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संक्षिप्त सारांश

यह लेख यूपीएसएसएससी पीईटी परीक्षा के लिए भारतीय इतिहास के पाठ्यक्रम का विस्तृत सारांश प्रस्तुत करता है। इसमें सिंधु घाटी सभ्यता, वैदिक संस्कृति, बौद्ध धर्म, जैन धर्म, मौर्य वंश, गुप्त वंश, राजपूत काल, दिल्ली सल्तनत, मुगल साम्राज्य, मराठा साम्राज्य और 1857 की क्रांति जैसे विषयों को शामिल किया गया है। प्रत्येक विषय को गहराई से समझाया गया है, जिसमें महत्वपूर्ण तथ्य, तिथियां, शासक और घटनाएं शामिल हैं।

  • सिंधु घाटी सभ्यता
  • वैदिक संस्कृति
  • मौर्य वंश: सम्राट अशोक
  • गुप्त वंश: समुद्र गुप्त, चन्द्र गुप्त द्वितीय
  • 1857 की क्रांति

कक्षा के बारे में परिचय

यह इतिहास की मैराथन क्लास है, जो यूपी ट्रिपल एससी पीईटी परीक्षा के लिए आयोजित की जा रही है। इस परीक्षा में इतिहास कुल 10 अंकों का होता है, जिसे दो भागों में विभाजित किया गया है: भारतीय इतिहास (5 अंक) और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (5 अंक)। इस मैराथन क्लास में भारतीय इतिहास के 5 अंकों को कवर किया जाएगा। पीडीएफ रोजगार विद अंकित ऐप पर उपलब्ध होगी।

यूपीएसएसएससी पीईटी में भारतीय इतिहास का पाठ्यक्रम

भारतीय इतिहास के पाठ्यक्रम में सिंधु घाटी सभ्यता, वैदिक संस्कृति, बौद्ध धर्म, जैन धर्म, मौर्य वंश (सम्राट अशोक), गुप्त वंश (समुद्र गुप्त, चन्द्र गुप्त द्वितीय), हर्षवर्धन, राजपूत काल, दिल्ली सल्तनत, मुगल साम्राज्य, मराठा साम्राज्य, ब्रिटिश राज का उदय और 1857 की क्रांति शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, ब्रिटिश राज का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी पाठ्यक्रम का हिस्सा है।

बौद्ध धर्म: गौतम बुद्ध (जीवनी एवं शिक्षायें)

बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध थे, जिनकी मानव प्रतिमा पूरी पृथ्वी पर पूजी गई। उन्हें शाक्य सिंह, साक्य मुनि, तथागत और एशिया का प्रकाश पुंज (The Light of Asia) जैसे नामों से भी जाना जाता है। उनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था, और उनकी माता महामाया कोली गणराज्य से थीं। उनके पिता शुद्धोधन शाक्य वंश से थे। उनका जन्म लुंबिनी वन में साल वृक्ष के नीचे हुआ था। जन्म के सात दिन बाद उनकी माता का देहांत हो गया, और उनका लालन-पालन मौसी प्रजापति गौतमी ने किया। 16 वर्ष की उम्र में उनका विवाह यशोधरा से हुआ, और 12 वर्षों बाद उनके पुत्र राहुल का जन्म हुआ। 29 वर्ष की अवस्था में उन्होंने गृह त्याग कर दिया, जिसका प्रतीक घोड़ा है। बौद्ध धर्म की भाषा पाली है।

राजकुमार सिद्धार्थ ने चन्ना के साथ राज्य भ्रमण के दौरान बूढ़ा आदमी, बीमार व्यक्ति, मृत व्यक्ति और सन्यासी को देखा। 29 वर्ष की अवस्था में गृह त्याग करने की घटना को महाभिनिष्क्रमण कहा गया, जिसका प्रतीक घोड़ा है। उनका जन्म, ज्ञान और मृत्यु पूर्णिमा के दिन हुई थी। गृह त्याग के बाद वे उरुवेला (गया, बिहार) पहुंचे और संप्रति ग्राम में तपस्या पर बैठ गए। 6 वर्ष की तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में पीपल वृक्ष के नीचे निरंजना नदी के किनारे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ।

गौतम बुद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ (ऋषि पत्तन) में दिया, जिसे धर्म चक्र परिवर्तन कहा गया। उन्होंने अपना अंतिम उपदेश श्रावस्ती में दिया, जहाँ उन्होंने सबसे अधिक उपदेश भी दिए। सर्वाधिक वर्षावास वैशाली में बिताया। सारनाथ में उन्होंने पांच ब्राह्मणों को उपदेश दिया। बौद्ध धर्म में पूजा स्थल को स्तूप कहा जाता है। उनके गुरु बृहस्पति थे, जिनसे उन्होंने वैदिक शिक्षा ली। उन्होंने सांख्य दर्शन की शिक्षा आलर कलाम से और योग दर्शन की शिक्षा रुद्र पुत्रम से ली। उनकी मृत्यु कुशीनगर में हुई थी।

बौद्ध धर्म के त्रिरत्न हैं: बौद्ध, धम्म और संघ। त्रिपिटक (सुत पिटक, अभिधम्म पिटक, विनय पिटक) बौद्ध धर्म के ज्ञान के लिए पुस्तकें हैं। सुत पिटक का संकलन आनंद ने किया, अभिधम्म पिटक का मोगली पुत्र ने और विनय पिटक का उपाली ने किया। सुत पिटक को बौद्ध धर्म का एनसाइक्लोपीडिया कहा जाता है। चौथी संगति के बाद बौद्ध धर्म दो शाखाओं में बंट गया: महायान और हीनयान। महायान के संस्थापक वसुमित्र थे, और हीनयान के महाकश्यप। वसुमित्र ने विभाषा शास्त्र लिखा, जिसे बौद्ध धर्म का विश्वकोष कहा जाता है। अश्वघोष को भारत का वाल्टेयर और भारत का पहला कवि कहा जाता है। उन्होंने सौदरा ब्रज सूची लिखी।

गौतम बुद्ध ने अष्टांगिक मार्ग दिया, जिसमें सम्यक अवलोकन, सम्यक आजीविका, सम्यक निर्धारण, सम्यक प्रयास, सम्यक भाषण, सम्यक जागरूकता, सम्यक अमल और सम्यक चिंता शामिल हैं। बौद्ध धर्म में 10 शील हैं, जिनमें अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना) और अपरिग्रह (धन संचय न करना) प्रमुख हैं। सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म का सबसे अधिक प्रचार किया।

जैन धर्म : महावीर (जीवनी एवं शिक्षायें)

जैन धर्म बौद्ध धर्म से पुराना है। इसके संस्थापक ऋषभदेव थे, लेकिन वास्तविक संस्थापक महावीर स्वामी को माना जाता है। जैन धर्म में कुल 24 तीर्थंकर हुए हैं, जिनके बारे में कल्प सूत्र पुस्तक में जानकारी मिलती है, जिसे भद्रबाहु ने लिखा था। ऋषभदेव का प्रतीक वृषभ (बैल) है, अजीतनाथ का हाथी और संभव थ का घोड़ा है। 22वें तीर्थंकर अरिष्ट नेमी थे, जिनका प्रतीक शंख था और उन्हें भगवान श्री कृष्ण का चचेरा भाई माना जाता है। 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ थे, जिन्होंने चार शिक्षाएं दीं: अहिंसा, सत्य, अस्तेय और अपरिग्रह। 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी थे, जिनका प्रतीक सिंह (शेर) था।

महावीर स्वामी का जन्म 599 ईसा पूर्व में वैशाली कुंड ग्राम में हुआ था। उनके पिता सिद्धार्थ थे, जो ज्ञत्र कुल से थे, और माता त्रिशला लिच्छवी नरेश चेटक की बहन थीं। उनके भाई नंदी वर्धन थे, और पत्नी यशोदा थीं। उनके बचपन का नाम वर्धमान था, और पुत्री अनुजा प्रियदर्शनी थीं। उनके दामाद जमाली उनके पहले शिष्य थे। उन्होंने 12 वर्ष तक तपस्या की, और रिजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ।

ज्ञान प्राप्ति के बाद उन्हें निर्ग्रंथ, जिन और केवलिन कहा गया। निर्ग्रंथ का अर्थ है बंधनों से मुक्त, जिन का अर्थ है खुद को जीतने वाला, और केवलिन का अर्थ है आत्मा और शरीर के बीच का अंतर समझने वाला। जैन भिक्षुणी संघ की स्थापना चंदना की अध्यक्षता में हुई थी। चंद्रगुप्त मौर्य ने जैन धर्म का प्रचार किया, और संलेखना व्रत से अपने प्राण त्यागे।

अकाल के समय जैन धर्म दो शाखाओं में बंट गया: दिगंबर (दक्षिण भाग गए) और श्वेतांबर (उत्तर भारत में रुके रहे)। दिगंबर के अध्यक्ष भद्रबाहु थे, और श्वेतांबर के स्थूल भद्र थे। सुहस्ति ने श्वेतांबर शाखा का प्रचार दक्षिण में किया। जैन धर्म की दो संगीतियां हुईं: पहली 300 ईसा पूर्व में पाटलिपुत्र में, और दूसरी 512 ईसा में वल्लभी (गुजरात) में। पहली संगति के अध्यक्ष स्थूल भद्र थे, और दूसरी के देवधर वण थे। जैन धर्म के त्रिरत्न हैं: सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र। महिलाओं के लिए इन नियमों को अणुव्रत कहा जाता है।

सिन्धु घाटी की सभ्यता

सिंधु घाटी सभ्यता एक कांस्य युगीन सभ्यता थी। अलेक्जेंडर कनिंघम ने 1853 में इसका सर्वेक्षण किया, और दयाराम सहानी ने 1921 में हड़प्पा की खोज की। राखल दास बनर्जी ने मोहनजोदड़ो की खोज की। कार्बन डेटिंग विधि (C-14) से इसका समय 2500 ईसा पूर्व से 1750 ईसा पूर्व निर्धारित किया गया है।

सिंधु घाटी सभ्यता के उत्तरी स्थल मांडा (जम्मू और कश्मीर), दक्षिणी स्थल दायमाबाद (महाराष्ट्र), पूर्वी स्थल आलमगीरपुर (उत्तर प्रदेश) और पश्चिमी स्थल सुतकांगेडोर (बलूचिस्तान) हैं। बलूचिस्तान में सुतकांगेडोर, सुतकाकोह और बालाकोट जैसे स्थल हैं। सिंधु क्षेत्र में मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, चन्हुदड़ो, जुरी जोदड़ो और अली मुराद जैसे स्थल हैं। राजस्थान में कालीबंगन, हरियाणा में राखीगढ़ी और बनावली, पंजाब में रोपड़ और गुजरात में लोथल, रंगपुर, सुरकोटड़ा और धोलावीरा जैसे स्थल हैं।

हड़प्पा में शवों को दफनाने के अवशेष मिले हैं, जबकि मोहनजोदड़ो में शवों को जलाने के अवशेष मिले हैं। मोहनजोदड़ो में बड़ा स्नानागार, नर्तकी की मूर्ति, कपाल खंड और मिट्टी की तराजू मिली है। चन्हुदड़ो में सीप, मुद्रा बनाने का केंद्र, वक्राकार ईंट, कंघा, लिपस्टिक और चूहे का पीछा करते हुए बिल्ली के पदचिह्न मिले हैं। लोथल में बाजरा, धान और डॉकयार्ड के साक्ष्य मिले हैं। कालीबंगन में मिट्टी की चूड़ियाँ और जुते हुए खेतों के साक्ष्य मिले हैं। बनावली में सरसों के साक्ष्य मिले हैं, और सुरकोटड़ा में घोड़े का अस्थि पंजर मिला है।

हड़प्पा रावी नदी के किनारे, मोहनजोदड़ो सिंधु नदी के किनारे, कालीबंगन घग्गर नदी के किनारे, लोथल भोगवा नदी के किनारे, रोपड़ सतलज नदी के किनारे और आलमगीरपुर हिंडन नदी के किनारे स्थित हैं। सिंधु घाटी सभ्यता का समाज मातृसत्तात्मक था, और उनकी लिपि भाव चित्रात्मक थी। वे मातृ देवी और धरती की पूजा करते थे, और पुनर्जन्म में विश्वास रखते थे। बाढ़ को सिंधु घाटी सभ्यता के पतन का कारण माना जाता है।

वैदिक संस्कृति

वैदिक संस्कृति को दो भागों में बांटा गया है: ऋग्वैदिक काल (1500-1000 ईसा पूर्व) और उत्तर वैदिक काल (1000-600 ईसा पूर्व)। दयानंद सरस्वती के अनुसार आर्य तिब्बत से आए थे, जबकि बाल गंगाधर तिलक के अनुसार वे उत्तरी ध्रुव से आए थे। मैक्स मूलर ने कहा कि वे मध्य एशिया से आए थे। आर्यों के शासन को आर्यव्रत कहा गया।

ऋग्वैदिक काल में पांच इकाइयां थीं: कुल (परिवार), ग्राम, विष, जन और राष्ट्र। गाय को सबसे पवित्र पशु माना जाता था। दशराग्य युद्ध सुदास और 10 जनों के मध्य हुआ था, जिसका वर्णन ऋग्वेद के सातवें मंडल में है। समाज पितृसत्तात्मक था, और विधवा विवाह प्रचलित था, लेकिन दहेज प्रथा और पर्दा प्रथा नहीं थीं।

वेदों की संख्या चार है: ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। यजुर्वेद गद्य और पद्य दोनों में है। ऋग्वेद को पढ़ने वाले को होत्र, यजुर्वेद को अर्ध्वयु, सामवेद को उद्गाता और अथर्ववेद को ब्रह्मा कहा जाता था। ऋग्वेद में 10 मंडल हैं, जिनमें से तीसरे मंडल में गायत्री मंत्र है। वेदांगों की संख्या छह है: शिक्षा, कल्प, ज्योतिष, व्याकरण, निरुक्त और छंद। उपनिषदों की संख्या 108 है, जिनमें से मुंडकोपनिषद से सत्यमेव जयते लिया गया है, और कठोपनिषद से यम नचिकेता संवाद। ज्वाल उपनिषद में चार वर्णों का उल्लेख है। वृहदारण्यक उपनिषद सबसे बड़ा उपनिषद है। पुराणों की संख्या 18 है, जिनमें से मत्स्य पुराण सबसे पुराना है।

मौर्य वंश : सम्राट अशोक

अशोक मौर्य वंश के तीसरे शासक थे, जिनका शासनकाल 269 ईसा पूर्व से 232 ईसा पूर्व तक था। उनका राज्याभिषेक 269 ईसा पूर्व में हुआ, और 261 ईसा पूर्व में उन्होंने कलिंग (उड़ीसा) पर आक्रमण किया। कलिंग युद्ध के बाद उनका हृदय परिवर्तित हो गया, और वे बौद्ध धर्म की ओर आकर्षित हुए। उनके गुरु राधा गुप्त थे।

अशोक को प्रियदर्शी और देव नाम प्रिय जैसे नामों से भी जाना जाता है। मास्की और गुर्जरा अभिलेखों में उनका नाम अशोक मिलता है। उन्होंने 14 शिलालेख और सात स्तंभ लेख जारी करवाए। टी फथ ने सबसे पहले अशोक के अभिलेखों को खोजा, और जेम्स प्रिंसिप ने 1837 में उन्हें पढ़ा। अशोक के पहले शिलालेख में पशुबलि की निंदा की गई है, और छठे शिलालेख में आत्म नियंत्रण की परिभाषा दी गई है। सातवां और आठवां शिलालेख अशोक के भ्रमण को बताते हैं, और 13वें शिलालेख में कलिंग युद्ध का वर्णन है। सातवां शिलालेख सबसे बड़ा है, और 14वां सबसे छोटा।

राज्याभिषेक के 10वें वर्ष में अशोक बोध गया गए, और 20वें वर्ष में उन्होंने बाकी बौद्ध स्थलों की यात्रा की। उन्होंने तीन गुहा लेखों का निर्माण करवाया। उनके स्तंभ लेखों में प्रयाग स्तंभ लेख, दिल्ली टोपरा स्तंभ लेख, दिल्ली मेरठ स्तंभ लेख, लौरिया नंदनगढ़ और चंपारण स्तंभ लेख शामिल हैं। सारनाथ स्तंभ लेख के आधार में सत्यमेव जयते लिखा हुआ है। अशोक की माता का नाम शुभ दंगी था। उन्होंने सांची का स्तूप बनवाया।

गुप्त वंश : समुद्र गुप्त ,चन्द्र गुप्त द्वितीय

समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने उत्तर भारत के 9 और दक्षिण भारत के 12 राजाओं को हराया था। उन्हें कवि प्रिय भी कहा जाता है, और उन्होंने वीणा बजाते हुए सिक्के जारी कराए थे। हरि सेन उनके दरबारी कवि थे। उनके समय में सती प्रथा का उल्लेख मिलता है।

चंद्रगुप्त द्वितीय को शकारी और विक्रमादित्य की उपाधि दी गई थी। उनके दरबार में नौ रत्न रहते थे, जिनमें कालिदास प्रमुख थे। कालिदास ने मालविकाग्निमित्रम्, ऋतु संहार, मेघदूत, कुमारसंभवम् और रघुवंशम् जैसी रचनाएँ लिखीं। वराहमिहिर वैज्ञानिक और गणितज्ञ थे, और उन्होंने वृहत संहिता और पंच सिद्धांतिका लिखीं। छपक ज्योतिष थे, और धनवंत्री चिकित्सक थे। फाहियान (फाह्यान) उनके दरबार में आया था।

