0:01 [संगीत] नमस्कार आप देख रहे हैं चंद्र ग्रहण स्पेशल कालचक्र और मैं हूं आपके साथ अंजलि आनंद और मेरे साथ हैं प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडे जी बहुत-बहुत स्वागत है पंडित जी आपका पितृ पक्ष के पहले दिन लगने जा रहा है पूर्ण चंद्र ग्रहण इस ग्रहण के साए से क्या आप बच पाएंगे? तो जी हां, 7 सितंबर को इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने वाला है। क्या यह चंद्र ग्रहण हमारे देश में दिखेगा? यह चंद्र ग्रहण आंशिक है या पूर्ण? कितने बजे से
0:47 इसकी शुरुआत होगी? कब से इसका सूतक लगेगा? कब यह चंद्र ग्रहण अपने चरम पर होगा? और कब इसका प्रभाव बिल्कुल खत्म हो जाएगा? यह वो सारे सवाल हैं जो आपके मन में होंगे और मेरे भी मन में है चंद्र ग्रहण का सभी 12 राशि वालों पर कैसा असर होगा? किन राशियों के लिए यह चंद्र ग्रहण सबसे खतरनाक साबित होने वाला है और किन राशियों को यह चंद्र ग्रहण सुकून देकर जाएगा यही आज कालचक्र में पंडित सुरेश पांडे जी आपको बताएंगे। तो अगर आप भी चंद्र ग्रहण के बुरे साइज से बचना चाहते हैं और पाना चाहते हैं चंद्र ग्रहण से जुड़ी हर छोटी जानकारी तो ध्यान से देखिए आज का हमारा यह स्पेशल शो। इसके अलावा अगर आपका भी कोई सवाल है तो आप हमें फोन कर सकते हैं। हमारा नंबर है 0120652415 और अपनी चर्चा की शुरुआत करें। उससे पहले
1:34 जान लेते हैं आज का शुभ मुहूर्त। [संगीत] आज 5 सितंबर 2025 दिन शुक्रवार है। आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि रात 3:12 तक इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू होगी। श्रवण नक्षत्र रात 11:38 तक इसके बाद धनिष्ठा नक्षत्र शुरू होगा। शोभन योग दोपहर 153 तक इसके बाद अतिगंड योग शुरू होगा। आज शुक्र प्रदोष व्रत है और आज रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बने हुए हैं। इसी क्रम में नित्य की तरह आज भी कुछ अशुभ
2:20 मुहूर्त हैं। जैसे शुक्रवार है तो राहु काल रहेगा सुबह 10:30 से दोपहर 12 तक। गुलिक काल रहेगा सुबह 9:10 तक और यमगंड काल रहेगा दोपहर 3:29 से शाम 5:3 तक। इन अशुभ समयों में किसी नए कार्य का शुभारंभ और यात्रा के लिए प्रस्थान नहीं करना चाहिए। जय मां बिंदवासनी। तो चलिए अब जानते हैं पंडित जी से कि 7 सितंबर को लगने वाले साल के आखिरी चंद्र ग्रहण का समय क्या होगा? इसका सूतक काल क्या होगा? इसका समाप्ति काल क्या होगा और सबसे पहले पंडित जी से यह समझते हैं। पंडित जी हमारे दर्शकों को यह बताएं आप। देखिए यह साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 7
3:06 सितंबर को लगने जा रहा है। यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण है। एशिया, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और प्रशांत महासागर में भी यह ग्रहण दिखाई देगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण 3 घंटे 28 मिनट का है और 2 सेकंड यह भारत में दिखाई देगा कितना 3 घंटा 28 मिनट 2 सेकंड ग्रहण का स्पर्श काल 7 सितंबर 2025 को रात 9:58 पर होगा। ग्रहण का मध्य काल 7 सितंबर की रात 11:41 पर होगा और ग्रहण का मोक्ष काल 8 सितंबर
3:55 की मध्य रात्रि 1:26 पर होगा। पूर्ण चंद्र ग्रहण का सूतक 7 सितंबर को दोपहर 12:19 से शुरू होगा। ग्रहण के सूतक की समाप्ति 7 सितंबर की मध्य रात्रि अर्थात 8 नवंबर की सुबह 1:26 पर होगा। 7 सितंबर को साल का आखिरी और पूर्ण चंद्र ग्रहण माना जा रहा है और है भी। कुंभ राशि और पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र पर यह ग्रहण लगने जा रहा है। देखिए चंद्र ग्रहण का संबंध मन भावना और मानसिक स्थिति से होता है। इसलिए यह घटना ना सिर्फ खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि आध्यात्मिक मानसिक और ज्योतिषीय
4:41 दृष्टि से भी इसका गहरा प्रभाव सभी पर पड़ने वाला है। जय मां निवासनी। तो 7 सितंबर को लगने वाला चंद्र ग्रहण किस राशि में लग रहा है? ग्रहण काल में नक्षत्रों की स्थिति क्या होगी? और किन राशि वालों के लिए साल का आखिरी चंद्र ग्रहण अशुभ है? चलिए अब इसी के बारे में पंडित जी से जान लेते हैं। बताएं पंडित जी। देखिए चंद्र ग्रहण का नक्षत्र से भी कुछ संबंध है। उसका भी असर [संगीत] आमजन के ऊपर पड़ता है। यह मैं आपको बताना चाहूंगा। 7 सितंबर को पूर्णिमा का श्राद्ध
5:26 है और साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण है। 7 सितंबर को लगने वाला पूर्ण चंद्र ग्रहण पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में लगने जा रहा है। जिन लोगों का जन्म पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में हुआ है। उनके लिए भी चंद्र ग्रहण शुभ नहीं है। पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में जन्मे लोगों को कष्ट, रोग और धन हानि का खतरा हो सकता है। चंद्र ग्रहण कुंभ राशि में लगने जा रहा है। ऐसे में इसका अर्थ यह होगा जो मैं आपको बताना चाहूंगा कि चंद्र ग्रहण जब कुंभ राशि में लग रहा है तो कुंभ राशि में राहु चंद्रमा को पीड़ित कर रहा है। जिस पर
6:12 जिस राशि पर ग्रहण लगता है उसके लिए ग्रहण अशुभ साबित होता है। चंद्र ग्रहण के प्रभाव के कारण कुंभ राशि वालों को भय, क्रोध, रोग, शोक, दुर्घटना और शत्रुता का सामना करना पड़ सकता है। कुंभ राशि वालों को थोड़ा संभलकर रहने की जरूरत है। आपके व्यक्तित्व पर चंद्र ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वैवाहिक जीवन पर अच्छा असर नहीं होगा। जीवन साथी की सेहत का भी ध्यान रखना होगा। साझेदारी का कारोबार है तो थोड़ा सतर्क होकर के आगे बढ़ना पड़ेगा। जय मां बिनवासनी। तो चलिए अब बात कर लेते हैं राशियों की और सबसे पहले शुरुआत करते हैं मेष राशि की। 7
6:59 सितंबर को लगने वाला चंद्र ग्रहण मेष राशि वालों के लिए कैसा रहने वाला है? क्या यह ग्रहण इनके लिए शुभ होगा या अशुभ? साथ ही इन्हें ग्रहण काल में कौन सी सावधानी बरतनी चाहिए? यह जानते हैं। [संगीत] देखिए अगर आपकी मेष राशि है अगर आपकी जन्म राशि या प्रचलित नाम से आपकी राशि मेष राशि है तो आपके जन्म कुंडली के 11वें भाव में ग्रहण लग रहा है। 11वां भाव लाभ का भाव कहलाता है। आपके लिए चंद्र ग्रहण शुभ है। आर्थिक लाभ, नौकरी में तरक्की, कारोबार में मुनाफा, परिवार में सुख शांति की पूरी संभावना
7:47 रहेगी। आपकी मानसिक स्थिति में भी मजबूती आएगी। लेकिन दोस्तों और भाई-बन से तनाव मिल सकता है। दूसरों से कम उम्मीद रखें। संवाद स्पष्ट रखें। जल्दबाजी में पैसे के लेनदेन से बचें। आत्मचिंतन करें और खुद के साथ थोड़ा समय व्यतीत करें। जय मां बिनवासनी। तो आगे वृषभ राशि वाले के बारे में जानेंगे। लेकिन पंडित जी एक मेरे ज़हन में सवाल है क्योंकि अक्सर हम लोग यह सुनते आए हैं सूर्य ग्रहण के बारे में कि आप नंगी आंखों से नहीं देख सकते। वो अच्छा प्रभाव नहीं होता। तो क्या चंद्र ग्रहण के लिए भी ज्योति में यही कहा जाता है क्या चंद्र ग्रहण को देख सकते हैं? क्योंकि एक देखिए
