कूपन कोड क्या था? एलटी20 ये लगाकर ये क्लासेस आपको 799 में टिल कब तक मिलती रहेंगी? 3 अगस्त तक। तो 3 अगस्त की रात 12:00 बजे तक रात 12:00

1:36 बजे तक ये आपके लिए क्या है? तो आप कहेंगे ये आपके लिए बिल्कुल क्या है? एप्लीकेबल है। आप इसके लिए एलिजिबल हैं। ठीक है ना? क्लियर हुआ? अच्छा, साहब। अच्छा लाइव रिकॉर्डेड क्लासेस भी हैं। वीकली मॉक टेस्ट एंड टेस्ट सीरीज डाउट ग्रुप क्लास नोट्स पीडीएफ सब कुछ है। एसएसटी का भी बैच है। बायोलॉजी का भी है। होम साइंस का भी विशेष तौर पर है। और जीएस अगर कोई स्पेशली लेना चाहता है तो भी वो एलटी 20 लगाकर वो जो 30 नंबर का है उसके माध्यम से इसे 480 में गेन कर सकता है। ये जो आपकी क्लासेस चलेंगी वो इस हिसाब से चलेंगी। अभी नहीं चलेगी। होम साइंस मेरी नहीं चलेगी। बाकी ज्योग्राफी की चल रही है। डेमो क्लासेस आप 8 am देख सकते हैं। आपका कोई भी मित्र जो बायोलॉजी से फॉर्म भरने की सोच रहा है। 11

2:23 am आराम से चेक करो पहले टीचर को टीचर की नॉलेज को टीचर की डेप्थ को उसके बाद आप आगे बढ़िए। कोई दिक्कत नहीं है। हिंदी 1:00 बजे पिटी 3:00 बजे चलती है। लेकिन 3:00 बजे क्योंकि आपने ऑलरेडी कुलदीप सर का डेमो देखा। तो 3:00 बजे ही दो डेमो नहीं हो सकते। तो इसीलिए मैंने अपनी क्लास को 6:00 pm पर जस्ट बिकॉज़ ऑफ़ डेमो के लिए आपके लिए शेड्यूल किया है। तो आज और कल दो दिन आप डेमो देखिएगा मेरा। आपको लगता है अच्छा पढ़ाते हैं बहुत अच्छी बात है। नहीं पढ़ाते तो जहां आपको ठीक लगेगा आप उसको फॉलो करेंगे। जाहिर सी बात है। हिस्ट्री 5:00 बजे आपकी क्लास रहती है। विपिन भैया के माध्यम से होम साइंस वालों के लिए 7:00 pm क्लास रहती है। ठीक है ना? तो आज से हम क्या शुरू कर रहे हैं? आज से ही आपने देखा

3:08 पिटी का 3:00 बजे डेमो भी हुआ और पिटी का दूसरा डेमो आपका 6:00 pm पर है। सिलेबस जो है वो सर ने आपको 3:00 बजे की क्लास में प्रॉपर्ली सर ने आपको अपना पूरा सिलेबस बताया होगा जो पोर्शन सर कराएंगे। और ये पोर्शन जो आप देख रहे हैं ये पोर्शन मैं कराऊंगी। ये मेरा पोर्शन रहेगा। ठीक है ना? क्या रहेगा? जैसे राजनीतिक सिद्धांत वाला पूरा नागरिक शास्त्र क्या? प्रकृति क्या? क्षेत्र क्या? परिभाषा क्या? राज्य क्या? राज्य की परिभाषा क्या? राज्य के निर्माणक तत्व क्या है? राज्य की उत्पत्ति के अलग-अलग सिद्धांत, दैवीय सिद्धांत, संवेदा सिद्धांत, विकासवादी, मार्क्सवादी सिद्धांत, समानता का, स्वतंत्रता का,

3:56 अधिकार, संप्रभुता क्या है? बहुलवाद क्या होता है? कानून और दंड के सिद्धांत क्या है? संविधान संविधान की परिभाषा वर्गीकरण सरकार संसदात्मक अध्यक्षात्मक एकात्मक और संघात्मक प्रजातंत्रात्मक अधिनायक तंत्र यानी अलग-अलग प्रकार की सरकार के टाइप्स करेंगे। व्यक्तिवाद, उदारवाद, वैज्ञानिक समाजवाद, फासीवाद ये सब और हिंदी मिक्स इंग्लिश में। क्योंकि हो सकता है आप में से बहुत सारे बच्चों ने इसको इंग्लिश में भी पढ़ा हो। देन राजनीतिक विचारक, पॉलिटिकल थिंकर्स ये पीजीटी या नेट जेआरएफ तक में पूछे जाते हैं। प्लेटो, अरस्तु, हॉप्स, जॉन लॉक, रूसो, जर्मी बैंथम, जॉन

4:43 स्टुअर्ट, मिल, कार्ल मार्क्स, मनु, कौटिल्य, गांधी इन सबको। तो ये मेरा हिस्सा रहेगा। ठीक है ना साहब? क्लियर हुआ? ये मेरा हिस्सा रहेगा जिसको मैं कराऊंगी। तो आप लोग क्या करेंगे? हां। आप लोग क्या करेंगे? इसका आप आराम से स्क्रीनशॉट ले लीजिएगा कि ये मेरा पोर्शन है जिसके लिए मैं रिस्पांसिबल हूं। इसमें से आपका कोई भी क्वेश्चन नहीं छूटेगा और आप बहुत ही आसानी से इस पूरे हिस्से को कर पाएंगे। क्या ये बैच प्री और मेंस दोनों को ध्यान में रखते हुए? जी हां, प्री और मेंस दोनों को ध्यान में रखते हुए ये बैच आपको देखने को मिलेगा। यानी आप इसमें अपने प्री के हिसाब से भी वो जो 120 नंबर है उनकी तैयारी एमसीक्यू बेसिस पर भी चल रहा

5:28 होगा और मेंस के हिसाब से यानी जो आपका 200 मार्क्स का मामला रहता है उसके हिसाब से भी आपको प्रिपेयर किया जाएगा। क्लियर रहेगा? ये ठीक रहेगा। तो शाम कितने बजे? 6:00 बजे मैं आपको मिलूंगी। शाम 6:00 बजे मैं आपको मिलूंगी। क्लियर हुआ? और आज और कल दोनों दिन आप आराम से मेरा डेमो देख सकते हैं। अब देखिए कहानी शुरू करते हैं। है ना? कहानी शुरू करते हैं। आज से सबसे पहले एक ऐसा टॉपिक अरस्तु मेरी नजर में बहुत ज्यादा रोचक है। आपकी नजर में मैं बना दूंगी। आप में से कितने बच्चों के पास पिटी रही है। एक बार हाथ खड़ा कर दीजिए। एक बार हाथ खड़ा कर दीजिए। थम्स अप कर दीजिए कि जी हमने पिटी पढ़ी है ग्रेजुएशन

6:13 में या पीजी में। एक बार थम्स अप कर दीजिए। एक बार थम्स अप कर दीजिए। वो बच्चे एक बार थम्स अप कर दें कि जी हमारे पास ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन में पॉलिटिकल साइंस थी। है ना? एक बार ओके। आंचल के पास थी। प्रीति बहुत बढ़िया। बहुत शानदार। हम शुभ पे भी थी। प्रतिभा पे भी थी। ओके। रिचा पे भी थी। ओके। ओके ठीक है मैं समझ गई मोस्ट ऑफ द स्टूडेंट्स पे थी और हो सकता है कुछ बच्चों पे नहीं थी लेकिन उन्होंने कहीं ना कहीं से नाम सुन रखा है कि गार्गी मैम पिटी बड़े आसान शब्दों में पढ़ाती हैं और ऐसा पढ़ाती हैं कि पूरा का पूरा फंसा देती

6:59 हैं तो ऐसे भी बहुत सारे बच्चे होंगे एक बार वो भी थम्स अप कर दें कि हां यार इनके प्लेटफार्म पे ना पिटी एकदम मक्खन की तरह पढ़ाई जाती है और फिर फंसा के भी दे दिया जाता है सीधे लाके कि ये देखिए क्वेश्चन यहां से आते हैं। अब यहां एक बात आती है कि मैं बिल्कुल दूसरे पॉइंट ऑफ व्यू से आपको पढ़ाते हुए लेकर चलूंगी। मैं ये मान के चलूंगी आप में से किसी ने भी आप में से किसी के भी पास है ना आप में से किसी के भी पास ये विषय था ही नहीं। तो आप सब बिल्कुल वैसे बैठोगे मेरी क्लास में कि आपके पास क्वालिटी थी ही नहीं। अब आप मजे लेने के लिए पढ़ रहे हो। अब आप मजे लेने के लिए पढ़ रहे हो। यानी अब आप आनंद के लिए पढ़ रहे हो। ठीक साहब मेरी बात समझे? अब आप आनंद के लिए पढ़ रहे हो। बिल्कुल ऐसे ठीक साहब आ जाओ। तो एक बंदा था भैया

7:46 का नाम था अरस्तु। अब कमाल की बात है एथेंस यानी पुराने यूनान में अगर हम बात करें तो एथेंस में बहुत गजब तरीके से चर्चाएं चल रही हैं कि यार लोकतंत्र होना चाहिए। यानी बिशप यानी कि जो आपका पुजारी महोदय होते हैं और जो चर्च का अपनी तरफ से ये बैठा के दिमाग में बैठाया हुआ है नहीं यही ठीक है यही गलत है उसको तीन लगातार गुरु और शिष्यों की जोड़ी आती है और वो इस चीज को चुनौती देती है स्पा सुना है आपने स्पा स्पा स्पा होता है ना कहती है लड़कियां कहती है कहां जा रही हो स्पा कराने जा रही हूं मतलब बॉडी रिलैक्स कराने जा रही है बढ़िया एकदम सिर में मसाज कराएंगी अपनी एकदम बढ़िया मजे लेंगी दो

