0:00 सुंदर होता है मन सुंदर मम्मी [संगीत]
0:51 इस फ़ की बैटरी को भी अभी जाना था। रमिला को फ़ करना था। पहले इसे चार्ज कर लेती हूं। >> कि राधा क्या? राध्या क्या हो गया? इतनी क्यों डरी हुई हो? हां हां हमने गैस बंद कर दी है। आग भी बुझा दी है। बेटा क्या हुआ? हां रुको एक मिनट रुको। बेटा पानी पी लो। शांत हो जाओ। पानी पी लो। [संगीत] शांत हो जाओ बेटा आज। क्या हो गया बेटा? इतना क्यों डर गई थी?
1:36 वैसे मैं घर पे ठंडी क्यों पड़ गई हो? बताओ। >> हां बेटा। लेकिन तुम्हें क्या? बहुत डर लगता है। इसलिए हमें खाना बनाना नहीं आता। [संगीत] क्या मां हम हम जानते आप बहुत नाराज होंगे आप पे बहुत गुस्सा करेंगी हमने आपको बताने की कोशिश की थी लेकिन अब हम इतनी हिम्मत ही नहीं जुटा पाए मां हमें माफ कर दीजिए हमें कुछ भी बनाना नहीं आता
2:21 लेकिन तुम्हारे घर में तो तुम्हारी दादी, तुम्हारी ताई-दादी वो सब मिठाइयां बनाती है। है ना? उनसे तुमने कभी कुछ नहीं सीखा। और आजकल की लड़कियां तो इंटरनेट पे वीडियो देखकर सब सीख जाती हैं। हां, तुम्हें हक से तो डर लगता है। लेकिन राध्या इतना क्यों डर लगता है? क्या वजह है? [संगीत] आप देखो हम तुम्हारी मां जैसे ही हैं ना। हमें बताओ कि तुम्हें क्यों इतना डर लगता है? तुम हमसे कोई भी बात कर सकती हो। अपना मन हल्का कर सकती हो। बताओ बेटा तुम्हें इतना डर क्यों लगता है आग से? हां।
3:07 >> हमने अपने मम्मी पापा को आग में ही खोया था। [संगीत] हमारे ही याद में लाइटर था। अपनी गैस चलाई थी। उसके बाद ही वो आग का हादसा हुआ था जिसमें हमारे पापा [संगीत] हमने अपने हाथों से वो गैस चलाई थी। अगर हम वो गैस नहीं जलाते तो आज हमारे मम्मी पापा हमारे साथ होते अपने हाथों से
3:55 अपने मम्मी पापा को खो दिया [संगीत] इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं सब नियति है होने को कौन डाल सकता है हां शांत हो जाओ मां- इसीलिए हमें आग से बहुत ज़्यादा डर लगता है। हम अगर आग के पास जाते हैं तो हमारी आत्मा कांप उठती है। वो भयानक मन से हमारी आंखों के सामने आ जाते हैं और हमारे हाथ पैर फूल जाते हैं। यही कारण कि हम आज तक खाना बनाना नहीं सीख पाए। हमें माफ़ कर दीजिए माफ़ के लिए। नहीं बेटा।