8:32 क्यूरोसिटी भी होती है। कई बार लोग देखना चाहते हैं ग्रहण को। तो क्या चंद्र ग्रहण की अगर बात हो तो उस ड्यूरेशन में देख सकते हैं? ग्रहण देखना अच्छी बात नहीं मानी जाती है। चाहे वो सूर्य ग्रहण हो चाहे वो चंद्र ग्रहण हो ग्रहण को देखना शास्त्रों में निषिद्ध माना गया है और अगर आप देखने की इच्छा ही रखते हैं तो एक्सरे प्लेट जो होती है उसके थ्रू आप देख सकते हैं या रंगीन चश्मा लगा करके आप देख सकते हैं। खुली आंखों से देखने पर कुछ लोगों को नुकसान हो जाता है। ऐसा तो नहीं कि 100 लोग देखेंगे तो 100 लोग अंधे हो जाएंगे। हम लेकिन 100 में से एक दो लोगों के ऊपर इसका बुरा इफ़ेक्ट पड़ सकता है। ठीक है? जी जैसे दुर्घटना हर गाड़ी की तो नहीं होती है ना। हजारों में एक आध गाड़ी की होती है। लेकिन दुर्घटना से सावधानी के लिए
9:19 बोर्ड जगह-जगह लगे रहते हैं सबको अलर्ट करने के लिए। तो इसलिए बुराई चाहे थोड़ी ही हो लेकिन बुराई बुराई ही होती है। तो इसलिए चंद्र ग्रहण को भी नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए। जी तो बिल्कुल देखिए दर्शकों को मैं यह कहना चाहूंगी जैसा कि आपने सुना पंडित जी को कि आप चंद्र ग्रहण को भी नंगी आंखों से ना देखें। अगर आप देखना चाहते हैं तो आप एक्सरे से आप रंगीन चश्मा लगा के देख सकते हैं जैसा कि पंडित जी ने भी बताया। चलिए आगे बढ़ जाते हैं और बात कर लेते हैं वृषभ राशि वालों के बारे में कि 7 सितंबर को लगने वाले चंद्र ग्रहण का साया वृषभ राशि वालों पर कैसा होगा? ग्रहण के बाद इनके जीवन में क्या बदलाव होंगे? साथ ही ग्रहण काल में किन बातों का इन्हें ध्यान रखना है? आइए जानते हैं। वृषभ राशि के जातकों के लिए 7 सितंबर को
10:06 लगने वाला चंद्र ग्रहण शुभ फल देगा। आपकी राशि से दवें भाव यानी करियर भाव में चंद्र ग्रहण लग रहा है। कार्य क्षेत्र पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। लेकिन नौकरी बदलने में किसी तरह की जल्दबाजी आपको नहीं करनी चाहिए। अपने वरिष्ठ अधिकारियों से विवाद नहीं करना चाहिए। कार्य क्षेत्र में राजनीति का शिकार होने से बचें। आपको अपनी और अपने पिता की सेहत का ध्यान रखना होगा। मानसिक तनाव भी हो सकता है। परिणाम पर बहुत ध्यान ना देते हुए सिर्फ कर्म करना चाहिए। इससे भी आपको सफलता मिलेगी। जय मां बिंदवासनी। तो आने वाले चंद्र ग्रहण में हम सभी को कौन से उपाय करने चाहिए और कौन सा दान
10:53 करना चाहिए जिसमें हमें चंद्र ग्रहण के बुरे प्रभाव से बच सकें। आइए जानते हैं। बताएं पंडित जी। चंद्र ग्रहण पर दीपदान जरूर करना चाहिए। दीपदान का मतलब यह नहीं होता किसी को दिया देना चाहिए। दीप दान का मतलब होता है कि मिट्टी के दिए में तिल का तेल या देसी गाय का घी लगाकर भर करके उसमें रुई की बत्ती डाल के दीप प्रज्वलित करना चाहिए। संक्रांति सूर्य ग्रहण चंद्र ग्रहण वैद्यति योग व्यतिपात योग उत्तरायण दक्षिणायन एकादशी शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि छ तिथि
11:40 सप्तमी और अष्टमी पर स्नान करके अपने घर के आंगन में घी से भरा मटका और जलता हुआ दीपक भूमि देव को दान करना चाहिए। अब तो है ही नहीं है आंगन तो आप अपने बालकनी में भी छोटा सा पात्र रख सकते हैं। इससे ओजस्वी काया प्राप्त होती है। अब सवाल आता है कि ग्रहण में दान क्यों जरूरी है? महर्षि वशिष्ठ के अनुसार कन्या, मिथुन, मीन, तुला, मेष और धनु संक्रांति में दिए हुए दान का अनंत गुना फल प्राप्त होता है। उत्तरायण या दक्षिणायन में दिए हुए दान का करोड़ गुना फल मिलता है। गंगा के किनारे दिए हुए दान
12:27 का लाख गुना फल मिलता है। खट स्थिति संक्रांति यानी जब सूर्य, मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशि में प्रवेश करते हैं तो उस दिन दिया गया दान हजार गुना फल देता है। चंद्र ग्रहण में दिया दान लाख गुना और सूर्य ग्रहण में दिया दान हजार गुना फल देता है। व्यतिपात योग में दिए दान का अनंत फल होता है। किसी भी ग्रहण में गाय, भूम, सोना और धान का दान महा फलदाई होता है। पद्म पुराण के उत्तरखंड और गरुड़ पुराण के धर्मकांड के अनुसार स्वर्ग अग्नि की पहली संतान है। सोना अत्यंत पवित्र और तप का प्रतीक है। ग्रहण में सोना दान करने
13:15 से सभी पाप समाप्त हो जाते हैं। भूमि भगवान विष्णु का स्वरूप मानी गई है। भूमि पालन करने वाली धारण करने वाली धरित्री है। इसीलिए पृथ्वी का एक नाम धरित्री भी है। जो ग्रहण में भूमि का दान करता है, वह तीनों लोकों का पुण्य प्राप्त करता है। भूमि का दान करना मुश्किल होता है। ऐसे में मिट्टी का बर्तन या किसी धातु की प्लेट दान करना चाहिए। गाय सूर्य की पुत्री है। गाय जीवन, प्रकाश और संपदा की जननी है। ग्रहण के समय गोदान करने से अनेक जन्मों के पापों का क्षय होता है। गाय नहीं दे सकते तो गाय की मिट्टी या चांदी की प्रतिमा दान कर सकते हैं। इन तीनों
14:02 वस्तुओं का दान करना तीनों लोकों को देने के समान अत्यंत महा पुण्यकारी माना गया है। ग्रहण में तुला दान पुण्य देता है। तुला दान क्या होता है? अपने वजन के बराबर का अनाज दान करना तुला दान कहलाता है। और यह ग्रहण दोष को समाप्त करता है। ग्रहण काल में सभी दान भूमि दान के समान सभी ब्राह्मण ब्रह्मा के समान और सभी जल गंगाजल के समान हो जाता है। ग्रहण पर अन्न का दान करने से अन्न और धन की स्थिरता मिलती है। पके हुए अन्न का दान ना करें। सिर्फ कच्चा अन्न जैसे चावल, गेहूं, दाल, आटा यह सब दान करना चाहिए। ग्रहण में कपड़े और तिल का दान यमदंड से रक्षा करता है। काले
14:48 तिल, कपड़े और घी दीपक का दान करने से पितृ दोष और पूर्व जन्म के पापों का क्षय होता है। चंद्र ग्रहण में चांदी और सूर्य ग्रहण में सोना देना श्रेष्ठ होता है। ग्रहण में आसन यानी कुशा का आसन या कंबल दान करने से भी मनोकामना पूरी होती है। जय मां बिंदवासनी। तो देखिए आज कालचक्र आप सबके लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि पंडित जी आपको बता रहे हैं चंद्र ग्रहण पे आपको क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए और खासतौर पर किन राशि पर इसका इंपैक्ट होगा अगर आपके ज़हन में भी कोई सवाल है तो आप हमें फोन कर सकते हैं पंडित जी से सीधे सवाल पूछ सकते हैं। आपके टेलीविजन स्क्रीन पर नंबर फ्लैश हो रहे होंगे इस नंबर पर आप कॉल करके सवाल पूछ सकते हैं। वहीं हमारी एक दर्शक भी