8:32 चार दासियां आएंगी एकदम ऐसे ऐसे तो ऐसे ही याद रखना स्पा से एस है सुकरात सुकरात पी से है प्लेटो प्लेटो और ए से है अरस्तु बोले तो एरिस्टोटलल एरिस्टोटलल एरिस्टोटलल सुकरात का चेला था प्लेटो और प्लेटो का चेला था ये अरस्तु यानी एरिस्टोटलल ठीक ठीक साहब तो हम कई बार कहते हैं ना कि जहां अंत होता है वहीं से शुरुआत होती है। तो मैं केवल यहां से कराना शुरू करूंगी ताकि आप यहां से समझ पाएंगे सुकरात तक की बातें। फिर आप समझ पाओगे कि सुकरात ज्यादा दमदार आदमी था नहीं। है ना? क्योंकि जब प्लेटो के विचार समझोगे तो लगेगा कि यार मतलब सुकरात दमदार नहीं था। और जब अरस्तु

9:18 के विचार पढ़ोगे तो लगेगा प्लेटो भी ज्यादा दमदार आदमी था नहीं। अरस्तु ज्यादा दमदार आदमी था। तो अरस्तु नाम का एक भैया था। भैया कहां था? भैया जो था एथेंस के अंदर पहुंचा। बोला गुरुजी प्लेटो गुरुजी आपका चेला बनूंगा। तो बोले ठीक है बन जाओ कोई दिक्कत नहीं है। तो एथेंस की नागरिकता इसको मिल गई। लेकिन दिक्कत क्या है? ये सबसे होशियार चेला है प्लेटो का। अब अरस्तु चाहता है कि मैं इतना होशियार हूं तो मैं मॉनिटर क्यों ना बनूं। होता है ना इंटेलिजेंट बच्चा अपनी मम्मी से कहता है मम्मी देखो मैं कितना इंटेलिजेंट हूं। फिर भी मैम मेरे को ना मॉनिटर नहीं बनाती। फिर पीटीएम में उसकी मम्मी आती है। मेरे लड़के को मॉनिटर क्यों नहीं बनाते हो? तो अरस्तु जो है वो प्लेटो के स्कूल में क्या बनना चाहता है? मॉनिटर बनना चाहता है। प्लेटो

10:04 के स्कूल का नाम है अेडमी। प्लेटो के स्कूल का नाम ही क्या है? अेडमी है। अब साहब ये वहां पर मॉनिटर बनना चाहता है। अब मॉनिटर बनने के लिए ये बात करता है। लेकिन भैया एक रूल है कि मॉनिटर वही बनेगा जो एथेंस का क्या है? जन्मजात नागरिक है। मतलब आपने सिटीजनशिप बाद में आके नहीं ली है। आप निवासी नहीं हो। अब आप पैदा हुए हो। और ये बेचारा वहां पैदा हुआ नहीं था। ये कहां पैदा हुआ था? ये पैदा हुआ था मकदुनिया। मकदुनिया एक जगह थी। मकदिया में स्टेजरा स्टेजीरा। मकदिया में स्टेजीरा में एक शाही चिकित्सक का घर था। उसके घर पे पैदा हुआ। शाही चिकित्सक यानी राजा और इन सब की चिकित्सा व्यवस्था देखने वाले डॉक्टर जी के घर पे ही पैदा हुआ। प्लेटो

10:50 का शिष्य बना। चाहते हुए भी कभी भी द एकेडमी में चाहते हुए कभी भी द एकेडमी में कभी भी मॉनिटर नहीं बन पाया यानी प्रमुख नहीं बन पाया। तो इसके दिल पर ये चोट हमेशा रही और इसको ये नुकसान भुगतना पड़ा। इसीलिए ये इस चीज के खिलाफ है कि किसी को भी किसी राज्य के अंदर रहने में अगर अधिकार मिलते हैं तो आप उस अधिकार को इस बात पे क्यों देते हो कि वो वहां पर जन्म लेता है या नहीं। वो ये कहता है कि भैया मैं अधिकार को इस बात पे मानता हूं कि आपने उस देश की नागरिकता ले रखी है या नहीं ले रखी है। तो इसलिए यह अपना एक स्कूल बनाता है लाइजियम। क्या बनाता है? लाइजियम। क्योंकि द एकेडमी का मॉनिटर तो बन नहीं पाया। प्लेटो गुरुजी मर गए। कायदे

11:37 में इसको लगता था मैं एरिस्टोटल प्रमुख बनूंगा द एकेडमी का लेकिन बन ही नहीं सकता था। गुरुजी ने रूल ऐसे बना दिए थे। तो ये अपना स्कूल बनाएगा लाइजियम और लाइजियम का क्या बन जाएगा? प्रिंसिपल बनके काम करेगा। अरस्तु ने एक बहुत मजेदार बात कही थी। मैं एथेंस वादियों को एथेंस के वासी जो हैं मैं एथेंस वासियों को दर्शन के विरुद्ध दूसरा अपराध नहीं करने दूंगा। यानी इसका ये कहना था कि भैया आप क्या करते हो? पॉलिटी को फिलॉसफी के साथ जोड़ देते हो। पहले होता भी था कि लोग पॉलिटी को यानी राजनीति को किसके साथ जोड़ देते थे? दर्शन फिलॉसोफी के साथ। तो इसने कहा कि दैया मैं दर्शन के विरुद्ध दूसरा अपराध नहीं करने

12:24 दूंगा। तो मैं पिटी को और फिलॉसफी को बिल्कुल अलग-अलग रखूंगा। ठीक साहब। तो अरस्तु का समय अगर हम देखें तो 384 ईसा पूर्व से लेकर बीसी से लेकर 322 बीसी तक रहता है। जन्म कहां रहता है? तो आप कहेंगे इसका जन्म होता है मकदुनिया। कहां शहर का नाम याद रखेंगे मकदुनिया। मकदुनिया एक क्षेत्र एक राज्य उसके स्टेजरा में स्टेजरा शहर में है ना मकदिया के स्टेजरा स्टेजरा जीरा वही वाला जो तुम डालते हो स्टेजीरा स्टेजीरा शहर में मकदुनिया के स्टेजीरा शहर में मकदुनिया का जो स्टेजीरा शहर है उसमें एक शाही चिकित्सक के घर पर

13:10 पैदा होता है। किसके घर पर पैदा होता है? शाही चिकित्सक के घर पर। मतलब एकदम रॉयल डॉक्टर साहब के घर चिकित्सक के घर पर पैदा होता है। घर पर क्या होता है? पैदा होता है। अच्छा किसका चेला है ये? चेला है ये प्लेटो का। और किसका गुरु है? ये गुरु है सिकंदर का। ये गुरु किसका है? सिकंदर का है। गुरु किसका है ये? तो आप कहेंगे सिकंदर का। तो किसका गुरु था? तो आप कहेंगे सिकंदर का गुरु बना। किसका गुरु बना? तो आप कहेंगे सिकंदर का गुरु बना। किसका गुरु बना? तो आप कहेंगे सिकंदर का गुरु बना। ठीक साहब। आगे बढ़ते हैं। मैक्सी ने कहा है अरस्तु। मैक्सी। मैक्सी अब आप याद रख सकते हैं कैसे भी करके एक व्यक्ति ने मैक्सी पहन रखी है। ऐसे याद रख लीजिए। तो मैक्सी ने कहा है कि अरस्तु

13:57 पहला राजनीतिक वैज्ञानिक है। अरस्तु पहला राजनीतिक वैज्ञानिक है। मतलब ये कहा गया कि अरस्तु राजनीति का साइंटिफिक वे में वर्गीकरण करता है और फिलॉसफी से बिल्कुल अलग कर देता है। इसीलिए मैक्सी इसको इज्जत देते हैं और कहते हैं कि अरस्तु विश्व का पहला राजनीतिक वैज्ञानिक है। अरस्तु विश्व का पहला क्या है? राजनीतिक वैज्ञानिक है। क्या है? राजनीतिक वैज्ञानिक। क्यों? क्योंकि इसने ना ये बताया पूरे विश्व में कि कितने प्रकार की सरकार हो सकती है? संविधान को बांटा। छह प्रकार की सर सरकार बताई इसने। और इसने पॉलिटी को फिलॉसोफी से

14:42 अलग किया। तो इसने पॉलिटी को क्या किया? फिलॉसोफी से अलग किया। और इसको राजनीतिक वैज्ञानिक का किसने कहा? पहला राजनीतिक वैज्ञानिक यह कहने वाला मैक्सी। देखिए मैं समझ नहीं पाती कि आप लोग अपनी तैयारी कुछ भी आपको पता क्यों नहीं रहता। जीएस में आप एसएसटी में कोई सी भी चार में से दो ऑप्शन फिल करेंगे। तो अगर आप उसमें पिटी चूज़ करेंगे तो आपको ये क्लास लेनी है। बात ही खत्म हो जाती है। बात ही खत्म हो जाती है। है ना? अगर आप चार में से एक विषय में पिटी को चुनते हैं सिलेबस के हिसाब से तो आप यह क्लास लेनी है आपको बात खत्म बात ही खत्म डेमो आज चलेगा कल चलेगा