थानेश्वर पुष्यभूति वंश / हर्ष वर्धन

हर्षवर्धन थानेश्वर के पुष्यभूति वंश से थे। उनके पिता प्रभाकर वर्धन थे, और भाई राज्यवर्धन थे। उनकी बहन राज्यश्री थीं। प्रभाकर वर्धन ने राज्यवर्धन को हूणों का दमन करने के लिए भेजा। गौड़ नरेश शशांक ने गृह वर्मन की हत्या कर दी, और राज्यश्री को उठा कर ले गया। 16 वर्ष की उम्र में हर्षवर्धन गद्दी पर बैठे।

हर्षवर्धन ने नागानंद, रत्नावली और प्रियदर्शिका जैसे नाटक लिखे। बाण भट्ट उनके दरबारी कवि थे, और उन्होंने कादंबरी और हर्षचरित लिखीं। मयूर ने सूर्य शतक लिखा। ह्वेनसांग 630 से 645 ईसवी तक भारत में रहे, और उन्हें यात्रियों का राजकुमार कहा जाता है। उन्होंने सी यू की नामक पुस्तक लिखी, और भारतीयों को यंतु कहा। ह्वेनसांग ने हर्षवर्धन को शिलादित्य कहा। हर्षवर्धन प्रत्येक पांचवें वर्ष महा मोक्ष परिषद का आयोजन करते थे। उनकी सेना को चतुरंग सेना कहा जाता था, और सेनाध्यक्ष को कुंतल कहा जाता था।

राजपूत काल

राजपूत काल में कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष हुआ, जिसमें राष्ट्रकूट, गुर्जर प्रतिहार और पाल वंश शामिल थे। अंत में गुर्जर प्रतिहार की विजय हुई। वत्सराज ने कन्नौज पर आक्रमण किया, और धर्मपाल को हराया। ध्रुव ने वत्सराज को हराया।

गुर्जर प्रतिहार वंश के संस्थापक नागभट्ट प्रथम थे, और उन्होंने राजधानी भीनमाल में बनाई थी। वत्सराज को गुर्जर प्रतिहार वंश का वास्तविक संस्थापक कहा जाता है। नागभट्ट द्वितीय ने कन्नौज को जीता, और उसे राजधानी बनाया। मिहिर भोज ने 49 वर्षों तक शासन किया। महेंद्र पाल के दरबार में राजशेखर रहते थे, और उन्होंने काव्य मीमांसा और बाल रामायण लिखीं। महिपाल प्रथम के दरबार में अल मसूदी आया था। राज्यपाल के समय में महमूद गजनवी का आक्रमण हुआ। यश पाल गुर्जर प्रतिहार वंश के अंतिम शासक थे।

राष्ट्र कूट वंश

राष्ट्रकूट वंश के संस्थापक दंती दुर्ग थे। कृष्ण प्रथम ने एलोरा का प्रसिद्ध कैलाश मंदिर बनवाया। ध्रुव ने त्रिपक्षीय संघर्ष में भाग लिया। अमोघवर्ष ने कविराज मार्ग की रचना की, और मान्यखेत को राजधानी बनाया। इंद्र तृतीय के शासनकाल में भी अल मसूदी आया था। कृष्ण तृतीय अंतिम शासक थे।

गुलाम वंश

गुलाम वंश (1206-1290) को सल्तनत काल भी कहा जाता है। सल्तनत काल में गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैयद और लोदी वंश शामिल हैं। गुलाम वंश के संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक थे, और उन्होंने राजधानी लाहौर बनाई। उन्होंने कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद और अढ़ाई दिन का झोपड़ा बनवाया। उन्हें लाख बक्स और पील बक्स भी कहा जाता था। उन्होंने कुतुब मीनार की नींव डाली।

ऐबक के बाद आराम शाह गद्दी पर बैठे, और फिर इल्तुतमिश गद्दी पर आए। इल्तुतमिश ने 1215 में तराइन का तीसरा युद्ध लड़ा। उन्होंने राजधानी लाहौर से दिल्ली स्थानांतरित की। उन्हें गुलाम का गुलाम कहा जाता है। उन्होंने तुर्क ए चहलगानी (40 सरदारों का संगठन) बनाया, और एकता प्रणाली शुरू की। उन्होंने टका (चांदी) और जीतल (तांबा) मुद्राएँ चलाईं। उनके समय में मंगोल आक्रमण हुआ।

इल्तुतमिश के बाद रुकनुद्दीन फिरोज गद्दी पर बैठे, और फिर रजिया सुल्तान गद्दी पर आईं। रजिया सुल्तान भारत की पहली मुस्लिम शासिका थीं। उन्होंने अल्तूनिया से शादी की। उनकी कब्र बाबली खाना (दिल्ली) में है। रजिया के बाद बहराम शाह और मसूद शाह गद्दी पर बैठे। नसीरुद्दीन महमूद टोपी सीकर जीवन व्यतीत करते थे। बलबन उनके प्रधानमंत्री थे, और उन्होंने अपनी बेटी की शादी नसीरुद्दीन महमूद से कर दी।

बलबन ने सिजदा और पैबोस प्रथाएँ शुरू कीं, और नवरोज उत्सव शुरू किया। 1279 में बंगाल में तुगल खां का विद्रोह हुआ, जिसे मुकद्दर खां ने दबा दिया। बलबन ने मुकद्दर खां को तुगल शाह की उपाधि दी। कैकू बाद बलबन के पोते थे, और शमसुद्दीन कैमर्स गुलाम वंश के अंतिम शासक थे।

खिलजी वंश

खिलजी वंश (1290-1320) के संस्थापक जलालुद्दीन खिलजी थे। 1296 में अलाउद्दीन खिलजी ने जलालुद्दीन खिलजी की हत्या कर दी, और गद्दी पर बैठ गया। अलाउद्दीन खिलजी के बचपन का नाम अली और गुर सप था। 1299 में गुजरात विद्रोह हुआ, जिसे दबाने के लिए नुसरत खां को भेजा गया। नुसरत खां को वहीं मलिक काफूर (हजार दिनारी) मिला। 1303 में चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण हुआ, और रानी पद्मिनी ने जौहर कर लिया। अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ का नाम बदलकर खिजराबाद कर दिया।

अलाउद्दीन खिलजी के पास सबसे बड़ी सेना थी। उन्होंने एकता प्रणाली को खत्म कर दिया, और स्थाई वेतन लागू किया। उन्होंने घोड़ा दागने की प्रथा और हुलिया लिखने की प्रथा शुरू की। उन्होंने मूल्य नियंत्रण प्रणाली और सार्वजनिक वितरण प्रणाली लागू की। उन्होंने चराई कर और गढ़ी कर लगाए। उन्होंने अलाई दरवाजा और हजार खंबा महल बनवाया।

तुगलक वंश

तुगलक वंश (1320-1398) के संस्थापक गयासुद्दीन तुगलक थे। उन्हें दिल्ली की गद्दी पर पहला गाजी कहा जाता है। उन्होंने सिंचाई के लिए नहरें और तालाब बनवाए। उन्होंने तुगलकाबाद और छप्पन कोट दुर्ग बनवाए।

मोहम्मद बिन तुगलक (एमबीटी) 1325 से 1351 तक शासक रहे। उन्हें जूना खां, रक्त पिपासु और स्वप्न शील जैसे नामों से भी जाना जाता है। उन्होंने राजधानी दिल्ली से देवगिरी (दौलताबाद) स्थानांतरित की। 1333 में इब्नबतूता (मोरक्को) उनके दरबार में आया, और किताब उल रेहला लिखी। 1336 में विजयनगर साम्राज्य की स्थापना हुई।

फिरोज शाह तुगलक (एफएसटी) 1351 से 1388 तक शासक रहे। उन्होंने फत हात ए फिरोजशाही लिखी। उनके शासनकाल में सर्वाधिक दास थे। उन्होंने एकता प्रणाली को फिर से शुरू किया। उन्होंने 1368 में कुतुब मीनार की अंतिम मंजिलों का निर्माण करवाया।

सैय्यद वंश

सैय्यद वंश (1414-1451) के संस्थापक खिजर खां थे। वे तैमूर लंग के सेनापति थे।

लोदी वंश

लोदी वंश (1451-1526) के संस्थापक बहलोल लोदी थे। उन्हें लू लगने की वजह से मौत हो गई थी। लोदी वंश को प्रथम अफगान साम्राज्य कहा जाता है। सिकंदर लोदी ने 1504 में आगरा को बसाया, और 1506 में उसे राजधानी बनाया। उन्होंने हिंदुओं पर कई प्रतिबंध लगाए। उन्होंने गुरुमुखी शीर्षक से रचनाएँ लिखीं। इब्राहिम लोदी ने 1517-18 में खतौली का युद्ध लड़ा, और 1526 में पानीपत का प्रथम युद्ध लड़ा, जिसमें बाबर ने उन्हें हराया।

बाबर

बाबर (1526-1530) फरगना (उज्बेकिस्तान) से आया था। उसका नाम जहीरूद्दीन था। उसने 1526 में पानीपत का प्रथम युद्ध लड़ा, और कलंदर की उपाधि धारण की। उसने 1527 में खानवा का युद्ध लड़ा, और गाजी की उपाधि धारण की। उसने 1528 में चंदेरी का युद्ध लड़ा, और 1529 में घाघरा का युद्ध लड़ा। उसने तुजुक ए बाबरी (बाबरनामा) लिखी, और तास का खेल भारत में लेकर आया।

हुमायूं

हुमायूं (1530-1556) बाबर का पुत्र था। उसके भाई कामरान, अकरी और हिंदा थे, और बहन गुलबदन बेगम थीं। उसने 1531 में कालिंजर अभियान किया, और 1532 में देवरिया का युद्ध लड़ा। 1539 में शेरशाह सूरी ने उसे चौसा के युद्ध में हराया, और 1540 में कन्नौज के युद्ध में हराया। वह ईरान भाग गया, और 1555 में सरहिंद का युद्ध जीतकर वापस गद्दी पर बैठा। 1556 में दीन पनाह पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर उसकी मौत हो गई। उसकी पत्नी हमीदा बानो बेगम ने हुमायूं का मकबरा बनवाया। उसने चार बाग परंपरा शुरू की।

अकबर

अकबर (1556-1605) का जन्म 1542 में अमरकोट में हुआ था। उनके चाचा अकरी ने उनका लालन-पालन किया। 1556 में उनका राज्याभिषेक हुआ। 1561 में उन्होंने मालवा अभियान किया, और राजा भारमल ने उनकी अधीनता स्वीकार कर ली। 1562 में उन्होंने तीर्थ यात्रा कर को खत्म किया, और 1564 में जजिया कर को खत्म किया। 1576 में हल्दी घाटी का युद्ध हुआ, जिसमें अकबर की सेना का नेतृत्व मान सिंह ने किया, और महाराणा प्रताप की सेना का नेतृत्व हकीम खान ने किया। 1574 में उन्होंने इबादत खाने का निर्माण करवाया, और 1582 में दीन ए इलाही धर्म शुरू किया। 1583 में उन्होंने इलाही संवत चलाया। 1586 में कश्मीर अभियान में बीरबल की मौत हो गई। 1599 में उन्होंने आगरा को राजधानी बनाया।

अकबर के दरबार में नौ रत्न थे: बीरबल, अबुल फजल, फजी, अब्दुल रहीम खानखाना, टोडरमल, तानसेन, मानसिंह, मुल्ला दो प्याजा और हकीम हुकाम। उन्होंने आगरा का किला, इलाहाबाद का किला, पंचमहल और बुलंद दरवाजा बनवाया।

जहाँगीर

जहाँगीर (1605-1627) की पत्नी नूरजहां (मेहरुन्निसा) थीं। उन्होंने ग्यास बेग को तमा उद्दो की उपाधि दी। उन्होंने दीन ए इलाही को खत्म कर दिया। 1606 में उनके पुत्र खुसरो खां ने विद्रोह कर दिया, जिसकी मदद करने के कारण उन्होंने सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव की हत्या करवा दी।

1608 में कैप्टन हॉकिंस भारत आया, और 1609 में मुगल दरबार में आया। जहाँगीर ने उसे इंग्लिश खान की उपाधि दी। 1611 में मिडलटन आया, और 1615 में थॉमस रो आया। जहाँगीर ने अकबर के मकबरे का निर्माण पूरा करवाया। उनकी मृत्यु शराब पीने से हुई। उनके काल को चित्रकला का स्वर्ण युग कहा जाता है। फारूक बेग उनके प्रमुख चित्रकार थे। उन्होंने तुजुक ए जहांगीरी लिखी।

शाहजहाँ

शाहजहाँ (1627-1658) की माता जगत गोसाई (जोधाबाई) थीं, और पत्नी अर्जमंद बानो बेगम (मुमताज महल) थीं। उनकी बेटी जहां आरा थीं, जिन्होंने साहिब ग्रंथ लिखा। उनके चार बेटे थे: दारा शिकोह, शाह शुजा, औरंगजेब और मुराद बख्श। शाहजहाँ दारा शिकोह को शासक बनाना चाहते थे, लेकिन औरंगजेब बाजी मार गया।

1658 में धर्मत का युद्ध हुआ, जिसमें औरंगजेब और मुराद बख्श ने दारा शिकोह और शाह शुजा को हराया। 1659 में देवराई का युद्ध हुआ, जिसमें औरंगजेब ने दारा शिकोह को हराया। दारा शिकोह ने सीर ए अकबर लिखा, और 52 उपनिषदों का फारसी में अनुवाद किया। बैप्टिस्ट टैवर्नियर और फ्रांस्वा बर्नियर शाहजहाँ के चिकित्सक थे।

शाहजहाँ ने ताजमहल, लाल किला, मयूर सिंहासन और जामा मस्जिद बनवाई। उन्होंने 1648 में लाल बलुआ पत्थर से लाल किले का निर्माण करवाया। उस्ताद अहमद लाहौरी ताजमहल के डिजाइनर थे, और ईसा खान ठेकेदार थे।

औरंगजेब

औरंगजेब (1658-1707) को जिंदा पीर कहा जाता है। उनकी पत्नी रबिया उद दौरानी थीं, जिनकी याद में उन्होंने बीवी का मकबरा बनवाया। उन्होंने नवरोज उत्सव को बंद कर दिया, और 1679 में जजिया कर को फिर से लागू कर दिया। 1665 में उन्होंने मंदिरों को तोड़ने का आदेश दिया। उनके समय में जाट विद्रोह हुआ, जिसका नेतृत्व राजा राम ने किया।

1686 में उन्होंने बीजापुर को जीता, और 1687 में गोलकुंडा को जीता। उन्होंने दिल्ली के लाल किले में मोती मस्जिद बनवाई।

बहादुर शाह 1

बहादुर शाह प्रथम (1707-1712) औरंगजेब के बाद गद्दी पर बैठे।

फ़र्रुख़ शिया

फ़र्रुख़ शिया (1713-1719) ने 1717 में अंग्रेजों को मुक्त व्यापार का अधिकार (मैग्ना कार्टा) दिया। उन्हें घृणित शासक कहा जाता है।

मोहम्मद शाह रंगीला

मोहम्मद शाह रंगीला (1719-1748) के समय में 1739 में नादिर शाह का आक्रमण हुआ।

शाह आलम

शाह आलम (1760-1806) का शासनकाल तीसरा सबसे लंबा कार्यकाल था। 1803 में वे अंग्रेजों की कठपुतली बन गए।

अकबर द्वितीय

अकबर द्वितीय (1806-1837) अंग्रेजों के संरक्षण से बनने वाले पहले सम्राट थे। उन्होंने राजा राम मोहन राय को राजा की उपाधि दी।

बहादुर शाह जफर II

बहादुर शाह जफर द्वितीय (अंतिम मुगल शासक) जफर नाम से कविताएँ लिखते थे। उन्हें रंगून भेज दिया गया।

मराठा साम्राज्य

शिवाजी महाराज मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे, और उन्हें भारतीय नौसेना का जनक भी कहा जाता है। उनके पिता शाहजी भोसले थे, और माता जीजाबाई थीं। उनके संरक्षक कोंडदेव थे, और आध्यात्मिक गुरु रामदास थे। उन्होंने राजधानी रायगढ़ बनाई। 1646 में उन्होंने तोरण का किला जीता, और 1648 में पुरंदर का किला जीता। 1659 में उन्होंने अफजल खां की हत्या कर दी, और 1663 में शाहिस्ता खां की नाक कान काट दिए। 1665 में पुरंदर की संधि हुई। 1664 और 1670 में उन्होंने दो बार सूरत को लूटा। 1674 में उन्होंने राज्याभिषेक कराया, और छत्रपति की उपाधि धारण की। 1680 में उनकी मृत्यु हो गई।

शिवाजी की मंत्रिमंडल को अष्टप्रधान कहा जाता था। उन्होंने सरदेशमुखी और चौथ कर लगाए। संभाजी (1680-1689) ने अष्टप्रधान को नष्ट कर दिया। 1689 में संगमेश्वर के युद्ध में उनकी मृत्यु हो गई। शिवाजी द्वितीय और ताराबाई ने मिलकर शासन किया। बालाजी विश्वनाथ पहले पेशवा थे, और बाजीराव प्रथम दूसरे पेशवा थे।

1761 में पानीपत का तीसरा युद्ध हुआ, जिसमें मराठों की हार हुई। 1776-82 में प्रथम आंगल मराठा युद्ध हुआ, और 1803-06 में द्वितीय आंगल मराठा युद्ध हुआ।