15:34 जुड़ चुकी हैं पुणे से। आप सवाल पूछ सकती हैं। प्रणाम पंडित जी। मेरा नाम रेखा है। जी बोलिए। हां पंडित जी मैं अपने पति के बारे में पूछना चाहती हूं। मेरा पति का बर्थ डेट 9 अक्टूबर 1978 है। और पंडित जी मेरे पति का बहुत कर्जा छड़ा हुआ है। एक कर्जा उतारने के लिए दूसरा लेना पड़ रहा है। हालत बहुत खराब है। पंडित जी प्लीज कोई उपाय बताइए। और पंडित जी मुझे यह पूछना था हमारे घर में श्री यंत्र तस्वीर में मड़ी हुई है वो क्या रखना ठीक है और पंडित जी एक और सवाल था कि हम लोग जो ऑनलाइन पूजा कराते हैं जहां हम पहुंच नहीं पाते वहां हम ऑनलाइन पूजा कराते हैं वो मान्य है क्या पितु पक्ष की पूजा वगैरह हम ऑनलाइन करा सकते हैं
16:20 देखो पूजा तो कहीं भी होगी तो मान्य हो जाएगा चाहे ऑनलाइन हो चाहे ऑफलाइन हो लेकिन होनी चाहिए जैसे आपने हमसे कह दिया कि आप हमारे हमारे लिए पूजा करिए और हमने आपके लिए सही में पूजा किया मनोयोग से तो इसका लाभ तो आपको मिलेगा। इसमें तो कोई संदेह नहीं है लेकिन पूजा होनी भी चाहिए। इस समय विश्वसनीयता का बड़ा अभाव है। संकल्प लेने के बाद भी पूजा का अनुष्ठान लेने के बाद भी लोग भगवान से नहीं डर रहे हैं और पूजा नहीं कर रहे हैं। तो यह बात एक होती है अगर कोई विश्वसनीय व्यक्ति पूजा करा रहा है तो निसंदेह उसका पूरा लाभ मिलेगा। रही बात रेखा आपके पति के कर्ज की
17:06 तो देखो बेटा बताना चाहूंगा कि यह तो आपके हाथ में है चुटकी में आप उनका कर्ज उतार सकती हैं। आप एक काम करिए सुबह और शाम सात-सात बार ऋण मोचन मंगल स्त्रोत का पाठ करना शुरू करिए। और जो श्री यंत्र आपका फ्रेम में मीढ़ा हुआ है उसको रहने दीजिए। उसको हटाने की जरूरत नहीं है। लेकिन एक चांदी स्फटिक या पारे का श्री यंत्र जो कम से कम 150 ग्राम का हो इसे अपने घर ले आइए और उसे रोज पीतल की थाली में रख के दूध से जल से दूध से गन्ने के रस से शहद से घी से दही से दक्षिणावर्ती शंख के द्वारा अभिषेक करिए और श्री सूक्तम के मंत्रों को बोलते रहिए। अगर आपको श्रीसक्तम का मंत्र नहीं
17:53 याद है तो आप अपने मोबाइल के YouTube में जाकर के श्रीस सूक्तम टाइप कर दीजिए तो वो फिर बजने लगेगा और उसी के आधार पर आप पूजा करिए। इसके बाद उस श्री यंत्र को अच्छे से धो करके एक चांदी की कटोरी में लाल कपड़ा बिछा करके और उस पर स्थापित कर दीजिए। श्री यंत्र के ऊपर एक कलावा लपेट दीजिए। थोड़ा सा हल्दी और चावल डाल दीजिए। रोली, सिंदूर और अीर गुलाल डाल दीजिए। और लाल पुष्प लाल फूलों से उन्हें सजा दीजिए। चंदन हो सके तो लगा दीजिए। इसके बाद धूप जलाइए, दिया जला के दिखाइए। और उसके बाद हाथ धो लीजिए। हाथ धोने के बाद एक थाली में सुंदर व्यंजन भगवती के लिए या अगर कुछ नहीं है तो काजू, किशमिश, मिश्री यह एक
18:40 पीतल की प्लेट में रख के भगवती को निवेदन करिए प्रसाद के लिए और उसके बाद एक बगल में छोटी सी चांदी की गिलास में भगवती के लिए महालक्ष्मी के लिए पानी रख दीजिए। उसके बाद में हो सके तो एक पान का पत्ता बीड़ा बनाकर लौंग की कली चुभोकर वह श्री यंत्र पर रख दीजिए। उसके बाद पांच दिए वाली बत्ती से या एक ही दिए वाली बत्ती से उनकी आरती कर लीजिए और श्री सूक्तम के 16 मंत्रों का 16 बार सुबह 16 बार शाम पाठ करिए। यह उपाय आप करिए। 18 महीने के अंदर आपके पति के ऊपर से सारा कर्जा उतर जाएगा और आप एक सम्मानपूर्वक जीवन जीने लायक हो जाओगे। मैं तो यही मानता हूं। मैं अपनी जिंदगी का अनुभव बता रहा हूं रेखा वैसे कि अभी हिंदुस्तान में 90% लोग ऐसे हैं जो
19:29 पूजा पाठ धर्म कर्म की विधा से वंचित हैं जिन्हें सही मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है और तमाम नाना प्रकार के दोषों को भुगत रहे हैं। नाना प्रकार की परेशानियों को नाना प्रकार के कष्टों को झेल रहे हैं। अगर उन्हें भी धर्म का ज्ञान हो जाए और धर्म के पथ पर चलना शुरू कर दें तो मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं सब लोगों के जीवन में खुशियां आ सकती हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है। जय मां बिंदवासनी जी। आगे पंडित जी से मिथुन राशि वालों के बारे में भी जानेंगे। लेकिन पंडित जी अक्सर कालचक्र में मैंने देखा है कि आपने यह जिक्र किया है। हमारे दर्शकों को बताया कि जब भी ग्रहण हो तो आप मानसिक जप करें। क्या इसके पीछे कोई वजह है कि मानसिक जप
20:15 ही करना चाहिए। आपने कहा है कि उस वक्त मंत्रों का तेज उच्चारण करके नहीं आप मन के अंदर ही उच्चारण करें। इसके पीछे क्या कोई वजह है? ऐसा नहीं है। अच्छा अगर साधक की प्रारंभिक अवस्था है। हां। साधना देखो जप जो होता है वो चार प्रकार से होता है। जी। पहला जप होता है वाचिक। दूसरा जप होता है उपांश। और अब इसको दूसरी भाषा में हम कर्मकांड की भाषा में समझा रहे हैं। जी जी। बैखरी बैखरी माने बोलकर मध्यमा माने उपांशु होठों को हिलाकर पश्यति माने बिना मतलब कि कोशिश किए मंत्र जप चले परा परा जो है वो नाभि से चलता है वो अपने आप मंत्र जप होने लगता है। ये चार
21:01 अवस्थाएं होती हैं। लेकिन प्रारंभिक अवस्था जो होती है शुरुआत जहां से आदमी करता है। जी जैसे कबूतर को देख के बच्चा क पढ़ता है। उसी तरह से पहले बैखरी में ही मंत्र जप करना चाहिए। जब बैखरी की स्थिति अच्छी हो जाएगी तो उपांश में अपने आप परिवर्तित हो जाएगा। आपके होठ हिलेंगे लेकिन बगल में बैठा हुआ व्यक्ति आपके मंत्र जप को नहीं सुनेगा। और जब बैखरी में भी सिद्धि आपको प्राप्त हो गई तो ये पश्यति अर्थात केवल आप मंत्र को आंखों से देख रहे हैं और मंत्र चलने लगेगा। और जब यह स्थिति भी गाढ़ हो जाएगी तो इसके बाद परा जो मतलब कि आपके नाभि से नाभि से प्रकट होगा और हर समय इसका धुनकारा चलता रहेगा। ऐसा व्यक्ति जो है
21:48 ऋषि तुल्य हो जाता है। ऐसा व्यक्ति जो है ईश्वर के सानिध्य में हो जाता है। तो ये जप करने की चार विधाएं हैं। चार विधाओं में आप किस योग्यता के छात्र हैं? किस योग्यता के आप हैं वो आपको करना चाहिए। जी जैसी आपकी योग्यता हो अगर साधना का प्रारंभिक काल है तो फिर आपको बोल-बोल के ही जप करना चाहिए। अगर आपकी साधना का थोड़ा अच्छा स्तर है तो आप मानसिक रूप से भी जप कर सकते हैं। चौथे प्रकार वालों की तो संख्या ना के बराबर ही है समाज में। तीसरे प्रकार तक के लोगों की संख्या है। जहां तक मेरे अनुभव की बात है जी तो माला पर मानसिक जप भी किया जा सकता है। और एक बात मंत्र का अजप करने से
22:35 मंत्र के जप की अपेक्षा अजप करने से हजारों गुना ज्यादा फल मिलता है। अजप माने मत जो बिना जपे जप जाए। अजप जिसका जप ना हो वो जप हो जाए। अजप ठीक है? जैसे राम राम नाम का आपको जप करना है तो रा सोचते हुए श्वास को नाभि तक ले जाइए और म सोचते हुए श्वास को बाहर निकालिए। रा म रा म जैसे कुछ लोग गायत्री मंत्र का करते हैं। ओम भूर भुव स्वः तत्सवतुर्व वरेण्यम यहां तक श्वास को ले जाइए नाभि तक। भर्गो देवस्य धीमहि धियो योनः प्रचोदयात। यह सोचते हुए श्वास को बाहर निकालिए। अगर ये वाली साधना केवल 10 माला हो जाए जी और एक साल हो जाए अरे तो उस आदमी की धोती