15:30 यानी एक तारीख और दो तारीख दोनों दिन मैं शाम 6:00 बजे आपको क्या कराऊंगी शाम 6:00 बजे यह जो मेरा पोर्शन है ये जो मेरा पोर्शन है यह जो मेरा पोर्शन है यह पूरा यह पिटी के अंदर यह पोर्शन मैं कराऊंगी। यह पोर्शन मैं कराऊंगी पिटी के अंदर। ठीक है ना? यह पोर्शन मैं कराऊंगी। तो ये जो पोर्शन मैं कराऊंगी इसका भी तो आपको डेमो देखना होगा। वैसे आपकी पिटी की क्लास 3:00 बजे चल रही है। लेकिन क्योंकि दोनों टीचर हैं। दोनों टीचर हैं तो बेहतरी ये है कि बच्चों के पास एक अच्छा मौका हो। सिलेबस भी समय पे पूरा हो जाएगा और बेहतर तरीके से भी पूरा हो जाएगा। तो ऐसी स्थिति में

16:16 पिटी का जो सिलेबस है वो आपका डिवाइड किया हुआ है। एक हिस्सा सर का है। सर ने आज 3:00 बजे डेमो लिया और उस डेमो में सर ने बताया कि वो कैसे पढ़ाएंगे, कैसे कराएंगे। अब 3:00 बजे तो मैं क्वालिटी का डेमो नहीं ले सकती थी जब ऑलरेडी एक टीचर डेमो ले रहा है। और आपको ये अधिकार है कि अगर दो टीचर पढ़ाएंगे तो दोनों टीचर्स में दूसरा टीचर कैसा पढ़ा रहा है? तो इसके लिए मैंने अपनी क्लास का डेमो 6:00 बजे रखा है। जब ये क्लास ऐप पे शुरू होंगी तो ये क्लासेस जब एप्लीकेशन पर जाएंगी तो ये क्लास 3:00 बजे ही शुरू होगी और मैं इन क्लासेस को बाद में कराऊंगी। अभी कंटिन्यूएशन में भैया के साथ आप चलेंगे। ठीक है ना? क्लियर? तो जीएस में जिसने भी ये चूज़ कर रखा है कि हम

17:03 अपने चार विषय में से एक विषय पिटी लेंगे तो वो हमारे साथ रहेगा। बात खत्म हो जाती है। इसमें मुझे तो नहीं लगता कि इतनी ज्यादा दिक्कत की बात है। ठीक है साहब। अरस्तकु को कंपैरेटिव पॉलिटिक्स का फादर कहा जाता है। तुलनात्मक राजनीति यानी कंपैरेटिव पॉलिटिक्स का फादर कहा जाता है। तुलनात्मक राजनीति क्योंकि आपको और हमको लगता है भीमराव अंबेडकर साहब थे जिन्होंने पूरे विश्व के 60 से ज्यादा देशों का है ना संविधान पढ़ा फिर कंपैरिजन करा। फिर जो बेस्ट चीजें थी वो लेकर भारत के संविधान में रखी। लेकिन अरस्तु इन सबके पिताजी हैं तुलनात्मक पॉलिटिकल साइंस के। क्यों? क्योंकि कंपैरेटिव पॉलिटिक्स के पिताजी इनको क्यों कहते हैं? इन्होंने 158 इन्होंने 158 कॉन्स्टिटशंस का अध्ययन किया

17:51 था। यानी 100 क्या कहना चाहिए? 58 राज्यों के राष्ट्रों के संविधान का अध्ययन किया। तुलना की। उसके बाद बेस निकाला। ठीक? तो अरस्तु क्या कहा जाता है? मैक्सी कहता है पहला राजनीतिक विचारक। उसके अलावा आप अरस्तु को तुलनात्मक राजनीति का फादर भी कहते हो क्योंकि उसने कंपैरिजन किया 158 संविधानों के बीच तुलना की अध्ययन किया उनका। इसके अलावा जो एक कांसेप्ट है जिसे आप बोलते हो सिविल सोसाइटी का कांसेप्ट। किसका कांसेप्ट? सिविल सोसाइटी का कांसेप्ट। सिविल सोसाइटी का कांसेप्ट क्या है? तो आपको बताती हूं नागरिक समाज सिविल सोसाइटी का कांसेप्ट। यानी आप ऐसे व्यक्तियों का समाज बनाइए। आप ऐसे

18:37 व्यक्तियों का समाज बनाइए जो बेसिकली पब्लिक सेक्टर और प्राइवेट सेक्टर दोनों में काम करें। पब्लिक सेक्टर और प्राइवेट सेक्टर दोनों में काम करें क्योंकि इनका कहना है कि हमें एक ऐसा नागरिक समाज बनाना होगा। सिविल सोसायटी बनानी होगी जिसमें अकेले सारे सेक्टर्स पर गवर्नमेंट का कंट्रोल ना हो। कुछ प्राइवेट सेक्टर्स भी हो। प्राइवेट सेक्टर्स जैसे आप लोग देखते हैं कि आजकल यूपी की सरकार जो है वो क्या करना चाहती है? वो प्राइवेटाइजेशन करना चाहती है शिक्षा का भी। तो अरस्तु कहते हैं कुछ चीजें प्राइवेट निजी लोगों के हाथ में भी होनी चाहिए और कुछ लोग सरकार कुछ चीजें सरकार के हाथ में भी होनी चाहिए। तो इन्होंने सिविल सोसाइटी का कांसेप्ट दिया कि भैया आप क्या करेंगे? उन्होंने ये कहा

19:22 कि भैया जो भी समाज है उस समाज का हर नागरिक समाज में इनवॉल्व हो। कुछ ना कुछ कार्य करता हो उसकी भागीदारी सुनिश्चित हो। इसके लिए सरकार जो है कुछ क्षेत्रों पर डायरेक्ट कंट्रोल अपना रखें और कुछ क्षेत्रों को लोगों को दे दे कि ठीक है आप बिजनेस करो आप काम करो ये वाला काम कर दे। तो इसका मतलब आप अपने परिवार के साथ-साथ अपनी जो आप पैसा कमा रहे हो संपत्ति का अर्जन कर रहे हो। उसके अधिकार को सुरक्षित रखने के साथ-साथ आप एक सिविल सोसाइटी के भी सदस्य हैं तो आपकी अपने समाज के प्रति भी क्या होगी? आवश्यक भागीदारिता होगी। क्या होगी? आपकी अपने समाज के प्रति भी आवश्यक भागीदारिता होगी। क्लियर? अरस्तु ने एक और कम की बात कही थी। अरस्तु

20:10 पॉलिटिकल साइंस को पॉलिटिकल साइंस कहते ही नहीं थे। वो तो बाद में दुनिया उनको कहने लगी। मैक्सी कहते हैं कि आप राजनीतिक वैज्ञानिक हो। पहले राजनीतिक वैज्ञानिक। अरस्तु पॉलिटिकल साइंस को मास्टर साइंस कहते थे। क्या कहते थे? मास्टर साइंस कहते थे। क्या कहते थे? मास्टर साइंस। क्यों कहते थे? इसके पीछे का कारण बताऊंगी। तो यहां तक कि मैंने आपको कुछ चीजें बताई। अब आपसे देखिए मैं वन डे एग्जाम के बेसिस पर क्वेश्चन पूछती हूं। वन डे एग्जाम के बेसिस पर मैं यहां से आपके क्वेश्चन पूछती हूं कि वन डे एग्जाम के बेसिस पर क्या क्वेश्चन बनेंगे? और अभी तक में एक आठ नंबर का क्वेश्चन भी बन चुका है। वो भी मैं आपको बताती हूं। सबसे पहली चीज जैसे मैं आपसे पूछूं कि अरस्तु जिस विद्यालय के प्रिंसिपल थे अरस्तु के

20:55 विद्यालय का नाम क्या था? तो आप मुझे बताते चलिए अरस्तु के स्कूल का नेम क्या था? जैसे प्लेटो के स्कूल का नाम मैंने आपको बताया कि उन्होंने अपने स्कूल का नाम एकेडमी रखा था। तो ऐसे ही अरस्तु का जो स्कूल था, शिक्षण संस्था थी, उसका नाम क्या था? एक तो क्वेश्चन ये बताइए। दूसरा अरस्तु को अरस्तु को किसने प्रथम राजनीतिक वैज्ञानिक कहा है? ये प्रश्न बहुत सीधे-सीधे आते हैं। किसने प्रथम राजनीतिक राजनीतिक वैज्ञानिक कहा है? मतलब कौन कहता है कि अरस्तु इज द फर्स्ट पॉलिटिकल साइंटिस्ट? कौन कहता है अरस्तु को इस बारे में? तो बताएंगे। बताएंगे बेटा जी। जल्दी से बताएंगे। हां। अच्छा रिचा ने कहा कि