4:44 इतना बड़ा हादसा किसी के साथ भी होगा तो मन में डर तो बैठ ही जाएगा ना। चिंता तो हमें इस बात की है कि जब मांजी को पता चलेगा कि उनकी बहू को खाना बनाना नहीं आता तब क्या होगा? उनके लिए तो ये बहुत बड़ी बात है। >> रजनी भाभी। अरे वाह। सास बहू दोनों नीचे। क्या बात है? हम सब घर वालों की चुगली चल रही है क्या? >> नहीं उर्मी आज राधा की पहली रसोई है ना तो हम उसे घर के तौर तरीके समझा रहे थे। ऐसे जमीन पे बैठ के। अरे वो नीचे कौन से बड़े बर्तन कहां रखे हैं वो सब दिखा रहे थे उसे। >> अच्छा। >> हम तो पहली रसोई में क्या बना रही है आपकी
5:30 बहू? [संगीत] >> अरे वाह। सूजी और चावल दोनों बाहर। हलवा बना रही हो या खीर या फिर दोनों? सरप्राइज है। राध्या सरप्राइज दे रही है सबको। हमें भी इंतजार रहेगा इसके सरप्राइज का। हम जाके घर के सभी लोगों को बुला कर लाते हैं। हम भी तो देखें कि हमारी बहू खाना बनाने में कितनी निपुण है। सबको बुला कर लाते हैं। सुजाता ये तीज का शगुन है। लो।
6:18 >> अरे वाह मां जी आपने इतनी सुंदर साड़ी हमारे लिए चुनी है। >> तुम्हारे लिए नहीं है सुजाता। ये राध्या के लिए है। उसकी नईनई शादी हुई है ना। >> तो तीजश का शगुन तो देना ही होगा ना। >> पर मां जी राध्या को शगुन देने की क्या जरूरत है? उसके तो ससुराल वाले पहले से ही इतने अमीर हैं। उन्होंने तो इससे अच्छी साड़ी से भी उसे लाद दिया होगा। राध्या को ये साड़ी देने की जरूरत नहीं है। >> मां आप भी किससे बात कर रही हैं? सुजाता ने राध्या को अपने घर से नहीं बल्कि अपनी जिंदगी से भी विदा कर दिया है। इसे ना तो राध्या से पहले कुछ लेना देना था ना अब। लेकिन मां आप चिंता मत कीजिए। तीज का शगुन राध्या के ससुराल में मैं लेकर जाऊंगा। अब ये मुझे दीजिए। >> क्या? कॉलेज की डिग्री तभी मिलेगी जब किसी कंपनी
7:05 में इंटर्नशिप की हो। यार मैं तो कितनी सारी कंपनियों में अप्लाई कर चुका हूं। पर मेरे मार्क्स देखकर सभी कंपनियां मुझे रिजेक्ट कर देती है। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा। अब तू ही मुझे कोई आईडिया दे। >> अच्छा ठीक है। चल मैं कुछ करता हूं। >> अगर कॉलेज में पढ़ाई अच्छे से की होती ना, तो नंबर भी अच्छे आते और इंटर्नशिप भी अच्छी जगह मिल जाती तुम्हें। इसीलिए कहते थे कि अच्छे से पढ़ा करो। >> जी। राध्या के ससुराल आपके साथ शगुन लेकर हम भी चलेंगे। और सोनू बेटा तू भी ना जल्दी से अच्छे से कपड़े पहन कर तैयार हो जाना। बहन से ससुराल में मिलने तू भी चलेगा हमारे साथ। >> क्या हुआ सुजाता? अब तक तो तुम बहाने बना रही थी। ये अचानक तुम्हारा इरादा कैसे बदल गया?