23:24 आकाश में सूखेगी वो कोई साधारण नहीं होगा उल्टा नाम जपत जग जाना वाल्मीकि भय ब्रह्म समाना इसका तो एक अर्थ लोग यह करते हैं कि वाल्मीकि ने मरा मरा किया तो वो मतलब कि जो है ब्रह्म पद को प्राप्त कर गए और इसका एक दूसरा अर्थ जो हमारे गुरुदेव बताते हैं। वह कहते हैं कि जप का उल्टा होता है अजप। जप का उल्टा होता है अजप। तो उल्टा नाम माने जप नहीं अजप करते हुए उल्टा नाम जपत जग जाना। वाल्मीकि भय ब्रह्म समाना। अजप करने से वाल्मीकि जो है ब्रह्म के समान हो गए। जी। हां। तो कहने का अर्थ ये है। जी बिल्कुल। तो चलिए अब बात कर लेते हैं मिथुन राशि वालों के बारे में कि 7 सितंबर
24:09 को लगने वाला चंद्र ग्रहण मिथुन राशि वालों को सुख देगा या दुख? क्या साल का आखिरी चंद्र ग्रहण इनके लिए खुशियां लेकर आ रहा है या नहीं? यह जान लेते हैं। देखिए आप मिथुन राशि के अगर जातक हैं तो आपको बताना चाहूंगा कि आपकी कुंडली के भाग्य स्थान में चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। नौवां भाव धर्म और पिता का भाव ज्योतिष शास्त्र में माना जाता है। आपके लिए चंद्र ग्रहण मध्यम फलदाई रहेगा। गुरु समान किसी व्यक्ति या पिता से मतभेद हो सकता है। विदेश यात्रा की प्लानिंग आपकी प्रभावित हो सकती है। खर्च बढ़ सकता है। हालांकि आपके रुके हुए काम तो बनेंगे। रुका हुआ धन
24:55 भी मिलेगा। अचानक कहीं से लाभ मिलने की भी संभावना है। लेकिन आपकी अपनी सेहत का भी ध्यान रखना होगा। धर्म कर्म में ज्यादा ध्यान लगाएं। इससे निसंदेह आपको लाभ मिलेगा। जय मां निवासनी। 7 सितंबर को लगने वाले चंद्र ग्रहण के प्रकोप से बचने के लिए हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही कर्क से लेकर मीन राशि वालों पर चंद्र ग्रहण अपना क्या प्रभाव डालेगा? यह सब बताएंगे आपको पंडित जी। लेकिन एक छोटे से ब्रेक के बाद आप बने रहिए चंद्र ग्रहण स्पेशल कालचक्र के साथ। [संगीत]
25:47 ब्रेक के बाद आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है चंद्र ग्रहण स्पेशल कालचक्र में। आने वाली 7 तारीख को इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लग रहा है। ऐसे में ग्रहण से पहले ग्रहण के दौरान और ग्रहण के बाद इन्हें कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए यह जानते हैं। ग्रहण से पहले सभी खानेपीने की चीजों में तुलसी या कुसा डाल देना चाहिए। 7 सितंबर को रविवार है। ऐसे में एक दिन पहले से ही तुलसी तोड़ लें। ग्रहण शुरू होने से पहले स्नान करके मंत्र जप करें। 7 सितंबर को सिर्फ शुद्ध और सात्विक आहार लें। लेकिन जब इसका सूतक काल होगा तो उस समय आहार और
26:32 जल के लिए भी शास्त्रों में निषेध किया गया है। केवल वृद्ध, बालक और रोगी यह तीन लोग जल ग्रहण कर सकते हैं। बाकी अगर आप स्वस्थ हैं तो सूतक काल में अन्न और जल का ग्रहण नहीं करना चाहिए। और सोना भी नहीं चाहिए। सिर्फ मंत्र जप और ध्यान करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को चाहिए कि घर से बाहर ना निकलें। चाकू या कैंची से कोई चीज काटे नहीं और दिन में गर्भवती महिलाएं बिल्कुल सोएं नहीं। टेढ़ी होकर के बैठे नहीं। हर समय मतलब कि जो है या तो चलती फिरती रहें या तो स्वस्थ आसन में बैठकर के भगवत नाम का जप करें। ग्रहण काल में 9:57 से रात 1:26
27:20 तक अगर आप बैठकर के सीताराम सीताराम राधेश्याम राधेश्याम राधा राधा कृष्ण कृष्ण कुछ भी नाम जप कर लें तो मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि सारी परेशानी आपकी दूर होगी और गर्भवती महिलाओं के लिए वरदान बन जाएगा। हां कुछ लोगों को चाहिए कि मंत्र अगर आपको सिद्ध करना है जैसे अमूमन महिलाएं नजर उतारने का मंत्र सिद्ध करती हैं। कोई व्यक्ति मतलब कि अपना कोई लक्ष्मी का मंत्र सिद्ध करता है। उसके लिए भी यह समय जो है बहुत बड़ा वरदान है। क्यों? क्योंकि मैं आपको एक बात बहुत सही बता दूं। अगर आप अनुभव करेंगे लेकिन यह बड़े अनुभवी लोगों के अनुभव की चीज है।
28:06 सबको समझ में नहीं आएगा। ग्रहण काल में सूर्य और चंद्रमा परस्पर सप्तम होते हैं और सूर्य और चंद्रमा के साथ राहु और केतु होते हैं। तभी पूर्णिमा तिथि होती है तभी ग्रहण होता है। ऐसे समय में सुषुमणा नाड़ी का प्रवाह जरूर चलता है। सुष्मणा नाड़ी का मतलब कि दोनों नासिका के छेदों से एक बराबर वायु निकलती है, अंदर जाती है, बाहर आती है। यह क्रम काफी समय तक होता है। सामान्य दिनों में 4 मिनट का होता है। लेकिन ग्रहण काल में ये थोड़ा ज्यादा समय का होता है। तो उस समय जब आप ध्यान में रहेंगे तो आप समाधि की अवस्था में चले जाएंगे। आपको लगेगा कि आप होते हुए भी नहीं हैं। आप जैसे खींच गए हैं। बड़े सुख
28:54 की अनुभूति होगी। बड़ी शांति की अनुभूति होगी। यह सुषुमणा नाड़ी का प्रभाव है। इसीलिए ग्रहण में किसी भी मंत्र को सिद्ध करने का शास्त्रों में विधान कहा गया है। अगर कोई मंत्र है जिसे आप सिद्ध करना चाहते हैं तो उस मंत्र का जप आप ग्रहण काल में करें। वह मंत्र निश्चित रूप से आपका सिद्ध हो जाएगा और आपकी मनोकामना को पूर्ण करने वाला होगा। आपके मनोरथ को पूर्ण करने वाला होगा और उसका प्रयोग जब भी आप करेंगे तो उसका प्रयोग कभी निष्फल नहीं जाएगा। हां ग्रहण के बाद एक कहावत हमारे यहां देहातों में प्रचलित है। प्रजा का नहान राजा का दान। जो लोग गरीब हैं जिन लोगों के पास धन दौलत की कमी है उन्हें सिर्फ
29:40 किसी पवित्र नदी में जाकर स्नान कर लेने मात्र से ग्रहण का अच्छा फल मिलता है। लेकिन जो लोग संपन्न हैं उन्हें चाहिए कि ग्रहण के बाद स्नान करके कुछ दान जरूर करें। अन्नदान, वस्त्रदान, भूमि दान कुछ दान जरूर करें और दान करने के बाद ही अन्न ग्रहण करें। दान का ग्रहण काल के बाद बहुत बड़ा महत्व है। जो लोग दान कर सकते हैं उन्हें दान जरूर करना चाहिए। कुछ लोग कहते हैं कि सूतक के समय में हवन नहीं करना चाहिए। तो मैं आपको बताता हूं न सूतकाद दोषो अस्ति ग्रहे होम जपादिशु यानी दान यानी दान जप और होम के
30:25 लिए ग्रहण में सूतक बाध्य नहीं है। इस बात को ध्यान में रखना चाहिए। जय मां बिंदवासनी। पंडित जी अभी आप प्रिकॉशन के बारे में बता रहे लेकिन यह बहुत कंसर्न रहता है। सोशल मीडिया पर भी खूब सवाल आ रहे हैं। हमारे इस कालचक्र के दर्शकों का भी गर्भवती जो महिलाएं हैं आपने बताया कि वो ना निकलें उन पर नहीं साया पड़ना चाहिए और क्या कुछ प्रकॉशन वो कर सकती हैं। प्रकॉशन में बस यही रखें जी। कि थोड़ा सा गाय का गोबर भारत में तो भाग्यशाली है। गाय का गोबर मिल जाएगा। हम्म। एक दिन एक कनाडा से फोन आया था। तो एक लड़की पूछ रही थी कि मैं गर्भवती हूं और 7 तारीख को ग्रहण लग रहा है तो मैं क्या करूं? हम्। तो, मैंने हिंदुस्तानी अंदाज में बता दिया कि गाय का गोबर लेकर के अपने पेट के चारों तरफ सात बार घुमा करके क्लॉकवाइज और उस