21:41 अरस्तु के स्कूल का नाम अेडमी था। नहीं अरस्तु के स्कूल का नाम था लाइजियम। क्या था? अरस्तु के स्कूल का नाम था लाइजियम। क्या था? लाइजियम। और प्लेटो के स्कूल का नाम था प्लेटो के स्कूल का नाम था अकडमी। प्लेटो के स्कूल का नाम क्या था? अेडमी। प्लेटो के स्कूल का नाम अकैडमी था। इस स्कूल का नाम इनके स्कूल का नाम क्या था? इनके स्कूल का नाम था लाइज़। और अरस्तु को मैक्सी ने मैक्सी ने अरस्तु को क्या कहा है? पहला राजनीतिक वैज्ञानिक कहा है। इसीलिए अगर आप लोग बातें करते रहेंगे और अगर कमेंट सेक्शन पे ही आपका ध्यान रहेगा तो आप देखिए बहुत बड़ी गलती पे हो जाएंगे। आप में से अगर किसी को ये लगता है कि आप बहुत आसानी से इन चीजों को पढ़ लेंगे और समझ भी लेंगे तो देखिए लगातार बार-बार बार-बार रिपीटेशन करनी होगी और एक कहानी

22:28 की तरह चीजों को समझना होगा तभी हो जाएगा। ठीक है ना? तो बहुत स्पष्ट तरीके से फालतू की बातों को इग्नोर कीजिए। फालतू चीजों को छोड़िए। आपको जो महत्वपूर्ण चीजें थी वो सारी चीजें मैंने आपको समझा दी कि क्या है, क्या नहीं है, किसको क्लास लेनी है, किसको नहीं लेनी है। सारी चीजें। अब चलिए आगे बढ़ते हैं। तो आपका ध्यान ज्यादा से ज्यादा इन चीजों पर होना चाहिए कि आप इस चीज को समझ पाओ कि आपके प्रॉपर तरीके से आपकी चीजों पर पकड़ होनी चाहिए। सब अरस्तु की कुछ किताबें हैं। बहुत फेमस किताबें हैं। और इनमें से जो शुरुआती तीन किताबें हैं ये पॉलिस पॉलिटिक्स के लिए द कॉन्स्टिट्यूशन और तीसरी निकोनियन एथिक्स ये तीनों किताबें बहुत फेमस है। जब भी आप अरस्तु के बारे में बात करते हैं। मेरे

23:14 साथ बोलिएगा। देखिए पीडीएफ आपको मिल जाएगी। उतारने पर ध्यान मत दीजिए। जब तक अंटिल अनलेस लॉन्ग आंसर्स नहीं आते। तब तक आप लॉन्ग आंसर्स को जब मैं आपको लिखने के लिए ना बोलूं कि बेटा लॉन्ग आंसर्स की प्रैक्टिस कीजिए तब तक आप कॉपी पेन को साइड में रखिए। यहां पूरी चीजें हैं। आपका एकमात्र एक ही काम है मेरे प्यारे बच्चे सुनना समझना। सुनना और समझना। ठीक साहब आ जाए। तो अरस्तु की फेमस किताब क्या है? प्रमुख पुस्तक क्या है? तो तीन राजनीति से संबंधित इनकी किताबें हैं। पहली किताब का नाम है द पॉलिटिक्स। क्या नाम है? पॉलिटिक्स। तो कमाल की बात ये है कि जिसे आप अरस्तु जो कि पॉलिटिकल साइंस को मास्टर साइंस कहता है। राजनीतिक विज्ञान को मास्टर साइंस कहता है। वो इस पॉलिटिक्स

24:01 में क्या बात करता है? वो इस पॉलिटिक्स किताब के अंदर सिविल सोसाइटी की बात करता है। यो एक नागरिक समाज की बात करता है। नगर राज्य की बात करता है और नगर राज्य को एक नाम देता है पॉलिस। क्या नाम देता है? पॉलिस। और यहीं से पॉलिटिक्स शब्द बना है। तो इसकी किताब का नाम ही है पॉलिटिक्स। इसीलिए आप इसे क्या कहते हो? तुलनात्मक राजनीति का पिता कहते हो। इसीलिए आप इसे ये कहते हो कि ये पहला क्या है? तो आप इसका नाम देते हो कि पहला राजनीतिक वैज्ञानिक है। क्योंकि इसने किताब लिखी पॉलिटिक्स और पॉलिटिक्स में इसने पॉलिश की बात की। नगर राज्य की। किसकी? पॉलिश यानी नगर राज्य। नगर राज्य इसका सिंपल सिंपल मतलब कि वो पूरा एरिया जिस पर शासन हो रहा

24:48 है और जिसके अंदर एक सीमा के अंदर रहने वाली जनता है और यहीं से पॉलिटिक्स शब्द बनता है और ये व्यक्ति जो बार-बार पॉलिटिक्स पॉलिटिक्स बोलता है ये पॉलिटिक्स का एक्चुअल मतलब इसका आज का लोकतंत्र है क्योंकि इसकी किताब पॉलिटिक्स में ये लिखता है कि भैया राज्य कैसा हो? नगर राज्य हो, जनता का राज्य हो, पॉलिटिक्स कैसी हो? पॉलिस हो, जनता से जुड़ी हुई हो। ठीक है साहब। दूसरी किताब लिखता है द कॉन्स्टिट्यूशन। तो क्योंकि हम इसे तुलनात्मक राजनीति का पापा कहते हैं और इसने 158 कंट्रीज के कॉन्स्टिट्यूशन की स्टडी की थी। उनकी तुलना की थी। तो ये जो अपनी किताब लिखता है द कॉन्स्टिट्यूशन उसमें ये उन 158 कंट्रीज की जो कंपैरिजन

25:36 था उसको शो करता है और उसमें सबसे बड़े लेवल पर एथेंस जहां ये रह रहा था उसके संविधान को बताता है कि बाकी सभी देशों के संविधान से बेहतर एथेंस का संविधान है। सभी देशों के संविधान से बेहतर एथेंस का संविधान है। एक और किताब लिखता है निकोमैनियन एथिक्स। क्या लिखता है? निकोनियन एथिक्स। निकोनियन एथिक्स। एथिक्स या द एथिक्स कह लीजिए। एथिक्स का मतलब क्या होता है? नीति शास्त्र कि क्या सही है? क्या गलत है? तो इसके अंदर ये ह्यूमन सोल की स्टडी करता है। मानव आत्मा का अध्ययन करता है एथिक्स में। निकोमेनियन एथिक्स और इसमें ये किसका अध्ययन करता है? मानव की आत्मा का। कुल

26:23 मिलाकर ये ये कहता है कि किसी भी राज्य के लिए एथिकल चीज यानी कि नीति शास्त्र के अंदर आने वाली चीज वो है जिससे आम जनता का भला होता हो। तो ये तीनों किताबें पॉलिटी से संबंधित है। उसके अलावा और भी किताब लिखता है भैया एक किताब लिखता है रथिक। रथोरिक जो किताब है वो कविता कहानी इन सब कीेंस को मानती है। एक और किताब लिखता है यूडीमियन एथिक्स यूडीियन जब हम पढ़ते थे तो हम इसको ऐसे याद करते थे यूडीमियन एथिक्स। एक तो थी निकोमियन एथिक्स। एक थी यूडीमियन एथिक्स। इस यूडीमियन एथिक्स के अंदर ये बात करता है किसकी? सोल की। आत्मा की। ये कहता है आत्मा अमर है। यूडीमियन एथिक्स। तुम्हारी

27:11 मेरी आत्मा अमर है तो कुछ भी अच्छा नहीं है और कुछ भी बुरा नहीं एथिक्स के चक्कर में मत पड़ो। और लास्ट किताब है इसकी ऑन द पाइथागोरियंस। ऑन द पाइथागोरियंस। आपको सबसे इंपॉर्टेंट चीज जिस पे याद रखनी है वो ये याद रखनी है कि तीन किताबों में पहली किताब का नाम द पॉलिटिक्स। और जो पॉलिटिक्स किताब है भाई इसके अंदर इसने बात की है किसकी? पॉलिस की। कि कोई भी राज्य बेहतर राज्य तब होगा जब वो आम जनता से जुड़ा हुआ राज्य होगा। तो नगर राज्य की बात की है और पॉलिटिक्स शब्द यहीं से बना। दूसरी किताब द कॉन्स्टिट्यूशन जिसमें ये एथेंस के संविधान का कंपैरिजन 158 कॉन्स्टिट्यूशन से करने के बाद कहता है कि एथेंस जहां मैं रहता हूं उसका संविधान सबसे बेहतर है। निकोमेनियन एथिक्स इसमें ये मानव की आत्मा का अध्ययन करता है।

27:58 रेथ्रोइक जिसमें ये कहता है कि यार जीवन सब कुछ बुद्धि बुद्धि तर्क ही नहीं है। जीवन कविताओं में कहानियों में सुंदरताओं में भी है। यूडीमियन एथिक्स आत्मा की अमरता का विवेचन और लास्ट किताब ऑन द पाइथागोरियंस। अब बताइए यहां तक समझने में कोई परेशानी कोई समस्या रही हो तो मुझे बताएं मेरे साथ फिर बोल लीजिए अच्छे तरीके से। अरस्तु प्लेटो का शिष्य है और किसका गुरु है? तो आप कहेंगे गुरु है यह सिकंदर का। यह मकदूनिया में पैदा होता है। यह पैदा था ही नहीं। कहां? यह कहां नहीं हुआ था? यह कहां नहीं पैदा हुआ था? तो आप कहेंगे यह व्यक्ति हां यह व्यक्ति कहां नहीं पैदा

