0:00 यह जो लोग प्रश्न करते हैं कि मैं अपने परिवार का पोषण करता हूं, धन कमाता हूं, बेटी बेटा पढ़ाता लिखाता हूं, इनके ब्याह करता हूं, भजन नहीं करता हूं तो कोई पाप भी नहीं करता तो मुझे नरक क्यों मिलेगा? ध्यान से सुनिए। चाहे वो चार वर्णों में किसी वर्ण वाला हो, चार आश्रमों में किसी आश्रम वाला हो। वर्ण और आश्रम में रहने वाले हर व्यक्ति का कर्तव्य है भजन करना। भेजे ही गए हो भजन करने के लिए। ये मानव देह भोगों के लिए नहीं। यथावत धर्म पूर्वक भोग को भोगते हुए भजन करते हुए भगवत प्राप्ति करने के लिए इस तन का एक ही फल है भजन नर्तन कर फल विषय न भाई भज राम सब काम बिहाई जो मनुष्य मानव देह प्राप्त करके भजन नहीं करता उसको इस बात का दंड मिलता है वो अपने वर्ण
0:48 आश्रम से भ्रष्ट होकर नीच योनियों में जाता है और बहुत कष्ट पाता है क्यों क्योंकि एक ही योनि है जिससे हम निकल पाएंगे 84 8 लाख योनियों में लोगों की मान्यता है। हमारी कामना भगवान तो पूर्ण नहीं करते हैं। कहां भगवान कैसा भगवान? कौन भगवान? बाप को बाप नहीं मानोगे तो बाप का कुछ बिगड़ जाएगा क्या? सम मम समम उपजाए। कैसे लोग अज्ञान में भटक रहे हैं। तुम करो पापाचरण तुम्हारी बात सुनेंगे। अच्छा यही सोचो। यदि आप धर्म मार्ग में चलोगे तो उज्जवल भविष्य वाले। आप अध्यात्म बल से बलवान। आप परमानंद की प्राप्ति करने वाले। आप विपरीत मार्ग में धर्म विरुद्ध चलोगे तो आपको रोग, शोक, दंड, चिंता, भय, शोक, नर्क, मृत्यु यह सब प्राप्त होंगे। भगवान ने निर्णय कर दिया। अगर अब आप साबित हो चुके हो महापापी हो और आप राष्ट्रपति
1:35 को प्रार्थना करें कि मेरी फांसी टाल दी जाए और उनकी मौज हो जाए तो न्यायाधीश के द्वारा पास किया हुआ आपका फांसी का मृत्युदंड भी टाल दिया जाएगा। ऐसे ही भगवान कह रहे हैं सर्वधर्मान परित्यज रास्ता बता रहे हैं मामेकम शरणम ब्रज अहम तम सर्व पापे मोक्ष्या मासा हे भगवान ये पूर्ण कर दो क्या किया तुमने भगवान के लिए भगवान ने तुम्हें मानव देह दिया भगवान ने प्रकृति दी भगवान ने सब कुछ व्यवस्था की तुम केवल पापचरण करो भगवान तुम्हारी नौकरी करे तुम भगवान के अंश हो भगवान ने तुम्हें देह दिया भगवान ने प्रकृति दिया तुम भगवान के लिए क्या कर रहे हो तुम हमारी समाज के लिए जो भगवान ने रचा है उसके लिए क्या कर रहे हो अपनी वासनाओं की पूर्ति तो दंड नहीं भोगोगे और क्या भोगोगे तुम्हारे गाली देने से भगवान कोई छोटे हो जाएंगे तुम्हारे थूकने से आकाश गंदा हो जाएगा। तुम कर सकते हो तो सिर्फ अपना बुरा कर सकते हो और कुछ नहीं कर सकते। लिख लो हमारी बात। अगर कुछ भी मंगल हो रहा है तो