7:50 >> वो क्या है ना जी? यह तीज का त्यौहार औरतों का होता है। अब अगर राध्या के ससुराल शगुन लेकर आप अकेले जाएंगे तो उसके ससुराल वालों को भी तो अटपटा लगेगा ना। बस इसीलिए हम आपके साथ चल रहे हैं। >> जग्गू वैसे सुजाता ठीक कह रही है। >> और ना शगुन थोड़ा अच्छे से लेकर चलेंगे। कुछ मिठाई-विठाई के डब्बे भी खरीद लेंगे। >> चल खड़ा क्या है? जल्दी से तैयार हो जा। जाओ जाओ। >> अरे दादी मैं वहां क्या करूंगा? मैं नहीं आ रहा। लेकिन अगर तू हमारे साथ चलेगा ना आराध्या के ससुराल तो हम तुझे पूरे 2 हज़ार देंगे। >> अच्छा हम >> मां हमें तो समझ में नहीं आ रहा है कि हम क्या करें? >> अगर मां जी को पता चल गया कि राध्या को
8:36 कुछ भी बनाना नहीं आता तो वो एक पल नहीं रुकेंगी। तुरंत राध्या को घर से बाहर निकाल देंगी। >> तुम अभी ना इस बारे में किसी को कुछ भी मत बताओ। बस जैसा हम कह रहे हैं ना वैसा करती जाओ। ठीक है। [संगीत] तुम अपनी नजर उधर फेर लो। [संगीत] >> मॉम अब आप ये क्या कर रही है? >> आत्या बेटा हम हलवा बना रहे हैं। तुम बस ना अपनी आंख बंद करके कड़ची चला देना और थोड़ी सी शक्कर डाल देना। तुम्हारी रस्म भी हो जाएगी। तुम्हारा हाथ भी लग जाएगा। ठीक है। >> मां लेकिन तो गलत है ना। ये रस्म तो हमारी पहली रसोई की है। आराध्या अभी वक्त ना सही गलत सोचने का नहीं है। बस हम कह रहे हैं
9:23 ना वैसे तुम करती जाओ और तुम्हारा हाथ तो लगवा रहे हैं ना हम। तुम नहीं जानती लेकिन मां जी के लिए ये एक बहुत बड़ी बात है कि उनकी बहू को खाना बनाना नहीं आता। >> मां अगर अगर ऐसी बात है तो हमें दादी को तुरंत जाके सच बता देना चाहिए। आप फिक्र मत कीजिए। हम हम दादी की डांट खा लेंगे। [संगीत] राध्या तुम्हारा सच बोलना ना हमें पसंद है लेकिन इस वक्त अपना सच अपने पास ही रखो और हमें वो दूध का जार दे दो यहां पे। मां >> रजनी रजनी कहां हो तुम? >> भगवान हमें तो मांजी को कुल देवता का प्रसाद देना था। राध्या तुम ना अभी प्लीज किसी से कुछ मत कहना। हम जा रहे हैं और जितना जल्दी हो
10:09 सके ना वापस आएंगे और यह सब खत्म कर देंगे। प्लीज, तब तक किसी से कुछ मत कहना, ठीक है? हमारे ही कारण मां को अपने परिवार से झूठ बोलना पड़ रहा है। पर वो अपनी पहली रसोई किसी झूठ या धोखे से शुरू नहीं करना चाहते। हे भोलेनाथ। पर हम करें भी तो क्या करें? अरे रे रस्म को लेकर इस घर में कोई भी उत्साहित नहीं है। हमारी नई नवेली बहू रसोई में पहली बार कुछ बना रही है। जल्दी से कमरे से बाहर आइए। >> फिर तो नहीं चाची के हाथों से तो मैं ही खाऊंगी। >> अरे अदिति घर चली गई। वरना वो भी अपने भाभी के हाथों का खाना चख लेती। है ना?