28:43 हुआ? अच्छा यूपीटेट आ गया है। ओके। यह व्यक्ति कहां पैदा नहीं हुआ था? तो आप कहेंगे ये व्यक्ति मकदिया में पैदा हुआ था। ये एथेंस में पैदा नहीं हुआ था। मकदिया के स्टजिरा में पैदा हुआ था। और ये क्या बन गया? मकदुनिया के स्टजिरा में पैदा होने के बाद। क्योंकि ये पैदा हुआ था एक शाही चिकित्सक के घर में। मतलब एक रॉयल डॉक्टर के घर में। तो इसकी एक रुतबा था। यह प्लेटो से शिष्य बनने के लिए आया प्लेटो का। प्लेटो का एक शिक्षण संस्थान थी, स्कूल था जिसका नाम था द एकेडमी। और द एकेडमी का रूल था क्या था? हां मकदुनिया का स्टेजीरा। जीरा मकदुनिया का ये स्टेजीरा का रहने वाला था। एकेडमी का रूल था कि केवल वही व्यक्ति एकेडमी का प्रिंसिपल बन सकता है। प्लेटो के बाद इसका मन था कि मैं बनूंगा प्रिंसिपल। प्लेटो

29:29 मुझे बहुत चाहता है। मैं इंटेलिजेंट आदमी हूं। इसका बहुत मन था। लेकिन इसके मन पे पानी फिर गया क्योंकि यह रूल था कि जो व्यक्ति एथेंस में पैदा हुआ है जिसका जन्म एथेंस में हुआ है वही आगे चलके प्लेटो की शिक्षण संस्थान का उत्तराधिकारी हो सकता है। तो इस बात से दुखी होकर इसने क्या किया? अरस्तु ने अपना एक स्कूल खोला और स्कूल का नाम क्या था? लाइजियम। स्कूल का नाम क्या था? लाइजियम। मैक्सी इसको कहता है कि ये पहला राजनीतिक वैज्ञानिक है क्योंकि इसने राजनीति और फिलॉसफी दोनों को अलग-अलग कर दिया। पहले लोग पॉलिटिक्स को फिलॉसफी से जोड़ते थे। जैसे कुछ लोग आज भी बड़े फिलॉसोफिकल होते हैं कि अरे नहीं साहब सरकार को तमाम चीजें करनी पड़ती हैं।

30:14 लोग तो मुंह उठा के धरना करने चले जाते हैं। अरे नहीं साहब अगर कंट्रोल नहीं करेगी सरकार आम जनता को तो इससे तो आम जनता का बड़ा नुकसान होगा। ये होगा वो होगा। ऐसी करके तमाम चीजें कि शासन व्यवस्था, कानून व्यवस्था लचर हो जाएगी। ये उनकी फिलॉसफी है। तो वो अपनी फिलॉसफी को पॉलिटिक्स के साथ जोड़ते हैं। तो इसने पॉलिटिक्स और फिलॉसफी को अलग-अलग किया कि पॉलिटिक्स देश को चलाएगी और फिलॉसफी आपका दृष्टिकोण है। आपकी सोच है। तो इसको अलग रखिए। अरस्तु को कंपैरेटिव पॉलिटिक्स का फादर भी कहा जाता है। तुलनात्मक राजनीति का पता भी कहा जाता है। 158 संविधानों का अध्ययन किया और इसी के आधार पर एक किताब लिखी। किताब का नाम क्या था? किताब का नाम था द कॉन्स्टिट्यूशन। किताब का नाम क्या

31:00 था? कॉन्स्टिट्यूशन था। अच्छा साहब इनको इन्ह ये पॉलिटिकल साइंस नहीं बोलते थे। ये बोलते थे मास्टर साइंस। क्या बोलते थे? मास्टर साइंस। इनकी एक बहुत फेमस किताब है पॉलिटिक्स जिसमें ये नगर राज्य की बात करते हैं और यहीं से पॉलिटिक्स शब्द निकल कर आता है। ठीक साहब चलिए तो ये तीन किताबें चार किताबें छह किताबें मैंने आपको बताई निकोमेनियन एथिक्स नीति शास्त्र मानव आत्मा का अध्ययन रैथोइक अलंकार शास्त्र यानी ये कहते हैं कि यार जीवन केवल यही नहीं है। कहानी कथा ये भी तो है तो कविताएं ये भी तो जीवन का हिस्सा है। तो इस पर इन्होंने किताब लिखी यूडीबियन एथिक्स आत्मा की अमरता के बारे में और लास्ट किताब थी ऑन द पाइथागोरियंस। ठीक साहब ऑन द पाइथागोरियंस। तो पॉलिटिक्स

31:46 से शुरू करते हैं। ठीक है बेटा? जो बैचेस आपके सामने हैं वही बैचेस हम लोग लेकर आए हैं। है ना? जो बैचेस आपके सामने हैं वही बैचेस हम लोग लेकर आए हैं। और ये चीज़ हमने पहले भी स्पष्ट की थी कि अगर हम रेलेवेंट टीचर हमें प्राप्त होंगे तो हम बैचेस लेकर आएंगे। नहीं प्राप्त होंगे तो हम किसी बच्चे का नुकसान नहीं करेंगे। बस बात ही खत्म हो जाती है। ठीक है ना? नगर राज्य का मतलब एक ऐसा राज्य जो नागरिकों से जुड़ा हुआ हो। जहां पर इज्जत किसकी हो? नागरिकों की हो। तो पॉलिटिक्स किताब में अरस्तु ये कहता है कि सर्वोच्च पावर जो है एक्सट्रीम पावर सत्ता जो है वो जनता के हाथ में होनी चाहिए। तो ये प्लेटो से अलग है इस मामले में। प्लेटो कहता है कि देखो पावर कि राजा

32:33 अच्छा होना चाहिए। प्लेटो ये मानता है कि राजा ही भला होना चाहिए। राजा नेक होना चाहिए। राजा सच्चा होना चाहिए। राजा ऐसा होना चाहिए, वैसा होना चाहिए। ये कहता है कि जिन लोगों पर ही रूल हो रहा है। एक्चुअली में पावर उनके हाथ में होनी चाहिए कि अगर उनको लगता है कि ये बंदा ठीक नहीं है तो उसको भगा दें। उसको हटा दें। तो पॉलिटिक्स जो किताब है उसके अंदर बेसिकली अरस्तु ये कहता है कि एक्चुअल पावर किसके हाथ में है? जनता के हाथ में होनी चाहिए। एक्चुअल पावर जनता के हाथ में होनी चाहिए। और यहां ये कहता है कि सामूहिक निर्णय बुद्धि यानी इनका कहना है कि जनता में बहुत सारे लोग हैं। कोई एक राजा कोई एक राजा कोई देखो भैया ने लिख भी

33:19 दिया मैथ्स इंग्लिश कॉमर्स का बैच 2 दिन में आ जाएगा। तो जो संभव हो पा रहा है वो आपके सामने आ जाएगा। जो संभव नहीं है उसके लिए कोई बात ही नहीं है। हां यूपीटेट का नोटिफिकेशन आ गया वसुंधरा जी अभी-अभी रोहित भैया ने यहां आप लोगों को सूचित भी किया है। ठीक है ना साहब? आ जाओ। तो यहां गौर फरमाना होगा कि सामूहिक निर्णय बुद्धि का सिद्धांत। सामूहिक निर्णय बुद्धि का सिद्धांत क्या कहलाता है? सामूहिक निर्णय बुद्धि का सिद्धांत ये ये कहते हैं कि प्लेटो मेरे जो गुरुजी थे ये बड़ी गलती करते थे क्योंकि प्लेटो कहता था राजा बहुत अच्छा होना चाहिए चतुर होना चाहिए इंटेलिजेंट होना चाहिए ऐसा व्यक्ति राजा होना चाहिए जो कि आम जनता के दिल की बात समझता हो आम जनता के हित की बात समझता हो ऐसे मतलब एकदम बढ़िया नेक आदमी होना चाहिए

34:06 इन्होंने कहा कि देखो यार राजा चाहे कितना भी बुद्धिमान हो लेकिन जब आम जनता में इतने सारे लोग हैं और इन सब की बुद्धि लगेगी गी तो वो किसी भी चतुर से चतुर राजा की बुद्धि से ज्यादा महत्वपूर्ण होगी। किसी भी चतुर से चतुर राजा की बुद्धि से ज्यादा महत्वपूर्ण होगी। तो पॉलिटिक्स में पॉलिटिक्स नाम की अपनी किताब में जब अरस्तु नगर राज्य यानी सिविल सोसाइटी की बात करते हैं तो एक्चुअली उनका कहने का मतलब ये है कि भैया जो भी निर्णय लिए जाएं वो एक्सट्रीम पावर किसके हाथ में हो? आम जनता के हाथ में हो। और जो भी निर्णय लिए जाए वो आम जनता क्या करके सामूहिक ग्रुप में निर्णय करके अपनी बुद्धि का प्रयोग करके ये काम करें। तो इनका ये कहना था कि

34:52 इनके जो गुरु जी थे प्लेटो उनके विपरीत है। उनके विपरीत इन्होंने बात की है। ठीक है ना? क्योंकि इनके जो गुरु जी हैं प्लेटो प्लेटो क्या मानते थे? प्लेटो कहते थे कि जनता की सामूहिक बुद्धि सबसे बुद्धिमान शासक से भी बेहतर होती है। तो इनका कहना था कि प्लेटो का कहना था कि भैया जो सबसे बुद्धिमान शासक है वो बेस्ट है। लेकिन इन्होंने अरस्तु ने प्लेटो के दार्शनिक शासन के बिल्कुल अगेंस्ट जाकर कह दिया कि नहीं नहीं नहीं। जनता की जो सामूहिक निर्णय बुद्धि है वो सबसे बुद्धिमान राजा से भी बेस्ट है। तो यहां पर शासन जो होगा वो बेस्ट होगा। यहां पर जो जनता डिसीजन लेगी वो बेस्ट लेगी। ठीक साहब। अच्छा साहब। इनकी जो नेक्स्ट किताब है निकोमियन निकोनियन एथिक्स जिसके अंदर