31:10 गोबर को कहीं शुद्ध स्थान पे रख दो। तो उसने कहा यहां कहां गाय का गोबर मिलने वाला है। कहां-कहां भटकूंगी? तो हमने कहा अच्छा नहीं मिलने वाला है। नहीं। तो हमने कहा ठीक है। तो एक मतलब कि ₹5 ₹10 का कोई सिक्का लेकर के और उसको अपने पेट के चारों तरफ सात बार घुमा करके और उसको कहीं रख दो। जब ग्रहण समाप्त हो जाए तो उस सिक्के को किसी जरूरतमंद को दान कर दो। तो हिंदुस्तान में तो गौ माता साक्षात हैं धरती स्वरूपा और हम बड़े भाग्यशाली हैं कि यहां गाय का गोबर गाय का मूत्र बड़े आसानी से मिल जाता है। तो गर्भवती महिलाओं को चाहिए कि थोड़ा सा गाय का गोबर ले आके और उसके गाय के गोबर की एक गोली बना करके और इन चार उंगलियों से पकड़ करके तर्जनी को छोड़ के चार उंगलियों से पकड़ कर छोड़ के
31:56 और मतलब कि नाभि के चारों तरफ क्लॉकवाइज जो है सात बार घुमा करके गोबर को कहीं शुद्ध स्थान पर रख दें। जी और उसके बाद में ग्रहण काल में ना सोएं ना कैंची से कोई चीज काटे ना कुछ खाएं ना कुछ पिए स्वस्थ रहने की कोशिश करें और जागृत अवस्था में रहें। तो ये गर्भवती महिलाओं के लिए रामबाण उपाय है। इससे कभी कोई किसी प्रकार का अनिष्ट नहीं होगा। जी तो बिल्कुल देखिए पंडित जी ने गर्भवती महिलाओं के लिए खास उपाय बताए हैं तो आप उसे भी फॉलो कर सकते हैं और खासतौर पर देखिए आज कालचक्र आप सबके लिए बेहद महत्वपूर्ण है और आप लगातार हमारे साथ बने रहिए आगे भी चर्चा करेंगे हमारे दर्शक प्रिंस हमारे साथ जुड़ चुके हैं आप सवाल पूछ सकते हैं पंडित जी से
32:42 नमस्कार पंडित जी हां सदा सुखी रहिए पंडित जी हमें अपने वैवाहिक जीवन के बारे में पूछना है जिसमें लड़की का नाम वर्षा है उसकी डेट ऑफ बर्थ है 16 सितंबर 1998 और मेरा नाम प्रिंस कुमार है। मेरी डेट ऑफ बर्थ है 20 जुलाई 1997। तो हमारा वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा और अप्रैल माह में हम कौन सी तारीख को विवाह कर सकते हैं? हमें यह जानना है। देखिए वैवाहिक जीवन आपका बहुत अच्छा रहेगा। यह विवाह लगभग-लगभग आपका प्रेम विवाह जैसा दिखाई दे रहा है। इस वैवाहिक जीवन का फल बहुत अच्छा है। इसमें कोई दो राय नहीं है। रही बात मुहूर्त की तो मुहूर्त इतना आसान नहीं होता है। मुहूर्त में लड़की और लड़के दोनों की कुंडली देख के उसका घात चक्र देखा जाता है। घात महीना
33:28 घात तिथि घात नक्षत्र देखा जाता है। उन घात तिथि व नक्षत्रों को छोड़ के तब मतलब कि मुहूर्त निकाला जाता है। इसके लिए आप किसी स्थानीय पंडित से संपर्क करिएगा। यह प्रश्न कुंडली का कार्यक्रम है। ना मेरे पास यहां पंचांग होता है और ना डिटेल है आपकी। तो इसलिए इस विषय में मैं कुछ आपसे कह करके गलत नहीं बोलना चाहता हूं। तो चलिए अब बारी आती है कर्क राशि वालों की। 7 सितंबर को लगने वाला चंद्र ग्रहण कर्क राशि वालों के लिए क्या कुछ लेकर आ रहा है? क्या ग्रहण के कारण इनका तनाव बढ़ेगा? क्या ग्रहण के कारण इनकी मुश्किलें बढ़ेगी? आइए जानते हैं। [संगीत] कर्क राशि के जातकों को बताना चाहूंगा
34:16 कि आपकी राशि से आठवें भाव में ग्रहण लग रहा है। आपके लिए ग्रहण मिलाजुला रहने वाला है। अचानक लाभ या हानि की स्थिति बन सकती है। फंसा हुआ धन वापस मिल सकता है। कारोबार में तेजी आ सकती है। मंदी मुनाफे में बदलने का योग है। लेकिन कुछ बातों में आपको सावधान रहना होगा। विरोधियों से सतर्क रहें। खर्च संभालें। परिवार का ध्यान रखें। अपनी वाणी पर संयम रखें। दुर्घटना या कानूनी मामलों में कष्ट के योग हैं। आपको पूरे ग्रहण काल में सीताराम नाम का जप करना चाहिए। पूरे ग्रहण काल में जब से ग्रहण शुरू हो जब तक ग्रहण का अंत
35:03 हो तुलसी की माला पर सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम का जप करें। यह जप निसंदेह आपको करोड़ों विपत्तियों से आपकी रक्षा करेगा और आपके दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल देगा। आप इसको करके देखिए। जय मां निवासनी। तो चलिए बात करते हैं सिंह राशि वालों की। 7 सितंबर को लगने वाला चंद्र ग्रहण इनके ऊपर कैसा असर डालेगा ग्रहण के बाद इनके जीवन में क्या बदलाव होंगे? आइए जानते हैं। [संगीत] देखिए सिंह राशि के जातकों को बताना चाहूंगा कि आपके राशि से सातवें भाव में चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। आपके लिए
35:49 ग्रहण शुभ नहीं है। इससे क्या होगा? सप्तम भाव पत्नी का स्थान पति का स्थान होता है। वैवाहिक जीवन में मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। जीवनसाथी या जीवन संगिनी की सेहत खराब हो सकती है। आपको अपने और अपनी जीवन संगिनी या जीवन साथी का विशेष ध्यान रखना होगा। अविवाहितों के रिश्ता जुड़ने में और समय लग सकता है। विलंब हो सकता है। साझेदारी के कारोबार में भी सावधानी बरतने की जरूरत है। अपने क्रोध पर आपको नियंत्रण रखना होगा। कोई भी फैसला आपको समझदारी से लेना होगा और आप ग्रहण काल में उचित होगा कि पूरे ग्रहण काल में आप ओम ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु शशि भूम सुतो बुधस्य
36:36 गुरुस शुक्र शनि राहु केतव सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु इस मंत्र का कम से कम एक माला जप जरूर कर लें। इससे नवग्रह की शांति हो जाएगी और आपके जीवन में खुशियां आएंगी। जय मां बिंदवासनी। तो चलिए बात कर लेते हैं कन्या राशि वालों की। आने वाले 7 तारीख को लगने वाला चंद्र ग्रहण। कन्या राशि वालों को सुख देगा या दुख? क्या इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण इनके लिए खुशियां लेकर आ रहा है? आइए जानते हैं। [संगीत] आपकी राशि से छठे भाव में चंद्र ग्रहण लगेगा। आपके लिए चंद्र ग्रहण शुभ रहने वाला है। आपकी सेहत में सुधार आएगा। शत्रु परेशान
37:23 नहीं कर पाएंगे। कार्य क्षेत्र में सफलता मिलेगी। लेकिन कुछ लोग ऑफिस पॉलिटिक्स का शिकार हो सकते हैं। आपके किसी फैसले का विरोध कार्य क्षेत्र में हो सकता है। अपनी सेहत का ध्यान रखिए। अनिद्रा और तनाव आपको परेशान कर सकता है। अपनी वाणी पर भी आपको संयम रखना होगा। और यदि आपकी कन्या राशि है तो आपको पूरी रात ग्रहण समय में ग्रहण के काल में ओम गंग गणपतय नमः गणेश जी के इस मंत्र को जप करके इसकी सिद्धि कर लेना चाहिए। उसके बाद गणेश जी का यह मंत्र जब आप रोज 10 माला जप करेंगे तो आपके चारों दिशाओं में सफलता आपके कदमों में होगी। जय मां बिंदवासनी।