1857 की क्रांति

1857 की क्रांति के कई कारण थे, जिनमें वेलेजली की सहायक संधि, डलहौजी की राज्य हड़प नीति और सैनिकों का असंतोष शामिल थे। 1857 की क्रांति का पहला केंद्र बैरकपुर छावनी (पश्चिम बंगाल) था। 34वीं इन्फेंट्री के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को विद्रोह कर दिया, और 8 अप्रैल 1857 को उन्हें फांसी दे दी गई।

10 मई 1857 को क्रांति भड़क उठी, और 12 मई को लोग दिल्ली पहुंचे, जहाँ उन्होंने बहादुर शाह जफर द्वितीय को सम्राट घोषित कर दिया। दिल्ली में वास्तविक नेतृत्व बख्त खान के हाथ में था। अंग्रेजों ने निकोलसन और हडसन की मदद से दिल्ली के विद्रोह को दबा दिया। लखनऊ में बेगम हजरत महल (महक परी) ने नेतृत्व किया, और कैंपबेल ने दमन किया। झांसी में रानी लक्ष्मीबाई ने नेतृत्व किया, और ह्यूरोज ने दमन किया। कानपुर में नाना साहिब और तात्या टोपे ने नेतृत्व किया। बिहार में कुंवर सिंह और अमर सिंह ने नेतृत्व किया। फैजाबाद में मौलवी अहमद उल्ला ने नेतृत्व किया। इलाहाबाद में लियाकत अली ने नेतृत्व किया। बरेली में खान बहादुर खान ने नेतृत्व किया।

अजीमुल्ला ने "हम हैं मालिक इसके हिंदुस्तान हमारा" गीत लिखा। 1857 की क्रांति के समय गवर्नर कैनिंग थे, और प्रतीक कमल और रोटी था। माइकल इेन ने 1857 की क्रांति का सजीव वर्णन किया। वी डी सावरकर ने इसे भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम कहा।

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Transcript

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0:37 जय हिंद दोस्तों मैं अवीन शर्मा आप सभी का स्वागत करता हूं इस मैराथन क्लास में जो कि होने वाली है हिस्ट्री की और बच्चे आप सभी जानते हैं यूपी ट्रिपल एससी पीईटी परीक्षा का आवेदन शुरू हो चुके थे और आप जानते हैं कि भाई किस तरह हम सिलेबस को खत्म करें क्या हमको पढ़ना है तो इसी सीरीज में बच्चे मैराथन क्लास आपके लिए शुरू कराई गई हैं और आप लोग जानते हैं कि भाई आपका इतिहास जो पीईटी परीक्षा में है वो कुल 10 मार्क्स का है और इन 10 मार्क्स को आपका डिवाइड किया गया है पांच-पांच मार्क्स में किसमें 10 मार्क्स को टोटल पांच पांच मार्क्स में डिवाइड किया गया है जिसमें पहले पांच मार्क्स में हम पढ़ रहे होंगे भारतीय इतिहास को किसको भारतीय इतिहास को और अगले 5 मार्क्स जो आपके होंगे वो होंगे भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के इंडियन नेशनल मूवमेंट के तो बच्चे एक

1:23 मैराथन आज जो हमारी पहली होने वाली है उसमें हम पढ़ रहे होंगे भारतीय इतिहास यानी इस पांच मार्क्स का कंप्लीट और और मैं आपको विश्वास दिलाता हूं बच्चे पांच मार्क्स के लिए आप कौन सी चीजें ऐसी पढ़े क्या संपूर्ण इतिहास आप लोग पढ़े नहीं उसके लिए आपको क्या करना है एक आपका जो सिलेबस है वो आयोग द्वारा आपको दिया जा चुका है तो आयोग ने जो सिलेबस दिया है उसी को हम अच्छे से अध्ययन करेंगे और पांच मार्क्स में से हम कैसे सिक्योर अपने कर सकते हैं यानी कि पांच नंबर के लिए आपको अतिरिक्त कुछ भी ना पढ़ना पड़े किसी किताब की आवश्यकता आपको ना पढ़े तो वो कैसे सुनिश्चित किया जाएगा इसके लिए आपकी मैराथन क्लास रखी गई है और नेक्स्ट पांच नंबर की मैराथन हम इस इतिहास की जो दूसरी मैराथन होगी उस पार्ट में ले रहे होंगे सभी बच्चों का स्वागत है दिल से स्वागत है आप सब लोगों का धन्यवाद है तो मैं एक बार

2:09 तो ओवरव्यू ले लेते हैं बच्चे क्या सिलेबस है क्या इसका सिलेबस है इतिहास का आप लोग एक बार मेरी आवाज ठीक से सुन पा रहे हैं देख पा रहे हैं बताएंगे एक बार बच्चे आप लोग सुन पा रहे हैं अच्छे से वीडियो क्वालिटी क्लियर है कोई परेशानी तो नहीं है किसी को बताएंगे बच्चे बताएंगे बच्चे वेरी गुड नहीं बच्चे कुछ भी नहीं पढ़ना पड़ेगा उसके लिए मैं विश्वास दिलाता हूं आपको एक बार मैराथन आप देख लीजिए और दूसरी चीज मैं आपको बताता हूं इसकी पीडीएफ आपको तैयार करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है बस आप ध्यान से बैठ कर के मेरी बात सुने कि मैं आपसे क्या बोलू आप अपने की पॉइंट्स बना सकते हैं इसकी पीडीएफ आपको रोजगार विद अंकित ऐप पर आप जाएंगे प्ले स्टोर में जिन बच्चों ने अभी भी ऐप को इंस्टॉल नहीं किया

2:54 है तो वो पहले तो ऐप को इंस्टॉल कर लेंगे प्ले स्टो पर मिल जाएगा आपको रोजगार विद अंकित पप तो वहां वहां एक पीडीएफ फोल्डर होगा उस पीडीएफ फोल्डर में आपको पीईटी में क्या मिल जाएगा यह आपकी मैराथन क्लास की पीडीएफ हैंड रिटर्न आपको मिल जाएगी तो इस चीज के लिए आपको बिल्कुल परेशान नहीं होना है कि आपको लिखना है कि आप धीमे पढ़ा रहे हैं या तेज पढ़ा रहे हैं तो आप बस ध्यान से सुनते रहे बातों को पीडीएफ बच्चे आपको बहुत अच्छी हैंडराइटिंग में मिल जाएगी तो आप एक बार क्लास को अब देखें और एक बार आप लोग पीडीएफ पढ़ लेना और मैं कहता हूं कि ये पांच मार्क्स आपके कोई आपसे छीन नहीं सकता है तो पूरे पांच नंबर सिक्योर करने के लिए क्लास है जिसमें बच्चे क्या सिलेबस दिया हुआ है ध्यान से समझना है बिल्कुल ध्यान से समझेंगे तो क्या है पहला हमारा इसमें भारतीय इतिहास में है सिंधु घाटी सभ्यता यानी सिंधु घाटी सभ्यता के विकास

3:40 के बारे में और इसमें आप जानते हैं कि सिंधु घाटी में सबसे ज्यादा प्रश्न आपके पूछे जाते हैं कि कौन सी वस्तु कहां से प्राप्त हुई है किस नदी के किनारे कौन सा सिंधु घाटी सभ्यता स्थल मौजूद है किस जगह पर और किस राज्य में यह सिंधु घाटी स्थल मौजूद है यहां से प्रश्न बनते हैं बहुत अच्छे से पढ़ रहे हो होंगे बाकी फैक्ट भी सिंधु घाटी सिविलाइजेशन के जो भी है उनको हम पढ़ रहे होंगे बच्चे वैदिक संस्कृति में क्या आएगा आपका वैदिक संस्कृति में हम लोग पढ़ रहे होंगे ऋग्वैदिक काल को और उत्तर वैदिक काल को तो क्या है ऋग्वैदिक काल यानी और क्या उत्तर वैदिक काल है यानी कि वेद उपवेद उपनिषद पुराण इन सभी के बारे में हम जान रहे होंगे फिर बात आएगी बच्चे बौद्ध धर्म के बारे में और बौद्ध धर्म के बारे में ऐसा कुछ भी एक भी पॉइंट नहीं

4:26 होगा जिसको हम ना पढ़ रहे हो साथ इसके बाद जैन धर्म को पढ़ रहे होंगे और फिर मौर्य वंश को फिर गुप्त वंश को और आपका सिलेबस में बच्चे गुप्त वंश में देखो क्या-क्या दिया हुआ है मौर्य वंश में आपको चंद्रगुप्त मौर्य बिंदुसार ध्यान से देखेंगे चंद्रगुप्त मौर्य बिंदुसार को नहीं पढ़ना है मौर्य वंश में आपका सिलेबस सिर्फ और सिर्फ दिया हुआ है सम्राट अशोक को आप लोगों को पढ़ना है किसको पढ़ेंगे अशोक महान को हम लोगों को पढ़ना है आगे देखेंगे बच्चे गुप्त वंश में अब गुप्त वंश में जैसे संस्थापक आपके श्री गुप्त हैं फिर घटोचक प्रथम है आपको नहीं प पना आपको क्या पढ़ना है समुद्रगुप्त और चंद्रगुप्त द्वितीय आपका सिलेबस है इन दो के बारे में आप लोगों को पढ़ना है हर्षवर्धन के बारे में थानेश्वर का पुष्यभूति वंश है वहां हम सिर्फ और

5:11 सिर्फ किसके बारे में जान रहे होंगे हर्षवर्धन के बारे में जान रहे होंगे और जरूरी बातें ऐसा नहीं है कि बिल्कुल पॉइंट टू पॉइंट इन्हीं को पढ़ रहे होंगे जो जरूरी चीजें हैं उनको भी हम जान रहे होंगे राजपूत काल राजपूत काल से तात्पर्य है बच्चे कि जो त्रिपक्षीय संघर्ष कनोज का हुआ किस तरह राजवंशों का उदय हुआ किस तरह गुर्जर प्र प्रति हारों ने काम किया था गुर्जर प्रतिहार कौन थे चौहान वंश के बारे में हम जान रहे होंगे और अन्य राष्ट्रकूट वंश के बारे में भी हम जान रहे होंगे फिर सल्तनत काल हमारा आएगा जिसमें हम पढ़ रहे होंगे बच्चे गुलाम वंश से लेकर के गुलाम वंश से लेकर के मुगल वंश की शुरुआत तक यानी 1526 1206 से लेकर 1526 इसको हम पढ़ रहे होंगे इसके बाद आपका कंप्लीट दिया हुआ है मुगल साम्राज्य क्या दिया हुआ है कंप्लीट आपका मुगल साम्राज्य बताया हुआ है तो फिर हमको मुगल साम्राज्य को पढ़ना है

5:58 मराठा के बारे में हम जान रहे होंगे सारा इतिहास मराठा हों का क्या है किस तरह मराठा हों ने संघर्ष किया था किस तरह उन्होंने अपनी नौसेना को मजबूत किया था किस तरह शिवाजी को द फादर ऑफ इंडियन नेवी कहा जाता है तो ये सारी बातें हम जान रहे होंगे इसके बाद में आएगा बच्चे ब्रिटिशर जो थे हमारे यानी अंग्रेज ब्रिटिश राज का अभ्युदय किस तरह उनका उदय हुआ और प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 भी आपका सिलेबस है इसके बाद में बच्चे आपका एक इसमें लास्ट टॉपिक बचेगा वो होगा ब्रिटिश राज का सामाजिक यानी कि सोशल और इकोनॉमिकल इंपैक्ट क्या आया उनका इंडिया के ऊपर भारत के ऊपर ऐसी कौन सी योजनाएं उन्होंने लागू कर दी क्या व्यवस्थाएं उन्होंने थोप दी जो भारत पर प्रभाव का कारण बनी तो ये सारा हमारा सिलेबस है हिस्ट्री का बड़े शांत

6:45 तरीके से बिना कोई सरगुल करे हम इसे समझ रहे होंगे और इतने अच्छे से समझ रहे होंगे कि आप लोग कहेंगे कि मजा आ गया और अगर मजा आ जाए किसी चीज में तो उससे बढ़कर क्या हो सकता है वो भी इतिहास जैसे विषय में मजा आना अपने आप में एक बड़ बात है तो सबसे पहले हम इसकी शुरुआत करेंगे बच्चे बौद्ध धर्म और जैन धर्म को समझेंगे फिर हम इंडस वैली यानी सिंधु घाटी सभ्यता को और उसके बाद में वैदिक संस्कृति को हम लोग पढ़ रहे होंगे तो एक बार सभी बच्चे एक साथ थम्स अप करेंगे और सब बोलेंगे वी आर रेडी फॉर क्लास और एकदम शांत होकर आप लोग बैठ जाइए क्या बातें मैं आपको बता रहा हूं तो उन बातों को हम लोग शुरू करेंगे ठीक है बच्चे एक बार बताएंगे बच्चे बोर्ड क्लियर है सभी लोगों के लिए

7:33 बोर्ड पर आप लोग साफ देख पा रहे हैं एक बार बताएंगे बच्चे तो हम क्या शुरू करने वाले हैं आपका भारतीय इतिहास में भारतीय इतिहास के इस पहली मैराथन में और बचे किसी भी परीक्षा के लिए आप लोग लिखने की आपको आवश्यकता नहीं है किसी भी परीक्षा में मैं ये बताता हूं यह वो मेजर टॉपिक है जहां से हर परीक्षा में प्रश्न बनता है किसी भी परीक्षा की आप तैयारी कर रहे हैं मैराथन पीईटी के लिए है लेकिन ऐसा थोड़ी हो सकता है कि भाई हिस्ट्री में पीईटी के लिए हर्षवर्धन का अलग क्वेश्चन होता है या एसएससी की बाकी परीक्षाओं में हर्षवर्धन का कोई अलग प्रश्न ऐसा निश्चित होता है तो ऐसा कहीं नहीं होता है बच्चे ओके एक बार सभी लोग क्लास को शेयर कर देंगे सभी बच्चे एक बार क्लास को शेयर कर देंगे जोरदार तरीके से और हम शुरू कर रहे

8:19 हैं बच्चे क्या सबसे पहले मैं आपको समझाने जा रहा हूं बौद्ध धर्म बौद्ध धर्म बौद्ध धर्म के बारे में बच्चे आप लोग क्या जानते हैं कि मैं अगर आपको कुछ डाटा बताऊं कि 2011 की जनगणना के अनुसार वर्तमान में बौद्धों की संख्या भारत में लगभग 84 लाख है अब ये बौद्ध थे कौन ये नया धर्म आया कहां से आप सभी जानते होंगे कि गौतम बुद्ध ने इस धर्म को इंट्रोड्यूस कराया और गौतम बुद्ध ने इस धर्म का प्रचार प्रसार इसकी शिक्षाएं लोगों को दी बाद में कई राजाओं ने भी इसका प्रचार और प्रसार किया अब बात आती है बच्चे कि बौद्ध धर्म में गौतम बुद्ध की शिक्षाएं क्या हैं गौतम बुद्ध को कौन थे तो सबसे पहले हमको इसे जानना होगा तो इसकी शुरुआत करते हैं बच्चे इसकी शुरुआत हम करेंगे कि बौद्ध धर्म के

9:06 संस्थापक कौन है बौद्ध धर्म के संस्थापक कौन है आपके तो आप लोग कहेंगे गौतम बुद्ध कौन है गौतम बुद्ध इसके संस्थापक हैं गौतम बुद्ध इसके संस्थापक हैं बच्चे नोट करने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है मैंने आप लोगों को बताया ना नोट करने की आवश्यकता नहीं है इसके हैंड रिटन पीडीएफ आपको रोजगार विद अंकित पप पर मिल जाए पीडीएफ फोल्डर के नाम से बड़ी आसानी से मिल जाएंगे निश्चिंत रहे बिल्कुल परेशान होने की आपको आवश्यकता नहीं है एसएससी जीडी वाले बच्चों के लिए बिल्कुल यह शानदार क्लास साबित होगी बच्चे ले सकते हैं आप संस्थापक कौन है इसके गौतम बुद्ध है और गौतम बुद्ध के बारे में आप जानते हैं कि पूरी पूरी पृथ्वी पर यह पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी मानव प्रतिमा पूजी गई क्या इनकी

9:52 मानव प्रतिमा पूजी गई अब आप कहेंगे मानव प्रतिमा पूजी अब आप जानते हैं भाई पूजा तो भगवानों की होती है आप कहेंगे जी प्रतिमाएं तो हमने देखी है भगवान श्री कृष्ण की तो वो लोग भगवान है मैं क्या कह रहा हूं पहले मानव हैं जिनकी मूर्ति पूजा की गई पहले मानव हैं जिनकी मूर्ति पूजा की गई कौन है वो आपके गौतम बुद्ध है कौन है गौतम बुद्ध हैं और गौतम बुद्ध के अन्य नाम क्या-क्या है इनके अन्य नाम किन-किन नामों से हम इन लोगों को जानते हैं कौन-कौन से इनके नाम है तो शाक्य सिंह किसको कहा जाता है आप लोग बताएंगे शाक्य सिंह किसको कहा जाता जाता है तो गौतम बुद्ध जी को कहा जाता है साक्य मुनि आपसे पूछे साक्य मुनि किसको कहा गया तो यह भी कौन थे ये महात्मा बुद्ध थे