35:38 आपको मैंने बताया था निकोनियन एथिक्स जिसमें ये आत्मा के कांसेप्ट की बात करते हैं। आत्मा के अध्ययन की बात करते हैं। निकोमेनियन निकोनियन एथिक्स बिल्कुल बेटा मैंने तुम्हें जेआरएफ के लेवल तक ही लिया है। ठीक है ना? मैंने तुम्हें जेआरएफ के लेवल तक ही लिया है ताकि तुम्हें किसी भी तरीके की कोई दिक्कत होगी ही नहीं। कोई क्वेश्चन छूटेगा ही नहीं। तुम नेट जेआरएफ तक के क्वेश्चंस लगाना इस लेवल पे और तुम आराम से करके आओगे। क्योंकि अगर तुम जीएस का पोर्शन ले रहे हो। है ना? तो तुम्हें थोड़ा सा बेनिफिट वहां 30 नंबर में भी मिलेगा। अब क्या चूज़ कर रहे हो उसके अंदर? जीएस के पोर्शन में तुम क्या चूज़ कर रहे हो? ये बहुत इंपॉर्टेंट है। तो अगर जीएस के पोर्शन में तुम लोगों ने चूज़ किया। क्या चूज़ किया? हिस्ट्री चूज़ किया है,

36:23 पिटी चूज़ किया है। है ना? या आप लोगों ने हां बिल्कुल बेटा नहीं पीडीएफ जिस भी बच्चे ने बैच में एनरोल कर रखा है उन सबको मिल जाती है। ठीक है ना? उन सबको उन सबको पीडीएफ मिल जाती है। डल जाती है। ठीक है ना? जिन भी बच्चों ने बैच में एनरोल किया है। जिन्होंने अभी नहीं किया उनको नहीं मिलती है। तो इसके लिए मैं माफी चाहूंगी क्योंकि ये सब जगह पे यही रूल रहता है। ठीक है ना? हां। तो पिटी पिटी के बाद आपने जो भी लेना है आपने हिस्ट्री लिया है आपने ज्योग्राफी लिया है जो भी लिया है आपका साथ में आपने क्या रहेंगे मर्ज अप रहेगा तो निकोनियन एथिक्स में ये कहते हैं कि यार जो बुजुर्ग होते हैं बुद्धिमान जो होते हैं वो लोग जो होते हैं उनके सजेशंस बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट होते हैं और आपको पता है इसमें इन्होंने आत्मा के अध्ययन की भी बात की है निकोमिनियन एथिक्स में।

37:10 अच्छा साहब ये कहते हैं कि पॉलिटी इनकी नजर में अरस्तु की नजर में पिटी एक आदर्श राज्य है। क्या है? आदर्श राज्य है। तो कोई मैंने तो कहा ही नहीं कि किसी किताब को लेकर चलने की जरूरत है। मैंने एक पर्सन नहीं कहा आपसे कि आपको किसी किताब को लेकर चलने की जरूरत है। मैंने आपसे 1% नहीं कहा। वरना मैं आपसे कहूंगी कि आपको किसी भी किताब को लेने की जरूरत है। मेरा जो पोर्शन है आप उससे आराम से नेट जेआरएफ तक के पोर्शन कर लेना। तुम जितनी किताबें लेकर आओगे उससे ज्यादा किताबें मुझ पे हैं। तुम जितनी बुक्स लेकर आओगे उससे ज्यादा किताबें मेरे पास हैं। तो बात ही खत्म हो जाती है। तुम तो इतना छांट कर पढ़ भी नहीं पाओगे जितना मैं आपको दे दूंगी।

37:57 ठीक है ना? जितना मैं आपको दे दूंगी। तो आपको इस बात पे बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं है कि हमको ये क्या कहना चाहिए? पिटी की जो हमें अलग से किताब लेनी होगी या हिस्ट्री की। नहीं जो टीचर आपको पढ़ा रहे हैं आप दमदार तरीके से उसको पढ़िए। क्वेश्चन आंसर्स की प्रैक्टिस कीजिए और पहले जो टीचर्स पढ़ा रहे हैं उनका रिवीज़ जितनी बार कर सकते हैं उतनी बार कीजिए। उसके बाद एनर्जी बचती है तो फिर कोई नया पढ़ने का शौक आए तो किताब तब लेकर आइएगा। ठीक है ना? पहले इसको जितनी बार हो सके उतनी बार रिवाइज़ कर लें। अब जो अरस्तु हैं वो यह बात करते हैं अपनी किताब पॉलिटिक्स के अंदर नगर राज्य की कि एक्चुअल पावर किसके हाथ में होनी चाहिए? आम जनता के हाथ में होनी चाहिए। तो पॉलिटी किताब के अंदर ये बेसिकली आदर्श राज्य की परिकल्पना करते

38:44 हैं कि आदर्श राज्य कैसा होना चाहिए? एक गजब तरीके का राज्य कैसा होना चाहिए? एक आदर्श मतलब एक ऐसा राज्य जिसको आप ये कहें कि यार मॉडल मॉडल राज्य है यानी मॉडल कंट्री है, मॉडल स्टेट है। तो इन्होंने कहा एक आदर्श राज्य पिटी किताब में लिखते हैं कि एक आदर्श राज्य वो होगा जहां निर्णय लेने का अधिकार किसका होगा? सभी लोगों का। क्योंकि क्या कहते हैं कि सामूहिक निर्णय बुद्धि का सिद्धांत। तो ये कहते हैं जहां पर निर्णय करने का अधिकार किसका होगा? समुदाय का होगा। निर्णय कौन लेता होगा? समुदाय लेता होगा। और लोकतांत्रिक प्रक्रिया होगी यानी डेमोक्रेटिक तरीके से लोग अपने किसको शासक को चुनते होंगे और सारे डिसीजन सामूहिक निर्णय बुद्धि के सिद्धांत पर लिए जाते

39:29 होंगे तो आम जनता शासन में भागीदारिता लेती होगी पर उन नियमों को एग्जीक्यूट कैसे करना है लागू कैसे करना है इसके लिए विशेषज्ञ एक्सपर्ट की जरूरत होगी तो एग्जीक्यूशन में पॉलिटी कैसे हो जाती है तो आप कहेंगे एग्जीक्यूट करने की जब बात आए एग्जीक्यूट करने की बात आए तो पॉलिटी क्या हो जाती है? कुलीन तंत्री हो जाती है। यानी तब पिटी क्या हो जाती है? एरिस्टोक्रेटिक हो जाती है। इसका मतलब कि पॉलिटिक्स नाम की किताब में हां बिल्कुल बिल्कुल समझ में आ रहा है ना कि पॉलिटिक्स नाम की किताब में ये कहते हैं कि डिसीजन मेकिंग किसकी होनी चाहिए? बोले डिसीजन मेकिंग जनता की होनी चाहिए। सारे डिसीजन जनता ले भैया। क्या करना है, कैसे करना है, किसको चुनना है? और सामूहिक निर्णय

40:15 बुद्धि के सिद्धांत के आधार पर ले। लेकिन उन डिसीजंस को एग्जीक्यूट करना, लागू करना, क्रियान्वित करना इसके लिए एक्सपर्ट्स की जरूरत है। और ये एक्सपर्ट्स कौन होंगे? एरिस्टोक्रेट होंगे। तो कौन होंगे? कुलीन लोग होंगे। कुलीन तंत्र यानी कि वो लोग जो कि एक तरीके से क्या है? सुपीरियर है। राजा के अंडर आते हैं। पढ़े लिखे लोग हैं। आम जनता से ऊपर है क्योंकि उनको अनुभव है। तो कहा कि भैया देखिए जब एग्जीक्यूट करने की बात आए किसी भी निर्णय को तो एरिस्टोक्रेसी होनी चाहिए। क्योंकि आम जनता निर्णय को एक दूसरे पर लागू करेगी। एक मानेगा एक नहीं मानेगा मैं क्यों माने? तो आपस में लड़ लेंगे। लेकिन डिसीजन मेकिंग हमेशा जनता जो है आम जनता उसके द्वारा होनी चाहिए ताकि वो सामूहिक

41:02 निर्णय बुद्धि के सिद्धांत का प्रयोग कर दे। सामूहिक निर्णय बुद्धि के सिद्धांत का प्रयोग यानी आम जनता जब खुद मिलकर डिसीजन लेगी तो ये क्लियर हो जाएगा आम जनता चाहती क्या है? और वो जो चाहती है वो बता चुकी है आम जनता। उसका पालन कराने का काम किसका होना चाहिए? वो एक्सपर्ट्स का होना चाहिए। तो इनके इनका जो कॉन्स्टिट्यूशन का आईडिया है वो मिक्स्ड कॉन्स्टिट्यूशन का आईडिया है। किसका आईडिया है? तो आप कहेंगे मिक्स्ड कॉन्स्टिट्यूशन का आईडिया। क्योंकि जब इन्होंने कंपैरिजन करा यार भाई साहब 158 कंट्रीज का तो इनको समझ में आया कि ना तो टोटली आप पॉलिटिक्स यानी कि ना तो टोटली डेमोक्रेसी बेहतर हो सकती है और ना ही टोटली एरिस्टोक्रेसी बेहतर हो सकती