2:21 भगवान के बनाए विधान से मंगल हो रहा है। संत समागम हरि कथा, नाम जप, भगवत आराधना ये उनकी कृपा से हो रहा है। तुम कर सकते हो तो शब्द लिख लो। केवल अपना बुरा कर सकते हो। वही बुरा कर रहा है। भगवान को गाली दे रहा है। भगवान को नहीं मान रहा। नास्तिकता बढ़ रही। मनमानी भगवान ने मेरा कर्जा नहीं। कर्जा लेते समय भगवान से पूछा था। कर्जा लेते समय भगवान से विनय की थी। धर्म से चला है तू। भगवान की आज्ञा का पालन कर रहा है तू। अरे भगवान तो सबके पिता हैं। परम उदार है। गाली देने वाले को भी प्रकृति से नहीं रोकते। इसको स्वास मत लेने देना। ये मुझे गाली देता है। नहीं अच्छी ऑक्सीजन देते हैं। पानी देते हैं। भोजन देते हैं। उसके लिए पृथ्वी फट नहीं जाती है। उसको भी पृथ्वी अपनी गोद में रखती है। जो भगवान को गाली कैसे नीच बुद्धि वाले अपना काम बनाने के लिए आए हो और अपना काम बिगाड़ रहे हो। जिनसे काम बन रहा है उन्हीं में नास्तिकता कर रहे हो।
3:07 कौन है आधार यहां इस जगत का? वही सर्धार परमात्मा। तुम अंधे हो दिखाई नहीं दे रहा। यह सूर्य किसके बल से तेजवान है? यह वायु किसके बल से चलती है? किसके बल से पृथ्वी आप देखो किसके आदेश से हो रहा है। एक जरा सा झटका आता है प्रांत का प्रांत चकनाचूर हो जाते हैं। वो सामर्थशाली भगवान है। तुम्हारे कुछ कहने से होगा चींटी की तरह पिस जाओगे। उसकी शक्तियां अनंत है होश में। अगर जीवन को मंगलमय सार्थक बनाना है तो एकमात्र भगवान की शरण है। और अगर कुछ भी और करोगे तो अपने को बर्बाद करोगे। सिर्फ बर्बाद करोगे। सिर्फ विनाश करोगे अपना और कुछ मंगल नहीं कर सकते। भगवान का आश्रय ले लो। वो बहुत करुणामय है। ये जो पुरुष चारों वर्ण या चारों आश्रम में यदि भजन नहीं करते तो इस बात का दंड मिलेगा कि मानो देह तुम्हें मिला है भगवत प्राप्ति
3:52 के लिए। देखो बोले भला पिता अपना बालक का अहित चाहता है। हां चाहता है। एक पिता के पुत्र ने किसी नाबालिक का बलात्कार करके उसको मार डाला। उससे वो समाचार वाला पूछता है कि आप अपने ऐसे पुत्र के लिए क्या बोलेंगे? तो बोले यही बोलूंगा कि जल्दी से गिरफ्तार किया जाए और उसको फांसी की सजा दी जाए। मेरे बालक ने ऐसा अपवित्र कार्य किया। मैं कभी देखना नहीं चाहूंगा कि वो मेरे सामने आवे उसको जल्दी से जल्दी पकड़ा जाए। ये जब एक साधारण पिता ऐसा बोल सकता है तो असाधारण पिता जो धर्म के विरुद्ध चलेगा तकर काल रूपमय भ्राता वो भगवान साक्षात धर्म स्वरूप है। कोई धर्मात्मा पिता नहीं चाहेगा कि उसका पिता अपवित्र कार्य करे और उसे गले से लगाए। फिर भी मेरे भगवान कह रहे हैं अहम तो सर्व पाप मोक्ष मा दुराचारो भजते मा अनन्य भाग महा