10:39 तथागत किस उपनाम किसका है तथागत उपनाम किसका है तो हम कहेंगे गौतम बुद्ध का नाम है और एशिया का प्रकाश पुंज क्या बोलते हैं बच्चे एशिया का प्रकाश पुंज यानी कि द लाइट ऑफ एशिया पूरी दुनिया को इन्होंने एनलाइन कर दिया प्रकाशमान कर दिया अपने ज्ञान से तो एक ही एशिया का प्रकाश पुंज क्या बोलते हैं द लाइट ऑफ एशिया लाइट ऑफ एशिया किसको कहा जाता है लाइट ऑफ एशिया किसको कहा जाता है गौतम बुद्ध को अब अगर आप एशिया को ध्यान से देखते हैं तो आप लोग जानते हैं कि भाई एशिया में जैसे कि आपका जापान है चीन है और भारत के पड़ोसी देश यानी कि नेपाल म्या म्यार जैसे देश हैं तो यहां किस धर्म की प्रमुखता है बौद्ध धर्म की तो बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग इधर

11:25 एशिया में बहुत है तो इनको क्या कहा गया आई लाइट ऑफ एशिया यानी एशिया का प्रकाश पुंज कहा गया प्रकाश पुंज से मतलब क्या है वह व्यक्ति जो समाज से बुराइयों को दूर कर दे किसको दूर कर दे किसको दूर कर दे समाज से बुराइयों को दूर कर दे अब बात आती है कि इनके बचपन का नाम क्या था सिद्धार्थ बचपन का नाम नोट करेंगे बच्चे बचपन का नाम क्या था इनके का तो बचपन में इनको कहा जाता है कि इनका नाम था सिद्धार्थ बचपन का नाम इनका सिद्धार्थ था इनकी माता कौन थी तो माता इनकी थी महामाया कौन कौन थी महामाया इनकी माता थी प्रश्न पूछा गया है कि इनकी जो माता महामाया थी यह किस वंश से संबंध रखती थी तो ये कौन सा था कोली गणराज्य नोट कर लेंगे बच्चे कोली गणराज्य

12:11 से इनका संबंध था बात क्लियर है कि इनकी माता किस वंश से थी कोली गणराज्य से अब इनका वंश भी तो पूछा जाएगा तो इनका वंश तो वो होगा ना जो इनके पिता का वंश था तो इनके पिता कौन थे पिता थे इनके शुद्धोधन कौन थे पिता शुद्धोधन इनके पिता थे और किस से संबंध रखते थे शाक्य वंश से अगर मैं आपसे पूछूं बच्चे कि महात्मा बुद्ध जो है उनका संबंध उनका संबंध किस वंश से था सभी बच्चे जवाब देंगे महात्मा बुद्ध का संबंध किस वंश से था तो आप कहेंगे कि जी इनके पिता शक्य वंश से संबंध रखते थे इसीलिए इनका संबंध भी किससे हुआ शक्य साक्य वंश से इनका संबंध हुआ अब जब इनका जन्म हुआ तो इनकी माता जो थी महामाया इनकी माता जा रही

12:58 थी अपने पीहर पीहर यानी कि किसके यहां गौतम बुद्ध के मामा जी के यहां और रास्ते में ही रास्ते में कोई जगह इनका नहीं रास्ते में ही इनको प्रसव पीड़ा हो गई तो एक साल वृक्ष के नीचे इनका जन्म हुआ घर पर जन्म नहीं हुआ था जंगल में जन्म हुआ था कहां लुंबिनी वन में कहां जन्म हुआ था इनका बच्चे बताएंगे रास्ते में ही जन्म हुआ था इनका लुंबिनी में किधर लुंबिनी में हुआ था और एक साल वृक्ष के नीचे इनका जन्म हुआ था तो घर पर नहीं हुआ था साल वृक्ष के नीचे इनका जन्म हुआ था सभी बच्चे लिखेंगे क्या बोलेंगे कहां जन्म हुआ था इनका साल वृक्ष के नीचे इनका जन्म हो जाता है अब अगली बात आती है बच्चे कि जन्म तो हो गया जन्म तो हो गया लेकिन इनके जन्म के ही सात दिन बाद इनकी माता का देहांत हो जाता है

13:46 यानी कि जो महामाया जी है ये खत्म हो जाती हैं ये एक्सपायर हो जाती है तोब प्रश्न आता है कितने दिन बाद सात दिन बाद तो फिर गौतम बुद्ध की परवरिश कैसे होती तो परवरिश के लिए इनकी जो मौसी थी इनकी मौसी थी प्रजापति गौतमी सुद्धन उनसे शादी कर लेते हैं तो किसने लालन पालन आपका किया होगा आप बताएंगे लालन पालन जो इनका किया था वो किया था इनकी मौसी जो बाद में इनकी सौतेली मां भी बन गई थी तो कौन है प्रजापति गौतमी क्या नाम है प्रजापति गौतमी इनकी मौसी भी थी और कह सकते हैं कि शुद्धोधन की साली थी कौन थी सद्दो दन की साली थी भैया शादी कर ली कि भाई बच्चा है परवरिश करनी पड़ेगी तो परवरिश किसने की प्रजापति गौतमी ने कौन थी

14:32 गौतम बुद्ध की गौतम बुद्ध की मौसी थी कौन थी गौतम बुद्ध की मौस नहीं मौसी जो बाद में क्या बन गई इनकी इनकी इनकी सौतेली इनकी सौतेली मां भी ये बन जाती है देखेंगे बच्चे क्या बोला इनकी सौतेली मां भी ये बन जाती है अब बात आती है कि जब इनका जन्म हुआ था महात्मा बुद्ध का तो अब राजा थे तो राजा ने बुलाया ब्राह्मणों को तो एक ब्राह्मण आया को कोडिन ध्यान से समझना एक ब्राह्मण था कोडिन और कोडिन ने क्या यह पहला व्यक्ति है प्रश्न पूछा गया है आयोग द्वारा वह कौन व्यक्ति है जिसने महात्मा बुद्ध के बारे में यह घोषणा की थी कि यह व्यक्ति या तो बहुत बड़ा बहुत बड़ा चक्रवर्ती सम्राट बनेगा या फिर बहुत बड़ा

15:18 सन्यासी बनेगा तो एक भय अंदर पैदा हो गया सोद के कि मैं राजा और मेरा बेटा सन्यासी बनेगा तो उन्होंने कहते हैं कि ऐसी व्यवस्था पैदा की ताकि गौतम बुद्ध अपने जीवन में कोई प्रश्न ही खुद से ना कर पाए ताकि दुख उनके सामने आएगा तो वो सोचेंगे ना दुख क्या है अगर पथ जड़ उनको दिखेगा तो वह सोचेंगे कि पथ जड़ क्या है तो उनके लिए चार महलों का निर्माण करवाया ऐसी व्यवस्थाएं पैदा की सुंदर परियों के बीच में उसको रखा ताकि उसको कोई कष्ट भाव किसी भी तरह का प्रश्न उसके दिमाग में ना आ पाए दुख उसके सामने ना आ पाए तो इस कोडिन की उस बात से बचने के लिए वो उसको बचाते रहते हैं बचाते रहते हैं और 16 साल की उम्र में शादी होती है गौतम बुद्ध की तो देखो यह

16:03 बात भी जानने के लिए महत्त्वपूर्ण है कि उनकी पत्नी का नाम क्या है बताएंगे पत्नी का नाम क्या है उनकी पत्नी का नाम आप कहेंगे पत्नी थी उनकी यशोधरा यशोधरा से जो शादी हुई भैया कितनी 16 वर्ष की अवस्था में हुई ये उम्र यशोधरा की नहीं है ये उम्र किसकी है भैया ये गौतम बुद्ध की उम्र है यानी 16 वर्ष की उम्र में उन्होंने किससे शादी की यशोधरा से शादी की इसी शादी के 12 वर्षों के बाद कितने वर्षों के बाद 12 वर्षों के बाद जन्म हुआ इनके पुत्र का तो इनके पुत्र का क्या नाम है बताएंगे बच्चे इनके पुत्र का क्या नाम है तो पुत्र कौन था इनका आप कहेंगे कि पुत्र का नाम था राहुल शादी के 12 वर्षों के बाद पैदा होता है यानी इस समय गौतम बुद्ध की उम्र कितनी

16:49 हो चुकी थी तो आप कहेंगे इस समय उम्र हो गई थी गौतम बुद्ध की 28 वर्ष कितनी 28 वर्ष 16 के बाद 12 वर्ष बाद बेटा पैदा हुआ और 28 वर्ष इनकी ऐज हो चुकी थी और इनके बच्चे के जन्म के एक साल बाद एक साल बाद ये अपने घर को छोड़कर चले जाते हैं कितने वर्ष बाद एक वर्ष बाद यानी अब मुझे आप बताओ कि गौतम बुद्ध ने अपना घर किस आयु में किस आयु में त्याग दिया था सभी बच्चों का जवाब चाहता हूं कि गौतम बुद्ध ने अपना घर किस आयु में त्याग दिया था हां बाल विवाह उस समय प्रचलित थे बिल्कुल ठीक बात आपने कही तभी तो इनका 16 वर्ष क्या में शादी हो गई बताएंगे बच्चे तो इन्होंने जो अपना गृह परित्याग किया जो यह घर को छोड़

17:35 कर के गए तो कितनी अवस्था में गए थे 29 वर्ष की अवस्था में और बच्चे इसका प्रतीक लिख लेना कि जो प्रतीक है इसका घोड़ा है प्रश्न पूछा गया है कि गौतम बुद्ध ने जब अपना घर छोड़ा उसको बौद्ध साहित्य में किस प्रतीक से दर्शाया गया क्या प्रतीक था वेरी गुड बिल्कुल बिल्कुल बहुत शानदार क्या प्रतीक था बच्चे वेरी गुड बहुत जोद जोरदार तरीके से एक बार आप लोग सेशन को लाइक और शेयर कर देंगे मेरे शेयर सभी बच्चे जितने बच्चे देख रहे हैं वह एक बार क्लास को लाइक और शेयर जरूर करते रहेंगे क्योंकि बच्चे आपके लाइक और शेयर से जो उत्साह हमें मिलता है उसका कोई सानी नहीं है तो इसका प्रतीक क्या है घोड़ा इसका प्रतीक हो जाता है अभी हम आगे पढ़ेंगे कि इनके घर त्याग करने की घटना को क्या कहा

18:22 गया महाभिनिष्क्रमण कहा गया फिर इनको ज्ञान प्राप्त हुआ तो संबोधि कहा गया पहला उपदेश जब इन्होंने दिया तो धर्म चक्र परिवर्तन कहलाया और जब इनकी मृत्यु हो गई तो उस मृत्यु को हम लोगों ने महापरी निर्वाण कहा ये सारी बातें हम नोट कर रहे होंगे बहुत अच्छे से तो क्या बोला 29 वर्ष की अवस्था में गृह प्रत्यागत अब देखो प्रतीक क्या बोला गया घोड़ा अब एक और लिख लेना जन्म का प्रतीक क्या माना गया है इनका कि जो महात्मा बुद्ध हैं उनके जन्म का प्रतीक किसको माना गया है कमल को माना गया है कमल का फूल लोटस किसको माना गया है कमल को माना गया है गर्भावस्था में आने का प्रतीक गर्भावस्था में जब ये अपनी मां के गर्भ में आए थे तो बौद्ध साहित्य में उसका प्रतीक किसको कहा गया है हाथी को कहा गया है किसको हाथी को कहा गया है बात क्लियर

19:09 है किसको कहा गया है बच्चे ये तीनों प्रतीक आप लोगों को पता होने चाहिए घर कब छोड़ा जन्म कब हुआ और गर्भावस्था का प्रतीक क्या है तो इतनी बात आप लोग याद रखेंगे उसके बाद बात आती है उसके बाद बात आती है क्या आगे की बात करते हैं कि भाई पाली जो साहित्य है तो एक चीज मैं मैं आपको अभी साइड में थोड़ा सा नोट कराता हूं इधर से देखना कि बौद्ध धर्म की जो भाषा रही है ना वो रही है पाली जैसे आप आगे जानेंगे कि जैन धर्म की भाषा क्या रही है जैन धर्म की भाषा रही है प्राकृत तो बच्चे ये भाषाए शुरू में नहीं थी सबसे पहले तो संस्कृत थी ना वैदिक संस्कृत फिर संस्कृत से बाद में ये भाषाएं डेवलप हुई प्राकृत भाषा पाली भाषा फिर हमारी हिंदी बनी तो हम इस बात को जानेंगे कि जोय पाली में लिखा

19:54 हुआ बौद्ध साहित्य किसम लिखा गया है पाली में तो पाली साहित्य के अनुसार क्या बताया गया पाली साहित्य यह कहता है कि जिस दिन जिस दिन महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था उसी दिन इनका जो घोड़ा था ना कंथारिया जिससे महात्मा बुद्धि प्रश्न पूछेंगे कि भैया यह बूढ़ा आदमी कौन है ये ये झुका हुआ क्यों है इस व्यक्ति को कंधे पर क्यों ले जा रहे हैं तो ये वो व्यक्ति है चन्ना ये कौन था का सारथी था और कंथारिया था उसी दिन जन्म होता है

20:42 कंथारिया में ताकि उसको सिर्फ और सिर्फ सुख पैदा हो ऐसी स्थितियों में रखा गया लेकिन वो दिन आया वो दिन आया जिस दिन के लिए शुद्धोधन चिंतित थे तो शुद्धोधन चिंतित थे वह दिन कब आता है कि एक बार राजकुमार जिद्द पकड़ लेते हैं कि भाई मुझको आप राज्य घुमाने ले चले और किससे जिद्द पकड़ लेते हैं चन्ना से तो चन्ना जब उनको लाख मना करने के बावजूद उनकी जिद्द के बावजूद उनको जब राजा सुद दन मौजूद नहीं होते हैं तो युवराज के आदेश की वजह से चन्ना को ले जाना पड़ता है और कैसे क्या दृश्य हुए तो पूछे गए हैं

21:28 प्र क्या-क्या इन्होंने देखा पांच ऑप्शन चार ऑप्शन आपको दे सकता है बच्चे जिसमें से इनमें से चीजें एक मिस होगी और आपसे पूछ लेगा कि क्या दृश्य देखा था और क्या दृश्य नहीं देखा था तो क्या देखा सबसे पहले देखा एक बूढ़ा आदमी कौन से चार दृश्यों के बारे में बात कर रहे हैं कि जब चन्ना के साथ आते हैं तो वो चार दृश्य जिनको कहा गया है पाली साहित्य के अनुसार तो पहला तो है बूढ़ा व्यक्ति इन्होंने देखा जो कमर झुकाए हुए था इन्होंने पूछा कि चन्ना इस व्यक्ति की कमर क्यों झुकी हुई है क्योंकि इनको तो बूढ़े से दूर रखा गया था सिर्फ यंग जनरेशन के लोग ही इनसे मिल सकते थे आप कहेंगे कि अपने पिता से भी नहीं मिलते थे तो राजा सद्दो दन की कमर झुकी नहीं थी प्रश्न आया कमर झुके हुए इन्होंने बोला कि यार बूढ़ा व्यक्ति इसे

22:13 कमर झुकाते तो इन्होंने बोला युवराज ऐसी अवस्था हर किसी के जीवन में आती है कि जब व्यक्ति को झुककर चलना पड़ता है दूसरी प्रश्न आया इन्होंने देखा एक बीमार व्यक्ति था इन्होंने बोला यह व्यक्ति ऐसे क्यों परेशान है ऐसे क्यों खास रा है ऐसे लाचारी की अवस्था में क्यों है तो उन्होंने कहा युवराज ऐसी स्थिति आती है कि व्यक्ति बीमारी से ग्रस्त हो जाता है और बीमारी जो कि युवराज को अभी तक नहीं आई थी तो ये क्या है अब प्रश्न दिमाग में आएंगे फिर देखते हैं एक व्यक्ति को ले जा रहे थे मृत व्यक्ति था क्या था मृत व्यक्ति था क्या था व्यक्ति मृत व्यक्ति था इन्होंने बोला इसको ऐसे क्यों ले जा रहे हैं इन्होंने बोला कि युवराज एक समय ऐसा आता है कि इस जीवन का अंत होता है ये जो हमने जीवन जिया है आप जी रहे हैं मैं जी रहा

23:00 हूं एक दिन इस जीवन का अंत भी होगा फिर बाद में इन्होंने देखा एक सन्यासी क्या देखा एक सन्यासी बड़ा शांत बैठा हुआ था बहुत शांत बैठा हुआ था इन्होंने बोला यह व्यक्ति इतना प्रस और शांत क्यों बैठा हुआ है इन्होंने बोला कि महाराज इस व्यक्ति ने सब कुछ त्याग दिया है इस व्यक्ति ने अपनी इंद्रियों को जीत लिया है इस व्यक्ति ने जो मोह था उसको खत्म कर लिया है इसीलिए यह व्यक्ति प्रसन्न द्रा में बैठा हुआ है और एकदम शांत है बड़े प्रभावित हुए और सोचा अगर प्रसन्नता का सबसे बड़ा कारण सन्यासी हो सकता है तो क्यों ना मैं भी सन्यासी बन जाऊं तो सोच विचार करते हैं और उसके बाद ये डिसीजन ले लेते हैं कि मुझको भी क्या बनना है सन्यासी बनना और घर से चले जाते

23:47 हैं जिस घटना को क्या कहा गया जिस घटना को मैंने बताया कि 29 वर्ष की अवस्था में गए घर छोड़ कर के उस घटना को कहा गया है बच्चे महाभिनिष्क्रमण क्या कहा गया है महाभिनिष्क्रमण कहा गया है प्रश्न पूछा गया है महात्मा बुद्ध के घर छोड़कर जाने की घर छोड़कर जाने की घटना को क्या कहा गया है बताएंगे बच्चे महाभिनिष्क्रमण कहा गया क्या कहा गया है सभी बच्चों का जवाब चाहता हूं कि महाभिनिष्क्रमण कहा गया है अब बात आती है बच्चे कि जब महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ ध्यान से समझना महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ और उनको ज्ञान प्राप्त हुआ तीसरा उनकी जो मृत्यु हुई ये तीनों पूर्णिमा के दिन हुई थी किस दिन हुई थी पूर्णिमा के दिन इसीलिए बुद्ध पूर्णिमा को