38:12 तो बारी आती है तुला राशि वालों की। तुला राशि वाले लोगों को 7 सितंबर को लगने वाले चंद्र ग्रहण से कितना सावधान रहना चाहिए? क्या यह ग्रहण इनकी खुशियों पर ग्रहण लगाएगा या फिर इनकी तरक्की के रास्ते खोल देगा? आइए जानते हैं। चलिए तुला राशि के जातकों को बताना चाहूंगा कि आपकी कुंडली में पांचवें भाव पर ग्रहण लग रहा है। जो संतान और विद्या उपासना का भाव होता है। पांचवा भाव संतान का भाव है। संतान को लेकर के आप थोड़ा सा चिंतित हो सकते हैं। बाहरी दखल के कारण रिश्तों में दरार आ सकती है। विद्यार्थियों का पढ़ से पढ़ाई से मन उचाट होगा। इस समय गर्भधारण का प्रयास कतई ना
38:58 करें। वैसे मेरा सुझाव है सभी राशि के जातकों के लिए कि चतुर्दशी, अमावस्या और पूर्णिमा और परिवाह इन चार तिथियों में गर्भाधान कभी नहीं करना चाहिए। इन चार तिथियों में गर्भाधान करने से जो बच्चा पैदा होता है वह अधम योग में पैदा होता है। अधम योग का मतलब सूर्य और चंद्रमा साथ हो तो अधम योग होता है। और सूर्य चंद्रमा केंद्रस्थ हो तब भी अधम योग होता है। और अधम योग में पैदा हुआ व्यक्ति चाहे जितना बड़ा तेजतर्रार हो चाहे जितना ब्रिलियंट हो वो जब भी 100% एफर्ट लगाएगा तो उसे 60 70% से ज्यादा का रिजल्ट नहीं मिलेगा। इसलिए
39:46 माता-पिता को ही समझदारी का परिचय देना चाहिए। किसी शिशु को धरती पर लाने के पहले मुहूर्त का सदुपयोग करना चाहिए। और कोई भी फैसला लेने के पहले अच्छी तरह से आपको सोच विचार करके ही फैसला लेना चाहिए। जय मां निवासनी पंडित जी जैसा कि आपने बताया दर्शकों को कि ग्रहण के दौरान नहीं खाना चाहिए। लेकिन आपने कहा बच्चे खा सकते हैं, बीमार खा सकते हैं। लेकिन कुछ लोग ट्रैवल भी कर रहे होते हैं। कहीं कोई फंसे होते हैं तो फिर ऐसी स्थिति में वो लोग क्या करें? जो लोग ट्रेवल कर रहे हैं उन लोगों को भी बैठकर के भगवान का भजन करना चाहिए मन में। मन तो आपका आपके पास है। हम मंदिर में तो आपको जाने की छूट है नहीं ग्रहण में। ग्रहण में जो भी पूजा होती है मानसिक होती है।
40:32 जी तो मानसिक पूजा करने के लिए आप ट्रेन की सीट पे बैठकर के अगर भगवान का स्मरण कर रहे हैं तो किसने आपको रोका? या आप मतलब कि अपने वाहन से जा रहे हैं। उसमें बैठकर के आपने साधना की तो किसने आपको रोका? तो मतलब उसके लिए तो कोई दिक्कत ही परेशानी की बात ही नहीं है। हां। अब ट्रेन में यात्रा कर रहे हैं और खा भी रहे हैं। चीजें मंगा मंगा करके खा भी रहे हैं। तो ये तो फिर दोष है। क्योंकि ग्रहण काल में शरीर में जो भी वस्तु जाती है वो विषकारी हो जाती है। वो विष के समान हो जाती है। उससे शरीर के स्नायु तंत्र नकारात्मक हो जाते हैं। उससे मनुष्य का मनुष्य की सोच जो है वो शिथिल हो जाती है और सोच जो है नकारात्मक हो जाती है। इसलिए ग्रहण काल में हमारे शास्त्रों में भोजन करने के लिए मना किया गया है। जल ग्रहण करने के लिए
41:18 मना किया गया है। वैसे तो सूतक 12 घंटे का होता है। 12 घंटे का निर्वाह करना बहुत बड़ी बात होती है। दोपहर से ही 12:19 से रात 1:26 तक आप इसका निर्वाह करें। ये तो बड़ी कठिन बात होती है। ये तो भारत की महिलाएं ही कर सकती हैं। पुरुषों के बस की बात तो नहीं है क्योंकि बहुत ही कम पुरुष होंगे जो इतना कठिन व्रत कर सकते हैं। महिलाएं तो हर हरतालिका तीज का 24 घंटे व्रत निराजल रह लेती हैं। करवा चौथ का निराजल व्रत कर लेती हैं। उनकी तो भैया आदत है। उनको भगवान ने दिया है शक्ति वो कर सकती हैं। लेकिन पुरुषों के लिए तो मुझे नहीं लगता कि सबके लिए आसान है। हां जो लोग एकादशी का व्रत करते होंगे निर्जला एकादशी का व्रत पुरुष करते होंगे वो कर सकते हैं। उनके लिए कठिन बात नहीं है। लेकिन आम
42:04 लोगों के लिए आसान बात भी नहीं है। बहुत कठिन बात है। तो इस तरह से अगर पूरे सूतक काल में आप परहेज नहीं कर सकते हैं तो कम से कम जब ग्रहण का स्पर्श हो ग्रहण का जब तक मतलब मोक्ष ना हो जाए तब तक तो आपको इस नियम को फॉलो करना ही चाहिए। जी बिल्कुल। तो पंडित जी लगातार आज आपको उपाय भी बता रहे हैं। साथ ही राशि के अनुसार यह भी बता रहे हैं कि आपको क्या कुछ करना चाहिए और आपकी राशि पर कितना असर होगा। लगातार हमारे साथ बने रहिए। हमारी दर्शक भी गुड़िया हमारे साथ जुड़ चुकी हैं बिहार से। आप सवाल पूछ सकती हैं। जय मां बिनवासनी पंडित जी। जय मां बिनवासनी बेटा। पंडित जी मैं आपसे एक सवाल करना चाह रही हूं कि पंडित जी मैं सुंदरकांड का पाठ करना चाहती हूं तो मंगलवार करूं या शनिवार
42:50 को? और दूसरा कि मेरे पति की तरक्की के लिए कौन सा व्रत मैं रखूं? और एक सवाल और है मेरे पति को कंधे में दर्द है। डॉक्टर से दिखाया तो बोले फ्रोजन शोल्डर है। लेकिन यह कब तक चलेगा? बहुत बेचैनी का दर्द होता है पंडित जी। उसके लिए कुछ उपाय बताइए और व्यापार में कैसे तरक्की हो उसके लिए उपाय बताइए। देखो गुड़िया ऐसा है कि जहां तक सुंदरकांड के पाठ का सवाल है तो मैं तो कहूंगा कि अगर आप हर मंगलवार शनिवार को करना शुरू कर दें मंगलवार को और शनिवार को तो पूरे साल में 100 पाठ आपके अपने आप हो जाएंगे। पूरे साल में 100 मंगलवार और शनिवार मिलाकर के आते हैं। 100 से ज्यादा ही आते हैं। 108 आ जाते हैं। तो अगर आप हर मंगलवार शनिवार को सायंक काल सुंदरकांड का
43:37 पाठ करें और हनुमान जी के चित्र के सामने दिया जला के और भोग लगा के पाठ करें तो आपके घर की सारी समस्याओं का समाधान तो ऐसे ही हो जाएगा। जहां तक आपके पति के कारोबार या व्यवसाय का प्रश्न है गुड़िया तो उसके बारे में बताना चाहूंगा कि उन्हें सफलता मिलेगी लेकिन अभी बहुत अच्छी सफलता नहीं मिल रही है और जहां तक फ्रोजन शोल्डर का सवाल है तो इसको तो किसी योगा के टीचर से दिखलाना चाहिए जो योगा जानता हो वो फ्रोजन शोल्डर ठीक कर सकता है डॉक्टर तो इसमें सिर्फ टेबलेट और टिकिया दे सकते हैं या फिजियोथरेपी के लिए आपको राय दे सकते हैं लेकिन जो लोग योगा के एक्सपर्ट हैं जो लोग योगा योगा करना जानते हैं बहुत अच्छी तरह से वो लोग फ्रोजन शोल्डर को 10 मिनट के अंदर ठीक कर सकते हैं। तो किसी योग के
44:23 अच्छे विशेषज्ञ से परामर्श लें। इसमें ज्योतिषीय उपाय कार्य नहीं करेगा। जय मां निवासनी। तब जानते हैं वृश्चिक राशि वालों के बारे में कि चंद्र ग्रहण का क्या असर होगा। यह ग्रहण इनके करियर, नेचर और फ्यूचर पर कितना इंपैक्ट डालेगा। [संगीत] देखिए आपके जन्म कुंडली के चौथे भाव में यह ग्रहण होने जा रहा है। अगर आपकी वृश्चिक राशि है तो चंद्र ग्रहण आपके लिए ठीक नहीं है। माता से मतभेद होगा। प्रॉपर्टी का विवाद बढ़ेगा। घर में अशांति रहेगी। मन में बेचैनी होगी और चिड़चिड़ापन बढ़ेगा। गाड़ी चलाते समय बहुत सावधान रहना होगा।