4:40 दुराचारी भी हो तो आ ये कह के कि प्रभु मैं आपका हूं आपके सिवा कोई मुझे नहीं बचा सकता तो मैं तुम्हें साधु समंत समिता मैं तुम्हें साधु बनाऊं फिर भी भगवान को कैसे शब्दों से बोल दे कोई भगवान नहीं मन मानी आचरण करूं पता चल जाएगा भगवान है कि नहीं अंतिम समय तक तो पता चल जाएगा एक डॉक्टर बोले थे हमसे जब गंगा किनारे भ्रमण करते थे बहुत अमेरिका से पढ़ के आए थे मार विज्ञान छांटते चले जाए कौन भगवान कैसा भगवान क्या अब गंगा किनारे तो एक अलग रहनी थी उदासीन ना बोलना किसी से उनसे कहा नहीं ऐसा अपमान मत करो भगवान अब कैसे हम तुम्हें छाती चीर के दिखावे कि हैं हम ऐसे जी रहे हैं ये साधु महात्मा ऐसे जी रहे हैं केवल हवा में जी रहे हैं नर्क स्वर्ग की चाल है लेकिन छाती से कहता हूं हृदय से कहता हूं त्रुटि
5:26 हमारी करुणा उनकी अगर कहीं भी कहीं भी हमें कुछ भी असंतोष हुआ है तो मेरे आचरण का मेरे विचार का मेरी क्रियाओं का हुआ है और उनकी कृपा का वार पार नहीं अपार करुणा वरुणालय और मिलना तुम बहुत दूर हो हमसे तुम दूर हो लेकिन मेरे प्रिया प्रीतम मेरे से दूर नहीं अब वो कोई ऐसी दूरबीन नहीं कि मैं तुम्हें दिखा सकूं कि देखो ये हम कोई प्रमाण तुमसे नमस्कार नहीं चाहने के लिए कह रहे हैं ये इसलिए कह रहे कि प्रभु कितना प्यार करते तुम्हें कैसे बताऊं हजारों प्राण हो तो न्योछावर कर दे ऐसा प्यार करते हो ऐसे नहीं स्वप्न में आकर प्यार करते हो भाव में आकर प्यार करते जैसी भावना करोगे वैसे तुम्हें अनुभव कराएंगे वो है प्रत्येक कण में है प्रत्येक क्षण में वो मेरे साथ है ऐसा बिल्कुल माइक से कह रहा हूं आचार्य बल से गुरु बल से कि विश्वास करो वो केवल ध्यान
6:12 का विषय नहीं है वो केवल भजन का विषय नहीं है वो मित्र की तरह मिलते हैं वो संभाषण करते हैं वो साथ खेलते हैं पर यह बात वही देख सकता है जो उन तक पहुंच चुका है जो उनके चिंतन में तन्मय है अन्यथा यह मायाकृत नेत्रों से बात नहीं देखी जा सकती इसलिए उसका उसका पतन निश्चित है जो मनुष्य शरीर पाकर के भजन नहीं करता है। भगवान ने केवल भजन के लिए दिया है। दुता परकाय स्वात्म हरिश्वरम मृतानु बनेहा भाई शरीर का अभिमान मत करो ये मरा ही मरा अभी मरा या कल मरा मरा ही है पक्का मृत्यु प्रतिपल साथ है। यह शरीर मृत शरीर समझो कब छूट जाए कुछ पता नहीं। इसके संबंधी भी छूट
6:59 जाएंगे। इस शरीर से प्रेमगाठ करने का मतलब है नरक यात्रा तय करना। इसलिए इससे ज्यादा प्यार मत करो। इसे खूब कई बार हमने प्रार्थना की साधकों से। इस शरीर को ऐसा समझो जैसे कंजूस मालिक बेईमान नौकर से काम लेता है। इसे लो इसे। इसको छूट दे दी तो ये पूरी की पूरी जिंदगी बर्बाद कर दे। इसे बेईमान जैसे नौकर ना हो। ईमानदार नौकर अपने आप काम करता है। यह अपने आप नहीं करेगा। बेईमान नौकर जो आराम करना चाहता लगाओ काम में। चार घंटे 100 24 घंटे में 20 घंटे इसको सांसारिक काम साधना के काम भजन कार्य आनंद समेट लो। यहां कमाने आए हो यहां कोई तुम्हारा घर नहीं कोई मकान नहीं, कोई दोस्त नहीं, कोई परिवार नहीं। ये परदेश है स्टेशन जैसा। तुम्हारी टिकट कटी भागे पूछोगे भी नहीं। हे पत्नी तुम कैसे रहोगे? हे बच्चों तुम कैसे रहोगे? नहीं