24:32 बड़े उत्सव बड़े आयोजन उसके लिए किया जाता है और ये लोग बड़े स्तर पर उसको मनाते हैं क्या नाम है पूर्णिमा उस दिन का नाम है जन्म ज्ञान और मृत्यु ये तीनों किस दिन हुए महात्मा बुद्ध के पूर्णिमा के दिन हुए थे किस दिन हुए थे पूर्णिमा के दिन हुए थे अब घर से चले गए तो घर से चले गए तो कहां पहुंचते हैं कहां पहुंचे ये पहुंचे उरुवेला उरुवेला कहां है गया बिहार में है तो नोट कर लेना कहां पहुंचते हैं उरुवेला उरुवेला कहां है भैया यह आपका गया डिस्ट्रिक्ट गया डिस्ट्रिक्ट कहां बिहार का गया पहुंच जाते हैं और क्या बोलते हैं कि भैया अब तो साधना करनी है और सन्यासी बन क्या बनना है सन्यासी बनना है रवेला पहुंच जाते हैं और यही एक ग्राम था नाम है

25:20 संप्रति ग्राम संपत्ति ग्राम भी आप लोग लिख सकते हैं संपत्ति ग्राम में यह फिर क्या करते हैं यह तपस्या पर बैठ जाते जाते हैं किस पर बैठ जाते हैं तपस्या पर और ऐसा नहीं है तपस्या पर अकेले बैठे थे इनके साथ पांच ब्राह्मण और बैठे थे ध्यान से समझना पांच ब्राह्मण इनके साथ बैठे तपस्या चलती रहती है और एक दिन ये खुद से प्रसन कर लेते हैं कि भाई छ वर्ष तपस्या को हो गई छ वर्ष तपस्या को हो गए हैं और किस वृक्ष के नीचे बैठे हुए हैं पीपल वृक्ष है क्या है पीपल वृक्ष के नीचे बैठे हुए हैं और ध्यान से समझना इस पीपल वृक्ष के नीचे कौन सी नदी है ये साइड में बह रही है के निरंजना नदी दोनों ही प्रश्न पूछे गए हैं वृक्ष भी और नदी भी जगह भी तीनों की बात हम कर चुके अब बात आती है बच्चे कि पांच लोगों के साथ

26:07 तपस्या पर बैठे हैं ज्ञान ज्ञान अब आप सोचेंगे ज्ञान कैसे आता होगा आपके दिमाग में भी तो प्रश्न आना चाहिए ज्ञान कैसे आता होगा तो वो सारी चीज जैसे आप हल किसी और से मांगते हो आप प्रसन अपनी समस्याओं का बच्चे किसी और से करते हो आपके अंदर भी प्रश्न आता होगा ये आत्मा क्या होती है आप सोचते होंगे परमात्मा क्या होता है आत्मा से परमात्मा कैसे मिलती है आत्मा और परमात्मा को अलग-अलग कैसे हम कर सकते हैं तो यह प्रश्न आपके दिमाग में भी आएंगे तो आपको हल नहीं मिलेगा आप सोचेंगे यार पता नहीं क्या चीजें हैं तो जब इन चीजों का ज्ञान मनुष्य को हो जाता है सत्य का ज्ञान मनुष्य को हो जाता है उसी को बोलते हैं ज्ञान का आ जाना किसका आ जाना ज्ञान का आ जाना और इस ज्ञान को प्राप्त किसने किया इस ज्ञान को प्राप्त इन्होंने किया छह

26:54 वर्षों के बाद कितने वर्ष की तपस्या के बाद छ वर्ष की तपस्या के बाद 6 वर्ष की तपस्या से मतलब है इनकी आयु अभी हो चुकी है बच्चे 35 वर्ष कितनी हो चुकी है 35 वर्ष इनकी आयु हो चुकी है अब ज्ञान मिल गया तो कहते हैं कि जब एक वृक्ष के नीचे बैठे हुए थे तो उसी ग्राम के जो ग्राम विष बोलते थे जैसे छोटी यूनिट पहले होती थी विष तो उस विष पति जो उस ग्राम का प्रधान होता था जो हम ऋग्वैदिक साहित्य में भी पढ़ रहे होंगे बच्चे तो ध्यान से समझना वहां के जो प्रधान आप लोग समझ सकते हैं उसकी लड़की आती है तो वो लड़की प्रसाद देने आती है अब सन्यासियों ने तो कर रखा था कि हमें किसी से बात नहीं करनी है कठोर तपस्या पर थे तो महात्मा बुद्ध ने सोचा यार इतनी कठोर तपस्या क्यों क्यों ना एक बहुत कठोर तपस्या से भी ज्ञान नहीं हासिल हो पा रहा है और बिल्कुल लो अगर कोई और

27:41 मार्ग अपना रहे तो भी ज्ञान प्राप्त नहीं हो रहा तो क्यों ना एक बीच का मार्ग अपनाया तो बीच के मार्ग में वो विनर्स उन्होंने उस लड़की से ग्रहण कर लिया जिसके बाद वो पांच सन्यासी उनको छोड़ कर के उनसे रुष्ट होकर के लड़ कर के वहां से चले जाते हैं और कहते हैं जैसे ही वो सन्यासी गए उसके बाद उसके बाद में जो प्रसाद उस लड़की से उन्होंने खाया तो ज्ञान प्राप्त हुआ किसको महात्मा बुद्ध को ध्यान से देखना बच्चे क्या उनको ज्ञान प्राप्त हुआ किसको महात्मा बुद्ध को तो कितने वर्ष तपस्या की थी सब बच्चों का जवाब चाहता हूं कितने वर्ष तपस्या उन्होंने की थी बताएंगे एक बार बच्चे सब कुछ पीडीएफ में मिलेगा सब कुछ सब कुछ पीडीएफ में मिलेगा अरे आज मूल विधि का दिन नहीं है मूल विधि पढ़ रहे होंगे मेरे शेर तो एक बार आप लोग हिस्ट्री पढ़ लीजिए फिर बेसिक लॉ को हम लोग पढ़ रहे

28:27 होंगे पीडीएफ बच्चे रोजगार विद अंकित ऐप पर मिलेगा पीडीएफ फोल्डर में जिन बच्चों ने इंस्टॉल नहीं किया है ना फ्री ऑफ कोस्ट है ऐसा नहीं है कि तुमसे पैसे ले लेंगे उस चीज के ठीक है तो ध्यान से समझना छ वर्ष की तपस्या होती है और ये सारी बातें मैं आपको बता चुका हूं अब महात्मा बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हो गया क्या प्राप्त हो गया ज्ञान अब उन्होंने सोचा जो ज्ञान मुझे प्राप्त हुआ है इसे और लोगों को भी तो देना चाहिए तो उन्होंने उस रास्ते पर चल दिए कि जो ज्ञान मुझे प्राप्त हुआ है जो सत्य का ज्ञान मुझे प्राप्त हुआ है इस ज्ञान को मैं बाकी लोगों तक भी पहुंचाओ ठीक है तो इसी क्रम में वो कहां पहुंचते हैं पहला उपदेश जो उन्होंने दिया अपना पहला उपदेश पहला उपदेश वो देते हैं बच्चे बहुत प्रश्न पूछा जाता है कहां सारनाथ में और इसी सारनाथ का पुराना नाम है ऋषि पत्न क्या नाम है ऋषि पत्न इसी को कहा जाता है

29:16 ध्यान से समझना इसी सारनाथ को क्या बनाते हैं बच्चे इसी सारनाथ को हम ऋषि पत्न भी पुकारते हैं तो अगर विकल्प में सारनाथ ना लिख कर के ऋषि पतन आ जाए तो घबराना नहीं है अब उपदेशों की बात आती है तो पहला उपदेश जो इन्होंने दिया इसी घटना को कहा गया बौद्ध साहित्य में धर्म चक्र परिवर्तन क्या धर्म चक्र परिवर्तन इसी को कहा गया एक घटना महाभिनिष्क्रमण जो घर प्रत्यागत हुई दूसरा जब इन्होंने ज्ञान दिया तो क्या हुआ क्या हुआ बच्चे क्या हुआ धर्म चक्र परिवर्तन हुआ धर्म चक्र परिवर्तन यानी कि इन्होंने यह ज्ञान और लोगों को देना शुरू किया और अ जो इसी में बच्चे यही पहले उपदेश के साथ आप अंतिम उपदेश भी नोट करेंगे यह भी प्रश्न पूछा जाता है कि अंतिम उपदेश कहां दिया था पहला उपदेश

30:02 अंतिम उपदेश इन्होंने दिया था श्रावस्ती में कहां श्रावस्ती में दिया था अगर आपसे पूछे सबसे अधिक उपदेश कहां दिए थे सबसे अधिक उपदेश सबसे ज्यादा उपदेश किस जगह पर इन्होंने दिए सबसे अधिक उपदेश जो दिए थे इन्होंने यह भी कहां दिए थे बच्चे यह भी शरावती में दिए थे ठीक है एक पूछेगा आपसे देखो छोटे-छोटे क्वेश्चन है एक आपसे पूछेगा सर्वाधिक वर्षावास कहां बिताए अभी मैं इस शब्द को समझाऊ कि वर्षावास क्या होता है सर्वाधिक वर्षावास सर्वाधिक वर्षावास जो इन्होंने किया था कहां किया था वैशाली में किया था कहां किया था वैशाली में किया था और बच्चे आपसे पूछे अगर अंतिम वर्षावास कहां किया था अंतिम वर्षावास कहां किया था तो आप लोग बोलेंगे

30:49 कि वैशाली में किया अब ये वर्षावास क्या होता है तो बच्चे जो बौद्ध भिक्षु होते हैं वो पूरे साल इस तरह घूमते रहते हैं लेकिन जब वर्षा आती है बारिश का मौसम आता है तो एक जगह ठहर जाते हैं एक जगह ठहरने का मतलब है आपने नाम सुना होगा मठ क्या होता है मठ वैल्यू वन बिहार भी जिनको हम बोलते हैं तो ये एक जगह ठहर जाते हैं तो ये प्रश्न पूछा गया है कि सर्वाधिक वर्षावास इन्होंने कहां बिताए थे तो आपका जवाब होगा कि सर्वाधिक वर्षावास भी और अंतिम वर्षावास भी इन्होंने वैशाली में बिताया था क्या वैशाली में बताया था अब एक बात और महत्त्वपूर्ण हो जाती है कि जो ये सारनाथ में इन्होंने उपदेश दिया था तो यह पांच ब्राह्मणों को दिया था सबसे पहले किसको दिया था पांच ब्राह्मणों को यह उपदेश इन्होंने दिया था इनकी मृत्यु बच्चे

31:35 पहुंचेंगे मृत्यु तक भी मृत्यु तक भी पहुंचेंगे बच्चे चाइना में बौद्ध और इंडिया के बौद्ध अलग अलग नहीं है बच्चे अलग नहीं है बिल्कुल अलग नहीं है देखो चाइना का शासन क्या है चाइना ने क्या बोला चाइना ने बोला कि हम लोग कम्युनिस्ट क्या है कम्युनिस्ट कम्युनिस्ट का मतलब क्या होता है कि किसी विशेष धर्म से हम अपने आप को अलग करते हैं तो बस इतना सा एक अंतर है बाकी अलग नहीं है वही बौद्ध धर्म के लोग हैं वही बौद्ध धर्म के लोग अब जैसे कि हम बात करते हैं अगर जापान में हम देखे तो बौद्ध धर्म की एक शाखा है सिंटो वादी क्या सिंटो वादी है वही चीन में क्या है चीन में चलता है आपका तावाद क्या तावाद टाइजम जिसको हम बोलते हैं तो वो चीजें बिल्कुल अलग नहीं है धर्म एक है बस मान्यताएं थोड़ी अलग-अलग हो जाती है जैसे आप देखेंगे

32:21 कि हम लोग हिंदू हैं लेकिन हिंदुओं में भी हमारे सबके रीति रिवाज एक जैसे थोड़ी है ब्राह्मणों के रीति रिवाज अलग है और क्षत्रियों के रीति रिवाज अलग हैं आप देखोगे राजपूतों में कुछ विवाह संबंधी विवाह संबंधी रीति रिवाजों को आप लोग से क रिचुअल्स अलग-अलग है ना सबकी सबके यहां एक जैसी प्रथा नहीं होती तो ये अंतर तो मिलता है ठीक है चलो आगे बात आती है बच्चे आगे बात आती है कि बौद्ध में जो पूजा स्थल है उनको क्या कहा जाता है तो मैंने बताया ना जो ये जगह थी जहां ठहरने की जगह थी ठहरने की जगह तो कहा जाता है बेलू वन बिहार तो ये बात नोट कर ले लेना ये क्या थी ठहरने का स्थान जहां ये बौद्ध लोग ठहरते थे या मठ आप बोल सकते हैं पूजा स्थल जहां ये पूजा करते थे रुक कर के या चलते हुए क्या

33:08 बोलते हैं उनको स्तूप बोलते हैं क्या स्तूप बोलते हैं अब बच्चे होशियार नहीं होंगे तो क्या होंगे बताओ बच्चों को होशियार होना चाहिए बुद्ध के गुरु कौन थे बच्चे मैं कह रहा हूं आपको किसी भी तरह का प्रसन करने की आवश्यकता नहीं है जब क्लास आपकी खत्म हो रही होगी बुद्ध के एक गुरु नहीं रहे हैं मैं आपको बताऊंगा कि बुद्ध ने सांख्य दर्शन की शिक्षा आलर कलाम से ली थी बाकी उनका जो आध्यात्मिक दर्शन हुआ था उसके गुरु आपके बृहस्पति गुरु थे रुद्र रुक पुत्रम से भी उन्होंने शिक्षा ली है सारी बातें मैं आपको नोट करा रहा ता किसी भी तरह के प्रश्न की आपको आवश्यकता नहीं है आप पढ़कर ये पाएंगे कि हां हमारे डाउट्स बचे ही नहीं निश्चिंत रहे बस शांति से उंगलियों को बिल्कुल कष्ट देने की आवश्यकता नहीं है ध्यान से देखते रहेंगे

33:54 बस सुनते रहे मेरी बात मैं क्या बता रहा हूं आपको तो अगली बात आते हैं बच्चे मैंने आपको एक बात बताई कि सबसे पहले कहां इन्होंने अपना उपदेश दिया था सारनाथ में दिया था कहां सारनाथ में दिया था पांच ब्राह्मणों को दिया था और सारनाथ के बाद में ये चल देते हैं किधर सारनाथ के बाद में ये चल देते हैं वाराणसी की तरफ किधर वाराणसी की तरफ चल देते हैं तो नोट कर लेना वाराणसी में यज्ञ सृष्टि क्या नाम था यज्ञ स्रेष्टि को ज्ञान दिया किसको यज्ञ सृष्टि को ज्ञान दिया और आप लोग जानते होंगे भल्लुक जैसे शिष्य इन्होंने अपने बनाए थे भल्लुक जैसे शिष्य इन्होंने अपने बनाए थे ठीक है अभी बच्चे अभी उन सब चीजों को हम नोट कर रहे होंगे हा नहीं

34:39 कोरोना नहीं हुआ है कोरोना नहीं हुआ है ठीक है वेरी गुड आगे चलेंगे बच्चे तो वाराणसी में ये ज्ञान किसको दिया इन्होंने यज्ञ शृष्टि को दिया था और सबसे महत्त्वपूर्ण बात क्या आती है बच्चे कि इनके एक शिष्य थे आनंद क्या नाम था शिष्य का शिष्य का नाम था आनंद तोध न से देख लेना इनके शिष्य देखो बहुत महत्त्वपूर्ण बातें मैं आपको बताने जा रहा हूं इनके शिष्य आनंद के कहने पर किस पर आनंद के कहने पर अब हम थोड़े से प्रश्न भी उठाएंगे गौतम बुद्ध पर इनके शिष्य आनंद के कहने पर क्या हुआ कि अब आप कहेंगे कि ये तो बौद्ध धर्म से जुड़े हुए थे बौद्ध धर्म से जुड़े हुए थे तो जब इनको ज्ञान प्राप्त हो गया तो ये राजा सुद्दनली

35:28 और कहते हैं कि भाई जब इनके भाई का राज्याभिषेक होना था तो राज्याभिषेक की सारी भीड़ किसको देखने के लिए चल दी गौतम बुद्ध की उस समय इतने प्रचलित हो चुके थे कि लोग गौतम बुद्ध को देखने के लिए पहुंच चुके और पहले दिन इनके जो भाई राजा बनने वाले थे इनके भाई जो राजा बनने वाले थे राज सिंहासन पर बैठने वाले थे तो उनकी मुलाकात भी वो भी मिलने आए किससे गौतम बुद्ध से तो गौतम बुद्ध ने उनको भी ज्ञान दिया तो उन्होंने बोला कि मैं भी राज सिंहासन का त्याग करता हूं तो सुद्धन रोए सुद्धन रोए और सुद्धन ने यह कहा कि एक तो मेरे सामने दुख की घड़ी वह थी कि जिस दिन तुम इस राज सिंहासन को छोड़कर चले गए थे तुम खुद सन्यासी बन गए थे और आज तो जो मेरी बची कुची उम्मीद थी वो भी नष्ट हो गई