10:57 >> उर्मी, मां कहां है? कमरे में होंगी। मैं बुला कर लाती हूं। लीजिए आ गई। >> अच्छा हुआ आप आ गई। ओ क्या है ना बेटा कि बच्चे अगर जिद में आकर गलत फैसला ले ले तो भी बड़े अपना कर्तव्य जरूर निभाते हैं। हम अपने खानदान की रस और अन्नपूर्णा मां का अपमान नहीं कर सकते थे इसलिए आए हैं। >> हम राध्या को देख कर आते हैं। >> क्यों? कोई जरूरत नहीं है। जब एकता इस घर में बहू बन के आई थी तब तो तुम बड़े उत्साह के साथ डाइनिंग टेबल पे बैठ के उसके हाथ के बने भगवान का इंतजार कर रही थी। तो अब क्या हो गया? क्यों जा रही हो? यहीं खड़ी रहो
11:42 चुपचाप। और वैसे भी तुम्हारा क्या भरोसा है? हो सकता है अपनी चहेती बहू की मदद करने जा रही हो। नहीं नहीं हमको भी देखने दो उसके अंदर क्या गुण है। देखे तो सही। हम तो सिर्फ यह देखने जा रहे थे कि कहीं उसे किसी चीज की जरूरत ना हो। >> कोई जरूरत नहीं है। वो खुद देख लेगी। >> और आगे से अब उसे ही सब कुछ संभालना है। इसलिए तुम्हें ममता लुटाने की कोई जरूरत नहीं है। समझी? >> रजनी जी आप यहीं रहिए। वैसे भी गलतफहमी के चक्कर में मां बहुत दुखी है। >> हे भगवान राध्या पता नहीं अंदर क्या कर रही हो। कहीं आज ही उसका सच सामने ना आ
12:28 जाए। वैसे मां जी भी ना पता नहीं कौन से तहखाने में अपना खजाना छुपा कर रखती हैं। आज तक हमें और भाभी को तो कुछ नहीं दिया। लेकिन उस गुब्बारे के लिए इतनी अच्छी साड़ी लेकर के आ गई। ये साड़ी उस बुलडोजर पर नहीं अच्छी लगेगी। ये तो हम पर अच्छी लग रही है। एक काम करते हैं। इसे हम ही रख लेते हैं। बुलडोजर को कोई सादी सिंपल सी साड़ी दे देते हैं। ये ठीक रहेगा।
13:16 बस अब हम जिस मकसद से ये शगुन लेकर जा रहे हैं ना हमारा वो मकसद पूरा हो जाएगा। फिर हमारे सोनू का भविष्य सवर जाएगा। [संगीत] कहां चली गई? हमने तो गौरी दीदी से कहा था कि हमारे सामान के साथ ही रख दे। पता नहीं उन्होंने रखी भी है या नहीं।
14:04 [संगीत] ओ हो आधा घंटा हो गया इंतजार करते-करते कि मीठे के लिए इतना इंतजार करना पड़ रहा है। अगर पूरा खाना बनवाते तो पता नहीं क्या होता। कल तक लेके आती। देखो भाई कहीं रसोई से भाग तो नहीं गई तुम्हारी बहू। क्या भाभी सात सजावट और चार मीठी बातें देखकर ही उसे अपनी बहू बना लिया। कहीं कुछ गुण परखे भी थे कहीं ऐसा ना हो कि हम बैठे ही रह जाए और वो कुछ बना कर ही ना लाए। >> हम देख कर आते हैं शायद उसे किसी चीज की जरूरत हो और वो हिचक रही हो पूछने में। है
14:51 ना? >> एक मिनट। कोई जरूरत नहीं है। हम जाके देखेंगे। जरा देखे तो सही तुम्हारी वो बहू क्या गुल खिला रही है। >> क्या हो रहा है? >> बेटा >> जी पापा। >> प्रथम से तुम्हारी बात हुई। कॉन्फ्रेंस की मीटिंग कैसी रही? >> पापा प्रथम इतने कॉन्फिडेंस से गया है। आई होप सब कुछ ठीक होगा। और वैसे भी आपने मौका दिया है। तो एक बार भरोसा करके देखिए। आई जस्ट होप वो हमारे इस भरोसे को गलत प्रूव ना कर दे क्योंकि अभी तो प्रथम को बिनेस का बी भी नहीं पता है। >> अरे हद हो गई। हद हो गई इंतजार की। आधे घंटे से भी ज्यादा हो गया इंतजार करते हुए। ये मीठा बना रही है। क्या कर रही है?