7:44 चले गए। दोबारा कभी देखने को नहीं मिलेगा। ना तुमको वो ना वो तुम्हें कभी नहीं मिलेगा। यह ऐसा माया का जादू का खेल सत्ता ही खत्म हो जाती है। इसलिए हे भाई इस शरीर में रहने वाले अपने स्वरूप को जान लो और किसी से भी द्रोह मत करो। वो मूर्ख है जो इस अपने शरीर को तो अमर मानते हैं और दूसरे शरीरों को मार कर खाते हैं। मांस देख लो ये ऋषि मुनियों की वाणी है। आत्म स्वरूप को पहचान लो। वही आत्मा चींटी में वही सर्वत्र भगवान है। वो मूर्ख है जो अपने शरीर को आत्मा मानकर पोषण करते हैं। दूसरे शरीरों की हत्या करके उनका मांस खाते हैं। बोले हम हत्या नहीं करते। हम तो दुकान से ले आते हैं। तो बराबर फल मिलता है। कर्ता प्रेरक अनुमोदन तीनों को बराबर पाप मिलता है। एक जो काट रहा है, एक जो खरीद के ला रहा है और एक जो बनाकर पका
8:31 करके खा रहा है, खवा रहा है। तीनों को नरक बराबर दंड मिलेगा। कर्ता प्रेरक अनुमोदन ये कैवल्य संप्राता त्रवर्गिका रक्षणिका आत्म घातते जो लोग ये भगवत प्रदत शरीर प्राप्त करके कैवल्य परम पद प्राप्त नहीं कर लेते और ज्ञान बगाड़ते रहते हैं वो पूरे ज्ञानी भी नहीं है और पूरे मूर्ख भी नहीं है उनकी बड़ी दुर्दशा होती है ना इधर के रहते हैं ना उधर के रहते मजरे ढो सदैव वो अर्थ काम वासना इनहीं में फंसे रहते हैं। एक क्षण के लिए उनको चैन शांति नहीं मिलती। जो मनुष्य शरीर पाकर अपना उद्धार नहीं कर लेता वो अपने पैरों में
9:18 मानो अपने हाथ से कुल्हाड़ी मारकर काट रहा है। वो आत्मघाती है दुर्गति को प्राप्त होता है। एत आत्मनो अशाता अज्ञाने ज्ञान मान सी कृत कृत्याव काल धस्त मनोरथा ऐसे जो ज्ञान बगाड़ते रहते हैं और ब्रह्म बोध नहीं किया निरंतर भजन नहीं करते इनको आत्मघाती कहते हैं। जानते हैं पर मानते नहीं है। इन आत्मघातियों को कभी शांति प्राप्त नहीं होती। इनकी कर्म परंपरा कभी नष्ट नहीं होती। काल भगवान सदा सर्वदा इनके मनोरथों पर पानी फेरते रहते। हृदय की जलन विषाद कभी मिटने को नहीं होती। इसलिए रचिता गहा
10:03 तमोच्छो वासुदेव पर मुख वासुदेव भगवान श्री कृष्ण के चरणों का आश्रय ले लो उनसे विमुख मत हो विमुख होकर यदि तुमने धन रुपया पैसा मकान सब समेट भी लिया तो भाई जब जाओगे कुछ साथ नहीं एक बार कृष्ण कहा एक बार राम कहा एक बार राधा कहा ये सत्य वस्तु तुम्हारे साथ जाएगी इसलिए बार-बार राम राम कृष्ण कृष्ण हरी हरी राधा राधा बोलते हुए अपना काम करो तो तुम्हारा लौकिक भी पुष्ट और पारलौकिक भी पुष्ट हो जाएगा। जो भगवन नाम जप नहीं करता भगवान से विमुख है ना चाहने पर भी विवश होकर उसे घोर नरक में जाना पड़ता है। इसलिए सद्गति प्राप्त करने के लिए नाम जप अत्यंत आवश्यक है।