36:16 अब बचा क्या तो कहते हैं कि इसके बाद गौतम बुद्ध विचलित हो गए थे जबकि एक सन्यासी पर इस तरह का प्रभाव नहीं होने चाहिए तो लोगों ने सवाल उठाया कि गौतम बुद्ध का ये डिसीजन क्या था इसी डिसीजन के बाद उन्होंने कुछ नियम बनाए कि भाई जो आपका युवराज है कुवारा है वह आपका बौद्ध धर्म में शामिल नहीं हो तो कहते गौतम बुद्ध पर इन चीजों का प्रभाव क्यों पड़ा क्यों पड़ा इन चीजों का तो ध्यान से देखना आनंद के कहने पर जो बदलाव हुए उन बदलावों में क्या बात है अपने शिष्य आनंद के कहने पर इन्होंने एक महिला भिक्षुणी संघ बनाया था क्या बनाया था महिला ना लिख कर के आप बौद्ध ही लिख लीजिए क्या बनाया था एक बौद्ध भिक्षुणी संघ बौद्ध भिक्षुणी भिक्षुणी समझते हो भिक्षुक बोलते हैं आदमी को किसको आदमी को और

37:03 भिक्षुणी किसको बोलते हैं स्त्री को बोलते हैं ध्यान से देखना बच्चे बौद्ध भिक्षुणी संघ की स्थापना इन्होंने कर दी और किसके कहने पर की थी आनंद के कहने पर तो प्रश्न पूछा गया है आयोग के द्वारा कि बौद्ध भिक्षुणी संघ जो था उसकी स्थापना कहां हुई थी तो कहां हुई थी सभी बच्चे सभी बच्चे आंसर देंगे सभी बच्चे आंसर देंगे बताएंगे बच्चे सभी बच्चे आंसर देंगे कि क्या बताया मैंने आपको वेरी गुड अब प्रश्न आपका एकदम दिमाग में यह आना चाहिए कि जी एक बात समझ में नहीं आई कि यह तो बिल्कुल आदर्श प्रताप सिंह जी का बहुत अच्छा क्वेश्चन है कि इनकी तो माता सात दिन बाद ही एक्सपायर हो गई थी बच्चा कहां से आ गया इनका भाई कहां से आ गया तो इनका सगा भाई नहीं था इनके

37:50 चचेरे भाई का राज्य अभिषेक होना था देवव्रत नाम है क्या नाम है देवव्रत नाम है आगे चलेंगे बच्चे क्या बोला आनंद के कहने पर इन्होंने बौद्ध भिक्षुणी संघ की स्थापना की एक आपसे प्रश्न पूछा जाएगा बौद्ध संघ जो है अगर भिक्षुणी संघ है तो कोई मनुष्य जो आपके आदमी है उनका भी तो संघ होगा तो बौद्ध संघ क्या था तो ध्यान से देखना बौद्ध संघ की स्थापना बौद्ध संघ की स्थापना ये कहां हुई थी ये आपकी वाराणसी में हुई थी तो ये दोनों स्थल आप याद रखेंगे बौद्ध संघ की स्थापना कहां ये हुई थी वाराणसी में और बौद्ध विषण संघ की स्थापना हुई थी यह हुई थी वैशाली में अब बात आई बच्चे तीसरी घटना क्या होती है पहली घटना तो हो गई आपकी महाभिनिष्क्रमण दूसरी हो गई आपकी धर्मचक्र परिवर्तन तीसरी

38:39 घटना क्या हुई बताएंगे बच्चे कौन-कौन जानते हैं दूसरी घटना धर्मचक्र परिवर्तन हमने बोली थी और एक घटना को हम मिस कर रहे हैं कौन सी घटना तो याद कर लेना ज्ञान प्राप्त करना मैं चारों घटनाएं आपको क्रम से लिखवा देता हूं एक बार कि पहली घटना महाभिनिष्क्रमण है ध्यान से देखना बच्चे महाभिनिष्क्रमण इसको क्या बोलते हैं ये इनके गृह परित्याग की घटना थी जब इन्होंने अपने घर को त्यागा था दूसरी घटना कहलाई संबोधि संबोधि बोले तो जब बुद्धि से याद रख लेना ज्ञान आया जब क्या हुआ जब ज्ञान प्राप्त हुआ क्या होता है ज्ञान प्राप्त होता है जब तीसरी घटना क्या है बच्चे तीसरी घटना है जब इन्होंने उपदेश अपना दिया पहला उपदेश पहला उपदेश जब इन्होंने दिया तो इसी घटना को क्या कहा गया धर्म

39:27 चक्र प्रवर्तन कहा गया और चौथी घटना क्या है जब इनकी मृत्यु हुई क्या हुई इनकी मृत्यु हुई इसी को क्या कहा गया महापरिनिर्वाण कहा गया क्या कहा गया महापरिनिर्वाण इसको कहा गया इसके बाद में कहते हैं कि भाई बुद्ध की मृत्यु के बाद में इनके शरीर को आठ हिस्सों में जो उस समय के आठ शक्तिशाली राजा थे तो उन्होंने ले लिया और आठ आठ हिस्सों में इनका शरीर बाद में बांट दिया गया था ध्यान से देखना बच्चे क्या बातें मैं आपको बता रहा हूं तो अब बात आती है इन चार घटनाओं के बाद में और क्या-क्या प्रश्न आपसे पूछा जाएगा और किस तरह हम चीजों को रिलेट करेंगे तो एक तो पूछा जाता है बौद्ध संगीतियां क्या पूछा जाता है बौद्ध संगीतियां बाद में हम फिर इसकी शिक्षाओं की बात कर रहे होंगे

40:12 बौद्ध संगीतियां तो बौद्ध संगीतियां कब-कब हुई थी बताएंगे बच्चे देखो वैसे तो जनरली इतिहास अगर आप पढ़ रहे हैं तो आप बोलेंगे चार बौद्ध संगति हुई थी अन्यथा पांच बौद्ध संगति भी हुई है मैंने आपको प्रैक्टिस सेशन में भी बताया था कि पांचवी बौद्ध संगति कहां हुई थी वर्मा में हुई थी लेकिन इतिहास की जब हम बात करते हैं बौद्ध साहित्य कहता है चार संगति हों के बारे में कौन-कौन सी पहली बौद्ध संगति जो आपकी 483 ईसा पूर्व में हुई थी ईसा पूर्व बोले तो बच्चे बिफोर क्राइस्ट ईसा के जन्म से ईसा का जन्म मानते हैं हम ए पहले वर्ष को अभी 2021 चल रहा है ना पहले वर्ष ईसा का जन्म हम मानते हैं तो उससे भी 483 साल पहले यानी आज से देखें तो 2021 प्लस 483 साल पहले तो 483 बीसी में पहली संगति हुई

40:59 फिर दूसरी बौद्ध संगति पूछी जाएगी आपसे तो दूसरी हुई थी 383 बीसी में और अगर आपसे पूछी जाए तीसरी तीसरी बौद्ध संगति कब हुई थी तो तीसरी के बारे में बच्चे दो कथन मिलते हैं आपको कई जगह 255 लिखा मिलेगा और कई जगह आपको 251 बीसी लिखा मिलेगा बात आएगी आपको कौन सा करेक्ट करना है तो कभी पहली बात तो विकल्प मैच नहीं होगा और विकल्प अगर मैच हो जाए तो 255 ईसा पूर्व आप लोगों को लिखना है चौथी बौद्ध संगति आपसे पूछी जाए कब हुई थी तो चौथी बौद्ध संगति आप बताएंगे या तो कहीं-कहीं आपको लिखा मिलेगा पहली शताब्दी पहली शताब्दी और एक्यूरेट वर्ष की हम उसके की बात करें तो वो सन 102 था सन 102 यानी 102 एडी ठीक है अगला प्रश्न क्या बनता है कि पहली कहां

41:46 हुई थी पहली बौद्ध संगति हुई थी आपकी बच्चे राज ग्रह में किधर राज ग्रह में तो ध्यान से याद कर लेंगे ट्रिक भी इस के लिए हम बना सकते हैं पहली कहां हुई थी राज ग्रह दूसरी कहां हुई थी वैशाली तीसरी बौद्ध संगति कहां हुई थी बच्चे पाटली पुत्र में हुई थी और चौथी कहां हुई थी आपकी कुंडल वन में हुई थी कहां कुंडल वन में तो स्थान बहुत इंपोर्टेंट है ध्यान से देखना क्या बताया आर वी प के क्या हम पी के हैं आर वी पी के इस तरह से आप बोल सकते हैं तो राज ग्रह वैशाली क्या बोला मैंने राज ग्रह वैशाली और आपका पाटलीपुत्र और साथ ही क्या कुंडल वन साथ ही क्या है कुंडल अब एक प्रश्न और बनता है बच्चे कि

42:35 ये जो इनके स्थल हैं ये स्थल में मतलब कौन शासक था तो पहली बौद्ध संगति आपकी हुई थी आजाद शत्रु के समय किसके समय आजाद शत्रु के समय हुई थी दूसरी किसके समय हुई थी आजाद शत्रु फिर हुई थी दूसरी काला शोक के समय किसके काला शोक एक शासक हुए तीसरी किसके समय हुई थी अशोक के समय हुई थी मौर्य वंश और फिर क्या हुई कुषाण वंश में जो कनिष्क हुए तो चौथी बौद्ध संगति आपकी हुई कनिष्क के समय और क्या प्रश्न बन सकता है ध्यान से देखना सन हम बात कर चुके स्थान से प्रश्न बनता है बच्चे फिर किसके समय पर हुई थी इसको याद कर लेना ए के ए के क्या ए के ए के पहले आजाद शत्रु बोलेंगे सभी आजाद शत्रु काला अशोक अशोक और कनिष्क फिर इनके पूछे जाते हैं बच्चे य तो राजा हैं और एक पूछा जाता है इनके अध्यक्ष कौन

43:21 थे क्या पूछा जाता है यानी इनके अध्यक्ष कौन थे भाई कोई समिति हो रही है तो समिति किसी एक अध्यक्ष की जरूरत होगी ना जो सारी चीजों को मैनेज करेगा तो वो अध्यक्ष कौन है पहली संगति के समय वो पहली संगति के समय है महाक श्य कौन है महाक श्य है और दूसरी संगति के समय कौन है सबा कामी क्या सबा कामी बोल सकते हैं या सभा कामी आप बोलेंगे तीसरी के समय कौन है मोगली पुत्र थे कौन थे तीसरी बौद्ध संगति के समय मोगली पुत्र और चौथी के समय कौन थे बच्चे वश उमित्र थे कौन वश उमित्र थे बात क्लियर है कुंडल वन किस राज्य में कुंडल वन बच्चे कश्मीर में है कश्मीर में है यह प्रश्न आपसे कभी नहीं पूछा जाएगा प्रश्न आपसे हमेशा पूछा जाएगा कि किस स्थान पर हुई थी और बौद्ध साहित्य में चार स्थानों के बारे

44:08 में पूछा गया है फिर भी यह कहां है कुंडल वन आपका कश्मीर में है पाटलीपुत्र कहां पड़ता था पाटलीपुत्र पटना का पटना का पुराना नाम है यानी जो बिहार की राजधानी आज पटना है ना उसको पहले पाटलीपुत्र कहते थे तो वो प्रश्न आपसे कभी नहीं पूछा जाएगा आप निश्चिंत रहे निश्चिंत रहे सर शरीर को आठ हिस्सों में कैसे बांटा जा सकता तो आठ हिस्से में जिंदा नहीं बांटा मेरे से जो आपका जलाने के बाद में अवशेष बचे ना व्यक्ति को जलाने के बाद में जो अवशेष होते हैं जो राख बचती है उस राख को आठ हिस्सों में बांट लिया और उस पर आठ स्तूप बनाए गए थे ऐसा नहीं है कि उनका हाथ किसी ने ले लिया या उनका पैर किसी ने ले लिया था है ना कभी यह सोच रहे हो कि उनके हाथ पैर ले लिए किसी ने उनके कान ले लिए ऐसा नहीं ओके ठीक है मैं आप लोगों के प्रश्न पढ़ लेता हूं किसी का कोई प्रश्न तो नहीं

44:54 है बताएंगे बच्चे एक बार ये बहुत इंपॉर्टेंट है यह टेबल आप लोगों के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है बच्चे जो बच्चे इसका स्क्रीनशॉट लेना चाहते हैं वो स्क्रीनशॉट ले सकते हैं इसका तो ये तो आपके समझो स्टेटस जैसी चीज है तो ये आपके हमेशा की पॉइंट्स में आप जो नोट्स मेंटेन करते हैं उसमें आपका हमेशा होना चाहिए यह आपके नोट्स में होना चाहिए अब अगली बात आ जाती है महात्मा बुद्ध के गुरु जो आप प्रश्न पूछ रहे थे महात्मा बुद्ध के गुरु कौन थे तो ध्यान से देखना महात्मा बुद्ध के गुरु की अगर हम बात करते हैं तो इनके एक गुरु हैं बृहस्पति क्या बृहस्पति जिनसे इन्होंने क्या ली थी आध्यात्मिक शिक्षा ली थी वैदिक शिक्षा ली थी क्या ली थी वैदिक शिक्षा वेदों की शिक्षा आध्यात्मिक शिक्षा

45:40 इन्होंने ली थी दूसरे इनके गुरु हैं आलर कलाम कौन आलर कलाम इनके शिष्य हैं इनसे इन्होंने किसकी शिक्षा ली थी सांख्य दर्शन मैं एक प्रश्न और पूछना चाहता हूं आप सब बच्चों से कि जो ये सांख्य दर्शन है दर्शन का मतलब होता है बच्चे एक विचारों की धारणा जैसे कि हमारे योग गुरु हुए थे पतंजलि उनकी धारणा थी कि योग इस तरह करना चाहिए योग के यह फायदे होते हैं योग से आप करेंगे तो आपके जीवन में यह बदलाव होगा तो यह दर्शन होता है वो योग दर्शन तो यह दर्शन का मतलब कुछ ऐसे विचार या ऐसी प्रक्रियाएं जिसका पालन आपको करना चाहिए तो सांख्या दर्शन के प्रतिपादक कौन है सांख्या दर्शन के जनक कौन है बच्चे बताएंगे वेरी गुड हां प्राचीन इतिहास बच्चे शुरू करेंगे

46:26 प्राचीन चीन भारत इतिहास सिंधु घाटी सभ्यता बौद्ध और जैन के बाद हम पढ़ रहे होंगे निश्चिंत रहे कोई दिक्कत नहीं बहुत अच्छे से बहुत अच्छे से पढ़ रहे होंगे मेरे से क्या बोला आला और कलाम होंगे फिर बात आती है योग दर्शन की शिक्षा वो दोनों चीजें किसी भी तरह से बच्चे रिलेट नहीं है प्रश्न आएगा आपसे योग दर्शन की शिक्षा इन्होंने किससे ली थी तो याद रख लेना रुद्र पुत्रम से रुद्र पुत्रम से इन्होंने यह शिक्षा ली थी नोट कर लेना इंपोर्टेंट है ये फैक्ट क्या बोला रुद्र पुत्रम से इन्होंने रुद्र पुत्र भी इनको बोलते हैं से यह शिक्षा ली थी कपिल मुनि सभी का एकदम राइट आंसर है बहुत शानदार कपिल मुनि सभी का एकदम राइट आंसर है आगे चलेंगे बच्चे अब साथ ही मैं आपसे एक प्रश्न पूछना चाहता हूं कि मैंने बताया बुद्ध का जन्म कहां

47:13 हुआ था मैंने आप लोगों से पूछा कि बुद्ध का जन्म हुआ था लुंबिनी में तो प्रश्न यह भी तो होगा कि इनकी मृत्यु कब हुई थी तो जन्म तो इनका बच्चे 563 ईसा पूर्व में हुआ था 563 ईसा पूर्व में हुआ था और मृत्यु कब हुई थी इनकी 483 ईसा पूर्व में अब मुझे बताओ आप लोग इनकी मृत्यु किस जगह हुई थी जो महात्मा बुद्ध की महात्मा बुद्ध की मृत्यु हुई थी किस जगह हुई थी बताएंगे बच्चे एक बार नहीं लुंबिनी तो जन्म स्थल है बच्चे लुंबिनी तो इनका जन्म स्थल है नहीं लुंबिनी नहीं होगा आंसर वेरी गुड नोट करते रहेंगे बच्चे फटाफट आंसर

48:00 देंगे वेरी गुड बहुत शानदार मृत्यु इनकी कुशीनगर में हुई थी यह बहुत शानदार जवाब लोगों ने दिया है वेरी गुड मतलब तुम थोड़े बहुत होशियार तो हो हैं चलो आगे चलेंगे बच्चे कब मृत्यु हुई थी इनकी मृत्यु इनकी कुशीनगर में हुई थी और आप एक बात समझनी है देखो प्रश्न अब क्या है जन्म मृत्यु से कभी प्रश्न नहीं बनते मैं आपको वास्तविक बात बताऊं आपके सामने अब कंपटीशन के इस में जन्म मृत्यु जन्म स्थान से प्रश्न नहीं पूछेगा शिक्षाओं से प्रश्न बहुत महत्त्वपूर्ण है शिक्षाओं से प्रश्न बहुत महत्त्वपूर्ण है तो ध्यान से एक बात देख लेना बौद्ध धर्म के त्रिरत्न कौन-कौन से हैं ध्यान से देखो बौद्ध धर्म के त्रिरत्न कौन-कौन से हैं बौद्ध धर्म के त्रिरत्न की बात अगर हम करें तो नंबर एक तो बौद्ध है आपका कौन है बौद्ध नंबर दूसरा