15:37 हम जाके देखते हैं हो क्या रहा है। [संगीत] माफ़ कीजिएगा। अब आने में थोड़ा समय लग गया। >> कोई बात नहीं बेटा। पहले ये बताओ कि तुमने बनाया क्या है? >> हमने तो हलवा तैयार किया था। तो ये मिठाई कैसे? [संगीत] वाओ सो प्रीटी
16:24 पर बेटा ये बनाया क्या है? हमने तो ऐसी मिठाई कभी नहीं देखी। मामा जी ये दरअसल गुलाबी पेड़े हैं। हमारी मम्मी की रेसिपी है। >> ओ बहुत अच्छी। राधा बेटा बहू की पहली रसोई चखने का पहला हक हमारे घर के मुखिया का होता है। पहले तुम मां को खिलाओ। >> जी
17:10 स्वाद तो बहुत अच्छा है पर तारीफ करेंगे तो पहले ही दिन सर पर चढ़ जाएगी। >> मां जी कैसा बना है? [संगीत] >> ठीक ही है। >> अब मैं खाऊंगी। [संगीत] ये तो बहुत यम्मी है। [संगीत] मम्मी आपकी मिठाई से भी ज्यादा अच्छी है। [संगीत]
18:01 वाकई में ये मिठाई तो बिल्कुल अलग तरह की है। ऐसी मिठाई तो मेरे हलवाई ने आज तक नहीं बनाई थी। राधा बेटा >> जी >> इसकी रेसिपी हमें भी बता देना। किसी खास मौके पर इस मिठाई को ल्च करूंगा मैं। जी पापा जी वैसे बनी तो लाजवाब है। >> खुश रहो खुश रहो खुश रहो >> ये लो मेरी तरफ से भी [संगीत] खुश रहो खुश रहो। >> इतना भी कुछ खास नहीं है। इससे कई बेहतर मिठाइयां हमने पहले भी खाई हैं। बहुत कुछ सीखना है इसे अभी। >> जी दादी। आप जो सिखाएंगी उसे हम दिल से
18:50 सीखेंगे। >> ये तुम्हारा पहली रसोई का नेक। >> तुम्हारे हाथों में मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद है। ये लो [संगीत] मैं तो सब मिठाई खा जाऊंगी।
19:35 >> वैसे तुमने ये बनाया कैसे? तुम्हें तो आग से डर >> ये मिठाई बनाने के लिए ना गैस की जरूरत नहीं पड़ती है। >> क्या? दरअसल वो अच्छा वो हम मम्मी की रेसिपी वाली डायरी ले आए। अब इसमें देखते हैं कोई ऐसी मिठाई है क्या जो बिना गैस के बन जाए। ये ये वाली मिठाई तो बिना गैस के बन सकती है। एक काम करते हैं हम झट से ही मिठाई बना लेते हैं। और और हां इसे ना फूल का सुंदर सा डिजाइन दे देंगे।
20:23 इसमें क्या-क्या लगेगा? [संगीत] मां आपको पता है हमारी मम्मी को ना खाना बनाने का बहुत शौक था। वह बहुत अच्छा खाना बनाती थी और हमारे नाना की भी एक छोटी सी मिठाई की दुकान हुआ करती थी और फिर हमारे पापा और दादू का भी मिठाई का बिजनेस था।
21:09 इसलिए मम्मी को नई-नई मिठाइयां बनाने का बहुत शौक था। भोलेनाथ ने हमें मम्मी की सूरत तो दे दी लेकिन उनके हाथों का हुनर नहीं दिया। पर आज उनकी इस रेसिपी ने ना हमें बचा लिया। मम्मी जब भी कुछ नया बनाती थी तो वो जरूर डायरी में लिखती थी। बेटा भले ही तुमने अपनी मां के साथ कम वक्त बिताया है लेकिन उनकी सूरत के साथ-साथ उनकी सीरत और हाथों का स्वाद भी तुम में आया है। तुमने अपने डर की वजह से कभी खाना बनाने की कोशिश ही नहीं की। वरना तुम भी मां अन्नपूर्णा का साक्षात रूप हो। बेटा अपनी इस कला को उभारने के लिए ना तुम्हें अपने इस डर को बाहर निकालना होगा। आज ना तुमने हमें फिर से यकीन दिला दिया कि हमारे प्रथम के लिए और हमारे इस परिवार के लिए तुम ही सबसे सही बहू हो।
21:59 [संगीत] >> तुम्हारे तीज का सामान आया है। तो दिखाओ तो सही। ऐसी साड़ी तो हम अपने माली की बीवी को भी नहीं देते। बेचारे मायके वालों ने तो वही दिया ना जो उनकी हैसियत है। ये साड़ी ना तुम जब मायके जाओगी उस वक्त पहन लेना। यहां मत पहनना नहीं तो तुम्हें सब लोग नौकर समझेंगे।