10:48 ये कलिकाल की बड़ी महिमा वर्णन की भगवान व्यास जी ने। जो फल सतयुग में द हजार वर्ष ब्रह्मचर्य रहकर दोनों हाथ उठाकर दाहिने पैर के अंगूठे के बल खड़े होकर भजन करने से मिलता था। ध्यान दीजिए कितना कलयुग का कृपा प्रसाद है। कलयुग को बहुत बुरा कहा जाता है। तो यह बात पक्का समझो दो पक्ष सब में होते हैं। कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। एक अंधेरे का पक्ष एक प्रकाश का। तो कलयुग में दो पक्ष है। एक अंधेरे का पक्ष अगर भगवान से विमुख हो तो नष्ट कर देगा। यहां कह रहे हैं भगवान महर्षि वेदव्यास देव जी यते दसभर वर्षतायाने तपरे तस मासे
11:35 तल तपस ब्रह्मचर्यस जपा फलमजा प्राप्त पुरुष कल साध्य भाषितम सतयुग में द हजार वर्ष ब्रह्मचर्य से रहकर दाहिने पैर के बल अंगूठे के खड़े होकर दोनों हाथ उठाकर मंत्र जपने से जो फल मिलता था वह त्रेता में एक वर्ष ऐसी साधना द्वापर में एक मास एक महीने और कलयुग में 24 घंटे नाम कीर्तन करने से वह फल प्राप्त हो जाता है। सतयुग में द हजार वर्ष तक सोचो कितना बड़ा कलयुग जैसा कलयुग समझ आ नहीं जो मन कर
12:20 विश्वास जो नर कर विश्वास बहुत बड़ा लाभ कलयुग 24 घंटे नाम कीर्तन से फल मिलेगा जो बड़ी-बड़ी तपस्याओं से बड़ी-बड़ी साधनाओं से बोले सतयुग बहुत श्रेष्ठ है। द्वापर त्रेता बहुत श्रेष्ठ है। हमें लगता है कलयुग बहुत श्रेष्ठ है। धन्य है कलयुग जो 24 घंटे नाम कीर्तन से वो हजारों वर्ष की तपस्या का फल प्राप्त करा दे। भगवान व्यास देव जी कहते हैं मैं कलयुग की पूजा करता हूं। में उसे सर्वश्रेष्ठ कहा कि सतयुग में ध्यान त्रेता में यज्ञ द्वापर में देवार्चन ध्यान कृते यज यज्ञ त्रेताया द्वापरे चयन यदा तदापनोति कल संकीर्त केशवम जो सतयुग में ध्यान से त्रेता में यज्ञ से द्वापर में पूजा करने से मिलता था कलयुग
13:06 में केवल नाम कीर्तन से फल मिल जाता है इसीलिए नाम संकीर्तनम यस सर्व पाप प्रणाशनम कलयुग में सबसे बड़ी साधना नाम जप करो नाम कीर्तन करो लीला चरित्र गाओ लीला चरित्र सुनो जो इस कलयुग में अपना कल्याण नहीं कर पाया तो फिर और युग में कल्याण करना बड़ा कठिन ए अंगूठे के बल खड़े होकर देखो कई मिनट खड़े रहोगे ऐसे उपमन्यु आदि बड़े-बड़े महात्माओं के चरित्र आते हैं हजार वर्ष दस हजार वर्ष ऐसे अरे यही सोभरी ऋषि यमुना में डुबकी लगा के भजन करके देखो कई मिनट करोगे जल को स्तंभित कर दिया समाधि ऐसे ऐसे महात्मा अपने लोग महात्मा कहते हैं अपने को हे डुबकी लगा के दो मिनट नहीं रुक सकते नीचे वो समाधिस्थ है मछली को देख