48:47 बोलते हैं हम धम्म और नंबर तीन बोलते हैं संघ ये तीनों स्थापित किए गए कौन-कौन कि त्रिरत्न किसको कहा गया है त्रिरत्न किसको कहा गया है कौन-कौन से त्रिरत्न बच्चे बताएंगे त्रिरत्न आपके बौद्ध धम्म और संघ इसी तरह आएगा बच्चे यहां आपका नंबर दो क्या त्रिपिटक त्रिपिटक त्रिपिटक से क्या मतलब है कि बौद्ध धर्म में तीन पिटक दिए गए हैं तीन पिटक मतलब बौद्ध धर्म में जानने के लिए बौद्ध धर्म में जानने के लिए क्या है तो उन त्रि पिटक में जैसे पहला पिटक आपका है सुत पिटक कौन सा सुत पिटक दूसरा कौन सा है आपका अभि धम्म पिटक कौन सा अभी धम्म पिटक है और तीसरा कौन सा है तीसरा है आपके सामने बच्चे विनय पिटक क्या विनय पिटक आप कहेंगे कि पिटक से क्या

49:35 मतलब है तो त्रि पिटक मतलब तीन पिटक से मतलब क्या है पिटक से मतलब है बौद्ध धर्म में ज्ञान के लिए ज्ञान के लिए पुस्तकें क्या है ये ये पुस्तकें हैं बौद्ध धर्म से संबंधित पुस्तकें हैं तो इसमें क्या-क्या है बच्चे ध्यान से देख लेना अगर आपसे पूछे सुत पिटक ये जो आनंद एक शिष्य थे इनके कौन थे शिष्य आनंद तो इस सत पिटक का जो संकलन किया जो सत पिटक में शिक्षाएं बताई गई है उनका संकलन किसने किया था आनंद ने किया था किसने किया था बच्चे बताएंगे किसने किया था सुत पिटक का ये किया था आपका आनंद ने और इसी में बताए गए हैं सुत पिटक में निकाय क्या बताए गए हैं निकाय बहुत इंपोर्टेंट बात है ध्यान से देखना निकाय कौन-कौन से हैं नंबर एक तो अंग उत्तर निकाय है क्या है आपने अगर नाम सुना हो

50:22 अंग उत्तर निकाय जिससे हमें 16 महाजनपदों के बारे में जानकारी मिलती है 16 महाजनपदों के बारे में जानकारी हमें किससे मिलती है अंग उत्तर निकाय से मिलती है तो प्रश्न आपसे पूछेगा अंग उत्तर निकाय का संबंध किस धर्म से है जैसे कि आपका भगवती सूत्र 24 जैन तीर्थं के बारे में बताता है उसी तरह बच्चे बौद्ध धर्म में क्या है अंग उत्तर निकाय क्या बताता है 16 महाजनपदों के बारे में बताता है अब बताओ अंग उत्तर निकाय किसका अंग है अंग उत्तर निकाय किसका अंग है सुत पिटक का अंग है क्या बोलेंगे बच्चे सुत पिटक का अंग है आगे है दूसरा है खुंदक निकाय क्या नंबर एक तो मैंने बोला अंग उत्तर निकाय दूसरा है खुंदक निकाय कौन सा निकाय खुंदक निकाय क्यों महत्त्वपूर्ण है क्योंकि भैया

51:09 इसी खुंदक निकाय में क्या बताई गई है इसी खुंदक निकाय में बताई गई है जातक कथाएं क्या बताई गई है आपसे प्रश्न पूछेगा जातक कथाओं का वर्णन किसमें है तो आप कहेंगे जातक कथाएं सुत पिटक के सुत पिटक के खुंदक निकाय में बताई गई है किसमें सुत पिटक के खुंदक निकाय में बताई गई प्रश्न पूछा गया है जातक कथाएं क्या है तो जब बौद्ध का जन्म हुआ था बौद्ध के जन्म से पूर्व की जो कहानियां है बौद्ध के जन्म से पूर्व की कहानियां क्या है वो जातक कथाएं हैं प्रश्न पूछा जाएगा बच्चे जातक कथाओं की कुल संख्या कितनी है तो आप बताएंगे जातक कथाओं की कुल संख्या है 549 क्या बोलेंगे 549 निकाय का मतलब होता है बच्चे सोर्स

51:55 क्या सोर्स सोर्स ऑफ नॉलेज तो यहां ये सोर्स ऑफ नॉलेज बना इसको नाम दिया गया खुंदक ध्यान से समझ लेना जातक कथाओं की संख्या कितनी है हर बच्चे का जवाब चाहता हूं जातक कथाओं की कुल संख्या कितनी है तो क्या बोलोगे 549 इसकी जातक कथाओं की कुल संख्या है अब बात आती है बच्चे किसकी अभि दम पिटक की किसकी बात आएगी अभि दम पिटक की बात आएगी तो ऐसे ही इसका संकलन किसने किया था तो मोगली पुत्र तीसरी संगति के अध्यक्ष बताए ना अभी मैंने आपको मोगली पुत्र तो किसने संकलन किया था अदम पिटक का अभि दम पिटक का आप लोग बोलेंगे कि मोगली मोगली पुत्र ने इसका मोगली पुत्र ने इसका मोगली पुत्र ने इसका संकलन किया था एक प्रश्न बनता है एक प्रश्न बनता है चलो प्रश्न बाद

52:41 में बताऊंगा आपको प्रश्न क्या-क्या बनेंगे पहले बात कर लेते हैं हम विनय पिटक की तो क्या विनय पिटक का किसने किया था विनय पिटक का संकलन आपका किया था उपाली ने किसने उपाली ने किया था पहले का आनंद दूसरे का मोगली पुत और तीसरे का क्या है बच्चे नीचे कर लेते थोड़ा सा तीसरे का क्या है इसका किया था उपाली ने किसने किया था उपाली ने किया था बात क्लियर है अब एक प्रश्न आपसे पूछा जाएगा प्रश्न क्या है प्रश्न आपसे पूछा जाएगा कि जो भैया यह बौद्ध धर्म का एनसाइक्लोपीडिया कौन से पटक को कहते हैं बताएंगे एनसाइक्लोपीडिया बौद्ध धर्म का एनसाइक्लोपीडिया कौन से पिटक को कहा जाता है तो आप कहेंगे जी सुत पिटक को कहा जाता है क्योंकि महात्मा बुद्ध से संबंधित बुद्ध ने जो भी ज्ञान दिया उसके बारे में

53:28 जानकारी कहां से मिलती है वो जानकारी हमको मिलती है बच्चे सूत पिटक से क्या सत पिटक से मिलती है अब मैंने एक चीज बताई थी कि चौथी संगति हुई चौथी संगति जिसके अध्यक्ष कौन थे आप कहेंगे कि चौथी संगति कनिष्क के समय हुई थी 102 एडी में उसके अध्यक्ष थे वसुमित्र कौन थे अध्यक्ष वसुमित्र क्या हुआ चौथी संगति में कि बौद्ध धर्म में मतभेद पैदा हो गया क्या पैदा हो गया मतभेद पैदा हो गया लोग बोलने लगे कि महात्मा बुद्ध की शिक्षाएं ठीक है कुछ लोग बोलने लगे महात्मा बुद्ध की शिक्षाएं ठीक नहीं है तो इस तरह से दो पार्टीशन हो जाते हैं बौद्ध धर्म के कब चौथी संगति के बाद में तो यहां क्या जरूरी है लिख लेना चौथी संगति के बाद में चौथी संगति के बाद में

54:14 कितने धर्मों में बट जाता है सॉरी दो शाखाओं में बट जाता है धर्मों में नहीं दो शाखाओं में बट जाता है और दो शाखाओं में बटा दो शाखाएं कौन-कौन सी थी बच्चे एक थी आपकी महायान क्या महायान एक शाखा और दूसरी शाखा थी आपकी हीनयान महायान और हीनयान ये क्या मतलब हुआ ध्यान से देख लेना महायान वो लोग बने जिन्होंने महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं पर सवाल उठाए प्रश्न चिन्ह लगाए बोला हम तो नई शिक्षाएं शामिल करेंगे क्या बोलेंगे नई शिक्षाएं शामिल हम लोग करेंगे अब बात हुई कि यह कौन व्यक्ति था जिसने इस तरह का ये प्रश्न उठाने शुरू किए और लोग उसके साथ हुए तो महायान शाखा के जो संस्थापक हैं महायान शाखा के जो संस्थापक

55:01 हैं वो थे आपके वसुमित्र संगीति क्यों होती है एक बच्चे का प्रश्न है संगति होती क्यों है संगति का मतलब होता है बच्चे बैठक कमेटी क्यों बुलाई जाती है बैठक बुलाई जाती है कि किसी तरह का कोई मतभेद ना रहे कोई मतभेद ना रहे तो विचार गोष्ठी होती है कि भाई किस तरह हम बौद्ध धर्म को आगे बढ़ा सकते हैं कैसे प्रचार प्रसार हम कर सकते हैं जैसे कि अशोक ने क्या बोला था बौद्ध संगति में अशोक ने बोला था कि कि बौद्ध धर्म का प्रचार इस दुनिया के कोने कोने तक होना चाहिए तो इसीलिए संगतिया बुलाई जाती थी कि प्रचार प्रसार कैसे होगा कोई खामी तो नहीं चल रही है तो इसी तरह यहां चौथी में गड़बड़ पैदा हो गई प्रश्न चिन्ह उठ गए तो वसुमित्र ने किसका बोला इसने बोला कि हम नई शिक्षाएं यानी कि हम शिक्षाओं में बदलाव करेंगे तो नई शिक्षाएं अपनाएंगे आप लोगों का सवाल था जी वहां

55:48 मैंने बताया जापान में अलग शिक्षाएं हैं चीन में अलग शिक्षाएं हैं तो वो फर्क है बच्चे महायान और हीनयान शाखा का तो नियान कौन थे जिन्होंने बुद्ध की शिक्षाए मानी किसकी बुद्ध की शिक्षाओं पर जिन्होंने विश्वास किया अब बात आती है कि जिस तरह इसके अध्यक्ष मैंने आपको बताया वसुमित्र है तो इसके अध्यक्ष कौन थे तो इसके अध्यक्ष थे आपके महाक श्य कौन महा कश्यप हीनयान शाखा के संस्थापक या हीनयान शाखा के संस्थापक या प्रवर्तक आप इनको बोल सकते हैं वेरी गुड आगे चंगे बच्चे आगे चलेंगे क्या बताया मैंने अब बात आती है कि बौद्ध साहित्य से रिलेटेड प्रश्न क्या बन सकता है बौद्ध

56:34 साहित्य से रिलेटेड क्या प्रश्न बन सकता है तो नोट कर लेना एक लेखक हुए हैं आपके एक लेखक जैसे किय वसुमित्र ने क्या लिखा था वसुमित्र ने ही लिखा था विभाषा शास्त्र को किसको विभाषा शास्त्र तो आपसे प्रश्न पूछ सकता है विभाषा शास्त्र का संबंध किस धर्म से है किस धर्म से बताएंगे तो आप लोग बोलेंगे कि इसका संबंध है जी आपका बौद्ध धर्म से किसके बौद्ध धर्म से इसी को विभाषा शास्त्र को बौद्ध धर्म का विश्व कोष कहा जाता है बौद्ध धर्म का विश्व कोष बौद्ध धर्म का क्या कहा जाता है इसको विश्व कोष कहा जाता है यानी कि इसमें सब कुछ आपको मिलेगा बौद्ध धर्म के बारे में काफी कुछ इसमें लिखा हुआ है इसी को विश्व कोष कलते हैं बौद्ध बौद्ध साहित्य का बाइबल किसको कहा जाता है बौद्ध साहित्य का

57:22 बाइबल कौन सी पुस्तक कहलाती है बौद्ध साहित्य का बाइबल कौन सी पुस्तक कहलाती है तो क्या जवाब आप लोगों का होगा आप लोग बोलेंगे विभाषा शास्त्र और विभाषा शास्त्र विभाषा शास्त्र विभाषा शास्त्र को ध्यान से देखेंगे बच्चे विभाषा शास्त्र को विभाषा शास्त्र को किसने लिखा था यह लिखा था आपका वसुमित्र ने किसने बोला था वसुमित्र ने लिखा था बहुत शानदार तो एक बच्चा कह रहा है कि सर महाक श्यब तो 483 ईसा पूर्व में थे तो यह हीनयान की स्थापना कैसे कर दी तो बच्चे हीनयान की स्थापना नहीं हुई है आप ध्यान से देखो ना इन्होंने बदलाव थोड़ी किया है यह तो वही लोग हैं जो बौद्ध की शिक्षाओं को मानने के प्रवर्तक लोग थे तो ये हीनयान तो पुरानी शाखा है ना ये नई नहीं है नई

58:09 शाखा तो कौन सी बनी महायान बनी हीनयान तो शाखा क्या विचारधारा पहले से ही मौजूद थी तो ये बताया गया जो पुरानी शाखा थी हीनयान वो किसके समय से थी आपके जब अध्यक्ष थे महाक श्यब उस समय से थी पहली संगति के समय से ये मौजूद थी बात क्लियर है अरे फैन तो चल रहा है लेकिन वो ऐसा है ना स्टूडियो बंद है एसी नहीं चल रहा एसी खराब हो चुका है तो क्लास वो दो तीन दिन से खराब है कोई नहीं आप इधर देखेंगे बच्चे ऐसे ही एक लेखक हुए हैं भैया जिन्होंने बौद्ध साहित्य के बारे में लिखा अश्व घोष क्या अश्व घोष नाम बस आप लोग लिखते रहेंगे अश्वघोष के बारे में आप लोग जानेंगे कनिष्क आपका सिलेबस नहीं है नहीं तो मैं आपको बता रहा होता कि कनिष्क के समय में कनिष्ठ के दरबार में रहते थे कौन अश्वघोष और ये अश्वघोष बौद्ध साहित्य के बारे में क्या लिखा इन्होंने

58:55 सबसे पह पहले तो इनके उपनाम जैसे कि भारत का हेटेक किसको कहा जाता है भारत का हेटेक किसको कहा जाता है आप उपनाम पढ़ते होंगे ना जैसे कि आप लोग पढ़ते होंगे भारत का शेक्सपियर कालिदास को कहा जाता है भारत का आइंस्टीन नागार्जुन को कहा जाता है भारत का न्यूटन आर्य भट्ट को भी कहा जाता है और कई जगह ब्रह्मगुप्त को भी कहा जाता है तो न्यूटन कहलाते हैं हालाकि इसी तरह इनको बोलते हैं भारत का टे क्या भारत का टे महापंडित किसकी उपाधि है बताएंगे महापंडित किसकी उपाधि है यह उपाधि द है आपकी अश्वघोष की भारत का वाल्टेयर किसको कहते हैं भारत का वाल्टेयर क्या बोलेंगे भारत का वाल्टेयर किसको कहा जाता है तो जवाब होगा भारत का वाल्टेयर है अश्वघोष कौन अश्वघोष भारत के पहले कवि भारत के पहले

59:44 कवि कौन कहलाए भारत के पहले कवि किसको कहा जाता है तो ये भी आपका जवाब होगा अश्वघोष को किसको अश्वघोष को कहा जाएगा अब आप कहेंगे जी अश्वघोष को तो कहा दिया लेकिन अश्वघोष को कौन सी इनकी रचना ऐसी थी जो बौद्ध साहित्य के लिए इन्होंने लिखी तो इनकी रचना लिख लेना बहुत इंपोर्टेंट है रचना है इनकी सद्रन ब्रज सूची क्या सोदरा नंद ब्रज सूची सोदरा ब्रज सूची को इन्होंने लिखा है और सौदरा ब्र सूची में उन्होंने क्या लिखा था यहीं से हमको जानकारी हुई थी बौद्ध भिक्षुणी संघ भी एक बना था जो मैंने बताया था ना बौद्ध भिक्षुणी संघ वैशाली तो उसकी जानकारी हमें कहां से हुई वो हमको सौदरा ब्रज सूची से हुई थी बात क्लियर है एक बार थम्स अप

1:00:29 करेंगे सभी बच्चे और बताएंगे बात आप लोगों को क्लियर है वेरी गुड बहुत शानदार आगे चले बच्चे बहुत शानदार बहुत शानदार वेरी गुड वेरी गुड वेरी गुड वेरी गुड वेरी गुड हां बस आराम से बस की पॉइंट्स अपने नोट करते रहे आप जो की पॉइंट्स आप कर सकते हैं तो महात्मा बुद्ध के बारे में बच्चे एक तो आएगा कि इन्होंने शिक्षाओं में क्या दिया था आपका एक दिया था इन्होंने अष्टांगिक मार्ग क्या दिया था अष्टांगिक मार्ग ध्यान से समझना क्या दिया था ध्यान से देखना अष्टांगिक मार्ग इन्होंने क्यों दिया था क्योंकि इनकी जब शिक्षाएं थी तो इन्होंने बोला था दुख है दुख का कारण भी है और दुख