45:12 सुख सुविधाओं में वृद्धि होगी। गाड़ी खरीदने का योग बन सकता है। धार्मिक यात्राओं का योग बन सकता है। लेकिन आपको अपनी मां की सेहत का ध्यान रखना होगा। कार्य क्षेत्र में मेहनत से काम करेंगे तो सफलता मिलेगी। अगर आपको पैसे की समस्या है, धन दौलत की समस्या है तो आप पूरे ग्रहण काल में ओम महालक्ष्मी च विद्महे विष्णु पत्नी च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात इस मंत्र का जप कर लीजिए। यदि आपको शत्रु बाधा है तो ओम सर्वा बाधा प्रसवनम त्रैलोक्यस्या अखिलेश्वरी एवं अस्मद बैर विनाशनम अगर आपको सब प्रकार का
46:00 सुख चाहिए तो ओम सर्वा बाधा विनुरमुक्तो धनधान्य सुतानित मनुष्य मत प्रसादेन भविष्यतिन संशय इस मंत्र का जप कर लीजिए। मनोकामना के अनुसार यदि आप मंत्रों का जप करेंगे और ग्रहण काल में करेंगे तो निश्चित रूप से यह मंत्र आपके सिद्ध हो जाएंगे और आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होगा। जय मां विनवासनी। धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि वालों पर चंद्र ग्रहण अपना क्या प्रभाव डालेगा ग्रहण के बुरे प्रभाव से बचने के लिए? इन्हें कौन से खास उपाय करने चाहिए? यह सब बताएंगे आपको पंडित जी। लेकिन उसके पहले हमारे एक दर्शक हमारे साथ जुड़ चुके हैं जानकी। आप सवाल पूछ सकती हैं। हेलो पंडित जी प्रणाम हां सदा सुखी रहिए पंडित जी मेरा तीन सवाल है कि मेरा बड़ा
46:46 लड़का है वो छ 6 2000 ना 276 2000 छ का जन्म है उसका वो बोलता नहीं है और खाना चबाता भी नहीं है ऐसे निकल जाता है बहुत आशा लगा रहता है कि थोड़ा सुधार हो होगा या नहीं वो बताइए और दूसरा सवाल है पंडित जी कि मेरी मेरी बेटी है वो 272 2010 का जन्म है वो अभी 11th में गई है तो उसका भविष्य क्या चीज में है कॉमर्स में है या साइंस में है क्या चीज में आगे उसका पढ़ाई कैसा रहेगा किस लाइन में उसका भविष्य है वो बता दीजिए आप देखिए ऐसा है कि आपने अपने बेटे के बारे में जो प्रश्न किया है तो जानकी जी मैं बताना चाहूंगा कि आपके पुत्र भाव का
47:33 स्वामी शुक्र है और उससे रोग भाव का स्वामी बृहस्पति है। दोनों की द्वितीय द्वादश की स्थिति है। आपके पुत्र के जीवन में कोई उपाय बहुत परिवर्तन नहीं कर सकता। बहुत परिवर्तन की उम्मीद नहीं की जा सकती। बोलने की समस्या में भी कोई सुधार की संभावना नहीं दिखाई दे रही है। खानपान में भी कोई समस्या है वह नहीं दिखाई दे रही है। हां अगर आप कुछ अच्छा चाह इनके लिए तो आप नियम बना लें एक वर्ष तक लगातार किसी शिवालय में जाकर के जल दूध और बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ाएं
48:19 घी का दिया जलाएं। भोलेनाथ कुछ भी कर सकते हैं। वह सामर्थ्यवान हैं। अगर उन्होंने आपकी प्रार्थना सुन ली तो आपके बच्चे का कष्ट कम हो जाएगा। जहां तक आपने अपने बेटी के बारे में प्रश्न पूछा है तो उसके बारे में बताना चाहूंगा कि उसके दशम भाव में राहु बैठा हुआ है। सूर्य की दृष्टि है तो ऐसे में अगर बेटी को अपने तकनीकी शिक्षा दो, इंजीनियरिंग की पढ़ाई करवाओ तो शायद यह बहुत अच्छा कर पाएगी और सफलता मिलेगी। जय मांस। तो चलिए धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि वालों पर चंद्र ग्रहण अपना क्या प्रभाव डालेगा? ग्रहण के बुरे प्रभाव से बचने के लिए इन्हें कौन से खास उपाय करने चाहिए? यह सब बताएंगे आपको पंडित जी। लेकिन एक छोटे से ब्रेक के बाद आप बने रहिए कालचक्र के साथ।
49:08 [संगीत] ब्रेक के बाद स्वागत है आपका चंद्र ग्रहण स्पेशल कालचक्र में और चलिए बात कर लेते हैं अब धनु राशि वालों की 7 सितंबर को लगने वाला चंद्र ग्रहण धनु राशि वालों के लिए शुभ है या शुभ क्या ग्रहण के बाद इनके करियर में उछाल आएगा या परेशानियां होगी आइए जानते हैं यदि आपकी धनु राशि है तो आपके तीसरे भाव में आपके पराक्रम के स्थान में चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। आपके लिए चंद्र
49:55 ग्रहण शुभ रहने वाला है। त्रिशष्ठा गते पापो जन मांगो शोभना भवेत तो आत्मविश्वास और पराक्रम आपका बढ़ेगा और निश्चित रूप से धन लाभ भी होगा। भाई-बहन और दोस्तों का सहयोग मिलेगा। कम्युनिकेशन के क्षेत्र से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा। करियर में नए अवसर प्राप्त होंगे। लंबे समय से चली आ रही शारीरिक समस्याओं में कमी आएगी और पैतृक संपत्ति से जुड़े विवादों में कमी आएगी। नौकरी बदलने की सोच रहे हैं तो उसमें सफलता मिलेगी। आपको चाहिए कि अगर आप बेरोजगार हैं तो आपको ओम श्रीय नमः इस मंत्र का जप करना चाहिए। अगर आप विद्यार्थी हैं तो ओम ऐंग सरस्वतीय नमः इस
50:42 मंत्र का जप करना चाहिए। अगर आप व्यवसाय हैं तो ओम महालक्ष्म्य नमः का जप करना चाहिए। अगर आप आध्यात्मिक क्षेत्र में लगे हुए हैं तो आपको नाम जप करना चाहिए। सीताराम राधेश्याम हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे राधा राधा शिव शिव इन नामों का जप भी आपको करना चाहिए जय मां बिंदवासनी तो आगे मकर राशि वालों के बारे में जानेंगे लेकिन उसके पहले हमारे एक दर्शक शैलेंद्र जुड़ चुके हैं आप सवाल पूछ सकते हैं जी शैलेंद्र सवाल पूछ सकते हैं नमस्ते पंडित जी हां सदा सदा सुखी रहिए। शैलेंद्र बोल रहा हूं प्रतापगढ़ राजस्थान
51:28 से। मेरी जन्म दिनांक है 205168 जी। जन्म स्थान कोटा जी। जी दिन के 12:43 मेरा वैवाहिक जीवन जो है वो थोड़ा अस्थिर सा हो रहा है। तनाव है। मानसिक तनाव भी बहुत ज्यादा है। दूसरा प्रश्न मेरे छोटे वाले बेटे के लिए है। उसका जन्म 12 जनवरी 2002 है। प्रतापगढ़ राजस्थान समय 12:3 उसका भविष्य और उसका स्वभाव दोनों के बारे में जानना था। अब देखो पहली बात तो यह कहना चाहूंगा शैलेंद्र भैया कि 57 साल की उम्र में अगर आपके वैवाहिक जीवन में तनाव हो रहा है तो ये तो बड़े दुर्भाग्य की बात है। वैसे आपके प्रश्न के हिसाब से शनि और सूर्य की स्थिति जो बनी हुई है वो मतलब कि जो है सदाष्टक योग की बनी हुई है। है तो
52:14 मतभेद इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन इस मतभेद को ठीक भी किया जा सकता है। और ठीक करने का जो उपाय है वह आपके हाथ में है ना कि आपके पत्नी के हाथ में। आपके हाथ में यह है। आप ओम शंग शनिश्चरय नमः इस मंत्र का 10 माला जब पीपल के नीचे बैठकर के 100 दो दिन लगातार कर लीजिए तेल का दिया जला के तो आपके पारिवारिक जीवन अर्थात आपके धर्मपत्नी के साथ आपकी कटुता समाप्त हो जाएगी। जहां तक आपने अपने बेटे के बारे में प्रश्न पूछा है तो उसके बारे में बताना चाहूंगा कि द्वितीय और सप्तमेश मंगल और बुध की स्थिति जो है वह द्वितीय द्वादश की है। बेटा पढ़ाई में अभी बहुत अच्छा नहीं कर रहा है और अच्छे सुपरविजन की