13:54 के 50 ब्याह करते हो तुम मोबाइल में देख के क्या करोगे तुम्हारे क्या होगा इसीलिए बहुत होश में कलयुग में बहुत मानता है भगवत प्राप्ति की बहुत सुविधा है भगवत प्राप्ति के होश में हो जाओ तो पर ये होश रहने नहीं देता ये किसके होश उड़ाता है इसका प्रवेश कहां है बता चुके कई बार मदिरा पान करने वाले वाला मांस खाने वाला पराई स्त्री से व्यभचार करने वाला और स्वर्ण चोरी करने वाला जुआ खेलने वाला छल झूठ कपट रजोगुण ये सब इसके स्थान है नाम जप करो पवित्र भगवत प्रसाद पाओ कहां कलयुग है आनंद ही आनंद बोलो यहां कितनी देर कलयुग लगा तुम्हारे ऊपर आनंद ही आनंद है कलयुग समझु आन नहीं जो नर कर विश्वास गाय राम गुण गन विमल भवि बिन तरह प्रयास इतना
14:40 कलयुग केवल नाम आधारा कोई बात और हो ना हो राधा राधा राधा पार हो गए सुखस्यांतम दुखम दुखसंतम सुखम पर्याय प्रसते नरम नेम मरा भाई जैसे रात के बाद दिन आता है दिन के बाद रात आती है ऐसे तुम सुख में हो तो दुख आने वाला है तैयार हो जाओ और दुख में हो तो सुख आने वाला है सुखम शंतरम दुखम दुख शंतम सुखम भगवान व्यास देव जी कह रहे हैं ये पक्का तुम्हारे पूरे जीवन क्रम लगा रहेगा क्योंकि तुम्हारा प्रारब्ध रच चुका है। सुख के बाद दुख दुख के बाद सुख ऐसा चलेगा। यह चक्र की तरह चलता रहता है। इसलिए तुम सुख में भूलो नहीं और दुख में प्रभु को भूलो नहीं। नाम जप निरंतर करो तो सुख दुख से परे हो जाओगे।
15:27 जातस मृत्यु तथान संयोगा संजना [संगीत] बुधाम हर्ष तेरे चेता संता हे भाई मेरी बात सत्य मान लीजिए जातस नियतो मृत्यु तुम्हारा शरीर जन्म लिया है ना मरेगा पक्का कल एकांतिक में एक भाई से पूछा सब प्रश्न कर रहे थे भाई तुम्हें कभी आता है कि मरोगे बोले नहीं हमारा सत्संग सुनना रोज मिलेगा ये आपको सत्संग में एक बार तो रोज आएगा कि तुम मरोगे नहीं आएगा रोज आता है आपका तो अभ्यास बन गया होगा सुनने का कि मरने वाली बात तो रोज आती है यही हमको
16:13 संभालेगी क्योंकि जाना है जो संभलते नहीं है वो लड़खड़ा के गिर जाते हैं रोज संभलना है मरना है जातसतो मृत्यु पतनम च तथोते अगर शरीर जन्मा है तो मरेगा आज नहीं तो कल तैयार हो जाओ जाना है, जाना है। कब जाना है पता नहीं है। फांसी वाले को तो समय बता दिया जाता है कि कल 12:00 बजे होगी। अपने को अपना यह भी समय नहीं पता है। पता नहीं कब जाना है। उसे पता हो जाए तो अच्छा रहता है। सब डर जाते कि इतना रह गया। बर्थडे कोई तो मनाता नहीं। शोक डे जरूर मनाता लेकिन अब पता नहीं इसलिए बर्थडे मना रहे हैं। वैसे तो नहीं मनाना है। नहीं मनाना है। मनाना है गुरु प्रदत्त जन्मदिन। जिस दिन से दीक्षा हुई वही दिन हमारा सार्थक है। और यदि मनाना है तो नाम कीर्तन करके मनाना है। बर्थडे कैसे मनाया जाए? जानते