41:49 है कुलीन तंत्र कि राजा रजवाड़े जो हैं उनके माध्यम से शासन चले। इन्होंने कहा देखो आम जनता निर्णय ले पाएगी और कलेक्टिवली सब लोग साथ में बैठकर निर्णय ले पाएंगे तो बेस्ट डिसीजन होंगे और वो डिसीजन जो भी जनता लेगी वो उन्हीं लोगों से रिलेट करते होंगे जो जनता आम अपने लिए जिन चीजों को चाहती है। फिर उसके बाद लेकिन इन जितने भी निर्णय लिए हैं इनको लागू करा पाना इनको एग्जीक्यूट करा पाना आम जनता के क्या आम जनता के बस की बात नहीं होगी। ये काम आम जनता के बस की बात नहीं होगी। तो ऐसे में कहा कि भैया यहां पर लागू कराने के लिए एरिस्टोक्रेसी होनी चाहिए, कुलीन तंत्र होना चाहिए। तो ये इनका मिक्स्ड संविधान का क्या है? आईडिया है। कोई दिक्कत यहां तक में मिक्स्ड

42:35 संविधान का आईडिया क्या होता है? ठीक क्लियर हुआ? क्लियर हुआ? अच्छा अब एक व्यक्ति है। बहुत ध्यान से सुनिएगा। एक व्यक्ति है। अरस्तु की जो किताब है ना ये कौन सी किताब? अरस्तु भाई साहब की ये जो किताब है पॉलिटिक्स ये जो किताब है इनकी और प्लेटो भैया की भी एक किताब है रिपब्लिक जो प्लेटो पढ़ेंगे तो आप उसे पढ़ेंगे तो अरस्तु की किताब पॉलिटिक्स और प्लेटो की किताब रिपब्लिक इन दोनों का एक कट्टर टक्कर मानी जाती है तो रिपब्लिक के अंदर रिपब्लिक के अंदर प्लेटो बात करता है टोटल परिवर्तन कर दो टोटल परिवर्तन कर दो यानी कि राजा पुराने जमाने के राजा से ज्यादा समझदार हो दार्शनिक को संपत्ति परिवार इन सबको आप लोगों से लेकर और बांट

43:24 दो साम्यवाद ले आओ। संपत्ति सबकी होनी चाहिए। तो प्लेटो बहुत बड़ा परिवर्तन करने की बात करते हैं। लेकिन अरस्तु इस मामले में लिबरल है, उदार है, यथास्थितिवादी हैं। वो कहते हैं नहीं नहीं यार ये मत करो आप। आप संविधान भी मिश्रित रखो। आप व्यक्ति को अपने लिए भी सोचने दो और समाज के लिए भी भागीदारी होने का मौका दो। आप सब कुछ बदलोगे तो गड़बड़ हो जाएगा। प्लेटो कहता है राजा हो दार्शनिक। ये कहता है राजा की जरूरत ही नहीं है। डिसीजन मेकिंग जनता करे। उसको पालन कराने का काम कौन करे? उसका पालन कराने का काम चाहे बेशक 1% भी दिक्कत आए तो वो कुलीन तंत्र यानी कि जो राजा रजवाड़े हैं यानी एरिस्टोक्रेट है वो करें। ठीक है ना? क्लियर हुआ? तो याद

44:10 रखिएगा ये एक एक बड़ा अंतर है। कैनी नाम के एक बहुत बड़े आपके फिलॉसफर हुए। कैनी नाम के एक बहुत बड़े राजनीतिज्ञ भी हुए। इन्होंने एक आरोप लगाया कि द पॉलिटिक्स जो है एक पिछड़ी हुई बेमेल रचना है। कारण क्या है कि एक तरफ ये कहता है अरस्तु कि नहीं यार सारी पावर आम जनता के हाथ में होनी चाहिए। बल्कि प्लेटो तब भी कहता है अपनी किताब के अंदर प्लेटो अपनी किताब के अंदर प्लेटो अपनी किताब द रिपब्लिक के अंदर ये कहता है कि नहीं यार राजा आदर्शवादी दार्शनिक राजा होना चाहिए। तो एक आइडियल राजा उसने वहां पे बैठाया है अपने दिमाग में एक कांसेप्ट दिया है लोगों को अपनी किताब के माध्यम से। तो यहां पर यहां पर कैनी कहता है यार अरस्तु बड़ा फालतू की बात करता है। झूठ सा बोलता है। बेमेल बात करता है अरस्तु। तो लोगों ने

44:56 कहा कैसे? बोले एक तरफ द पॉलिटिक्स में ये ये कहता है कि सभी निर्णय सामूहिक जनता के निर्णय बुद्धि से होने चाहिए और दूसरी तरफ ये सिकंदर का गुरु है। दूसरी तरफ ये सिकंदर का गुरु है और सिकंदर जो इसका शिष्य है वो एक ऐसे साम्राज्य का निर्माण कर रहा है जो कि विश्व को साथ में जोड़कर विश्व साम्राज्य बने। और यह यहां पर नगर राज्य को ही आदर्श मानता है कि एक अच्छा राज्य सिविल सोसाइटी कैसी होनी चाहिए। ऐसी होनी चाहिए जहां आम जनता का निर्णय हो। ये हो वो हो। और बोले इसी का चेला इसका चेला सब कुछ छोड़कर आगे बढ़ रहा है। ठीक है ना? बेटा ऐसा जीवन में कभी कोई भी नहीं करता

45:41 होगा। कोई भी प्लेटफार्म, कोई भी टीचर नहीं करता होगा कि वो डेमो किसी और से कराता हो और बाद में पढ़ाने के लिए किसी और टीचर को खड़ा कर देता हो। मैं अपना जो मेरा पोर्शन है ये पोर्शन ये पोर्शन कहानी कथा की तरह मैं ही कराऊंगी और बहुत सारे टॉपिक हैं मेरे जिनको मैं कराऊंगी। बहुत सारे टॉपिक हैं मेरे जिनको मैं कराऊंगी। ठीक है ना? तो मैं अपना पोर्शन कराऊंगी और कुलदीप भाई अपना पोर्शन कराएंगे जो तीन की क्लास में उन्होंने बताया है। तो मेरी बात को आप समझेगे। अब यहां पर एक लॉन्ग आंसर बनता है। अब आपको मुझे बताना है कि आपकी कितनी समझ बनी है और आपको कितना ठीक लग रहा है कि आप कर पाएंगे पॉलिटी के साथ में। क्योंकि ये जो हिस्सा है इसको थोड़ा सा समझना कठिन है। क्योंकि ये पॉलिटी का

46:29 वो हिस्सा है जो टोटली एक ऐसी अंडरस्टैंडिंग लेकर चलता है जो कि अगर आप उस लेवल की समझदारी पर हो तभी आप उसको कर सकते हो। ठीक है ना? तो बताएं। बताएं जल्दी से बताएं। आप मुझे बताएं मैं क्वेश्चन लिखती हूं आपका कि अरस्तु प्रथम राजनीतिक विचारक है। प्रथम राजनीतिक वैज्ञानिक है। इस कथन की पुष्टि कीजिए और वैज्ञानिक है। इस कथन की पुष्टि कीजिए। कथन की क्या करनी है आपको? तो आपको कथन की पुष्टि करनी है बेटा जी। और कथन की पुष्टि कैसे होगी? कथन की पुष्टि पुष्टि इस बात

47:14 से होगी। कथन की पुष्टि कीजिए। कथन की पुष्टि इस बात से होगी। कथन का जो पुष्टि हो रही है वो इस बात से होगी कि आप इस बात को साबित कर पाए कि हां ये व्यक्ति जो है ये पहला राजनीतिक वैज्ञानिक है। फर्स्ट पॉलिटिकल साइंटिस्ट है। बताएंगे जल्दी से। बताएंगे क्या-क्या पॉइंट आपके दिमाग में आते हैं? आठ नंबर का क्वेश्चन हम मान के चलते हैं। ये आठ नंबर का एक क्वेश्चन हमें दिया गया। ये क्वेश्चन हमें आठ नंबर का दिया गया। अब आप मुझे बताइए यहां आप इसको कैसे लिखेंगे? अब आपको पॉइंट में भी लिखना है ताकि पहली बार में ही कैची कैची आपके

48:00 हम नहीं बिल्कुल अह बेटा जी बहुत अच्छा पढ़ाते हैं वो भी बहुत अच्छा पढ़ाते हैं कुलदीप सर आप एक बार पढ़िए है ना आप समझ पाएंगे और जब मैं कराऊंगी है ना जब मैं कराऊंगी तो मैं मैंने खुद जानबूझकर वो पोर्शन लिया है जो जनरली आप किसी भी YouTube के किसी भी चैनल पे पढ़ोगे ना तो यार आप बोर ही हो जाओगे वास्तव में ये पॉलिटिकल थिंकर और इनका मामला ना कतई ऐसा हो जाता है तो आप बोर हो जाओगे तो मैं क्योंकि मुझे पता है अपना कि मैं हंसते मुस्कुराते एकदम लाइट वेटेड मामले में तुम्हें पढ़ा पाऊंगी। तो मैंने अपना जानबूझ के ये वाला पोर्शन चुना है। और जो जनरली आप वन टे एग्जाम्स में भी पढ़ते आए हो वो वाला कुलदीप भैया के पास है। तो परेशान होने की बात ही नहीं है। अच्छा तो