1:01:15 के निराकरण के उपाय भी है और निराकरण का उपाय क्या बताया था इन्होंने अष्टांगिक मार्ग बताया था तो अष्टांगिक मार्ग को बहुत ज्यादा अच्छे से समझने की आपको जरूरत नहीं है फिर भी आप लोग अगर समझना चाहते ते हैं तो अष्टांगिक मार्ग एक आठ नियमों का समूह था जिसमें इन्होंने क्या बोला था सम्यक अवलोकन कि भाई चीजों को सही तरीके से देखो गलत नजरिया आप लोगों का नहीं होना चाहिए चीजों का जो अध्ययन आप लोग कर रहे हैं अवलोकन कर रहे हैं वो सही तरीके से आपका होना चाहिए सम्यक अवलोकन होना चाहिए सम्यक आजीविका के बारे में इन्होंने बोला बोले कि जो आपकी आजीविका है ना जो आप पैसा कमाते हैं वो गलत तरीके से नहीं आना चाहिए वो पैसा किस तरीके से आना चाहिए आपका सही तरीके से आना चाहिए सम्यक डिसीजन आपके होने चाहिए सम्यक निर्धारण आपको करना होगा सम्यक निर्धारण चीजों को निर्धारित सही

1:02:02 तरीके से करें नंबर चार क्या बोला हमेशा एक सही कोशिश आप लोग करते रहे जैसे कि आप परीक्षा देंगे और आप प्रयास ही ना करें आप प्रयास ही ना करें आप ये सोचे कि भाई चल जाएगा काम कल पढ़ाई कर लेंगे तो हमेशा क्या बोला इन्होंने एक सफल जीवन के लिए सम्यक प्रयास यानी कि हमेशा एक अच्छा प्रयास करते रहना चाहिए नंबर पांच क्या सम्यक भाषण सम्यक भाषण से मतलब क्या है अ स्पीच नहीं है नेताओं की कभी नेताओं की स्पीच समझ लो इसको सम्यक भाषण से उन्होंने बोला था आपकी जो बोलने की शैली है वो प्रभावशाली और अच्छी होनी चाहिए आपको गलत शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए आपको विनर्स भाषण फिर बात आई सम्यक जागरूकता अवेयरनेस जिसको हम कहते हैं क्या बोलेंगे

1:02:48 सम्यक जागरूकता तो सम्यक जागरूकता इन्होंने छठा बताया कि सम्यक जागरूकता होना चाहिए और फिर बताया जी जो नियम बने हैं जो नियम बौद्ध के हैं उस पर सम्यक अमल आपको करना होगा सम्यक अमल चीजों पर आपको करना होगा और सही चिंता भी करनी होगी सम्यक चिंता सही चिंता होनी चाहिए व्यर्थ चिंता नहीं बेमतलब की चिंता कर रहे हो आप लोग आप चिंता इस बात की कर रहे हैं कि रात को मैसेज आएगा या नहीं आएगा रात को किस टाइम फोन करना है मिलने कैसे जाना है तो आपको चिंता इन चीजों की है और जब सही चिंता करोगे यानी कि अपने भविष्य की चिंता आप लोग करोगे तो इसको क्या बोलेंगे इसको हम बोलेंगे सम्यक चिंता क्या बोलेंगे सम्यक चिंता तो कितने मार्ग बताए आठ फिर से रिपीट करता हूं क्या बोला आठ फिर से

1:03:35 रिपीट करते हैं बोले क्या बोला उन्होंने कि सबसे पहले तो सम्यक अवलोकन आपका होना चाहिए सम्यक आजीविका आपकी होनी चाहिए सम्यक निर्धारण आप लोगों को करना पड़ेगा बिल्कुल ठीक आप लिख रहे हैं बहुत शानदार बहुत शानदार बच्चे तो क्या बोला सम्यक निर्धारण आपको करना होगा सम्यक प्रयास आपको करना होगा सम्यक भाषण आपको देना होगा सम्यक जागरूकता और सम अमल आप लोगों को करना होगा और साथ ही क्या करनी होगी सम्यक चिंता करनी होगी क्या करनी होगी सम्यक चिंता करनी होगी अब बात आएगी बच्चे बौद्ध धर्म में कितने सील है कुल सील कितने बताए गए सील मतलब मर्यादा एं सील मतलब मर्यादा एं कुल शल कितने है अष्टांगिक मार्ग में तो आठ नियम है कुल शल कितने है बच्चे बताएंगे एक बार तो आप लोग कहेंगे जी कुल शल है 10 इस 10 में क्या था

1:04:22 जैसे अहिंसा था अहिंसा था सत्य बोलना था असती था क्या ध्यान से देखना कुछ प्रमुख की बात कर लेते हैं जैसे अहिंसा अहिंसा दूसरा था आपका सत्य और यह प्रश्न पूछा गया है आयोग द्वारा कि बौद्ध धर्म में अती क्या था अस्ते क्या था तो अस्ते का क्या मतलब होता है बच्चे चोरी न करना क्या होता हैते का मतलब चोरी न करना बताएंगे अते का क्या मतलब होता है अस्ते का मतलब होता है चोरी ना करना नंबर चार क्या बताया इन्होंने अपरिग्रह अपरिग्रह का क्या अर्थ है बच्चे अपरी ग्रह का मतलब होता है धन संचय न करना जो कमाया है उसको खर्च कर दो जो कमाया है उसको खर्च कर दो सील का मतलब होता है बच्चे नियम मर्यादा एं जैसे हमारी

1:05:07 मर्यादा एं होती है जैसे जैन धर्म में आपने सुना होगा जैन धर्म में आप लोगों ने सुना होग ये लोग चीटी भी नहीं मारते आप लोगों को भी बताया गया ना कि भाई आप पूजा करते हैं तो गोहत्या नहीं करोगे गाय को आप लोग ऐसे धमका होगे नहीं गाय के डंडा नहीं मारोगे अब आप जो भैसा वैसा होता है उसके तो डंडा मार देते हो गाय के नहीं मारते हो ना तो ये क्या ये मर्यादा एं हैं ये नियम बनाए गए हैं तो ऐसे ही कुल शल 10 मर्यादा एं बताई गई तो 10 मर्यादाओं में प्रमुख क्या है आपका अस्ते आप लोग बोलेंगे अप ग्रह होता है बोल दिया भैया कि आपका जो दोपहर को भोजन नहीं करना है जो आपकी आरामदायक सैया है उस पर लेटना नहीं है अब हार्ड पर लेटो बात समझ रहे हैं मुलायम गद्दे का इस्तेमाल शराब नहीं पीना है किसी भी तरह का नृत्य और संगीत में शामिल नहीं होना है तो ये नियम बनाए गए तो इनको बोलते

1:05:54 हैं हम द सील क्या बोलते हैं 10 सील बोलते हैं आगे चलेंगे बच्चे द सील के बाद में बात आई कि भाई बताओ अब मैं एक प्रश्न आप लोगों से कर रहा हूं कि बौद्ध धर्म का सबसे अधिक प्रचार किस शासक ने किया था बौद्ध धर्म का सबसे अधिक प्रचार किस शासक ने किया था और यह हमारे सिलेबस में भी हम इसको अच्छे से पढ़ रहे होंगे तो एक एक बच्चे का जवाब चाहता हूं बच्चे एक एक बच्चे का जवाब चाहता हूं देखो हां नीचे लगा दो कमेंट सेक्शन साफ दिखता र कमेंट नहीं दिख रहे ठीक है वेरी गुड बात समझ रहे हैं बच्चे हां ये चार जो है ये जैन धर्म के भी हैं हम जैन धर्म में भी इन चार को पढ़ रहे होंगे मैं पांचवा भी आपको

1:06:39 बताऊंगा कि ये चार जो दिए थे ना ये चार सेम जैन धर्म में भी है जो आपके 23वें 23वें तीर्थंकर थे पार्श्वनाथ ने यही चारों दिए थे इसी में पांचवा जो जोड़ा था ब्रह्मचर्य वो महावीर स्वामी ने जोड़ा था ये ऐसे मिलाकर कुल 10 है आप इनको बढ़ा भी सकते हैं बच्चे मैंने बताया ना जैसे नृत्य संगीत ना नृत्य संगीत को मना कर दिया और आरामदायक सैया आरामदायक सैया बैन कर दी तो ये आप बढ़ा सकते हैं ऐसा नहीं है चार है मैंने कितने बताए 10 है 10 में से प्रमुख चार है बात क्लियर है वेरी गुड अशोक के सन और डॉटर हां अशोक ने बिल्कुल सम्राट अशोक ने इसका प्रचार प्रसार बहुत अच्छे से करवाया था मैं आपको बताऊंगा कि सरमा आट ने किस-किस को भेजा था जैसे कि हम बात करेंगे कि उन्होंने गांधार

1:07:26 उत्तरी भारत में भी बज जातिक को भेजा था अपनी पुत्री संघमित्रा को भी भेजा था पुत्र महेंदर को भी श्रीलंका उन लोगों ने भेजा था तो ये बातें हम कर रहे होंगे बच्चे बात क्लियर है बात क्लियर है एक बार बताएंगे थम्स अप करेंगे बौद्ध धर्म के बारे में बातें आपको क्लियर हैं अगला हमारा टॉपिक है बच्चे जैन धर्म क्या जैन धर्म जैन धर्म के बारे में अगर हम देखें परीक्षा में तो बौद्ध धर्म से काफी छोटा सिलेबस इसका है काफी छोटा सिलेबस है और जानने के लिए क्या-क्या है सबसे पहली बात तो जैन धर्म बौद्ध धर्म से पुराना जैन धर्म क्या है वो बौद्ध धर्म से पुराना है बहुत शानदार बिल्कुल बहुत अच्छी बात कही है कि भाई जो ये न्यूटन था ना ये न्यूटन जैसे लोग तो भारत के शास्त्रों पर ही पले बड़े हैं आर्यभट्ट वो व्यक्ति है जिसने एक

1:08:12 कमरे में बैठ कर के धरती की त्रिज्या बता दी थी जिसने धरती का व्यास बता दिया था कि धरती का व्यास इतना है गुरुत्वाकर्षण बल के बारे में उन्होंने बता दिया था पाई का मान जीरो का मान उन लोगों ने बता दिया था वर्ग मूल घनमूल आर्य भट्ट ने बता दिया था तो यह लोग तो सिद्धांत इन्होंने जो अपने प्रिंसिपल है वह हमारी नीव पर डेवलप किए हैं हमारी नीव पर लोग क्या है अपनी शिक्षा पद्धति को आगे बढ़ाए हैं जैन धर्म की ओर चलते हैं बच्चे संस्थापक कौन है जैन धर्म के उसी क्रम में चलेंगे जैन धर्म के संस्थापक कौन है यह आप लिखेंगे कि ऋषभ देव इनके संस्थापक थे कौन थे ऋषभ देव इनके संस्थापक थे आवाज क्लियर है बच्चे एक बार बताएंगे आवाज क्लियर है एक बार

1:09:13 ब आवाज क्लियर है बच्चे बताएंगे आवाज क्लियर है एक बार बोलेंगे बच्चे आवाज ठीक है चलो आगे चलते हैं एकदम ठीक है संस्थापक कौन है बच्चे इसके ऋषभदेव हैं लेकिन वास्तविक संस्थापक अगर आपसे पूछे दोनों बातों में अंतर है जैसे कि मौर्य साम्राज्य की अगर बात करें तो उसके संस्थापक तो आपके श्री गुुप है लेकिन वास्तविक संस्थापक चंद्रगुप्त प्रथम को माना जाता है ऐसा क्यों क्यों जो शिक्षाओं को ज्यादा बढ़ाए सीमाओं को जो राजा बढ़ाता है ज्यादा उसको वास्तविक संस्थापक कहते हैं जैसे कि गुलाम वंश में आप पढ़ोगे कि संस्थापक तो कुतुबुद्दीन बबक है लेकिन वास्तविक संस्थापक आपका इल्तुतमिश को माना

1:09:58 गया है किसको इल्तुतमिश को माना गया है दिल्ली का संस्थापक किसको माना गया है इल्तुतमिश को माना गया है दिल्ली साम्राज्य का संस्थापक किसको माना गया है गुलाम वंश में तो वो इल्तुतमिश को माना गया है तो यही अंतर है जो शिक्षाओं का ज्यादा प्रसार प्रसार करें तो वास्तविक संस्थापक कौन हुए वास्तविक संस्थापक हुए आपके महावीर स्वामी कौन हुए महावीर स्वामी हुए याद रखेंगे बच्चे कौन है महावीर स्वामी हुए अब बात आती है अब देखो ये मैंने एक बात आपसे बोली कि जैन धर्म बौद्ध धर्म से पुराना था तो इसके सिंधु घाटी सभ्यता में होने के भी प्रतीक मिले ये सिंधु घाटी कालीन था सिंधु घाटी सभ्यता के समय से ही ये जैन धर्म था आगे देखेंगे बच्चे क्या बात मैंने आपको बताई कि कुल कितने तीर्थंकर हुए

1:10:43 हैं अब देखना ध्यान से कुल तीर्थंकर कितने हुए हैं जैन धर्म में तो आप कहेंगे 24 और सीधा-सीधा एक प्रश्न आयोग द्वारा पूछा हुआ है कि तीर्थंकर तीर्थंकर जो ये होता है तीर्थंकर का संबंध किस धर्म से है तो तीर्थंकर शब्द का संबंध किससे है जैन धर्म से कितने हुए कुल 24 हुए और इन 24 के बारे में हमें कहां से पता चलता है कल्प सूत्र पुस्तक में पता चलता है किसमें कल्प सूत्र पुस्तक में पता चलता है और कल्प सूत्र पुस्तक फिर इंपोर्टेंट बात ये आ जाती है कि किसने इसको लिखा था तो भद्र बाह ने इसको लिखा था बात क्लियर है भद्र बाह ने इसको लिखा था बताएंगे बच्चे एक बार भद्र बाह ने इसका लिखा था आगे चलेंगे कुल तीर्थंकर 24 हुए कल्प सूत्र के लेखक हर

1:11:30 बच्चे का जवाब चाहता हूं कल्प सूत्र पुस्तक के लेखक कौन हैं तो आप लोग कहेंगे भद्रबाहु इसके भद्रबाहु इसके लेखक हैं 24 तीर्थं कोमर में जो हुए जो पहले कौन से हुए ऋषभदेव हुए क्या नाम है ऋषभ देव हैं तो इनके प्रतीक हर जो भी जैन धर्म का आपका तीर्थंकर हुआ ना तीर्थंकर बोले तो आप कह सकते हैं कि जिन्होंने जैन धर्म को बढ़ाया और प्रचार प्रसार किया तो बढ़ाने वालों में पहले व्यक्ति कौन है है पहले व्यक्ति हुए ऋषभदेव और इनके प्रतीक पूछे जाते हैं जैन धर्म के जो तीर्थंकर है उनके प्रतीक पूछे जाएंगे तो ऋषभ देव का प्रतीक क्या है वृषभ वृषभ किसको कहते हैं बैल भी आप इसको बोल सकते हैं सांड भी आप इसको कह सकते हैं बैल भी और सांड भी आप इसको कह सकते हैं बात क्लियर

1:12:16 है शिवम इसको आप बैल भी कह सकते हैं सांडट भी कह सकते हैं आगे चलेंगे बच्चे आगे चलते हैं तो यह पहले हैं पहले के बाद में अब एक बात देख लेना यह पूछा जाएगा आपसे आदिनाथ नाम से किसको जाना जाता है आदिनाथ नाम से किसको जाना जाता है केशरिया देव नाम से किसको जाना जाता है तो वह कौन है वह पहले थे आपके ऋषभ देव यह क्या है यह पहले हैं कौन है पहले सभी 24 को पढ़ने की आपको आवश्यकता नहीं है पहले तीन पढ़ो और बाद के तीन पढ़ो पढ़ो और बाद के तीन आप लोग पढ़ो बहुत शानदार बताया ना ऐप पर मिल जाएगी आपको पीडीएफ पीडीएफ आप लोगों को ऐप पर मिल जाएगी वेरी

1:13:18 गुड ठीक है आवाज क्लियर है अभी हैं ठीक है ऋषभ देव क्या बोला मैंने पहले तीर्थंकर थे और ऋषभ देव के ही पुत्र हुए देखो बहुत इंपोर्टेंट बात है एक पुत्र था इनका भरत और एक था इनका बाहुबली पुत्र क्या नाम था बाहुबली अब एक प्रश्न आपसे पूछूंगा आप लोगों ने सुना होगा इसी को बोलते हैं महाबली बाहुबली अब ये साउथ की बॉलीवुड वाला बाहुबली नहीं है ध्यान से देखें एक बार मैं आपसे पूछ रहा हूं कि आपने कहीं सुना है बाहुबली की प्रतिमा आप जानते हैं आज भारत की सबसे ऊंची प्रतिमा कौन सी है स्टैचू ऑफ यूनिटी जो आपकी कहां है गुजरात के नर्मदा जिले में सबसे ऊंची मूर्ति है एक टाइम पर सबसे ऊंची मूर्ति किसकी थी

1:14:03 सबसे ऊंची मूर्ति हुआ करती थी आपकी बाहुबली की मूर्ति ये कौन सी थी जिसको हम बोलते थे गोमतेश्वर सुनिए मूर्ति के बारे में नहीं सुना है गोमतेश्वर श्रवण बेल गोला कर्नाटक में स्थित थी आपकी बाहुबली और बाहुबली बोले तो महाबली की मूर्ति तो ये महाबली कौन थे ये बाहुबली कौन थे तो आप लोग बताएंगे कि ये बाहुबली कौन थे ये ऋषभ देव के पुत्र थे कौन थे ऋषभ देव के पुत्र थे बात क्लियर है आगे चलेंगे बच्चे पहले इनके पुत्र थे आगे चलना है नेक्स्ट बात क्लियर है वो कमेंट सेक्शन दिखाओ कमेंट सेक्शन नहीं दिख रहा कितने बजे क्लास खत्म होगी तो क्लास बच्चे लगभग पा घंटे में हम लोग खत्म कर लेंगे पाच घंटे में कवर कर लेंगे पाच घंटे

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