16:59 हो? प्रिया प्रीतम को विराजमान करो, श्रृंगार करो, व्याहुला करो और रात भर कीर्तन करो और खूब सबको पकवान पओ, जय जयकार लगाओ। हम कह रहे रोज बर्थडे मनाओ। बहुत बढ़िया है भैया। इस तरह का बर्थडे इस तरह का बर्थडे खोल रहे हैं शराब। गंदी गंदे सब खानपान और नाच रहे हैं और यह कोई बर्थडे समय नष्ट कर रहे एक इतना कीमती राधा राधा राधा इतना कीमती समय आप कैसे नष्ट करो बहुत लोभ लगता है इतना कीमती एक स्वास खरीद नहीं सकते 50 वर्ष की कमाई में 50 वर्ष की कमाई की जो स्वासे तुमने व्यर्थ की सब स्वासों के द्वारा जो आपने धन एकत्रित किया एक स्वास नहीं खरीद सकते ऐसा कीमती श्वास राधा राधा कह रहे हैं नित्य ये ध्यान रखो कि शरीर जन्माए तो मरेगा कुछ अच्छा अच्छा नहीं लगेगा ये बात
17:44 ध्यान रखने पर नहीं लगता अच्छा कुछ अच्छा नहीं लगता बस यही लगता है कि एकांत हो जाए कितना भजन कर ले बस यही सार्थक है जीवन की सार्थकता नाम जप कर लूं मरना है कोई साथ नहीं जाने वाला और आपको अनुभव की बात बता रहे सब अपने लिए तुमसे प्यार करते हैं तुम्हारे लिए कोई प्यार नहीं करते किसी ने हमसे कहा कि आपको तो बहुत लोग प्यार करते हैं हम कहा आपकी नजर में हमारी नजर में नहीं वो कहा क्यों आपको ऐसा क्यों नहीं लगता हम कहा हमें इसलिए नहीं लगता कि सब अपने लिए हमें प्यार करते करते हैं। हमारे लिए तो प्रिया जो प्यार करती है। सिर्फ प्रिया जो वो हमारे लिए प्यार करती है। सब अपने लिए हमारे लिए नहीं हमारे लिए तो प्यार करते तो पहले भी प्यार होता ना नहीं हुआ। हमारे लिए तो प्रिया जो पहले भी प्यार करती अब भी प्यार करती है और वो करती ही रहेंग क्योंकि उनका स्वभाव है ऐसा
18:32 संसार का प्यार भगवत समर्पण करने के लिए हमें मिल रहा है। आपका प्यार लिया प्रियाजू के चरणों में समर्पित हमारे लिए नहीं हमारी प्रियाजु के लिए हमारे लिए प्यार सिर्फ हमारी प्रियाजु का है। आप प्यार करते हैं प्रियाजु के लिए। आप प्यार करते हैं। उस प्यार को प्रियाजु के चरणों में हम चढ़ाते हैं। वो प्यार मेरे लिए नहीं वो प्रियाजु के लिए जिससे आपको प्रियाजु कृपा करके प्यार करें। आपका दुख नाश करके परम सुख प्रदान करें। तो हे भाई जिसका जन्म हुआ उसकी मृत्यु निश्चित है और जिसकी आज उन्नति है कल उसकी मृत्यु उसका विनाश उसका पतन यही खेल है मृत्यु लोक का ये बात परसों सत्संग में कही थी। पहले ये नहीं था और बाद में भी ये नहीं रहेगा। हे अर्जुन
19:18 ये बीच में दिखाई दे रहा है इसलिए इस पर विश्वास नहीं कभी भी उन्नति को उन्नति रूप में स्थाई कहीं नहीं पाया गया वो अवनति में आई कभी भी अवनति सदैव अवनति नहीं बनी रहती वो उन्नति को प्राप्त होती चक्र चल रहा है इसलिए अभिमान मत करो फूलो मत निरंतर भजन पर रहो मोह या कृत्वा पुन समन्यते मना समाध संयुक्तो नसा सेवते दुष्कम ये जो मोह व अपने शरीर को अविनाशी मान के पापाचरण करते हैं। यह सच्चे हृदय से प्रायश्चित कर ले नहीं तो नष्ट हो जाएंगे। हर पाप बम की तरह जमा हो रहा है। तुम्हारा जब फूटेगा ना बिल्कुल नष्ट कर देगा। किसी काम का नहीं रखेगा। जो जो तुम जान रहे हो कि पाप हो रहे हैं इनका फटाफट प्रायश्चित
20:04 कर लो। पाठ के द्वारा भजन के द्वारा संत