48:46 ये कह रहे हैं कि इन्होंने एथिक्स को और एथिक्स को और पिटी को अलग किया। एथिक्स को और पिटी को तो अलग नहीं किया। इनकी तो किताब में ही एथिक्स है। द कॉमनियन एथिक्स नहीं इन्होंने फिलॉसफी और इसको अलग किया। किसको? फिलॉसफी आप लिखेंगे प्रथम राजनीतिक वैज्ञानिक पॉइंट नंबर वन फिलॉसफी यानी दर्शन को हिंदी में लिखा देती हूं दर्शन को राजनीति से अलग करने का काम किया इन्होंने दर्शन को राजनीति से अलग किया राजनीति से क्या किया अलग किया अलग किया पहले तो तुम यही लिखोगे ये कथन किसका है मैक्सी का है क्या लिखोगे कथन किसका है तो आप लिखोगे कथन मैक्सी का है कथन किसका है मैक्सी का है कथन किसका है बेटा जी तो पहले आप लिखोगे कथन है मैक्सी फिर आप

49:31 कहोगे इन्होंने दर्शन को राजनीति से अलग किया। दूसरा पॉइंट फिर बीच में आप लिखोगे कि अरस्तु से पहले फिल पॉलिटी को दर्शन से जोड़ा जाता था। यहां तक कि अरस्तु के गुरु प्लेटो भी जब पॉलिटिक्स की बात करते हैं या राजनीति की बात करते हैं तो वो एक दार्शनिक राजा की बात करते हैं कि राजा कैसा हो? दार्शनिक हो। तो इन्होंने पहली बार दर्शन को फिलॉसफी को राजनीति से अलग करके राजनीति को एक राजनीतिक विज्ञान के रूप में प्रस्तुत किया। दूसरा पॉइंट आप यहीं पे लिखेंगे कि इन्होंने तुलनात्मक तुलनात्मक है ना इन्हें तुलनात्मक राजनीति का जनक कहा जाता है। तुलनात्मक राजनीति का जनक तो आप यहां पर बताएंगे कि भैया इन्होंने राजनीति को साइंटिफ़िक वे में प्रूफ किया है ना। पहले राजनीतिक

50:17 वैज्ञानिक भैया इन्होंने 158 कंट्रीज के संविधान का तुलनात्मक अध्ययन किया और कहा कि भैया बेस्ट संविधान तो मिश्रित संविधान होना चाहिए। ये बात आप यहां पे पॉइंट में लिखेंगे। तीसरा पॉइंट आप क्या लिखेंगे? तीसरा पॉइंट आप ये लिखेंगे कि अरस्तु जो है वो अपनी किताब पॉलिटिक्स हो। चाहे उनकी किताब पॉलिटिक्स के अलावा कौन सी थी? द कॉन्स्टिट्यूशन हो या कॉमेनियन एथिक्स हो। जब आप किताबों के नाम लिखेंगे ना और ब्लैक पेन से हेडिंग डाल के बढ़िया सा तो एक अच्छा इंपैक्ट पड़ता है। तो अपनी तीनों किताबों में अरस्तु ने वैज्ञानिक ढंग से वैज्ञानिक ढंग से अपनी बातों को तर्कों के साथ में रखा है। तो आप कहेंगे तीनों पुस्तकों में तीनों पुस्तकों के नाम आप जानते हैं। तीनों पुस्तकों में तीनों पुस्तकों में है ना तार्किक क्या आप

51:03 कहोगे? तार्किक तथ्यों का प्रयोग किया गया है। तार्किक तथ्यों का प्रयोग किया गया है। तथ्यों का क्या किया है इन्होंने? तार्किक तथ्यों का प्रयोग किया है। तार्किक तथ्यों का क्या किया है? प्रयोग किया है। तार्किक तथ्यों का प्रयोग किया है। और आप क्या कहेंगे? हां। हां। इन्हें पॉलिटी का मास्टर कहा जाता है। पिटी को इन्होंने मास्टर साइंस कहा था। वो अभी तुम मैच नहीं कर पाओगे। अभी मैच भी नहीं करेगा इस बात से। ये तुम बाद में इसको इसके साथ डाल पाओगे। आप इसके अलावा और क्या लिखोगे? के प्रथम राजनीतिक वैज्ञानिक हैं कि अपनी किताब पॉलिटिक्स में ये लिखते हैं कि जनता जनता जो है निर्णय लेने की पावर जनता के हाथ में होनी चाहिए। लेकिन उस निर्णय को एग्जीक्यूट करने की पावर कुलीन तंत्र के हाथ में होनी चाहिए। तो मिश्रित संविधान की बात करते हैं ये। तो मिश्रित संविधान

51:50 की बात करते हैं तो इन्होंने तर्क के आधार पर एक वैज्ञानिक सिस्टमैटिक वे में ये बताया कि किसी देश की पॉलिटिक्स बेहतर कैसे हो सकती है तो ये वाला पॉइंट भी लिख दीजिए कि ये मिश्रित संविधान की बात करते हैं अपने तरीके से डाल के कि मिश्रित संविधान है ना मिश्रित संविधान मिश्रित संविधान की समझ तो आप यहां लिख सकते हैं कि भैया वैज्ञानिक हैं पॉलिटिक्स के वैज्ञानिक कहें कहेंगे बिल्कुल कहेंगे। फिर आप यहां पे ये भी पॉइंट डाल सकते हैं। ये आप जो भी कुछ जानते हो उसको तरीके से छान कर बढ़िया तरीके से आप उसको लेकर आएंगे तो मजा आ जाएगा। तो आपको मजा आ जाएगा। तो आप यहां पे ये भी जोड़ सकते हैं कि ये अपने गुरुजी से टोटली अपोजिट है। क्योंकि इनसे पहले

52:37 प्लेटो पॉलिटिक्स के ऊपर बात करते हैं अपनी किताब रिपब्लिक में। लेकिन वो जो परिवर्तन बताते हैं वो परिवर्तन एकदम आमूलचूल परिवर्तन है। यानी रेडिकल परिवर्तन है। बहुत तेज परिवर्तन है। और इतने तेज परिवर्तन से समाज बिखर जाएगा। लेकिन अरस्तु उदारवादी है। वो ये कहते हैं कि व्यक्ति अपने लिए भी जिए और साथ-साथ समाज के लिए भी भागीदारी हो जाए। तो आज का क्वेश्चन मैंने तुम्हें एक्सप्लेन किया। ये क्वेश्चन मुझे चाहिए आठ नंबर में। ये क्वेश्चन मुझे आठ नंबर में चाहिए और मैं ये चाहूंगी कि आप सब लोग जो आपका टेलीग्राम ग्रुप है क्या कहेंगे टेलीग्राम जो चैनल है आपका इसके लिए जो डाउट है चैनल बनेगा आपका है ना संभाल के रख लेना लिख के रख लेना वहां इस क्वेश्चन को मुझे जरूर

53:23 भेजना क्योंकि मैं मैं ये चाहती हूं कि मैं यहां तक तो तुम्हें ले आऊं कि तुम एट लीस्ट इतने समझदार हो जाओ कि तुम्हें लिखने का तरीका आ जाए क्योंकि रट्टा तो तुम मार लोगे वो तो मैं रटवा लूंगी तुम्हें। ठीक है ना? लिखने का तरीका बहुत जरूरी है। ठीक है ना? तो इसको तुम आठ नंबर में लिखोगे। कल यहीं से शुरू करेंगे क्योंकि अरस्तु ही बहुत इंपॉर्टेंट है। अभी अरस्तु का राज्य का क्या विचार है? इसको हम समझेंगे। ठीक है ना? तो कल हम यहीं से चलेंगे। ठीक है ना? यहीं से चलेंगे। इसके अंदर जैसे अरस्तु की आलोचना भी है कि अरस्तु साहब मुंह फाड़ के ये कह देते हैं साहब हैं। यही है। ऐसा है वैसा है। ऐसा कैसे हो सकता है? यह वाला मामला। है ना? आमूल परिवर्तन का मतलब टोटली परिवर्तन। हां टोटली परिवर्तन होता है। सृष्टि मैम

54:08 एसएसटी का बैच लेना मुझे ज्योग्राफी और पॉलिटिकल साइंस से पेपर देना है। तो क्या दोनों सब्जेक्ट अलग-अलग नहीं क्यों लेना होगा? एसएसटी का मतलब ही है कि दोनों ही आपके आपके चार में से दो आपके लिए कोई से भी खुल जाएंगे। दो आपके लिए कोई से भी जो आपको पढ़ने होंगे वो दो आपके लिए खुल जाएंगे। चारों आपके सामने एक्सेसबल होंगे। दो आपके लिए वो खुल जाएंगे। एसएससी में ठीक है ना? क्लियर हुआ? दो आपके लिए खुल जाएंगे। और आपको क्या करना होगा? आपको बस एक ही महत्वपूर्ण चीज करनी होगी और वो महत्वपूर्ण चीज ये करनी होगी। राइटिंग की प्रैक्टिस साथ-साथ करना। बाकी तो मैं करा लूंगी। चलो बाय-ब लव यू। टेक केयर। चलो भैया। एक महत्वपूर्ण वीडियो है। हां। यूपीटेट आ गया। यूपीटेट आ गया। हल्ला काटना है। चलो।

54:54 ठीक है ना? बहुत प्रिसाइज़ नोट्स मिलेंगे। बिल्कुल परेशान मत होना इस बात को लेकर। चलिए। कोई डाउट नहीं है ना? चलिए बाय-ब लव यू। टेक केयर। कल देखते हैं।

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