53:00 जरूरत है और अच्छे उसके देखरेख की जरूरत है। तभी जाकर के चीजें ठीक होंगी। जय मां निवासनी। तो चलिए अब बात करते हैं मकर राशि वालों की आने वाले 7 तारीख को लगने वाले पूर्ण चंद्र ग्रहण मकर राशि वालों के लिए कैसा रहने वाला है? क्या ग्रहण के बाद इन्हें आर्थिक तंगी सताएगी? आइए जानते हैं। [संगीत] आपके दूसरे भाव में चंद्र ग्रहण लग रहा है। आपके लिए चंद्र ग्रहण बिल्कुल ठीक नहीं है। रिश्तों में तनाव आएगा। वाणी पर नियंत्रण रखिएगा। परिवार में कलह हो सकती है। आर्थिक मामलों में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लेनदेन में सावधानी बरतनी चाहिए। खानपान
53:47 का ध्यान रखिए। करियर में नए अवसर मिल सकते हैं। यदि आप कर्ज भार से दबे हुए हैं तो आपको चाहिए कि आप ऋण मोचन मंगल स्त्रोत का पूरे ग्रहण काल में जप करें। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि अगले एक साल के अंदर आप कर्ज से मुक्ति पा जाएंगे। इसमें कोई दो राय नहीं। जय मां निवासनी। वहीं हमारे एक दर्शक जुड़ चुके हैं शरी बिहार के किशनगंज से। आप सवाल पूछ सकते हैं। पंडित जी प्रणाम। हां सुखी रहिए। पंडित जी मैं मेरा अपना एक प्रश्न है मैं अभी जो कार्य कर रहा हूं वो मेरे लिए सही है या आगे मैं जिसके बारे में सोच रहा हूं वो मेरे लिए सही रहेगा। दूसरा प्रश्न है
54:33 मेरे मेरे बेटे के लिए उसका जन्म तिथि है 99 2014 दिन मंगलवार समय 11:10 एएम कृपया उसके भविष्य और उसके पढ़ाई के बारे में बताएं सर पहली बात तो ये सुन लीजिए जो आप सोच रहे हैं ना वो आपके लिए उचित है ना जो आगे सोचेंगे वह आपके लिए उचित है। क्यों? क्योंकि सूर्य और मंगल का प्रत्यक्ष बैरा दृष्टि से योग हो रहा है। आप जो सोच रहे हैं उसके नुकसान और फायदे दोनों पहलुओं पर विचार नहीं कर रहे हैं। एक पहलू पर विचार कर रहे हैं। दोनों पहलू पर जब आप विचार करेंगे तो आपको पता चलेगा कि दोनों चीजें आपके लिए ठीक नहीं है। फिर तीसरे ऑप्शन पर विचार करिएगा। जहां तक बेटे के बारे में आपने प्रश्न किया है तो घबराने की बात
55:20 नहीं है। सामान्य जीवन उसका रहेगा। बसशर्ते उसको कहिए कि नित्य हनुमान चालीसा का पाठ किया करें। जय मां निवासनी। चलिए अब बारी आती है कुंभ राशि वालों की। 7 सितंबर को लगने वाला चंद्र ग्रहण। कुंभ राशि वालों के लिए क्या कुछ लेकर आ रहा है? क्या ग्रहण के कारण इनका तनाव बढ़ेगा? क्या ग्रहण के कारण इनकी मुश्किलें आएंगी? आइए जानते हैं। कुंभ राशि के जातकों की हम पहले ही बात कर चुके हैं। लेकिन जो लोग देख नहीं पाए हैं उनके लिए एक बार फिर से बताना चाहूंगा। चंद्र ग्रहण का प्रभाव उनकी राशि पर कैसा रहने वाला है? चंद्र ग्रहण कुंभ राशि में लग रहा है। कुंभ राशि में राहु चंद्रमा को पीड़ित कर रहा है। जिस राशि पर ग्रहण लगता
56:05 है उसके लिए ग्रहण अशुभ होता है। चंद्र ग्रहण के प्रभाव के कारण कुंभ राशि के जातकों को भय, क्रोध, रोग, शोक, दुर्घटना और शत्रुता का सामना करना पड़ सकता है। कुंभ राशि वाले थोड़ा संभलकर रहने की जरूरत है। आपके व्यक्तित्व पर चंद्र ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वैवाहिक जीवन पर अच्छा असर नहीं होगा। जीवनसाथी के सेहत का भी ध्यान रखना होगा। कारोबारी साझेदारी के काम में सतर्क रहें। एक मंत्र लेकिन आपको मैं बताता हूं और मेरा दावा है कि अगर इस मंत्र को आपने पूरे ग्रहण काल में कर दिया तो 1% भी ग्रहण का बुरा असर आपके ऊपर नहीं पड़ेगा। यह दुर्गा सप्तशती का मंत्र है। सप्तशोकी दुर्गा का दूसरा मंत्र है। आप
56:52 देख लीजिए अपनी सप्त श्लोकी दुर्गा की किताब दुर्गा सप्तशती की किताब मंत्र है ओम दुर्गे स्मृता हरस भी तमसे सजंतो स्वस्थ स्मृता मति मति वसुभदा दासी दरिद्र दुख भय हारणिका तदन्या सर्वोपकार करणा यश सदार चित्ता बस इसी मंत्र का अनवरत तीन घंटे जप कर लीजिए आपके जीवन से दुर्भाग्य सदा सर्वदा के लिए दूर हो जाएगा जय मां बिनवासनी मीन राशि वालों पर चंद्र ग्रहण अपना क्या प्रभाव डालेगा? ग्रहण के बुरे प्रभाव से बचने के लिए इन्हें कौन से खास उपाय करने चाहिए? सब बताएंगे आपको पंडित जी। लेकिन एक छोटे से ब्रेक के बाद आप बने रहिए चंद्र ग्रहण स्पेशल कालचक्र के साथ।
57:41 ब्रेक के बाद स्वागत है आपका चंद्र ग्रहण स्पेशल कालचक्र में। और चलिए अब बात कर लेते हैं मीन राशि वालों की। 7 सितंबर को लगने वाला चंद्र ग्रहण मीन राशि वालों को सुख देगा या दुख? क्या साल का आखिरी चंद्र ग्रहण इनके लिए खुशियां लेकर आ रहा है या नहीं? आइए जानते हैं। [संगीत] देखिए मीन राशि के जातकों को बताना चाहूंगा कि आपके राशि के 12वें भाव में यह ग्रहण लगने जा रहा है। तो अगर व्यय भाव में ग्रहण लगेगा तो आपका खर्च बढ़ेगा। रिश्तों में टूटन आएगी। अलगाव की स्थिति बनेगी। सेहत का आपको ध्यान रखना होगा। विदेश से आपको लाभ मिलेगा। विदेश जाने में रुकावटें आ रही हैं तो वह भी दूर हो सकती
58:27 हैं। मीन राशि को चाहिए मीन राशि के जातकों को चाहिए कि जब तक ग्रहण रहे रात 9:57 से 11:26 तक तब तक आप ग्रहण के समय में अपने इष्ट देव के मंत्रों का जप करते रहें। आप जिसे भी इष्ट मानते हैं, भगवान शिव को मानते हैं, राम को मानते हैं, कृष्ण को मानते हैं, भगवती दुर्गा को मानते हैं, जिसे भी आप इष्ट मानते हैं, उस मंत्र का आपको जप करते रहना चाहिए। यदि आप गुरु मंत्र से दीक्षित हैं। यदि आपको कोई गुरु मंत्र मिला हुआ है, और पूरे ग्रहण काल में यदि आप अपने गुरु मंत्र का जप करते हैं, तो निसंदेह आपका यह जन्म तो ठीक होगा ही। अगला जन्म भी ठीक होगा और ग्रहण का कोई दुष्प्रभाव आपके जीवन पर नहीं पड़ेगा। जय मां निवासनी।
59:16 पंडित जी कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्हें अपनी राशि के बारे में नहीं जानकारी है तो वैसे लोग क्या करें ग्रहणी? देखो ऐसा है ना जन्म राशि का पता ना हो ये बात तो ठीक है। नाम लेकिन नाम राशि का तो पता लगभगलगभग सबको है। तो जिन लोगों को अपनी जन्म राशि नहीं पता है वो लोग अपनी नाम राशि के हिसाब से भी अगर उपाय करेंगे तो उन्हें उतना ही फल मिलेगा। इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन चाहे राशि पता हो या ना पता हो, चाहे और विधान आप कर पाएं या ना कर पाएं। लेकिन हमारा आग्रह है तीन चीजें जरूर करनी चाहिए। एक तो ग्रहण लगने से पहले 9:57 से पहले स्नान कर लेना चाहिए और स्नान करके साधना कर लेना चाहिए। जय मां बिंदवासनी। पंडित जी हमारे दर्शकों को इतनी
1:00:01 महत्वपूर्ण जानकारी दी। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। उम्मीद यही करते हैं कि आपको भी आज का हमारा विषय बहुत पसंद आया होगा। कल फिर एक नए विषय और आपकी परेशानियों को दूर करने के लिए ढेरों उपाय लेकर आएंगे हम पंडित सुरेश पांडे जी के साथ। तब तक कालचक्र की पूरी टीम को अनुमति दीजिए और खबरों में बने रहने के लिए देखते रहिए N 24। नमस्कार। [संगीत]